Latest / Baba ji Vijay Vats / 3 Nov 25 - मुक्ति, सिमरण और आत्मा का रहस्य | क्या गुरु ग्रंथ साहिब और उपनिषद एक ही बात कहते हैं? Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:17अनुराग प्रकाश चर्न स्पर्श बाबा ऐसा शब्द बताइए?
- 0:44जो गुरुग्राम साहब में भी हो और उपनिषद में भी हो।
- 1:03ऐसे शलोक बताइए जो गुरु ग्रंथ साहब में भी हो और उपनिषद में भी
- 1:15हो और दोनों का अर्थ उस परा को छूता हो?
- 1:32यह प्रश्न नहीं है पुत्र एक बजार है आपको इस संसार में आज की घड़ी।
- 1:51प्रश्नों के ही स्टेक उत्तर मिल जाए।
- 1:55क्या यह कम नहीं, काफी नहीं प्रश्नों के ही उत्तर गडबड करके
- 2:10दिए जाते है। और सच पुरुष को प्रश्न लिया ही
- 2:16नहीं जाता। आज के संत पुरुष किसी को बोलने
- 2:24देते, न राजनीतिक बोलने देते, न संत पुरुष बोलने देते और यही उनके
- 2:32अज्ञानता की परिभाषा है। तो खुद बोलते हैं लाउडस्पीकर पर
- 2:40माइक पर सामने बैठी जनता को इस वृत्ति से।
- 2:53उनकी नालायकता का पता चलता है तुमने कहा ऐसा शलोक बताइए जो गुरु
- 3:06ग्रैंड साहब में भी हो और उपनिषद में भी हो?
- 3:14और उसका अर्थ परा को जूता हो या तो कोई शलोक बताइए।
- 3:25मैं उनके अर्थों का कंपॅरिज़न कर सकू, जब मुझसे ही पूछते हो।
- 3:38तो फिर ठहरों थोड़ी देर मैं प्रश्न भीतर भेजता हूँ, यह
- 3:47सर्वज्ञ ही जवाब देगा। आपको आज कथावाचकों की भीड़।
- 4:00और कथावाचक का अर्थ होता है जो बोलेंगे जो बोलने देगा नहीं, तुम
- 4:10कभी बोल सके हो कथावाचको कहानी सुना रहे हैं अगड़म बगड़म कुछ भी
- 4:18सुना रहे हैं। और तुम्हें सुनना पड़ रहा है।
- 4:25राजनीतिज्ञों ने कभी तुम्हें बोलने दिया, कभी प्रेस कान्फरेन्स
- 4:29से बुलाई जैसे जनता ने चुना क्या उसकी तकलीफें?
- 4:40उसकी परेशानियां, कठिनाइयां, जीवन जिंदगी के तरीके हैं, बताने का हक
- 4:49नहीं है जनता को, लेकिन नहीं। आज ऐसा ही चल रहा है।
- 4:58क्योंकि मोर्ता का ज़माना है। खैर तुझे आपका जवाब आगे गुरुग्राम
- 5:14साहब में भी हो। कर्मी आवे कपड़ा नदरी मुख द्वार
- 5:33आखिरी पड़ाव है मुक्त हो जाना, किस्से मुक्त हो जाना बंदे किस्से
- 5:41हो। आपको पता भी है आप आँखें मूंदे
- 5:55मूंदे जल रहे हो। आपको पता भी है कहाँ जा रहे हो?
- 6:04नाम स्मरण कर रहे हो? आपको पता भी है दो बातें पहली बात
- 6:11तो जीसको सुमर्ण कर रहे हो, क्या वो है और क्या जीस नाम से उसको
- 6:23सुमर्ण कर रहे हो क्या उसका नाम है?
- 6:28लेकिन तो मैं दोनों ही बातें नहीं करता।
- 6:34सबसे बड़ी बात मैं सदा ही कहता रहूँ।
- 6:41क्यों कहा कृष्ण ने आचार्य हो वासुनाम?
- 6:50जिसने जान लिया उसे जान लिया, मान लिया नहीं उसके पास बैठ के कई
- 7:00तरीकों से वह आपको रूपांतरित करेगा।
- 7:07यू विल ट्रांसफर यू फ्रम मेनी डायमंड्स आचार्य का आचार्य के पास
- 7:29जिसने जाना उसके भीतर से जानते ही।
- 7:35एक एक शब्द को बारीकी से एनालिसिस करना आज तू न कर पाऊँगा मैं अच्छी
- 7:45तरह से जानता हूँ, इसलिए स्टोर करके जा रहा हूँ मेरे जाने के
- 7:51बाद। तुम इन्हीं शब्दों पर जखाई मरोगे।
- 7:58इन्हीं शब्दों पर आपको डॉक्टरेट की उपाधि मिलेंगे।
- 8:04इन्हीं शब्दों का आप गहरा अर्थ निकाल पाओगे और काश जिससे तुम
- 8:12अर्थ निकाल पाओगे। वह अर्थ निकालने के योग्य हो सकती
- 8:16है। तुम्हारी बुद्धि वह कभी सही अर्थ
- 8:20निकाल नहीं पाएगा, लेकिन तुम उसे भारत रत्न देते रहोगे जी पीएसड की
- 8:29डिग्री जिसने भी ली सब बकवास। धर्म के ऊपर पीएचडी कभी होती है,
- 8:43धर्म के पास पहुँचना होता है। धर्म के पास उपाधियाँ नहीं मिलती
- 8:49आनंद मिलता है उपाधियाँ तो अलंककार है उपाधियाँ तो बाहर के।
- 8:57जड़े गए मुकुट हैं, हीरे हैं मोती मणि, वह अलंकार और आनंद आनंद
- 9:07तुम्हारा मौज है आनंद तुम्हारा नाचना गाना झूमना थरकना।
- 9:17मौज मस्ती लेकिन तुम अलंकारों से संतुष्ट होने वाले व्यक्ति हो,
- 9:32तुमने तो जैसे ठान ही रखा है कि हम रिकॉर्ड बना के जाएंगे।
- 9:43रेत के पन्नों पर खुदे हुए रिकॉर्ड कितनी देर ठहर पाएंगे?
- 9:47आंधियां? उड़ा के ले जाएंगे 100 वर्ष बाद
- 9:541000 वर्ष बाद किसी को पता ही नहीं चलेगा तुम।
- 9:59और पता भी चलेगा तो तुम्हें क्या फायदा है?
