Latest / Baba ji Vijay Vats / 8 Sep 25 - संसार और अध्यात्म के लिए दो परम सूत्र! The Ultimate Sutra’s By Baba Ji Vijay Vats
Transcript
- 0:16सृष्टि, देहरादून से बाबा आपने ग्रंथ बोला बड़ा सुंदर ग्रंथ बोला
- 0:36संसार और परमात्मा में। कैसी जीव?
- 0:44दो रास्तों का सरलता से वर्णन करने का कष्ट कर मुद्दतों से यह
- 0:57समझा गया। कि संसार और परमात्मा दो हैं
- 1:07भिन्न हैं, बल्कि विरोधी मेरी बात को ध्यान से सुन लेना।
- 1:17कैसे जिए संसार में और कैसे जिए अध्यापन रास्ता एक है एक ही
- 1:34रास्ता मंजिल तक जाता है। आधा रास्ता संसार का और उससे आगे
- 1:42शुरू हो जाता है रास्ता परमात्मा का बिलकुल शॉर्ट में सरलता से
- 1:51समझाने की कोशिश करूँगा। संसार में कभी अकड़ मत दिखाना।
- 2:07अकड़ घरी के घरी रह जाएंगे जिनको झुकाओगे वो भी ना रहेंगे और तुम
- 2:19भी ना रहोगे। और जिनके सामने तुमने किसी को
- 2:24झुकाया, वो प्रत्यक्षदर्शी भी नहीं रहने का है।
- 2:30यह सब मच जाएगा। यह संसार की वास्तविकता है।
- 2:41तो संसार में जीए बस भाई तुमको मैं दो शब्द दे रहा हूँ, शायद आप
- 2:50फ्री इनको आप लिख लेना। हृदय पे लिख लेना, अंत के प्राणों
- 3:03पे लिख लेना, संसार सुंदरता से जिया जाएगा।
- 3:16शब्द आता है समझौता पकड़ मत करना, बैठ के सुलझा लेना।
- 3:30यहाँ किसी की अकड़ कभी चली नहीं, ना कोई रहा है।
- 3:35ना कोई रहेगा एक वही रहता है जो सदासिक था है और वही रहेगा।
- 3:49अच्छे दिन भी आएँगे, बुरे दिन भी आएँगे, मुसीबतें भी आएंगी।
- 3:59लेकिन एक शब्द याद रखना, समझौता समझौता सभी सूखों का मोल बीच का
- 4:13रास्ता पोज लेना। वो तुम स्वयं हो या तुम्हारा
- 4:20परिवार है या तुम्हारा समाज? यह तुम्हारा राज्य है या तुम्हारा
- 4:27देश है या संसार है या विश्व है, ब्राह्मण है, एक ही सूत्र काम
- 4:35करेगा संसार में समझौता है। जहाँ कहीं समस्या आ गई समझौतावादी
- 4:44रुखों को अपनाना तुम्हारी जिंदगी बड़ी सरल हो जाएगी, जो तुमने दावे
- 4:52कर रखे है। अकड़ के वश में हो के।
- 5:00आज ही चले जाना और उन दामों को वापस ले लेना, समझौता कर लेना
- 5:10यहाँ कुछ किसी के संगठन। और तुम पाओगे अगर तुमने समझौता कर
- 5:20लिया तो दुखों का मूल समाप्त हो गया।
- 5:26यह अकड़ ही दुखों का मूल थी, जिसके कारण तुम समझौता नहीं कर
- 5:33रहे थे। इस मेरे शब्द को।
