Latest / Baba ji Vijay Vats / 25 Feb 25 - जड़ से परमात्मा मुक्ति की ओर! सूक्ष्म लोक? मुक्त होने का सबसे आसान और Practical तरीका! KARMA Philosophy.
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- 0:09सूक्ष्म लोक के लिए रोज़ का एक विचार समझदार व्यक्ति सत्य बोलता
- 0:27है, मूर्ख व्यक्ति। झूठ बोलता है और तत्वज्ञानी कुछ
- 0:41नहीं बोलता। मन हो जाता है, तत्वज्ञानी चुप
- 0:49रहता है। आप भी सुन लीजिये समझदार व्यक्ति
- 0:59सत्य बोलता है, मूर्ख व्यक्ति झूठ बोलता है।
- 1:10और तत्रज्ञानी प्रज्ञावान चुप हो जाता है।
- 1:15मान हो जाता है लीजिए आज का प्रश्न है एमडी भास्कर सुबह के
- 1:29प्रवचन को लेकर। एक जिज्ञासा है, आपने कहा था कि
- 1:36सूक्ष्म लोक से एक प्रश्न आया है, क्या सूक्ष्म लोक में भी प्रश्न
- 1:43उठते हैं क्या हमारी तरह? उनकी श्रवण इंद्रियाँ काम करती
- 1:51हैं। क्या ये सामान्य जीवात्वयें हैं
- 1:58जिनके सुदूरों के वचन से शंका, समाधान और उनकी प्रोग्रेस होती
- 2:05है? आखिर वे हैं क्या?
- 2:12और सतगुरु का उनके लिए क्या रोल है?
- 2:17कृपा करके जिज्ञासा श्रमण करें, बहुत सुंदर प्रश्न है, ऐसे प्रश्न
- 2:27बेशकीमती होते हैं। आने चाहिए।
- 2:40शास्त्रों में आपने पढ़ा होगा अक्सर पांच सूक्ष्म ज्ञानेन्द्र
- 2:53पढ़ा ना ये पांच सूक्ष्म ज्ञानेन्द्र।
- 3:01वही है जो सूक्ष्म शरीर में होती है।
- 3:09आपको थोड़ा सा इनका अंतर संबंध गहना दू तीन शरीर हैं प्रमुख।
- 3:23सबसे बेसिक कारण शरीर, दूसरा सूक्ष्म शरीर, तीसरा सोल शरीर जो
- 3:38आप देख रहे हैं यह सोल शरीर इट्स एन इन्स्ट्रुमेंट।
- 3:44यह एक उपकरण है यंत्रिक उपकरण इसके भीतर खूब हूँ, बिल्कुल ऐसा
- 3:56ही सूक्ष्म शरीर। एक ज्ञानेन्द्रियां हैं सूर्य
- 4:09सूक्ष्म ज्ञानेन्द्रियां हैं, सूक्ष्म जैसी ये नक सूंघता है काम
- 4:20श्रवण करते हैं। आंख देखते हैं।
- 4:30ऐसे ही सूक्ष्म ज्ञानेन्द्र है। हम रोज़ पढ़ते हैं फूल
- 4:37ज्ञानेन्द्र और सूक्ष्म ज्ञानेन्द्र।
- 4:49अक्सर अपने शास्त्रों में पढ़ा होगा अपने घर बार को स्वच्छ, साफ
- 5:00सुथरा, सुगंधित वाजावर में रखिए। भगवान को सुगंधित फल फूल अर्पित
- 5:09करते हैं। इतर छिड़कते हैं आपने अक्सर
- 5:17पुजारी देखे होंगे। जब वो मूर्ति को भोग लगाते हैं तो
- 5:26वो खिलाते नहीं हैं, वो सुंघाते हैं।
- 5:32क्योंकि उनकी टेस्ट बड्स जीव बाहर नहीं होती।
- 5:35काली को खिलाया जा सकता है काली की जीव अपार है।
- 5:42उनकी टेस्ट बड्स हैं सूक्ष्म टेस्ट बड्स।
- 5:51बिल्कुल ऐसे ही जैसे ये शरीर सुनता है अब ध्यान से समझ लेना
- 5:59इनके संबंधो को आवाज़ बाहर से आती है अगर ये खराब हो।
- 6:06तो नहीं सुनता अगर ये ठीक हो? सूक्ष्म ज्ञानेन्द्र खराब हो तो
- 6:13भी नहीं सुनता। सूक्ष्म शरीर पावर लेता है कारण
- 6:25शरीर से। और कारण शरीर शक्ति रहता है।
- 6:35सामूहिक चेतना से थोड़ा थोड़ा गहरा जाता जाऊंगा।
- 6:44आप भी गहरा समझने की चेष्टा करना। मैंने आपको बहुत बार कहा है चेतन
- 6:58मन जिसका हमें पता चलता है सारे दिन तुम ऊहापोह से घिरे रहते हो
- 7:09मन चलता है मन सूझता है। सोचता है तो ये प्रश्न आया अन्यथा
- 7:18प्रश्न नहीं आता, जब ये मन नहीं रहेगा तो प्रश्न नहीं आएगा।
- 7:26निष्प्रश्न हो जाएगा व्यक्ति। मनशोर है और प्रश्न उस शोर का
- 7:40बाहरी परिदृश्य भीतर शोर मचा है। प्रश्न बन के उभरता है और हम उसे
- 7:54बोल देते हैं। बस यह सिर्फ यही दर्शाता है के
- 8:01भीतर मन का शोरगुल है। संत कहते हैं, समाधि में सारे
- 8:10प्रश्न घर जाते हैं, मन मन हो जाता है तो प्रश्न कहाँ से रहेगा?
- 8:18समाधि में मन घर जाता है तो प्रश्न बिगड़ जाते हैं।
- 8:26मन ही प्रश्न उठाता है। तो मैंने कहा चेतन और चेतन के
- 8:36भीतर अचेतन मन अचेतन को फ्राइड ने दो भागों में बांट लिया।
- 8:46सबकॉन्शियस एंड अनकॉन्शियस अब चेतन और अचेतन उसने एक के दो कर
- 8:58लिया है। हमारे ऋषियों ने एक अचेतन किया
- 9:03था। फराइड क्योंकि बहुत गहरे नहीं
- 9:08पहुँच पाया, उसकी खुद की मजबूरी ने अचेतन मन को दो भागों में
- 9:18बंटने के लिए मजबूर कर दिया। चेतन मन से सभी सहमत हैं।
- 9:26कॉन्शस अचेतन मन फ्राइड क्योंकि पूरा नहीं जा सका।
- 9:32भीतर तो फ्राइड जहाँ तक जा सका, वहाँ तक उसने कहा इट इस सब
- 9:41कॉन्शस, यह अब चेतन मन है। और जो बहुत गहरा हो जाता।
- 9:50है। राइट ने कहा ये अचेतन है इट्स
- 9:56अनकॉन्शियस सब कॉन्शियस एंड अनकॉन्शियस मैं आपको थोड़ा सा।
- 10:05सरल भाषा में समझा हम किसी झील में तालाब में छोटी कंकरी करा
- 10:18देते हैं या कोई कागज़ करा देते हैं।
- 10:23वह गहरे तलों पे नहीं जाता ऊपर ऊपर तैरता रहता है।
- 10:29अगर उसी जलाशय में हम एक बड़ा पत्थर फेंक दे तो वह ऊपर नहीं
- 10:35तैरेगा वह भीतर भीतर। तल को छूता जाएगा और अंतरिम छोर
- 10:42को छू जाएगा। स्थल के झील के बिल्कुल अंदरूनी
- 10:48किनारे पे बैठ जाएगा। वो तो।
- 10:53फ्रेंड ने जो बाहर बाहर के सतह ही।
- 11:00स्थान थे उसको कह दिया अब चेतना सब कॉन्शस, जो गहरा था, भारी था,
- 11:14वो बैठ गया बिलकुल तल पर नीचे। उसको फ्राइड ने कहा अनकॉन्शियस
- 11:24लेकिन ऋषियों ने कहा दोनों को मिला के बोथ आर अनकॉन्शियस अब
- 11:32यहाँ थोड़ी सी बात। बड़ी प्यारी बात करी स्पाइड ने
- 11:36यहाँ कुछ समझदार बातें भी की। जितना बड़ा और गहरा पाप होगा वह
- 11:49क्योंकि भारी होगा पत्थर की शिला की तरह।
- 11:53वह बिल्कुल जलाशय के सतही तल पर बैठ जाएगा।
- 11:57भीतर ही इसलिए गहरे पापों का परिणाम परमात्मा की सृष्टि में
- 12:08बहुत देर से मिला करता है। समझाइए आपको मैं सर एक बात कहा
- 12:23करता हूँ के पिछले जन्मों में एक जन्म में मैं राजा था।
- 12:31एक सच्चे व्यक्ति को। जिसका कोई कसूर नहीं था।
- 12:36मैं जानता था इसका कोई। कसूर नहीं था।
- 12:43लेकिन मैंने कुछ अपने मेरा द्वेष था उसके साथ अपने निजी द्वेष के
- 12:53कारण। मैंने उस व्यक्ति को सख्त सजा दी,
- 12:56उसको मार दिया, वह निर्दोष था, मारा भी तड़पा के मारा बहुत भारी
- 13:06पाप हो गया। उसका दंड मुझे आज तक नहीं मिला और
- 13:10मैंने आपको कई बार जिक्र किया उस बात का।
- 13:14वो दंड मेरा भोगना बाकी है। जब आएगा महत्त्व बन के आएगा ये
- 13:23ईश्वर का विधान, जानें क्या बनकर आएगा लेकिन आता जरूर है, निश्चिंत
- 13:32है। कर्मों की व्याख्या करते हुए जो
- 13:42हल्के हल्के पाप हैं, जैसे हम रसोई घर में हैं।
- 13:50पांच 4 दिन पहले मेरे पास एक कमेंट आ गया बाबा क्या करे?
