Latest / Baba ji Vijay Vats / 9 Mar 25 - अंतिम आदेश: जो होता है होने दो, जब होता है होने दो | परमात्मा कर्ता नहीं है। जपुजी साहिब 25
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- 0:12भवानी प्रसाद बाबा हमारे लिए अंतिम आदेश क्या है?
- 0:31अंतिम आदेश ध्यान से सुनना। एक एक शब्द को लक्ष्य को हर को
- 0:46पूरे प्राणों से आत्मसात कर लें। जो होता है होने दो ये तो मैंने
- 1:02सजा ही को, लेकिन एक मेरा शब्द आय दे दो।
- 1:16जो होता है होने दो। यह तो बहुत से संतो ने कहा आई
- 1:24दूसरा शब्द स्नेह जिससे आपकी तकदीर बदल जाएगी वो है।
- 1:35जो होता है होने दो जब होता है होने दो, जो होता है होने दो जब
- 1:48होता है होने दो। तुम जल्दबाजी में किसी घटना को
- 1:59घटनाने की चिष्टा मत करो अगर तुम कहते हो कि अभी हो।
- 2:10जाए। उस अभी हो जाएंगे तुम्हारा चित्र
- 2:21दो एक। तुम विधान के अनुरूप नहीं चल
- 2:29सकोगे। प्रत्येक घटना के घटित होने का
- 2:39समय समय से पहले और समय के बाद। वो घटना घटित होती।
- 2:56यह प्रकृति का स्वभाव है जो भवानी प्रसाद।
- 3:06तुमने आज अंतिम संदेश पूछे तो इसको और व्यस्त रखना आत्मस्त रखना
- 3:22जो होता है होने दो। जब होता है होने का घटनाओं को
- 3:29खेंच, खोज के जल्दी कटवाने की चेष्टा न करो या घटनाओं को खेंच
- 3:37खेंच के देरी से घटना। करवाने की सिस्टर येस एक व्यक्ति
- 3:56बीमार थोड़ा। हॉस्पिटल लाइफ तुम जल्दबाजी में
- 4:10करना फिर जल्दी से ठीक कर दो, ये है जल्दबाजी।
- 4:22घटनाओं को समय से पहले होने पर इनके पास कोई डाका नहीं है।
- 4:31मृत्यु तुम चाहते हो। कि मेरा दुश्मन जल्दी मज़ा और
- 4:43मेरा मित्र श्रद्धा जीवित रहे घटनाओं को पहले या बाद में।
- 4:56इच्छा रखने वाला व्यक्ति कभी उस रहस्य को पीता जो घटनाओं को घटित
- 5:11होने देता है। देश काल और समय के अनुरूप जीस देश
- 5:18में होना हो। जीस समय में होना जीस काल में
- 5:24होना वो घटित हो जाएगा हम उसमें कोई व्यवधान प्रणाम करेगा।
- 5:40यही स्वभाव परमात्मा है। परमात्मा मात्र साक्ष्य मुझ कल
- 5:52किसी ने पूछा बाबा? आप स्टेप ब्य स्टेप हमें बहुत
- 6:03सुन्दर बात पढ़ा रहे हैं। पहले आपने कहा मुर्शीपत अच्छा
- 6:12करोगे, अच्छा भरो, बुरा करो। बराबर तो हमने अच्छा करना शुरू।
- 6:26फिर आप क्यों करते हो जो करता है पर बात करता है।
- 6:30तुम हो ही नहीं और ये सत्य भी है। तुम हो ही नहीं।
- 6:42या कह दो कि तुम ही हो मेरे कहने का मकसद सिर्फ इतना कि वजूद एक
- 6:52आकार उस एक को मैं कह। उस एक को तो क्या ज़रा भी तो फर्क
- 7:02नहीं पड़ता। तीसरा आपने कहा ना तुम करते हो ना
- 7:13परमात्मा करता हो अब थोड़ा इसके ऊपर।
- 7:21चर्चा करने का कष्ट करें। हमारी जड़ें हिल गई।
- 7:32ठीक है, मैं स्टेप ब्य स्टेप ही चलता हूँ।
- 7:36देखिए अगर छोटे बच्चे को अनारना सिखाया जाएगा।
- 7:43और बड़े बच्चे को एम् अनार छीना ना जायेगा तो वह एम् अनार में ही
- 7:50गुस्सा रहेगा। एम् अनार कहना भी होता है एम्
- 7:57अनार छीनना भी होता है। ठीक से जोड़ पाओगे और ठीक से जोड़
- 8:10पाओगे। समझाने के लिए सीढ़ी दर सीढ़ी
- 8:20स्टेप ब्य स्टेप थोड़ी दर थोड़ी चलना ही पड़ेगा।
- 8:29अन्यथा यात्रा संभव। नहीं है।
- 8:38पहले मैंने कहा तुम हो तुम कर सकते हो, आप तो दीपो भावा देखिए
- 8:45पुरुषार्थ रहते अपना कर्म कीजिए। अच्छा करो, अच्छा भरो, बुरा करो,
- 8:56बुरा करो फिर। मैंने कहा तुम तो हो ही नहीं।
- 9:08जैसे जैसे तुम ध्यान में गहरे उतरोगे।
- 9:12वैसे वैसे ऐसे ही अनुभव आएँगे। बिलकुल सेम मिलते जुलते, फिर तुम
- 9:19पाओगे नहीं, मेरा मजूद हैन है यह तो करने वाला कोई होना है।
- 9:30घटनाएं तुमसे फिसल फिसल जाएं तुम चाहोगे कुछ बनना बन जाओगे कुछ
- 9:45घटनाएं तुम्हारे हाथों में नहीं तुम्हारी पकड़ से बाहर।
- 9:55तो वहाँ मैंने कहा तुम कुछ नहीं करते परमात्मा तीसरा, मैंने कहा
- 10:05ना तुम करते हो ना परमात्मा करता है, घटनाएं मात्र घटित होती हैं।
- 10:16डूर नहीं है यहाँ करने वाला नहीं है ना तुम, ना हैपनिंग होती है
- 10:24डूर कोई तुमने कहा पुत्र भवानी परेशान।
- 10:36विस्तृत चर्चा की। परमात्मा कण कण में व्याप्त है और
- 10:47परमात्मा का स्वभाव साक्ष्य। और ध्यान रखो, एक बात जब कोई
- 10:57व्यक्ति साक्षी होता है तो वह स्टिल होता है, वह अकंप होता है,
- 11:03ठहरा हुआ होता है, वह शिखर होता है।
- 11:11वह शांत होता है। अगर परमात्मा करता बन जा तो वह
- 11:21अपना साक्षित। और जैसे ही परमात्मा ने साक्षी को
- 11:32रखा है सूरज पृथ्वी से जाँच रहेगा।
- 11:40पृथ्वी चंद्रमा से चंद्रमा, बृहस्पति से सारा ब्रह्मण्ड।
- 11:47एक दूसरे से टकरा के ध्वस्त हो जाएगा।
- 11:52मैं है जब परमात्मा के शाक्तित्व के होने का ये परिणाम परमात्मा
- 12:01जीस दिन साक्षी न रहे। उस दिन न्यायकारी भी नहीं रहे।
- 12:10क्योंकि जिसने अपनी नगन आँखों से चीजों को सटीक ठहरकर देखा नहीं वह
- 12:17न्याय भी कैसे करेगा? न्याय तो वही करेगा जो बिल्कुल।
- 12:26अब कम हो के सारी चीजों को परिपूर्णता में घटनाओं को
- 12:31निहारेगा। फिर ही तो न्याय।
- 12:34करेगा तो परमात्मा साक्षी सदा सक्षिक्षा।
- 12:46है और रहेगा। इसलिए परमात्मा करता नहीं।
- 12:53दूसरा जो करता है वह भरता है, जैसा करता है वैसा भरता है।
- 13:08अगर परमात्मा करता बन गया। तो यहाँ तो ज़ुल्म भी होते।
- 13:20यहाँ तो बड़े बड़े दानी भी पड़े। यहाँ तो सेवक ही बहुत है, यहाँ तो
- 13:30हत्यारी भी बहुत है गड़बड़, हत्या कमा।
- 13:46आप कहीं खड़े किसी चीज़ को निहार रहे हैं अचानक से आप भागने लग।
- 13:57गए क्या हुआ? तुम्हारा निहारण समाप्त हो गया,
- 14:09तुम दौड़ने लग गए। चित एक तरफ जाता।
- 14:14है जब तुम दौड़ोगे। तो साक्षी नहीं रहे और जब तुम
- 14:26दौड़ से विहीन होगे तभी साक्षी रह पाओगे आज अनिल अनाज अनाहत।
- 14:41जुग जुग, एक्विस आदि में आद अनाथ अनिल अनाहत अनाहत उसका विनाश नहीं
- 14:59होता। वह रंग रहित है।
- 15:02वह शुरू से भी था और अंत तक भी रहेगा।
- 15:07आज अनाथ अनिल अनाहत जुग जुग एकोविट।
- 15:19सदा साक्षी रहता है परमात्मा जीस घड़ी उसने परमात्मा ने अपना
- 15:29शख्सित्व खो दिया। जैसे तुम जब दौड़ते हो तो साक्षित
- 15:39व नष्ट हो जाता है। साक्षित के कारण ही यह भ्रमण
- 15:44घूंसा हुआ है। आपस।
- 15:46में बस एक साक्षी। ही है, जो प्रत्येक अणु को दूसरे
- 15:54अणु से जोड़े बैठा है। यह संरचना आप उसमें गुत्थी हुई,
- 16:03किसी को भ्रमण करें तो फिर मैंने कहा ना तुम करते हो ना परमात्मा
- 16:17करते हो, क्योंकि अगर परमात्मा करे।
- 16:21तो करने वाला दुखी। हो जाता है।
- 16:25तुम करोगे तो तुम दुखी हो जाओ, परमात्मा करे तो परमात्मा दुखी हो
- 16:33गया। अब वे तीसरे प्रॉडक्ट से आया
- 16:37घटनाएँ। होती।
- 16:40अगर तुम भी ऐसा ही समझ के चलो, ऑल दी, इवेंट्स आर, जस्ट हैपनिंग सभी
- 16:49घटनाएं सिर्फ हो रही हैं मात्र पूर्व निर्धारणों को एक बार छोड़
- 16:57दूँ। प्री डस्टाइन्ड को एक बार छोड़ दो
- 17:02ऑल दी इवेंट्स आर प्री डस्टाइन्ड इनको छोड़कर ऑल दी इवेंट्स आर
- 17:09हैपनिंग मीर हैपनिंग जस्ट हैपनिंग्स खोट भाग है बस।
- 17:19करने वाला। कोई भी नहीं।
- 17:21सूरज घूमता है, कोई घुमाता नहीं, पृथ्वी घूमती है, अपनी धुरी के
- 17:29आसपास घूमती है और सूरज के आसपास भी घूमती है, बस घूमती है कोई
- 17:35घूमाने वाला है नहीं। रोज़ सूरज उगता है रोज़ सूरज
- 17:40छेडता है कोई उगाता नहीं है कोई छिपाकर ऑल दी इवेंट्स अरे जस्ट
- 17:50गोइंग ऑन हैपनिंग घट रही है। क्योंकि जॉब नहीं।
- 17:59करेगा वह बढ़ेगा और वह दुखी हो जाएगा तो न फिर मैं तुम करता है न
- 18:12तुम करते हो होता है। होता है तो तुम क्या करते?
