Latest / Baba ji Vijay Vats / 3 Jan 26 - भलो भयो हरि बिसरो, सर से टली बला - कबीर | शंका से श्रद्धा तक : संत गंगाराम का चमत्कार!!
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- 0:09कई दिनों से बहुत प्रश्न आ रहे हैं मजेदार और उन प्रश्नों का मैं
- 0:17आनंद उठा रहा हूँ। लीजिए एक एक करके मैं प्रश्न
- 0:30सुनाता हूँ, आदमी का मन उसे कहाँ कहाँ बजता है बाबा हम कहते हैं
- 0:44आपको 25,00,00,000 मिलेंगे। वो मुँह मिर वा ठूस लेते हैं,
- 0:52हंसने लग जाते हैं, हमारी खिल्ली उड़ाते हैं, वो ऐसे करते हैं तो
- 1:00बाबा हम क्या कहें? हमारा मन बल कर जाता है।
- 1:12मुझे भी कइयो ने डाइरेक्टर पूछा है पापा पैसा कहाँ से आएगा?
- 1:1925,00,00,000 हर व्यक्ति को देते हो गए।
- 1:28हमारे शहर में एक व्यक्ति हुआ करता था उसका नाम था सेठ बुरा
- 1:36दत्ता मल। लेकिन किसी कारण से बेचारा गरीब
- 1:41हो गया, लॉटरी बेचने गया। तो वह बीमार हो जाता हूँ तो
- 1:51डॉक्टर के पास जाता हूँ। बिलकुल आपके जैसा था पुत्र।
- 2:08भयंकर दर्द पेट में और डॉक्टर के पास चला गया उसके घर के करीब
- 2:17पड़ता था डॉक्टर जगदीश बहुत अच्छे डॉक्टर है, सस्ते भी है बस सिर्फ।
- 2:27₹150 में इंजेक्शन भी लगा देते हैं, दवा भी अपने पास से दे देते
- 2:32हैं इतना सस्ता ज़माना और इतना रश रहता जितना गाड़ी आती है ना
- 2:42प्लेटफार्म पे रश होता है इतना रश होता है उसकी दुकान पे।
- 2:49तो उसने कहा डॉक्टर साहब मेरे पेट में बहुत दर्द है, गुड़ गुड़ हो
- 2:53रही है, वाशरूम जाना पड़ता है। बार बार डॉक्टर इन्जेक्शन लगाने
- 3:01लगा। कम्पाउडर को पर्ची लिख के दे
- 3:07इंजेक्शन भर के ले आया वह तो कोई आप जैसा होगा वह बोला यह किस चीज़
- 3:21का इंजेक्शन है? अब डॉक्टर को सुपर सा होता है
- 3:26डिकलो फैनी का है और दर्द में क्या देगा?
- 3:30ऐन्यूअल कैसे क्या देगा ना ऐंटी फास्मोडिक दे देगा?
- 3:36उस वक्त बैरोलगन हुआ करता था उसके बाद एनोलजिन साल्ट।
- 3:43रिएक्शन करना शुरू कर दिया तो हम रिस्क लेना बिल्कुल नहीं चाहते।
- 3:47हमने पेंसिलिन भी बंद कर दिया क्योंकि वह किसी किसी को माफ़
- 3:51करने आता था। वह चलते चलते रिएक्शन करने लग
- 3:54जाता। उसका पता ही कोई नहीं हमारी भाभी
- 4:00का इन्फेक्शन हो गया था। और उसको पेंसिलिन बड़ा मासिक था।
- 4:04पेंसिलिन से ही सदर ठीक हुई हो, लेकिन 1 दिन हमने पेंसिलिन
- 4:1024,00,000 लगाया और तुरंत ओवर एक्शन कर दिया।
- 4:18सारा शरीर लाल। और दप्पड़ होने लगे दप्पड़ समझ
- 4:25गया फोले घबराहट होने से शरीर जलने लगा।
- 4:38मैंने देख ली इलेक्शन। मैं भागा, डॉक्टर की दुकान पे
- 4:43गया, मैंने कहा जल्दी कर डेक्सोना 40 दे दे मैं फन दे दे ये दे दे
- 4:50वो दे दे वगैरह सब मैंने बोल दिया नाम आ गए डॉक्टर भी ऐसा ही नाम
- 4:56मेरे वाले विजय कुमार। वह थोड़ा सा बोलता था, धीरे धीरे
- 5:02आरएसएस कथा सुबह सुबह सोटी लेकर जाता हूँ तो मैंने कहा डॉक्टर
- 5:11साहब मुझे एक बात बताओगे, कहता क्या?
- 5:16उसी पार्क में मैं सहकर्ता उसी पार्क में इनकी शाखा लगती आदि
- 5:23कच्ची पहनने में वो आ जाते हैं। मैंने कहा डॉ साहब एक बात का जवाब
- 5:28दो, मुझे आज तक समझ नहीं आया कहते क्या माँ ऍम के ये बताओ?
- 5:35कि आपको यह लाठी संभालना है या आप लाठी को संभाले हैं?
- 5:43बस ऐसा ही था वो बहादुर और आरएसएस का बागता ऐसा ही होता है।
- 5:55लाठी संभालना है उसको यह वह लाठी को संभालना है।
- 5:59उसे पता ही नहीं होता आकर वो अपने सब कुछ ढंग बदल लिए थे।
- 6:07अब देखो ऐसा करो या ऐसा करो। ऐसा करो उससे क्या फर्क पड़ता है?
- 6:16बस सर्कस का ही फर्क पड़ता है ना और तो कोई फर्क पड़ता नहीं।
- 6:20बहुत से लोग नाक से नाक मिलाते हैं।
- 6:23अभी वादन का एक असंकेत का या ढांक है और बहुत जगह पे आपको अलग
- 6:31मिलेंगे। कुछ ऐसी जगह है जहाँ जब मिलते हैं
- 6:35आप उसमें थूक देते हैं, दूसरे के ऊपर आप कहोगे क्या?
- 6:38बद्दी परम्परा है, लेकिन है ऐसी अपनी अपनी सामाजिक मान्यताएँ।
- 6:59इंजेक्शन लगाने लगा तो गुड या लॉटरी वाले ने पूछा इसके अंदर
- 7:05क्या है? पुराना था।
- 7:08कंप्यूटर कहता है की इसमें डिक्लोफेनिक है, पोटैशियम सोडियम
- 7:13है तो ये बनता कैसे? कम्पाउडर ने नीचे पड़ी हुई
- 7:31प्लास्टिक की छोटी सी टोकरी होती है।
- 7:33उसमें सारा टिकाऊ डाल दिया तो गुरिया लॉटरी वाला कहने लगा ये
- 7:40आपने क्या किया कहते देखिये मैं कम्पाउडर हूँ।
- 7:45इन्जेक्शन लगा सकता हूँ। इन्जेक्शन में क्या है, कैसे बना
- 7:51ये मैं नहीं जानता। ये डॉक्टर साहब से पूछो मैंने
- 7:56अपना काम कर दिया इतना वक्त कहाँ है?
- 7:5910 वर्षियां और पड़ी है अकेला आदमी हूँ आज तो दो जने छुट्टी पे
- 8:04है। बाहर आ गया।
- 8:10पेट दर्द तो वैसे ही कर रहा है। डॉक्टर के पास पैसे दे दिए, चला
- 8:18गया दर्द तो वैसे का वैसा रहा। कल मेरे एक भक्त की जो बड़ा अपने
- 8:31आपको विशेष भक्त मानता है और कल उसकी पोल खुल गया, जो सदा से कहता
- 8:42था कि मेरे ऊपर। आपकी कृपा क्यों नहीं बरसती?
- 8:48कल परखा गया बाबा आपके ऊपर से विश्वास उगता जा रहा है, उसका नाम
- 9:02बता देता हूँ मुझे कुछ मुझे शर्म नहीं आया करते शर्म से दूर खड़ा
- 9:09हूँ मैं। बेशर्म नहीं हूँ शर्म से दूर खड़ा
- 9:14हूँ मैं शर्म को भी अड़ते हुए देखता हूँ इसलिए बस प्रकृति का
- 9:19नहीं करता शर्म मेरे बस में है मैं लूँ या ना लूँ।
- 9:29उसका नाम है गणेश कुमार। कर्क आग्रा से ही है।
- 9:36ऐसा प्रश्न आया तो मैंने लिखा मैंने लिखा समस्याओं का हल करूँ
- 9:45या शंकाओं का लिखें मेरे हाथ में। पढ़ के सुना रहा हूँ ये खुद से
- 9:56बिनबलाये मेरे व्हाट्सएप पे आ गए। हालांकि मैंने कभी नहीं कहा मेरे
- 10:05व्हाट्सएप पे आके बात करो लेकिन आ गए चलो।
- 10:10इतना स्वीकार कर लिया थोड़े अरे बाबा मेरी श्रद्धा क्या शक्ति जा
- 10:20रही है? ऐसा ही रहा तो श्रद्धा शून्य हो
- 10:29जाऊंगा। आग के ऊपर बनी हुई इतनी श्रद्धा
- 10:33टूट जाएगी। मैं फौरन हुई चीजों को पकड़ लिया
- 10:40करता हूँ। मेरे पास बड़े यंत्र पैमाने हैं
- 10:44मापने के। मैंने कहा, समस्याओं का हल करूँ
- 10:51या शंकाओं का गुरिया, लॉटरी वाला जैसी बात होगी।
- 11:01आपका पेट दर्द ठीक करने के लिए ऐंटी क्रॉसमैटिक दूँ।
- 11:07या तो मैं समझाऊं कि जब बनता कैसे हो?
