Latest / Baba ji Vijay Vats / 31 Jul 25 - कर्मों की सूक्ष्म व्यवस्था: बदला लेने की जरूरत नहीं! तुम साधारण मनुष्य नहीं, परम बीज हो!
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- 0:01तुम किसी की बेइज्जती करते हो, भूल जाते हो सामने वाला जिसकी
- 0:10बेइज्जती की वो लचार होता है, तुम भूल जाते हो।
- 0:19जिसकी बेइज्जती की वो भी भूल जाता है तो तुम ये मत सोचना एक ऐसी
- 0:27प्रणाली है जिसे न्यायिक व्यवस्था कहते हैं।
- 0:32ईश्वर की बनाई हुई एक व्यवस्था है जो याद रखती है।
- 0:41इसलिए बाबा कहा करते हैं और मैं उस पे अमल भी करती हूँ।
- 0:47बाबा कहते हैं अगर कोई तुम पर अत्याचार कर जाए, तुम उसका पता
- 0:55होते हुए भी उसका बदला मत लेना। वही कबीर वाली बात धोखा खा लेना,
- 1:02धोखा देना क्यों? क्योंकि अगर तुम बदरा लोगे बाबा
- 1:11कहते हैं अगर तुम बदरा लोगे और तुम्हारे हाथ वाले छोटे।
- 1:22क्योंकि मेरी प्रकृति के सुपर सेंसिटिव कंप्यूटर में वह घटना
- 1:26फील हो गई है। मैं याद रखता हूँ मेरी व्यवस्था
- 1:30सब है याद रखती है हर चीज़ को क्योंकि उससे करीब कोई है ही नहीं
- 1:33आपके वह निकट से निकट। तुम्हारी सूक्ष्म से सूक्ष्म
- 1:43तरंगों को मनुष्य को कर्मों को वह फीड रखता है।
- 1:48तुमने सोच भी लिया ज़रा उसने फीड कर लिया और जो चीज़ हिट हो गई वह
- 1:57फलीभूत हो के आएगी यह बात समझ लेना तुम।
- 2:02तुमने मनुष्य से भी किसी के प्रति गलत सोच लिया?
- 2:10वह बीज बनकर तुम्हारे सुपर सेन्सिटिव कंप्यूटर में फंड होगी
- 2:17प्रकृति के सुपर सेन्सिटिव कंप्यूटर।
- 2:22और बीज सदा अंकुरित होता है और सदा पेड़ बनता है, फूल लगते हैं,
- 2:30फल लगते हैं और वो फल तुम्हें ही खाने पड़ेंगे।
- 2:36तो बाबा कहते हैं अगर तू अगर तुम्हें कोई।
- 2:41हानि पहुंचा जाए, दुखी कर जाए। कोई अपराध कर जाए तो उससे बदला
- 2:50लेने की चिष्टा मत करना। भूल जाना क्यों?
- 2:53क्योंकि मैं याद रखता हूँ। ये तुम्हारे लिए संदेश भी है,
- 2:59इसको अंडरलाइन कर लो। अगर कोई तुम पर अत्याचार कर जाए
- 3:06तो तुम याद मत रखना तुम भूल जाना क्यों?
- 3:10क्योंकि मैं याद रखता हूँ बाबा कहते हैं मैं याद रखता हूँ।
- 3:15और फिर बाबा कहते हैं कि मेरे हाथ बड़े विशाल तुम्हारे हाथ तो छोटे
- 3:20सी हैं, मेरे हाथ बड़े बुरा, मैं विराट हूँ तो मेरे हाथ ही बड़े
- 3:24बुराट इसलिए तुम बदले लेने की चिष्टा मत करो।
- 3:33और अगर तुम बदला ले लोगे तो याद रखना, मैं जब दंड दूंगा, मैंने तो
- 3:40दंड देना ही है, क्योंकि जो बीज बोया गया मुझे याद है उसका फल मैं
- 3:48दूंगा। तुम अगर तुमने उसे दंडित कर दिया
- 3:52तो जब मैं फल दूंगा तब मैं अपने हाथ थोड़ी सी नरम कर दूंगा,
- 4:00क्योंकि इसे तुमने भी दंड दे रखा है।
- 4:06बड़ी सूक्षम व्यवस्था है कर्मों की।
- 4:10लेकिन बड़ी प्यारी है और बड़ी परमात्मा न्याय का है और परमात्मा
- 4:16दयालु है। किसी के प्रति अपराध नहीं होने
- 4:18देता हूँ, चाहे खेल ही क्यों ना हो, लीला ही क्यों ना हो लेकिन
- 4:25अपराध की कोई गुंजाइश नहीं। लीला के भीतर भी।
- 4:31इसी शब्द को आप फिर से अंडरलाइन करो।
- 4:34लीला के भीतर भी ठगी ठोली की कोई गुंजाइश नहीं।
- 4:40किसी के साथ भेदभाव नहीं होता क्योंकि सब उसका है, सभी उसके
- 4:45हैं। तो आज तक जो ब्राह्मणों ने
- 4:47अत्याचार किए सुद्रों पर मैं सदा ही कहता हूँ सुद्रो अब तुम्हारा
- 4:53वक्त आ गया है, ज़माना बदलता है, अक्सर है अब ज़माना बदल क्या है?
