Latest / Baba ji Vijay Vats / 9 Jun 25 - शिवलिंग का रहस्य! क्यों देवता भी मानव जीवन को तरसते हैं? चेतना को शिखर तक कैसे पहुंचे?
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- 0:00जगदीश कुमार अत्रि, नार्वे से बाबा बहुत देर से एक शंका मन में
- 0:18थे। बहुत से संतों को पूछा, लेकिन
- 0:24जवाब नहीं मिला। अब वक्त देख कर क्या बहुत मुश्किल
- 0:32कठिनतम प्रश्नों का जवाब दे रहे हैं तो मन में आया।
- 0:39कि प्रश्न आपसे पूछ लेना चाहिए बाबा प्रश्न है ना यह जो हमने
- 0:51भगवान शंकर का लिंग बनाया? सिम्बोलिक रीप्रेसेंटेशन इसका
- 1:04वास्तविक अर्थ क्या है गहराई से समझाइएगा वैसे।
- 1:12तो आप हर बात को गहराई से ही समझाते।
- 1:14हो? जगदीश अत्रि नर्वस ठीक किया पुत्र
- 1:31तुमने क्वेश्चन पूछ रखा है। बहुत सी कुंठानों को।
- 1:38बहुत सी जंजालों को। गांठों को यह उत्तर खोल देगा
- 1:52मंदिर किसी का हो? आप देखोगे वहाँ शिवलिंग जरूर।
- 1:58होता है। सनातन की ये अद्भुत संकेत बड़ा
- 2:10मुश्किल था बताना। इसलिए।
- 2:13तुम्हें कोई बता नहीं सका, यह कोई अचंभे वाली बात नहीं है।
- 2:25इसका वास्तविक अर्थ क्या है, पुत्र सोना?
- 2:35इसका मतलबी है। जो बच्चे पैदा नहीं करता है, वह
- 2:41पाप में है। अगर तुम सच में पुण्यात्मा होना।
- 2:49चाहते हो? तो तुम कम से कम दो बच्चे पैदा
- 2:55करो यह क्रैश हो। भाई क्योंकि दो के संयोग से
- 3:06बच्चा। उत्पन्न होता है।
- 3:08स्त्री और पृष्ठ। और दो ही पैदा।
- 3:13होने चाहिए। तो धरती पर न्यूट्रालिटी बनी।
- 3:17रहेंगी। नहीं पहले भी अपने।
- 3:21प्रवचन में आपको बताया? लेकिन क्योंकि आपने इसका गहन।
- 3:29अर्थ। ये गहन अर्थ तो बड़ा भारी है तो
- 3:35फिर ऐसा कीजिए आप। थोड़ा सा सुनने के लिए तैयार हो
- 3:42जाते है। इसका मतलब ये है।
- 3:49के संभोग अपराध नहीं। यह शिव लिंग योणी में।
- 3:58हर वक्त लिंग का फंसे रहना, यह प्रतीकात्मक चिन्ह तुम्हें बताता
- 4:05है। यह अपराध में न्यायसर्गिक है।
- 4:09नैचुरल जब तक की वह। एक्सेस में नहीं हो जाता।
- 4:22एक्सेस इस एवरीथिंग एक्सेस ऑफ एवरीथिंग इस बैड।
- 4:39जो बच्चे पैदा नहीं करता वह पापी है।
- 4:48एक बार एक। बी के मेरे पास साखे श्वेत मैंने
- 4:54कहा, पुत्र। तू जो मुझसे पूछना।
- 4:56चाहती है कुछ प्रश्न पूछते थे। उसमें में ऐसा तो है नहीं है।
- 5:03कि तुम्हारे अहंकार को पोषण दे दो।
- 5:11मैं तुम्हें ये कहता हूँ के बी के।
- 5:13धर्म अपना लो यह एक। श्रृंखला है तुम्हें अच्छी लगती
- 5:17है, लेकिन दो बच्चे पैदा करो। उसके बाद।
- 5:25कहीं जाओ मुझे ठीक से। समझने का प्रयास करो।
- 5:34ये तुम्हें बहुताय में सनातन धर्म के।
- 5:37किसी भी क्षेत्र में मिलेंगे। धरती को जहाँ से।
- 5:41खो दोगे और कुछ मिले न मिले। शिवलिंग जरूर मिलेगा।
- 5:49इस कार्थ क्या होगा? बहुत देर से।
- 5:53तमन्ना थी कोई बता ना सका किसी से पूछ ना सका आपसे भिक्षित हूँ।
- 6:09आपकी लाजवाब से प्रसन्न, हर बात का जवाब आप निर्भीक ढंग से देते
- 6:16हैं इसलिए जरूरत हो गई। एक मौत तू से तमन्ना थी तुम्हें
- 6:34छोड़ने की एक मौत तू से। तमन्ना थी तुम्हें छुआ के आज बस
- 6:56में। जज़बाती करी बाजा आज बस में नहीं
- 7:14सजवाती। करी बाजा दूर रहकर ना करो बात करी
- 7:33बाजा। याद रह जाएगी ये रात करि बाजा।
- 7:51मुझे देखकर ये ख्याल आया। के पूछ लेना चाहिए।
- 7:59बाबा से। मेरी बहुत सी गुंडिया खुल।
- 8:02जाएगी इस। दिखावे बाजी से बच जाऊंगा।
- 8:10सर्कस बाजी से बच जाऊंगा। सत्य की समझ आएगी, रस का निचोड़
- 8:16मिलेगा। एक जैन भी मेरे पास आ गई, अभी बनी
- 8:31नहीं थी साथ में। बाबा कहते है कि दो बच्चे अवश्य
- 8:35पैदा करने चाहिए। इसके भीतर का गहरा रहस्य क्या है?
- 8:43मैं सादगी बनना चाहती हूँ और जाने से पहले।
- 8:49आपसे इस अहम समस्या का समाधान चाहती हूँ।
- 8:53मैंने कहा बैठो हो इसलिए। मानव।
- 9:04शरीर पाने के लिए देवता। तक भटकते भरते हैं, ये सामने
- 9:08देखो, तुम नहीं देख सकोगे सिक्स्थ सेन से जागृत करो तुम जान।
- 9:15पाओगे? मुझे करोड़ों लोग सुन रहे हैं,
- 9:19तुम्हें शायद अहंकार होता हो। के बाबा।
- 9:22हमारे लिए बोलते हैं, नहीं नहीं, मैं इनके लिए।
- 9:25बोलता हूँ जो। मानव शरीर पाने के लिए इतने
- 9:32उतावले हैं, इतने उत्कंठित हैं हिपाश से भरे पड़े।
- 9:41क्यों? क्यों?
- 9:45क्योंकि मानव शरीर चेतना का परम आयाम ये वो आयाम है जो आपको।
- 9:54परम चेतना तक ले जाता। है।
- 9:56चेतना के परम शिखर। को बचाने वाला अगर कोई।
- 9:59शरीर है ईश्वर प्रदत्त इस सृष्टि। में तो वह मानव शरीर ही है।
- 10:09इसलिए तुमने शास्त्र में पड़ा। होगा कि इस शरीर को मानव।
- 10:14शरीर को लेने के लिए। देवता गण भी तरसते हैं।
- 10:18कारण नहीं बताया उन्होंने। मैं बता देता हूँ कारण मैं कुछ
- 10:23छुपाऊंगा नहीं कारण। यह है कि मानव शरीर चेतना का
- 10:31एक्स्ट्रीम है। एक्स्ट्रीम।
- 10:36जहाँ। जाकर तुम भाग्यवान हो जाते हो और
- 10:39भाग्यवान से शब्द बना भगवान तो फिर?
- 10:44तुम्हें दर्जा मिलता है भगवान का, कृष्ण की तरह राम की तरह।
- 10:52तुम पकड़ लेते हो उनके कामों। को चरित्रों को कर्मों को।
- 10:57यहीं छूते जाते हो? तुम उनकी चेतना की ऊंचाइयों।
- 11:02को नहीं। पकड़ पाते हो डंग?