- 10:04मर जाओगे? मरने के बाद 21 तोपों की शरामी दी
- 10:10तो क्या खाक दी? तुमने सुना नहीं तुम तो सो गए
- 10:14चेयर निद्रा में। कर्मी आवे कपड़ा उसकी कृपा से ही
- 10:27तुम्हें मानव शरीर मिलता नदरी मुख्य त्यौहार।
- 10:41उसका रहम बरसता है, उसकी नजर होती है सच्चा साहब ये नजर करें तिकागो
- 10:47हंस करें तो आपको मुक्ति मिलती है आखिर तुम बंदे किस्से हो तुमने
- 11:03कभी कभी सोचा? तुम सब चीज़ नकली नकली कर रहे हो
- 11:12मुक्त होना किसी के तो बता दो तुम कहोगे दुख से मुक्त हो दुख है
- 11:20क्यूँ? कभी इसका सर्च किया कि राधे राधे
- 11:29ही करते रहे। राधे राधे करने से सुखी हो जाओ
- 11:36राधे राधे कहने से फूल खिल जाएंगे खिल जाएंगे तो खला के दिखा दो।
- 11:45राहदे राधे कहने से फल लग जाएंगे, मीठे लग जाएंगे तो लगा के
- 11:52दिखाऊंगा। ये मूर्खों की सगा नहीं है।
- 12:07ये विवेकशील प्राणियों की सभा है। यहाँ मूडताएँ काम नहीं करेंगे
- 12:18नदरी मोख द्वारा उसकी कृपा से ही मिलता है सब अब एक बात समझ लेना
- 12:26बीच में। संसार भी उसकी कृपा से मिलता है
- 12:32क्योंकि उसने बनाया मुक्ति भी उसकी कृपा से ही मिलती है क्योंकि
- 12:39उसी की देन ये जो बीच में तुमने मान्यताएँ सौंप दी।
- 12:55ये तुम्हे तंग करती है, ये तुम्हे दुख देती है क्या हो अगर प्यार भी
- 13:13तुम्हे रुला जाए? रातें हमें सोने नहीं दे देती,
- 13:38सुहानी जाननी। रातें हमें सोने नहीं देते,
- 13:53तुम्हारे प्यार की बातें। तुम्हारे प्यार की बातें हमेशा
- 14:09नहीं देते सुहाने चाँदनी। रातें हमें सोने नहीं देती भला
- 14:30ऐसा कभी। हुआ है।
- 14:34सुहानी चाँदनी रातें सुलाने में मदद करती हैं, तुम्हें सोने नहीं
- 14:39देती। तुम्हारे प्यार की बातें मीठी
- 14:44मीठी लोरी सुना देती हैं तुम कहती हो मैं सोने नहीं देती ये अजूबा
- 14:51नहीं तो और क्या है? नदरी मोख्तवार उसकी कृपा से
- 15:01मुक्ति मिलती है मुक्त किस्से होना है पहले ये समझ लो आप
- 15:08समर्ण्य किसका करना है शमण्य करना अपने आप का जिसे तुम भूल गए।
- 15:15जिससे विष स्मरण हो गया है, उसे स्मरण करना है।
- 15:19विस्मरण तुमने अपने आप को किया तो तुम दुखी हो गए।
- 15:30और जीसको विश्व स्मरण किया उसको स्मरण कर लोगे, याद कर लोगे तो
- 15:34सुखी हो जाओ के सीधा सा फार्मूला राजेश से तुमने क्या करवाना है?
- 15:46हाँ क्या करवाना है राजेश? तुमने सुखी हो, तुम दुखी हो, यही
- 16:01बुद्ध कहते हैं छोड़ो व्यस्त की बातें।
- 16:10बात सारी इतनी के जीवन दुख है, बात सारी इतनी के दुख का कारण है।
- 16:23कारण क्या है अज्ञान झूठी मान्यताएँ।
- 16:31और अज्ञान को मिटाने का कार्य ढंग है जीवन दुख है दुख का कारण है।
- 16:49दुख मिटाया जा सकता है। बुध की बात खत्म हो गई।
- 17:00बुध कहते जीवन दुख है बिलकुल ठीक है।
- 17:07दुःख का कारण है बिलकुल ठीक है अज्ञान जो तुम्हारा न था वह तुमने
- 17:14तुम्हारा मान लिया यही भ्रांति तुम्हें दुख जाती है और फिर आखिर
- 17:24में तुम्हारा राह रह भी कहाँ जाता है?
- 17:32एक एक बूंद करके तुमने घड़ा भरा बड़े खुश हुए घड़ा भर गया, अब तो
- 17:43इतना भर गया कि बिखरने लगा, छलकने लगा।
- 17:54और तुम अहंकार से भर गए तुम्हारी चाल बदल गई ढाल बदल गई बोल बदल
- 18:00गया ये घडा क्या भरा तुमने भेद ईर्ष्या, द्वेष, घृणा, नफरत
- 18:18फैलाने से। और 1 दिन घड़ा फूट गया।
- 18:30ध्यान रखना घड़ा श्रद्धा के लिए बचता नहीं, 1 दिन फूट जाता है 1
- 18:41दिन। सबका घड़ा फूट जाएगा, तुम्हारा भी
- 18:44फूट जाएगा, यह घड़ा भी फूट जाएगा, फिर कहाँ जाते हैं तुम्हारे दावे
- 19:01मैं और मेरा कहाँ बिखर जाता? बुध कहते हैं दुख है लेकिन यह
- 19:19सिम्बोलिक अब्रीविएशन थी जैसे डेफिनिशन थी, दुख है क्यों, दुख
- 19:28तो है, लेकिन दुख क्यों है? दुःख है तुमने ऊंट पटांग मान रखा
- 19:36है, बिल्ली को अगर गधा मानोगे? घोड़े को अगर ऊंट मानोगे तो दुखी
- 19:48तो हो गई क्योंकि दूसरों की भाषा अलग है।
- 19:55संवाद में जा सकेगा। कन्वर्सेशन न हो सकेगा, कर में
- 20:03आवे कपड़ा नदरी मोख दवार या गुरुवाणी के तुक लेलो।
- 20:09आइए। अब उपनिषद के कठोर अनुषद गए 2213
- 20:15के ऊपर चलते हैं नायन आत्मा प्रवचनें लघ्य हो नायन आत्मा
- 20:29प्रवचनें लपथो आत्मा प्रवचनों से नहीं मिलती मैं तुम्हे रोज़ कहता
- 20:42हूँ प्रवचन सुन लेना, इसका रस भी लेना, लेकिन इससे चबट मत जाना।
- 20:53अभी कल ही एक पुत्री का कमेंट आया कि मैं आपकी तस्वीर की पूजा कर
- 21:01सकती हूँ। बिल्कुल कर सकती हूँ बशर्ते के।
- 21:09लिप्त न हो जाओ चेपट न हो जाओ कलिंग न हो जाओ किसी को भगवान न
- 21:19मान लो फिर मुश्किल होगा। इसलिए गुरु इतना प्यारा होता है।
- 21:30आप सबको छोड़ सकते हो। लोग घर बार छोड़ कर चले गए।
- 21:39गुरु, मैं और जगह। और दुख क्या है?
- 21:47दुख का कारण क्या है? दुख का कारण यही है चिपकना फिर
- 21:53तुम बाल बच्चों से ही चिपकना कहते हैं अगर गुरु से ही भी चपकना था।
- 22:04तो मेरे बच्चों को छोड़ के क्यों आया है?
