Latest / Baba ji Vijay Vats / 24 May 25 - क्या Osho Drugs लेते थे? Osho ने क्यों कहा कि मेरे जाने के बाद सभी विधियां बेकार हो जाएंगी?
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- 0:00रीता सेन कुश्ती हैं। बाबा मैं ओशो की संन्यास में हूँ।
- 0:25आपकी बातों में भी मुझे ऐसा लगता है मेरे गुरु मिल गए हों।
- 0:39सहजता, निर्मलता, कोमलता। और हँसी के फौव्वारे सब वही कुछ
- 0:52अंदाज़। निराला चेहरा मोहरा अलग।
- 1:03लेकिन रसोई आपके कुछ शब्द जो ओशो ने कहे और आपके मुख से प्रसारित
- 1:16हुए, मैं दुर्गा में हूँ। और आप ही इसे खोल सकते हैं।
- 1:28क्या अनुमति देंगे कि मैं लिख दूँ, लिख तो दिया है आपकी इच्छा
- 1:37हो तो जवाब अवश्य दे देना। मेरा ये भटका अब समाप्त हो जाएगा
- 1:51पोंषों की एक अभागिन सन्यास से इतना भी धीरज मत हारो।
- 2:03कि अपने आप को ऐसा शब्द लिखने पर विवश हो जाओ, अभागिन शब्द शोभा
- 2:13नहीं देता ओश जैसे महान। व्यक्ति की सन्यास नहीं होकर ये
- 2:25अलफाज़ कटे शोभा नहीं देता है। ऐसे दुविधा को लिए हुए।
- 2:44द्वंत युद्ध में उलझें, मैं कैसे साधना कर पाऊंगी और अपने अंतिम
- 2:55छोर को छू पाऊंगी? पहला प्रश्न है।
- 3:05जब मैं नहीं रहूँगा तो मेरी सब विधियों बेकार हो जाएंगी बड़ा
- 3:24गंभीर शब्द है। जो हमारी आत्मा को जड़ों से हिला
- 3:30देता है, तो क्या हमें अब वह कुछ करने के बाद भी नतीजा नहीं
- 3:37मिलेगा? और दूसरा मेरे जाने के बाद?
- 3:47किसी जीवंत गुरु को तलाश लेना प्रभु इन दो व्यथाओं का इलाज कर
- 4:04दीजिए। हम अटके पड़े हाँ पुत्र बिलकुल
- 4:17ठीक कहा तुम्हारा चेतन मन लाख भुला दे अज्ञात और अचेतन के किसी
- 4:29कोने में। ये बात जवाब को पता लगा तो भीतर
- 4:37रह गई जैसे आप अन्य चीजों को दबा लेते हो, यह भी दबा लिया गया और
- 4:47मैं तुम्हारी व्यथा को। भीतरी कोनों तक महसूस करता हूँ और
- 4:55तुमने लिखा कि शीला दीदी ने जो आरोप लगाए क्या वो तथ्यहीन थे?
- 5:08ओशो नाइट्रस ऑक्साइड गैस का इस्तेमाल करते हैं नशे के लिए
- 5:17जिसे लाफिंग गैस कहते हैं। क्या लाफिंग बुद्धा किसी का है तो
- 5:24प्रतिफलन नहीं था? बहुत ही जिंजावात उठते हैं भीतर
- 5:32से आखिर क्यों रहते थे वो लव फिंगर्स?
- 5:42कारण क्या था? जबकि।
- 5:50इस नाइट्रस ऑक्साइड गैस के लिए ऐसे छटपटाते थे जैसे नशेड़ी नशे
- 6:03के लिए जहाँ आकर बड़ो बड़ो की आत्मा।
- 6:13और उनकी श्रद्धा डगमगा जाती है। आप ही से कुछ आशा की कारण बची है
- 6:26और आपने जब तक ओशो का जिक्र नहीं किया, मैंने आपसे पूछा भी नहीं।
- 6:33अब आपने बड़ी बेबाकी से उत्सव का जिक्र किया और जब आपने उसो का
- 6:39जिक्र किया कि मुझे जगाने आए सिद्धों में शिव के साथ ओशो भी थे
- 6:48तो मुझे कुछ आशा की घृणा दिखाई, बढ़िया।
- 6:52कि आप मेरी इन समस्याओं का हल कर पाएं, ठीक लीजिए, हम सत्य की गहरे
- 7:04अंतरंगतलों में उतरते हैं। उन रहस्यत्मक काव्यों में प्रवेश
- 7:11करते हैं, जिससे आपके प्रश्नों का उत्तर मिलने में सहायता होगी।
- 7:23तुमने लिखा पुत्री बहुत से सन्यासियों का भी यही प्रश्न है।
- 7:33तो अच्छी तरह से सुन लो पुत्र क्यों कह के गए?
- 7:40पहली बात ओशो बेहद ईमानदार व्यक्ति थे।
- 7:49आध्यात्मिक, ईमानदार उनकी ईमानदारी की कोई मिसाल नहीं।
- 8:00संत ईमानदार हो तो ही संत होता है अन्यथा।
- 8:08तो बेईमान तो राजनीतिक भी होते हैं।
- 8:17अब तुमने जब लिखा मैं केमिस्ट्री में पीएसडीएमएससी हूँ।
- 8:24मुझे कुछ तसल्ली हुई कि तुम समझ पाओगे मेरी बातों को, क्योंकि यह
- 8:30एक रसायन विज्ञान है। इसको अन्य भी लोग समझ पाएंगे।
- 8:38इतना मुश्किल मामला नहीं है। देखिए कैटेलिटिक एजेंट मैंने बहुत
- 8:50बार बात की। अगर आपस में रिएक्शन करने वाले
- 8:57सबस्टेंस आप एक टेस्ट ट्यूब में डाल दोगे तो क्या रिएक्शन होगा
- 9:10अगर उसमें? कैटेलिटिक एजेंट नहीं डाला गया तो
- 9:15क्या रिएक्शन होगा? नहीं होगा तो क्या कैटेलिटिक
- 9:24एजेंट का कोई काम था उस रिएक्शन में?
- 9:32बिलकुल तुम कहोगी नहीं कोई काम भी नहीं था लेकिन जब तक वह डाला नहीं
- 9:40गया तब तक रिएक्शन शुरू नहीं हुआ। ये जुबाब माकूल है तुम कुछ भी
- 9:57करो, बस उतना ही फल देगी जो तुमने तुम्हारी मेहनत से।
- 10:09अपने आप को झोंका, लेकिन कैटेलिटिक एजेंट जानें गुरु की
- 10:16मौजूदगी में गुरुपूर्ण चेतना है। उस चेतना की मौजूदगी में जो
- 10:27घटनाएं जीस गति से घटती हैं, वो उसकी गैरमौजूदगी में नहीं घटेंगे।
- 10:34बस दूसरा क्वेश्चन भी इसके साथ ही रिलेटेड है।
- 10:41ओशो ने कहा कि मेरे जाने के बाद। संकोच मत करना मुझे छूट देना,
- 10:48किसी अन्य संत पुरुष की तलाश करना, सिद्ध जीवंत जागृत अवार्ड
- 10:58क्योंकि ये घटना। चेतना के मौजूदगी में ही घटित
- 11:10होती है। मैंने थीम बोल दिया आपको बुतरी और
- 11:18ओशो चेतन हैं बिलक्षक। क्या खाते, क्या सूंघते, नाइट्रस
- 11:25ऑक्साइड गैस सूंघते या कुछ केमिकल चीजें लेते।
- 11:35इससे ज़रा भी फर्क नहीं पड़ता। छीला ने कहा कि वो वैल्यूम लेते
- 11:41थे। वर्चुअल मात्रा में लेते थे और
- 11:46इतनी मात्रा में लेते थे कि केमिस्ट उसे देने से इंकार कर
- 11:50देते थे और बहुत से लोगों के नामों पर पर्चियां बनाई जाती।
- 11:57फिर केमिस्ट उन्हें अलग अलग नामों से देता।
- 12:06ठीक है, लेकिन ये भी ध्यान रखना आपकी जो भीतर की केमिकल बदलाहट है
- 12:22संरचना में बदलाव। अब आप जो हो इस वक्त वो शरीर हो,
- 12:32मन हो भावनाएँ? क्या होता है नाइट्रस ऑक्साइड को?
- 12:44सूखने के बाद? बिलकुल करी प्री, वो ही बात तो
- 12:50एक्यूरेस है स्टाइवा में होती है भांग और भगवान शंकर तो किसका
- 12:57प्रयोग करते है? मैं बहुत से लोगों पे यह प्रयोग
- 13:03कर रहा हूँ क्यों? इसलिए नहीं तो वो शांत हो जाएंगे।
- 13:12इसलिए कि उन्हें यकीन हो जाएगा कि कोई इस सृजना को चला रहा है?
- 13:19जीसको हमने कभी जाना नहीं, कभी देखा नहीं, कभी पहचाना नहीं।
- 13:24वो अज्ञात हाथ दिखने शुरू हो जाते हैं।
- 13:27उसके प्रभाव में तो मैं उसे कहता हूँ कि इतनी मात्रा में आपके
- 13:37स्वास्थ्य के अनुकूल। इतनी मात्रा में बैंक का इस्तेमाल
- 13:45करो। मैंने बहुत पहले भी आपसे कहा और
- 13:52बार बार बीच में भी कहता रहता हूँ कि बुनियाद को मजबूत रखना होगा,
- 13:59नहीं तो कोई भी। बनती मंजिल और महल के भीतर आपके
- 14:04उन महलों के स्ट्रक्चर को भावनाओं को ताश के पत्तों की तरह गहरा
- 14:14सकता है और भावनाएं? किसी की भी बड़ी नाजुक होती है।
- 14:29एक बार विश्वास हो जाए, मुझे तो आवश्यकता नहीं पड़ी ईश्वर की कृपा
- 14:36से। बाबा नानक का मुझे शब्दवार पर याद
- 14:40आ जाता है नदरी मोख दवार वहाँ कोई नाइट्रस ऑक्साइड की आवश्यकता नहीं
- 14:46होती वहाँ कुछ भी जरूरत नहीं होती मात्र 1970 में 18 वर्ष का।
- 14:57एक बच्चा ही समझो अभी दाढ़ी भी न फूटी थी मुझे बिना जब ये ट्रैन का
- 15:03इंसिडेंट गठित होगा तब से लोग पूछ लेते हैं कि बाबा आप में क्या
- 15:13खासी थी, हमें क्यों नहीं होता? नहीं तो ये बिलकुल प्रश्न वैसा ही
- 15:20है। जैसे जेल में बंद हुआ व्यक्ति ये
- 15:23कहे कि मैं ही क्यों बताऊँ, ये बाहर आजाद क्यों कर रहे हैं?
