Latest / Baba ji Vijay Vats / 18 Apr 26 - मौन ऊर्जा और जागृति का विज्ञान! अहंकार और स्वप्न के बीच क्या संबंध है? MUST WATCH!!
Transcript
- 0:09कौटिल्य प्रसाद, कन्नौज से बाबा सादरचंद्र स्पर्श आपकी वीडियो ने
- 0:30संसार बदल दिया। आप बातों को बड़े सरलीकृत ढंग से
- 0:42व्याख्यायित करते हैं। कृपया जाप के बारे में हमें।
- 0:58क्या होता है व्हाट हैपन व्हेन वी रिपीट?
- 1:05जब हम पुनरुत्ती करते हैं, जब हम जाप करते हैं, हमारे भीतर क्या
- 1:11गठता है? क्या प्रोसेसर होती है आपकी बातों
- 1:24को मानकर हमने मूर्ति पूजा बंद कर दिया, जाप करना बंद कर दिया और
- 1:38फुर्सत के लम्हे भी पाय। आनंद भी मिला, रसास्वादन भी मिला।
- 1:51अब कृपा करके हमें इसकी भीतर की रहस्यत्मक प्रध्यात्मिक वर्ण करने
- 2:02का कष्ट करें। जाप करने से तुम शक्ति को व्यय
- 2:17करते हो, लूज़ करते हो जाप करने से।
- 2:25तुम शक्ति को व्यय करते हो, शक्ति के व्यय होने से तुम मूर्छित हो
- 2:33जाते हो और ध्यान का अर्थ है जागरण।
- 2:46होना था तुमने अवय हो जाते हो तुम मोर्चे ये बिल्कुल उलटब परिणाम
- 2:56मिलता है, इसलिए मैं कहता हूँ डोंट वेस्ट युअर एनर्स।
- 3:10जरूरी कामों पर अपनी शक्ति को व्यक हो ऋषियों ने तो संतो ने तो
- 3:19पतंजलि, बुद्ध और महा योगियों ने। यहाँ तक के मौन मौन तुम्हें जगाता
- 3:37है, क्योंकि मौन से तुम शक्ति को संचरित करते हो।
- 3:44बोलने से तुम शक्ति को व्यय करते हो और शक्ति का व्यय तुम्हें
- 3:53मूर्छित कर जाता है। जबकि ध्यान का मतलब है तू भी अवर
- 4:01जा कर पाना। होना था तुम जागृत हो जाते हो,
- 4:07तुम मूर्छित हो, इस संतों का प्रभा निराला है, बस यही इसकी
- 4:18आंतरिक प्रोसेसर है। भीतर की करोनालाजी तुमने पूछ।
- 4:27भीतर का रहस्यत्मक कारण आपने कुछ तो यही मात्र एक संक्षेप में कौन?
- 4:51थोड़ी शब्दों में कहो ताकि तुम समझ जाओ ध्यान का अर्थ है जाग
- 4:59हतों टु बी अवे ऑर रेपुटेशन से यू लूज़ यूर एनर्जी।
- 5:12उससे तुम अवेयर न हो पाते, उससे तुम मूर्छित हो जाते हो।
- 5:18परिणाम और हटाया तुम चले थे परमात्मा की तलाश और परमात्मा की
- 5:29तलाश। परमात्मा मिलता है।
- 5:31जागृति से अवेयरनेस रेपेटिशन तुम्हें मूर्छित कर देती है, जो
- 5:40कि अवेयर से बिल्कुल अपोज़िट होती है।
- 5:46इसलिए तुम कभी नहीं पहुँच पाओगे। शब्द चाही, तुम राम ले लो, अल्लाह
- 5:54ले लो, वह क्रू ले लो, पांच नाम ले लो।
- 5:591000 नाम ले लो, उतनी ही ज्यादा शक्ति व्यय होगी।
- 6:12ये बेसिक फिलॉसफी है। जीतने अवे और तुम हो जाओगे उतनी
- 6:26ही तुम्हारी कॉन्शसनेस ग्रो की। और जाप करने से पाठ करने से पूजा
- 6:36करने से अरदास करने से पर्याप्त करने से तुम शक्ति विहीन हो जाती।
- 6:51और जाप के अंदर तो तुम निरंतर दो 2 घंटे बैठे रहते हो।
- 6:57ज़रा सोचो कितनी शक्ति को तुम व्यय नहीं करते?
- 7:032 घंटे वही शक्ति तुम्हें। भीतर ले जाने में सहयोग करते हो,
- 7:17उसी शक्ति को तुमने गंवा दिया। फिर तुम आशा करते हो कि हमारी
- 7:26जिंदगी में फूल खेले। रस उतरे मेरे पास लोग आ जाते हैं।
- 7:41बाबा 14 साल से लगातार एक स्थान पर और बिना कुछ खाये।
- 7:51यह कैसे संभव हुआ? सीधी सी बात है, मैंने एनर्जी को
- 8:00जीता। थोड़ा सा दूध ले लेता हूँ।
- 8:05दट इस सुफ्फिसिएंट। फॉर मैं डेली पर्पस हार्टबीट के
- 8:15लंग्स के लिए श्वास लेना छोड़ना इनहैलेशन एक्सेलेशन।
- 8:25जो भी शारीरिक प्रक्रियाएं को शक्ति की आवश्यकता है, वह इतनी सी
- 8:33खुराक से मिल जाता है। यह कोई नॉन साइंटिफिक चीज़ नहीं
- 8:39है, इट्स साइंटिफिक और मैंने कर के दिखा दिया है।
- 8:51जितना महीन सूक्ष्म भोजन तुम करोगे, उतनी ही तुम्हारी भीतर
- 9:01शक्ति उत्पन्न होगी। और उतने ही भीतर तुम अपने भीतर
- 9:08उतर सकने में समर्थ हो आओगे, तो आपने पूछा पुत्र।
- 9:24किसका रहस्यत्मक विवेचन करने का कष्ट करें?
- 9:31मैं बोल रहा हूँ, आई ऍम लूज़िंग, व्हाई इनफ क्योंकि बोलने से शक्ति
- 9:43व्यय होती है। लेकिन मैं उसके हुक्म में बोलता
- 9:54हूँ, मुझे बोलना पड़ता है, मन नहीं करता, बोल लेना पड़ता है।
- 10:05क्योंकि अगर अन्य बोलेंगे तो शास्त्र तो कुछ बोलते नहीं।
- 10:11शास्त्रों में तो तुम्हें पढ़ना पड़ता है और तुम पढ़कर शास्त्रों
- 10:18को अपनी बुद्धि के हिसाब से उसका अर्थ निकाल लोगे।
- 10:23चारों के। बिना उस तल पर जाए जहाँ श्री संत
- 10:32बोलता है कोई भी व्यक्ति जो शास्त्र को पड़ेगा उसका मतलब वह
- 10:41अपनी बुद्धि के हिसाब से निकालेगा।
- 10:45इसलिए सारे शास्त्र, सारे आचार्य सारे सर फेल हो जाएंगे अध्यात्म
- 10:54का नस्ला संसार के बारे में तुम। वे वीर से न कर सकते हैं, लेकिन
- 11:06वो भी आंधी अधूरी है। परमात्मा के बारे में कुछ नहीं
- 11:13कहा जा सकता। वह सिर्फ शक्ति को व्यय करना है।
- 11:20लेकिन फिर भी हम शक्ति को व्यय करते हैं क्योंकि अगर बोलेंगे
- 11:28नहीं तो शास्त्र पढ़कर तो तुम समझोगे।
- 11:38किसी शास्त्र में यह नहीं लिखा कि जाप ना करो।
- 11:42बड़े बड़े हैं नांग रहस्य तरह तरह की पाखंडों से, लोभी लालची गुरुओं
- 11:54ने, पाखंडियों ने। निहेतों स्वार्थों के कारण अडंग
- 12:02वडंग बोल दिया है और तुम उसको ठीक समझते हो।
- 12:10तुम शास्त्र को भगवान के समान पूजते हो और सही पूछो तो भगवान से
- 12:16भी ज्यादा पूजते हो? क्योंकि भगवान तो आपने देखा ना
- 12:23शास्त्र को सर पे रख लेते हो जबकि शास्त्र सर पे रखने की चीज़ तो
- 12:30है। लेकिन इसका असली थीम रास्ते तुम
- 12:38पी नहीं पाए, इसके भीतर क्या लिखा है?
