Latest / Baba ji Vijay Vats / 16 Dec 25 - सत्य को निहारने का मौका, इसे चूक मत जाना !! दुःख और दर्द में क्या फर्क है? Special Video by Baba ji Vijay Vats
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- 0:00हमारे पंजाबी में शंशा को दो चिंता कहा गया है।
- 0:13जो व्यक्ति शंशा में होता है, हमारे पंजाबियों से कहते हैं यह
- 0:19दो चित्र हैं। यह दो उचित होना ही तुम्हारे
- 0:27विनाश का कारण है विनाश यानी तुम्हारे दुख का कारण है एक छोटा
- 0:34सा सूत्र अगर तुम समझ लो जीवन में।
- 0:39तो तुम्हें कोई शास्त्र, किसी गुरु के पास जाने की जरूरत नहीं
- 0:48है। प्रसुत्र छोटा सही है जो तुम हो।
- 0:58वैसा स्वीकार नहीं करना चाहते, बस दुख का मूल कारण यह है अगर
- 1:10व्यक्ति जो है उसे स्वीकार कर ले। प्रतिक्षण सुखी हो जाएगा कई
- 1:25प्रश्न उत्तर दूंगा आप ये देखो मैं बैठा हूँ, ठंडी बहुत पड़ रही
- 1:35है, ऑपरेशन का हुआ है, दर्द हो रहा है।
- 1:45ऐसे मौकों पर वीडियो बनानी तुम्हें प्रैक्टिकल रूप से
- 1:52रूपांतरित कर जाएगा। दर्द हो रहा है, लेकिन आंख में
- 2:03दर्द है, काला चश्मा लगा है और मैं जान रहा हूँ कि दर्द आंख में
- 2:13है भयंकर दर्द है। अगर मैं इसके साथ मिल जाऊं, दर्द
- 2:23के संग हो जाऊं तो मैं दर्द हो जाऊंगा, वहीं मेरे दुख का कारण
- 2:29होगा। अगर मैं इस दर्द को साक्षी रूप
- 2:34में देख लूँ कि दर्द आंख में हो रहा है और मैं उसको निरंतर इस
- 2:41दर्द को होते हुए देख रहा हूँ तो मेरी भ्रांति खत्म हो गई।
- 2:48दर्द तो रहा, दुख ना रहा। अब समझिए दुख और दर्द का क्या
- 2:54फर्क है? दर्द स्वभाविक है हो रहा है अगर
- 3:04तुम कृष्ण को काटोगे तो दर्द कृष्ण को भी उतना ही होगा जितना
- 3:10आपको। लेकिन कृष्ण मंसूर जैसे लोग अंग
- 3:22अंग काट दिया जाता है, ईसा को सूली चढ़ाया जाता है, हाथों पांव
- 3:28में केले ठोंकी जाती है। दर्द तो होता है उन्हें जैसे मुझे
- 3:35अभी हो रहा है दर्द आंख में और तुम कहोगे बाबा आराम करने का दिन
- 3:43है। हाँ आराम करने का दिन कर रहा हूँ।
- 3:49लेकिन ऐसी घड़ियाँ रोज़ रोज़ तो आती हैं।
- 3:54अब ऑपरेशन हुआ, दर्द हुआ साक्षात प्रैक्टिकल रूप में, देखिए मैं
- 4:00ठंडी में क्या कुछ बांध के बैठा हूँ आँख में दर्द है?
- 4:08दर्द के संग हो जाऊं तो मैं भी दर्द हो जाऊंगा, दर्द को दूर बैठा
- 4:16अपने स्वभाव में साक्षी रूप में मैं बैठा रहा हूँ स्थिति प्रज्ञा
- 4:22हो जाऊं तो दर्द अलग हो जाएगा मेरे से।
- 4:31अगर मैं दर्द के संग हो लिया तो मैं दर्द के साथ दुखी भी हो
- 4:35जाऊंगा। दर्द तो है ही।
- 4:40अगर मैं दर्द को दूर से साक्षी की भाँति देखता रहा तो दर्द तो होगा,
- 4:47लेकिन मैं दुखी नहीं होऊंगा। मैं अपने सुख में मस्त रहती हूँ,
- 4:53मैं वजन भी कोण बना सकता हूँ? मैं वीडियो भी बना रहा हूँ।
- 5:01ये दुख और दर्द का फर्क है। मनसोर का शरीर करता है हाय वो भी
- 5:07करेगा। चीख उसकी भी निकलेगी।
- 5:13चीख आकर्षण की भी निकलेगी। दर्द शरीर को हो रहा है तो तुम
- 5:22में और कृष्ण में क्या फर्क तुम में और कृष्ण में यह फर्क है?