- 15:29वो भूल गया कि किसी और मकान में उसने कुछ किया होगा।
- 15:37जिससे उसे आज बंधन झेलना पड़ रहा है।
- 15:45तो 4 दिन पहले मुझे हरियाणा के व्यक्ति ने पूछा बाबा था में के
- 15:50खासियत थप क्यों अनुमान बरसा थप क्यों आए शंकर?
- 16:00और मेरे पे क्यों नहीं आये? मैंने कबूतर थे पे तो नहीं आये थे
- 16:09बंदे हुए और मेरी जंजीरें इतनी सूक्ष्म थी, एक झटके में टूट गयी।
- 16:22इतना गहरा शोक और मैं झट से अपने अंदर प्रवेश कर गया, लेकिन प्रवेश
- 16:35तो कर गया, एक झलक तक वो आश्चर्य गड्डित हो गया।
- 16:41वंडर, जिसे कहते हैं जहाँ से शुरू होता मैंने शिवशत्र बोला था, एक
- 16:46मित्र के वृषण में विश्व में आधार है उस अनंत तक पहुंचने का विश्व
- 16:54में वो पैदा हो गया उस दिन पर मैंने मांगा नहीं था।
- 17:00ज़रा भी मेरी तमन्ना तो डॉक्टर बनने की थी ज़रा भी मांग ना थी
- 17:07मुझे इन राहों पे चलाया जाए लेकिन मैं ये चाहता था कि उसकी निर्मित
- 17:18उसके ढंग से चले। उसके ढंग से ही हुआ।
- 17:24जो हुआ तो यह है सारी क्रियाएं नाइट्रस ऑक्साइड हो, गैस हो,
- 17:35लाफिंग गैस से कह देते हैं अक्सर। दांतों के डॉक्टर्स का इस्तेमाल
- 17:40करते हैं शिजरीन करो एनेस्थीसिया करो बस बिलकुल वही जैसे आपकी पीठ
- 17:57में एनेस्थीसिया दे दिया जाता है और तुम्हें काटते पीटते रहो।
- 18:03जो भयंकर दर से आप चिल्ला जाते वह आपको बता ही नहीं रहा।
- 18:12ये कुछ केमिकल परमात्मा ने बनाई, उसकी सृष्टि में क्या नहीं है सब
- 18:21है। तुम खोजरो तो भला ना खोजो तो भी
- 18:26भला ये शब्द बड़ा तुम्हे अश्यर्य में डालेगा ना खोजो तो भी भला
- 18:32क्यों क्योंकि कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 18:44तुम जो हो सकते हो वो तुम हो फिर आज पता चले जब करोड़ जन्मों के
- 18:53बाद पता चले ज़रा भी फर्क नहीं पड़ता जब तुम पहुंचोगे तो पाओगे
- 19:00अभी अभी तो कृष्ण पहुंचे। इसलिए मैं कहता हूँ जल्दबाजी मत
- 19:06करना। मेरी बातों को सुनकर भक्त थोड़ा
- 19:10प्रभावित हो जाते हैं। बाबा मेरी भी फरियाद कर दो, ना
- 19:17मैं हंसता हूँ। करोड़ों जन्मों के बाद भी अगर तुम
- 19:26पहुंचोगे वहाँ 1 दिन तो पहुंचोगे प्राकृतिक ढंग से जैसे तुम्हारी
- 19:34चेतना पाथर से मनुष्य तक आ गई। इसमें किसी ने कुछ नहीं किया।
- 19:43यद्यपि न जानने वाले ने बहुत कुछ प्रचार किया, क्या कर सकता है?
- 19:52बेचारा गधा भार डोज सकता है। वो डो रहा है।
- 19:57क्या कर सकता है बेचारा हाथी? क्या कर सकती है?
- 20:02एक चींटी क्या कर सकता है? एक वृक्ष उसे जीस लिए उपजाया गया
- 20:09है। वह वट वृक्ष से छाया बनकर आपको
- 20:12शीतलता प्रदान कर देता है, अपना कर्तव्य निभा रहा है।
- 20:17लेकिन इसे बनाया किसने? उषा प्रभु है।
- 20:23तू सुप्रभु ने वो छाया दी, वटवृक्ष ने कुछ नहीं किया, बीज
- 20:28डाला, पानी, हवा रोशनाई सब हुई, सूर्य से एक प्रोटॉन निकाला।
- 20:42और वो पत्तों से टकरा गया, क्लोरोफिल से उसका संघात हुआ और
- 20:55जीवन का रस पैदा हो गया। ये थोड़ी सी अनूठी प्रक्रिया है,
- 21:01गंभीर है। केमिस्ट्री वाले समझ जाएंगे,
- 21:06फिजिक्स वाले भी समझ जाएंगे, लेकिन तुम तो सिर्फ मेरी वाणी के
- 21:12सरल झरी का प्रवाह को ही सुनते रहना, इसमें ही तुम्हें बहुत कुछ
- 21:19मिल जाएगा। वरना कई बार तो ऐसा कि शायद
- 21:29फिजिक्स या केमिस्ट्री के समझने वालों को उतना ना कुछ मिले जो
- 21:34आपको मिल जाए क्योंकि आपकी बुद्धि ने बीच में अड़चन डाला नहीं तो
- 21:40घबराना मत अगर तुम्हें कोई किसी बात की।
- 21:46जानकारी नहीं है तो मैं इसे शुभ समझता हूँ।
- 21:52ये लोग पूछ लेते हैं बाबा मैं बहुत बड़ा डॉक्टर हूँ जो कुछ भी
- 21:59नहीं जानता। मैं कितना जल्दी पहुँच जाऊंगा?
- 22:03मैंने कहा नहीं बेटा, जल्दी की बात मत करो, जितना पड़े हो उतना
- 22:14लेट हो जाओगे। हाँ अगर तुम पीएचडी किए हो।
- 22:21एक व्यक्ति मेरे पास है यहाँ आज वो कहते मैं तीन पीएचडी हूँ,
- 22:25मैंने कहा तुम पुत्र आशा ही मत करो क्योंकि उसने कहा कि मैं
- 22:35चपरासी और प्राइम मिनिस्टर दोनों को एक मानता हूँ, बराबर का सम्मान
- 22:40देता हूँ। मैंने कहा पुत्र फिर ये तो
- 22:43मान्यता ही हो गई है। ये निष्पक्षता न ही रावण वाली जो
- 22:50रावण मांगता है दृषित विचित्र तप और जंग मुक्ति कसर जोरकृष्टरत्न
- 23:01लोस्टियो। सोहृत्य पक्षी ओह त्रिनार बिंदु
- 23:05चक्षु शोप्रजा में ही महिन्द्रो संप्रवृत्त कह कथा सदाशिवम बाजा
- 23:11में हम हे ट्रिपल पीएचडी करने वाले महानुभाव तुम कभी ना
- 23:21पहुंचोगे मैं लिख कर दे। वे शर्तें की तुम्हारी भावनाओं
- 23:27यही रहीं तो फिर एक मान्यता है मैंने सुवर को और गाय को बराबर
- 23:37समझा। मैंने चपरासी को और प्राइम
- 23:41मिनिस्टर को बराबर माना तो मान्यताओं में उलझे हुए खिलाड़ी
- 23:47वहाँ तक कहाँ छू पाते हैं? उस तरंगों को जो लब बालब भरी पड़ी
- 23:52है उन आनंद की खजानों से। यहाँ की दुनिया बड़ी अजीब है और
- 24:13तुम ऐसी खिलाड़ी कि तुम झप्पा डाल लेते हो।
- 24:21तुम तो किसी की मौजूदगी में अगर प्रेम भी बरस जाए तो उसे भी चाहते
- 24:25हो कि बांध लें। हथकड़ियों से और श्रद्धा के लिए
- 24:27वो मेरी या मेरा हो जाए और तुम उसे प्रेम कहते हो।
- 24:31जबकि ये दुराचार है किसी को बंधन दे देना।
- 24:35प्रेम कैसे हो सकता है? प्रेम तो अति स्वतंत्रता प्रदान
- 24:38करता है, भीतर तम। तलोतक।
- 24:59आओ पुत्र इन शब्दों की गहराई में चलें जब मैं ना रहूँगा मैं ओशो जो
- 25:12वास्तविक तत्व हैं वो तो सदा रहेगा।
- 25:16जिसे तुम होशों की तरह जानते हो वह मैं ना रहेगा और नहीं रहेगा।
- 25:231 दिन सभी खो जाते हैं भगवान कृष्ण का, कबीर का होशों का सब खो
- 25:29जाते हैं, कौन बचा है यहाँ? तो मेरे द्वारा बताई गई सभी
- 25:36विधियों फलित नहीं होगी बड़ा शुद्ध उद्भोज इससे बड़ा ईमानदार
- 25:45उदघोष कोई और हो नहीं हो सकता तुम इसे उसकी।
- 25:53अज्ञानता में लपेट सकते हो, लेकिन अज्ञानी व्यक्ति ऐसा नहीं बोलते।
- 26:03शुद्ध और ज्ञानी व्यक्ति ही ऐसा बोल पाता है क्योंकि वह तुम्हारे
- 26:09ऊपर बला और करुणा बिखेरता है। भला करना चाहता है तुम्हारा तुम
- 26:16बांध न जाओ महावीर की तरह जैसे गौतम का भला किया उन्होंने, तुम
- 26:24उस कश्ती से किनारे पर आ गए हो, फिर कश्ती से चिप के क्यों बैठे
- 26:31हो? गौतम उठो।
- 26:35छलांग लगाव किनारा करीब है पर गौतम दत्त कृष्ण पहुँच गया।
- 26:41समझ गया उसकी बात को 24 घंटे उसके पास रहता था बस इतनी सी बात थी।
- 26:52कई बार बड़े सूक्ष्म धागे बड़ी बड़ी फौलादी जंजीरों से ज्यादा
- 26:57प्रभावी सिद्ध होते हैं। बांधने के लिए और ऐसा ही गौतम के
- 27:01साथ हुआ। क्या कहना चाहते हैं ओशो?