- 11:11चेतना की। ऊंचाइयों को पकड़ने का ढंग।
- 11:13का है अपने। आपको उस स्थान पर रख।
- 11:16ले पता चल जाएगा। तुम्हें राजतिलक होना सब
- 11:25तैयारियां पूरी अयोध्या वासी प्रभात।
- 11:31गीत गा रहे है, उत्सव मना। रहे है ढोल नगाड़े।
- 11:34पीते रहे है। नाच रहे है लोग।
- 11:42वीणा और मृदंग की ध्वनियों पे घूंघर बांध के लड़कियां नाचती है।
- 11:51भगवान राम का राज्याभिषेक हुआ। और सारी रात उससे नाच।
- 11:57जड़ता है। रैन मौके पे हो के की कई भेजती है
- 12:06संदेश। बेटा राम को बुला के आओ राम कुशल
- 12:15के पास है। अपना अंतिम भोजन करने के।
- 12:19लिए राज्याभिषेक से पहले। दूध आ जाता है।
- 12:28प्रभु, आपको। पिता श्री ने महाराज श्री।
- 12:32ने बुलाया है और हम कहते है ठहर जाओ भैया ये बाद में खा लूँगा
- 12:42आके। भाग्य।
- 12:47के हैं। इताश्री के स्थान की ओर कोप।
- 12:52भवन में बैठे हैं देखते हैं, आश्चर्य चकित होते हैं।
- 13:02इन्हें तो राज़ दरबार में होना चाहिए।
- 13:06जी कोप भवन में क्यों? और अगला दृश्य देख कर तो बड़े
- 13:11बेजान हो जाते है पिताश्री जमीन पर?
- 13:19जो राज्य सिंहासन पर होना चाहिए। मैं देख रहा हूँ कहीं सपना तो
- 13:24नहीं? लेकिन जल्दी ही समझाते हैं।
- 13:32संभल के पूछते हैं, पिताश्री, क्या बात है?
- 13:38ज़रा सोचो अपने आप को तुम्हें राजा विषय कौन हो और हो जाए
- 13:47वनवास? 14 वर्षगाँव।
- 13:51संघ चले तुम्हारी अर्धांगणी सीता। और संघ चले तुम्हारे लघुव्रता।
- 13:58तुम्हारा हाल क्या होगा? यहाँ तो थोड़ा सा जाने की बात कर।
- 14:05लेता हूँ मैं आंसू थमते। अपने प्रिय पुत्र के योग में दशरथ
- 14:14कैसे? तड़पा होगा, यह तुम नहीं जान
- 14:17सकोगे। इतना प्यारा बच्चा राम जैसा
- 14:23आज्ञाकारी रघोकुलभूषण संत हृदय। गिरवा वस्त्र पहनने की जरूरत नहीं
- 14:34है संत होने की। हृदय को गेरुआ करता।
- 14:38हूँ। वस्त्र कोई भी लपेटे रहो, वो तो
- 14:42शरीर के। हैं।
- 14:45हृदय तुम्हारा है, ये भावनाएँ तुम्हारी है।
- 14:56क्या बीतेगी तुम पर लेकिन राम हैं कि ज़रा भी शिकन नहीं आती।
- 15:01वर्ण प्रसन्नता होती ओह हो हो भाग्य मेरे संतों के दर्शन।
- 15:12करने की विराज। एक मुद से तमन्ना थी तुम्हें छूने
- 15:23के। इनके दर्शन करने की तमन्ना एक
- 15:27मुद। से थी।
- 15:29कैसे होंगे ये लोग कभी? जाना पाए।
- 15:35बड़ा वक्त दिया महत्त्व ने मैं तुम्हारा आभारी रहूंगा।
- 15:40मैं कृत्य कृत्य भय हो जाता क्या हुआ?
- 15:54जीस दिन तुम उस दशा में आ जाओ उस दिन।
- 15:56राम शब्द का उच्चारण करने की चेष्टा करना सत्य।
- 16:09रामायण बनाने वाले परिवार। तुम चले गए।
- 16:13प्रकाश, मैं तुम्हारे वक्त में होता।
- 16:15है और। तुम्हें मैं बताता कि सच्ची।
- 16:18रामायण है क्या? तुम चले गए तुम्हारी खबरों को हो
- 16:21तुम। येस हराम?
- 16:33इसलिए हमने पक्षियों ने। मर्यादा पुरुष उत्तम 10 पुरुषों
- 16:40में श्रेष्ठ है। दो बच्चे पैदा करो, क्योंकि
- 16:49मनुष्य का शरीर सभी। प्रकार की।
- 16:54आंतरिक प्रणालियाँ से भरा पड़ा। है।
- 16:58इसमें सामर्थ्य। है।
- 17:01एनलाइटनमेंट की उस परम सीमा को छूने की, जो आचार्यों की दृष्टि
- 17:05में होती है, इसलिए मैं। तुमसे कहता हूँ इन आचार्यों के
- 17:09पास मत। जाना यह तुम्हें खत्म कर।
- 17:11देंगे। तुम्हारी इंटेलेक्चुअलिटी।
- 17:15छीन लेंगे तुम्हारे भीतर का। चैतन्य में खेलने का स्वपन
- 17:22धराशायी कर देंगे ये लोग? पुषक के शादी करने की आवश्यक है
- 17:29शादी की बात प्यार है। मैंने शादी कर लू आवश्यक नहीं।
- 17:42फिर बाबा। तुम कहना क्या चाहते हो?
- 17:45मैंने तो पुत्री बच्चे पे समझ नहीं आया।
- 17:53अरे पुत्री शादी सामाजिक बंधन है एंड थिस शुड बी चेंज्ड जब बदलता
- 18:04रहना चाहिए। समाज बदलता है तो समाज।
- 18:08के नियम कायदे कानून भी बदल लेने चाहिए।
- 18:12इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मानव क्षेत्र में कोई क्या फर्क
- 18:15पड़ेगा? चेतना चेतना?
- 18:19भोग जो अप्रभावी रह जाती। है।
- 18:24सभी प्रकार के। अब एकों से जो।
- 18:36एक प्रभावित रहती है वो है चेतना तो पुत्री।
- 18:42शादी करना कोई आवश्यक नहीं। दो बच्चे पैदा करो ब्रह्मकुमारी।
- 18:46हो जाओ। दो बच्चे पैदा करो, सादगी हो जाओ
- 18:53अनीता परमात्मा के दरबार में जब तुम।
- 18:55जाओगी ना तो परमात्मा तुमसे। पूछेगा क्यों गई थी नीचे मैंने
- 19:00क्यों भेजी? तुम क्या मुँह तो खाओगे?
- 19:08क्या बोलोगे? ऐसे ही लोगों से परमात्मा।
- 19:15क्षमा करना मुझे ये यंत्र छीन लेता है फिर तुम तालियां बजाते
- 19:29हो। क्योंकि अगर इसका उपयोग नहीं करना
- 19:36था तो मैंने दिया क्यों मैं उल्लू का बेटा हूँ क्या?
- 19:42मैं बोल रहा हूँ अगर इसका। उपयोग नहीं करना था चलो।
- 19:48ठीक। आगे से नहीं, इसका दुरूपयोग।
- 19:54भी मत करो एक्सेस ऑफ एवरीथिंग इज़ बैड लेकिन इसका।
- 20:00सदुपयोग करो, पहचानो ये ईश्वर ने हमें दिया था।
- 20:08यही बताने के लिए। जगह जगह पे कोई मंदिर।
- 20:11हो कुछ हो शिवलिंग जरूर। होगा वो मैंने तो सुना है की
- 20:21मक्का के भीतर भी यही शिवलिंग है जो ढक दिया गया है।
- 20:25मुझे पता नहीं। अगर है तो बड़ा शुभ है क्योंकि ये
- 20:32सन्देश मानव मात्र के लिए है। कपुत्री साध्वी होना मन और शरीर
- 20:40मैं नहीं हूँ ये जानना है ध्यान से समझे ना बात को।
- 20:45साध्वी होना, सिद्ध होने की तरफ। एक कदम है पहला।
- 20:50कदम है। प्रथम पड़ाव टू नो दाय।
- 20:53सेल्फ मैं शरीर नहीं मैं मानु। लेकिन योणी का मिलना लिंग का
- 20:59मिलना। यह एक शारीरिक क्रिया।
- 21:05यह तुम्हारा कर्तव्य है। मुझे कल कोई ओशो का वचन सुना रहा
- 21:11था मैंने। कहा इस मूर्ख की बातों।
- 21:14को मत सुना करो, मैं तो ओशो का भक्त हूँ।
- 21:20मैंने कहा तू छोड़ दो ना भक्ति इसकी।
- 21:23जो ऐसी ऐसी बातें। करता है नाइट्रस ऑक्साइड को।
- 21:27सूंघ कर लाफिंग गैस को? लाफिंग की बात करता है।
- 21:35बोल रहे थे ओशो, एनलाइटन थे बेटा, शक।
- 21:40एनलाइट तो कृष्णमूर्ति विध्य है, लेकिन मूर्ख का इनका इंतजाम।
- 21:48क्या है? एक को तीन बार।
- 21:53गर्भवती किया और तीन बार अवार्ड करवाया।
- 21:58देखिये एनलाइटन हूँ ना? और समझदार होना ये दो बातें
- 22:05एनलाइटन होने में तुम ये समझती हो, तुम जानते हो?