- 5:30तुम दर्द के संग होलोगे गमराह में खड़े थे, वो ही साथ हो लिए खुद
- 5:38दिल से दिल की बात कही और रो लिए यूं हसरतों के दाग मोहब्बत में धो
- 5:44लिए। खुद दिल से दिल की बात कही और मरो
- 5:49ली दर्द है मैं चाहूं तो इच्छा से दुखी हो सकता हूँ।
- 6:03मैं चाहूं तो इस दर्द को। अपना हूँ ना मान सकता हूँ कि मेरे
- 6:08दर्द हो रहा है फिर मैं दुखी हो जाऊंगा।
- 6:13यह असक्ति भी है और गलत भी है और दुख का कारण भी है तो दुख का कारण
- 6:21क्या है, इसी मौके पर समझाया जा सकता है।
- 6:25इसीलिए मैंने स्पेशल ये वीडियो अपनाया।
- 6:29देखिए तो मेरे हालात देखो, ये कोई सर्कस नहीं कर रहा हूँ, ऑपरेशन
- 6:35करा के आया हूँ, बहुत दर्द है, दवाई खाई नहीं दर्द की।
- 6:46यही मौका होता है सत्य को निहारने का और तुम उसी से चूक जाते हो।
- 7:02मंदसौर का हाथ पांव काट लिया गया। लेकिन वह आस्था रहा, उसका गुरु जो
- 7:09नैयद जानता था कि इसे दर्द नहीं हो रहा, यह दर्द को होते हुए देख
- 7:16रहा है। सुदर्शन चक्र से ऊँगली कट जाती है
- 7:23कृष्ण की। द्रौपदी पट्टी बांधती है, दर्द
- 7:27कृष्णा को भी होता है, लेकिन दोनों के दर्दो में फर्क है।
- 7:37कृष्ण दर्द को दर्द की तरह देखते हैं और दुखी नहीं होते हैं तुम।
- 7:44दर्द को स्वयं के होने के दर्द की तरह देखते हो और दुखी हो जाते हो
- 7:52अगर ऐसा तुम न करो, चीजों को सत्य रूप में निहारो तो तुम दुखी होना
- 8:01बंद हो जाओगे। तुमने पूछा पुत्र के दुख का कारण
- 8:06क्या? दुख का कारण अज्ञान, अज्ञान यानी
- 8:14दर्द तो है, वो तो मिटेगा नहीं। लेकिन वो तुम्हारी आंख में हो रहा
- 8:23है, तुम दर्द के संग होलोगे तो तुम भी दर्द हो जाओगे।
- 8:31अगर दर्द को होते हुए दूर से निहार लोगे जहाँ तुम वास्तव में
- 8:35बैठे हो तो फिर दुख का कोई कारण शेष नहीं रह जाता।
- 8:45कुछ मजहबों ने कुछ नियम लागू कर दिए और ये नियम अज्ञानुओं के नियम
- 8:51थे। जब मंसूर अपने खुद तक पहुंचता है
- 9:03और खुदा हो जाता है। यह सत्य भी है, तुम भी पहुँच सकते
- 9:09हो। अपने खोद तक और खुदा हो सकते हो
- 9:18तो मशहूर ने आवाज लगाई अनलहक मैं खोद खुदा हूँ और ये आवाज सत्य की
- 9:30आवाज थी। दबा दी गई।
- 9:35कट्टरपंथी सलामियों के द्वारा राजा के पास फरमान पहुंचा राजा
- 9:48अक्सर उल्लू होता है, जन्म के जैसा कोई भी होता है।
- 9:53राम जैसा कोई कोई होता है अक्सर उल्लू लोग राज़ करने की चाहत रखते
- 10:01हैं संत राज़ करने की चाहत कभी नहीं रखेगा व्यवस्था को।
- 10:15हमारे लटके हुए मुँह देखकर व्यवस्था को ठीक करने की बात कह
- 10:22देगा। ऐसे कर लो ठीक हो जाएगा।
- 10:25जैसे डॉक्टर चिकित्सा क्षेत्र में दवाई ले सके, ये दवा ले लो।
- 10:30तुम्हारा रोग दूर हो जाएगा। ऐसे ही सुनता है तुम तकलीफ में
- 10:38हो, अभाव में हो झुग्गी झोपड़ियों में हो, सर्दी में ठंड लगती है,
- 10:45गर्मियों में गर्मी लगती है। तो संत तुम्हारे इस दुख से
- 10:56व्याकुल हो जाएगा। पीघल जाएगा संत हृदय नवनीत सम्मान
- 11:02और वो दिखेगा कि जब इसका उपाय है तो उपाय क्यों नहीं कर लेते?