- 27:09इसकी गहराई के अंतराल तल पर हम आ गए।
- 27:17उसको कहते हैं जब मैं ना बचूंगा मैं ना बचूंगा।
- 27:23यानी मेरा संपर्क में चेतना हूँ, उसको अच्छी तरह जानते हैं।
- 27:29और मेरी चेतना की प्रजेंस में सारी क्रियाएं घटित होती हैं
- 27:34क्योंकि मैं कैटेलिटिक एजेंट हूँ और जब ये कैटेलिटिक एजेंट उन
- 27:43रिएक्शनरी सबस्टेंस से अलग कर लिया गया।
- 27:47या उनके भीतर न हुआ तो हाउ दी केमिकल रिएक्शन्स विल हैपन नहीं
- 27:56होगी। बड़ी ईमानदारी का व्यक्त
- 28:09व्यक्तव्य था, तुमने इसे एक अज्ञानता का पैमाना माना कि कह गए
- 28:19कह गए कि मैं अज्ञानी हूँ। अपनी भूल चूक को मार लिया, कहाँ
- 28:25मार लिया? उन्होंने एक परम सत्य का
- 28:30व्याख्यान किया और दूसरे शब्द से इसको पूर्ति कर गए।
- 28:37घटेगी कहाँ चेतन व्यक्तित्व की मौजूदगी में?
- 28:45आपको उसका विकल्प भी देगा। जो मेरी मौजूदगी में घटित होता है
- 28:56वो किसी बुद्ध की मौजूदगी में भी घटित होगा, इसलिए मेरे जाने के
- 29:00बाद। जब मेरा संपर्क के शरीर से टूट
- 29:04जाए तो किसी बुद्ध को क्षरणित हो जाना ढूंढ लेना, ये ये बाद की बात
- 29:17है, फिर करेंगे प्रश्न बहुत दूर तक चला जाएगा।
- 29:29ये कहते हैं सच्चा गुरु कैसे ढूंढें सच्चे गुरु की आसपास की
- 29:35हवाएं मदहोशी और उसके भीतर से झरती हुई निर्जीत वाणी बता देती
- 29:43है यह कौन? नीरस व्यक्ति जब बोलता है तो उसके
- 29:50भीतर सूचनाओं के अतिरिक्त आपको रस नहीं मिलता और आपका न्यूरॉन
- 30:01सेटिस्फाइ होता है। आपका न्यूरॉन कहता है वाह।
- 30:07क्या कमाल है इतना ज्ञान? बस ये ज्ञान सिर्फ सूचनाएं,
- 30:15महत्त्व, सूचनाएं और हमारे भीतर अरबों खरबों की मात्रा में
- 30:20न्यूरोस हैं और सब भर देते हैं। ये सर लोग खुद भी भरे हुए हैं।
- 30:26सर हो या अचार हो, मैं रोज़ बोलता हूँ, क्योंकि सबसे बड़े अज्ञानता
- 30:33का फैलाने वाले ये लोग हैं क्यों? क्योंकि आपको इससे सब के उत्तर
- 30:39मिल जाएंगे, इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ।
- 30:44कि प्रश्न पूछना ए आई से सर से ना पूछना, बशर्ते कि आपने किसी
- 30:51एग्ज़ैमनेशन में कॉम्पिटिशन में बैठना हो, मत पूछना किसी आचार्य
- 30:58से कि लीव इन में रहें या ना रहें, इस बेचारे को खुद ही नहीं
- 31:03पता। बंधन होता क्या है?
- 31:08इसने जाना नहीं अन्यथा बंधन होता क्या है?
- 31:12बंधन जिसे महसूस होता है वह बंधन को तोड़ने की व्यवस्थाएँ करने
- 31:17लगता है। ततिक्षण ज़रा सोचो आपने जहर पी
- 31:22लिया है? फूल से पी लिया है, जानबूझकर पी
- 31:31लिया है तो उसके बाद क्या करोगे? चिल्लाओगे प्राण निकलेंगे दम
- 31:38घुटेंगा श्वास आने में तकलीफ होगी, दर्द होगा सारे तन बदन में
- 31:43आप कहोगे मुझे हॉस्पिटलाइज करो। पता लगा कि मैंने जहर पी लिया,
- 31:53जानबूझ कर पिया या गलती से पिया, जब पता चल जाता है कि मुझ के ऊपर
- 32:02बेड़ियों का प्रभाव है, ये देखो फौला दी बेड़िया।
- 32:07वह अपनी सूचनाओं को प्रसारित नहीं करेगा।
- 32:12वह अपनी सूचनाओं को तोड़ने की व्यवस्था करेगा।
- 32:16बस यही फर्क है सर में और ज्ञानी में, सर में और अज्ञानी में।
- 32:24अज्ञानी ज्ञान की राह पर चल पड़ता है।
- 32:27सर को पता ही नहीं कि मैं बनता हूँ।
- 32:31इन सूचनाओं में जो इकट्ठी की थी उसने बड़े शोक से इनके बल पर इनके
- 32:42दांबों पर। जो मैं एकत्रित कर रहा और लोगों
- 32:45को सीखा रहा। मैं भूल जाता हूँ कि ये फौलादी
- 32:52ज़िंजीर है और तुम 1 दिन विदा हो जाओगे।
- 33:01बड़े शोक से ये कहानी का होक है? दुनिया बड़े प्यार और मिठास से
- 33:09इज्ज़त और मानद के सलाम करेगी। तुम्हें बार बार हर अलफाज़ में
- 33:15कवियों की तरह महंगे कवियों की तरह तालियाँ बजाई।
- 33:21और 1 दिन तुम फनाह हो जाओगे बड़े शोक से सुन रहा था ज़माना हमीं सो
- 33:31गए दास्ताँ कहते कहते। और फिर कोई चारा ना बचेगा ना
- 33:45तुम्हारे पास ना किसी के पास। अगर तुम्हें पता चल जाए कि ये
- 33:50सूचनाएं तुम्हारे ऊपर बंधन हैं तो पहली बात क्या होगी?
- 33:55तुम इस कवायद में जुट जाओगे कि सूचनाएं नहीं ना इकट्ठी करूँ।
- 34:00और दूसरी जो पुरानी इकट्ठी थी उसको तोडूं कैसे?
- 34:03धीरे धीरे धीरे धीरे उसको तोडूं तो मैंने उसकी व्यवस्था आपको दी
- 34:08है। बाबा ने मुझे 1976 में शिव मंदिर
- 34:11में बैठे हुए ये व्यवस्था दी कि आप क्रिया योग करो।
- 34:15देखिये आप सर, लोगों से भी अचारों से भी।
- 34:22मैं आपसे ज्यादा सयाना तो नहीं हूँ, लेकिन उस सयानप से दूर जरूर
- 34:36हूँ। इसका मतलब शायद आपको न समझाए,
- 34:39समझदार मैं नहीं हूँ, लेकिन तुम्हारी समझदारी से दूर।
- 34:46अवश्य बड़ा दूर निकल गया तुम्हारी इस दुनिया से बड़ी दूर इतनी दूर
- 34:57कि तुम्हारी दुनिया दूर से देखने पर बिलकुल साफ साफ दिखती है कि
- 35:03फौलादी ज़ंजीर से तुम बंधे हुए हो।
- 35:10तेरी दुनिया से हो के मजबूर। अरे चला, मैं बहुत दूर, बहुत दूर,
- 35:37बहुत दूर। चला तेरी दुनिया से वो क्यों चला?
- 36:00मैं बहुत दूर बहुत दूर चला तेरी दुनिया से।
- 36:19तुम्हारी जो दुनिया है समझदारी की बुद्धिमानी की विस्डम की, मैं
- 36:26बहुत दो बहुत दो समझदार नहीं हूँ बुद्धिमान नहीं हूँ, लेकिन
- 36:36तुम्हारी समस्या बहुत दो। काश तुम भी ऐसे ही दूर निकल जाओ
- 36:45तुम इन सूचनाओं में अटको न बा मुश्किल तुम्हें ये जीवन मेला
- 36:53इतनी समझ होने के बाद। तुमसे छोड़ा ना गया बस यही मुड़ता
- 37:05है। बुध छोड़ देते हैं बुध के पास भोग
- 37:11की सारी सामग्री। और भोग की सारी सामग्री जो तुमने
- 37:17चाही कि हम बन जाएं, कटोरा उठाए फिरते हो, हम और राज़ कर लें, हम
- 37:25और जी लें। महज 10 मिनट के जीने के लिए अब
- 37:30सारी जिंदगी की कमाई हुई। संपदा लुटा सकते हो यानी उसका
- 37:43अंजाम उसकी कीमत कितनी? अब तुम समझ सकते हो।
- 37:54सारी ज़िन्दगी की कमाई इस एक पल के क्षण के लिए आनंद के लिए जुटा
- 38:05सकते हो तुम? लेकिन काश तुम जग भी सकते हो मैं
- 38:16तुम्हें ये नहीं कहता की तुम नहीं जगोगे कौन जाने किस घड़ी वक्त का
- 38:22बदले मिजाज़। कोई कभी भी जाग सकता है।
- 38:29कोई कभी भी रत्ना का डाकू बालम की हो सकता है कोई कभी भी अंगड़ी माल
- 38:35ब्राह्मण हो सकता है कोई कभी भी सदना कसाई भ्रम में प्रवेश कर
- 38:41सकता है कोई अणिका गणिका किसी वक्त भी।
- 38:45ये जान सकती है कि यह देह जिसे मैंने वेश्यावृत्ति की हो, मैंने
- 38:50बस यही कुछ अनिका गणिका के साथ हो।
- 38:55जी, जिसे विकृत शरीर समझती अणिका गणिका क्या होता है उसके जीवन
- 39:00में? क्रांति क्या घटित क्या होती है
- 39:03भीतर का वो क्या रसायन है जो बदल जाता है रसायन ये बदल जाता है कि
- 39:11वह स्पार्इल शरीर जो नोचा गया, अलग अलग व्यक्तियों के द्वारा अलग
- 39:17अलग वक्तों के ऊपर वो कौन था? जाति क्या थी, धर्म क्या था, उम्र
- 39:23क्या थी पता नहीं और अपने आपको नीच, प्रत्यक्ष समाज में हे
- 39:35दृष्टि से देखने वाली गणिका और अणिका।
- 39:40कर जाती है और तुम कहते हो क्षण में कर जाती है फिर और क्षण में
- 39:45कर जाती है। क्या होता है बस एक पलटी ही तो
- 39:49मारनी है, पलटू की तरह एक पलटी ही मारनी है, फिर जीवी पलटू हो
- 39:57जाएगा। क्या पलटी?