- 18:24तुम तो हो ही नहीं पर मत में क्या करता पर मत में सक्षित पर मत में
- 18:34सक्षित करता है। तुम हो ही नहीं, तुम इसीलिए कुछ
- 18:39करती तुम सर्कमस्टैंसेस के अधीन हो और तुम्हें जो भी कुछ होता है
- 18:46वह सर्कमस्टैंसेस के अधीन होता। है।
- 18:55फिर क्या गरीबी, क्या हत्या का कतल गारक क्या बलात्कार या एक
- 19:01बड़ा मजेदार स्वाद, ये भुखमरी, ये मैं रोज़ बोलता सेठोनी तुम्हारा
- 19:13धन? इकट्ठा कर ले।
- 19:15बोलता हूँ मैं ये भी बोलूँगा मैं हर आयाम से आई स्पीक फ्रम ऑल दी
- 19:28डायमेंशन्स मैं ये भी बोलेंगे तुम भूखे क्योंकि तुम्हारा भोजन किसी
- 19:41ने छीन लिया, लेकिन मैं कुछ और भी बोलेंगे, बहुत कर में लेखे आना
- 19:56जाए। उस पर्वतकार की इतनी मैहर है कि
- 20:03वह लिखी नहीं जा। सकती उसकी दया और उसकी करुणा और
- 20:13उसकी कृपा, उसकी दांत इतनी। कि वह लिखी नहीं जा सकती।
- 20:23असित गिरहसेमम स्यात के जलम सिंधु पात्रे सुरतर्वर शाखा लेखनी पत्र
- 20:31मृवी लिखतयतिगृहित व शारदा सर्वकालम ततपी सब गुणना में से
- 20:39पारबना ये हाथ सारे संमंत्र को शाही बना लिया जाए, सारे पर्वतों
- 20:48को उसमें घोल दिया जाए, काजल बन जाए, थपेड़ों की कलमें बना ली
- 20:54जाए। धरती को कागज़ बना दिया जाए और
- 21:01उसकी महिमा का गुणगान खुद सरस्वती लिखे तो जानने वाले कहते हैं तदपि
- 21:09तब गुणा ना मीश फिर भी उसके गुणों को।
- 21:14तदपि तब गुणा नाम इस पर हम न याद उसका कोई पार न है, वह लिखी नहीं
- 21:23जाएगी, उसकी इतनी करपा घटनाएं घटती।
- 21:39कौन कटवाता है? भूत करण लिखे आना जा है सच्चा
- 21:47दाता तिल ना कमाएं वह परमपिता परमात्मा प्लेशामात्र भी तिल के
- 21:57समान भी। उसमें लालच नहीं है तमाम वह तुमको
- 22:04लुटाता ही रहता है अपना रास अपना सुख आनंद।
- 22:18और। उसको पानी की ज़रा भी जिज्ञासा
- 22:21नहीं है क्योंकि उसमें कोई कमी नहीं है, वह पूर्ण है और पूर्ण को
- 22:28कभी कोई कमी होती है। पूर्ण का अर्थ ही यही है।
- 22:33कि जिसमें कोई कमी शेष न रह गई। कहते मंगणी जोध अपा कितने बड़े
- 22:40बड़े योद्धा उससे बल मांगते हैं? कहते गणित नहीं विचार।
- 22:50वो कितने हैं योद्धा गिनती में कुछ नहीं कहा जा।
- 22:54सकता। व्यर्थ योद्धा उससे बल मांगते हैं
- 23:02क्योंकि वह सर्वशक्तिमान उसमें से कितनी भी शक्ति निकालो।
- 23:10ज़रा भी कम नहीं इसलिए कबीर ने कहा छिड़ी जोंच भर ले, नदी न हटे
- 23:18हो, परमात्मा में से पूर्ण में से पूर्ण को निकाल लिया जाये तो
- 23:25पूर्ण ही शेष बचता है। कीर्ति मंत्री ज्योत अपार केतिया
- 23:34गणित नहीं विचार केतथे खप तू ही बेकार कितने बेचारे खपते रहते हैं
- 23:43सुबह शाम तक। उठो जल्दी से नहाओ धोओ जल्दी से
- 23:52दफ्तर जाना काम करना है, बच्चों को पालना है, स्वयं के शरीर का
- 24:03पोषण करना है। जरूरतों को पूरा करना है और शोक
- 24:08भी निभाने केत्ते खब तुट ही बेकार केत्ते ल ल मुकर फ।
- 24:22कितने? यह राजनेता हूँ कांग्रेस तुमसे
- 24:27वोट तो मांग लेते हैं कीत्ते लै लै मुक्करप मैं ये करता हूँ मैं
- 24:35वो करता हूँ आई विल मेक मेक दी अमेरिका ग्रेट अगेन।
- 24:44कितने भाई तकरे केकते लह लह मुकर पा लेकिन मुकर जाते कोई ग्रेट
- 24:54नहीं बन पाता। ये भी क्या ग्रेट?
- 25:01अगर तुम्हारे पास है तो पहले का अमरीका ग्रेट क्योंकि ग्रेट वह
- 25:08हुआ करता है। जिसके पास ज्यादा हो वह बाट दे आई
- 25:17मेक। अमेरिका ग्रेट वह जो वंड छके
- 25:33ग्रेट वह नहीं जो अपना बड़ा मज़े से खाना पीना अयाशी होती है।
- 25:44और फिर लोगों का गला घोंट दें। सिर्फ जीने का अधिकार हमें ही है,
- 25:51तुम्हें नहीं यह ग्रेटनेस नहीं है, यह तो निश्चितता की हद है।
- 26:01कित्ते लै लै मुकर्पा केत्ते मूर्ख खा ही।
- 26:10खा देखिए जो सिर्फ कपड़े ही बदलते रहे।
- 26:22साड़ियाँ ही बदलते रहते हैं, कौन तुम्हारी गली में धोखा सोये कौन
- 26:34तुम्हारी गली में रात की ठंडी में?
- 26:39ठीठों ठीठों के मर गया कौन प्यासा, भूखा राज़ को दम तोड़
- 26:47दिया अगर तुम्हारे पास सब कुछ है तो फिर तुम्हारे पास से लाना।
- 27:02कित्ते ले ले मुक्करपा कित्ते मूर्ख खाई खा बस खुद ही खा, खुद
- 27:11ही जहाज पर घूम लिया बहाना कोई भी कर दो।
- 27:20वह खुद ही खाते हैं, लेकिन नानक आपको सुखी होने का मंत्र बता रहा
- 27:28है। नानक आपको वह रस पीने के युक्ति
- 27:36बता रहा है। नानक तुम्हें उस उचाई तक पहुंचाना
- 27:47चाहती हैं कान्शियसनेस की जहाँ तुम आनंदमग्न हो गए हो जहाँ
- 27:54तुम्हारी कोई इच्छा ना बचा हो। कोई वासन ना बचे, कोई कामना ना
- 28:00बचे, कोई योजना ना बचे यह सिर्फ आनंद और आनंद का रस और सुगंध
- 28:11मस्ती का आलम। मत खुशी का वो पल खोया खोया च।
- 28:28खुला आसमान खोया खोया। अच्छा खुला आसमान आँखों में सारी
- 28:49रात जाए गी। तुमको भी कैसे नींद आएगी?