- 5:07यह एक गोल घेरा चक्कर है जो घूमता रहता है।
- 5:12आज जो नीचे है पहिये का तल वो कल ऊपर होगा और वह जो ऊपर है वो नीचे
- 5:19होगा। आज वो वेला आ गया है जब
- 5:22ब्राह्मणों ने तुम्हारे साथ अत्याचार किया, मैं खुद।
- 5:28तो आज वो विलियन अगर तुम चाहो तो उसका बदलाव ले सकते हैं।
- 5:42अगर तुम्हें चैन मिलता है तो। वैसे उसके हाथ बड़े अगर उसपे छोड़
- 5:48दोगे तो वह दंड देगा पूरा पूरा अगर तुम बदला लोगे तो वह दंड देगा
- 5:54अधूरा अधूरा, क्योंकि वह माइनस कर देगा।
- 5:57फिर बदला तो आपने भी ले लिया तो और पूछते हैं बाबा अब जब।
- 6:05मृदम सुमारी हो जातीय गणना हो तो हम अपना क्या लिखायें धर्म हिंदू
- 6:12लिखायें मुसलमान लिखायें बहुत लिखायें क्या लिखायें मैंने कहा
- 6:16नहीं जैसा परमात्मा ने तुम्हें बनाया वैसा लिखो।
- 6:21ये तो बेचारे भूल ही गए कि परमात्मा ने हमने क्या बनाया?
- 6:28हमने तो इन राजनीतिज्ञों के द्वारा बताई गई ब्राह्मणों के
- 6:31द्वारा बताई गई व्यवस्था को थोप लिया और मानने लगे कि हम तो यहीं
- 6:36तो फिर बाबा तुम बता दो परमात्मा नहीं क्या अपना है?
- 6:43पर महात्मा इंसान से हट के अगर तुम्हें कुछ बनाया हो तो बता दो,
- 6:55अगर मेरे से कुछ तो जब मर्दम सुमारे हो तुम कोई धर्म ये धर्म
- 7:01है तुम्हारा। यह रिकग्निशन है, धर्म है,
- 7:08रिकग्निशन है लेकिन वास्तव में परमात्मा ने तुम्हें कैसा पैदा
- 7:14किया वो लिखा देना है ये तो बाद में थॉपी हुई बातें हैं।
- 7:20जो संसार ने तोप दी, समाज ने तोप दी, धर्मों ने सौंप दी या किसी
- 7:27कारण से महज तुम्हारे आचार्य ने तोप दी?
- 7:38परमात्मा के सुपर सेंसिटिव कंप्यूटर में ये घटना।
- 7:44फीड हो गई और हर घटना फीड होती है क्योंकि सबसे गरीब वही बैठा है,
- 7:52उसकी पैनी निगाह है। तुमने सोचा ठीक सोचा, गलत सोचा
- 7:59उसके भीतर फिर हो गया। इसलिए समझदार व्यक्ति कहते हैं
- 8:08बुरा मत सोचना जब सोचना तो भला सोचना तेरा मंगल मेरा मंगल सबका
- 8:16मंगल होय जी है ना ये सोचना शुभभाव हो तुम्हारा?
- 8:24मंगल काम न हो, सबके प्रति परमात्मा खुश होगा क्योंकि सभी
- 8:30उसके बच्चे परमात्मा नहीं चाहता। एक बच्चा दूसरे से नफरत करें।
- 8:41मझाओ नींद से खाता आप इसमें बैर रखो, परमात्मा के बच्चे हैं, सभी
- 8:48और बच्चे के हैं, परमात्मा का मटेरियल है जिसका माल वो ही तो
- 8:53मालिक बस तुम समझे नहीं अब तक समझोगे उस दिन जाके।
- 8:59जब लास्ट कोर पे जाके तुम्हें समझाएगा कि मैं नहीं हूँ वही है
- 9:04तब ये बात समझाये कि मेरा कुछ नहीं हूँ, जब मैं ही नहीं हूँ तो
- 9:07मेरा क्या है? मेरा कुछ भी नहीं और दूसरे तर्पे
- 9:11तुम्हें समझ आएगा कि मैं ही हूँ और सब मेरा ही है, फिर छीनना
- 9:16किसे? जब मेरा ही है तो मांगना किसी और
- 9:26छीनना किसी मुझे लोग कहते थे कि टेलीविजनों पे स्क्रीन्स पे कुछ
- 9:35धार्मिक समुदाय की आती है। संस्था के हाथ मजबूत करते।
- 9:40हाथ के सहयोग करो। मैंने कहा क्यों लकवा हो गया है,
- 9:45हाथों को लकवा हो गया है क्या पापा आपके यहाँ नहीं आते?
- 9:52अब ये फिर अंडरलाइन कर लो। आप आज आज लाइन्स अंडरलाइन बहुत
- 9:57होती हैं। जिसने परमात्मा देख लिया, वह आपकी
- 10:04व्यवस्था के ऊपर निर्भर रहना छोड़ देगा।
- 10:10जिसने उस विराट का दर्शन कर लिया सत्य में और दर्शन जाली नहीं माना
- 10:15नहीं जा सकता। माना हुआ तो टूट जाएगा तो कांपने
- 10:17लग जाओगे। जब कोई तुम्हारे सामने गुरु तेग
- 10:22बहादुर के सामने नंगी तलवार, लंबी तलवार लिए हुए औरंगजेब का फरमान
- 10:28लिया है, कोई व्यक्ति जल्लाद सामने होता है तो गुरु तेग बहादुर
- 10:36गर्दन को। सिथर रख के बैठ जाते हैं।
- 10:39उसके ध्यान में मगन और गर्दन उतार दी जाती है लेकिन उनका कुछ नहीं
- 10:47बिगड़ता है। जलती हुई तवियों के ऊपर गुरु
- 10:52अर्जुन देव को बैठाया जाता है ऊपर से।
- 10:55गर्मी के महीने में गर्म रेत गिराया जाता है, लेकिन वो उसी भी
- 10:59नहीं करते। क्यों?