- 11:10अगर भाई डॉक्टरी करनी है तो मेडिकल कॉलेज में प्राइवेसी ले
- 11:20लो, उसके बाद मेडिकल कर लो, एमबीबीएस हो जाओ, फिर एमडी हो
- 11:26जाओ। एम् मैं सूर्य हूँ तो उसने जल्दी
- 11:38से के बाबा कहते बुद्धिकम है मैं आपका भक्त तो हूँ।
- 11:52लेकिन बुद्धि कम है तो उसे पता है ये अब ब्लॉक कर देंगे।
- 11:58डरते भी है तो जल्दी से सारे मैसेज डिलीट है।
- 12:03अब कोई मैसेज नहीं इनका और इन्हें पता है एक बैंगलोर से है तरीका।
- 12:12वो नहीं मानी, नहीं मानी, उसने चैनल को मजाक समझ लिया, कहती
- 12:20अच्छा तो बताओ मैं इस वक्त क्या कर रही हूँ?
- 12:25मैं कुछ नहीं बोला बाबा आज मौसम बड़ा सुहाना है।
- 12:32और नाम लिखा हुआ तारिका बैंगलोर। अब वो उसके बाद छह महीने से
- 12:37लगातार मैंने हरप्रीत से भी कहा इसका क्या हल करें, बताओ कहते हैं
- 12:44बाबा वो कर दो वो कर दो। मैंने कहा हम तो सीधा फॉर्मूला
- 12:47जानते हैं। ये थोड़ा सा मुझे मोबाइल कम ही
- 12:52चलाना आता है, चेतना आपकी एक तरफ ही लगेंगी ना तो इधर थोड़ी कम
- 12:59लगवाई तो मैंने जैसे ही उसका कोई मैसेज आया, मैं पढ़ता ही हूँ।
- 13:11लिखे जाओ अब उसको छः महीने से हो गए, मैं पढ़ता नहीं वो लिखे ही
- 13:18जाती है, लिखे ही जाती है। ऐसी बहुत सी बातें है।
- 13:25जो कुछ तो हार हूर के छूट गए पांच नाम ले लिए जो घर पे बैठ गए,
- 13:32मायूस हो के 5.5 वर्ष हो गए, मुझे बोलते हुए पूरा ग्रंथ बोल दिया,
- 13:41ग्रंथ का अंत भी कर दिया उसके बाद भी प्रश्न।
- 13:45प्रश्नों पे प्रश्न प्रश्नों पे प्रश्न उसके उत्तर गहरे गहरे ये
- 13:51जानते हुए भी कि आप उथले उथले प्रश्नों का अभी समाधान नहीं कर
- 13:56पाए, फिर भी गहरे गहरे प्रश्नों का उत्तर में।
- 14:04यूट्यूब पे डाल रहा हूँ रिकॉर्ड कर रहा हूँ भला तुम्हें पता है
- 14:08किसके लिए कर रहा हूँ नहीं मैं तुम्हारी जेनरेशन के लिए कर रहा
- 14:16हूँ अगर कल को। एक भी व्यक्ति मुझे नहीं सुनेगा
- 14:22तो तुम पाओगे, मेरे वीडियो ऐसे ही आयेंगे, अब तो क्या आयेंगे?
- 14:27अब तो मैंने ग्रंथ पूरा कर दिया, फिर तो कोई प्रश्न नहीं आएगा और
- 14:30प्रश्न नहीं आएगा तो मुझसे कोई उत्तर भी नहीं आएगा।
- 14:37नए प्रश्न करने वाली दीवारों को मैं जवाब नहीं दिया करता क्योंकि
- 14:44दीवारें कोई प्रश्न नहीं खड़ा करती।
- 14:48मैंने पहले दिन ये आपसे कहा था कि मैं आई ऍम जस्ट ए साइलेंट लिंक
- 14:55मेक मोन। जेल की तरह और मैं क्यों बोलूं?
- 15:06जब आपने कंकड़ियाँ फेंकी तो लहर क्यों उठे?
- 15:15िरोपायो गांठ गठि आयो आर वारवा को क्यों खोलें?
- 15:34मन मस्त हुआ हुआ फिर क्यों बोला मन मस्त हुआ फिर क्यों बोला?
- 15:48यह है मेरी आखिरी। मंचल यहाँ तक पहुंचाना था आपको
- 16:00मेरे चचा जान की तरह सातवीं से छठी में हो गए।
- 16:03छठी से पांचवीं में हुए पीछे पीछे बैठकर लगाते लगाते आपके मूल
- 16:09प्रश्न पे आगे जब भेट ये नहीं भरा होगा।
- 16:12ठीक है बात जय जी तो पेट भरने का समाधान खोज लिया, मैं क्या नहीं
- 16:20कर सकता? फिर लोगों के प्रश्न आए क्योंकि
- 16:25तुम प्रश्न ही करना जानते हो, जवाब तो तुमने कभी सुना ही नहीं?
- 16:32अगर मौन होना सीख लो तो प्रश्न गिर जाएगा।
- 16:40फिर कहते हैं बाबा तुम हमारे मन ही बदल लो, यह दुख देने वाला मन
- 16:50ही ना रहे। अध्यात्म में भी ऐसे ही प्रश्न आए
- 16:58मन के मालिक तुम जब तुम। मन के मालिक न रह के मन के गुलाम
- 17:11हो जाते हो तो ऐसी ऐसी बातें उठती हैं जब तुम मन के मालिक न रह कर
- 17:20सच में तो तुम मन के मालिक हो जब तुम मन के मालिक न रह कर।
- 17:28मन और इंद्रियों के गुलाम हो जाते हो, तब ऐसी ऐसी आशंकाएं होती है।
- 17:36आशंका क्या है? उस गुरिया लॉटरी वाले को आशंका
- 17:39क्या थी? कहीं गलत दवाई न दे दे और मैं मर
- 17:44जाऊं तो अगर गलत दवाई दे भी देगा। तुम्हें क्या पक्का पता है के
- 17:49इसके भीतर डिकलोफेनिक है भी के नहीं है, यह बता भी दे डॉक्टर के
- 17:59डिकलोफेनिक कैसे बनता है? फिर भी तुम ये पता कैसे लगाओगे कि
- 18:05यह इंजेक्ट करने वाला। द्रव्य नहीं तुम्हारे पास कुछ
- 18:13नहीं, लेकिन तुम्हारा मन शंकाई उठाता ही चला जाता है और इसलिए
- 18:22मैं तुम्हें बार बार कहता हूँ, तुम्हारा मन ही तुम्हारे दुख का
- 18:25कारण है। तुम्हारे मन को कुछ पता नहीं
- 18:32शंकाएं उठाना जनता है तो संत कहते हैं इस मन को ही समाप्त कर दो अलग
- 18:41अलग तरकीमे बरत के मन को ही समाप्त कर दो।
- 18:53ऐसी ऐसी प्रश्न आए मेरे पास और मैं ब्लॉग पे ब्लॉग पे ब्लॉग
- 18:59ठोकता चला गया, क्योंकि यह भी एक पैमाना है।
- 19:05जो समझदार थे, उन्होंने कोई प्रश्न नहीं उठाया, वो समझदार थे,
- 19:10वो जानते हैं। प्रश्न करने का अर्थ होता है
- 19:15तुमने अपना धैर्य खो दिया, तुमने अपनी श्रद्धा खो दी जैसे ही तुम
- 19:24प्रश्न करोगे तो प्रश्न आएँगे अधैरे से।
- 19:31प्रश्न आएँगे श्रद्धाहीनता से, विश्वासहीनता से और जो समझदार थे
- 19:40उन्होंने कोई प्रश्न नहीं किया और मुझे खुशी है इस बात की।
- 19:531020 लोगों से अन्य ज्यादा मेरे चैनल पर ये शंकाएं आई नहीं, बस
- 20:06यही आई तो उनको मैं कुछ नहीं कह सकता।
- 20:09हम ही लोगों को कहते हैं तुम आगे शेयर करो।
- 20:13तुमको 25,00,00,000 आगे लोग कहते हैं हंसने लग जाते
- 20:27हैं, ताली मारते हैं, मजाक उड़ाते हैं, मखौल उड़ाते हैं तो बाबा हम
- 20:34चुप कर जाते हैं। सच बात तो ये है कि पता तो हमें
- 20:39भी नहीं है। ये ठीक कहते हैं क्योंकि मैंने
- 20:42कौन सा बताया कहाँ से है इशारा ही तो किया है तो आगे लोग पूछते हैं
- 20:52कैसे आयेंगे बस ये घुरिया लाटरी वाले की बात याद रखना ये क्या है?
- 21:00तो डॉक्टर बोलता है कि तुमने पेट दर्द ठीक करना है या डॉक्टर सीखना
- 21:06है अगर डॉक्टर बनना है तो मेडिकल कॉलेज में दाखिल हो जाओ एम बी
- 21:14बीएस करो एमडी करो या एमएस करो। अगर तुमने दर्द को ठीक करना है तो
- 21:23ये इन्जेक्शन रखवालो शायद तुम ठीक हो जाओ पक्का नहीं, मैं कह सकता
- 21:32समस्याओं को हल करना चाहते हो। मैं तुम्हारी समस्याओं को हल करूँ
- 21:40या तुम्हारी पागलपन का हल करूँ? अब अगर मारकस जैसे लोग कहें बिना
- 21:50कोचिंग के परमात्मा नहीं है तो किशोर किसका परमात्मक है और
- 21:56परमात्मा हस्ता है। उसे भला कोई फर्क पड़ता है?
- 22:02जब आत्मा को कोई शास्त्र नहीं काटता, कोई चिंता नहीं जलाती तो
- 22:10मार्क्सवाद का नास्तिकवाद क्या उसे सताएगा?