- 29:02हो आसमान। आँखों में सारी रात जाएगी तुमको
- 29:24भी कैसे नींद आएगी वो? खोया खोया चार।
- 29:46जहाँ पर जीस भी भक्ति में कोई भी भूखा सोता।
- 29:50है। जहाँ पर जीस भी बस्ती में कोई भी
- 29:56भूखा सोता है वहाँ बस्ती ही बस्ती से खुदा नाराज होता है।
- 30:05अगर कोई भूखा सो रहा है। और तुम्हारे पास।
- 30:13टंकियाँ भरी पड़ी और तुमने उसे भूखा सोने दिया।
- 30:22कोई ठिठुर के मर गया। और।
- 30:25तुम्हारे संदूकों में रजाइयां बड़ी बड़ी तो तुम गुनहगार इसलिए
- 30:36बाबा नानक कहते वंड चुक। इस गुनाह गाड़ी को अपनी आत्माओं
- 30:44पर बोझ न बनने का तुम्हारे टंक भरे रहे, तुम्हारे गोदाम भरे रहे
- 30:53और कोई भौंक से मरता रहे, कोई ठंडी से मरता।
- 30:57रहे। तो फिर?
- 30:59मस्ती ही मस्ती से खुदा नाराज होता है।
- 31:03उस देश से ही परमात्मा नाराज हो जाता है कि मैंने तुम्हें किया था
- 31:10बाट के खाने के लिए और तुमने क्या हालात करते हो?
- 31:19देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान कितना बदल गया हिंसा
- 31:33सूरज इंसान कितना बदल गया इंसान देख तेरे संसार की हालत क्या हो
- 31:53गई भगवान कितना? बदल गया हिंसा बाबनान कैसे हैं?
- 32:07कितने मूर्ख का ही बस खुद ही खाते रहते हैं।
- 32:18किते पूख किते दुख ऊख सदमा बहुत से लोग ऐसे हैं जो दुख की।
- 32:34और भूख की मार सहते ही रहते हैं। आजीवन केतते भूख दुख सदवार संत
- 32:46कंवर का मैं राजनीति पर बोलता हूँ।
- 32:53तो बहुत से ज्ञानी जनक कमेंट पर बाबा आध्यात्मिक लोक सांसारिक
- 33:01बातों पे नहीं बोला पर्थ केते पूख दुःख।
- 33:15सद्मार भूख और दुःखों की मार झेलते हुए व्यक्ति कितने ही
- 33:21तड़पते रहते हैं, कोई ठंडी से चढ़वा।
- 33:28कोई भूख से तड़पा कोई प्यास से तड़पा अगर कोई तड़पा उसके संसार
- 33:37में आकर और तुम्हारे ड्रंक भरे रहे तुम्हारे बैंक भरे रहे
- 33:44तुम्हारे खेत खलिहान। गोदाम भरे रहे तो तुम्हें अल्लाह
- 33:51श्राप दे, वहाँ बस्ती ही बस्ती से खुदा नाराज होता है, लेकिन क्या
- 33:58किया जाए? पूछा है शब्द साथ ही निपटा क्या?
- 34:16परमात्मा सबके लिए देता है? हाँ।
- 34:19बिलकुल परमात्मा किसी एक के लिए नहीं देता।
- 34:25तुम छीना छबती करके, जिसकी लाठी उसी की भैस ले जाते हो।
- 34:31तो यह तुम्हारी बेईमानी है मैंने। एक छोटा सा सिद्धांत बनाया था।
- 34:43मैंने कहा छोड़ो मार्ग का स्ववाद भी कामयाब नहीं होगा, यह तुम्हारा
- 34:50पूँजीवाद भी कामयाब नहीं होगा। कामयाब क्या होगा?
- 34:59कामयाब होगा। जरूरतवाद सबकी जरूरतें पूरी कर और
- 35:08परमात्मा इतना देता है कि तुम्हारे पास फिर भी बहुत बचे
- 35:12जाएंगे। कितना चाहिए व्यक्ति की जरूरतें
- 35:16कितनी खाने को रोटी बहने को कपड़ा, सोने को मकान, बस और
- 35:28परमात्मा ने तो इतना दिया है तो मैंने एक तीसरा नुकसान।
- 35:36बहन नुस्खा आज बताता हूँ ना पूंजीवाद ना मार्कस्वाद समानता तो
- 35:50यहाँ हो ही नहीं सकती किसी को एक रोटी की भोग?
- 35:54और मेरा 100 रोटी खा जाता था और मेरी बुआ यही बैठी रहती थी।
- 36:01मैंने पूछा बुआ तू चौथे दिन यहाँ बैठी रहती है और छः छः महीने जाती
- 36:07हूँ आखिर कारण बता क्या कहते बेटा विजय?
- 36:17मैं बताऊँ 13 फूफर 100 रोटी खा मैंने कहा 100 रोटी के दो नहीं
- 36:26कहते 100 फिर। फिर अब तुम समझदार हो, मैं यहाँ
- 36:32क्यों बैठी हूँ? कौन पकावे और सुबह की पकाती हूँ
- 36:43तो शाम का आटा बूँदना शुरू कर सकते।
- 36:48ये है मेरा कर नहीं यहाँ बैठने का ये तुम्हारी रामलीला देखनी है
- 36:52मैंने विजय का राम करूर देखना है ये तो वहानी है तो फिर असली बात
- 36:58क्या है? असली बात ये है तेरा फूंपर सो और
- 37:02खाता। भी था।
- 37:05तेजपाल उनका नाम था। मैं हैरान हुआ मुझे मैंने खाते
- 37:12हुए नहीं देखा उसे मेरे बुआ के शव और वो भी ऐसी मोटी मोटी का भूत के
- 37:20पिछवाड़े के। हरे राम उसका।
- 37:30पेट है, सुरंग है, अरे सोर उठेगा सेकंड थ केते भूख दुख सो दबाव है।
- 37:44क्रियों को यहाँ संसार में भूख की मार पड़ती है और तुम्हारे गोदाम
- 37:49बने, दुःख हसा। कितने व्यक्ति दुखी?
- 37:55हैं, देखिए जो अभाव के कारण दुखी हैं, उनका दुख हारा जा सकता है।
- 38:05लेकिन एक ऐसा भी मुकाम होता है बुद्ध जैसा अभाव तो कोई नहीं
- 38:11होता। मेरे पास अक्सर मिक्सर लोगों के।
- 38:18आदेश। कोई कहता बाबा, मेरी बच्ची बाबा।
- 38:23मेरा बच्चा, बाबा। उसको ठीक कर।
- 38:28दो ना तो हमारे पास क्या कमी? है।
- 38:37कोई कहता है है तो फिर कुछ लेकिन फिर भी।
- 38:43कोई अज्ञात पीड़ा हमें सता रही है बापा उस अज्ञात पीड़ा से हमें
- 38:49मुक्ति दिला दो, तुम इतने अनंत में क्यों हो यह समझा दो,
- 38:58तुम्हारा मन कहीं जाने को नहीं करता।
- 39:01हमारा मन तो भटकता रहता है। कुल्लू मनाली देख लो शूट जर्नी
- 39:06देख लो उस मंदिर मस्जिद में चला जाऊं उस गुरुद्वारा में चला जाऊं
- 39:17उस हिल स्टेशन पर चला तुम्हारा मन नहीं भटकता मैंने करने।
- 39:25तो मेरे पास दो तरह के लोग आ जाते हैं मिक्सेशन कोई भूख की मार, कोई
- 39:32दुख की मार तो भूख की मार तो हम ठीक कर सकते हैं हमारे हाथों में।
- 39:43परमात्मा ने इतना दिया हमारे लिए मगर बाँट के खाये बाबा नानक का
- 39:52सिद्धांत, वंड इच्छा हो और जब तुम्हारे अब पीठ भर जाए तो उसका
- 39:59सुकराना अदा हो। नाम जप।
- 40:11लेकिन जो दुख की मार है तो बोध छोड़ देते हैं।
- 40:22भरा पूरा साम्राज्य तख्तों, तास, जमीन, जायदाद, सुंदर स्त्री पुत्र
- 40:30छोड़ के चले जाते हैं दास दासी। उसको दुख की मार उसको अभाव की मार
- 40:41नहीं थी। ये अभाव पूरे करके पता चला इसलिए
- 40:46मैं तुमसे कहता हूँ अभाव को पूरा कर लूँ ताकि तुम्हारी।
- 40:54यह सोच समाप्त हो जाए कि मैं अभाव के कारण बहुत से लोगों को यही
- 41:05होता है। हमें देखने को नहीं मिलता।
- 41:08फ़िल्म हमें घूमने को नहीं मिलता, हमें खाने को नहीं मिलता, वो देखो
- 41:12वो तो पहले फॉर नहीं आ जा रहा। वो तो शीष में गया उसके पास तो
- 41:21इतना खजाना है तुम दूसरों को देख देख कर मरते रहते, दुखी होते रहते
- 41:29तो बाबा कहते है कहते पूख दुख? सगबा मार कईयों को तो सारी उम्र,
- 41:38भूख और दुख की मार पड़ती है भूख की मार तो तुम सेठ लोग ठीक कर
- 41:45सकते हो। दुख की मार।
- 41:52सेठ ठीक नहीं कर सकता बल्कि सेठ तो खुद ही दुखी हो जाता है।
- 42:01दर्द बढ़ता ही गया झूँझूँ दवा का जीतने जीतने तुम सेठ होते जाओगे
- 42:09उतने उतने तुम्हें भीतर से अपना खालीपन पोखलापन नजर आता है।