- 11:09जैसे मैंने आपसे कहा उपाय है कि सभी बांट दो, बाबा नानक का
- 11:16सिद्धांत कृत्य करो, अपना काम करो।
- 11:23ये डेरा बाबा नानक के पास खड़े होकर देखे तो करतारपुर साहब में।
- 11:30गुरु नानक के खेतों को लोग दो से बैलों को जुटते हुए और खेतों को
- 11:41बीजते हुए कणक वगैरह देखा करते थे।
- 11:46और गुरु नानक अपनी कर्त में मस्त रहते थे।
- 11:50ऐसा कृत्य करो अगर कल को आपको इतना परीक्षा मिल जाता है तो
- 11:56कृत्य करना छोड़ना क्योंकि आप कर सकते हो जो अव्वल है।
- 12:06असहाय है, बीमार है, बच्चा है, गर्भवती स्त्री है, प्रसूता
- 12:14स्त्री है, वो तो कर नहीं सकते, तुम कर सकते हो तो तुम जरूर करो
- 12:22तो बाबा नानक खुद खेत से जोतते है।
- 12:27इसलिए उनका संदेश काबजी नहीं है। कृतिकृत करो जैसे मैं खेत जोत रहा
- 12:37हूँ, फसल बो रहा हूँ, पानी दे रहा हूँ, खाद दे रहा हूँ, बीज दे रहा
- 12:43हूँ ऐसे तुम भी कृत करो। बंट छको और जो इससे परमात्मा की
- 12:49बनाई हुई सृजना से उत्पत्ति हो उसको बांट के खा लो।
- 12:57चार है तो चार बाट लो दो है तो दो बाट लो नहीं है तो फाका रख लो।
- 13:07कृत्य करो वण शको नाम जपो और उस परमात्मा को सजन हरा समझो अपने आप
- 13:17को सजन हरा मत समझो अब तुमसे गलती ये हो जाती है कि तुम कहते हो कि
- 13:23सजन हरा मैं हूँ। जबकि तुम हो नहीं सत्य को सत्य की
- 13:31तरह निहारना ही आपको दुखी होने से बचाएगा।
- 13:40मैंने शुरुआत की थी कि तुम हो तुझोर।
- 13:45फिर चोरी चाहे किसी महल में रात को चोर किसी के खजाने की करता है
- 13:53या चोरी, वोट की चोरी करता है या चोरी माल की हो या वोट की हो, चोर
- 14:01बराबर है उतना ही। जितना पनिसेबल आपके घरों से आपकी
- 14:11मुद्रा या माल चुराने वाला छोर होता है, उतना ही तुम्हारी
- 14:16स्वतंत्रता को पर नालियाँ, जो तुमने इकट्ठा हो के समूह में
- 14:21विकसित कर ली। उनको चुराने वाला भी चोर होता है
- 14:29और याद रखना उन चोरों का संग देने वाले भी चोर होते हैं तो गुरेज मत
- 14:36करना अगर आपको आप वास्तव में चोरी कर रहे हो।
- 14:42तो आपको कोई चोर कह दे तो अपनी शक्ति का दुरुपयोग करना अपने आप
- 14:50को दुखी करने के अलावा और कुछ नहीं होगा, तुम तो जानते नहीं अभी
- 14:57अज्ञानी हो। तुम ये कहते हो किसने देखा किसी
- 15:04आदमी ने देखा उसको मार मुकाओ फिर किसी और ने देख लिया उसको मार
- 15:12मुका दो, किसी का एक्सीडेंट करवा दो।
- 15:20किसी को किसी के हाथों गोली मरवा दो, किसी को प्लेन क्रैश करवा दो,
- 15:28किसी को कुछ करवा दो, किसी को कुछ करवा दो।
- 15:32यह है कुछ ही राजनीति। इसमें उच्च राजनीति करता हूँ।
- 15:44अगर तुम चोर हो तो फिर तुम निश्चित रूप से अगर मानते हो कि
- 15:51वाकई ही मैं चोर हूँ और तुम्हें चोर कहने पर तुम्हें कोई आपत्ति
- 15:56नहीं मिलती होती। और तुम ये चिल्लाते नहीं फिरते कि
- 16:02मुझे चोर क्यों कहा जाता? तुम एक्सेप्ट करो पूर्ण प्राणों
- 16:09से कि हाँ मैं चोर हूँ। फिर तुम्हारे दुख का कारण सुरोहित
- 16:18हो जाएगा। देखिए इन शब्दों को ऐसा मत समझना
- 16:23कि मेरी आंख में दर्द हो रहा तो मेरे कोई दिमाग हिल गया है नहीं,
- 16:29आंख में दर्द हो रहा है तो दिमाग से ही काम कर रहा है नज्ज़।
- 16:35इस सारी सूचनाओं को एक्सेप्ट कर रही हैं कि यहाँ दर्द हो रहा है।
- 16:42ब्रेन की नब्ज़ बिल्कुल बखूबी सही काम कर रही है।
- 16:49सही बोल रहा हूँ आप मैं बोल रहा हूँ।
- 16:53अपने से बाहर हो के नहीं बोल रहा तुमने पूछा कि दुख दुखी क्यों है
- 17:02दुखी तुम अपने कारण दुखी हो और जीस चीज़ के लिए जिम्मेदार तुम हो
- 17:10उसके लिए जिम्मेदार दूसरे को मत ठहराओ।
- 17:15अगर ऐसा करोगे तो फिर तुम दुख से कभी मुक्त नहीं हो सकोगे तुम चोर
- 17:24हो तुम मानो के म चोर हो। और मज़े की बात ये है कि जब तुमने
- 17:33मान लिया की मैं चोर हूँ तो तुम में परिवर्तन शुरू हो जाएगा।
- 17:38तुम चोर न रह पाओगे क्योंकि चोरी तुम्हें दंश देती है, कोई तुम्हें
- 17:45चोर कह दे। तो वह तुम्हें लड़ता है, जो बता
- 17:50है फिर तुम चोर न रहोगे। बदलाव शुरू हो जायेगा।
- 17:54ट्रांसफॉर्मेशन होना बदलाहट होना शुरू हो जायेगा।
- 18:00तुम खुद को ही तंग करने पर उतारू हो, तुम ही तुम्हारे दुश्मन हो।
- 18:06इसलिए कृष्ण ने एक वाक्य कहा आत्मा ही आत्मा का शत्रु और आत्मा
- 18:13ही आत्मा का मित्र है। इसका सही अर्थ यही है तुम अगर
- 18:20सत्य को सत्य की तरह स्वीकार कर लोगे तो तुम्हें।
- 18:25दुख देने वाला दुनिया में कोई भी नहीं है।
- 18:30तुम्हें कोई दुःख ही नहीं कर सकेगा अगर तुम सत्य को, असत्य को
- 18:38सत्य की तरह स्वीकार करोगे। सत्य को असत्य की तरह स्वीकार
- 18:44करोगे, असत्य को सत्य की तरह स्वीकार करोगे तो तुम्हें जिंदगी
- 18:49में धरती पे सुखी करने वाला कोई नहीं है।
- 18:54फॉर्मूला क्या है, फॉर्मूला है व्हाट यू आर जो तुम हो?
