Latest / Baba ji Vijay Vats / 17 Nov 25 - मन, मृत्यु, अहंकार और सतोरी! मौत के बाद का सच दर्द नहीं, सिर्फ गहरी शांति! Japji Sahib 18 Baba Ji Vijay Vats
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- 0:01गौरीशंकर बाबा जी चरनश्वर आपका जन्म ब्राह्मणकुल में हुआ।
- 0:21क्या आप जाती भाती धर्म विशेष को मानते हैं?
- 0:38मैं ब्राह्मण कूल में तो पैदा हुआ, लेकिन उस ब्राह्मण कूल में
- 0:45पैदा हुआ जिनके पुरखों पे दलितों को दबाने का पाप है।
- 0:563000 वर्ष तक हमारे पुरखों ने दलितों को दबाया।
- 1:12उस ब्राह्मण कुल में मैंने जन्म लिया जो पाखंडियों को बनाया हुआ
- 1:16था। जो दूसरों से उनका अधिकार छीन
- 1:23लेते थे, तुम्हें पढ़ने नहीं देंगे, तुम हमारे संघ नहीं बैठ
- 1:38सकते, तुम अछूत हो? तुम्हारी छाया भी पड़ जाएगी तो हम
- 1:47मलि न हो जाएंगे। जा के क्षणन करते मैं उस ब्राह्मण
- 1:55कुल में पैदा हुआ जो परमात्मा ने नहीं बनाया, जो पाखंडियों ने
- 2:03बनाया। और ये सभी कुल पाखंडियों ने
- 2:10बनाये। लेकिन यह एक व्यवस्था होगी दलितों
- 2:20को दबाने के लिए। अन्य कोमों को दबाने के लिए तुम
- 2:29लिखते हो पुत्र के श्रेष्ठतम कुल में तुमने जन्म लिया, यह गलत है
- 2:34तुम्हारी बात जब भी कोई पैदा होता है।
- 2:42पैदा तो शुद्र ही होता है। ब्राह्मणत्व तो कमाना पड़ता है,
- 2:49पुत्र अपनी तपशचर्या से अपने त्याग से।
- 2:58अपने भीतर के आनंद को जानने से ब्राह्मणत्व कमाया जाता है।
- 3:06ब्राह्मणत्व जन्मजात पानी जैसी कोई चीज़ है, लेकिन मनुष्य सदा से
- 3:13ही आसान तरीकों से। हर चीज़ को पाल लेना चाहता है
- 3:21इसलिए तो देखो आज नाम धारियों के पास तुम्हें कदार मिलेंगे पांच
- 3:29नाम ले लो राम राम जप लो राधे राधे कर लो बड़ा आसान है करो करो
- 3:35ना करो कोई बात नहीं। वो उस प्रक्रिया को भूल गए जो आदि
- 3:45रेशन शुरू किए थे। जिसमें प्रयास करना पड़ता है।
- 3:54अपने भीतर उतरने का खाली लम्हों का सदुपयोग करना होता है।
- 4:02खाली लम्हों में सैर सपाटे नहीं करनी होती।
- 4:07मूवीज़ देखने नहीं जाना होता, ताश से पीटनी नहीं होती और तुम तो
- 4:14खाली वक्त में कुछ भी करने को तैयार हो जाते हो।
- 4:19धर्म के नाम पर तुमने आडंपर रचे चलो तीर्थ यात्रा कर लो कोई हज
- 4:27कराया कोई गंगा सागर जाया कोई हरिद्वार तीर्थ, कोई पुष्कर।
- 4:40कोई ऐसे सस्ते ढंग तुमने निकाले, जो बड़ी आसानी से टिकट लो और
- 4:50गाड़ी में बैठो और अपने सारे पाप काट दो।
- 4:57हिंदू आज अगर पापी हो गया है तो गंगा माता के कारण नहीं, इन
- 5:08तथाकथित बाबाओं के कारण जिन्हें तुम हिंदू कहते हो, ब्राह्मण कहते
- 5:16हो। क्योंकि इन्होंने प्रचारित किया
- 5:20कि कुंभ में आ जाओ, सारे पाप कट जाएंगे और सदा से ही व्यक्ति पाप
- 5:26तो करना चाहता है लेकिन पाप का फल नहीं भोगना चाहता।
- 5:34तो ऐसे लोगों को एक रास्ता मिल गया।
- 5:38ठीक है। कुंभ चलो स्नान कर लेंगे, वक्त भी
- 5:46ठीक से गुजर जाएगा, यात्रा का मज़ा भी ले लेंगे।
- 5:56और पाप मुक्त भी हो जाएंगे। लेकिन कृष्ण कहते हैं ऐसी बात
- 6:01नहीं होने की कृष्ण कहते हैं छोड़ो इनको और जब मैं कहता हूँ
- 6:12कृष्ण कहते हैं तो ये समझें ना, मैं कहता हूँ।
- 6:18क्योंकि कृष्ण और मुझ में ज़रा भी असमानता नहीं, मैं ही कृष्ण कृष्ण
- 6:28मैं ही हूँ। कृष्ण कहते हैं, ऐसे तीर्थ यात्रा
- 6:34करने से गंगा स्नान करने से हज करने से उस आनंद में गोते न लगा
- 6:45पाओगे अगर गोते ही लगाने हैं, पाप ही धोना है।
- 6:52तो आ जाओ मेरी क्षण में सभी तीर्थ छात्राओं को हजो को छोड़ दो, सभी
- 7:09धर्मों को तिलांजलि दे दो सर्वधर्म प्रत्याजमा में कम शर्म
- 7:17वृक्ष। मैं कहता हूँ जब भी कोई धार्मिक
- 7:21व्यक्ति पैदा होता है, धर्म को चलाता है, वह तो बिलकुल 100%
- 7:30कुंदन होता है, सोना भी नहीं कुंदन होता है।
- 7:35लेकिन आगे उसके शिष्य बिगाड़ देते हैं, तिगाड़ देते हैं, आनंद की
- 7:43परभाषा बदली जाती है, अल्लाह और राम में तब्दील कर दी जाती है।
- 7:53लड़ाई झगड़े यहाँ से होते हैं। इसलिए जब भी कोई पीर पैगंबर अवतार
- 7:59पैदा हुआ, उसने तो जो किया और शांति के लिए किया।
- 8:11तुम जो करते हो कतरो गारथ। अपनी प्यास बुझाने के लिए करते हो
- 8:22तो तुमने पूछा पुत्र क्या मैं जाति पाति धर्म में आस्था रखता
- 8:29हूँ जिसने क्षुद्र को गले से लगा लिया?
- 8:36सुवर हो उस काल में आफ्टर अनलाइटनमेंट मैंने एक सुवर जो
- 8:49गंदगी गंदे नाले में बैठ के बाहर आया था भी अब गंदगी में लिपटा
- 8:54हुआ। मैंने उसे गलत से काट दिया।
- 9:00मुझे स्वर में परमात्मा नजर आया या कोई सर्कस?
