Latest / Baba ji Vijay Vats / 11/3/26 - ब्रह्माकुमारी और सकारात्मक सोच के पीछे का मानसिक मनोविज्ञान। संतो की कब्र के पास बैठने से?
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- 0:11कुमारी शीला, ब्रह्मकुमारी बाबा जब से मैंने आपको सुनना शुरू
- 0:21किया। है।
- 0:25किसी को सुनना अच्छा लगता है। ब्रह्मकुमारी तथा अन्य धार्मिक
- 0:35संस्थाओं यह कहती हैं कि तुम 21 दिन तक लगातार जब सुबह उठो ब्रह्म
- 0:45मुहूर्त में। जब तुम बिलकुल तरोताजा हो तो तुम
- 0:53सोचो किस संसार में मेरे से बड़ा भाग्यशैली कोई भी नहीं।
- 1:06धरती पर सबसे ज्यादा भाग्यशाली मैं और उसको दोहराओ, धरती पर सबसे
- 1:16ज्यादा भाग्यशाली व्यक्ति में धरती पर सबसे ज्यादा भाग्यशाली
- 1:23व्यक्ति में। इसकी एंटायर साइकोलॉजी की चीर फड़
- 1:34करके हमें समझाइए कि यह क्या है? यह एक मानसिक रोग है, पुत्र।
- 1:46जिसे शीजोफ्रेनिया कहते है। ज़रा ध्यान से समझो आज हर दूसरा
- 1:59व्यक्ति। सीजोफ्रेनिया की बिमारी से ग्रसित
- 2:08और यह संभव ऐसे ही प्रचारकों के कारण हुआ, जो पांच नाम देते हैं,
- 2:16जो नाम जप देते हैं, जो कहते हैं। के सोचो विश्वास करो, मान लो, ऐसे
- 2:33ही लोग धारणा बना देते हैं तुम्हारे यहाँ।
- 2:39सीजोफ्रेनिया रोग में क्या होता है?
- 2:44तुम्हारा मस्तिष्क डिवाइड हो जाता है दो भागों में एक तार्किक, एक
- 2:52अतार्किक, धीरे धीरे। तार्किक मन अतार्किक में बदलना
- 3:03शुरू हो जाता है। पहले पहले वो संदेश उठाता है
- 3:09लेकिन धीरे धीरे धीरे धीरे दिमाग अपने आप को व्यवस्थित कर लेता है।
- 3:16यह प्रणाली ऐसी है ईश्वर्य प्रणाली है।
- 3:26एक लड़की किसी चमार के घर में ब्याही गई थी जो चमड़े का काम
- 3:32करते थे। चमड़ा रंगते, दीवारों पे फेंक
- 3:38देते। चमड़ा सूख जाता, तो जब नई नई गई
- 3:47तो वह आकर कहने लगी माता तुने मुझे कैसी जगह पे विवाह कर दिया
- 3:57क्यों पुतरे? वह बदबू बड़ी आती है।
- 4:02अच्छा कोई बात नहीं धीरे धीरे ठीक हो जाएगा।
- 4:12उसने अपनी सासु माँ से भी शिकायत की।
- 4:14बदबू पड़ी आती है। उसने कहा कोई नहीं पुत्री ठीक हो
- 4:19जाएगा और थोड़े से दिनों में ठीक भी हो गया तो वह लड़की बोली माँ
- 4:30सासु माँ देखो मैं कितनी खुशी नसीब हूँ मैं वो खुशी नसीब
- 4:35व्यक्ति हूँ। धरती पे मेरे जैसा भाग्यशाली
- 4:39व्यक्ति ही नहीं है, बस यहीं से उपजता है देखो मैं कितनी खुश नसीब
- 4:46हूँ के मैं क्या आई तुम्हारे मोहल्ले की बदबू है उठ के।
- 4:58जब मैं नई नई आई थी तो यहाँ पर बड़ी बदबू आती थी और मैंने अपनी
- 5:05माता से शिकायत रखी थी। उसने कहा था कोई नहीं पुत्रे धीरे
- 5:11धीरे ठीक हो जाएगा। लेकिन इसका श्रेय मैं अपने ऊपर
- 5:19लेती हूँ क्योंकि मैंने तो कुछ किया ही नहीं और आज सारे मोहल्ले
- 5:29में। मैं चक्कर काट लेती हूँ कहीं भी
- 5:34दुर्गंत नहीं आती, मैं कितनी भाग्यशाली हूँ ऐसे ही 1 दिन तुम
- 5:42भी भाग्यशाली हो जाओगे वह लड़की। अपने मायके लौटी बोलीं माता मुझे
- 5:56तुने बताया क्यों नहीं? मैं इतने शानदार मुहूर्त में
- 6:00जन्मी कि जहाँ गई वहाँ की बदबू ही खत्म हो गई।
- 6:06माता पुत्री का। सिर सहला की बोली बेटी, सत्य तो
- 6:12यह है कि तेरा नाक मर गया। सूंघरे की क्षमता खत्म हो सुंघरे
- 6:19की क्षमता से दिमाग के उस रिश्ते ने कॉम्प्रोमाइज़ कर दिया।
- 6:25अब तुम्हें दुर्गंध, दुर्गंध जैसी नज़र नहीं आती।
- 6:31यह है साइंटिफिक का कहान। हमारा तार्किक मन धीरे धीरे
- 6:38अतार्किक होता जाता है। इसे ही अंधभक्ति कहते हैं।
- 6:42इसे ही मंदबुद्धि कहते हैं। फिर आप जीस व्यक्ति के प्रति
- 6:48निष्ठावान हो गए उचा ही माम् आप कहो कि बाबा है तो मम मोदी है तो
- 7:01मुश्किल है। लेकिन देखो ना तो बाबा है तो
- 7:07मनकिन है ना? मोदी है तो मुश्किल है ये बात
- 7:11तुम्हारा खेल तुम्हारे मन का है सारा और तुमने पूछा पुत्र।
- 7:18मुझे साइंटिफिक रूप से समझाइए क्योंकि मैं खुद ही एक साइंटिस्ट
- 7:22हूँ तो फिर तुम अच्छी तरह से जानती हो।
- 7:29दिमाग अपने आप को व्यवस्थित कर लेता है, सर्कमस्टैंसेस के
- 7:36अनुरूप। यह ऑटोमेटिक व्यवस्था है प्रकृति
- 7:41की लेकिन हालात नहीं बदलते हैं। क्या बदलता है?
- 7:57हालात नहीं बदलते, सर्कमस्टैंसेस नहीं बदलते, बदलती है तुम्हारे
- 8:02चित की वृत्ति तुम्हारी चित की वृत्ति अभ्यस्त हो जाती है।
- 8:10वो कहती ठीक है, ठीक ही होगा। फिर धीरे धीरे कहती है कि ये ठीक
- 8:16है, फिर तुम अंधभक्त हो जाते हो? तुम कहते हो, ये ही ठीक है।
- 8:21कैसे? अंधभक्त पैदा होते हैं ये
- 8:24साइंटिफिक डेफिनिशन समझा रहा हूँ मैं तुम्हे।
- 8:34जो लोग कहते हैं ऐसी एक संस्था नहीं है बर्बाद गुलस्ता करने को
- 8:44बस एक ही उल्लू का फ़ेथ बर्बाद गुलस्ता करने को।
- 8:51बस एक ही उल्लू का फीता हर्षा पे उल्लू बैठा है अनजाने में गुलस्ता
- 9:00क्या हो जहाँ जाओ वहाँ यही कहते हैं राधे राधे जप लो राम राम जप
- 9:06लो पांच नाम जप लो। सुबह उठ के सोचो कि मेरे जैसा
- 9:11भाग्यशाली कोई है, हालात बदल जाएंगे, नहीं बदलेंगे, तुम्हारी
- 9:20चित्त की दशा बदल जाएंगे। हालात तुम्हारे बदलने से बदलते
- 9:26नहीं। सर्कमस्टैंसेस वही रहेंगे, लेकिन
- 9:31तुम्हारी चित्त की वृत्ति बदल जाएगी और चित्त की वृत्ति बदलने
- 9:37से हालात नहीं बदला करते। तुम गधे को अरबी घोड़ा समझना शुरू
- 9:45कर दो कर दो। लेकिन यह सत्य नहीं होगा,
- 9:50तुम्हारा दिमाग रिपीट करेगा। यह अरबी घोड़ा है, यह अरबी घोड़ा
- 9:56है, यह बड़ा तेज़ दौड़ता है। इसकी रफ्तार हवाओं को मात दे देती
- 10:02है। यह अरबी घोड़ा है और 1 दिन तुम
- 10:06मानने लगोगे। यह गदा ही अरबी घोड़ा है जो हमारे
- 10:11देश की इतनी शानदार व्यवस्था को चला रहा है।
- 10:15अच्छा दिन आ तो गए, तुम्हे दिखते क्यों न हो?