- 13:55कॉकरोच मर जाते हैं? चींटियाँ मर जाती हैं, यह बाप
- 14:02नहीं हैं और अगर हैं तो बड़े हल्के पाप हैं।
- 14:09आपने जान बूझ कर नहीं मारा? जैन मुनि पांव बचा के चलते हैं 17
- 14:18सी कलो का व्यक्ति छोटी सी चींटी पर पड़ेगा, मर जाएगी मेरे कारण
- 14:24क्यों मरे बेचारे इसलिए कोशिश करते हैं कि स्थान पर बैठे रहे,
- 14:32ज्यादा घूमे फिरें नहीं। चौमासी के अंदर जब बिलों में से
- 14:38निकलते हैं सूक्ष्म प्राणी, तो जैन बनी आपको नहीं पता क्यों बंद
- 14:43कर देते हैं यात्रा? उसका यही कारण है।
- 14:48सूक्ष्म प्राणी अपने बिलों में से बाहर निकलते हैं।
- 14:53आपने भी देखे होंगे। बारिश के कारण उनके बिलों में
- 14:58पानी घुस जाता है। बारिश भर जाती है बाहर निकल जाते
- 15:03हैं बाहर तो जैन मुनि उस चौमासे के दौरान चार माह के दौरान यात्रा
- 15:11नहीं करते हैं। एक बड़े मज़े की बात बताऊँ चलो
- 15:27नहीं बताता फिर बताऊँगा। बस इतना सा बता देता हूँ।
- 15:39यह जो ट्रांसपोर्टर हैं, जो बसें वगैरह चलती हैं, यह कभी सुखी नहीं
- 15:46रहती। अपने जीवन में बस इसे आप समझ लेना
- 15:51इसका विस्तार कभी करूँगा। क्यों नहीं जाती कारों वगैरह पे?
- 15:57जर्मनी। टायर के नीचे कौन आ गया, कोई पता
- 16:00नहीं लगता। पांव के नीचे तो पता भी चल जाएगा।
- 16:08फिर वो पांव किसको जाता है? ये थोड़ी विस्तार की बात है।
- 16:11फिर समझाऊंगा बड़ा गहरा लंबा विषय है।
- 16:17लेकिन इतना सा समझ लेना कि ट्रांसपोर्टर जो बसें चलाते हैं,
- 16:22जो कार चलाते हैं, बहुत ही ज्यादा चलाते हैं, वह अक्सर दुखी रहते।
- 16:31हैं। समयदार।
- 16:36कोई सराह हिप्स्य होता है। मुझसे अक्सर पूछ लिया जाता है कि
- 16:42जैन मुनि पैदल क्यों चलते हैं? जब कार उपलब्ध है, भगत हैं देने
- 16:48को हैलो मुनि जी आपके लिए कार लेकर आए नहीं भाई हम तो पैदल
- 16:55चलेंगे। कार्यण क्या कार्यालय शरीर को
- 17:02कष्ट दे लेंगे? अहिंसा वर्मा धर्म किसी को
- 17:08मारेंगे नहीं आइए। हम प्रसंग पे चले सोल सीरीज आप सब
- 17:20देखते हो सोल सीरीज इसके भीतर सूक्ष्म शरीर, सूक्ष्म ज्ञान
- 17:30इन्द्रियां उनका क्या काम है? जब सूल से बाहर दे ही निकल जाता
- 17:37है तो वह अपने साथ सूक्ष्म ज्ञानेन्द्रियों को लेकर जाता।
- 17:41है। दे ही को सुनता भी है, दिखता भी
- 17:51है, टेस्ट भी लेता है जी बस। पाचू इंद्रियाण उसके काम करते
- 18:04हैं। ज्ञानेन्द्र जैसा स्थूल है।
- 18:16बिल्कुल वैसा ही इन्स्ट्रुमेंट जब मैंने बोल दिया आपको।
- 18:20तो बस ऐसा ही समझना कि पांचों ज्ञान इंद्र पांचों स्थूल
- 18:26इंद्रियों के समान त्वचा भी होती है।
- 18:33उसके पिता से उसको पता भी चलता है, जो सतूल अनुभव करता है।
- 18:43वह सूक्ष्म भी अनुभव करता है। इसलिए अक्सर जो व्यक्ति मर जाता
- 18:47है उसको कुछ घंटों तक पता ही नहीं चलता कि मैं मर गया हूँ।
- 18:53बिलकुल वही सब कुछ दिखता भी है। ये रो रहे हैं, घर वाले देख रहे
- 18:59हैं। इनकी चीखों से लाट कान में पड़
- 19:02रही है। दिख रही हैं, सारी ज्ञान
- 19:07इंद्रियाँ काम करती हैं। समझाइए आप ठीक?
- 19:23ज्ञानेंद्रियो के कारण ही वो अपनी यात्रा पूरी करता।
- 19:26है। अब आपको कनेक्शन बना दूँ।
- 19:37एनर्जी कैसे वितरित होती? है।
- 19:43यह स्थूल है। इस थूल को एनर्जी मिलती है
- 19:49सूक्ष्म से खूब हूँ, इसके भीतर जो बैठा हुआ है और सूक्ष्म शरीर इसके
- 19:59साथ थूल के साथ एक सर्वर कोड से बंधा होता।
- 20:03है। और समित है।
- 20:07जाना आप सूक्ष्म शरीर सतुल शरीर के साथ रजत तरज्जु से बंधा होता
- 20:15है। सिल्वर कॉर्ड से सतुल शरीर को
- 20:21शक्ति मिलती है सूक्ष्म शरीर से। उसका कनेक्शन पॉइंट क्या है?
