Latest / Baba ji Vijay Vats / 11 Apr 25 - कर्मों को करने में हम स्वतंत्र हैं या परतंत्र? क्या समझ से रहस्य में उतरा जा सकता है? Karma Theory
Transcript
- 0:02बाबा जी, आपने कहा कि आपका नेपाल के साथ बड़ा पुराना गहरा संबंध
- 0:14है, कृपया करके हम अज्ञानियों। थोड़ा विस्तार देने की चेष्टा
- 0:28करेगा। नेपाल के लक्ष्मी वंश में।
- 1:13मुख्य रूप से कार्य कर रहा था मुख्य सेनाधिकारी था नेपाल में
- 1:32लक्ष्मी वंश। लेकिन मैं तुम्हें बताऊँ कि मैं
- 1:38लिखी हुई वंश से नहीं था, उसके बावजूद राजा ने मुझे गद्दी का
- 1:50बारिश बना दिया। मैंने बड़ा प्रयास किया, बड़ी
- 1:57संपन्नता लेके आया। हम ये कह सकते हैं कि किसी वक्त
- 2:08भारत सोने की चिड़िया। अंशु वर्मा मेरा नाम था, मैंने
- 2:27काफी पहले से राज़ संभाल लिया था। राजा की गिरती हुई सेहत,
- 2:39अस्वस्थता और मुझ पर भरोसा अपने वंश का ना होते हुए भी उन्होंने
- 2:51मुझे गद्दी सुना। उससे पहले मैं बहुत सेवा कर चुका
- 3:01था, लेकिन करीब सातवीं शताब्दी के शुरुआत में अगर सही से मैं याद
- 3:12करूँ तो 60456। इसके आसपास लेके 621 22 तक मैंने
- 3:28रच किया। इसी दौरान मुझसे एक पाप हो गया।
- 3:39बड़ा न्याय पी रहा राजा था किसी से कभी वजीकी नहीं करता था जुल्म
- 3:53और जुल्म की इम्तहा। तो मेरी किताब में ही नहीं थी
- 4:01द्यादूता करुणा इसका प्रभाव तो सैकड़ों हजारों वर्षों से मेरे
- 4:10संग चला आ रहा है। राजपाट के दौरान शायद राजा का नाम
- 4:28शिवदेव था। जहाँ तक मुझे याद आता है,
- 4:39उन्होंने मुझे गद्दी शौक दी। जब्द की उनकी अस्वस्थता की हालत
- 4:43में भी गद्दी में ही समर्पित। विधिवत रूप से उन्होंने 60456
- 4:51यहाँ मुझे गद्दी सौंप दी और मैंने करीब 620 21 तक राज्य किया।
- 5:01विधि। उसके बाद गद्दी मैंने भी किसी को
- 5:08सौंप दी है। बात को लंबी न करें।
- 5:14इस दौरान मैंने एक निर अपराधी व्यक्ति को घोर दंड दिया।
- 5:21प्रताड़ित? बड़ा तड़पा थी मारा क्योंकि उससे
- 5:26मेरी जाती दुश्मनी थी और उसके मरने से उसका परिवार का इतना हजूम
- 5:43बहुत बड़ा परिवार था उसका। करीब 200 के गरीब लोग प्रभावित
- 5:50हुए। जिनने मुझे बदुआइन की जो तड़प के
- 5:57दुखी हुए और वो सारा कुछ मिल मिला के मेरे लिए एक विशाल पत्थर।
- 6:07कर्मों का पत्थर बन गया पर वो इतना भारी पत्थर था कि वो मेरे
- 6:15कर्मों की तलहटी में जा बरसा। मैंने आपसे पहले भी कहा, कर्मों
- 6:21की थियरी में। फल के कर्म सबसे पहले भुगता लिए
- 6:27जाते हैं प्रकृति के द्वारा जबकि हेवी लोडेड कर्म बहुत भारी कर्म
- 6:37बहुत बाद में भुगताए जाते हैं। अब लोग मुझसे पूछ लेते हैं बाबा?
- 6:41ये इतना पाप करते हैं लोग भगवान इनको दंड नहीं देता भाई पाप इतने
- 6:48हैं कि ज्यादा गहरे में बैठ गए हैं इनका दंड तो मिलेगा मिला शक
- 6:57लेकिन शायद आपकी आँखों के सामने न मिले।
- 7:01अब आज तक मुझे उसका धन मिलेगा। धीरे धीरे भुगता भी रहे हैं बाबा
- 7:15ये मेरा इतिहास था। आपका प्रश्न पढ़ा।
- 7:19सरल और संक्षिप्त था और मैंने संक्षिप्त उत्तर दे दिया।
- 7:30जैसे भारत में स्वर्ण योग था, वैसे ही मेरे उस राजकाज में।
- 7:38नेपाल के स्वर्ण युग को आप कह सकते हो जनता खुशहाल थी, बहुत
- 7:44खुशहाल थी, किसी चीज़ की कोई कमी ना थी, मैंने डिक्टेटरशिप कभी
- 7:50नहीं की थी। दोस्ताना व्यवहार था मेरा अक्सर
- 7:55हम मफलों में बैठते थे। निर्वाह पर शुरू से ही राजा के
- 8:04विष्णु की पूजा अवतार समझ के विष्णु की पूजा की जाती है।
- 8:13यही सभी राजाओं के साथ होता है। परंपरा के अनुसार मेरा समर्थन
- 8:22मैंने एक संक्षिप्त में तुम्हे बता दिया।
- 8:27कर्मों का फल देर अवैध बोगुना होता है, हल्के कर्म जल्दी भुगता
- 8:34लिए जाते हैं। लेकिन बहुत भारी क्रम अंत में
- 8:39भोगने पड़ते हैं, पत्थर की तरह नीचे बैठ जाते हैं, जैसे समुद्र
- 8:48में बहुत भारी पत्थर तलहटी में बैठ जाते।
- 8:54अब कब समुद्र खाली हो और कब हो पत्थर?
- 9:00इसलिए मुक्त होने के बाद आपको एक और महात्मा बुद्ध एक और कारण से
- 9:12भी रुपये हो। करुणा तो उसका कारण है ही, लेकिन
- 9:20कुछ ऐसे बहुत भारी पाप हैं क्योंकि अभी उजागर नहीं हो रहा
- 9:28बही खाता बंद करके जाना होता है। इसी कारण से उन्हें जन्म नहीं दे
- 9:35रही। प्रकृति सहायता नहीं अन्यथा
- 9:39प्रकृति के लिए कोई मुश्किल नहीं है।
- 9:43बुद्धि जैसे लोगों को उदारना तो कृष्ण जैसे लोगों को उधार देती
- 9:48है। ईश्वर की सृष्टि में कुछ भी असंभव
- 9:53नहीं है। कब का उतार दिया गया होता?
- 9:57कुछ लोगों ने कोशिश भी की बुद्ध को मैत्री के रूप में उतारने की
- 10:03लेकिन असफल रहे उसका बहुत गहरा कारण शायद।
- 10:09बस की बात है, बहुत गहरे में अनुभव से देखा जाता है तो शक्ति
- 10:21का पूर्ण समझाया जाता है तो महात्मा बुद्ध के भी पिछले जन्मों
- 10:27के। बहुत भारी कर्म भुगतने शेष हैं और
- 10:34अभी जो उन्होंने पाया एनलाइटनमेंट में उसकी करुणा के कारण तो वो
- 10:40रुके ही हुए हैं। ये दो कारण हैं।
- 10:46करुणा के कारण रुके हैं, लेकिन अगर करुणा न भी रहे तो भोगों को
- 10:54भोगने के कारण खुद को अभी और रुकना पड़ेगा।
- 11:02सुख सुख की बातों मैं आपको समझा रहा हूँ।
- 11:12एक क्वेश्चन पूछा है कि आ के शिष्य आपके इतने मुखर बोलने के
- 11:24बाद भी द्रविड़ता से बोलने के बाद भी?
- 11:31बहुत से लोग पूजा पाठ, व्रत, उपवास, देवी देवताओं के पूजा,
- 11:46अर्चन, क्षुभचार पूजन। भजन कीर्तन जब छूट नहीं रहे क्या
- 11:56कारण और आप रोकते हैं? पहली बात तो मैं गुरु हूँ,
- 12:11तानाशाह नहीं। रोकूंगा।
- 12:14तुम्हें कभी भी नहीं सत्य बदला दूंगा जो जब जब भी मान जाए जब
- 12:24जागे तभी सभी। अगर कोई देवी देवताओं की पूजा
- 12:29करता है तो मैं उसको मंदिर से या मसल से कहीं से वापस बुला के ला
- 12:35नहीं सकता। क्या मेरी फितरत नहीं है?