- 9:12यह कोई सर्कस का पूर्व अभ्यास न था।
- 9:21यह कोई एक्टिंग से पहले का कार्यक्रम न था।
- 9:27यह शुद्ध दर्शन था। मुझे सुवर में भगवान दिखा।
- 9:37और मैंने उसको चूम लिया, उसको गले से निकाल लिया।
- 9:45भला ऐसा व्यक्ति जाति पाति में विश्वास करे।
- 9:58सनातन तो बड़ा महान था, है नहीं। जब ऋषियों ने इसे खोजा तो सनातन
- 10:08महान था जिन्होंने ये बात कही जिनका नारा था वसुधैव कुटुम्बकम।
- 10:25उन्होंने वसुधा को एक परिवार के रूप में देखा जाना ऐसे ही नहीं
- 10:34लिख दिया। यह कोई खोपड़ी की खुजलाट नहीं थे,
- 10:38यह दर्शन था। सनातन कवि था, आज सनातन की अवशेष
- 10:55भी नहीं बचे, वो भी तुम्हे प्रवाहित करती है गंगा जी में
- 11:02इसलिए सनातन का नाम मत लिया करो। क्योंकि ये 71 साल टाट में लेने
- 11:09वाले तथाकथित गुंडे यह सनातन क्या था जिसे जानते है जिसे रोम रोम
- 11:22में परमात्मा नजर आ गया। इसे जरे जरे में वह अकालपूर्वक
- 11:28नजर आ गया। अल्लाह की तस्वीर जिसे सारे जहन
- 11:35में दिखी और आवाज़ भीतर से आई ला इलाहा इल्लाह मोहम्मद उर रसूल
- 11:45अल्लाह। ये भीतर से आई हुई है।
- 11:48आवाज और जिसने उसकी विशालता देखकर कहा आशित गरीब सिमम स्यात के जलम
- 12:01से दो पात्र सुर धर्वर शाखा लेखनी पत्र पर वे लेखसि अधिग्रहीत व
- 12:08शारदा सर्वकालम। तथ्य तब गणना में स्वरब न आया था।
- 12:16यह वो सनातन था जो कभी था, आज तुम सनातन का अपमान कर दिए हो।
- 12:31तुम अपमान क्या नहीं सहोगे तुम सनातन का हत्या कर दिए हो और उसके
- 12:39जो अवशेष बचे थे वो गंगा जी में बहा दिए हो।
- 12:47आज का खाक तुम अपमान और मान की बात करते हो जब वो रहा ही नहीं,
- 12:52हिंदू गुंडों ने सनातन को समाप्त करने में कोई कोरकसर बाकी नहीं
- 13:01छोड़ा और अगर तुम कहोगे क्या? अपने स्वार्थ के लिए किया।
- 13:07उन्होंने स्वार्थ भी कहा सदा उनका स्वार्थ भी सद जाता तो मैं उन्हें
- 13:14माफ़ कर दे अगर वो इतना कुकृत करके भी आनंदमय छलांग ले लेते।
- 13:24तो मैं उन्हें क्षमा कर देता हूँ, लेकिन काग पढ़ाया पिंजरा पढ़ गया,
- 13:32चारो वेग समझाए, समझा नहीं रिया ढेढ़ का ढेढ़ ये ढेढ़ के ढेढ़ ही
- 13:43रह। इससे कनकन में परमात्मा नजर आता
- 13:51है। यह कोई व्यवस्था नहीं है।
- 14:01सनातन सनातन दर्शन है। इसे वो शाश्वत नजर आया जो आध सच
- 14:09जुगाध सच हेवी सच नान कहो सी भी सच वह सनातन है, सदा है, शाश्वत
- 14:19है, ये मोर्टल है, वह सनातन है। तुम्हारे जैसे लुच्चे, लफंगे,
- 14:32शैतान, गुंडे, बदमाश, सनातन ऐसे लोगों के लिए नहीं होता।
- 14:46और इतना जहर भरा पड़ा था। मवाद भरी पड़ी ऐसा लगता कि इनके
- 14:54न्यूरॉन्स सारे के सारे कैंसराइटिस के फोड़े से ग्रसित हो
- 14:59गई। और चेस चस कर रहा है वो मवाद।
- 15:04यह सनातन का अपमान नहीं सहेंगे। मुझे इस समवाद के भीतर से आती हुई
- 15:10चस चस की ध्वनि का दर्द दिखाई पड़ता है।
- 15:18थोड़े शब्द गहरी है, आनंद से शांति से सुनिएगा।
- 15:41मैं किसी धर्म को नहीं मानता, मैंने एक नया धर्म इजाद किया।
- 15:52शब्दों में बोलना तो पड़ेगा धर्म लेकिन।
- 15:59यह कोई धर्म वो नहीं जिसे तुम बिगाड़ते लोगे।
- 16:06बड़ा सोच समझ कर नाम दिया गया बाबा के द्वारा मुख्य द्वार।
- 16:19इसका कोई कमेनमेंट नहीं, शास्त्र पढ़ो, नमाज़ पढ़ो, गंगासागर जाओ
- 16:25हरिद्वार जाओ, हज करो मक्का मदीना कोई कमेनमेंट नहीं जुमे की पांच
- 16:33ही नमाज़ ये बंधन। यहाँ तो ब्रह्म मुहूर्त में उठना
- 16:41भी बंधन लगता है। मैं आज तक कभी किसी तीर्थ यात्रा
- 16:47में नहीं क्या जब ताजा ताजा घटना ट्रेन की हुई।
- 16:54तो मैं तलाश के लिए हरिद्वार स्टेशन पर पहुंचा और लश्कर जंक्शन
- 17:00पर मुझे हनुमान जी मिल गई। सारी गाथा मेरी बायोग्राफी में
- 17:08पढ़ सकोगे। पूरी की पूरी कहानी उन्होंने कहा,
- 17:23घर बैठे मिले और 1000 यत्न किए। मैंने मुझे गाड़ी तो मिली, कुली
- 17:31ने भी कहा। यह गाड़ी जाएगी ऋषिकेश।
- 17:45लेकिन वह गाड़ी मुझे लग गयी। भटिंडा आज?