- 12:45उसके ऊपर तुम चल नहीं सके, प्रैक्टिकल नहीं तुम कर सके इस
- 12:52थ्रोटिकल। बार को तुम सिर के ऊपर ढोए रहे,
- 12:59यह तो एक बार है अगर तुमने इसको पढ़ा नहीं तो तुम कहीं नहीं
- 13:08पहुंचोगे इसको पढ़ो। इसको गुणों मनन करो इसके बताए हुए
- 13:20मार्ग पे चलो फिर तुम पहुँच जाओगे लेकिन ध्यान रखना इस वस्त्रों को
- 13:31तुमने नहीं पढ़ना। इस शास्त्र को जागृत पुरुष से
- 13:39सुनना और जागृत पुरुष हो है जिसने वो अपना आनंद का तल छू लिया है।
- 13:52वह जगह जगह भोंकता नहीं भरता हंसा पायो मानसरोवर ताल तलेगा क्यों
- 14:10रोल मन मस्त हुआ? फिर क्यों बोल रहे है बोलने की
- 14:20आवश्यकता नहीं, लेकिन संत घर में बोलता है क्योंकि संत एकांत में
- 14:35बैठा चौबीसों घंटे उस रस का पान करता है, मन में ही तो होता है
- 14:39संत। संत बाहर जाकर लोगों में भ्रमण
- 14:47नहीं करता, शास्त्रार्थ नहीं करता, शास्त्रार्थ करना, शक्ति को
- 14:54व्यय करना। इसलिए संतो ने ब्रह्मचर्य का पालन
- 15:01करना इसका जो अहम कारण था वो टू सेव दी ऐनर्स क्योंकि यौन
- 15:12परिक्रिया जो एक पूरे मनुष्य को जन्म दे देती है।
- 15:18जीवंत चीज़ को जन्म दे देते थे। उसमें कितनी शक्ति होगी?
- 15:22राजपूत से कल्पना करो और चीजों की तुम कल्पना करते हो तुम कल्पना
- 15:35करते हो कि मेरे से ज्यादा भाग्यशाली व्यक्ति कोई नहीं।
- 15:41और ऐसा कभी नहीं हो पाएगा। कितनों के साथ ऐसा हो गया, सिर्फ
- 15:49ब्रह्माकुमारियों का उपदेश करने वाली लीडर्स के पास हो गया?
- 15:58तुम्हारे पास नहीं हुआ तुम किता ऊपर उठ गए वरुण तुम नीचे दस्ते ही
- 16:06चले गए, उनकी मान्यताओं से ग्रस्त होगा।
- 16:11मान्यताएँ तुम्हें दबाती हैं, सो प्रेस करते हैं।
- 16:18और तुम कुंठित होते चले जाते हो। 1 दिन तुम पागल हो जाते हो ये
- 16:25घिसी पिटी टेप तुम कितने दिनों तक कितने वर्षों तक सुनोगे आखिर में
- 16:32बोर हो जाओगे और हैरान की बात है। तीसियों वर्ष से मैं देख रहा हूँ
- 16:45मुँह मूक्छु बैठे हैं और उसी घिसे पीते रिकॉर्ड को रोज़ सुनते रहते
- 16:51हैं, कोई नया शब्द नहीं। क्योंकि इनके पास इन्वेंशन करने
- 16:56को कुछ इन्वेंशन वो व्यक्ति कर सकता है जो अपने ही भीतर उतर गया।
- 17:05उसको रोज़ नए मुकाम में ले गए जो यात्रा पर निकल गया।
- 17:14उसको रोज़ नए दृश्य मिलेंगे, देखने को रोज़ उसके तल बदलेंगे,
- 17:24रोज़ वह आगे आगे जाएगा और उसे देखने को रोज़ नया मिलेगा कुछ।
- 17:33यह लोग चलते नहीं, इन्हें चलना आता नहीं, ये ऐसे ही लोग हैं जो
- 17:43मुझे प्रश्न पूछते हैं बाबा हम अपने ही भीतर कैसे जाए?
- 17:49कल मुझे बड़ी हैरानी होती है, दुख भी होता है भला के अपने ही भीतर
- 17:56जाना इन्हें नहीं आता और क्या होता है?
- 18:04और इनसे गुरुद्वारा के पाठ सुन। गीता के सलोक सुन लो बाइबल के
- 18:14शब्द सुन लो कुरान की आदतें सुन लो, ये घिसे पिटे रिकॉर्ड रोज़
- 18:22सुनते हैं। खोजी व्यक्ति चलता है उस राह पर
- 18:38और उस राह पर चलकर उसे रोज़ नई चीजें मिलती हैं जब मेरे शिष्य
- 18:44पूछ लेते हैं बाबा ये रोज़ नई। रोज़ नई रोज़ नई बात कहाँ से आती
- 18:53है? मैं रोज़ गहरे गहरे गहरे गहरे
- 19:00जाकर उस तल से लाइव कमेंट्री करता हूँ और तल रोज़ बदलता हूँ।
- 19:11मैंने यह मार्ग मंजिल तक लाखों बार कवर किया है मेरे लिए बड़ा
- 19:18आसान है, लेकिन आप को बदलने के लिए।
- 19:27मैं रोज़ ही चलता हूँ उस राह पर और उस राह के भीतर जो जो भी दृश्य
- 19:37आते हैं उनको मैं आपको वर्णित करता चला जाता हूँ।
- 19:43जैसे संध्या ने महाभारत को वर्णित किया धृतराष्ट्र के आँखें,
- 19:54क्योंकि धृतराष्ट्र अंधा था, तुम भी अंधे हो।
- 20:02अंधा वह होता है जिसने वह मार्ग देखा नहीं जिसका संत व्याख्यान
- 20:11करता है। इसलिए संजय को रोज़ की घटनाएं जो
- 20:18घटती हैं 18 दिन तक घटे। संजय धृतराष्ट्र को निरंतर सुनाती
- 20:26रहे क्योंकि धृतराष्ट्र अंधा लेकिन सुन सकता है।
- 20:38कितने संत आए चले गए, कितने संतो ने क्या क्या बोला?
- 20:47बोल कर चले गए, तुम्हारे कान पर जूं देंगी।
- 20:55क्या तुम अपने भीतर रत्ती भर भी खसक पाए?