- 10:25बस धीरे धीरे सब ठीक हो जाएगा पुत्र।
- 10:30तुम ऐसे ही चलती रहो अगर हालात ठीक करने हैं तो पुत्री यू विल
- 10:42हैव टू ट्रांसफर यूरसेल्फ़ तुम्हें अपने आपको बदलना होगा
- 10:48तुम्हें अपने। लेवल को यहाँ से कहीं और लेके
- 10:53जाना होगा। यहाँ तो बदबू है, गटर है और गटर
- 10:59बदबू देता है। सारे शहर की बदबू यहाँ से गुजरती
- 11:04है और तुम इसी के किनारे पे खड़े। 1 दिन तुम्हारा नक मर जायेगा,
- 11:10सूंघने की शक्ति समाप्त हो जाएगी, घ्राण शक्ति समाप्त हो जाएगी।
- 11:21फिर तुम कहोगे देखो मेरे से भाग्यशाली वाक्य ही कोई नहीं तुम
- 11:26पागल हो गया। तुम्हें मानसिक रोग हो गया है,
- 11:33जिसे सीजो फ्रेन्ड ये कहते है, तुमने कहा कुतरी साइंटिफिक रूप से
- 11:41व्याख्या करो तो यह बैठा है, तुम चाहो तो इन पागलों में रह सकती
- 11:47हो। मुझे कोई एतराज नहीं मेरे क्या
- 11:51बिगाड़ती है मैं मौज में हूँ, आनंद में हूँ मैं तो सिर्फ देखता
- 12:03रहता हूँ दुखी लोगों के लटके हुए चेहरे।
- 12:13दुखों से आँखों से बहते हुए अश्क निहारता हूँ और जानता हूँ कि ये
- 12:23खुद को बदल नहीं पायेगा। यह फिर सुबह उठ के ब्रह्म मुहूर्त
- 12:32में जब बिल्कुल तरो ताजा होते हो तो चीजें गहरी उतरती हैं, क्योंकि
- 12:36सारी रात भर की ताजगी सुबह सुबह का सोचा हुआ।
- 12:44सत्य नहीं होता, कल नहीं बदलता, हालात नहीं बदलते चित दशा बदल
- 12:54जाती है। यही कहा पतंजलि ने योगा
- 13:00चित्तवृत्ति नरोधा। बस चित्तवृत्तियाँ बदल जाती।
- 13:09हैं। हालात नहीं बदलते, बीके हो ये सब
- 13:21ठग है मैंने कहा चोर है लुटेरे। ये कैसे हो सकता?
- 13:28है। जब तक ब्रह्मचर्य सदान हो, बम
- 13:36ब्रह्मचर्य परिपको ना हुआ तब तक कोई व्यक्ति माल उड़ाता रहे।
- 13:46सेठों के चंदे से बढ़िया बढ़िया माल खाता है।
- 13:50खराब कौन खाना चाहता है और फिर वो ब्रह्मचारी बनने का नाटक करता है।
- 13:57साइंटिफिकली इट इस नट पॉसिबल है। क्योंकि प्रोसेसिंग के जरिए रस,
- 14:07रक्त, मांस, मज़ा, हड्डी, खून सब बनेगा वीर्य भी बनेगा।
- 14:21वीर बनेगा। वीरे को ओज में प्रवर्तित करने की
- 14:25कला तुम्हें आई नहीं यानी ब्रह्मचर्य तुम्हारा साधानी तुमने
- 14:30दबा लिया या तुमने नकली नकली चेहरे पैदा कर लिए, दिखला के देख
- 14:37मैंने घरवाली छोड़ दी। देश की रक्षा के लिए, देश प्रेम
- 14:42के लिए, लेकिन रात को शाखाओं में क्या होता है?
- 14:46ज़रा सीसीटीवी कैमरे लगा दो तुम्हें घुसड़ मुसड़ होती हुई
- 14:54लगेंगी साफ। प्रकृति को हराने की चेष्टा करते
- 15:01हो, नकली नकली तरीकों से पृष्ठ के फूल ले आते हो, नकली इतर छिड़क
- 15:08देते हो देखो प्रकृति के गर्भ से नहीं निकला ये हमने बनाया है इसकी
- 15:17सुगंध चखो। ऐसे ही भरमाते हैं लोग तुम्हें और
- 15:25तुम्हारी नाक अभ्यस्त हो जाती है तुम कहते हो हाँ यही सुगंध असली
- 15:30है, नहीं पुत्री, यह मानसिक क्रोध है।
- 15:37दे शुड बी ट्रीटेड मेंटली इनसे ज्यादा बहसबाजी भी न करें क्योंकि
- 15:45सत्य के बारे में बहसबाजी नहीं किया करते।
- 15:49सूरज है, इसका प्रमाण अंधे को कौन देगा?
- 15:55रंग होते हैं। इसका प्रमाण अंधों को कौन देगा?
- 15:59क्या तुम अंधों से बहस करोगे? रंगों के बारे में क्या तुम अंधों
- 16:06से बहस करोगे? सूरज के होने के बारे में नहीं,
- 16:10क्या करोगे? तुम अपेक्षा करोगे, तुम कहोगे ठीक
- 16:14है? तुम्हें मुबारक हो तुम्हारी
- 16:25मनोवृत्तियाँ, लेकिन हम चले क्यों, क्योंकि हमारी आँखें हमें
- 16:31रंग भी दिखते हैं। हमें सूरज भी दिखता है इस पर बहस
- 16:35करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है रंग है, सूरज है।
- 16:41और हमने उसे देखा है परमात्मा के विषय में मार्ग से ही बहस कर सकता
- 16:47है परमात्मा के विषय में बहस कर सकता है चारबाक एक्शन रिएक्शन के
- 16:55बारे में बहस कर सकता है चारबाक। ऋणम कृतवागृतम् पीवत यदा जीवत
- 17:02सुखी जीवत बसुबुर्ता से देहस पुनर आगमनम कुतह कोई लेना देना नहीं
- 17:13होता यहाँ रेन उठा लो घी पी लो, रेन उठा लो, शराब पी लो।
- 17:21माल छक लो, एपेस्टीन कांड कर लो, छोटी छोटी बछियों को कड़ाहे में
- 17:26डालकर उबालकर खा जाओ ना कोई न्याय की कुर्सी पर बैठा हुआ स्वतः है
- 17:35संज्ञान लेगा। ना ही तुम में इतनी हिम्मत है कि
- 17:40तुम इकट्ठे हो के इस व्यक्ति का गला पकड़ लो और इससे कहो कि बताओ
- 17:46सच क्या है? न्यायिक कुर्सी पर बैठे हुए लोग
- 17:53तुम्हें कभी परमिशन नहीं देंगे इनका नार खोखरा।
- 17:59उस वो बहाने बाजी करेंगे। नारको कभी कभी फेल भी हो जाता है,
- 18:03कोई बात नहीं फेल हो जायेगा हो जायेगा तुम, नार्को की इजाजत तो
- 18:08दो हो जायेगा हो जायेगा। पॉलीग्राफिक टेस्ट तुम इजाज़त तो
- 18:21दो भाई लेकिन इतनी छाती कहाँ है? क्योंकि जो इजाज़त देंगे वो खुद
- 18:31बेईमान हैं, वो कहेंगे अगर मैंने इजाज़त दे दी।
- 18:37तो ये फिर कहेंगे तुम अपनी भी नारकों की इजाज़त दो मशाल्लाह तुम
- 18:46अपनी भी नारकों की इजाज़त दो। आरोप तो तुम्हारे पर भी हैं शर्मा
- 18:52जी। अकेले डोनाल्ड ट्रंप पर और मोदी
- 19:01पर और हरदीपपुरी पर ही अंजाम देंगे।
- 19:07अंजाम तो तुम्हारे पर इसलिए ये कभी इजाजत नहीं देंगे ये कहेंगे
- 19:13नो। ये कहेंगे जब तक दोष ही ना कहे कि
- 19:21हाँ मैं एनआर को करवाने को तैयार हूँ, मुझे बताओ फांसी पर चढ़ने
- 19:31वाला मुजरिम अगर उससे पूछो? कि तुम फांसी पर चढ़ने को तैयार
- 19:37हो तो वो कभी कहेगा, हाँ कोई भगत सिंह जैसा शोरमा कहेगा और वह अमर
- 19:49हो जाता है। अमर तो तुम्हारे सबरकर भी होते
- 19:51हैं। लेकिन माफीनामे के कारण वीर बन
- 19:57जाते हैं। तुम ज़रा सोचो एक्यूज़ से पूछोगे
- 20:04कि तुम्हें फांसी लगा दे, क्या फांसी भी तुम पुष्कर लगाते हो?
- 20:11तो फिर नार को पूछकर क्यों करते? हो?
- 20:14जब वो फांसी पूछकर नहीं लगाते तो पॉलीग्राफ और नार को पूछकर क्यों
- 20:21करवातें हो तुम्हें पता है कल यह बात यह आग?