- 18:00जिनको खुदा मिला नहीं वो कहते खुदा है नहीं जिनको एनलाइटनमेंट
- 18:14हुआ नहीं, वो कहते एनलाइटनमेंट है नहीं, जिनको सुख मिला नहीं वो
- 18:22कहते सुख है नहीं। ठीक कहते हैं, बुध जब घर छोड़
- 18:27देते हैं तो तर्क बिल्कुल ठीक है। बुध का बुध कहते हैं सब कुछ होते
- 18:37हुए भी दास दासियां हैं। अकेला बारिश हूँ अकपिल वस्तु के
- 18:46सम्राट का पुत्र सब कुछ है दास दासिये हैं भौंकने को खाने को सब
- 18:55कुछ लेकिन फिर सुख क्यों नहीं है? यह उसके हृदय को कपा देता है कि
- 19:16मैं मरूँगा तुम्हारे हृदय को नहीं कपाता और जिसके हृदय को मृत्यु ने
- 19:26नहीं कंपाया वह पहुंचने की आकांक्षा भी ना करें।
- 19:33क्योंकि सबसे पहले तो कम आयेगी तुम्हें मौत।
- 19:37इसलिए रेशियो ने कहा प्रति दिन एक फेरी मंदिर में न लगाना श्मशान
- 19:45घाट में जरूर लगा ले। कब्रिस्तान में जरूर लगा ले।
- 19:53तुम यहाँ अकड़े फिरते हो शहनशाही के आलम में और कब्रों में पड़ा
- 20:02हुआ आदमी तुम्हारी आहट सुनके कहता है सोए हुए थे चैन से ओड़े हुए
- 20:10कफन। यहाँ भी शतानी आ गए, किसी ने पता
- 20:16बता दिया मृत्यु में इतनी शांति है जीसको तुमने डिफाइन किया जैसे
- 20:30बिच्छू। लाखों बिच्छू एक बार से तुम्हें
- 20:32काटने हैं। इतना दुख होता है उसमें नहीं, कुछ
- 20:36नहीं होता। प्रकृति आपको ऐसा एनेस्थीसिया दे
- 20:45देती है उस आखिरी ऑपरेट के वक्त की तुम्हें पता ही नहीं चलता।
- 20:58और प्रकृति से ज्यादा समझदार और कौन?
- 21:00तुम ज्यादा समझदार बनने की चेष्टा तो करते हो, लेकिन हो नहीं पाते,
- 21:08आखिर में झुंझला के मर जाते हो। हाँ, मैंने ब्राह्मण कुल में जन्म
- 21:19लिया लेकिन ब्राह्मणत्व तो मेरे प्रयास से ही मिला।
- 21:3023 वर्ष की अखंड खोज। मुझे अभी लोग कह देते हैं तुम्हें
- 21:37किया तो कुछ है नहीं, मैंने कहा जिसने कुछ किया वो क्या ले गए?
- 21:48मैं तो भरा पूरा जाऊंगा। जिन्होंने कुछ किया दिन भर रात
- 21:55सोई नहीं, उस फैक्टरी में हड़ताल न हो जाए।
- 22:01उसके मज़दूरों का मुखिया कल बगावती भाषा बोल रहा था।
- 22:07कहीं ऐसा न हो। कि फैक्टरी का द्वार ही न खुले।
- 22:12तुम रात को सो पाते हो, यहाँ तो घोड़े बैठ के सोते हैं, धन शिलगा
- 22:26खुद को सुख है। इसलिए उन्होंने जीवन का यह एक
- 22:39अमूल्य सूत्र आपको दिया। जीवन दुख है, दुख का कारण है कारण
- 22:51खोजने में चले गए। सब कुछ होते हुए फिर ये दुख
- 22:58क्यों? अभी तक मौत की छाया देखी ना थी, 1
- 23:09दिन मौत की छाया देख ली। किसी उत्सव में गए थे, रास्ते में
- 23:14ही वापस आना पड़ा। सारथी ने बताया, यह बीमार है,
- 23:23लेकिन आदमी है, यह टीबी से ग्रस्त है, लेकिन आदमी है इसकी कमर झुकी
- 23:31हुई है। यह वृद्ध हो गया लेकिन आदमी है।
- 23:35कोई बुरी तरह से खांस रहा है और कोई मर गया है अर्थ ही लेके जा
- 23:40रहे है तो उसने बताया कि यह आदमी है मर गया है।
- 23:49सबसे बड़ी गलती अगर की बुद्ध के पिता ने।
- 23:55तो यही की कि उससे मृत्यु का राज़ छिपा लिया।
- 24:01तुम ऐसी गलती मत कर लेना। जैसे ही व्यक्ति को बच्चे को
- 24:07होशानी शुरू हो, उसे बताया जाए कि मृत्यु?
- 24:13इस दी अल्टीमेट ट्रुथ ऑफ लाइफ अंतरिम अंतिम सत्य है।
- 24:26मृत्यु तो आएगी ही। पुत्र हो या पुत्र।
- 24:33मृत्यु तो आयेगी, सबसे बड़ी गलती की है।
- 24:41मृत्यु को छुपा लिया जो जीवन का अंतिम सत्य था, यही मार खा गए,
- 24:51समझदार सयाना बनने की चेष्टा की। और इस समझदारी के प्रयास में ही
- 24:58मात खा गए। छः सशणप लख हो गए एक न चल ले नाल
- 25:10उसकी कोई शयनप काम नहीं। तुमने कहा जाति पाति ब्राह्मण
- 25:28क्षत्रिय, शुद्र में। तुम विश्वास करते हो?
- 25:34मैंने कहा जब मैं सूअर को गले लगा लेता हूँ तो फिर भी तुम तो इंसान
- 25:42हो इंसान मानव जोनी सबसे सर्वश्रेष्ठ?
