Latest / Baba ji Vijay Vats / 5 Nov 25 - मोक्ष द्वार का पहला सूत्र! निर्मल मन हो जाओ और दिखावा बंद करो! निर्मल मन जन सो मोहि पावा। Baba Ji Vijay Vats Satsang
Transcript
- 0:22एक सम्राट का हाथी मर गया था। बहुत से वैद्य हकीम आए, दवाएं दी
- 0:37गई। बड़े उपाय किए गए लेकिन वो हाथी
- 0:47उठा नहीं मृत ही रहा। आखिर में पड़ोस के गांव के अच्छे
- 0:59हकीम थे, वो बुलाए गए। लेकिन वो भी नाकाम रहे।
- 1:07राजा था डिंडोरा पिटवा दिया गया था कि मेरा पोलू उसका नाम पोलू था
- 1:17पोलू मर गया है। कोई भी वैध हकीम जो इसे जिंदा कर
- 1:27देगा मैं उसे अपना आधा साम्राज्य करूँगा राजा को हाथी से।
- 1:44सारे साम्राज्य में से जहा जहा तक भी उसका राज्य था, बड़े विश्वस्त,
- 2:00बड़े निपुण। प्रवीण महारथी आय उन्होंने अपने
- 2:11अपने सैकड़ों उपाय किये लेकिन हाथी जीअन सारे नगर में यह खबर
- 2:17फैल गई। के सम्राट का पोलो मर गया है,
- 2:29पोलो जितना प्यारा सम्राट का था, उतना ही प्यारा जनता का भी था।
- 2:38बच्चों तक को प्यारा था। बच्चे उसके सूट को कलूसते हाथ
- 2:45लगाते और बड़ा प्यार करता। उसके आँखों के नेत्र में आंसू आ
- 2:54जाते हैं। सभी दवाएं दवाई में कामयाब हो गई।
- 3:11हाथी जिंदा न हो सका, राजा भी हार गया।
- 3:20वैध हकीम भी हार गए, जनता ने भी सिर गिरा दिया।
- 3:28कोई उम्मीद न थी कोई दवा काम न की कोई दुआ, काम न की।
- 3:40अचानक उस रस्ते से हर रोज़ एक छोटा बच्चा जाया करता था करीब
- 3:511213 साल का। अपने स्कूल जाया करता था।
- 3:59उसने देखा पोलू मरा पड़ा है। वह जब भी जाता पोलू के पास से
- 4:08गुजर जाता तो पोलू उसे बड़ा प्रेम करता सो हिलाता।
- 4:13सूंड ऊपर उठा लेता है जैसे पोलू उसे आशीर्वाद दे रहा हो।
- 4:25सूंड ऊपर उठाकर के आसमान को छूओ इतनी तरक्की करो अर्शी पे पहुँच
- 4:32जाओ। उस बच्चे को बड़ा प्रेम था।
- 4:43बच्चे ने देखा सभी रो रहे हैं राजा तक की आँखों में आज आंसू थे
- 4:58वह बच्चा धीमे धीमे पद चापों से उसका हाथी के पास गया, उसने बड़े
- 5:07प्यार से। हाथी के सूंड पर हाथ बड़े प्यार
- 5:18से कहा पोलू पोलू मैं बोल रहा हूँ तू सोया क्यों परा है?
- 5:30तू जाग जा। और हाथी जाग गया।
- 5:50यह एक चमत्कार से कम न था, लेकिन चमत्कार है यह एक नहीं है जब भी
- 6:03कोई कोमल करता है। तुम अक्सर उलाहना देते हो और
- 6:11शिकायतें करते हो, हमारी प्रार्थनाएँ परमात्मा के दरबार
- 6:15में स्वीकृत नहीं होती, बस उसका कारण यही है।
- 6:23मेरे हृदय से की गई प्रार्थना परमात्मा स्वीकार नहीं करती।
- 6:29और सच पूछो तो मेले हृदय से की गई प्रार्थना परमात्मा तक पहुंचती ही
- 6:35नहीं तो स्वीकार क्या होगी? सभी जनता वहाँ इकट्ठा बहुत हो गया
- 6:47था। दरबारी खड़े थे, बड़े बड़े मंत्री
- 6:51खड़े थे। इस चमत्कार को देखकर हैरान हो गए
- 6:55बैठे तुने क्या किया? अब बच्चा तो डर गया कहते मैंने तो
- 7:01कुछ नहीं कहा, मैंने तो शूट के ऊपर हाथ फेरा बड़े प्यार से।
- 7:09और उसे कहा तू सोया क्यों पड़ा है?
- 7:11तू जग जा, मैंने सोचा शायद सोया पड़ा है, बच्चा था इतना पता नहीं
- 7:22था। दवाएं तो सभी ने की थीं, यह जी
- 7:34जाए यह तमन्ना तो सभी की थी, राजा भी बराबर हाथ परमात्मा की तरफ
- 7:41पसार रहा था। हे प्रभु इसको चिंता कर दो।
- 7:47सारी जनता पुकार रही थी हमारा जीवन ले लो, इसे जीवंत कर दो
- 7:57लेकिन किसी के दवा सुनी न कहें। कोई इल्थजा, कोई बन रही नाक से
- 8:20हाथ छुड़ा सके। कोई।
- 8:27इल्थजा कोई बंदगी नकदा से हाथ शुडास की किये हाथ में।
- 8:44बड़े यत्न, मगर उसके काम न आज के ना कोई।
- 8:58दवा ना कोई दवा। कोई इलतजा, कोई बंत घी ना कजरा से
- 9:08हाथ छुड़ा सके कज़ा मौत किए आदमी ने बड़े जतन मगर उसके काम न आ
- 9:23सके, ना कोई दवा। न कोई दुआ वहाँ पे एक फकीर पे कर
- 9:35था सिद्ध फकीर लोगों ने पूछा। यह है सो बच्चे ने प्यार से सूंढ़
- 9:48के ऊपर हाथ फेरा, यह हाथी मौत के मुख से बाहर आ गया।
- 9:55ऐसा क्यों? उस संत ने कहा परमात्मा के दरबार
- 10:09में? मासूमों की बात सुनी जाती है।
- 10:18अगर संत तुम्हे कहते हैं चलत छोड़ दो, कपट छोड़ दो, झूठ बोलना छोड़
- 10:26दो सत्य बोलो भला करो, बुरा मत करो।
- 10:37वो इसीलिए नहीं कहते की ये कोई कमिटमेंट है नहीं, ये तुम्हारे ही
- 10:43करुणा बसु फायदे के लिए बोल रहा है।
- 10:49अगर तुम सत्य की डगर पे चलोगे। वो बच्चे की तरह मासूम बने रहोगे,
