Latest / Baba ji Vijay Vats / 7 Oct 25 - How to Meditate? ध्यान में क्या करें? ध्यान में उतरने के लिए सबसे महत्वपूर्ण Video!
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- 0:14आस्थाओं के व्यथाओं के व्याधियों के भटकाओ के के मूल में क्या है?
- 0:34आपदाओं के व्यथाओं के व्याधियों के बाटकाओ के मूल में क्या है?
- 0:52और इस पर विजय पाने का मूल मंत्र क्या है?
- 1:01बाबा जी आज कृपा करके हमें मूल मंत्र समझा दें कि हम कैसे इस पर
- 1:07काबू पाएं। करण सिंह लीजिए ध्यान से सुनना
- 1:20छोटी सी वीडियो बनाऊंगा और इसे संजो कर रखना हृदय में।
- 1:34आप सतों के भटकाओ के सुविधाओं के तुम्हारे कोई भी क्लेश कष्ट
- 1:44व्यवधयों के मुद में है मानव। इसके मोड में मन है मन ही है कारण
- 2:04एक मात्र कारण दूसरा कोई नहीं। इसका हल क्या है?
- 2:17तो लीजिये आज इसका रामबाण हल। मैं आपको बताता हूँ।
- 2:29अब गौर से समझेना। सभी जीवंत प्राणियों में मन है
- 2:46मनुष्यों में मन है मनुष्य शब्द बना ही मन से।
- 2:53मनुष्य, मन, शब्द जो मानसी युक्त है, वह मनुष्य, वह मानव, इसका
- 3:10उपाय क्या है? मन एक उलझन है।
- 3:17मन एक गहरी गुंडी है जो सुलझाई नहीं जा सकी।
- 3:25आपसे कितने गुरु आए चले गए? आपने सुना बड़ी शांति से सुना
- 3:36बड़ी गहराई से सुना, लेकिन उसको इम्प्लिमेंट नहीं कर सके तो आज
- 3:42आपको एक बूल मंत्रा बताता हूँ मैं?
- 3:49मन का स्वभाव है भटकना और अगर मन भटके ना तो फिर आपको कुछ नहीं
- 3:56कहता। इसका उपाय ध्यान से समझे।
- 4:11मन भटके तो भटकने देना जैसे कोई दूर कहीं आग लगी हो, हम उसको
- 4:24बुझाने की कोशिश करते हैं। कहीं दूर हमें आग की लपटें दिखाई
- 4:32पड़ती है, बस हम इतनी ही दूर हैं। मन से आग लग जाती है हमें उसकी
- 4:44लपटें। दूर आकाश में दिखाई पड़ते हैं।
- 4:49क्या हम उनको बझाने की चेष्टा करते हैं?
- 4:53नहीं करते क्यों हम जानते हैं या बूझ नहीं सके?
- 4:59हम इतने दूर हैं। हमारे पास कोई साधन नहीं हैं की
- 5:04हम इसको बुझा दें। पहली बात मन भटकता है, मन का
- 5:15स्वभाव है भटकना, इसको भटकने दो तुम कहोगे ये उश्रिंकल हो जाएगा।
- 5:28यह स्वच्छंद हो जाएगा नहीं होगा यह उछृंकल और स्वच्छंद तब होगा जब
- 5:36तुम इसको अपनी शक्ति दोगे। तुम्हारी शक्ति के बिना यह उछृंकल
- 5:44और स्वच्छंद नहीं हो सकता। तो पहली बात इसको भटकने दो।
- 5:55मन का दूसरा नाम भटकन है और तुमने पूछा भटककाव भटककाव मन ही का
- 6:03दूसरा पर्यायभासी है? भटकता है भटकने दो तड़पता है
- 6:13तड़पने दो जो करता है करने दो मान को समझो बात को।
- 6:24तुम कहाँ फंसते हो? इसके जाल में अब इसकी मुहीम तरकीब
- 6:30क्या है आपको फंसाने की वो समझ लो तुम इसके जाल में फंस जाते हो।
- 6:44इसको भटकने से रोकने के लिए तुम इसमें इंटरफेरेंस करते हो, मन में
- 6:55घुस जाती हो, मन को शांत करने की चेष्टा करते हो।
- 7:02ये चेष्ठनों को बंद कर दो मन भटकता है।
- 7:09इसे भटकने दो पहली बात मन को भटकने से रोको मत।
- 7:20दूसरा दूसरा प्वाइंट है इसके पीछे मत चलो।
- 7:26अनुसरण मत करो। अनु करण मत करो, मन तुम्हें कहता
- 7:34है बड़ी दूर यहाँ तो दुख है आओ कहीं और चला लें।
- 7:49आओ कहीं ऐसी जगह चलें जहाँ हमें कोई जान ही न कोई पहचान ही न
- 8:00बिलकुल अनजान बे पहचान कोई भला ही न।
- 8:07कोई रुलाए ना कोई पूछे ना वहाँ चले जाए मन कहेगा दूसरा मैंने
- 8:18क्या बताया इसका मूल मंत्र इसके पीछे मत लगो।
- 8:25तुम्हारी शक्ति के बिना ना ये बह सकता है ना ये कहीं जा सकता है
- 8:34अगर कहीं जाएगा तो तुम्हारी शक्ति के संग जाएगा।
- 8:39अगर तुम इसको शक्ति नहीं दोगे तो मन में कोई शक्ति नहीं।
- 8:44जो तुम्हें कहीं ले जाएगा। ये तुम्हारी ही दी हुई शक्ति है