- 11:00क्योंकि उस स्तर पर चले जाते हैं जहाँ पर कोई शस्त्र नहीं पहुंचता।
- 11:08आग नहीं पहुंचती, तूफान नहीं पहुंचता।
- 11:14भू कम नहीं पहुँचती वहाँ वहाँ चला जाता है गुरु अर्जुन देव ये
- 11:22परीक्षा की गाड़ी यहाँ तो आचार्य कह देते हैं अगर मैंने बोल दिया
- 11:27तो वे मुझे मार देंगे, फिर इसका मतलब धर्म टूटा नहीं ना अभी?
- 11:33तुम अभी भी अपने आपको शरीर समझते हो पर जिसका खुद का ही भर्म नहीं
- 11:39टूटा, वह दूसरे का भर्म का खाक तोड़ पाएगा।
- 11:42इसलिए मैं कहता हूँ इन धोखेबाजों से बचना।
- 11:47यह सुंदर सूट बूट डाल के टाई लगा के तुम्हें ठग लेते हैं माया।
- 11:52माँ ठगनी हो यानी यह ठगनियों की वेशभूषा बड़ी सुन्दर होती है और
- 12:01कुछ कुछ लोग तो आजकल ड्रामे का जीकर फटे कपड़े डालते मैंने देखा
- 12:07है एक व्यक्ति को कॉल। अध्यात्म की बातें कर रहा हूँ।
- 12:11फटे कपड़े डाल के मैंने कहा भाई इतना तो किसी के पास भी होगा इतना
- 12:14वक्त समझे कोई पजामा कुर्ता नहीं तुम्हें दे सकता, तुम्हें शर्म
- 12:19नहीं आती टज्जी मारते हुए यह है ये कहते हैं तुम्हें?
- 12:31कि मैं बंध सकता हूँ इसलिए खुद शादी नहीं करते।
- 12:34आचार्य शादी नहीं करते। त्याग में यह एक पलायन है, बंधनों
- 12:42से पलायन है, जैसे पहले के लोग भाग जाते थे वनों में।
- 12:49हिमालय की गुफाओं में पहाड़ों की चोटियों में यह पलायम था।
- 12:56वो मुक्षा नहीं थी, यह पलायम था तुम इनको।
- 13:12संत मत समझना, यह बंधे हुए लोग हैं, जो खुद को इतने से बंधन मैं
- 13:23नहीं मान सकता। वह विराट बंधनों का क्या करेगा?
- 13:30कैसे निपटेगा उससे यही संदेश दिया कृष्ण तुम एक ही बात करते हो
- 13:3816,108 राणियों आठ राणियों तो वो विवाह करके लेके आए, किसी को
- 13:44अपहरित करके किसी को जीत के लेके आए लक्ष्मण को जीत के लेके आए।
- 13:50हम्म जैसे अर्जुन जीत के लेके आए दम्पत्ति को बिल्कुल ऐसी ही शर्त
- 13:59थी और कृष्ण बिल्कुल वैसा ही तीर चला के मछली की आंख में लक्ष्मण
- 14:05को जीत के लेके आए। गए थे न भाई जीतने किसी ने बुलाया
- 14:10तो नहीं था जिससे तुम डरते हो, तुम एक छोटी सी रस्सी धागे से
- 14:23डरते हो, वो रस्सियों का पहाड़ बांध लेते, दिखाओ मैं कहाँ बंधन
- 14:27में हूँ। मर्दवे है जो जमाने को बदलते है।
- 14:36ये है मरदान तो मैंने भी शार्द नहीं की मेरे पिताजी कहने के
- 14:41कर्मठोक शादी करले मैंने पिताजी को थोड़े से अल्फाज़ गलत कहे।
- 14:49कुछ दुख भी होता है। ऐसे न भी कहते तू चल जाता लेकिन
- 14:57मुझे पता नहीं नहीं चलता तब मैं जानता था रोज़ रोज़ की है बात तू
- 15:05सब कर रहा है, इतने रिश्ते आ रहे है।
- 15:08मैंने कहा, पिताजी। अगर तुम्हारी कामना न भरी हो तो
- 15:10तुम एक और करा लो, मुझे कोई इंकार नहीं होगा, कोई ऐतराज नहीं होगा,
- 15:17लेकिन मुझे शादी के लिए आशीर्वाद मत कहना।
- 15:21अगर तुम्हारी तमन्ना नहीं भरेगी तो तुम एक और करा लो।
- 15:27बिलकुल यही अलफ़ाज़ मुझे याद है आज गाँधी चौक के भीतर खड़े हो के
- 15:31मैंने अपनी पिता श्री से की। बहुत ही शरीफ व्यक्ति थे वो इस
- 15:39शराब पर नॉन रिऐक्टिविटी मैंने अगर कोई सीखी सबसे पहले अपने पिता
- 15:46श्री से सीखी। गरीब थे, जिन्होंने पैसा लेना था,
- 15:55वह एक हुक्के वाला भाई था, अपने साथ हुक्का ही रखता था, बाजार में
- 16:01चलता रहता बड़ा सेठ था, बड़ा नाम था जब चाहता सुधरता मार लेता।
- 16:06ओके उसके थोड़े से पैसे देने होते वह पिताजी के सामने आकर खड़ा हो
- 16:12जाता। तुम्हें सच बात बता रहा हूँ तो
- 16:18पिताजी के पास पैसे नहीं होते कबीलदारी बड़ी थी पांच भाइयों का
- 16:23पोषण। पढ़ाई लखाई फिर उनका करियर बना दो
- 16:31बेटियों की शादी एक मेरा बड़ा भाई सबसे बड़ा भाई बचपन में 14 महीने