- 20:28लगे कि आग तो आएँगे घर सभी जद में यहाँ पर सिर्फ हमारा ही मकान खड़े
- 20:36हैं। तुम्हें पता है कल को लोग इकट्ठा
- 20:42हो जाएंगे और मैंने कहा। हिंदुस्तानियों नहीं, विश्व के
- 20:51वासियों लाख लाख व्यक्तियों की जोड़ियां बना लो और प्रत्येक
- 21:00व्यक्ति जो इस कांड में है उसके घर के आगे।
- 21:08सुआ रखो, अपने पास सोडियम पेंटाथॉर का इंजेक्शन घुसेड़ दो,
- 21:16उसके ऐसे नहीं मानेगा और मैं कहता हूँ अगर कोई व्यक्ति थायो
- 21:29पेंटाथॉर। नाम का इंजेक्शन देना होता है।
- 21:37अगर कोई। व्यक्ति सोडियम पेंटासोल इंजेक्शन
- 21:40से मर जाए। मुझे पता होना।
- 21:44चाहिए। मुझे पूछ के करवाना तो फांसी पर
- 21:48मेरे को लटका देना। आप सुन रहे हो मेरी बात अगर कोई
- 21:56व्यक्ति तुम ये कहते हो, अगर यह मर गया तो तो फांसी पर मेरे को
- 22:00नहीं दिखा देना। मैं जानता हूँ।
- 22:03कभी कोई मरा नहीं। सोडियम पेंटरथॉल आम तत्व है, इससे
- 22:20मृत्यु नहीं होती और अगर फिर भी हो जाए तो आई ऍम रिस्पेन्स, यू
- 22:26विल फर्दर। मुझे हैंग कर देना।
- 22:32उसका दोष मेरे सिर पर मठ देना। लेकिन याद रखना।
- 22:36मुझे बता मैं किसी भी भारतीय मौजूद हूँ या मेरा प्रतिनिधि
- 22:42मौजूद हो। तो आप नार्क को करवाओ पॉलीग्राफ
- 22:48करो, लेकिन बात तो ये है कि तुम जानते हो कि आज नार्क को हम
- 22:59कराएँगे। ट्रंप जी का?
- 23:04डोनाल्ड ट्रंप का। नरेंद्र मोदी।
- 23:09का? अमित शाह का, हरदीप पुरी का या
- 23:13अन्य अन्य लोगों का? जीतने भी लोग बीजेपी के हैं और
- 23:18जीतने भी लोग अन्य पार्टियों के हैं।
- 23:23जिन पर इलज़ाम। हैं, जो शक के दायरे में हैं।
- 23:31उनका नार्को करने की इजाजत तुम्हें सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया
- 23:36के। चीफ?
- 23:38जस्टिस से मांगना चाहिए सीजेआई से?
- 23:42और लाख लाख। की तादाद में।
- 23:46उन लोगों के। घरों के आगे जाके हाथ बांध के कहो
- 23:51कि हम पे रह न करो। हमी तो मर त्याग।
- 23:54बदतर नहीं चल रहे हैं। बैठे रहो गद्दियों पर दूध फलों
- 24:00पूतों फलों। लेकिन हमें।
- 24:05तुम्हारी सत्य को जानने का हक है। नार्को की?
- 24:11इजाजत दे दो प्रो। ये कोई हिंसा?
- 24:15नहीं है लाख व्यक्तियों का इकट्ठा होके अहिंसक पूर्वक।
- 24:22गाँधी ने चौरा। चोरी कांड बंद कर दिया था।
- 24:27सिर्फ हिंसा के कारण तो आप हाथ। बांध कर।
- 24:40हम प्रे करते। हैं, आपसे प्रार्थना करते हैं।
- 24:451,00,000 व्यक्ति। हैं।
- 24:47सामूहिक प्रार्थना। करते हैं।
- 24:49सत्य क्या है, झूठ क्या है? दूध का दूध और पानी का पानी हो ही
- 24:53जाना चाहिए। कितनी देर होगी?
- 24:5512 साल हो गया आपको? तो आप नार को करवाइए।
- 25:04इसके दायरे। में सीजेआई भी आए।
- 25:07सीबीआइ से। कहिए कि आप सिर्फ पहले तो इनकी
- 25:11इजाजत दीजिए, फिर हम आपकी भी इजाजत मांगेंगे।
- 25:15जवाब ध्यान में। खून खराबा, नहीं।
- 25:21करना। एक बूंद भी।
- 25:23खून की न बहके। जितना खून हम।
- 25:29हीमोग्लोबिन टेस्ट करने में लगाते हैं या जितना हम पीलिया को टेस्ट
- 25:39करने में क्या लगाते हैं? बस एक स्विच बोनी होती है।
- 25:44उतना सा खून। भी नहीं गिरना चाहिए।
- 25:50प्यार से। दुलार से प्रेम पूर्वक विनय
- 25:54पूर्वक या तो बता दो कि तुमने क्या किया?
- 26:00नहीं तो नार्को कराने की इजाजत दे दो।
- 26:04तुम सभी संस्थाओं के मुखियों की नार्को टेस्ट की डिमांड करो, कोई
- 26:11जरूरत नहीं है। ईवीएम हटाओ वगैरह की नहीं, नहीं
- 26:17ईवीएम हटा दोगे लेकिन जीत जाएगा। अपराधी फिर क्या करोगे?
- 26:24यहाँ अन्त भक्त। भी तो बहुत हैं।
- 26:27लेकिन हमने। जड़ मूल से खत्म करना है
- 26:30अपराधियों को। और जब्त का।
- 26:33अपराध आज चर्म श्रेणी पर है। जब्त अपराधों का मूल बचा रहेगा।
- 26:40तब तक यह है। पुष्प परल भी तो होता ही रहेगा।
- 26:461 दिन। बीज वट वृक्ष बन जाता है।
- 26:49आज बन गया। छोटी छोटी बच्चियों।
- 26:52के पांव हाथ खाये जा रहे हैं। उबाल का ये सीन तुमने देखा क्या
- 26:58तुम्हारा दिल दहला बिल्कुल दहला होगा।
- 27:05बिल्कुल दहल होगा। जिनके खुद के बच्चे नहीं या जिनके
- 27:12भीतर गरुणा की आगमन है, उनको छोड़कर जिनके भीतर थोड़ी सी भी
- 27:20करुणा है, उनका दिल जला। यह बच्ची।
- 27:25किसी की तो होगी। किसी की माता।
- 27:30ने तो प्रसव पीड़ा सही होगी। किसी की माता।
- 27:35ने तो अरमान सजाए हो गए। किसी की माता।
- 27:39ने तो इसका पालन पोषण मतलब मूत्र? ठीक किया होगा।
- 27:45स्नान कराया होगा, फराहकें बदली होंगी क्या अरमान रहे होंगे उसके
- 27:51ज़रा सोच एक फूल फूल बनने से पहले।
- 28:01कली को ही तुमने? मुर्जा दिया तुम कली को ही भूनकर
- 28:05खा गए तो तुम्हारा अंजाम क्या होना चाहिए?
- 28:11किताबों में संविधान में तो लिखा है।
- 28:17कि बच्चियों। के साथ जो बलात्कार है।
- 28:21उनको मृत्युदंड मिलना चाहिए। कौन से संविधान में लिखा है कि
- 28:25नहीं मिलना चाहिए? वास्को एक्ट में?
- 28:30यही तो लिखा है। तो फिर नार्को।
- 28:34से क्यों घबराते हो फिर आप? छानबीन करने से।
- 28:40क्यों घबराते हो देखो भाई? पुलिस भी छानबीन करती है।
- 28:43सब जगह चलती। है हर तरफ।
- 28:47से क्लू को ढूंढने की चेष्टा होती है।
- 28:51मिले ना मिले बात अलग। लेकिन मैं तो आपसे।
- 28:57ये कहता हूँ। ये अगर कुछ न मिले आई ऍम टू मच
- 29:02कॉन्फिडेंट अबाउट इट। तो मुझे फांसी पे।
- 29:05लटका देना। अगर मर जाए।
- 29:09कोई तो उसका जिम्मेदार में फिर अब और तुम क्या चाहते हो?
- 29:19फिर भी अगर नार्को। टेस्ट की तुम इजाजत न दो।
- 29:23ये तो बिल्कुल ऐसा ही हो गया कि फांसी पर चढ़ाने से पहले निर्भयता
- 29:28के चार अपराधियों को पूछा जाता क्या तुम्हें फांसी चढ़ा दें?