- 19:01एक्सेप्ट दट विथ फुल हार्ट उसे पूर्ण हृदय से स्वीकार करना है।
- 19:09यह सुख का एक मात्र कारण है। दुखी हो तो दुख का कारण मैंने
- 19:28बताया तुम जो हो उसके विपरीत अंतर्दंद में तुम फंसे हो गए हो,
- 19:38तुम हो तो डाकू। हो तो चोर, लेकिन तुम चाहते हो कि
- 19:43दुनिया मुझे सम्मानित करेगी? मैं संत हूँ फिर तुम वस्त्र भगवा
- 19:47डालो, फिर तुम गंगा स्नान करने की सर्कस करो।
- 19:56इससे लोग भ्रमित भी हो जाएंगे। कुछ लोग।
- 19:59उन्हें मैं मंदबुद्धि कहता हूँ, जो सत्य को बिना जाने स्वीकार कर
- 20:08ले, वह मंदबुद्धि होता है। दूसरा प्रश्न आया कि कृष्ण को?
- 20:17चोट लगती है तो दर्द होता है। हाँ कृष्ण के शरीर को दर्द होता
- 20:21है तुम में और कृष्ण में। 1985 से पहले जो विजय वत्स था,
- 20:301985 के बाद समाप्त हो गया। 28 अक्तूबर।
- 20:36उससे पहले दर्द होता था, पेट में तो विजय वत्स के पेट में दर्द
- 20:41नहीं होता था। विजय वत्स के दर्द होता था 85 में
- 20:48ये घटना घटने के बाद जब मैं शरीर की हदूदों से बाहर गया।
- 20:56अनंत विस्तार में एकाकार हुआ। मेरा अनंत के साथ रिश्ता जुड़ा तो
- 21:05मैंने सत्य को जाना कि मैं ये लिमिटड शरीर नहीं हूँ बल्कि।
- 21:14लिमिटलेस वो अनंत हूँ मैं जिसकी कोई हदूसिया बोंडरे नहीं होती तो
- 21:23फिर दर्द होता है, दर्द तो होगा वे देखो यू कैन टेक एनेस्थीसिया
- 21:30ऑपरेशन में तुम ले सकते हो। लेकिन ध्यान रखो, दर्द फिर भी
- 21:35होता होगा, एनेस्थीसिया के कारण तुम्हें पता नहीं चलेगा।
- 21:41डॉक्टर से पूछो तुम वो तुम्हारी ब्रेन के कनेक्शन को काट देते हैं
- 21:48नर्व के साथ। जो सूचनाएं पहुंचाती हैं तुम्हारी
- 21:53ब्रेन को वो नब्ज को काट देती हैं, संबंध विच्छेद कर देते हैं
- 22:01तो दर्द तो होता है लेकिन तुम्हें पता नहीं चलता ऐसे ही तुम।
- 22:11एनेस्थीसिया लेकर सत्य से कनेक्शन तोड़ सकते हो तुम्हारे धर्म सही
- 22:19मायने में एनेस्थीसिया हैं पांच नाम जप लो राज्य राधे कर लो।
- 22:31ये ऐनेस्थीसिया है और बिलकुल मार्क्स ने 100% सही बात कही।
- 22:38यहाँ तक उसने सत्य पाल लिया था। कहते धर्म अफीम का नशा है सुंदर
- 22:46बात। और उतना ही बोला वो लेकिन उसके
- 22:50आगे जो बोला वो बुद्धि के सोच के कारण बोला कहता है ईश्वर विसर कुछ
- 22:56नहीं है, जहाँ वो गलत हो गया क्योंकि ईश्वर को उसने खोजा नहीं
- 23:02है, जीसको खोजा नहीं। उसको इंकार भी कैसे करूँगा उसको
- 23:11स्वीकार तो कर सकते हो आफ्टर एनलाइटनमेंट तुम खुद की खुद ही को
- 23:18जानकर तो कह सकते हो एवं ब्रह्मस्म और हमारे संतों ने
- 23:21उदभोष भी किया कि मैं खुद खुदा हूँ।
- 23:27चाहे इस्लाम इस बात की इजाजत नहीं देता कि तुम खुदा हो, यह बोलना
- 23:34अपराध है। अगर बोलोगे तो दंडित होगे।
- 23:38ऐसे कानून हम बना सकते हैं सत्य के विपरीत और इस्लाम में बना दिए
- 23:44गए। तो उसके गुरु ने कहा जुनने कि
- 23:49देखो राजा का फरमान आया है मंसूर मैं तुम्हारा गुरु हूँ, बल्कि मैं
- 24:01जानता नहीं। कि मैं खुद खोदा हूँ तो मंसूर कह
- 24:07ले दी, गुरुदेव ये कैसे हो सकता है?