- 16:36की अवस्था में स्वर्गवास हो गया था।
- 16:38पहला पहला बच्चा उसका नाम था रामनारायण।
- 16:44उसके बाद सत्यनारायण जी आए। अरे हाँ सो मत भाई, वो आज भी है
- 16:59तो पिताजी को उसने गाली वो गाली जब मैं आपको।
- 17:03सार्वजनिक रूप से बता नहीं सकता। पर मैं सुन रहा था बच्चा था, मेरे
- 17:10को गुस्सा आया। मैंने कहा चलो कोई बात नहीं, पैसे
- 17:14तो देंगे या ना देंगे बुजुर्ग इसका मुँह तो मैं टेढ़ा कर दूँ
- 17:19ज़ोर था। जीस आठवीं कक्षा के विद्यार्थी ने
- 17:2421 किलो का ड्रम सिर पर रखा और 10 किलो की बाल्टी और गुरुदास मान के
- 17:29घर से पैदल जलके लाइनों को क्रॉस करके दुकान के ऊपर और फिर सारे
- 17:33बाजार में दूध वितरण करके आता। और इन ढोरों में इतनी ताकत थी कि
- 17:45सभी दाना दाना चीनी आती, चीनी उसकी बोरी होती थी 95 किलो की।
- 17:54उसमें जो रस्सी होती थी वह बांधती जाती थी, डबल करके अच्छी तरह पट
- 18:00देते हैं, यहाँ बांध देते हैं। और मैं हाथ फुलाता बस हाथ यहाँ तक
- 18:05किया था टूट जाती है तड़क टूट जाती है मैंने कोई व्यायाम नहीं
- 18:12किया या काम ही मेरा व्यायाम हो गया तो मुझे पक्का पता था अगर मैं
- 18:19इसके थोपड़े के ऊपर एक मार दूंगा गुस्सा बहुत आया।
- 18:25कोई लज्जा की बात नहीं है। मुझे मूर्ख व्यक्ति मूर्ख ही होता
- 18:29है। तब मैं मूर्ख था, मुझे पता नहीं
- 18:33शराफत बुजुर्गों के चेहरे पर शराफत देख के चुप हो गया।
- 18:39कोई कारण हो गया या कुछ बोल नहीं रहे।
- 18:41थोड़ा आदेश करें तो मैं अपना काम करूँ लेकिन वो शांति ने हाथ छोड़
- 18:48दिया। कोई बात नहीं, सेठ जी देने हैं,
- 18:51जरूर देंगे। ऐसे ऐसे दिन देख और आज भी मेरे
- 19:03दिल में ठी सूखती है। मैंने पिताजी को कहा कि तुम वासना
- 19:08नहीं भरी तो तुम एक और कभी कभी मन में हल्के से ठी सूझती है।
- 19:23संत कौन है संत वह जो प्रकृति द्वारा अकारण दिए गए दुखों को,
- 19:32सहज मन से सर्व भावना से? सम्पूर्ण हृदय से सम्पूर्ण
- 19:38प्राणों से परिपूर्ण प्राणों से खुशीपुरों को स्वीकार कर ले वह
- 19:44सनी तेरा पाना बेटा लाख कड़वे नहीं वाने को तो मानना पड़ता ही
- 19:53है, तुम्हे कर क्या सकते हो? वाणी को मानना पड़ेगा भाई रो धो
- 19:58के भी तो मानोगे? रो लिए पिट लिए चीख लिए चिल्ला
- 20:05दिए फिर भी क्या करोगे? ओह वापस तो आएगा नहीं, मानना तो
- 20:10पड़ेगा ही लेकिन गुरु नानक। समझदार है मूर्ख अपनों अपनी शभय
- 20:21स्याणे एक मत श्याणे प्रतिक्रिया नहीं करता मूर्ख प्रतिक्रिया करते
- 20:28हैं, इन प्रतिक्रिया को छोड़ दो क्यों क्योंकि एक वृद्ध हस्त।
- 20:35तुम्हारी बातों को हर वक्त सुन रहा है।
- 20:37प्रत्येक के कर्मों का लेखा जोखा उसके पास है।
- 20:41क्यों वह सब के करीब है, करीब से करीब है जो तुम सुन नहीं सकते।
- 20:48इसने हृदय में क्या सोचा? वह उसने सुन लिया।
- 20:52बड़े बड़े कानों वालों ने सुन लिया, जो बिल्कुल करीब बैठा था।
- 20:58इसलिए संतों ने कहा पन्थों ने कहा सर्वे भवंतु सुख नो सर्वे सन्तु
- 21:09निरामय, सर्वे भद्राणि प शंतु मा कश्यप वागव बेहतर।
- 21:16किसी को दुख न दे भगवान तू मालिक है सिर्फ ठीक है खेवन हारा पी तू
- 21:27कैसे को दुख न दे हमारी तेरी आगे फरियाद है।
- 21:3526 के तेरा मंगल मेरा मुकल सबका मुकल होए रहा है।
- 21:43अगर ऐसा सोचोगे तो उसके कारण तुम्हारे पास है।
- 21:47हर वक्त तुम मंदा सोचोगे उसने सुन लिया।
- 21:53तुम लाख पश्चातत करो, इसलिए मैंने आपसे बहुत बार कहा, अगर गुना हो
- 21:57जाए तो पश्चातत मत करना क्यों? क्योंकि तुम्हारा पश्चातत बेकार
- 22:02हो जाएगा। उसने तो दंड फेर भी देना है
- 22:04तुम्हें क्योंकि उसने सुन लिया और उसके सुपर सेन्सिटिव कंप्यूटर में
- 22:10फीड हो गया। और भीड़ होते ही वो प्रोसेसिंग
