Latest / Baba ji Vijay Vats / 25 May 25 - कर्म और प्रारब्ध: क्या हम भाग्य बदल सकते हैं? कर्म, पुनर्जन्म और प्रारब्ध का गहरा रहस्य!
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- 0:01दुख क्यों होता है? आदमी दुखी कब होता है?
- 0:15दुख होता है व्यक्ति की जीस हिसाब से अपनी जिंदगी को चलाना चाहता
- 0:23है। उस ढंग से उसकी ज़िन्दगी नहीं चल
- 0:28पाती। प्रकृति उसी ढंग से ज़िन्दगी नहीं
- 0:31चला पाती। यही कारण है कि व्यक्ति दुख होता
- 0:37है और दुख का कोई भी। कारण?
- 0:45व्यक्ति चाहता है कि मैं जज बन जाऊं।
- 0:50लगता नहीं चपरासी प्रकृति के विरुद्ध जो चलता है उसका दुखी
- 1:02होना सौभाग्य। अगर दुखी होना चाहते हो तो
- 1:11प्रकृति के विपरीत चलना शुरू हो। अगर बीमार होना चाहते हो तो
- 1:19प्रकृति के प्रति कूल। खाना पीना शुरू करता हूँ ये मार्ग
- 1:29दुखी होना चाहते हो तू जो होता है उससे संतुष्ट ना हो, तृप्ति ना
- 1:42कर। कभी भी सुखी नहीं जो मिलता है
- 1:52उसमें आप राजी ना रहो। आप को चाहे संसार की समस्त।
- 2:03जब तक आपको तृप्ति नहीं मिलती तब तक आपको खुशी नहीं मिलती तृप्ति
- 2:18के बिना सारे सुख अधूरे। व्यक्ति दुखी क्यों होता है?
- 2:31व्यक्ति दुखी होता है। प्रकृति की इच्छा के विपरीत चलने
- 2:36के बाद व्यक्ति चाहता है की मैं राज़ करूँ लेकिन उसको।
- 2:46अधीनता स्वीकार करनी पड़ती है। किसी की राज़ कोई करता है, वो दास
- 2:51बन जाता है, उसकी आत्मा को मंजूर नहीं होता इसलिए वो दुखी होता है।
- 2:57अपनी इच्छाओं के कारण व्यक्ति दुखी है।
- 3:03ने कहा है। इच्छाएं बहुत है तो रुलाई है,
- 3:10इच्छाएं कम है, शहनशाई है, इच्छाएं बिलकुल नहीं तो खुदाई इस
- 3:20घड़ी तुम्हें कुछ भी नहीं चाहिए। कुछ भी नहीं चाहिए, खुशी भी नहीं
- 3:31चाहिए, पद भी नहीं चाहिए। धन भी नहीं चाहिए पुत्रपुत्राधि
- 3:42भी नहीं चाहिए। और कुछ भी तुम्हारी इच्छा नहीं,
- 3:50तुम भगवान हो तुम सहन क्या हो और जीतने तुम्हारी इच्छाएं है की मैं
- 4:00वो गंजों में सम्राट गंजों में। मैं सिकंदर बन जाऊं कुछ नहीं, तुम
- 4:06दुखी हो जाओ इच्छाएं बहुत है तो रुदाई है, कम है, शहंशाह है
- 4:13बिलकुल नहीं तो खुदाई है, ईश्वर को कोई इच्छा नहीं।
- 4:26इसीलिए वो कोई दुख ही नहीं होता। मौज में है, आनंद में क्यों चल
- 4:35रहा है, कैसा चल रहा है, खूब वो बढ़िया चल रहा है।
- 4:44पूछा है कि बाबा नानक ने कहा जो तुद पावै साईं, पल्लिका तू सदा
- 4:53सलाम नरंका लेकिन ध्यान रखना बाबा जी ने ये नहीं कहा।
- 5:04कि जो तुद पा वे साईं पलिका, अगर तुम उसकी राजा में राजी नहीं
- 5:15रहोगे तो तुम सुखी नहीं। उन्होंने अपने संदेश में यह कहा
- 5:27कि वो इतना विराट है, विशाल है, पताला पाताल लख आगासा आगास।
- 5:37ओढ़क ओढ़क बाल थके वेदकैण एक बात 618 केणकते बा अशुदु इकदात लेखा
- 5:50वेद लिखिए, लेख हुए विनाश। उसने ये कभी नहीं कहा के उस विराट
- 6:01के साथ लड़ाई शुरू कर दे। विराट चाहता है तुम्हे कैसा बनाना
- 6:13तुम कहते को हम वैसा नहीं बनेंगे। तो निश्चित ही तुम दुख पौगे
- 6:19उन्होंने एक सूत्र बताया, उन्होंने तुम्हें कोई आदेश नहीं
- 6:26दिया कि उसके रजा के अंदर राजी रहो नहीं।
- 6:31वो कहते हैं कि अगर तुम उसकी रजा में राजी रहोगे।
- 6:35तो सुखी रहोगे? इन दो बातों में फर्क है वो ये
- 6:41कहते नहीं हैं, उसकी रजा में राजी रहो।
- 6:45वो कहते हैं, अगर राजी नहीं रहना है तो दुखी रहने के लिए दुखी होने
- 6:51के लिए तैयार हो जाओ। अगर उसकी रजा में राजी रहना है तो
- 6:58तुम सूखी हो जाओ, तुम्हे उपदेश नहीं दे रहे हैं।
- 7:02एक तथ्य बता एक सत्य बता जो तुद पावै साईं परी का अगर तुम ऐसा
- 7:10करके चलोगे ऐसा मान के चलोगे? जो भी कुछ हो गया, तुम्हारी
- 7:16इच्छाएं के विरुद्ध हो गया या तुम्हारी इच्छाएं के अनुकूल हो
- 7:21गया अगर तुम उसको वैसा ही स्वीकार कर लोगे।
- 7:24प्रफुल्लित हृदय से तो तुम सुखी हो अगर तुम उसके साथ लड़ाई करने
- 7:31शुरू हो जाओगे। मुँह सुझा लोगे?