- 21:00नहीं खिसके क्यों? क्योंकि तुमने उन शब्दों को पकड़
- 21:07के अपनी बुद्धि के हिसाब से अर्थ कर लिया, इसलिए मैं इतना सरलीकृत
- 21:17रूप से बोलता हूँ कि तुम्हें। इसमें तरमी करने की कोई गुंजाइश
- 21:24वाकई ना छोड़ें। हर पहलू से हर एक ही बात को मैं
- 21:35बोलता चला जाऊंगा और हर बार तुम पाओगे नया है।
- 21:41बात वही है, आसमान वही है, रंग अलग है, इसे फिर से सुन लो तुमने
- 22:02जहाँ जाना है। उस स्थान को परम जागृति कहता है।
- 22:09टोटली अवेयरनेस और ज्याप हो के पाठ हो के पूजा हो के तप हो।
- 22:21के शो प्रचार पूजन हो के तुम्हारे कर्मकांड हो या गलत खान पान हो,
- 22:33चाऊमिन चुग्गा पिज्जा जो तुम्हें शक्ति नहीं देंगे, जो तुम्हारे
- 22:42शरीर को विकृत करेंगे। तुम्हारे तमाम अंगों को ज्यादा
- 22:51प्रयास करना पड़ेगा। वो भोजन बचाने के लिए तुम उस खाने
- 23:00से शक्ति। अर्जित नहीं कर पाओगे।
- 23:05जबकि खाने का मतलब ही ये होता है उद्देश्य ही ये होता है ऐसा खाना
- 23:12खाओ जो तुम्हें शक्ति दे। तुमने हर चीज़ के अर्थ बदल लिए
- 23:29तुम खाना खाते हो, शक्ति के लिए स्वाद के लिए शांत खाना खाता है
- 23:41शक्ति के लिए। जो शक्ति इस 24 घंटों में व्यय हो
- 23:47गई उसको फिर से गेन कर ये टी शूज फिर से चलना शुरू हो जाए।
- 23:59हृदय बराबर धड़कता रहे। फेफड़े बराबर सांस लेते रहे,
- 24:09अन्यथा यह रथ ठहर जाएगा। तुमने अपने ही अर्थ निकाल लिए
- 24:19शब्दों के। क्रियाएं के अपने ही अर्थ
- 24:23निकालिए। यौन शक्ति अपनी नस्ल को बढ़ाने के
- 24:31लिए होती है। यह प्रकृति की शानदार नियामत है।
- 24:39हम अपने वंश की वृद्धि कर सके। कुत्ता कुत्ते को पैदा करता है,
- 24:46मनुष्य मनुष्य में पैदा करता है। मनुष्य की संतुति समाप्त न हो
- 24:51जाए, वंशावली समाप्त न हो जाए इसलिए परमाथु ने प्रत्येक जीव।
- 25:00यह वासना नहीं है, काम ऊर्जा है काम ऊर्जा दी, लेकिन कोई क्या करे
- 25:12अगर तुम इसको। अन्य कारणों के उद्देश्यों के
- 25:18हिसाब से प्रयोग करना शुरू कर दें।
- 25:21अब भोंदू लाल जी कहते हैं उसका नाम भूल गया मैं लड़की का कौनसा
- 25:30एक है? गणचेकर के ऐसा कुछ नाम है उसका
- 25:43बाबा तो हमें 2 घंटे आनंद देते हैं।
- 25:49क्या से क्या हो गया? बेवफा तेरे प्यार में मगथा।
- 26:19क्या मेरा बेवफा तेरे प्यार में? तुम इसको स्वाद के लिए प्रयोग
- 26:43करना शुरू कर दे। कामना करते हो कि हम उस परम
- 26:50रशानंद को कैसे पीएं। 2400 घंटे 1 दिन ऐसा आएगा।
- 26:59यह जो इंद्रियों के द्वारा तुम क्षण भर का आनंद ले पाते हो, वर्ण
- 27:06सही व्याख्यायित करूँ तो इन इंद्रियों के द्वारा जो तुम क्षण
- 27:12भर के आनंद को दूर से निहार लेते हो।
- 27:17वो भी इन्द्रियां मना कर देंगे, इन्द्रियां निर्बल हो जाएंगे,
- 27:24तुम्हारा कहना मानने से इंकार कर देंगे, विद्रोह कर देंगे फिर क्या
- 27:33करूँ? संत तुम्हें एक ऐसा रास्ता हो
- 27:40जाता है हींग लगे ना वटकड़ी रंग भी चोखा दे रंग भी बड़ा मजेदार
- 27:50आता है सुन हैला। और हींग लगे ना फटफट लगता भी कुछ
- 27:58नहीं, वर्ण जुड़ता है, आनंद जुड़ता ही चला जायेगा और वह किसी
- 28:06पे डिपेंड नहीं है। तुम्हारा आनंद तो तुम्हारी
- 28:12इंद्रियों पे डिपेंड। जिसतन इंद्रियों ने मुख मोड़
- 28:16लिया, इंद्रियां थक गई, कमजोर हो गई, शक्तिहीन हो गई, बूढ़ी हो गई।
- 28:34वही तो सहारा था तुम्हारा श्रेणी का आनंद वो सहारा 1 दिन छूट जाएगा
- 28:46इसलिए संत कहता है। वक्त रहती, संभल जा वक्त रहती जा,
- 28:58फिर रास्ते में बड़े ढोंगी बैठे तुम्हें लूटने को मेरी आवाज़
- 29:05लोगों तक पहुंचती। इसको लोगों तक पहुंचाया करो
- 29:18क्योंकि धरती का ऐसा कोई मानव नहीं जीसको आनंद नहीं चाहिए।
- 29:25सच पूछो तो प्रत्येक व्यक्ति, हर पल, हर घड़ी इसी आनंद की खोज में
- 29:31व्यस्त है। वो कर चाहे कुछ भी रहा है, धन कमा
- 29:37रहा है, मान प्रतिष्ठा कमा रहा है, वो गीत गुन गुना रहा है, वो
- 29:47अपनी बढ़िया ही करवा रहा है। वह आचार्य बनकर आपको उपनिश्चितों
- 29:56की व्याख्या बदला रहा है उसके भीतर के किसी कोने में एक कट्टसक
- 30:05बाकी है। वो टसक है आनंद को पानी इस वीडियो
- 30:14को आगे फैलाना एक अपूर्ण है। मेरे पास इतने साधन नहीं हैं कि
- 30:31मैं शरारती लोगों की तरह। एड्स लगा लो, जगत भर में फैला दो
- 30:41इतनी शादी की बस यह तो सिर्फ तुम ही कर सकते हो अगर चाहो तो।
- 30:52इसमें अपने मित्र, परिजन, परिवार, दोस्त, यहाँ तक के तुम आस पड़ोस
- 31:02को भी प्रसारित कर सकते हो क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति को इसकी
- 31:10आवश्यकता है। और इसकी आवश्यकता में दर दर मारा।
- 31:17व्यक्ति उसको राह दिखलाने वाले अंधे बहुत कोई गीता को बांच रहा
- 31:29है। कोई बन्धु नास बनकर तुम्हें दन को
- 31:37लूट रहा है और अपनी वासना की पूर्ति भी कर रहा
- 31:52है। होशियार यार जान ये रास्ता ठगों
- 31:55का। ध्यान रखना क्योंकि ये सबकी जरूरत
- 32:02है और कोई भी चीज़ सबकी जरूरत नहीं है।
- 32:14या तो प्रत्येक व्यक्ति को स्वास्थ्य चाहिए।
- 32:21या प्रत्येक व्यक्ति को आनंद चाहिए और अगर तुम किसी व्यक्ति को
- 32:30आनंद पाने में सहायक हो सकते हो तो उसका फल तुम्हें बहुत मिलेगा।
- 32:39वह व्यक्ति जब आनंदित होगा, उसके हृदय स्थल से पुकार निकलेगी।
- 32:46धन्यवाद निकलेगा तुम्हारे प्रति और उस धन्यवाद का कोई मूल्य नहीं
- 32:51होता सिक्कों में इसलिए शांत। क्योंकि संत देखता है कि सारा जगत
- 33:09दुखी है और संत जानता है कि इस दुख को सुख में बदलना मेरे पास
- 33:18मंत्र है इसलिए संत बोलता है। जिसने मेरे शब्द को सुन लिया, वह
- 33:32समय पाकर दूसरों को भी यह वीडियो शेयर करें।
- 33:42तानाशाही से नहीं, बहुत से लोग प्यासे बैठे होते हैं।
- 33:49उनको पता ही नहीं होता कि इस वीडियो में उनके मर्द की दवा है,
- 34:00उनके दर्द की दवा है। उनकी बिमारी का स्वास्थ्य इसके
- 34:06भीतर छुपा है। वो चूक जाते हैं।
- 34:13अभाव में उनके पास वीडियो पहुंचते हैं।
- 34:15बहुत से लोग मुझे कह देते हैं छः वर्ष हो जाएंगे 3 मई को।