- 24:10जिसने मुझे बताया हो रास्ता तो वह तो मंजल के ऊपर जाकर मेरे से पहले
- 24:16ही देखा आया कि मैं खुद खुदा हूँ तो फिर मैं चुप हो क्यों?
- 24:22जो नैज ने कहा तो मंसूर को वा तू जजे लेकिन मंसूर कहता जुने से कि
- 24:33गुरूजी, मैं क्या करूँ? ये बिल्कुल ठीक है कि आपने भी जान
- 24:42लिया है। कि तुम खुद खुदा हो, लेकिन
- 24:47क्योंकि पाबंदी है, नियम है, कानून है इस्लाम के कि तुम खुद
- 24:55खुदा नहीं हो, बस ला इलाहा इल्लाह।
- 25:03मोहम्मद उर रसूलल्लाह अल्लाह का सिर्फ एक ही पैगंबर है और वो
- 25:10मोहम्मद है, तुम नहीं हो। वो कहते हैं, मेहसीर को स्वीकार
- 25:16कैसे करूँ? अकेले मोहम्मद ही कैसे पैगंबर है?
- 25:23जब मैंने खुदा हो के देख लिया, गुरु ने कहा तो क्या मैं नहीं
- 25:32जानता, मैं भी तो जानता हूँ मशहूर कहने लगा बिलकुल आप जानते हो
- 25:38लेकिन मैं क्या करू मुझसे तो नहीं रहा जाता।
- 25:42तो कोई सत्य को नियमों में बांधकर चुप रह सकता है।
- 25:51जो नैत की तरह है। कोई सत्य को देखकर चुप नहीं रह
- 25:58सकता। वह घोषणा करेगा।
- 26:01मैं खुद खुदा हूँ तो मंसूर ने कहा मैं नहीं रुक सकता, मैं बोलेंगे
- 26:09जो सत्य है तो फिर जो नेतनिका फिर ठीक बोलो अगर तुम इतने ही।
- 26:19मजबूर हो तो फिर बोलू लेकिन काट दिए जाओगे तो मंसूर हंसा गुरुदेव,
- 26:29आप कह रहे हो तो जुन्नत चुप हो गया जुन्नत के पास कोई जवाब नहीं
- 26:37था। जुनैद कहता पुत्र तुम ठीक कहते हो
- 26:41कटोगे तुम तो नहीं नैनम चदंती शास्त्र में जलोगे तुम नहीं नैनम
- 26:50दाहदी पाओगा नैन चेनम के लिए दंत को न सुशैत ही मारु था।
- 26:58पानी तुम्हे गलाएगा नहीं हवा तुम्हे सुखाएगी नहीं तुम इन सबसे
- 27:06पार अजर अमर शाश्वत हो तो फिर मंसूर कहने लगा मैं क्या करूँ?
- 27:15वह विराट इतना है। गुरुदेव, क्या आप सोचते हो वह आए
- 27:22और मुझ से बलवाई के बोल, मैं खुदा हूँ तो भला के मैं रोक सकता हूँ
- 27:30अपने आप को जुनैद कहता है बिल्कुल नहीं रोक सकता पुत्र।
- 27:36तो रोक भी मत, अब मैं तुम्हें रोकूंगा भी नहीं, क्योंकि यह सत्य
- 27:41है। ये अध्यात्म के अत्यंतिक रहस्य
- 27:49हैं जो तुम जान लो। और इस अवस्था में बेहतर बोला जा
- 27:58सकता है। इसलिए मैं इस अवस्था में भी घोर
- 28:02पीड़ा के बावजूद निरंतर पीड़ा का दर्शन भी कर रहा और निरंतर इस
- 28:10यंत्र को बोलते हुए भी न्यार रहा। दोनों काम यक मुक्त हो रहे हैं,
- 28:17पीड़ा को भी देख रहा हूँ। जीवा को बोलते हुए भी देख रहा
- 28:24हूँ। आंख में दर्द हो रहा है ये भी देख
- 28:27रहा हूँ लेकिन हूँ मैं साक्षी। तो इस अवस्था में वीडियो बनाना
- 28:38अति आवश्यक भी है और इससे आपको सत्य का उदभोध भी होगा।
- 28:48सत्य का उदभोध कराने के लिए इस अवस्थाओं को मैं।
- 28:54इंतजार किया करता हूँ तुम जिससे दूर भागते हो न मैं उसका इंतजार
- 29:00करता हूँ कि अगर कोई ऐसा वाक्यात हो जाए तो उस वाक्यात में हौ आई
- 29:11विल रिएक्ट। मैं उसको कैसे प्रकट करूँगा यह
- 29:17दुनिया देखे और कोई सर्कस नहीं करूँगा, कोई चालबाजी नहीं करूँगा,
- 29:27कोई किसी प्रकार का भ्रम में। मैं खुद नहीं रहा और आपको डालूँगा
- 29:33नहीं। असल में दूसरों को भ्रमित वही लोग
- 29:37करते हैं जो खुद भ्रमित होते हैं। अब मेरा भ्रम टूटा तो मैं आपके
- 29:44भ्रम तोड़ने का प्रयास करूँगा। तुम चिल्ला रहे हो कि मैं तो बंधा
- 29:51हुआ हूँ आई ऐम बैंड और मैं देख रहा हूँ कि तुम बंधन में नहीं हो
- 29:58तुम्हारे हाथ पांव खुले तो मैं कहूंगा कि तुम भ्रम में हो, तुम
- 30:04बंधे नहीं हुए हो तुम्हारे हाथ पांव बिलकुल स्वतंत्र रहे।
- 30:09ना हाथों में हथकड़ी है ना पांव में बढ़िया है लेकिन जुबान पर
- 30:15लगाम तानाशाह लगा सकते हैं। फिर भी कोई ना बोलने से हटे तो
- 30:22तानाशाह काट सकते हैं। फिर भी वो हँसे।
- 30:27तो तानाशाह वर्धन कर्म कर सकते हैं लेकिन सत्य को प्रवर्तित नहीं
- 30:34कर सकते वो क्योंकि तानाशाह ये जानता है कि जब दर्द होता है, एक
- 30:43व्यक्ति उस स्थिति में हास कैसे सकता है?