- 5:38गांठ बांध लेना, हीरे की तरह और याद रखना।
- 5:46जब भी कोई अड़चन आए, उलझन आए, कष्ट आए प्लेस आए।
- 5:56वैर हो, प्रेम हो, कोई द्वंद् हो तो एक ही रुख संसार में काम
- 6:07करेगा, वह है समझौता समझौता करो बीच का रास्ता अपना लूँ।
- 6:16सर्वश्रेष्ठ उपाय है ज़िन्दगी बड़ी सरल हो जाएगी और तुम खिल
- 6:23जाओगे फूल के गृह यह संसार के भोगों को भोगते हुए जब वैराग्य
- 6:35में आ जाओ। तो यात्रा शुरू होती है।
- 6:41परमात्मक ईश्वर अल्लाह वायुवर्क गॉड वहाँ पर सूत्र काम करेगा
- 6:53स्वीकार? स्वीकार जब तुमने संसार का राह
- 7:03कवर कर लिया तो फिर परमात्मा का राह अभी तुमने तय करना है।
- 7:18वह कैसे तय होगा? सरलतम मार्ग है स्वीकार संसार
- 7:26समझौते से और ईश्वर स्वीकार्य जो भी कुछ होता है तुम्हारे जीवन
- 7:36में। उसको पूर्ण है, हृदय से स्वीकार
- 7:44कर लेना राजी है हम उसी में जीस में तेरी रजा है अपनी।
- 7:56तो यूँ भी वाह वाह है और यूँ भी वाह वाह है यह दूसरा है कच्चे
- 8:05कच्चे मत उतर जाना। अन्यथा फिर फिर इस पाठशाला में
- 8:13वापस आना पड़ेगा। पहले इस संसार को तय करना, यह
- 8:20मार्ग पक जाए। फिर परमात्मा का रास्ता शुरू कर
- 8:25बुद्ध की तरह बुद्ध भौंकते भौंकते पक गए तो उन्होंने छोड़ा नहीं।
- 8:33उनसे सिंहासन छूट गया। जब तुम्हारे हाथों से कंकड़ पत्थर
- 8:41ही नहीं हीरे मोती भी छूट जाएं तो शुरू होता है परमात्मा और
- 8:49परमात्मा की प्राप्ति होती है स्वीकार से।
- 8:55संसार को तय करना समझौते से कोई ऐसा द्वंद नहीं जो समझौता हल न कर
- 9:04सके। कोई ऐसी समस्या नहीं जो समझौता हल
- 9:09न कर सके। ध्यान रखना मैं दोनों पक्षों के
- 9:14लिए गया हूँ अहंकार झुकने को तैयार नहीं, थोड़ा तुम झुकना
- 9:21थोड़ा दूसरा जोके इसे ही समझौता करता है कुछ अपनी शर्तें, कुछ
- 9:27उसकी शर्तें बीच का रास्ता निकाल लेना।
- 9:32जीवन बड़ा सुगम हो जाएगा, जीवन का रास्ता बड़ा सरल हो जाएगा।
- 9:39आनंद और खुशी उल्लास तुम्हारे अंतरंग के प्राणों में छा जाएगी।
- 9:48उससे आके शुरू होता है परमात्मा का रास्ता।
- 9:56परमात्मा का रास्ता स्वीकार संसार का रास्ता तय करने के बाद स्वीकार
- 10:06भाव में आ जाना जो होता है होने दो।
- 10:16एनालिसिस सुना करो, ये अच्छा है या बुरा है, ये गलत हुआ या ठीक
- 10:21हुआ? तुम होते कौन हो?