- 34:24बाबा जी आप कहाँ थे? कहता हूँ पुत्र मैं तू जा और बोल
- 34:32रहा था तो बहुत से भाग्यशाली लोग मुझे कारुनोकार से लगातार सुन रहे
- 34:38हैं। और मुझे आश्चर्य होता है जब कोई
- 34:49बिटिया मुझे कहती है कि एक मास्टर जी भी आपकी तरह बोलते हैं, क्या
- 34:53मैं उसको सुन लिया करूँ तो निश्चित ही मुझे समझ आती है।
- 35:01कि इस बेटी ने मुझे ठीक से सुना है, माला तो कर में फिर है जीव
- 35:11फिर है मुखमा मनीराम, चहुँगेश्वर यह तो स्मरण।
- 35:20तुमने कुछ ऐसा ऐसा ही मुझे सुन लिया होगा और मैं रोज़ आपसे कहता
- 35:24हूँ मुझे सुनना बिल्कुल खाली बेला में एक बार मेरी वीडियो को खाली
- 35:35बेला में सुनना एकांत में सुनना। किसी उद्यान में बैठ जाना, किसी
- 35:43आग के कमरे में एकांत में बैठ जाना, फूलों के बाग बगीचे में बैठ
- 35:49जाना और अकेले में सुनना तो यह शब्द तुम्हारे हृदय में जाकर।
- 35:59तुम्हें बड़ा आनंद देंगे क्योंकि इन शब्दों के साथ चिपककर वह आनंद
- 36:06आता है जीसको मैंने उस रात शरद पूर्णिमा की रात समुद्र भर भर के
- 36:15दिया था। पैग भर भर के यह शब्द बिल्कुल नया
- 36:21है आपके लिए समुद्र भर भर के ज़रा सोचो इसकी क्वांटिटी का अंदाज़ा
- 36:37क्या है? नो मेजरमेंट ये थोड़ा थोड़ा करके
- 36:44शब्दों के साथ चिपट के आ जाता है और सुनने वालों के कानों के
- 36:52द्वारा उस ₹70 पहुँच जाता है। जहाँ पर आनंद स्टोर होता रहता है,
- 37:00तुम्हारा जितना सुनोगे उतना आनंद की बरसात भी तुम्हारे भीतर इकट्ठी
- 37:07होती जाएगी और 1 दिन तुम्हें कुछ भी नहीं करना पड़ेगा।
- 37:13नथ्थिंग टु डू। तभी तो बाबा ने कहा सुनिए दुःख
- 37:19पाप का नाश शून्य मात्र से ही तुम्हारी भ्रांतियां टूट जाएंगी।
- 37:30और तुम्हारी भ्रांति क्या है? जन्मो।
- 37:34जन्मो से तुम्हारी एक ही भ्रांति। मैं यह शरीर हूँ, इंद्रियाँ हूँ,
- 37:44मन हूँ, विचार हूँ, बेकार हूँ और बहुत से ऐसे लोग चरवाक जैसे।
- 37:56मार्कस जैसे अपनी नाकामियों को अपनी सिद्धांतों को तुम्हारे हृदय
- 38:09स्थल में पटकने को कामयाब हो गए। और तुमने उनको अपना लिया, तुम
- 38:16उनके अनुकरण करने लगे। आज प्रत्येक व्यक्ति किसी ना किसी
- 38:22का अनुकरण कर रहा है तो उसे थोड़ा सा ठहर के देखना चाहिए।
- 38:31कि क्या मैं जो ये बता रही हूँ ये करके कुछ आनंद की प्राप्ति कर
- 38:41पाए? कुछ ठहर पाए।
- 38:49कभी ऐसा तो नहीं कि मैं और भी ज्यादा दौड़ने लग गया?
- 38:59तुम पाओगे ऐसा ही है तुम्हारे मार्गदर्शक तुम्हें दौड़ाते।
- 39:10जबकि आनंद तुम्हें ठहराता है। यह भी एक मेज़रमेंट की तरह ले
- 39:19लेना जीस सतल पर जाकर जीस जगह पे जाकर जीस, गुरु के सांनिध्य में
- 39:28बैठकर। तुम्हें ठहराव का आनंद मिल जाए।
- 39:33बस तुम्हें और कुछ देखने की जरूरत नहीं है।
- 39:38वही बासी, बासी, वही पुराने धुराने रिकॉर्ड फिर फिर से सुना
- 39:46देना। यह तो रट्टा खोरों का काम होता
- 39:53है। गुरु से गुरु तक अगर गद्दियाँ
- 39:57बदली तो गुरु से गुरु तक अनुभव नहीं जाता।
- 40:03अनुभव तो। श्रम से ही कमाया जाता है टु अर्न
- 40:09यूरसेल्फ़ गद्दियाँ बदल दोगे तुम बदल देते हो बाबा हजूर बना देते
- 40:22हैं हजूर, किसी दिन फिर बाबा हो जाते हैं।
- 40:28और वह बाबा फिर खजूर बना देता है। गद्दियाँ बदल गईं।
- 40:36ज्ञान ट्रांसफर नहीं हो सकता, वो तो खुद का अर्जन करना।
- 40:46इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ बिना वक्त गँवाए अपने अंतः समय उतरने
- 40:55का प्रयास करो, वहीं मिलेगा तुम्हें पक्का।
- 41:02तुमने कभी ख्याल नहीं किया, क्योंकि तुम्हारी प्रज्ञा इतनी
- 41:07बारीक नहीं है जिनको तुम स्वाद या आनंद का संज्ञा देते हो।
- 41:16बस उस क्षण में एक चीज़ देखना कि तुम ठहर जाते हो पल भर के लिए।
- 41:25चाहे संभोग के पीर पे हो, तुम पल भर के लिए ठहर जाओगे, चाहे कोई
- 41:33स्वादिष्ट वस्तु को जिवक रखो, उसका टेस्ट इतना होगा कि तुम पल
- 41:40भर के लिए ठहर जाओ। कोई सुंदर संगीत तुम्हारे कानों
- 41:46में पढ़ तो पल भर के लिए तुम मंत्र मुग्ध हो जाओगे या नहीं ठहर
- 41:51जाओगे तुमने सुंदर दृश्य देख कोई प्राकृतिक?
- 42:01या कोई आर्टिफीसियल तुम वहाँ ठहर जाओगे और जीस घड़ी तुम ठहरे वो
- 42:10घड़ी आनंद की होती है इसको आप सर्किल।
- 42:20जीस घड़ी तुम ठहर गए वह घड़ी आनंद की होती है तो ये क्षणिक ठहराव तो
- 42:31तुम्हें संसार में भी मिल जायेगा ढेरों में लोग वैसे नहीं जाते
- 42:37हैं। इन संस्थानों में लोग वैसे ही
- 42:42नहीं जाते पल भर का ठहराव यहाँ भी मिलता है अंतरंग क्षणों के संभव
- 42:52के क्षणों की तरह बिल्कुल नीरस नहीं है यह।
- 42:59नीरस तो राजनेताओं के भाषण भी नहीं होते।
- 43:04वहाँ भी कहीं न कहीं रस की एक बूंद छलक जाती है।
- 43:09कभी कभी तभी तुम बैठे रहते हो। एक बात को मेज़रमेंट के रूप में
- 43:17ले लेना ठहराव तुम्हारा अंतिम उद्देश्य अल्टीमेट टारगेट ऑफ लाइफ
- 43:36उस घड़ी का इंतजार करना। जीस घड़ी में तुम परिपूर्ण रूप से
- 43:43ठहरते हो उस दिन तुम्हारा रोमा रोमा नाचेगा उस दिन तुम पाओगे हवा
- 43:56की तस्वीर बदल गई। फिजाओं ने फिजाओं का दामन थामा,
- 44:07मुरझाई फूल खिल गए, आसमान गाने लगा, पंछी नाचने लगे।
- 44:19वृक्ष लहलहाने लगे पत्ते मुस्कुराने लगे।
- 44:27यह धरा सुगंध बिखेरने लगी। चारों तरफ आनंद ही आनंद विखरता
- 44:37दिखेगा तुम्हें? उसी घड़ी की इंतजार रखना, उसी
- 44:48घड़ी को इंतजार करना, वह कब आए हम इंतजार करेंगे।
- 45:04हम इंतजार करेंगे कयामत तक, खुदा करेगी कयामत हो।
- 45:21और तू आए खुदा कर की कयामत और तू आए हम इंतजार करेंगे।
- 45:44कुछ भी करो लेकिन उस घड़ी का इंतजार मन के गहरे तलों पर बना ही
- 45:53रहेगा तुम्हें कि वह घड़ी कब आएगी, वह पल कब आएगा।
- 46:02उसी पल के इंतजार में तुम गली गली कूचा कूचा छान लेता, तुम्हें उसी
- 46:13पल का इंतजार है। और वह पल जब तुम्हें नहीं मिलता
- 46:19कॉन्स्टेंट रूप में धारा प्रवाह रूप में अखंड रूप में तो तुम
- 46:27इंद्रियों के माध्यम से क्षण का आनंद लेना शुरू कर देते।
- 46:37क्यों यहाँ एक बात को ध्यान से सुन लेना उसका कारण है?