- 22:15वो जानता है। पल दो पल का शायर है, शायरी करेगा
- 22:20और चला जाएगा माल तो हमरा ही है मैटर कैन नीदर बी क्रिएटेड नॉट
- 22:27कैन बी जस्ट स्टार्ट तो भगवान तो जानता है यह मैटर मान ही जाना
- 22:36मान। इससे भगवान पर क्या असर पड़ता है?
- 22:43ज़रा भी तो असर नहीं पड़ता। मुझसे लोग कहते हैं पहले ही समझाओ
- 22:52या तो समझने की भी चेष्टा कहाँ करते हैं बस?
- 22:56ताली मार के खूब हस्ते हैं, खाने का शुक्रिया है।
- 23:00हीमोग्लोबिन 10 से 10.5 हो गया होगा, यह भी तो हमने पुण्य ही
- 23:06किया। मोती जी रोज़ पुण्य करते हैं,
- 23:14देखो कितना हंसाते हैं। एक कार्टून पहली दफ़े हिंदुस्तान
- 23:19की गती पर बैठा यह इतना हंसाता है कई बार मेरा पेट हँसते हँसते पीठ
- 23:30से लग जाता है ऐसी ऐसी ऐसी शानदार वैज्ञानिक बाते।
- 23:36नाले में से मैं गैस पैदा कर दूंगा, मौसम खराब हो और मिसाइलों
- 23:48को देखना बंद कर दूंगा। अगर आपको किसी ने कहा है आपने
- 24:06आपने कहा कि हम दुखी हैं। बाबा तो मैंने उनसे मुखातिब हुआ।
- 24:17जो दर्द मिटाना चाहते हैं, चुपके से आ जाते हैं, मैं उन्हें दवा दे
- 24:24देता हूँ, डॉक्टर का काम जिखाई मारना होता है।
- 24:30अगर जिखाई ही मरवानी है तो मेडिकल कॉलेज में जाओ वहाँ।
- 24:36वहाँ 2030 मिनट के लेक्चर्स होते हैं।
- 24:38वो पगार लेते हैं, वो आपको बताएंगे हाइपोथैलिक मुस्किया होती
- 24:43है वो बताएंगे पीचट्री कहाँ होती है वो बताएंगे पीनियल कहाँ होती
- 24:50है सब बताएंगे आपको। दर्द से मुक्ति पाने निकले थे, मन
- 25:04राह में खड़ा था, उसने शंकाएं उठा।
- 25:08दी। घर से तो हम चले थे।
- 25:16खुशी की तलाश में खुशी की तलाश में घमराहो में खड़े थे।
- 25:36वो ही साथ बोल रही है। ये शंकाएं रास्ते में खड़ी थी,
- 25:43तुम्हें पता भी नहीं था, बिलकुल हर व्यक्ति अपने अभावों से पीड़ित
- 25:50है। वो अभाव चाहे आनंद का हो।
- 25:54वो अभाव चाहे पदार्थ को हो, दो ही तरह के अभाव होते हैं, कोई पदार्थ
- 26:06से और कोई आनंद से अभावग्रस्त है। तो आनंद तो मैंने बोला है कैसे
- 26:19तुम आनंद के उस अंतिम छोर पे पहुँच पाओगे?
- 26:25तो फिर आपका सवाल आया जच्चा सबको जचेगा।
- 26:31जब कबीर को जच गया भूखे भजन ना होय का पालन ये ले अपनी कंट्री
- 26:36में ना नहीं होता भाई तो फिर मेरे पास हाल है।
- 26:53मैंने कितनी बार आपसे कहा? मैं वो शम जो कयामत की खबर रखता
- 26:59हूँ, मैं वो शम जो कायनात की खबर रखता हूँ।
- 27:12गिद्ध सी नजर है मेरे अब मेरे पास संसाधन है, तुम भी उस स्थान पर
- 27:22पहुँच सकते हो। ऐसा नहीं कि अकेला मैं पहुँच गया
- 27:28नहीं इससे पहले बहुत से आए और आपके इन शब्दों में दफन होकर चले
- 27:34गए। बहुत आए आए और चले गए, लेकिन
- 27:40कितने व्यक्तियों ने बुद्ध को समझा?
- 27:46कितने व्यक्तियों ने बुद्ध को मनस के भीतर उतरने दिया?
- 27:52ऐसे ही संत आते हैं, चले जाते हैं।
- 27:55संतों का अभाव तो कभी भी नहीं हुआ।
- 27:58मेरे जाने के बाद भी कोई न कोई तो आएगा ही।
- 28:07मार्कस चला गया, लोगों की भूख कहाँ उठी?
- 28:12मार्कस कहता मैं क्यों परमात्मा हूँ, मानूं?
- 28:16जो खाने को रोटी नहीं देता तो मार्कस के मर जाने के बाद खाने को
- 28:20रोटी किसने दिया? और मार्कस के जन्म से पहले खाने
- 28:28को रोटी कौन देता था? लेकिन सही बात ही है, तुम बदलना
- 28:40चाहते ही नहीं पीड़ाएँ तुम्हें दुख देती हैं, क्षणिक।
- 28:48समस्याएं तुम्हें दुख देती हैं क्षणिक और फिर जब तुम नॉन एनर्जी
- 28:55में आ जाते हो तो तुम बेहोशी के आलम में खो जाते हो, लेकिन बहोश
- 29:05होकर बेहोश होकर तो तुम निद्रा में चले जाते हो।
- 29:11वहाँ झंझट सब खत्म हो जाती है, लेकिन बाहोश होकर जिसने अपने
- 29:19अभावों को खत्म किया बहुत संत कहलाता है।
- 29:24बाहोश होकर जिसकी जरूरतें मिट गई, उसका अभाव है।
- 29:29मिट गया। जरूरतें ही तो अभाव पैदा करती
- 29:35हैं। संत आखिर में स्थल पर पहुंचता है
- 29:41जहाँ उसकी कोई जरूरत बचती जहाँ वह खुद ही नहीं बचता।
- 29:57बहुत से कमेंट आये, उसमें कुछ मजेदार भी थे।
- 30:00आपको सुना तो तो सुनी। उसने कहा हमने नहीं पता था के
- 30:07बाबा विजयवश के भीतर मोदी छुपा बैठा है।
- 30:14नहीं बड़ा ऐसा। मैंने कहा वा कमाल हमें नहीं पता
- 30:21था। बाबा विजय वत्स तो नकाब है भीतर
- 30:27तो मोदी ही छुपा बैठा है। सबसे सुंदर कमेंट लगा मुझे एक
- 30:35नंबर देता हूँ उसको मैं। अधिशान कमिट तुम जान तो गए ना कि
- 30:48मोदी ने जो वायदा किया वह वायदा ही क्या जो वफा हो गया?
- 31:00समझ लेना आगे से भी अभी मोदी राज़ कर रहे हैं वह वायदा ही क्या जो
- 31:05वफ़ा हो गया जो वायदा वफ़ा नहीं होगा वह पूरा करने की बात कहेगा
- 31:12मोदी आज अतीत में यह भविष्य में जब भी कभी कहेगा मैं ऐसा कर
- 31:20दूंगा। चिल्ला के कहेगा खूब देखिए हमें
- 31:23चिल्लाना तो नहीं आता, लेकिन काम तो हमारा करने में पूर्ण लक्ष्य
- 31:32है। मैं वो शे हूँ जो कायनात की खबर
- 31:38रखता हूँ। मैं वो शे हूँ जो कयामत की नजर
- 31:46रखता हूँ, मैं समस्याओं का हल करना जानता हूँ।
- 31:57समस्याएं कैसे हाल होंगी यह भी जानता हूँ, लेकिन तुम्हारी शंकाओं
- 32:06को हल तो तुम्हें ही करना है। पुत्र गणेश गर्ग अब तुम सिर्फ
- 32:13मुझे कभी कमेंट नहीं कर पाओगे। तुम मेरी वीडियो को मज़े से सुनो
- 32:19अगर तुम्हे वीडियो सुनने में मज़ा आता है अगर तुम्हे वीडियो सुनने
- 32:25में मज़ा नहीं आता तो राम राम करने में मज़ा आता।
- 32:32राधे राधे करने पांच नाम जपने में जहाँ मज़ा आता है वहाँ चले जाओ
- 32:37किसने भुलाया था तुम्हें क्यों माथापच्ची करते हो तो मैंने
- 32:51तुम्हें ब्लॉक कर दिया, समझ लो या तो उस।
- 32:56तरीका की तरह रखूँगा, तुम्हारी कमेंट्स आयेंगे और मैं ज़रा भी
- 33:00ध्यान में करूँगा। मैं जागृत इंसान हूँ, शुद्ध इंसान
- 33:06नहीं जागृत। यह सारी मशीनरी के भीतर जागृत
- 33:12तत्व बैठा है। और मैंने उसे कब से जान लिया है।
- 33:1740 वर्ष पराना अनुभव मेरा रोज़ उस आनंद को जाम के प्याले भर भर के
- 33:25पीता हूँ और आपको लुटा देता हूँ, बस अब आप कमेंट मत कीजिएगा
- 33:33क्योंकि आप ब्लॉक हो गए। एक तरफ भी कमेंट मत कीजिएगा, माफी
- 33:38वगैरह मांगने की जरूरत नहीं। आपने कोई गलती ही नहीं की।
- 33:42प्रश्न करना कोई गुनाह नहीं होता। शंका करना और शंका उस व्यक्ति के
- 33:50ऊपर करना। जहाँ पर आप निहीं शंक होने
- 33:54चलेंगे, यह गुनाह है तो फिर वहाँ जाओ जो आपको निःशंक कर सकता है।
- 34:01अगर चमत्कार देखना चाहते हो बाबा बागेश्वर के पास शो अगर रेपुटेशन
- 34:10करना चाहते हो। तो राधास्वामी के पास चले जाओ तो
- 34:16बी के में चले जाओ, वो सिखाएंगे तुम्हें मुझे कोई कहने लगा बाबा
- 34:24आपको वोट कौन डालेगा? आप ने सबके साथ बिगाड़ दिया।
- 34:29बीके से, निरंकारी से, राधास्वामी से सभी सनातनियों से मैंने कहा
- 34:37मुझे मुझे कोई वोट नहीं मिला और मुझे वोट वोट की जरूरत भी नहीं है
- 34:45वोट तुम्हें देंगे तुम्हारे दर्द। इन्जेक्शन लगाने का मन किसका होता
- 34:54है? लेकिन जब कोई दर्द से छटपटाता आता
- 35:00है तो इन्जेक्शन हमारे पास है। भाई एनर्जेसिक भी हैं।
- 35:07ऐंटी स्पेस्मोलिक भी हैं ऐनेस्थीसिया भी है हमारे पास है
- 35:17सब इलाज अंडर वन रूफ, तो जब आप आओगे शर्ट पटाते हुए तो फिर देखा
- 35:26जाएगा। आप होंगे भी के नहीं।
- 35:361 दिन पड़ेगा जाना क्या वक्त, क्या ज़माना?
