Latest / Baba ji Vijay Vats / 23 Aug 25 - अंगूठा लगाने से मुक्त हो जाएंगे? यह बात हजम नहीं होती |अगर श्रद्धा नहीं | कल्याण का अर्थ?
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- 0:02प्रणाम बाबा जी छोटे छोटे दो तीन प्रश्न पहला प्रश्न राकेश बेदी।
- 0:22आपने अपनी बायोग्राफी में ट्रेन इंसिडेंट की बात की, इसके बाद
- 0:29आपका जीवन पलट किया। कृपया समझाने की चेष्टा करें।
- 0:4917080 किलो व्यक्ति को कोई कैसे नीचे से उठा के?
- 1:06गाड़ी के प्लेटफार्म के भीतर पटक दिया और आप कहते हैं कि सूक्ष्म
- 1:15शरीर सथुर शरीर के बिना कोई काम नहीं कर सकता है।
- 1:26जब सूक्ष्म शरीर सतहुल शरीर के बिना कोई काम नहीं कर सकता हूँ तो
- 1:32चलती गाड़ी में 7080 किलो वजन आपको कैसे?
- 1:40उसने? बिना सोल देह के गाड़ी के
- 1:47प्लेटफार्म के भीतर पटक दिया। एक इंस्पेक्टर बच्चों के स्कूल
- 1:58में गया था बच्चों एक प्रश्न पूछुंगा अगर उसका जवाब दे दिया तो
- 2:10आपको अगली कक्षा में बैठा दूंगा। एक ही प्रश्न पूछुंगा सुबह
- 2:20कलकत्ता से चला हूँ, दिल्ली पहुंचा हूँ।
- 2:25एक घंटा लग गया वायुजान को कलकत्ता से दिल्ली आने में बताओ
- 2:39मेरी उम्र कितनी है? मैच चला था सुबह कलकत्ता से भाई
- 2:50जान कर बैठ कर ऐरोप्लेन 1 घंटे में जहाँ पर पहुँच गया।
- 2:59तो बताओ बच्चों मेरी उम्र किसी बच्चे को सवाल समझ नहीं आया।
- 3:08आखिर मेरा छोटा बच्चा उठा उसने हाथ उठा लिए थे, मैं जानता हूँ
- 3:17उसका जो। बताओ बेटा शावच तो मैं अगली क्लास
- 3:27में बैठा दूंगा। तुम्हारी उम्र कितनी है?
- 3:43बच्चा बोला 48 साल बिल्कुल उस इंस्पेक्टर की उम्र थी 48 साल
- 3:53इलाक्षक, अब टीचर भी हैरान इतना टूटा मीठा स्वर बच्चे से पूछ लिया
- 4:03और बच्चे ने जवाब भी सही दे दिया। ये तो मुझे भी नहीं आता।
- 4:09मैथ्स की क्लास चल रही थी। क्यों?
- 4:16इंस्पेक्टर बड़ा खुश हूँ, बिल्कुल सत्य है।
- 4:20पुत्र 48 वर्ष का में हूँ, लेकिन मुझे समझ नहीं आया कि तुमने यह
- 4:29प्रश्न सवाल अब कैसे किया? बच्चा बोला।
- 4:35मेरा एक बड़ा भाई है, उसकी उम्र 24 वर्ष है और वह आधा पागल है।
- 4:51इंस्पेक्टर साहब, आप पूरे पागल 24 उन 48।
- 5:02इतने बरस हो गए मुझे सुनते सूक्ष्म शरीर के पास सोल शरीर के
- 5:10बिना काम करने को कुछ यंत्र नहीं होता।
- 5:15तो कैसे किया होगा ये प्रश्न कल पूछा था मुझे आपके काम का है,
- 5:24आपको बता दूँ? बहुत से लोगों ने ये प्रश्न मन ही
- 5:28मन किया होगा, महसूस के रह गए होंगे।
- 5:35जबकि मैं किसी को ये नहीं कहता कि प्रश्न ना पूछ मैं कहता हूँ वे तू
- 5:41के प्रश्न ना पूछ जिससे तुम्हारी ज़िन्दगी का वलस ना खेले ना हो ना
- 5:50पूछो। दो और दो चार होते हैं 2*2 चार
- 5:58होते हैं अगर ये जान भी लिया तो क्या तुम्हारे हृदय में गुलस्थान?
- 6:10अपनी सुगंधी फैलाने लगेगा। नहीं तो ऐसे प्रश्न पूछो जिससे
- 6:17तुम्हारे हृदय में संतोष हो जाए, अतः प्रेम जग जाए, इन मान्यताओं
- 6:28में उरझे हुए हों? अपनी ही खबर देते रहो इतना बोला
- 6:39लेकिन तुमने सुना कौन? मैंने फ़िल्म उदाहरण दिया ये
- 6:50बताओ। यहाँ से चंद्रयान तीन चंद्रमा पे
- 6:59गया उसका वजन कितना था मैं बता देता हूँ 37 क्विंटल के आसपास,
- 7:083700 किलोग्राम और मेरा वजन 7080 किलोग्राम।
- 7:16और चंद्रयानतीन को यहाँ पर बैठे हुए साइंटिस्ट रिमोट रेंज के
- 7:22द्वारा जहाँ चाहे मोड़ देते हैं, जहाँ चाहे अलग कर देते हैं, जहाँ
- 7:27चाहे जोड़ देते हैं जहाँ चाहे रिवॉल्व करने लग जाते हैं।
- 7:32और जहाँ चाहे धरती के ऊपर उतार देते हैं, यह कैसा सूक्षम शरीर और
- 7:45कैसा स्त्रोत? जो परमात्मा ने करना है उसके लिए
- 7:52फूल शरीर की आवश्यकता क्या है? रेंज इज़ सुफ्फिसिएंट तो यहाँ से
- 8:02रेंज वैज्ञानिक ने फेंकी चंद्रमा, तीन के ऊपर।
- 8:08और जैसा चाहा वैसा हो गया। चंद्रयान खुल गया, चंद्रयान घूमने
- 8:15लगा और वैजन था 3700 किलो और फिर चंद्रयान उतर गया।
- 8:27और हम सभी ने लाइव देखा कौन सा स्थूल शरीर था यहाँ जो यहाँ से ले
- 8:43के गया? चंद्रयान तीन को और कौन सा
- 8:48सूक्ष्म शरीर था यहाँ जीसको स्थूल शरीर की आवश्यकता थी।
- 8:54परमात्मा की बात हो रही है। तुम शरीरों के पचड़े में पड़े हो,
- 9:09कहाँ बात जहाज की, कलकत्ता से दिल्ली आने की और कहाँ बात उम्र
- 9:14की, ये दोनों मेल नहीं करते। मैंने कहा किसी अज्ञात शक्ति में
- 9:23तो चंद्रयान के लिए तो वो अज्ञात शक्ति ही होगी ना जो रेंजेस के
- 9:30द्वारा यहाँ से रिमोट के द्वारा कंट्रोल की गई।
- 9:36तुम बातों को बतंगड़ बनाने में दक्ष हो बात पर मौसम की होती है
- 9:48कितने भारी सूरज चाँद गर्म पाक का गोला।
- 9:52कैसे उसने फिक्स किया होगा? आकाश में कल को तुम ये भी प्रश्न
- 9:59पूछ सकते हो कि उसके हाथ नहीं चले और बिना स्थूल शरीर के तो
- 10:07परमात्मा अड्जस्ट ही नहीं कर पाता नहीं।
- 10:12हम यही गलती में संकल्प मात्रा से ही सब कुछ हो जाता है और परमात्मा
- 10:19को कहीं जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
- 10:22यहाँ बैठे बैठे सब कंट्रोल कर लेता है वह ध्यान रखना।
- 10:27वह कण कण में मौजूद है। उसका रिमोट हर जगह है।
- 10:33मैं तुमसे पूछता हूँ जो आज तुम्हारे मित्र अविद्या का साया
- 10:48छाया हुआ है अगर? चंद्रयान तीन में चेत न आ जाए और
- 11:02वह ये सोचे कि ये सारा रिवॉल्व दो पोरशन में अलग हो जाना ये घूमना
- 11:11इस धरती पे चाँद के उतरना मैं कर रहा हूँ तो ठीक होगा या कल तो?
