Latest / Baba ji Vijay Vats / 17 Feb 25 - सहस्रार चक्र को जल्दी जागृत कैसे करें? वीर्य और स्वप्नदोष के रहस्य जानें! Must Watch
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- 0:24बाबा जी प्रणब दिसंबर के महीने में मैं आपसे दीक्षा लेने आया था,
- 0:35जैसे ही आपने अंगूठा रखा। आपने अंगूठा हटा लिया, कहा कि आप
- 0:46वापस जाओ, तुम अपनी काम शक्ति को ज्यादा गवा रहे हो, इसको साधो फिर
- 0:56आ जाना। मैं वास्तव में अपनी कामशक्ति को
- 1:00बहुत गंवा रहा था रोज़ मास्टरवेट करता था मैं बड़ा दुखी हुआ 1520
- 1:12मिनट तक। आश्रम में बैठा दूसरे कमरे में
- 1:16रोता रहा। फिर मैंने संकल्प किया कि अब मैं
- 1:25कभी भी अपनी शक्ति को जाया नहीं करूँगा।
- 1:32आपसे प्रॉमिस किया? मैसेज भेजा छः महीने तक का संकल्प
- 1:40लेता हूँ कि मैं अपनी काम शक्ति को अपने हाथों से नहीं घुमाऊंगा
- 1:47और आज दो महीने हो गए हैं और। मुझे आज खुशी है कि दो महीनों से
- 1:56मैं अपने संकल्प से डिगा नहीं हूँ।
- 2:01इन दो महीनों के अंतराल में दो बार स्वप्न दोष हुआ है।
- 2:13आप कुछ कहना चाहेंगे? इसके बारे में?
- 2:17मैं अपने प्रॉमिस में पक्का हूँ। छः महीने तक जब मैं इस ऊर्जा को
- 2:24बचा लूँगा तो पुनः आपके पास शिक्षा लेने के लिए आऊंगा।
- 2:34नाम गुप्त ही रखना अच्छा होता है। फिर ये लोग कह देते हैं बताना मत
- 2:44पापा मैं तो नरंकारी धर्म से हूँ, मैं तो जैन से हूँ, मैं तो बी के।
- 2:55सीख के से हूँ क्या करूँ? चलिए प्रश्न का जवाब देते हैं।
- 3:13वीर्य के भीतर जो रासायनिक संग्रक्षण डॉक्टर बताते हैं,
- 3:23सिर्फ वही नहीं होता, असानी रंगों से भरा हुआ।
- 3:34स्फूर्ति दायक चेतना से भरा हुआ है।
- 3:40कुछ और भी होता है जीसको डॉक्टर की लैब पकड़ नहीं पाते।
- 3:47अभी तक ऐसी मशीनें इज़ाद नहीं हुई।
- 3:51जो इन आसानी रंगों को और और जो सब कुछ कैन्सेस्नस का है उसको पकड़
- 4:03लेना ऐसा कुछ हुआ नहीं खुशी के हार्मोन पैदा करना सैरटोन।
- 4:16बगैर इन्होंने खोज लिया है लेकिन पूर्णतया ये कभी खोज भी नहीं
- 4:28पाएंगे। ईश्वर की सृष्टि का रहस्य सदा
- 4:37रहस्य ही रह जाएगा और विज्ञान सदा सोचता है कि हम सब खोज लेंगे
- 4:48लेकिन असफल हो जाएगा। सब खोजा नहीं जाएगा।
- 4:59अब मैं आपको समझाता हूँ आप कभी जूस निकालने वाली दुकान पे गए
- 5:08होंगे जो फलों का जूस निकालता है। अनार, सेब, संतरा।
- 5:17गाजर वगैरह वगैरह अवश्य गए हो क्या?
- 5:23या आते जाते देखा होगा? तो जब वो जूस निकालते हैं, चाहे
- 5:31हाथ से चाहे मशीन से तो एक तरफ जूस निकलता है।
- 5:36लिक्विड फॉर्म में दूसरी तरफ उसका जिसे आप वेस्ट प्रॉडक्ट कहते हैं
- 5:43फलूदा वो निकलता है। अब इस बात को समझ लेना आदमी और
- 6:00स्त्री। कि काम शक्ति में कुछ और भी है।
- 6:13कुछ तो जूस जैसा है और कुछ फलूदे जैसा है।
- 6:19दो चीजों से मिलकर संग्रहित हुआ है।
- 6:30वेर्य और राज्य में भौतिक पदार्थों के अलावा चेतना के अंश
- 6:39भी होते हैं। अगर चेतना के अंश न होते तो ये
- 6:45स्पर्म। इतनी तेजी से भागते हैं।
- 6:50इनमें मोर्टेलिटी आती ही चेतना के कारण जो इतनी तेजी से भागते हैं,
- 6:59जो खोजा वैज्ञानिक ने अभी तक अधूरा है।
- 7:09और आसानी तरंगें चेतना की खुशबू बहुत चीजों से मिलकर बना है।
- 7:19रिप्रोडक्टिव प्रोडक्ट्स। आदमी और स्त्री दोनों का इनका खो
- 7:32जाना आपको आध्यात्मिक उन्नति से रोक देगा।
- 7:46मूर्ख नहीं थे हमारे ऋषि सभी ने सभी ने एक स्वर में बोला
- 7:55ब्रह्मचर्य के बिना बात न बनेगी, लेकिन क्या करें?
- 8:00ऐसे आदमियों का क्या करें? जो पढ़ाई लिखाई अच्छे किए हैं।
- 8:04बोलने में दक्ष ब्रह्मचर्क के अर्थ बदल दिए अर्थ तो वो भी होते
- 8:12हैं ब्रह्म जैसा आचरण लेकिन वो अंतिम स्वरूप में होता है जब
- 8:19व्यक्ति अस्तित्व में फैल जाता है।
- 8:22तो भ्रम हो जाता है। वह घोषणा करता है।
- 8:25अहम ब्रह्मास्त्र तो वह भ्रम जैसा आचरण करता है, लेकिन उससे पहले जब
- 8:33वह वीर और राज्य के फौरम में होता है तो उसे तो बचाना होता है।
- 8:45अब थोड़ा समझ ले यह जो स्वप्न दोष में वीरस्करित होता है, यह वो
- 8:57फलूदा है। रस तो निकल गया।
- 9:00रस 10 दिनों में निकल जाता है। अब इसको ठीक तरह से समझ लेना।
- 9:06युवा पीढ़ी और युवा तो छोड़ो यहाँ तक के प्रौढ़ और वृद्ध भी।
- 9:18इन्हीं भ्रांत धारणों से जब वीर और राज़ इनका फॉर्मेशन होता है तो
- 9:31बनते ही इनमें आसानी, रंगें और चेतना की लहरें भी पैदा होती हैं।
- 9:39अब वेव्स को मेज़र नहीं कर सकते। इनके इन्स्ट्रुमेंट और आसानी
- 9:43तरंगों को भी मेज़र नहीं कर सकते। ऐसी कोई मशीन नहीं बनी।
- 9:47अभी तक कल को बन भी सकती है। अब इस बात को ध्यान से समझ लेना।
- 9:56ये तुम्हारी समझने योग्य बात है। इनको हो सके तो 1 मिनट 2 मिनट का
- 10:05वीडियो अलग से निकाल के आप अपने मित्रों को प्रसारित कर सकते हैं।
- 10:15मुझे लोग कह देते हैं बाबा 5 साल हो गए आपको बोलते को?