- 35:461 दिन पड़ेगा जाना क्या वक्त, क्या ज़माना कोई ना साथ देगा, सब
- 35:59कुछ यही रहेगा। होंगे।
- 36:05यहीं झमेले जाएंगे हम अकेले ये जिंदगी के मेले जाएंगे हम अकेले।
- 36:22ये ज़िन्दगी के मेले दुनिया में कम न होंगे, अफसोस न होंगे।
- 36:41हाँ जी, ये यंत्र ठीक से काम नहीं कर रहा।
- 36:45सर्दी लगे जाएंगे हम अकेले 1 दिन पड़ेगा जाना क्या वक्त क्या?
- 37:03कोई न साथ देगा सब कुछ यही रहेगा कोई न साथ देगा सब कुछ, यही रहेगा
- 37:17जाएंगे हम अकेले ये ज़िन्दगी के मेले।
- 37:24दुनिया में कम न हो के अफसोस कम न हो के देख लिया मैंने अगर प्यासों
- 37:46तक खबर नहीं पहुंची, यह बात अलग है।
- 37:54पश्चिमी बंगाल, तमिलनाडु जो हमारी भाषा को नहीं समझते, वहाँ तक बात
- 38:02नहीं पहुंची तो बात अलग है। उन तक तो विचारों तक बात ही नहीं
- 38:11पहुंची, लेकिन क्या किया जाए? जिन तक बात पहुँच गई वो कहते हैं,
- 38:20यकीन नहीं होता, अब ये यकीन क्यों नहीं होता क्योंकि बाबा विजय बस
- 38:30के भीतर लबा दा उड़े मोदी बैठा, अब के बड़ा मोदी आ गया।
- 38:3715,00,000 का जुमला चला नहीं चल गया तो अब 25,00,00,000 का चलाओ
- 38:4815,00,000 का जुमला चल गया 15,00,000 दिया नहीं, अब क्या
- 38:52करें? अब इससे बड़ा झूठ बोलो तो फिर 15
- 38:57से 35,00,000 तो चलेगा नहीं। 15 से 50,00,000 भी नहीं चलेगा।
- 39:041,00,00,000 भी नहीं चलेगा तो 25,00,00,000 दे दो पुत्र तुम
- 39:14बिलकुल ठीक हो अगर तुम मेरे शिष्य हो।
- 39:24और तुम्हारी श्रद्धा टूट रही है तो श्रद्धा जो अब तक बनी वो कच्ची
- 39:34थी, कच्ची थी पुत्र। गुर गूंगे गुर भांवरे गुरू करे
- 39:45युद्धास गुरू जो भेजें नरक में तो सर के रखियो आस कहते हैं अगर गुरु
- 39:56झूठ भी बोल दे बोल रहे हैं, झूठ बोल रहे हैं।
- 40:00तो रास्ता उनका ग्रथ है श्रद्धा तुम में कितनी हो तुम पहुंचोगे
- 40:06नहीं लेकिन फिर क्या होगा? एक अनुभव हो जाएगा, अनुभव क्या हो
- 40:13जाएगा और यह बड़ा कीमती है। अनुभव क्या हो जाएगा के जाप से
- 40:19परमात्मा मिलता है। यह अनुभव भी बड़ा कमाल का है।
- 40:27संसार में ऐसा ही अनुभव होता है कि पदार्थ में आनंद नहीं है, सुख
- 40:31है, क्षणिक सुख है, यह भी बड़े काम का है।
- 40:36क्यों कहा अष्टावक करने? के भोगो भोग से दुख मिलेगा बड़े
- 40:44कमल का शब्द है अष्टावक्र कहते भोगो भोगने के लिए सृष्टि बनाई
- 40:51भोग से दुख मिलेगा। दुख से बैरक आएगा बैरक से
- 40:54मुमुक्षाह का जन्म तो झपो पांच नम झपो और राधे रह जा, इससे
- 41:05कॉन्सन्ट्रेशन नहीं होगी ध्यान रखना एनर्जी लेस्नेस आएगी तुम
- 41:10एनर्जी लेस्नेस को कॉन्सन्ट्रेशन मत समझ लेना।
- 41:15कॉन्सेंट्रेशन इस ए डिफरेंट थिंग एनर्जीलेसनेस तो शक्तिहीनता है और
- 41:30कॉन्सेंट्रेशन शक्ति को एक अपूंज में डाल देना।
- 41:36अब इसको ठीक से समझ लो। जाप करना शक्ति को गंवाना है।
- 41:47एनर्जी लेस्सनेस वो है और कॉन्सेंट्रेशन।
- 41:53जो कहते हो ना आप जप करने से कॉन्सेंट्रेशन आएगा।
- 41:56यू अरे ऑन रॉंग वेयर जप करने से शक्ति हीनता आएगी एनर्जीलेसनेस
- 42:03आएगी कॉन्सेंट्रेशन है बिना शक्तिहीनता के उस सारे पुंज को
- 42:10इकट्ठा कर लिया जाए। ज़रा भी गवाही देना यही एक महीने
- 42:18में यही भ्रमचर्य है जो सारे दिन मोबाइल देखते रहते हो, एनर्जी को
- 42:26खपाते हो बस यह। तकनीक ने वैज्ञानिकता से ने
- 42:35परमात्मा तक पहुंचने से एक बाधा बना दी।
- 42:38आपको तो सभी वैज्ञानिक खोजें शुभ नहीं होते, अशुभ भी होते।
- 42:51अनु आण्विक की शक्ति को पैदा करता है।
- 42:54ऐसा नहीं है, वो डिस्ट्रक्शन भी करता है।
- 43:00तुम इसे प्रयोग कैसे करते हो? व्हाट्सएप का इस्तेमाल तुम श्रेणी
- 43:05का अपने। मनोभावों को अपने मित्रों तक
- 43:10पहुंचाने का काम करते हो या कि तुम इसको बकवासी मीडिया की तरह
- 43:17प्रयोग करते हो या तुम्हारी मर्जी है या तुम सारे दिन कार्टून देखते
- 43:23रहते हो, अपनी आँखें खराब कर लोगे।
- 43:26और अपना दिमाग तो खराब हो ही जाएगा।
- 43:32उसी शक्ति को अगर इतिहास से जानना चाहते तो किताबों से ही जानें।
- 43:37बहुत से लोगों ने इतिहास लिखें हैं।
- 43:43तो जाप में आती है शक्तिहीनता एनर्जीलेसनेस और मैंने जो आपको
- 43:51मार्ग दिया वो शक्तिहीनता का तो मैं बिल्कुल ही नहीं देता, मैं तो
- 43:56कहता हूँ, शक्तिहीनता से बचो। ब्रह्मचर्य का खंडन शक्तिहीनता
- 44:01है। वैसे ही जाप भी शक्तिहीनता जाप भी
- 44:06भोग है। जाप भी भोग की तरह आपको एनर्जी
- 44:13लेस्सनेस में ले जाता है। दट।
- 44:14इस नॉट ए वे ऑफ कॉन्सेंट्रेशन। कॉन्सन्ट्रेशन का विकय है जहाँ
- 44:28जहाँ से चिपकाहटें अपने जीसको हम मुँह वो कहते हैं वहाँ से
- 44:37चिपकाहटों को हटा देना। फिर आपकी शक्ति वहाँ पर जानी बंद
- 44:45हो जाएगी। कॉन्सेंट्रेशन विल हैपन
- 44:49ऑटोमैटिकली चिपकाहटों को काट दो राम राम जपने से पांच नाम जपने
- 45:00से? कॉन्सेंट्रेशन नहीं आती ध्यान
- 45:02रखना तुम गलती में हो चपकहटों को काट दोगे तो कॉन्सेंट्रेशन विल
- 45:14हैपन यह एक हैपनिंग है जाप। एक आपको शक्तिहीनता करने का एक
- 45:33साधन है। तुम बेहोश हो जाते हो और तसल्ली
- 45:40दे देते हो। मैंने आज का जाप पूरा कर लिया।
- 45:44लेकिन तुम पाओगे लाखों सालों बाद भी तुम क्यों नहीं पहुंचे,
- 45:50क्योंकि तुम्हें गुरु ऐसे ही मिले?
