Latest / Baba ji Vijay Vats / 26 Sep 25 - जपुजी साहिब पौड़ी - 19 | नाम क्या है? | मैं तुम्हें जीते जी सचखंड में पहुंचा के दिखाऊंगा!
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- 0:01आइए उन्नीसवीं पौड़ी पे चलते हैं अशंख नाम अशंख तुम तुमने परमात्मा
- 0:16के अशंख नाम बना रखे हैं कोई राम, कोई रहियों वह गुरु सतनाम।
- 0:24कोई राधे, कोई कृष्णा असंक नाम असंक थाम और तुमने असंक थाम
- 0:32वृंदावन जाओ, तीर्थ जाओ, कुरुक्षेत्र जाओ।
- 0:40ब्रह्म सरोवर में स्नान करो गंगा सागर जाओ, हरिद्वार जाओ ऋषि को
- 0:44जाओ तो बाबा कहते हैं असंख नाओ और ध्यान से सुन ना इस पर वचन को कई
- 0:52बार मैं सोचता हूँ के बाबा में बाबा ने इतनी सरलीकृत करके जपजी
- 0:59बोली। फिर भी ये लोग कैसे भटक गए?
- 1:06ये ग्रंथि कैसे भटक गए? असंक नाम तुमने बेगणित नाम पैदा
- 1:19कर लिए, जिसका कोई नाम नहीं होता। असंक थाम तुमने अनेक थाम पैदा किए
- 1:29चलो वृंदावन चलो वहाँ शांति में दे कुरुक्षेत्र, हरिद्वार चलो
- 1:35गंगासागर चलो बरेली बद्री नारायण चलो।
- 1:43तुमने हजारों थांव बना रखे हैं जिनकी गणित नहीं हो सकती।
- 1:48असंख्या यो संख्या में नहीं आता, इतने थांव बना रखे तुमने उसके
- 1:55उनसे सुन लेना। इस कौड़ी को बड़ी शानदार कौड़ी
- 1:58है। अगम अगम अशंख लो जहाँ जाया ही न
- 2:07जा सके। यानी जो है ही नहीं वो तुमने लोक
- 2:11बना रखे हैं। असंख नाम असंख थाम अगम अगम असंख
- 2:18लो जहाँ जाया ही न जा सके। इतनी संख्या में तुमने लोक बना
- 2:26रखे हैं, सतलोक बना रखा है, सच खंड बना रखा है।
- 2:32और कितने कितने लोग बना रखे सर्ग बना रखा नर्क बना रखा और स्वर्ग
- 2:38और नर्क भी अलग अलग बना रखे। कुम्भ भी पाग नर्क है।
- 2:45सैकड़ों केतु तुमने नर्क बना रखे हैं।
- 2:51यहाँ बेईमान लोग आएँगे, यहाँ राजनीतिक आएँगे और राजनीतिज्ञों
- 3:01के लिए तो तुमने विशेष लोक बना रखा है तो बाबा कहते हैं असंक नाम
- 3:08असंकता। तुमने तो भाई अशंक नाम बना दिया
- 3:11उसके जिसका कोई नाम नहीं है अशंकथाओं तुमने अलग अलग बना दिए,
- 3:22कोई कहता उस सरोवर में स्नान कर लो, कोई कहता है?
- 3:26गंगासागर में कर लो, कोई कहता कुंभ में कर लो स्नान कर लो ये
- 3:31तुमने थॉव भी अलग अलग बना दी है, लेकिन बाबा कहते हैं सब थॉव देख
- 3:39लिए दिट्ठे सभ्य थॉव नहीं तुद जे हेय।
- 3:45बाबा कहते हैं कि और भी थांव है जहाँ तुमने जाना है, गंगा स्नान
- 3:54करके तुम्हारे पांव नहीं धुलते। यद्यपि तुम कोशिश करते हो, तुम
- 3:59लालच खा जाते हो, तुम सस्ते मार्ग खोजते हो।
- 4:04बाप तो तुमने कर दिया, तुम कहते हो कैसी तरह हम बचे जाएं लेकिन
- 4:14परमात्मा बड़ा द्यादू भी है। न्यायकारी?
- 4:18द्यादू ये है कि वो तुम्हारे प्रोसेसिंग के अंदर।
- 4:23ही भुगता देता है। यह उसके ज्यादा होता है, अन्यथा
- 4:29सर के ऊपर तुम टोकरी का भाव कितनी देर तक रखते रहोगे?
- 4:33अगर वो भुगताये नहीं तो हमारी टोकरी के भीतर भरी ईंटें पड़ी
- 4:39रहें। और कोई उन ईंटों को एक एक करके
- 4:44गिराए नहीं, बाहर हल्का नहीं करे तो तुम बाहर से मरते ही जाओगे।
- 4:50अनंत अनंत समय तक तो यह उसकी द्यादुता ही है कि वह भुगता के
- 4:56तुम्हारा भार हल्का कर देता है। यह द्यादुता नहीं है।
- 5:05तुम कहते हो एक ही तुम्हारी बुद्धि सोचती है और जो बुद्धि से
- 5:10सोचेगा वह ऐसे ही प्रश्न करेगा उसके पास जवाब तो होंगे ही।
- 5:17ज़रा सोचो तुम्हारे सिर के ऊपर एक मजदूर के सिर के ऊपर बट्थल है,
- 5:21उसमें 20 ऐंटे हैं। 20 ईंटों का भार उसके ऊपर लगातार
- 5:27रखा रहे। जन्मो जन्मो।
- 5:28तक तो तुम दुखी न हो जाओगे, यह पाप जो तुमने किये वो तुम्हारे
- 5:36अचेतन के ऊपर बोझ हैं और लगातार बोझ हैं।
- 5:39तुम सोये रहो, तुम जगते रहो, काम करते रहो।
- 5:42तुम हरि भजन करते रहो, पाप तो भीतरी अब कोई सर पर टोकरी रखे हुए
- 5:49है, ईंटों की भरी हुई राम राम करेगा उससे बोलते नहीं हल्का
- 5:55होगा। सर पर तुम्हारी टोकरी है, ईंटों
- 6:02की बाहर बड़ा घना है और मजदूर राम राम राम राम करना शुरू कर दे।
- 6:08क्या भारत का हो जायेगा बातों को थ्रोटिकल वे में न लिया करो
- 6:18प्रैक्टिकल वे में भी ले लिया करो।
- 6:20मुझसे पूछ लेते हैं वह परमात्मा दयालु भी है और वह परमात्मा
- 6:27न्यायकारी भी है, ये दोनों यज्ञ सा कैसे हो गए?