- 10:24तुम्हारी ज़रा भी औकात नहीं है होने दो वह विराट जो करना चाहता
- 10:30है उसे करने दो या परमात्मा का रास्ता है।
- 10:35और इस स्वीकृति के भाव से इस स्वीकार भाव से तुम उस अनंत की
- 10:43यात्रा को तय कर लोगे जो तुम्हारी आखिरी यात्रा है।
- 10:50पहला संसार समझौता। और दूसरा परमात्मा स्वीकार भाव
- 10:57में आ जाना और तुम पाओगे स्वीकार भाव में आते ही तुम अपने भीतर
- 11:07उतरने लगे। अपनी ही निजता में उतरने लगे,
- 11:15अपनी ही खाँद में उतरने लगे, अपने होने में उतरने लगे, एग्ज़िस्टन्स
- 11:20में उतरने लगे। जैसे ही तुने स्वीकार किया जो
- 11:29होता है होने दे। अच्छा है बुरा है ऐसा एनालिसिस न
- 11:37करना, उसे बदलने की चेष्ठा न करना, उससे लड़ना झगड़ना मत, उसको
- 11:47सहज स्वीकार कर लेना। और सहज स्वीकार करके तुम उस मुकाम
- 11:55पे पहुँच जाओगे जहाँ जाकर सब व्याधियां समाप्त हो जाती हैं।
- 12:02रौब छूट जाते हैं, चिन्ताएँ मिट जाती हैं चिन्ह न ही मिट जाती
- 12:09हैं। फिर कुछ पाना शेष नहीं रहता।
- 12:14कुछ छोड़ना भी शेष नहीं रहता। फिर जो है वो है।
- 12:20ये दो मार्ग हैं आस्तिकों और नास्तिकों के बीच में।
- 12:29सदा ही झगड़ा रहा इन बातों का क्योंकि तुमने दो माने जबकि एक के
- 12:37दो छोर हैं। एक धागा शुरू होता है संसार से और
- 12:44वह खत्म होता है परमात्मा। यहाँ दूसरा कोई नहीं यहाँ अभेद्य
- 12:51है यहाँ अद्वैत है यहाँ एक है दूसरा है इसलिए बाबा ने कहा नहीं
- 13:04किस्से पैर करूँ, दूसरा कोई है? निर्पुं किसे भय मानु दूसरा है ही
- 13:15एकों का सतनाम करता भर वही करता है निरपुं निर्भय, अकाल मूरत
- 13:27अजुनी सैपम। गुरु प्रसाद अच्छा करता वही है,
- 13:38भोक्ता वही है तुम अपने आप को बीच में मत फंसाओ सत्य यही है के वो
- 13:48ही है वो ही करता वो ही भोगता। संसार और परमात्मा इन थोड़े से
- 13:59अलफजों में मैंने आपको समझा दिया ये रस रोग इसे हृदय में बसा लेना
- 14:05जब कोई तकलीफ हो, संसार में तो समझौता बनाना।
- 14:12जब कोई तकलीफ हो, अध्यात्म में तो स्वीकृति कर लेना स्वीकार का तो
- 14:18हमारी सभी उलझनें दूर हो जाएंगी। सुखों के लिए तो इनसे एक शब्द
- 14:32कहूंगा। जो सुख आप लाख साल तक भी नहीं
- 14:37भुगत पाएंगे पदार्थों से जो लाखों करोड़ों वर्षों तक तुम्हें नहीं
- 14:44मिलेगा। पदार्थों को भोग कर भी जन को नहीं
- 14:51मिलता, बुध को नहीं मिलता। कुछ विरय पुरुष हुए हैं जो समझ
- 14:57जाते हैं फिर वो रास्ता पलट देते हैं।
- 15:07नहीं मिला भूत को नहीं मिला जनक को।
- 15:12बहुत ही चले गए उस अज्ञात की खोज में और जनक चले गए अष्टावक की
- 15:19शर्म वह ऐसा रस का प्याला है जिसके ऊपर अधिकार सभी का है।
- 15:34तुम ना पियो। वो तुम्हारी मर्जी है, तो इन
- 15:43पाखंडी साधुओं से मैं कहूंगा इकट्ठा करके क्या करोगे?
- 15:50नेट एसेट्स को नेट व्रत को बढ़ाकर क्या करोगे?