- 10:57तुम्हें याद नहीं करना पड़ेगा कौन से मंच से क्या बात कही थी, कौन
- 11:03से मंच से क्या बात कही थी ये झूठ, ये फरेब ये तुम्हें ही ले
- 11:09डूबेंगे। कोई बंदगी ना करा से हाथ छुड़ा।
- 11:25सकें। कि आज हैं बड़े जतन, मगर उसके।
- 11:37काम न आ सके, न कोई दुआ, न कोई। तुम्हारी दुआ क्यों नहीं काम
- 11:51करते? तुम्हारी दुआ काम क्यों नहीं
- 11:55करती, क्योंकि मल मैं निर्मल मन से इसलिए ईशा ने कहा बच्चे जैसे
- 12:07हो जाओ। ओनली दे विल एंटर इन मैं गार्ड्स
- 12:11किंगडम विल पे नो सेंस जस्ट लाइक ए साइड यह कोई नियम नहीं है कि
- 12:22झूठ मत बोलो। ये तुम्हें ही अमृत पिलाने का एक
- 12:29मंत्र है। तुम विषय ही पीना चाहते हो तो
- 12:34तुम्हारी मर्ज़ी। अगर झूठ नहीं बोलोगे तो निर्मल
- 12:48रहो और निर्मल व्यक्ति को संसार में भोंकना नहीं पड़ता।
- 13:01निर्मल किसी भी उम्र का हो, मन में मैल ना हो, मन साफ सुथरा हो।
- 13:10कबीर ने कहा ज्यों की त्यों धरती नहीं चदर या बड़े चित्र से उड़ी
- 13:14थी बिल्कुल सफेद की सफेद जैसी ओढ़ी वैसी रख दी।
- 13:20ज़रा भी दाग न लगा, न जूट का, न फरेब का न पाप का असर फोनी की दवा
- 13:30सुनी जाती है परमात्मा के दरबार में।
- 13:41जो बच्चों की तरह पुकारना है। फिर उम्र का कोई तकाजा नहीं।
- 13:47वह चाहे 100 साल का बूढ़ा भी गाना और अगर 10 साल का बच्चा भी बेईमान
- 13:56ही मन में लिए बोलता है। उसकी भी बात नहीं सुनी जा रही।
- 14:04उम्र से कोई तालुकात नहीं है, निर्मल चित्त से है, चित्त निर्मल
- 14:10होना चाहिए, उसमें कोई मैलन नहीं होना चाहिए।
- 14:15संत ने कहा। तुम्हारी किसी की दुआ और तुम्हारी
- 14:22किसी की दवा जो हकीम वैद्य वहाँ खड़े है कोई काम नहीं किया काम
- 14:29किया तो इस बच्चे के निर्मल पुकार ने किया।
- 14:36इसकी पुकार सीधी हॉट लाइन पे थी और परमात्मा तक गई उठ जा पोलू
- 14:43क्यों सो रहा है? बस परमात्मा ने सुन ली इसलिए
- 14:52शास्त्रों में लिखा। कि संत के हृदय को तड़पाना मत
- 15:01मानो वचन और कर्म से संत के हृदय को तड़पाओगे तो गर्व के होने के
- 15:14सिवा कोई रास्ता नहीं। इसलिए बाबा नानक ने कहा कि
- 15:25ब्रह्मलीन व्यक्ति को दिया गया दान करोड़ों का न ज्यादा फली बहुत
- 15:30होता है, वह तो बिल्कुल ऐसा है। जैसे की नन्ना बच्चा अपने पिता को
- 15:37कह दे के पिताजी मैं मेहनत करके ₹1 कमा के लाया हूँ, ये लो आप कर
- 15:45के पिता की खुशी का परिवार कितना होगा तुम समझ सकते हो।
- 15:56नन्हे बच्चे की मासूम हृदय से निकली हुई यह बात पिता मेहनत करके
- 16:03मैं लेके आया ₹1, तुम रख लो संत हृदय नवनीत समान।
- 16:17ब्रह्मलीन वृत्ति को दिया गया दान करोड़ों गुना ज्यादा फली बहुत
- 16:21होता है। क्यों?
- 16:26क्योंकि उसकी हॉट लाइन सीधी होती है।
- 16:28परमात्मा के साथ तुम्हारा दान तुमने संत को नहीं दिया।
- 16:36तुम्हारा दान तुमने परमात्मा को दिया और परमात्मा के हाथ कितने
- 16:47बड़े हैं? तुम सोच भी नहीं सकते, वह है वृहद
- 16:50हाथों बाला, वह है विराट हाथों बाला।
- 16:55वह विराट अस्तित्व का मालिक उसके हाथ कितने पड़े होंगे।
- 17:01दाता दे लिंदा थकपा जुगाजुगंतर खाई खा उसके हाथ कितने पड़े हैं?
- 17:07जुगों जुगों तक उसके हाथों का दिया हुआ खत्म नहीं होता।
- 17:16एक गांव में कर पड़ गया बड़े बड़े जोशी बुलाए गए जोशी ने कहा हवन
- 17:26करना पड़ेगा हवन का आयोजन हुआ, नगर में ढिंढोरा पिटवा दिया गया।
- 17:37और सभी अपने घरों से अच्छे अच्छे कपड़े श्रृंगार करके आए बच्चों को
- 17:46सुंदर सुंदर कपड़े पहने हैं, लेकिन एक छोटा बच्चा बाजित था।
- 17:54उसने पूछा माँ हम कहाँ जा रहे हैं?
- 18:00पुत्र हवन हो रहा है, वह डरते हैं उससे क्या होगा पुत्र बारिश होगी
- 18:08यहाँ अकाल पड़ गया है देख धरती में।
- 18:12दरारें आ गई हैं। वर्षों से पानी नहीं बरसा।
- 18:21अच्छा में तो मैं भी चुकूंगा हाँ पुत्र तू भी चलेगा जल्दी से नए नए
- 18:30कपड़े डाले। बच्चे ने तो कपड़े नहीं पहने, आज
- 18:41ही नई पोशाक लेके आए थे, पता था कि आज हवन होगा, दिखावा करने
- 18:50वालों को परमात्मा नहीं मिलता इसको सर्किल में।
- 19:01दिखावा करने वालों को परमात्मा कभी नहीं मिलता।
- 19:08ये जो गए थे नए नए सूट बूट डाल के फोटोशूट करवा के।
- 19:19गई तू सभी सारा गांव आया लेकिन यह बच्चा के तो नहीं ना?
- 19:27मैं तो नंगा ही जाऊंगा ऐसे क्यों माँ?