- 11:21बस ऐसी ही तुम्हारी स्थिति है, तुम कहते हो मैं करता हूँ और संत
- 11:32कौन अगर चंद्रयान तीन में चेतना आ जाए।
- 11:38और वह उस रिमोट कंट्रोल की उँगलियों को देख ले जो धरती से
- 11:44चंद्रयान तीन को कंट्रोल कर रहा है तो उसका भ्रमट जाएगा कि मैं
- 11:50करता हूँ मैंने अपने दो हिस्से कर लिए हैं।
- 11:57मैं घूमा, मैं धरती पे उतरा तभी तक सटीक थे जब तक तुम्हें वो
- 12:09अदृश्य हाथ दिखाई नहीं पड़े। और संत इसी को कहते हैं जैसे
- 12:19चंद्रयान देख ले उस रिमोट कंट्रोल के हाथों को जहाँ से वो रिमोट
- 12:26कंट्रोल कर रहा है, सारे विश्व तो वह संत हो जाएगा।
- 12:36तुम भी एक जानता हो बोलो मत और तुम भी शायद ये सोच रही होगी की
- 12:42प्रश्न मैंने उठाया तुम गलती में हो।
- 12:51और इसी भ्रम का नाश करने के लिए संत अवतरित होते हैं।
- 12:59तुम मैं की अग्नि में जलते हो के मैं करता हूँ इसलिए संतों ने कहा
- 13:07संत न होते जगत में तो जल मरता संसार।
- 13:12अहंकार की आग तुम्हें लेट बैठ, राख भी ना बचेगी।
- 13:22अभी विद्या ऐसा जहर है, हर पल तुम्हें भटकाता है।
- 13:31प्रश्न सुनता है अगला प्रश्न दे ओशो क्यों कह गए के मेरे जाने के
- 13:49बाद परमात्मा तक पहुँचने की मेरी सब गतियाँ?
- 13:55बेकार हो जाएंगे और आप कैसे धड़ल्ले से कह सकते हो कि ओशो का
- 14:05कोई अनुयायी उस स्तर पर नहीं पहुँच पाएगा?
- 14:13और इतने संकल्प से कह देते हो कि हमारा अंत से हिल जाता है।
- 14:18हम अवशों के सुन्न से सुनिए जैसे एक एटोमिक थर्मल पावर प्लांट।
- 14:32ये बात कह दे कि मेरे जाने के बाद जहाँ जहाँ इसकी सप्लाई होती है,
- 14:40तुम्हारे सभी यंत्र चाहे पंखा हो, बिजली हो, एसी हो, पंप हो, मोटर
- 14:48हो। इलेक्ट्रिक कार हो मेरे जाने के
- 14:57बाद सब ठहर जाएगा तो क्या वो गलत बोलता है?
- 15:05एटामिक पावर प्लांट करके है कि मेरे जाने के बाद।
- 15:10तुम्हारे सारे इन्स्ट्रुमेंट ठहर जाएंगे और पल भर के लिए भी नहीं
- 15:13चलेंगे तो क्या गलत कहा? उसने या ठीक कहा बिलकुल ठीक कहा
- 15:22लेकिन तुम्हें बाचेगा पोंषों के शब्द को वहीं बाचेगा जो उस तल पर
- 15:30पहुंचा और ओशु से आगे भी तल है। मैंने आपको बताया वो कृष्ण का तल
- 15:39है। ओशु कहते हैं, मेरे जाने के बाद
- 15:46क्योंकि एक पावर प्लांट था एटोमिक पावर प्लांट।
- 15:50तुमने वहाँ से कनेक्शन ले रखा था या उन्होंने कनेक्शन दे रखा था?
- 15:57ओशो पे जाने के बाद तुम्हारी सब पद्धतियां तुम्हारे सभी प्रयास
- 16:08सभी रास्ते। बंद हो जाएंगे, कोई काम नहीं
- 16:15करेगा क्यों? क्योंकि जहाँ से शक्ति आती थी वो
- 16:22गया लेकिन तुम अज्ञानी हो। उसने संघ में एक और भी बात कही नए
- 16:34पावर प्लांट को खोज लेना तुमने उसों के सारे ग्रंथ पढ़ लिए,
- 16:43लेकिन माटी कर दिया। वह तो सत्य बोल गया और ज्ञानी कभी
- 16:50झूठ नहीं बोल था, लेकिन तुमने उसे पढ़ा था नसीरुद्दीन के चुटकीले
- 16:59सुन लिए मन बहला लिया कुछ बातें जो तुम्हें समझ आई वो समझ ली ये
- 17:04जानते हुए भी। बार बार वो कहते हैं, समझा नहीं
- 17:08जाता नहीं आता, तुम्हारी छोटी बुद्धि में गागर में सागर समाता
- 17:14नहीं, लेकिन फिर तुम शो की उन्हीं बातों को।
- 17:24पर मैं धड़ल्ले से इसलिए कहता हूँ की मुझे पता है जैसे राकेश ने
- 17:31मुझसे प्रश्न पूछ लिया और अगर मैं तिरोहित हो गया होता तो ये प्रश्न
- 17:39उसके दिमाग में गुज रहा होता। कौन हल करता?