- 25:54तो बुद्ध निकल जाते हैं, जीवन दुख है नहीं, मैं कहता हूँ जीवन सुख
- 26:02है बस बुद्ध को वो श्री का आया जो कृष्ण को आ गया और मैं कृष्ण हूँ।
- 26:15देखो आज मुझे किसी चीज़ की आवश्यकता है, इतना सा दूध चाहिए,
- 26:22एक कुर्ता पजामा चाहिए शरीर ढाँपने के लिए थोड़ा सा वस्त्र
- 26:28चाहिए ये मेरी जरूरत। और मुझे पता है जोड़ा हुआ तो संघ
- 26:35जायेगा नहीं, जो जायेगा वह मैंने बढ़ा लिया अपटू द टॉप एक्सटेंट
- 26:44100% की चेतना मैंने बढ़ा लिया। इसमें और जोड़ा नहीं जा सकता।
- 26:54मैं उस लेवल तक आ गया जिसमें से अगर अब तुम सारा ही निकाल लो तो
- 27:01सारा ही शेष बच जाएगा। पूर्ण से अपूर्ण महादाय पूर्ण
- 27:10मेवा व शिष्य थे। इस सम्पूर्ण में से इतना पूर्ण हो
- 27:14गया मैं इस सम्पूर्ण में से अगर पूर्ण भी आप निकाल लो तो पूर्ण ही
- 27:21शेष बच जाएगा ये बजाते हैं ये बजाते तुम्हें इसलिए लगती हैं ही
- 27:27कैनट बी एक्सप्रेस इन अवार्ड्स? वह तत्व जिसे तुम अल्लाह कह लो,
- 27:36परमात्मा कह लो, वह गुरु कह लो, वह शब्दों में संबोधित नहीं किया
- 27:45जा सकता, समझाया नहीं जा सकता आतन जैसे सागर गागर में नहीं।
- 27:59मोक्ष द्वार, एमडी मोक्ष द्वार अभी बहुत से लोगों के कमेंट मेरे
- 28:07पास आए। बाबा हम निजात जाते हैं और निजात
- 28:13दोनों तरह की जाते हैं। जो इन दुष्टों ने हमारे मस्तिष्क
- 28:19पे थूंक दी आपने बहुत अच्छा किया ये भार बड़ा हल्का हो गया।
- 28:24हम वार फीलिंग करी, रिलैक्सेशन हम अपने आपको।
- 28:37तनावरहित महसूस कर रहे हैं। ऐसा लगता है जैसे किसी ने सिर के
- 28:45ऊपर से बाहर की गचड़ी उठाकर फेंक दी हो।
- 28:52मुझे ये भी मुक्ति चाहिए और बोलते हैं कि मुझे वो भी मुक्ति चाहिए।
- 28:59अंतिम मुक्ति जहाँ साहस की आवश्यकता पड़ती है।
- 29:02देखिये साहस की आवश्यकता तो सब जगह पड़ती है इसलिए संतों ने कहा।
- 29:10इतना तुम कर न सकोगे एकदम से शरीर को छोड़ दो मैं शरीर नहीं हूँ ये
- 29:18छोड़ना बड़ा मुश्किल हो जाएगा स्टार्ट फ्रम दी बिगिनिंग तो
- 29:24थोड़ा दान छोड़ दो दान का महत्त्व।
- 29:30शास्त्रों में इसीलिए बताया था दान करना आसान है, उसको छोड़ने से
- 29:39तुम्हें कोई तकलीफ नहीं होगी। हालांकि बहुत से लोगों को होती
- 29:43है। देखिए अब कितने कितने बड़े?
- 29:49ऑफिसर रेंक पे रहे हुए लोग करोड़ों रुपए उनके घर से निकलते
- 29:54हैं, सोना निकलता है, कितनी महंगी महंगी कारें निकलती हैं और एक वो
- 30:01भी थे प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया लाल बहादुर शास्त्र जिन्होंने
- 30:06कर्जे के ऊपर एंबेसडर कार खरीदी थी।
- 30:11और तुम्हें सुनकर रोना आएगा मर गए या मार दिए गए, इसकी बात छोड़ो,
- 30:22वो मैं जानता हूँ क्योंकि मैंने सारी तथ्य देखी है।
- 30:31कोई पोस्टमॉर्टम नहीं किया गया, ना उनकी लाश का पोस्टमॉर्टम किया
- 30:38गया और कितनी ही लाशें ऐसी जो मार दी गईं, उनकी लाश का पोस्टमॉर्टम
- 30:44नहीं किया। राजीव दीक्षित का भी यही हाल?
- 30:50उनकी लाश का पोस्टमॉर्टम तक नहीं किया गया।
- 30:52हालांकि शुद्ध गाना खाते थे, शुद्ध बोलते थे लेकिन किस दुष्ट
- 31:04ने ये किया? उजागृत तो करूँगा।
- 31:08लेकिन अब अच्छा उजागर करने से पहले जिन्होंने ये कांड किया,
- 31:20उनको अपने षड्यंत्र रचने दो, वह भी हैं।
- 31:31बुद्ध ने देखा सब कुछ होते हुए भी ये परमात्मा ने सृष्टि बनाई।
- 31:43अंत में उन्होंने जानते हुए भी कहा कि परमात्मनि?
- 31:49क्योंकि बाकी बातों का वो जवाब अगर देते तो उलझ जाता।
- 31:57घोर करुणा थी, उनके मन में जल्दबाजी थी कि अब वो मिल ही गया
- 32:02है तो बांटने में देरी नहीं करनी चाहिए।
- 32:04उन्हें सारनाश पर अपना पहला प्रवचन दे दिया।
- 32:09थोड़ी सी जल्दबाजी करता है। कुछ बिगड़ता न था पांच 6 साल और
- 32:17लग जाते कृष्ण का तल छू लेते तो ऐसा शानदार बुद्धा हमें मिल जाता।
- 32:26जिसकी कोई कल्पना कभी ना कर सकेगा।
- 32:32कृष्ण बड़े प्यारे हैं, कृष्ण कभी शस्त्र उठाएंगे?
- 32:38कोई सोच सत्ता है वह निधि वन में। प्रेम की बंसरी बजाने वाला वह
- 32:57चोरी भी करता है पर हम किसी को चोर कहने तो सुप्रीम कोर्ट में
- 33:07पैटिशन डाल देते हैं। ₹500,00,00,000 हर जान उससे पूछा
- 33:14जाए अरे तेरी कीमत है वैज्ञानिक कहते हैं ₹6 भरने की कीमत है?
- 33:19आदमी की इतना मटेरियल है हमारे भीतर इतना कैल्शियम इतना
- 33:25फास्फोरस, इतना मैग्निशियम, इतना जंक?
- 33:28ये सब कुछ मिला के हमारे शरीर में ₹6 बार आने 75 वर्ष और ये दावा
- 33:40करते हैं 500,00,00,000 का मानहानि हो गयी।
- 33:46मैं बहुत से लोगों को पूछा ये जो हानि होती है वो मान वो पुरजा
- 33:54जड़ा कहाँ है ज़रा बताओ ज़रा देख लूँ उस पुरज़े को मैंने देखा नहीं
- 34:03ऐसा मत कहो। वो पुर्जा दिखला दो, जिसकी कीमत
- 34:11500,00,00,000 है नहीं, इन्हीं मान्यताओं को मैं तोड़ना चाहता
- 34:27हूँ। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई इससे
- 34:35पहले कृष्ण भी कहता है लेकिन वो ऐसी भाषा में कह गए जो पंडितों की
- 34:41भाषा थी और उस सब वक्त सभी जानते थे।
- 34:50संस्कृत भाषा सर्वधर्माण पर तज्ज सभी धर्मों को त्याग आज तुम अर्थ
- 34:56कुछ भी करते हो, अर्थ बिल्कुल साफ है।
- 34:59बड़े सरलतम ढंग से बोले कृष्ण सभी धर्मों का प्रति त्याग कर दे ही
- 35:05अर्जुन। उस धर्म के हिसाब से मुझे ये करना
- 35:13चाहिए। उस धर्म के हिसाब से मुझे ये करना
- 35:15चाहिए, तू ये मत सोच तू इन सब का त्याग कर दे और मेरी शरण में आजा।
- 35:22यानी जैसे मैं चलूँगा वैसा चल। थोड़ा साइंटिफिक वे से समझ ले जब
- 35:31तुम अपने भीतर चले जाओगे तो जंक्चर प्वाइंट के बिलकुल आगे तुम
- 35:35वहाँ आ जाओगे जहाँ फिर तुम खुद से नहीं कर्म करोगे, फिर परमात्मा
- 35:42तुम्हे नचाएगा सटोरी की झलक यही होती है।
- 35:47इसी तल को देखा जाता है सटोरी में जहाँ परमात्मा नाचता है और तुम
- 35:53नाचते हो, असल में तो वो ही नाचता है, तुम नाचते हो।
- 36:08और तुम फिकर करते हो, सिर्फ फिकर ही करते हो की अगर ऐसा ना करेंगे,
- 36:16कॉम्पिटिशन ना करेंगे तुम्हारे पास हर बात का जवाब है तो समृद्धि
- 36:21कैसे होगी? अगर कॉम्पिटिशन ना करेंगे तो देश
- 36:27ज्यादा सुन्दर कैसे बनेगा? तो आज तुमने यूक्रेन की हालत
- 36:34देखी, इसे तुम तरक्की कहते हो, छोड़ो।
- 36:46भूगोल को छोड़ो, आदमी के चेहरे की तरफ से रखो ये लटके हुए चेहरे
- 36:51दुखी, दुखी से दिल दर्द से भरा हुआ छाती जलन से भरी हुई खोपड़िया
- 37:01शब्दों से भरा हुआ है। तुम इसे इंसान कहते हो?