- 22:09गुरु से मार्ग लेना था तुम ये सभी चीजों को निष्कर्ष निकाल के मैंने
- 22:21या की योजना बनाई? कि यहाँ आए रुके न कुछ रुके थोड़े
- 22:27दिन के लिए रुके जब तक वक्त है स्थान है रुके यहाँ की तरंगों को
- 22:35पिए। और तरंगों को पीके यहाँ से चला
- 22:42जाए अपने घर चला जाए जो यहाँ नहीं आए वो भी मूर्ख हैं अभागी।
- 23:06क्योंकि उन्होंने देखा ही नहीं, उस स्थल पर पहुंचने वाला व्यक्ति
- 23:15कैसा होता है? और जो यहाँ आकर रुक गए मेरे पास
- 23:29प्रत्येक तरह के कमेंट आते हैं। बाबा हम आपके करीब बैठने जाते हैं
- 23:36श्रद्धा के लिए। ओके तो यह नहीं हो सकेगा क्योंकि
- 23:46मैंने आपको आपके करीब भेजना है। अगर तुम मुझमें उलझ गया तो फिर एक
- 23:58और रोक चिपट गया। पहले जो थे वो तो थे।
- 24:05एक नया रोग से पट गया। फूलों के पास आकर जो सौगंध मिलती
- 24:12है तुम बाग बगीचों के जोगे ही रह गए।
- 24:22वहाँ पर फंस गए और मैं तुम्हें फिसलाना नहीं चाहता, यही है बंधन
- 24:32वह बंधन, स्त्री, पुरुष, पुत्र, पुत्री, माँ, बाप, दादा, दादी।
- 24:41पोता पोती इनका हो या धान्य धान्य पदार्थों का हो, मान सम्मान का हो
- 24:48या गुरु का हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 24:52बात चिपकने की है बात कलिंगनेस की।
- 25:01तुम दुखी क्यों हो? क्योंकि तुमने बहुत सी मान्यताएँ
- 25:08थोप ली और बड़े कमाल की बात है। जब कोई व्यक्ति वहाँ पहुंचता है
- 25:18तो ताली मार के हँसता है। कमली, सड़ी फकीरदी, हस्या ताड़ी
- 25:32मार कमली, सड़ी फकीरदी, हस्या ताड़ी मार चंगा ए भी ले गया
- 25:41मुठ्ठे ऊँतों पार। फकीर के पास एक कम्बली थी, ठंडी
- 25:47रातों में ऑर्डर लिया करता था, 1 दिन आग लग गई और जल गया और ज्ञान
- 25:58हो गया। देखिये कैसी कैसी बातों से ज्ञान
- 26:01हो जाता है। तुम्हें लगेगा ये पागल हो गया बस
- 26:11एक कंबली हेतु थी उसके पास तो दिमाग पर टेंशन आ गया होगा,
- 26:22इन्फिनिटी कॉम्प्लेक्स आ गया होगा बर्डन आ गया होगा।
- 26:28इसलिए पगला गया भला कम्पल सड़ गया एक कम्पल ही तो था इसके पास उसमें
- 26:38हंसने जैसी बात थोड़ी है रोने जैसी बात तुम्हारे भी है, तुम
- 26:43होते तो रोते। लेकिन इसे जो मिल गया वो तुम्हें
- 26:49मालूम नहीं। इसे मिल गया वो खजान इसे भी पता न
- 27:02था कि यह कंबली ही मेरी जी का जंजाल।
- 27:08उसे तो सदा से ऐसा विश्वास रहा, बड़ा संभाल के रखता, हृदय से लगा
- 27:15के रखता बोझ बोझ के रखता सदा ही ओड़े रखता।
- 27:19उसे कहीं गम ना हो जाए कहीं छूट ना जाए।
- 27:26लेकिन 1 दिन वो सड़ गई, बड़े गहरे अर्थें शब्द के कमली सड़ी फकीर दी
- 27:36फकीर की कंबल मच गई, सड़ गई जल गई हस्य ताड़ी मार।
- 27:45बड़े ऊंचे से हस तुम कहोगे पागल हो गया बड़े आ गया टेंशन आ गया
- 27:56तुम्हारे रोज़ टेंशन आते है छूट छूट की बात पे।
- 28:08इस शब्द को अगर आपने हृदय के अंतःसकोनी से सुन लिया, इसलिए मैं
- 28:19तुम्हें अलर्ट कर रहा हूँ वार न कर रहा हूँ।
- 28:28इस प्रवचन को शांत मन से सुनना वह तुम्हें तब्दील कर देगा।
- 28:36फिर तुम भी हँसों की ताड़ी मार्क वह व्यक्ति जो प्रथम बार।
- 28:47तुम भी जब प्रथम बार वहाँ जाओगे जीसको मुक्ति कहते हैं जिसकी
- 28:55डिमांड बरसों बरसों से जन्मो जन्मो से चद गई, तुम ताली मार के
- 29:00हंसोगे। कुमली, सड़ी फकीर दी अच्छा ताड़ी
- 29:10मार इसमें हँसने जैसी क्या बात है?
- 29:17बहुत बड़ी बात है, तुम छोटी छोटी घटनाओं को नज़रअन्दाज़ मत करो।
- 29:27बहुत छोटी छोटी घटनाएं श्रद्धा से प्रबुद्धों का बुद्धत्व का कारण
- 29:35बन रहा है। लाउ से बैठे हैं।
- 29:39पीपल के बेड के नीचे पतझड़ का मौसम और एक पत्ता आया झूमता हुआ।
- 29:46नीचे आ गयी गिर क्या लाल विज्ञानी हो गया क्या था इसमें?
- 29:57बस वही शक्ति की झलक दगाई बढ़ गई। महावीर खड़े थे, खड़े खड़े ध्यान
- 30:06किया करते थे, थक गए, बैठने लगे थे, आधा बैठे थे उंकड़ू जैसे हम
- 30:17गाय का दूध धोते हैं, ना देखना, कभी गाय का दूध धोते थे, उकड़ू
- 30:22बैठते थे। उसको गो दो आसन कहते हैं।
- 30:27गो दो आसन में पहुंचे थे। अभी ज्ञान हो गया क्या हुआ तुम
- 30:35कहोगे कुछ भी सुनें हमें तो राधे राधे करते पांच ही जन्म बीत गए
- 30:40हमें तो पांच ही। नाम जपते जपते 30 से जन्म बीत गए,
- 30:473030 साल तो बैठ गए, अभी ढेरे में बैठे मेरे पास लोग आ जाते हैं।
- 30:55बाबा आपका प्रवचन सुनाते समय को छू गया।
- 30:59हम आपके पास आ जाए। मैंने कहा भाई यहाँ भीड़ भारी और
- 31:07फिर जिसने 30 साल जी कूड़ा अपने दिमाग में भरा, मैं कूड़ा साफ कौन
- 31:15करेगा? यहाँ कोरे कागज़ पर लिखा जाता है।
- 31:25गोरा कागज ता ये मन हो मेरा लिख दिया ना?
- 31:40उसपे तेरा कोरा कागज था यह मन मेरा लिख दिया ना उसपे तेरा?