- 17:43जीवंत गुरु ने हल किया ना आप दूसरी बात को समझ पाते हो?
- 17:52मैंने किसी डेरे के अनुयायी से कहा मैं खास व्यक्ति था, मुझे तरस
- 18:00आया। जैसे विवेकानंद को तरसागत और
- 18:03पंडित के ऊपर तू छोड़ दे 35 वर्ष हो गए तेरे किए से कुछ नहीं होगा,
- 18:20तेरे किसी प्रयास से नहीं होगा। ज़ोर न जोगती छोटा संसार तुम्हारी
- 18:27किसी युक्ति में विज्ञान भैरव तंत्र की 112 विधियों में कोई
- 18:33ज़ोर नहीं देयर अनेबल कि तुम्हें संसार से मुक्त करते हैं, संसार
- 18:42या निर्भ्रम। तुम्हें ब्रह्म से मुक्ति दे दे
- 18:47तुम्हारी कोई युक्ति में इतना दम नहीं है ज़ोर नजुक्ति छूट है
- 18:52संसार उसको तो ठीक है। लेकिन जो लोग आज संस्था के
- 19:08अधिकारी बने बैठे हैं, वो उनके साहित्य को बेच देंगे, धन इकट्ठा
- 19:21कर लेंगे, पदवी इकट्ठी कर लेंगे, जमीन जायदाद इकट्ठी कर लेंगे।
- 19:25लेकिन संग लेके जाएंगे। इसी भ्रम ने तो दुनिया उजाड़ दी।
- 19:40इसी भ्रम ने तो खाद के बड़े बड़े वीग जमानेनमार जमा कैसे?
- 20:00कैसे? जमाने में मारे जमा कैसे कैसे
- 20:16जमीं खा गई आसमान? कैसे कैसे जवान ने मार जमा कैसे
- 20:35कर जमीन खा गई? आसमान कैसे कैसे जमीन।
- 20:49खा गई आसमान कैसे कैसे तुम्हारा ये अज्ञान कितने कितने बड़े वीरों
- 20:56को खा गया निकल गया महावीर को किताब ऐसे ही नहीं मिला।
- 21:04नाम उनका वर्धमान था। उपाधि थी उनकी महावीर तो शो,
- 21:12इसलिए क्या कहते हैं? ऐसे लोग ईमानदार होते हैं।
- 21:20जो उस स्तर पर पहुँच गया नवदया सेल्फ जिसने खुद ही जान लिया।
- 21:28मैं झूठ नहीं बोल सकता, ईमानदारी से बता दे लेकिन तुमने माना कहा।
- 21:39तो उस डेरे वाली व्यक्ति ने जवाब दिया बाबा सारी बीत गई, कुछ पल
- 21:45बाकी रह गए, अब ये भी आजमा लेने दो बाबा आएँगे मेरी ऊँगली पकड़ के
- 21:53सच खंड ले जाएंगे मैंने कहा हाँ। तुम ये जन्म देख ही लो है जन्म
- 22:01तुम्हारे लेखे तुम मूर्खों के लेखे ये पूरा जन्म लगा दो जब भटक
- 22:09लिए हो 35 वर्ष कोई कम नहीं होता मेरे प्रिय हो मेरा फर्ज बनता है
- 22:17तुम्हें कहने का। यह श्री कृष्ण का फर्ज बना अर्जुन
- 22:21को कहने का देख तू भाग मत तू युद्ध कर मुझे स्मरण कर देख मैं
- 22:29कौन हूँ मेरा विराट देख महामानु समर युद्ध च युद्ध में कुछ।
- 22:38ओशो ने तो ठीक कहा ये जो कब्जा किए बैठे हैं, कौन है?
- 22:43मैं जानता नहीं मैं कभी ओशो के पास गैप ही नहीं है।
- 22:47ओशो आश्रम मैंने देखा नहीं उन दिनों मैं खुद की साधना में
- 22:53व्यस्त हूँ। बाबा मुझे चला रहे थे।
- 22:57और मेरा पथ प्रदर्शक और कोई भी नहीं था ये तो मुझे बाद में बताया
- 23:06ओसु ने के इधर तुम संबोधि को प्राप्त हो रहे थे, पुत्र मैं
- 23:14अमेरिका में जिलों में। बंद किया जा रहा था।
- 23:18झुंझीरों में जकड़ते और बाद में हमने गणना की बिल्कुल वही वक्त
- 23:25निकला। 28 अक्टूबर 1985 यहाँ रात के 8:30
- 23:34बजे थे। 8.5 से करीब 2:00 बजे तक ये घटना
- 23:39घटी। इसी काल के भीतर वो कहीं जंजीरों
- 23:45से लपेटे गए होंगे। ओशो ने से लिखा जब जाग जाओ तभी
- 24:06सवेरा अतीत को भुला दो। भूल जा भूल जा जो चला गया उसे भूल
- 24:29जा। जो चला गया उसे भूल जा वो न सुन
- 24:41सके गा तेरी सजा जो चला गया। उसे भूल जा वो न सुन सकेगा तेरी
- 25:00सजा। जो?
- 25:02चला गया उसे भूल। जा।
- 25:10से भूल जा उसे। भूल जा जो 35 वर्ष का आदमी भटक भी
- 25:20तो जाता है छोड़ दे जब नहीं मिला 35 सालों में।
- 25:28ये कुछ साल बकाया बचे हैं। यही उसके लेखे लगा दे।
- 25:34लेकिन नहीं ये भ्रम है। 35 साल पुराना के लेखे तो लग गया
- 25:38जीवन ठीक है एक ही आज। कमेंट किसी ने पढ़ के सुनाया।
- 25:49देखिए मुझे कमेंट मत किया करें क्योंकि मैं पढ़ता नहीं हूँ,
- 25:53तुम्हारे मैसेज मैं पढ़ता नहीं देखता नहीं है मुझे अभी आँख का।
- 26:00ऑपरेट हुआ है। और देखता ना हूँ मैं तुम्हारे
- 26:03मैसेज पढ़ता नहीं हूँ, कोई पढ़ के बता देता है।
- 26:10तो सुखबीर सिंह नाम का कोई व्यक्ति मेरे से दीक्षित होगा।
- 26:14शायद बाबा ये बात समझ नहीं आती कि आप कैसे अंगूठा लगा दो और कैसे
- 26:25अमुक्त हो जाएंगे आपका अंगूठा लगाना?