- 19:33तू कह रही है? एक बारिश पड़ेगी और बड़ी तेज़
- 19:36बारिश पड़ेगी। बड़े गुणी विद्वान ब्राह्मण ही
- 19:40हैं। 5 साल से बरसा नहीं तो बारिश
- 19:54पड़ेगी तो नहाने का मज़ा आएगा माँ नहाने का मज़ा आएगा तो घर आके नए
- 20:01कपड़े डाल दूंगा। अन्यथा भीग जाएंगे।
- 20:04एक ही तो जोड़ी ला के दी हमने माँ चुप रह गई, तर्क ठीक था हम अपने
- 20:20बच्चों को सजाते हैं दिखाने के लिए क्या हम अमीर।
- 20:31सारी दुनिया दिखावे पर चलती और मेरी एक बात को नोट कर लेना।
- 20:42जो व्यक्ति दिखावे से मुक्त हुआ, उसने परमात्मा की तरफ पहुंचने का
- 20:47पहला कदम उठा लिया। ये पहला कदम है फर्स्ट स्टेप
- 20:55टुवर्ड लिबरेशन। ये मोक्ष द्वार का पहला कदम है।
- 21:02देखाबा नहीं करना दिखाबा बंद था। अगर तुम घर पे बैठे तुम्हे कोई
- 21:17बुला नहीं आ गया आफत पड़ी है मैं मुसीबत में हूँ जल्दी चलो तब तुम
- 21:25कहते हो कपड़े तो बदलो बस यही तुम्हारी गलती है।
- 21:32तुम दिखावा करना चाहते हो, अगर सच में हमें दर्दी है, सिम्पत्ति है
- 21:42तो तुम उठ जाओगे, तुरंत तुम कपड़ों को नहीं देखोगे।
- 21:46जो व्यक्ति कपड़ों से पहचानना है वो ठग है।
- 21:49झूठा है, वो तुम्हारा भला नहीं कर सकता।
- 21:51वो अपना ही भला नहीं कर सकता। जो खुद ही दिखावे में उलझ गया वो
- 21:57सत्य तक पहुंचेगा। क्या सत्य तक वही व्यक्ति पहुँचता
- 22:03है जो दिखावे से मुक्त हो जाता है?
- 22:06आज से ही दिखावा बंद कर। बच्चा भी गया, माँ भी गई, थोड़ी
- 22:22शर्मा रही थी। बच्चा नहाया धोया तो है लेकिन
- 22:29वस्त्र तो पहन ही नहीं नंगा ही आ गया।
- 22:39हवन शुरू हुआ, 2 घंटे सारे लग गए और बच्चा आसमान की तरफ देख रहा
- 22:50है। अब बरसा के अब बरसा।
- 22:58और पंडित जी अपना मंत्र पढ़ रहे हैं स्वाहा
- 23:13बच्चा स्वान की तरफ देखता है पंडित जी आहुति की तरफ देखता है
- 23:19पर जरूरत हो रही है अग्नि बड़ी तेज।
- 23:24तो इन्द्र ने स्वीकार कर ली कोई इन्द्र विद्र नहीं होता तो मैं
- 23:30समझा दूँ। इन्हीं पंडितों के बनाए हुए जाँसी
- 23:35हैं बच्चे का बार बार देखना। संपूर्ण अहूति हुई हम पूर्णमदाह
- 23:55पूर्णमिदं पूर्णमद पूर्णमय पूर्णमय पूर्णमय पूर्णमय पुर्ण।
- 24:10और मेघ न जाने कहाँ से आ रहा है उमड़, घमड़ कर कार्य बादल और ऐसे
- 24:18बरसे ऐसे बरसे बच्चे का हृदय बड़ा प्रसन्न हुआ है।
- 24:31बच्चा खूब मल मल के नहाया इतना बरसा मोटी मोटी बूंदें, पांच
- 24:38वर्षों के बाद बरसात सभी पंडित जीके चरण पकड़ लिया पंडित जी तुम
- 24:46साक्षात परमात्मा देखो पांच वर्षों से।
- 24:51बरसन तुमने परमात्मा को इंद्र को आज बरसने पे मजबूर करती हूँ पंडित
- 25:04जी कहते हाँ, मेरे से बड़ा ब्राह्मण कोई नहीं है, दर्शक
- 25:10सर्वश्रेष्ठ में ही। सभी बातें हो रही थीं।
- 25:18बच्चा नहारा था, बड़ा होश था, खूब बरसा खूब वर्षा इंद्र प्रकट हो
- 25:34गए, कहानी है। और जब मैं कहूं कि कहानी है तो
- 25:46कहानी कहानी की तरह नहीं, कहानी के भीतर कुछ हरस है छुपा हुआ उसे
- 25:52टटो लेना। इंद्र ने कहा हे भ्रम विग्व हे
- 26:06भ्रमण तुम ये गुमान मत करना के तुम्हारी हवन के कारण मैं बरसा।
- 26:18पंडित हो लाल चेहरा था, पीला पड़ गया, इंद्र कह रहा है तो हमारे
- 26:25कारण नहीं बरसाव है, तुम्हारे मंत्राभिषेक के कारण नहीं बरसाव
- 26:29है तुम्हारे मंत्रों की सही उच्चारण के कारण नहीं बरसाव है।
- 26:46तो पंडित हाथ जोड़ के खड़े हो गए। प्रभु फिर क्यों बरसे?
- 26:51नहीं बरसा सिर्फ एक बच्चे के लिए, एक बच्चे के लिए?
- 26:54हाँ उस बच्चे के लिए जो नंगा आया, जिसने वस्त्र नहीं पहना।
- 27:06श्रद्धा ने मुझे बरसने पे मजबूर किया उसके अंतरंगमन पे ठेस लग
- 27:17जाती अगर मैं ना बरसता। और मैं श्रद्धान भित हृदयों को
- 27:30खंडित नहीं किया करता, जो जो यम यम श्रद्धांजित भगवान कृष्ण ने
- 27:42शर्त का है। बस श्रद्धापूर्वक तुम याद करो
- 27:48जीस, जीस देवता को याद करोगे मैं उस उस देवता के रूप में प्रकट
- 27:53होता हूँ है तो एक है दो तो है नहीं वह सत्ता एक।
- 28:07तो बरसा बरसा तो सिर्फ इस बच्चे के लिए बरसा, बाकी सभी सुन्दर
- 28:12वस्त्र पहन के आए। उन्हें विश्वास नहीं था कि बरसे
- 28:16का विश्वास होता तो सुन्दर कपड़े पहन के नाते तुमने कभी देखा?
- 28:24होली वाले दिन तुम सुन्दर कपड़े निकालो पुराने धुराने जो ट्रंक
- 28:30में पड़े हैं सड़े गले जो तुमने उतार दिए फेंक दिए चलो खराब हो
- 28:37जाएंगे तो ये हो जाएंगे। कभी नए कपड़े अभी अभी दर्जी से
- 28:44सिलकर आए तुमने पहने पता है पिचकारियाँ चलेंगी, रंग चलेंगे और
- 28:53आज कल तो पेंट चलते हैं, रंग चलते हैं पेंट ऐसे क्यों उतरते हैं?