- 7:35कि जैसे मैं चाहता था वैसे नहीं हुआ तो तुम दुखी हो जाओगे
- 7:39तुम्हारी मर्जी जो रास्ता ठीक लगे चुन सुखी रहना है जो भी वो कर दे
- 7:51उसमें तुम। राजू राजी यार दी राजा देवचरण
- 8:00कुल्ली चिप में तक ना तुम्हारे पास दिव्य रहे ना रहे लेकिन वो
- 8:10तुम्हें जीस रजा में रखता। उससे अगर तुम राजी हो गए तो उससे
- 8:16बड़ी खुशी तुम्हें किसी से नहीं मिल पाई।
- 8:22सबसे बड़ी खुशी उसकी रजाम में राजी रहे।
- 8:30पूछा है कि जो कुछ करता है, ईश्वर ही करता है, आदमी कुछ नहीं करता।
- 8:44ये थोड़ा गया शायद थोड़े प्रयत्न से।
- 8:52एकाग्र से हो के समझना पड़ेगा जो कुछ करता है, ईश्वर ही करता है।
- 9:00क्या वाक्य ही जो कुछ करता है ईश्वर करता है और तुम कुछ नहीं
- 9:05करते? जो कुछ करता है ईश्वर करता है एक
- 9:17लेवल पे तो ये बात बिलकुल ठीक है उनसे लेवल पे तुम्हारे प्रारब्ध,
- 9:24जन्म के कर्मों के हिसाब से फिर समझ लेना।
- 9:31तुमने पिछले जन्मों में जो भी कुछ किया, उसका जो भी उन्होंने फल
- 9:37निर्धारित किया, मालकिन जो तुद पा गए, आपने जैसा कि उसका पद निश्चित
- 9:46कर दिया। आप ने आप की प्रकृति ने मेरे
- 9:53कर्मों का मेरे अतीत के जन्मों का किया हुआ कर्मों का फल आप ने जो
- 10:00भी निर्धारित कर दिया वो। ठीक कर दिया।
- 10:11ओके, ईश्वर या ईश्वर की प्रकृति? कुछ भी कहिये वो कभी कुछ गलत नहीं
- 10:21किया। अगर आप दुखी हो तो प्रकृति ने मात
- 10:27नहीं खायी। आपने पाप किया?
- 10:30प्रकृति में फैसला देने में कोई गलती नहीं।
- 10:36आपने गलती की, आपने पाप किया होगा तो उसने आपको दंड दे दिया जो कुछ
- 10:44करता है। ईश्वर करता है और सही करता है और
- 10:51आपके भले के लिए करता है क्योंकि प्रारब्ध के कर्म तो आपके कर चूके
- 11:00हैं। वो तो बीत गए पिछले जन्मों के
- 11:04कर्म। आपके कंप्यूटर में उसके फल फीड हो
- 11:10गए वो आपको भोगने ही पड़ेंगे। तो आप क्या कहोगे?
- 11:17ईश्वर जो कुछ करता है, अच्छा ही करता है।
- 11:23ये कहोगे कि ईश्वर जो कुछ करता है।
- 11:26वो गलत करता है। ये कहोगे प्रारब्ध के जन्म के
- 11:32कर्मों के हिसाब से जो कुछ करता है, ईश्वर करता है, वो ठीक करता
- 11:38है क्योंकि वो कर्म तो तुमने कर दिया, पिछले जन्म में उसका फल भी
- 11:43निर्धारण हो के तुम्हारे। कंप्यूटर में फिर हो वो तुम्हें
- 11:48भोगने ही पड़ेंगे हर हालत में और क्योंकि आपने वो किए हैं, आपके
- 11:55रिकॉर्ड में बोलते हैं, वो ईश्वर ने उन कर्मों के हिसाब से।
- 12:05बिलकुल उचित पुरस्कार या दंडा आपको लिख दो।
- 12:13जैसे ही वो फल की बारी आएगी आप सुखी या दुखी हो जाओगे तो ईश्वर
- 12:20जो कुछ करता है ठीक करता है, ठीक जो आपने पाप किया।
- 12:25दुख कह दिया जो आपने पुण्य किया, सुख दे दिया, ये गलत किया नहीं
- 12:31ठीक किया इस दृष्टि से ईश्वर जो कुछ करता है ठीक करता है प्रारब्ध
- 12:39जन्मो के कर्मों का हिसाब देने के लिए।
- 12:46प्रारब्ध के जन्मों के कर्मों का हिसाब देने के लिए निर्धारित करने
- 12:54के लिए ईश्वर ने जो निर्धारित कर दिया, बिल्कुल सही कर दिया।
- 12:59इसका अर्थ भी। लेकिन श्रद्धा के लिए नहीं, पिछले
- 13:06जन्म में वो तो आपने कर दिया उसे आप वापस भी नहीं ले सकते ना?