- 8:51जिससे मन भटकता है। मैंने आपको एक उदाहरण दी थी कि हम
- 8:57साइकिल चला रहे हैं अचानक। हमने साइकिल चलाना, पैडल मारना
- 9:05बंद कर दिया तो पैडल मारना बंद करते ही साइकिल रुकेगा नहीं थोड़ी
- 9:21दूर तक। जो तुमने पैटल मारने में पहले
- 9:27शक्ति लगाई उस शक्ति के सहारे यह साइकिल थोड़ा चलेगा और जब
- 9:36तुम्हारी दी हुई शक्ति समाप्त हो जाएगी।
- 9:40तो यह है वहीं गिर जाएगा ये साइकिल की बात नहीं कर रहा हूँ
- 9:47मैं ये मैं तुम्हारे मन की बात कर रहा हूँ।
- 9:52मैंने जब भी ऐसा उदाहरण दिया साइकिल के लिए नहीं दिया तो हमारे
- 9:56मन के लिए दिया। तुम्हारा मन ऐसी साइकिल है जिसका
- 10:01पेटल तुमने मार दिया और फिर अचानक तुम्हारी समझ में आया कि नहीं
- 10:07इसको पेटल नहीं मारना, इसको शक्ति नहीं देना तो तुम शक्ति देना बंद
- 10:12कर दिए तुमने पेटल मारना बंद कर दिया।
- 10:17तो तुम अभी भी डर रहे हो कि ये चलेगा चलेगा, चलेगा तो सही, लेकिन
- 10:24थोड़ा सा चलेगा। जितनी शक्ति तुमने पैडल मारने में
- 10:29लगा दी इससे पहले बंद करने से पहले उतनी दूरी तक तो ये चलेगा।
- 10:38तुम इसी मुगादे में रह जाते हो कि मैंने तो पेटल बंद कर दिया, ये
- 10:44गिरा क्यों? नहीं तो ठहरों थोड़ा सा धीरज रखो,
- 10:51तुम्हारी दी हुई शक्ति से ही चल रहा है।
- 10:56तुमने पैडल मारना बंद कर दिया यह पर्याप्त है इट सफीशियंट जैसी ही
- 11:05तुम्हारी लगाई हुई शक्ति तुमने पैडल मारना बंद किया और तुम्हारी
- 11:10लगाई हुई शक्ति। इसको थोड़ी दूर तक घसीटेगी फिर
- 11:16शक्ति समाप्त हो जाएगी और इसके कोई औकात नहीं।
- 11:21साइकिल अपने बल के ऊपर कभी नहीं चल सकता।
- 11:25ऐसा ही तुम्हारा मन, तुम्हारा मन, अपनी शक्ति के बल पर नहीं जल
- 11:30सकता। यह गरेगा अवश्य गरेगा।
- 11:36इससे कोई शक्ति नहीं चलाने वाली। तुम्हारे सिवा तुम चलाओगे तो
- 11:42चलेगा नहीं तो नहीं चलेगा ठीक पहला बात।
- 11:50ये भटकता है भटकने दो जहाँ जाता है जाने दो तुम इसको स्वतंत्र
- 11:57छोड़ दो तुम इसकी पहरेदारी चौकेदारी मत करो, जाने दो।
- 12:08इसे भटकने दो, तुम इसकी कोई सुध सार नहलो क्योंकि ये भटकेगा ये
- 12:20जायेगा तुम्हारी शक्ति से जायेगा। और जब तुम इसका निरीक्षण करोगे तो
- 12:27तुमने इसको शक्ति दी, अब इसे समझ रहा हूँ।
- 12:30बहुत से लोग इसका निरीक्षण करने लग जाते हैं।
- 12:35तुम्हारा निरीक्षण का बल इसको शक्ति प्रदान करता है।
- 12:40तुम इसकी तरफ देखोगी मत। मन भटकता है भटकने?
- 12:49भचकता है भचकने दो और दूसरा इसका अणुकरण मत करो, इसके पीछे मत रखो,
- 13:02ये कहेगा बड़ी बोरियत है यहाँ कोई।
- 13:08मन को बहलाने वाला नहीं है। आओ कहीं चले कोई हिल स्टेशन यहाँ
- 13:16वैसे भी गर्मी है थोड़ा वक्त बीत जाएगा तो घड़ी के लिए।
- 13:29सुकून आएगा। मन अपनी दलील देता है और बड़ी
- 13:35सुंदर दलील होती है, बड़ी गहरी क्योंकि मन ने सदा से तुम्हारे
- 13:38साथ चालाकियां की हैं और चालाकियां इसकी राह साझी।
- 13:44तुम इनके पीछे लगे हो? तो इसको चालाकियां भागी तो दूसरा
- 13:50क्या है। इसके पीछे मत रखो, इसका अनुकरण
- 13:54इसका अनुसरण मत करो, वहीं थोड़ी देर में ठहर जाएगा।
- 14:07गिर जाएगा मन जैसे मैं उदाहरण दिया करता हूँ कि गंधला पानी है
- 14:16उसको कांच के ग्लास में पाके, एक नुक्कड़ में रख दो थोड़ी देर।
- 14:25और आराम से सो जाओ। रात को सोते वक्त इस गंदले पानी
- 14:30को शीशे के गलास में डाल के अलग से रख लो।
- 14:38कोई छेड़छाड़ नहीं, सारी रात तुम सोओगे सारी रात पानी ठहरा रहेगा।
- 14:44और सुबह तुम पाओगे, माटी अलग हो गई, नीचे बैठ गई और शुद्ध ज्यादा
- 14:49ऊपर आ गया। दोनों अलग हो गए।
- 14:52क्यों अलग हो गए क्योंकि तुमने कोई छेड़छाड़ नहीं की?