- 40:03वह क्यों? सामाजिक हे दृष्टि को कबूलती है,
- 40:09क्योंकि वह समाज के बंधनों में बंधी हुई है।
- 40:13वह समाज के साथ एकाकार हो गई है। समाज की दृष्टि उसकी दृष्टि है पर
- 40:20कौन जाने कब आंख खुल जाए, सोए हुए व्यक्ति की आंख कब खुल जाए पता है
- 40:28कोई पता नहीं चलता और जैसे ही आंख खुली।
- 40:36तो अणिका पाती हैं, मैं देह नहीं हूँ और सब चीजें सुरोहित हो जाती
- 40:42हैं जोश ने मन गरीब ने नोचा अमीर ने नोचा वृद्ध ने नोचा, जवान ने
- 40:49नोचा। किशोर ने नोचा किसी जाति पाति
- 40:56धर्म विशेष का कोई ख्याल नहीं था, सब ने नोचा।
- 41:02सब जगह लूटी कहाँ तक नाम? गिनवाएं सभी ने हम को लूटा है,
- 41:21सभी ने हम को लूटा है। एंड का यही सोच है गण का यही सोच।
- 41:31सभी ने हमको लूटा है लेकिन एक अक्षण में, अणिका और गणिका और
- 41:36सतना कसाई भी पहुँच जाते तुम बड़े आश्चर्यगत होते हो, मैं तो कप से
- 41:41माला लिए बैठा हूँ बौद्धी वृक्ष के नीचे कप से।
- 41:49इंतजार कर रहा परमात्मा अन्नयकाली कोई दयालु नहीं, पक्षपाती है।
- 41:57ऐसे ही लोग प्रश्नपूषा करते हैं बाबा आप में क्या खासियत के
- 42:01हनुमान ने तुम्हें दर्शन दे दिया? कहीं ना कहीं तुम्हारे भीतर
- 42:08नास्तिकता छुपी हुई। इस नास्तिकता को उगाड़ो क्रय योग
- 42:15करो। ये ऊपर के तल पे आ जाएगी।
- 42:17भीतर से उठके अभूतपूर्व क्रय है। ये बाबा ने वरदान शुरू हमें दी
- 42:25है। मानवता इसका जैसे जितना लाभ
- 42:28उठाएगी, उतना ही खुशहाल हो जाएगी। बाबा ने एक हीरा दे दिया।
- 42:39हमें हम चले जाएंगे, लेकिन आपको ये धरोहर देके जाएंगे।
- 42:47इसलिए मुझे बहुत कहते हैं सुदर्शन क्रिया की तरह आप भी बाबा कोई फीस
- 42:51रख लेते? मैंने कहा मेरा दिमाग उसकी तरह
- 42:53खराब नहीं हसो मत भाई। अगर कोई लोभी है, कोई लालची है,
- 43:04मन लोभी मन लालची मन चंचल मन चोर मन के मते न चलिये पलक, पलक, मन
- 43:11और अगर कोई किसी ने कोई नुकसान ढूंढ लिया या पता चल गया और वह
- 43:18उसकी फीस लेने लगा तो उसे क्या हो गया?
- 43:24धन कमाने वाले को आप क्या कहते हो आप सम्मान देते हो, लेकिन संत
- 43:29क्या कहते हैं? संत कहते हैं, मूड है और सही
- 43:33दृष्टि संत के पास होती है क्योंकि वह निर्मल कोमल आँखें
- 43:39बच्चे के समान। कुँआरी आँखें शुद्ध इनोसेंसी भरी
- 43:46पड़ी। वह जो बोल सकता है वह कोई नहीं
- 43:49बोल सकता। इसलिए वो राजा की कहानी अक्सर
- 43:52आपने बहुत बार सुनी होगी। स्वर्ग से आए हुए कपड़े पहना दिए
- 43:56किसी ने राजा सबको बेवकूफ बनाता। लेकिन उसने राजा को मूर्ख बना
- 44:01दिया। ये लो ये शर्क से आये हुए कपड़े
- 44:05पहन लो तो राजा तो बहुत खुश हुआ शर्क के देवताओं ने मुझे सम्मान
- 44:12दिया, अभिमान दिया, लओ पहनाओ? उसने कहा, पहले ये वर्दी उतारो।
- 44:18कौन सी ये जो पहन रखी तो ऊपर से पहन लेता हूँ?
- 44:21नहीं, नहीं आया तो नहीं चलेगा इट शुड बी क्लिंग विथ युअर स्किन और
- 44:31तुमने तो सब कहीं पहन रखा है, कहीं सोना, कभी कुछ कहीं कुछ
- 44:36उतारो इसको। पहला व्यक्ति जो नग्न कर गया राजा
- 44:40को समझ की बात है, रग ही तो पकड़नी होती है।
- 44:51महाराजा रंजीत से काने थे एक आँख और उसको कोई काना कह के दिखला दे
- 44:58काने को काना कह देना बड़ा मुश्किल।
- 45:02चोट लगती है अब कोई कह दे पोने दो आंख वाला तो देखे भीतर आग लग
- 45:09जाएगी और कोई कह दे तो बोथा बांधते थे और कहते थे ये ये रोम
- 45:18ऑक्सीजन को पीने के लिए है। ना के बंद करने के लिए तुम तो बंद
- 45:23कर देते हो। जीन्स बैंक और खुद ही जीन बेचने
- 45:26लग जाता है। फिर भीतरी लालसा क्या रही होगी?
- 45:32हिंदुस्तान बदल गया या तुमने अपने ढंग से बदला?
- 45:41तो कोई उसे काना नहीं कह सकता था। एक शर्त लग गई एक बार आपसी
- 45:47दरबारियों में कहता है अगर इतने ही सत्यवादी हो तो महाराणा रंजीत
- 45:55सिंह को। काना कहकर दिखा दो एक आंख वाला और
- 46:01कहता बिलकुल महाराज बिलकुल कितनी शर्त कितनी शर्तियों की शर्त ठीक
- 46:08गौरव कितनी बार कहूं एक बार कहता हूँ साफ साफ कहना कि तू कहना है
- 46:15हाँ हाँ। तुम सुनना पास आ जाना अब जंग होता
- 46:21है चला गया महाराजा रंजीत सिंह को जाके सलाम किया खजूरी अरा शहीद
- 46:30मंसूर का सलाम कबूल हो हाँ बोलो। जनाब, मैं आपके ससुराल गया था,
- 46:41अच्छा ससुराल के नाम से किसकी भागे निकल जाती और फिर वहाँ पर
- 46:49आपकी साली मिली अच्छा और साली के नाम पर आप देते हो?
- 46:55ऐसी खुशबू उमड़ती है। अरे भाई हसन सुगंध क्या करेगा?
- 47:05चंदन और कपूर क्या करेगी बड़ी से बड़ी परफ्यूम?
- 47:12सब फेर हो जाएगा मैं फेर लड़की वगैरह सब अच्छा वो थोड़ा सा जुगा
- 47:20है क्या कहा उसने? उसने कहा हजूर कहने में तो शर्म
- 47:28आती है, नहीं, नहीं, नहीं मेरी सारी का संदेश।
- 47:32मुझे बिल्कुल लफ़ से भाई लफ़ से कहो और वो आदमी पास खड़ा है।
- 47:49क्या कहा मेरी साली ने वो आदमी का हजूर?
- 47:56उसने कहा कह देना, उस साली को कह देना उस गाने को।
- 48:04अब साली का कैसे गुस्सा हो? अच्छा कह देना उस खाने को मैंने
- 48:18कहा उसे गाना मत कहो, वो हमारा हुजूर है।
- 48:22हमारा अन्नदाता है, हमारा मालिक है तुम्हारी शादी कहने लगी अजूर
- 48:31तुम तुम एक बार मैं 100 बार बोलेंगे काना काना काना तू काना
- 48:36तू काना काना काना क्या क्या भाग गया?
- 48:40ये शर्त है जीत के। कहने के ढंग होते हैं, उसी बात को
- 48:49कहने के ढंग नराले होते हैं। बात क्या थी, बात बताई नहीं थी या
- 48:59नहीं कोई? इसे ऐसा समझो कि जैसे एक पत्थर
- 49:14नीचे पड़ा बहुत भारी और उसको हिमालय की अंतिम एवरेस्ट पे
- 49:20पहुंचाना हो तो क्या होगा? क्या करना होगा किसी क्रेन का?
- 49:27किसी प्लेन का किसी हेलिकॉप्टर का सहारा लेना पड़ेगा।
- 49:32वह एस्टब्लिश करने के लिए बस गुरु उस उचाई को छूने में तुम्हारी मदद
- 49:40करता है। क्रेन बनकर हेलिकॉप्टर बनकर जहाज
- 49:42बनकर तुम्हें वहाँ तक ले जाता है, एस्टब्लिश कर देता है।
- 49:50लेकिन वो एस्टाबलिशमेंट झूठा होता है तो तुम्हारा स्वयं का कमाया
- 49:56नहीं होता, ये बात समझलो मैं झूठा क्यों कहता हूँ?
- 50:00जो तुम्हारे स्वयं के अनुभव से आए वो सही।
- 50:05जो गुरु की मौजूदगी में आए वो गलत मुझे लोग पूछते हैं, सूक्ष्म से
- 50:11पूछ रहे हैं आपने ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की?
- 50:18आपके इतने हजारों शिष्य तो हैं जो आपने चाहे वह बनें और आपने?