- 29:01तो कौन मुरख जाएगा? नए वस्त्र पहन के तुम पुराने
- 29:06धराने पुराने ट्रंकों को फूलते हो और फटे पुराने जो कपड़े पहन के
- 29:12चले जाते हो, खराब हो जाएंगे वैसे भी खराब ही।
- 29:20ये श्रद्धा विहीन हृदय है तुमने कहाँ होली खेली तुमने कहाँ जश्न
- 29:27मनाया तुमने होली हो न जाए इसके लिए रोकथाम पहले ही कर ली।
- 29:39मज़ा तब आता अगर नए नए वस्त्र पहन के जाते मज़ा तब आता अगर नई
- 29:47तुम्हारी वस्त्र मरे हो गए होते रंग जाते।
- 29:59खराब हो जाते है लेकिन तुम इंतजामात पहले कर लेते हो, इसलिए
- 30:07परमात्मा वर्षा इंद्र ने कहा, मैं वर्षा सिर्फ एक बच्चे के लिए
- 30:14वर्षा तुम अभिमान मत कर। तुम्हारा उच्चारण सही था या गलत
- 30:22था इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 30:26इस बच्चे की पुकार सही थी, श्रद्धा सही थी कि बरसेगा और
- 30:30बरसेगा तो मुझे नगंज जाना पड़ेगा क्योंकि मेरे पास कपड़े की है।
- 30:47अभी आज वीडियो प्रसारित हो रही है।
- 30:53एक छोटा बच्चा भी मुझे सुनता है। करीब 13 वर्ष का उसका कमेंट आया।
- 31:09कहीं नहीं जाना बाबा जैसे आदेश तेरा।
- 31:18और साथ में ₹15 भी गए थे। देखो मैंने पेन लेके आना था पेन
- 31:29तो फिर कभी ले आऊंगा। ₹15 भेजते हैं, फ़ोन पे कर दिया
- 31:45और आदेश के रूप में चार शब्द लिख दिए।
- 31:48कहीं नहीं जाना है बाबा मैं रुका, मैं रुका तो सिर्फ इसके लिए रुका।
- 32:08एक छोटे बच्चे की पुकार निर्मल हरदा से आते है और एक छोटा बच्चा
- 32:16मुझे सुनता है, बस सुनता है और कहता है आपके गाने बड़े अच्छे
- 32:23लगते हैं। आपकी एस्ट्रल ट्रैवलिंग की जो
- 32:28बातें बड़ी प्रभावित करती हैं, आश्चर्यचकित कर जाते हैं।
- 32:35देखो बाबा जाना कहीं नहीं, ये ₹15 हैं, मेरे पास ले लो।
- 32:50एक बार की मेरा हृदय भक है, इस बच्चे के लिए मेरे हृदय के भीतर
- 32:57अंतःस्तर से आशीर्वाद है इस छोटी सी उम्र में इतनी सुंदर भावना है।
- 33:09सोचा होगा शायद बाबा के पास पैसे नहीं है अब छोटी सी बुद्धि वैसा
- 33:24ही सोचेगा तो ₹15 थे, पिता ने पहन लेने के लिए दिए होंगे, मुझे भेज
- 33:33दिया है। ये तीन कहानियों मैंने सुनाई
- 33:47तीनों कहानियों का हर र से ही निकलता हृदय की पुकार परमात्मा को
- 33:58अपना संविधान। बदलने पर मजबूर कर देती हूँ।
- 34:05कुरान में लिखा कि मैं निश्चित रूप से बहुत हूँ दयाल हूँ, लेकिन
- 34:13तुम भूल गए। तुमने वो नियमावली नहीं पढ़ी
- 34:21परमात्मा की वह दयालु होता कब है जब तुम्हारा हृदय बच्चे की तरह
- 34:28निर्मल होता है, फिर बच्चा को ना करे और प्रयास कर ले, क्षमा मांग
- 34:37ले? और तौबा कर ले, फिर फिर गुनाह करे
- 34:42फिर प्रयासित कर ले, गुनाह की माफी मांग ले और तौबा कर ले तो
- 34:51परमात्मा कहते है तू बार बार बार बार गुनाह किये जा।
- 34:59बार बार क्षमा बार बार तौबा किए जा, लेकिन कौन हृदय तेरा बालक की
- 35:08तरह होना चाहिए? बालक की तरह मासूम में हृदय, ये
- 35:13तुम भूल गए। और यही था इसके भीतर का रस।
- 35:24अगर हृदय बालक जैसा है तो शरीर कितना ही बूढ़ा गिना।
- 35:36वह सुनता है तुम्हारे अंतःस्परणों की पुकार अगर वो निर्मल हृदय से
- 35:44आई तो सुन ली जाएँगी तुरंत। लेकिन तुम तो रोज़ प्रयास करते हो
- 35:59सुनी एक भी नहीं जाती है कारण क्या है?
- 36:04कारण बस यही है। गुनाह कर ह्यूमन यूज़ टु एरर,
- 36:16लेकिन प्रयासित कर ओह गलती हो गई यह है गुनाह नहीं, यह गलती है, यह
- 36:23एरर है यह मिस्टेक है। प्रायश्चित करके क्यों हो गया?
- 36:30गलत हो गया फिर गलत हो गया होगा। बहुत बार होगा, लेकिन बात सुन तू
- 36:43दुनिया से छिपा लेगा। तेरे अंत में कोने कोने में धरे
- 36:49धरे में बसने वाले परमात्मा से कैसे छुपाएगा?
- 36:55सबसे पहले तो वह देखेगा, शायद तू भी बाद में देखेगा।
- 37:04वह तो देख ही लेगा। बच्चे कैसा करता है?
- 37:09भूल होती और अगर कपट सह से स्याणा अपन लक्ख होवे यही बात कहते हैं।
- 37:23कपट झूठ फरेप स्याण तुम चोर मोरियों से निकल जाना चाहते हो?
- 37:30एक आभार की निकल जाओगे, लेकिन क्या सच में निकल जाओगे?
- 37:37नहीं तुम्हारी कानून। पाप के हिसाब से दंड दे पाने में
- 37:48समर्थित नहीं हैं। हिटलर ने 2,50,00,000 व्यक्तियों
- 37:53को मार दिया। क्या 2,50,00,000 बार फांसी दी जा
- 37:56सकती है? अब इनसा तो यही बनता है।
- 38:05लेकिन तुम्हारे कानून बोनी तुम्हारी अदालतें बोनी हैं समर्थ
- 38:19हैं, टांग देंगी व्यक्ति को एक बार।
- 38:23लेकिन एक बार टंगने से दूसरी बार तुम भी मजबूर हो जाओगे।
- 38:34तुम्हारी अदालतें हिसाब नहीं भी लें और उससे लोग मुझे शिकायत
- 38:40करते। बाबा ये पैसा देके छूट जाते।
- 38:45मैंने का पुत्र वहाँ रिश्वत नहीं चलते यहाँ पैसा दे के छूट जाए,
- 38:52कोई बात नहीं लेकिन वहाँ रिश्वत नहीं चलती वहाँ तो जरे जरे का
- 39:00हिसाब। मांगा ही जाता है और देना ही
- 39:06पड़ता है। चंगियाईयाँ बुरियाईयाँ वाच्चय
- 39:14तरमहदुर उस परमात्मा के दरबार में अच्छाई बुराइ पुण्य पाप।
- 39:21सब बाचे जाते हैं। जैसे सजा सुनाने से पहले फांसी की
- 39:27सजा सुनाने से पहले जज कहता है कि देख तुने ये ये अपराध किया और इस
- 39:38अपराध की एवज में। इट शुड बी हैंग्ड टिल डेथ।
- 39:47लेकिन यह कोई सजा नहीं है। प्रॉपर सजा नहीं है क्यों?