- 42:20भूख परमात्मा की देन नहीं, दुःख भी परमात्मा की देन नहीं, दुःख भी
- 42:33तुम्हारा ही उपार्जन है। भूख भी तुम्हारा ही उबार बना
- 42:46क्योंकि तुमने व्यवस्थाएँ ही ऐसी बना ली जिसके कारण तुम्हें भूखा
- 42:54रहना पड़ेगा। कुछ लोग भूखे रह जाएंगे।
- 42:58व्यवस्थाएँ ही ऐसी बनाली लेकिन बात आती है दुख की तो हम चले थे
- 43:13पहला अप दीपो भव। क्योंकि तुम ही अपनी जगत को रोशन
- 43:18कर सकते दूसरा। तुम नहीं कर सकते परमात्मा ही कर
- 43:25सकता है क्योंकि वो ही करता है। जिसने बनाया वो ही चलाता है लेकिन
- 43:31मैंने तीसरा का वो भी नहीं करता क्योंकि अगर वो करेगा तो वह भरेगा
- 43:37दुखी भी। और उसका ध्यान करने में हो जाएगा।
- 43:42उसका ध्यान साक्षित से हट जाएगा। तो फिर कौन करता है, करता कोई
- 43:47नहीं घटनाएं घटित होती हैं। बस डू और कोई अब तुमने कहा,
- 43:57पुत्र। विस्तार बताइए, विस्तार ही है
- 44:03परमात्मा भी नहीं करता सर्कमस्टैंसेस करवातें हैं,
- 44:08घटनाएं घटती हैं, सर्कमस्टैंसेस के कारण सर्कमस्टैंसेस कौन पैदा
- 44:14करता है? कोई भी नहीं।
- 44:16सर्कमस्टैंसेस पैदा हो जाती हैं। जैसे गुस्सा किसी ने दिलाया पता
- 44:25ही नहीं चलता। सर्कमस्टैंसेस ऐसे बन गए के
- 44:32गुस्सा आ गया। कतल किसने करवाया किसी ने नहीं सर
- 44:39कम से ऐसी बन गई कतल हो गया। फिर हमें जीने का ढंग बताइए ना
- 45:03मैं करता हूँ ना मैं कर सकता हूँ, ना परमात्मा करता है, ना परमात्मा
- 45:07करता है। ना परमात्मा कर सकता है क्योंकि
- 45:14अगर करेगा तो उसका शाशित्व नष्ट तो घटनाएं घटती हैं ये हम जहाँ तक
- 45:20समझा गया बाबा अब आगे चलिए। केत्या पूक दुख, सदमा देखिये बाबा
- 45:28कहते। हैं।
- 45:29है भी दांत तेरी ताकत। या किसी अडानी के दे नहीं।
- 45:41मैं स्टेप ब्य स्टेप करूँगा या किसी अंबानी के देने।
- 45:50जो मिल गया। उसी को मुकदर समझ लिया, जो मिल
- 46:02गया उसी को मुकदर समझ लिया जो खो गया आमे।
- 46:12उसको बुलाता चला गया। बर्बादियों का शो मनाना फजूल था।
- 46:29बर्बादियों का शो मनाना फजूल था बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया
- 46:41मैं। भी जब शरीर से बाहर हो जाऊ।
- 46:47मेरा यह है इन्स्ट्रुमेंट ठहर जाए, हाथ कम न करे तो मुझे शीशे
- 46:56के भीतर दफन करके मत रखो कि मैं फिर से आऊंगा, लंबी समाधि में
- 47:02जाओ, या तो मेरे साथ बदला हो जाएगा।
- 47:06मुझे दफन कर देना इसलिए मैंने इन मूर्खताओं की मूर्खताओं को देखते
- 47:12हुए अपनी खबर पहले ही बनवाई ताकि तुम्हें कोई मौका ही न मिले जैसे
- 47:21जैसे संसार की रंगत देख रहा हूँ। वैसे वैसे बदलाव कर रहा हूँ तो
- 47:29बर्बादमियों का जश्न मना, तुम कहोगे हम तो बर्बाद अब किसके पास
- 47:37चल, किसके पास रोएंगे, कौन सुनेगा यह सब दुखी?
- 47:44बात तो ठीक है तुम? लेकिन मैं जब तक हूँ तब तक तू ये
- 47:51मत सोचो और जब मैं चला जाऊं बरबातियों का जश्न मनाना फजोल था।
- 48:07बर्बादियों का शो मना न फजूल था कहीं कहीं शब्दों पर हो जाता है,
- 48:14कोई बात नहीं बर्बादियों का जश्न मना ता चला गया।
- 48:23तो तुम नाचना तुम हँसना तुम लय वध होकर संगीत में खो जाना एक
- 48:33अभूतपूर्व घटना घटी वह व्यक्ति वह बूंद जिसके ऊपर कभी समुद्र उतरा
- 48:41था। वह आज समुद्र ही हो गया है अब तक
- 48:52थोड़ी सी। कणसवा की थी।
- 48:56आज वो कणसवी मच गई, अब थोड़ा सा। शरीर बांटे हुए थे, मजबूरी थी अब
- 49:07ये कनक से भी खत्म बुद्ध भिक्षा मार्ग में जाते थे, वृद्ध हो गए
- 49:20थे, एक बस्ती उसमें खोदी जाती थी। वह बस्ती बैठते होंगे?
- 49:30लुच्चे, लफंगे, गुंडे, बदमाश ऐसे लोगों की थी।
- 49:37शरारती तत्व भी होते हैं। परमात्मा की सृष्टि में सब कुछ
- 49:42होता है। रंग रंग की भांति भांति की दुनिया
- 49:47बनायीं। भगवान इसलिए इतनी रंगदार है इसलिए
- 49:52इतनी मजेदार है। एक तरह का रंग हो तो मन ऊभ जाएगा।
- 50:01और जो लोग एकत्र के रंग का राष्ट्र बनाना चाहते हैं, वह
- 50:07मूढ़े हैं, उनको मैं मूर्ख कर गुरस्ता में सब प्रकार के रंग
- 50:16होते हैं, सभी सुरंधें होती हैं, मुरझाए फूल भी होते हैं।
- 50:22और खेले खेले। फूल भी होते हैं और कलियाँ भी
- 50:25होती हैं जो अभी फूल बनने को उत्सुक होती है।
- 50:30सब होता है। तो बोधी धर्म कहने लगे प्रभु मैं
- 50:46जाऊंगा, तुम वृद्ध हो गए हो, तुमसे चला नहीं जाता, मुझसे देखा
- 50:51नहीं जाता, तुम मत मांगने जा करो, आज से मैं जाऊंगा।
- 51:00बोध ही धर्म का बोले बुध बोले नहीं नहीं तुम नहीं जाओगे, मैं ही
- 51:11जाऊंगा वहाँ। नहीं मैं जाऊंगा, तुमसे नहीं चला
- 51:15जाता, मुझे तकलीफ हो तुम थोड़ा रंगिड़ा के चलते तुम्हारा शरीर भी
- 51:21कमजोर 80 साल जिए बुध लेकिन फिर 80 साल भी उनको जहरीला तत्व गलती
- 51:29से कहला। दिया।
- 51:38लेकिन बोधी धर्म तो अड़ गए बोधी धर्म कैसा बनते हैं मैं?
- 51:49हे प्रभु मैं जाऊ हे पर्व दीगार मैं जाऊ।
- 52:03आप मुझे वहाँ जाने क्यों नहीं देते?
- 52:05बहुत ही धर्म ने कहा वहाँ लोग दुष्ट है वो तुम्हें पत्थर।
- 52:14को तुम्हें ज़लील करेंगे। तुम्हें गालियां निकाली वह
- 52:20तुम्हारे मुँह पर थूकेंगे को तुम्हें आटे सेंट बोलेंगे बने
- 52:28फिरते हैं, संत मांगने आते हैं हमारे द्वारे।
- 52:34तुम काहे के संत हो, खुद कमाओ, हट्टे कट्टे पड़े हो।
- 52:40बहुत। तरह की बातें करेंगे।
- 52:42बहुत ही बहुत ही बोले, कोई बात नहीं प्रभु, मैं उन्हें बोलने।
- 52:53दूंगा। और मैं चुपके से गुजर जाऊं, बहुत
- 53:00बोले वो तुम पर थूकेंगे सिर्फ गालियां ही नहीं वो तुम पर
- 53:06थूकेंगे बहुत इधर हम बोले। जैसे आपने अपना माथा पूछ लिया था,
- 53:18मैं भी अपना माथा पूछ लूँगा, अपने पति के साथ बहुत ही तुम मत जाओ यद
- 53:27मत करो, वो तुम्हें पत्थर मारेंगे।
- 53:31लघु बहेगा घर का मुँह। बोधी धर्म बोले प्रभु।
- 53:37बनते मैं पट्टी कर्मा, मैं मर्म लगा लूँगा, हल्दी लगा लूँगा, कोई
- 53:53लैप लगा लूँगा, लेकिन तुम्हें नहीं जाने दो।
- 53:58मुझे तकलीफ होती है। बूते ने कहा तुम किसी और तरफ निकल
- 54:07जाया करो, हम 50,000 के करीब हैं, तुम किसी और तरफ निकल जाया करो,
- 54:15तुम थोड़े दूर निकल जाए, कहते नहीं।
- 54:20इधर तो मैं ही जाऊंगा, मेरे पत्थर मारेंगे, खून निकलेगा मैं पट्टी।
- 54:30का? वो तो बोले।
- 54:39बहुत ही धर्मजद मत करो, वो तुम्हें मार भी सकती हैं।
- 54:45वो दुष्ट लोग हैं, वहाँ बैठ से आए हैं, तुम्हें आमंत्रित करेंगे,
- 54:52बुलाएंगे। कहते है कोई बात?