- 46:49तुम धैर्य नहीं रख पाती, तुम प्रतीक्षा भी करना।
- 46:56हम इंतजार करेंगे क्या मत तक, अनलिमिटेड वक्त तक जब तक क्या मत
- 47:07न हो और ये क्या मत तुम्हारे अहंकार की आएगी तुम्हें नहीं
- 47:14आएगी। जो तुम अपने आप को समझे बैठे हो
- 47:21उसको कयामत कभी नीयत विज्ञान कहता है मैटर कैन नीदर बी क्रिएटर न
- 47:28कैन बी जस्ट डायल। और संत कहते हैं, नैनम चदंती
- 47:35शस्त्राणी नैनम धाती पावका न चेनम के लिए त्यापु न सुश्यतिमारो तहा
- 47:42फिर मरता क्या है, न पदार्थ मरता है पंचभौतिक।
- 47:51तत्वों से बना हुआ ये शरीर बिखर जाता है, मरता नहीं हो जाता है,
- 47:59जाता है, नहीं होता और कृष्ण भगवान कहते हैं कि आत्मा मरती
- 48:08नहीं मर सकती। दो ही तो चीज़ है, फिर ना पदार्थ
- 48:16मरता है ना चीतना मरती है, फिर मरता कौन है?
- 48:27यही तो तुम समझ नहीं पाए पुत्र ना पदार्थ मिटता है, ना चेतना मिटती
- 48:39है, तो तुमने कभी स्वपन देखा? तुम सोते हो ये भी जानते हो तुम
- 48:52जागते हो जागते हुए सो तरह के क्रियाकलाप करते हो, ये भी जानते
- 48:57हो? और तुमने एक संधि खेद का पल भी
- 49:02देखा होगा छोटा सा पल उसे स्वप्न एक पल के लिए ठहर जाओ, यही है
- 49:22तुम्हारे दुख का पार। सोपन जब देखा जाता है तब तुम उस
- 49:33उसको इंकार नहीं कर सकते। तुम 100% मानते हो कि ये सोपन
- 49:40नहीं सत्य? इसलिए तो तुम्हारा सोपन टूटता
- 49:44नहीं, लेकिन क्या सोपन वास्तव में है जैसी कल्पना में तुम भगवान हो
- 49:58जाते हो कल्पना में भगवान तुम्हारे पास आ जाते हैं।
- 50:06कल्पना में सोपन आते हैं लोगों को कि बाबा आप हमारे सोपन में आए,
- 50:14मैं कहीं जाता नहीं वरना अगर जाता हूँ तो मैं हर जगह, हर वक्त रहता
- 50:21हूँ। ऐम ओमनी प्रेसेंट अबरी बार अबरीटन
- 50:27मैं कहीं जाता आता नहीं मैं सदा स्टिल हूँ सदा शेतर हूँ सदा
- 50:35अकंपों सदा अचर मैं चेराबी इधर से।
- 50:41इधर उधर नहीं होता तो स्वपन भी तुम देखते हो नींद को तो तुम
- 50:53अच्छी तरह जानते हो हम 5 घंटे सोये, 8 घंटे सोये जागृति को भी
- 50:59तुम अच्छी तरह जानते हो क्योंकि वह लंबे चेयर काल तक होते हैं।
- 51:06लेकिन एक बीच में छोटा सा लम्हा होता है, वो सोपन का है।
- 51:15एक ख्वाब सा देख था हम। जब आंख खुली तो टूट गया जब आंख
- 51:35खुली तो टूट गया मरने की खबर। ए जाने जिगर मिल जाए, कभी तो मत
- 51:53रोना, हम छोड़ चले हैं महफिल। एक ख्वाब सा देखा था हमने जब आंख
- 52:08खोली तो टूट के तुम ज़िन्दगी के ऊपर लाखों करोड़ों किताबें लिखते
- 52:21थे मृत्यु के ऊपर। लाखों करो किताब में लिख देते है,
- 52:32लेकिन कभी सोपन के ऊपर भी कोई किताब नहीं सोपन क्या है, है भी
- 52:40कि नहीं? कौन सा ऐसा व्यक्ति है जिसने कभी
- 52:48स्वप्न नहीं देखा? स्वप्न सभी देखते हैं और मुझे
- 52:58ज़रा क्षण भर ठहर के बताओ। कि क्या वो सपन जब तुम देख रहे
- 53:05थे, क्या तुम्हें सत्य नहीं लग रहा था?
- 53:10लग रहा था तुम जहाज पर जा रहे हो जहाज क्रैश हो गया।
- 53:19और तुम डर गए और डर के कारण तुम्हारी जाख खुली और स्वप्न में
- 53:25वह क्रैश बिखर गया। सारा मलवा यात्री सभी इधर उधर हो
- 53:31गए, लेकिन जब आंख खोली तो तुमने क्या देखा?
- 53:37कोई जहाज का मलबा दिख। कोई जहाज के भीतर टनो टनो पेट्रोल
- 53:44डीजल होता है। क्या तुमने देखा है उसका कोई
- 53:48पुर्जा उसका, कोई पायलट, उसके भीतर बैठी हुई कुछ सवारियां तुमने
- 53:54देखी उसका एक बाल भी तुमने देखा किसी सवारी का?
- 53:59नहीं कहाँ गए हुए यह है, मैं कोई वर्णन अज्ञात का नहीं कर रहा हूँ,
- 54:13यह है वर्ण मैं भ्रम का कर रहा हूँ, यह है भ्रम यह इलुज़न ही
- 54:21अहंकार है। और यह खोयेगा और मुझे इतना बता दो
- 54:30कि इसके खोने से तुम्हारा नुकसान क्या है?
- 54:33सोच लो सोच लो सारी जिंदगी भर सूझते रहो।
- 54:41और जब तुम्हें जवाब का पता चल जाए तो मुझे बता देना कि सोपन के खोने
- 54:51से तुम्हारा क्या खो जाएगा? सोच के मुझे बता देना और तुम्हारा
- 54:57जवाब क्या होगा मैं आज बता देता हूँ।
- 55:03तुम कहोगे हमारा कुछ नहीं होता बाबा यह तो एक सोपन था, दोहू सोपन
- 55:13था, बुरा सपना देखा। लेकिन सपना ना बुरा होता है, ना
- 55:20अच्छा होता है। जो होता ही नहीं उसका अच्छा क्या
- 55:24और बुरा क्या यह जो खोएगा, उसके खोने से
- 55:39तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ेगा, इसलिए संत कहते हैं।
- 55:46जिसके खोने से तुम कुछ खोते नहीं। उसको खो दो।
- 55:54बड़ा प्यारा शब्द है जिसके खोने से तुम कुछ खोते नहीं, उसको खो ही
- 56:03लो। उसके बने रहने में बड़ा दुख है।
- 56:07अहंकार अगर बचा रह गया तो तुम कितने जन्मो तक दुखी रहोगे और
- 56:16उसके खोने से तुम्हें कोई नुकसान नहीं होगा?