- 10:20आपने हमें बुलाया ही नहीं, मैंने कहा मैंने आपको रोका भी नहीं, यह
- 10:27उनका दायित्व बनता है जो मुझे सुनते हैं कि वह औरों तक भी जो
- 10:34बात उन्हें अच्छी लगती है वो पहुंचा दें।
- 10:38जिन तक पहुंचाया उन्हें अच्छी नहीं लगेंगी तो वो नहीं सुनेंगे,
- 10:42छोड़ देंगे, अच्छी लगेंगी तो ग्रहण कर लेंगे, ये मेरा कोई नहीं
- 10:49है। मैं अपने अनुभव बता सकता हूँ,
- 10:53साझा कर सकता हूँ। मीडिया की तरह प्रवाहित नहीं कर
- 10:58सकता। ब्रॉडकास्ट नहीं कर सकता
- 11:10तो रिप्रोडक्टिव प्रोडक्ट्स की ये दो बुनियादें हैं एक तोरस, एक
- 11:22फलोदा। वीर्य और राज्य बनते सार ध्यान से
- 11:30सुनें इस बात को वीर्य और राज्य बनते सार उसके भीतर जो आसानित,
- 11:39रंगें और चेतना का जो प्रवाह है। क्योंकि यह हमारे मूलाधार के पास
- 11:48है और वहीं से जाती है सुसुमना नाड़ी और ब्रह्मरंद्र सहसरार तक
- 11:55पहुंचती है। तीसरे नेतृत्व तक भी पहुंचती है।
- 12:01तो यहाँ से बनते सार जो उसमें आनंद की तरंगें हैं, वेव्स हैं,
- 12:12जीवन की तरंगें हैं, वो सारी वाष्प की तरह उड़नी शुरू हो जाती
- 12:17है। उधर वीर और राज़ बनते जाते हैं।
- 12:27इधर ये दोनों चीजें तरंगें वाष्प बनकर और आनंद वाष्प बनकर उड़ती
- 12:40हैं। सुसुना नाड़ी के जरिए सहसरार में
- 12:44पहुंचती हैं। मेरु दंड में से गुजर के ये पैसेज
- 12:49मैंने कल भी बताया था। 10 दिनों के भीतर यह प्रोसेसर
- 12:58पूरी हो जाती है। इसलिए 10 दिनों के बाद अगर आपको
- 13:06कुछ लोगों में 20 दिन भी लग जाते हैं, 15 भी लग सकते हैं, एक महीना
- 13:14भी लग सकता है। तो एक बात को ध्यान से समझ लेना,
- 13:20ये द्वाइयों वगैरह के चक्कर में मत पड़ना, ये जो स्वपन दोष के लिए
- 13:28दवाई देते हैं, इनके षड्यंत्र में मत आना, ये षड्यंत्रकारी लोग हैं,
- 13:35लोभ की भावना है इनके भीतर। इनके खुद के स्वपन दोष रुकते नहीं
- 13:42रुकेंगे क्या ये बचाते ही नहीं हो ही जाते हैं क्योंकि ये स्वाभाविक
- 13:51प्रक्रिया है। जैसे अगर आप खाना खाते हो तो आपको
- 13:56शौच आएगी। पानी पीते हो, आपको मूत्र आएगा।
- 14:02ये स्वाभाविक प्रक्रिया है। ऐसे ही स्वप्न दोष का 10 दिनों के
- 14:07बाद हो जाना। ये वही फलूदे की तरह है जिसने
- 14:11वेस्ट प्रॉडक्ट फॉरेन मैटेरियल्स बाहर को निकाल दिया है।
- 14:16इससे घबराना नहीं है। इट इस नेचुरल प्रोसेसर आज ये ठग
- 14:23लोग इसका भय दिखाकर ये दो ही चीजें थी।
- 14:30इन लोगों के पास धार्मिक हूँ या धनाढ्य हूँ।
- 14:36दो ही चीजें थी इनके पास या वैद्य खाऊ या लोप दिखाऊ तो वैद्य दिखाते
- 14:43हैं आपको यह तो सोने से भी ज्यादा कीमती है।
- 14:48हीरे ज्वारा से भी ज्यादा कीमती है।
- 14:50इसको खोने, मत देना और फिर यह खोता है 10 दिनों के बाद क्योंकि
- 14:54बनता है। होता है तो आप कंप जाते हो इतना
- 15:01डरा रखा है इन्होंने इतना डरा रखा है फिर कहते हैं दवाई हमारे पास
- 15:07है, दवाई ले लो, अंधा धुंध खर्चा कर देते हो आप दवाइयों पे।
- 15:15कोई सलूशन नहीं निकलता क्योंकि इट इस नेचुरल प्रोसेसर अगर आप किसी
- 15:24दिन डरने लगे कि मुझे रोज़ सोच आ जाती है तो फिर परमात्मा ही रक्षा
- 15:32करेगा। 10 दिनों में जो वीर्य और राज्य
- 15:43रिप्रोडक्शन प्रॉडक्ट बने, उनके भीतर से जो कीमती चीज़ है, जिसे
- 15:49रस कहता हूँ, मैं और रस कहते हैं शास्त्र उपनिषद में लिखा रसोवैसा
- 15:55वैरस है। रस्म वाष्प बन के उड़ जाता है।
- 16:02सुशमना नाड़ी के जरिए और सहसरार में पहुँच जाता है।
- 16:07ब्रह्मचर्य के द्वारा ऐसे एंड लाइटन्ड होने में सहायता मिलती
- 16:13है। यह है तकनीक बड़े शार्ट में
- 16:16समझाती है मैंने। जैसे जैसे बनता जाएगा वैसे वैसे
- 16:23इसके रस के तत्व वाष्प के रूप में सुसुमना के जरिये एक ही मार्ग है
- 16:31सिर्फ सुसुमना। आध्यात्मिक चीजों के लिए एक ही
- 16:38मार्ग है वाष्प बनकर सुसुमना के जरिए आपके ब्रह्मरद्र में सहस्रण
- 16:45में पहुँच जाएंगे और आपको बड़ा आनंद आएगा।
- 16:49इसलिए ब्रह्मचर्य में इतना आनंद है।
- 16:55जब आप ब्रह्मचर्य को खो देते हो, आपको नींद आ जाती है, क्यों
- 17:04निचोड़ लिए गए आप? शक्ति तो गई गई, चेतना भी गई,
- 17:11एनर्जी तो गई गई, कान्शस्नस भी गई।
- 17:14और एनर्जी तो चली भी जाए, कोई बात नहीं लेकिन ये जो कॉन्शसनेस गई यह
- 17:21खतरनाक है। अध्यात्म के मार्ग में चलने वाला
- 17:27व्यक्ति हो या संसार के मार्ग में चलने वाला व्यक्ति हो।
- 17:33उसको इस चेतना को बचाना होगा क्योंकि ये सफर चेतना की वृद्धि
- 17:38का है। कान्शस्नस लगातार बढ़ी पत्थर से
- 17:46बढ़ी और मानव चेतना तक आ गई। अब मानव चेतना से परमात्म चेतना
- 17:52में जाएगी। तुमने इसलिए ऋषियों ने कानून बनाए