- 12:38मुझे करना भी नहीं चाहिए और संत लोग ऐसा करते हैं।
- 12:47दूसरी बात, एक बार जीस सब रिहाद आनंद की मैं बात करता हूँ वहाँ तक
- 12:56तो ये पहुंचे नहीं और क्षुद्र आनन्दों को मैं रोक दूँ तो मैं
- 13:04जानता हूँ इनका हाल क्या है? तो इसलिए मैं चाहता हूँ कि ये बने
- 13:13रहें। शूत्र भोगों को भोगते रहे अगर
- 13:17किसी देवी देवता की पूजा अर्चना, उपासना कहीं तीर्थ।
- 13:27कहीं कोई हज जाने से किसी के मन को सुकून मिलता है।
- 13:33तब मैं उसे इसलिए नहीं रोकता क्योंकि इसको अभी बड़ा आनंद नहीं
- 13:40मिला, मजबूरी है। बड़ा आनंद मिला नहीं छोटी खुशी से
- 13:47मैं रोक दूँ, यह उसके साथ अन्याय होगा तो इसलिए मैं करने देता हूँ
- 13:55कभी तो भ्रम टूटेगा, जब टूटेगा तो खुद ही बंद हो जाएगा।
- 14:06इसलिए मैं रोकता जब मेरी बात इनके हृदय में उतर गई और इनकी सोचने
- 14:16समझने की शक्ति में सटीक बैठ गई। गहरी उतर गई।
- 14:22रहस्य में उतर गई तो फिर इनको बंद नहीं करना होगा, बंद हो जाएगा।
- 14:29बहुत से लोग आज जाप नहीं करते, बंद कर दिया।
- 14:35लेकिन अगर जाप करते हैं तो मैं रोकता हूँ मैं तो गायत्री मंत्र
- 14:41खुद भी देता हूँ। लेकिन साथ में वार न कर देता हूँ
- 14:47कि बिना कारण के इसको प्रयोग न किया जाए अन्यथा यह विपरीत
- 14:51बढ़ेगा। अभी थोड़े दिन पहले मेरे पास
- 14:57मैसेज आया बाबा मैं गायत्री मंत्र का जाप करता था।
- 15:00गायत्री परिवार कोई हो गया हो उससे जुड़ा हुआ था, लेकिन जैसे ही
- 15:05मैंने गायत्री मंत्र का जाप करना शुरू कर दिया 2 दिन आने शुरू हो
- 15:09गया। पूरा वक्त सब जगह से कंगाली,
- 15:14मानसिक वेदना अभाव। शरिर, कष्ट रोग घर जैसे नर्क बन
- 15:26गया हो। ये ऐसा क्यों है बाबा जब ये मंत्र
- 15:30इतना शक्तिशाली है इनका पहली बात तो ये है कि ये मंत्र जो आपका
- 15:38परिवार देता है गायत्री परिवार वो पूर्ण नहीं जहाँ तक मैं समझता
- 15:43हूँ, मैंने वो मंत्र देखा तो नहीं।
- 15:48दूसरा गायत्री मंत्र जैसे कमजोर व्यक्ति घुमार व्यक्ति घी पी ले।
- 15:57क्या हो आप नवजात शिष्य को पाप भर भी बलाद हो क्या हो?
- 16:07माजना नहीं है डाइजेस्टिक तो मैं सबसे पहले आगाह करता हूँ गायत्री
- 16:15मंत्र सिर्फ उस वक्त जपना। जपना इसका अपना एक फायदा है।
- 16:27परमात्मा की वृहद सृष्टि में बड़े महिम दागे, जिनको न खंगाला गया।
- 16:36और शायद ना खंगाला जाएगा। अब मैं धागा भी बनाता हूँ।
- 16:482 दिन पहले मेरे पेट में बड़ा दर्द था, मैंने दो इन्जेक्शन
- 16:56लगवाए। डॉक्टर को भी।
- 16:59नहीं ठीक आया। मैंने अपनी धर्मपत्नी से कहा ऐसा
- 17:03करो, वो धागा जो मैंने बनाया, मेरे पांव को बांधो, वह भी चकित
- 17:13हुए। धागा उसने बांध दिया।
- 17:20धागा बांधने के मुश्किल से 10 मिनट बीते होंगे।
- 17:26दर्द गायब परमात्मा की सृष्टि में ये नहीं है ये कहना।
- 17:40मूलता से अतिरिक्त और कुछ भी अखंड हैं, मान्यताएँ हैं, लेकिन उन
- 17:48मान्यताओं में कहीं गहरे अर्थ हैं।
- 17:51हमारे करने में फर्क रह जाता है। मैं जाके तो मैं क्यों बनाता हूँ
- 18:01और अक्सर यहाँ के लोग बड़े पुराने 4050 वर्षों से मेरे से ले जाते
- 18:07हैं, यह भी एक विद्या है। लेकिन तुम इसे कहो कर ये टूने
- 18:18टोटके मढ़ी मसाने दागा। तभी ये व्यर्थ हैं, आपके लिए
- 18:24व्यर्थ हैं तो फिर आप डॉक्टरी इलाज करोगे।
- 18:33लेकिन और भी इलाज है परमात्मा की सृष्टि में दुखों का निवारण करने
- 18:39का, शारीरिक दुखों का निवारण करने का सिर्फ एक ढंग नहीं, अनेकों ढंग
- 18:46है। अब किसी को दर्द हो जाता है भी
- 18:51काम करती है। डाई साइक्लोन और मैकनैमी किसी भी
- 18:57काम करता है और एनालिस्ट भी काम कर जाता है।
- 19:01एंटीस कॉस्मेटिक भी काम कर जाता है।
- 19:04बहुत से है जो काम कर जाते है। और दर्द घना हो, न खत्म हुआ हो।
- 19:12अब देखिए फिर एंटीबॉट काम करता है।
- 19:15बैक्टीरियल इन्फेक्शन होगा, लेकिन हम इतनी गहरी बातों को समझ नहीं
- 19:21सकते पुरातन काल में। साइंस ने इतना खोजा नहीं था।
- 19:30आज बड़ी बड़ी मुश्किलें आ गई हैं। एवरेज आयु बढ़ रही है।
- 19:39इसका कारण सिर्फ साइंस का विकसित होना है।
- 19:42साइंस के दुष्प्रभाव नहीं होते। अच्छे प्रभाव में होता है।
- 19:49यही कारण है जब हम आजाद हुए जब हमारी एवरेज जीने की जो आयु थी वो
- 20:02करीब 3537 साल की कृति। आज करीब सख्त हो गए हैं।
- 20:13मैं तुम्हें ये नहीं कहता की जो कम जीते थे वो बुरे रहे नहीं।
- 20:22उनको अगला सर्विस मिल गया। घर ही तो बदलना होता है।
- 20:28यही तो कहा भगवान कृष्ण ने वासन की जीर्ण नीयता विहाय नवानि
- 20:34गृहणार्थी नरवपराणी तथा श्रीराणी विहाय गिरणा अनन्याणी संयराती
- 20:41नवानी। वश जैसे हम प्राणी वस्त्र के नए
- 20:45धारण कर देते हैं। दे ही इसी तरह प्राणी शरीर को
- 20:51छोड़कर न शरीर ग्रहण कर देता है। देखिए एक होती है समझ और एक होता
- 21:02है रहस्य। अब इस बात को आप ध्यान से समझ रहे
- 21:06ये समझ नहीं होगे। बुद्धि समझती है और जब तक तुम
- 21:14समझने की चेष्ट में संलग्न हो, वह सब्जेक्ट्स को तुम समझ पाते हो।
- 21:21तुम्हारी बुद्धि। विषयों को समझ पाती है।
- 21:25सब्जेक्ट फिजिक्स और केमिस्ट्री सिक्स, ये सब सब्जेक्ट्स हैं विषय
- 21:34तो ये समझ बुद्धि से आती है और बुद्धि का तर्क ऊपरी उब्रेता है।
- 21:42एक दूसरा तलह रहस्य। मैं जो बातें बोलता हूँ वो समझ के
- 21:50नहीं होती। अगर समझ की बातें सीखनी हो तो सर
- 21:55लोगों के पास जाने वो आपको अच्छे से समझा देंगे।
- 22:02मैं आपको बिलकुल सही दिशा दे रहा हूँ और अगर आप दो रस्ते है ऊब के
- 22:13जाना चाहते हो, तो फिर मेरे पास आ जाओ ऊब के।
- 22:21भोग के जाना चाहते हो तो फिर संसार में उतर जाओ के सर लोग
- 22:29तुम्हें भोगने के तरीके बताएं। यूपीएससी आईएएस वो बना देंगे, वो
- 22:36बना देंगे। ये हमारे सहायक हैं।
- 22:43रहस्य की बातें आपको आकर्षित तो बहुत करें लेकिन रहस्य में उतरने