- 6:30मैंने कहा बिलकुल हो गए। वह न्यायकारी इसलिए है कि उसने
- 6:36न्याय किया कि तुम्हें दंड मिलेगा।
- 6:39टोकरी में सो टीके ईटें उठा के तुम्हें जब तक भुगता लिया नहीं
- 6:46जाए तब तक तुम्हें खड़े रहना पड़ेगा।
- 6:48एक स्थान पे यह दंड है, यह है उसका न्याय अब ध्यान से समझ ले ना
- 6:54बार बार ना पूछ। सो ईंटों का भार उठा के दिन भर
- 7:04रात और तुम्हारा अचेतन तो ऐसा है तुम अगर सो जाओ।
- 7:14तो भी वह बाहर तुम्हारे अछेतन में पड़ा रहता है, इसलिए तो लोगों को
- 7:19नींद नहीं आता। मौत का 1 दिन मय्यन है, नींद को
- 7:25रात भर नहीं आती, ये अछेतन का बोझ है जब तुम जब भोगते लोगे।
- 7:32तो मज़े से घोड़े बेच के सोक तुम जानते हो कि मौत 1 दिन आएगी।
- 7:41मौत का 1 दिन मोयन है, नींद क्यों रात भर नहीं आती?
- 7:46सिर्फ मरने का ही तो बोझ नहीं है। भाई कर्मों का भी बोझ है।
- 7:53जैसे जैसे करम तुम भोंकते जाओगे वैसे वैसे तुम हल्के होते जाओगे
- 7:57भोंकने से तुम डरते हो भोंकने से बचने के लिए तुम हज करते हो।
- 8:08भोगने से बचने के लिए तुम गंगासागर तीर्थ यात्रा कुम्भ
- 8:12स्नान करते हो, भोग से बच जाए। लेकिन कहा परमात्मा इतना तो तुम
- 8:21भोग से बच जाते नहीं, उसकी सृष्टि में बात कर कहाँ जाइएगा?
- 8:29जहाँ जाएगा हमें पाइएगा, अजी रूठकर।
- 8:44हब? कहाँ जाइएगा जहाँ जाएगा हमें
- 8:59आइएगा अजय रोट कर अब। कहाँ जा ये वह न्यायकारी?
- 9:12है। उसने तुम्हे पनिश किया, ये लगातार
- 9:16वो जा तुम्हे ढोना पड़ेगा जो तुमने कर्म किये है और देखो जितना
- 9:20पाप किये जाओगे वो जा बढ़ता जायेगा।
- 9:22करती जाओ कौन रोकता है? उसने खुली छूट दे रखी है।
- 9:29तुम कहते हो क्यों नहीं रोकता, वो हाथ नहीं रोकता, तुम्हें ये तो
- 9:33भोगना पड़ेगा। अगर तुम अपने सर का बोझ और बढ़ाना
- 9:37चाहते हो तो और करो भाई दो 5 मिनट और बढ़ जाएंगे।
- 9:45उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा, तुम्हें ही भोगना पड़ेगा।
- 9:51जैसे राजा आज को ये तो खाना पड़ेगा तुम्हें तो करो भाई वो
- 9:59क्यों रोके हैं तुम स्वतंत्र हो। वह नहीं रुकेगा तुम्हें उसका भेजा
- 10:06खराब है क्या? उसका भेजा बहुत बढ़िया है।
- 10:11तुम चालाक हो तुमसे पहले वो सयाना है, चालाकी सयाना पे नहीं होती।
- 10:17तुम चालक हो वह सयाना। तुम चालाकी को स्याण पर समते हो
- 10:25जब की चालाकी स्याण पर नहीं होते, मूर्खता होती है तो मैं शतरंज की
- 10:32मोहरें बसते हो। यह स्टेट भी जीते हैं।
- 10:35वो स्टेट भी जीते हैं, लोकसभा भी जीते हैं।
- 10:41पंजाब भी जीत जाए हरियाणा भी जीत जाए जीत जाओ भाई ये खरीद ले वो
- 10:47खरीद ले वो ही धारा खरीद ले इलेक्शन कमिशन खरीद ले जजमेंट
- 10:53खरीद ले खरीद लो भाई। यह रास्ते में तूफान बन के खड़ा
- 11:00है। अड़चन बन के खड़ा है।
- 11:01इसको रास्ते से हटा दो। हटा दो भाई कौन मना करता है?