- 26:31और मुक्त होने की गारंटी बाबा देते हैं।
- 26:33हमारे समझ में आती नहीं, गले से नीचे नहीं उतरती।
- 26:40आपको तीखे सवाल पसंद है इसलिए तीखा सवाल मैंने कर दिया, तू तो
- 26:47गया बेटा काम से? अब दीक्षा ली या ना ली, बराबर हो
- 26:53गया। पहला ही बात है श्रद्धा विश्वास
- 26:58रूप में तुम मुझे सुनो। पहले अभी तो मेरी वीडियो आती है
- 27:04तो स्किप कर देते हो। नहीं अच्छा लगता।
- 27:11जब तुम सुनोगे मुझे सुनते सुनते गुणोगे मुझे गूंदते गूंदते थोड़ा
- 27:17सरूर आएगा, हल्का मस्ती छलकेगी रंगत बिखरेगी खुशबूएं।
- 27:26फैलेंगे सुगंध का भाषा होगा आनंद झलके का भीतर से झरने उठेंगे,
- 27:34स्वर्ग की तरह पत चढ़ गया बसंत आई तो तुम्हें पता चलेगा हाँ कुछ
- 27:45होता है। तो मुझे नहीं पता ये व्यक्ति
- 27:50मुझसे दीक्षा दे के गया की नहीं, लेकिन इतना अगर दीक्षा ले गया तो
- 27:55क्या यह मुझे अपना शिष्य ना समझे क्यों?
- 28:02क्योंकि श्रद्धा ही तो शिष्य बनाती है।
- 28:07बाबा नानक ने कहा तू शिष्य हो जा, तू सीखने की श्रद्धापूर्वक कामना
- 28:15कर समर्पित हो जा, जब पहले ही मन में तुम्हारे ये हैं शंका आ गई।
- 28:24कैसे तुम अंगूठा लगा दोगे और कैसे मैं मुक्त हो जाऊंगा?
- 28:30इनमें कोई तालमेल लगता नहीं, बिल्कुल नहीं लगता, क्योंकि
- 28:36बुद्धि कभी तालमेल बढ़ा नहीं पाएगी।
- 28:39कितना ही तालमेल बढ़ाने की चेष्टा करें?
- 28:43ये तो पियकड़ों की महफिल है। यहाँ आकर जाम के दाम थोड़ी पूछे
- 28:50जाते हैं, यहाँ तो जाम को गटका जाता है और उसके सरूर को पिया
- 28:57जाता है। जिसने जाम का दाम पूछा, वह लिज
- 29:02किया। इसलिए बुद्धि बुद्धि कभी नहीं
- 29:05पहुँच पाएगी। हृदय थोड़ा थोड़ा पहुंचेगा।
- 29:11थोड़े थोड़े तर्क हैं, उसके भीतर घृणा है तो प्रेम भी है।
- 29:19शोक है तो। खुशी भी है, हर्ष भी है लेकिन
- 29:27पहुंचेगा कौन? जो अपने अंत तक पहुंचा।
- 29:34जो स्थिति प्रज्ञाता में स्थित हो गया उसने अपने आप को जान लिया।
- 29:42करना क्या है? यू हॅव टु डू नथिंग।
- 29:47मेरी दृष्टि में तुमने क्रिया योग किया नहीं होगा क्योंकि जिसने
- 29:53क्रिया योग कर दिया ये भीनी भीनी मिठास ये खुमारियाँ।
- 30:02ये हल्का, हल्का शुरू हर वक्त छाया रहता है।
- 30:12या तो दीक्षा मिली नहीं होगी या दीक्षा ले गया तो एक खेल खेल में
- 30:18दीक्षा ले गया तो चलो देखें। नहीं, कोई काम नहीं कर रहा, मन के
- 30:26हारे हार है, मन के जीते जीत मन के हारे हार है, मन के जीते जीत
- 30:38पारभ्रम को पाइए। मन ही की प्रतीत पारप्रम मिलता
- 30:46है, लेकिन आगाज करना पड़ता है सत्य को स्वीकार करना।
- 30:54हाँ मिल जाएगा ये भावना। तुम्हारा कल्याण करेगी।
- 31:03मारकस को कितने ही अंगूठे लगा दूँ।
- 31:05मैं रोज़ अंगूठा लगाता रहूँ या मुक्त नहीं होगा क्योंकि उसके
- 31:12भीतर वो रेंज जाएगी ही नहीं जो उसको रूपांतरित कर दे।
- 31:19और वह रूपांतरित नहीं होगा, वो वही मार्कस का मार्कस रहेगा, वह
- 31:27कम्युनिज्म का चाहने वाला, समानता का रक्षक।
- 31:38सब में बराबर बांट दो, कभी बराबर बँटा है, कभी बराबर बँटा है, न
- 31:47बंटेगा, न बंट सकता है क्योंकि कर्म तुम्हारे बराबर नहीं है।
- 31:59वो ही अन्न खा के एक व्यक्ति परमात्मा का उपदेश देता है, वो ही
- 32:07अन्न खा के एक व्यक्ति परमात्मा को गाली निकालता है।
- 32:10हैं तो शब्द ही। लेकिन भेद बड़ा है।
- 32:19तल्खी से सवाल तो पूछो लेकिन मूल के ऊपर प्रहार ना करो के जड़ों के
- 32:27ऊपर प्रहार कर दिया तो तुम्हारा पौधा धड़म से गिरेगा।
- 32:31वो कितना भी बड़ा वृक्ष क्यों न हो गया हो, अगर तुमने जड़ों के
- 32:36परवाह कर दिया तो तुम गए काम से बेटा मुझे नहीं पता यह व्यक्ति
- 32:44दीक्षित है या नहीं, लेकिन मैं इसे यही कहूंगा।
- 32:51कोई और ढूंढ ले, कोई और मुकाम ढूंढ ले और श्रद्धा बनाए रखना अगर
- 33:03श्रद्धा नहीं है तो कोई तुम्हें बाध्य नहीं करता, कोई तानाशाही
- 33:09नहीं दिखाएगा। कि तू श्रद्धा कर ही तो जो
- 33:13पहुंचना चाहते हैं, उनके लिए बोले संत अगर पहुंचना चाहता है
- 33:20श्रद्धा, विश्वास, रुपने या व्यायाम बिना ना पशमते कैसे किस
- 33:27मेरे पास आते ही रहते हैं। जीतने आज सब्सक्राइबर मेरे पास
- 33:33बोल रहे हैं, उसे दो गुना सब्सक्राइबर।
- 33:36मैंने अंगूठा लगा दिया, क्यों? क्योंकि ऐसे ही सवालों के कारण यह
- 33:44सीखना नहीं चाहता और कौन सीखना चाहता है?