- 37:10ऐसे व्यक्ति को इंसान कहते हुए भी दुख होता है।
- 37:17पशुओं के चेहरे पर भी गाय के चेहरे पर मैं मने के चेहरे पर तुम
- 37:23इतनी शांति पाओगे। पशु भी तुमसे श्रेष्ठ हैं।
- 37:27इस मामले में तुम पशुओं से भी गैर गुजरे होकर शांत भी नहीं हो।
- 37:44चैन के नीत में नहीं सो पाते। तुम कितने दिन हीन हो गए हो कि दो
- 37:53घड़ी चैन की सांस भी नहीं ले पाते?
- 37:56दो घड़ी रात को सो भी नहीं पाते। इसे ही कहते हैं मानव जामा यही
- 38:06है। जो सब योनियों में सर्वश्रेष्ठ
- 38:09है, मैं कहता हूँ, सबसे निकृष्ठ बना लिया तुमने है तो सर्वश्रेष्ठ
- 38:15कर्मी आवे कपड़ा नत्री मोख द्वार, लेकिन कोई क्या करे अगर तुम गटर
- 38:23में छलांग लगा जाओ? गटर का पानी पीने लगो, गटर का
- 38:35भोजन खाने लगो बाबा नायक ने कहा कित्ते चोर हरामखोर?
- 38:49जब भी साहब का एक शब्द है। वड्डा दाता तिलना तमाम है।
- 38:59जब तुम उस विराट के पास पहुँच जाओगे तो उसके एक लक्षण है कि
- 39:05तुम्हारे भीतर लोभ नहीं बचेगा। तुम नहीं कहोगे रुमाला चढ़ा दो
- 39:11यहाँ तुम नहीं कहोगे गौलो के में पैसे डाल दो वड्डा दाता तेलाना
- 39:21धमाल जब तुम उस बड़े दाते के पास तो पहुँच जाओगे।
- 39:28तो इसके लक्षण हैं, तिल भर भी तमा नहीं बचेगी, लोक नहीं बचेगा
- 39:41असंख्य मूर्ख अंधकोर कितने मूर्ख और घोर मूर्ख।
- 39:52असंख मूर्ख अंत कोर असंख चोर हरामखोर, जिनकी गणित नहीं इतनी
- 40:07असंख्य चोर देखे बाबा? चोर कहते हैं कोई माल चोर, कोई
- 40:21राज़ चोर, कोई वोट चोर चोरों का मुकाम है चोरों का जमावड़ा।
- 40:40असंख मूरख अंधखोर असंख चोर हरामखोर असंख अमर करजाहि ज़ोर
- 40:51अपनी ज़ोर से हुक्म से मेरे पास फौज है, मेरे पास पुलिस है,
- 40:58सीआरपीएफ है। मेरे पास सुरक्षा कार्ड असंख अमर
- 41:06कर जा ही ज़ोर ज़ोर पूर्वक बल पूर्वक संधान दंड है।
- 41:20ज़ोर ज़ोर जहाँ चलता है वहाँ ज़ोर चला लो और राज़ कर लो गद्दी हथिया
- 41:27लो, लेकिन मुझे आज तक समझ नहीं आया।
- 41:34मैं शपथ से यह बात कहता हूँ, मुझे समझ नहीं आया इन लोगों को गद्दी
- 41:40पर बैठकर मिलता क्या है मुझे कोई समझा दे आगे क्या मैं इतना मूर्ख
- 41:51हूँ। असेंख मूरत अंधखोर असंख चोर
- 42:01हरामखोर असंख अमर कर जाहिजोर। अशंक गल वड हत्या का नाम लोगों को
- 42:13हत्याएं करके उसको मार दिया, उसको मार दिया, उसको मार दिया।
- 42:18ये राज्य न खुल जाए इसलिए जिसके पास राय था उसको मार दिया।
- 42:27असंख का गल वड्ड हत्या कमा किसलिए?
- 42:31मैं पूछता हूँ किसलिए वाह क्या तुम्हें चैन मिल जाता है?