- 11:12लेकिन रूठकर कहाँ जाइए। जहाँ जाइएगा।
- 11:22हमें हम बैठे आओ, कोई कोना नहीं शाबाशी में दम सर्वम या तो किनची
- 11:32जगती हम जगत जहाँ मैं नहीं हूँ। हो गया।
- 11:36ऐसी जगह असंख ना असंख ना तुमने रखे हुए हैं वहाँ जाओ कल्याण हो
- 11:44जाएगा वहाँ जाओ कल्याण हो जाएगा तो बाबा तुम्हें कहते हैं
- 11:50तुम्हारे बनाई तो बहुत से नाम हैं।
- 11:53जिसका कोई नाम नहीं उसके तुमने बहुत से नाम बना लिए और यह बात
- 11:59बड़ी हैरानी जनक है असंक थाव जो किसी एक थाव पे नहीं सर्वम जगतयाम
- 12:07जगत जो जगत के कण कण में व्यापक है वह वृंदावन में ही मिलेगा।
- 12:14ये पागलपन नहीं है, वो मक्का मदीना में ही मिलेगा, वह गंगासागर
- 12:20में ही मिलेगा। यह तुम्हारे पागलपन हैं।
- 12:29असंख ना प्रसंख था ये तुम्हारे रखे हुए हैं जिसका कोई नाम नहीं
- 12:35उसके असंख्य नाम रख लिए। और तुम नामों के झगड़े में दरवाजे
- 12:40को कभी खटखटा नहीं पाओगे महात्मा कहता है आह, वाह।
- 12:47जी देख के हमें तुम बोला। महोबच में तू ना ना हम खोसता हो
- 13:09आवा जिद के। हमें तुम बुला।
- 13:17आवाज़। नाम नहीं मोहब्बत में इतना।
- 13:25तुम बच्चे हो, मेरे और परमात्मा इंतजार करता है।
- 13:30दरवाजा खुला है, बस थोड़ा पुश कर दो।
- 13:35भीतर में बैठा। हूँ मोहब्बत में तू ना ना हमको
- 13:45सताओ आवाज देंगे। अगम असंख नाम असंखथाम अगम अगम
- 14:03असंखलो। ऐसे ऐसे तुमने लोक बना दिए सचखंड
- 14:09है, सतलोक है, स्वर्ग है, नरक है, कुम्भ ई पार्क है, जो है ही नहीं।
- 14:17तुमने ऐसे ऐसे काल्पनिक नाम बना दिए, ये कोई भौगोलिक क्षेत्र नहीं
- 14:24है, मैं सदा कहा करता हूँ। तुम्हारे चुटकी भरूंगा मैं तो
- 14:28दर्द यहाँ होगा या नर्क में जा के होगा और मैं चुटकी भरी तुम्हारे
- 14:36दर्द हुआ, मैं यहाँ भोगूंगा या नर्क में भोगूंगा।
- 14:44तुम भूखों को मैंने भोजन खिलाया, जैसे बाबा नानक ने खिलाया, भूख
- 14:51शांति हुई, तृप्त हुई, तुमने कहा जीते रहो, हम तृप्त हुए हैं,
- 14:57प्यासे को जल पिलाया तो तुम्हारी आत्मा यहाँ ठंडी हो जाती है, कभी
- 15:03दान करके देखना। जरूरतमंद को जैसे ही तुम्हारे हाथ
- 15:09सहायता के लिए बढ़ेंगे, तुम्हारे भीतर से एक शांत लहर उपजेगी और
- 15:14तुम्हारे तन बदन को रोम रोम को शांत कर जाएगी।
- 15:18तुम ज़रा आजमा के देख लो, ये बातें थ्रोटिकल नहीं हैं, ये
- 15:22बातें प्रैक्टिकल हैं। अगम अगम अशंखलो जो है ही नहीं ऐसे
- 15:33तुमने लोक बना रखे अशंख्या पता नहीं किस किस ने क्या क्या भेजा
- 15:38खराब है तुम्हें? अब सचखंठ कोई बाहर की जगह है जो
- 15:44मरते हुए को ये बेबानी करते हैं ये लोग अरे स्वाद तो तू आए तू
- 15:52जीते जी लेकर जा हमें सचखंठ में या फिर हम सचखंठ में जीते जी
- 15:58पहुंचते हैं? मैं तुम्हें कहता हूँ, इनकी
- 16:01बदमाशियों में मत आ जाना मैं तुम्हें जीते जी, सच कंडा में
- 16:06पहुंचाऊँ तुम करो क्रियायोग के चार घूँट भरो और देखो सुरूर आया
- 16:12कि नहीं आया और तुम ध्यान में कुछ न करने की स्थिति में बैठो।
- 16:18और देखो आनंद गहरा हुआ कि नहीं हुआ यही तो सच कण है बस इसकी बहु
- 16:25मात्रा बहु गुणित मात्रा जैसे जैसे होती जाएगी तुम गहरे उतरते
- 16:31जाओगे स्वर्ग तुम्हारे भीतर। और तुमने कोई पाप किया रात भर सो
- 16:41ना सकोगे। कतल करने वाला व्यक्ति पहले बेहोश
- 16:44हो जाता, कहता ठहर मैं थोड़ा सा एक बोतल शराब पी लूँ, बेहोश हो
- 16:50जाऊं क्योंकि होश करने नहीं देगी मुझको ये पागलपन।
- 17:00वह होश परमात्मा तुम्हें करने देता तुम कहते हो रोकता क्यों
- 17:04नहीं रोकता है भाई बड़े शोक से सुन रहा था जमन हम सो गए दास्तां
- 17:16कहते कहते हैं। वह रोकता है तुम ही नहीं तो शराब
- 17:23पी ली की उसकी आवाज सुनी ना हो रोकता है हर बार रोकता है जगह जगह
- 17:33पर रोकता है। उस स्थान पर जो पहुंचे उन्होंने
- 17:36पाया कि वह कम करता है। और फिर तुम हुक्म को मानते हो
- 17:47वहाँ बाबा जाके बोलते हैं हुक्म हुक्म अंदर सब को बाहर हुक्म ना
- 17:52कोई ना ना हुक्म जे मुझे। बाहों में कह न कुछ जो उस हुक्म
- 18:06को देख लेता है नगण आँखों से सुन लेता है अपने कानों से वो नहीं