- 18:06थे, पहले आचरण करना सिखाया था कि इसको बचाना सीखो।
- 18:17जैसे ही ये बनेगा। वैसे ही वाष्प के जरिये इसके
- 18:23मुख्य मुख्य अंश जिसे रस रूप कहते हैं, उपनिश्चित रसोवैसाह, वह
- 18:31वाष्प बनकर सुशूमना के जरिये। आपके सहसाद में ब्रह्मात्र में
- 18:38पहुँच जाएंगे और बूंद बूंद करके बड़ी सहायता मिलेंगे।
- 18:47आपको ब्रह्मचर्य को साधने वाले का गलो ही कुछ और होता है।
- 18:57वाणी का तेज। कंठ की मधुरता बुद्धि की
- 19:04तीक्षणता, शरीर का बलिष्ठ होना ये सब कुछ दे जाता है।
- 19:14अकेला एक वीर और राज्य। ज़रा सोचो जो चीज़ एक नए जीवन का
- 19:25निर्माण कर सकती है, वह आपको क्रांति नहीं दे सकते, जो नए जीवन
- 19:32का निर्माण कर सकती है, वह आपकी जीवन चेतना में वृद्धि नहीं कर
- 19:36सकती। बस यही चीज़ आपको समझाई नहीं रही,
- 19:42आपको डराया क्या? इसलिए आज से ही ये दवाइयाँ खानी
- 19:48बंद कर दो? इन दवाइयों में सिर्फ़ बहकावे के
- 19:57इलावा और कुछ नहीं। मेरे पास लोगों के फ़ोन आ जाते
- 20:06हैं। बाबा पहले ही धंधा मंदा है।
- 20:09आप ऐसा मत किया करो, मैंने कहा गला घोंट दो इनका।
- 20:18अगर नहीं बोला तो सत्य से वंचित हो जाएंगी आने वाली पीढ़ियाँ और
- 20:25क्या बचा पाएंगी कैसे जी पाएंगी मरे मरे से जीना भी कोई जीना होता
- 20:31है। और प्रबल वेग में जब उफान पे होता
- 20:37है काम तो आप इसको डराते हैं और पश्चिम में तो हद ही करते हैं और
- 20:48पश्चिम के अनुकरण करने वाले संतों ने तो बलकुंड ही हद करते हैं।
- 20:53जब पश्चिम के शब्दों के ऊपर तथाकथित ऐसे संतों ने मुहर लगा दी
- 21:03कि संभोग से समाधि की तरफ जाया जा सकता है, उसे ये नहीं पता था।
- 21:08भीतर चाहे कुछ भी बोल दो आप। कि आपके इस टाइटल से आंधी दुनिया
- 21:15तो वैसे ही पागल हो जाएगी। टाइटल तो देख कर ढूंढ के डालो आप
- 21:29इनको कृपा करनी चाहिए थी। लेकिन नहीं कि अध्यात्म को
- 21:35पाश्चात्य के पीछे लगा दिया। ये बिल्कुल ऐसा था जैसे बबूल में
- 21:40से कोई आम कर से ढूंढे एक पश्चिम के अंदर उसकी धरती में ही
- 21:50आध्यात्मिकता नहीं है। मेरे भाई बहन कहा करते हैं,
- 21:54अमेरिका में जाके खून सफेद हो जाता है।
- 22:01इसमें कुछ हैरानी जनक विश्व में जनक कुछ भी नहीं है।
- 22:07डालरों की चमक देख के खून सफेद हो ही जाना चाहिए हो ही जाता है।
- 22:14इसलिए जो यहाँ से गए देर अवेर व डॉलरवादी हो गए।
- 22:24कुछ तो यहाँ से फौके फौके गए थे। कुछ वहाँ जाके फोंके हो गए, उनकी
- 22:32फोक सामने आ गई, कोई रूपांतरित नहीं कर पाया, वर्ण स्वयं
- 22:40निष्कासित हो के वापस आ गए, गए थे रूपांतरित करने पश्चिम को कहाँ
- 22:47पश्चिम रूपांतरित हो पाया? पश्चिम के लोगों की धरती में
- 22:54खुशबू नहीं है। अध्यात्मिकता के ये अध्यात्मिकता
- 22:59की खुशबू सिर्फ भारत भूमि में है या कुछ और धरतियाँ हैं?
- 23:09जिनमें ये खुशबू है, ईरान की धरती है, पाकिस्तान की धरती है,
- 23:18बांग्लादेश की धरती है, ये तो कभी भारत रहा था, नेपाल की धरती है।
- 23:27इनमें आध्यात्मिकता की सुगन्ध है। अफगानिस्तान की धरती है।
- 23:41सरकारों बदलती रहती हैं, निवासी बदलते रहते हैं तो आप उन लोगों के
- 23:48प्रति वैसी ही राशन बना लेते हो, लेकिन इन सब में बिछड़े, हमारे
- 23:53संत जन और जहाँ जहाँ चर्न पड़े उनके वहाँ वहाँ खुशबू।
- 24:00के फूल खिल गए। पश्चिम से क्या निकालोगे?
- 24:13रोटी चाहिए तो पश्चिम में जाओ, तृप्ति चाहिए तो पूर्व दोनों में
- 24:23से एक चुनना होगा। पहले ये देखना होगा व्हॉट यू वांट
- 24:29एन्टायरली तुम्हारे भीतर की मंशा क्या है?
- 24:33तुम चाहते क्या हो घन दौलत चाहिए पश्चिम में जाओ कैसे भी जाओ।
- 24:45आज वैलिड प्रोसेसर से वो भी नहीं घुसने देंगे।
- 24:50वैलिड प्रोसेसर से जाओ, लेकिन आध्यात्मिकता चाहिए जो कि सबको
- 25:01चाहिए। आज नहीं, कल अमेरिका हिंदुस्तान
- 25:04में आएगा, कब्जा करने के लिए नहीं।
- 25:08नत मस्तक होने के लिए आएगा क्योंकि वो ढूंढ लेंगे।
- 25:13चैन नहीं वो ढूंढ लेंगे। यहाँ जलन है, यहाँ शांति नहीं,
- 25:25यहाँ फूलों की सुगंध नहीं। हम प्यार में जलन वालों को चैन
- 25:40कहाँ? आराम कहाँ हम चार में जलने वालों
- 25:58को। डालरों की चमक में चैन नहीं और सब
- 26:05है। करार नहीं, तृप्ति नहीं और सब हैं
- 26:11एस ओह आराम की सब सुविधाएं हैं, लेकिन चैन के बिना सब बेकार हैं।
- 26:18कबीर ने कहा है जब आ वे संतोख, धन, सब धन, दूध, सामान।
- 26:25जैसे ही तृप्ति का धन मिल जाता है, व्यक्ति को सही धन वो है,
- 26:30बाकी धन ढूंढ़ हो जाते हैं तो दो ही रास्ते हैं या तो तृप्ति का धन
- 26:35पहले पालो तो बाकी धन ढूंढ़ ही हो जाएंगे।
- 26:40आप ढूंढ़ोगे नहीं उसको। या फिर टक्करें मार लो पहले दूसरे
- 26:44दोनों में देख लो, इसमें है या नहीं?