- 29:36कौन कहता की? हाँ फांसी चढ़ा सब बचने के लिए
- 29:39उदित है। यहाँ तो आखिरी।
- 29:43वक्त पर मौत को सामने खड़ा देखकर तुम्हारा तथा कथित शहंशाह बहादुर।
- 29:55भी कह देता। है गॉड से कि देखो सीधा सा है,
- 30:03अगर तुम मुझे मार दोगे तो मैंने जिसकी हत्या की वो अहिंसा वधि था।
- 30:09देखिए तर्क बुद्धि के तो गाँधी जी की।
- 30:16अहिंसा का वध हो जाएगा। वो जीस धारणा पर चलित जीस वृत्ति
- 30:26के व्यक्ति थे। उसके विपरीत होगा ये मारा है
- 30:31मैंने उससे कैसे मुकर सकते हैं। बहुत सी शेर मुझे कह देते हैं कि
- 30:39देखो कितना बहादुर था गाँधी को मारकर भागा नहीं, मैंने कहा ऐसा
- 30:44नहीं है। भाग्य सकता तो।
- 30:47जानता था बाहर। बहुत पुलिस कड़ी।
- 30:50पटेल बड़ा समझदार। था पटेल बाहर?
- 30:53पूरी कतार रखता था। 200 व्यक्ति खड़े थे, बाहर कैसे
- 30:58भागने देते थे? उसे पता था।
- 31:03वह। उनको लांघ?
- 31:03के आया था। इसलिए उसने।
- 31:08दीवार फांदी। तो मैं तुम्हें कहता हूँ रोज़
- 31:16रोज़। अपेस्टीन कांड हो गए रोज़ रोज़ ये
- 31:18दरिंदे पैदा होंगे खुद की जवानी को बरकरार रखने के लिए बुढ़ापा तो
- 31:26फिर भी आएगा मौत तो फिर भी आएगा बिल क्लिक नहीं मरेगा।
- 31:33या बिल गेट्स नहीं। मरेगा हरदीपपुरी नहीं मरेगा,
- 31:42नरेंद्र मोदी नहीं मरेगा या जिन जिन का भी नाम था।
- 31:47राजघराने का। वो है सम्राट भाभी सम्राट नहीं
- 31:50मरेगा। तो परमात्मा ने।
- 31:54फिर मृत्यु को बनाया ना? तुम कितना ही।
- 31:57लघु की जाओ तुम नरभक्षी हो, नरभक्षी हो तुम काबिले।
- 32:09मृत्यु दंड हो। तुम्हारे नारको होना चाहिए, तो
- 32:17तुमने कहा सुबह उठो हमें सिखाते हैं प्रत्येक धर्म आज ऐसा है खुद
- 32:27का तो कुछ इन्वेंशन किया नहीं। कुछ उतरा नहीं जाता अपने भीतर,
- 32:32क्योंकि जब तुम भीतर उतरोगे तुम्हारे किए हुए काले कारनामे,
- 32:37अच्छे कारनामे तुम्हारे सामने आएँगे क्योंकि वो अचेतन में भरे
- 32:41पड़े हैं। तुम उनका सामना नहीं करते, डर के
- 32:44बाहर आ जाते। यही कारण है कि कोई विरला भीतर जा
- 32:49सकता है। बाबा ने कहा कोटे न में कोई एक
- 32:53चलत है, कोटे न चलत है, एक पहुंचत है, कोटे न पहुंचत एक ठहरत है, एक
- 33:03रुकता है, ये रेश्यो है। ऐसे होते हैं संत बोलने वाले।
- 33:10कोटिन में कोई। एक जलत है करोड़ में पहले तो एक
- 33:13कोई चलता है बाकी घबरा के आ जाते हैं।
- 33:17अपने ही काले। कारनामों को देख नहीं।
- 33:23और कोटिन। जलत एक पहुँचत है कुछ बीच में से
- 33:27थर्रा के बाहर आ जाएंगे। जब एपिस्टीन कांड वगैरह देखेंगे।
- 33:31ओहो। मैंने ये बच्चियों।
- 33:34का मांस खाया था। मैंने छोटी छोटी।
- 33:38बच्चियां जिनको पता ही नहीं था कुछ।
- 33:43मैंने उनका मांस। खाया था।
- 33:46मैंने उन्हें। गर्भवती करके उनको तकलीफ दी थी।
- 33:51तुम इनको? शुद्धात्मा गिनते हो?
- 33:54क्या इनका वध? नहीं होना चाहिए।
- 33:58बिलकुल वध होना चाहिए। जीस तरह से।
- 34:03मुसोलनी को मारा गया और मुसोलनी। का गुरु था।
- 34:07लोगों ने उसके। मुँह में मल मूत्र किया?
- 34:14उसको गोलियां मारी गई। एक स्त्री ने चार गोलियां मारी।
- 34:18उसके सीने में उसके चार पुत्र मार दिए थे उसने।
- 34:25वो कहती मेरे पुत्र तो नहीं आ पाएंगे, लेकिन मुझे संतोष है कि
- 34:30मैंने तुझे जीते जी चार गोली मार दी।
- 34:33उसको उल्टा लटका दिया गया। उसको इतनी।
- 34:39शद्दत दी गई कि मैं व्याख्यान नहीं कर सकता।
- 34:44तो जब सुना। हीटर ने कि यह तो मेरे ताबूत को
- 34:51बस में भूत कर देंगे तो उसने खुद ही गोली मार दी।
- 34:56सुनें, मैं अपनी लाश को इस तरह का अंजाम नहीं होने दें, देना चाहता
- 35:02लोग वहाँ से ताड़ियाँ मारें। इससे अच्छा है कि मैं खुद ही खस
- 35:06के जाऊं। और अपनी घरवाली।
- 35:14को जो अभी अभी घरवाली बनी थी। ताजा ताजा।
- 35:20उसको भी गोली मार। दे।
- 35:23पर अपने सैनिकों। से कहा कि मरने के बाद हमारी लाश
- 35:26को इस ग्राम के भीतर 200 लीटर पेट्रोल है।
- 35:32इसमें डुबो देना जब पूरा डूब जाए तो आग लगा देना, हमारी खाक भी न
- 35:37बचे। और जब तलक।
- 35:41जीता। रशिया ने फौजियों ने हिटलर का वो
- 35:49शेहेंशाही दरवाजा उसको भुक दिया गया था।
- 36:00देखिये बार बार किसी चीज़ को दोहराओगे यह सीजीओ फ्रेंड नाम का
- 36:07एक रूप होता है। मानसिक दुविधा?
- 36:11बार बार दोहराओ। बार बार दोहराओ, बार बार दुहराओ
- 36:14ये क्या करते हैं, यही तो फॉर्मूला आजमाते हैं।
- 36:17बार बार कहो मोदी है तुम कन्हैया मोदी है, तुम हम कन्हैया मुमकिन,
- 36:22रम रम रम क्या? हो जायेगा तुम संत तो।
- 36:33ना हो सकोगे। तुम मानसी करोगे।
- 36:39हो जाओगे। तुम सीजो।
- 36:43फ्रेंडियों से युक्त हो जाओगे तुम प्रागली हो जाओगे, अर्ध विक्षिप्त
- 36:49अवस्था में हो जाओगे आज ये दुनिया तुम्हें क्या दिखती है समझदारों
- 36:53की दुनिया? नहीं, ये अर्ध विक्षिप्त लोग हैं,
- 37:00अर्ध विक्षिप्त सीजोफ्रेनियम आधे बंटे हुए हैं वास्तविकता तो नहीं
- 37:08होगी गधा? अरबी घोड़ा तो।
- 37:13नहीं बनेगा। सर्कमस्टैंसेस तो वही रहे हैं,
- 37:21तुम्हारे क्षेत्र की दशा बदल जाएगी।
- 37:23तुम्हारे क्षेत्र की दशा स्वीकार कर रहे है।
- 37:26तुम्हारे नोस्ट्री ने स्वीकार कर लिया कि चमड़े की बदबू नहीं है,
- 37:30ये तो खुशबू है। तुम गंदे नाले।
- 37:34के करीब भी खड़े रह सकते हो और मान सकते होगे।
- 37:37आह क्या? स्वर्ग की खुशबू।
- 37:43आ रही है। यह गंदे नाले।
- 37:46में बहता हुआ कूड़ा करकट कल्प वृक्ष के पत्ते।
- 37:53यह खीर पूड़ी से सजी हुई खाद्यान है।
- 37:58थाली है। तुम कुछ भी मान सकते हो।
- 38:02लेकिन ध्यान रखना। यह वास्तविकता नहीं है।
- 38:05अब शीजोफ्रेनिया रोग क्या है? एक होता है।
- 38:13सत्य इसलिए संतो ने अष्टांग योग का जब वर्णन किया पतंजलि ने,
- 38:21बुद्ध ने, महावीर ने या और भी योगियों ने।
- 38:26अष्टांग। योग में सबसे पहला शब्द उन्होंने
- 38:29रखा सत्य। यम नियम।
- 38:37आसन, प्राणायाम प्रत्याहार इस वीडियो को ध्यान से सुनें।
- 38:42धारणा ध्यान। समाधि ये आठ अंग हैं योग के और
- 38:47उनमें से पहला यम यम के पांच अंग हैं।
- 38:52सत्य, अहिंसा, अस्त, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, सोच, संतोष, तप,
- 38:57स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिदान यह नियम के हैं।
- 39:02अग्य आसन। प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा।
- 39:08तो ऋषियों ने। कहा संतो ने कहा सत्य को सत्य की
- 39:12तरह जानो, कल्पना के रूप में मत जानो।
- 39:17यह कल्पना। है कि मेरे से ज्यादा भाग्यशाली
- 39:20व्यक्ति संसार में कोई है नहीं। तुम दोहराने।
- 39:24से या सुबह सुबह फ्रेश माइंड रात्रि भर के विश्राम से तुम तरो
- 39:30ताजा होते हो तो तुम्हारा मन ज्यादा स्वीकार कर लेता है।
- 39:34इसलिए तुमने देखा? कि जो भूखारी होते हैं, वो सुबह
- 39:37सुबह तुम्हारे पास होते हैं। शाम को किसी को।
- 39:41उम्मीद नहीं होती। तुम थक जाते हो, तुम एग्रेसिव हो
- 39:46जाते हो, मूड बदल जाता है, सुबह तुम रिसेप्टर होते हो, शाम को तुम
- 39:52अग्रेशन में आ जाते हो, कोई उम्मीद नहीं होती, मगधों तक को भी
- 39:57उम्मीद नहीं होती कि तुम कुछ दोगे।
- 40:00सुबह सुबह। उम्मीद की जा सकती।
- 40:03तुम्हारा। मन अरीशक्ति है तुम आए हो मांगा
- 40:07है उसको तुम्हारी व्यथा दिखेगी बेचारा आया है भूका।
- 40:12होगा। प्यासा होगा वह यथायोग तुम्हारी
- 40:16सेवा करेगा। जैसा होगा मुट्ठी।
- 40:19भर के चावल देगा। इसलिए मगध।
- 40:23सुबह सुबह आता है। इसलिए ये धर्म?