- 13:10इसलिए हमें कहना ही पड़ेगा। अगर आपने 2+2 कर दिया तो वो तो
- 13:16चार हो गया तो आप कैसे कह सकते हैं कि ईश्वर ने।
- 13:21जो ये किया वो गलत किया नहीं ईश्वर ने आपने दो और दो किया था
- 13:27ईश्वर ने आगे लिख दिया, चार तो गलत किया ईश्वर ने आपके कर्मों का
- 13:37जोड़ जमा करके वहाँ लिख दिया उसका जवाब।
- 13:41आपने पाप किया, उसने लिख दिया दुख, आपने पुण्य किया, उसने लिख
- 13:47दिया सुख कहाँ गलती हुई ईश्वर से तो उन्होंने जो कहा वो इस दृष्टि
- 13:56से करो, ये ईश्वर जो कुछ करता है। ठीक करता है।
- 14:02ठीक करती है कि बिल्कुल आपके जन्म के कर्मों के हिसाब से उसने फल
- 14:09खिला। उसके अतिरिक्त ना उसने कम दिया,
- 14:15ना उसने ज्यादा दिया। आगे ईश्वर जो कुछ करता है ठीक
- 14:26करता है, ठीक तो कर दिया, आपने पाप किया था, उसने तो दे दिया दे
- 14:34के दिया। आपने फ़ोन किया था, उसने शोक लिखी
- 14:38थी, लेकिन सदा ही ईश्वर जो कुछ करता है वो ठीक करता है, इसका
- 14:45मतलब ये तो नहीं ईश्वर जो कुछ करता है, अच्छा ही करता है, ठीक
- 14:53ही करता है। लेकिन एक शब्द मैं जोड़ दूँ।
- 14:58प्रारब्ध जन्मों के फल में प्रारब्ध पिछले जन्मों के जो कर्म
- 15:06आपने किए उसके फल के हिसाब से बिल्कुल ठीक फैसला कर।
- 15:14यहाँ लगेंगी आपकी ये बात आगे के लिए नहीं आगे के लिए आप अपने
- 15:23कर्मों की दिशा बदल दोगे तो ईश्वर भी अपने फल की दिशा बदल देगा।
- 15:31पाप किए उसने दुख लिखा। पुण्य करने लग जाओ आपके हाथ में
- 15:35है उसने आपको स्वतंत्र चेतना बनाया है, तुम चाहो आप कर सकते
- 15:43हो, तुम चाहो पुण्य कर सकते हो कौन रोकता है मुझे अक्सर लोग कह
- 15:52देते हैं। ये कैसा भगवान है?
- 15:55लोग बाप किए जाते हैं लेकिन फिर भी सुखी लोग पुण्य किए जाते हैं
- 16:02फिर भी दुखी है वो फला आदमी कितना पुण्य करता है, कितना दान करता
- 16:07है, फिर दुखी है फला आदमी कितने डाके मारता है लोगों को।
- 16:12कष्ट कर दी, सुखी है, आनंद मान रहा है नहीं ये कर्मों की
- 16:19श्रृंखला आपके दंड से नहीं जगी। अभी जो आप दुखी हैं तो वो।
- 16:27दुःख का कोई बीज होया होगा, वो अंकुरित हुआ होगा, उसका फल होवे
- 16:34जो आपने पुण्य का कर्म खोया है, उसका फल सुख उनके बीज के अंकुरित
- 16:44होने के बाद फल लगेगा। सुख मिले।
- 16:49हो सकता है जब आप सुख मानने का वक्त आपका आ जाए उस वक्त आप आप कर
- 16:57रहे हों फिर दूसरा भी कहेगा के कर तो ये रहा है पाप, आ रहा है ये
- 17:04सुख। लेकिन ये नहीं ये सुख तो प्रारप्त
- 17:09जन्म के कर्म बीच में आड़े आ गए। उसका ले रहा है वो भी तो बैलेंस
- 17:14करने हैं, वो भी तो भोगने हैं और अगर आप पुण्य कर रहे हो और उस
- 17:20वक्त भोग रहे हो दुख? तो ये भी गलत है क्योंकि पाप
- 17:27कर्मों के प्रारब्ध, जन्म के पाप के जो दुख होगा वो उस घड़ी आप भोग
- 17:36रहे हो, अब जो आप पुण्य कर रहे हो उसका बीज पनपेगा फलेगा और फल के
- 17:43अपना। जब फल देगा आप सुख भोगोगे जब सुख
- 17:48भोगने का वक्त आया, जब उस बोए हुए बीज ने फल देना शुरू किया, हो
- 17:55सकता है आप उस घड़ी पाप कर रहे हो तो लोग देखने वाले क्या कहेंगे?
- 18:01लोग कहेंगे की ये कर तो रहा है पाप।
- 18:06हो गया है। दुख और जीस वक्त आप सुख भोग रहे
- 18:12हो। हो सकता है आप उसको कर रहे हो।
- 18:14जीस वक्त आप दुख भोग रहे हो। हो सकता है आप उस वक्त।
- 18:23तो देखने वाले फिर यही कहेंगे कि ये उदाहरण है।
- 18:26हमारे सामने ये आपके सामने एक मेज़रमेंट है कि ये कर्ता पुण्य
- 18:33है वो रहा है दुख इसलिए हमें पाप ही करनी चाहिए यहाँ भ्रांति।
- 18:44कर तो रहा है ये पाप भोग रहा है सुख इसलिए पाप ही करने चाहिए उर्फ
- 18:54फला कर तो रहा है पुण्य दान भोग रहा है दुख।