- 18:11कहता कि मैं करता हूँ न न कहूँ कम, मैं ये बोझ है।
- 18:18जिसने अपने कानों से सुन ली उसकी आवाज़ को कम सुन लिया।
- 18:21वह नहीं कहेगा कि मैंने किया, वो कहेगा परमात्मा ने किया वह जानता
- 18:26है यह कोई शब्दों में लिखा लिखी की है।
- 18:29नहीं देखा देखी बात? अगम अगम असंख्य लोग उन्होंने बहुत
- 18:43से लोग बना लिए जहाँ जाया नहीं जाता और इन बीके वालों ने तो कमाल
- 18:50ही कर दी। एक वो है, बड़ा पागल है, वो दशरथ
- 18:55पड़े है। वो ऐसा उलझा हुआ कोपड़ा है मैंने
- 19:02उसको गौर से देखा तो मैंने गांठो के अलावा कुछ सिपाया ही नहीं सभी
- 19:08गांठ है, भरी पड़ी हैं, कोई गांठ खुली नहीं और रोज़ गांठ नहीं बाँध
- 19:15देता है। और फिर देखो उसको जो लाखों लोग
- 19:20सुनते हैं उनके दिमाग कैसे गांठों से विहीन हो पाएंगे और बातों
- 19:29गांठों के खोलने का है चले थे गांठें खोलें, सुन लिया दर्शन
- 19:35पटेल को। गांठें और गहरी हो गई गोल गांठ बन
- 19:40गई। यह खुलेगी भीड़ बीके को सुनने
- 19:45वाले अक्सर ही मूर्ख लोग होते हैं।
- 19:52अगाम अगाम असंख्य लोग देखिए अभी इसमें बाबा आते हैं, आते हैं।
- 20:03वह बंदा जो 250 सुंदर स्त्रियों को कराची से लेकर भागा और
- 20:10माउंटआबू चला गया। बदमाश वो बाबा बना बैठा आज।
- 20:15और वो आता है जीसको मरने के बाद नर्क क्या कुछ भी नहीं मिलता।
- 20:21जीवन भी नहीं मिलता, गर्व भी नहीं मिलता भौंकता भरता ही नहीं।
- 20:28मैंने 1000 बार देखा है जिसे तुम सिर्फ बाबा कहते हो, वो यही
- 20:32भौंकता भरता है, उसको गर्व भी नहीं मिलता।
- 20:35वो झूठ बोलेंगे उसको गर्व मिलेगा। अरे तुम बात ओर तरफ मत लेके जाइबो
- 20:42फिर उधर ही ले जाते हो जो झूठ बोलता है उसे गर्व नहीं मिलता, वे
- 20:51पुंडा फिरता है बाबा के शब्दों में।
- 20:54भौंकता भरता है, अगम अगम असंख लोग असंख के सिर पार हो बाबा कहते हैं
- 21:12इनके बारे में बातें करने से दिमाग भारी हो जाता है।
- 21:17असंख न असंख सामं अगम अगम असंख लो असंख कई सिर पार हो इनके असंख
- 21:27नामों का, असंख दामों का, असंख लोकों का।
- 21:33वरन करते बाबा कहते सर के ऊपर भार हो जाता है किस किस का नाम लूँ ये
- 21:42सब तुम्हें लूटते हैं कहाँ तक? नाम गिनवाएं।
- 21:54सभी ने हम को लूटा है सभी ने हम को लूटा है।
- 22:07तुम्हारे नर्क तुम्हारे स्वर्ग तुम्हारे सचकंड तुम्हारे सतलोक।
- 22:14क्या क्या बनाया है इसने तो पता ही नहीं क्या क्या बना दिया।
- 22:17दशरथ पटेल मेरा तो भेजा घूम गया जो बाबा कहते हैं असंख का कहीं सर
- 22:22पार हो घूम क्या भेजा ये रहा। गाँधी के आखिरी शब्द याद आए हैं
- 22:34ऐसा ऐसा लोग धर्म चलाते हैं असंख्य कहीं सर पार हो अखरी नाम
- 22:52अखरी सा लाश बाबा कहते हैं अक्षरों के साथ खिलवाड़ न करो।
- 23:02वह अखरा नालों वखर है, शब्दा तीर्थ है, अक्षरों से परह है,
- 23:10व्योंड वर्ग है शब्दों में आतन। तुम जिसका नाम जपते हो, वह
- 23:20अक्षरों में आता है, आखरी नाम आखरी साला तुम जो पाठ, पूजा,
- 23:27प्रार्थना जो फरियाद करते हो, वो अक्षरों की होती है।
- 23:40ध्यान से सुनें सबको अखरी नाम अखरी साला तुम शलागा करते हो उसके
- 23:49वो भी अक्सर हो तुम जो नाम जपते हो वो भी अक्सर हो।
- 23:56अखरी नाम अखरी साला अखरी ज्ञान गीत गुण गा अखरी ज्ञान जो तुम
- 24:09बांटते हो, लेन देन करते हो। क्यों तुम डिस्कशन करते हो,
- 24:25कन्वर्सेशन करते हो, अक्षरों के माध्यम से करते हो?
- 24:29मौन कन्वर्सेशन का तुम्हें कुछ पता ही नहीं है, तो ज्ञान को भी
- 24:34तुम अक्षरों से ही बांटते हो? आखिरी नाम।
- 24:38आखरी शाला, आखरी ज्ञान गीत गुण गाह तुम गीत गाते हो वो भी
- 24:46अक्षरों में गुणों का तुम उसका प्रसार करते हो, उच्चारण करते हो?
- 24:57सलाहधार करते हो, वो भी अक्षरों में करते हो किसके जो अक्षरों से
- 25:11पार कैसे पहुंचेगा? बाबा नानक?
- 25:20नहर में से पानी निकाल निकाल के बाहर फेंक रहे थे तो किसी ने पूछा
- 25:27क्या कर रहे हो बाबा? उसने कहा दिमाग खराब हो गया था।
- 25:31बाबा कहते हैं मैं अपने खेतों को पानी दे रहा हूँ।
- 25:39हँसा, थोड़ा सा ज़ोर से नहीं हँसा, शक हो जाए, झगड़ा हो जाएगा
- 25:48लेकिन बाबा कहाँ झगड़ा करने वाले थे?