- 32:02तुमने तो ये कोरा पन्ना इतना विकृत कर दिया है, देखने को स्थान
- 32:10ही नहीं बचा, कोरा पन्ना सारा काला हो गया, कहाँ लिखोगे?
- 32:17लेकिन फिर भी लिखे जाते हो। तो मैं कहता हूँ भाई 35 साल में
- 32:24तुमने या कोरा कागज इतना मेला कर लिया, इसको धोएगा कौन?
- 32:32सब कौन करेगा? मुझे चाहिए वो लोग।
- 32:39जिनके चित के ऊपर कोई अवार्क न लिखे हो, जिनके चित के ऊपर कोई
- 32:47शास्त्र न हो, कोई जय श्री राम न हो, कोई अलाहू अकबर न हो।
- 32:56कोई सतराम श्री वाहगुरु ना हो, कोई गॉड ना हो, बिल्कुल कोहरा का
- 33:07कुछ उस पर मैं नाम लिख दूंगा। और वह नाम तुम्हें दिखाई नहीं
- 33:17पड़ेगा। ऐसा नाम देता हूँ मैं ये राधे
- 33:29राधे तो गधे गधे भी हो सकते हैं थोड़ी सी करनी कम पड़ जाए थोड़ी
- 33:35सी करनी ज्यादा हो जाए वही राधे बन गया।
- 33:37वही गधा बन गया हमारे पंजाबी में। दुख क्या है तुम्हें पहले ये देखो
- 33:52बहुत सी बातें देखने योग्य है, सिर्फ मानने योग्य नहीं होती।
- 33:59मैं कहता हूँ मानो तो कुछ भी नहीं सिर्फ जानू।
- 34:05सिर्फ जानू, इसलिए दर्शन की इतनी महिमा की गई।
- 34:14मैं कहता हूँ एक बार जिसने आके नहीं देखा, जिसने सिर्फ मुझे
- 34:20बोलते देख लिया, मेरे ऊंट पटांग निकलते हुए शब्द।
- 34:25सुन लिए और मुझको कभी उस मुद्रा में आके देखा नहीं वो क्या खाके
- 34:32जाने के आनंद होता क्या है? यहाँ लोग चूक जाते हैं।
- 34:54बाबा द्वार में प्रवेश किया। संत की रेंज 60 फुट तक तो जाती ही
- 35:03है और दीवारें उसमें वादा नहीं बनती।
- 35:08परले पार जो खेत जोत रहे हैं, वो भी इससे प्रभावित होते हैं।
- 35:16इस दायरे में आते हुए वो गीत गाने लगते हैं, उन्हें पता नहीं होता।
- 35:32लेकिन तुमने देखा नहीं ना आनंद देखा ना आनंदित व्यक्ति देखा फिर
- 35:42क्या खाक देखा तुमने किसको पगार रहे?
- 35:53क्या डिमॅंड है तुम्हारी किसको पाना चाहते हो तुम?
- 36:02इसलिए दुनिया आज टक्करें मार रही है पश्चिम को लगता है पूर्व में।
- 36:11ना मेरे पास सारी दुनिया के लोग आते हैं और पूर्व को लगता है
- 36:17पश्चिम में नहीं, ना पूर्व में, ना पश्चिम में, ये तो तुम्हारे मन
- 36:27में है। ना मंदिर में है ना मस्जिद में है
- 36:33भला इन ईंटों में सरियों में जो कल को कहीं और पड़े थे अगर इनमे
- 36:40परमात्मा होता तो वहीं पे परमात्मा ना दिख जाता।
- 36:45कबीर ने कहा। पत्थर पूजा हर मिले तो मैं पूज
- 36:50हूँ पहाड़ लेकिन तुम्हारे पंडित ऐसे हैं कि तुम हिप्नोटाइज़ कर
- 37:00लेते हैं, ये देखो हमने प्राण प्रतिष्ठा कर दी।
- 37:06और प्राण प्रतिष्ठा का इन्हें कुछ पता ही नहीं क्या होता है?
- 37:12अब ये पत्थर भगवान हो गया कहाँ भगवान हो गया न तो खाता है, न
- 37:19देखता है, न सूंघता है, न सुनता है, बहरा है।
- 37:25अंधा है, गुन का है, कुछ भी तो नहीं क्या लेकिन तुम पूछते हो
- 37:37पूछते रहो कौन रोकता है तुम्हें? जीसको याद कर रहे हों, क्या उसे
- 37:50जानते हुए हों, कल परसों एक ब्राह्मण सुना रहा था कहानी क्या
- 38:00हम किसी का नाम ले के पुकारना हैं तो वो पलट के देखता है।
- 38:08मैंने कहा भाई देखो पहली बात तो ये है उसका नाम क्या है ये
- 38:14तुम्हें पता नहीं। नामों पर ही मतभेद अन्यथा ये इतने
- 38:20नाम न होते। कोई राम कहता कोई रहीम कहता कोई
- 38:26अल्लाह हूँ अकबर कहता कोई शिष्य बोले कहता कोई दुर्गा कहता, कोई
- 38:35पार्वती कहता कोई लक्ष्मी कहता, कोई हनुमान कहता।
- 38:44अगर वो एक है तो उसके नाम अनेक असल में तुम्हें यही नहीं हो पाता
- 38:58कि तुम्हें तकलीफ है क्या? तुम याद कर रहे हो किसको कर रहे
- 39:05हो वो कौन? और है भी कि नहीं याद करने से
- 39:12पहले नाम लेने से पहले खबरदार प्रवेश कर जाना।
- 39:17आश्रम में मैं कोई नाम वाम नहीं देता, मैं तो नामों से पीछा
- 39:21छुड़ाता हूँ, ये वो दुष्ट हैं नाम रूपी दुष्ट हैं।
- 39:26जो कालनेमी हैं इनका जब करने से तुम दुखी हो जाओ एनर्जी लस निस
- 39:41होना दुख ही तो है और क्या है? तुम जब अपनी शक्ति को खो देते हो
- 39:48तो क्या सुखी हो जाते हो? लेकिन तुम मान लेते हो कि हम सुखी
- 39:53हो गए। अंतरंग क्षणों में तुम अपनी
- 39:58महत्त्व शक्ति को खो देते हो। और तुम धड़म से गर्व पड़ते हो
- 40:03कहते हो, नींद बड़ी आ जाती है, मैंने कहा गोली खा लेते हैं, इतना
- 40:09बहुमूल्य द्रव्य तुमने क्यों गवा दिया?