- 40:28कहते हैं ब्रह्म मूर्त में जगन तुम तरो ताजा हो, नींद खराब कर
- 40:36करके ही चाहे 340 पे उठ जाना। देखो बेटी, तुम सत्य तक तो नहीं
- 40:49पहुँच पाओगे जहाँ आनंद की बारिश होती है।
- 40:54एक पक्का है। तुम पागल जरूर हो जाओगे।
- 40:58और फिर ये पागल बागेश्वर धाम, मेहंदीपुर सालासर धाम और चेरे
- 41:05चपटों के। इलाज कराने।
- 41:09के लिए वहाँ पहुँच जाएंगे इनके दरबार में।
- 41:13अच्छी दिहाड़ी। बनेगी।
- 41:17मुझसे किसी ने पूछ। लिया के बाबा अगर आपको
- 41:21प्रधानमंत्री बना दिया जाए। मैंने कहा वैसे मैं बनूँगा ना?
- 41:26लेकिन इतना। दुखी संसार देखकर पीड़ा को सह भी
- 41:30नहीं सकूंगा। अगर ऐसा कभी माहौल आ जाता है।
- 41:36तो मैं व्यवस्था करके हट जाऊंगा। ईमानदार लोगों।
- 41:40की व्यवस्था। बस और कुछ नहीं।
- 41:43क्योंकि राज़ करना तो वह चाहता है जिसने कभी राज़ किया नहीं।
- 41:50मेरा राज़ है। मेरी इंद्रियों पे राज़ है मेरे
- 41:53मन पे राज़ है मेरी वासनाओं पे राज़ है।
- 41:56मेरी इच्छाओं पे राज़ है मेरी योजनाओं पे राज़ है मैं राज़ करता
- 42:01हूँ हर वक्त हर वक्त राज़ करके आनंद का अमृत पीता हूँ।
- 42:07मुझे उस राज़। की जरूरत नहीं है जो दूसरों पर
- 42:12आरोपित करे, हुक्म को नहीं। मैं तो हुक्म को मानने में खुश
- 42:16हूँ। हुक्म अंदर सबको बाहर हुक्म ना
- 42:20कोय। नानक हुक्म जे बुजे।
- 42:25तो मैं कहे। ना कोय।
- 42:28मैं हुक्म मानने में बड़ा बड़ा आनंद महसूस करता हूँ।
- 42:34हुक्म करने में मुझे दुख होता है। इसलिए जो तुम्हारे।
- 42:39वाला राज़ है वो तो मैं ना कर पाऊंगा।
- 42:42लेकिन तुम्हारी। व्यवस्था को ठीक कर दूंगा।
- 42:45ये ठीक है इतना सा कर दूंगा। तुम्हारी बेसिक।
- 42:52नीड्स को पूरी कर दूंगा। ताकि तुम?
- 42:57उसका कारण होगा अय्याशी के लिए नहीं।
- 43:01ये बिल गेट्स। जैसे लोग।
- 43:05अमीरी में से। आधा दान करके।
- 43:10एपिस्टेंट। कांड जैसे कांड दोहराता हूँ।
- 43:13तुम्हें शर्म नहीं आती तुम्हारी अपनी बच्ची?
- 43:17अगर इसको। कोई।
- 43:22तेल के कड़ाहु। में।
- 43:26फ्राई करके। खाये।
- 43:28नमक मिर्च लगा के तुम्हे कैसा लगेगा?
- 43:32मैंने सुना है। बिल गेट्स के बैठी है।
- 43:37तुम्हे कोई शर्म? हैया है थोड़ी बहुत।
- 43:42डोनाल्ड ट्रंप। को शर्म हैया है कोई?
- 43:46तुम कितना ही। बहकाल हो लोगों को मूल समस्याएं
- 43:49वहाँ खड़ी ही रहेंगी। जब फारिग।
- 43:53होगे तुम इसीलिए राजनीतिक लोग कोई न कोई समस्या खड़ी करते ही रहते
- 43:58हैं। ताकि तुम्हारी दिमाग।
- 44:01खाली ना हो। दिमाग खाली हो तो समस्याएं सामने
- 44:05खड़ी होंगी। रोजगार नहीं पेट भरने को कुछ नहीं
- 44:10शादी भी करवानी है बस बच्चे भी पैदा करने सब करना है लुथफ देखना
- 44:16है हर चीज़ का लुथफ देखना सिर्फ तुम्हारे ही कर्मों में लिखा है
- 44:21क्या? गरीबों का हक?
- 44:23नहीं है क्या? तो तू ये क्यों दान?
- 44:27करते हैं ताकि इनकी छवि बनी रहे और भीतर खाते तुम टैप्पू पर जाकर
- 44:33वो काम करते रहो तुम वहाँ अगर रेप तक भी सीमित होते रेप नहीं, रेप।
- 44:43बालिग लड़कियों को तो शायद हमारी आत्मा तुम्हें कम अपराधी समझ
- 44:50लेती। लेकिन तुमने तो वो किया जो
- 44:56ब्राह्मणों ने। कुम्भी नर्क बनाएं कुम्भी पाक
- 45:10नर्क नर्क तेल के कढ़ाई उबल रहे हैं वहाँ फेंक दिए जाओगे बस आज हम
- 45:20आँखों से देख रहे हैं। हम कहते हैं।
- 45:24हमारी आँखें ये देख रहे हैं जाके हमें भी शीजोफ्रेनिया हो गया
- 45:29नहीं। हम वास्तविकता।
- 45:32में पहुंचे हुए लोग। हम दुविधा में।
- 45:36ग्रस्त लोग नहीं। हम शंशाह से।
- 45:40ग्रस्त रोग नहीं है जिसे कृष्ण कहते हैं शंख आत्मा को निश्चित हम
- 45:44सत्य तक पहुंचे हुए लोग हमारी आँखें धोखा नहीं करते।
- 45:51तो जैसी कल्पना। की थी।
- 45:54ठग पंडितों ने बेईमान पंडितों ने। लोभी लालची पाखंडियों ने बंटाधार
- 46:03कर दिया सब कुछ तुमने। आज इसे।
- 46:07साक्षात में एपिस्टन कांड में देख रहा हूँ छोटे।
- 46:11छोटे बच्चे बड़ी मुश्किल से। शायद साल।
- 46:17की भी न हो कोई बड़ी बात मैं तुमसे पूछता हूँ तुम्हारे पास ये
- 46:26रिवॉल्वर तो होगा बस ये? शर्म?
- 46:29नहीं है। हीटलर के पास रिवॉल्वर भी था।
- 46:36और तुमसे अच्छा मैं हिटलर को समझता हूँ।
- 46:40उसके पास शर्म? थी।
- 46:41इतनी तो शर्म थी कि अपने ही रिवॉल्वर से।
- 46:47जो दूसरों को। मारने के लिए खरीदी गई थी, उसके
- 46:51पास इतनी सी शर्म थी। कि वह अपनी।
- 46:55ही कनपटी पर रखकर गोली मर गया, उनमें इतनी भी शर्म बची नहीं है
- 47:01तो फिर ऐशो का इलाज किया जाए। फिर इनको दंडित।
- 47:06करना होगा। शर्म तो इनमें है लेकिन न्याय
- 47:13अपना काम करे। इन बच्चियों को न्याय कौन देगा?