- 25:51शांतमति परमात्मा करूँ। मैं अपने खेतों को पानी दे रहा
- 26:01हूँ, थोड़ा संकोच वश पूछा बाबा ये पानी तुम्हारे खेतों में जाएगा
- 26:09कहाँ? पानी तो बहुत दूर है, जहाँ
- 26:12तुम्हारे खेत कैसे पहुंचेगा कहता फिर तुम यहाँ सूरज को जल देते हो?
- 26:19सूर्य का कैसे पहुंचे? तुम्हें पता है सूरज का तापमान
- 26:23कितना है? पानी तो 100 डिग्री पे बन जाता
- 26:26है। सूरज का बाहरी लेयर का तापमान
- 26:295000 डिग्री सेल्सियस है। वहाँ जाते जाते पानी बचेगा।
- 26:40बाबा कहते हैं तुम ऐसे पाखंड करते हो अखरी नाम अखरी साला अखरी ज्ञान
- 26:49गीत गुण का अक्षरों में ये लिखते हो अक्षरों में बोलते हो अखरी
- 26:56लिखण बोलन बाण। अखरा सर संजोग बखान अब आइये बात
- 27:07आखरी लिखन बोलन बानी, बानी भी अक्षरों में लिखी जाती है भाई मैं
- 27:14बोलेंगे तो मौन तो तुम समझे ना पाओगे, मेरी मत बोलिए।
- 27:20अक्षरों के द्वारा ही तुम्हारे साथ कन्वर्सेशन हो सकेगी।
- 27:27बिना अक्षरों के मौन तो तुम समझ नहीं पाओगे मौन तो बुद्ध हैं क्या
- 27:31समझोगे तुम? मौन मूर्ति से तुम क्या शिक्षा दे
- 27:37सकते हो? तुम्हारे मंदिरों में मौन मूर्ति
- 27:41हैं, हमको शिक्षा ले सकते हो उससे नहीं, बस हाथ जोड़तें हो, दंडवत
- 27:46होते हो, मूर्ति ना तुम्हारे दंडवत को देखती है ना तुम्हारे
- 27:50हाथ जोड़ने को देखती है, तुम सर्कस करते हो, चले जाते हो।
- 27:55और नजाने क्या क्या सरकस करते हो। हमारे में एक भक्त होता था।
- 28:01यह माता के दरबार में आता प्रणाम करके वापस लौट जाता, लेकिन पीठ
- 28:06नहीं करता था। ऐसे ही ऐसे वापस मुँह माता की तरफ
- 28:11कई बार तो टकरा भी जाता तो लड़ाई झगड़ा भी हो जाता।
- 28:17वो कहता यार तू पीछे आवके लगवा ले उल्लू के पट्ठे कितने लोगों को
- 28:22तुमने फ्रेश शेयर कर दिया? ऐसे उल्टा उल्टा क्यों चलता है जब
- 28:30भगवान ने आँखें आगे दी हैं? तू मुर जा कहता नहीं है माता को।
- 28:36माता को पीठ नहीं दिखाना नहीं तो फिर तू पीछे आंखें लगवा ले उल्लू
- 28:42के पट्ठे पीछे आँखें लगा लो लग जाएंगे तो जाके पूछ ले सर्जन से
- 28:52लगा देंगे। आज कल नकली क्या कुछ नहीं लगता
- 28:55नकली विकास हो जाता है नकली अच्छे दिन आ जाते हैं नकली ऐम जो बन
- 29:03जाते हैं नकली काला धन आ जाता है सब नकली नकली ही तो हो रहा है
- 29:10असली क्या है? नकली गद्दियाँ मिल जाती हैं, नकली
- 29:15नाम हो जाते हैं नकली डंक के बच जाते हैं नकली सब कुछ हो जाता है
- 29:21भाई पीछे आंख भी लग जाएंगी तू जाके किसी सर्जन से कंसल्ट कर ऐसे
- 29:26लोगों को फ्रैक्चर मत कर कोई बूढ़ा व्यक्ति लट्ठ लेके आ रहा है
- 29:29उसको दिखता कम। कितनों को तुमने जख्मी कर दिया?
- 29:35तेरी इस माता भक्ति ने कितने लोगों को जख्मी कर दिया?
- 29:42लेकिन वो था के मनपान वो कहता माता को पीठ नहीं दिखा।
- 29:57ऐसे ऐसे वक्त बैठे हैं तो बाबा कहते हैं अगर मैं वाणी को भी
- 30:01बोलूं लिखा मैंने वाणी को भी यह भी अक्षरों में लिखा भाई, अखरी
- 30:12लिखन बोलन वाणी वाणी को तुम पढ़ोगे तो लिखी हुई को पढ़ोगे।
- 30:21तुम बोलोगे, वाणी को मैं बोलेंगे तो अक्षरों में ही बोलेंगे।
- 30:26अखरा सर संजोग बखा क्या बात है? लेकिन अक्षरों का संबंध बुद्धि से
- 30:33है अब यहाँ पर बात को जोड़ लेना। अखरा सिर संजोग बखान अक्षरों से
- 30:43मैं बोलेंगे अक्षरों से तुम वार्तालाप करोगे अक्षरों से तुम
- 30:47कॉन्वर्सेशन करोगे अक्षरों से तुम बहस करोगे और अक्षरों का।
- 30:58आखिरी सर संजोग बखान। अक्षरों का संबंध बताया जाता है
- 31:05बुद्धि और बुद्धि परमात्मा तक पहुँच नहीं सकती।
- 31:15अखरे सिर, संजोग, बखान, अक्षरों का संबंध सिर के साथ, बुद्धीक के
- 31:23साथ अक्षरों से मैं बोलता हूँ मजबूरी अक्षरों से बानी लिखता
- 31:31हूँ। मजबूरी है लेकिन ध्यान रखना ऊपर
- 31:34से जो आता है वो अक्षरों में नहीं आता, ऊपर से आती है सब फुरना
- 31:41अक्षरों में तो तुम्हारी बुद्धि तब्दील करती है, उसे तुम अपनी समझ
- 31:45के अनुसार तब्दील कर लेते हो। अखरासर, संजोग, बखान सब वक्षरों
- 31:56की देन तुम्हारे नाम तुम्हारे धाम, तुम्हारे लोग हैं कुछ नहीं
- 32:03ये परमात्मा का इनसे कोई भी समन्ध नहीं है तुम इस से बुद्धि।
- 32:08के द्वारा पहुंचना चाहते हो और बुद्धि के द्वारा पहुंचा नहीं जा
- 32:13सकता। बाबा कहते हैं, बुद्धितवर्चन है
- 32:17तुम इसके द्वारा इसको वाहन बनाना चाहते हो तो अक्षरों के द्वारा
- 32:23तुम नहीं पहुँच सको। के बाबा कहते हैं अखरा सर संजोक
- 32:26बखान। अब ये शब्द जो आ गया आएगा, यह
- 32:32वाणी के उन कठिनतन शब्दों में से एक है क्या जिन ए लिखे जो अक्षर
- 32:45जिसने लिखे जिसने लिखे बाबा ने लिखे?