- 54:58मैं अनदेखे अनदेखे भाव से चला जाऊं, तुम्हारे शिष्यों बनते?
- 55:07क्या तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं कहते हैं?
- 55:12तुम तुम मेरे सर्व शिष्यों में से?
- 55:21लेकिन वो तुम्हें मार भी सकते हैं।
- 55:26बहुत ही तरम बोला फिर तो बहुत ही शुभ हो खुद कहते कैसे, कैसे शुभ
- 55:37होगा कैसे? ये आखिरी बंधन भी तो
- 55:55जो मेरे अस्तित्व को आपके अस्तित्व में समाहित होने से बाधा
- 56:00बनता है, मैं उसको भी तो कितना अच्छा होगा प्रभु मोक्ष?
- 56:16पूंदी छुपी किस बादल में कोई जाने ना कोहरे ताल मिले नदी के जल में
- 56:33नदी मिले सागर में। सागर मिले कोने से जल में कोई
- 56:46मिले नदी के जल यह आखिरी व्याधा भी खत्म हो गया।
- 57:01क्यों मेरे अस्तित्व को आपके पूर्ण अस्तित्व में एकाकार होने
- 57:07से रोकता यह अंतिम बंधन भी समाप्त हो जाएगा?
- 57:13मैं आपका धन्यवाद कि होऊंगा अगर आप मुझे बेहतर है।
- 57:19तो मैं मर जाऊं इस राह पे मुझे और क्या चाहिए मेरा आखिरी बंधन भी
- 57:26टूट जाएगा सो दैट बुद्ध ने भिक्षा पत्र भी बहुत ही तरम के हाथ में
- 57:41बहुत ही तरम तुम जाओ। और आज से तुम ही जाओगे तुम योग्य
- 57:54हुए तुमने आखिरी बात कही थी बस जो मैं तुम्हें बता सकता था वो यही।
- 58:23कुछ लोग आते हैं, अभावों के कारण कुछ लोग आते हैं हैं तो बहुत
- 58:32चौकीदार बिछाने पड़ते हैं। सुरक्षा गाड़ बढ़ाने पड़ते हैं
- 58:37पैरों के लिए और उसी सड़क पर कोई भूखा मर जाता है और उसी सड़क पर
- 58:45कोई ठिठुर के मर जाता है और उसी सड़क पर कोई गर्मी की ताब ना सहता
- 58:51हुआ लोगों से मर जाता है। और तुम एयर कंडीशन रूम में बैठे
- 58:58हुए लोगों को छलकपट, प्रोग्रामिंग करने के भीतर उलझे हुए।
- 59:06होते हो? एक बात कहूं?
- 59:12बुरा मत मानो और अगर बुरा मान भी गए तो मेरा कह लो मान जाना।
- 59:23मैंने तो कबर खुदवार लेकिन पुत्र तुम भी कुछ नहीं जाओगे।
- 59:34आज नहीं, कल तुम्हें भी मेरी शरण में आना ही होगा।
- 59:46इट एस एन एसेंशियलिटी। यह संभावना नहीं है, यह जरूरत है
- 1:00:02निश्चित रूप से आप मेरे पास आओगे और आपको मेरे पास आना ही होगा यू
- 1:00:12विल। कम टू मी वन।
- 1:00:16डे यू विल हैव टू कम टू मी वन डे? 1 दिन आपको मेरे पास आना ही बस
- 1:00:35यही मजबूरी है। तुम सब कर सकते हो लेकिन एक
- 1:00:41दुखड़ा ऐसा वह तुम दूर नहीं कर सकते।
- 1:00:48उस दुखड़े को दूर करने के लिए वॅन डे यू विल हैव टु कम टु इट मेरे
- 1:00:55पास आना ही। मेरे पास आ नहीं होगा मैं कहाँ से
- 1:01:00बोल रहा हूँ इन गहरी समुद्र की तलहटी से आती हुई आवाज़ों को
- 1:01:08पहचान लेना ए भी दात तेरी दातार कृपया पूख।
- 1:01:18दुख सदमार एबी दास तेरी दास। वो किसी को गुनाहगार।
- 1:01:24नहीं ठहराते। वो नहीं कहते।
- 1:01:30राजनीतिक जिम्मेवार वो नहीं कहते सेठ जिम्मेदार।
- 1:01:37वो कहते हैं है भी दांत तेरी दाता, यह भी तेरी ही दांत घटनाएं
- 1:01:49घटती हैं कि कोई गरीब हो जाता है, कोई कमजोर हो जाता है।
- 1:01:58कोई असहाय असमर्थ हो जाता है। प्रत्येक व्यक्ति 1 दिन होता है।
- 1:02:09ये सभी के ऊपर घटता है। ये घटनाएं सभी के ऊपर।
- 1:02:13घटता है तो नानक। किसी व्यक्ति के ऊपर आरोप नहीं।
- 1:02:20लगाती? यह भी भगवान के ऊपर आरोप नहीं
- 1:02:24लगाता। वो कहते हैं, यतरी दांत और दांत
- 1:02:30को स्वीकार करना मेरा परम कर्तव्य है जो दुग्धपा।
- 1:02:36है। सोई पलिका, यह मेरा परम कर्तव्य
- 1:02:42है कि मैं तेरे दी हुई दांत को वो दुख हो, चाहे सुख हो, चाहे भूख
- 1:02:47हो, प्यास हो या तू मुझे रजा के सुलाय या तुम मुझे भूखे भूखे
- 1:02:53सुलाय मैं तो वैसे ही सो जाऊंगा। हर हाल में है राजी हम तो अपनी तो
- 1:03:00इधर भी वह वह है, उधर भी वह। वह है।
- 1:03:09किसी भी हालात में नानक जैसे व्यक्ति को तुम दुखी नहीं कर
- 1:03:14सकते, किसी भी हालात में। के त्या पूख दुख सद्मार एबी दात
- 1:03:33तेरी दातार बंदी खलासी पानी होय कहते जो तुम कहते हो, मुक्ति होती
- 1:03:45जो तुम कहते हो हम बंध गई। वो भी किसी ने बांधा नहीं तुम्हे
- 1:03:53कौन बांधता है? बंदी खलासी पाणे होए ए भी आँखें।
- 1:04:03कोई कोई यह बात भी कोई कोई कह सकता है।
- 1:04:08कि तेरे ही भाणी में मिलती हैं यातनाएं तेरे ही भाणी में मिलती
- 1:04:15हैं खुशियों की बौछार। जिक्र चुका तेरे जलों की बात होती
- 1:04:44है। जिक्र हो होता है जब कयाम तू का
- 1:04:55तेरे जलओं की बात होती है, तू जो चाहे।
- 1:05:06तो दिन निकलता है तू जो चाहे तो रात कयाम चुका तेरे जल की बात।
- 1:05:32होती है ये जो जलबे तुने बिखेर रखे हैं, रूबरू हैं हमारी आँखों
- 1:05:41के जिधर देखता हूँ उधर तू। तू ही तो रो रु भाई।
- 1:05:49तेरा ही तो जलवा है हरत जिक्र होता है, जब कयामत का तेरे जलबों
- 1:05:57की बात होती है, तू जो चाहे तो दिन निकलता है।
- 1:06:03तू जो चाहे तो रात होती। है तेरी ये इच्छा से सब होता है
- 1:06:24दिमाग से मत सुन ना मेरी बातों को ले जाऊंगा हृदय से सुनना मेरी
- 1:06:32बातों। कभी दिमाग स्वल्प नहीं कर सकेगा
- 1:06:40इस गुत्थ। दिमाग तो और जा देगा।
- 1:06:44मेरे पास रोज़। ऐसे ही परमात्मा आ जाते हैं जो
- 1:06:48सवाल दाग देते हैं। 1156 की तरह।
- 1:07:00जिक्र होता है जब कयामत का। तेरे जलबों की बात होती है।
- 1:07:06और ये जलवा। हर नूर में बसा है।
- 1:07:14कण कण में है तेरा जलवा मोहब्बत। तुम जो चाहे तो रात।
- 1:07:24तुम जो चाहे तो दिन निकलता है। एपी दात तेरे दादा बंदी खलासी
- 1:07:39पाणे होय। ये भी आँखें कोई कोई या कोई कोई
- 1:07:48ही कह। सकता है ये तेरी ही इच्छा में।
- 1:07:51बंधन होता है। और तेरी ही इच्छा में स्वतंत्रता
- 1:07:57मिलती है भेड़िया टूटती है। यह भी कोई कोई बरला ही कह सकता
- 1:08:02है। प्रत्येक व्यक्ति ये बात भी नहीं
- 1:08:05कह सकता और अगर यही बात कह दे तो ये बात।
- 1:08:09तो अंतिम है। यह बात तो अंतिम पड़ाव पे आके कही
- 1:08:16जाएगी। तू जो चाहे तो दिन निकलता है तू
- 1:08:22जो चाहे तो रात। होती।
- 1:08:24है और आंख न सके कोई और कोई कह नहीं सकता।
- 1:08:31कोई कोई ही कह सकेगा इस बार। जे को खायक।
- 1:08:37अखण पा अगर कोई। कहने की कोशिश करे।
- 1:08:41कोशिश का मतलब है नकल। जे को खायक अखण पा।
- 1:08:49को जानें जीतियाँ ऊ खाय। ये कोई कहने की कोशिश करेगा यह
- 1:08:57नकली। गुरु आज कहने की कोशिश कर रहा है।
- 1:09:01देखिए भरा पड़ा है सारा युग जे को।
- 1:09:07जे को खायेक पाये। जे को कहने की कोशिश करेगा।
- 1:09:15ओह जाने जेत्तियां मुँह खाये उसके मुँह पर इतनी युवतियां पड़ीं
- 1:09:21क्योंकि जानता तो है जानता है नहीं और कहने की चेष्टा करता है।
- 1:09:31चेष्ठ का मतलब? ही इमिटेशन होता है।
- 1:09:36चेष्ठ का मतलब ही नकलची। वंदर होता है।
- 1:09:40तुम नकल करते हो तुम अपने स्वभाव में नहीं उतरे, सहजता से तुम नहीं
- 1:09:47गए तुमने नकल की और नकल करना एक प्रयास है।
- 1:09:52प्रयास के बिना नकल होती नहीं। जे को खाये अखन पा हो जाने जतियां
- 1:10:00मुँह खाये उसके मुँह के ऊपर जूतियां पड़ती आइए उस शब्द को चले
- 1:10:08जो इस। पौड़ी की आत्मा।
- 1:10:14आपके जानें आपके देश अगर गौर से देखा जाए तो।
- 1:10:23जपजी साहब का ये रस। कई रसों में से एक रसी भी आपको
- 1:10:32जाने। आप पर।
- 1:10:39नानक कहते हैं कि आप ही तुम्हें? सदुभुति प्रदान करता है।
- 1:10:48आप ही तुम्हें चलाता है। ये आपका?