- 26:49नहीं मिलेगा तो फिर इधर भागोगे, आप इसलिए मैं कहता हूँ आज नहीं।
- 26:53कल अमेरिका जल्दी ही इधर मुड़ने वाला है क्योंकि वहाँ चैन नहीं।
- 27:04जल्दी ही हिंदुस्तान को वीजा बंद करना होगा, क्योंकि वो लोग
- 27:15अतृप्ति के मारे मारे जलन को कब तक बर्दाश्त करोगे?
- 27:22जलन ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं होती, आखिर उसका इलाज करना ही
- 27:27पड़ता है। आज नहीं कल पश्चिम भागेगा पूर्व
- 27:33की तरफ़, क्योंकि चैन तो यही है और तुम्हारी अंतरात्मा की पुकार।
- 27:39और अंतरात्मा की आवाज़ चैन मांगती है, करार मांगती है, संतोष मांगती
- 27:49है, ठहराव मांगती है, वहाँ ठहराव नहीं है, वहाँ दौड़ है और धावकों
- 27:57की तरह दौड़ है। और ये दौड़ने का रोग हिंदुस्तान
- 28:01को भी लग गया और रहने दो उसको एक नंबर का पूँजीपति इन दावों को कोई
- 28:11दौड़ में तुम हिंदुस्तान को क्यों शामिल करते हो?
- 28:16ये सफीशियंट नहीं है। कि आप अपने नागरिक को जरूरी वस्तु
- 28:23दें, महैया करा दें, भोजन चाहिए, तन ढांपने के लिए कपड़ा चाहिए,
- 28:31सिर पे छत चाहिए और कुछ नहीं चाहिए।
- 28:37और ये काफी है और हमारी भूमि ये सब कुछ पैदा कर सकती है।
- 28:41हिंदुस्तान की भूमि कभी इतनी गरीब नहीं रही।
- 28:46हिंदुस्तान की भूमि सदा ही सोने की चिड़िया रही है।
- 28:51लोगों ने लूटा, बहुत लूटा। लेकिन खुद लूट गए हैं हम लूटते,
- 29:00लूटते खुद लूट गए हमारा चैन नहीं लूट सके खुद का चैन लूट गया।
- 29:06आज विश्व में कहीं चैन नज़र नहीं आता भारत के सिवा और अब तो भारत
- 29:13से भी खोता चला जाता है। धीरे धीरे धीरे धीरे ऐसा लगता है
- 29:18जैसे लुप्त हुआ जाता है। रोज़ प्रचारक प्रसारक बिना जाने
- 29:29प्रचार करने लग गए। बिना देखे प्रसार करने लग गए।
- 29:36तो ऐसा ही हश्र होना है। वीर और राज्य के रिप्रोडक्टिव
- 29:45प्रोडक्ट्स में केमिकल रासायनिक संरचना जो होती है वो तो होती है
- 29:52उसके अलावा चेतना की कुछ। वाष्प भी होते हैं।
- 30:01आसानित रंगों से लब लब भरा होता है बाहर फेंक देते हो आप रोज़
- 30:07बाहर फेंक देते हो और सारे दिन दुखी रहते हो।
- 30:17ब्रह्मचारी का भी दुखी न रहता। उसको अपने वीर और रज की मस्ती ही
- 30:27बहुत होती है। कोई वक्त था जब शंकर अपनी मस्ती
- 30:31में और गार्गी भी अपनी मस्ती में थी।
- 30:34ऐसे नहीं कि गार्गी मस्ती में नहीं थी।
- 30:36गार्गी भी मस्ती में थी। विद्युतमा भी मस्ती में थी,
- 30:40कालिदास भी मस्ती में था, ये क्यों था?
- 30:46हमारे ऋषियों ने हमें एक मुख्य सबक दे दिया था बेसिक फाउंडेशन
- 30:52ब्रह्मचर्य रिप्रोडक्टिव प्रोडक्ट्स की।
- 30:58संरक्षण करो और अगर ये खो जाए, 10 दिनों में इनका अर्घ निकल जाता
- 31:07है। 10 में 15 में 20 में जब भी अर्घ
- 31:10निकले निकलें तो में कॉन्स्टिपेशन हो जाता है।
- 31:172 दिन तुम नंबर एक में नहीं जाते, कोई बात नहीं आएगा, जो खाया है वो
- 31:25निष्कासित होगा। तुम्हें घबराने की आवश्यकता नहीं
- 31:29है। जब वीरे बनेगा रज बनेगा, उसके
- 31:34भीतर प्रतिक्षण चेतना की। वाष्प बनेगी आनंद की वाष्प जीस
- 31:45दिन वैज्ञानिक ने ऐसी मशीनों का निर्माण कर लिया कि वह स्वपन दोष
- 31:53के जरिए निकले गए इस रिप्रोडक्टिव प्रॉडक्ट की।
- 31:57विश्लेषण कर सकें तो एक चीज़ पाएं कि इनमें आसानी तरंगे नहीं है और
- 32:04इनमें जीवंत मात्रा नहीं है। जीवन खो गया।
- 32:08जो अपने आप स्वपन दोष में निकला उसकी बात करता हूँ।
- 32:13जो तुम निकाल देते हो उसमें तो होगा सब होगा वो तो तुमने जान
- 32:18बूझकर अपनी ज़िन्दगी को विकृत किया आनंद की धारा इसमें बहती है
- 32:27और तुम बाहर निकाल देते हो फिर तुम कहते हो बाबा मैं दुखी हूँ।
- 32:38तो अगर मैंने हाथ उठा लिया तो ठीक किया ये बताओ, क्या तुम नहीं
- 32:48मास्टरवेट करते थे? रोज़ क्यों छह महीने की सौगन्ध
- 32:55खानी पड़ी? अगर हाथ उठाया तो किसी कारण से
- 33:00उठाया हर किसी के तो हाथ में उठाता भी है और ध्यान रखना।
- 33:11जब मेरे पास तुम दीक्षा लेने आओ तो परिपूर्ण शुद्धता से आनु यह एक
- 33:19अजूबी घटना घटने जा रही है। यह कोई मामूली डिग्री होल्डर की
- 33:25बात नहीं है कि आप कैसे भी चले जाओ।
- 33:28सिर्फ काले वस्त्र पहनकर टोपी लगा के ये ऐसा कुछ नहीं होने को है।
- 33:33ये आपकी ज़िन्दगी का बहुत बड़ा एक मोल आने वाला है।
- 33:40तो ध्यान से आइएगा। ऐसे ही सोए सोए उठ के नहीं आ
- 33:51जाएगा? आँखें मलते मलते बहुत जागृति से