- 42:48अपने अचेतन में पाप कर्मों के बीज को भरते चले जाते हैं।
- 42:54असंख अमर कर जाही, जो असंख गलबड़ हत्या का गल काट काट के उनके
- 43:03लाशों के ढेर। को सीढ़ियाँ बनाकर ऊपर चढ़ जाते
- 43:07हैं। ये डेढ़ आंख वाले और ऐसे छोंकते
- 43:15फिरते हैं जैसे किसी को पता नहीं है।
- 43:22अरे भाई है। देखने वाले कयामत की नजर रखते
- 43:29हैं। ये बात अलग है तो उसको तुमने देखा
- 43:35ही नहीं। देखने वाले कयामत की नजर रखते
- 43:40हैं। ये बात अलग है कि उसको तुमने देखा
- 43:45है वह जरे जरे में विद्यमान तुम्हारी सारी गतिविधियों को हर
- 43:54पल सोते जागते निहार रहा है और वह कभी सोता नहीं।
- 44:01वह सहभम है, अपनी ही ऊर्जा से प्रकाशित है, उसे ईंधन की और
- 44:07बातें की जरूरत नहीं होती है। वह खुद के प्रकाश से प्रकाशित है।
- 44:15दो आँखें तुम्हें सदा ही निहार रही हैं।
- 44:20तुम अच्छा कर रहे हो तुम मंदा कर रहे हो, उसकी नजरों से नहीं बच
- 44:25रहे हैं यह ध्यान में रखो असंख गलवड हत्या कम।
- 44:45असंख पापी पाप कर जा, थोड़ी से बात यहाँ समझ लेना, पाप की शुरुआत
- 44:54ही मत करना क्योंकि ये ऐसा कीचड़ है की एक बार अगर आपके आनंद के
- 45:02हीरे पे जम गया। तो फिर ये जमता ही चला जाएगा।
- 45:07तुम्हें पता भी न चलेगा तुम्हारा हीरा कब पूरा का पूरा ढक दिया गया
- 45:17असंख गलबट हत्या का माँ असंख कापी पाप कर जा।
- 45:25अशंक कुडयार कूड़े फेरा ऐसा लगता है बाबा को 2014 के बाद कौन आएगा
- 45:36इसको पता था। कहीं झांक के देख लिया होगा।
- 45:43संत पुरुष कयामत की नजर रखते हैं। ये कहते हैं कि अशंक कूड़े यार
- 46:00कूड़े फेरा अनगणित ऐसे जो झूठ बोलते रहेंगे और झूठ ही बोलते
- 46:10रहेंगे। वह सच बोल ही नहीं सकते और भीतर
- 46:22की अनकक्षा के मैं कैसे सुखी हूँ। ये बिल्कुल ऐसा है जैसे तुम अपने
- 46:31शरीर को नुकेली चीज़ से काटती रहो और इच्छा ये करती रहो कि मैं दर्द
- 46:39मुक्त कैसे हो जाऊं। यह असंभव है तेज हथियार से अगर
- 46:46तुम अपने शरीर को। छिलोगे तो उम्मीद मत रखना कि
- 46:52तुम्हें दर्द नहीं होगा, बस यही तुम्हारी आकांक्षा है।
- 46:58असंख कुड़यार कूड़ेफरा बहुत से ऐसे हैं जिन्होंने ज़िन्दगी में
- 47:05जोख के सेवा कुछ बोला ही। झूठ ही बोलते करते है।
- 47:14बाबा जुग जुग की बातों को जानते है पर बड़े अफसोस की बात है।
- 47:25तथा कथित बाबा के शिष्य नाम तो रख लेते हैं सिंह और कोर लेकिन उनके
- 47:35हृदय मलिन रहते हैं। फिर यह शिष्य न हुए।
- 47:46तुम छोड़ दो, अगर ऐसे दोगलापन में ही तुम्हे चलना है तो छोड़ दो मैं
- 47:53कितों को रोज़ अंगूठा लगाता हूँ, बोलो बाबा दूसरे तो आवाज ही
- 48:00मारते। मैं अपने पुराने घर में था, वहाँ
- 48:04लोग मुझसे पूछने आ जाते एक स्त्री आ गई, मुझे कहती बाबा ये पास वाले
- 48:09घर वाले कौन? मैंने कहा अपन पड़ोसी हैं, अच्छे
- 48:13हैं, क्या बात है? कहती कुछ नहीं।
- 48:17जब मैं आने लगी तो उसके घर वाली। पता नहीं कौन एक औरत थी, वो मुझे
- 48:21ऐसे बुला रही थी कि इधर आ जाओ, क्या हो जाएगा भाई क्यों?
- 48:36पैसे कमाने के चक्कर में यह बहुत बड़ी विशाल अपने आप को समझती है।
- 48:44स्वयंभू है ये। खुद को मानती हैं कि मैं बहुत
- 48:48बड़ी वकील हूँ लेकिन परमात्मा की नज़र में तो दो कौड़ी की भी नहीं
- 48:55है। दो कौड़ी की भी नहीं है।
- 49:01मूल्यवान वह होता है जिसकी कदर परमात्मा डाल।
- 49:06इंसान क्या जानें तुम्हारे हृदय के भीतर क्या है?
- 49:14संत परमात्मा का रूप होता है, संत परमात्मा ही होता है, संत जानता
- 49:20है तुम्हारे भीतर क्या क्या कूड़ा बना है?
- 49:23तुम किस लिए आए हो? तुम सेल्फ सेल्फ हिप्नोटाइज़ तुम
- 49:33नारसी से ग्रस्त हो नारसी से वह है यूनानी कविता का उपन्यास का
- 49:41लेखक। नर्सरी सीलम आत्मा शलाघा से युक्त
- 49:48हो। तुम अपने आदमी बांटने को हुए हो
- 49:54लेकिन परमात्मा की नज़र में तो वही ऊँचा है।
- 50:05जीसको वह चाहता है कुडयार कूड़ेफरा कहते कुडयार कूड़ेफरा
- 50:20कहते मूर्ख मल। पख खा ये वो ही लोग हैं जिन्होंने
- 50:28गटर में छलक लगा दी। गटर में कहते आह, गंगाजल है, मल
- 50:35पख खा। झूठ बोल कर पैसा कमाने वाली ये
- 50:42वकील छोड़ी हुई फिरती है और खुद को बाबा बनाने की शिक्षा कहते
- 50:57हैं। आज वो ज़माना आ गया।
- 51:02दिखावे का ज़माना है। बस नाम के पीछे सिंग और कोर्ट लगा
- 51:07लो नाम के पीछे राम और कृष्ण लगा लो लेकिन ऐसे काम नहीं चलेगा।
- 51:15ये मात्र दिखावा है। असंख मलेच मल पख खा अभी से ज्यादा
- 51:23साहब क्या बोलेंगे? बहुत से मलेच तो गटर का ही मल
- 51:30खाते हैं, गटर का ही पानी पीते हैं और कहते हैं गंगा जा रहा है
- 51:34हाँ। आ जाओ कुंभ पर मोक्ष हो जाएगा और
- 51:41वो बेचारे जो मर गए उनके उनकी गणित का भी हिसाब में दोस्त इसका
- 51:49हम यहाँ पर आदमियों को बुलाते हैं, हम पांडाल लगा सकते हैं?
- 51:59लाखों लोगों को बुला सकते हैं, लेकिन गिनती के लोग जिन्हें हम
- 52:04जिनकी सेवा सुशीक्षा कर सकते हैं, हमको पता लगता है इनकी सुरक्षा का
- 52:13इंतेजामान। हम भलीभाँति कर सकते हैं, उनको
- 52:18बुलाते हैं, लाखों की भीड़ नहीं बुलाते, इतनी सी भीड़ बनाती हैं
- 52:23जिनको हम संभाल सके, जिनको हमारे सेवक संभाल सके।
- 52:32कुड यार कुडे फरा गप ही बोलते फिरते, झूठ ही बोलते बोलते मैं
- 52:40तुम्हें कहता हूँ कोई मुझे बता दे हैलो।
- 52:52यारों। किस तरह जीते ये लोग बतादो यारो
- 53:07हमको भी जीने का अंदाज। सीखा दो यारो किस तरह जीते हैं ये
- 53:23लोग बता दो यारो। हमको भी जीने का अंदाज सिखादो
- 53:39यारो किस तरह जी से हैं ये लोग? तुम कतलोगात करके मुझे आज तक समझ
- 53:58नहीं आया कि राज़ करने से मिलता क्या है?