- 22:13शुरू हो गई। जैसे ही दाना बीज जाता है, धरती
- 22:18के गर्भ में अंकुरण होने की प्रक्रिया तत्व क्षण शुरू हो जाती
- 22:23है। वह अंकुर भी होगा, धरती से बाहर
- 22:30भी आएगा। सूरज की करण नाचेगा हवाओं को
- 22:35हवाओं को पिएगा, खिलवाड़ करेगा छोटे छोटे हाथों से शरीर से वह
- 22:42नाचेगा, खुश होगा। यह सब भाविक प्रक्रिया है।
- 22:47फिर 1 दिन पेड़ बन जाएगा, फिर फूल लगेंगे, फिर फल लगेंगे।
- 22:50फिर फल पकेंगे फिर फल गिरेंगे और वो तुम्हे खानी पड़ेगा।
- 22:57इसलिए इतनी सूक्षम अवस्था को आज मैं बोल रहा हूँ के मन से कभी
- 23:02किसी का अहित चाहना भी नहीं और अगर तुम किसी का अहित चाहोगे तो
- 23:08याद रखना। तुम्हारा हित हो जाएगा, ऐसा मत
- 23:12समझना जो किसी के लिए बबूल होता है, किसी के लिए गड्ढा खोदता है,
- 23:20वह खुद ही गिरेगा। उसमें ही हू डीक्स, पिट्स फॉर
- 23:30ऑदर्स हिमसेल्फ फॉल्स इंटू इट। अगर मंगल कामना करोगे दूसरे बस
- 23:41धर्म का शार अर्थ था यही की सबका मंगल सोचो क्यों?
- 23:50क्योंकि अंत में जाके पता चलेगा। ये सभी मैं हूँ एहम ब्रह्मस्म,
- 23:57इसका अर्थ क्या है? गहरे से सोचना शिव हम शिव, मैं
- 24:03हूँ एहम ब्रह्मस्म, मैं ही ब्रह्म हूँ यानी मैं सर्व हूँ ब्रह्मकोण
- 24:09जो सर्व है। और मैं सर्व हूँ तो फिर किसी का
- 24:15बुरा सोचोगे तो तुम अपना ही बुरा सोचोगे, तुम कहो मेरा एक अंगूठा
- 24:22गल जाए ध्यान से सुन तुम अगर कहो संकल्प शक्ति तुम्हारी काम करती
- 24:29है के मेरा एक अंगूठा गल जाए। और तुमने जे हित की बात सोंची या
- 24:35अहित की बात सोंची तुम्हें पता नहीं तुमने अपने अहित की बात
- 24:39सोंची। अंगूठे के अहित की बात नहीं सोंची
- 24:42क्योंकि अंगूठा तुम्हारा ही अंश है तुम्हारा ही अंग है अंगूठा
- 24:48तुम्हारा ही अंग है। तुमने सोचा होगा शायद मैं अंगूठे
- 24:54के अहित की बात सोच रहा हूँ, लेकिन संत वह जो जान लेता है कि
- 24:59मैं ही हूँ, मेरे सिवा कोई नहीं, मैं ही हूँ और सब मेरा ही है
- 25:07इसलिए ये सारा शरीर तुम्हारा है और तुम ही हो।
- 25:11ये तुम भूल जाते हो सक्षम ये सक्षम तुम कहते हो कि अंगूठा तू
- 25:15जल जा, तू गल जा, तुम भूल गए तुम मैदान में आ गए, तुम बेहोश हो गए,
- 25:22मूर्छित हो गए हिप्नोटाइज़ हो गए। मनुष्य आचार्य और संत और बीच की
- 25:36एक बात रह गई थी उसी महीने का। फिर वो अवस्था है अर्जुन के
- 25:44अर्जुन को। गीता के ज्ञान के बावजूद भी
- 25:47अर्जुन समझ नहीं रहा। फिर उसको सत्य का दर्शन करवाना
- 25:52अनिवार्य हो गया क्योंकि कृष्ण उसकी भूमि को तैयार कर रहे हैं।
- 25:57कृष्ण जानते हैं कि इसकी भूमि को तैयार करना होगा क्योंकि इसमें
- 26:01बीज फूटना ही चाहिए अन्यथा लड़ नहीं पाएगा ये।
- 26:08और दोनों पक्षों के योद्धा मैदान के अंदर डटे खड़े हैं।
- 26:13शंखनाद हो चुका है तो बीज फेंकते हैं, अंकुरित हो जाए और उसके बाद
- 26:20फल फूल लग जाएं तो फिर इसे दिखाऊ मैं।
- 26:26उस वक्त का इंतजार करते हैं और वह वक्त आ जाता है जब उसके ऊपर
- 26:33शक्तिपात करते हैं। यह एक व्यवस्था है जो आदि संतोसी
- 26:39चल रही है, बहुत दूर तक जाती है उसके ऊपर।
- 26:44व्यक्ति उसके ऊपर जो तैयार भूमि को लिए बैठा है, उसमें रोपण होता
- 26:48है। बीज का शक्तिपात उसी व्यक्ति पे
- 26:51होता है अन्यथा किसी पे नहीं छोटी सी बात कह के फिर मैं आज का
- 26:58प्रवचन समाप्त करूँगा। स्वामी नित्यानंद स्वामी स्वामी
- 27:03नित्यानंद जी महाराज कृष्णमूर्ति के भाई थे।
- 27:09उसने बुद्ध के अगले जनम मैत्री की आत्मा को उतारने का प्रयास किया।
- 27:14समय से पहले। अगर व्यवस्था के हिसाब से मैत्री
- 27:21आए तो माता के गर्व में से आएँगे, लेकिन माता को इतनी शक्तिशाली
- 27:26गर्वस्थ मिल नहीं रही तो फिर क्या किया जाए?