- 33:56आना पड़ेगा अन्यथा वापस से लौटा दिए जाओगे।
- 34:04मुझे लोग कह देते हैं बाबा सारे धर्म अपने प्रचार प्रसार में
- 34:08जुड़े हैं, आप भाव मुश्किल दो। तीन लोगों को दीक्षा देते हैं,
- 34:17हजारों लाखों लोग हैं कतार में बलाती हो 1020 लोगों को।
- 34:28और मैं सदा से कहता हूँ, बाबा ने मुझे ये कहा था टीचर को अध्यापक
- 34:34को उतने ही विद्यार्थी अपनी क्लास में रखने चाहिए या कक्षा में रखने
- 34:39चाहिए जिनको वो पढ़ा सकें। जिनके प्रश्नों का जवाब दे सके
- 34:44जिनकी पीड़ाएं को उहरण कर सके जिनका बोझ है वह उठा सके, जिनका
- 34:50दायित्व वह निभा सके। करोड़ों लोगों की भीड़ तो कोई भी
- 34:57इकट्ठे कर लेगा। भेड़ों की भीड़ को इकट्ठा करना
- 35:01कोई मुश्किल नहीं है, बस एक रुद्राक्ष बाटूंगा इतने में ही
- 35:09करोड़ों लोग आ जाएंगे। रुद्राक्ष की कीमत मुश्किल से एक
- 35:12₹2 होती है। नेपाल में मिल जाते हैं, नीचे
- 35:17बड़े मिल जाते हैं, जीतने चाहे ही ले लो।
- 35:20उठा लो कोई ज्यादा कीमत नहीं होनी, लेकिन कीमत तो उसकी है जो
- 35:32चेत न उसमें प्रविष्ठित की गई। मैंने लालचंद की मदद कहा, लोग
- 35:48कहते हैं बाबा 5000 10,000 15,000 बोलते हैं, मैंने कहा मत लो जब
- 35:58आपको यहाँ से फ्री अवेलेबल है। हम कोई पैसा नहीं मांगते आपसे आप
- 36:05अगर दे जाते हैं वो आप की श्रद्धा है उसको हम लात नहीं मार सकते
- 36:13लेकिन उसके ऊपर कुछ एनर्जी फेंकी गई है, कुछ नहीं।
- 36:17बहुत सी। फुल एनर्जेटिक हैं।
- 36:22वो सुगंधिम पुष्ठिवर्धनम् पुरवारुक में बंधनान मृत्यु और
- 36:30मोक्ष माँ मरे दात त्रम्बकम जज़ाम रही।
- 36:40रुद्र मंत्रों नमो भगवते रुद्राय इनकी सबकी तरंगें उनमें समाहित
- 36:47है। ये वो नहीं जो आपको ऑनलाइन मिल
- 36:53जाएगा। ऑनलाइन मंगवा सकते हो आप, लेकिन
- 36:56कोई काम नहीं करेंगे। ध्यान से समझ रहे।
- 37:01मैंने कहा आप चार्ज कर लेना खुद, लेकिन मुझे लगता है कि चार्ज आपसे
- 37:07हो नहीं पाती इसलिए आप कृपा करिए, आप यहाँ आश्रम से ही निशुल्क ले
- 37:14जाइए, हम आपसे कोई पैसा मांगते हैं।
- 37:22हमारा सभी हमारी सेवा है। हम मानवता को सुख में देखना चाहते
- 37:29हैं। हम मानवता को मस्ती में देखना
- 37:32चाहते हैं, आनंदित अवस्था में झूमते नाचते मीरा की तरह।
- 37:36गाते नानक की तरह सुरती में गूम होते हुए कबीर की तरह देखना चाहते
- 37:42हैं। हमारी ये मंशा है हम दुखी,
- 37:51पीड़ित, वृद्ध ये जलते हुए हृदय इनसे युक्त लोगों।
- 38:00का अभाव चाहते हैं भारत भूमि से, भारत से और विदेशों से भी।
- 38:06मैं तो चाहता हूँ वसुधैवकोटम वकम वसुधा एक परिवार की तरह रहे और
- 38:16पूर्ण संतुष्ट और खुशहाली में रहे तृप्त रहे।
- 38:21कोई दुखी न हो सभी सुखी रहे सर्वे भवन्तु सुखी न हमारा तो मूल मंत्र
- 38:32ही जय हो सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यंतु।
- 38:40माँ कश्चित दुख भाग में बैठ हे प्रभु, किसी को दुख मत देना, सभी
- 38:48को सुख देना सभी को आनंद में रखना कोई भूखा न सोए।
- 39:00इस्लाम के एक पुजारी ने लिखा, जहाँ भी जीस भी बस्ती में कोई भी
- 39:07भूखा सोता है वहाँ बस्ती ही बस्ती से खुदा नाराज होता है।
- 39:13तुम्हारे कठोर दान में 10 रोटियां पड़ी होंगी।
- 39:16लेकिन कोई भूखा अगर चार रोटियों के लिए मर गया तो दोस्त हमारा है।
- 39:21बस्ती ही बस्ती से खुदा नाराज होता है इसलिए सोते वक्त देख लेना
- 39:28तुम्हारे कठोर दान में कुछ रोटी पड़ी तो बाहर कोई जीव जंतु।
- 39:35कोई भिकारी उसको दे देना या और नहीं तो अपनी पेंडी पे बाहर रख
- 39:42देना कोई रात वरात आएगा खा जाएगा भूखा भूखा यही मुहम्मद का सुर था।
- 39:54मोहम्मद जब रात को सोते तो उससे पहले पूछते फातिमा खदीजा कुछ बचा
- 40:06तो नहीं जी बचा है तो चलो बांटो बाहर।
- 40:15बांट के आओ, फौरन बंटवा देते बाहर हमारे कठोर दान में पड़े किसी को
- 40:29जीवन नहीं दे सकते लेकिन किसी के पेट के भीतर गए।
- 40:33उसको जीवन दे सके दो भी लोगों के द्वारा राज़ करने के ज्येष्ठरों
- 40:42से युक्त नफरतें फैलाई जाती हैं राज़ करो बिल्कुल करो कौन रोकता
- 40:47है कोई नहीं रोकता। लेकिन मन को दूषित मत करो।
- 40:56हमारे ऋषियों के द्वारा छेड़ी गई ये बातें महज लफ्फाजी नहीं होनी
- 41:01चाहिए। जी आत्मा की आवाज़ होनी चाहिए, ये
- 41:08बटनी चाहिए। और सब कुछ बंटवा के जाते हैं कोई
- 41:17आज अगर मोहम्मद को गाली निकालेगा, मोहम्मद का कुछ नहीं पकड़ेगा,
- 41:24अपने ही खून की नालियों में विष पैदा करेगा?