- 33:51मरना कौन चाहता है? और ये तो बात मरने की है, यह बात
- 33:59ज़िन्दगी से तालुका रखती ही नहीं जैसी ज़िन्दगी तुम अब जी रहे हो,
- 34:05नहीं तो उस पार की ज़िन्दगी से संबंधित बात है।
- 34:11जहाँ आग नहीं बरसता, जहाँ अमृत बरसता है, यहाँ शंकाएं नहीं
- 34:17बरसतीं जहाँ श्रद्धा बरसती है तुमने प्रश्न तो ठीक पूछा बेटा?
- 34:28लेकिन फिर उसके पास जाना जिसके ऊपर श्रद्धा है और मैं वक्त तो
- 34:35तुम्हारा जाया भी नहीं करना चाहता करुणा वान इतना करना वान तो हूँ
- 34:41नहीं। कि अगर तुम्हारे में श्रद्धा नहीं
- 34:46है तो मैं तुम्हें ब्लॉक कर दूँ, कारण तुम हो, मैं नहीं हूँ
- 34:55क्योंकि तुम आए हो उस चर्म आनंद को पिन उस चर्म रस को पिन श्रद्धा
- 35:01के बिना। वो पड़ाव तय नहीं होता।
- 35:04मार्ग का पहला कदम भी नहीं उठाया जाता तो कैसे पहुंचोगे तुम दूर है
- 35:11मंजिल लंबा रास्ता अकेले चलना। दुःख झेलोगे कष्ट झेलोगे लेकिन
- 35:28गुरु के पर श्रद्धाना टूटे तुमने तो प्रथम बार जड़ पे ही कर दिया।
- 35:42और ध्यान रखना इन जड़ों से ही सिंचित हो के जाता है।
- 35:48सामान जो वृक्ष को फलीभूत करता है, जड़ों से ही हो के आता है।
- 35:54जड़ें पाताल में हैं, दिखती नहीं, श्रद्धा भी दिखती नहीं, विश्वास
- 36:00भी दिखता नहीं। लेकिन भीतर होता है अकेले ही चलने
- 36:10का रास्ता है चलोगे तो तुम लेकिन उस श्रद्धा को संघ लिए लिए चलोगे?
- 36:19अगर श्रद्धा का संघ नहीं लोगे तो मैं तुम्हारा वक्त जाया करने को
- 36:24नहीं हूँ। ना मैं तुम्हें भटकाना चाहता हूँ।
- 36:28मैं किसी को भी भटकाना नहीं चाहता।
- 36:32कौन चाहता है? फिर उनके पास जाओ जिनके जमावड़े
- 36:37ज्यादा हैं। जिनके पास बड़ों का झुंड है, मैं
- 36:43ईमानदार व्यक्ति हूँ। मैं तुम्हें बेईमानी सीखा न
- 36:46सकूंगा और अगर तुम बेईमानी करने की चेष्टा करोगे, मैं जड़ पे
- 36:52प्रहार करोगे तो मैं तुम्हें कहूंगा देखो भाई तुम्हारी प्यास
- 36:57अभी जगीन है तुम जो पानी मांगते हो अभी प्यासे नहीं है।
- 37:05तुम्हारा यहाँ से विदा हो जाना ही श्रेष्कर।
- 37:12तेरा कोई साथ न दे तो तू खुद से बीट जोड़ ले।
- 37:23तेरा कोई साथ ना दे तो तू खुद से पीठ जोड़ ले बिछौना धरती को करके
- 37:36अरे आकाश। ओढ़ ले।
- 37:41बिछौना धरती। को करके अरे आकाश ओढ़ रे यहाँ।
- 37:51कौन है वो इंसान यहाँ पर जिसने दुख न झेला?
- 38:04कौन है वो इंसान यहाँ पर जिसने दुख ना झेला चल?
- 38:14अकेला चल अकेला चल। अकेला?
- 38:25अकेले ही का रास्ता है संघ श्रद्धा का जो दिखती नहीं उसका
- 38:33तुम्हें पता है, लेकिन आज दिल की बात जुबां पे आ ही गई, आज आया ही
- 38:42करती है। फिर मुझसे ये मत पूछा करो बाबा
- 38:48सुन तो तुम अब भी सकते हो तुम्हें सुनने से तो मैं कभी रोक ही नहीं
- 38:53सकता तुम्हारे उपकार के लिए तुम्हारी भलाई के लिए मैं कहता
- 38:59हूँ देखो किसी और को तलाश। शायद किसी पे श्रद्धा बन जाए और
- 39:05तुम्हारा बेड़ा पार हो जाए, क्योंकि श्रद्धा विश्वास के बिना
- 39:10बेड़ा पार होता नहीं। मेरा विजय और राकेश वैद्य ने
- 39:14प्रश्न पूछा। और परमात्मा ने जो किया श्रद्धा
- 39:18उत्पन्न करने के लिए किया। कौन सा शक्ति है ऐसा जिसने मुझे
- 39:23उठा के भीतर पटक दिया? उस वक्त तो मैं शरीर ही था और
- 39:31सारा जुगाड़ हिल गया। भीतर का दिमाग सन्न रह गया।
- 39:38परमात्मा ने प्रथम सबक मुझे सिखाया, मैं तो खरगोश काट के आ
- 39:42रहा था, कोई पुणे कर मिनट, फिर उसने मुझे किस चीज़ का इनाम दिया
- 39:51तो उसकी बातें तो वो ही जाने। लाखों ही पंडित करोड़ों ही सयाने
- 39:57खुदा की बातें तो खुदा ही जाने, ये मुझे नहीं पता।
- 40:03कहते हैं बाबा के तुम पिछले जन्म में गाँधी थे, इतनी लिबरेशन तुमने
- 40:09बेड़ियां काटी, लोगों के उसके पुण्य स्वरूप फरेबोध हुए।
- 40:13और मैंने तुम्हारी भेड़िया काट दी, जैसे को तस लेकिन तुम मत
- 40:21मानना तुम्हें मानने को मैं कोई आग्रह नहीं कर रहा हूँ।
- 40:28मैं बोलता हूँ सिर्फ तुम ना सुनोगे, दीवारें सुनोगे?