- 15:54संत तो कुछ नहीं रहेगा। संघ जाएगा।
- 16:00तो अगर तुमने यही लम्हे जो द्रव्य को इकट्ठा करने में मान सम्मान को
- 16:09इकट्ठा करने में लोगों में अपना नाम प्रसिद्ध करने के लिए।
- 16:16जो तरकीबे तुमने की जो तरकीबे तुमने की सब बेकार हो जाएंगे आखिर
- 16:24में जाओगे पापों का गचरा साथ में बांध के लेके जाओगे।
- 16:34होश में आओ, जागो मैं तुम्हारे शिष्यों से नहीं कर रहा हूँ, मैं
- 16:43तुमसे कर रहा हूँ क्योंकि तुम तुम ही हो, मेरी माता कहा करती थी चोर
- 16:52को मत मारो। उसको मारो जो चोरों को जन्म देती
- 16:59है, चोरों की जननी को मारो, चोरों को मत मारो तो चोरों की जननी जनक
- 17:07है जी तो मैं इनसे कहता हूँ झूठे साधुओं से।
- 17:18महंगाई घनी है, तुम्हारे जरूरतें तो कुछ ज्यादा नहीं होती है।
- 17:28आदमी की देखो मैं थोड़े से पीसों में गुज़ारा कर लेता हूँ।
- 17:33मात्र तीन 300 ग्राम तू तीन बार लेता हूँ बस और मेरा कोई शौक नहीं
- 17:37है, लेकिन बात है, जरूरत पड़ती है तुम भागते हो, तुम दौड़ते हो, कोई
- 17:47जरूरतों के लिए नहीं दौड़ते। जरूरतें तो व्यक्ति की बहुत ही कम
- 17:51है। 14 वर्षों से मैं उठा हूँ और
- 17:57जरूरत कितनी है? आप देख लो तुम दौड़ते हो वासनाओं
- 18:06की पूर्ति के लिए, और वासना क्या है?
- 18:09वासना है कि तुम सूख जाती हो और तुम्हारा अंधापन ये है?
- 18:15कि सुख कहाँ से मिलेगा ये तुम्हें मालूम है?
- 18:21जिन से पूछा कि सुख कहाँ मिलेगा? वे अंधे थे, उन्होंने खुद सुख
- 18:26जाना नहीं। उन्होंने तुम्हें अलग अलग हथकंडे
- 18:32पकड़ा दिए ये लोग। ये मंत्र जपलो ये नाम जपलो ये
- 18:37रास्ता है इसको तय कर लो मिल जायेगा लेकिन होशियार यारचानी ये
- 18:43रास्ता ठगों का यहाँ ज़रा नजर सूखी तो माल दोस्तों को।
- 18:52तुम अपना सब कुछ माल पैसा नहीं करता।
- 18:55मैं माल तुम्हारा जो समय खराब हो जाता है, जिसने तुम्हारा वक्त लूट
- 19:01लिया, उसने तुम्हारा समग्र लूट लिया।
- 19:06तुम्हारा वक्त बड़ा चेंज किया है। मैंने कल के प्रवचन में भी बोला।
- 19:12के इसी पल में जो तुम जाया कर देते हो, इन संतो के दर्शन में एक
- 19:19संत तुम्हारे भीतर बैठा है जो तुम खुद ही हो काश तुमने ये वक्त उस
- 19:26संत के दर्शन में लगाया होता वह मुखी न होकर।
- 19:31अंतरमुखी हुए होते तो उस एक पल में जितना आनंद है तुम पी लोगे
- 19:44बाहर मुखी होकर संसार में तुम। करोड़ों अरबों खरबों वर्षों में
- 19:51उसका एक बूंद का मुकाबला नहीं होगा।
- 19:54जो सुख तुम बाहर से पाओगे तुलसी का एक वचन और मैं अपना प्रवचन।
- 20:06दात स्वर्ग अपवर्ग सुख धरीय तुला एक अंक राजू के दो परड़े होते है,
- 20:19एक परड़े में स्वर्ग और अपवर्ग के सारे सोकर।
- 20:26जीतने तुम बहार से एकमाते हो वो पदार्थों के हैं डिग्रीज़ के हैं