- 20:28रजत रज्जु वह सूक्ष्म को मिलती है कारण शरीर से वह कारण शरीर जो
- 20:38मैंने व्याख्या की जो बिलकुल चेतना का छोटा सा बिंदु।
- 20:50प्रारंभ से लेकर अंत तक आपके साथ रहता है देही के साथ और देही क्या
- 20:58है सब कर्मों का हिसाब, किताब, लेखा जोखा, हमारी कामनाएं, हमारी
- 21:06स्मृतियां, हमारी वासनाएं। हमारी इच्छाएं सब भरी पड़ी हैं।
- 21:12इसमें इनका समूह है देही? एक हिसाब से देही भी जड़ और देही
- 21:25भी जड़ दोनों जड़। और इन दोनों को शक्ति कहाँ से
- 21:31मिलती उस फ्यूज से जिसे मैं कारण से कहता हूँ, वह फ्यूज शक्ति कहाँ
- 21:39से लेता वह लेता उस सामूहिक कॉन्शसनेस से।
- 21:47अब पहले आपको ये पॉइंट गिना दूँ? यह चेतन इसके भीतर अचेतन अचेतन के
- 21:59नीचे अगर तीसरा हमसे देखेंगे ऋषियों के हिसाब से।
- 22:05तो वह सामूहिक कलेक्टिव, अनकॉन्शियस, अचेतन, चेतन अचेतन,
- 22:19सामूहिक अचेतन, कलेक्टिव अनकॉन्शियस।
- 22:24प्रचो था। सामूहिक चेतन मैंने इसको मन में
- 22:30ही शुमार कर दिया ताकि आप ठीक से समझ लो।
- 22:32शुरू से मैं ऐसी व्याख्या करता हूँ।
- 22:38ऋषियों ने भी इसको ऐसे ही डाला। चेतन कॉन्शन्स, अचेतन,
- 22:50अनकॉन्शियस, सामूहिक, अचेतन, कोलेक्टिव, अनकॉन्शियस और चौथा।
- 23:00सामूहिक चेतन कलेक्टिव कॉन्शस ये चार शरीर आग है कलेक्टिव कॉन्शस
- 23:10कोई शरीर नहीं है कलेक्टिव अनकॉन्शस वह भी एक फलो है।
- 23:22वह भी दरअसल शरीर नहीं। ये भाव हैं कर्मों के जो लहरों की
- 23:32तरह बहते हैं सब के भीतर या किसान।
- 23:38उसके नीचे वाली जो लहर है लेहर है वो कहलाती है कलेक्टिव कॉन्शस
- 23:45सामूहिक चेतन, जो मैं कहता हूँ अस्तित्व समान है, हम सब का फिर
- 23:56समझा दूँ थोड़ा सा मुश्किल विषय है।
- 24:02यह चेतन कॉन्शस माइंड अचेतन, जीसको फ्राइड ने दो भागों में
- 24:11बांटा सबकॉन्शस एंड अनकॉन्शस तो ऋषि कहती हैं इसको सिर्फ कॉन्शस
- 24:16अनकॉन्शस। कॉन्शस अनकॉन्शस दोगे।
- 24:22तीसरा कलेक्टिव अनकॉन्शस सामूहिक अचेतन और चौथा सामूहिक चेतन तो
- 24:31फ्राइड के हिसाब से पांच हो गए वृष्यों के हिसाब से चार हो गए।
- 24:38बताओ, कोई नहीं समझाए तो मुझे बता दो, मैं आगे शुरू भारी।
- 24:48आपका परिणाम सबके बाद मिलता है जितना भारी से भारी गहरे से गहरा
- 24:53होगा। अंतिम समय में इसीलिए संत आखिरी
- 24:57वक्त में। गंभीर बीमारियों से युक्त हो जाते
- 25:03हैं। जेद्दो कृष्ण मूर्ति देख लो राम
- 25:08कृष्ण परमहंस देख लो, गंभीर कारणों से मरते हैं।
- 25:17राम आत्महत्या कर लेते हैं। कृष्ण के शरीर को जहीरा तीर पार
- 25:23कर जाता है। जितना गहरा बड़ा पाप होगा, सबसे
- 25:31बाद में वो फल देगा। अब कर व्यवस्था को आप ठीक से समझ
- 25:40गए होंगे। समझ गए तो आगे चलो च अब एक बहुत
- 25:51महत्वपूर्ण मु्द्दे पे हम आते। हैं, जो शायद आज तक।
- 25:58आपके सामने खुला नहीं होगा। सूक्ष्म शरीर सथूर शरीर की हूबहू
- 26:07फोटोकॉपी है। पहले तो आप इस शब्द को अच्छे से
- 26:12समझ लो, हूबहू फोटोकॉपी है। तो फिर इसका अर्थ ब्रेन की भी
- 26:22फोटो कॉपी होनी चाहिए। हम इस जन्म में अल्बर्ट आइंस्टीन
- 26:28नोके मरते हैं उदाहरण दे रहा हूँ और उदाहरण को कभी उस वस्तु के
- 26:34बराबर मत समझ लेना। एग्ज़ैम्पल इज़ एग्ज़ैम्पल समझे
- 26:40एग्जाम्पल के ऊपर बहस मत करना, हम अल्बर्ट आइंस्टीन नो के मरते हैं।
- 26:51तो मेरे पास बहुत बार प्रश्न आ जाते हैं कि मैंने 1000 गुरुओं से
- 26:55पूछ लिया कोई जवाब नहीं देता। मैंने कहा वक्त आने पे मैं आपको
- 26:59जवाब दूंगा। इसका हर चीज़ का जवाब वक्त आने पे
- 27:03ज्यादा प्रासंगिक होता है। गुथिया घुलती हैं वहाँ के।
- 27:10प्रत्येक व्यक्ति जीस जन्म में मरता है, उसकी निजी समृद्धि उसके
- 27:19न्यूरॉन्स में इकट्ठी। होती।
- 27:21है। जैसे अब जे शरीर जाएगा, इस जन्म
- 27:26की जितनी स्मृतियां हैं। ये सब इस खोपड़ी के निगलों में
- 27:31संग्रहित हैं। ठीक जिसे हम स्मृति कहते हैं
- 27:36लेकिन ये सिर्फ इस जन्म की स्मृतियां हैं।
- 27:42एक ऐसा भी हमारे भीतर सूक्ष्म शरीर में।
- 27:49सुपरमाइंड है जिसमें सारे जन्मो की स्मृतियाँ संग्रहित है, वह
- 27:57क्या है जहाँ सारे जन्मो की स्मृतियाँ संग्रहित है?
- 28:01सुपर सेंसिटिव कंप्यूटर? सुपरसिस्ट माइंड अगर आपके सभी
- 28:13शरीर दफ़न किए होते। हैं।
- 28:16तो आप उन शरीरों के नूरांस को जाकर चेक कर सकते थे, प्रत्येक जन
- 28:24की स्मृति को? अगर ऐसा कोई विधान होता है नहीं,
- 28:29बात अलग है लेकिन अल्बर्ट आइंस्टीन के न्यूरॉन्स में इस
- 28:37जन्म की स्मृतियां और वो क्या सीख के गया, क्या खोजा इज़ इक्वल टु
- 28:42एम सी स्क्वायर? बस में फीड है तो क्या वह जब साथ
- 28:50गया तो वह जो सीखा ए बीसी से लेकर इज़ इक्वल टु एम सी स्क्वायर इतनी
- 29:04समृद्धि कहाँ लुप्त हो गई लुप्त नहीं हुई?
- 29:07मैंने कहा फोटो कॉपी है दो कॉपीस है यहाँ न्यूरॉन में है जो हमने
- 29:13दफन कर दिया और एक अपने भीतर है उसका रेसर पड़ा है दो कॉपीस।
- 29:30इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ कि दूसरी बार जब मैं उस तल पे गया तो
- 29:36देख के हैरान हुआ के सभी जन्मो में वो ही आभासा सभी जन्मो में वो
- 29:45ही एबीसी। वही जन्म, सबी में वही दबार से
- 29:50फिर सीखो दबार से क्यों सीखो? क्योंकि यह फूल यंत्र नया मिला है
- 29:59लेकिन हमारे सूक्ष्म यंत्र में तो पहले से ही बर्फ़ पड़ा है।
- 30:06हर जन्म में हम मशक्कत करते हैं, अपनी मूर्खता के कारण मूर्खता समझ
- 30:11लो या हमें पता नहीं उस सूक्ष्म की समृद्धि को स्कूल में कैसे
- 30:16क्रमट किया जाए और जल्दी ही यह व्यवस्था आ जाएगी।
- 30:22वैज्ञानिक सीखो चलेंगे? हमारी सूक्ष्म जन्म की स्मृति
- 30:31लाकर सतुल में पटक दी जाएगी। ये जो कहते हैं पास्ट लाइफ फ्री
- 30:38या तो बकवास इनको कुछ नहीं पता। लेकिन एक्चुअल में ऐसी संभावना है
- 30:47कि व्यक्ति के इस जन्म के समृद्धि को पिछले सारे जन्मों की समृद्धि
- 30:53से जोड़ दिया जाए। यह एक विज्ञान है।
- 30:58अगर विज्ञान इसको किसी दिन खोज सका तो?
- 31:09अब आपको मैं समझाऊंगा 64 कलाएं व्यक्ति 64 जन्म में भी नहीं सीख
- 31:18सकता और भगवान कृष्ण? 64 कलाओं को संदीप पानी आश्रम के
- 31:29भीतर 64 दिनों में देख लेते हैं। क्या किया संदीप पानी ने?
- 31:35संदीप पानी के पास क्यों गए? कृष्ण गुरु तोब भी बहुत।
- 31:41थे। लेकिन संदीप पानी के पास यह
- 31:47प्रोसेसर थे कि आपकी सभी कलाओं को एक स्थान पर कलेक्ट कर देना।
- 31:58उसने 64 दिनों में वह। एक्स्पेरिमेंट करके सारी कलाओं को
- 32:05जो जन्मो जन्मो से उसके पास थी, एक जन्म में स्टोर करती थी, तो 64
- 32:14दिनों में 64 कलाओं को सीख लिया, जो कि असंभव है।
- 32:22इस संतुल यंत्र के लिए असंभव है संदीप पानी ने इसे संभव कर दिया
- 32:33कैसे संभव कर दिया उस प्रोसेसर के द्वारा उसके कुछ गुप्त रहस्य हैं।
- 32:39मैं वक्त पे आपको बताऊँगा थोड़े थोड़े करके एक तो मैं एक दो तो
- 32:50मैं उजागर अभी कर देता हूँ जो कि महीने भी शायद पहले भी बोले हुए
- 32:56हैं किसी वीडियो में। अगर आप किसी चीज़ को गहरे में याद
- 33:04रखना चाहते हो जो कभी भूल ना सको तो ये जो इयरफोन होता है हमारे
- 33:18मोबाइल के साथ लगा के कान में लगा के इयरफोन सो जाया करो।
- 33:26नींद आ जाएगी। आपको बहुत से लोग ऐसा करते हैं और
- 33:30कुछ लोग ऐसा करने से जल्दी पहुँच गए हैं।
- 33:33ये जो 20 लोग पहुंचे उनमें से दो तीन इस हिसाब से पहुंचे उन
- 33:43सूक्ष्म। वीडियो को लगा के कानों में सो
- 33:49जाते हैं, नींद भी गहरी हो जाती है, मीठी मीठी लोरी जैसी आवाज सो
- 33:56जाते हैं। आपने देखा होगा वीडियो को सुनते
- 34:01हुए। रस आपके भीतर उतरना शुरू हो जाता
- 34:05है और आपको नींद का बाकी बताने लगता उस क्षण में जीस क्षण में आप
- 34:12सोए। अब इन बातों को ध्यान से सुन लें
- 34:14ना शायद फिर ये तार न जुड़े। जब आप सोए ओह लोरी मीठी आवाज की
- 34:30लोरी भीतर से उस तत्व से लिपटते बढ़कर आई और ज्ञान तंतु साथ लेकर
- 34:38आती। है।
- 34:42वह आपके कानों में जब पड़ता है और आपको नींद आ जाती है तो बड़ा शुभ
- 34:49है। शुभ क्यों है?