- 30:48उस स्थिति को प्रकट कैसे कर सकता है?
- 30:51वो तो हाय हाय राम करेगा हे राम तो नहीं करेगा हे राम वही व्यक्ति
- 30:58कह सकता है जो परमात्मा को स्मरण कर रहा है।
- 31:04ये है स्मरण। परम आफत के काल में तीन गोलियां
- 31:10चुभ गई। छाती में उतर गई और वो हाय राम
- 31:16नहीं कहता वो हे राम ही कहता है। यानी वो याद करता है राम।
- 31:23स्मरण करता है, इसे स्मरण कहते हैं।
- 31:26तुम रेपेटिशन को स्मरण कहते हो, यह गलत है तो आज के प्रवचन में अब
- 31:36आगे एनर्जी लेस्नेस महसूस कर रहा है शरीर।
- 31:43और भी नहीं पायेगा दर्द गाना है, लेकिन आपको मैंने प्रकट करना था।
- 31:50ऐसी अवस्था कभी कभी आती है और इन अवस्था को एक।
- 32:01यह आपदा आई तो इसको अवसर में समेट लेना तुम दूसरे हिसाब से समेटते
- 32:07हो। नानक कहते हैं, इसको स्वीकार कर
- 32:10लेना, यह तुम्हारे लिए अवसर बन जाएगा।
- 32:13पर महात्मा तक पहुंचने का मेरे पुत्र की हत्या कर दी हतृ सी को
- 32:19मैं जानता हूँ। तो उसकी डेड बॉडी बड़ी लेकिन मेरी
- 32:27आँखों में अशुरूप एक भी नहीं तो मेरी शिष्यों ने कहा ये पागल हो
- 32:33जाएगा, पहले भी बता चुका हूँ और एक मेरे।
- 32:39ये शिष्य लिपट के रोने लगी ऊंचे ऊंचे कि मैं रोउं किसी ढंग से
- 32:48जैसा हम होते हैं, वैसा हम सोचते हैं कि मैंने इस रुद्र को दबा
- 32:53लिया। लोक इलाज के कारण।
- 32:57जैसे हम सब चीजों को दबा लेते हैं लेकिन मैं वो दबाने वालों में तो
- 33:02है नहीं। अगर कुछ प्रकट होता तो मैं रोता
- 33:10बाजीद का बेटा मर गया, अब फूट फूट करवाया कैसे रोना है?
- 33:17मुझे नहीं आया तो मैं कुछ सर्कस करूँ नहीं।
- 33:25गुरु गोविन्द सिंह रोज़ नहीं चार बेटों के मरण में तो सर्कस कर रहे
- 33:29थे नहीं उन्हें रोना नहीं आया। जानते हैं मिट्टी का घड़ा था।
- 33:36पंचतत्व का पुतला था स्केडर हो गया खंड क्या?
- 33:43और तो कुछ हुआ ही नहीं, घटा तो कुछ है ही नहीं और जानते हैं गुरु
- 33:49गोबिंद सिंह घड़ा फूटा है। गढ़ाई का मटेरियल कहीं गया नहीं।
- 33:57आज तो फिजिक्स एक शब्द कहती है मैटर कैन नीदर बी क्रिएटेड नॉर
- 34:02कैन बी डिस्ट्रॉइड ये मैटर पर भी लागू होता और आत्मा पर भी लागू
- 34:08होता हमारे अस्तित्व पर। कृष्ण दूसरी तरफ से बोलता है नैनम
- 34:15चदंती शास्त्रण तो मैटर भी खत्म नहीं होता, आत्मम भी खत्म नहीं
- 34:21होती फिर खत्म कौन होता है खत्म? कुछ भी नहीं होता यहीं उप क्षेत्र
- 34:29का ये वाक्य काम आता है। पूर्णमदः पूर्णमयदम पूर्णिमा
- 34:35पूर्णमदृश्य ते पूर्णस्य पूर्णमयदाएँ पूर्णमयबावशीषण ते
- 34:43पूर्णमय से पूर्ण को निकाल लो तो स्ट्रक्चर फूटेगा सिर्फ?
- 34:52एक बाल्टी पानी के निकालो, समुद्र में से तो अब दो जगह पानी हो गया
- 34:58एक समुद्र का पानी एक आपने जो गाकर या बाल्टी भर ली वो पानी
- 35:03लेकिन पानी नहीं घटा, पानी नहीं बढ़ा।
- 35:09पहले एक स्थान पे था अकेले समुद्र में अब दो स्थान पे हो गया थोड़ा
- 35:15सा हमने बाल्टी में निकाल लिया, थोड़ा सा गागर भी भर लिया पानी
- 35:21कहाँ घटा तो मैटर कैन ईदर बी करिएटर्स नॉर कैन बी टेस्ट?