- 20:31ओह दो के हैं मान सम्मान के जिसमें भी तुम्हें सुख नजर आता है
- 20:39वो सारे सुख तुम एक वर्ल्ड में रख दो।
- 20:42तुलसी कहते हैं, तातस्वर्ग अप वर्ग सुख धर यह तुला एक अंग एक
- 20:51तराजू के परडे में और दूसरी तराजू के परडे में आनंद की वो बूंद।
- 21:01जीस तक पहुंचने के लिए संत तुम्हें करता है संत इतना बोलता
- 21:07है इतनी मेहनत करता है आपसे कोई पगार नहीं लेता, आपसे कुछ मांगता
- 21:15नहीं सिर्फ आपको राह दिखाने के लिए वह जानता है।
- 21:21मार्ग भटकाने वाले बहुत हैं, थोड़ी सी जुग्म की तरह रोशनाई कर
- 21:27देता है ये बात रख है कि उसकी रोशनाई तुम्हें दिखती नहीं, तू
- 21:36लगत ही सकल मिले जो सुकल्लव सत्संग।
- 21:42तुम झूठ का संग करते हो, झूठ बोलते हो, झूठ हैं, वायदे करते
- 21:46हो, कुंड में उलझे रहते हो, लेकिन तुलसी कहते हैं सत्संग में।
- 22:00वह सत्य जो तुम्हारे भीतर विद्यमान है, उसका संग एक अपल के
- 22:07लिए कर लो तुल नता ही सकल मिली जो सुख लव सत संग उस भीतर के सत्य
- 22:17में। उसके संग गुज़ारा हुआ एक पल एक
- 22:23क्षण इतना आनंदित कर जाएगा कि सारी सृष्टि के द्रव्यों से कमाया
- 22:34गया तुम्हारा आनंद जिसे तुम कहते हो।
- 22:38महा सुख बुफी के पास जाएंगे। उस लव सतसंग का जो भार है वो
- 22:47पलड़ा झुक जाएगा। तुम्हारे पदार्थों का पलड़ा ऊपर
- 22:52हो जाएगा। भारी पड़ेगा जो सुख लव सतसंग।
- 22:59जो सत्संग में तुम्हें एक पल उस सत्य को छू लिया, इतना मगन हो
- 23:08जाओगे तुम फिर उस मदहोशी के आलम में ना चिंता रहेंगी ना तो ना।
- 23:20ना पीड़ा रहेंगी ना अभाव, सब मिट जाएगा उस एक के पाने से द्वंद मिट
- 23:35जाएगा और तुम सदा के लिए सुखी हो जाओ।
- 23:44काश तुम्हारे भीतर उसकी लगन लग जाए।
- 23:51ऐसी लगी लगन। मेरा हो गई मगन हो तो गली गली हरी
- 24:12गुण गाने लगी। महलों में पुल बन के जोगन चल मेरा
- 24:30रानी। दीवाने खाने लगी ऐसी लगी लगन,
- 24:49मेरा हो गई मगन। ऐसी लगी लगन मेरा हो गई लगन छोड़ो
- 25:00इस लगन को संसार की लगन व्यर्थ है इससे जो भी कमाओगे कुछ नहीं
- 25:08मिलेगा लगन लगाओ। उस सत्य के संघ की तरफ जाने के
- 25:16लिए छोड़ो बेकार की बात पल पल बीता जाता है और पल पल बड़ा
- 25:31आनंदित है तुम इस आनंद से चोकर यही नुकसान।
- 25:48इन तथाकथित पाखंडियों को गुरुओं को जो खोज कुछ पाने के लिए बोलते
- 25:58हैं, छोड़ दो आज भरा पड़ा है। लेकिन मेरी एक बात को सुन ले तुम
- 26:14क्योंकि अंत में झाँक नहीं सकते, ये बोलते हैं निहेत स्वार्थों के
- 26:21कारणों को स्वार्थ चाहे कोई भी हो।
- 26:27किसी को कुछ भी चाहिए? यूट्यूब का सहारा ले लेता है, तुम
- 26:35इनकी फिक्र मत करो, ये क्या कहते है किसी शास्त्र की जरूरत नहीं
- 26:41भीतर जाने के लिए। बल्कि शास्त्रों को तो छोड़ना
- 26:47होता है शास्त्रों की चिपकाहट गुरुओं की चिपकाहट सब छोड़ देनी