- 39:54क्योंकि कतल तो 2,50,00,000 की है कतल तो उसे ही पता है कितने की
- 40:00है। ये ऊंची कुर्सियों पर बैठने वाले
- 40:04ज्यादा कदल करके आते हैं। इनके चेहरे देखो जैसे गुनाहों की
- 40:15साक्षात मूर्ति। गौर से देखना पारदर्शी निगाह रखने
- 40:20वाले संत बड़ी अच्छी तरह से देख लेते हैं क्योंकि कुछ भी न बोलें
- 40:28इनके लभ न बोलें इनका ओरा तो बोल ही जाएगा और संत ओरा देखता है।
- 40:36संत और इसे पहचान जायेगा। बहुत से व्यक्तियों को मैं शिक्षा
- 40:40देने से इंकार करते थे। नहीं मिलेंगे शिक्षा बाबा मैं
- 40:49बड़ी श्रद्धा से बड़ी आशा से तुम्हारे दरबार में आया हूँ।
- 40:53बिल्कुल आए हो, लेकिन इतना भार में सहन नहीं कर सकता।
- 40:58तुम परमात्मा हो, बिल्कुल हूँ लेकिन इतना भार में सहन नहीं कर
- 41:03सकता, कहीं कहीं तो ईश्वर को ही ब्याह करनी पड़ती है, तुम इतने
- 41:13पाप कर देते हो अरे इतने पाप। इसका मतलब नहीं ये परमात्मा कर
- 41:26नहीं सकता नहीं परमात्मा करता नहीं तू थोड़ा भोग तुने किया बड़े
- 41:37प्रेम से उसी प्रेम से भोग थोड़ा भोग तो हो रहे।
- 41:41फिर आ जाना रात। खुला खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए
- 41:58कोई इजक तुम्हारा। हृदय।
- 42:03तोड़ दे तड़पता हुआ जब कोई छोड़ दे।
- 42:11जब तुम्हें भुगतना पड़े, जो तुमने दूसरों को दुख दिया था, वो महसूस
- 42:17तुमने नहीं किया उसने किया। तो ज़रा तुम भी तो चखो थोड़ा चखो
- 42:26फिर आ जाना तब? तुम मेरे पास आना।
- 42:32प्रिये बच्चे तो हो मेरा, लेकिन वह भी तो बच्चा था।
- 42:39वह कोई बेगाना थोड़े था, तुम भी तो स्वाद चखो के तुमने कितना दुख
- 42:46दिया उसे? मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा
- 42:55तुम्हारे लिए। तुम्हारे लिए।
- 43:00सभी के लिए द्वार खुला है। ये मोक्ष द्वार सबके लिए खुला है।
- 43:06आ जाना तुम क्षमा कर दिए जाओगे लेकिन क्षमा करने से पहले गुनाह?
- 43:18माननीय हो गया। मैंने एक परिवार को पूरे के पूरे
- 43:24को निष्कासित कर दिया, इसीलिए नहीं कि उन्होंने गुनाह किया तो
- 43:31मैं जानकर बड़ी हैरानी हो गया। उन्होंने छोटी छोटी बच्चों के साथ
- 43:37रेप किया। यही आठ 9 साल के बच्चे और खुला
- 43:44रेप किया और उनकी वोटों खिचवाए। इसलिए मैंने घर से निष्कासित नहीं
- 43:53किया कि उन्होंने पाक किया। तुम्हें जानकर हैरानी भी होगी।
- 44:00मैंने इसलिए निष्कासित किया कि तुम्हारा पीड़ा इस घर में नहीं
- 44:05पड़ना चाहिए, क्योंकि तुमने गुरु से छुपा दिया और काश तुमने गुरु
- 44:14से बता दिया। तो तुम्हारे सभी पाप क्षमा हो
- 44:21जाती है, मैंने निपट ले आह, हम तम सर्व पापवे भव मोक्ष श्याम माँ चु
- 44:27च सर्वधर्माण पर तज्जमा में कम शर्म पर तुमने जो किया अच्छा
- 44:34किया, बुरा किया। मेरी शरण में सोप दो छुपाया, ये
- 44:46बहुत बड़ा गुण है, तुम्हारा छुपाना गजब कर देता है।
- 44:56तुम पाप करते हो हो जाता है मदहोशी के आलम में बेहोशी के आलम
- 45:06में पाप हो जाए तो गुरु का एक यह भी मतलब होता है वह साथी भी होता
- 45:16है। वह मित्र भी होता है, वह पिता भी
- 45:20होता है, वह गुरु भी होता है, उपदेशक भी होता है, वह तुम्हारा
- 45:25सभी संगीत साथी है, उसे अगर नहीं बताया तो फिर तुमने परमात्मा को
- 45:34नहीं बताया? वह तुम्हें कभी नहीं कहेगा कि
- 45:39मुझे बताओ और उस व्यक्ति ने उस परिवार ने पूरा का पूरा मुझसे
- 45:44पूछा कि कारण मैंने कहा कारण मत पूछो मत पूछो।
- 46:00बस गुनाह किया इससे बड़ा गुनाह ये किया के गुनाह को छिपाया परमात्मा
- 46:13यही कहता है कन्फेस द एरर्स। तुम गुनाह करके गुनाह कम करते हो,
- 46:28गुनाह को छिपा कर गुनाह बड़ा कर देते हो सर लहते की निशानी मुझे
- 46:42याद है मैं बच्चा था तो माँ पैसे इकट्ठे करती।
- 46:48₹1 की कीमत बहुत हुआ तो मैंने माँ की अरमारी में से ₹1 निकाल लिया।
- 46:58लोटा सा होता था, ₹1 निकाल लिया? और घर से दुकान कोई ज्यादा दूर न
- 47:09थी। नन्हे कदमों से चलकर दुकान पे
- 47:12पहुँच गया ₹1 पिताजी को दे दिया पिता पूछने लेकर तू कहाँ से ले के
- 47:21आया? मैंने नहीं पता ऐसे मैं जाता, घर
- 47:32से ₹1 ले आता, पिताजी को दे देता। पिताजी के पास काफी रुपए इकट्ठे
- 47:41हो गए, ₹1012 इकट्ठे हो गए। उस जमाने में ₹1012 बहुत तो पिता
- 47:55ने कहा ये कहाँ से लेके आ रहा है? पैसे छानबीन हुई तो पता चला कि
- 48:04उसे लौटे में सिर पे निकाल के दे रहा है, लेकिन छुपाये?