- 1:10:53मतलब सर्कमस्टैंसे। समझना आप।
- 1:10:58अब मैंने पाला। बदल लिया है मैं।
- 1:11:02अब कांग्रेसी हो गया हूँ हाँ, अच्छा।
- 1:11:08अब मैंने पगड़ी जो है सफेद बादली। पहले नीली थी आप पे जाने आप पे
- 1:11:15दे। खुद को खुद ही के द्वारा ही जानता
- 1:11:22है। खुद ही जानता।
- 1:11:26है खुद को ही जानता है। जानने वाला भी खुद।
- 1:11:31और जनाने वाला भी खुद। आप पे।
- 1:11:34जाणे आप पे दे जानने की कला भी वो खुद ही देता है तुम किसी प्रकार
- 1:11:44की वेधना मत बना लेना। तुम किसी प्रकार की साधना मत करने
- 1:11:53लग जाओ। यह तुम्हारी मूर्खता होगी और तुम?
- 1:11:57कहीं भी नहीं पहुंच पाओगे। बाबा कहते।
- 1:12:01हैं वह आप पे जाने आप पे दे। ढंग भी वह बताएगा कैसे पहुंचोगे।
- 1:12:17तुम श्रद्ध बुद्धि भी वही देगा अपने से अपने।
- 1:12:23आप को कैसे। देखना है तुमने देखना तो अपने आप
- 1:12:26को है बड़ी मजेदार बात है। तुम गुरु बैठे डेरों में।
- 1:12:39आश्रमों में, संगठनों में। अपने अपने पीठों में, मठों में
- 1:12:58अपने अपने ढंग से तुम्हें समझाते हैं, लेकिन बाबा।
- 1:13:04नानक कहते हैं, आप पे जाणे। आप पे दे।
- 1:13:08जानने का मार्ग भी वो खुद ही देगा।
- 1:13:14और कोई ऐसी विधि नहीं। ज़ोर न जुगती छूटें संसार कोई
- 1:13:21युक्ति नहीं है बंधनों को। काटने के लिए।
- 1:13:28मुक्त होने के लिए कोई युक्ति नहीं है।
- 1:13:33तुम्हे कुछ समझाता है इस वक्त ज़ोर न।
- 1:13:38जुगति छूट संसार, कोई युक्ति। नहीं है क्योंकि तुमने खुदी के
- 1:13:44पास ही पहुंचना है। तुमने खुद से खुद को ही खोजना खुद
- 1:13:54ही खोजने। वाले खुद ही होने वाले खुद।
- 1:13:57को ही खोजने वाले, खुद में ही जाने वाले।
- 1:14:06खुदी को कर बुलंद इतना के हर तकदीर से पहले।
- 1:14:09खुदा बंदे से खुद पूछिए बता तेरी रचा क्या?
- 1:14:17आपके जानें आपके दे आंख। से भी कोई के ये कहने वाले भी।
- 1:14:23कोई कोई हैं? बात हुई थी बाबा मुझे।
- 1:14:28कहने लगे। पोलो मैं नहीं कर किसी हूँ और कुछ
- 1:14:33देखिए कितने मज़े में बैठ। बाबा कहते तुम तो मज़े में बैठ
- 1:14:40जाओ। संसार।
- 1:14:44अज्ञानता की आग में जल। रखा है, कुछ उसका ख्याल नहीं
- 1:14:49करोगे। मेरे भीतर की करुणा ने उबाल खाया।
- 1:14:57मैंने कहा बाबा आदेश कैसे बोल? बाबा किसी और को सुन अब वो दिन और
- 1:15:10आज का दिन मैं अच्छी तरह से। समझता हूँ ये डेरों में बैठे
- 1:15:15लुटेरे इसलिए इतनी निर्भिकता से बोलता हूँ, मुझे मार दीजिए बस।
- 1:15:21ये मेरा खंड हर। जो जीवित है।
- 1:15:25इसको खंड खंड कर दें। इससे बलाबा वो कुछ नहीं कर सकते।
- 1:15:30इतना शद्दत दे सकते। हैं, काट सकते हैं पिट सकते हैं
- 1:15:34जब तुम छोटी छोटी बच्चियों को एपिस्टिन कांड में काट काट के खा
- 1:15:38जाते हो। तो मुझको काट दोगे तो क्या फर्क?
- 1:15:42पड़े आप पे चने, आप पे दे आँखें। से भी कहीं के ऐसा कहने वाले भी
- 1:15:52कोई कोई होते हैं अष्टावक्र? जनक को समझा रहे।
- 1:16:00शक्तिपात कर दिया है। बोलना कुछ जरूरी है बातें वो बोले
- 1:16:07चले जा रहे। हैं।
- 1:16:10पूछते हैं जनक? से हे राजन तुम कहाँ पहुँच गए?
- 1:16:16जनक कहते हैं, प्रभु। मैं वहाँ पहुँच गया हूँ जहाँ मैं
- 1:16:21ही मैं हूँ अस्थमा कर कह दिया फिर प्रणाम कर जनक कहते हैं प्रो।
- 1:16:36मैं स्वयं। से स्वयं को प्रणाम करता हूँ।
- 1:16:41ये है बात प्रतिक जनक कहते हैं, प्रभु हे गुरुदेव मैं स्वयं से
- 1:16:52स्वयं को प्रणाम करता हूँ क्योंकि दूसरा कोई है कौन किसको प्रणाम
- 1:16:57करें। प्रणाम करने का मतलब किसी गैर को
- 1:17:02दूसरा है, इसलिए मैं खुद से। ही खुद को प्रणाम कर लेता।
- 1:17:08हूँ आप पे जानें आपके देय। तुम तक पहुंचने का।
- 1:17:15रास्ता भी वह बता देगा। क्योंकि कोई रास्ता है ही नहीं।
- 1:17:23पाथ लेस पाथ कोई रास्ता है ही नहीं, कहाँ जाओगे?
- 1:17:32क्यों मगजखबाई करते हो? पांच नाम का के दिमाग खराब हो
- 1:17:36गया। और पांच नाम जपने वालों के चेहरों
- 1:17:41पर कोई लाभन्य दिखाई नहीं पड़ता। कोई खुशी का आलम दिखाई नहीं
- 1:17:48पड़ता। कोई चहकता हुआ पंछियों का गुणगान
- 1:17:52यहाँ सुनाई नहीं पड़ती। फिर।
- 1:17:56इन्होंने 35 साल का झक का मारा बिल्कुल झक।
- 1:17:59मारा फिर इन्हें क्या करना चाहिए? जब ये हैं ही खुद जब किसका कर रहे
- 1:18:08हैं, जब ये हैं ही खुद? अरदास किसको कर रहे हो?
- 1:18:15जब तुम हो ही को दो, किस से मांग रहे हो जब तुम हो ही को दो।
- 1:18:23शोड शुभ प्रचार पूजन। किसका कर रहे हो?
- 1:18:31बाबा कैसे हैं आप पे जाने आप पे? दूसरा कोई है बहुत गहरे में?