- 35:29फिजिक्स का पहला सिद्धांत वैज्ञानिक के यहाँ धराशायी हो
- 35:33जाते हैं। उर्स बनाने वाले का पर्वतगार का
- 35:38शुकर करो शुक्र करो इन भ्रांतियों से मुक्त हो।
- 35:49एक शब्दाता है राज़ करेगा खालसा आपकी रहना कोई आपकी जो सर्कस करता
- 36:02है जो मले फेंकता है। जो गलत प्रचार करता है, जैसे
- 36:09प्रचार मिल गया, राज़ करेगा खालसा जो प्योर व्यक्ति होगा, जिसने
- 36:16शुद्ध सत्य को जाना और वैसा ही प्रकट किया।
- 36:21उसको कहते हैं, खालस व्यक्ति है, हम कहते हैं घी लेने जाते हैं ना
- 36:25तो हम कहते हैं भाई मिलावट तो नहीं है इसमें कुछ और गाय की चरबी
- 36:30वगैरह तुने मिला दिया कहता है नहीं, ये शुद्ध है।
- 36:32प्योर खालस है तो गुरबानी का शब्द है ये।
- 36:39राज़ करेगा खालसा? जो शुद्ध है सब भांति सर्कस नहीं
- 36:46करता, वह राज़ करेगा यानी खुश रहेगा, आनंदित रहेगा।
- 36:52पहले के शब्द पे आ जाऊं तुम सत्य को सत्य की तरह।
- 36:58स्वीकार नहीं करते इसलिए तुम दुखी हो।
- 37:03तुम हो तो चोर कामना करते हो कि तुम्हें पुरस्कृत करें।
- 37:08नो फूल बरसाएँ संत की तरह व्याख्यायित करें और कुछ
- 37:16मंदबुद्धि लोग तुम्हें कर भी देंगे।
- 37:19लेकिन उससे क्या तुम्हारा अस्तित्व वैसा हो जाएगा?
- 37:27नहीं होगा अस्तित्व तुम्हारा वही नहीं होगा।
- 37:32अस्तित्व कब होगा जब तुम खुद को जान लोगे?
- 37:37कि मैं शरीर नहीं हूँ, फिर दर्द होगा और तुम दर्द को होते हुए
- 37:44देखोगे चिल्लाओगे नहीं यह मरेगा ढांचा तुम इसको मरते हुए देखोगे,
- 37:54यह नहीं कहोगे, मैं गयो। मैं मरो बल्कि ये कहोगे मैं ना
- 38:02मरो, मरे संसारा, मुहे मिला जिलाबन हरा शायद मैंने बड़ी
- 38:11खूबसूरती से बारीकी के अंदाज में। आपको ये सारी कहानी प्रस्तुत कर
- 38:17दी तुम दुखी तुम्हारे कारण हो मेरी बात जो तुम हो, उसके विपरीत
- 38:27तुम अपने आप के प्रकटीकरण में लगे हुए हो बस यही तुम्हारे दुख का
- 38:33मूल कारण है। इसीलिए कृष्ण ने कहा ऋण स्यात्मा
- 38:38वनस्पति और जो दुखी है वो दुखी होता चला जायेगा।
- 38:46आज एक है कल दो परसों 100% हो जायेगा।
- 38:51फिर वो दुख का ही मातृ रूप हो जायेगा।
- 38:55पर फिर वह मिट जाएगा क्योंकि दुख के स्वरूप में तुम दुखी होकर
- 39:01जिंदा नहीं रह सकोगे। फिर तुम मौत की भीख मांग हो और
- 39:05बड़े मज़े की बात है। मैंने लोग देखी है, मैंने ऐसे
- 39:10लुक्स देखे है। जो मौत की भीख मांगते हैं।
- 39:16देखिए वोट की भीख मांगने वाले लोग मैंने मौत की भीख मांगते देखे
- 39:28हिटलर खुद के रिवॉल्वर से मर गया। इसे दूसरे शब्दों में परिभाषित
- 39:36करूँ या व्याख्यायित करूँ तो हिटलर ने मौत को मांगा ए मौत आजा
- 39:49पहले तानाशाही से हकूमत मांग रहा था।
- 39:54अब मौत से मौत को मांगने लगा क्योंकि दुख ही इतना हो गया कि
- 40:02उसने मोसुलनी का हाल देख लिया था। मोसुलनी इतनी बुरी तरह से मरा
- 40:08तड़प तड़प के। जैसे तुमने संतों को तड़पा के
- 40:13मारा ईसा का क्या कसूर था जिसने कहा कि लव इस गॉड कोई कसूर था
- 40:18उसका नहीं लेकिन वो तुम्हारे राज़ नहीं आया।
- 40:23तुम अज्ञानियों ने जो नीम कायदे कानून बना दिए वो अज्ञानता के
- 40:29कारण बना दिया। संत उसको कैसे मानेगा?