- 34:53क्योंकि उस वक्त आप योग निद्रा में होते हो।
- 34:56जीस योग निद्रा की तलाश बड़े बड़े योगी हिमालय पर बैठ के करते हैं।
- 35:04कि काश हमें योग निद्रा लग जाए और मैंने उसका बिल्कुल सरल उपाय
- 35:10भगवान शंकर ने मुझे बताया था जो मैंने आपको फॉर्वर्ड कर दिया।
- 35:16क्रिया योग स्वास्थ्य उच्च से लेना, पेट भर लेना।
- 35:21नबी को चोट लगे फिर श्वास को छोड़ देना, सहस को चोट।
- 35:26लगे। इससे दो तलों को चोट लगेंगी।
- 35:36दो चक्र आपके स्पंदन में आ जाएंगे।
- 35:43और वो वक्त से कहीं पहले जाग जाएंगे।
- 35:47ऊर्जा के क्षेत्र हैं ये उससे आपकी चेतना भी जग जाएगी।
- 35:53कुंडलहन जो चेतना का भंडार। है।
- 36:03मैंने कहा दो का पीस होती है एक ओरिजिनल एक फोटो स्टेट फोटो स्टेट
- 36:12तो आप कितनी भी करवा सकते हो, ओरिजिनल एक है इसमें रह गया अब जो
- 36:18आइस क्रीम की समृति यहाँ पड़ी है। अगर आपके पास से यंत्र हूँ तो
- 36:23उसमें से हू हू प्राणी निकाली जा सकती।
- 36:26है। इज़ इक्वल टु एम सिख तो संदीप
- 36:34पानी ने क्या किया? कृष्ण को योग निद्रा में ले गए
- 36:38योग निद्रा में ले जाकर। पहले से ही जो उन्हें पुराने
- 36:43जन्मों में सीखा। था।
- 36:48कलाओं को वो उठाया और उठा के पटक दिया।
- 36:54ये काम किया। आपकी प्राणी जन्मों की शिक्षा को
- 37:01भी भटका जा सकता है। देखिए गलत व्यक्ति इस शिक्षा का
- 37:06इस्तेमाल न करें, गलत मैंने देखे हैं।
- 37:12लोग शब्दों का गलत तरीके से इस्तेमाल करते हैं और प्रचार शुरू
- 37:16हो जाता है। कृपा करें यह विज्ञान है, विज्ञान
- 37:23को विकृत मत करें, फिर से दोबारा दोबारा से ए बीसी सिखाया जाए,
- 37:35काखागह सिखाया जाए, उडा आडा ईडी सिखाई जाए।
- 37:43व्यक्ति ऑलरेडी प्रशिक्षित। है।
- 37:47ये कॉपी तो छोड़ गया यहाँ, लेकिन उसकी फोटो है, उसको उभारा जा सकता
- 37:53है और उसको उभाकर फिर से नए शरीर के स्टूल में प्रविष्ट किया जा
- 37:58सकता है। यह एक वैज्ञानिक टेक्नोलॉजी है और
- 38:06इसको उभारा जा सकता है वैज्ञानिक इसे कृपया नोट कर।
- 38:13लें। अगर इस दिशा में कोई काम।
- 38:17वो कर सकते हैं या करना चाहते हैं तो करें तो संदीप पानी के पास जब
- 38:25इतने पांच हो जा और सॉल्व कर जाए। यह विद्या थी तो विद्या तो मौजूद
- 38:31है बस विद्या को जानने वाले और उसको एटेम्पट करने वाले।
- 38:38लोक नहीं है विद्याएँ कहीं नहीं, कोई विद्या ही हैं विद्या तो सही
- 38:47पूछो तो वातावरण से भी निकाले जा सकते हैं।
- 38:52आपको जानकर बड़ी हैरानी होगी कृष्ण के वाक्य।
- 38:57कृष्ण के गीता के वाक्य वशिष्ठ के योग वशिष्ठ के वाक्य इस सृष्टि
- 39:05में आज भी रैंक रहे हैं, लेकिन उनको खींचने की व्यवस्था नहीं है।
- 39:12आपके पास जैसे रेडियो होता है ना रेडियो?
- 39:16यहाँ से थरंगें गुजरती हैं, हमको पता नहीं चलता और कई बार आपका
- 39:24ब्रेन रिसीविंग सेंटर बन जाता है। आपने बहुत बार ये चमत्कार शायद ही
- 39:30देखा भी हो। आजकल तो रेडियो तो नहीं है लेकिन
- 39:33टेलीविज़न के भी आप खेच सकते हो। रेंज कोई गाना चल रहा है और वो
- 39:41अक्सर आप गुनगुनाने लग जाती हो। आपको पता नहीं चलता कि ये गाना
- 39:44कैसे आ गया? मन में मेरे दिल के सहारे आजा।
- 39:58बेगा भीगा है समां ऐसे में तू है कहाँ हो मेरा दिल लिए पुकारना आजा
- 40:14मेरे गम के सहारे। आजा आप गुनगुनाने लग गया आपको पता
- 40:21नहीं कहाँ से आया है आपका ब्रेन रिसेक्टिव सेंटर हो गया रिसेप्ट
- 40:28किया उसने उस गाने को गुजर रही हैं तरंगें।
- 40:34आपके ब्रेन ने बिल्कुल वही काम किया जो रेडियो का स्टेशन करता
- 40:38है। रेडियो में जो वॉल्यूम का
- 40:41मैट्रिक्स है, वो खींचता है उसको आपका ब्रेन वहाँ पर फिक्स हो गया,
- 40:49आपको पता भी नहीं था कई बार आप गली निकालने लग जाते हो।
- 40:54कहाँ से आई? पता नहीं सुंदर भजन गाने लग जाते
- 41:03हो, सुंदर बातें आपके दिमाग में चलनी शुरू हो जाती हैं, जो कभी
- 41:09आपने सीखी नहीं। कहाँ से आई वो?
- 41:18वो यहाँ से गुजर रहे? हैं।
- 41:22और जीस मेट्रिक्स पर गुजर रहे हैं वो उस पर आपके ब्रेन ने उनको कैच
- 41:29कर। लिया।
- 41:30और आपके भीतर उतर गई। ये है प्रोसेसर चलो हम विषय पे
- 41:39लौट चले ये आपको कुछ मैंने बाहर की सूचनाओं से संबंधित इसका ज्ञान
- 41:47से कोई संबंध नहीं है। ध्यान रखना मैं श्रद्धा कहता हूँ।
- 41:52यह है सिर्फ इन्फॉर्मेशन है ऑल अरे इन्फॉर्मेशन सूचना ही है
- 41:57सिर्फ यह कि मैं भी हो, तो भी आप अपने तत्व तक पहुँच सकते हो जरूरी
- 42:07नहीं है पीएचडी करना। जरूरी नहीं है।
- 42:11ट्रिपल पीएचडी करना या मस्ट डिग्री लेना या पढ़ाई लिखाई या आई
- 42:16ए एसआइपीएस करना कोई जरूरी नहीं है।
- 42:21बिलकुल बिलकुल कोरा कागज़, कबीर की तरह कागज दो कलम छूओ नहीं।
- 42:30भाई जब भी उतरेगा आपने आप चौंकना मत क्योंकि आपके न्यूरॉन को विकृत
- 42:41नहीं किया गया वो खलल नहीं डालेंगे।
- 42:47इसलिए कल मेरे से प्रश्न पूछा था रहदास किसके शिष्य थे?