- 48:12ये चोर ही नहीं बच्चे की कारस्थानी है, बच्चे ऐसे ही
- 48:20कारस्थनियां करते हैं, ₹1 निकालो, पिता को दे दिया, पिता शाबाश ही
- 48:28देगा। ये नहीं पता, उसी का पैसा उसी को
- 48:32दे रहा हूँ। तुम भगवान के साथ यही धोखा करते
- 48:39हो, भगवान को कहते ख्याल रखना, छतर चढ़ाया है सोने का।
- 48:51पांव में खड़ाव डाले हैं सोने सिर पर मुकुट है सोने का जब जयंती
- 49:01माला डाली है घर ये पोशाक मेरी दी हुई है।
- 49:07कि शायद तुम अगर पोशाक न देते तो भगवान नंगे ही बैठे रहते, ऐसी
- 49:16मनोवृत्ति से अगर तुम कालीमा लिए हुए हृदय में कुछ भी करोगे, वह
- 49:25पाप हो जाएगा। सदना कसाई करता तो है ये काम
- 49:34लेकिन हृदय में प्रायश्चित होता है।
- 49:36प्रभु ये मुझे क्या काम सौंप दिया?
- 49:43अनिका, गणिका, वैश्य तो हैं। लेकिन कुढ़ती रहती है हे प्रभु,
- 49:53हमें यह क्या काम सौंप दिया? सामने वाला पुजारी तो बड़ी मस्ती
- 49:59से भगवान का गुण काम कर रहा है। आपने हमें कैसा जीवन दिया?
- 50:06और वह पुजारी नर्क चला जाता है। अक्सर पुजारी नर्क ही जाते हैं
- 50:13क्योंकि पुजारी में पूजा का अहंकार होता है।
- 50:21जो बकरा काटने वाले और देह बेचने वाले के भीतर अंकार मरता है और
- 50:27अहंकार का मर जाना ही उस सतत्व के करीब आना है।
- 50:34उस सतत्व के गरीब आना चाहते हो तो काम ना देखो।
- 50:41कर्म क्या करते हो ये ना देखो ये देखो कि कर्म करते वक्त तुम्हारी
- 50:47मनोज श्रद्धा होती है। प्रयास तो हो गया तो वह तो हो गई।
- 50:58यह बोलकर तौबा नहीं हुई लेकिन मन में तो बड़ी गलानी हुई, मैंने देह
- 51:04बेचा, हे परमात्मा, तुने हमें कैसा काम सौंपा?
- 51:10यह गलानी भी हुई, प्रायश्चित भी हुआ।
- 51:15खुद की निंदा भी हुई। और तौबा भी हुई, लेकिन मजबूर है
- 51:23के देह बेचना पड़ता है। व्यय जितनी आसानी से मुक्त हो
- 51:37जाएगी। क्योंकि वह मुक्त होना ही चाहती
- 51:41है। उसका धंधा ही ऐसा है।
- 51:47उतनी आसानी से सती सावित्री मुक्त नहीं हो पाती।
- 51:51सही पूछो तो सती सावित्री मुक्त हो ही नहीं पाती, वह तो बंद ही
- 51:56रहेंगी। तुम तो उकसाते हो, सती हो जाओ,
- 52:02मंदिर बनेगा पूजा होगी सारी उम्र या बड़ी से बड़ी बात सुनाएं, सारी
- 52:09उम्र पूजे जाओगे कई स्त्रियाँ तो इसीलिए सती हो जाती हैं जीवन में
- 52:19रखा क्या है? मरना वैसे भी है ऐसे क्यों न मर
- 52:27जाए? सारी दुनिया पूजेगी सती भगवती के
- 52:34नाम तुम अमर होना ही चाहते थे तो अमर होने का बहाना मिल गया।
- 52:40चलो सती हो जाओ। लेकिन तुम्हें नहीं पता दुनिया
- 52:48तुम्हारी पूजा करें, परमात्मा की दरगाह से तुम्हें जूते पड़ेंगे,
- 52:58सति मुक्त नहीं होगी, सति बंधन में बंधी रहेंगी।
- 53:03अनिका गणिका मुक्त हो जाएगी। सदना कसाई मुक्त हो जाएगा।
- 53:13बड़ी उलटी बात है, यह जीवों को इस वृत्ति से रक्षा करने वाला कि मैं
- 53:21बचा रहा हूँ। यह मुक्त न हो पाएगा।
- 53:27जीस कर्म के करने से मैं प्रबल हुआ वह बंधन बन गया जीस कर्म को
- 53:36करने से मैं बलवती हुआ, बलवान हुआ, वह बंधन बन गया।
- 53:43मानो यह बंधन, सोने की जंजीर और तुम्हें सोने की जंजीरें बंधन
- 53:52नहीं लगते। हथकड़ी जैसे नहीं लगते वो लगते
- 53:54हैं आभूषण जैसे और आभूषण हो ना? तो बहुत बेहद खतरनाक है तुम्हारे
- 54:06कृत्य तुम्हारे लिए आभूषण बन जाए तो तुम खुद ही नहीं छोड़ना
- 54:11चाहोगे। गलानी क्या आएगी कभी सोनी की चेन
- 54:14को भारी कड़े को चाहे हथकढ़ी जीतने भारी हो।
- 54:20पहनकर तुम्हें शर्म होती है नहीं, शर्म होती है लोहे की हथकड़ी मेरे
- 54:30भाई बहनें अमेरिका से आती हैं। यहाँ से लेकर यहाँ तक सोने के
- 54:38कड़े डाले होते हैं। पहली बार जब आई गरीबी में गई थी,
- 54:45जब आई तो यहाँ तक सोने के खड़े थे।
- 54:49ये बिल्कुल सत्य बात बताता हूँ मैं, मैंने कहा बहना ये क्या
- 54:58किया, जुलुस निकाला। क्या दिखाना चाहती हो कि मेरे पास
- 55:04इतना सोना है? ए झेंप बिल्कुल दिखाना चाहती थी।
- 55:14यहाँ गरीबी थी, दो वक्त की रोटी के लाले थे।
- 55:20और वहाँ से सोना लेके आई दिखाना चाहती है और दिखावा ही तुम्हारी
- 55:26मुक्ति में सबसे बड़ी बाधा है। यहीं से मैंने शुरू किया था
- 55:30दिखावा ये पंडित करते हैं। पंडित मंत्र बोलते हैं, सुहाग
- 55:40करते हैं, आहुति देते हैं। दिखावा कर प्रताप तो उस बच्चे का
- 55:51जो नंगे शरीर आ गया। बारिश आएगी आह हाँ नहायेंगे और
- 55:57फिर जा के नए कपड़े डालेंगे पविंद्र कहते की मैं बरसा इस
- 56:03बच्चे के लिए, मैं रुका तो उस बच्चे के लिए।
- 56:13पर्याप्त तो बहुत लोग रोए तो बहुत लेकिन ज्यादा तीर की तरह घाव करके
- 56:25ये ₹15 तीर की तरह घाव करके ये मासूम हृदय के चार शब्द।
- 56:33नहीं जाना बाबा के यहाँ ये जैसे एक आदेश था।
- 56:41बाबा के आदेश वे बिल्कुल ऐसे ही आया करते हैं।
- 56:45आवाज़ भोली मासूमियत से भरी हुई। लेकिन आदेश ऐसा जैसे तानाशाह बोल
- 56:55रहा हो। आवाज़ में मासूमियत शब्दों में
- 57:01कड़पटा नहीं जाना है। कहीं ये लोग ₹15 हैं?