- 19:01इसके लिए पुणे नहीं करना चाहिए। आप उसकी उस वक्त की अवस्था भोग की
- 19:08देख के फैसला ले लोगे, लेकिन ये फैसला आपका कर दे।
- 19:15देखिए बीज आपने अब हुआ है। पानी लगेगा सूरज की करनें, उसको
- 19:22खिलाएंगी उनको फूटेगा छोटे छोटे नन्हे नन्हे पौधे होंगे उठेंगे
- 19:29झूमेंगे तने लगेंगे पेड़ बनेगा फूल लगेंगे, फल लगेंगे।
- 19:38फल लगेंगे फल पकेंगे पकेंगे और फिर वो फल गिरेंगे जब फल गिरेंगे
- 19:48ये तुम्हारे आम नहीं हैं जो आप केमिकल लगा के जल्दी पका लो
- 19:54तुम्हारा फल नहीं है ये आम। तो तुम केमिकल लगा के जल्दी पका
- 20:00लोगे नहीं ईश्वर की सृष्टि में कोई भी कर्म ना जल्दी पकता है ना
- 20:05देरी से पकता है तय वक्त पे पकता है तय वक्त जो सीमा तय की गई है।
- 20:16के आम का वृक्ष इतनी देर में फल देगा कनक का बीज, ज्वार का बीज,
- 20:23बाजरे का बीज सब के वक्त अपने अपने कजूर इतनी देर में फल देगा
- 20:34इमली। इस वक्त पे फल दे दी सभी
- 20:38निर्धारित ईश्वर की सृष्टि में आपके संसार जैसी व्यवस्था नहीं
- 20:45है। फल को पकाने की नेचुरल फल पकता है
- 20:50और गिरता है। जब गिरता है तब आपको भोगना पड़ता
- 20:55है। और तब जब आप पुण्य कर्मों के पल
- 20:59मीठे आम चख रहे होते हैं। अगर आप तब पाप कर रहे होते हैं उस
- 21:05वक्त तो देखने वाले क्या कहेंगे कि ऐश तो ये कर रहा है और पाप भी
- 21:11ये कर रहा है। इसका मतलब इस की सृष्टि में न्याय
- 21:15व्यय नहीं है। पापी को ये सन्देश जाएगा, लेकिन
- 21:22ये सत्य नहीं। सत्य तो ये है कि जो वो सुख भोग
- 21:27रहा है वो उसके कर्मों के बकाया है।
- 21:32ओके क्या उन्होंने किया? है ना पुण्य का फल भी तो भोगना है
- 21:40अगर पिछले जनम में पुण्य करता करता इसका देहांत तो हो गया तो कब
- 21:45हो जाएगा उसका सुख? अगले ही तो जनम में भोग लेकिन अगर
- 21:50पिछले जनम में। पाप किए है और मर क्या पाप करते
- 21:55थे तो फिर अगला घर जो आएगा उसमें जाएगा, वही तो भोगना पड़ेगा।
- 22:01सो अक्सर लोग यहाँ आके गलती खाये है, कर्म के फल में ये फला मौज कर
- 22:08रहा है और पाप कर रहा है। अरे हम दुःख कर रहा है लेकिन दान
- 22:12कर रहा है लेकिन यहाँ उलझना मत, ये फलासपुर मैंने आपको समझा एक ही
- 22:19व्यक्ति है। अगर वो फाप करके कतल करके घर बदल
- 22:23ले तो क्या उसका दंड नहीं मिलेगा? मिलेगा?
- 22:30इस दुनिया में तो शायद आप इस शहर से उस शहर या उस देश को भाग जाओ
- 22:35लेकिन यहाँ भागने वाला नहीं है व्यक्ति क्योंकि सारे देश उसके
- 22:39है। कोई भी देश उसका ऐसा नहीं है जो
- 22:43की उसने ना बनाया हो, जिसकी मल्की है तो उसकी ना।
- 22:49जो कुछ करता है, सही करता है, ईश्वर करता है, बिल्कुल ईश्वर
- 22:53करता है, सही करता है, बिल्कुल सही करता है।
- 22:58लेकिन प्रार्थ के मामले में जो कर्म आपने कर दिए, ईश्वर रूपी जज
- 23:07के पास गए। उसने फैसला कर दिया इसको इतने साल
- 23:12की सजा या इसको ये पुरस्कार दे दो।
- 23:16ये कर्मों की तुलसु किया अब रह गए ताजा कदम अगर आप स्याने हो।
- 23:28वृद्ध ने कहा है वृद्धा जै तू अकल लगती हैं, काले लिख न लेख आप पलडे
- 23:40गिरबान में हैं, सिर नीवा कर देख अगर तू अकलमंद है।
- 23:48तो पाप ना करो झांक के देख की जब जब तुने पाप किया तो पाप जब जब
- 23:59तुने पुण्य किया सुख पाया आप पर जुड़े गर्बान में हैं।
- 24:08उसकी प्रकृति के न्याय व्यवस्था के भीतर कोई व्यवधान पढ़ने को
- 24:13नहीं है। कोई वहाँ पर हेराफेरी नहीं होती
- 24:17है, कोई दगाबाजी नहीं होती है। कोई रिश्वतखोरी नहीं होती है, ऐसा
- 24:22मत समझो। हमारे शहर में एक बड़े सेठ का
- 24:29लड़का बहुत साल पहले की बात है। लड़का कार चला रहा था, सीख रहा था
- 24:39तो नए नए लड़के जब ये सीखते है, थोड़ा तेज चला अब लगती है।