- 40:34तुम ना सुनोगे, वातावरण सुनेगा, ये छत पी जाएगी या फर्श पी जाएगा,
- 40:41ये दीवारें पी जाएगी, ये इन्स्ट्रुमेंट पी जाएंगे, तुम ना
- 40:45सुनोगे, कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन तुम अपना बिगाड़ दोगे।
- 40:52और तुम्हारा ना बिगड़े इसलिए मैं तुम्हें ये कटु अल्फाज़ बोला करता
- 40:58हूँ जहाँ श्रद्धा हो जाए, वहीं टिके रहो।
- 41:10और श्रद्धा करके भी अगर तुम्हे ना मिले तो वहाँ गुरु की गलती है।
- 41:17वहाँ गुरु नकली है। यही तो गोविन्द सिंह के काल में
- 41:21हुआ और गुरु गोविन्द सिंह को इतना बड़ा फैसला लेना पड़ा।
- 41:26गुरु मान्यव ग्रंथ सब सिखन को कम है क्योंकि माखन शाह लुभाना जो
- 41:37मन्नत माने थे अगर वो शो कहते हैं।
- 41:48कि जिंदा जागृत को खोज लेना तो ऐसा ही नहीं कहते क्योंकि जब
- 41:57जिंदा जागृत व्यक्ति कहता है कि मैं चला जाऊंगा और मेरा सारा बोला
- 42:05कूड़ा कबाड़ बजाएगा। तो जिंदा बुद्ध वृक्ष को आप खोज
- 42:11लो, वही करेगा समस्याओं का हल शास्त्र कभी समस्याओं का हल करते
- 42:17हैं, शास्त्र तुम्हें दिलासा भी नहीं दे पाते, शास्त्र को तो
- 42:22पढ़ना पड़ता है शास्त्र बोलने से। इतना विचारा है शास्त्र तो उसे
- 42:32पता है मेरे जाने के बाद मैं गुरु, मैं गुरु, मैं गुरु, मैं
- 42:37गुरु जैसे माखन शाह लुबाना को। ये घटना फिर घटित न हो इसलिए उसने
- 42:48जड़ से काट दिया। मार्ग ले लो गुरु ग्रण साहब से और
- 42:54जहाँ जाना है वो तुम्हारे भीतर है, फिर जिंदा गुरु का कोई काम
- 43:00नहीं। ये दोनों वक्तव्य आपको अलग अलग
- 43:03जान पड़ेंगे, लेकिन हैं एक ही दोनों आपकी भलाई के लिए बोल रहे
- 43:09हैं। गुरु गोबिंद सिंह आपकी भलाई के
- 43:13लिए बोल रहे हैं कि जिंदा गुरु के कथन पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
- 43:20कृष्ण भी बोलते हैं लक्षण तुम देखते हैं उसका चरित्र कैसा क्या
- 43:28खाता, कहा जाता क्या करता, कैसे चलता, कैसे फिरता?
- 43:37इसकी आवाज के भीतर छिनकाट है भी कि नहीं?
- 43:43इसकी वाणी में ओज और धैर्य झलकता है कि नहीं, ये लक्षण नहीं।
- 43:49तुम जानते कोशिश भी नहीं करते। बस तुम्हारे परिवार ने कहीं से
- 43:56दीक्षा ले ली थी। तो चलो बेड़ों के समर में तुम भी
- 44:00दाखिल हो जाओ। ऐसे ही बेड़ों के बाड़े बड़ा करते
- 44:07हैं और कोई दूसरा कारण नहीं है। ओशो कहते हैं मेरे जाने के बाद
- 44:18जीवंत गुरु को तलाश लेना। ठीक कहते हैं, बिल्कुल ईमानदारी
- 44:22की बात क्योंकि वो जानते हैं कि मेरे जाने से पहले कोई एनलाइटन
- 44:31मैं छोड़ के नहीं चला हूँ गुरु देख लेता है।
- 44:38कि मेरे होने से कितने व्यक्ति हैं, हो सकते थे अगर वो जक तरफ़ा
- 44:43रहते मैं कल भी बोल रहा था पूर्व का ज्ञान था पूर्व की फलस्वी थी
- 44:55पूर्व का अनुभव था। पश्चिम की चरित्रता यहाँ लेके
- 44:59नहीं आनी थी पश्चिम का चरित्र पूर्व पर थोपने की कोशिश में उसको
- 45:09चूक गए, दोगले हो गए। खुद ही सेंसर से ग्रस्त हो गए।
- 45:18आजादी धूम इन्हें भोगने की या उस तल पर पहुंचा दूँ जहाँ ब्रह्मचर्य
- 45:25पारित होता है, खुद ही दोगले हो गए आखिर में लेकिन एक बात
- 45:31ईमानदारी की कर गई। नहीं मिलेगा शस्त्र से मेरे
- 45:36शस्त्र भी बेकार, मेरी विधियों भी बेकार क्योंकि जहाँ से मिल रही
- 45:40थीं आपको कनेक्शन एनर्जी वह थर्मल पावर प्लांट गया अब कहाँ से
- 45:48जागेगी तेरी रौशनी कहाँ चलेगा तेरा आई सी कहाँ चलेगा हीटर?
- 45:53कहाँ चलेगा पंखा कहाँ चलेगी लाइट कहाँ तेरा पानी का मोटर चलेगा,
- 46:00कहाँ पंप काम करेगा, कुछ नहीं काम करेगा, सब अँधेरा हो जाएगा
- 46:09तुम्हारे हित के लिए बोले और तुम्हारे हित के लिए ही मरे।
- 46:18लेकिन तुमने ना उनके जीवन से कुछ सीखा, ना उसके मरने से कुछ सीखा।
- 46:26ऐसे संस्कार किया करते हैं मिट्टी का तेल छिड़क कर।
- 46:36अंत बिदाई तुमने ऐसे देनी थी तो तुम धूर्त लोग थे, तुम ज्यादा
- 46:45अच्छे इंसानों में नहीं देने जाते।
- 46:47भगवान तो बड़ी दूर की बात है। जीते जी उसे भगवान कहते रहे
- 46:51होंगे, लेकिन जैसे ही उसने प्राण छोड़ दिए।
- 46:56किसी भी कारण से तुमने फौरन जल्दी से उसको मिटाना चाहा कि इसकी राख
- 47:01भी ना बचे, पोस्टमॉर्टम ना हो जाए, वेद खोल न जाए क्योंकि तुम
- 47:06समितियों के जो हम यहाँ कमा लेंगे, उसका साहित्य बेच के जो हम
- 47:11कमा लेंगे वह हमारे संग जाएगा। बस यही भ्रांति तो जमीं खा गई
- 47:16आसमान कैसी कैसी जो भी संभाल रहे हैं वो भी 1 दिन धड़प से गिर
- 47:27पड़ेंगे जो संध जायेगा वो तो न कमा पाये तुम।
- 47:32संघ जाएगा तुम्हारा आनंद, लुत्फ, लज्जत वही तुमने कमाई नहीं उसका
- 47:46लिटरेचर बीच बीच कर तुम धन कमा लोगे, सुमेरु पर्वत के अम्बार लगा
- 47:50दोगे लेकिन। एक तो न मिला सारी दुनिया।
- 48:11मिले भी तो क्या है? मेरा दिल ना खिला सारीबगियां खिले
- 48:30भी तो? क्या है एक तू ना मिला?