- 45:52गद्दियाँ बढ़ती गईं और ये आज से नहीं बहका रहे लोगों को।
- 46:01इससे पहले और भी थे। बहकाने वाले अन्य अन्य ढंगों से
- 46:06उन्हीं की उपज है। ये गद्दियाँ बदल गई हैं जीसको यह
- 46:15नहीं पता कि सत्यकांड जीते जी मिलता है।
- 46:20मौत के बाद तो सिर्फ मृदानगी मिला करती है सच खंड तो जीवंत प्रतिभा
- 46:30और जीवंत रेवोलुशन ऑफ कॉन्शन्स है।
- 46:40रेवोलुशन का रेवोलुशन क्रांति जहाँ जहाँ आपने अपनी चेतना को
- 46:50चिपका रखा है वहाँ वहाँ से गाड़ दो।
- 46:57इसको ऋषि कहते हैं, चिपकाटों को आप काटोगे।
- 47:05ऑटोमैटिकली आपकी शक्ति एक जगह पे कन्सेंट्रेट हो जाएगी, उसका तो
- 47:10फिक्र ही मत करो, कन्सेंट्रेशन पैदा करने के लिए श्रम मत करो।
- 47:16यह भी एक श्रम है जाप भी एक श्रम है कॉन्सेंट्रेशन पैदा करने के
- 47:22लिए चिपकाहटों को काट दो सीजर से कैंची से जहाँ भी मोह है आपका।
- 47:38जैसे एक रबड़ को आप फलाए जा रहे हो और उसको बीच में से कोई
- 47:47व्यक्ति कैंचे से काट दे तो वो फलावट कहाँ जाएगी?
- 47:54जो रबड़ फैली थी, इतनी दूर तक रबड़ बैंक फैला था, कहाँ गया?
- 47:59वह अपनी ओरिजिनल फार्म में आ गया। जब टूट गया तो सत्य जब दिखा तो
- 48:04अपनी ओरिजिनल फार्म में आ गया। इसी अवस्था में आके कबीर कहते
- 48:16हैं। भलो भयो, भारी भी सरो सर से टली
- 48:23पता एक बला टल गई यह जो रबड़ बैंड हम खीच रहे थे, किसी ने काट दिया
- 48:32और इसका फैलाब नकली था। और रबर बैट अपनी ओरिजिनल फॉर्म
- 48:39में आ गया। आगे का शब्द सुनिए ज्यादा
- 48:42महत्वपूर्ण है भलो भयो, हरी भी सरो ये पांच नाम भी सर गए भूल गए।
- 48:51राधीर आदि बिसर गया। राम राम बिसर गया।
- 48:53कोई भी नाम बिसर गया। बहुत अच्छा हुआ शुभ हुआ ऐसी आएगी
- 49:00कॉन्सेंट्रेशन कैसी आएगी आगे का शुभ सुनिए सर से टली बला थिसर
- 49:07गया। जो तुमने खुद ही चिपके रखे थे।
- 49:12ये गुरु लोग आपका भला नहीं करते जितना विनाश इन्होंने किया है,
- 49:17इतना कोई भी नहीं कर सकता। जैसे थे तैसेब है, तुम कैसे हो
- 49:29वैसे ही हो जाओ जैसे थे तैसेब है। तुम जैसे थे वैसे हो जाओ जो हो वो
- 49:39हो जाओ, बनो मत कुछ यह रबड़ का खींचना एक बनना था, एक्चुअल फर्म
- 49:46इसकी ये नहीं थी रबड़ को खींचना। यह एक कल्पना थी।
- 49:53तुम्हें लगेगा रबड़ इतनी बड़ी है नहीं, इतनी बड़ी नहीं है।
- 49:56रबड़ का ओरिजिनल फॉर्म क्या है? काटने से पता लगेगा या छोड़ने से
- 50:01पता लगेगा उसको खींचना छोड़ दो तो पता चल जाएगा।
- 50:10जैसी थी तैसी भय तुम जैसी हो वैसे हो जाओ आगे का शब्द और भी प्यारा
- 50:17है अब कछु कह ना जाए अब मौन हो गया मनमोन।
- 50:28फिर क्यों बोले फिर क्यों बोलेंगे?
- 50:33फिर क्यों फैलेगा? फिर क्यों कल्पना के जाल में अपने
- 50:37आपको बड़ा दिखाने की चेष्टा करेगा?
- 50:40यह बिलकुल दिखावे बाजी रबड़ बैंड को खींच के बढ़ा लेना है।
- 50:45यह नकली है, यह उसका स्वभाव नहीं। रबड़ बैंड ऐसा है नहीं जैसा तुम
- 50:50दिखाने का प्रयत्न करते हो। जब मन मस्त हो जायेगा, ओरिजिनल
- 51:00फॉर्म में आएगा जैसे से तैसे भय अब कुछ कहा न जाए।
- 51:06क्या कहोगे, खा कहोगे, अमृत का प्यारा पी के आनंद का वो प्यारा
- 51:11पी के कुछ कहना बाकी रह जाता है, फिर तो मस्ती को कह देना बाकी
- 51:20बचता है जो हम कहते हैं, हम मस्ती ही कहते हैं।
- 51:27मन मस्त हुआ फिर क्यों वो हो रहा जरूरत तो नहीं होती?
- 51:37मन मस्त हुआ फिर क्या वो हो हो रहा?
- 51:44बोलने को है भी कुछ नहीं लेकिन फिर भी संत बोलता है अपनी ओरिजिनल
- 51:57फॉर्म में आ जाओ भलो भयो हर इविंग सर वो अच्छा हो गया।
- 52:03पांच नाम भी सर गए। सर से टली भला ये एक भारत सिर्फ
- 52:08गंदगी की टोकरी रखी हुई थी जाप गंदगी की टोकरी है वो राम राम हो
- 52:15जो पांच नाम हो वो राधे राधे हो वो कृष्णा कृष्ण हो ये गंदगी की
- 52:20टोकरी है। ये रबड़ बैंड को इसकी ओरिजिनल
- 52:23फर्म में नहीं आने देता। सर से टली भला बड़ा अच्छा हो गया
- 52:33ये टोकरी फेंक दी देखो तुम्हारे सर के ऊपर ईंटो से भरा हुआ बट्टल
- 52:37है तुम्हे बाहर नहीं लगता क्या लगता है?
- 52:43अगर कोई जबरदस्ती ऊपर से खींच के नीचे गिरा दे तुम रिलैक्सेशन और
- 52:49इजीनेस महसूस करोगे ना करोगे बिलकुल करोगे जाप ऐसा ही।
- 53:02और कबीर कहते हैं बहुत अच्छा हुआ, बाहर हीन होकर पता चलता है कि
- 53:09बाहर उठाई था मैं और कितना दुखी था सिर पर गट्ठर था।
- 53:17लकड़ियों का बहुत बुरा हुआ ये गठड़ को पटक दो नीचे तो भार विहीन
- 53:26हो जाओगे ये गठड़ तुमने खुद ही बांधे।
- 53:30गुरुओं का तो काम है लूटना पाटना। और इकट्ठा करके अपने अगली
- 53:36पीढ़ियों को दे देना। लेकिन संत का ये काम नहीं होता।
- 53:44नानक कहाँ इकट्ठा करते हैं? नानक तो जो ₹20 ₹30 मिले, वो आज
- 53:50तक खत्म नहीं हुए, देखो खत्म हुए। और खत्म होंगे भी नहीं, कभी कभी
- 53:58नहीं खत्म होंगे। मैं तुम्हें सदा कहा करता हूँ अगर
- 54:05तुम किसी ऐसी जगह पे हो जो तुमसे बिल्कुल अज्ञात है जिसके बारे में
- 54:12जानते हैं। तो फिकर मत करना अगर तुम्हें
- 54:17सामने गुरु द्वारा नजर आ जाए बस तुम शरीर की जरूरतों से निश्चिंत
- 54:25रहना, तुम्हें खाने को मिलेगा, सोने को मिलेगा पीने को पानी
- 54:30मिलेगा यही तो जरूरत है बंदे की सही।
- 54:35विश्व का एक नंबर का अमीर होना व्यक्ति की जरूरत थोड़ी होती है।
- 54:39यह तो वासना की जरूरत होती है जब व्यक्ति उस मुकाम पर पहुँच जाता
- 54:54है। तो फिर छोटी छोटी ताल चइयों को
- 55:02खोजता नहीं। हंसा पायो मानसरोवर हंसा पायो।
- 55:26मानसरोवर ताल तले या क्यों ढोल ताल तले या क्यों ढोल?
- 55:45मन मस्त हुआ फिर क्यों बोले मन मस्त हुआ फिर क्यों?
- 55:55बोले चुप हो जाओ, ध्यान रखो मैं बांट नहीं रहा।
- 56:11बांटता है अहंकारी व्यक्त है मुझसे बांटता है अब इस फर्क को आप
- 56:25आसानी से समझ रहे हो गागर इतनी भर गई।
- 56:32इतनी भर गई एक बूंद समाने को जगह न बच और ऊपर से गगन मंडल से
- 56:39निरंतर आनंद की धार बह रही है। वर्चू मात्रा में बह रही है और
- 56:46गागर से छलक छलक जाती है वो अमरतरस की धार।
- 56:53क्या आप गागर को कहोगे कि यह बांट रहा है?
- 56:59फिर क्या कहोगे तुम कहोगे यह छल कर रही है, गागर गागर बांटता नहीं
- 57:09है। गागर से बंट जाता है गागर से
- 57:12इच्छा लग जाता है बांटने वाला तो से अटैगा बांटने वाला तू झंडी
- 57:21दिखाएगा किया किसी ने भी हो फिर झंडी मैं दिखाऊंगा, ये देखो मैंने
- 57:27किया। नहीं मैं बांटता मेरी गगरिया इतनी
- 57:36भर गई छलके छलके जाते और उस गगरिया में मेरा ज़रा भी श्रेय
- 57:43लेने का मतलब नहीं क्योंकि दिया सच खंड।
- 57:48दिया। गगन मंडल ने बिखेरा।
- 57:50गंगा मंडल ने गगरिया पहले से भरी हुई तो उस रस का क्या होगा?