- 22:53के लिए तुम समझ का सहारा देखते हो।
- 22:58यह नाम उनकन है इज़ इम्पॉसिबल, नेक्स्ट इम्पॉसिबल रहस्य बड़ा
- 23:07खूबसूरत है। रहस्य में खुशबूओं के बाग खेलते
- 23:13हैं। रहस्य में आनंद ही आनंद है मस्ती
- 23:18ही सरोध ही सरोध है। संतों ने इसका जगह जगह वर्णन किया
- 23:25है, लेकिन ये समझ से नहीं आएगा। मैंने सीधा सीधा इनको किया।
- 23:34समझ आपको सुख दे सकती हैं। रहस्य आपको आनंद और बड़े भज्जी की
- 23:43बात है। अगर आपने आनंद लेना है तो सुख का
- 23:50जिसे सुख होता है समझ इसका त्याग। तुम इतना दांव पे लगा नहीं सकते
- 24:02तुम कहते हो सुख है अभी तो कल को ऐसा ना हो धोबी का कुत्ता, ना घर
- 24:10का, ना काट ना खुदा ही मिला। नवसाले सनम न इधर के है, न उधर के
- 24:19है। तुम डर जाते हो और ये डर ही
- 24:24तुम्हें हजारों हज़ारों साल तक अटकाए रहता है, कभी तो साहस करना
- 24:31पड़ेगा। कब भी कर रहे रहस्य में उतरना
- 24:41तुम्हारा चरम लक्ष्य भी है और तुम्हारी जरूरत भी है।
- 24:51रहस्य सदा तुम्हें प्रभावित करता है एक छोटा बच्चा रहस्य से बड़ा
- 24:58खुश होता है। उसकी बुद्धि अभी डर में है, लेकिन
- 25:04तुम रहस्य से प्रेरित होते हो खींचते हो।
- 25:12लेकिन तुम सूखों के साधन जुटाने लगते हो, शंका घेर लेती है, कहीं
- 25:19ऐसा ना हो कि समझ भी छोड़ दूँ और पागल खाने में बंद कर दिया जाऊं।
- 25:28देखिए दांव पर तो डगाना ही होता है रहस्य में जाने के लिए जुआरी
- 25:39बनना पड़ेगा गैम्बलर तुम अगर कहो कि कुछ भी दाव पे लगाए देना।
- 25:50मैं रहस्य में उतर जाऊं जो की परंपरा से है आनंद है तो ये असंभव
- 25:56है। इन दोनों चीजों को ठीक से समझें,
- 26:03समझ तुम्हें सांसारिक सुख दे देगी।
- 26:07अगर सुख चाहिए तो बने रहना। अगर सुख से ऊब गए हो जो की 1 दिन
- 26:14ऊब जाता है अगर सुख से ऊब गए हो बार बार फिर वही भिन्डी फिर वही
- 26:26मूगी की दाल फिर वही रोटी। फिर वही मोली, फिर वही सलाद सुख
- 26:36देती है, लेकिन सुख से तुम ऊब जाते हो।
- 26:49समझ से सुख मिलता है या सुख के साथ दूसरा तन मैंने कहा रहस्य
- 27:01रहस्य में तुम जाओगे जब तुम समझ को छोड़ दोगे एक ही चीज़ रहती है।
- 27:09देखिए एक बड़ा प्यारा शब्द कबीर ने कहा जब मैं था याने समझ जब मैं
- 27:19था तब हरि नहीं तब आनंद नहीं था, सुख सा अब हरि है मैं ना।
- 27:29अब आनंद है, समझ नहीं है प्रेमकली अति सांकरी, बेरहे से इतना बारीक
- 27:39है तामे दो न समाये तुम समझ को साथ लेके।
- 27:47रहस्य में नहीं उतर सकते। किसी को हृदय पटर पर खोद लो।
- 27:57इसे रोज़ मैं बोलता हूँ और कमेंट्स फिर वही के वही डाक के
- 28:05तीन पाथ। बाबा यह समझ नहीं आया समझा दो
- 28:13पुत्र वह समझ में आता है नहीं जीस दिन तुम्हें ये समझा गया कि वह
- 28:20समझ में नहीं आता, उस दिन तुम रहस्य में उतरना शुरू हो जाओगे।
- 28:28एक छोटा सा रहस्य तुम रोज़ जाते हो पता नहीं होता तुम निद्रा में
- 28:31रोज़ जाते हो ना कहाँ जाते हो बताओ इतने घंटे बाहर तो इतने घंटे
- 28:41बैठे बैठे बोर हो जाओगे तुम? 1000 बार उठापटक करोगे, इधर
- 28:46देखोगे उधर बदले जाखोगे लेकिन रात को सोए सोए इतने घंटे बीत जाते
- 28:52हैं, तुम कोई बदले नहीं जा क्योंकि तुम रहस्य में उतर जाते
- 28:57हो तो बार बार मैं जिसकी बात करता हूँ।
- 29:08मैं छोटे सुख को छीनना नहीं है। तुम अगर कृष्ण की भक्ति कर रहे हो
- 29:16करते जाओ, मुझे कोई आपत्ति नहीं, मैं जानता हूँ ये तो कोई बात ना
- 29:24हुई हीरे तुमको। मिले ना कंकड़ पत्थर तुम छोड़ो
- 29:30नहीं एक बात मैं अच्छी तरह से जानता हूँ जीस दिन तुम्हें हीरे
- 29:37मिल गए कंकड़ पत्थर हाथ से छूट जाएंगे फिर तुम बंटे बच्चों वाले
- 29:45बंटे अब तुम बड़े हो गए हो। बच्चे थे, बंटो को संभाले थे,
- 29:50क्या आप भी संभाले हो? अगर संभाले हो तो तुम्हारा मैएंड
- 29:57विकसित नहीं हुआ, समझ से रहस्य में नहीं उतरा जाएगा।
- 30:11समझ तुम्हें सुख देती है और जो व्यक्ति सुख लेना जानता है मैं
- 30:16रोज़ रोज़ बोलता हूँ, कोई कहता बाबा आप अपने लफरे न बढ़ा रहे।
- 30:25अरे भाई मैं तुम्हें स्टेप ब्य स्टेप चलने को कहता हूँ, मेरे पास
- 30:32सिर्फ पीएचडी का खतरा है। इनके भीतर प्यास से जगी मेरे पास
- 30:41पानी है। पानी पिलादू का शीतल जल रोम रोम
- 30:48शांत हो जाएगा तू सूखा हुआ गला है उत्तर्भ हो जाएगा किसी भी मेरे
- 30:59लिस्टनर से। अगर मेरे पास आके कृष्ण जी की
- 31:05मूर्ति सजा ले और पूजा पाठ करें, मैं रोकूंगा नहीं, क्योंकि इसका
- 31:12सुख क्यूँ छीनू तो दो चार बूंद इसको सुख की मिलती है, वो भी छीनू
- 31:19बिलकुल लाचार। बिल्कुल बेजार नहीं ऐसा नहीं मैं
- 31:27करता इतना तो समझे है मेरे में पर मैं जानता हूँ जीस दिन तुम्हें वो
- 31:35आनंद की जुल्क मिल गई उस दिन सुख को पाने का साधन समझ।
- 31:43छूट जाएगा। तुम अपने आप छोड़ दोगे, जब मेरा
- 31:46काम नहीं है, मेरा काम सिर्फ तुम्हें हीरे हीरो का दर्शन कराना
- 31:50है और मैं ये भी जानता हूँ कि कंकड़ छोड़ जाएंगे।
- 31:58जब तुमने हीरे पाटे है इसलिए मैं रोकता नहीं किसी को।
- 32:03अतिसरक्षण और मैं रहस्य से बोलता हूँ और रहस्य की बातों का बुद्धि
- 32:13बड़े मज़े से मजाक उड़ा सकती है, इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ अगर
- 32:20तुम ऊब गए हो संसार से। थोड़ा थोड़ा ऊब गए हो तो भी तुम आ
- 32:29सकता हो, क्योंकि फिर जो तुम्हे तकनीक मैं दूंगा, उसे तुम्हारी
- 32:37प्यास जगेगी। बिरहा की अग्नि लगेंगी।
- 32:43और अग्नि सदा बढ़ती ही जाती है। अगर ऊबे नहीं, अभी कशिश्य है,
- 32:53संसार के तो फिर मत आना बिल्कुल मत आना और जिनमे में ही मैं ये
- 33:00देखता हूँ। इस संसार की कशिश है, प्रश्नों
- 33:05में ही उलझे होंगे सिर्फ उनको ही मैं कहता हूँ भाई अभी तुम सही जगह
- 33:16पे चले जाओ, सही जगह पे तुम आई। तुम्हारा ठिकाना कहीं और है?