- 50:24नहीं अपनाया। आप क्यों नहीं उन शिष्यों के बीच
- 50:28में अपनी चेतना को लेकर जाते हैं? ये मेरी तकलीफ है।
- 50:37बुद्धा मेरे पास था। पहले इतना भी नहीं था कि आप आके
- 50:44दीक्षा ले ले, आपने पुराना मकान देखा ही होगा।
- 50:50वहाँ वह मुसकर दो चार लोग बैठ पाते हैं, यहाँ 100, 200 लोग बैठ
- 50:56पाते हैं। टर्न ब्य टर्न मैं बुला सकता हूँ
- 51:04बढ़ाएँ ऐसी व्यवस्था नहीं है तो स्थान के अभाव में यह प्रक्रिया
- 51:09संभव न हो पाए इस और कोई कारण न था।
- 51:14मैं उपलब्ध हूँ दीक्षा के लिए बुलाता हूँ।
- 51:20वही रेंजेस फेंकता हूँ अगर आप पीने के योग्य हैं तो पी जाओगे और
- 51:28अगर योग ही नहीं हो तो फिर तुम नहीं पी पाओगे।
- 51:33मैं लाख कोशिश करूँ तुम नहीं पी पाओगे।
- 51:40बस मैं क्रेन की तरह पाथर को उठा के एवरेस्ट के ऊपर एक बार रख
- 51:44दूंगा और वो रखूँगा। तुम्हारी कल्पना में निसंकोच मैं
- 51:51ये बात कहता हूँ यही करते हैं। ओशो और ओशो जानते हैं?
- 52:01वह चला जाएगा जिसने तुम्हारी चेतना को उन ऊंचाइयों तक पहुंचाया
- 52:07लेकिन वो खुद पहुंचा हुआ था। बस उसके वेग के साथ बह गए लेकिन
- 52:15वो था पवन का वेग। गुरु का वेग जब ये वेग चला जाएगा
- 52:21तो फिर क्या होगा? तुम दम से वहीं पड़े रह जाओगे फिर
- 52:26तुम्हें कोई और उठा के उस उचाई तक पहुंचाने वाला चाहिए।
- 52:31यही कहना चाहते थे ओशो और वो जीवंत ही कर पायेगा गुरु।
- 52:41ये अवश्य ही विचारणीय प्रश्न है लेकिन इसका जोबाब आज मैं नहीं दे
- 52:46पाऊंगा, क्योंकि फिर वीडियो बहुत रंगी हो जाती है।
- 52:50मैं 2 घंटे की बोल देता हूँ। आप बड़ी मुश्किल से ही 40 मिनट 45
- 52:54मिनट की सुन पाते हो, वो भी कभी कभी नहीं सुन पाते।
- 52:57मैं मानता हूँ ऐसे बहुत से लोग हैं जो पूरी पूरी और दो चार बार
- 53:01भी सुनते हैं लेकिन ऐसे भी लोग हैं जो थोड़ा सा सुन के एस्केप कर
- 53:06देते हैं या तो समझ में नहीं आता। या उनकी मान्यताओं से पार पड़ता
- 53:16हूँ स्किप कर देते हैं। भावनाओं टूट न जाएं या गरती हुई
- 53:24अमारत कभी और न ढह जाए। तरडे पहले से बहुत हैं और खुद का।
- 53:32एहसास भी नहीं है। यह गिरी के गिरी अब गिरी के तब
- 53:37गिरी और यह गुरु तो इतना भयानक इसके शब्द तीर की तरह चुभ जाते
- 53:43हैं और सब गिरते हुए देर न लगेंगी।
- 53:47ताश के पत्तों की तरह ढेर हो जाएगा सब यही तुम्हारी भी लाचारी
- 54:04है। यही मेरी विलाचारी है, यही ओशो की
- 54:13विलाचारी रही ओशो इसीलिए बोले कि मेरा जो काम मैं कर रहा हूँ वह
- 54:22मेरे अभाव में मैं तो ना कर पाऊंगा क्योंकि जीस यंत्र के
- 54:27सहारे। मैं बोल पाता था तो मैं उस उचाई
- 54:31तक ले जाता था वो सब और गन ठहर गए।
- 54:37अब अब किसी नए चंद्र की तलाश करना जो आपको उन्हीं ऊंचाइयों पे ले
- 54:42जाए जहाँ मैं ले जा पाता हूँ। इसमें कुछ गलत भी ना थी।
- 54:49ट्रू ऑनेस्टी थी इसमें तुम कितना ही डिग्रेड कर लो लेकिन तुम्हारे
- 54:56डिग्रेड कहने से करने से परमात्मा की सृष्टि का विधान बदल नहीं
- 55:02जाता। बिल्कुल सत्य कहा उन्होंने।
- 55:07इसलिए मैंने पहला शब्द बोला कि ओशो जितना ईमानदार आध्यात्मिक
- 55:12व्यक्ति मिलेगा नहीं, अध्यात्मिक तो तुम भी हो लेकिन सुबह से शाम
- 55:17तक गप्पे बोलते हो। अध्यात्म तो राजनीतिक में भी और।
- 55:25उचाई तक होता है वो व्यक्ति जो सत्य बोलते थे, जो बोलते ही नहीं
- 55:30थे उन्हें आपने मोहन मोहन सिंह कहा और आप हैं कि आप सत्य में सब
- 55:38उजड़ जाता है, फिर भी नहीं बोलते, आग लग जाती है तो भी नहीं बोलते।
- 55:48ये क्या है? कोई बोलेंगे जेल में पर्यटकों के
- 55:53कोई बोलेंगे। घर में ईडी, ईडी और ऐसा ही ये सब
- 55:57हैं। बिकाऊ मार्ग खरीद लिए गए हैं।
- 56:02सब संस्थाओं खरीद ली गई हैं। कौन बचा है?
- 56:07हमारी निगाह है जहाँ वह भी बिक चूके होंगे।
- 56:11जब तक हम देखेंगे कि बस वो जाने वाले हैं।
- 56:21लेकिन एक बात मैं बता दूँ, जो अंतिम है और अंतरिम भी है, मैं
- 56:28जिसने खरीदा उसके साथ कुछ जाएगा, जाएगा तो बेईमानी और दूसरों का
- 56:35दिल दुखने। के बीज उनके अनकॉन्शियस में फीड
- 56:40लिया। वो चला जाएगा जो उसे ही भुगतने
- 56:43होंगे और जो बिक गया वो भी अपने आपको क्षमा नहीं कर पाएगा।
- 56:48इसलिए सी जे आई बाद में कहते हैं क्योंकि उनकी आत्मा जागृत है।
- 56:54इन साफ पसंद हैं। वो कहते हैं, इतिहास मुझे किस रूप
- 56:57में याद करेगा, पता है उन्हें कि जीस रूप में उन्हें याद करेगा
- 57:02जैसा उन्होंने किया है उसी रूप में याद करेगा उसी रूप में याद
- 57:08करेगा। कल वो बोल रहे थे श्वेत जुल्फों
- 57:11वाले। वो है ना गिट्टू से कद वाला हाँ
- 57:17क्या बात है? मैं एक्टिंग से बड़ा प्रभावित
- 57:20हुआ, मैंने कहा थोड़ा सा किसी फ़िल्म में काम कम करो, गुजर बजर
- 57:29हो जाएगा। ऐसे क्यों बिके हो इनके हाथों
- 57:34में? आज यह सत्ता कल नहीं रहे कि कौन
- 57:37रहता है यहाँ सदा के लिए तुम्हें खरीदने वाले भी फन हो जाएंगे।
- 57:49फिर बताओ क्या करोगे जनाब? महज अपनी बुद्धि के निर्णयों से
- 58:01शक्ति को खंगालने की चेष्टा करने वाला व्यक्ति बुद्धी मान नहीं
- 58:06होता, बुद्धू होता है तो वो शो कह कर जाते हैं कि कैटलिट का एजेंट
- 58:18चला। और आपके सबस्टेंस आपस में रिएक्शन
- 58:24करके नहीं रिएक्ट कर पाएंगे विथाउट कैटेलिट का एजेंट वह तो
- 58:30चला और फिर कहीं और जाके वक्तव्य दे देते हैं फिर आप क्या करोगे?
- 58:42ऐप करो, सर्च करो, पहचान करो। किसके पास बैठने से आनंद मिला,
- 58:53किसके दूर से निकले थे? और कोई खुशबू छलकी इन नासिक के
- 58:57पुटों को छू गई यह कौन है जो यहाँ घर में बैठे हैं?
- 59:05ज़रा देखूं तो फूल वो नहीं होते जो खिलते हुए देखते हैं, फूल वो
- 59:12होते हैं। जो आपके नासा पुटों को हलक तक
- 59:16भीतर से झंझोर देते हैं, उनकी खुशबू बागवान वही इमानदार होता
- 59:34है। जो अपने गोलसत्ता को सभी प्रकार
- 59:37के फूलों से सजाये रखता है। यह गुलाबों को पालने का शौक और
- 59:50दूसरे सभी सुगन्धों को तिरस्कृत करने का आपका जिद?
- 59:57कहीं आपको ही ना ले बैठें या ना तो आपने कहा, शीला कहती नाइट्रस
- 1:00:09ऑक्साइड लाफ़िंग गैस का इस्तेमाल करता है, बिल्कुल करता है।
- 1:00:14क्या हरजा वो आपके लिए प्रयोग करता है जैसे रामकृष्णा कहते हैं
- 1:00:25सूरी का भोग लगाने से पहले मैं चक लेता हूँ खुद।
- 1:00:31खाने योग्य भी है जो मेरे खाने योग्य नहीं और माँ को कैसे कर
- 1:00:37लूँगा। मेरी माँ भी ऐसी ही किया करती थी।
- 1:00:40राम किशन कहते हैं, मुझे जब खिलाती चोरी तो पहले खा कर देख
- 1:00:44लेती कभी और शक्कर डालने पड़ जाते।
- 1:00:52फिर मुझे खिलाती, कभी थोड़ा सा घी और डालना पड़ जाता है कभी थोड़ा
- 1:00:57सा मिलाना पड़ जाता है सब प्रप ढंग से सब निर्मित करके फिर मुझे
- 1:01:04खिलाती है अपने हाथों से। ऐसे भी ओशो एक माँ की तरफ वार
- 1:01:11करते हैं। आप माँ की तरह आपके हृदय से चिपट
- 1:01:18जाते हैं और कभी बेटी की तरह तो मैं स्नेह।
- 1:01:26से बांध लेते हैं। ये आध्यात्मिक लोग बड़े गहरे
- 1:01:33खिलाड़ी होते हैं, इसलिए इनकी ज़िन्दगी को हमने खेल कहा।
- 1:01:38लीला। ये खेल खेलते हैं और कितने मज़े
- 1:01:44से खेलते हैं? मेरा बेटा यहाँ बैठा कहता पापा
- 1:01:49बाबा आपके जाने के बाद अब इतना इकट्ठ हो जाएगा, मैं कैसे संभाल
- 1:01:55लूँगा, मैंने कहा पुत्र तुम्हें संभालने की आवश्यकता है जो आएँगे।
- 1:02:01वो खुद ही संभाल लेंगे, अच्छा के हाँ, बिलकुल तो फिर आपके कमीज
- 1:02:08बाजा में ये धोके रख दिए। प्रेस करके अब क्या करें?