- 27:29किसी जीवित पुरुष को जो एनलाइटन है या एनलाइटन होने के करीब है,
- 27:34उसमें इस शरीर को उतार दिया जाए। कैथी असफिकल सोसाइटी थी।
- 27:41उसने यही सोचा ये काम करे और कोई इलाज नहीं है तो उसने नित्यानंद
- 27:47के भीतर बुद्ध की उस रूह को उतारने की चेतना को उतारने की
- 27:53चेष्टा की। और कामयाब भी हो गए।
- 27:57करीब करीब जैसे कृष्ण शक्तिपात करें।
- 28:02अर्जुन के ऊपर और शक्ति तो भीतर चली जाए लेकिन तब तक क्षण विस्फोट
- 28:09हो जाए, एक्सप्लोजन हो जाए, यही नित्यानंद के साथ हुआ एक्सप्लोजन
- 28:15हो गया, फट गए। मर गए ज़रा सोचो कैसी माता चाहिए
- 28:25मैत्रे को लाने के लिए? बुद्ध कैसी आत्मा है जब नित्यानंद
- 28:32जैसे शांत मन वाले लोग फट जाते हैं?
- 28:37तो कैसी माँ इस गर्भस्थ शिशु को सहन कर पाएगी?
- 28:40नौ महीने? इसलिए इतनी देर से 2500 साल से
- 28:47माता की तलाश मत नहीं मिल रही और आगे आगे मत मिलेंगे भी नहीं।
- 28:53क्योंकि आज स्त्रियों ने शराब पीना शुरू कर दिया, गांजा खाना
- 28:58शुरू कर दिया, ये करना शुरू कर दिया, वो करना शुरू कर दिया व
- 29:01विचार करना शुरू कर दिया। मैं ऐसे ही नहीं कहता के भगवान
- 29:08राम की तरह मर्यादा में रहना चाहिए।
- 29:13यह एक कार्य से नहीं है, यह अनेक कारणों से शुभ है।
- 29:21प्रकाश ये जो कुछ धर्म चले हैं, एक दो जैन धर्म में साध्वियों की
- 29:28व्यवस्था है या बी के अंदर साध्वियों की अवस्था है?
- 29:32काश। ये शुद्ध हो पायेंगे बस मेरे इतने
- 29:36शब्दों को ही काफी फिर ये योग्य हो पायेंगे उस बुद्ध की आत्मा को
- 29:45अपने गर्भ में समाने के लिए। उसके बीच की ये अवस्था अर्जुन
- 29:57शक्तिपात के लिए जो योग्य हो जाए वह मुँह मोक्षु वह एक बीच की
- 30:07अवस्था में मनुष्य मनुष्य के बाद आचार्य आचार्य के बाद मुँह
- 30:10मोक्षु। अभी अचार्य में मोमुक्षा नहीं
- 30:13जन्मी है, अभी तो यह बंधन को दूर भगाने की चेष्टा कर रहे हैं।
- 30:19अभी तो बंधन से यह पलायन कर रहे हैं।
- 30:24अभी बंधन को बंधन जैसा। इन्हें लगता है शादी तो फिर क्या
- 30:29खाक इनमे? सहनशक्ति है, इम्युनिटी है।
- 30:41बर्दाश्त करने की क्षमता क्या है? वो ही मैं कहता हूँ।
- 30:47मैं डरता था लेकिन शादी तब कराई बिल्कुल अपने कायदे कानून में
- 30:55रहो। 1985 में एनलाइटनमेंट के बाद 1991
- 31:00में मैंने शायद 6 साल लग गए। तैयारी करते करते, लेकिन मैंने
- 31:12अपना। मन चाहा काम कर ही गया।
- 31:16जब मुझे बंधन बंधन जैसा नजर नहीं आएगा, तब मुझे जीतने मर्जी बंधनों
- 31:22से बांध देना कोई बात नहीं, कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन तब फर्क
- 31:28पड़ता था इसलिए मैं कहता हूँ कम से कम ईमानदारी से तो बोलो।
- 31:34साफ कहो कि देखो भाई मुझे तो बंधन बंधन जैसे लगते हैं, मैं कबीर
- 31:41नहीं हुआ हूँ यद्यपि कबीर को मैं नमन करती हूँ, मैं कृष्ण नहीं हुआ
- 31:48हूँ। उपनिषद के ऋषियों को याग्यबल को
- 31:51मैं प्रणाम करता हूँ। लेकिन मैं हुआ नहीं हूँ उस स्थल
- 31:56पे गया नहीं हूँ मैं सिर्फ जैसा सीखा मेरी खोपड़ी ने वैसा ही
- 32:03व्याख्यान कर रहा हूँ जानता मैं कुछ नहीं कैसा शुभ हो अगर अपने
- 32:08सत्य बचने यह कहते। जब तुम सुनोगे तो तुम बिल्कुल
- 32:12पाओगे कि यह पहुंचा हुआ है। मैंने जब प्रथम बार मेरे पास इनकी
- 32:18वीडियो आई तो मैंने कहा इस मूर्ख को यह नहीं पता अभी मैंने पहुंचा
- 32:23नहीं। यह जो बांट रहा है वह विषय है,
- 32:29अमृत नहीं है। ये जानता नहीं बिल्कुल जानता है
- 32:34लेकिन पता नहीं किस चाहत में दिखवाना है कि अपना देखो कुछ भी
- 32:38नहीं। हम तो त्याग किये बैठे हैं ना कि
- 32:40बाल बच्चा है, ना कोई धर्म पत्नी है, किसके लिए जोड़ना है?