- 56:22और तुम फिर भी उसको बचाए रखते हो जब हो पंचना ये सब उस अहंकार को
- 56:30बचाने की तरकीब है। राम हो रहीम हो, अल्लाह हो, अकबर
- 56:36हो, वह गुरु हो। पांच नाम हो 1000 नाम हो गीता हो,
- 56:43पुराण हो, पुराण हो, वेद हो अपने से ये सब सपने हैं, इन सपनों को
- 56:56छोड़ दो, इन सपनों को छोड़ दो। इन सपनों के बोझ के तले तुम दबे
- 57:08हुए हो, अपने आपको भूल गए जब तुम सपना देखते हो तो तुम स्वयं को
- 57:18भूल जाते हो। और सुबह जग कर पाते हो के सपने
- 57:31में जो खोया इतना नुकसान हुआ, जहाज टूट गया, करोड़ों का था,
- 57:41पैसेंजर मर गए उनकी कोई कीमत नहीं।
- 57:47सारा मटेरियल द्रव्य उसके भीतर पेट्रोल आज मिलता ही नहीं वह बिखर
- 57:55गया। बड़ा नुकसान हुआ होगा।
- 58:02लेकिन जब जग जाते हो तो पाते हो ज़रा भी नुकसान नहीं, वरना अच्छा
- 58:08ही हुआ जो था ही नहीं वो टूट गया जो कभी होता नहीं जिसके खोने से।
- 58:21तुम कुछ खोते नहीं, वह खो ही जाए तो अच्छा है, लेकिन हैरानी की बात
- 58:33है कि अगर कोई गुरु तुम्हें जगाता है तो तुम उसे प्रतिशोध लेते हो।
- 58:48वो तुम्हारे इन सपनों को तोड़ता है, जगाता है हिलाता डुलाता है,
- 58:55जग जाओ और तुम गुस्सा हो जाते हो, तुम उससे प्रतिशोध लेते हो।
- 59:06तुम उसकी हत्या कर देते हो, ईसा को सलीब लगा देते हो, मंसूर के
- 59:11हाथ पांव काट देते हो, सोकरेट्स को जहर पीला देते हो, मीरा को जहर
- 59:17का गला बेच देते हो, इसने मेरे सोने में खलल डाले।
- 59:28यह दुष्ट कहाँ से आ गया? सोए हुए थे चैन से ओढ़े हुए कफन
- 59:38सोए हुए थे चैन से ओढ़े हुए कफन। यहाँ भी सताने आ गए किसने पता बता
- 59:45दिया तुम इतना गुस्से होते हो कि उसे जगाने वाले से तुम प्रतिशोध
- 59:58लेते हो, वह तुम्हारा दुश्मन हो जाता है।
- 1:00:08इसलिए संत तुम्हें दुश्मन जैसे दिखाए पड़ते हैं।
- 1:00:16तुम सुंदर सपने देख रहे थे। बाघ बगीचों में अपने प्रेमी
- 1:00:22प्रेमिका के साथ बतिया रहे थे। अभी अभी तो आए हो बाहर मन के छाये
- 1:00:31हो हवा ज़रा बहक तो ले हवा ज़रा महक तो ले नजर ज़रा बहक तो ले।
- 1:00:45ये श्याम ढल तो ले ज़रा ये श्याम ढल तो ले ज़रा ये दिल संभल तो ले
- 1:00:55ज़रा, अभी तो कुछ कहा नहीं है, अभी तो कुछ सुना नहीं।
- 1:01:06अभी न जाओ छोड़कर यह दिल अभी भरा नहीं जगाने वाला, तुम्हें दुश्मन
- 1:01:16की तरह लगता है इसलिए बहुत से गुरुओं को तुमने मर्डर।
- 1:01:25जबकि वो इस संसार की अमूल्य धरोहर है तो मैं उन्हें बचा के रखना था।
- 1:01:39कुछ लोग समझदार होते हैं। वो अपने मार्गदर्शकों को बचा के
- 1:01:47रखते हैं। वो जानते हैं कि इनका जगाना हमारे
- 1:01:53हित में है। अच्छा हुआ सपना टूट गया।
- 1:02:03जब कि जगाने वाला तुम्हें जगाता है कि जो तू देख रहा है सपना
- 1:02:13उसमें कोई तत्व नहीं, वह सत्य नहीं, वह झूठा?
- 1:02:23बहुत सपना देख लिया, अब जाग जा, तुम नाराज हो जाग जाओ, तुम कहते
- 1:02:33हो, हमारी मान्यताएँ तोड़ दी, जैसे कि तुम्हारी मान्यताएँ।
- 1:02:39तुम्हारे दर्शन से आई हूँ नहीं, मैंने कल ही कहा था बाबा कहते हैं
- 1:02:48मने की गति कहीं ना जा, एक तुम मानते हो खोपड़ी से वो गलत होता
- 1:02:55है। एक अपने अंत स्थल में जाकर मानना
- 1:02:59पड़ता है देखकर जैसे तुम ताजमहल के सामने जाकर ताजमहल को देखकर
- 1:03:05तुम्हें ताजमहल है, यह मानना पड़ जाए, वह सच होगा, वह तुम्हें
- 1:03:15मानना ही पड़ेगा। वे किसी के कहीं सुनने से नहीं
- 1:03:18मानोगे, वो देखने से मानोगे? देखने से भ्रम टूट जाता है जीस
- 1:03:32सपने के टूट जाने से तुम्हारा कुछ घटता नहीं कुछ वर्तन।
- 1:03:42वरना अच्छा है कि तुम देखना शुरू करोगे, अपना काम धाम करोगे, किसी
- 1:03:55ने ट्रेन पकड़नी है, किसी ने ऑफिस जाना किसने दुकान को?
- 1:04:03किसी ने बच्चे के लिए दवाई लेके आओ, 1000 काम है संसार सपने के
- 1:04:15टूट जाने से तुम्हारा ज़रा भी टूटता नहीं, नुकसान नहीं होता।
- 1:04:27उसी को संत कहता है कि तोड़ दे जिसके टूटने से तुम्हें कोई
- 1:04:35नुकसान नहीं होगा, उसको टूट ही जाने दे और वो क्या है तुम्हारा
- 1:04:46इल्यूज़न तुम्हारा ब्रह्म? तुम्हारी मिसकन्सेप्शन तुम कौन हो
- 1:04:57तुम्हें जन्मो जन्मो से इस बात का पता नहीं लगा और पाखंडी गुरु
- 1:05:04तुम्हें कहते हैं कि यह जप कर लो, रेपिटेशन कर लो, तुम्हें तुम्हारा
- 1:05:09पता चल जाएगा। कैसे पता चलेगा तुम याद तो राधा
- 1:05:15को करते हो परिणाम में तुम्हें तुम्हारा पता चल जाएगा कि तुम कौन
- 1:05:22हो, ये कैसे संभव है? राधे राधे करते करते तुम स्वयं को
- 1:05:30जान पाओगे? यह कैसे संभव है?
- 1:05:38राधा राधा करते करते तो राधा की स्मृति बनेगी जैसी तुमने तस्वीर
- 1:05:44देखी राधा बस इससे ज्यादा कुछ नहीं।
- 1:05:49आलू आलू करते करते तुम्हारी नजरों के सामने क्या आया करता है?
- 1:05:53इमेजिनेशन में ब्रेन में रिफ्लेक्शन किस चीज़ की आती है?
- 1:05:59आलू की टमाटर को याद करो टमाटर की याद आएगी छवि क्योंकि वो तुमने
- 1:06:08देखा है। जीस परमात्मा को तुम याद करने चले
- 1:06:15हो तुमने कभी देखा कैसे करोगे याद उसको?
- 1:06:24इट्स इम्पॉसिबल? और इस इम्पॉसिबल काम को करने के
- 1:06:30लिए गुरु तुम्हे कहते हैं इसलिए मैं रोज़ कहता हूँ ढेरों में लंबे
- 1:06:35लंबे बांस गाड़ दिए गए हैं, चढ़ते रहो, उतरते रहो, चढ़ते रहो, उतरते
- 1:06:41रहो। 10 पांच किलो जमीन है हमारे नाम
- 1:06:45पर। क्योंकि ये तो संघ ले के जाएंगे।
- 1:06:53इन्हें ब्रह्म तुम्हारे कौन सा साथ जाने?