- 47:19मैं पूछता हूँ, न्याय की कुर्सी पर बैठे हुए लोगों से अगर तुम
- 47:26नारकों की इजाजत नहीं दोगे तो फिर कौन देगा?
- 47:33मैं पूछता हूँ। जब राज़ सत्ता पे बैठे हुए लोग ही
- 47:37नरभक्षी हो जाएं। बच्चियों का।
- 47:40खून पीने लगें ताकि हम ज्यादा जवान नजर आएं।
- 47:48ज्यादा देर तक। जिएं हमारा हिंदुस्तान विश्व
- 47:52गुरु। कमल, यहाँ ऐसे लोग पैदा हुए हैं
- 47:59जिनकी जीवेशणा मर गई। और तुम्हारी जीवेशणा।
- 48:05इतनी ज्यादा प्रबल उत्कंठा के साथ कि तुम बच्चियों।
- 48:10का लघु पीकर जवान रहना चाहते हो? तो शर्म है।
- 48:17इनपे है। इनके पास।
- 48:20गोलियां हैं, बंदूकें हैं, लेकिन वे खुद को दंडित नहीं कर पाएंगे।
- 48:26मेरे देशवासियों विश्ववासियों ये ध्यान भटकाएंगे किसी आयातुल्ला
- 48:33अली खो मैनी को मार देंगे, फिर उसके बेटे को मार देंगे, फिर किसी
- 48:39और को मार देंगे, फिर किसी और को मार देंगे, तुम्हें चैन नहीं लेने
- 48:43देंगे यानी तुम्हारे दिमाग को रेस्ट नहीं लेने दे।
- 48:48और तुम्हें? तुम्हारी सही तकलीफें तब याद आती
- 48:52हैं जब तुम्हारा दिमाग खाली होता है।
- 48:58तुम अपने भीतर। भी तभी जा सकोगे जब तुम एम्प्टी
- 49:02माइंडेड हो। लेकिन यह लोग तुम्हें कोई ना कोई
- 49:06समस्या से घरा हुआ रखेंगे। चाहे वो समस्या वंदे मातरम की ही
- 49:11क्यों ना जिसका भूख से कुछ लेना देना है ही नहीं।
- 49:17भला वंदे मातरम की दो लाइनें हमने रखी नहीं रखी?
- 49:21बिरला साहब बताना उससे क्या फर्क पड़ता है?
- 49:25क्या तुम्हें इतनी? अकल नहीं है कि तुम रोक दो कि ऐसी
- 49:29बकवास करने के लिए यह संसद नहीं है भाई।
- 49:36तुम कह सकते। हो, लेकिन करते नहीं क्यों?
- 49:39क्योंकि तुम भी गाने कहीं ना कहीं लगते हो।
- 49:43सब सस्ताएं। खरीदनी सब लोग खरीद लिए इधर उधर
- 49:48का भानुमति ने कनबा जोड़ा किस तरह जोड़ दिया है?
- 49:52लेकिन मैं कहता हूँ शर्म हया किसी में भी नहीं।
- 49:58अगर शर्म हया। होती।
- 50:01तो यह कांट खुलने के बाद सुबह लाशें मिलती और नोट मिलते सुसाइडल
- 50:10नोट के मैं गुनहगार हूँ, मैं दरिंदा हूँ, मैं नरभक्षी हूँ, मैं
- 50:18पिशाच हूँ, मैं अधम हूँ। मैं महा मानव नहीं, मैं महा दानव
- 50:25हूँ। इसलिए तुम्हें।
- 50:28तो मैं तुम से तो छुपाता रहा। मैंने मीडिया को खरीद लिया, मैंने
- 50:34को खरीद लिया। मैं कैसे राज़ कर सकता हूँ मैंने?
- 50:39चुनाव आयोग भी खरीद लिया। मैंने न्यायपालिका भी खरीद ली,
- 50:43लेकिन मेरी आत्मा मुझे धिक्कार दे रही है।
- 50:46इसलिए आई ऍम गोइंग टु कमिट सुसाइड।
- 50:51लेकिन ऐसा कोई? भी मुझे सुसाइडल नोट नहीं मिला।
- 50:55मुझे मिली तो। एपिस्टाइल के वो घिनौनी तस्वीरें
- 51:01जिनको देखकर किसी दरिंदे के रूप में कंपज है जानें तुम्हारी रूह
- 51:10कभी घुन कर रहा है तुम इतने मज़े से कह रहे हो।
- 51:17कमर प्रभु की सृष्टि। बैराट तो है लेकिन इतनी बैराट है
- 51:29निजता में अदमता में यह मैंने भी प्रथम बार जाना।
- 51:37इतना भी नीचे। कोई हो सकता है।
- 51:42फिर अगर मैं। गाहे बगाहे तो मैं कह देता हूँ के
- 51:45बच्चे न प्रॉडक्ट। क्योंकि अगर लड़का।
- 51:49होगा तो ये जहर भरकर नफरत का। हिंदू मुसलमानों का भेद बुद्धियों
- 51:59का तुम्हें आप उसमें लढवा के मरवा देंगे क्या धरती पर अमृत नाम की
- 52:04कोई चीज़ नहीं है क्या? लिख है तो।
- 52:09लेकिन ऐसे व्यक्तियों को। यह सामने।
- 52:13नहीं आने देते। मेरे कितने से?
- 52:16फल आवर पाओगे तुम कारण क्या है? मेरी वीडियो को पहुंचने देते हैं।
- 52:24सब को हुक्म है। जो जिद करके आ गया वो आ गया।
- 52:31अन्यथा ये पूरी कोशिश करेंगे न? प्रोमोज इसलिए क्योंकि हमारे जैसे
- 52:44लोग उनके भीतर जीवेशणा भी नहीं होती।
- 52:49ख्याति प्राप्त करने की भी नहीं होती, कुछ भोगने की इच्छा भी नहीं
- 52:54होती। किस्से आगे नंबर 1 बनने की इच्छा
- 52:57भी नहीं होती जब कोई वासना ही ना रहे, मिट गया सब कुछ, कुछ ना बचा
- 53:07खाक हो गए। फिर कौन करेगा?
- 53:14ऐसे घनोने कृत्य? कौन अपनी?
- 53:18मनाती करेगा। मैं।
- 53:25पल दो पल का शायर हूँ। पल दो।
- 53:32पल मेरी। जवानी?
- 53:35है। पल दो।
- 53:39पल मेरा जीवन है। पल दो पल मेरी कहानी।
- 53:48है। मैं पल।
- 53:52दो पल का शायर। हूँ ये समझते हैं।
- 53:59कि शायद हम ज्यादा जी लेंगे। मैं तुमसे पूछता हूँ एक बार
- 54:04ईमानदारी से अपने भीतर जाकर देखना।
- 54:09ज़िन्दगी में जब। से जन्मे होश संवाद तुमने खुशी
- 54:12पाई सच्ची खुशी से। किसी को मार।
- 54:17देना और उसके बाद ना चले ना ये तो खेने की खुशी है।
- 54:22हरेन पांडा को मार देना, तुलसी प्रजापति को मार देना, 750
- 54:28किसानों को मरने के लिए बिठा देना।
- 54:33ऐसे ऐसे। उत्पाद खड़े करना किंतु मुसलमान
- 54:36के नाम पर। कौन कौन मर गया उसकी तस्वीरें का
- 54:40नामो निशान वाकिना तुम देखना कभी शांत एकांत अपने ही कमरे में बैठ
- 54:50गए। कि तुमने कभी?
- 54:53एक पल के लिए भी वह सच्चा आनंद पाया है।
- 54:57जीसको पीकर आत्मा तृप्त हो जाती है।
- 55:01तुम पाओगे नहीं। पाया क्योंकि अगर ऐसा पाया होता।
- 55:07तो फिर तुम ऐसे घनौने कृत्य करते नहीं थे?
- 55:14यह सीजफ्रेनिया। है, पुत्री।
- 55:17तुम चाहो तो। कर कर सकती हो?
- 55:19मैं रोकता नहीं कैसे? तुम अपना जीवन।
- 55:22स्वतंत्र रूप से जीने के लिए आजाद हो, मैं बाधित नहीं करता।
- 55:30लेकिन है। जैसी जो फ्रेनिया है, ये मानसिक
- 55:33करो। चाहे सुबह उठ के।
- 55:36सूचक मैं संसार का अमीर से अमीर व्यक्ति हूँ शहंशाह आलम तो क्या
- 55:42तुम्हारी तिजोरियां भरी में देंगी सोने से?