- 14:58अगर तुम घजोल मारते रहते और फिर इसको घजोल मारके देख लो।
- 15:03तो यह पानी फिर गंधला हो जाएगा। इस गंधलेपन को ही तुम कहते हो
- 15:11बटकन इस गंधलेपन से ही तुम तंग हो, बदहाल हो और गंधला बनाया
- 15:21तुम्हीं ने। इसमें गजोल डालकर बार बार हाथ
- 15:27गजोल मार देते हो, हिला देते हो उसको बैठी हुई माटी फिर पानी में
- 15:37घुल जाती है, फिर पानी गंधा हो जाता है।
- 15:42तो पहली बात भटकता है लडकता है जाने दो जहाँ जाता है इसको रोको
- 15:50मत दूसरा इसके पीछे मत रुको, यह कहेगा चलो बाजार चले एक गुलाब
- 16:00जामुन खायेंगे। एक बंगाली रसगुल्ला खाने का इसको
- 16:06कोई जवाब ना दो तुम जवाब तलब भी करने में लग जाते हो ज़रा समझे ना
- 16:15बात को भटकता है भटकने दो बोलता है बोलने दो।
- 16:21कुछ तुम्हें सुझाव देता है देने दो उस सुझाव को ना इंकार को ना
- 16:28स्वीकार करो, ना उसके पीछे लग कर बाजार में जा के रसगुल्ला को ना
- 16:36इसको डांटों डपटों। भला विचारों से कोई डांट डप्ट
- 16:43करता है? खुद ही के विचार है, खुद ही की
- 16:48शक्ति से उत्पन्न हुए हैं। इनको डांट लगाने का मतलब खुद से
- 16:54लड़ना हो गया, खुद की शक्ति से टकराना हो गया।
- 16:59बात कह रहे हैं थोड़ी समझना, इसको भटकने देना और इसके पीछे भी मत
- 17:07लगना, ये तुम्हें कहेगा चलो फ़िल्म देखना बहुत दिन हो गए,
- 17:13अच्छी लगी। ये फ़िल्म बहुत बढ़िया मजेदार
- 17:16फ़िल्म है। 2 घंटे 3 घंटे आराम से कट जाएंगे।
- 17:20वैसे भी गर्मी है, एयर कंडीशन में बैठेंगे, बड़ा मज़ा आएगा, मजेदार
- 17:27गाने सुनेंगे तो इससे ये मत कहो कि नहीं जाएंगे या जाएंगे फिर
- 17:34जाएंगे, देखेंगे नहीं। नो रिप्लाय किसे कहते है?
- 17:41सरता ना जवाब देना, ना पीछे लगना, ना तर्क वितर्क करना।
- 17:52जैसे कुछ हुआ ही ना हो कहीं दूर। आग लग गई।
- 17:58उसको बचाने की चेष्टा न करो, कहीं दूर कोई बोल रहा है पता नहीं
- 18:03किस्से बोल रहा है इसको समझाने की चेष्टा मत करो, इसके पीछे भी मत
- 18:12लगाओ। तीसरा सबसे अहम इसको कोई सुझाव मत
- 18:22दो नो सुजेशन टु माइन सुझाव तुम सुझाव देते हो देखो।
- 18:33तब मैंने तुम्हारी बात मानी। अब हम कल ही तो जा के आए।
- 18:38अभी 10 5 दिन ही तो हुए हैं, अभी तुम रुको देखेंगे, करेंगे,
- 18:45सोचेंगे जाएंगे ऐसा कुछ मत करो। इसको सुझाव मत दो, इससे कोई कमिट
- 18:55मत करो, क्योंकि यह मात्र एक विचार है और यह विचार तुम्हारी
- 19:02शक्ति से बना है और इस विचार में कोई ताकत नहीं है।
- 19:08जो तुम्हें थिर्रा दे, तुम्हें भटका दे तुम्हारे जीवन को शांत कर
- 19:12दे, तुम शांति के भंडार हो, तुम अपनी अवस्था में स्थित रहो, इसको
- 19:25भटकने दो यहाँ जाता है। थोड़ी देर में चूक जाएगा क्योंकि
- 19:29इसके पीछे की शक्ति तुम देना बंद कर दोगे।
- 19:33तुम इसका निरीक्षण मत करो। कहाँ जाता है, क्यों जाता है?