- 57:58हमें बिखर बिखर जाएगा तो क्या यह बांटना है?
- 58:01नहीं, यह बांटना बिलकुल नहीं है। यह बिखर जाएगा, छल के जाएगा यह
- 58:08बंट जाएगा उस बंटते हो को अगर तुम पी लो तो तुम्हारा शोभाग्य इसलिए
- 58:20बुद्ध जीस रस्ते से निकल जाते। वहाँ मुरझाई हुई फसलें पुनर्जीवित
- 58:30हो जाते हैं। कहानी है बाबा नानक गम्मो को
- 58:40चराने जाते। किसी का खेत चर गई और वृक्ष तले
- 58:47बैठे आनंद से आँखें मूंदे उस अमृत रस का पान कर रहे हैं।
- 58:51बाबा नानक सब चर गए ठूँठ बचे। पत्ते चर गईं।
- 59:12कुछ भी न रहा तो खेत के मालिक ने नानक से कहा तुम अपनी गाय इधर
- 59:21क्यों छोड़ते हो? ने कहा भाई पशु है, मैं अपनी
- 59:28मस्ती में बैठा था, कोई बात नहीं आगे से मैं उधर छोड़ दिया करूँगा।
- 59:32नहीं तुम रोज़ ये ही काम करते हो, मैं तुम्हारे पिता को जाके शिकायत
- 59:37करूँगा तो नानक चुपके से घर चलेगा पिता से जाके शिकायत कर।
- 59:45कहानी है ध्यान रखा, पिता से कहा तुम्हारा पुत्र रोज़ गायों को ले
- 59:52जाता अक्सर जो बच्चा पढ़ता लिखता नहीं है हम उसको कहते हैं चल तू
- 59:59फालतू का काम या गायों को चराना। इनको नहला जा के तालाब में ये
- 1:00:08फालतू के काम हमारे पंजाबी में कहावत है वैली रन परुणा योगी आय
- 1:00:14गए को संभालना है वो पानी दे दिया, चाय दे दी बस सेवा उसका काम
- 1:00:20है। नानक से कहा, उसके पिता ने तू ये
- 1:00:27क्या करता है? तू अपने डंगर पशुओं का केयर नहीं
- 1:00:32करता, वो तो नहीं? पिता फिर ऐसी बात नहीं।
- 1:00:39तो ये तो आया है शिकायत लेकिन कि रोज़ देखता हूँ कभी कोई पक्ष कहा
- 1:00:46गया कभी कोई पक्ष कहा बाबा नानक कहते नहीं कहानी है मैं फिर कह
- 1:00:52रहा हूँ तुम्हें ऐसा नहीं है। तो पिताजी कहने लगे चल तू आज साथ
- 1:01:11चल मेरे यह शिकायतें आना ठीक नहीं, मैं भी दीवान हूँ, मेरे पास
- 1:01:21कोई अपने बच्चे की शिकायतें लेके आते तो मुझे हरजाना देना पड़ेगा।
- 1:01:30अच्छे अमीरी खानदान के थे, गुरु नानक थे।
- 1:01:38नानक कहते हैं, चलो गए वहाँ खेत देखे हरे भरे घरे।
- 1:01:54खेतों के मालिक को शर्म आई। नानक के पिता बोले कहाँ है, दिखाओ
- 1:02:07तुम गलत शिकायतें लेकर आ जाते हो, कौन सा खींच च रहा है, बताओ तुम
- 1:02:14कहते एक कल चढ़ गए थे, परसों चढ़ गए थे, एक आज चढ़ गए।
- 1:02:17क्या छोड़ा? इसे सभी खेत तो लेह ला रहे है।
- 1:02:22फसलें हरी भरी पड़ी है, जीवंत है, शर्मिंदा हुआ और समझ भी गया।
- 1:02:35देखने के बाद समझा आ ही जाती है। कहता गलती हो गई पिताजी घर चले गए
- 1:02:46और उसने नानक के पांव पकड़ लिया। कहता मुझे क्षुमा करते रहो, मुझे
- 1:02:52पता नहीं। हमारे गिद्दड़बाह में एक संत
- 1:02:56गंगाराव आँखों देखी बातों में ये बात आँखों देखी बताता हूँ तुम्हें
- 1:03:01मैंने नहीं देखी मेरे पिताजी ने देखे लेकिन पिताजी झूठ नहीं बोलते
- 1:03:06थे पिताजी की जवानी। सुबह नहाने जाते वहाँ डिग्गी थी।
- 1:03:16वहाँ नहाते लंगर भी वहीं छक लेते आग भी वहीं सेक लेते।
- 1:03:21सर्दी में धोना जगाए रहते बाबा गंगा राम सिद्धत पहले रहते थे
- 1:03:33हुस्नत। यहाँ से तीन चार किलोमीटर दूर है
- 1:03:37गांव हुसनर हुसन से हुसनर बना है, बड़ा हसीन गांव है, हुसन का मालिक
- 1:03:45है हुसनर। तो वहाँ पर ऐसे थे वहाँ पर किसी
- 1:04:01ने सरकारी पानी तोड़कर तालाब में मर दिया।
- 1:04:05हालांकि बाबा गंगा राम के पास कोई गाय अपनी तो थी नहीं, लेकिन बगाना
- 1:04:10कौन होता है? सन्तों का।
- 1:04:12संतों ने देखा कि ये पशु प्यासे मर रहे हैं।
- 1:04:15गर्मी के दिन तो तैलाब को भर दें, यहाँ से पानी पिला दें, पी जाएंगे
- 1:04:21खुद आके बहुत अच्छा था तुम बाल्टी भर भर के रखते हो कब तक रखोगे?
- 1:04:30तैलाब भी खुश हुआ था। गाय भैंसे आएंगी और गर्मी में
- 1:04:35अपनी प्यास बिछा लेंगे। तो उसने सरकारी जो नाला था वो काट
- 1:04:42लिया और तलाक भर लिया। तलाक छलकने लगा, ऊपर तक पूरा भर
- 1:04:47गया। तो उसने वो जो छोटी डाली होती है
- 1:04:53वो बंद कर दी है। अक्सर वो यही किया करते थे।
- 1:05:00पशुओं के लिए यह करुणा है। पशुओं को ही प्यास लगती।
- 1:05:10पशुओं को भी भूख लगती है। किसी ने शिकायत कर दी।
- 1:05:21हुसैनर के किसी ने वासी ने क्या नाम था उसका पहला टहल सिंह टहल
- 1:05:33सिंह, जरनैर सिंह। दो लोगों ने शिकायत कर दी।
- 1:05:42अंग्रेज अधिकारी थे तब अंग्रेजों का राजस्थान स्वतंत्र था, नहीं
- 1:05:45मिले थे। हमारे जन्म से पहले की बात है, हम
- 1:05:49वो सौभाग्यशाली नहीं है जिनका जन्म आजाद हिंदुस्तान में हुआ।
- 1:06:01अंग्रेज के पास शिकायत कर दी। अंग्रेज कानून के बड़े पाबंद
- 1:06:07ड्यूटी में ज़रा सी किसी ने खुदाई की।
- 1:06:10आज आज तो कोई अड़ंग वड़ंग बोल देता है, बोल देता है।
- 1:06:14साहब कोई एक्शन लेता ही नहीं, यह कमजोर मैनेजमेंट की निशानी है।
- 1:06:24अपने घर को पहले से काबू करना चाहिए।
- 1:06:28मेरा बच्चा ही अगर किसी को जाके गली निकाल ले।
- 1:06:33तो समझ लेना कि इसे संस्कार मैंने ठीक नहीं दिए।
- 1:06:39मेरे बच्चे से कभी आप शिकायत नहीं पाओगे।
- 1:06:42उसने आपको गाली निकाल दी या उसने आपको चांटा लगा दिया?
- 1:06:48कभी नहीं ऐसा पाओगे संस्कार? जाके शिकायत कर दी।
- 1:06:58अंग्रेज ऐसे संस्कारी थे, तुम अपने आप को संस्कारित कहते हो?
- 1:07:02संस्कारित अंग्रेज थे जैसा भी संस्कार दे दिया उसको उन्होंने
- 1:07:08प्रेम पूर्व के निभाया तो हैट रखते थे।
- 1:07:13जो साहिब लोग थे घोड़े पर आए। उन्होंने कहा सरकारी पानी तोड़
- 1:07:18लिया। यह बार बार तालाब भर लेता है।
- 1:07:25यह संत क्या है? मुसीबत है?