- 33:27अब एक प्रश्न आपने कहा था, इसी तरह का एक और भी व्याख्या हुआ।
- 33:34मेरी ज़िन्दगी में बहुत वाक्य हुए ऐसे।
- 33:41जो प्रश्न कल आया था कि आपने कहा बाबा तीन बेटियां हैं, अब मैं
- 33:48क्या करूँ? मैं गौशाला मंदिर जाया करता था।
- 33:58आप सबको पता है बहुत साल बीत गए थे।
- 34:05वहाँ मैं काफी घंटे बिताया करती थी, कभी नहर के किनारे, कभी मंदिर
- 34:14में, कभी शंकर मंत्रालय में। लेकिन मेरा बहुधा वक्त दिन का।
- 34:23वहाँ बीतता था। रात को मैं बाबा धर्मदास की समाधि
- 34:28भी चलाया था। शायद मेरी याददाश्त अभी अगर ना
- 34:41भूली हो तो 1981 की ये घटना है। शायद 9 सितंबर के जब हिंद समाचार
- 34:57संभू के संस्थापक लाला जगत नारायण की हत्या कर दी गई थी।
- 35:06तो बड़े उपद्रव हो रहे थे। मंदिरों में गो मांस फेंक देना,
- 35:12सूअर का मांस फेंक देना इस तरह की तो इससे भावनाएँ भड़कती हैं,
- 35:22भावनाएँ भड़कती हैं तो सरकार ने। पुलिस के पहरे लगा हर वक्त पुलिस
- 35:32का बहरा होता है पर मैं जाया करता था एक पुलिस मिलाजम शायद उस वक्त
- 35:42होलदार की। उसके यहाँ लाल पुट्टी लगी होती
- 35:48थी। उसकी ड्यूटी लगा दियो अबे आता बस
- 36:01बैठना ही होता था, सुरक्षा देखना ही होता था, सिर्फ डर ही होता है।
- 36:09दिन भर रात वो वहीं रहता और मैं अक्सर वहीं रहता।
- 36:16धीरे धीरे वार्तालाप होता गया, प्रेम बढ़ता गया।
- 36:25नजदीकियां होती हैं और उसने मुझे गुरु मान लिया।
- 36:38हालांकि उस वक्त तक मैं समझता हूँ कि मुझे।
- 36:49ज्ञान नहीं हुआ था। क्या मैं 85 में हुआ ज्ञान, ये
- 36:55दुर्घटना, ये घटना लाला जगतनान की क्या सीन हुई?
- 37:01समृद्धि धोखा दे सकती है। वृद्ध हो गया अगर कहीं।
- 37:09समृद्धि धोखा दे दे तो तुम क्षमा करना।
- 37:18वह कुछ बातें मुझसे पूछने लगा। घर के सुख दुख सांझे करने लगा।
- 37:271 दिन उसके साथ उसका छोटा भाई आ गया।
- 37:30सबसे छोटा भाई। वह बीच वाला था और सबसे छोटा भाई
- 37:40और साथ में ले आया। उसने इंट्रोड्यूस करवाया।
- 37:44ये मेरा छोटा भाई है, वह भी अक्सर वो आ जाते तो मुझे या तो नहर के
- 37:56किनारे घूमते पाते या मंदिर केंद्र तक सुबह बैठने पाते या
- 38:02शंकर मंदिर में पाते। यही था मेरा पड़ाव धीरे धीरे आने
- 38:22लगा वह 1 दिन वो दोनों भाई मेरे पास घर आए।
- 38:29मुझे कहने लगे बाबा हमारे बड़े भईया ने इस छोटे भईया का रिश्ता
- 38:42कहीं तय कर दिया। थोड़ा सा बता दो देख के आप बता
- 38:50देते हो वहाँ पूछने आ जाते हो मेरे पास बता दो, कैसा रहेगा?
- 39:02अब यहाँ से बात समझी ना? अब तक भूमिका थी।
- 39:13मैंने कहा मैं बताता हूँ मैंने पापा से कुछ यह जो रिश्ते की बात
- 39:25कर रही हैं। पक्का हुआ या नहीं हुआ?
- 39:30बड़ों की तो जुबां नहीं होती है। कुछ जरूरी थोड़ा है कि कुछ
- 39:37वस्तुओं का आदान प्रदान करके लोगों को बुलाया है।
- 39:43बड़े भाई ने कह दिया और ठीक है, कह दिया उनके परिवार में।
- 39:49ये परंपरा बहुत ऊपरानी है कि बड़ों के आदेश से छोटे चलते है वो
- 39:58बड़ा चाहे बुद्धू ही मैंने बहुत से बड़े भाई लोगों के जेलों में
- 40:07सड़क रखे। और बहुत से पागल खानों में इस तरह
- 40:13की कोई परंपरा होनी नहीं चाहिए। बीच बीच में शब्द में बोल क्या
- 40:17जाता हूँ? लेकिन उनकी परंपरा थी।
- 40:24मैंने बाबा से पूछा बाबा कहते ठीक रहेगा?
- 40:29लेकिन बाबा देखो मुझे शुभ ने कभी बाबा ही कहा सदा मैंने कभी इतना
- 40:43अच्छा नहीं दिया जो मन करे कह दी। पुत्र कह रहे बाबा के पास बाप मत
- 40:53कहें, क्यों मैं नहीं हूँ? पूछा मैंने बाबा से उसी तल पर
- 41:03जाकर पूछा जाता है जिसका मैं? पहले जिक्र कर सको, बाबा बोले ठीक
- 41:10रहेगा, लेकिन इन दोनों के संबंध से दो पुत्रियां पैदा जैसे कल के
- 41:21प्रश्न। मैंने कहा देखो ठीक रहेगा कर और
- 41:36कुछ कहा बाबा ने, मैंने कहा कहा भी दो पुत्रियां पैदा होंगी वह तो
- 41:45थर्राया बाबा। हमारे घर में तो पुत्रियां पहले
- 41:49ही पांच भाई थे। बड़े भाई के पुत्री हैं, उससे
- 41:56छोटे के दो पुत्रियां हैं। उससे छोटे के दो पुत्रियां हैं।
- 42:03उससे छोटे के कोई औलाद ही नहीं है।
- 42:06पर उससे छोटा मैं हूँ। हमारे घर में तो पुत्रियां की
- 42:11पहले ही बहुत भीड़ है कभी से तुम देखो मैंने तो तुम्हें बता दिया।
- 42:24उन्होंने गुफ्तगू की। तुम ही बताओ बाबा नहीं, मैं
- 42:32तुम्हारी ज़िन्दगी में कोई दखलंदाजी नहीं हूँ।
- 42:37प्रत्येक व्यक्ति स्वतंत्र है अपना फैसला लेने के लिए किसी को
- 42:41पुतरे हमें अच्छे लगते हैं। किसी को पुत्र ही अच्छे लगते हैं,
- 42:47तरह तरह के लोग आते हैं। मेरा भाई अमेरिका में हार्ट
- 42:50स्पेशलिस्ट था। सुप्रीमटेंडेंट इंडियन एस्टेट के
- 42:55एक बहुत बड़े हॉस्पिटल में है, इसलिए कोरोना काल में उनकी मृत्यु
- 43:01हुई। मुझे कहा कृति से की जब हम वहाँ
- 43:06पर लैंगिंग पता करना अपराध है, प्रभा पर भारतीय भी है, अंग्रेजी
- 43:16भी है मुझसे कहता भैया यहाँ पर जब हम किसी को लिख के देते हैं।
- 43:24अंग्रेज को बेबी व्हाई तो वे नाक घूँसकोड लेता है जब हम लिख देते
- 43:31हैं बेबी गर्ल, बड़ा खुश मिठाई बांटते हैं और अगर।
- 43:42ये दुष्ट भारतीय ऐसे ही बोला फिर इनको लिख दे बेबी गर्ल तो इनकी
- 43:50जान की आफत हो जाती है और अगर लिख दे बेबी व्हाई तो फिर ये प्रसाद
- 43:57बांटते है, मिठाई खिलाते है, हमें तो मिठाई में ही जाते है।
- 44:06अपनी अपनी इच्छा संस्कृति अकाउंट करते हैं।
- 44:14कहता बाबा हमारे तो पहले ही लड़कियां हैं नहीं नहीं कभी ये अब
- 44:21तुम देखो। तुम यहाँ शादी कर लो, देखो बड़े
- 44:31भाई का हमारे घर में आज्ञा की तरह सम्मान होता है तो मैंने कहा
- 44:38आज्ञा पुगाओ मैंने कब रोका तुमने ये पूछा आखिर?
- 44:47लेकिन दोनों ने राय की राय करके ये फैसला किया कि हम यहाँ शादी
- 44:53नहीं करेंगे, हम कहीं और करेंगे। अपने बड़े भाई को बताया कि नहीं
- 45:00करेंगे शादी? वो कहते मैंने जुबान दे दी, कहता
- 45:04दे दी तो दे दी भाई हम क्या करें? हम दो लड़कियों को मैं नहीं पाल
- 45:08सकता। हालांकि सरकारी नौकरी कर सकते
- 45:22भाई से नाराजगी हुई। रिश्ते और आते चले गए।
- 45:31एक रिश्ता आया, उन्होंने मुझे बताया शायद धुंदली समृद्धि।
- 45:39शायद मैंने उस लड़की की फोटो भी देखी।
- 45:47मैंने बाबा से पूछा ये कैसे कह तो बाबा इसके दो पुत्र होंगे, वैसे
- 45:56ठीक रहेगा, मारकाट खूब होगी। इनके घरों में चलती है।
- 46:04और मार काट तो ऐसी चलती है की अगर किसी ने कहा मैं लाख रुपए लगाऊंगा
- 46:13शादी में और उसने 10,000 लगा दिया तो ये बेल्टों से गुटते हैं उसे।
- 46:22ऐसा सतयुग है, इनके घर में मैं सत्य कह रहा हूँ तो मैं जूते उठा
- 46:31लेंगे, बस स्त्री होनी चाहिए जैसे कि स्त्री में जीवन नहीं होता।
- 46:43और पीटने लग जाएंगे। छोटे भाई की घरवाली के पास बड़े
- 46:47भाई बड़ा भाई आ जाए, वो पूछेगा ये यहाँ सफाई क्यों नहीं हुई?