- 1:02:13मैंने कहा किसी जरूरतमंद को दान कर दो या फिर भक्त लोग आएँगे, ले
- 1:02:18जाएंगे। तुम को फिक्र करती हो, सब प्लान
- 1:02:28तैयार कर नहीं, नहीं रो मत, रोने की क्या बात है, सभी ने जाना है,
- 1:02:33सब प्लान तैयार करता हूँ। और बहुत से लोग मुझे कह देते हैं
- 1:02:37बाबा आप तो ऐसा करते हो जैसे अपनी शादी का इंतजाम कर रहे हो।
- 1:02:40मैंने कहा रे भाई शादी में कहाँ खुशी जो खुशी इस अंतिम अंतिम
- 1:02:58हथकड़ी के टूटने की जो खुशी होती है वो सबसे भारी होती है।
- 1:03:03इसलिए जब व्यक्ति संत पुरुष जब प्राण छोड़ता है, बड़े
- 1:03:08क्रांतिकारी लम्हे होते हैं, इतनी ऊर्जा बिखरती है इसलिए संत की
- 1:03:15मृत्यु के वक्त अवश्य इकट्ठे हो जाना।
- 1:03:21इतना सैलाब उमड़ेगा गाँधी की अंतिम क्रिया में 10,00,000 लोग
- 1:03:28आया क्या आबादी थी उस वक्त? राजघाट के उस मुकाम पर नीलकंठ ने
- 1:03:41जब अंतिम संस्कार की क्रिया की। तो ऐसी तरंगें उमड़ीं हालांकि
- 1:03:50एनलाइटनमेंट के करीब से गाँधी एनलाइटन हुए नहीं, कुछ कुछ शक
- 1:03:56बढ़ने लग गया था और शक से ही इतना त्याग हो गया और तुमने उसके त्याग
- 1:04:03को गोली मार दी। इसलिए मैं कहता हूँ अब कभी कोई
- 1:04:07गाँधी नहीं पैदा होगा। अब होंगे लालची पैदा जो कुछ भी ना
- 1:04:14करेंगे मात्र हीमोग्लोबिन चेक करने के लिए सुई चुभवाएंगे ऊँगली
- 1:04:19में और वो खून दिखाएंगे देखो मैं शहीद हो गया।
- 1:04:25बस ऐसे दिखावा करने वाले शहीद आ जाए।
- 1:04:30आप मरते होगे, भीतर से आवाज आएगी, ठहरो मैं छह वा वस्त्र तो बदल
- 1:04:35लूँ, दिन भर में पांच ही तो बदले। मेरी बातों को हैरानी जनक
- 1:04:43व्यवस्था में मत लेना। मैं एक बड़े कड़वे सत्य बोल रहा
- 1:04:47हूँ जो कपड़े बदलने के लिए बाथरूम से बाहर एक घंटा नहीं निकलता, वह
- 1:05:04तुम्हारे दुख का साथी होगा कब? जो आपके विपत्ति काल में बाहर
- 1:05:11निकल लेता है, वह आपके दुख में सहयोगी कब होगा?
- 1:05:20सुख में झंडा लेकर अपना क्रेडिट ले लेगा, जिसका क्रेडिट।
- 1:05:27उसमें ज़रा भी नहीं है उसका कुछ ऐसे खुद गर्जों से साथ हूँ।
- 1:05:39मैंने कर्ज भी कहा था जीस गुरुर पे तुम जिंदा हो जब वो असलियत
- 1:05:46तुम्हारे सामने आएगी। हिंदू 18% है।
- 1:05:50मैंने बाबा से रिपोर्ट ली इसकी मैंने कहा कहा बाबा से रिपोर्ट ली
- 1:05:59और बाबा झूठ रहे हैं। क्या हिंदू शुद्ध जो हिंदू हैं
- 1:06:04शुद्ध 18%? और मुसलमान 19.72 मुसलमान ज्यादा
- 1:06:11हैं, आज कैसे लड़ोगे आप? क्या आप जिन्हें पांव की जूती
- 1:06:18समझते रहे? जिन्हें सूत्रों की तरह स्वीकृत
- 1:06:21करते रहे और वो ऐसा संस्कार पड़ा कि आज भी किसी कुएं से शुद्र पानी
- 1:06:27नहीं पी सकता। वो व्यवस्था जब सतन धक्के रखने के
- 1:06:35टैक्स लगते थे। टैक्स बदलते देखें, वैट बदलता
- 1:06:42दिखा, आज जीएसटी लगते देखा, बहूत्र के टैक्स लगते देखें।
- 1:06:52एसटी सीएसटी लगता देखा लेकिन सतन टैक्स कभी लगता नहीं देखा।
- 1:06:57हमारे जमाने से पार की बातें और उस वक्त के महान पुरुषों ने कैसे
- 1:07:04उसका विरोध किया होगा या कैसे उसे सहन किया होगा, ये वो ही
- 1:07:09महापुरुषे जानें उनको सलाम। करोड़ों सलाम अगर हम उस वक्त होते
- 1:07:21तो पक्का कहता हूँ कट जाते लेकिन ये होना है ना?
- 1:07:36आज तुम उनको हिंदू समझते हो? बुद्धों के साथ आपने क्या व्यवहार
- 1:07:42किया? बुद्ध लाचार होकर हिंदुस्तान
- 1:07:48छोड़ने पर मजबूर हो गए। कोई इतना मूर्ख नहीं होता कि अपनी
- 1:07:55जन्मभूमि को छोड़ के दूसरे देशों में चला जाए।
- 1:08:01आपके पंडों ने भितिकृत करके उससे निकाला।
- 1:08:05सारनाथ में उन्होंने पहला उपदेश दिया लेकिन आपने कहा बोलने दिया।
- 1:08:14जो थोड़ा सा बोला तुम उस पे घूर रहाए तो तुम क्या समझोगे?
- 1:08:20बहुत हिंदू जत भी तुम उसे कैटेगरी में रखो।
- 1:08:26जैन मंत्र अभी अभी तोड़ दिया गया। जब मैं तुम्हें ही बताता हूँ
- 1:08:32हिंदू परस्तों अगर वास्तव में हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हो तो
- 1:08:38तुम्हारे प्रत्येक कृतव्य तुम्हें क्षमा मांगना बस यही एक पक्षप ही
- 1:08:45इलाज है और दूसरा इलाज टेंपररी। सिखों से क्षमा मांगनी होगी,
- 1:08:54जैनियों से क्षमा मांगनी होगी, ईसाइयों से क्षमा मांगनी होगी।
- 1:09:02क्या किया तुमने मणिपुर में? ये कोई करने वाला था और ज़रा एक
- 1:09:12बार भी पता नहीं है, तो शीर्षस्थ कुर्सी पर क्या तुम बैठने के लायक
- 1:09:18हो, मुझे पटक दोगे, मुझे पता है। और वैसे भी मैं पटका, पटका, या 13
- 1:09:27वर्ष से खाया ही कुछ ने मैं बिल्कुल अंतरंग प्राणों में समझ
- 1:09:35के चला ये कैद खाना और उस कैद खाने जहाँ तुम गिरा दोगे।
- 1:09:45मुझे ज़रा भी फर्क नहीं मुझे उसको बस अब तो मौत की अंतिम घड़ियाँ
- 1:09:52गिरनी है। कहीं गिनी जाए कोई बहुत फर्क नहीं
- 1:09:59पड़ता। लेकिन तुम जीने हिंदू समझते हो
- 1:10:07क्या? वो हिंदू हैं तो बाबा ने कहा 18%
- 1:10:12हिंदू हैं जिनके सिर के ऊपर ये गुमान करते हैं।
- 1:10:15ज़रा मर्दम तुम्हारी देख लो करके गुमान ढल जाएगा।
- 1:10:22कम से ज़्यादा तो आज भी मुसलमान हैं जहाँ और वो ये मुसलमान तो मैं
- 1:10:27बताऊँ इतिहास इनका अतीत खंगालोगे तो ये वो मुसलमान हैं जिनको इस
- 1:10:33माटी से बहुत गहरा पुश्तैनी प्यार ये कभी हिंदू थे औरंगजेब के
- 1:10:40त्रिशद से आके। इनका मन घबरा गया था और ये
- 1:10:48मुसलमान हो गए थे। तुम कहते हो धर्म परिवर्तित किया,
- 1:10:53धर्म परिवर्तित किया क्या आसमान खा गया, धरती निगल गई कहाँ गए वो
- 1:10:59लोग जिनके धर्म परिवर्तित किए? इतना तो पक्का के इतिहास गवाह ही
- 1:11:07देता है कि हाँ, धर्म परिवर्तित हुआ और नहीं तो गुरु तेग बहादुर
- 1:11:13को बलिदान न देना पड़ता। फिर तुमने क्या कदर की?
- 1:11:18गुरु तेग बहादुर के वंशजो की तुमने क्या कदर की
- 1:11:33बताओ अगर सिखों ने दुखी होकर कहा कि हम अलग कौन हैं तो ज़रा सोचिये
- 1:11:43इसके पीछे बात क्या है? कुछ तो हुआ होगा।
- 1:11:51ऐसे की ऐसी ही आशिकी उमड़ती नहीं कुछ तो बिजली सी गिरी ही होगी।
- 1:12:12ओसु ने कहा मेरे जाने के बाद तुम्हारी सभी क्रियाएं जो मैंने
- 1:12:18ही तुम्हे दी बेकार सिद्ध होने को हो मत करना, वो प्रभावी नहीं
- 1:12:24होगी। किसी बुद्ध पुरुष को तलाश लेना
- 1:12:28जागृत पुरुष के। सांनिध्य में ही ये घटनाएं घटती
- 1:12:33हैं। बस यही कमी उनका महत्त्व था।
- 1:12:38लेकिन अगर एक व्यक्ति सात सात फुट की दूरी पर हो, जितनी उसकी लंबाई
- 1:12:43उचाई है उतनी ही दूरी पर हो तो फिर तरंगे आपको कुछ नहीं कहते।
- 1:12:55और इतनी व्यवस्था कहाँ से लाएं? इतना स्थान इतना कहाँ से लेके आए?