- 42:52रहदास वैसे तो रामानंद के शिष्य थे, कहते हैं कि कबीर जी से
- 42:59उन्होंने नाम दान लिया था। यह इतिहास की बात है, लेकिन कम से
- 43:10कम मैं इसका साक्षी नहीं हूँ। मैंने भी सिर्फ सुना है जो सुना
- 43:15है वो मैं कह देता हूँ वो मैंने सुना है।
- 43:19रामानन्द थे, रामानन्द उसके गुरु थे, रामानन्द ब्राह्मण थे।
- 43:25लेकिन वैसे ब्राह्मण नहीं जो आपके चोटी वाले होते हैं।
- 43:29जिन्होंने सतन टैक्स लगाए, वो ब्राह्मण है, मुझे भी दुख होता है
- 43:36बोलते हुए। आपको भी सुनते हुए दुख होता होगा
- 43:41ऐसा ज़माना है हम गुजरे हैं ऐसे जमाने में कहीं आज फिर हम उसी
- 43:50दिशा में तो नहीं जा रहे? थोड़े से चेत रहना।
- 43:59यह मानवता के जीवन के ऊपर एक धब्बा है कलंक है काला कलंक, यह
- 44:06किसी डिशर एजेंट से नहीं मिटता नहीं है।
- 44:11कोई डिटरजेंट नहीं है, जॉब उसको मिटा देगा।
- 44:15ये धब्बा लगा रहेगा हमारे माथे के ऊपर श्रद्धा क्लंक रहेगा ये चेतन
- 44:33सारी नॉलेज जिसे हम ज्ञान कहते हैं, सूचना ही है असल में कोई
- 44:39यहाँ भीड़ होती है। और जब तुम ज्ञान को उपलब्ध हो
- 44:46जाओगे वो भी सारी सूचनाएं बन जाएंगी आपके लिए, वो भी यहाँ भीड़
- 44:52होंगी यहाँ से जाने के लिए। उस अस्तित्व तक पहुंचने के लिए जो
- 45:03तुम हो तत्व और मसीह जो कुछ भी होगा सब कुछ फीड हो जाएगा आपके
- 45:10चेतन मन में। और फिर सबको साथ लेके पुराने
- 45:17जन्मों के सब संस्कार साथ लेके प्लस इस जन्मों की सारी पूंजी तीन
- 45:244 घंटे लग जाती है सामान समेटने में आदमी एकदम से मरता नहीं है।
- 45:30एकदम से सांस बंद हो सकती है उसके।
- 45:33एकदम से दिल धड़कना बंद हो सकता है, एकदम से ब्रेन काम करना बंद
- 45:39हो सकता है, लेकिन भीतर जो प्रोसेसिंग है वह करीब चार 5 घंटे
- 45:46तक चलती है। सारी पोटली सिमट जाती है दोनों
- 45:50तरफ से। सब कुछ सूचनाओं को संग्रहित करके
- 45:54उसे सुपर कंप्यूटर में डाला जाता है।
- 45:57अच्छी तरह से पैक किया जाता है। फिर वो देही कारण शरीर के साथ
- 46:03शरीर से बाहर निकल जाता है उस देही के भीतर पिछले जन्म की प्लस
- 46:10से इस जन्म की। सभी स्मृतियां साथ होती हैं।
- 46:14कर्मों वगैरह की सूचनाएं सब होती हैं।
- 46:18मुख्य बिंदु था मेरा कि जो आपने इस जन्म में सीख लिया अल्बर्ट
- 46:23आइंस्टीन से चला था मैं अल्बर्ट आइंस्टीन आज जहाँ भी जन्म लेंगे
- 46:29या ले लिया। मुझे इसका कुछ पता नहीं वहाँ पर
- 46:37ये उनके साथ है। अगर कोई व्यक्ति संदीपानी जैसा हो
- 46:47तो वह अल्बर्ट आइंस्टीन को। वो उस तल पर जाकर उसकी समृद्धि को
- 46:53उठाकर उसके सुर में भटक सकता है तो कृष्ण जैसा काम होगा।
- 46:5864 दिनों में संदीप ने ये काम कर दिया।
- 47:08अब इतनी झिखाई मारने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- 47:11क्लास में बैठो। टीचर निकाल देगा, दंडित करेगा,
- 47:16मुर्गे बनाएगा ऐसा कुछ नहीं तो मैंने एक उपाय बताया था जीस भीतरी
- 47:28या बाहरी ज्ञान को आप गहरे में ले जाना चाहते हो।
- 47:34उसकी वौइस् कान में लगा के सो जाओ, बहुत से लोग मेरी वीडियो
- 47:42उसको कान में लगा के सो जाते हैं। जैसे ही आप योग निद्रा में जाओगे।
- 47:50वो आपके अचेतन के गहरे तरों पर फीड हो जाएगा।
- 47:59अचेतन में भी आप यात्रा कर सकोगे। नींद में जागने का यही अर्थ था।
- 48:09शास्त्रों में बोला तो बहुत गया ओशो भी बहुत बोले, लेकिन ओशो इतने
- 48:16गहरे से समझा पाया हूँ, मैंने उन्हें नहीं पढ़ा, इतना थोड़ा
- 48:21पढ़ा है, लेकिन इतना नहीं पढ़ा सोये में कैसे जागू?
- 48:30उसमें एक तो साक्षी होके जागना होता वो तो सदा साक्षी रहता ही
- 48:34है। एक दूसरी विधि यह भी है कि योग
- 48:40निद्रा में चले जाओ। जो चीज़ आप याद करना चाहते हो,
- 48:47विद्यार्थीगण इस बात को नोट कर ले।
- 48:53जो चीज़ को आप गहरे में रट्टाबाजी करने की जरूरत नहीं है, वो आपके
- 48:59समृद्धि का अभिन्न अंग बन जाएगा। एक शर्त का आपको योग निद्रा में
- 49:08जाना पड़ेगा अगर आप योग निद्रा में चले गए उस ड्यूरेशॅन में जो
- 49:18कुछ आपके भीतर उतरा। वह कंप्लीट्ली, फुल्ली फीड हो
- 49:24जाएगा। आपके पिता श्रद्धा के लिए आपका
- 49:28अभिन्न अंग बन जाएगा। एक तो यह प्रोसेसर में ना आपको
- 49:31बताइए अब जैसे आपने अपने अंतश में उतरना है।
- 49:42और बहुत से लोग वक्त नहीं मिलता, क्या करें?
- 49:50फिर मैंने उनको ये उपाय बता रखा है कि आपको वक्त नहीं मिलता, वाकई
- 49:54नहीं मिलता तो फिर आप। कोई बढ़िया सी वीडियो जो आपको ठीक
- 49:59लगती हो अध्यात्म की गहरी अनुभूतियाँ जिसमें बरी पड़ी हों
- 50:07उसको इयरफोन लगा के ऑन कर देना, हल्की आवाज में सो जाना वह आपके
- 50:15लिए। डोरी का काम करेंगे।
- 50:19वैसे भी संत की आवाज डोरी की तरह ही होती है।
- 50:26जैसे माँ डोरी सुनाती है तो आप सो जाओगे वो जो सोओगे वो जोग नेदारा
- 50:33में जाओगे बहुत बार आपकी नींद को लगी।
- 50:39आपको पता भी नहीं चलेगा आप कब परिवर्तित हो गए, कब
- 50:43ट्रांसफॉर्मेशन हो गया। बहुत से मेरे शिष्य इस विधि को
- 50:50अपनाते हैं। वो मगज खपाई में विश्वास नहीं
- 50:59करते। हैं।
- 51:02बस एक आध बार वीडियो सुन लिया। दिन में, उसके बाद जब भी नींद आती
- 51:09है या सोने का मन होता है, कान में लगा लिया।
- 51:13नींद नहीं आएगी तो भी आएगी। नींद का भी इलाज है यह वीडियो,
- 51:21नींद का भी इलाज है आप ज़रा आजमा कर देखो हाथ कंगन को आरसी क्या इस
- 51:34वीडियो को कानों में आप इयरफोन लगा लो?
- 51:40हल्की आवाज में वीडियो कॉल कर दो चलेगी आप सुनोगे सुनते जाओ एक पल
- 51:50आएगा जब आप खो जाओगे, बिल्कुल वैसे ही जैसे रात को सोये पड़े
- 51:56थे। वो नींद नहीं होगी, वो योग निद्रा
- 52:00होगी, दैट इज़ बेटर फ्रॉम स्लीप योग।
- 52:05निद्रा में आपकी कान्शस्नस जागती है और स्मृति भी खुली होती है।
- 52:16योग निद्रा को इसलिए योगी तलाशते हैं।
- 52:22अक्सर आपने बहुत बार सुना होगा। मैं वीडियो में अक्सर ही बोल दिया
- 52:28करता हूँ कि मेरी इन वीडियो को बिल्कुल एकांत में शोरगुल से परे।
- 52:38यहाँ शुद्ध वातावरण हो शोर नहीं क्योंकि आपने वहाँ पहुंचना है
- 52:44जहाँ शोर नहीं है, तो वहाँ सुनना जहाँ शोर नहीं।
- 52:56लेकिन आपको ऐसा मुकाम मिल नहीं। पाता?