- 19:37देखिए कहाँ जाता है कहीं नहीं जाता।
- 19:40ये तुम्हारी शक्ति से ही जाता है, जहाँ जाता है।
- 19:48भटकता भटकने दो भटकाता तो भटकाओ मत तुम्हें भटकता तो तुम इसके
- 19:58पीछे मत रखो। तीसरा इसको सुझाव मत ये कहेगा चलो
- 20:06पिक्चर देखें मत कहो कि हफ्ता पहले तू देखें, वही तो फ़िल्म है,
- 20:14ये अच्छी नहीं है या अगली फ़िल्म देखेंगे नो रिप्लाय कोई जवाब
- 20:20नहीं। मूढ़ता के कभी जवाब दिए जाते हैं,
- 20:25यह तो एक पागलपन है और पागलपन का तुम क्या जवाब दोगे?
- 20:31और तुम्हारे ही अपने विचारों का पागलपन है, यही तुम्हें सारा दिन
- 20:36रात उलझाये रखता है। और देखो तुम्हारी जी सकती है,
- 20:42बड़े मज़े की बात है, दुनिया समझने की बात है, अपनी ही शक्ति
- 20:47से यह तो लड़ने बैठ जाते हैं, यह समझाने बैठ जाते हैं।
- 20:58जब वो भटकता है तो डांट डपट करते हैं।
- 21:01क्यों जाते हैं वहाँ? नहीं तीनों में से कुछ नहीं करना
- 21:07भटकता है। भटकने दो इसको डांट डपट मत करो,
- 21:14इसका अनुकरण मत करो। ये कहेगा चलो वहाँ चलो वहाँ चलो
- 21:18बड़ा आनंद आया तुम इससे जवाब भी मत दो आया होगा ये भी मत कहो अगर
- 21:29तुमने ज़रा सा भी हस्तक्षेप कर दिया उस पानी की तरह।
- 21:34अगर तुमने ठहरे हुए पानी में थोड़ी सी अंगुली भी फराह दी तो
- 21:38गचोल बज गया फिर पानी गंधला हो जाएगा समझना तुम इस पानी को ठहरे
- 21:47ही रहने देना। या कोई भी उपद्रव करता है करने
- 21:53देना। ये कहेगा खाली क्यों बैठे हो राधे
- 21:57राधे जपलो इसे ये मत कहो कि क्या होगा इससे नहीं गुरु जी तो कहते
- 22:04हैं इससे कुछ नहीं होगा। इसको जवाब मत दो, ये कहेगा राधे
- 22:09राधे करो तो चुप रहो। ये कहेगा थोड़ी कमाई हो जाएगी।
- 22:15चलो थोड़ी दुकान खोल लेते हैं, एक घंटा पहले यहाँ पड़े पड़े क्या
- 22:20करते हो? कोई जवाब मत दो नो रिस्पांस नो
- 22:24रिप्लाय। मन का स्वभाव भटकना भटकेगा।
- 22:36स्वभाव है भाई बच्चे का स्वभाव उछल कूद करना, उछल कूद करेगा तो
- 22:43करने दो ना उसे उछल कूद क्या रोकते हो?
- 22:48तुम्हारे ही विचार हैं, तुम्हारी ही शक्ति से उत्पन्न हुए मुर्दे
- 22:51में विचार रहता है, क्योंकि मुर्दे में शक्ति ही नहीं है।
- 22:58मुर्दे में शक्ति ही नहीं तो विचार कैसे रहेगा?
- 23:02तो इसीलिए मुर्दे में कोई हलचल नहीं होती, न विचारों की होती है,
- 23:05न शरीर की होती है। ऐसे ही तुम जीवंत हो और जीवंत में
- 23:11लहरें उठेंगी वो जीवंतता के कारण उठेंगी।
- 23:16वह तुम्हारी शक्ति है। इसमें अंतर्निहित की हुई इसको
- 23:22भटकने लो कितनी देर भटकेगा? नहीं भटकेगा ये?