- 46:54यहाँ सफाई क्यों नहीं हुई? ऐसा कुछ डिक्टेटरशिप तानाशाही
- 47:02माहौल है, कुछ करना है मुझे पता नहीं ये सब बातें मुझे बाद में
- 47:08पता चली क्योंकि ये मैं अब बस है तो पूछ नहीं सकता जो मुख्य बात
- 47:17थी। किसके दो बेटे होंगे, लोग खा गए
- 47:25या पता नहीं क्या हुआ? उन्होंने शादी वहाँ तय कर दी जहाँ
- 47:34दो बेटे होने थे। बड़े भाई का तो बड़ा गुस्सा है,
- 47:40परंपराएं टूट रही है, छोटे की इतनी मज़ा हो रहा है मेरा हुक्म
- 47:49मैंने जुबान दे दी। जुबान की कीमत है भाई तो उसके
- 47:54बड़े बेटे की शादी और। शादी ऐसी जगह हुई जहाँ पर 2025
- 48:03किला जमीन थी और दो बहनें थीं। पुत्र कोई नहीं तो उनके एक शब्द
- 48:14है सुन लेना। गौर से वो कहते है, हम लड़कियों
- 48:18के साथ शादी नहीं करते। हम जमीनों के साथ साथ मैंने कहा
- 48:24फिर जमीनों से संभोग करते बच्चे पैदा, फिर उनके पास कोई जवाब
- 48:30नहीं। अगर जमीनों से ही शादी करते हो तो
- 48:35जमीनों से ही संबंध होना। और जमीनों से ही बच्चे को दिया
- 48:40करो फिर स्त्रियों को डालते क्यों हो?
- 48:45और संयोग कुछ ऐसा बीड़ा की दो पुत्रियां का बाप यानी उसका ससुर।
- 48:57चल बसा कोई मरना आदमी के हाथ में तो नहीं होता वो छोटी को कुछ दे
- 49:03के नहीं क्या कोई छोटी बड़ी में एज का बड़ा गैप था?
- 49:07उसका कोई कसूर भी ना था बेचारे का तो फिर क्या होता मैं आपको बताता
- 49:17हूँ। मेरे आंसू निकल जाते हैं, घर दर्द
- 49:20होने लगता है, तंखा से काम नहीं चलता जबकि तनखा से पेट भर जाता
- 49:29है। आज लोग तनख्वाह ही तो मांगते हैं।
- 49:31इनको ठंडी के अंदर ठंडे पानी की बौछारें कराई जाती हैं।
- 49:36ये देखो ज़रा हरियाणा में। तो सरकार तुम्हें नौकरी दे दिया
- 49:43है। पक्की पेंशन भी मिलेगा।
- 49:49ओल्ड पेंशन स्कीम आखिर तक मरते दम तक सरकार तुम्हें पेंशन देगी।
- 49:58लेकिन पेट भर जाता है तमन्नाए नहीं भरती तो ऐसे ही कुछ उनके घर
- 50:05में हुआ। आज भी हो रहा है मैं बात को आगे
- 50:11ना भरु। उन्होंने चुन लिया बड़ा भाई बड़ा
- 50:16उससे हुआ आँखें लाल जैसी चाइना को दुखानी है अरे भाई मैंने
- 50:25तुम्हारा। मैंने कुछ कहा है।
- 50:30उन्होंने पूछा वो ना पूछते, उनको रुको तुम्हारा भाई मैंने कहा जो
- 50:38अगर वो सत्य ना हो तो तुम मुझे दंडित कर देना, ये भी व्यर्थ है
- 50:45क्योंकि मैंने उनसे कुछ लिया तो है नहीं।
- 50:49कोई मूर्ख नहीं बनाया, लेकिन वह तो था कि लाल आँखें लिए मेरे पास
- 50:58आ गया। बाबा तुम भगवान हो, मैंने कहा
- 51:00नहीं तो फिर तुम कैसे कह सकते हो कि उसके दो लड़कियां होंगी?
- 51:07और इसके दो लड़के होंगे मैंने का भाई आज मेरे पास इसके अलावा कोई
- 51:17जवाब हो सकता है ज़रा सोच के बताओ चॉइस तुम्हारी।
- 51:26कहते हैं बाबा चलो मैं अपनी जुबान को भी जुबान कर देता हूँ, मेरी
- 51:33मिट्टी पूरी तो हो जाएगी लेकिन बाबा एक बात का ध्यान रखना, शादी
- 51:40यहाँ कर देते हैं हम। लेकिन अगर इससे संतान लड़की हुई
- 51:48तो फिर आपको दंड? मैंने कहा, मेरा दंड मेरे यहाँ
- 51:53बीजड़ वहाँ में गाँधी छौंक ले, वहाँ मुझे ले जाना, टांग देना,
- 52:00मेरी गर्दन उड़ा देना। इससे ज्यादा कोई क्या कहेगा?
- 52:05कोई भी नहीं लिया सीवर की फीस भी नहीं लेता ना बता दिया तुमने पूछा
- 52:18प्रेम था बड़े भाई से? कथागर ना हुई तो दो बेटे ना हुए
- 52:27तो मैंने कहा मेरी घर क्यों उड़ा देना?
- 52:31गाँधी चौक में मैं लिख के दे दूंगा जब फिर तुम मुझे खुद ही
- 52:37तलवार दे देना मैं खुद ही अपने आपको उड़ा दूंगा तुम्हारे पे कोई।
- 52:42अब शेप भी नहीं आएगा और तुम्हारी इच्छा भी पूरी हो जाएगी।
- 52:50लेकिन एक बात ध्यान में रखना वो कद में तो मेरे सोचो।
- 53:01लेकिन कुछ लंबे कध वाले हम बुद्धि वाले होते हैं फ्रस्ट्रेटेड मैएंड
- 53:14जो व्यक्ति रिश्वत लेता है, वह सिर्फ मन नहीं हो सकता।
- 53:21इस बात को नोट कर लेना आप क्योंकि मैंने पहले भी बताया, ओह का खून
- 53:31किसी को लगा दो चलेगा, लेकिन ओह ओह के खून अगर ए बी लगा दिया ए
- 53:38लगा दिया तो वह मर गया। बस ये रिश्वत का मतलब यही है ये
- 53:43मर जाती है जमीन इनको हरियाली ही हरियाली नजर आती है, ये अंधे हो
- 53:52जाते है सावन के अंधे। बात हुई भी थी इतनी बात कहने के
- 54:00बाद और क्या ये मेरी जान लेंगे चले गए जाना पड़ा शादी तय हो गई,
- 54:07शादी हो गई मैं तो आई वास् कन्फ्यूज्ड क्वाइट कन्फ्यूज्ड
- 54:19शायद दो 4 साल बीत गए होंगे। मुझे तो याद भी नहीं था।
- 54:24मैं तो भूल गया क्योंकि जब बाबा से पूछा और कभी गलत तो होता नहीं,
- 54:31तो फिक्र में क्यों मैंने कोई व्यवस्था थोड़ी बताई?
- 54:37यह तो कभी गलत नहीं है। शादी हो गयी 1 दिन बुझा रहा है
- 54:49मिठाई का डब्बा बाबा बेटा इस तारीख को हुआ है।
- 54:59थोड़ी सी पत्री बना दो और ये 150 दक्षिणा ले लो कोई दक्षिणा दे दे
- 55:14तो क्या मैं उसके मुँह के ऊपर भरु?
- 55:18नहीं तो फिर ज्यादा तो ही ना हो जाएगी।
- 55:20वो कहेंगे हमारी तो भावना है आहत कर दिया, बड़ी श्रद्धा से दी तो
- 55:30भाई मजबूरी है मांगते हैं। इन आचार्यों के चैनल पर तुम बराबर
- 55:42ये बोलते रहेंगे, वहाँ बराबर चलता रहेगा।
- 55:46कृपया संस्था को मजबूत बनाएं, कृपया आर्थिक सहयोग दें।
- 55:57लेकिन यहाँ ऐसा कुछ नहीं होता, नहीं तो आपका हृदय कहता है तो आप
- 56:08भेंट कर देते हो। मैं उसे स्वीकार कर देता हूँ।
- 56:18शादी हो गयी, बच्चा हो गया, बेटा हो गया, प्रथम बेटा हो गया, मैं
- 56:22निधनपत्री बना के दे गयी पर मैं जान गया ये व्यक्ति एक नंबर का
- 56:33लफण्ड होगा। क्योंकि स्टार्स बताओ और ऐसी छोटी
- 56:42बात है तो बाबा ही से नहीं पूछो जाओ नहीं नहीं उसे रास्ते बनाने
- 56:49की चिष्टा की वो रास्ते पे आया है।
- 56:53शायद मैंने नहर में डूबने की बात आप सबको कह दी।
- 57:00एक मेरा पुत्र था कुणाल एक रोहित जो हमारा चैनल कंट्रोलर है और
- 57:07तीसरा व्यक्ति वह था जो उसका बड़ा बेटा था।
- 57:16मैं डूब रहा था, डूब गया था ना तो कोई तैर न जानता था।
- 57:22ठंडा मौसम 8 जनवरी की ठंडी शाम। जैसा लगा जैसे शरीर जम गया, मेरा
- 57:38हृदय ख्याल लेकिन वो भी मजबूर थे क्योंकि ना तो कोई तैर ना जानते
- 57:46ना ही उनके पास कोई पगड़ी, कोई रस्सी कुछ भी नहीं।
- 57:51इसलिए सर पे पगड़ी वगैरह आवश्यकता को कभी जरूरत पड़ जाती।
- 57:56अब मैं हर वक्त ऊँगली में रखता हूँ, कहीं कोई ना जाने जरूरत पड़
- 58:00जाए। देखते रहे मेरा बेटा तो थर्रा रहा
- 58:07था क्योंकि मैं तो उसका सब खुश था, उसका तो जहान लूट रहा था।
- 58:14उसकी आँखों के सामने तो पुत्र से पुत्र मेरा बात निधन हो गया, छोटा
- 58:25मेरा साथ था, पुना छर्रा रहा था, वो तो उतर भी नहीं सकता था?