- 24:46तेज़ चलाने लगा स्टेरिंग संभलाने एक तरफ खींच के ले गई गाड़ी आगे
- 24:56से एक लड़की आ रही थी 1012 साल वो बेचारा कुछ ले गई।
- 25:04सेठ को पता लगा कि मेरे बेटे से ऐसा कतल हो गया है कि उसने एक
- 25:11ब्राह्मण को बुलाया। विष्णु जी की आरती था शंकर जी की
- 25:19आरती। करपुर गौरम करुणावतारम संसार सरम
- 25:25भोजकेन्द्रारम सदावसंतम हृदयर विन्दे भवम भवानी सेतन प्रार्थना
- 25:38क्या करेगा इस? ईश्वर तुम्हारे पाप को क्षमा करने
- 25:44को नहीं है, वो न्याय करेगा तुम्हारी यह स्तुति करने से या
- 25:48नाम लेने से या प्रार्थना करने से माफी मांगने से माफी उसके अगर
- 25:55माफ़ करेगा तो न्यायकारिता खूब बैठेगा।
- 25:59एक व्यक्ति या तो न्यायकारी हो सकता है या मेहरबान हो सकता है।
- 26:09दयालु हो सकता है। अगर दयालु है तो न्यायकारी नहीं
- 26:14रहेगा क्योंकि माफ़ कर दिया, फिर न्याय किसी दूसरे व्यक्ति को तो
- 26:17न्याय मिला ही नहीं। ये तो तभी चलेगा अगर न्याय दोनों
- 26:24पक्षों को न्याय। उसने लड़के को कुचल दिया।
- 26:29हत्या का मामला दंड मिलना चाहिए। वो लड़की मरी गई।
- 26:35उसको पुरस्कृत होना चाहिए। उसकी इस हिस्टरी में जो भी
- 26:39पुरस्कार बनता है, करता है, ईश्वर ठीक करता है, लेकिन प्रारब्ध करना
- 26:52तो अब प्रार्थ के बाद तुम अब करम पर इस वक्त ऐट दी मोमेंट।
- 27:01उसमें ईश्वर कुछ नहीं कर रहा है। तुम सही क्या कुछ भी नहीं कर रहे
- 27:06हो ना सही कर रहा है ना गलत है इस कर्म के लिए तो उन्हें तुम्हें
- 27:12स्वतंत्र छोड़ा हुआ है पुण्य करो, पाप करो।
- 27:17मैं कोई बीच में डिस्टर्बेंस नहीं होता।
- 27:21पुणे भी कर सकते हो, आप भी कर सकते हो मेरे पिता के लिए पिछले
- 27:27जन्मों ने तुमने जो किया मैंने वो प्रकृति के अपने अपने कर्मों के
- 27:32अनुसार आपको फल दे। उसको भूल अगर पीछे आपने पाप किये
- 27:42हैं वो दुख पाया मत करो पाप सीधी सी व्यवस्था तो आप मत करो पुण्य
- 27:51करना शुरू कर दो पुण्य का फल सदैव सुख।
- 27:58पाप का फल सदैव कड़वा हो दुख हो ये मान के काले लिख न लेख फरीदा
- 28:09जेतुं अकल लतीफ हैं काले लिख न लेख।
- 28:14आप पनले जबान में है फिर निमा कर दे कोई हेराफेरी, कोई रिश्वतखोरी
- 28:25नहीं होती, कोई बेमानी नहीं होती, कोई भी अन्याय नहीं होता, किसी के
- 28:33साथ भी। ईश्वर जो कुछ करता है, अच्छा करता
- 28:45है तुम्हें पापों का दंड दुख देके उसने अच्छा किया कैसे मुझे?
- 28:58के पापों का दंड दुख देख के ईश्वर अच्छा कैसे करता है?
- 29:08मैंने कहा अच्छा तुम ऐसे करो, सिर के ऊपर वो गट्ठल होता है, उसके
- 29:13अंदर ईटे डाल लो। उसमें 1015।
- 29:21ये ईंटें हैं पाप तुम क्या सोचते हो की ये ईंटें तुम्हारे सर के
- 29:30ऊपर ही रखी रही और तुम उसका भार सदा के लिए झेलते रहो, तुम ये
- 29:38चाहोगे? के ये ईंटों का भार सिर के ऊपर से
- 29:41जितनी जल्दी हो सके उतर जाए। मैं भार मुक्त हो गया।
- 29:47ईंटें इस बठली में से निकाल के बाहर फेंक दी जाए तो जब वो ईंटें
- 29:52बाहर फेंकेगा तो भोग के आपको दुख का फल भोगना पड़ेगा।
- 29:59जैसे जैसे दुःख भोगते जाओगे, ईंटों का भार कम होता जाएगा।
- 30:06बाप ये दुःख इसका मतलब ये होता है ईश्वर जो कुछ करता है।
- 30:20अच्छा ही करता है, लेकिन जो कहते हैं की ईश्वर ही करता है।
- 30:30ये थोड़ा भेद है अगर ईश्वर ही करता है।
- 30:39ईश्वर ही करवाता है तो फिर दंड मनुष्य क्यों करता है?
- 30:50आप से मैंने पाप करवाया। मेरी व्यवस्था ने आपको पाप करने
- 30:58पर मजबूर कर दिया, आपने पाप कर दी, आपने मेरी व्यवस्था के कारण
- 31:09पाप किया, दंड आप तो होगी अकेले। आपने परमात्मा की इच्छा से
- 31:22क्योंकि करवाया तो परमात्मा ने करवाया, परमात्मा ने किया आपने
- 31:27लेकिन करवाया तो परमात्मा ने दंड आप क्यों भोगो?