- 1:07:27यह हमारा पानी भी कम कर देता है। वरना देखो खुद पीता है क्या खुद
- 1:07:37पीता है अरे पशुओं को भाई प्यास लगती है, पशुओं के लिए खोला है
- 1:07:47तुम शिकायत कर दी हो चलो। तो शिकायत कर दिया तो 15 मिनट के
- 1:07:53बाद 15 मिनट के बाद उनके पास स्टाफ पूरा हुआ करता था।
- 1:07:59वो ठगी तो नहीं किया था? स्टाफ पूरा ऐसा नहीं है कि 1010
- 1:08:05लोग से उसने एक बिटिया का। मैसेज आया 10 लोग से अब गट के तीन
- 1:08:11रह गए। हम तीन में से दो तो साहेब भी
- 1:08:14हैं, एक मैं ही हूँ, काम करने वाली बाबा, कोई वालंटियर और
- 1:08:18रिटायरमेंट का प्लान ले के ही नहीं आती।
- 1:08:21गवर्नमेंट पर भाई इन्होंने। तो अपने वस्त्र बदलने हैं,
- 1:08:30तुम्हारी फिकर कब करनी है? तुम्हारी फिकर तो कोई करेगा
- 1:08:35फिकरमंद ये रंडे टुंडे पुंडे लुंडे आपकी फिकर नहीं करेंगे,
- 1:08:41इसीलिए जब भी कभी गलती सोंकना उसे सोंकना जिसके बाल बच्चे।
- 1:08:48तुम गलत सोचे जाते हो। यह कोई क्वालिफिकेशन नहीं है।
- 1:08:52सत्ता के लिए क्वालिफिकेशन है, उसे आटा, नून, भाप, तेल, लकड़ी सब
- 1:08:58पता होना चाहिए। गैस का क्या भाव है चीनी बड़ी
- 1:09:03गड्डी? अन्न दाल का क्या भाव है उसे पता
- 1:09:10होना चाहिए। तोरी, कद्दू, करेला, भिंडी,
- 1:09:16चिंटू, प्याज, लहसन इनका क्या रेट है?
- 1:09:22तुंड मुंड को पता है क्या? तो घर कुछ लेके ही नहीं जाना है।
- 1:09:27बाजार में बाप कुछ है तो आज तुम पूछ के देख लो टुंडो मुंडो से पूछ
- 1:09:32के देख लो, कोई भी जवाब नहीं दे सकेगा और इनके नीचे काम करने वाली
- 1:09:38व्यवस्थापक जो इन्होंने रखे हुए हैं।
- 1:09:42उनको भी नहीं पता होगा। साहब ने कह रखा तुमने क्या लेना
- 1:09:45बाप से जो तुम्हें जरूरत है कजाना खुरा है चाबी ले जाओ और ले जाओ बस
- 1:09:52बात खत्म तो टुंड मुंडों को कभी मत उठाना और यही काम तुमने कर रखा
- 1:09:58है और आर एस है यही सता है टुंड मुंड रह जाओ।
- 1:10:05भाई रूड़ मुंडो के लिए यह नहीं होती, देखिये जनक का भी जनक का भी
- 1:10:09शादी हुआ, राम का भी हुआ, कृष्ण का भी हुआ और कितना शानदार
- 1:10:13मैनेजमेंट किया उन्होंने उन्हें पता होता है।
- 1:10:21भाई भाव बढ़ गया है प्याज का और प्याज सब्जी के लिए आवश्यक है।
- 1:10:26लेकिन यहाँ तो फिर हम प्याज खाते ही नहीं, यहाँ तो हम लहसुन खाते
- 1:10:32ही नहीं तो क्या मैं अगर रोटी नहीं खाता तो अन्न के भाव का
- 1:10:36ख्याल ना करूँ? क्या आटा और चावल क्या भाव है यह
- 1:10:40मेरी निजी? इच्छा है कि मैं खाऊं कोई दूसरे
- 1:10:44के ऊपर त्याग का, मैंने कुछ पुरस्कार थोड़ी लेना है।
- 1:10:50मैंने अपने शरीर को जैसे सेट होता है वैसे नहीं कह रहा हूँ तो मेरी
- 1:10:55मर्जी है, तुम्हारे ऊपर कोई एहसान थोड़ी है इस बात का?
- 1:11:00नहीं नहीं, मैं तुम्हें सिर्फ एक अनुभव बताया करता हूँ कि इतने से
- 1:11:06जीवन चल सकता है भाई ज्यादा 54 जंगा मत खाया करो, इते से जीवन चल
- 1:11:13सकता है, चला रहा हूँ तुम्हारे सामने बैठा हूँ और जहाजों में
- 1:11:18घूमने फिरने से। ही जीवन धन्य नहीं हुआ करता ये
- 1:11:22देखो एक जगह पे बैठा हूँ, जीवन धन्य है परम धन्यता का उपलब्ध हो
- 1:11:26गया तो घोड़े के ऊपर अंग्रेजों का प्रतिनिधि जीसको दायित्व संपाता
- 1:11:43वो आ गया। साथ में वो लोग भी थे।
- 1:11:51नाम फिर बता दो जरनैर सिंह तहर, सिंह तहर सिंह जरनैर सिंह के दो
- 1:12:00आदमी थे जनोने शिकायत के। साथ में वो भी ले लिए बताओ भी
- 1:12:08निशांत ही करो अब सभी सूखे पड़े हैं, तालाब कोई तालाब बना नहीं
- 1:12:18यहाँ तक के पेपड़ी जमी हुई है, नीचे तरेड़ें पड़ी हुई हैं।
- 1:12:25जैसे सूखा पड़ा हुआ होता है, धरती पे कहता कहाँ भरे हैं भाई कहाँ
- 1:12:36भरे हैं बताओ बाबा अभी तो भरे थे। अच्छा देखो अगर आगे से शिकायत कर
- 1:12:45दी तो ख्याल रखना गया और बाबा गंगा राम जीके जाके चरणों में हैट
- 1:12:53रख दिया लेकिन अभी शंका वापिस एक बार हो गया।
- 1:13:04अब संत कहाँ छोड़ता है? अब कारखंड वृक्ष को लाक तुम बेरी
- 1:13:12को लाक बट्टे मारो लेकिन वो फल देने से रुकते नहीं वो फल देख
- 1:13:17लिया आपके लिए। रुका नहीं वो पशुओं के लिए अब के
- 1:13:25घर जाके शिकायत कर दी, किसी और ने कर दी देख के गया था।
- 1:13:35अभी गंगाराम परीक्षा ले रहे थे। पिताजी कहते हैं, मैंने पूछा
- 1:13:40तुमने ऐसा क्यों किया? कहते भक्तों की परीक्षा लेना
- 1:13:44आवश्यक होता है। तुम्हारे पास जो आता है, गलत नीयत
- 1:13:48से तो नहीं आता? ठीक अभाव से आता है क्योंकि उसकी
- 1:13:52रेंज आपस को प्रभावित करती है। जीस जगह पे बैठेगा।
- 1:13:57वहाँ अगर अच्छी रेंज है तो अमृत बसेरेगा अगर गलत रेंज है तो जहर
- 1:14:03छोड़ के जाएगा, आने वाले व्यक्ति पे प्रभाव पड़ेगा तो संत वक्त
- 1:14:09वक्त पे परीक्षा लेता है। कहाँ तक पहुंचे तुम कितने गर्क गए
- 1:14:14हो या कितने ऊपर उठ गए हो? वक्त वक्त पे संत परीक्षा देता है
- 1:14:25अब की फिर शिकायत करती किसी और ने करती हमारा पानी तोड़ लिया।
- 1:14:32इन्होंने हमारे पानी को तोड़कर तालाब भर लिया।
- 1:14:38टर्न मेरी थी। पानी मेरे खेतों को लगना था, भर
- 1:14:41दिया इसने तालाब, तालाब तो सांझा है या तो थोड़ा थोड़ा पानी सब से
- 1:14:46ले लिया करो तो अंग्रेज वो ही अंग्रेज चल प्रा।
- 1:14:56वो कहता है अगर। खाली हुआ तो अगर खाली हुआ तो कहते
- 1:15:03मेरे को दंड देना। मैं खुद देख के आया कहते वो पहली
- 1:15:08वाली भी खुद देख के आये थे। कहते ये मुझे नहीं पता, मैं तो
- 1:15:11बिल्कुल खुद देख के आया चलो तुम्हें दिखा देता हूँ चलो।
- 1:15:19तो अंग्रेज अधकारी चल पड़ा। ये बिल्कुल सत्य कथन है।
- 1:15:24मेरे पिताजी मुझे सुनाया करते थे। संत ऐसे होते हैं और मैंने आँखों
- 1:15:29से देखा और करीब 1012 वर्ष तक। उनके सांनिध्य में ही वक्त
- 1:15:34गुज़ारा। पिता जी ने अपने घोड़े के ऊपर चला
- 1:15:47जाकर उसने देखा आज तालाब भरा पड़ा है।
- 1:15:58उन दो व्यक्तियों ने शिकायत की अबकी बार और थे तालाब भरा पड़ा था
- 1:16:08बिल्कुल पूरा भरा पड़ा था लब लब तो अंग्रेज अधिकारी ने कहा था
- 1:16:17आपकी शिकायत बिल्कुल सही है अपनी आँखों से देख लिया और देखिए ऐसी
- 1:16:31ही चीजें आपके जीवन को परिवर्तित कर देती हूँ।
- 1:16:38कहानी रोचक है स्किप मत कर देना बस हिंदी से सुन लेना अपनी आँखों
- 1:16:47से देख के गया, बाबा गंगाराम के पास चला गया जाके हैट रखा।
- 1:16:52देखिये ये बड़ा, ये होता है संस्कार।
- 1:16:58कोई भी है, चाहे उस पर लांछन लगा है, लेकिन शांत है।
- 1:17:03अपना हैट रख दिया, हाथ जोड़ दिया। परंपरा को जानता था कि सनातन में
- 1:17:08हाथ जोड़ना ही बड़प्पन देना होता है।
- 1:17:14किसी को बड़प्पन देना हो तो हाथ जोड़ो।
- 1:17:18इसलिए सबसे पहले मैं हाथ जोड़ के आपको प्रणाम करता हूँ क्योंकि आप
- 1:17:24भी परमात्मा हो। आपके परमात्मक तत्व को याद दिलाने
- 1:17:30के लिए शायद मेरे हाथ जोड़े देखकर आपको अपने भीतर का परमात्मा याद आ
- 1:17:36जाए। शुरुआत में यहीं से करता हूँ तो
- 1:17:45सुनिका संत जी शिकायत आपकी आज है, फिर मैं वही व्यक्ति हूँ।
- 1:17:51पहले शिकायत झूठी थी, लेकिन आज तो मैं अपनी आंख से देख के।
- 1:17:57लम्बा लब भरा पड़ा है तालाब ये आपने धृष्टता क्यों की है सरकारी
- 1:18:03अवमानना की है, तुमने आपको दंड लगेगा।
- 1:18:09बाबा गंगा राम ने कहा बिलकुल दंड लगेगा अगर मैंने ऐसा अपराध किया।
- 1:18:15लेकिन मैंने ऐसा अपराध किया है क्या कहते?