- 23:27थोड़ी देर में बस रुक जाएगा। जितना तुमने शक्ति दिया इसको उतना
- 23:31ही भटक पाएगा। ये समझना उससे ज्यादा नहीं
- 23:41भटकेगा। जैसे ही तुम्हारी दी हुई शक्ति
- 23:44समाप्त हुई। यह ठहर जाएगा।
- 23:47उस सैकल की भांति जिसका पैडल मारना तुमने थोड़ी देर पहले बंद
- 23:53कर दिया था और उस पैडल के द्वारा दी हुई शक्ति जब समाप्त हो जाएगी
- 23:59वह रुक जाएगा, गिर जाएगा, ऐसे ही तुम्हारा मन गिर जाएगा।
- 24:04फिर तुम नहीं कहोगे बाबा मन तंग करता है, मन तंग करता है,
- 24:11तुम्हारी इच्छा से तंग करता है, तुम तंग होना चाहते हो या तुम
- 24:16अज्ञानी हो, तुम्हें मन का पता नहीं तो यह मन का स्वभाव अच्छी
- 24:22तरह से आज समझ लेना। मैंने तुम्हें सरल भाषा में
- 24:25तुम्हारी भाषा में समझा दिया है। भटकता है भटकने दो झगड़ता है किसी
- 24:36के साथ झगड़ने दो तुम इसको देखो भी मत ये झगड़ा कर रहा कर रहा।
- 24:42सपने सिंझोरा सिंझोरा ना इसमें हस्तक्षेप करो ना इसको कोई सुझाव
- 24:49दो ना इसके पीछे लगो। ये तीन नियम हैं भटकना इसका
- 24:57स्वभाव ये भटके का? अनु शरण मत करो अन्नू करण मत करो,
- 25:03इसके पीछे मत रखो, ये कहे फ़िल्म नहीं जाना तो चलो अपन तीर्थ
- 25:12यात्रा करते है। अपन हज जाते है, तुम कोई जवाब ना
- 25:19देना। कुछ न देना माँ शांत सुझाव बना
- 25:28दो, क्या करोगी वहाँ जाके मक के गया गल मुकदीना।
- 25:42तीरथ गया गदम मुकदी ना है पावें सो सो नमाज़ कराइए।
- 25:55हाँ सो सो गोते लाइए ये समझाने की चेष्टा मत करो।
- 26:03इसके आगे प्रवचन करता मत बनो, यह बोलता बोलता रहेगा तुम ना इसका
- 26:12अनुसरण करो ना इसको झिड़को ना ही इसको सुझाव दो।
- 26:21आज नहीं कल चले जाएंगे आज वैसी भी तबियत अन्ना साज़ है, कुछ मत कहो,
- 26:28तुम शांत बने रहो, समझा आ गया तुम्हें इसको प्रैक्टिकल करो,
- 26:37पहले दिन तुम्हें शांति मिल जाएगी।
- 26:42हो सकता है अपन भटके क्योंकि संस्कार बहुत पुराने लेकिन अगर
- 26:49तुम्हें फॉर्मूलेशन आ गया ठीक से तो तुमने कंट्रोल की चाबी अपने
- 26:55हाथ में ले ली। ये चलता है तुम्हारी शक्ति से और
- 27:03तुम इसका निरीक्षण करके इससे झगड़ा करके इसकी बातों का जवाब
- 27:10देके इन्हें सुझाव देके इसका अनुसरण करके इसका अनुकरण करके
- 27:15इसको। झिड़क के शक्ति देने के अलावा और
- 27:19कुछ भी नहीं करते हो, ये सब इसको शक्ति देने का साधन बन जाते हैं।
- 27:26अपने मन पर कभी ख्याल मत करो, लोगों ने तुम्हारे ऋषियों ने
- 27:31समझाया। कि इसको देखते रहो।
- 27:37नहीं देखो इसको देखोगे तो इसको शक्ति दोगे, समझो बात को तुम्हारा
- 27:44देखना इसकी शक्ति का कारण बनता है क्योंकि तुम हो जीवन तुम हो चेतना
- 27:51यह है मृत विचारमृत ही होते हैं सदा।
- 27:57मैं नहीं जानता किस मनहूस वेला में तुम्हें ये सब कपड़ाया गया और
- 28:04जीस मन के कारण तुम आज तक वे दुखी हो उसका हल तुम्हें मिल नहीं पाया
- 28:09तो किसी मनहूस शिक्षण में किसी मूड?
- 28:17मार्गदर्शक ने तुम्हें कहा होगा इसके साक्षी बने रहो नहीं, इसके
- 28:22साक्षी मत बने रहो इसके साक्षी बनने का अर्थ इसकी गति को शक्ति
- 28:30देना है क्योंकि तुम हो चेतना। और चेतना की यह डिमांड करता है
- 28:37विचारों को चलने के लिए चेतना चाहिए साइकिल को चलने के लिए
- 28:44पैडलों की शक्ति चाहिए विचारों को चलने के लिए चेतना की शक्ति
- 28:51चाहिए। और तुम हो चेतना तुम अगर इसकी
- 28:56तरफ़ देखोगे इसके साक्षी बनोगे तो इसको चेतना की शक्ति तुम दोगे तो
- 29:03फिर ये तुम प्रश्न मेरे से मत करना के मन भटकता है।
- 29:12मन भटकेगा। तुम इसके साक्षी हुए तो मन
- 29:17भटकेगा। तुम इसकी तरफ देखे तो विचार चेतन
- 29:25हो गए। विचारों को चलने में मदद की
- 29:30तुमने। अब ये बड़ा उल्टा लगेगा तुम्हें
- 29:33क्योंकि श्रद्धा की तरह गुरु ने तो तुम्हें यही समझाया इसका करो
- 29:39कहाँ जाता है, कहाँ जाएगा वही विचार कहाँ जाएगा जब जाओगे तुम
- 29:45जाओगे इसको पीछे ये तुम्हें कहीं नहीं लेके जाता।
- 29:51यह चलती भर्ती तरंगे मात्र ये कहाँ जाएंगे?