- 40:18मुझे जवाब मिलता है कि देखिए आप बड़े हो कि पश्चिम के डॉक्टर
- 40:23बड़े। जिन्होंने इज़ इक्वल टु एम सी एस
- 40:26किया। मैंने कहा देखिए जहाँ तक आनंद की
- 40:32बात है वहाँ तक तो ये बड़े नहीं इन्हें तो उडा भी नहीं आता।
- 40:36ए बीसी भी नहीं आता काका का भी नहीं आता।
- 40:43यहाँ तक विज्ञान की बात है, ये बिलकुल आगे हैं लेकिन विज्ञान में
- 40:49आगे निकलते रहें, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 40:54सोए हुए व्यक्ति को पता चलता है कौन आके क्या चुराके ले गया ले
- 40:59गया। सोय हो व्यक्ति इतने आनंद में है
- 41:05कि उसे कोई फिक्र नहीं। उसकी कोई चीज़ चुरा के ले गया, ले
- 41:08गया। नींद में ही इतनी मस्ती है कौन
- 41:15मुशक्कत करे उसे पता ही नहीं चलता।
- 41:22कर्मी आवय कपड़ा नदरी मुख्तवार जिसे स्मरण कर रहे हो, पहले जान
- 41:29लो वे है सबसे पहला फर्स्ट ऑफ़ फॉल अगर तुम नहीं जानते कि वह है।
- 41:39मत जपना, उसका नाम धोखा खा जाओ। तुम किसी गलत चीज़ को जप लोगे।
- 41:50जब जानते ही नहीं वो है भी के नहीं है अभी ये सर लोग।
- 41:57बता रहे हैं कि परमात्मा है कि नहीं, लो मैं सबूत देता हूँ, कभी
- 42:01सबूत देने से परमात्मा सिद्ध हुआ है, परमात्मा तो उसमें मिल जाने
- 42:12से सिद्ध होता है। जब बिखेरता है वो अपने आनंद की
- 42:17छटा निराली और उस खुशनुमा माहौल में वह व्यक्ति आनंद में झूमता
- 42:30है, खुमारी में झूमता है। वह सिद्ध हुआ ब्रह्मा में
- 42:38तुम्हारे शब्दों से सिद्ध करने से कभी सिद्ध होता है, तो फिर तो
- 42:42शब्दों से पेट भर दो रोटी लिख के लिख, दो ब्लैकबोर्ड पे रोटी भोजन,
- 42:48बढ़िया बढ़िया पिक्चर बना दो चित्र सब भी प्रकार के।
- 42:53पपड़ आचार साथ रख देना थोड़ा प्याज भी रख देना साथ पेट भर
- 43:02जाएगा ठंडा पानी मिल्क शेक इसकी फोटो बना दो, प्यास मर जाएगी।
- 43:14तुम ऐसे प्यास मिटा रहे हो, ध्यान से सुनना मेरी बात को तुम ऐसे
- 43:22प्यास मिटा रहे हो चित्रों की रोटी।
- 43:28क्षेत्रों की सब्जी चाहे बिरियानी खा रहे हो, मटन बिरियानी मैंने
- 43:34खाया नहीं कभी मैंने देखा भी नहीं, कभी अचार खा रहे हो,
- 43:42गुड़िया पकोड़े खा रहे हो, लेकिन क्या खा रहे हो?
- 43:52चित्रों का खाना खाना नहीं होता, चित्रों का खाना खाने की तस्वीर
- 43:57होती है और चित्रों का खाना तस्वीर होती है और लिखी हुई भोजन
- 44:05का नाम भोजन नहीं होता। भोजन की लिखावट होती है, शब्द
- 44:09होते हैं पेट भर जाएगा उससे ब्लैकबोर्ड पे लिखा हुआ अचार उसको
- 44:25चाट लोगे, खट्टा होगा वो? शुगर लिख दोगे उसको चाटोगे वह तो
- 44:36चाट हो तुम ऐसी ही मुर्दा में उलझाओ और मुक्त होना है इनसे हाँ?
- 44:56इन से मुक्त होना है। इन भ्रांतियों से मुक्त होना है।
- 45:01पहले ये बताओ ये भ्रांतियां हैं कि नहीं बताओ सोच के बताओ कल बता
- 45:11देना। ब्लैकबोर्ड पे बनाई हुई थाली चाहे
- 45:18सोने की बना लो रोगियों सब्जी, प्याज, अचार, मिर्च, हरी मिर्च का
- 45:29अचार। क्या इसको खाने से पेट भरता है?
- 45:44क्या ये खाई जा सकती हैं? ये बता फिर तुम्हारे गुरु तुम्हे
- 45:55पागल क्यों बना रहे हो? पांच प्रकार का भोजन दे दिया
- 45:59तुम्हें चटनी भी दे दी। साथ में कटाई मिर्च भी साथ में
- 46:08सब्जी भी दे दी। बढ़िया शराब ये अपने नहीं देते।
- 46:18खट्टा मीठा इतना ज़ाहिर खाओ, कहते हैं वहाँ बल्ले बहुत मिलते हैं,
- 46:22बढ़िया बल्ला तो भाई खट्टा होता है और खट्टा खाने वाला काम वासना
- 46:31से ग्रसित होगा। आज तुम्हें राज़ बोल रहा हूँ
- 46:37संतोषी माता के शुक्रवार को खट्टा क्यों नहीं कहा जाता?
- 46:44खट्टा खाने से काम बसना पड़ती है और जो अपनी काम बसना को बढ़ाना
- 46:48चाहता है वो खट्टा खाता है। मैंने कहा था वो सब।
- 46:52ये खटाई कहानी गाड़ी निकालती है। इसका अर्थ क्या है?
- 47:00मैं नहीं जानता। मैं वो शै हूँ जो कयामत की नजर
- 47:07रखता है। सब जानते है।
- 47:11ये खटाई खानी खट्टा खाओगे काम बासना बढ़ेगी काम बासना बढ़ेगी तो
- 47:20कहीं निकालोगे जाके, कहीं खे खाओगे ना जाके बस इसका यही मतलब।
- 47:36ऐसी वृहद शक्ति को गवा दोगे तो ब्रह्मचर्य का वह आनंद कहाँ उठा
- 47:44पाऊंगा? क्षुद्र को तुम?
- 47:52चख लोगे, वृहद का रस चखने से रेखते रह जाओगे जिसका नाम जप रहे
- 48:06हो। तुम कोई भी हो, कहीं भी हो, बस एक
- 48:11बात सोच लेना। जवाब आज दे देना, कल दे देना और
- 48:18शब्दों से दे देना या गोलियों से दे देना, मुझे कोई फर्क नहीं
- 48:22पड़ता। हम तो गोलियां खाने के आदी हैं,
- 48:31तुम आने की हिम्मत तो करो। लेकिन सत्य बोलने से ज़रा भी गरज
- 48:40नहीं करेंगे और कभी भी नहीं करेंगे।
- 48:45जो सत्य है वो बोलेंगे सत्यवेव जयते इसलिए भी नहीं बोलेंगे।
- 48:51सत्य सत्य के लिए बोलेंगे सत्य जीतता है, श्रेय नहीं बोलेंगे
- 48:58हमें पुरस्कार तो चाहिए ही, हमें कर्म का फल भी नहीं चाहिए।
- 49:03हम सिर्फ कर्म करते हैं, शुभ कर्म करते हैं शुभ कर्म नतीं कब हूँ
- 49:09ना? जी तो अपने आप ही हो जाएँ जी तो
- 49:17शुभ गर्म दिला ही देते हैं, कब हूँ ना डरूं?