- 54:04कोई बता दो मुझे उसका कारण मैं समझता।
- 54:14क्योंकि मैंने असली फूलों की सुगंध ले ली है।
- 54:24नकली फूलों के इत्र की सुगंध मुझे खींचती है।
- 54:31लेकिन तुम मुझे न बता पाओगे, तो मैं तो गलतियाँ मुझसे अपेक्षा मत
- 54:41रखना, यह जो पार्शलिटी तुम्हें सिखाती हैं लोग।
- 54:52हो सयाना बनने की चेष्टा में सब कुछ गंवा देते हैं लोग, क्योंकि
- 55:01जिसने आनंद खोया चैन खोया करार खोया।
- 55:09रात की नींद खोई, दिन की भूख हुई, उसने कखाक पाया और इन्हीं सभी
- 55:23उपद्रवों को इकट्ठे करते करते तुम बुढ़ापे में भी ठीक से गुजर रहे
- 55:31हो। इन लोगों का बुढ़ापा देखा जिन
- 55:35लोगों ने पाक नहीं किया, बड़े आराम से किया।
- 55:42जिन लोगों ने पाक किए, धोखा किया हेरा फेरी की उन लोग किस तरह
- 55:49व्हील चेयर पर बैठकर? मर मर के जीए उसका नाम मैं क्या
- 55:56करूँ? मह के कवियों की नजर में वो मूल्य
- 56:08रखते हैं उनके। मेरी नज़र में मूल्य नहीं रखते हो
- 56:12परमात्मा की नज़र कुछ अलग ढंग से देखते हो, मुझसे उम्मीद मत रखना
- 56:25अगर तुम माँ बाप हो और तुम्हारे बाल बच्चों में तुमने कभी कभी
- 56:31फर्क किया है। अगर तुमने कोई फर्क किया है, तो
- 56:35तुम माँ बाप ने फिर तुम दुष्ट हो, फिर तुम हिरण्य का शुभ हो
- 56:43निस्संदेह तुम हिरण्य का शुभ हो तुम में मत्व नहीं है तुम में
- 56:48बातें सर रही हैं, बच्चों को तुम को कोई नहीं देना।
- 56:56इसलिए मैं बच्चों से मेरे पास रोज़ आ जाते हैं।
- 57:00बाबा शादी कराएं ना करें बिलकुल फिर आओ लेकिन बच्चे।
- 57:11क्योंकि बच्चों को पैदा करने के लिए बच्चों की सहमति आवश्यक है
- 57:23करो बच्चे पैदा, लेकिन बच्चों की सहमति से बच्चे पैदा करो तो माथा
- 57:29पकड़ लेते हैं। तो बाबा आपने निराली बात करके और
- 57:34धरती पे कभी किसी ने की नहीं? मैंने कहा बाबा बातें ही ऐसी करता
- 57:40है जो धरती पे कभी किसी ने की नहीं ये गंदी वायु मेरे पास रोज़
- 57:48फ़ोन आते है बाबा। ये दिल्ली का एयर पॉल्यूशन, इसमें
- 57:59हम बच्चों को जन्म दे दें। बच्चों को हम क्या दे के जाएंगे
- 58:05विरासत में ये गंदी हवा पॉल्यूटेड हवा।
- 58:11जिसका मापदंड है 1900 800। इस गंदी हवा में तुम सांस लो, तुम
- 58:18जाओ ज़रा सी लंड नर में जाओ विदेशियों ने इसे बचा के रखा है।
- 58:28यहाँ के गुंडों ने मवालियों ने जो तख्त उतार इस पर आसीन है अरे तुम
- 58:42कोई नई हवा के अंदर स्वास्थ्य थोड़ी लेते हो अंत भक्तो तुम भी
- 58:47तो हो उससे ही। जहरीली वायु का शिकार और याद रखो
- 58:56रोग कभी ये नहीं देखता के ये अंध भगत है ये भगत है रोग अंधभक्त को
- 59:03भी उतना ही कैंसर इटिस होता है। यह तुम्हारे फेफड़ों को भी उतना
- 59:08ही दूषित करे। तुम करो अंधभक्ति, लेकिन वायु को
- 59:14तो शुद्ध कर दो। क्या यही बच्चों को दिखाने के लिए
- 59:22जन्म दोगे? कितना सुन्दर है यह संसार देखो।
- 59:27बच्चे पैदा करो, नॉर्वे में पैदा करो में पैदा करो, अच्छे मुल्क
- 59:32हैं, उनमें पैदा करो मुख्य भोजन सबसे पहले बच्चे का होता है।
- 59:38प्रथम स्वास्थ्य जब बच्चा पहले श्वास लेता है तो हम कहते हैं हाँ
- 59:43इसमें जीवन है। और प्रथम स्वासी वह जहरीला होता
- 59:48है तो फिर उसे पानी पिलाते हो। वह पानी जिसके जहर से हजारों
- 1:00:01लाखों मछलियां मर के ऊपर आ जाती है।
- 1:00:04यह सीन मैंने देखा है। तुमने भी देखा होगा वह धरती जो न
- 1:00:09जाने कितनी बार जिसके ऊपर जहर छिड़क दिया गया।
- 1:00:15तुम्हारे क्या ख्याल है? आज अमृत जैसी धरती बची है।
- 1:00:24तीनों ही चीजें जो बाबा ने कहा ओण, गुरु, पानी, पिता, माता,
- 1:00:30तरती, महत्त्व ये तीनों ही तुमने विकृत नहीं की, विनष्ट कर दी तुम
- 1:00:40ऐसी परिस्थिति। दिखलाने के लिए बच्चों को जन्म
- 1:00:46दोगे? हिंदुस्तान में बच्चों को पैदा
- 1:00:48करना बैन हो जाना चाहिए। या तो पॅलूशॅन को हटा दो, तीन तरह
- 1:01:00के पॅलूशॅन जो मैंने गनाए तुम तो थपेड़ों को रोज़ काटते।
- 1:01:08कानून बना दो, जो थपेड़ों को काटेगा, उसका सिर काट लेंगे, गला
- 1:01:11काट लेंगे। तुम तो हजारों एकड़ जमीन किसी
- 1:01:17मूर्ख को ₹1 के हिसाब से बेच देते हो और भाई किसी गरीब को तो तुमने
- 1:01:21दिया नहीं? वहाँ से तुम वोट मांगते हो जो
- 1:01:27तुम्हारे वरुथ बोलता है उसको फिर पोडियों के लिए ब्रोक करते हो
- 1:01:32सीढ़ियों के लिए समझ गए ना बात हाँ, भेदभाव की मेरे से अपेक्षा
- 1:01:41मत करना। मैं वो तत्व को देख कर वो ही तत्व
- 1:01:48हो गया हूँ जो पार्शियल्टी नहीं करता, वो तो समान ही समुद्र में
- 1:01:59समुद्र ही हो जाए। जैसे ही मैंने समुद्र को देखा,
- 1:02:06समुद्र ही हो गया। समुद्र किसी से पार्शलिटी करता का
- 1:02:13भी नजर आया ईश्वर से उम्मीद मत रखना।
- 1:02:23कि वह पर श्रुति करेगा। ईश्वर के लिए तुम सभी पुत्र हो
- 1:02:27बराबर वह कम पढ़ा, वह ज्यादा पढ़ा।
- 1:02:35वह स्त्री, वह पुरुष, वह बच्चा, वह वृत्त ईश्वर की दृष्टि में सभी
- 1:02:42समान उसके बच्चे, उसकी पैदाइश, उसकी रचना उसने अपने हाथों से
- 1:02:48बनाया है तुम्हें। संसार के हर कण में उसकी छाप है
- 1:02:58उसके हाथों की। इसीलिए ये इतना प्यारा है और
- 1:03:04तुमने इस वातावरण को दूषित करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं
- 1:03:08छोड़ती। तुम कहते हो?