- 32:51थिस शेर नाम उसके शेर की ये खोज नहीं है जिन ए लिखे थिस शेर नाम
- 33:01उसकी बुद्धि की ये खोज नहीं है तो फिर क्या है?
- 33:05लिखा था बाबा ने। गौ से समझना जीन ए लिखे तेसे शरना
- 33:13जिसने ये लिखे उसकी बुद्धि की उपज नहीं है जो उपज किसकी है?
- 33:17जब फरमाए ते ते। ऊपर से सफरना आई है जैसे सफरना
- 33:25उसने की। मेरे अंतः समय मेरे प्राणों में
- 33:31वैसे वैसे मैंने अपनी समझ के अनुसार लिख दिया वहाँ से शब्द
- 33:37नहीं आते। वह शब्दातीत है, ना शब्द जाते हैं
- 33:43वहाँ ना शब्द वहाँ से आते हैं। तुम्हारे शब्दों की कोई भी, किसी
- 33:49भी प्रकार की अरदास से वहाँ पहुंचते नहीं वहाँ पहुंचती है
- 33:58पुकार शब्द नहीं पहुंचते अरदास नहीं पहुंचते।
- 34:04इसलिए अरदास न किया करो, पुकार किया करो बाबा कहते हैं जिन ए
- 34:12लिखे तिस शरण न जे फुरमय ते ते पापा जैसे जैसे वो बोलता क्या?
- 34:19पूरी वाणी 38 पूरी लिखी। वैसे वैसे लिखता चला गया, मेरे
- 34:26नहीं दिखा। मेरी बुद्धि की करामात नहीं है।
- 34:30तृतीय से रहना उसकी बुद्धि की करामात नहीं है।
- 34:35यह तो वहाँ से आई हुई ऊपर से सच गड्ड की वाणी है।
- 34:39गगन मंडल की आई हुई वाणी है जो ऊपर से।
- 34:41सुफोरित हुई है बरसी जब फॉर माय तेब तेब वाह वैसा वैसा लिख दिया
- 34:50मैंने, मेरे इसमें कुछ नहीं निर अहम्कारी व्यक्ति की पहचान।
- 35:00तुम तो थोड़ा सा किसी का भला हो जाए तो तुम छाती ठोकने लगते हो कि
- 35:04मैंने लिया झंडी दिखाने लगते हो। चाहे चंद्रयान तीन वैज्ञानिक को
- 35:11नहीं पहचाया हो लेकिन जब तो वो नहीं पहुंचेगा, चंद्रयान दो फिर
- 35:16तो तुम आओगे नहीं। जब चंद्रयान तीन पहुंचाएगा तुम
- 35:20झंडी लेकर आ जाओ तुम भूखे हो तुम प्यासे हो मान सम्मान इज्जत के जो
- 35:33यही धरा रह जाता है शरीर धड़म से गिर जाता है और उसके संग संग।
- 35:41सब चला जाता है भूल जाते हो उसको कमाने में सारा जीवन तुम व्यतीत
- 35:47कर देते हो तुमसे बड़ा मूर्ख कोई होगा इसलिए बाबा तुम्हें मूर्ख
- 35:56कहती हूँ। चोर कहते ना हरामखोर, कहते ना
- 36:04केत्ते मूर्ख अंत को केत्ते चोर हरामखोर ऐसी गाली सुनी एम् बाबा।
- 36:20अब है अंदाज में बोलते हैं कितने मूर्ख अंध को हो तुम अंधे हो तुम
- 36:31मूर्ख हो तुम्हें दिखता नहीं तुम वो इकट्ठा करते जो संघ नहीं
- 36:35जाएगा। संघ जाएगा आनंद।
- 36:38उसको चूक गए हो। पदार्थ को इकट्ठा करने में,
- 36:42परिवार को पालन पोषण करने में तुम अंधे हो गए हो।
- 36:49तुम ये नहीं जानते के जो कमाया वो संग नहीं जाएगा।
- 36:52तुम्हारा शरीर भी तो संग नहीं जाता।
- 36:56कपड़ों की बात छोड़ो, शरीर भी तो साथ नहीं देता कितने मूर्ख अंदखोर
- 37:03कितने चोर हरामखोर, कितनी गाली निकालते हैं?