- 31:32करवाया तो परमात्मा? दंड परमात्मा ही भोग तुम क्यूँ
- 31:38भोगो? जब दंड परमात्मा भोगेगा तो हिसाब
- 31:44परमात्मा करता है तो परमात्मा ही भोगता है।
- 31:47देखिये एक बात को आप गौर से समझिए जो करता है।
- 31:56वो ही भुगतान अगर आप करोगे तो आप ही भोगोगे ये सूत्र स्वर्ण
- 32:07अक्षरों में निकलेगा ये सूत्र है। कर्म का बड़े से बड़ा गहरे से
- 32:12गहरा सूत्र है। जो करता वो ही भोगता अगर आपने
- 32:19किया आप ही भोगोगे अगर ईश्वर ने किया जो कुछ करता है, ईश्वर करता
- 32:26है अगर ईश्वर ने किया ईश्वर। अगर आप भोग रहे हो तो निश्चित ही
- 32:41आपने किया होगा। अगर आप नहीं भोग रहे हो तो
- 32:51निश्चित ही आपने नहीं किया होगा। ये सूत्र है नेम है।
- 32:57ये सिद्धांत जो करेगा वो ही भोलेगा वो नहीं करेगा उसे भोगना
- 33:11भी। अगर ईश्वर करता है तो ईश्वर ही
- 33:19मूतेगा लेकिन यहाँ मुश्किल पड़ी ये भक्तों की अंधभक्तों की भक्ति
- 33:28क्योंकि भक्त सिर्फ शब्दों को। शब्दों के अर्थ कुल भगवान कृष्ण
- 33:35एक बहुत सुंदर शब्द था लेकिन वो तो शब्द ठीक बोल गए अर्थ तो हम
- 33:43करेंगे ना, वो तो चले गए बोल के अर्थ हमने करना है सर्वधर्म।
- 33:50तयज्ज मामेकुम शरणम वृक्ष सभी धर्मों को छूट सभी मतमतांत्रों को
- 33:59छूट मामेकुम शरणम वृक्ष मेरी शरण में आजा।
- 34:10मैं जो करवाऊं वो कर शरण की जो मैं करवाऊं वो कर
- 34:20सर्वधर्माणृत्जमामेकम शरण व्रत मेरी शरण में आजा सभी धर्मों को
- 34:27छोड़कर सभी धर्म। यानी सभी प्रकार के कहानी अपनी
- 34:36खुद की इच्छा के बिना किया हुआ कर्म दूसरे की शरण में जाके किया
- 34:45हुआ कर्म तुम्हारा दूसरे की शरण में चले गए तू।
- 34:49उसके आदेश के मुताबिक कर्म करोगे और वो तुम्हारा कर्म नहीं होगा,
- 34:54तुम करता नहीं हो हम तो हम सर्व पाप्य मोक्ष श्याम माँसूचित जब तू
- 35:00खुद की इच्छा से काम नहीं करेगा, मेरी इच्छा से काम करेगा, मुझे
- 35:05समर्पित होके काम करेगा तो भोगना भी तुझे नहीं पड़ेगा।
- 35:10अहम तो आम सर्व पापे सभी पापों से मैं तुम्हें मुक्त कर दूंगा,
- 35:17क्यूँ कर दूंगा? क्योंकि जब करवाया मैं मेरी शरण
- 35:20में से तो मैं ही करूँगा तुम्हें मैं सभी पापों से मुक्त कर दूंगा।
- 35:28लेकिन शर्त बड़ी भारी हम करते तो खुद है सारा दिन शाम को आके उसके
- 35:36मंत्र के आगे माता टेक लेते हैं के लिए बाबू आज के सारे कर्म तुझे
- 35:41समर्पित ये तो कोई कर्मों का हिसाब ना होवे।
- 35:47दिन भर तुम कर्म करो, शाम को आकर तुम सारा हिसाब उसको सौंप दो ये
- 35:55तो व्यापार है सेतु आपने। समर्पण का भाव उसी वक्त होना
- 36:06चाहिए। जीस वक्त आप कर्म करो, शाम को आकर
- 36:09नहीं समर्पण का भाव होना चाहिए। कर्म करने के बाद अगर कतल हो गया
- 36:15तो फिर जाके उसके साथ ले भाई प्रभु जी, ये सारे दिन में मैंने
- 36:21कहा। तुम्हारे समर्पित मोमेंटरिली उसके
- 36:29समर्पित होके कर्म करेगा तो वो जिम्मेदारी उसको समर्पित होके जो
- 36:37भी कर्म करेगा पुण या पाप पुण भी वो भोगेगा।
- 36:42पाप विभू हो के अहम् तो आम सर्वोपाध्याव मोक्ष श्याम सभी
- 36:48पापों के दंड से कह दिया, लेकिन हम बड़े होशियार हम कर्म कर देते
- 36:55हैं बाद में शाम को जाके सारे कर्म इकट्ठे पोटली बांध के।
- 37:00उसके पैरों में करा देते है कि ये तो सारे दिन के काम ऐसा नहीं
- 37:06इकट्ठे काम समर्पित नहीं होते मूवमेंटर भी हर वक्त, हर क्षण
- 37:11समर्पण भाव से काम करके, उसको समर्पण करके ये तेरे जैसा चाहे
- 37:18करवा। जैसा चाहे करवा राजी है हम उसी
- 37:26में जिसमें तेरी रज़ा है, जो तेरी रज़ा है, वो करवा अपनी तो इधर भी
- 37:35वह हवा है और उधर भी वह। पाप करवा ले तो भी मुज पुण्य करवा
- 37:42ले तो भी मुज हम तो हमको भोगना ही है ना हम पुण्य के फल सुख को
- 37:51भोगना चाहते हैं, ना हम पाप के फल दुख को भोगना चाहते हैं हम पुण्य
- 37:57या पाप? दोनों ही नहीं करना चाहते।
- 38:00हम कर्माती तो होना चाहते और कर्माती तुम कैसे होगे कर्माती तो
- 38:06हो जाओगे, कर्म फल त्याग करता न बन करता, न बनो अब करता तो फिर
- 38:15तुम रोकता भी नहीं। फिर तुम्हें अगर तुमने कर्ता भाव
- 38:21से काम किया की ये मैंने किया तो फिर तुम्हें भोगना भी अगर ईश्वर
- 38:27ने किया, अगर ईश्वर की आंख की कठपुतली बनते ईश्वर ने तुमसे
- 38:34करवाया तो ईश्वर जाने उसका। खुद वोगे ना हमें कोई ये था इसका
- 38:42क्या? सच में ईश्वर ही सब कुछ करता है,
- 38:46नहीं, ईश्वर सब कुछ नहीं करता है और जो कुछ करता है ठीक करता है
- 38:54सिर्फ। फैसला करता है, बिलकुल ठीक करता
- 38:58है जैसे जज फैसला करता है, बिलकुल ठीक करता है।
- 39:01ईमानदार जज फैसला करता है, बिलकुल ठीक करता है।
- 39:05क्या शंका है? परमात्मा जो कुछ करता है, ठीक
- 39:08करता है और परमात्मा करता है न्याय आगे के लिए तो आप स्वतंत्र
- 39:15है, जैसा करोगे। उसका दंड जो भी होगा या पुरस्कार
- 39:20जो भी होगा आपके खाते में ले के गया ईश्वर जो कुछ करता है, ईश्वर
- 39:29करता है नहीं प्रारप केजी आप स्वतंत्र हो।
- 39:35अगर आगे के लिए भी इश्यू नहीं करें तो फिर आपकी स्वतंत्रता नष्ट
- 39:40हो जाएगी। फिर कैसा?