- 1:18:41जाकर इसके अर्थ मिलेंगे। आप पे जाने आप पे।
- 1:18:46दे मैं लम्बी खेच रहा हूँ बात को। क्योंकि यह एक रस है।
- 1:18:51अग्गे। अब कोई जनी अब कोई दे दूसरा।
- 1:19:00कोई है ही नहीं खोजोगे। से अरे बूंद सागर वही है, बूंद
- 1:19:06सागर से बिछड़ी ठीक भूल गई, ठीक? लेकिन छलांग लगाओ ना ज़रा गौता
- 1:19:15खाओ ना। ज़रा अठखेलियां करो ना ज़रा, अमृत
- 1:19:19के समुद्र में तुम। रस को पीने लगोगे।
- 1:19:22क्योंकि तुम रस रो हो रसो वैसा उस रस में डुबकी लगा लो।
- 1:19:31तुम रस ही तो हो। फिर जाना कहाँ?
- 1:19:37क्या है मार्ग क्या है? मंजिल स्वाथलस्पात।
- 1:19:46आप पे जाने आप पे दे। आक्षे से भी कई के।
- 1:19:55जिस्नु बक्शे शिफ्ट, साला जिस्नु बक्शे शिफ्ट, साला नानक पात्रशाही
- 1:20:05पात्रशाह जब तुम खुद। से खुद को जानते हो?
- 1:20:10ओके अप्पे जाणे, अप्पे दे आँखें से भी कई के जिसनु बक्से शिफ्ट
- 1:20:20सारा नानक पातिशा पक्ष वहीं पातिशा हूँ गा पातिशा।
- 1:20:33जीसको अपनी ही शिलाघा करना सीखा देता है।
- 1:20:45जन्न कहते हैं, मैं खुद से ही खुद को प्रणाम करता हूँ।
- 1:20:49क्योंकि दूजा यहाँ कोई है ही नहीं क्या कहा अब हम प्रथम पूरी पे आ
- 1:20:56जाए। अब हम मूल मंत्र पे आ जाए कहाँ?
- 1:21:00से चले थे। अब बैगेर लगा लें थोड़ा सा दूसरा
- 1:21:05कोई नहीं है एक और का। किस्से बेहतर होंगे, किस्से डरोगे
- 1:21:15किस्से मुकाबला करोगे, किस्से आगे निकलोगे, किस्से एक क्रम पर हो
- 1:21:21जाओगे, किस्से पिछड़ जाओगे, कुछ भी कर लो, रहोगे कोई?
- 1:21:31ये सुनो बक्से शिफ्ट साला। बस इतनी से शिफ्ट कर सकते।
- 1:21:37हो तुम जो जनक ने की जनक। कहता है, हे प्रभु।
- 1:21:43हे गुरुदेव मैं खुद से ही खुद को प्रणाम करता हूँ क्योंकि यहाँ
- 1:21:48दूसरा मुझे कोई दिख ही नहीं रहा। दूजा कोई हैब दादू, दूजा कोने
- 1:21:58दूजी मन की दौड़ दौड़ मिट्टी संसह गया वस्तु ठोर की ठोर?
- 1:22:06पाथलस पास। तुम घबराओ मत।
- 1:22:10तुम कितनी ही दूर आ गए हो। लेकिन सोए सोए तुम सपने में चाहे
- 1:22:22कहीं भी पहुँच। ओह हजूर तुमको सितारों पे ले चलो,
- 1:22:42दिल झूम जाए ऐसी। बाहरों में
- 1:23:02अगर जानने वाला संत कहता है कि तुम।
- 1:23:05अभी पहुँच सकते हो? इसका मतलब तुम दूर कहाँ हो?
- 1:23:12बस सोये हो, जिंदा हो सोये हो? चेतन हो, संत हो।
- 1:23:21आनंद हो लेकिन सोए हो और सोए। क्या बस पर कहीं तो उठा नहीं तुम
- 1:23:37चाहे दूसरे प्रदेशों में चले गए ग्रहों पे चले।
- 1:23:40गए। दूर निकल गए कल्पनाओं के जाल
- 1:23:44भूनकर। बहुत दूर निकल गए, लेकिन मत।
- 1:23:46भूलो कि तुम वहीं हो कहीं नहीं गए और कोई जा भी नहीं सकते क्योंकि
- 1:23:54हिज़ प्रेसेंट एवर अप हैं। मैं तुम्हें यहाँ आकर सभी प्रकार।
- 1:24:04की तरकीबों से मुक्ति दिलाता हूँ। यही है असली निजात और सारा संसार
- 1:24:14इन्हीं युक्तियों में उलझा हुआ है।
- 1:24:19यही है बंधन तुम्हारे चित्र के ऊपर तुम सब तोड़ सकते हो बंधनों
- 1:24:24को। लेकिन यह।
- 1:24:25बंधन तो दिखाई नहीं पड़ता जंजीरें दिखाई पड़ीं।
- 1:24:31ये मुँह है ये पुत्र। है ये पत्नी ये धन है?
- 1:24:35ये मान है तुम इनको तोड़ दोगे बड़े मज़े से लेकिन इन बिद्धियों
- 1:24:42को कैसे तोड़? पाओगे जो तुम्हारी जी का।
- 1:24:45जंजाल है आखिरी आखिरी जी का जंजाल?
- 1:24:49यही है। ज़ोर न जगती छोटा संसार जाको
- 1:25:00बक्से शिव तशाला मैं स्वयं से स्वयं को ही प्रणाम करता हूँ।
- 1:25:14कहाँ जाना है? तू यहीं बैठ जा, यही है तेरा
- 1:25:25मुकाम कहीं और नहीं, थोड़ी झपकी लग गई है तेरी।
- 1:25:37बस थोड़ी झपकी को खुल जाने जाए। जल्दी भी मत कर जबकि।
- 1:25:45जल्दी से खुल जाए ये भी मत कर। यह भी तेरा प्रयास होगा।
- 1:25:53बस इंतज़ार कर। जब झपकी खुलेगी तो।
- 1:25:56खुलेगी नहीं, खुलेगी तो नहीं खुलेगी।
- 1:25:59हम मज़े से सोए पड़े जब जाग खुल जाएगी, पलके उठ जाएगी और आँखों से
- 1:26:09सत्य दिख जाएगा। सत्य जाग।
- 1:26:13क्या फिर भी? तुम चलोगे क्या?
- 1:26:16फिर भी तुम? यात्रा करोगे जब आंख खुल जाएगी और
- 1:26:22तुम कहोगे कि मैं तो यहाँ हूँ, किसी ग्रहण क्षेत्र पे थोड़ी
- 1:26:25क्या? मैं तो स्वप्न में भटक रहा था,
- 1:26:32कोई मुझे अपने घर ले जाओ। मेरा घर कहाँ है मैं भूल गया
- 1:26:40अल्बर्ट आइंस्टीन कहीं जा रहे हो खोए।
- 1:26:45रहते हैं खोज। कोई चाल मस्त, कोई हार मस्त कोई
- 1:26:51माल मस्त वो खोजों में मस्त रहते हैं यूनिवर्सिटी से घर जाना है,
- 1:27:02टैक्सी कर ली, बैठ गए। थोड़ी दूर जाकर पता चलता है।
- 1:27:101015 मिनट बाद ड्राइवर से पूछते हैं भैया बात सुनो।
- 1:27:17ठहरों ड्राइवर ठहर जाता है, कहते हैं तुम्हें।
- 1:27:23पता है मैंने? जाना कहा है।
- 1:27:31कहते हाँ आइन्स्क्रीन, मैं तुम्हें जानता हूँ।
- 1:27:36तो कहाँ जाना है तुम्हें पता? है।
- 1:27:38कहता हाँ। इस वक्त तुम गरगी जाया करते हो,
- 1:27:43अपने काम काज से नवरात। हो के साज़ डाली।
- 1:27:47और तुम विश्राम करने घर चले जाया करते थे।
- 1:27:52तो अक्सीडेंट बोले क्या तुम्हें मेरा घर पता है?
- 1:27:56बड़ा अजूबा स्वाद, लेकिन। उससे ड्राइवर के लिए।
- 1:28:03यह स्वर हदसे पद नहीं था। क्योंकि वह जानता था के मस्त।
- 1:28:11बनते ऐसे ही होते हैं। कोई हाल मस्त, कोई माल मस्त, कोई
- 1:28:17चाल मस्त तो उसीने कहा। आइंस्टीन महोदय घबराओ मत।
- 1:28:25आई नो यू अरे नो वेरी वेल मैं आपके।
- 1:28:30घर को अच्छी तरह से जानता हूँ, मैं पहुंचा।
- 1:28:32दूंगा। गाड़ी में जा रहे थे नेक्स्ट टिकट
- 1:28:45चेकर, आ गया टिकट टिकट टिकट उन्होंने जेब में हाथ मारी, टिकट
- 1:28:50नहीं मिली 20 की जेब में जितनी जेब।
- 1:28:54भी थी सब में हाथ पर है, टिकट नहीं।
- 1:28:55मिली बर्थ से निकाला पर्स में टिकट, नहीं मिली टिकट बेली ही
- 1:29:00नहीं घबरा गए, पसीना आ गया। टिकट चेकर टिकट चेकर कहने लगा
- 1:29:12महोदय परेशान मैं जानता हूँ कि तुमने टिकट अवश्य ली होगी।
- 1:29:21बिना टिकट के तुम बैठे ही नहीं होगे कहाँ गई?