- 1:07:02बस इन्हीं आदमियों से संभल के रहना।
- 1:07:10मैं सुनी सुनाई बात नहीं करता, बड़ी पढ़ाई बात नहीं करता, मैं
- 1:07:14देखा देखी बात कहता हूँ, अपने अनुभव की बात कहता हूँ, इसको मन
- 1:07:25करे। तो स्वीकार कर ले नहीं।
- 1:07:30मन करे तो ये समझ लेना। अभी परमात्मा की इच्छा नहीं है।
- 1:07:35एक उसकी भी इच्छा है और सच में कहूँ तो इच्छा ही उसकी होती है।
- 1:07:43अगर मैं अब बोल रहा हूँ तुम सुन रहे हो तो उसकी इच्छा के कारण ही
- 1:07:48सुन रहे हो अन्यथा तुम नहीं सुन पाते यह बात हमारी खोपड़ी को जचती
- 1:07:53नहीं, लेकिन सत्य को खोपड़ी के जचने या ना जचने से क्या लेना
- 1:08:00होता है? सत्य किसी का मोहताज नहीं होता।
- 1:08:08सत्य अपनी मस्त चाल से चलता है। जिसके टूट जाने से जिसके मिट जाने
- 1:08:24से क्षमा के भीतर परवाने का भस्मी भूत होने से कुछ मिटता नहीं, उसको
- 1:08:36मिट ही जाने दो ना। क्योंकि संत तुम्हें एक अजीब सी
- 1:08:42बात कहता है, अगर तुम मरने के बाद मिटने के बाद भी ऐसे ही बने रहते
- 1:08:50तो संत तुम्हें कभी नहीं कहता। ट्रांसफर, यूरसेल्फ़, ट्रांसफॉर्म
- 1:08:55यूरसेल्फ़ नहीं कहता। संत जानता है अपने अनुभव से उसने
- 1:09:04बदलकर महा आनंद का रस पिया तो तुम भी बदल जाओ।
- 1:09:15बदलने से तुम्हें आनंद के समुद्र मिलेंगे नहीं बदलोगे तो इन्हीं
- 1:09:26गमों में गोते खाते रहोगे इन्हीं दुखों के संताप में।
- 1:09:32इन्हीं चिंताओं की चिंता में जलते रहोगे ये तुम्हारी मर्जी है
- 1:09:41क्योंकि संत डिक्टेटर नहीं होती। संत अपना अनुभव बोलता है और उस पर
- 1:09:50भी तुम इतराज उठाते हो। संत अपना अनुभव बोलता है और उस पर
- 1:10:02भी तुम प्रतिक्रिया करते हो। मतलब देखो अगर मैं कहूं कि मैंने
- 1:10:08ऐसा देखा। तो तुम कहो कि नहीं ये गलत है।
- 1:10:13इट्स युअर हैलो सेलेक्शन बाबा तो मैं कहता हूँ ओके तो अगर आचार्य
- 1:10:22कह दें कि एनलाइटनमेंट डज़ नॉट एग्ज़िस्ट देन ओके?
- 1:10:30इसका यही मतलब हुआ ना कि तुमने नहीं जाना एनलाइटनमेंट अगर
- 1:10:39मार्क्स कहते हैं परमात्मा नहीं है तो यही मतलब है ना कि इस
- 1:10:43बेचारे ने जाना। तो सत्य बोलता है ना इतना ईमानदार
- 1:10:49तो है चारवाक ने कर्मों के लेन देन के सिद्धांत को नकार दिया।
- 1:10:59वह कहता रिदम कृतवा कर्तम यदा जीवित सुखी जीवित।
- 1:11:04बसुम बोता से देह से पुनर आगमन कोता तो ठीक है कर्जी उठालो सराग
- 1:11:15पीलो, चाउमीन चुग्गा खा लो। जेल में बंद होने का डर है, किसी
- 1:11:27को रिश्वत दी ना है तो किसी मित्र से उदार मांग लो और फिर कह दो यदा
- 1:11:41जी वे सुखी जीव है। ऋण कृतवा ग्रितं विवेक भस्म भूत
- 1:11:52से देह से पुनर आगमन को ता है। इंतजार करो कि कब तुम मरो और कब
- 1:11:58ऋण देने वाला मरे, यहाँ कोई वापसी वगैरह तो होती ही नहीं।
- 1:12:07इसलिए उल्टा इलज़ाम लगा दो। उसने जो पैसे दिए गुनाह किए ऊपर
- 1:12:16और खर्च करवा दो इसलिए तो ये तड़पते हैं दिन भर रात और इसके
- 1:12:24सहयोग करने वाले व्यक्ति भी तड़पते हैं।
- 1:12:30फिर ये कहते हैं मेरे पास बाबा सुकून नहीं, सुकून क्या खा करेगा?
- 1:12:40जब तुमने सपने को सत्य मान लिया तो सुखु की।
- 1:12:47प्रतीक्षा न करो तुम दुख के विश्व के समुद्रों में अनंतकाल तक डूबे
- 1:13:02रहो। अगर कोई नहीं मानता तो फिर यही
- 1:13:12मतलब है संत कहता है कि वह नहीं जानता, इसका इता सा मतलब है कोई
- 1:13:23सार, कोई आचार्य। कोई मार्कस, कोई चरवा, कोई बात कह
- 1:13:29के सिद्धांत कह के कितना भी सीना बुलाये भरे, लेकिन संत एक बात में
- 1:13:37ही खत्म कर देता है। कहानी बेचारा सत्य तो बोलता है।
- 1:13:44ईमानदार तो है नहीं देखा होगा लेने को देना पड़ता है।
- 1:13:55भाई वापसी होती है यहाँ यहाँ कर्मों का फर्ज सफा मिलता है।
- 1:14:02यह नहीं जानता होगा, प्रकृति की मार नहीं और जब प्रकृति की मार
- 1:14:12पड़ती है तो ये कहाँ पे लग जाता है और इन लोगों में प्रकृति की
- 1:14:19मार पड़ती ही क्यों? क्योंकि प्रकृति के नियमों के
- 1:14:27विपरीत चले नहीं मानोगे तो प्रकृति का क्या रहोगे?
- 1:14:34टेढ़े आढ़े चलोगे? तो चूक ना तुड़वाओगे ना भाई।
- 1:14:41यह प्रकृति का नियम है। प्रकृति के नियमों का अवहेलना
- 1:14:45करोगे तो परिणाम भुगतने को भी तैयार रहो।
- 1:14:51जिसके खोने से तुम्हारा कुछ होता नहीं है।
- 1:14:56उसको संत कहते हैं कि खो ही दो ना।
- 1:15:01और संत कहते हैं कि इसको खोने के बाद एक बार तुम्हें धड़का तो होगा
- 1:15:09इसलिए मैं विवेकानंद को कोई ज्यादा समझदार व्यक्ति नहीं कहता
- 1:15:16क्योंकि समझदार उस वक्त यह नहीं कहता।
- 1:15:20थर्राता नहीं, कांपता नहीं, वो कहता है बाबा थोड़ा सा और तेज़ी
- 1:15:26से फेंक वो नहीं कहता बाबा मेरे माँ बाप भी हैं, मेरे भाई बहन भी
- 1:15:34हैं। ये क्या खाक मुमुक्षु था वो
- 1:15:38विवेकानंद को तो महान? मैं महान पुरुष नहीं कहता, मैं
- 1:15:44शुद्र पुरुष कहता हूँ, जो मृत्यु से डर गया वह महान का खाक महान तो
- 1:15:53सुभाष चंद्र बोस थे महान तो भगत सिंह थे।
- 1:15:59महंत तो राजगुरु सुखदेव थे महंत जतिन दास जो मृत्यु के सामने
- 1:16:10कांपी नहीं और यह तथा कथित मोमुख शु, विवेकानंद, नरेंद्रनाथ।
- 1:16:18और तू से डर गया तो बाबा ने हाथ उठा लिया।
- 1:16:22ठीक है। फिर तो ऐसे ही लोगों को परेशान
- 1:16:28किया। हर किसी से पूछ लेता था परमात्मा
- 1:16:33है तुमने देखा है मुझे दखला सकते हो।
- 1:16:39आज मैं दिखलाने वाला आया तो तू कपड़े क्यों लग गया?
- 1:16:52विवेकानंद कायर था, व्यसनी था, ऐसा कौन सा व्यसन था जो उसके भीतर
- 1:17:00नहीं था? इसलिए 31 बीमारियों से युक्त हो
- 1:17:10विवेकानंद हिंदुस्तान के अपने आश्रम के भीतर।
- 1:17:2039 वर्ष की छोटी सी उम्र में तड़प, तड़प के प्राण तख्त।
- 1:17:28तुम मरने के बाद व्यक्ति को छलाघा करने में चूबते नहीं।
- 1:17:40फिर तो जब ओशो का जन्म हुआ था तो नर्मदा उनके पांव छूने आई थी।
- 1:17:49फिर तो जब कृष्ण को ले जाया जा रहा था तो नदी ने उनके पांव बार
- 1:17:57बार चूमने चाहिए। नदी में इतनी होश होती है क्या?