- 22:09नो दाई सर, तुम हो कौन वास्तव में?
- 22:12और समझदार होने का मतलब ये है कि तुम इस शरीर।
- 22:17के कर्तव्यों को भी जान। लो।
- 22:22क्योंकि कृष्ण ने भी कहा, महामानव क्यों मानते?
- 22:27हम कृष्ण को 16 के लिए अवतारण क्यों मानते हैं?
- 22:30पूर्ण अवतार क्यों मानते हैं? शायद ही कोई बात छोड़ी हो।
- 22:35कृष्ण ने जो न बताई। कुछ अपने कृत्यों से बता।
- 22:41दिया। कुछ अपने शब्दों से बता दिया कुछ
- 22:43भाव भिकों से बता दिया, कुछ करके दिखा दिया लेकिन आदमी।
- 22:49के सम्पूर्ण जीवन जीने की। कला वो समझा गए।
- 22:54इसलिए कृष्ण पूर्ण उतार रहे। हैं।
- 22:58अब ध्यान। से समझ लेना तुम, मनीष।
- 23:00तुम्हारा सवाल है, सत्यो को जीस दिन, तुम?
- 23:06कानूनों में बदलना। शुरू कर दोगे?
- 23:08उस दिन सत्यो को चूक। जाओगे?
- 23:15शक्ति को जीस दिन तुम नियमों में बदल दोगे।
- 23:18उस दिन सत्य को चूक जाओगे। कैसे भगवान कृष्ण के जीवन से सबक
- 23:36मैं तुम्हें कहता हूँ। शादी करो ना करो।
- 23:44यह सामाजिक प्रक्रिया है, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 23:51अगर तुम्हारे दिमाग में हो जाता है।
- 23:58तो मत करो, बंधन बनता है तो शादी मत करो मैं बात बच्चों की कर रहा
- 24:04हूँ तुम्हारी सामाजिक ताणी। वाणी की तो मैंने बात ही नहीं की,
- 24:09वो तो आएँगे जाएंगे, बदलते रहेंगे, आज एक है कल अनेक होंगे।
- 24:16कल दूसरा होगा बरसों तीसरा होगा नर्सों चौथा होगा।
- 24:22इन बंधनों की बात। नहीं करता मैं?
- 24:24इन नियमों की बात नहीं। करता मैं।
- 24:26लेकिन जब इन नियमों को सत्यों में डाल दिया जाता।
- 24:29है तो मुश्किल करी होती है। तुम इन नियमों को ही सत्य समझने
- 24:34लगते हो। तब तुम मूर्ख कहलाते हो, तुम कहते
- 24:42हो बस यही सत्य है नहीं शरीर का अनुपालन करना अलग।
- 24:49बात है चेतना की यात्रा पर निकल जाना।
- 24:53अलग बात है। तुम साध्वी होने चली हो पुत्री तो
- 24:59यह तुम्हारी एक आत्मा। की यात्रा है।
- 25:04इसके लिए शरीर का कोई। संबंध नहीं है।
- 25:10और जो मनी लोग? ऐसा कहते हैं।
- 25:13कि शरीर वह प्रधान। है बस।
- 25:16उन्होंने जाना नहीं ये समझ लेना अनीता जिसने जाना उसने तो हर रानी
- 25:24के 10:00 बजे पैदा। किया है।
- 25:2716,108। रनियां।
- 25:32समाज की दृष्टि से वैलिड इनवालिड और प्रत्येक 10 स्वच्छ।
- 25:38रुक्मणी के 11 बच्चे चारोमती एक लड़की भी थी।
- 25:45खैर ये प्रश्न पूछने योग्य नहीं। इन सभी के पुत्र ही।
- 25:57पुत्र क्यों नहीं सबसे बड़े पांडव?
- 26:07युधिष्ठिर ने तो शराब पी दिया बच्चियों को?
- 26:11काश वह कृष्ण? के पास चला जाता कृष्ण?
- 26:14को इस चीज़ का। पता है।
- 26:17यह एक प्रणाली है जिनके पुत्र ही होती हों।
- 26:23पुत्र को पैदा करने की एक प्रणाली है, वह कृष्ण जानते हैं।
- 26:33और किसी धीरे से एक बेटी को उत्पन्न कर।
- 26:37लेता है बेटी एक ही बहुत है चारुमती बच्चे सभी रानी के 1010
- 26:49बेटे सभी के। और जाम बनती का ये।
- 26:53स्थान बड़ा सुन्दर था। विनाश का कारण बना तो यह ढंग।
- 27:09के पुत्र ही कैसे प्राप्त। हो।
- 27:11देखिये यह बात बताने योग्य। यह एक नियम है, एक हिसाब किताब है
- 27:21गणना है, तो मैं इतना समझाता हूँ कुछ लोगों को मैंने बताई, लेकिन
- 27:27कुछ चीज़ मैंने। छुपाई।
- 27:31क्योंकि अगर। मूड हमको पूरी चीज़ बता दी जाएगी।
- 27:35तो उसका दुरूपयोग हो जायेगा। तो कुछ हमने नहीं छुपाया।
- 27:41और कुछ मैंने बताया तो साथ। ही मुझसे पूछने लगे।
- 27:47बाबा ये तो समझा दिया। आज ये भी।
- 27:52समझाया कि देवता गण मनुष्य। शरीर को पाने के लिए क्यों
- 27:58तड़पते? हैं।
- 28:01आपकी बात सबसे बड़ा स्पष्ट समझ में आ।
- 28:03गया क्योंकि यही है एक यंत्र। जो तुम्हें चेतना की परम उचाई तक
- 28:11नहीं जा सकता। रथ नहीं उड़ सकता, कार नहीं उड़
- 28:16सकती। हाथी घोड़े ये उड़ नहीं सकते,
- 28:22लेकिन। जहाज उड़ सकता है आदमी का शरीर
- 28:27मनुष्य का शरीर। इस स्त्री का श्री एक।
- 28:30जहाज की तरह है। वो परम ऊंचाइयों को छू सकता।
- 28:33है। और अगर तुम नहीं करोगे।
- 28:44तुम सभी बीके हो जाओगे, तुम सभी। जैन मुनि हो जाओगे तो ध्यान रखना,
- 28:50यहाँ सेंटीपीड कान खजूरे। सांप बिच्छू हैं हाथी, घोड़े,
- 29:01अरबी, घोड़े अस्थि का। इनकी भरमार नजर आएगी।
- 29:1784,00,000 योनियां हैं हैं तो ज्यादा काउंट नहीं की गई।
- 29:25बालू, मगरमच्छ, हाँ। कितनी योनियां हैं, कछुआ है, मछली
- 29:40है, भालू है, बघेरा है, बाग है। शेर है चीता है।
- 29:55कितनी योनियां है इनका शरीर पाने के लिए देवता?
- 30:01का लाला इतनी होती है? पशु मनुष्य का शरीर चाहिए और।
- 30:10इतनी आत्माएं आज भटक रही है। और प्रकृति लाचन यहाँ।
- 30:17दोनों तरफ से रजामंदी होनी चाहिए। जो शरीर पाना चाहता है उसमें
- 30:23गुणवत्ता होनी चाहिए और जो गर्भधारण करनी चाहती है उसमें
- 30:28क्षमता होनी चाहिए। कैपेसिटी ये दोनों चीजों का मिलान
- 30:34जब प्रकृति देखती है तो भीड़ बढ़ा देती है।
- 30:39ये भटकती हुई जो रोज़ मेरे प्रवचन को सुनती है बड़े ध्यान।
- 30:45से। तुम्हारी तरह ये भी इंतजार।
- 30:48करते है कल सुबह 5:05। ये भी मुझे प्रत्यक्ष सुनते।
- 30:59हैं और तुम तो थोड़ी सी संख्या में हो।
- 31:05यह तो करोड़ों की संख्या ये लाल। इस।
- 31:12परम चेतन तक पहुंचने का। यह रथ कैसे मिल जाए?