- 1:29:26बस तुम्हें मिल नहीं रही अभी, लेकिन तुम घबराओ मत ऐसे ही।
- 1:29:31तुम तुमको मिल नहीं। रहे अभी तुम तुमको अभी मिल नहीं
- 1:29:36रहे। इसलिए घबराओ।
- 1:29:38मत लेकिन। आइस्टिन कहता प्रभु वो तो बात ठीक
- 1:29:44है। लेकिन बात ये है कि टिकट से ही तो
- 1:29:48पता चलेगा कि मेरे जाना कहाँ है क्योंकि टिकट पर जहाँ जाना है उस
- 1:29:55शहर का नाम लिखा हुआ है। कहाँ से चला मुझे तो ये भी नहीं
- 1:30:01मालूम। और कहाँ जाना?
- 1:30:04मुझे तो यह भी नहीं मालूम बस ऐसे ही था।
- 1:30:14टिकट चेक कर कहने लगा घबराओ होता है।
- 1:30:17जहाँ तुमने जाना है वहाँ मैं तुम्हें उतार दूंगा कैसे भला?
- 1:30:25तुम जब भी जाते हो। यहीं उतरते हो?
- 1:30:30इसलिए तुम घबराओ मत जब वो तुम्हारा स्टेशन आ जाएगा, मैं
- 1:30:33तुम्हें बता दूंगा। गुरु ऐसा ही हुआ करता है।
- 1:30:40गुरु जानता है तुम कहाँ से आए हो। गुरु जानता है कि तुम नहीं जाना
- 1:30:46कहाँ। बस तुम अपनी घबराहट को छोड़ दो।
- 1:30:54जीसको बख्शे। शिफ्ट चला।
- 1:30:57नानक पातिशाह। पातिशाह वो पातिशाओं का भी
- 1:31:01पातिशाह? बे परवाह्या तेरिया
- 1:31:39तेरब। डा।
- 1:31:41डा बे। ले महक गुरु।
- 1:31:53जानता है। गुरु जानता है।
- 1:32:03वहाँ कौन है तेरा? मुसाफिर जाएगा कहाँ वहाँ कौन है
- 1:32:15तेरा मुसाफिर जाएगा कहाँ? दम ले ले दो घड़ी दम ले ले दो
- 1:32:27घड़ी ये छिया पाएगा कहाँ वहाँ, कौन है तेरा मुसाफिर?
- 1:32:42कहाँ जाए कहाँ जा रहा है? ज़रा आँखें खोल ले बस यहीं रुक
- 1:32:58जा। मैं रोज़।
- 1:33:01कहता हूँ ठहर जा मैं कहता हूँ रुक जा क्योंकि कहीं नहीं जाना है ठहर
- 1:33:12जा और तू पाएगा जहाँ मैंने जाना था मैं वहीं।
- 1:33:21बस आंख ही तो खोल ली। और वो भी खुल।
- 1:33:24जाने दे, तू आंख खोलने के लिए भी मशक्कत करेगा।
- 1:33:29मुझे पता है यह है मान बढ़ा भाई मान मेरे बन बड़ो हारा में फिर मन
- 1:33:36कहेगा अच्छा। तो फिर मैं आंख खोलने की।
- 1:33:39कोशिश करूँ? जल्दी से पहुँच जाऊंगा नहीं नहीं
- 1:33:42तुम कोशिश तुम पहुंचेगी आँख खुल जाने का इंतजार करो, तुम ठहरों
- 1:33:49बस। जिसनो बक्शे सिर्फ साला।
- 1:34:00नानक पातिशाही पातिशाह। वह पातीक्षा हो का पातीक्षा?
- 1:34:06तुम ही हो तुम ही हो यू यूर सेल्फा तुम ही हो जहाँ जाना।
- 1:34:19तुम ही हो जहाँ ठिकाना। तुम ही मंजल हो तुम ही रास्ता हो,
- 1:34:25तुम ही चलने वाले हो तुम ही चलाने वाले हो।
- 1:34:30तुम्हारे सिवा कोई? है नहीं बस।
- 1:34:34एक तुम। एक तुम हो दूजा, कोई नहीं।
- 1:34:43उसी की। शरण में चले जाओ जब परिस्थितियां
- 1:34:55खराब हो जाएं, जब अनुकूल न रहे जब तुम भूल जाओ, अपने आप आँखें बंद
- 1:35:08हो जाएं। और तुम्हें खुमार जड़ने लगे।
- 1:35:12तुम्हें पता न चले हमें कहाँ जाना है फिर तुम रुक जा।
- 1:35:24इन। पलकों के उठने का इंतजार करना।
- 1:35:28बल्कि उठाने की कोशिश मत करना। तुम्हारा मन बड़ा हरा है।
- 1:35:33वह हर चीज़ को कोशिश में बदलेगा। वह कहेगा फिर जल्दी कर लो।
- 1:35:37फॉर्मूला तो पता चल गया नहीं नहीं कोई फायदा नहीं जल्दी करने का कोई
- 1:35:44फायदा नहीं। तुम सोए हुए हो?
- 1:35:46नींद पूरी हो जाएगी। तो पलके उठ जाए, ऐसी भी क्या
- 1:35:52गलती? है खुल जाने देना, इन पलकों को उठ
- 1:36:00जाने देना। और तुम पाओगे आँखें तो है तुम
- 1:36:06पाओगे। दूजा कोई है ही नहीं।
- 1:36:10यही दो बाबा नानक ने पाया। यही सब संतो ने पाया।
- 1:36:14एहम ब्रह्मस्म, एको अहम् द्वितीय अनारस्थी एकों का गोडीज़ वन फिर
- 1:36:25कहाँ जाओगे भाई और वह सब जगह? इस प्रेसेंट एवरी और वह एक है फिर
- 1:36:33कहाँ जाओ कंधराओं में भी बनी वणों में भी।
- 1:36:38वहीं। घर में भी वहीं पहाड़ों में भी
- 1:36:41वहीं वीरान सुनसान इलाकों में भी वहीं कहाँ जाओ।
- 1:36:51बस यहीं ठहर जाओ, ठहरों। और उस बल का इंतजार करो जब नींद।
- 1:37:02पूरी हो जाए और बलक उठ जाए। फिर तुम।
- 1:37:10जान पाओगे सत्य कहर छोड़ दो इन धंधों।
- 1:37:13को। ये तुम्हें उलझा देते ये तुमने।
- 1:37:20गहरे स्वप्नों में गहरी वासनों में।
- 1:37:26गहरी। कड़पन में ले जाएंगे ये लोग,
- 1:37:29तुम्हें इनको पता नहीं है। ये मुँह रख।
- 1:37:34पंक्ति है छोड़ दो इनको। कहाँ जा रहा
- 1:38:41अँधेरा। अमावस्या की घनी रात।
- 1:38:45काले मग छाये हुए तुम्हें कुछ नजर नहीं आता तुम दिया जलाओ, दिया
- 1:38:52जलाओ रोशनाई। होगी तुम्हें पता।
- 1:38:55चलेगा कि तुम तो अपने घर में ही। तुम कहीं गए नहीं और अपने घर।
- 1:39:04तक आने के लिए किसी विधि को करने की जरूरत नहीं और किसी यात्रा को
- 1:39:08करने की जरूरत नहीं। नथिंग टु डू और यह कोई विधि नहीं।
- 1:39:17यह आविधि है अँधेरा मन का। दिया तो जला ले।
- 1:39:28बस इस अज्ञान के अंधकार का नाश करते हैं, तुमसो माँ जोतिर गम है।
- 1:39:37यही संतो की। पुकार रही भगवान के आगे तुम।
- 1:39:43सो माँ चो दिल कभी। बहुत अंधी चिराग।
- 1:39:51दिल के जलाओ। दिल के जलाओ,
- 1:40:56के आओ बहुत अँधेरा कहाँ से लौट के आया जब?
- 1:41:08कहीं गया ही नहीं। यहीं है, अभी है गलतियों में मत
- 1:41:15उलझो वह कहीं गया। ही नहीं वस्तु ठोर की ठोर?
- 1:41:21वह अकंप है, वह अभिज्ञत है, वह सिधर है, वो स्थिति है।
- 1:41:31तुम सिर्फ अपने भीतर उतर के देखो तो सही।
- 1:41:39दिल का चिराग। जलाओ तो सही।
- 1:41:44अमानित्वं। दंभित्वं हिंसा शांति राजमं।
- 1:41:49आचार्य उपासनम् शौचम सैरियम सिर्फ़ आत्म विनग्रह और अपने भीतर
- 1:41:55उतर जाओ आचार्य उपासनम् शौचम सैरियम आत्म विनग्रह ठहर।
- 1:42:06सिर हो सैरम। आत्म विनग्रह और अपने भीतर उतर
- 1:42:12जाओ देख पायेगा मैं कभी। भी किसी काल में कहीं गया ही
- 1:42:18नहीं। आज सच जुगाद सच हैप्पी सच नानक।
- 1:42:32हुस्से के सच आज से नहीं अभी से। अभी से सभी प्रयास को तोड़ दो,
- 1:42:40मैं जिम्मेवार हूँ, मैं जिम्मेवार हूँ।
- 1:42:48तुम जहाँ जाना चाहते हो? उस रस की मंजिल के पास तुम पहुँच
- 1:42:53जाओ, मैं जिम्मेदारी। लेता हूँ अहम तुआम।
- 1:42:59सरबवा पे देवमुख से श्यामी माँ सुचार मैं तुम्हारे सभी बातों।
- 1:43:05का हरण कर दूंगा यह ख्वाब। क्या है यह है मात्र एक परदर्श?
- 1:43:11इस सब पर्दे को हटा। दो।
- 1:43:15तुम थोड़ा। सा चिराग
- 1:43:27जला लो।