- 49:21जब बजाय लड़ूं, निश्चय करें अपनी जीत करो, दे हो शिवा बरमोही यही।
- 49:39तुम दुखी क्यों हो? नकली को असली मान लिया है भोजन पर
- 49:49छपे हुए ब्लैकबोर्ड पर चाक से बने हुए माँ तो कुछ भी बना लो भाई।
- 50:00चाद का क्या बिगड़ता है, तुम्हारी सब आज्ञा मानेगा, वो अचार भी बना
- 50:04देगा, मिर्च का ऐसा मत कर सब बना देगा।
- 50:16नहीं, नहीं भ्रांतियों ने तुमको लूटा।
- 50:20कहाँ तक न गिनवाएं सभी ने हमको लूटा है।
- 50:34सभी ने हमको लूटा है। अचार भी लूट ले गया, सब्जी भी लूट
- 50:38ले गई। रोटी भी क्योंकि नकली थी।
- 50:44पांच अनाम भी लूट ले गए। राधे भी लूट ले गए।
- 50:47राम भी लूट ले गया, आला भी लूट ले गया।
- 50:50सतनाम भी लूट ले गया। भाग ग्रुप भी लूट ले गया।
- 50:53कहाँ तक नाम गिनवाएं सभी ने उनको लूटा है तुम कैसे समझते हो उससे
- 51:01शांति मिलेगा तुम करते हो जब तुम्हें क्रोध आता है तुम राम राम
- 51:09राम राम करते हो ना वो दब जाता है फ्रोज।
- 51:16एक छोटा सा प्रश्न ले ले, बहुत लंबी वीडियो हो जाएगी।
- 51:20देख लो नहीं ये मनीष कहता है इसी में स्वाद आ रहा है तो चलो फिर
- 51:28इसी को चलो स्वाद आ नहीं चाहिए। नन्या आत्मा प्रवचन नैन लभ्य थे
- 51:45नन्या आत्मा प्रवचन। यह आत्मा प्रवचनों में नहीं
- 51:53मिलते। ऐसा नहीं कि मेरे प्रवचनों से मिल
- 51:57जाएगी। बिलकुल नहीं मिलेंगे रहा मिलेगा,
- 52:01वो भी तुम थोड़ा देखो तो उस तल पर गया है व्यक्ति की।
- 52:11हाँ भाव होते कैसे हैं बहुता कैसा है, कैसे चलता, कैसे बोलता, ये तो
- 52:18तुमने देख लिया, लेकिन कैसे? उसका जीवन कैसे उसके भीतर से
- 52:25निकलती हुई आसानी तरंगों का वो झोंडा?
- 52:29तो मैं प्रभावित करता हूँ, ये तुमने देखा?
- 52:39नाया महात्मा प्रवचन नैन लक्ष्यों यह आत्मा प्रवचनों से नहीं मिलती।
- 52:54प्रवचन चाहे कोई भी करे चाहे बुध करे, चाहे कृष्ण करे, चाहे मैं
- 53:01करूँ, चाहे कोई करे, यह आत्मा प्रवचनों से नहीं मिलती न मेधया न
- 53:10बहुता श्रुतेन न सोचने से मिलती। ना ज्यादा बुद्धि वालों को मिलते
- 53:17हैं, ना श्रुतेन ना सुनने से मिलते हैं।
- 53:27यह आत्मा न प्रवचनों से मिलती है। ना बुद्धि से मिलती, ना विचारों
- 53:37से मिलती ना सुनने से मिलती और ये वो शब्द आ गया गुरुवाणी का नदरी
- 53:49मोख दवार। एम ऐफ़ ऐश्वर्णोत्ते जीसको यह
- 53:56आत्मा स्वयं अपनाती है जिसे वह चुनता है।
- 54:06एम ऐफ़ ऐश्वर्णोत्ते तीन लभ्य। उसको मिलते हैं नदरी मोख द्वार
- 54:18जीस पर नजर होती है उसको मुक्ति होती है तसः अब आत्मा विपणनते।
- 54:32तनु स्वम उस व्यक्ति के सामने यह आत्मा अपनी वास्तविकता को प्रकट
- 54:38करती है। उस व्यक्ति के सामने यह आत्मा
- 54:45अपनी वास्तविकता को रियलिटी को व्यक्त करती है।
- 54:55आत्मा शब्द का अर्थ यहाँ अपना होना ले लेना जो तुम हो वास्तव
- 55:03में प्रवचन नै न लभ्य न मेधया न प्रवचन से मिलता है।
- 55:21ना बुद्धि या तर्क से मिलता है। तुम तर्क लड़ाते ना।
- 55:28शास्त्रार्थ में शंकराचार्य शास्त्रार्थ करते थे, तर्क लड़ाते
- 55:33थे लेकिन उपनिषद का ऋषि कहता है के तर्क से नहीं मिलता लड़ाते
- 55:39लोग। इसलिए शंकराचार्य को मैं मूर्ख
- 55:43करता हूँ। मुझे बहुत से लोग कह देते है बाबा
- 55:47ऐसा क्यों करते हो तुम? हज़ारों साल पहले मैंने कहा
- 55:51हज़ारों साल पहले तो बनमार से भी हुआ करते थे, एक दम बुद्धू बिजली
- 55:59कड़कती और छिप जाते डर के। तो हजारों वर्ष से पहले अगर
- 56:03शंकराचार्य हुए इसमें क्या श्रेष्ठताएं होती है?