- 37:06हमारे ऊपर ज़रा कोई प्रभाव नहीं पड़ता बाबा आते हैं डेफिनिशन पे।
- 37:16तो नाम क्या है? बाबा कहते हैं यह जो नाम जिसमें
- 37:23डिस्कॅशन की है जिसमें कॉन्वर्सेशन की है दट, इस नॉट
- 37:28नॉर्म कम करते रहो मिलेगा कुछ राधे राधे करो वेगुरु वेगुरु करो।
- 37:36गॉड अल्लाह ईश्वर कुछ भी करो राम रहीम कुछ भी करो कृष्णा कुछ भी
- 37:43करो नहीं मिलेगा वो मिलेगा कैसे तो नाम की व्याख्या करते हैं
- 37:49देतता कितता तेतता नाम परमात्मा ने ये जो सारा पसारा किया।
- 37:57बस वो नाम ही है उस सारे पसारे के संग जुड़ जाना ही मुक्ति है तुम
- 38:08उसके साथ तो जुड़ते नहीं, तुम तो पदार्थों के साथ जुड़ के उन्हें
- 38:11कमा लेते हो। तो पापा कहते हैं पदार्थों को
- 38:16कमाना नहीं है, पदार्थों से जुड़ना है, योग करना है ये इतना
- 38:22कितना कितना नाम, ये सारा पसारा जो कित्ता है परमात्मा का, वो नाम
- 38:29है तुम नाम कमाते हो। नहीं नहीं, इन्सर्ट यूरसेल्फ़ इन
- 38:35नाम कंप्लीटली नाम में तुमने खुदकुशी कर देनी है समझे शरीर में
- 38:45खुदकुशी मत कर देना फिर? तेता कित्ता तेता नाम इन्सर्ट
- 38:50कंप्लीट्ली यूरसेल्फ़ इन नाम नाम राधा हो, नाम कृष्ण हो, वह गुरु
- 38:56हो, अल्लाह हो, कुछ भी हो, तुम्हे राजनीतिज्ञों की तरह नफरत फैलाने
- 39:03की चेष्टा को छोड़ दो, सत्य की तरफ आ जाओ।
- 39:08तो कुछ यहाँ से कमा के जाओगे अन्यथा तुम गंवा के जाओगे फिर ये
- 39:16जीवन बी गया। इससे पहले के जीवन बीत गए, काफी
- 39:22बीत गया, गनी गई, थोड़ी रही वो अभी बीती जाए।
- 39:31अब संभल जाओ, अब जाग जाओ। जैसे ही सुबह हुई आँख खुली तभी
- 39:38सोया हुआ। जेता तेता तेता ना बिन ना ही कोठा
- 39:45कोई ऐसी ठाणे। कोई ऐसी था में गटर में भी वो है
- 39:51स्वर्ग में भी वो है नर्क में भी वो है सचखंड में भी वो है, सतलोक
- 39:56में भी वो है, तुम्हारे भीतर भी वो है, बाहर भी वो है, वो ही वो
- 40:00है वो ही वो है ईशा वास्य में दम सर्वम कौन सी ऐसी जगह जो वहाँ
- 40:08नहीं है वो सभी जगह है? वो तो बाबा नाम की डेफिनिशन देते
- 40:18हैं, के शब्दों का नाम जो मैंने कहा, कन्वर्सेशन के लिए दट इस नॉट
- 40:23नाउ पसारा। जो समस्त जगत में फैला हुआ दट।
- 40:28इस नाम उसके साथ जुड़ना है। उसको जपना नहीं है।
- 40:34नॉट टु रिपीट बट टु इन्सर्ट खप जाना।
- 40:40उसमें भस्मी भूत हो जाना पर वाणी की तरह।
- 40:45क्षमा में बसमा जाना है, जीतता सीखता तिकता नाव बीन नावे, ना ही
- 40:52कोटा कोई जगह नहीं है कोई जगत, जगत जगत सारे जगत में वही व्याप्त
- 41:04है। सारा पसारा वो ही तो है, जड़ है
- 41:08या चेतना, खुशबू है या दुर्गंध है, अच्छा है या बुरा है वो ही है
- 41:17उसके पार को शैतानी शैतान भी वो ही है।
- 41:22सज्जन भी वो ही है, डाकू भी वो ही है, दानी भी वो ही है, उसके सिवा
- 41:28कोई कुछ नहीं। नथिंग इस बियॉन्ड हिम कुदरत कवन
- 41:35कहा विचार? परमात्मा को यहाँ कुदरत के नाम से
- 41:41किताब करते हैं हम बाबा कुदरत कवन कहा विचार कुदरत को मैं कैसे
- 41:49व्याख्यान करूँ के सब हाथी व्याख्यान करूँ, व्हाट्स दी वे टु
- 41:55डिस्क्रैप व्हाटस टु व्हाटस दी वे टु एक्सपोनेंट?