- 1:03:13मैं ब्राह्मण परिवार में जन्म लिया।
- 1:03:16कब की बात कर रहे हो? तुम कौन सी सदी की बात कर रहे हो
- 1:03:21तुम? क्या आप भी ऐसा पागलपन किसी जगह
- 1:03:27है? भारत के सिवा भारत में ये क्यों
- 1:03:31है? कुछ दुष्ट जलाद लोग तुमने कुर्सी
- 1:03:37में पढ़ा दिए, मैं जानता हूँ मैं जानता हूँ मेरे टुकड़े टुकड़े कर
- 1:03:42दिए जाएंगे, लेकिन ज़रा भी खौफ मैंने सुर को भी तो आपने काट दिया
- 1:03:51था। मैं इंतजार करूँगा।
- 1:03:55हम इंतजार करेंगे, हम इंतजार। करेंगे, कयामत तक खोदा।
- 1:04:10करे की। कयामत हो और तू?
- 1:04:18आए खुदा करे की। कयामत हो और तू आए?
- 1:04:29हम इंतजार करेंगे। जलादो दुष्टो समझ जाओ जनता आ रही
- 1:04:41है क्योंकि जनता को जगा नहीं मारे आ रहे जरूर राठी कहते हैं मैं
- 1:04:47हार। मैं इसलिए बोल रहा था कि कल को
- 1:04:52मेरे बच्चे मुझसे ये न कहें कि जब ऐसा कुछ अत्याचार हो रहा था, आप
- 1:04:58कहाँ थे? पापा मैं ये कहूंगा मैंने अपनी
- 1:05:03पूरी वाह लगा दी। मैं जो कर सकता था जितनी क्षमता
- 1:05:10थी कैपेसिटी थी मैंने प्रयोग की मैंने की लेकिन अब मैं थक गया हूँ
- 1:05:15कोई बात नहीं साद विवाद है तुमने बहुत कुछ किया तुम्हारा दैन भी।
- 1:05:26हिंदुस्तान दे न सकेगा तुमने सोई जनता को उस वक्त जगाया जब इसकी
- 1:05:38आपकी उसको बड़ी जरूरत है। ऐसे ही कुछ लोग।
- 1:05:46देखिए जो चरणचुम्बक बन गए, उनका हश्र भी आपने देखा होगा।
- 1:05:55फिर उन्हें आत्मगलानी से सड़कर प्राण त्यागना पड़े।
- 1:06:00सबरकर जी कैसे मरे? कहानियों जैसे मर्ज़ी घर लो लेकिन
- 1:06:05आत्मगलानी से मरे आखिर में अन्न पानी तुम संसार के सकते हो जैन
- 1:06:14मुनि की तरह लेकिन वह आत्मगलानी थी कि मैंने ये किया तो क्या
- 1:06:18किया? जब देश को मेरी जरूरत थी, मैं चरण
- 1:06:29चम्बक बन गया एक कलेक्टर की तनख्वाह जब ₹42 होती थी, सावरकर
- 1:06:35को ₹60 मिलता था, महीना और तुम आज उसकी तस्वीरें पार्लियामेंट हॉउस
- 1:06:42में लगाए बैठा हो। तो ध्रुव राठी जी आपने जो सेवा की
- 1:06:51वो सेवा मोर दैन सुफ्फिसिएंट है। कोई बात नहीं एक सिवा ही मर जाता
- 1:06:58है। तो फौज खत्म नहीं हुआ करते, फौज
- 1:07:05भी से कड़ी रहती है, दूसरा आगे आ जाता है।
- 1:07:13शहीदों की कोई कमी नहीं है इस देश में और मैं अच्छी तरह से जानता
- 1:07:18हूँ। अगर मैं नहीं जानता तो फिर और कौन
- 1:07:22जानता है? भरी भाँति जानता हूँ।
- 1:07:25वो सब यादें मेरे संग हैं जब इस देश के लोग घरों से बाहर आ गए थे,
- 1:07:32मेरे संग चले थे, कंधे से कंधा मिलाकर और उखाड़ फेंका था उसको,
- 1:07:40जो दो तिहाई। भू भाग पर धरती के भू भाग पर
- 1:07:45काविश था तुम्हारी तो औकात क्या है और फिर फिर फिर लाओ कहीं से
- 1:07:58ढूंढ के। लाओ कहीं से ढूंढ से ढूंढ के फिर
- 1:08:09से कोई मूड रखो, जो लटकने को तैयार हो फिर से कोई गोट से लेके
- 1:08:19आओ मेरे लिए। चिराग दिल के जलाओ बहुत अंधेरा
- 1:08:41है। चिराग दिल के जलाओ बहुत अँधेरा।
- 1:08:58है। चिराग दिल के जलाओ, चिराग दिल के
- 1:09:09जलाओ, बहुत अँधेरा है। कहीं से लौट के आओ, कहीं से लौट
- 1:09:27के आओ, बहुत अँधेरा है। चिराग दिल के जलाओ, बहुत अँधेरा
- 1:09:42है, कहीं से लौट के आओ, बहुत अँधेरा है, अँधेरा है, चारों तरफ़
- 1:09:59अमावस्या की राह है ऐसा लगता है। घने काले मेघों ने आसमान को ढक
- 1:10:07लिया है। ऐसा लगता है
- 1:10:19कुछ लोगों को छोड़कर जो चिराग बनकर हमें रास्ता दिखा सकता है।
- 1:10:30उन्हें ढूंढ के लाओ, अंधेरा घना हो गया चिराग ढूंढ के लाओ बहुत
- 1:10:42अंधेरा है कहीं से लौट के आओ बहुत अंधेरा।
- 1:10:52जीतर देखते हैं, चोर बैठे अगर उनमें कोई ईमानदार बैठे है तो
- 1:10:59क्या करें उसकी पेश नहीं चलता। मैं तुम्हें यही कहता हूँ, यह
- 1:11:16सोने का वक्त नहीं है, जागो उठो, जल पान करो, घरों से बाहर निकलो।