- 56:11वनमानुष बुद्धू ही तो ये इंद्र की उपासना करते हैं इंद्र को भी तो
- 56:17हो गया है। बहुत वर्षों तक ये श्रृंखला चलती
- 56:24रही। इंद्र कुपित हो गया है।
- 56:27कृष्ण के जमाने तक यह चलती रही। जब गोवर्धन पर्वत उसने उठाया तब
- 56:33भी इंद्र कुपित हो गए थे। और यह इन्द्रों की श्रृंखला वेदों
- 56:41से चल रही है। वेदों में परमात्मा का नाम बहुत
- 56:45कम मिलेगा। ना मिलेगा हे इन्द्र और वेदों में
- 56:51जीतने भिखारी तुम्हें मिलेंगे। उतने कहीं नहीं मिलेगा।
- 56:59बड़े गौरव की बात है कि उपनिषद में तुम्हें भिखारी नहीं मिलेगा,
- 57:07उपनिषद में तुम्हें ज्ञान मिलेगा। बांटने वाले मिलेंगे, देने वाले
- 57:12मिलेंगे। वेदों में तुम्हें भिकारी मिलेंगे
- 57:16जिन वेदों का तुम इतना गुणकान कर रहे हो, ज़रा एक बार एक अक्षर
- 57:21पढ़कर देख रहे हो जैसे चारों तरफ ठूठा उठाये, भिक्षा पात्र उठाये।
- 57:32बस मांग ही रहे हैं मांग ही रहे हैं भगवान से हे इंद्र ये दे दो
- 57:37हे इंद्र ये दे दो हे इंद्र ये दे दो मैं कहता हूँ ये क्या खा कृषि
- 57:43से इनको तुम ऋषि? जो अभी तलक मांग रहे हैं।
- 57:56जिनकी मांग अभी तक समाप्त नहीं हुई मांग वासना होती है पता नहीं
- 58:07वह निर्वासना कैसे हो गए? और माघ भी ऐसी टेढ़ी मेढ़ी
- 58:13अष्टावक्र जैसे माघ भी ऐसी करते हैं।
- 58:18ऋषि और तुम इनको ऋषि करते हो जो अभी तर्क करता।
- 58:30रोप निषद् करिशी तो कहता है के तर्क से नहीं मिलता हो ना मेधा से
- 58:36मिलता है बुद्धि तुम्हारी कितनी आयकू तुम्हारी कितनी तुम आइस्टिन
- 58:40हो जब तुम खत बुद्धि हो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 58:50मैं न तर्क से मिलता, न प्रवचन से मिलता, न बुद्धि से मिलता और तुम
- 58:59अपने वेदों में देखो ज़रा पढ़ो तो एक वेद के चार पर नहीं पढ़ो।
- 59:11तुम उनको फेंक के मरोगे या जला दो, ये किसी ऋषियों ने लिखी है
- 59:21अरे मंगते इकट्ठे हुए सब। आज भी वेद उपलब्ध हैं।
- 59:30तुम कोई भी वेद उठा लो उनमें देखो हे इन्द्र ये दे दो हे इन्द्र ये
- 59:42दे दो जिसकी वासना ही निमुखी। जिसकी जरूरतें ही नहीं मकी और ऋषि
- 59:48कैसे हो जाए वह महावीर कैसे हो पाएगा?
- 59:56वह बुद्ध कैसे हो पाएगा? बुध तो लात मार के चले जाते हैं
- 1:00:01बारे पूरे सम्राट। कहीं ये ऋषित होते तो नहीं थे?
- 1:00:07बिलकुल थोते थे इसलिए वेदों का एक आध सूत्र तो मैंने वैसा किया।
- 1:00:15इसीलिए नहीं कि मैंने वेद पढ़े नहीं, बिलकुल पढ़े, लेकिन वेदों
- 1:00:20में जो फोंक मैंने पाई। और कमाल की बात है कि बिल्कुल फोक
- 1:00:30को हमने सिर पर बैठा लिया और वेदों में मैंने आप पढ़ के देखना
- 1:00:37फिर पता चलेगा ऐसी नहीं बात करते। सब मंगते सब मंगते हे इन्द्र, ये
- 1:00:45दे दो हे इन्द्र, ये दो दो और यहाँ तक नहीं खुद की वासना नहीं
- 1:00:50मटी चलो अभी निर्वासना नहीं हो गई तो ऋषि ना कहें कि हम मनुष्य कह
- 1:00:56देंगे। आम मनुष्य भी नहीं है आए आम
- 1:00:59मनुष्य से गए गुजरे ये तो ये शालू हैं, ये तो राजनीतिज्ञों के बाप
- 1:01:05हैं क्या कहते हैं के हे द्रा मेरे खेत में खूब बरसन।
- 1:01:17लेकिन पड़ोसी के खेत में बिलकुल न बरसे।
- 1:01:22भूखा मर जाए पड़ोसी के बच्चे भूखे मर जाए, मेरे पशु तो खूब दूध दें।
- 1:01:36लेकिन पड़ोसी के पश्नों के दूत थनों में ही सूख गए।
- 1:01:39या ऋषि, तुम कहते हो, बड़ा सुन्दर वेला था।
- 1:01:54ये सुंदर बेला है सर्व का भला मांगने वाला वह है ऋषि।
- 1:02:07कहीं हमारी गुलामी ने वेद तो नहीं बदल दिया?
- 1:02:13मेरी दृष्टि में बदल दिए गए मेरी दृष्टि में जो तुम वेद पढ़ रहे हो
- 1:02:21वो वेद वेद छुपा लिए गए, वेद जलाती गए और भी कितनी किताबें
- 1:02:29नालंदा में जलाती गई? उपनिषद बच गए।
- 1:02:34उपनिषद इसीलिए बिल्कुल शुद्ध है। ऐसी ऐसी गलत हरकतें करते हुए तुम
- 1:02:47ऋषियों को पाओगे फिर बच्चों से क्या उम्मीद रखोगे?
- 1:02:53बच्चे घृणा ही आग ही फैलाएंगे। हिंदू मुस्लिम की और क्या करेंगे?
- 1:02:58क्योंकि उनका ही डीएनए है यहीं से सीखा है।
- 1:03:04जब महामारी वेदों में ये लिखा तो हम क्यों ना सीखें वो बात लेकिन
- 1:03:09नहीं। बुद्धि से निर्णय करो, विवेक करो
- 1:03:15शिंच में मत रहो, देखो ये चीज़ कहीं गलत तो नहीं अहितकर तो नहीं
- 1:03:23सर्व का मंगल मांगने वाला सर्वे भवन्तु सुखी नाम कहने वाला तेरा
- 1:03:28मंगल मेरा मंगल सबका मंगल होय रहा है।
- 1:03:32ये कहने वाला व्यक्ति ये कहें के पशुओं के थनों का दूध सूक्ष्म है,
- 1:03:42कहीं गड़बड़ाई या ऋषि ने नै अयां महात्मा।
- 1:03:52प्रवचनैन लभ्य यह आत्मा प्रवचन से नहीं मिलते एक एक शब्द को हृदय
- 1:04:01में उतार देना नय में ध्या तुम्हारे में ज्यादा बुद्धि है।
- 1:04:07आई क्यू ज्यादा इसे नहीं मिलते। और मैं तुम्हें और बात बता दूँ,
- 1:04:14जो शरीर से अपंग है वो जल्दी पहुंचेगा, बड़ी उल्टी बात लगेंगी।
- 1:04:25तुम्हारे ऋषियों ने ये सूत्र बताए कितने कॉम्प्लिकेटेड है।
- 1:04:29और आठ जगह से टेढ़ा मीठा अष्टमकर ने जो सूत्र बताया वो टेढ़ा मीठा
- 1:04:34थोड़ी सीधा स्पाट कहता तुम ही हो क्रमांक मैं कहता हूँ अपाहिज
- 1:04:43व्यक्ति बहुत जल्दी पहुंचेगा और अपाहिज व्यक्ति बहुत।
- 1:04:49जल्दी आपको पहुंचा देगा। अष्टावक्र ने जनक को पहुंचा दिया।
- 1:04:59कितनी देर में मात्र एक अगड़ी के छठे हिस्से में पहुंचा दिया?