- 41:31अपनी ही खून की नालियों में कॉटी, शॉल वगैरह पैदा करेगा।
- 41:35अड्रिनलिन वगैरह मोहम्मद का क्या जाता है?
- 41:39वो तो गए। एक रात बीमार पड़ गए, सोचा प्राण
- 41:54छोड़ तुमने कई दिनों से बीमार थे और फातिमा ने शोखा कि बीमार है।
- 42:04सर्द रात है। रात को अगर अब्बा जान को कोई
- 42:14तकलीफ हुई तो कोई वैध हकीम बनाना पड़ेगा और इतने सर्द रात में बिना
- 42:19पैसा दिए वो आएगा। तो कोई पांच दिनार देगा था वो
- 42:25संभाल के रख लिए अलग से छुपा रही है लेकिन मोहम्मद हैं कि उनके
- 42:39प्राण नहीं निकलते हैं। मोहम्मद कहते हैं, मेरे प्राण
- 42:41नहीं निकल रहे हैं, क्या बात है खलीजा?
- 42:47खातिर में तुमने कुछ छुपा तो नहीं लिया?
- 42:51आज कुछ ऐसा तो नहीं कि तुमने बचा लिया हो।
- 42:59हमारी परंपरा दूषित तो नहीं हो गई?
- 43:03हमने कुछ रात्रि के लिए बजा तो नहीं लिया, कुछ अलह तालाब पर भी
- 43:08छोड़ दो, उसकी रहमत पर भी छोड़ दो, उसकी न्यामत पर भी छोड़ दो,
- 43:18उसके कर्म पर भी छोड़ दो। कुछ ऐसा तो नहीं कि तुमने बचा
- 43:27लिया खत में कहती नहीं, अब्बा कुछ नहीं बचा तो फिर मेरे प्राण क्यों
- 43:35नहीं निकलते? अवश्य कहीं खंडन हुआ है।
- 43:44हम जो आज तक करते रहे कुछ है जो आज विकृत हुआ है।
- 43:50जब वो परंपरा दूषित हुई है, आज क्या है?
- 43:52सच बताओ मेरे प्राण नहीं निकल रहे, बताओ क्या बात है?
- 44:00जब ज्यादा तड़पे तो फातिमा ने पांव पकड़ लिया।
- 44:06मैंने पांच दिनार कोई दिन में भगत देगा था वो रख लिया बचा के क्यों
- 44:13रख लिया? रात्रि को आप ज्यादा बीमार हो गए।
- 44:18किसी हकीम को बुलाना पड़ेगा और हकीम इस सर्द रात में दिसंबर की
- 44:22सर्द रात में हकीम नहीं आएगा बिना फीस दिए लोब दिखाना पड़ेगा फिर
- 44:27आएगा मोहम्मद कहने लगे तुम गलती में हो, बटिया।
- 44:45लोभ के कारण नहीं आएगा, उसकी रहमत के कारण आएगा।
- 44:52जो भी हकीम आएगा, लोभ के कारण नहीं आएगा, रहमत के कारण आएगा, वह
- 44:58प्रवेश करेगा, उस हकीम के भीतर तब वो आएगा नहीं तो नहीं आएगा।
- 45:09जल्दी करो इसको देके आओ किसी को बाहर सर्द रात है हाथ में बोली इस
- 45:16वक्त कौन होगा चिढ़ी परिंदा भी तो नहीं है मनुष्य कहाँ से आएगा इस
- 45:22वक्त? उसने कहा अल्लाह ताला हमारी
- 45:27रक्षा। तुम बाहर जाओ तो इतने वर्ष तक हम
- 45:34जो परंपरा निभाते रहे वो आज टूटने नहीं देगा।
- 45:37मुझे पूरा विश्वास तुम जाओ तो बाहर।
- 45:48और फातिमा बेईमान से होगा तो नहीं ठंडी हवा चल रही है।
- 45:56इतनी सर्द राहत इस वक्त कौन आएगा मरने के लिए?
- 46:05ये हवाएं तो मारने वाली हैं और सांगली खोली।
- 46:13सांकल खोल के बाहर गई एक वृद्ध भिखारी हाथ कँपते हुए हैं और।
- 46:25सरल लाहु आला है। वह सरल मोहम्मद कहने लगे फातिमा
- 46:31क्षमा करना खतीजा पहले परमधाम को चली गई थी, खतीजा 13 वर्ष पहले
- 46:39चली गई थी। शायद मेरी स्मृति अगर ठीक से काम
- 46:46कर रही हो तो ईस्वी 632 में मोहम्मद ने प्राण था, जब खदीजा
- 46:53नहीं थी खदीजा, तो वह गरममत प्राप्त होने के बाद रमजान में
- 47:00चली गई थी। शायद 619 में और 632 में मोहम्मद
- 47:10तो 632 की बात है। ये ईस्वी का है सर लहू आला है
- 47:16वसल्लम मोहम्मद कहते हैं, फातिमा से फातिमा जाओ बाहर।
- 47:24ये पांच दिनार देखा फातमा बाहर के देखा, एक बूढ़ा आदमी कपता हुआ हाथ
- 47:40कप रहे हैं, सारा शरीर कप रहा है, देखने में वृद्ध लगता है
- 47:44झुर्रियाँ सारे शरीर पर कपता हुआ। बेटी कुछ खाने को मिलेगा, कुछ
- 47:55चादर कंबल मिलेगा, सर्दी बहुत है, ठंडी रात फातिमा की आँखों में
- 48:05आंसू आ गए। तब पांच दिनार बहुत होते थे।
- 48:14क्रीब आज एक दिनार ₹280 के क्रीब है, उस वक्त देख लो उसकी क्या
- 48:21कीमत? पांच दिनार आज 280 के क्रीब है
- 48:25कवैती दिनार। तो उसने झट से पांच दिनार उस
- 48:36भिक्षुक को दिए जा बाबा कहीं आगे से खरीद ले, आगे से कोई खाना खा
- 48:44ले, कोई दुकान खुली होगी। और जल्दी से सर्द हवाओं से बैठते
- 48:52हुए भीतर आ गए। फातिमा भागी मोहम्मद की चारपाई के
- 48:59पास जाके देखा, आराम से लेटे हुए थे, चादर लिए हुए फातिमा ने
- 49:08हिलाया। नहीं हिले चादर उठाई पंछित जा
- 49:17चुका था, उठ चुका था। तुम सांप्रदायिकता से तुम
- 49:37तुम्हारे तथा कथित नकली धर्मों से कस लेते हो मानवता को लेकिन
- 49:45राजनीति, समाज, सम्प्रदाय ये पार्टियों के झंडे वंडे।
- 49:52इनका धर्म से कोई समृद्ध है। धर्म बहुत भीतरी अस्तित्व की बात
- 50:00है, वो सबका एक है। भीतर से हम सब जुड़े हुए हैं, सभी
- 50:10जीव जंतु। सभी अस्तित्व पत्थर हो के भगवान
- 50:16हो, सभी एक सूत्र में बंधे हुए हैं, यही तो विलक्षणता है।