- 26:54होती है और नॉन क्लिंगिंगनेस। कंप्लीट्ली नॉन क्लिंगनेस में आकर
- 27:04तुम अपने भीतर जाओगे, बाहर का सब छोड़ना पड़ेगा, बाहर का सब चिपका
- 27:11हाथ है, इस सब को छोड़ना पड़ेगा। समाज कुछ भी कहे।
- 27:19समाज कुछ भी कहे तुम्हें सुख मिलेगा संत तुम्हारी नकली कुछ भी
- 27:28कहे, असली तो यह नहीं कहेगा नकली संत तुम्हारी कुछ भी कहीं रोज़ नई
- 27:35नई राहें निकल रही हैं। और और भी नई नई राहें निकलती
- 27:40रहीं। शायद मेरी ये बातें इन शोरबुल में
- 27:47खोना जाए। इनको बचा के रख ये कुछ तो कहेंगे
- 27:58कुछ पुरानी, कुछ नई। कुछ हैं, कुछ आएँगे, कुछ चलेंगे
- 28:05कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना नहीं तो स्वार्थों के
- 28:11वशीभूत होकर अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए यद्यपि ध्यान रखना
- 28:18मैं फिर बोल रहा हूँ। इन स्वार्थों की पूर्ति से इनको
- 28:22भी कुछ नहीं मिलेगा। ये भी खाली खाली जाएंगे।
- 28:27बस आपका वक्त खराब कर देंगे। आपको गलत बहका के शब्दों को छलावा
- 28:34दिखा के सुंदर अल्फाज़ बोलकर तुमको।
- 28:40गलत राह पे डाल देंगे और तुम्हारा एक एक पल मैंने पहले कहा तू लेना
- 28:47दा ही सकल मिली जो सुकल लबुसा एक क्षण के लिए उसको पीतो लो।
- 28:59फिर तुम जहाँ चाहे चले जाना और बड़े मज़े की बात है, फिर तुम
- 29:02कहीं भी नहीं जा सकोगे। कुछ तो लोग कहें, लोगों का काम
- 29:09है, कहीं छोड़ो बेकार की बातें ये बेकार की बातें।
- 29:17कहीं बीत न जाए रहना या गोल्डन चांस कभी कभी मिलता है कोई कभी
- 29:29युगों युगों के बाद कोई एक व्यक्तित्व में जगाने वाला होता
- 29:32है। और उसकी पहचान उसके लक्षण मैंने
- 29:38आपको बहुत बार बताया, कोई विषय नहीं, कोई विकार नहीं, कोई विचार
- 29:46नहीं, निर्दोष खाली खाली आनंद में मस्त।
- 29:51रस को पीते हुए सजा आपको मिलेंगे या उनका लक्षण?
- 29:55कोई दौड़ नहीं, कोई भाग नहीं, कुछ पाना नहीं कुछ खोने का 1 कुछ तो
- 30:04लोग कहते है लोगों का काम है कहना।
- 30:12छोड़ो बेकार की बातें ये बेकार की बातें तुम्हारे कम ही आएँगे ना
- 30:17कोई पहुंचा ना कोई पहुंचेगा कहीं भी तो न जाए रहना बड़ा गोल्डन
- 30:25पीरियड। जो कुछ पल बचे हैं जीवंत गुरु के
- 30:35सांनिध्य में पता फिर रहना बीत जाए तो फिर पछताने का कोई लाभ
- 30:43नहीं होता। जो जो भीतर जाओगे, एक तड़प गहरी
- 30:50होगी, बिरहा की अग्नि और ज्यादा जलेगी और बिरहा की अग्नि तुम्हें
- 30:56पहुंचा देगी तुम आग लगा दो, फिर तुम्हारा अंत।
- 31:07यार हसीन गले लग जा यार, हसीन गले लग जा।
- 31:26मोहे उमर गुजर की जाए है उमर गुजर की जाए।
- 31:46सावन भी ताजा, सावन भी ताजा। यार हसीन गले लग जा यार, हसीन गले
- 32:19लग जा। मोरे उम्र गुजरती जाए, मेरी उम्र
- 32:31गुजरती जाए सावन बीवी ताजा। धन्यवाद।