- 29:56तुम्हारे बिना तुम ही इसको कहीं लेके जाओगे इसके पीछे लग के इसकी
- 30:05कोई औकात नहीं है नहीं जो सिखाया उसे भूल जा।
- 30:11ये गलत सिखाया किन्हीं मनहूद शिक्षणों में किन्हीं मूड लोगों
- 30:16ने ये सिखाया तुम्हें के मन को देखो, अनवरत देखो, नहीं देखो भाई,
- 30:25देखने से ही इसकी शक्ति बढ़ती। जैसे सूरज के उगने से तुम्हें
- 30:32प्रकाश होता हो, मन ठहर जाएगा, निर्जीव हो जाएगा, यह निर्जीव तो
- 30:42सदा से है, तुम इनमें अपने प्राणों की शक्ति को सींचते हो।
- 30:50और यह तुम्हें भटक आता है तुम्हारे से ही शक्ति लेकर
- 30:56तुम्हारे ही आनंद तथा मौन की शांति को समाप्त करता है।
- 31:02हमने ही अपने खून से बक्सा गोलों को रंग।
- 31:06हम ही शरीर के जश्न बहारा न हो सके।
- 31:10थैरी 1 मिनट हाँ जी सूक्ष्म का प्रश्न है, बड़ा सुन्दर है।
- 31:22जी कहते हैं अगर मन को शक्ति न देंगे तो काम कैसे करेंगे?
- 31:27मन को शक्ति देना तो आवश्यक है अन्यथा फिर मन काम कैसे करेगा हाथ
- 31:35पांव कैसे लाएगा दिनचर्या, कैसे करेगा अपना काम धाम कैसे करेगा
- 31:40व्यापार का ऑफिस का ठहरों तुम गलत समझ गए।
- 31:47मैं तुम्हें ध्यान की यात्रा बता रहा हूँ।
- 31:51जब तुम ध्यान में बैठो तो तुम ऐसा करो, मैं तुम्हें संसार में विचरण
- 31:57करने का फार्मूला नहीं ले रहा हूँ।
- 32:00समझना इसको मैं वाइफ पर किड करता हूँ जो पहली बात मैंने कही।
- 32:05वो जब तुम ध्यान में बैठो तो ऐसा करो, मन नहीं भटकेगा, थोड़ी देर
- 32:11भटकेगा, भटकने का, इसके पीछे मत चलो, इसको समझाओ बुझाओ न ठहर
- 32:17जायेगा। मन को ठहराने का एक फॉर्मूला है,
- 32:20लेकिन मन को ठहराने का फॉर्मूला है।
- 32:24संसार में मन ठहरे से बात नहीं बनेगी, संसार में तो तुम्हें मन
- 32:29से काम लेना होगा, बुद्धि को जलाना होगा, कुछ याद करना होगा,
- 32:38कुछ समझना होगा, कुछ पूछना होगा, यह तो मन की आवश्यकता है।
- 32:45तो मैंने ये बात बताई अपने अंत में जाने के लिए उस परमात्मातत्व
- 32:51तक पहुंचने के लिए उस आत्मातत्व तक पहुंचने के लिए मैंने सिंसार
- 32:55की बात यहाँ नहीं की तुमने फिर भी सिंसार को बीच में फंसा लिया तो
- 33:00मैं इसका जवाब देता हूँ। चलो हम इसको दो हिस्सों में बांट
- 33:04लेते हैं, ये जो मैंने पहले कहा यह तो उस अवस्था के लिए है जब तुम
- 33:12सब कामों से मुक्त होकर ध्यान में बैठते हो तो तुम्हारा मन भटकता
- 33:15है। तुम्हारा सभी का प्रश्न भी यही
- 33:18था। अब तुमने एक नया प्रश्न भी दिया,
- 33:23इसका जवाब भी मैं दे दूंगी। ये बिल्कुल सही वक्त पे किया हुआ
- 33:26सही प्रश्न है तो फिर क्या संसार में भी ऐसा करें?
- 33:30नहीं, संसार में ऐसा करोगे तो तुम निद्रा में चले जाओगे।
- 33:37ये सिर्फ अपने अंतर में जाने के लिए एक फॉर्मूला और राम वाण मंत्र
- 33:48तुम जो कहते हो मन जाता नहीं भीतर मन रुलाता है।
- 33:52मन सुझाव देता है मन भटकता है। उसके लिए ये फॉर्मूला अगर तुम ये
- 34:00कहते हो कि संसार में अगर मन को शक्ति न दे फिर क्या संसार में तो
- 34:05भाई मन को शक्ति देनी पड़ेगी, कंप्यूटर चलाना है, मन को शक्ति
- 34:11देनी पड़ेगी। ये दो आयाम है, तुम समझो दो इस
- 34:14बात को। तुम दोनों को यक मिक्क कर देते
- 34:17हो, यही तो चुनौती तुम खिचड़ी बना देते हो, हर चीज़ का अन्नकूट बना
- 34:23देते हो और फिर अन्नकूट ला के संतों के माथे में ठोंकते हो कि
- 34:28दो इसका जवाब अन्नकूट का जवाब कहते हैं।
- 34:33सब कुछ बीच में मिला दिया मूली इसमें बैंगन इसमें प्याज इसमें
- 34:38पकौड़ा इसमें बेसन इसमें लस्सी इसमें सब मिला दिला दिया देगी
- 34:47मर्ज़ी इसमें ठोक दी नु नमक इसमें डाल दिया पालक किसमें?