- 31:18तुमने सुना तो बहुत बार होगा कि माइनस का शरीर बड़ा मुश्किल है।
- 31:31देव दुर्लभ है, देवता तरसते। हैं उसका कारण।
- 31:36नहीं किसी ने बताया। होगा तो पुत्र मैं बता देता हूँ
- 31:40पूछ लूँ मेरे जाने से पहले असम्भव।
- 31:43प्रश्न जोतों में लगते हैं। जो तुम्हारे शास्त्रों में एक
- 31:47सिम्बोलिक रीप्रिजेंटेशन की तरह बोले हुए हैं और उनके तुम्हें
- 31:52कारण पर विस्तार नहीं बताएंगे। क्यों हैं और रहस्यम से जान लो
- 31:58क्योंकि मैं रहस्य में उतरा हुआ व्यक्ति हूँ।
- 32:03उनकी गहराई वहीं तक रहती होगी जहाँ तक वो बोल।
- 32:06पाती हैं। लेकिन यहाँ अटल गहराइयां प्रेम।
- 32:14की कुछ भी पूछ लो मुझसे। जो रहस्यमयी है।
- 32:23जहाँ तक बोला जा सकता है मैं वो बोलने को तैयार।
- 32:29हूँ पूछो नजर से अच्छा किया। आजकल लोग प्रज्ञाभान लोग ऐसे ऐसे
- 32:34मुश्किल प्रश्न पूछते हैं। पूछने भी चाहिए मुझसे न?
- 32:38पूछोगे, मेरी कब्रों से पूछोगे। अभी जनता।
- 32:46अभी चल रहा है सारा ढांचा। अभी पूछ लो बाद में पश्ताऊ कहे।
- 32:56ये क्वेश्चन मुझसे ही पूछने के योग्य।
- 32:58था। ठीक किया।
- 33:00पुत्र जगदीश तुमने पूछ लिया, ऐन वक्त पर पूछ लिया?
- 33:04बहुत सी गुत्थियां खोलेंगी, गांठें खोलेंगी और गोल गांठें
- 33:09खोलेंगी, जिनको दांतों से भी नहीं खोला जा।
- 33:14सकता। मैंने कपूतर शादी करो या न?
- 33:24करो एक बड़ी प्यारी प्रथा तुम्हें बता देता हूँ जयन धर्म उसका अर्थ।
- 33:34तुम कोई भी नहीं। समझ पाए।
- 33:37यद्यपि जिन्होंने बनाई वो वाक्य ही महामुनी।
- 33:40थे, मन के पार थे वो व्यक्ति जिसे साध्वी बनना होता है।
- 33:50उसको पहले दुल्हन की तरह। सजाया जाता है कभी देखा?
- 33:55देखना। आज कोई चला है उस।
- 33:59परम उचाई को पाने के। लिए आज कोई चला है।
- 34:05उस परम कौंश तक। पहुंचने के लिए आज किसी ने उडारी
- 34:12मारनी है वायुयान पर। बैठकर?
- 34:15आसमान की उन ऊंचाइयों तक पहुंचना है दूर दिगंत तक उस चेतना को छूना
- 34:22है। आज उस मुकाम।
- 34:24पर चला उस यात्रा पर। चला।
- 34:27इसलिए। स्त्रियों को सजाया जाता है
- 34:29दुल्हन की तरह इसका अर्थ। तुम जान नहीं पाए।
- 34:35तुम सदा ही सत्यो को नियमों। में डाल लेते हो यही?
- 34:41तुम्हारी कमजोरी है तुमने पूछने की।
- 34:43कभी कोशिश? नहीं की क्यों, क्योंकि तुम सब।
- 34:46जानते हो यह शर्म? क्या मैं सब जानता हूँ अगर मैं
- 34:56पूछने लग गया हालांकि तुम पूछते हो बहुत से जैन बहुत से बी के
- 35:02बहुत से इन धर्मों के कथावाचक मुझसे गुपचुप तरीके से पूछ लेते
- 35:08हैं। बाबा इसका हल बता दो।
- 35:10हम छा जाएंगे। मैंने कहा तुम छाओ।
- 35:13हम तो छाना ही नहीं चाहते, हम तो छा गए उसी दिन।
- 35:19छा गए जीस दिन खुद को जाना, खुद का फैलाव जाना उस दिन सभी
- 35:29थोपनाएं। मिट गई।
- 35:31सभी संस्कार झड़ गए, नर जरा हो गए।
- 35:40साध्वी बनाने से पहले जुलूस निकाला जाता है।
- 35:44नाचते हैं गाते हैं दुल्हन। के वेश में सजाया जाता है लड़की
- 35:49को। गाना बजाना होता है, बिल्कुल वही
- 35:53जो शादी के वक्त होना होता है। लेकिन बस एक क्रिया अधूरी।
- 35:57रह जाती है यहाँ तुम। झुक गए।
- 36:03आधा काम तुमने किया आधा छुप के प्रकृति, दूसरा भी चाहती है तुम
- 36:08दो बच्चों को जन्म दो। फिर तुम।
- 36:10ऐसे ही सजो उसकी दुल्हन। उसकी दुल्हन बन के निकल जाओ।
- 36:31वो यात्रा बड़ी अनोठी है मीठी है रसीली।
- 36:36है। बहते हैं वहाँ रस के।
- 36:42झरने। कोकलें मधुर कंठ से गाती।
- 36:49हैं और। कोई दुखड़ा वहाँ नजर नहीं।
- 36:54आता वहाँ सब कमाल ही कमाल है, वहाँ आनंद ही आनंद है फूलों की
- 37:05खुशबूएं हैं। वाजनाद अनेक अशंका केते वावनहारी।
- 37:14केते राग परिसों कैयों केते गावनहारी।
- 37:23कितने वाद्य यंत्र हैं, कितने गाने वाले हैं, कितने बजाने वाले
- 37:28हैं? चारों तरफ महकई तो वातावरण है, बस
- 37:36अब आगे की यात्रा शुरू करनी है। पहले परमात्मा भी गाता है।
- 37:44वाज्यनाद अनेक असंका। वहाँ अनेक नाद बज रहे हैं।
- 37:49जैसे तुम्हें सजाया जाता। है।
- 37:51ढोल नगाड़े बजाये जाते। हैं।
- 37:53असल में भी होता है। लेकिन ये तुम्हारे भीतर होता है
- 37:59बड़ी। शांति है, बड़ा आनंद है।
- 38:01यहाँ तो शोर शराबा। है।
- 38:07उस अनंत की यात्रा पर निकलने से पहले अपने सारे शोक पूरे कर लो।
- 38:16ये था मुख्य कारण तुम्हें समझाने का।
- 38:20अब तुम उसकी यात्रा पर। चले अब तक।
- 38:25तुमने जो गवाया गवाया। शक्ति बिखरी बिखेरी तुमने अपने ही
- 38:31बच्चे। नाली में बहा दिया।
- 38:33देखते हो आप? रात संभोग करते हो?
- 38:39उस वीरे को बाहर नाली? में फेंक देते हो?
- 38:42तुमने अपने ही बच्चों को मार दिया, तुमने कितना बात किया?
- 38:49ये बच्चे जीवंत रूप ले सकते थे, लेकिन तुमने मौका नहीं।
- 38:54दिया। फिर तुम पूछते हो बाबा हमने पाप
- 39:01क्या किया है? यही क्या?
- 39:07तुमने पुनी का किया ये? बताओ मैं वसु की यह सुन रहा था
- 39:14वर्ण में क्या कहें शब्दों। को कैसे तर्क की धार?
- 39:22दी जाती है। और ये जानते हैं अच्छी तरह से।
- 39:27फिलॉसफी की एमए है और फिलॉसफी की भी।
- 39:31ये जानते हैं कि तर्क दुधारू तलवार है, कोई और आएगा और तुम्हें
- 39:35काट? जायेगा।
- 39:38अच्छी तरह से जानते हैं। फिर भी तर्कों से सत्यओं की
- 39:42व्याख्या करने में नहीं चूकते। बस खुद को साबित करने के लिए।
- 39:52कि मैं सही हूँ कहाँ से ही हो भाई।
- 39:57व्याख्यान। तो तुम करते हो कबीर?
- 39:58का? जिसने खुद ने दो बच्चे पैदा की।
- 40:04व्याख्यान। तो करते हो एक ओंकार, सतनाम नानक,
- 40:08जिसने खुद ने तुम बात रमन की क्यों करते हो?
- 40:13लेकिन तुम्हारी बात के तर्क के ऊपर ये खरे उतरते हैं तो तुम
- 40:17उन्हें चुन लोगे। तुम्हें पता नहीं कल को कोई
- 40:21दूसरा, दूसरी। दार से तोड़ देगा तुम्हें?
- 40:25तो फिर कृष्ण का क्या होगा? तेरा क्या होगा?
- 40:28कर लिया? प्रत्येक 10 बच्चे उस वक्त वक्त
- 40:35की जरूरत थी। यदु।
- 40:38वंश बड़ा कम था और। कृष्ण?