- 57:11कुछ चाहिए तो ले आओ मुझे पिताजी ने पेन लाने के लिए दिया है
- 57:27निर्मल मन जन सोईमोही बाबा एक ही सूत्र तुम्हें देता हूँ।
- 57:39पहला प्रवचन मोक्ष द्वार के बाद कहा मन को निर्मल रखना फिर जो
- 57:48करोगे हॉट लाइन पे परमात्मा होगा तुरंत मान ली जाएगी तुम्हारी
- 57:53फ़रियाद। और तुम्हारे बड़े बूढ़ों की
- 57:57फरियाद नहीं मानी जाती। कितने रुमालें चढ़ाते हो तुम
- 58:01फरियाद कभी सुनी जाती है इस बच्चे की फरियाद सुन ली गई वर्ष पड़ा
- 58:08इतना फैसला बदल लिया मैंने। हाथी मरा हुआ जीवित हो गया।
- 58:21इतने प्रेम से कहा क्यों सोया पड़ा है उठ जा ना ओहे कपट छल
- 58:31छिद्र ना बाबा। तुम कपट करते हो तुम छल करते हो
- 58:38इसलिए मैं कहता हूँ वकील कभी नहीं पहुँच सकेगा ये खरीदे गए जज चाहे
- 58:46कितनी भी पड़ी पोस्ट पे हो माना। ये चीफ जज से राज्यसभा के सदस्य
- 58:54बन जाएं, लेकिन इनका उधार नहीं होगा।
- 58:59क्यों मन निर्मल नहीं हुआ? वह मन निर्मल जो मुआवजा नहीं
- 59:06लेता, जो अपना कर्तव्य निर्वहन करता है बस।
- 59:12क्या तुम्हे जब तुम जज की कुर्सी पर थे, मिस्टर बोना प्रकाश नाम तो
- 59:20भूल जाता हूँ बोना प्रकाश ही कहता हूँ, क्योंकि कद बोना तुम्हे
- 59:27तनख्वाह नहीं देती थी। तो गवर्नमेंट क्या हमें तुम
- 59:31खरीदते थे? गवर्नमेंट के मामी के घर पे रखा
- 59:36है क्या? पैसा, पैसा तो हम से जाता है तो
- 59:41मिस्टर बोना प्रसाद तुमने गलत फैसले क्यों दिए?
- 59:50मिस्टर चंद्रचोर फैसला देते हुए तुमने भगवान से क्यों पूछा,
- 59:58अल्लाह से क्यों नहीं पूछा? फैसला तो भगवान और अल्लाह के बीच
- 1:00:03में था, सिर्फ परमात्मा से पूछ लिया, अल्लाह से क्यों नहीं पूछा?
- 1:00:12यह मल युक्त मन की निशानी है। तुम कभी मुक्त नहीं होगे।
- 1:00:19ये छल कपट यही तो तुम्हारे ऊपर बंधन है और कोई जंजीरों में बंधन
- 1:00:27होते हैं। यही तो बंद है जो दिखते नहीं जो
- 1:00:32तुम्हें पता ही नहीं के बंदा है राज़ करने वाले राज़ करने के
- 1:00:42उद्देश्य से कितना झूठ कपड़ तोड़ते, कितनी कतलो गारत करते और
- 1:00:48छुपाते? और फिर राज़ करने से क्या मिलता?
- 1:00:55पूछना किसी मरते हुए व्यक्ति को राजनीति को कि ठीक तुम अब तो मर
- 1:01:02नहीं चले, क्या तुमने इतना कुछ कतलो गारथ करके?
- 1:01:10नफरत फैलाके खून खराबा करके दूसरे के बच्चों को खून धरती को ला के
- 1:01:21छोटे छोटे बच्चों का यौन शोषण करके अभी केरला में 126 वर्षीय
- 1:01:27बच्चे ने सुसाइड कर लिया। बच्चा ही समझूंगा।
- 1:01:31वो कहता है कि मुझे तीन और चार वर्ष की उम्र में सेक्शुअल
- 1:01:38हरस्मेंट। ऐसी संस्थाओं को निस्तनाबूद कर
- 1:01:52देना चाहिए और ऐसी संस्थाओं से निकले हुए व्यक्ति पदमुक्त कर दिए
- 1:02:05जाएं। आजिनी का बुर बाला है इसलिए
- 1:02:14हिंदुस्तान पे आफत आई पड़ी है। जो लोग पूछते हैं बाबा क्या तुम
- 1:02:21कुछ नहीं कर सकते? वक्त आने दो?
- 1:02:31वक्त पे मैं नहीं करूँगा तो मैं बखूबी जानता हूँ एक न्यायाधीश को
- 1:02:41जो तुम्हारे न्यायाधीश से कहीं ऊंचा है।
- 1:02:43जो तुम्हारे न्यायाधीश की जिंदगी का भी न्यायाधीश है, जो इस कुर्सी
- 1:02:50से ऊपर भी ये कुर्सी है, इनको भी हिसाब देना होगा।
- 1:02:55वो इनसे भी हिसाब मांगेगा कि वो मिस्टर बोना तुमने ये क्या किया?
- 1:03:05मैं तो एक था, तुमने ये क्या किया?
- 1:03:12तुमने द्वेष क्यों खड़ा किया? सभी राजनीतिज्ञों से पूछा जाएगा।
- 1:03:21अगर तुम्हें पता नहीं था कि मैं एक हूँ तो फिर तुमने अपने राज्य
- 1:03:27की व्यवस्था अपने ढंग से कि मुझको क्यों फंसाया बीच में?