- 52:59तो फिर आप क्या करोगे? फिर आप ये तकनीक आजमाओगे रात को
- 53:07सोते हुए तो आप शांति में जाओगे न, शोर गुल से परे हो जाओगे।
- 53:16रात सबसे बढ़िया वक्त है। भगवान कृष्ण का यह शब्द यहाँ भी
- 53:20डूबता है। जब संसार के लोग सो जाते हैं तो
- 53:26मेरा योगी जागता। है।
- 53:33आप कान को लगा कि इयरफोन। वीडियो कॉल ऑन करके आराम से सुनना
- 53:45सुनते सुनते आपको पता नहीं चलेगा कब नींद आ गए वह योग नेत्र हो के।
- 53:59और उस योग निद्रा में आपके अंत में सब स्टोर हो जाएगा परमानेंटरी
- 54:08बहुत से लोग मुझे कहते हैं वापस सुबह पता लगता है वीडियो कब ठहर
- 54:12गई। पता नहीं लगा।
- 54:23यह तो अवश्य करना अगर आप चेतन मन में भी संग्रहित करना चाहते हो तो
- 54:32फिर इसको दिन में सुन लेना अगर आप सिर्फ भीतर से ही ट्रांसफर होना
- 54:39चाहते हो। तो फिर रात को लगा के सो जाना आप
- 54:44ट्रांसफर हो जाओगे। योग नेत्रा में जाना बिल्कुल
- 54:51लाजिम है। ये आवाज आपको मीठी लोरी की तरह
- 54:57सुला देगी। आपको पता भी नहीं चलेगा।
- 55:03कब सुध बेशर करी तुम्हारी वह जो मैं कहता था शांत कोलाहल रहित
- 55:15वातावरण में मौन में सुनना इसे। शुध बिसरा गयो मोरी रे शुध बिसरा
- 55:39गयो। माखनचौर वो नन्द किशोर जो।
- 56:13कर गयो मन की चोरी रे सूत विसरा गयो।
- 56:34वो काला, एक भाँसुरी वाला चेतन मन, अचेतन मन सामूहिक अभिचित।
- 56:50सामूहिक अचेतनमन और सामूहिक चेतनमन कॉन्शन्स अनकॉन्शियस
- 57:03कलेक्टिव अनकॉन्शियस कलेक्टिव कॉन्शन्स।
- 57:09ये चार तल मैंने बताया आपको बार बार समझा रहा हूँ, कुछ लोग ऐतराज
- 57:19कर देते हैं बाबा इतनी बार न बोला करो, मैं कहता हूँ इतनी बार बोलने
- 57:24से भी आप समझ जाओ बड़ा शुभ। है।
- 57:30फिर फिर से आप पूछ लेते हो प्रश्न क्योंकि आपके बहुत गहरी चीज़ जाती
- 57:34नहीं, थोड़े से दोहराव से आपके भीतर से उतर जाती?
- 57:38है। बुद्ध प्रत्येक वाक्य को तीन बार
- 57:41बोलते। थे।
- 57:43उसका मनोवैज्ञानिक कारण था क्योंकि मन में जानी होती है ये
- 57:47बात। होती मन से दूर की बात है, प्रसंग
- 57:52चल रहा है मन से दूर का लेकिन भेजनी है आपके मन के अंतःस्कोनों
- 57:59में तो यह प्रोसेसर काम करेगी। गौरव बार बार दोहराव इस चार तल
- 58:10हैं तो ज्ञानेन्द्र, पांच स्थूल ज्ञानेन्द्र और पांच ही सूक्षम
- 58:20ज्ञानेन्द्र। जब हम शरीर को छोड़ देते हैं।
- 58:23जब हम शरीर को छोड़ देते हैं, एक एक शब्द को ध्यान से सुनना यह
- 58:31शरीर जर्जर हो गया। है।
- 58:36तब हमारी दे ही के साथ क्या जाएगा देह तू यहाँ रह।
- 58:41देही सारी पोटली सब जन्मो की सब बीच में संग्रहित है, सुपरसेस्टिव
- 58:48कंप्यूटर जैसे मैं कहा करता हूँ वह जब निकलेगा तो साथ में वह
- 58:56फ्यूज़। जो देही को पावर देता है और वह
- 59:06फ्यूज जाने के कारण शरीर कोलेक्टिव कान्शस्नस से पावर लेता
- 59:13है। समुद्र से पावर लेती है बूंद।
- 59:18और बूंद प्रवाहित करती है देही में और देही प्रभावित करता है फूल
- 59:24शरीर में अब ये है कनेक्शन, इसे फिर सुन लो सागर।
- 59:36कॉन्शसनेस का समूह वह प्रवाहित करता है।
- 59:46ह्यूज में कारण शरीर में कारण शरीर प्रवाहित करती है।
- 59:54देही में दे ही प्रभावित करता है शुभ शरीर में।
- 59:58यह कनेक्शन चेतना का चेतना का यह समझ लेना पावर का नहीं, चेतना का
- 1:00:15जब आपका शरीर मर जाता है, चेतना निकल जाती है।
- 1:00:21दोनों चीजों का संगम है ये सर कॉन्शसनेस प्लस एनर्जी अगर आपके
- 1:00:33घर में विद्युत आ जाए और इन्स्ट्रुमेंट न हो चलने वाला फिर
- 1:00:40क्या करोगे? विद्युत का ना ऐसी है।
- 1:00:43न पंखा है, न मोटर है, फिर क्या करोगे और बिजली बेकार है।
- 1:00:52यह जो कान्शस्नस सर्व अस्तित्व में बिक्री हुई है, यहाँ से वह
- 1:01:00फूसे जो देही के साथ रहता है। वह हर वक्त शक्ति खींचता रहता है
- 1:01:06और वो सब जगह है किसी एक जगह से उसने शक्ति नहीं लेनी होती।
- 1:01:12जहाँ भी जाएगा वो दही के साथ वहीं से शक्ति खींच लेगा और नए शरीर
- 1:01:18में जाएगा। तो वह कारण शरीर साथ जाएगा।
- 1:01:24आने के कारण शरीर शुरू से लेकर आकर जब तक देही पूरा गलता नहीं,
- 1:01:32आप अपने पूरे कर्म भोग भोगते नहीं।
- 1:01:35वह कारण शरीर देही के साथ रहेगा। जब देही गल गया आपने सब कर्म
- 1:01:43व्यवस्था भोग ली तो क्या होगा? कारण शरीर निर्लिप्त रह जाएगा,
- 1:01:49देही उसके साथ नहीं होगा देही तो गया फिर कारण शरीर बूंद समानि
- 1:01:57संबंध में। मैंने पिछले एक वीडियो में बड़ी
- 1:02:03विस्तार से ये बात बोली थी। आज फिर बोल रहा हूँ सारे भोग भोग
- 1:02:09लिए व्यक्ति मुक्त हो गया, उसी को कहते हैं मुक्त तो मुझे कह देते
- 1:02:14हैं, मुक्त होना चाहती हैं। मैंने कहा।
- 1:02:19किसने बांधा कोई रस्सी? कोई ज़ंजीर नजर आती है कोई
- 1:02:27बैंडिस्ट किसने बांधा तुम्हें किस्से मुक्त हो गया उन्हें पता
- 1:02:36ही नहीं होता। बस मोक्ष चाहिए, किस्से चाहिए पता
- 1:02:42नहीं यह कारण शरीर बूंद है। अब इसको तो मैं आपको विस्तार नहीं
- 1:02:58दे पाऊंगा। भाई ये सूक्ष्म से यार।
- 1:03:05कि जब वो सब जगह है, सूक्ष्म वाले पूछते हैं जब वो सब जगह है तो इस
- 1:03:13बूंद का क्या काम? मैं कहता हूँ जब बिजली घर में सब
- 1:03:17जगह आ गई तो ये फूसे का क्या काम? फूसे का काम करता है।
- 1:03:24देखिए, खोपड़ी में सभी बात मैं समझा सकूँ या मेरे बलबूते के बाहर
- 1:03:29है। जितना समझा सकता हूँ उतना समझाती
- 1:03:32है, आप उसके बाद अपने अपने हाथ खड़े भाई नहीं समझा सकते, समझ में
- 1:03:40आएगा नहीं है। बस जैसा देखा आपको बोल दिया लोग
- 1:03:47मुझे कहते हैं परमात्मा के होने का प्रमाण दीजिए।
- 1:03:51क्या प्रमाण है आपके पास? मैंने कहा, मेरे पास इससे बड़ा
- 1:03:57प्रमाण क्या हो सकता है मैंने देखा है।
- 1:04:01कहते ये भी कोई प्रमाण है? मैंने कहा, मेरे लिए तो यही
- 1:04:04प्रमाण है, आपके लिए वही प्रमाण होगा जो आप देखोगे।
- 1:04:11आप क्यों नहीं देखते हो उसे? यह आपकी कमजोरी है, यह आपकी
- 1:04:18कायरता। मेरे लिए प्रमाण ये कि मैंने देखा
- 1:04:23मैं संतुष्ट हूँ, मैं तृप्त हूँ, आपके लिए ये प्रमाण नहीं हो सकता।