- 32:45फिर जोड़ना है। ये सारे ढांचे के लिए सस्ता के
- 32:52लिए सस्ता इसके बाल बच्चे हो गए किसी के लिए घरवाली छोड़ देना फिर
- 33:02कोई सेठ बाल बच्चा हो जाता है उसके लिए जीता है वो बंधन तो बना
- 33:07ही रहा ना? घरवाली का त्याग कर दिया जबकि वो
- 33:12कम कम बंधन थी। वो तो साथी होती सुख दुःख की उसको
- 33:17छोड़ दिया फिर कोई सेठ उसके मोह जंजाल में बंध गया, अब उसके लिए
- 33:26जिएगा। तुम अकारण कब जिओगे जब तुमसे कोई
- 33:34पूछे कि तुम क्यों जी रहे हो तुम कहो कोई कारण वह जला रहा है, मैं
- 33:41जी रहा हूँ और मरना 1 दिन सभी ने जब वो मार देगा तो मर जाए।
- 33:51जब तुम ऐसा जीने लगो, आकार तुम्हारे जीने का कोई कारण ये सब
- 33:58बंधन जो तुम्हारे ऊपर हैं तुम जानते हो अगला पल आएगा नहीं आएगा।
- 34:03तुम अपने कर्तव्य पूरा कर पाओगे नहीं कर पाओगे क्या सांस लेना भी
- 34:08तुम्हारे वस में क्या फेफड़ों का धड़कना हृदय का धड़कना, स्वास्थ
- 34:15पर स्वास्थ लेना तुम्हारे वस में बहुत से लोग ऐसे मेरे ससुर जी थे
- 34:20रात को सोए सुबह उठने। तो कोई क्या करेगा, क्या करेगा?
- 34:27कोई? यह तुम्हारे वश में नहीं है, तुम
- 34:30कल्पना कर सकते हो, तुम मैप बना सकते हो, तुम आगे की योजनाएं बना
- 34:37सकते हो, कल्पनाएं कर सकते हो, लेकिन तुम जिंदगी को तो आगे नहीं
- 34:40न बढ़ा सकते। कौन जाने आज की रात आखरी रात
- 34:49जानता है कोई अगला पल नहीं आए कोई जानता है यही ईसा कहते हैं जब
- 34:56मांग रहे हैं भगवान आपका भोजन दे दे ओह गॉड।
- 35:01हेम हंकरी, प्लीज़ प्रोवाइड मी फूट मुझे भोजन दे दे मैं भूखा हूँ
- 35:09और साथ में जाने वाला व्यक्ति कहते है 150 साल के लिए मांगलिक
- 35:12जब तेरा प्रिय बाप है, तू पुत्र है।
- 35:20तो 150 साल के लिए मांग लो कहता मांग लूँगा, लेकिन पक्का पता है
- 35:26कि अगले पल मैं जीऊंगा तो बोलती बंद हो जाती है।
- 35:30तुम्हें लुभा पाते हैं ये लोग जिसके आँखें।
- 35:44पैदा हो गई हैं, उसको नहीं लुभा पाएंगे।
- 35:47अंधों को ये लुभा पाएंगे जिनकी आँखें जन्म गा गई हैं, उनको नहीं
- 35:54लुभा पाएंगे जी क्योंकि वह देख सकता है इनके बंधनों को देख सकता
- 36:01है, महसूस कर सकता है। तो हम उन लोगों में से हैं जो
- 36:07डरते थे। बंधनो से खुद की ही उतारण दी
- 36:11मैंने और फिर वो वक्त आये जब बंधन नाम की कोई चीज़ रही नहीं।
- 36:18जो बंधन था वो टूट गया, मैं विराट हो गया।
- 36:21अब कोई बंधन मुझे तंग नहीं करता है।
- 36:25ऐसे ही तुम भी हो जाओ फर्क मैंने सुंघा दिया।
- 36:29मनुष्य आम मनुष्य उसके बाद आचार्य जो जानता कुछ भी नहीं और प्रकट
- 36:37ऐसा करता कि जानता सब कुछ। और फिर बीज की अवस्था मैंने
- 36:41अर्जुन की बताई। वह अभी जानता नहीं, लेकिन वह
- 36:44तैयार हो रहा है। भूमि की तरह उसमें बीज का रोपण
- 36:48होना है। कृष्ण ने उसके ऊपर शक्ति बात करना
- 36:52है, उसकी वास्तविकता दिखाने के लिए बीज की वास्तविकता क्या है?
- 36:59ज़रा सोचना बीज की वास्तविकता क्या है?
- 37:04बीज को पता नहीं, ऐसे ही आपको भी पता नहीं है कितनी पोटेंशिअल टी
- 37:11तुम्हारे में है, यह तुम्हें पता नहीं जैसे बीज को नहीं पता।
- 37:17कि मेरे में वट वृक्ष बनने की संभावना है, मेरे में वृहद आम का
- 37:22वृक्ष होने की संभावना है और मीठे फल देने की संभावना है।
- 37:26इट्स जसपोसित पोटेंशिअलिटी इन दी शील्ड गुठली को नहीं पता के मेरे
- 37:33भीतर कितना वृहद। आम का वृक्ष छुपा हुआ है, ऐसे ही
- 37:38तुम्हें पता है तुम बीज हो, लेकिन वो परमात्मा है, तुम्हारे भीतर
- 37:44परमात्मा का बीज छुपा हुआ है पोटेंशिअल्टी ऑफ अमनिप्रेज़ेंट
- 37:50अमनिपोटेंट अमनिशरण। तुम्हारी भीतर संभावना है, बस उन
- 37:58संभावनाओं को प्रकट करना और अंकुरित और फलीभूत कर ले।
- 38:08तुम भाग्यवान हो जाओ उसे ही भगवान कहते हैं।
- 38:15संत कुंभ जो हर परिस्थिति में उसके द्वारा दी गई हर प्रस्थिति
- 38:22वह बुरे से बुरा लम्हा हो, वह अच्छे से अच्छा धर्म?