- 58:35पक्ष में एक व्यक्ति वहाँ से गुजरा जो वहाँ का ही था।
- 58:39जमींदार रोज़ ऐसी घटनाएं देखते थे, उसे पता चला कि कोई व्यक्ति
- 58:45डूब गया है। उसने आकर देखा मावना किया।
- 58:50कहता देखो इस व्यक्ति को निकाल लो इस डैट और अगर आपने अभी डेड बॉडी
- 58:57न निकाली तो धीरे धीरे डेड बॉडी पानी के भीतर भीतर चली जाएगी और
- 59:04ये नहर बड़ी गाड़ी है। बच्ची 30 फुट फिर बड़ी मुश्किल हो
- 59:10जाएगी। जाएगी और यहाँ बड़े मगरमच्छ भी
- 59:12हैं। फिर आपको लाश भी नहीं मिली पर वो
- 59:17मैं ही था जो भीतर जा रहा था। मैंने किसी को नहीं कहा बचाओ और
- 59:27उनके पास मजबूरी वहाँ एक पुलिस वाला खड़ा तो उन्होंने कहा।
- 59:33बड़ी ईमानदारी से भाई के पगड़ी देते आदमी के जीवन का सवाल है,
- 59:40लेकिन कई बार इज्जत और ओहदा जिंदगी से ज्यादा कीमती हो जाते
- 59:45हैं। वह व्यक्ति कुछ ज्यादा है।
- 59:53इज्जत और पौधे का सेवक होगा तो उसने पगड़ी देने से स्पष्ट मना कर
- 59:59दिया। नहीं आदमी मरता है, मर जाए तो वह
- 1:00:07व्यक्ति। जब आया उसने देखा कुछ लक्षण होते
- 1:00:12हैं और बुलबुले उठने बंद हो जाते हैं।
- 1:00:15तो इसका मतलब व्यक्ति ने सांस लेना बंद कर दिया और व्यक्ति ने
- 1:00:19सांस लेना बंद कर दिया। इस डेड अब लाश है, डेड बॉडी है।
- 1:00:27तो उसने सभी को कहा मेरा पुत्र भी था, रोहित भी था और वह व्यक्ति भी
- 1:00:31था। हे बच्चा रोहित का क्लास से कह
- 1:00:40सकते हो आप? वो कहता है इसको निकाल लो, निकाले
- 1:00:53कैसे? किसी के पास कुछ नहीं, जो बताने
- 1:00:58आया था उसके पास भी पकड़ी। अब देखिए बुल प्ले निकलने बंद
- 1:01:07बहुत देर तक। और बिलकुल असमर्थ अवस्था में खड़े
- 1:01:15हुए तीनों लोग और भी बहुत से लोग आ गए आस पास, लेकिन किसी के पास
- 1:01:21कुछ नहीं। यहाँ तक के किसी स्त्री स्त्री थी
- 1:01:24नहीं, उसके पास चुन्नी भी नहीं। इतने में एक व्यक्ति है उसके पास
- 1:01:35रस्सि थी, रस्सि पकड़ाती थी झेलो इसको निकालो जल्दी इन सभी ने मिल
- 1:01:49के। वो जो तीसरा व्यक्ति बच्चा था वो
- 1:01:57भीतर उतरा, लेकिन सेफ्टी करके उतरे सब अच्छी तरह से भाग लिया
- 1:02:06कहीं मैं ना डूब जाऊं बाबा के साथ।
- 1:02:14सभी संभाले रहे सभी ने उसका भार अकेला थोड़ी जा सकता हूँ रस्सी
- 1:02:22थोड़ी बचा जो मर चूका है वो तो तुम्हारी रस्सी को भी नहीं
- 1:02:26पकड़ेगा पता ही नहीं उसे। और मैं आनंद से मैंने कोई
- 1:02:32चित्रकार नहीं किया, कोई फरियाद नहीं किया।
- 1:02:35अरे मरा बचा लो अरे कोई तनके का सहारा दे दो, कुछ नहीं आना
- 1:02:42स्वीकार कर लिया आज आखिरी दिन है पर महात्मा को नमस्कार किया।
- 1:02:47अलविदा। अच्छा ले, उसने हाथ पांव फुलाए और
- 1:03:02देखिए कुदरती प्रक्रिया उसके हाथ में मेरा मुँह डा गया।
- 1:03:10उसने वो पकड़ लिया। कसक है अगर ये अब यह हाथ से छूट
- 1:03:15गया फिर नहीं मिलेगा पर उसने कहा मुझे निकालो उसके साथ ही मैं बाबा
- 1:03:22को अच्छे से पकड़े रखता हूँ और तुम मुझे खींचो उन सभी ने।
- 1:03:29उसको भी खेचा और मुझे डेड बॉडी पर भी खेचा पानी से भर चुका था।
- 1:03:3512 हो गया था दोनों को खेचा, बाहर निकाला आई वॉज़ डेड ने।
- 1:03:50कुछ देर में हर्टपिट चल घटना का मैंने पहले जिक्र किया।
- 1:04:03पहले बेटे के जनों के बाद अब दूसरे बेटे का इंतजार था।
- 1:04:12पांच 4 साल बीत गए। 1 दिन फिर मिठाई का डब्बा आ गया
- 1:04:19सो ₹50 माथा टेक दिया, मैंने शहर से स्वीकार कर लिया, क्या खुशखबरी
- 1:04:30है? दूसरा, मैंने कहा, चलो।
- 1:04:34मेरी गर्दन तो कुछ है बाबा की बताई हुई बातें हम अगर अपनी
- 1:04:48स्टोरी से कोई बात कह रहे है दैट कैन बी लॉन्ग।
- 1:04:53लेकिन बाबा से पूछी ये बातें कभी गलत नहीं होता उस पर जा कर इसलिए
- 1:04:59मैं तुम्हें कहता हूँ मत पूछो मत, तुम उस पर उतर जाओ और तुम्हें
- 1:05:06रोज़ मैं बताता हूँ कैसे जाओ उस पर।
- 1:05:10लेकिन तुम सब अटके पड़े हो और बहुत से लोग पहुंचने की कगार पे आ
- 1:05:16गए हैं। तीन व्यक्ति फुल एनलाइटनमेंट हो
- 1:05:19गए फुल एनलाइटन जो की होती ही नहीं।
- 1:05:24एचआर ए के हिसाब से। जब देखा ही नहीं बेचारो ने तो
- 1:05:29होती ही नहीं ठीक है, ईमानदार तो है तीन लोग एनलाइटन हो गए
- 1:05:35फिनलेंड्स है नॉर्वे से है अश्लील से है एक जेपानीज़ बस ग्रीन है।
- 1:05:48ये करीब 2022 लोग हैं और विदेशी ही हैं।
- 1:05:52विदेश ही इसलिए हैं के वहाँ रोटी पानी का फिक्र नहीं, भोग भोग लिया
- 1:06:01सब खुली व्यवस्था है। सब भोग लिया।
- 1:06:11इसलिए उनका बहुत ही वक्त सगा ज्यादा है, कुछ एक्स्ट्रा
- 1:06:18आर्डिनरीज अनुभव होने शुरू हो गए और अनुभव जब होते हैं आनंद के।
- 1:06:24आपको मैंने कहा वो खेच लेगा तुम्हें चम्बक है वो रहस्य आपको
- 1:06:29खेच लेता है, रहस्य बड़ा प्रबल है, दूसरा बेटा भी हो गया चलो सब
- 1:06:47ठीक है उनका। मैंने कहा भाई ये ऐसा ही होता है,
- 1:06:57चलते गए आना जाना शुरू हो गया, फिर तो दूसरे परिवार का भी हो
- 1:07:03चमत्कार। बुद्धूओं की माँ है इसको नोट
- 1:07:12करना। बस बुधु चमत्कार से प्रसन्न हो
- 1:07:16जाते हैं। वो चाहे हाथ की सफाई ना हो।
- 1:07:20मैं बहुत वर्षों तक लोगों को चमत्कार दिखाता रहा।
- 1:07:23आज भी तुम्हें मिलेंगे लोग। सैकड़ों काम जो मैं भूल गया, वो
- 1:07:30गिना देंगे। आपको खुश किस्मती से वध किस्मती
- 1:07:36से आप आए नहीं है अभी इतिहास जब मेरा लिखा जाएगा तो मैं कहता हूँ
- 1:07:42तुम्हें पूछना चाहिए आप। क्योंकि उन व्यक्तियों की गवाह ही
- 1:07:47होगी कि ऐसा हुआ एंड दैट वास् एक्सट्रॉर्डिनरी बाद में कोई
- 1:07:53फायदा नहीं, कोई गवाह नहीं है। अब पूछ लो ऐसे मैंने ड्रामे बहुत
- 1:08:03दिखाए हैं लोगों को। ड्रामा में तू कहता हूँ क्योंकि
- 1:08:09ये आदमी को उलझा देते हैं, ये होते हैं इंकार नहीं करते, लेकिन
- 1:08:17ये भटकाते हैं, बस तुम फैक्टरी खोल के पैसे कमा लेते हो।
- 1:08:23मान सम्मान कमा लेते हो बड़ी पोस्टों पर बैठ के बड़े वोदों पे
- 1:08:28सीएमपीएम बनके और जिनके पास सिद्धियां हैं वो सिद्धियों से
- 1:08:33कमा लेते हैं। बात ये है कि सांसारिक धन कमाते
- 1:08:36हैं, उसके पार नहीं जाते। ये मनीष कहते हैं कि एक घंटा हो
- 1:08:44गया भाई आप बंद मत कर देना कृपया करके आज इसको लंबी चलने देना, ठीक
- 1:08:51लंबी चलने तुम सुनने वाले बन जाओ। बहुत से लोग इस मनीष के बारे में
- 1:08:58पूछ लेते हैं मुझसे लक्ष्मी वंश में।
- 1:09:03जब राज़ था और मैं राजा था, तब का ही इसका ये मेरा सेवक रहा है,
- 1:09:10मेरे संग्रह है, लेकिन तब पता नहीं था क्योंकि पिछले जन्मों की
- 1:09:15रीढ़ जली इस जन्म में पता लगा इन सब का।
- 1:09:27मेरा इतना बोलने का मतलब सिर्फ यही बताना कि तुम्हारी च्वाइस
- 1:09:41तुम्हारा भाग्य निर्माण करती है। पहली वाले पुत्र ने पूछा मुझे?