- 50:23यही तो कृष्ण कहते हैं जीवन भी मैं हूँ मृत्यु भी मैं हूँ।
- 50:32और तुम्हें समझ नहीं आता तुम जीवन और मृत्यु को विपरीत छोर समते हो।
- 50:51जैसे ही वीर पैदा होता है उसके भीतर से ये आसानी तरंगें जो आपको
- 51:00खुशहाली से भर देती हैं, आनंद से भर देती हैं, वह उड़ने लग जाती
- 51:07हैं, जैसे जैसे इसका निर्माण होता है।
- 51:10वैसे वैसे ये आसानी तरंगे तुम्हारे ब्रहम्रंत्र यह कह लो
- 51:18सहसरार में प्रवेश करती हैं, तुम आनंदित होते जाते हो और जब तुम खो
- 51:25देते हो। तो सभी ये बाहर देने वाले खुशियां
- 51:31देने वाले तरंगें भी साथ में जाती हैं।
- 51:37पूरा का पूरा फूल जाता है जो खिला हुआ है फूल उसको तुम तोड़ लेते हो
- 51:46मैंने देखा लोग। अपने स्वागत में बड़े फूलों की
- 51:50हत्या करते हैं। मैं ऐसे हत्या करते हैं।
- 51:55पहली बात तो ईश्वर ने उसे जीवन ही इतना छोटा दिया, छोटे से जीवन में
- 52:02उसके खलावट से आपने कुछ सीखना था फूल की तरह खेल जाओ।
- 52:09लेकिन आपने उसी को तोड़ लिया और किसी भी राजनेता या किसी भी
- 52:17धार्मिक नेता के स्वागत के लिए आप वर्षा नहीं लगे।
- 52:27फूल की हत्या करके किसी का स्वागत करना अपराध हो सकता है।
- 52:32ईश्वर की षष्ट में अपराध है, ऋषि कनाद कच्चा गेहूं नहीं खाते थे।
- 52:44पक के झड़ जाता घर जाता फिर वो दोनों कहते लोग कहते नहीं कच्चे
- 52:50में जीवन है अब जब जीवन से टूट गया फूल मुरझा जाए तुम उसको
- 52:58अर्पित कर देना लेकिन वो तो बेज़ती होगी फिर इनकी।
- 53:04वह अपनी ज़िन्दगी को जी ले फिर तुम उसे तोड़ लो, खुद ही टूट
- 53:10जाएगा, खुद ही गिर जाएगा लेकिन जीवंत यहाँ पर पुष्प लेकर आ जाते
- 53:17हैं मेरे पास लेकिन मुझे कोई खुशी नहीं होती, सच पूछो तो मेरे भीतर
- 53:23दुख होता है। इतने फूलों की हत्या सिर्फ मेरे
- 53:27लिए की गई। किसी न किसी रूप में मैं इसका
- 53:32दोषी हूँ। ये सब फुलवाड़ी में लगे ज्यादा
- 53:38शोभा दे रहे थे। खुद के होने का आनंद मान रहे थे,
- 53:43खुशबू बिखेर रहे थे। इनका क्या ले रहे थे?
- 53:48लेकिन ये तोड़ लेते हैं या कोई बेचने वाला उससे खरीद लेते हैं।
- 53:54बात तो एक ही है अगर आप मीट बेचने वाले की दुकान से मीट खरीदोगे
- 53:59इसका मतलब ये है। के अगले दिनों को ज्यादा लेके
- 54:02आएगा खरीदना बंद कर दो आगे से वो लेके नहीं आएगा ही गुलशन रोकता
- 54:08होगा तुम जब फूल को तोड़ के आते हो एक गुल से तो नहीं।
- 54:22एक घुलसे तो उजड़ जाते नहीं, फूलों के बाद एक घुलसे तो उजड़
- 54:37जाते। नहीं।
- 54:39फूलों के बाद क्या हुआ? तुने भुजा डाला मेरे घर का चिराग
- 54:51हल्ला। कम नहीं है रौशनी हर श में तेरा।
- 55:17नूर है सामने तेरे तेरा बंदा बहुत मजबूर है है खुदा हर फैसला।
- 55:35तेरा मुझे मंजूर है, सामने तेरे तेरा बंदा बहुत मजबूर है।
- 55:51अल्लाह वो। एक गुल से तो उजड़ जाते नहीं,
- 56:07फूलों के बाग बाग तो यही कहता होगा।
- 56:12क्या हुआ तुने बुजा डाला मेरे घर का चिराग कम नहीं है।
- 56:17रौशनी और भी बहुत है हर छः में तेरा नूर है, हर फूल में तेरी
- 56:23इबादत करने की क्षमता है। तुम इनके झांसे में मत आया करो
- 56:40अगर अपने भीतर वो उषा आनंद का पान करना चाहते हो रस्का तो इन
- 56:48लोभियों लोगों के पीछे मत लगा करो।
- 56:53भीतर का आनंद इतना प्यारा है इसको पीने के लिए बड़े बड़े ऋषि मनी
- 56:59पीर पैगम्बर तरस गया है। एक बूंद न मिली और जिसे मिली वो
- 57:07निहाल हो गया। उसकी खोज करना, उसकी तरफ पांव
- 57:12बढ़ाना। और मौका है, चूक मत जाना है।
- 57:18बा मुश्किल यह मौका आया कर में आवे कपड़ा नदरे मोख तो वार नदरे
- 57:25हुई तो मुक्ति भी हो जाएगी उसकी रहम तो हुई तो तुने।
- 57:33सर्वोच्च मानव शरीर मिला इस इसका तुम लाभ उठा सकते हो, लेकिन लाभ
- 57:44उठाने के बजाय अगर तुम। इसको जीर्ण शीर्ण करने पर तुल गए
- 57:53हो तो यह है तुम्हारा भाग्यहीनता का सबूत है तुम्हें जेलों में बंद
- 58:01नहीं होना चाहिए। अगर गलती से जेलों में भी बंद हो
- 58:09गए हो तो अपने भीतर उतरना शुरू करो।
- 58:19मैं इन पैरोकारों से कहता हूँ कि मेरे प्रवचनों को जेलों में जरूर
- 58:23सुनाया करें। जेल सुधार नाम तो रख दिया आपने
- 58:31सुधारोगे कब? ऐसे ही प्रवचनों से व्यक्ति सुधर
- 58:37जाता है। कोई जन्मजात बदमाश में पैदा हुआ
- 58:41करता है। तुम्हारा समाज तुम्हारी संस्कार
- 58:46इसे विकृत कर देते हैं, तुम्हारी कु व्यवस्थाएँ इसे विकृत कर देते
- 58:51हैं। यह जन्मजात बदमाश में पैदा हुआ
- 58:54था। ये जन्मजात कातिल नहीं था।
- 58:59कुछ तो गड़बड़ है तुम्हारे समाज में, तुम्हारी परंपराओं में,