- 40:32मानेगा तो यह जानता हूँ मानेगा जुनैद की तरह कि जानता तो हूँ मैं
- 40:38खुद खुदा हूँ लेकिन इस्लाम की तुम्हारी बात को फिर भी तुम
- 40:44समझाने से समझोगे तुम मंदबुद्धि हो इसलिए मैं भी स्वीकार कर लेता
- 40:50हूँ। लेकिन तुम्हारे हुजूम में शामिल
- 40:52नहीं होगा तो जुनैद कभी इस्लाम के हुजूम में शामिल नहीं हुए।
- 41:00उसने कहा ठीक है, तुम मानो मैं तुम्हारा विरोध नहीं करूँगा।
- 41:03मंसूर ने क्या किया? मंसूर ने हुजूम में शामिल तो हुए
- 41:08नहीं, वरना। अज़ूम के विपरीत बोलना शुरू कर
- 41:11दिया। उसने कहा नहीं यह तुम्हारा शब्द
- 41:16गलत है, ल इलाहा इलालाहा मोहम्मद और अरसूला लाहा।
- 41:25यह शब्द तुम्हारा गलत है। और मैं इसे नहीं मान सकता।
- 41:29क्यों? मैंने जान लिया कि सिर्फ मोहम्मद
- 41:34ही रसूल नहीं हैं। मोहम्मद ही प्रगम्बर नहीं हैं,
- 41:39वरना मैं भी सीमाओं के उन अखंड सीमाओं के पार चला गया।
- 41:49जो जानेगा वो तुम्हारी अज्ञानताओं को मानेगा नहीं और अगर मानेगा तो
- 41:57जुनैद की तरह मानेगा ठीक है भाई, तुम मंदभूतियों की तादाद ज्यादा
- 42:04है? तो जानता तो मैं हूँ जो सत्य है
- 42:09लेकिन मैं बस तुम्हारे नहीं करूँगा।
- 42:13समझ गए मेरे ख्याल में आप मेरी बात को बड़ी बारीकी से समझ गए
- 42:18होंगे। मैंने बड़ी बारीकी से इस अवस्था
- 42:21में समझाने की चेष्टा की है। क्योंकि इसी अवस्था में समझाया जा
- 42:25सकता है। अगर कुंती भगवान कृष्ण जैसे विराट
- 42:31तत्व से झोली फैला के दुख की दर्द की भीख मांगती है तो वह मूर्ख
- 42:37नहीं है। सबसे बड़ी समझदार वही है जो दुखों
- 42:41को। स्वीकार ही नहीं करती बल्कि
- 42:45मांगती भी है। वो बुद्ध की तरह है जो धन को
- 42:52अस्वीकार ही नहीं करता वरन त्याग भी कर देता है।
- 42:57सब कुछ होते सोते राजमहल भी हैं। तख्तों दास भी हैं।
- 43:03दास दासियां भी हैं, महफिल भी हैं, आनंद भी है, सब तरफ खुशहाली
- 43:08है, जनता है, वृद्ध पिता है, वारिस गेरा है, सब मेरा है, पुत्र
- 43:15भी उत्पन्न हो गया है। सुंदर, सुशील स्त्री भी है।
- 43:19सब कुछ होते, सोते छोड़ देता है उसको तुम कहोगे पगला गया है, हम
- 43:28तो इनके पीछे दौड़ लगा रहे हैं। हम तो भिक्षा पत्र उठा के भीख
- 43:32मांग रहे हैं। हमें वोट दो।
- 43:35इसका दिमाग गड़बड़ गया लगता है यह मूर्ख हो गया लगता है, लेकिन
- 43:40नहीं। बुद्ध मूर्ख नहीं बुद्ध ये तो
- 43:43सयानी है, मूर्ख तो तुम लोगों की कतार है, मंदबुद्धियों की कोई एक।
- 43:54सत्यबुद्धि पैदा हुआ करता है इस आलम में वो भी जब सारी कायनात
- 44:05रोती है, बड़ी ही मुश्किल से होता है चमर में दीला बर पैदा।
- 44:19हजारों साल नरगिस अपनी बे नूरी पे रोती है हे प्रवर दीगार मुझे नूर
- 44:27बक्से मैं बे नूर हूँ मुझमें हुस्न नहीं।
- 44:35मुझमें लावन या नहीं, मैं को रूप लगती हूँ हजारों साल नरगिस अपनी
- 44:42बेनोरी पे रोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा भर पैदा
- 44:49कोई एक दीदा भर पैदा होता है और आप उसको काट देते हो।
- 44:54अब उसको गालियां निकालते हो, उसके मुँह पे थूक देते हो, उसको सूली
- 45:00लगा देते हो, हाथ पांव काट देते हो, जहर पीला देते हो जैसे लोग
- 45:07मीरा तक्को आप जहर का पहला दे दिया प्रेम की मूर्ति को।
- 45:13लेकिन मीरा जानती है, मेरे तो गिरधर गोपा तो सरो न कोई मेरे तो।
- 45:32गिरधर गोपाल जा के सिर पे मोरमुकट है मेरो पति सोई मेरो तो।
- 45:50गिरधर गोपा यंत्र कुछ खराब है। जैसा सयंत्र से बोला गया इस हालात
- 46:00में वैसा मैंने बोल दिया अब इसको बार बार सुन रहा हूँ ये वक्त कभी
- 46:09कभी आता है। कभी कभी आता है यह वक्त और ऐसी
- 46:17दरदीली हवाओं के चलते हुए प्यार का पैगाम कभी कभी कोई दीवाना
- 46:25बरसाया करता है इसको बार बार सुनना।
- 46:30धन्यवाद।