- 55:46तुम्हारे संदूकों। में डॉलर ही डॉलर होंगे।
- 55:50सोने के सिक्के होंगे, गन्नियां होंगी।
- 55:53अश्रत्य होंगी, तुम्हारे सोचने से ऐसा हो जाएगा क्या तुम वो खुशनसीब
- 56:01हो जो संसार में तुमसे बड़ा खुशनसीब कोई है ही नहीं?
- 56:05ऐसा सोचने से क्या सत्य में ऐसा हो जाएगा?
- 56:10नहीं, तुम पागल हो जाओगे पुत्रे। और जो व्यक्ति।
- 56:14तुम्हें ऐसा सिखाते हैं, वो आलजड़ी ही पागल है, पुत्री।
- 56:22बिल्कुल पागल है। अनीसा तुम्हें ऐसी बात क्यों
- 56:24सिखाते? जो दुखिया है वो।
- 56:27तुम्हें कहेंगे उनको पता तो है नहीं, सच्चा आनंद कहाँ मिलता?
- 56:32वो कहेंगे बस ये लो पांच नाम और पांच नाम भी देंगे नहीं मेरे पास
- 56:38एक राधास्वामी में दीक्षा देने में 1015 मिनट तो लग जाते।
- 56:45मुझे कहते बाबा। आपने इतना वक्त लगा दिया।
- 56:49वह राधास्वामी। के डेरे में तो।
- 56:54नाम को। खिंडाया जाता है उछाला जाता है
- 56:58ताश के पतों की तरह ए अल न। जे तो प्रेम।
- 57:10मिला। की चार जेतों प्रेम परमात्मा?
- 57:19को कहते है प्रेम मिलन की चार। शी?
- 57:30स तलीधर घर मेरे आ शी स तलीधर घर मेरे आ।
- 57:46घर मेरे आं? शी स।
- 57:51तली घर घर मेरे। आं?
- 57:57घर। मेरे आं?
- 58:10तो बोलना होता। है।
- 58:13तब जिसके लिए मृत्यु। समाप्त हो जाती है वह मर जीवडा।
- 58:21जो जीते जी मर। गया।
- 58:23जिसने जीते जी अपनी मौत स्वयं देख ली।
- 58:26वह ही साहस कर पाएगा बोलने का अन्यथा कोई साहस नहीं कर पाएगा।
- 58:30तुम मुझे निंदक कह के छोड़ सकते हो।
- 58:36तुम मुझे पापी। कह के छोड़ सकते हो तुम मुझे पापी
- 58:40होने का अलंकृत करके छोड़ सकते हो तनह लेकिन ध्यान रखना, मैं तनह
- 58:47पीऊंगा तो उस अमृत के रस को पीता पीता बड़ा मज़े में होऊंगा।
- 58:54सॉरी चोप। लेट मी देवन से नोन एंड अनली मैटर
- 58:58लेट मी टॉक स्टिल फ्रॉम दी, वडा नॉट एस्ट्रोन टेल व्हेर आई लाइ।
- 59:07मुझे चुरा लिया। जाए संसार से और कोई पत्थर न बता
- 59:13सके। कि मैं कहाँ दफन।
- 59:20ऐसे जीने दो। मुझे एक कमरे में बैठा हूँ।
- 59:2314 बरस से अननोन लेट मी लाइव उनसीन अननोन।
- 59:32लेट मी। मैंने कहा जब मैं मर जाऊं इस
- 59:37खंडहर को छोड़ दूँ इस ढांचे को त्याग दूँ।
- 59:42तो रोना मत। झूमना खुशी।
- 59:50मनाना यद्यपि तुम ऐसा कर नहीं पाओगे, मैं जानता हूँ।
- 59:57लेकिन रोना मत। खुशी खुशी विदा कर दे।
- 1:00:06मैंने जो खुशी। पाई।
- 1:00:09तुम देखना उस। पल में अगर तुम चुप रह गए तो खुशी
- 1:00:13तुम्हें भी मिलेंगे, क्योंकि उस पल में इतनी बरसात होगी आनंद की।
- 1:00:20जैसे उस दिन। बरसा था।
- 1:00:2228 अक्टूबर 1985 की रात को बरसा था जो वही बरसेगा उस दिन।
- 1:00:30तुम उसको पीना। रोने में वह वक्त जाए मत कर देना।
- 1:00:36तुम सहजता। से पीना यद् पे आंसू रूके के नहीं
- 1:00:44लेकिन फिर भी खुद को संभाल लेना। मरने की खबर ए जाने जिगर मिल जाए
- 1:01:01कभी तो। मत रोना, हम छोड़ चले हैं महफिल
- 1:01:15को याद आए कभी तो। मत।
- 1:01:21रोना। इस दिल को तसल्ली दे लेना घबराए,
- 1:01:33कभी तो मत रोना हम छोड़ चले। महफिल?
- 1:01:44को। इक।
- 1:01:47ख्वाब सा देखा था हमने, इक ख्वाब सा देखा था हमने।
- 1:02:00जब नींद खुली तो टूट गया जब आँख खुली तो टूट गया ये प्यार अगर सब
- 1:02:18ना बनकर। तड़पाए कभी तो मत रोना, हम छोड़
- 1:02:29चले हैं महफिल को। तुम।
- 1:02:34मेरे खयालों में खोकर। तुम मेरे ख्यालों में होकर बर्बाद
- 1:02:48न करना जीवन को उस वक्त। वह जो 28 अक्तूबर 1985 को रात को
- 1:02:588.5 9:00 बजे जरा था आसमान से उस दिन वो जरेगा और तुम मेरी यादों
- 1:03:05में उस वक्त को गवाह मत देना रोकर या तो अष्ट भी।
- 1:03:14तुम मेरे ख्यालों में खोकर बरबाद न करना जीवन को जब कोई सहरी बात
- 1:03:32तुम्हें। समझाये कभी तो मत रोना, जब कोई
- 1:03:42सहेली बात तुम्हें समझाये कभी तो मत रोना।
- 1:03:53हम छोड़ चले हैं जीवन के सफर में अनहाय मुझको तो ना जन आ छोड़ेगी।
- 1:04:13जीवन के सफर में तन्हाई मुझको तो न जिंदा छोड़ेगी मुझको तो न जिंदा
- 1:04:30छोड़ेगी। मरने की खबर अह जाने जिगर मरने की
- 1:04:41खबर अह जाने जिगर मिल जाए कभी मिल जाए कभी।
- 1:04:52तो मत रोना मिल जाए कभी ही तो मत रोना हम छोड़ चले महफिल को।
- 1:05:09संत जब शरीर। छोड़ता है संत तो वही एक बार फिर
- 1:05:14घटता है। इसको दूसरी बार का मरना कहते हैं।
- 1:05:21एक बार तो जब। वो मरा था तो कोई साक्षी ना होता।
- 1:05:25ये पेड़ ये। पौधे ये दीवारें?