- 1:09:53तो उसने प्रेम का चुनी और दूसरे वाले ने मुझपे यकीन किया दो बेटे
- 1:10:05हो गए, यकीन किया तो बेटे। ओके, उनके एक और भी भाई था जिसके
- 1:10:15उलाद मैंने उसे फल दिया। उसकी पुत्री हो गई।
- 1:10:24पता नहीं ये लोग कैसे सोचते हैं? लेकिन मैंने इनकी सोच से कुछ नहीं
- 1:10:33लेना। मैं शक्ति का वर्णन शक्ति की तरह
- 1:10:36करता हूँ। कोई मान ले तो भला नहीं मान ले तो
- 1:10:41और भी भला। मैंने बोला कि चॉइस अगर उस
- 1:10:48व्यक्ति की उस वक्त पारिवारिक परंपरा के हिसाब से ये हो गई होती
- 1:10:57कि हमने बड़ों का कहना ही मानना है तो फिर परिणाम कुछ और होते
- 1:11:03हैं। तुम्हारे डिसिशन्स तुम्हारे भाग्य
- 1:11:09का निर्माण करते हैं। उस वक्त उसने बगावत की उन बातों
- 1:11:22को तोड़ा उन प्रणालियाँ को तोड़ा। क्योंकि खुद के ऊपर पड़ गई थी और
- 1:11:29जब खुद के ऊपर पड़ती है तो ऊपर नालियां तोड़नी पड़ती है।
- 1:11:37क्योंकि बेरियाँ होंगी तो आज के जोग में फिर आप समझते हो जो
- 1:11:41हिंदुस्तान है ये अमेरिका तो है। कौन सा स्त्रियों की श्रद्धा की
- 1:11:58अपेक्षा हुई, शूद्रों की स्त्रियों की सदा की अपेक्षा हुई
- 1:12:04इस? सुंदर राष्ट्र में मैं इसे सुंदर
- 1:12:10नहीं पाऊंगा। ये कोई सुंदरता नहीं है।
- 1:12:13जहाँ भेदभाव की दृष्टि हो तो अगर वह व्यक्ति उस वक्त निर्णय कर
- 1:12:22लेता कि नहीं? मैंने अपने बड़े भाई की बात मानी,
- 1:12:28मैं नहीं बाबा की बात नहीं हूँ। ये बाबा तो ऐसे ही होते हैं और
- 1:12:35बाद में भी उसने कहा कि परमात्मा होता ही नहीं है, विचार बदलते
- 1:12:43रहते हैं। जब तक नहीं देखोगे, विचार बदलते
- 1:12:46ही रहेंगे। अपनी आँखों से देखना होता है तब
- 1:12:50अनुभव परिपक्व होता है जब तुम स्थिर मती होते हो, अनुभव से पहले
- 1:12:58तुम अस्थिर मती रहते हो। मैंने तुम्हें कहानी सुनाई और ये
- 1:13:06सत्य कहानी आज सभी लोग जिंदा हैं। इत्तेफ़ाक से ये खुशखबरी है।
- 1:13:21मैं किसी के विचारों को बदलता हूँ।
- 1:13:24मैंने कहा मेरे को यहाँ। कोई ज्योत बत्ती करता है नहीं रोक
- 1:13:30मैं कहता हूँ बस जो मैंने बताया वो करते हो, और फिर तुम जो
- 1:13:35तुम्हारी मान्यताएँ हैं, उसको भी करते रहो भाई अगर तुम्हें सुख
- 1:13:39मिलता है मुझे कोई। अगर उस वक्त वह व्यक्ति बड़े भाई
- 1:13:52की आज्ञा का पालन करके अपनी खुद की चॉइस ना मानता और उस लड़की से
- 1:14:04शादी कर लेता। अब ये अब की तो है नहीं।
- 1:14:09अब ये प्रश्न तो मन में आ सकता है कि अगर मैं उससे शादी कर लेता तो
- 1:14:15लड़कियां होती यह क्या पक्का है? मैंने कहा जब की ही नहीं शादी तो
- 1:14:22फिर पता क्या चले? या तो दोनों से ही शादी कर लेते
- 1:14:26तो पता चल जाता एक के बेटे होते एक के बेटे ना लेकिन तुमने ओख से
- 1:14:33क्यों? डा और तुम्हारी चॉइस तुम्हारे
- 1:14:37भाग्य का निर्माण करती है। इस चीज़ को मैं बार बार तो कह रहा
- 1:14:41हूँ ये कर्मों का मुख्य सिद्धांत। तुम इंडिपेंडेंट हो, अपना भाग्य
- 1:14:49का निर्माण करने में तुम कभी भी परतन्त्र नहीं हुए।
- 1:14:52मैंने पहले भी कहा था तुम सिर्फ परतन्त्र हो, जो तुमने कर दिया
- 1:14:57तुमने कतल कर दिया। तो तुम्हें जो भी होगा जेल होगी,
- 1:15:01फांसी होगी। 20 साल की उम्र का जो भी कुछ हो
- 1:15:05वो बस तुम गृहस्थ में आ गए, वो तो तुम्हें भुगतना है यहाँ तो तुम
- 1:15:12स्वतंत्र हो लेकिन अगला कर्म करने के लिए तुम स्वतंत्र हो।
- 1:15:22पिछले कर्मों के फल भोगने में तुम पर तंत्र हो वहाँ तुम्हारी कोई
- 1:15:30आज़ादी नहीं तो लोग मुझे पूछ लेते हैं हम।
- 1:15:35ये प्रीडेस्टाइन है या कुछ हमारी खुद के लिए प्रीडेस्टाइन दो भाई
- 1:15:40जो तुमने कर दिया वो प्रीडेस्टाइन है, उसका तो जज नेविडा करेगा,
- 1:15:49लेकिन आगे के लिए आपके हाथ के सीने नहीं बांधे, आप अभी से शुरू
- 1:15:54कर सकते हो। अच्छे कर्म करो, किसी का मन ना तो
- 1:15:58खाओ ये तुम कर सकते हो। क्या आपत्ति है?
- 1:16:09क्या मुश्किल है? अगर तुम चाहते हो हम सुखी रहे तो
- 1:16:13सुख बांटो। और अगर तुम चाहते हो हम दुखी रहे
- 1:16:17तो बस दुख बांटो। सीधा सा मैंने बताया आपको शास्त्र
- 1:16:21का सिद्धांत दुख दीन दुख होता है सुख दीन सुख हो मैंने दोनों
- 1:16:32उधारने आपको वतन। उसके बाद मैं थोड़ा सा खुद भी
- 1:16:40कन्फ़्यूज़न में था कन्फ़्यूज़न में इसलिए नहीं कि बाबा गलत बोलते
- 1:16:45हैं। मैं इस बात को संक्षेप में नहीं
- 1:16:49विस्तार से समझना चाहता था। बाबा।
- 1:16:54मुझे ये बताओ कि एक ही व्यक्ति के फिर भाग्य कहाँ गए जब उसकी शादी
- 1:17:01होती है एक से तो शादी करता वो दो बेटियां होंगी, तुम्हारे मन में
- 1:17:08भी आना चाहिए। जो प्रश्न और दूसरे से शादी करता
- 1:17:12तो दो बेटी होंगी। फिर ये क्या इसके पीछे का
- 1:17:17प्रोसेसर है? रहस्य क्या है?