- 40:43ने देखा यदुवंश तो बहुत कम मात्रा में।
- 40:46है। 10 बच्चे चाहिए प्रतेब को, फिर
- 40:50बात बनेगी वक्त वक्त। पे समझदार व्यक्ति, समाज को बदलते
- 40:56रहते हैं ये समझदारी के निशान। हैं।
- 41:02लेकिन जब संख्या इतनी महत्वपूर्ण और आरएसएस का प्रमुख कहे कि तुम
- 41:10तीन बच्चे पैदा करो और मुसलमान बच्चे पैदा ना करें, यह भेद की
- 41:16दृष्टि। होगी।
- 41:19मानव की संख्या अगर कम है तो बच्चे पैदा करो।
- 41:223,00,00,000। 10,00,00,000 2,00,00,000 मुख्य।
- 41:26प्रारूप है के दो बच्चे पैदा करो तो जनसंख्या में न कभी कमी आयेगी,
- 41:32न कभी बढ़ोतरी आयेगी तो हमारा फॉर्मूला भी आजमा।
- 41:38के देखो तातकाली की जरूरत। थी भगवान कृष्ण के वक्त।
- 41:46तातकाली की जरूरत को पूरी करने के लिए उन्हें कहा था स्वच्छ पर,
- 41:52लेकिन आज तो जनसंख्या विस्फोट से तो तुम पहले मरे।
- 41:55जा रहे हो? और मूर्ख लोग वक्तव्य दे रहे हैं
- 42:03कि तुम तीन बच्चे पैदा करो। लेकिन छोड़िए इन बातों को यह
- 42:13राजनीतिक व्यक्ति इनको राजनीति में रस आता है।
- 42:19रस वहाँ है नहीं बस यही। मूढ़ता के कारण ये छटपटाते।
- 42:25फिरते हैं। रस तो इसे आ गया, उसे आ गया।
- 42:34वह तो रस को भी और मस्त हो जायेगा।
- 42:38सुरत? कलारी भैमतवारी, सुरत कलारी
- 42:53भैमतवारी। मदवा पी गई बिना तो ले मन मस्त
- 43:07हुआ आज फिर क्यों बोल रहे? मन मस्त हुआ।
- 43:16फिर क्यों? वो बोले?
- 43:22राज़ करने वाले आनंद नहीं। ले सकते।
- 43:26उस रस का प्याला वही पिएगा जो अकेला हो जाएगा, जो बल की कामना
- 43:32करेगा। झोंड़ बनाएगा संस्थान, कड़े करेगा
- 43:41समूह, इकट्ठा करेगा वह चूक। जाएगा।
- 43:46इसलिए बाबा ने मुझे। कहा बोलने से पहले मत बनाना।
- 43:51यह निजी यात्रा है। प्रत्येक व्यक्ति ने खुदने तय
- 43:55करनी। है, जैसे मरना निजी यात्रा है।
- 43:58तुम किसी की जगह नहीं मर सकते, तुम किसी की तरह जगह जीवन भी नहीं
- 44:04ले। सकते जन्म भी तुम्हें स्वयं।
- 44:06ही लेना पड़ता है। मरना भी तुम्हें स्वयं ही।
- 44:09पड़ता है। ऐसे ही प्रबुद्ध हुई तुम्हें।
- 44:12स्वयं ही होना होता है पर स्वयं। होने के लिए अकेला होना।
- 44:15आवश्यक है। और अकेला होने के लिए कमीने का।
- 44:19त्यागना होगा कम्यून। में बैठे बैठे अगर कोई।
- 44:23व्यक्ति भी प्रबुद्ध हो जाए। तो मुझे दोष।
- 44:31देना तुमने कहना तुम जनता को बह के चले गए।
- 44:36जाना तो सभी ना होता। है।
- 44:40कम्यून में बैठे बैठे कभी कोई ना प्रबुध हुआ है ना हो सकता है।
- 44:46यह एक नियम है। इसको नियम की तरह बोल।
- 44:49देता हूँ। जो कमीन में बैठा वह नहीं
- 44:53पहुंचेगा। तुम कुछ भी किये?
- 44:55जाओ मैं सुन रहा था वो शो बोल रहे थे।
- 45:04रमन ने इसलिए शादी नहीं की। नानक का नाम नहीं लेते, कबीर का
- 45:12नाम नहीं लेते। मीरा ने तो शादी की।
- 45:18बच्चे नहीं पैदा हुए, भोजराज की मृत्यु हो गई अन्यथा मीरा बच्चे
- 45:24पैदा करते बच्चे शरीर में पैदा करने।
- 45:29मस्ती में उसकी चेतना है, ये फर्क समझलो बच्चे शरीर में पैदा करने
- 45:37है मस्ती में तुम्हारी चेतना है मस्ती में हुए हुए तुम बच्चे पैदा
- 45:42कर सकते हो हैरानी क्या मेरे लिए एक बहुत बड़ा?
- 45:48रिश्ता आया था। गुरुग्राम से सात।
- 45:52दुकानें हैं। पिताजी कहने लगे लड़की अच्छी
- 45:56ग्रैजुएशन? बहुत होता था।
- 45:59सुंदर है अकेली है ये सारा माल तुम्हारा है, पुत्र, तुम उसको
- 46:05भागे। तुम्हारी बोल तुम्हारी चाल,
- 46:10तुम्हारा रंग, तुम्हारा रूप तुम्हारे काम करने की।
- 46:12दक्षता प्रवीणता बोलने की सहजता उसे आ गई।
- 46:16वह। पंडित जी तो बैठ।
- 46:18गए दुकान पे मैंने लड़की। देखने मैंने लड़की देने तो आपके
- 46:24पुत्र को दे। मैं तो नहीं जाऊंगा, मर जाऊंगा।
- 46:32और घर से मैं आ रहा था, पिताजी घर को जा।
- 46:34रहे थे। हम गाँधी चौक में मिल गए।
- 46:36आज ही मुझे याद है पिताजी बोले गुस्से में थे।
- 46:47अरे कर्म। ठोक शादी कर ले हमारे जाने के बाद
- 46:51पछताएगा। हर माँ बाप सोचते हैं भले के लिए
- 46:54सोचते हैं। निस्संदेह, भले के लिए सोचते।
- 46:58हैं। पिताजी के शब्द मुझे।
- 47:02आज तक याद है, अरे कर्म। ठोक।
- 47:07बहुत पैसे वाला है मनेजमेंट जमा लेना बड़ा कारोबार।
- 47:12है। एक्सपोर्ट का।
- 47:17कुर्सी में बैठे बैठे राज़। करेगा।
- 47:22लड़की सुन्दर है, सुशील है। अच्छे घराने की है।
- 47:27और उसका बाप यहाँ। बैठा मेरे पैर पकड़ रहा है।
- 47:35जच गया उसे। तो मैं सहमत करो।
- 47:46मैंने कहा नहीं पिताजी, मैंने शादी नहीं करने से मैं एक बार कह
- 47:49दिया। मैं शादी करूँगा उस दिन।
- 47:52देखे करूँगा उस दिन करूँगा। जीस दिन मेरा गंतव्य लक्ष्य पूरा
- 47:58हो जाएगा ये तो हमारा गंतव्य लक्ष्य क्या है बेटे?
- 48:03जीस लिए। मैं भागा था घर से।
- 48:08वह मेरा गंतव्य लक्ष्य था, तो मैंने कहा, पिता।
- 48:14जी मैं तो नहीं करूँगा, मैं तब तक शादी नहीं करूँगा जब तक कि मैं
- 48:22अपना स्वयं निहारना लूँगा। मैं हीरा ना पालूंगा और गांठ में
- 48:29गटिया ना लूँगा, उस दिन शादी कर लूँगा और मैं अपनी बातों और
- 48:38रिहाजों पे उनके जाने के बाद खरा उतरा।
- 48:43जब पिताजी गए तब मैं हो चुका था। 85 में घटना घटती है।
- 48:4828 अक्टूबर को मेरे पिताजी 17 मार्च 87 को चले जाते हैं।
- 48:541900। 87।
- 49:02और मेरे ही यहाँ। पट के ऊपर उनका सिर है का सिर
- 49:07सहला रहा हूँ। और वह।
- 49:09हिचकी रहते हैं। उपरांत निकल।
- 49:11जाते हैं बस घर में हम तीन लोग हैं, माँ है, मैं हूँ, पिताजी
- 49:18मरते। हुए बड़ा भाई रजिस्ट्री के।
- 49:21लिए क्या हुआ है कुछ? लोगों ने भाई के नाम।
- 49:24रजिस्ट्री करवा दी थी। जैसे प्लॉट बेचते तो भाई जागरिह
- 49:28शीघ्रवाता ईमानदार लोग थे ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध थे।
- 49:36डीएनए था ईमानदारी। का?