- 34:53क्या कुछ नहीं है इसमें डाला तुमने और सारा इकठ्ठा करके
- 34:56अन्नकूट बना दिया और फिर गुरु के माथे मर दिए।
- 34:59दो जवाब इसको इसका जवाब नहीं होगा।
- 35:02अन्नकूट का कही कोई जवाब होता है संसार और स्वय।
- 35:13यह फॉर्मूला था सुबह तक पहुंचने का।
- 35:16अब इसको यहीं पर छोड़ दो। अब संसार में आ जाओ।
- 35:20संसार में जाने के लिए से बिलकुल उलट काम करेगा क्या जब तुम रात को
- 35:30नींद से जगे फ्रेश उठे? तो तुम बिलकुल उनिद्रवस्था में
- 35:36हो, तुम्हारा शरीर ठीक से काम भी नहीं करता, धीरे धीरे शरीर में
- 35:41जान आएगी, तुम रोज़मर्रा के काम करने शुरू कर दो फिर तो शक्ति
- 35:46देनी पड़ेगी सभी यंत्रों को अन्यथा ये काम कैसे करेंगे?
- 35:50कैसे कंप्यूटर चलाएंगे? कैसे दौड़ लगाएंगे, कैसे दुकान को
- 35:56खोलेंगे, कैसे झाड़ू भारी पूजा करेंगे, कैसे खाना बनाएंगे नहीं,
- 36:02फिर ये कुछ नहीं कर सकेंगे। संसार की बातों को संसार तक ही
- 36:06सीमित रहने को तुम खिचड़ी खुद बनाते हो।
- 36:10और खिचड़ी का कोई जवाब नहीं होता। जवाब होता है एक एक चीज़ का
- 36:17परमात्मा तक जाने के लिए वह फार्मूला जो मैंने बताया उसको याद
- 36:21रख लो। आप अब दूसरे प्रश्न का जवाब संसार
- 36:24में क्या करें? संसार में मन को शक्ति दो।
- 36:32वहाँ मन से पूरी शक्ति खींच लो और जहाँ मन में पूरी शक्ति रेल दो
- 36:38इनसर्ट यूरसेल्फ़ कंप्लीट्ली नहीं बोला मैंने ये दो रास्ते आ गए।
- 36:48संसार में जब तुम हो, काम कर रहे हो, इन्सर्ट यूरसेल्फ़ कंप्लीट्ली
- 36:58दूसरा संसार आ गया बड़ी, बेहतर, बड़ी शुद्धतम तरीके से।
- 37:08बिना किसी गलती के तुम काम कर सकोगे।
- 37:13संसार में कोई गलती नहीं होगी उससे क्योंकि तुम्हारी सारी शक्ति
- 37:20उस काम के भीतर लगी हुई है। इसलिए जो परिणाम उस वक्त काम करने
- 37:27में आएगा जब तुम कंप्लीट्ली उसमें डिसोलवे हो जाओगे, अपने आपको झोंक
- 37:34दोगे तो उससे बेहतर परिणाम कभी नहीं आएगा, ये सेंसर की बात है।
- 37:43वह परमात्मा की बात है, दोनों बातों को फिर अलग से समझो उसमें
- 37:47टोटली तुमने अपनी शक्ति को खेच लेना है, विचार मुर्दा है
- 37:57तुम्हारी शक्ति खींचने से मुर्दा हो जाएगा सायकल।
- 38:00जीसको थोड़ी सी शक्ति मिली हुई थी, वो गिर जाएगा, तुम्हारे विचार
- 38:04गिर जाएंगे और तुम निर्विचार अवस्था में पहुँच जाओगे।
- 38:09ये तो था अपने भीतर जाने के लिए फॉर्मूला अब बाहर आने के लिए
- 38:13फॉर्मूला समझ लो। वहाँ से शक्ति पूरी खींची थी यहाँ
- 38:19पर पूरी शक्ति उडेल दो बिल्कुल उलट क्योंकि संसार और परमात्मा
- 38:27विरोधी धुरों पर हैं। दोनों एक साउथ के छोर पे है जैसे
- 38:32दो धागे के दो छोर हुए। एक साउथ में है, एक नॉर्थ में है
- 38:40यह दूसरा छोर है। वहाँ से सारी शक्ति खींची यहाँ पर
- 38:45सारी शक्ति लगा दो, झोंक दो कंप्लीटली ज़रा भी ना बचे 100
- 38:52डिग्री पे आ जाए फिर तुम उभल जाओगे।
- 39:00ऐसी नक्षणात हो जाओगे तुम इतनी प्रवीणता से तुम्हारे काम
- 39:05निपटेंगे और इतनी शुद्धतम सटीकता के साथ परिणाम आएँगे कि तुमने कभी
- 39:12सोचा ही नहीं होगा। अगर तुमने अपनी पूर्ण शक्ति को
- 39:17इसमें झोंक दिया काम में, सिनसार में तो सटीक परिणाम है, बिना किसी
- 39:23गलती के शुद्धतम अवस्था में परिणाम है, लेकिन तुम्हारा तुम तो
- 39:34मन को। कई डायमेंशन्स में फैला देते हो
- 39:41इधर भी देखो, उधर भी देखो अपनी दुकान पे ग्राहक उन्हें भी अटेंड