- 1:17:19तो बाबा ने मुझे बताया मैं आपको बता रहा हूँ सुनने योग्य बात है
- 1:17:26ये अब इस वीडियो को कृपा करके पूरा सुन लेना या पूरा?
- 1:17:32रिकॉर्ड रख दे नारीधर बाबा से मैंने पूछा क्या फिर व्यक्ति के
- 1:17:41कर्म काउंटर नहीं होते? भाग्य काउंटर नहीं होता बाबा कहते
- 1:17:48भाग्य काउंटर होते हैं। लेकिन शादी के मसले में भाग्य एक
- 1:17:54कहानी होता दोनों का होता है। समझाई बात अब बाबा ने जो मेरे को
- 1:18:02सारी फिलॉसफी समझाई वो काफी लंबी जोड़ी है।
- 1:18:06महीनों सालों लगेंगे इसमें। लेकिन इतनी जल्दी मैं आपको
- 1:18:10संक्षेप में समरी बता सकता हूँ। अब समझिए इसको।
- 1:18:20वो कहते हैं कि पीला रंग प्रमुख है, इसको सुनते जाइए और दिमाग में
- 1:18:25उतारते जाइए। जैसे हम कहते हैं क्रोमोसोम एक्स
- 1:18:31क्रोमोसोम, एक्स क्रोमोसोम, साथ ही साथ मैं सेंट्रल को प्रभाष
- 1:18:35देता रहूँगा। बाबा कहते हैं पीला रंग पीला रंग।
- 1:18:48मेन है मेन और पीला रंग दो रंगों से मिल सकता है।
- 1:19:00तीन ही रंग है प्रमुख कौन कौन से पीला, लाल और नीला?
- 1:19:09ये बेसिक रंग है। पीला रंग अगर नीले से मिल जाए तो
- 1:19:19तीसरा रंग बनता है वो क्या हरा इसको फिर सुन लो।
- 1:19:27पीला रंग अगर पीला रंग अगर नीले से मिल जाए तो वह बन जाएगा।
- 1:19:36हर दोनों ये मुख्य रंग है तीन रंग मैंने मुख्य बताये पीला, नीला,
- 1:19:44लाल। पीला, नीले से मिल जाए तो हरा रंग
- 1:19:51बन जाएगा तो बेटा पैदा होगा और उसका सारा विज्ञान मेरे पास है।
- 1:20:01तो उन्होंने मुझे तो समझाया की मुझे बार बार पूछने की जरूरत ना
- 1:20:04पड़े। मैं फॉर्मूला ही दे देता हूँ।
- 1:20:09इसकी बड़ी व्याख्या गहन है। सारी एक वीडियो मैं नहीं बताई जा
- 1:20:13सकती ना आप सुन सकते हो और पीला रंग वो ही पीला रंग।
- 1:20:21अगर लाल के साथ मिल जाए तो बनता है नारंगी बात पीले रंग भी है लाल
- 1:20:34के साथ मिल जाए लाल भी बेसिक रंग है पीला, लाल, नीला।
- 1:20:41लाल से मिल जाए तो बन जाएगा नारंगी वो लड़की पे बात अब हम तो
- 1:20:50देख नहीं सकते हैं लेकिन उन्होंने सारा मेरे को ये ढांचा सेंटीफिक
- 1:20:57समझा दिया है। और मैं इसको ट्रांसफर कर रहा हूँ।
- 1:21:05बहुत सी जो मुख्य मुख्य चीजें हैं और मेरे जो करीब देखिए मेरे सबसे
- 1:21:10करीब तो मेरा पुत्र ही रहता है। कुणाल तो उसको ही मैं ट्रांसफर
- 1:21:15करता हूँ क्योंकि 24 घंटे मेरे पास अवेलेबल तो वो जो पहले आपने
- 1:21:24केस बताया जिससे मैंने कहा कि दोनों लड़कियां ही होंगी तो उसमें
- 1:21:33पीला रंग मिल रहा था। लाल रंग से नारंगी बन रहा था और
- 1:21:41दूसरे केस में पीला रंग मिल रहा था।
- 1:21:45नीले रंग से वो हरा हो रहा था। वह लड़का था।
- 1:21:52यह सेंटीफी का लक्ष्मी है क्योंकि शिव?
- 1:21:56उससे बड़ा साइंटिस्ट कोई भी नहीं। सारा खेल इन दो रंगों के मिलने का
- 1:22:07है। सारा बन जाए तो पुरुष।
- 1:22:14और नारंगी बन जाए तो इस तरह एक तीसरा रंग होता है, नहीं मिले तो
- 1:22:28अच्छा क्योंकि तीन मुख्य रंग मैंने बताये, नीला, लाल, नीला।
- 1:22:37अगर कहीं गलती से दुर्भाग्यवश नीला और लाल मिल जाए यानी के पीला
- 1:22:47ना हो, दोनों में लीला और लाल मिल जाए, वो क्या होगा?
- 1:22:57ट्रांसजेंडर पीले को छोड़कर जो बाकी के दो मुख्य रंग रह गए, नीला
- 1:23:09और लाल। अगर ये दो मिल गए तो ट्रांसजेंडर
- 1:23:19समझाती है आपको। बड़ा सर्ल करके बोल रहा हूँ, मुझे
- 1:23:25ये संदेह नहीं हुआ था। मैं सिर्फ इसका विस्तार जानना
- 1:23:28चाहता था कि बाबा ये है क्या सर तो उन्होंने मुझे क्योंकि वो तो
- 1:23:35समुद्र है, कभी खत्म नहीं हुआ और मैं समझाने की चेष्टा कर रहा हूँ।
- 1:23:40सभी कुछ बांट रहा हूँ, जो भी योग्य हैं उनको भी बांटता हूँ,
- 1:23:46आपको भी बताता हूँ और जो बहुत गहरी चीजें हैं जो वास्त हैं, वो
- 1:23:53मैं जो मेरे करीब हैं इस वक्त कुणाल मैं उसको बताती हूँ।
- 1:24:00वो सारा ज्ञान ये तो समुद्र है खत्म नहीं होगा न मेरे भीतर का, न
- 1:24:06बाबा के भीतर का। पर जब आप पहुँच जाओगे तो आपके
- 1:24:10भीतर का ज्ञान भी समाप्त नहीं होने को न कोई सदाबन।
- 1:24:15इस ढंग से ये कहा जाता है लेकिन इसको डिटरमाइन कौन करेगा?
- 1:24:23उसके लिए गुरु की आवश्यकता है। जन्मपत्री तो है तो कंप्यूटर से
- 1:24:32निकाल लो लेकिन पड़ेगा। वो बांचने वाला अगर सही नहीं है
- 1:24:38एस्ट्रोलॉजिस्ट तो फलादेश गलती निकलेगा।
- 1:24:45बांचने वाला सही होना चाहिए। ओके, दूसरी कहानी मैंने सुनाई है
- 1:24:51आपको। सारा ज्ञान मेरे हिसाब से ये
- 1:24:59तुम्हारे आउट ऑफ मैएंड हो लेकिन ये सारा विज्ञान आप समझ बड़े सरल
- 1:25:05तरीके से पाओगे कि खेल पीले रंग की है।
- 1:25:14पीला रंग किसी से मिलता है तो वो हरा बन जाता है और पीला रंग किसी
- 1:25:22से मिलता है। नारंगी बन जाता है एक में लड़का
- 1:25:26होता है, दूसरे में मिलती है इस विज्ञान से बताया है।
- 1:25:32अब तुम परमात्मा को मानो या ना मानो मेरी सेहत पे कोई मैंने
- 1:25:41तुम्हें बताया गलत हुआ हो तो बताओ, एस्ट्रोलॉजिकल कैलकुलेशन
- 1:25:49कभी कभी गलत हो सकती हैं। उसके लिए मैं खुद ही कहता हूँ
- 1:25:54कैलकुलेशन्स ये हिसाब और हिसाब बुद्धि से आता है।
- 1:25:59बुद्धि गलत हो जाती है और ये कैलकुलेशन्स जो मैंने आपको बताई
- 1:26:06ये रहस्य से आती है रहस्य कभी गलत नहीं होता, नेवर।
- 1:26:13मेरे ख्याल में आज यहाँ समाप्त कर देने से श्री कृष्णबोगन परे
- 1:26:25मुरारी। के नाथ नारायण, वासुदेव, श्रीकेश,
- 1:26:40गोविन्द हरे हैं मुरारी। हे नाथ नारायण वासुदेव पितुमात
- 1:26:58स्वामी सखा हमार गुरुमात स्वामी। सखा हमारे हेनाथ नारायण, वासुदेव,
- 1:27:19श्रीकृष्ण, गोविंद, हरे मुरारी।