- 1:13:04बस एक वक्त के लिए गुरु के सांनिध्य में सभी एकत्रितों के।
- 1:13:09उस समुद्र का पान कर लें, समुद्र को खुला छोड़ दें, उस टेप को खोल
- 1:13:14दें, संत व्यक्ति और आप पर बरस जाए वो थोड़ी सी देर के लिए
- 1:13:22सत्संग की आंधी घड़ी 12 मिनट भजन के वर्ष 50 तुम 50 साल पांच नाम
- 1:13:30जपते रहो है तो संत भी दर्शन देते हैं तो खुली जीप में फुर से निकल
- 1:13:39जाते हैं, दर्शन होगा ये दर्शन है।
- 1:13:45यह महज दूसरों को बेवकूफ बनाने का साधन है।
- 1:13:58दूसरों को गम देने वाले खुद के गमों का भी ख्याल कर लिया करो कभी
- 1:14:07ये तुम पर भी बरसेगा वापस। ये सृष्टि का असुर जो देती हो वो
- 1:14:18वापस लौट जाता है, बिल्कुल उसी मात्रा में इसमें संदेह मत करना
- 1:14:26बस इसे ही मैं कहता हूँ। विश्व में विश्व में से शुरू होती
- 1:14:34है यात्रा और अस्तित्व का आनंद समाधि है।
- 1:14:38मैंने पहले बोला। इस कारण से ओशो ने कहा पुत्र मैं
- 1:14:51चला जाऊंगा तो कैटेलिटिक एजेंट चला जाएगा, क्या करेंगे?
- 1:14:56तुम्हारे रिएक्शन करने वाले तत्व जब कैटेलिटिक एजेंट ना होगा
- 1:15:01समझाने की चेष्टा थी अन्यथा वह समझाया जाता नहीं।
- 1:15:08ऐसे ही उदाहरणों से अगर आपको समझ में आ जाए तो आप भाग्यवान हैं और
- 1:15:15आगे चलकर भाग्यवान ही भगवान हुआ करता है।
- 1:15:21अगर न समझ आए। तो फिर आप अब भाग गए हो काश तुम
- 1:15:31ये बात समझ में आ जाए और फिर आपको उपाय भी बताया मैं चला जाऊंगा
- 1:15:41इतने बेबाक। और इनोसेंट वक्त ही होते हैं।
- 1:15:49अध्यात्म के उन तलों को छीन वाले जब भी तुम उनके रहते तुमने पहचान
- 1:15:56नहीं पाते। कोई क्या करें?
- 1:16:06पहले बताया तुम्हें कारण छोड़ देना सब नहीं चलेगा ये क्योंकि ये
- 1:16:12मेरी मौजूदगी में हो रहा था। तुम्हारी रेंज छह सात फुट तक जाती
- 1:16:19है। जितनी तुम्हारी उचाई ये थोड़ा सा
- 1:16:22समझा दूँ जितनी तुम्हारी। हैट होती है उतनी दूर तरक जाती
- 1:16:27है। तुम्हारी जंजेस हाइट का मतलब भी
- 1:16:30पूरे इतना है लेकिन वह तो अनंत दूरी पे है।
- 1:16:45वह तो अनंत का फैलाव है, वह तो अनंत में कण कण में समाया हुआ परम
- 1:16:51तत्व है। जो रहस्य और आनंद से परिपूर्ण है,
- 1:17:01उसकी मौजूदगी में घटनाएं घटती हैं और गुरु वह कैटरैक्टिक एजेंट है
- 1:17:11जो छः सात फुट का नहीं, महज। बुध थे तो पांच फुट पांच इंच के
- 1:17:19लेकिन पांच फुट पांच इंच की उनकी रेंजेस न थी।
- 1:17:28रेंजेस तो उनकी बड़ी विशाल थी वह विराट से।
- 1:17:33और जहाँ तक वो पहुंचे वहाँ तक अपने अस्तित्व का फैलाव तो वो कर
- 1:17:37ही सकते हैं और जो बहुत ज्यादा तक पहुंचा।
- 1:17:41कबीर कबीर तो अस्तित्व के अनंत में समा जाते हैं।
- 1:17:47नानक अस्तित्व में समा जाते हैं और कृष्ण?
- 1:17:52अस्तित्व एकाकार कर लेते हैं और अस्तित्व एकाकार कर ही कोई वेद का
- 1:18:00ऋषि बोल पाता है। अहम् ब्रह्मस्व ऐसे ही उदघोष नहीं
- 1:18:05हुआ करते। ये अहंकार के तूफ़ान में नहीं आया
- 1:18:09करता ये शब्द। जहर अहंकार से नहीं उत्पन्न होता
- 1:18:19कृष्ण का ये उदघोष माँ वेखम शरणम् वृक्ष अहन्तुआम् सर्बबा पे ब्य
- 1:18:25मोक्ष, श्याम माँ सुचा अन्य न्यास चिंतित तो माँ ये जनमपुरु वास्ते?
- 1:18:32देशाम नित्याभुक्ता नाम योग शिवम्बा में हम ये उसके वास्तविक
- 1:18:37अस्तित्व से आया हुआ उदघोष है। कृष्ण कहते हैं, मैं कोई छः सात
- 1:18:43फुट का नहीं हूँ, मेरा विस्तार अनंत है।
- 1:18:51मेरा विस्तार दिग दिगंतर सब मैं हूँ और मेरे से बाहर कुछ भी नहीं
- 1:19:01विस्तृत विस्तृत विस्तृत फैलाव, फैलाव और फैलाव तो।
- 1:19:09उसकी मौजूदगी में गड्ढे की घटनाएं और वह गया तो सब गया।
- 1:19:18अब क्या करोगे तो पहले से ही सच्चा संत तुम्हें किसी न किसी
- 1:19:28मुकाम पे आके। रास्ता बताया जाता है कि तुम क्या
- 1:19:31करो क्योंकि वो जानता है कि मेरी सत्य शब्दों से, इनोसेंस से बहुत
- 1:19:44से लोगों के हृदय। झलकेंगे वीणा की तारें वजू
- 1:19:49उठेंगी, शहनाइयां गूंजेंगी, उपवन में ज्यादा खुशबू बिखरेगी और
- 1:19:56सितारे ज्यादा चमकेंगे। ज्यादा अभाव ठेरेगा उस दिन का
- 1:20:01चंद्रमा और सूरज की तप थोड़ी सी ठंडी हो जाएगी।
- 1:20:09आपके हर्दों में वो ज्वाला नहीं बिखेरेंगे।
- 1:20:14आग उतनी प्रभावी नहीं होगी। संत के करीब बाकी सब संत के हिसाब
- 1:20:24से हो जाता है। तुमने जरूर सुना होगा कि संत के
- 1:20:30पास आकर हिंसा के जानवर शांति से बैठ जाते हैं।
- 1:20:33संत उनके सिरों को पुचकारते हैं। सुना होगा कहीं ना कहीं ऐसे संत
- 1:20:41आज भी। जिनके पास आके शेर बघेरे बैठ जाते
- 1:20:46हैं और वो उनके सिरों पर हाथ फेरते है।
- 1:20:52बच्चों की तरह क्या है आपसे ज्यादा बढ़िया शेर की?
- 1:21:04सेंसेशन है, वो पहचान लेती है। ये अहिंसक है, यह मुझे ज़रा भी
- 1:21:12नुकसान नहीं हो जाएगा। उसके करीब आके बैठ जाते हैं ऐसा
- 1:21:19अहिंसक व्यक्ति होश। तुम ये कह के जाता है कि मेरे
- 1:21:28जाने के बाद कितना निर्दोष वक्तव्य है लेकिन काश कितने वर्ष
- 1:21:33हो गए उन्हें गे तुम्हारे भीतर ये उतर पाया नहीं उतर पाया तुम फिर
- 1:21:41वही सक्रिय साधना। फिर वो ही हू हू हाँ हाँ के सरसिस
- 1:21:47तो ठीक हो जाएगा। भावनाएँ तो भीतर से निकलेंगी
- 1:21:54लेकिन भीतर लेके कौन जाएगा, कैसे जाओगे तुम?
- 1:22:02कौन बताएगा तुम्हें रास्ता भटकोगे और अटको गे तो फिर पूछोगे किस्से
- 1:22:12तो फिर कोई शास्त्र काम ना आएगा, फिर कोई संवाद काम ना आएगा।
- 1:22:22फिर तत कृष्ण तत प्रभावी संत जो आपके सामने आज मौजूद वो काम आएगा
- 1:22:33वो ही बता पाएगा इन गोल गांठों को खोलने का तरीका।
- 1:22:40तो तुने पूछा पुत्री? मैंने जवाब दे दिया बड़े बेबाक
- 1:22:44ढंग से बड़े स्पष्ट व्यख्यायित कर दिया मैंने इसलिए कह के गए थे ओशो
- 1:22:55और फिर उसका आपको हल भी बता गए अब उलझे कहाँ हो पुतरी ये बता दो।
- 1:23:03क्या तुम्हें संत नहीं समझता कोई क्या तुमने खोजा या कि ओशो की लाश
- 1:23:16से चिपके बैठी हो? ओशो के शब्द ओशो की लाश हैं?