- 48:39यह तू यह बड़ा प्यारा शब्द है। तुझ से लिपटके।
- 48:48जो रो लेते हम तुझसे लिपटके जो रो लेते हम आंसू नहीं थे।
- 49:06ये मोती से काम 713 नहीं संग दुनिया।
- 49:25सले भी तो क्या है, एक तू ना मिला?
- 49:36काश एक घुट तू ने आनंद की भूँज तुमने पीली होता है।
- 49:47उस तू की बूँद तुने भी देखी हम भगवान को तू कहते हैं एक तू ही
- 49:55नरंकार और तू में इतना आदर छिपा है।
- 50:05हृदय की परम आवाज में तू आता है, माँ को हम तू कहते हैं तुम
- 50:15परमात्मा से मुखातिब होना है। हम अपने बच्चों को सिखाते हैं।
- 50:20नहीं बेटा शिष्टाचार सीखो, तू नहीं आप कहा करो तुमने उसके प्यार
- 50:26को मार दिया, तू शब्द में जितना ममत है, जितना बात शल्य है, आप
- 50:34में कहा। आप भी तो शिष्ट आचार्य है तुम्हें
- 50:41प्यार है तुम्हें बात शल्य है तुम्हें ममतव है, इसलिए हम भगवान
- 50:49को तुम कहते हैं, उस जन्मदात्री माता को तुम कहते हैं।
- 51:08तीसरा प्रश्न मैं कह रहा था मुझे मैसेज न किया करो क्योंकि मुझे
- 51:21आँखों से दिखता नहीं है। यह पढ़ने पत्र बहुत ही जरूरी हो
- 51:31तो वौइस् मैसेज कर दिया करो, बहुत जरूरी हो, लेकिन मैसेज तो जो
- 51:42पड़ेगा। वो आपकी समस्या का हल नहीं कर
- 51:44पाएगा। अभी थोड़ा ठहर रहा शरीर की अपनी
- 51:50लिमिटेशंस अभी कल ही किसी भाई ने कमेंट किया बाबा आप कहते हो
- 52:04प्रेमानंद से राधे राधे करने से। तुमने अपनी किडनीस नहीं ठीक की,
- 52:12अब तुम भगवान शंकर से ये क्यों नहीं कह देते कि मेरी आँखों को
- 52:18ठीक करता है, जैसे रामकृष्णा पर मास ने माँ को नहीं कहा।
- 52:30उसके बाने में ही चलने वाला व्यक्ति उसके बाने को प्रमाण
- 52:34करेगा, शिकायत नहीं करेगा, तरमीन करने का आग्रह नहीं करेगा, तेरा
- 52:42पाना मीठा लगता है। हमारी तो यही पथ रही है, अब भी
- 52:50वही है, हम ठीक कर सकते हैं मिलाशंकर लेकिन उसने।
- 53:10अगर आंख की रौशनी पहले बता के गए तो कोई कारण होगा।
- 53:16फिर उसको करना है तो अपनी मर्जी मैं जहाँ अपनी मर्जी कभी नहीं
- 53:21चलाता, एक आंख देख रही है देख रही है।
- 53:29अगर ये भी वो ले जाए तो भी उसका है, मेरा तो है ही नहीं।
- 53:34जिसने जान लिया कि मैं ही नहीं हूँ, उसने ये भी जान लिया कि मेरा
- 53:39नहीं है कुछ तो अब तो एक ले गया। अगर वो रहती एक भी ले जाए तो मुझे
- 53:47ज़रा भी अफसोस नहीं होगा। क्योंकि जो पाना था वो पादिया अब
- 53:59पाने को कुछ वाकिल है और बोल तो मैं जुबान से भी दे सकता हूँ और
- 54:10अगर उसकी होने में तुम कथा ही करोगे।
- 54:18ओके, वो जो करता है, अच्छे के लिए करता है तो मेरा कोई डिमैंड करना
- 54:24ही कि शिकायत के बराबर हो जाएगा के नहीं, तू मेरी आँख क्यों ले
- 54:30गया? ठीक कर दे ये एक शिकायत है।
- 54:34फिर तुम वाणी में ना रहे, तुम उसकी रजा में ना चले और बाबा कहते
- 54:44हैं उसकी रजा में चलाओ, हुकम रजाई चल ना ना नकल किया नाल जब वो करता
- 54:53है करने दो। और फिर इस तल पर आकर भी अगर मैं
- 55:02कहूंगा ये कर दे, वो कर दे तो ये बेकार है।
- 55:07ध्यान रखें ये एक इच्छा है, कल ही कोई बुध वर्ष की बात कर रहा।
- 55:19बुद्ध को और रास्ता तय क्यों करना पड़ेगा?
- 55:21मैंने कहा एक वासना उसमें बाकी रह के करुणा भी एक वासना है, ऐसे भी
- 55:31तुम्हें पता नहीं चलेगा। तुम कहोगे तुम तो महा करुणा वान
- 55:35हो। करुणा एक वासना है जिसके कारण
- 55:42बुद्ध उलझे और जन्म लेना इसलिए आवश्यक है कि इसे करुणा को भी
- 55:47विदा कहना पड़ेगा। ये भी एक वासना है।
- 55:53काम क्रोध लो मो अंकार भै यही वासना नहीं है करुणा भी एक वासना
- 56:00है करुणा का अथक कि तुम अपनी तरफ से कुछ करना चाहते हो।
- 56:09उसका हुक्म आए और मैं तुम्हें कुछ कह दूं।
- 56:13यह मेरी करुणा नहीं है, यह उसका हुकुम है।
- 56:18जब वो फरमाए, एक ते होते पापा जैसे जैसे वो फरमान करता है, वैसे
- 56:23वैसे मैं आगे ब्रॉडकास्ट कर देता हूँ।
- 56:25मेरा काम जस्ट ए ब्रॉडकास्ट द हुकुम।
- 56:32मैं हुक्म को तुम्हारे तक पहुंचा देता हूँ, इतना सा काम है एम जस्ट
- 56:36एन इन्स्ट्रुमेंट मैं को उपकरण हूँ कल्याण क्या होता है?