- 39:42फिर जब आप स्वतंत्र ही नहीं हो जब आप पराधी हो तो फिर आपने
- 39:48स्वतंत्रता पूरक कर्म ही नहीं किया तो आप रोकोगे तो?
- 39:54करने के लिए आप स्वतंत्र हो स्वतंत्रता से अगर आपने पुण्य
- 39:58किया तो आप सुख दोगे। स्वतंत्रता से आपने पाप किया तो
- 40:04आप आप दुख होगे। ये आगे के लिए आपको मैत्र दे दिया
- 40:12ईश्वर। कि पिछला हिसाब तो तुम बदल नहीं
- 40:16सकते वो तो मैंने लिख आपने कर दिया मैंने उसका आगे के लिए तो
- 40:24तुम स्वतंत्र हो अगर तुम पाप करके दुख नहीं भोगना चाहते तो पाप मत
- 40:28हो पाप का फल तो दुख हो गया अगर आप।
- 40:33पुण्य करके सुख भोगना चाहती हूँ तो पाप छोड़ दो पुण्य करो सुख
- 40:39भोगना, ये आपकी इच्छा है, ईश्वर ने तुम्हें स्वतंत्र भी किया है
- 40:46और तुम्हें भी किया है कर्म ने वाद का रस्ते मा फले।
- 40:52ये शब्द यहाँ का है ये प्राणी कर्म करने में तो तू स्वतंत्र है
- 41:00तेरा अधिकार है कर्मण्य वाधिकार से तेरा अधिकार है कर्म कर मा
- 41:06फौलेशु कदाचन। लेकिन फल जो है मेरे हाथ।
- 41:12वो अपने अतीत में कर दिया प्रारब्ध कर्म, आपने कर दिए फल
- 41:17ईश्वर ने आपके लिख दिया आगे फॉर्वर्ड कैर्री हो गया अब आप
- 41:22जैसा करना चाहते हो आप आप करो पुण्य पुण्य करो, सुख चाहते हो
- 41:29पुण्य करो। दुख जाती है आपको अब आपकी इच्छा
- 41:33है, इस में कोई नहीं डालता। कोई इसमें ऑब्स्ट्रक्शन नहीं
- 41:41डालता, आप पूर्ण करोगे। आपको सुख मिल जाएगा।
- 41:48जो कुछ करता है, ईश्वर करता है नहीं, जो कुछ करता है, ईश्वर नहीं
- 41:53करता है। अगर जो कुछ करे, ईश्वर करे तो फिर
- 41:56आपकी स्वतंत्रता नष्ट हो जाएगी। फिर आपने कुछ किया ही, जो कुछ
- 42:00किया ईश्वर ने फिर आप भोगोगे भी आपकी स्वतंत्रता नष्ट होती है।
- 42:05अगर जो कुछ करता है ईश्वर। और आपको उसने स्वतंत्रता दी है,
- 42:11इसलिए जो कुछ भी करता है वो नहीं करता है।
- 42:15आप करते है अगर आप ने किया पिछले जन ने तो उसका प्रारथ का।
- 42:26फल देने के लिए ईश्वरी करेगा सपोज़ न्याय तो करेगा, ईश्वर ही
- 42:33आने के लिए कर्म करोगे, आप भी क्यों?
- 42:39क्योंकि उसने आपको स्वतंत्रता दी है।
- 42:43कर्म करने की आज़ादी दी। आप कर लो, पुणे कर लो।
- 42:49दोनों ऑप्शन्ज़ खुली है, वो कुछ नहीं कहता, फिर क्या करूँ?
- 42:53वो आपको कोई इंसिस्ट नहीं करता की पुणे करो की पाप करो, कुछ भी करो
- 42:58लेकिन उसका फल भोगने की तैयारी रखो, क्योंकि फल वैसा ही मिलेगा।
- 43:05कड़वा होगा तो कड़वा मीठा होगा तो मीठा बोए पेड़ बबूलते आम कहाँ से
- 43:13करें मेरे ये सिद्धांत नहीं है। ईश्वर कहते हैं कि मेरे सृष्टि
- 43:19में ये सिद्धांत नहीं है। क्या?
- 43:20बबूल तो वो और खाओ आप आम है। ये सब की सृष्टि में से बबूल बौवे
- 43:27बबूल काटना पड़ेगा। आम बौवे आम का ये परिभाषा थी कर्म
- 43:38के फल की ईश्वर सभी कुछ नहीं। अगर ईश्वर से भी कुछ करता है तो
- 43:49फिर आपको दुख नहीं, आपको सुख नहीं एक बाप के दो बेटे।
- 43:59एक बाप के दो बेटे किस्मत जुदा जुदा किस्मत का फल किस्मत एक बाप
- 44:10के दो बेटे किस्मत जुदा जुदा है एक राज़ कर रहा है एक भीख मांगता।
- 44:18राज़ घूमकर है जिसने पुण्यति पीठ को मांगा है जिसने बाप रे तुम
- 44:28तुम्हारी स्वतंत्रता, ये एक हीरा है, स्वतंत्रता एक हीरा है।
- 44:37उसने तुम्हें स्वतंत्र रूप हीरा दे दिया है।
- 44:43तुम चाहो तो इसका इस्तेमाल करो, तुम चाहो तो इसका इस्तेमाल गलत या
- 44:49सही किसी भी ढंग से उसने आपको आजाद कर दिया तो सभी कुछ करता है।
- 44:57ईश्वर ये गलत है, सभी कुछ ईश्वर नहीं करता है।
- 45:03ईश्वर आपके कर्मों का हिसाब करता है और वो ठीक करता है।
- 45:09अगर ऐसा नहीं है की कोई 100 नंबर का पेपर करके आया है विद्यार्थी
- 45:15ईश्वर उसको 90 जन तक। ऐसा नहीं और जो 90 नंबर का खर्चा
- 45:21है उसको 100 नंबर दे दे। ऐसा भी नहीं, कोई रिश्वत नहीं,
- 45:26कोई पुरस्कार, कुछ शुद्ध आपके कर्मों का फल फल देने में।
- 45:36ईश्वर स्वतंत्र रहे, कर्म करने में आप स्वतंत्र है कर्म नेवादी
- 45:41का रस्ते माँ फले आपका कर्म करना अधिकार मेरा फल देना अधिकार ईश्वर
- 45:49ये कहते हैं भगवान कृष्ण गीता में यही।
- 45:54इसलिए इस दुविधा को खत्म करो। दो तरह के लोग मुझे बोलते हैं यही
- 46:00तो दुविधा है। एक तो ये कहते हैं कि जो कुछ करता
- 46:06है इस हम कुछ कर पूरा किया इस। वो नहीं किया, ईश्वर ने करवा लिया
- 46:17दूसरे तरह के वो कहते ईश्वर कुछ नहीं होता, ईश्वर करता तो हम
- 46:21क्यों भुगते? जो कुछ करते हैं हम करते हैं हम
- 46:25ही भुगते दो तरह के लेकिन दोनों तरफ के आदमी किसको?