- 1:04:31मैं अच्छी तरह से जानता हूँ, लेकिन मेरे लिए तो प्रमाण है ना
- 1:04:36कि मैंने देखा मैं खुद को तो बहका नहीं हो सकता।
- 1:04:39मैं खुद को तो प्रवंचित नहीं ना कर सकता, मैं खुद को धोखा नहीं दे
- 1:04:44सकता इसलिए मैं बैठ गया। ठहर गया, रुक गया, दौड़ मुक गई सब
- 1:04:54खत्म ये लक्षण ठीक नहीं है क्या? बस यही प्रमाण है मेरे लिए प्रमाण
- 1:05:02है आपके लिए प्रमाण नहीं है मानना भी मध्य से है जब देही उस कारण
- 1:05:15शरीर के साथ बाहर निकल जाता। है।
- 1:05:21तो नए शरीर में प्रवेश कर जाता है वह देही उसके संग होता है कारण
- 1:05:27शरीर चेतना की एक बूंद वह फूज जो देही को चेतना देता है, समुद्र
- 1:05:39में से निकाल के। वह बूंद काम करती है, फिर उसका
- 1:05:45देखो भाई से आगे नहीं समझा सके। अब दे जवाब देती है त्राहिमाम
- 1:05:51त्राहिमाम करने लगती है, वो थी वैसे आप समझ गए होंगे मेरे हिसाब
- 1:05:58से। देख भी सकता है, सुन भी सकता है
- 1:06:07स्पर्श भी कर सकता है। बहुत से केस मेरे पास नहीं आते।
- 1:06:13बाबा किसने हमारी चादर सोए पड़े थे, खेच ली कोई हमारे से लिपट
- 1:06:21गया। यह स्पर्श हमने किसी को देखा,
- 1:06:34श्वेत रोशनाई की तरह एक रात मेरा पुत्र भाग कर आया मेरे कमरे में।
- 1:06:41अपनी माता से बोल रहा चल बाहर अपनी चार भाई बाहर ले के चल।
- 1:06:48मैं समझ गया कि इसे कोई सूक्ष्मात्मक दिख गई हो के बाहर
- 1:06:55सोई तो उसे थोड़ा सा चैन आया बहुत वर्ष पहले की।
- 1:06:59बात। है।
- 1:07:01तो उसने बताया एक बहुत लम्बे कद का व्यक्ति है मुझे दिखाब मैं डर
- 1:07:07गया वो देख भी सकते हैं, वो दिख भी सकते हैं, वो सुन भी सकते हैं,
- 1:07:17वो अपनी आहट को आपको सुना भी सकते हैं।
- 1:07:21उनकी बात करने की एक विशेष शैली होती है।
- 1:07:24जैसे आप कहो चाइनीज से कि मैं तो इसकी बात नहीं समझा भाई क्योंकि
- 1:07:29आप वो लिंक नहीं समझ सकते जिसके जरिए वो संबंध बनाने की चेष्टा।
- 1:07:34कर रहा है। इसलिए आपको कुछ भी बोलता जाए आप
- 1:07:38नहीं समझोगे। तो सूक्ष्म आत्माओं का लिंक बनाने
- 1:07:42का एक विशेष तरीका होता है। यह तरीका ऑल ओवर दी यूनिवर्स चलता
- 1:07:48है। जब कोई किसी दूसरे ग्रह पे जाएगा
- 1:07:52तो यही तरीका काम करेगा कन्वर्सेशन का।
- 1:07:59जैसे दुनिया में हँसना, रोना, गमगीन होना, दर्द में होना, ये
- 1:08:06सभी संवेदनाएं समान हैं। वैसे ही एक भाषा समान है जो सभी
- 1:08:15लोगों में कारगर है। पुषा है सुभा के प्रवचन को लेकर
- 1:08:26एक शंका है। आपने कहा सूक्ष्म लोक से प्रश्न
- 1:08:36आया है, क्या सूक्ष्म लोक में भी प्रश्न उठते हैं?
- 1:08:39बिल्कुल उठते हैं। बिल्कुल होती है।
- 1:08:46जब यहाँ जब तक मन है, स्कूल में भी आपको तंग करेगा, सूक्ष्म में
- 1:08:52भी आपको तंग करेगा। ये जो भटकते है इनका मन तंग करता
- 1:08:57है, इनको नहीं तो आराम से बैठते है।
- 1:09:02बोध सोल से निकल कर शांत रहते हैं, क्योंकि उनका मन सोल में
- 1:09:07रहते ही शांत हो गया। इसलिए मैं कहता हूँ यहाँ रहते ही
- 1:09:10शांत हो जाओ अन्यथा अब तो घबरा के ये कहते हो कि मर जाएंगे।
- 1:09:19अगर मर के भी चैन न पाए तो किधर जाओगे?
- 1:09:23होगा तो इसका ही प्रतिरूप इसका प्रति व्यय होता है।
- 1:09:26वो क्या हमारी तरह उनकी श्रवण इन्द्रियाँ कार्य करती हैं?
- 1:09:36बिल्कुल ये पांच ज्ञान इन्द्रियाँ आपने सुनी नहीं ज्ञान इन्द्रियाँ
- 1:09:40क्या है जिनको ज्ञान होता है? सुनने का ज्ञान, देखने का ज्ञान,
- 1:09:46महसूस करने का ज्ञान, स्पर्श का ज्ञान ये पांच ज्ञान इंद्रियां
- 1:09:51यही तो हैं क्या वे सामान्य जीवा आत्माएं हैं?
- 1:10:01बिल्कुल सामान्य हैं। हमारे जैसी आवाज में हम ही तो
- 1:10:04जाते हैं निकल के। हम ही आते हैं नए रूप में जिनके
- 1:10:13सद्गुरु के वचनों से शंख का समाधान और उनकी प्रोग्रेस होती
- 1:10:18है। अब ये बड़ा प्यारा सा प्रश्न आ
- 1:10:20गया बिलकुल। यह जो करोड़ों करोड़ों आत्माएं
- 1:10:25सुनने आती हैं, अपने शास्त्रों में पढ़ा होगा जहाँ कहीं राम नाम
- 1:10:37का प्रचार होता है। वहाँ बहुत सी रूहियाँ इकट्ठी हो
- 1:10:42जाती हैं। सुनने के लिए वहाँ क्या होता है?
- 1:10:47संत कोई भी हो कहने वाला, लेकिन वह संत पहुंचा हुआ होना चाहिए,
- 1:10:56उसकी आवाज की तरंगों को सुनेगी। सूक्ष्म।
- 1:11:00सूक्ष्म को आप भ्रम नहीं दे सकते, सुन को आप भ्रम दे सकते हो।
- 1:11:08सूक्ष्म जगत को आप भ्रमित नहीं कर सकते हैं क्योंकि सूक्ष्म जगत
- 1:11:14आपके सूक्ष्म के ओरे को देता है। इसलिए सूक्ष्म लोक में रहते हुए
- 1:11:22लोग धोखा नहीं खाएंगे। सुन लोक के धोखा खा जाएंगे।
- 1:11:31क्या उनकी प्रोग्रेस होती है, बिल्कुल होती है, व्यक्ति जब मरता
- 1:11:37है। उसके बाद अगर कुछ देर प्रकृति
- 1:11:44उसको जन्म देने में लगा देती। मैंने पहले भी कहा 1020% चेतना
- 1:11:53वाले, 30% चेतना वाले। प्रकृति फौरन निपटा देती है, गर्व
- 1:12:00उपलब्ध है, बहु मात्रा में उपलब्ध है लेकिन बड़ी चेतना 5060 70%
- 1:12:11थोड़े कम होते हैं तो उनको ठहरना पड़ता है।
- 1:12:17वो आधे आधे होश में होते हैं और जो पूर्ण जागृत हो गए, 90% तक
- 1:12:22जागृत हो गए, बुद्धि जैसे लोग जो पूर्ण जागृत हो गए, उनके ऊपर
- 1:12:29प्रकृति का कमांड नहीं चलता। वह प्रकृति को कमांड करेंगे।
- 1:12:37तो जो थोड़े से कम चेतना के लोग हैं, बहुत कम चेतना की तो प्रकृति
- 1:12:43निपटा देगी। अधिकतम 13 दिनों में निपटा देती
- 1:12:48है। प्रकृति कई बार चार दिनों में
- 1:12:51निपटा देती है इसलिए रस्म चौथा भी करते हैं।
- 1:12:57कई बार उसी दिन भी निपटा देती है लेकिन ये कार्य है प्रकृति का
- 1:13:07विधान का। ये आप नहीं कर सकता विधान का काम
- 1:13:12है। कई बार साल भर लग जाता है।
- 1:13:17कई बार सवा साल लग जाता है। अक्सर मैंने देखा है अच्छी
- 1:13:21आत्माओं को साल सवा साल लग जाता है बुरी आत्माएं क्योंकि खुद
- 1:13:28तलाशती हैं हाय मेरा घर हाय मेरा घर तो प्रकृति उनको जल्दी से गलत
- 1:13:33दे देती। है।
- 1:13:38और जो जागे हुए आदमी हैं वो ज्यादा चीखो पुकार नहीं करते।
- 1:13:43उनको धीरे धीरे प्रकृति निपटाती है और जो बहुत ज्यादा चेतना के