- 56:51मुझे नहीं पता कितने मिनट हो गए, देख नहीं सकता लेकिन जीतने भी हो
- 56:58गए हूँ। कल्याण का संक्षिप्त जवाब दे देता
- 57:01हूँ कल राकेश बेदी ने पूछा था कल्याण क्या होता है सर बताऊँगा।
- 57:10संसार में तुम लाभ ले सकते हो, संसार में तुम कोई काम करते हो,
- 57:17हानि हो सकती है, लाभ भी हो सकता है, लेकिन संसार में कल्याण नहीं
- 57:29होता। कल्याण वो स्थिति है जहाँ लाभ बना
- 57:34रहे, हानि ना रहे। दुख न रहे, सुख न रहे, खुशी न
- 57:44रहे, गम न रहे जहाँ द्वंद न रहे, जहाँ द्वैत न रहे, जहाँ एक रहे।
- 57:54अद्वैत रहे उस स्तर पर जो पहुँच जाता है उसका कल्याण हो जाता है।
- 58:03बाहर के पदार्थों से तुम्हारा कल्याण ही होगा।
- 58:07बाहर के पदार्थों से तुम लाभान्वित हो सकते हो।
- 58:12कल 1,00,00,000 था 2,00,00,000 हो गए।
- 58:14200,00,00,000 हो गए, 20,000 करोड़ हो गए शहंशाहे आलम बन गए।
- 58:19ये लाभ तो हो सकता है लेकिन ये लाभ तुम्हें कल्याण तक नहीं
- 58:24पहुंचाएगा। लाभ सिर्फ बाहर से तुम ले सकोगे।
- 58:33तुम्हारी मल्कियत बढ़ जाएगी। अब एक एकड़ जमीन है, फिर लाख एकड़
- 58:39जमीन हो जाएगी तो परमात्मा को लाभ के लिए प्रयोग न करना परमात्मा
- 58:49लाभ के लिए प्रयोग होता है। परमात्मा कल्याण के लिए प्रयोग
- 58:55होता है। और कल्याण का महत्त्व होता है।
- 58:58आनंद रस संसार तुम्हें लाभ देगा, आने देगा, परमात्मा तुम्हें रस
- 59:08देगा, आनंद देगा और जहाँ आनंद है वहाँ सभी खुशियां आ जाती हैं।
- 59:17चहल पहल होती है रसदार बहती है उसके हुक्म के अंदर तुम चलते हो
- 59:25वह तुम्हें चलाता है, तुम उसकी शरण में छोड़ देते हो अपने आपको
- 59:31फिर वो जैसा चलाता है तुम चलते हो?
- 59:34तुम खुद से कुछ नहीं करते, लेकिन वह करवाता है वह चलाता है और तुम
- 59:41चलते रहो। इसे कहते हैं कल्याण फिर बताऊँगा
- 59:53तो मैंने तो कहा होगा कि उस वक्त इतनी।
- 59:58स्टेज जो मैं बोला वो इतनी कच्ची होगी कि तुम बात को समझ नहीं
- 1:00:03पाओगे। पूरा ग्रंथ होने पर ही बोलेंगे।
- 1:00:06कल्याण का होता है। अगर मैं तुम्हें कह दूँ, सुखी भवा
- 1:00:14ये कोई खास बात नहीं है। अगर मैं तुम्हें कहती हूँ कि
- 1:00:18तुम्हारा कल्याण हो, इससे बड़ी नियामत मेरे पास है, नहीं, तुम
- 1:00:25आनंदित रहो, इससे बड़ी नियामत मेरे पास नहीं है, संसार से
- 1:00:32कल्याण नहीं होता। अगर कल्याण की चाहत है तो
- 1:00:40बेहरमुखी होने के बजाय अंतर्मुखी हो जाओ, सिर्फ और सिर्फ मात्र
- 1:00:50भीतर ही तरह कल्याण होगा। बाहर लाभ तो हो सकता है।
- 1:00:57गद्दियों का लाभ कमा लो, धन का लाभ कमा लो पदार्थों का लाभ कमा
- 1:01:01लो डिग्रीज़ का लाभ कमा लो आई एस बन जाओ, प्राइम मिनिस्टर बन जाओ,
- 1:01:09चीफ मिनिस्टर बन जाओ, कोई ओहदा ले लो।
- 1:01:13चक्रवर्ती सम्राट हो जाऊं लेकिन ये लाभ तो तुम ले सकते हो बाहर
- 1:01:19लेकिन लाभ कल्याण, कल्याण तो तभी होगा जब तुम्हें आनंद के वो बूंद
- 1:01:27मिल जायेगा बस। एक साथ सब सत है, उस आनंद की उस
- 1:01:35रस, धार की एक बूंद और सारे ब्रह्मांड का अस्तित्व सारे
- 1:01:46ब्रह्मांडो का अस्तित्व एक तरफ़। तात स्वर्ग अपवर्ग सुख तात स्वर्ग
- 1:01:58अपवर्ग सुख धरीय तुला एक अंग एक पलटे में स्वर्ग के धरती के और
- 1:02:05सभी लोगों के। पदार्थ रख दूँ ये लाभ है तात
- 1:02:14स्वर्ग अपवर्ग सुख धरीय तोला एक अंग तुलना ताही सक्र मिली जो सुख
- 1:02:23लव सत संग। जो सत्संग के एक क्षण में मिल
- 1:02:30जाएगा, वह ब्राह्मणों के मालिक होने में वह सुख नहीं मिलेगा,
- 1:02:41उसकी एक बूंद पीलों में बार बार। एक बार उसकी एक बहुत पी रहा हूँ
- 1:02:51तुम्हारा कल्याण हो गया, ऐसे तो तुम ज़िन्दगी में पदार्थों को।
- 1:03:02सुविधाओं को जुटाते रहोगे, लेकिन वो न मिलेगा जिसके बिना जगत सुना
- 1:03:14है। मैं तुम्हें कहता हूँ, तुम अपना
- 1:03:21कल्याण कर लो। तो घड़ी उसके गले लग के रो जाओ
- 1:03:31लिपट के रो उसके बिरह की आग में तड़पो चिंता की आग में तो बहुत
- 1:03:38तड़प लिया बिरह की आग में तड़पो मेरा की तरह।
- 1:03:47तुझसे लिपट के जोरो लेते हम तुझसे लिपट के।
- 1:04:02जो रो लेते हम आंसू नहीं थे ये मोती से कम तेरा दामन।
- 1:04:19नहीं तेरा दान में, फिर ये आंसू बहे भी तो क्या है?
- 1:04:39एक तू ना मिला। मेरे आंसू बह के तेरे दामन पे भी
- 1:04:47खर्चा है तेरे दामन को गीला करता है वह मुकाम देदे मेरे मालिक को।
- 1:05:03हे रह बर, हे रहमो करे हे विशाल हे विराट।
- 1:05:22तू दुनिया का दाम्र मत अपने आँचल में छुपा ले मेरे आंसू थे उन आँचल
- 1:05:32में ढल जाए और तेरा आँचल मेरे आंसू से गेला हो जाए।
- 1:05:47धन्यवाद।