- 49:39तो किसी ने पूरी लक्ष्मण कॉलोनी का कुछ हिस्सा बड़े भाई के नाम
- 49:43करवा दिया था। जैसे ही कोई प्लाट बेचता भाई जाके
- 49:48रजिस्ट्री करवाता कोई पैसा नहीं लेता था।
- 49:53बस सिर्फ ईमानदारी उसको विश्वास था, ईमानदारी, हमारी रग, रग।
- 50:03में है, डीएनए में है। मेरे पड़दाता ने किसी से कुछ
- 50:10रुपये ले। लिए थे आत्मा ढंग की तो मुझे
- 50:14आँखें चुकाने हुए इसे ही पितृ ऋण। कहते बच्चे शरीर में पैदा करना
- 50:27है। चेतना की यात्रा तुम्हारी यात्रा
- 50:29है। चेतना की उचाई तुमने तय?
- 50:33करनी है। तुम जहाज पर बैठे बैठे चेतना की
- 50:39ऊंचाइयों तक उठते रहे और बच्चे पैदा कर रहे हो, जहाज में बैठे
- 50:42बैठे क्या फर्क पड़ेगा? बस ऐसी ही यात्रा है तो मैंने
- 50:49साध्वी से कहा बैठी अब तुम साध्वी।
- 50:51बनने से पहले मेरे। पास आ ही गई है तो अर्थ।
- 50:57तो ये होता है करो तुम अपनी मर्जी, मैं बाध्य।
- 51:01नहीं किसी को करता। तुम्हारे जीवन में हस्तक्षेप।
- 51:04करना मेरा अधिकार न। करो तुम अपनी मर्जी समझा तुम्हे
- 51:09देता हूँ मतलब। क्या है?
- 51:11लेकिन वह व्यक्ति वह? स्त्री साध्वी नहीं बनी उसने।
- 51:16कहा बाबा। आपने तो हमारी गांठें।
- 51:18खोंप दी। फिर हमने ऐसी व्यवस्था में क्यों
- 51:24जाना? जो हमें मूड़ता की तरफ।
- 51:28धकेलता है। वह साथ भी नहीं बनी और वह बहुत
- 51:35अच्छे चेतना के मुकाम पे है। शिवलिंग का।
- 51:46जो संकेत बनाया चिन्ह बनाया प्रतीकात्मक चिन्ह।
- 51:51यह योणी और लिंग क्यों बनाया इसलिए?
- 51:54बनाया। यह आवश्यक है, भाई।
- 51:59नहीं तो यह सांप बगरे। बिच्छू बाग शेर फिरेंगे।
- 52:04सरकते सेंटीपीड, कान, खजूर, मक्खियां मच्छर सब हो गए।
- 52:15ज़िन्दगी के मेरे नहीं। हो गए।
- 52:23ये ज़िन्दगी के मेले। ये ज़िन्दगी के मेले दुनिया।
- 52:31में कम न होंगे। अफसोस हम न होंगे।
- 52:37अफसोस। हम न होंगे अफसोस।
- 52:41मानव प्रजाति न होती। जो चेतना की चरम ऊंचाइयों को छू
- 52:46सकती है सकती है। मैं कहता।
- 52:48हूँ और। कान खजूरे में, साँप में।
- 52:52बाघ बघेरों में। ये चेतना की ये शरीर ही नहीं
- 52:56होता, ढांचा ही। नहीं दिया होता भगवान।
- 53:01न जाने कब से चली थी। चेतना कब?
- 53:07से प्रकृति ने आशा लगाई। थी हजारों साल।
- 53:16नरग सप्नि बेनूरी पे रोती है। बड़ी मुश्किल से होता है।
- 53:21चमन में दी लवर पैदा बड़ी मुश्किल से मानस जन्म उपलब्ध होता है और
- 53:30तुमने? उसे ऐसा रोल दिया कोई राजनीति में
- 53:33घुस गया? कोई शिक्षा।
- 53:36देने लग गया बिना जाने। कोई सर बन गया, कोई आचार्य।
- 53:40बन गया जीवन की परम। ऊंचाइयों को छूना।
- 53:45किसी ने ठीक ही नहीं समझा। जीस शरीर।
- 53:50के। द्वारा ये काम तो पशु भी कर।
- 53:55लेते हैं जो तुम कर रहे हो। ये जखई तो एआई।
- 54:00भी बहुत मार देगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पूछो,
- 54:04जो आचार्य लोग बोल रहे। हैं।
- 54:07और कल को और थोड़ा सा उन्नत हुआ तो आचार्यों को घर बैठना।
- 54:11पड़ेगा ये सर। लोगों को घर बैठना पड़ेगा।
- 54:16यह बात सिर्फ राजनीति। करेंगे फिर क्योंकि।
- 54:19दूसरा मरहला इन्हें पता नहीं ईशणा जगी नहीं मुक्ति की वो तो होता ही
- 54:26नहीं पर जाना क्यों है? इसलिए मैं कहता हूँ।
- 54:30आप गँवाए। अगर तुम कहोगे।
- 54:34परमात्मा नहीं है तो तुम्हारे। द्वार बंद।
- 54:36होंगे। तुमने मान लिया परमात्मा नहीं।
- 54:39है बिना जाने बिना खंगाले। मार्क से कभी भी पहुँच।
- 54:44पाएंगे इस जन्म में मुश्किल? है क्योंकि उन्होंने मान लिया कि
- 54:49परमात्मा होता ही है। प्रकृति के नियमों को।
- 54:54कभी चरवाक मान पायेगा वह। चोर लूटेरा डाकू, अधेरगर्दी करने
- 55:01वाला, बलात्कारी बन। सकता है।
- 55:02हथियारा बन। सकता है क्योंकि वह प्रकृति के
- 55:05नियमों को बांधते ही नहीं और उसे पता ही नहीं है।
- 55:09मैं संसार को क्या देके जा। रहा हूँ।
- 55:13ऋणम कृतवागृतम् पी वेध। यथा जी वेध सुखी जीवेध बस मैं
- 55:18भूतस्य देहस्य पुनर आगमनम को तह। अगर सभी लोग ऐसा करने लग जाए।
- 55:30तो चोर? लुटेरे डाकू हथियारे बलात्कारी।
- 55:33यही गुंडे यही होंगे इस धरती पर फिर कोई बुद्ध नहीं पैदा।
- 55:38होगा। क्योंकि तुमने मूलभूत नियम को
- 55:44छीन। लिया।
- 55:46जो प्रकृति। का है और परमात्मा का भी है तो
- 55:53अगर संतों ने मान्यता। दी कि यह उनकी करुणा।
- 56:02थी। संतो ने चारवा को भी मान्यता दी
- 56:07ऋषि कह के पुकारना के चलो विचार तो हैं काम तो कर रहे हैं विचार
- 56:17यह। भी चेतना का एक प्रारूप है
- 56:19न्यूनतम ही सही। आज न्यूनतम है कल को उचितम हो
- 56:23जायेगा। इसलिए ऋषियों ने इन्हें कहा यह
- 56:28ऋषि। है।
- 56:30फिर मार्क कस हुआ वो भी ऋषि हुआ। फिर आगे आगे चलते रहे।
- 56:35बड़े पंथ में दाए हुए। छह तरह के मार्ग बनाए गए खोजे गए
- 56:53चेतना की ऊँचाई के लिए खोजे गए तो यह जो बनाया था।
- 57:03प्रेजेंटेशन यह तुम्हारे गुप्तंगों का।
- 57:08था। और तुम उसके ऊपर।
- 57:11ठंडा पानी डालते हो उसका मतलब होता है इनको शांत रखना।
- 57:18इनसे सिर्फ तभी काम लेना जब इनकी आवश्यकता।
- 57:22होती। जैसे तुम जीवा से काम लेते हो जब
- 57:26किसी को। समझाना होता है अपना दुख, अपना
- 57:30दर्द, अपना ज्ञान, अपना सुख, जरूरत पर तुम प्रयोग करते हो
- 57:39जीवन। हाथों पांव को शरीर।
- 57:43के सभी अंगों का प्रयोग। करते हो?