- 1:23:24किसी के भी शब्द लाश हैं, आज वो कबीर हो, वो नानक हो, वो ओशो हो
- 1:23:31और कभी आज नहीं, कल मेरे शब्द भी लाश होने को हैं, इसलिए मैं तुमसे
- 1:23:39कहता हूँ मेरे रहते रहते जाग जाना।
- 1:23:43एक झलक देख जाना और वो कितने कितने दयालू हैं आपके लिए नाइट्रस
- 1:23:50ऑक्साइड गैस का कहते हैं उसे सूंघ लेना, एलएसडी ले लेना भाँग ले
- 1:23:59लेना मैं मिथुन से कहता हूँ, मैं प्रयोग करा रहा हूँ।
- 1:24:04बहुत से लोगों ने बोतल छुआ और बताया मुझे कि बाबा आपका कथन सत्य
- 1:24:17है वही करता है। क्योंकि जब हम उस स्थल पर पहुंचे
- 1:24:23था तो काल्पनिक की जाने थोड़ी देर के लिए थोड़ी देर के लिए था,
- 1:24:29लेकिन सत्यनग्न आँखों से दिखा उसने चलाया और मैं चला कठपुतली की
- 1:24:36तरह उसने नचाया और मैं नाचा इन लम्हों में।
- 1:24:40यह मैंने पहले भी बताया था यह जो बैन कर दी गई भांग एक्यूरेसटिवा
- 1:24:54इसका दूसरा ये मेल फीमेल दो हैं। दोनों ही कारगर हैं।
- 1:25:01ये सेटईवा थोड़ा सा ज्यादा है। अंग्रेजी भाषा में ये दो प्रकार
- 1:25:12कैनबिस, सेटीवा और कैनबिस एनडीए का ये दो प्रकार है।
- 1:25:21इनके प्रयोग करने से दिखे। मैं पहले ही कह रहा हूँ, यह
- 1:25:26टेंपररी आपको उस अवस्था में ले जाएगा, दर्शन सत्य होगा, स्थिति
- 1:25:34टेंपररी होगी। समझाई बात दर्शन जो आप देखोगे वह
- 1:25:39सत्य होगा ऑबज़र्वेशन विल बी ट्रू।
- 1:25:46लेकिन स्थिति क्षणिक होगी, अब इसको आप ठीक से समझ लेना
- 1:25:53ऑबज़र्वेशन गलत ही नहीं होगी। वह जो संत देखता है वही आप
- 1:25:56देखोगे, उन लम्बो में बिलकुल सेम लेकिन स्थिति, सिचुएशन, भक्षण,
- 1:26:07बंकर ओके थोड़ी सी देर के लिए होगी फॉर ए मोमेंट।
- 1:26:14सिचुएशन विल फॉर ए मोमेंट इस बात को आप ध्यान में रख के चलना,
- 1:26:25लेकिन जो आप देखोगे वह होगा असली। दर्शन होगा असली कितनी देर के लिए
- 1:26:41होगा वो होगा अल्पकालिक बहुत थोड़ी सी देर के लिए वो आप उन
- 1:26:49उच्चतम शिखरों के बीच में मुश्किल से दो चार पल।
- 1:26:55जी पांव के और दो चार फल तो बहुत होते हैं।
- 1:27:01भ्रम मिटाने के लिए कितनी देर लगी मुझे भ्रम मिटाने के लिए?
- 1:27:06बस एक आवाज विजय पांव कट जाएंगे, पांव पर कर लो और किसने मुझे पटक
- 1:27:12दिया कितनी देर तक? खत्म पात सब टूट गया इतनी सी देर
- 1:27:22तक आप उस मुकाम पर उच्चतम शिखर पर उस गौरी शंकर पर अब थोड़ी सी देर
- 1:27:27के लिए ठहर पाओगे। लेकिन वह दर्शन होगा, बिल्कुल
- 1:27:32ऑब्सर्वेशन होगा, बिल्कुल सत्य ट्रिप, फाइल्स नहीं होगा, रुकोगे
- 1:27:42फॉर दी टाइम बीइंग मोमेंटरिली क्षणिक तक और इतना तो बहुत होता
- 1:27:48है। एक बार देखिए किसी ओब्सर्वर के
- 1:27:58देख रेख में ये सारा प्रयोग कीजिए।
- 1:28:01अब मैं सब कहीं तो नहीं आपको गाइड कर सकता ऐसे प्रयोग।
- 1:28:10हमारी टीम में तो यहाँ से बाहर नहीं निकलता।
- 1:28:14मेरा अपना एक लक्ष्य है, मेरा अपना एक ढंग है जीने का मैं
- 1:28:18इकट्ठा करता हूँ सिर्फ इकट्ठा आपको बांटने के लिए ज्यादा से
- 1:28:23ज्यादा ज्यादा से ज्यादा। ढंग पूर्वक विवेक से आपको बांट
- 1:28:28पाऊं सहजता से सरलता से गुणतम रहस्यों को परमात्मा से ज्यादा
- 1:28:35गुणतम और क्या होगा? बस मैं सारे दिन इस कवायद में
- 1:28:40रहता हूँ। लोगों को कहा गया कि आप डिस्टर्ब
- 1:28:45मत करो, डिस्टर्ब करोगे तो घंटी बजते ही आप ब्लॉक कर दिए जाओगे।
- 1:28:51मैसेज फेंकोगे तो आप ब्लॉक कर दिए जाओगे, आप जो भी पूछना चाहते हो,
- 1:28:58अब बहुत से लोग तो कहते है रात को मुझे एक शुभ न है।
- 1:29:03हमारी चैनल कंट्रोलर तत्व क्षण अंगूठा प्रयोग कर लेते हैं हैक
- 1:29:07इसलिए बाबा अपनी जिंदगी से घटित एक बात बताता हूँ।
- 1:29:16हमारी चैनल कंट्रोलर अंगूठा तैयार रहते हैं।
- 1:29:21ऐसी मूर्खता मत करना तुम कुछ सीखने के लिए आए हो, सिखाने या
- 1:29:27बताने के लिए नहीं आए हो लोगों की कहानियों पिछले वस्त्रों का कूड़ा
- 1:29:31कबाड़ा उठाके व्हाट्सएप पे फेंक देते हैं।
- 1:29:38मैंने पूछा बाबा से बाबा किसका इलाज बताऊँ, वो तो बता दिया आपने
- 1:29:44कि आप अज्ञानियों के लिए बोलो, अज्ञानियों के लिए मत बोलो, जो
- 1:29:50पहुँच चूके हैं उन्हें आवश्यकता भी कहाँ है?
- 1:29:52अलग कोई नहीं पहुंचा है। तो लेकिन जो समझते हैं मैं पहुँच
- 1:29:59गया, उन्हें आवश्यकता भी क्या है? वो तो जेखा ही है, वो तो अड़ेंगे
- 1:30:05उनका लबादा टूटेगा तो वो चिल्लाएंगे।
- 1:30:09वो ऐसे ही खुश हैं तो उनकी खुशी में ही तुम भी खुश हो जाओ।
- 1:30:15और जो ज्ञानी नहीं है, जो अज्ञानी है उनके लिए तुम बोलो तो मैंने
- 1:30:20कहा बाबा इनका क्या करें? वो कहते हैं लेट गो कर दो, चल मुख
- 1:30:28ज्ञाता जो भी आए कोई भी आए, किसी भी रूप में आए।
- 1:30:34कितना ही भीतर उसके यह भावना हो कि मेरा क्लोसेस्ट है, आप अंगूठा
- 1:30:43फेर देना तो मैंने कहा मुझसे तो नहीं हो पाएगा जी?
- 1:30:49क्योंकि मैं तो होश में नहीं रहता हूँ, अमिर तो ऐसा होता है।
- 1:30:54मैं जब दीक्षा देता हूँ, यहाँ बहुत से लोग दीक्षा के लिए बैठ
- 1:30:57जाते हैं और यहाँ मेरा पुत्र कुणाल निगरानी पर होता है।
- 1:31:03किसको दीक्षा लेनी किसने दर्शन करना और सब व्यवस्था उसके हाथ में
- 1:31:07होती है? सारा भार व्यवस्था का भार उसके
- 1:31:11अकेले पर होता है यहाँ का। भीतर के कमरे का वह अकेला आ सकता
- 1:31:17है तो कई बार वो यहाँ खड़ा होता है।
- 1:31:21तुम्हें दीक्षा देते हुए इतने फैलाव में होता हूँ और भूल जाता
- 1:31:26हूँ तो मैं सोचता हूँ यह व्यक्ति इतनी देर से खड़ा है जहाँ यह पंकज
- 1:31:32में बैठ क्यों नहीं जाता? दीक्षा ही तो लेनी है तो फिर
- 1:31:36क्यों खड़ा है यह बैठे और पंगत में दीक्षा ले ले, लेकिन मैं चुप
- 1:31:42कर जाता हूँ। अब पिछले दिनों एक अधबुल रहा हूँ
- 1:31:48मेरे पास मैसेज आते थे, यहाँ कोई नहीं था।
- 1:31:51चैनल कंट्रोलर पुत्र किसी काम से। किसी शादी के काम से गया हो जहाँ
- 1:31:57मेरे पास मैसेज आया मैंने घूठा फेर दिया जहाँ मेरे पास फ़ोन आ
- 1:32:04गया। तीन चार बार फ़ोन आया, मैंने घूठा
- 1:32:07फेर दिया। सांझ घर लौटा मेरा पुत्र कुणाल
- 1:32:16पापा आपने मुझे बोला कर दिया, मैंने कहा तुम्हें क्या बोला किया
- 1:32:21कहता वो जो पांच फ़ोन आए थे, मेरे ही तो थे, मैंने देखा हाँ हाँ
- 1:32:26तुम्हारे ही थे लेकिन मैं क्या करूँ?
- 1:32:30मैं तो अंगूठा फेरना जानता हूँ, मेरी तो आँखें खुली भी नहीं होती,
- 1:32:34तुम जानते हो बस आवाज़ सुनी और अंगूठा फिर गया।
- 1:32:39कौन था पता नहीं बुद्ध की तरह स्त्री थी, पुरुष थी, नग्न था,
- 1:32:45वस्त्र पहने थे, आवाज़ थी कानों में पड़ी।
- 1:32:50और कोई गुजर गया। पता नहीं वो कौन था?
- 1:32:57श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरा हे नाथ नारायण वह सुते श्री कृष्ण
- 1:33:21गोविंद हरे। मुरारी हिनाथ ना रहा न वा सुगे
- 1:33:44कितुमात स्वामी। सखा हमारे हेनाथनारां यन व सुबह
- 1:34:02मितमात स्वामी सखा हमारे। श्री कृष्ण, गोविन्द और मोरारी
- 1:34:32एनाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोविन्द।
- 1:34:44हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव, वासन सी जीर्णनी सब हाय।
- 1:35:02नवानी, घृणाती नरोपुरा तथा श्री रानी विहार जीर्णान्य सैया।
- 1:35:19नवानी दे पितमात स्वामी सका हमारे स्वामी।
- 1:35:39नाथ स्वामी नाथ स्वाम हम्म पितुमात स्वामी।
- 1:35:56सखा हमारे ऐना तिनारा यन वासुदेव श्री कृष्णवय अरे मुरारी केनाथ
- 1:36:10नारायण वासु धन्यवाद आपका।