- 1:05:29ये टोंक ये टेम्पल, ये गोदाम, ये भुना पेड़ ये हरियाली खेतों की ये
- 1:05:38चाँद, ये सूरज, ये सागर। ये साक्षी थे।
- 1:05:43लेकिन पिघलते चले गए। और व्हाइट।
- 1:05:47पार्टिकल्स में कन्वर्ट होते चले गए।
- 1:05:49धीरे धीरे सब पारदर्शी हो गया। यही कुछ फिर दोहराया जाएगा उस दिन
- 1:05:57और तुम रहो ना मत यही था कारण? संतों ने कहा, हमारे शरीर के
- 1:06:03छोड़ने के बाद यह तो एक पिंजर है। ढांचा।
- 1:06:07ये तो हमारा घर है, जिसमें हमने इतनी देर विश्राम किया, इस घर को
- 1:06:13दफना लेना सुरक्षित क्योंकि लाखों सालों तक इसने वो समुद्र पिया जो
- 1:06:20कभी चुपका नहीं, इसके पास जब्त माँ के बैठ जाओगे।
- 1:06:28तो तुम चाहे न। चाहे अपने ही भीतर उतरना शुरू हो
- 1:06:34जाओगे। तुम्हें वो लुत्फ।
- 1:06:36आएगा जो ज़िन्दगी में तुमने किसी भोग में चढ़ना नहीं था जो
- 1:06:41इन्द्रिय के भोग तुम्हें। लुत्फ न दे।
- 1:06:46सकी लज्जत न दे सकी उस दिन वहाँ। मेरी समाधि के।
- 1:06:51पास मेरी खबर के पास बैठकर तुम्हें वो आनंद आया, तुम उसे रस
- 1:06:58को पी लेना आंसू मत वाहन। तो अगर तुम सुबह।
- 1:07:10उठ के सोचती हो, बेटी। सुबह उठ के।
- 1:07:14ब्रह्म मुहूर्त को राम राम करती। वहगुरु वहगुरु।
- 1:07:20करती अल्लाह हूँ अकबर करती शिव शिव करती राम राम करती।
- 1:07:26राधे राधे करती, श्याम श्याम करती पांच नाम करती कुछ भी करती।
- 1:07:36तो तुम जो। फ्रेशनेस रात के उस मरहरे पे जाके
- 1:07:40तुमने कमाई थी, उसको खो दोगे, बेकार कर दोगे।
- 1:07:44तुमने रात को शुबती के उस आलम में उसके पास डेरा जमा दिया था जिसे
- 1:07:51समुद्र कहते हैं अमृत का। सारी।
- 1:07:54रात वहाँ की खुशबू तुम पीते रहे, इसलिए तो इतनी ताजगी होती है।
- 1:08:02तो तुम इस भक्त। को गंवाना मत ये बात ठीक है।
- 1:08:06लेकिन गंवाना। ही हो जाता है जब तुम पांच नाम
- 1:08:10जपने लग जाते हो, राधे राधे करने लग जाते हो।
- 1:08:14रेपुटेशन। से तुम्हें सीजोफ्रेनियां हो
- 1:08:16जायेगा। तुम अर्ध।
- 1:08:19विक्षिप्त हालत में हो जाओगे, इन भक्तों को देखो यह किसी की बात
- 1:08:25मानने को क्यों तैयार नहीं? इसका साइंटिफिक कारण मैंने आपको
- 1:08:29बता दिया। कुकिंग का आधा।
- 1:08:32हिस्सा उस गिरफ्त में फंस गया है जिसे हम रेपुटेशन कहता है।
- 1:08:41आधा हिस्सा आधा हिस्सा सोच नहीं सकता।
- 1:08:45आधे हिस्से से बात। बनती भी नहीं है।
- 1:08:48आधा हिस्सा तर्क। करता है, लेकिन उसके तर्क को
- 1:08:52तुम्हारा दूसरा हिस्सा दबा देता। है।
- 1:08:55ये है एंटायर। फेरेस्टली।
- 1:08:58सेंटीफी का फिलॉसफी तो ये भक्त नहीं है पुत्री यह विक्षिप्त है,
- 1:09:11यह पागल हैं पुत्री। इनका मानसिक उपचार होना चाहिए।
- 1:09:18जल्दी से जल्दी जितना हो सके इनसे वो कारण छीन लेने चाहिए जिनके
- 1:09:25कारण ये इस दशा में पहुंचे हैं। याने नाम नाम छीन लेना चाहिए।
- 1:09:33क्योंकि इसी नाम ने इनको इस अमरहले पर पहुंचाया।
- 1:09:41ज़िन्दगी को बर्बाद मत करना यह मानस का जामा।
- 1:09:48बड़ी मुश्किल से। मिला है।
- 1:09:50ये शब्दों के अर्थ गलत निकाल निकाल के तुमको गुमराह करके गलत
- 1:09:55मार्गों पे डाल देते हैं। खुशी ये भी नहीं चख पाते।
- 1:10:01इनका भी वक्त। खराब होता है कुदरत बक्सेगी किसी
- 1:10:05को नहीं। सब लपेटे जाएंगे।
- 1:10:09लेकिन बात ये है ये तो लपेटे जाएंगे तुम व्यर्थ में क्यों
- 1:10:13लपेटे जाओ तुम बचा लो अपने आप को इन दुष्टों से।
- 1:10:21इन क्लेशियों। से इन मूर्खों से इन पागलों से इन
- 1:10:25अर्धविक्षिप्त लोगों से इन सीजोफरेनिया के शिकार बीमारों से?
- 1:10:33यह रोग है। पुत्री?
- 1:10:36और मैं इसकी। साइंटिफिक व्याख्या तुमने मांगी
- 1:10:38थी। अब मैं तुम्हें समझा।
- 1:10:41दिया कि मैं संसार का सबसे भाग्यशाली व्यक्ति हूँ।
- 1:10:47तो क्या ये हो जाता? है।
- 1:10:49क्या तुम भाग्यशाली हो जाते हो? नहीं तुम्हारे चेहरे देखो ये लटके
- 1:10:53हुए चेहरे देखकर ही तो मुझे बोलना पड़ा।
- 1:10:58ये 12 बजकर। पूरे 4 मिनट हुए खड़े हैं चेहरे
- 1:11:01पे कोई खुशी का आलम तुम्हारे चेहरों पर दिखता नहीं।
- 1:11:12ना तुम जीते। हो ना तुम मरते हो?
- 1:11:17इतनहाई का आलम और उस पर आका गम इतनहाई का आलम।
- 1:11:37और उस पर। आप कदम।
- 1:11:43न। जीते हैं न मरते बताओ क्या करें
- 1:11:53हम? तुम ऐसे ही वास्तव।
- 1:11:57में हो मैं जी। रहे हो?
- 1:12:00नंबर नहीं फिर क्या किया जाए, इन सब बीमारियों को छोड़ दो आज नहीं
- 1:12:11अभी नाउ एंड नाउ। टूटे नहीं।
- 1:12:17अभी छोड़ दो इस गंदगी के ढेर को इन पांच नामों को इन राधे को राम
- 1:12:27को सबको फेंक दो, किसी काम के नहीं लक्वाजी हैं अक्षर हैं और वह
- 1:12:32अखरा नालो अखर। वह शब्द नहीं वह शब्दातीत तुमने
- 1:12:42उस शब्दातीत के पास जाकर उस रस का आशीर्वादन करना है।
- 1:12:49और झूमना है। नाचना है गाना है।
- 1:12:58तुमने? ज़िन्दगी हार दी सिर्फ उसी दिन
- 1:13:01तुम जीत पाओगे। उसी दिन जीत।
- 1:13:07पाओगे? झुमझुम के नाचों आज गाओ खुशी के
- 1:13:22ही काश तुम अब उस। अवस्था में पहुँच सकते।
- 1:13:28झुमझुम के नाचो आज गाओ खुशी केगी। आज किसी।
- 1:13:40की हार। हुई है।
- 1:13:45दुष्टहर। गए।
- 1:13:49और किसी की जीत जीत किसकी हुई आनंद की जीत?
- 1:13:58आनंद ने तुम्हें। अपनी तरफ खींच लिया और आनंद में
- 1:14:01तुम तब आओगे जब तुम्हारा मस्तिष्क का खाली होगा नाम से।
- 1:14:07कुछ भी करने। से जब तुम खाली होगे टोटली या
- 1:14:10पट्टी। तो तुम वहाँ।
- 1:14:14पहुँच जाओगे जिसकी उमंग जन्मो जन्मो से तुम्हारी प्यासी आत्मा
- 1:14:21को रही। आज।
- 1:14:24किसी की हार। हुई है।
- 1:14:30और। किसी की जीत तेरे गाव खुशी के
- 1:14:38खेतरे गाव खुशी के ही। झूम।
- 1:14:45झूम के नाचो आज गाओ आज। गाओ।
- 1:14:52खुशी के फूल। आज किसी।
- 1:14:58की हार हुई है। और किसी की जीत रे गाओ, खुशी के
- 1:15:07गीत रे गाओ, खुशी के ही। अनन्या चिंतन तो माँ ये जन पर
- 1:15:27वास्ते ते श्याम नृत्या भक्ता नाम योग श्यामा पाहम्या अन्य्न्य भाव
- 1:15:36से। जो मेरा शमरण।
- 1:15:40करता है। किसी दूसरे का।
- 1:15:43समन नहीं करते। देखिए राधे राधे दूसरा है तुमने?
- 1:15:48पांच नाम दूसरे। हैं तुमने राम दूसरे का नाम है
- 1:15:53तुम्हारा अनन्या चिंतन तो माँ ये जना गुरु वास्ते।
- 1:16:00और कृष्ण कहते। हैं, जो दूसरे का सुमन करता है।
- 1:16:04वह मुझे तक नहीं पहुँचता अगर कोई व्यक्ति दूसरे का सुमन करके करना
- 1:16:12छोड़ दे और सिर्फ मात्र मेरा स्मरण करे।
- 1:16:19अन्नन्या चिंतित तो माँ ये जनाह परु पास्ते तेशाम नित्यभुक्ता नाम
- 1:16:25योग मैं उसकी। ज़िन्दगी की।
- 1:16:30बागडोर अपने हाथों में ले लेता हूँ, फिर मैं चलाता हूँ उसके जीवन
- 1:16:35की नैया। मैं हो जाता हूँ उसके नाव के
- 1:16:38खवैया। तुम सोंक दो, उसके हाथों में
- 1:16:43बड़ा। मज़ा है बड़ा मज़ा है, बहारे हैं
- 1:16:50ठंडी हवाएं हैं आग में मत जलो इस नर के।
- 1:16:55स्वर्ग के उस दरवाजे पे पहुंचो जहाँ शीतल ठंडी हवाएं बहती हैं और
- 1:17:02बड़ी बड़ी आनंददायक है धन्यवाद।