- 59:03तुम्हारी वितरण प्रणालियाँ में कहीं तो कुछ गड़बड़ है।
- 59:09जो आज सारी तरफ अंधकार ही अंधकार है, रोशनाई की आनंद की कोई बूँद
- 59:14दिखाई नहीं पड़ती तो स्वतंत्र दोष से डरने वालो मत डरो।
- 59:27यह खुद होगा जैसे मल मूत्र का त्याग होता है।
- 59:32अगर कोई मूर्ख तुम्हें कहे मरमूत्र को बचा लो ये तो बड़ा
- 59:35कीमती है नहीं नहीं, उसकी बात मत मानो कोई कुश्ते कोई नुस्खे मत
- 59:44मानना छोड़ दो इनको ये लोभी लोग हैं, ये ठग हैं।
- 1:00:02वीर को राजकीय एक बूंद बड़ी महकता रखती, इसको बचा लो और जो खो जाए
- 1:00:11अपने आप उसकी परवाह ना करो। दट इस दट।
- 1:00:14इस फ़ौरन मटेरियल भी जाती है। द्रव्य है वो।
- 1:00:18वह जाएगा जाएगा, मलमूत्र की तरह जाएगा, उसको त्याग दो, उसका फिक्र
- 1:00:22मत करो। वह प्रकृति ने जो सेंस निकालना
- 1:00:26था, निकाल लिया और तुम्हारे भर में भेज दिया।
- 1:00:30उसकी बिल्कुल चिंता मत करो। उसके लिए दवाई वगैरह मत लो।
- 1:00:33ये ठग लोग हैं। ये दिन में जीन्स बेचते हैं।
- 1:00:40रात को गुप्त अंगों को बढ़ाने के लिए दवाई भेजते हैं।
- 1:00:44इनको शर्म नहीं आती? ये व्यापारी हैं और व्यापारी भी
- 1:00:52कुटिल, व्यापारी, दुष्ट, व्यापारी जिनके भीतर ज़रा भी।
- 1:00:58परमात्मा की द्यादुता नहीं है, कुछ नहीं ले के जाएंगे, बस धन
- 1:01:11रोज़ बढ़ता जाएगा। इनका अहंकार भी बढ़ता जाएगा।
- 1:01:15संघ कुछ नहीं जाएगा। किसी के कुछ नहीं जाता।
- 1:01:20सिकंदर भी खाली हाथ चले जाते। लुकमान भी खाली हाथ चले जाते,
- 1:01:32लेकिन मेरे पास जवाब परिपूर्ण ब्रह्मचर्य को साध कराओ।
- 1:01:42क्योंकि तुम जीतने ब्रह्मचर्य से गुजरकर मेरे पास आओगे, उतनी ही
- 1:01:46तुम रेंजेज़ को ज्यादा मात्रा में पी पाओगे एक नुक्शा बताया मैंने।
- 1:01:57तुम परिपूर्ण ब्रह्मचर्य रखना पांच चार महीने कम से कम फिर मेरे
- 1:02:02पास दीक्षा लेने आना तुम पाओगे मेरे द्वारा प्रसारित देखी गई सभी
- 1:02:09तरंगों को तुम पूर्णतः जजब कर लो। और तुम्हारे वो शरीर का अभिन्न
- 1:02:19अंग बन जायेगा। तुम्हारी आत्मा का अभिन्न अंग बन
- 1:02:22जायेगा। तुम खुशहाल हो जाओगे, नाचने लगोगे
- 1:02:26वे तुम्हे मस्त कर देंगे तुम्हारी आँखें मूँद जायेंगी तुम मस्त हो
- 1:02:32गए यही मस्ती हमारी जरूरत है भीतरी।
- 1:02:36आत्मा पुकार रही है इसको संतुष्ट करो शरीर को संतुष्ट करने की, सो
- 1:02:44बहाने तुम्हारे पास है स्त्री के तुम्हारे पास है मन को भी तुम
- 1:02:48संतुष्ट कर देते हो लेकिन आत्मा संतुष्ट नहीं होती क्योंकि आत्मा
- 1:02:52को उसका भोजन न मिलता है। आत्मा का भोजन है, सत्संग संत के
- 1:02:59संग व्यर्थ चाँद है जितनी भी कथा वचक है, कैसा भी है इनसे?
- 1:03:08मैं कहूंगा कि जेदो में जाके अवश्य का प्रवचन किया करें।
- 1:03:14तुम्हारे जाने से कुछ तो बदलेगा कहानियों झूठी, मुठी ही सही लेकिन
- 1:03:22यहाँ जरूरत नहीं है। वहाँ जरूरत है जो भटक गए हैं यहाँ
- 1:03:29तो सभी ठीकठाक चल रहा है। वहाँ जरूरत बहुत भारी है, वहाँ
- 1:03:36जाकर अवश्य प्रचार किया करे, बजाए इसके कि तुम खुद तिहाड़ जेल में
- 1:03:41बैठो, तुम तिहाड़ जेल के लोगों को बदलो, ऐसे कुकृत मत करो जो कानून
- 1:03:49तुम्हें जेलों में धकेल दे। सध कृत्य करो कि वहाँ बैठे हुए
- 1:03:57लोग सुधर जाए और वाकई ही ये जेल जिसे हम सुधार गृह कहते हैं ये
- 1:04:02वाकई ही सुधार गृह हो जाए। श्री कृष्ण गोविंद।
- 1:04:13हरे मुरारी हिनाथ नारायण वासुदेव। श्री?
- 1:04:31कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी हिना थ नारायण यन वासुदेव।
- 1:04:50पे तो मात स्वामी सखा हमार। पे तो मात स्वामी।
- 1:05:08स्वामी सखा हमार हेनाथ नारायण व सुदेव।
- 1:05:23श्री? कृष्णबवन हरे मुरारी हे नाथ
- 1:05:35नारायण वा सु दे व। आहटें जा गुठें आहटें थम गईं
- 1:05:58रास्ते। हंस दिए आहते, जाग उठे रास्ते हंस
- 1:06:12दे थाम कर दिल उठे। हम किसी के लिए कई बार ऐसा भी
- 1:06:33धोखा हुआ है। कई बार ऐसा भी धोखा हुआ है।
- 1:06:49चले आ रहे हैं वो नजरें। झुकाए जब याद आए बहुत ही याद आए।
- 1:07:15वो जब याद आए बहुत ही याद आ गमे ज़िन्दगी के अंधेरों में हम ने।
- 1:07:37चिराग ए मोह व तू जलाये बौंझाएं। बहुत याद आए।
- 1:08:00वो जब। याद आए बहुत याद आए।
- 1:08:11श्री कृष्ण गोविंद, हरे मुरारी, हेनाथ नारायण वासुदेव व श्री
- 1:08:26कृष्ण गोविंद। हरे मुरारी हेनाथ नारायण वासुदेव
- 1:08:40पितुमात स्वामी सका हमार। पितुमात स्वामी सखा हमारे हे नाथ
- 1:08:57नारायण यन वासुपेवा श्री कृष्ण गोविंद आरे मुरारी।
- 1:09:07नाथ, नारायण, वासुदेव व हो। धन्यवाद।