- 42:01कुदरत कवन कहा विचार इस कुदरत का, उसकी बनावट का, उसकी सर्जना का,
- 42:14उसके कृत्य का। उसकी प्रकृति का, उसकी कुदरत का
- 42:20मैं भगवान कर सकूँ वारयाना जामा एक बार कुदरत कबन कहा विचार
- 42:29वारयाना जामा, एक बार मेरी तो इतनी हसीत नहीं।
- 42:34कि मैं उसके ऊपर एक बार भी बलिहार हो जाऊं।
- 42:37मैं इतना नाचीज़ मैं इतना सूद्र मैं इतना छोटा कि उसके ऊपर एक बार
- 42:43भी बलिहार हो जाऊं, मैं ऐसा नहीं मेरा कुछ भी नहीं है।
- 42:48कहने का मतलब ये है आई ऍम नथ्थिंग।
- 42:55बाबा कहते हैं मैं हूँगा तो कुरबान होगा, मैं कब कब मिटचुरा
- 43:06जब नदिया के किनारे नदी में पांव। बैठे थे और नदियां में ही उतर गए।
- 43:16घटना घटी संबोधित की। मैं तो उस दिन ही विदा हो गया।
- 43:22मैं मारने के लिए रहा नहीं आई ऍम नॉट ए प्रेसेंट नाउ।
- 43:30मैं वो मौजूद नहीं हूँ। मैं उस दिन विदा हो गया, रुखसत हो
- 43:34गया। उस दिन मैं कुदरत गबन कहा विचार
- 43:41वार है ना जावा, एक बार मेरी कोई हैसियत ही नहीं है मैं हूँ ही
- 43:45नहीं जो बलिहार हो जाऊं तेरे ऊपर। क्या प्यारी बात है बलिहार होने
- 43:52के लिए भी तो तुम्हारा होना जरूरी है।
- 43:55समर्पण होने के लिए भी तो तुम्हारा होना जरूरी है।
- 43:58कौन समर्पण होगा? तुम हो ही नहीं तो समर्पण क्या
- 44:02होगा? तो बाबा कहते हैं, मैं तो समर्पित
- 44:05हो चुका भाई मैं तो बलिहार हो चुका भाई।
- 44:08वाहिया ना जाऊं? एक बार मैं तो एक बार भी अब और
- 44:12समर्पित नहीं हो सकता, क्योंकि बचा ही नहीं है।
- 44:14आई ऍम नथ्थिंग, मैं हूँ ही नहीं जो तो दफा है साईं पालिका अब तो
- 44:24ऐसी दशा हो गई है। अब तो ऐसा हो गया है तेरा पाणा
- 44:32मीठा लगता है साईं पलिक जो तू करता है ठीक करता है क्योंकि मैं
- 44:40तो है ही नहीं, मैं तो इतना भी नहीं बचा कि तेरी शरण में आ जाऊं
- 44:45आएगा तो? भगवान कृष्ण कहते हैं, सर्व द्रवण
- 44:49प्रत्यक्ष माँ मैं काम शरणं ब्रज। लेकिन बाबा कहते हैं शरणं ब्रज
- 44:54आएगा कौन? मैं हूँ ही नहीं जो समर्पण करूँ
- 44:59मैं बच्चा ही नहीं, मैं तो खो गया उस दिन जीस दिन।
- 45:05संबोध ही लगे 3 दिन तक बाबा खोए रहे।
- 45:10कहानी है ढूंढा नहीं मेरे 3 दिन बाद अचानक प्रकट हो गए यह कहानी
- 45:16है जो संबोधि की घटना थी। 72 घंटे के बाद व्यक्ति बाहर आता
- 45:22है। संबोधि की घटना के 72 घंटे के बाद
- 45:27बाहर आता है। मैं आपको बताया करता हूँ कि
- 45:32संबोधि के बाद 72 घंटे ऐसे बीते जिनकी याददाश्त नहीं, मैं सूअर से
- 45:39गले मिला, मुझे बताया गया। कि तुम सूअर से गले मिले लिपड़ा
- 45:46तिब्डा, सूरज और सूअर गंदगी में से निकल के आए नाली में बैठता
- 45:52गटर, पास्ता और तुम उससे गले मिले।
- 46:03वो 3 दिन वो 72 घंटे मुझे नहीं पता उसकी कोई स्मृति नहीं है मेरे
- 46:09भीतर मैं अक्सर ही अपनी जिंदगी के ये लम्हे बोला करता हूँ वो ही 3
- 46:15दिन 72 घंटे। साईं बाबा कहते हैं चले गए, शरीर
- 46:20छोड़कर चले गए। कहते हैं 72 घंटे में अगर मैं
- 46:24वापस ना जाऊं तो शरीर को दुबहन कर देना, जला देना जैसा चाहूँ कर
- 46:30देना शरीर का क्या है माटी? लेकिन 72 घंटे के बाद आ गए।
- 46:38ये 72 घंटे बड़े कीमती हैं। संत अगर चला जाए तो देखना तुम्हें
- 46:45पता तो है, हम दोनों अंगूठे बांध देते हैं क्यों?
- 46:52क्योंकि अंगूठों के बांधने से अगर कोई उस घर की औरत कोई स्त्री या
- 46:57के पांव को छुएगी। श्रद्धा बस।
- 47:01अंत बिदाई देने के लिए तो स्त्री जब अंगूठों के हाथ लगाएगी तो अगर
- 47:06वह गया होगा तो बाहर तो वापस आ जाएगा।
- 47:09इसका मतलब यह था नेगेटिव पॉज़िटिव बढ़ गए तो आदमी है तो स्त्री पांव
- 47:16को छूए स्त्री है तो आदमी पांव को छूए।
- 47:21लेकिन आज कर्मकांड रह गए, लेकिन कर्मकांड भी कीमती हैं, इनको भी
- 47:27बचा के रख लेना थोड़े थोड़े जो अर्थ आपको बता रहा है, ये अर्थ
- 47:32संजोय रखना। लेकिन इन चीजों को बचा लेना बात
- 47:36तो चीजों की है। इन कांडों को बचा ले ना कर्म
- 47:39कांडों को बचा ले ना बड़ी कीमती है ये और इन कर्म कांडों ने गलत
- 47:45कर्म कांड पैदा किये बस वो ही गलत है वार है ना जावां एक बार जो तो
- 47:53तो पावे साईं पलिका। तो सदा सलामत निरंक हम चले जाएंगे
- 48:04तो शेष रहेगा आज सच जुगाद सच है भी सच नानक होश तो सदा सच है
- 48:13रहेगा था और है। हम नहीं है।
- 48:21तुझसे लिपटके जोरो लेते हम आंसू। नहीं थे।
- 48:36जब मौत से कम तुझसे लिपटके जो रो लेते हम।
- 48:51आंसू नहीं थे जमौती से कम मेरा दामन नहीं।
- 49:09तेरा दामन में आंसू डले भी तो क्या है तेरा दामन में?
- 49:27ये आंसू डले भी तो क्या है? 111 तोना मिला।
- 49:44तू ना मिला तू ना मिला सारी दुनिया मिले भी तो क्या है मेरा
- 50:00दिल? खिला मेरा दिल ना खिला सारी बगिया
- 50:14खिले भी तो क्या है एक सोना? महिला।