- 57:46लेकिन तुम अपने गुप्त अंगों को जरूरत में नहीं।
- 57:48पूरा करते वासना के लिए। पूरा करते हो उत्तेजनों को पूरा
- 57:52करने के लिए करते हो क्योंकि यह एक सिर्फ यही एक अंग है।
- 57:58जो तुम्हें परमात्मा के गौरी शंकर का दूर से अनुभव।
- 58:01करा सकता है और यह सुंदरतम भी है और यह निकृष्टतम भी है।
- 58:11सुंदरतम। इसलिए कि तुम दूर से जरोखा देख
- 58:14सको। कि परमात्मा ऐसा होता है।
- 58:18लेकिन परमात्मा ऐसा ही नहीं। होता बस दूर से देख लिया तुमने
- 58:27लेकिन दूर से देखा क्वांटिटेटिव डिफरेंस आ।
- 58:32गया क्वालिटेटिव तो ठीक है। क्वालिटी तो बिल्कुल यही है तुमने
- 58:38चेतना को ही देखा, तुमने परमात्मा को ही निहारा।
- 58:42उस शिक्षण में। इसलिए तो सबसे।
- 58:44ज्यादा आकर्षण अंतरण कक्षणों का है।
- 58:50लोग फांसी पर लटक लेते हैं। तुम कितना ही कानून बना लो।
- 58:58लेकिन इन क्षण को उपलब्ध होने के लिए बलात्कारी कहीं भी पकड़ लेगा।
- 59:03स्त्री? को क्यूँ?
- 59:12स्त्री। भी उन क्षणों में जाना।
- 59:14चाहती है। दोष नहीं है किसी का ये सभावी
- 59:18प्रक्रिया। है।
- 59:21तो शिवलिंग का ये जो। आकृति बनाई गई।
- 59:26तुम्हें बताने के लिए। थी।
- 59:30संभोग करना पाप नहीं? लेकिन अति सर्वत्र वर्जित एक्सेस
- 59:39एवरीथिंग इज़ ये जो तुम अपनी। इस ऊर्जा को जो ओझ।
- 59:46में बदल सकती थी, उसको प्रवाहित कर देते हो।
- 59:49गंदे नालों में ये गलत। इसका दुरुपयोग मत करो, उपयोग करो।
- 1:00:00इससे वो मानव चेतना बन सकती। है।
- 1:00:07जो कि चेतना के परम। ऊंचाइयों।
- 1:00:09तक तुम्हें ले जा सकती है मानवता को बस।
- 1:00:14एक सिर्फ यही है तुम्हारी खून से बच्चा पैदा।
- 1:00:17नहीं हो सकता ध्यान रखना। किसी चीज़ से बच्चा नहीं पैदा हो।
- 1:00:21सकता। बच्चा पैदा करने के लिए।
- 1:00:26सिर्फ सपम और अर्रज अंडा। इसकी।
- 1:00:31जरूरत होती है और वो कहाँ से आएगा गुप्तंग से आएगा।
- 1:00:36इसीलिए परमात्मा ने इस स्थान के। ऊपर आपको बाल दे दिया।
- 1:00:40क्यों दे दिया? दो डिग्री कम चाहिए तापमान?
- 1:00:43यह है। 35 डिग्री के ऊपर सुंदर क्वालिटी
- 1:00:46का स्पम और राज़ पैदा। होगा।
- 1:00:51यह कानून की व्यवस्था है। प्रकृति जानें।
- 1:00:54लेकिन प्रकृति को जिन्होंने समझा वो बता रहे।
- 1:00:58हैं तुम्हें? यह बाल इसीलिए दिए गए।
- 1:01:05कि यहाँ। दो डिग्री कम तापमान चाहिए ठंडक
- 1:01:09इसलिए तुम पानी चढ़ाती हो। इसको ठंडा रखने के लिए।
- 1:01:14इसका तापमान कम बना रहे। तुमने देखा जब तुम्हारे बुखार
- 1:01:18ज्यादा हो। जाता है तो डॉक्टर क्या कहता है
- 1:01:22बर्फ़ की पट्टी करो। हालांकि नमोनिया होता है, लेकिन
- 1:01:26डॉक्टर। कहता है।
- 1:01:27बुखार को कम करो। बर्फ़ की पट्टियाँ करो अगर बिगड़
- 1:01:33गया तुम्हारा ये। सेरेपरल हेमिस फट जाएगा तो फिर
- 1:01:39तुम। कहीं पे न रहोगे।
- 1:01:42दिमाग को न चढ़ जाए यह बुखार। क्यों?
- 1:01:48क्योंकि इसको जरूरत है कम तापमान की।
- 1:01:51इसलिए परमात्मा ने सिर के ऊपर सबसे ज्यादा बाल दिया।
- 1:01:56सिर के ऊपर ज्यादा बालों की आवश्यकता थी इसका।
- 1:02:02शीतल होना आवश्यक है। इसलिए घने बाल दिए जीसको जीतने
- 1:02:08बालों की आवश्यकता। थी।
- 1:02:09उसको उतने लंबे बाल दिए। प्रकृति ज्यादा शमीदार है, इसकी
- 1:02:16उपेक्षा मत करना इसलिए सिख धर्म में कहा गया।
- 1:02:22तुम केशों को। कतल न करो केस जहाँ भी परमात्मा
- 1:02:27ने दिए हैं वहाँ से अगर तुम यू विल रिमूव युअर।
- 1:02:33हार्ट्स इट इस ए सेंड या पाप हैक। अगर तुम इनको।
- 1:02:38हटा देते हो तो। तुम प्राकृतिक व्यवस्था को
- 1:02:42तोड़ते। हो यह।
- 1:02:45प्रकृति समझाती है, करो। तुम अपनी मर्जी पुत्र, तुमने।
- 1:02:53अच्छा किया जगदीश, तुमने एक बहुत बड़े रहस्य से पर्दा।
- 1:02:59उठा दिया और ध्यान रखना। तुम मुझे यह नहीं कह सकते कि
- 1:03:04तुमने स्वता से ज्ञान को नहीं दिया, नहीं।
- 1:03:07जस्टिस साइलेंट लीक। मुझमें तो कंकड़ फेंकना ही
- 1:03:14पड़ेगा। मौन झील में अगर कंकड़ न फेंका तो
- 1:03:19लहरें न उठेंगी। और यह जो परिणाम आये ये तुम्हारी
- 1:03:23कंकड़ को फेंकने के कारण जो लहरें उठीं वो प्रकट हो गईं।
- 1:03:27बाहर वही जवाब है। ये लहरें जब पूर्णतः प्रकट हो
- 1:03:32जाएंगी, मैं मौन हो जाऊंगा। यह तुम्हारे गुप्त अंगों की सु
- 1:03:44है। इसलिए भगवान शंकर का लिंग?
- 1:03:49और यौनी माँ पार्वती की। यह एक प्रतीकात्मक रूप से चिन्हित
- 1:03:57कर दी गई। क्योंकि भगवान।
- 1:04:00शंकर फर्स्ट एनलाइटन पर सुनता रहेगा और माँ पार्वती फर्स्ट
- 1:04:10एनलाइटन विमन पहेली जागृति स्त्री।
- 1:04:19पार्वती पहला जागृत आदमी शिव इसे आदि योगी।
- 1:04:26कहते हैं। जो शिव शंकर की बात।
- 1:04:29मैंने कल, परसों नर्सों के पर्वचन में कही।
- 1:04:33उनसे अलग यह तीसरा शिव है, जिससे आदि योगी कहते हैं।
- 1:04:39जीस आदि योगी का वर्णन। सद्गुरु करते हैं।
- 1:04:42या उसी का वर्णन करते। हैं फर्स्ट एनलाइटन पर्सन ऑफ दी
- 1:04:54वर्ल्ड और फर्स्ट एनलाइटन वूमेन। और द अर्थ जब पार्वती।
- 1:05:02और इनकी गुप्तंगों की तस्वीरें सरेआम तुम्हें दिखाई जाती हैं
- 1:05:07इनको शांत। रखो।
- 1:05:09इनको शीतल। रखो उस पर जल चिड़ाओ।
- 1:05:12लेकिन तुम हो कि बस? कर्मकांडों का निर्वाहन कर रहे
- 1:05:19हो, इसका तथ्य तुम्हें पता नहीं और तुम भी क्या करो?