- 38:27जो न अच्छे से अच्छे लम्हे में उतेजित हो, न बुरे से, बुरे लम्हे
- 38:32में दुखी हो, शोक न करे और हर्ष भी न करे, सहज बना रहे।
- 38:38यही तुम्हारी आत्मा का स्वभाव है और यह तुम अपनी।
- 38:47प्रज्ञा से जानू उस प्रज्ञा में स्थित हो के जानू किताबों से
- 38:56प्रारूपों से लोगों से प्रवचनों से सुन सुना के पड़पड़ा के।
- 39:05बता देना प्रसारित करनातु के यंत्रों का काम होता है।
- 39:10जैसे अब मैं बोल रहा हूँ और ये यंत्र ब्रॉडकास्ट कर रहा है तो ये
- 39:18यंत्र कहे कि मैं हूँ परमात्मा तो झूठ बोलता है।
- 39:23अगर ये यंत्र कहे तुम तो ऐसे ही सुन रहे हो न?
- 39:28लेकिन ये थोड़ी बोल रहा है जब मैं चला जाऊंगा, ये कहाँ भूल पायेगा
- 39:36ये बोलता है क्योंकि मैं हूँ इसमें जब मैं चला गया इससे वायरस
- 39:41को छोड़ के। यह सांस भी नहीं भर पाएगा।
- 39:46तुम बोलने की बात करते हो, तुम समझाने की बात करते हो नहीं, यह
- 39:52यंत्र की तरह है। जीस दिन ऐसा समझ लेंगे उस दिन
- 39:56इनकी सारी उपाधियाँ। सारा ज्ञान, सारी सूचनाएं बेकार
- 40:03हो जाएंगी। उस दिन ये सिर्फ यंत्रवत् काम
- 40:08करेंगे जैसे अब ये यंत्र काम करता है, मैं चाहता हूँ ये बोलें, ये
- 40:13बोलता है मैं चाहता हूँ क्या बोलें, वह है ये बोलता है।
- 40:19मैं चाहता हूँ ये ना बोले मैं बाहर चला जाऊंगा, नहीं बोलेंगे जब
- 40:23मैं भीतर चला जाऊंगा अपने आप में नहीं बोलेंगे जब बोल नहीं सकेगा
- 40:28ये है मात्र यप्त्र है इसको मत बूझने लग जाना मेरी बात को थोड़ा
- 40:33गहरे से समझना। बहुत से लोग कहते हैं बाबा जाने
- 40:39जोने की बात मत किया। मैंने कहा फिर तुम मेरे से ही
- 40:42चिपट गए हो, तुम अपने शरीर से चिपटे हुए हो, तभी तुम्हें भाग
- 40:52उठता है कि तुम बाबा छोड़ के मत चले जाना।
- 40:56मैं तुम्हें ये कहता हूँ तुम मूल रूप के बंधन को काट दो, तुम ये
- 41:01जान लो कि तुम शरीर हो नहीं और ये सत्य है आध सच जुगाध सच एबी सच
- 41:08नानको से भी सच क्या तुम शरीर नहीं हो?
- 41:11तुम मन नहीं हो? ये जानना तुम्हारा अंतिम ध्येय है
- 41:18और फिर कोई ड्रामेबाजी ना होगी। कोई सर्कस ना होगी, कोई लाल पीले
- 41:29दाढ़ी नहीं रंगी जाएगी। कोई बकवास नहीं करोगे राधे राधे
- 41:34करो ना ही दूसरों को करने के लिए प्रेरित करोगे बकवास को कौन बोलता
- 41:41है गंध को कोई फलाता है गंध को तभी वो फलाता है जब उसे पता नहीं
- 41:47होता है गंध है। जीसको ये वो तो गंध को गंध समझ के
- 41:53फैलाता है। गंध को गंध समझ के फैलाता है उसको
- 42:00खुद को ही नहीं पता की ये गंध है, गंदगी है, वो समझता है की ये गंध
- 42:05है यही वो मार खा जाता है। दो वो मुझे कहते हैं, आप क्यों
- 42:12बोलते हो? बस मेरा महत इतना ही कारण है तुम
- 42:20न समझोगे, आने वाले मूड को ही समझ जाएगा कौन जाने किसके हृदय में
- 42:25मेरी बात उतर जाएगी। ये पक्के खिलाड़ी हैं नहीं
- 42:30फूटेंगे तो शायद आने वाला कोई अंकुर होने वाला बीज फूट जाए।
- 42:36मेरी कोशिश है मात्र आगे जो तो तू पा वे साई पालिका तू सदा सदा।
- 42:52श्रीकृष्ण, गोविंद, हरे मुरा ए नाथ नारायण।
- 43:08यन वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद, हरे मुरारी हे नाथ नारायण
- 43:21वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद। अरे मुरारी एनाथ नारायण वासुदेव
- 43:34पितुमात स्वामी सखा हमार पितुमात स्वामी सखा हमार।
- 43:46हेनाथ नारा धन वासुदेव, श्रीकृष्ण भावविन्द नरे मुरारी हेनाथ नारायण
- 44:02वासुदेव। हाँ, धन्यवाद।