- 1:13:49दुख हैं वो तो अपना गर्व स्वयं चुनते हैं।
- 1:13:53उनके ऊपर प्रकृति का कोई वर्ष नहीं होता, जो थोड़े से कम रह गए
- 1:14:00हैं। उनकी चेतना बस जगी की जगी।
- 1:14:07ऐसे लोग सदगुरु के पास आते हैं जिनको अच्छी लगती है बात।
- 1:14:13उनके भ्रम टूटते हैं, क्योंकि अभी भी भ्रम है।
- 1:14:22मैं दे ही हूँ या दे हूँ या दोनों भ्रम है।
- 1:14:30जब देह में थे, तब आपको ऐसा था, मैं देह हूँ।
- 1:14:35जब दे से निकल के दे ही रह गई, तब आपको ऐसा लगेगा।
- 1:14:38मैं दे ही हूँ तो भ्रम तो बना रहा।
- 1:14:44भ्रम कब टूटेगा? जब आपको ये पता चलेगा कि आप देही
- 1:14:48भी नहीं हो? देही खोरेगा।
- 1:14:52और खुरते खुरते खुरते खुरते बचेगी आखर में वो चेतना की एक बूंद जिसे
- 1:15:00कारण शरीर कहता हूँ मैं तो यह भी मिटेगा कि मैं दे ही हूँ यह भी
- 1:15:08मिटेगा कि मैं दे हूँ, ये दोनों ब्रह्म है।
- 1:15:12बोथ आर इलूशन तो रह जाएगी चेतना की वो बूंद जिसे कबीर कहते हैं
- 1:15:21बूंद समानी, संबंध में कब समायेगी जब देही ने सारे वाष्प बनकर उठ
- 1:15:27गया सारे भौंक भौंक लिए देही शून्य हो गया।
- 1:15:34तो रह जाएगी एक अकेली चेतना की बूंद, जिसे कारण शरीर कहता हूँ
- 1:15:40मैं तुम्हारे शास्त्रों में तो कारण शरीर कुछ और बना लिए गए हैं।
- 1:15:50मैंने जैसा जाना जैसा देखा बिल्कुल वैसा आपको बोल दिया।
- 1:15:58कोई माने फंदा नहीं है, ना माने कोई दंड नहीं है, मानना भी नहीं
- 1:16:04चाहिए खुद जानो फिर मानो। यही है व्यवस्था सत्य की बाकी तो
- 1:16:12झूठ है बस आप मेरे से समझ लो एक रास्ता गुरु बनाने का यही मतलब
- 1:16:21होता है कि मुझे आपकी बातों पर यकीन है।
- 1:16:25बस यही मतलब होता है और कुछ नहीं। मेरे पास यहाँ दो कार जाते हैं,
- 1:16:32दीक्षा दी जाते हैं। मैंने अंगूठा लगा दिया, प्रवाहित
- 1:16:37कर दी। शक्ति बहुत सी अच्छी आत्माएं होती
- 1:16:41हैं जिनको पता नहीं रहता बहुत से। विकृत आत्मा होती है वो तो अच्छी
- 1:16:51आत्माएं मुझे कहती बाबा पता नहीं लगा नहीं लगेगा पता और थोड़ी सी
- 1:16:59कपती हुई आत्माएं निर्बल क्योंकि पाप हैं भीतर।
- 1:17:06पाप कमता है। वो कहेंगे बाबा मेरे कम्पन हो रहा
- 1:17:14है, मैं कहता हूँ कोई बात नहीं बैठे रहो, कुछ नहीं होगा, मरोगे
- 1:17:20नहीं, मेरे द्वार पर बैठे रहो, चिंता मत करो।
- 1:17:31देह भी इल्लूजन यह भी जाएगा दे ही जब बाहर निकल गया वह भी इल्लूजन
- 1:17:40ये जो आत्माएं सभी सुन रही हैं। ये सब इल्ल्यूशन में हैं और
- 1:17:52इल्ल्यूशन से ग्रस्त प्रश्न पूछता है।
- 1:17:57यहाँ के लोग भी प्रश्न पूछते हैं इल्ल्यूशन के कारण और वहाँ के लोग
- 1:18:03भी प्रश्न पूछते हैं। इल्ल्यूशन के कारण ये अनेकों
- 1:18:05करोड़ों करोड़ों आत्माएं हैं। इनके लिए स्थान महत्त्व नहीं
- 1:18:10रखता। ये पारदर्शी है।
- 1:18:18इनका ऐसा स्ट्रक्चर है। मैं आपको थोड़ा समझा दूं ये आउट
- 1:18:22ऑफ़ ये प्रसंग से बाहर की बात है। ये करोड़ों की करोड़ों एक जगह
- 1:18:28समाहित हो सकती है। ऐसा डायमेंशन है इनका।
- 1:18:33ये जगह नहीं गिरती, बस समझा सकता हूँ।
- 1:18:39अगर आप समझ जाए तो आप बुद्धि समझ नहीं सकती।
- 1:18:42बुद्धि ठोस चीज़ को समझती है जब मुझे एनलाइटनमेंट हुआ सब खो गया।
- 1:18:51पाथर वाथर सब खो गया वृक्ष वगैरह सब चंद्रमा, तारे सब गाय सूरज
- 1:18:58पानी समुद्र सब गया फैलता चला गया कान्शस्नस का एक प्रकट प्रवाह
- 1:19:05श्वेत श्वेत कण पार्टिकल्स वाइफ पार्टिकल्स एवरीवेयर।
- 1:19:11और मैं फैलता फैलता फैलता फैलता फैलता होश आवाज़ गुम टाइमलेसनेस
- 1:19:17इगोलेसनेस तो हो ही गई थी, पहले फैलता चला गया सुध, बुत खत्म पता
- 1:19:27तब चला। जब किसान ने आके पेट थपथपाई, ये
- 1:19:32कैसे स्टेचू की तरह खड़ा? है।
- 1:19:36मैंने देखा मुझे कहता 2:00 बज गए हैं दो मैंने देखा बैलों की जोड़ी
- 1:19:46है किसान आ गया है खेतों में काम करने।
- 1:19:49और मैं प्रश्न भी उठते हैं जवाबों से उनकी उनमें भी इल्ल्यूशन है।
- 1:20:02अभी उनके भी इल्ल्यूजन टूटते हैं। मैं दे हूँ ये इल्ल्यूजन है और
- 1:20:07मैं दे ही हूँ ये भी इल्ल्यूजन है ये समझना बात को।
- 1:20:11जो ये गठड़ी है गठड़ी ये भी है जब ये गठड़ी भी टूट जाएगी, खुर जाएगी
- 1:20:20फिर वो रह जायेगा। सूक्ष्म शरीर कारण श्री चेतना का
- 1:20:27एक बिंदु है। बस फिर उसका कोई काम नहीं है।
- 1:20:31उसका काम खत्म हुआ है। इसे मुक्ति कहते हैं।
- 1:20:36वह जो चेतना की एक बूंद बंधी थी। देही के साथ आज देही विलीन हुआ आज
- 1:20:47वो मुक्त हुई। इसको कहते हैं मुक्ति ये है मोक्ष
- 1:20:54आपका कोई मोक्ष नहीं है। ये भी गया पंचतत्व में दे ही भी
- 1:20:59जो था वो भी विलीन हो गया तो मुक्ति किसकी हुई?
- 1:21:03जो बंदा था बंदा कौन था वो कर्ण शरीर कर्ण शरीर बंदा था।
- 1:21:10वो झट से समुद्र में उतर जाता है, उसे मुक्ति कहते हैं, वो है
- 1:21:18मोक्ष। मेरे ख्याल में मैंने बहुत
- 1:21:21विस्तार से आपको बता दिया। अगर ना समझाए तो फिर पूछ लेना।
- 1:21:27बार बार सुनना, बार बार सुनना ये थीम है संसार का थीम है जड़ से
- 1:21:36परमात्मा मुक्ति की ओर इसको बार बार सुनना सारी चीज़ समझाएगी
- 1:21:45तुम्हें सारी प्रोसेसिंग समझाएगी। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे
- 1:22:07नाथ नारायण। वा सु दया पितु मात स्वामी सका
- 1:22:24हमर पितु मात स्वामी। सखा हमार हिनाथ नारायण वासु देवा
- 1:22:45श्रीकृष्ण। हरे मुरारी अनाथ नारायण यन
- 1:23:02वासुदेव। आहतें जागुठे रास्ते हंस दिए
- 1:23:19आहतें जागुठे। रास्ते हंस दिए थाम कर दिल उठे हम
- 1:23:35किसी के लिए कई बार। ऐसा भी धोखा हुआ है चले आ रहे हैं
- 1:23:57वो नजरें झुकाए। जब याद आए बहुत याद आए और जब याद
- 1:24:18आए। बहुत याद आ गमे ज़िन्दगी के
- 1:24:32अंधेरों में हम। चिराग मोबत जलाये बुझाए जब याद
- 1:24:54आये बहुत याद। श्री कृष्ण गोविन्द हर मुरार
- 1:25:14हिनाथ नारायण? वा सूर्य पितुमात स्वामी सखा हमार
- 1:25:32पितुमात स्वामी सखा। हमा रे हमा रे पितमात स्वामी सखा
- 1:25:56हमार। हे नाथनारां यन वासुदेव, श्री
- 1:26:08कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी। हेनाथ नारायण वासुदेव व।
- 1:26:37धन्यवाद।