- 39:46करो सामने तुम्हारे दुश्मन की दुकानें वहाँ भी देखो वहाँ ग्राहक
- 39:51ज्यादातर नहीं आगे। फिर क्या करोगे भाई ज्यादा आगे तो
- 39:55रहो बढ़ोगे जलने की सेवा तुम्हारे पास रास्ता है।
- 40:03इधर सेवकों से भी देखो नौकर चाकरों पर भी ख्याल रखो, क्या हो
- 40:08रहा है? क्या नहीं हो रहा है तुम अपनी
- 40:11शक्ति को सारे डायमेंशन में फैला देते हो।
- 40:14यही है घुम्मन गेरी जिनको चक्करवाड़ा कहते है इस संसार का
- 40:21चक्करवाड़ा है यहाँ भी फंसो वहाँ भी फंसो यहाँ भी फंसो सभी
- 40:27डाइमेंशन में अपनी शक्ति को ढेल दो नहीं यहाँ भी तुम गलत हो।
- 40:33वहाँ भी गलत है जहाँ भी गलत हो, संसार भी तुम्हें ठीक से चलाना
- 40:38नहीं आता। वहाँ से पूरी शक्ति को खींचना है
- 40:43और यहाँ पूरी शक्ति को झोंकना है। काम करते वक्त अपनी पूरी शक्ति को
- 40:49झोंक लो। पूरी शक्ति को इन व्यस्त कर दो।
- 40:54इस स्वयं सर देखो परिणाम कितना बेहतर आता है।
- 41:00जो काम तुम 8 घंटे में खत्म करते हो वो काम तुम 4 घंटे में बढ़िया
- 41:05ढंग से खत्म कर दोगे। शुद्ध एकदम बढ़िया परिणाम आयेंगे
- 41:10इसके। अब दोनों चीजों का मैंने बता दिया
- 41:16परमात्मा में जाना हो, शक्ति पूरी खींच लो, मंच से इसके पीछे मत
- 41:21लगो, इसको सुझाव मत दो। इससे लड़ो मत और अगर संसार में
- 41:26आना है तो पूरी की पूरी शक्ति अपने काम में झोंक दो।
- 41:32फिर कहीं भटको मत एक स्थान पर जैसे कुंड सेंट्रेशन होता है।
- 41:37कॉन्वेक्स रेंस सूरज की आगे करें और एक बिंदु बन जाता है धूप का और
- 41:47वह आग लगा देता है पेपर को। बस ऐसे हो जाओ तुम ऐसी
- 41:52कॉन्सेंट्रेशन में आ जाओ, आग लग जाए पेपर को इतनी एकाग्रता हो काम
- 42:00में इतनी व्यस्तता हो कि तुम खो जाओ, फिर न तुम बचो।
- 42:10न सामने कोई बचे बचे तो सिर्फ काम बचे, कर्म बचे न देखने वाला बचे न
- 42:24करने वाला बचे, कर्म बचे नाचो। तो नाचने वाला ना बचे देखने वाला,
- 42:35ना बचे नृत्य बचे नृत्य बचे, नाच बचे, कर्म बचे ना करता बचे ना
- 42:47साक्षी बचे। बड़ी परोटे पास लगेंगी तुमने यहाँ
- 42:52भी ज़रा आज वहाँ दे दो करने वाला ना बचे देखने वाला भी ना बचे कर्म
- 43:01बचे कर्म बचे सिर्फ कर्म बचे। फिर तुम देखो कितनी दक्षता, कितनी
- 43:10निष्पक्षता और कितना सुंदर परिणाम आता है।
- 43:15इसे आजमा कर देखो जब तुमने इस शिक्षण में होना है।
- 43:28जिन क्षणों को तुम कहते हो बिलकुल वेहिल में आये हुए हैं तुम खाली
- 43:39हो कुछ नहीं कर रहे फुर्सत के क्षण।
- 43:46उनको ध्यान के लिए प्रयोग करो और जब तुम अपनी शक्ति को लगाते हो वो
- 43:54फुर्सत के क्षण नहीं है। वो तुम्हारी व्यस्तता के क्षण हैं
- 44:00और जब तुम व्यस्तता के क्षण में आओगे तो अपनी पूरी शक्ति को झोंक
- 44:04दो। व्यस्त हो तो पूरा हो जाओ ए
- 44:08व्यस्त हो तो भी पूरा हो जाओ, दोनों का सार एक टोटली हो जाओ ए
- 44:14व्यस्त हो जाओ तो टोटली हो जाओ, व्यस्त हो जाओ तो टोटली हो जाओ,
- 44:19फिर देखना परिणाम कितना सुंदर आएगा?
- 44:24श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हीनाथ नारायण वासुदेव।
- 44:44श्री कृष्ण। गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण
- 44:59वासुदेव। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी ए
- 45:06नाथ नारायण वासुदेव पितुमात स्वामी सखा।
- 45:15हमारे। पितुमात स्वामी सखामारे हेनाथ
- 45:26नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण गोबिंद हरे मुरारी हे नाथ?
- 45:38नारायण व सुरे।