- 1:03:38निर्मल मन जन सोई मोही पावा, मोहे क भटू छल छिद्र न पावा।
- 1:03:48मलहीन चित्दश। वो ही लुत्फ लेती है आनंद का मोहि
- 1:04:00बाबा का यही अर्थ वह आनंद का सुमित्र है और कौन पाता जिसके मन
- 1:04:09से मैल उतर जाता है मोहि कपट। कपट करना, छल छिद्र सुराख रख के
- 1:04:21अक्सर वकील सुराख रख लेते हैं। कानून में हजारों सुराख मिलेंगे।
- 1:04:32अम्बेडकर ने संविधान बना दिया लेकिन वो संतुष्ट नहीं।
- 1:04:37तो संविधान मैंने बनाया लेकिन क्या करूँ?
- 1:04:43जब संविधान को लागू करने वाले व्यवहार हो जाएं लागू तो वही
- 1:04:49करेंगे ना बना तो मैंने दिया अपनी तरफ से कोई कोर कसर वाकई नहीं
- 1:04:55छोड़ी। लेकिन क्या करूँ जब इसे लागू करने
- 1:05:03वाले बेमान हो जाएं, संस्थाओं को खरीद लें लेकिन खरीद कर भाई तुम
- 1:05:11क्या पाओगे? ध्यान रखना।
- 1:05:18धन दौलत मान सम्मान पदवी उच्चस्त्र पदवी राष्ट्रपति बन गए,
- 1:05:24प्राइम मिनिस्टर बन गए, चक्रवर्ती सम्राट बन गए।
- 1:05:29लेकिन अगर चैन ना। एक तू ना मिला एक तू ना मिला।
- 1:05:47सारी दुनिया मिले भी तो क्या है? मेरा दिल ना खेला मेरा दिल ना
- 1:06:06खेला। सारी बगिया खिले भी तो क्या?
- 1:06:16है एक। तोना तोना मिला।
- 1:06:25तकदीर की मैं कोई भूलू तकदीर की मैं कोई भूलू।
- 1:06:44डली से बिछुड़ा हुआ बोलूं तकदीर कि मैं कोई बोलूं?
- 1:06:56डली से बिछुड़ा। हुआ हो लो 713 नहीं 713 नहीं संग
- 1:07:21दुनिया। चले भी तो क्या है?
- 1:07:28713 नहीं संग दुनिया चले भी तो क्या है?
- 1:07:43एक तू ना मिला। दनपतियों कुबेरों?
- 1:07:59उच्चस्त गतियों पर बैठे हुए लोगों, न्यायाधीशों, लोकसभा के
- 1:08:11विधानसभा के पार्गियामेंट के सदस्यों, राज्यसभा के सदस्यों।
- 1:08:21कभी एकांत अपने घर के कमरे में बैठते सोचना सुख तो इंद्रियों की
- 1:08:30उत्तेजना से आत्म सुख तुम नहीं लेते सुख लेती तुम्हारी जीवो।
- 1:08:41तुम जीबा को सुख लेते हुए देखते हो?
- 1:08:44टेस्ट वर्ष लेते हैं, सुख तुम्हें नहीं मिलता।
- 1:08:47अगर जीबा पे टेस्ट वर्ष न होते तो स्वाद कैसे आएगा?
- 1:08:55सोच नजर। अगर जीवा के ऊपर परमात्मा टेस्ट
- 1:08:59वर्ष न देता तो स्वाद आता कैसे? स्वाद आता टेस्ट वर्ष को तुम्हें
- 1:09:09थोड़ी आता तुम तो देखने वाले हो यही भ्रम।
- 1:09:17तुम्हें आनंद से वंचित रखता इन्द्रियां तुम्हारी स्वाद लेते
- 1:09:22आंख सुंदर मनमोहक दृश्य देखते कान मनमोहक संगीत सुनते।
- 1:09:35लेकिन तुम जो कहते वो ऐश कर ले, उस ऐश की परिभाषा क्या है?
- 1:09:42ज़रा बताना मुझे ये जो ऐश तुम कहते हो दट इस स्टिमुलेशन ऑफ़
- 1:09:52युअर इन्स्ट्रुमेंट। यह तो तुम्हारे उपकरणों की उतेजना
- 1:10:00है क्या तुमने कभी वो क्षण देखा जहाँ वो स्वाधवी हो और उतेजना न
- 1:10:08हो उसे ही आनंद करता? श्राद्ध भी हो और श्राद्ध के कर्म
- 1:10:15श्राद्ध हो और उत्तेजना न हो। नॉन स्टिमुलेंट नॉन स्टिमुलेंट
- 1:10:27हैपीनेस हैपीनेस जो है अपने आप में होते है न?
- 1:10:33लेकिन उसमें स्टिमुलेशन ऐसा सुख देखा नहीं देखा और याद रखो अगर एक
- 1:10:44क्षण के लिए भी पूरे जीवन में या पूरे जीवन में।
- 1:10:51जो बीत गए जो आएँगे जो अब चल रहे हैं एक क्षण के लिए भी तुमने उस
- 1:10:58लम्हे को चख लिया जहाँ स्टिमुलेशन तो ना थी, लेकिन मज़ा था।
- 1:11:10बस तुम उसके बाद सभी मज़्ज़ों को छोड़ दोगे और अगर फिर भी तुम
- 1:11:17इंद्रियों से मज़े ले रहे हो तो तुम कुछ भी धोखे में हो, औरों को
- 1:11:26भी धोखा दे रहे हो। बस इसकी एक ही परभाषा आखिर मैं
- 1:11:32बताऊँगा वह सुख जिसमें उत्तेजना नहीं है उत्तेजना हीन सुख दट।
- 1:11:42इस कॉल्ड आनंदा। अगर कभी एक पल के लिए हो वो
- 1:11:48तुम्हें मिल जाए अब तो तुम नहीं छोड़ते सुक्खों को फिर वो नहीं
- 1:11:56छोड़ेगा तुम्हें गैर उत्तेजना युक्त सुख अगर तुम्हें एक क्षण के
- 1:12:05लिए मिल जाए। तो फिर वो तुम्हे नहीं छोड़ेगा।
- 1:12:10यही कहते हैं बाबा नानक सब न जियाँ का एक दाता शो में विसर न
- 1:12:17जाए बहना मुझे भूल जाए ऐसा ज़्यादा आए कि फिर मुझे याद करने
- 1:12:23की आवश्यकता न पड़े। फिर तो वो ही याद करते हैं, वो
- 1:12:26तुम्हें छोड़ेगा नहीं, फिर और अगर उसका साथ नहीं तो सारी दुनिया भी
- 1:12:35साथ चले तो कोई फर्क नहीं पड़ता। 713।
- 1:12:44नहीं। 713 ने संग दुनिया चले भी तो क्या
- 1:13:01है? एक तो ना मिला तो न मिला तो न
- 1:13:14मिला। धन्यवाद।