- 46:32वे भक्त नहीं कर पाए। बात को ईश्वर भी करता है, आप भी
- 46:37कर ईश्वर प्रारब्ध कर्मों के प्रति करता है।
- 46:42आप अभी जो ताजा कर्म कर रहे हो उसके प्रति आप करते हो।
- 46:48अभी ताजा कर्म में आप जिम्मेवार हो।
- 46:51पिछले जो प्रारंभ के कर्म हैं उनका फल देने में वो जिम्मेदार
- 46:55है। कर्म ने वात का रस्ते वहाँ फले
- 46:57सुकता चल कर्म करने में आप स्वतंत्र हैं अब माँ फले सुकता चल
- 47:04पिछले जन्मों का, कर्मों का फल देने में स्वतंत्र हूँ मैं।
- 47:14यही है कर्म की व्याख्या यही है आपका प्रश्न जैसा जो जश्न पर ही
- 47:24सो 10 पर पिछले जन्म का किया। के आ गया।
- 47:32अब भोगोगे अब ठीक कर अगर आपको दुख नहीं चाहिए तो वो काहे अब पुण्य
- 47:40कर सुख चाहिए तो पुण्य कर सुख नहीं चाहिए।
- 47:46दुख चाहिए तो वापस। दोनों रास्ते खुले।
- 47:50ईश्वर आपको बांधन ईश्वर आपको आजाद ही इसलिए अगर आपको ये भ्रांति हो
- 48:02गयी हो, सभी कुछ ईश्वर करता है तो आप।
- 48:07सभी कुछ ईश्वर नहीं करता है। सभी कुछ तो आप करते हैं।
- 48:11पहले भी सभी कुछ आपने किया। प्रारब्ध कर्म जो बर्खी आए थे वो
- 48:16भी आपने किए थे, उनका फल ईश्वर ने दिया है।
- 48:20जज कुछ नहीं रहता है, जज सिर्फ फल देता है, एक्यूरेट।
- 48:27करते तो आप भुगतते हो, आप ईश्वर न करता है, न भुगतता है, आप करते हो
- 48:34आप ही भुगतते हो। अगर आप पिछड़े कर्मों के कारण तो
- 48:39की हो तो आपने बात की है और अगर आप।
- 48:43वैसे दुःख नहीं उठाना चाहते तो पुण्य करने लगता।
- 48:48इसकी सेवा को सहायता करो, सुख हो उसको पुण्य सहायता को बांट के फौ
- 49:00पापा नानक ने सुख के तीन सूत्र बनाए।
- 49:06कर्म को तीन तरह से सूत्र बताए थे।
- 49:10सुप्रीम क्या वर्णिशक तीर्थकर नाम?
- 49:23ईश्वर पे भरोसा ट्रस्ट हिम ईश्वर जो करेगा बिलकुल ठीक करेगा, ये
- 49:32भरोसा रख के मैं जो करूँगा उसका फल ईश्वर पर बुटीक देगा।
- 49:39जॅज पे तो भरोसा ही करना पड़ेगा कर भी कैसे जॅज पे तो भरोसा ही
- 49:45करना होता जहाँ कोई रिश्वत नहीं चाहिए, जहाँ कोई सिफारिश नहीं
- 49:50चाहिए जहाँ कोई। माँ तो ट्रस्ट ट्रस्ट इन गॉड एंड
- 50:03टु दी राइट अच्छे काम करो, तूफ़ान मिलेगा ख़ुशी बा बनाने के ने कहा
- 50:11के नाम जब कृत कर काम कर, मेहनत कर।
- 50:17डाका मार के मत खा, किसी का लूट मत, किसी का चोरी मत कर, कीरत कर
- 50:26काम कर अगर तुम्हारे पास फालतू है तो बाट कैसे कोई धोखा है उसको
- 50:34खिलाओ। नामद उस ईश्वर पे ट्रस्ट भगवान पे
- 50:41ट्रस्ट के मैं अगर अच्छा करता हूँ मुझे अच्छा मिल जाएगा मैं पूरा
- 50:47यही थे इन तीन कुत्तों के अर्थ तो इस क्रांति को छोड़ दीजिए की जो
- 50:57कुछ करता है ईश। ईश्वर सिर्फ आपके कर्मों के फल का
- 51:06हिसाब तो आप ही करते क्योंकि अगर कर्म आप करने लग गए तो आपकी कर्म
- 51:15करने की स्वतंत्रता नष्ट हो जाएगी।
- 51:18और वो आपकी स्वतंत्रता को कतई नहीं खेलता।
- 51:25धन्यवाद सर।