- 1:05:26जब किसी ने समझाया ही नहीं लो आज समझा दिया, अब से कर रहे हो, समझा
- 1:05:33तो बहुत बार चुका। लेकिन नहीं, तुम्हें समझाया तो अब
- 1:05:38समझ जाओ, अगर फिर भी कोई आशंका है तो मेरे बैठे बैठे फिर भी पूछ लो।
- 1:05:44मैं उपलब्ध हूँ तुम्हें ये खास। अगर बच्चे ना पैदा करो।
- 1:05:54तुम प्रकृति के गुनहगार। हो गए और।
- 1:05:57प्रकृति के गुनहगार हो गए तो तुम अगर किसी चीज़ को प्रकृति की दी
- 1:06:05हुई किसी चीज़। को गलत।
- 1:06:08इस्तेमाल करते हो परमात्मा? तब भी छीन लेता है।
- 1:06:13और अगर। सही इस्तेमाल नहीं करते ध्यान से
- 1:06:16समझ लेना मेरी। बात को।
- 1:06:18यह करीब करीब आखिरी। प्रश्न है, बात है मेरी अगर।
- 1:06:23तुम प्रकृति प्रदत्त किसी उपहार। को।
- 1:06:27ठीक से प्रयोग नहीं करते तो परमात्मा अगले जन्म में वो चीज़
- 1:06:31छीन लेगा। फिर मेरी जहाँ चाह रही थी।
- 1:06:40और अगर। किसी स्त्री जाती स्त्री को।
- 1:06:42स्वतंत्रता उसकी इच्छा के बगैर। तुम उससे।
- 1:06:47बलात्कार करोगे तो परमात्मा। अगले जन्म में तुम्हें मेरी।
- 1:06:51जान जा रही हो गई। मेरी जान जिला जलंतर।
- 1:06:55आ गई। सुन आगे चले अच्छा।
- 1:07:08इस्तेमाल करो। दिए है।
- 1:07:10भाई तुमने किस हिसाब से कान दिए हैं?
- 1:07:13अगर कान न हो तो तुम पीटते हो, हमें सुनाई नहीं पड़ता भगवान हमने
- 1:07:18किया है भाई इसलिए तो ये यंत्र छीन लिया तुमसे एक बाई ऊपर चली
- 1:07:26गई। गई तो इसलिए थे पुरस्कार मिलेगा।
- 1:07:34मोबाइल थी बी के की। भगवान।
- 1:07:38के पास और भी थे। अंग्रेज भी थे स्त्रियां फीमेल।
- 1:07:44तुमने क्या किया हमने पांच? बच्चे हमने हमने दो बच्चे आपने।
- 1:07:50मैंने एक बच्चा अच्छा और बी के तुमने मैंने कुछ मैं तो बी के हूँ
- 1:07:58अच्छा तो ऐसा करो तुम छीन लो उसको गुप्तंग और फेंक दो उसको निशा।
- 1:08:07करो मेरी जा जा रही। जोक है।
- 1:08:10मेरी जा जिला जलंदा। है।
- 1:08:16जीस चीज़ का दुरूपयोग करते हो, परमात्मा उस यंत्र को छीन लेता
- 1:08:20है। जीस चीज़ का सदुरूपयोग।
- 1:08:24करता है परमात्मा में फिर फिर से ये मया कराता रहता है।
- 1:08:28और जीस चीज़ का उपयोग ही नहीं करते।
- 1:08:30परमात्मा कहते इसे आवश्यकता ही नहीं मत दो आँखों का दुरुपयोग
- 1:08:38किया परमात्मा ने छीन लिया ये रामभद्राचार्य जैसे लोग।
- 1:08:44देखो फिर बाज नहीं आते इन्हें फिर महामंडलेश्वर की।
- 1:08:49उपाधि चाहिए। मैं परमात्मा इससे।
- 1:08:56बड़ा तो मैं दंड दे। भी कर सकता है।
- 1:09:01अब तो चुप हो जाओ। आँखें तो बंद है, जुबान को भी बंद
- 1:09:06कर लो, लेकिन नहीं करेंगे और अगले जन्म में परमात्मा।
- 1:09:12जुबान भी छीन लेगा ध्यान से रख। फिर गूंगे टू टू करते।
- 1:09:17फिरोगे मेरी बातों को। तथ्यात्मक ढंग से सुना।
- 1:09:26करो। अविशात्मक ढंग से न सुना।
- 1:09:29करो मेरी। बातों को तथ्यात्मक ढंग से।
- 1:09:34सुना करो अगर समझ में आता है। प्रतिक्रियात्मक रूप से मत छूना
- 1:09:42करो, कुछ समझना चाहती हो तो समझ लो अनीषा मैं किसी को भलाता।
- 1:09:49नहीं घर से पीले चावल। देख पूछा तुमने पुत्र जगदीश?
- 1:09:55और बहुत। से लोगों को भला।
- 1:09:57कर दिया। यह शास्त्रों में लिखा।
- 1:10:00था। पढ़ा मानव जीवन बड़ा दुर्लभ है
- 1:10:04मानव श्री बड़ा दुर्लभ है हजारों शाह।
- 1:10:08नरगिस अपनी बेनूरी पर। होती है।
- 1:10:12कभी कुछ बन गए, कभी मछली बन गए कभी।
- 1:10:16कुरम बन गए। कभी वराहा बन गए, कभी कुछ बन गए,
- 1:10:21कुछ बन गए, सेंट पीडी बन गए, साँप बन गए, निबरे बन गए।
- 1:10:28बाघ। बन गए, हिरण बन गए, क्या कुछ नहीं
- 1:10:30बने? बड़ी मुश्किल से होता है चमन में
- 1:10:36गीता बर पैदा। यह दीदावर।
- 1:10:39है। मनुष्य का यह जामा उसकी कृपा से
- 1:10:46मिलता है। और उससे बड़ी कृपा मानव शरीर पर
- 1:10:50ही होती है सिर्फ क्योंकि यह उसका पूर्ण पवित्र पूर्ण आविष्कार।
- 1:10:56है। यहाँ शरीर भी पूर्ण।
- 1:10:59हुआ और यहाँ। तुम चेतना भी पूर्ण कर।
- 1:11:01पाओगे? तुम्हें प्रत्येक अंग दिए गए।
- 1:11:06बंदर को भी ऊँगलियाँ। दी गई, लेकिन इस ढंग से नहीं
- 1:11:09मिले। मंदिर?
- 1:11:12को सभी अंग मिले वो ही लेकिन फिर भी बंदर बंदर।
- 1:11:19मंत्र का शुद्धतम प्रारूप मनुष्य मानव मनुष्य के ऊपर ही उसका रहम
- 1:11:35रास्ता है। प्रकृति तुमसे ज्यादा समझदार है।
- 1:11:44कर्मी आवय कपड़ा नदरी मोक्ष दवा है, परमात्मा की कृपा से ही ये
- 1:11:51मानव शरीर मिलता है। क्योंकि यह सम्पूर्ण यंत्र है
- 1:11:55इसमें और मोडिफिकेशन की जरूरत। नहीं है।
- 1:11:59कोई इम्प्रूवमेंट नहीं करनी है। अब तो तुम इस यंत्र को उगाड़।
- 1:12:03सकते हो? इन न्यूरॉन को तुम भर।
- 1:12:05सकते हो यह बिगड़ना है सर बन जाओ। राजनीतिक पीएम सीएम बन जाओ।
- 1:12:15इस यंत्र को बिगाड़ दोगे यह यंत्र मिला है किसी कारण से कर्मी आवय
- 1:12:22कपड़ा नदरी मुख्य द्वार अब उसकी नजर भी तुम ले लो, कैसे लोगे उसकी
- 1:12:30नजर? राजनीति के जंजाल से बाहर हो जाओ
- 1:12:34मैंने पिछले ही। प्रवचन में तुम्हें बताया था मुझे
- 1:12:37एक वृहद संदेश। दिया।
- 1:12:39पापा ने राजनीति नर्क का द्वार नर्क है द्वारक कुंभ भी भाग नर्क
- 1:12:46अगर किसी ने देखना हो तो दिल्ली चले जाओ।
- 1:12:50और सबसे बड़ी गद्दी पर बैठ जाओ। वो कुम्भी पाक नर्क जीता जागता
- 1:12:56कुम्भी पाक नर्क। प्रत्येक देश में अगर देखना
- 1:13:00ट्रम्प को देख लो ये बड़ा कुम्भी पाक नर्क है अपने आप को।
- 1:13:06कुछ भी समझते रहे। अपनी घरवाली को तो सभी बेगम कहते
- 1:13:10हैं लेकिन दूसरे जिसे बेगम। कहें वो ही संत उस रस को मधुर
- 1:13:19प्याले को पीता है। झोपड़ी में बैठा हुआ या जहाँ भी
- 1:13:23उसे। स्थान उपलब्ध हुआ वहाँ बैठकर
- 1:13:28पिएगा बड़े मज़े। से उसको तुम्हारी महल अटारिया ये
- 1:13:35नहीं चाहते। वे कहीं भी बैठ के उस रस को पी
- 1:13:41लेगा। और तुम तख्तों।
- 1:13:44पे बैठ के भी। उस रथ को एक जगह भी ना पी पाओगे,
- 1:13:50यही तुम्हारी दुर्भाग्यता है। अभागापन है इसलिए तुम्हें भगवान।