- 1:18:07लेकिन ये भगतों की मजबूरी है। अगाध श्रद्धा भी कभी कभी पगला
- 1:18:15देती है। अपने भीतर उतर कर अगर अगाध
- 1:18:24श्रद्धा पैदा हो जाए, वो तो है हीरा।
- 1:18:30अगर आनंद का लुत्फ उठा के एक हमारे भीतर अगाध श्रद्धा पैदा हो
- 1:18:34जाए, वो तो है सही अगर किसी व्यक्ति को वैसे ही अगाध श्रद्धा
- 1:18:43से तुम भर जाओ वह सोपंज जैसा। तो गौर कहते हैं मरो हे जो की मरो
- 1:18:52जीस मरने से तुम डरते हो मरो मरण है मीठा क्यों?
- 1:19:05इसका फल मीठा होगा। मरने का फल मीठा होगा और ये
- 1:19:11स्वप्न अगर मिट भी जाए तो क्या कुछ बिगड़ेगा?
- 1:19:15तुम्हारा? अगर कुछ बिगड़ेगा तो मुझे बता
- 1:19:19देना। जब तक मैं जिंदा हूँ तो मुझे बता
- 1:19:22देना। एक बात फिर सुन लो स्वप्न के मरने
- 1:19:32से बिगड़ने से टूटने से तुम्हारा कुछ घटता नहीं टूटता नहीं, ऐसा ही
- 1:19:40तुम्हारा अहंकार है। अंकार को गल जाने दो, जल जाने दो
- 1:19:47परवानी की तरह बस में बहुत हो जाने दो, फिर तुम जो पाओगे उसका
- 1:19:57वर्णन नहीं किया जा सकता ताकि या गल्ला कथिया ना जाए।
- 1:20:06उसकी बातें कहीं नहीं जा सकती। वह अवर्णनीय शब्दों से पार
- 1:20:17शब्दातीत वह रस्मों पे। वह आनंद है तो संत कहता है देखो
- 1:20:31यह सच्चा सौदा है, यह सच्चा सौदा कर लो।
- 1:20:38अर्ज क्या? लेकिन हमने तो सच्चे सौदे की नकल
- 1:20:47बना दी। गुफाओं में गुफाओं में सच्चे सौदा
- 1:20:52करने लगे, कतलो गारत करनी शुरू कर दी, लूटपाट करनी शुरू कर दी।
- 1:21:00पता है लेकिन भूल गए। के झर्रर तो साथ हुए जाए।
- 1:21:13संत कहते हैं कि यह सच्चा सौदा है अहंकार को खो देना और उस विराट को
- 1:21:21बालीना। यह है सच्चा सौदा।
- 1:21:28कोई किसी डेरे में सच्चा सौदा नहीं मिलता, सच्चा सौदा मिलता है।
- 1:21:35अहंकार को गला कर विराट को पा लेना वह सच्चा सौदा है।
- 1:21:41उस सोते में कोई नुकसान नहीं है। उस सोते में शूद्र विराट हो जाता
- 1:21:48है। उस सौदे में दुखी व्यक्ति भटकता
- 1:21:54हुआ मानव दौड़ता हुआ मानव ठहर जाता है और एक बार की एकतहा
- 1:22:01समुद्र आनंद का वालेता है, जिसका कोई और छोर नहीं होता।
- 1:22:12जिसके खोने से कुछ भी नहीं खोता, उसको खो ही दो, उसको बचाने का
- 1:22:19प्रयास न करो। भला मृत्यु से भी क्या डरना होता
- 1:22:25है? उससे लोग कह देते हैं वाह वाह
- 1:22:30तुझे मार देंगे। मैंने कहा चलो हम मान ले कि तुम
- 1:22:36ना मुझे मारो तो क्या मौत भी ना मारी फिर तो वह तो मारेगी ही।
- 1:22:47जमाने में मार जवां कैसे कर जमीं खा गई आसमान।
- 1:23:06कैसे कैसे जमाने ने मार जमा कैसे कर जमी खा गई आसमान?
- 1:23:26कैसे, कैसे क्या मौज भी ना मारेगी फिर क्या करोगे तो संत कहते हैं।
- 1:23:46जब मौत मार ही देगी तो फिर मरने से डरते क्यों हो?
- 1:23:51यह सच्चा सुधा कर जिसके खोने से तुम्हें बिगड़ता भी कुछ नहीं,
- 1:23:58वरना तुम विराट हो जाते आनंद का सागर विराट आनंद का सागर तुम पर
- 1:24:05बरस पड़ता है। वह है सच्चा सौदा, अन्यथा तब तक
- 1:24:10तुम झूठा सौदा ही कर रहे हो तो तुमने पूछा पुत्र इसकी भीतरी
- 1:24:24रहस्यत्मक विवेचना करो। कि जब से आप मना ही क्यों करते हो
- 1:24:36जब तुम्हें शक्ति विहीन कर देता है और शक्ति विहीन होकर तुम
- 1:24:40मूर्छित हो जाते हो। सारे दिन बोलते रहो, कुछ भी बोलते
- 1:24:45रहो, आज लोग बोल रहे हैं कोई अलाह अकबर।
- 1:24:49कोई गॉड, कोई वह गुरु, कोई राम, कोई राधे, कोई पांच न सभी बोल रहे
- 1:24:56हैं और सभी अपनी शक्ति को खो रहे हैं और शक्ति को खोने से तुम
- 1:25:02मूर्छित हो जाते हो जबकि जीस पर तुमने जाना है।
- 1:25:08वह परम अवेयरनेस है, वह परम जागृत है, वहाँ जाकर मोर्चा हो जाती है,
- 1:25:19वहाँ जाकर मोर्चा का एक कण भी वाकई नहीं रहता।
- 1:25:25100% तुम चैतन्य की धारा हो जाते हो वहाँ जाना है तुमने कैसे जाओगे
- 1:25:33तुम नाम जप करके तुम जाओगे कैसे क्यों मूर्ख हो गया हो?
- 1:25:42जिन ऋषियों ने कहा। उन्होंने उसका विस्तार भी किया,
- 1:25:47व्याख्या की लेकिन आप उसकी तरफ ध्यान नहीं करते।
- 1:25:52बाबा ने कहा नाम की व्याख्या करते हुए।
- 1:25:55जेता कित्ता तेता नाम ये सारा पसारा इसको बाबा कहते हैं।
- 1:26:01यह नाम है। बिन नावें नाहीं को ठोव हिज़ ओमनी
- 1:26:08प्रेसेंट सब जगह है वो और तुम उसको शब्दों में बांध लेते हो
- 1:26:14सीमित कर देते हो अगर वह सब जगह है तो तुम उसको बांधोगे कैसे
- 1:26:21शब्दों में? रेपेटिशन से यू विल लूज़ यू अरे
- 1:26:30ऐनर्स और जहाँ जाना है वहाँ वृहद शक्ति की आवश्यकता है?
- 1:26:37वृहद शक्ति के द्वारा तुम उस वृहद शक्ति और चेतना के सागर में समा
- 1:26:43जाओगे। यह तुम्हारा अंतिम लक्ष्य।
- 1:26:47इसलिए मैं कहता हूँ मत करो चलो अंतिम शब्द इसको सर्कल में ले लो।
- 1:27:02मोर्चा से कभी परम चेतना तक जाया नहीं जा सकता।
- 1:27:11मूर्च्छ से कभी परम चेतना तक जागृति तक जाया नहीं जा सकता।
- 1:27:20जप करने से आती है मूर्च्छ। और तुम्हारा मुकाम है, परम जागृति
- 1:27:31कैसे पाओगे तुम कैसे बनेगी सीढ़ी मूर्छा कैसे सीढ़ी बनेगी परम
- 1:27:40जागृति की कोई मुझे बता सकता है? श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारें ए
- 1:27:58नाथनारा यन वसुदेव। पितु मातृस्वामी सखा हमार पितु
- 1:28:18मातृस्वामी सखा हमार। हिनाथनारां यन वासुदेव श्रीकृष्ण
- 1:28:33गोविन्द ह रे मुरारी। हे नाथ नारायण यन वासुदेव
- 1:28:56धन्यवाद।