- 1:18:18बिलकुल मैंने खुद देखा है कहते चलो तो संत जी चले और वह।
- 1:18:35जो अधिकारी था वो भी चला पैदल चला, घोड़ा बांध दिया, जाके देखा
- 1:18:43उस तालाब के पास बिल्कुल खाली पड़ा।
- 1:18:51वो ही जो 15 मिनट पहले इतनी इतनी देर में लग गई होगी।
- 1:18:5615 मिनट पहले जो लबा लब बराबर बिल्कुल खाली था और नीचे जमीन ऐसी
- 1:19:04थी जैसे सूखा पड़ गया हो। 100 सालों से सूखा हो।
- 1:19:13संत पास में थे, कहते साहब दिखाओ कौन सा तालाब भरा है, किसकी बारी
- 1:19:26मैंने प्रभावित किया बताओ? उस अधिकारी ने अपना हैट बाबा
- 1:19:40गंगाराम के चरणों में रख दिया। कहते अब आपकी कोई भी शिकायत करे
- 1:19:47क्योंकि जिम्मेदारी मेरी है। शिकायतों को देखना।
- 1:19:50उस वक्त अपराध थोड़े कम होते थे। मैं क्षमा मांगता हूँ, मैं गलती
- 1:19:59में आ गया, मैं जानता नहीं था आपको और देखिये बाबा यह तालाब तो
- 1:20:06भरा हुआ था, मैं अपनी आँखों से देख के।
- 1:20:13आप में अवश्य ही उस गॉड का कोई अंश है?
- 1:20:17आप ईसा की तरह चमत्कारिक हो, उन्हें पांव छुए और आशीर्वाद लेके
- 1:20:24चला गया। और बाबा ने तत क्षण अपनी कुटिया
- 1:20:29क्या कर दी। ये था कारण हुस्नर से गदड़ बहा
- 1:20:35आने का यहाँ शिकायत करने वाले हूँ वहाँ से दूर चले जाना चाहिए उनको
- 1:20:43तो हम दूर नहीं भगाते, हम तो दूर हो जाए।
- 1:20:46इसीलिए मैं अपने चैनल को ब्लॉक कर देता हूँ।
- 1:20:51तुम तुम सस्ते हो दूर बैठे सुनो, लेकिन तुम मुझसे संपर्क मत साधो न
- 1:20:58व्हाट्सएप से, न कमेंट बुक से, न किसी प्रकार से तुम मुझसे संपर्क
- 1:21:03नहीं कर सकते क्योंकि तुम्हारा मन शंकालू तुम इसको छोड़ते ही नहीं
- 1:21:11तुम इससे दूर जाती नहीं और यही सारी उम्र का मैं सीखा रहा हूँ
- 1:21:16कैसे दूर हो जाओ। यही हरी भरी फसलें नानक यही भरा
- 1:21:32हुआ तालाब यह तो यह तो हमारे पिता जी ने खुद अपनी आँखों से देखा और
- 1:21:38मुझे खुद अपनी जुबान से सुनाया। बेटा संत ऐसे होते हैं।
- 1:21:43संत का निराधार मत करना संत से जवाब दल भी मत करना, संत से हो
- 1:21:50सके तो नमन करना बस अगर आप एक्स्ट्रा बात रखते हो तो वहाँ से
- 1:21:57आप आराम से गुजर जाओ। उस पर थूक के मत जाना यानी उस पर
- 1:22:04कमेंट मत करना। मेरे पिताजी इस कहानी को सुनाया
- 1:22:12करते थे। हुस्नर से गजड़ बहा आने का यही
- 1:22:15कारण था। यहाँ आकर उन्हें बड़ा सुकून मिला
- 1:22:17और देखिये ग्रस्त थे उनके। बच्चे, पुत्र, पुत्र, पोत्रियां
- 1:22:24आज भी रामपुरा फूल के अंदर मैंने सुना है रामपुरा फूल से वो आए थे
- 1:22:31यहाँ टहलते टहलते हुसंद्र चले गए हुसंद्र से पर यहाँ आ गए।
- 1:22:37यहाँ आकर उन्होंने दम तोड़ा। एक कुत्ता था, उनके पास एक गाय
- 1:22:43पाल रखी थी और जीस वक्त गंगाराम बाबा ने प्राण त्यागे।
- 1:22:50बिल्कुल उसी वक्त गाय ने प्राण त्याग दिए और कुत्ते ने प्राण
- 1:22:56त्याग दिए। आप यहाँ पर आकर देखना कभी।
- 1:22:59जब कभी मेरे पास आओ तो बाबा गंगाराम की समाधि पे जरूर जाना।
- 1:23:04वहाँ आपको तीन समाधियां मिलेंगे। एक के नीचे गाय दफन है, दूसरे के
- 1:23:10नीचे कुत्ता दफन है। बिलकुल ऐट दी मोमेंट बाबा गंगाराम
- 1:23:16मरे और देखिये इतनी इनमें। कॉन्शस होती है, इतनी होती है
- 1:23:25भीतर सेंसिटिवनेस इन हमारी माता दो रोटियां निकालते थे।
- 1:23:31हम कितने पिट पिट के मर जाते बच्चे थे?
- 1:23:34भूख ज्यादा लगती नहीं माँ पहली रोटी मैं कहूं?
- 1:23:39कितनी पहली रोटी गाय की गाय की रोटी पहले ही और आखिरी रोटी,
- 1:23:46कुत्ते की गाय और कुत्ता एक एक रोटी इनको देनी ही देनी।
- 1:23:53और माता रोज़ दो रोटी उनके लिए नकारती थी।
- 1:24:00मुझे याद है कभी मैं कह देता मुझे भूख ज्यादा लगी तू गाय की रोटी
- 1:24:04निकाल दे मुझको दे दे एक रोटी पहले तू बाद में गाय को खिला देना
- 1:24:10नहीं कहती पहली रोटी गाय को। गाय और कुत्ता वो प्राणी है गाय
- 1:24:17को ऐसे ही नहीं पूजा का छोड़ो ओशो को ओशो फिलॉसोफर हैं, संत नहीं
- 1:24:26कहता मैं उसको वो फिलॉसोफर हैं। तार्किक हैं, पढ़े लिखे हैं,
- 1:24:36वोकबुलरी बहुत है, तार्किक शक्ति बहुत है, पढ़ाते रहे हैं, बड़े
- 1:24:43हैं। इसका मतलब वो बड़े नहीं हो जाते।
- 1:24:46हर बात उनकी। तर्क के बल के ऊपर हर बात ठीक
- 1:24:51नहीं होती। समझे न अनुभव भी तो होना चाहिए
- 1:24:55कहाँ गाय पाली उन्होंने उन तो राजसराय से ली कहाँ कुत्ता पाला
- 1:25:00उन्होंने नहीं कुछ नहीं पाला। स्वय अनुभव से आना चाहिए या मेरे
- 1:25:04स्वय के अनुभव से। मेरे चाचाजी राठी गाय रखते थे।
- 1:25:10राठी गाय के ऊपर हाथ करते थे और उनके शरीर का दर्द खत्म हो जाता
- 1:25:18था। गाय और कुत्ता इसीलिए हमारे सनातन
- 1:25:26में पूज्य हुए। उनकी खैर खबर रखनी ही रखनी है।
- 1:25:30हमने लेकिन यहाँ एक आ गए थे वो कोई बीजेपी की थी, कौन थी उमा
- 1:25:38भारती? उसने पता नहीं क्या कानून पास
- 1:25:44किया। ये ऊंट पटांग कानून पास करते रहते
- 1:25:47हैं। पशु मंत्री थी कि पता नहीं क्या
- 1:25:57थी? अब मुझे याद नहीं है इन बी जे पी
- 1:26:01वालों के मैं ज्यादा खबर रखता भी हूँ क्योंकि मूर्ख लोग होते हैं।
- 1:26:09तो गाय और कुत्ता इनकी सेवा अवश्य किया करो।
- 1:26:12मुझे भी जब कोई आपके ऊपर आफता पड़े तो मैं सदा ही ये कहता हूँ
- 1:26:19कि कुत्ते को रोटी खिला दो, दूध फैला दो।
- 1:26:25गाय को सवा मनी करा दो। जैसे आपका वजन 60 किलो है तो 60
- 1:26:33किलो में 60% तो दलिया कणक का दला हुआ दलिया।
- 1:26:44कणक नहीं है तो चावल बसाल चावल नहीं है तो बाजरी बसाल 60 किलो,
- 1:26:5220 किलो शक्कर 20 किलो, हरा चारा 20% तो यह है 100% उसके वजन का
- 1:27:01बराबर करके। और उस व्यक्ति के हेतु संकल्प करो
- 1:27:06और गउ को खिला दो। गउ का आशीर्वाद संत के बराबर होता
- 1:27:14है। गउ की सेवा संत की सेवा के बराबर
- 1:27:20होती है। अगर संत उपलब्ध न हो तो गौ की
- 1:27:23सेवा करो, कुत्ते की सेवा करो, बड़ा प्यारा जानवर है, सेवा करो,
- 1:27:33इसे बंधन मत बनाओ, इसे बंधक मत बनाओ।
- 1:27:44धन्यवाद।