- 1:05:074 मिनट में और तुम्हारी शास्त्र आए तक तुम्हें काखा गा नहीं सका।
- 1:05:23निर्बल व्यक्ति, दुर्बल व्यक्ति। अपंग व्यक्ति अपाहिज व्यक्ति
- 1:05:29जल्दी पहुंचेगा सवस्थ व्यक्ति देर लगा देगा एक तो सवस्थ व्यक्ति के
- 1:05:39शरीर के साथ शिपगाहट होगी, जितना सुंदर होगा व्यक्ति।
- 1:05:46नकल जल्दी नहीं पहुंचते। कृष्ण पीछे से पहुँच के आते हैं,
- 1:05:54महावीर को देर लग जाती है, राम पीछे से पहुँच के आते हैं।
- 1:06:06बस अगला जन्म सिर्फ कुछ थोड़े से भोग भोग नहीं ना प्रवचन से मिलता
- 1:06:17ज्यादा बुद्धि से मिलता ना तर्क से मिलता मिलता किस्से है।
- 1:06:26जीसको वह आत्मा चुन लेती है। नदरी मोख दवा मुक्ति का दरवाजा
- 1:06:39तुम्हारे हाथ में नहीं मुक्ति का दरवाजा, उपनिषद का यह श्लोक कहता।
- 1:06:47और मैं भी करता हूँ मुक्ति का दरवाजा तुम्हारे हाथ में नहीं,
- 1:07:01आत्मा के हाथ में वो किसे चुनती है?
- 1:07:04यह एक तरह का स्वयंवर सैकड़ों प्रकार के राजकुमार बंटे बड़े से
- 1:07:15बड़े साम्राज्य वाले राजकुमार बंटे लेकिन द्रौपदी है के गरीब।
- 1:07:26अर्जुन के गले में माया चल देती है।
- 1:07:29खुशी खुशी जिसके पास कोई भूमि नहीं जो लड़ रहा है भूमि के लिए
- 1:07:38गरीब को चुन लेती है कहाँ गई तुम्हारी भूमियां?
- 1:07:43बड़े बड़े राजकुमार बैठे हुए शब्द को पूरा सुनिए गुरबानी का शब्द तो
- 1:07:55सुन लिया कर्मी आबय कपड़ा नदरी मोख द्वार अब कठोर निशिद का 2213।
- 1:08:06ये शब्द पूरा सुन लीजिए इसके अर्थ सुन लीजिए यह आत्मा प्रवचन से या
- 1:08:18बुद्धि से या तर्क से। और न ही बहुत शास्त्र सुनने से
- 1:08:26तुम कहते हो। श्रवण मात्र से कठोर निश्चित
- 1:08:34उपदेश दे रहे हैं यमराज नचिकेता जमराज मृत्यु का देवता नीचे के
- 1:08:44तको देश से रहा है और हिम्मत इतनी हिम्मत के बिना कमी कुछ नहीं
- 1:08:51मिलता। ऐसी हिम्मत नहीं होनी चाहिए कि
- 1:08:58दूसरों के कंधों पर रखकर। बंदूक उसको दोषी ठहरा दिया जाए,
- 1:09:04उसको लटका दिया जाए। खुद बचे जाए जाए ये हिम्मत नहीं
- 1:09:08है ये हिम्मत है तो सामने आओ अभी कल कोई कह रहा था कि फलां की
- 1:09:17गर्दन कोई काट के लाएगा, ₹1,00,00,000 दूंगा।
- 1:09:21बस ये कार का निशानी और क्या तू खुद जा उसके गोली मार हरामखोर
- 1:09:34दुश्मनी तुझे मरवा रहा है उसको, ऐसे ही होते हैं तुम्हारे वीर।
- 1:09:46कुछ शरीफ लोगों को बहलाकर फुसलाकर उनके कंधों पर रखकर बंदूक चला
- 1:09:54देते फंस जाते हैं। टाँगे जाते हैं हो बेचारे भोले
- 1:10:00व्यक्ति फंस जाते। तुम्हें आज तक नहीं पता चला गोडसे
- 1:10:04गोडसे को मैं भी अधिमान देता हूँ। मैं भी प्रणाम करता हूँ कि तू बलि
- 1:10:10का बकरा बना धन्य बलि का बकरा बनना भी कौन सा आसान होता है यह
- 1:10:18आत्मा? प्रवचन से प्राप्त नहीं होता।
- 1:10:25न बुद्धि या तर्क से और न ही बहुत शास्त्र सुनने से जीसको यह आत्मा।
- 1:10:39स्वयं चुनता है। अब देखिये, वही बात है नदरी मोख
- 1:10:44दवा जीसको यह आत्मा स्वयं चुनता है, उसी को यह आत्मा प्राप्त होता
- 1:10:57है। उसी के सामने आत्मा अपनी वास्तविक
- 1:11:03सत्ता को प्रकट करता है। दोनों का समान है कर्मी आवे कपड़ा
- 1:11:16तुम्हारा तो कुछ है नहीं, मैंने 1000 बार कहा तुम्हारा सिर्फ दावा
- 1:11:22है। दावे के सिवा और कुछ नहीं करता तो
- 1:11:33वो ही है। लेकिन यह बुद्धि से नहीं पता
- 1:11:39चलेगा जो बुद्धि से। उपनिषद को व्याख्यान करने चलेगा।
- 1:11:46उससे बड़ा मूड कोई है जो बिना अपने भीतर छलांग लगाए उस रस के
- 1:11:55भीतर भीगे गलीच हो के आ जाए। डूब जाए, सारे का सारा भीग जाए,
- 1:12:06लतपत हो जाए और लतपत हो के बाहर आए वह बता सकता है इस उपनिषद में
- 1:12:15क्या शब्द का क्या अवस्था है। फोंकी फोंकी नीरस खोपड़ी से रहस्य
- 1:12:25की व्याख्या नहीं हो सकता है। इसको अंडरलाइन कर दो।
- 1:12:30फोंकी फोंकी नीरस बुद्धि से उस रस की व्याख्या रस ही रस में डूब
- 1:12:39सकता है। बुद्धि में रस नहीं, बुद्धि निरस
- 1:12:43है, बुद्धि गणित करती है, हिसाब में कहीं रस होता है, हृदय में रस
- 1:12:50होता है, थोड़ा सा लेकिन आधा। रस भी होता है, घृणा भी होती है,
- 1:12:59ईर्ष्या भी होती है, देवेश में होता है, प्रेम भी होता है, द्वा
- 1:13:03भी होती है, प्रयास भी होती है, लेकिन बुद्धि तो शुद्ध गणितज्ञ
- 1:13:08है, मैथमेटिशियन है बुद्धि में कुछ नहीं, वह तो नीरस है और इससे
- 1:13:15कामना भी मत करना। नीरस जैसे बूंद ही समुद्र में समा
- 1:13:20शक्ति, विकास, बौद्ध फॉर्मूलेशन रस ही रस में समा सकता है।
- 1:13:30रस महारस में समा सकता है। पानी की बूंद महासागर में सम सकती
- 1:13:39है क्योंकि फॉर्मूलेशन ऑफ बोथ इस दी सेम रस की फॉर्मूलेशन महारस
- 1:13:46में समज सकती है। सेम है फॉर्मूलेशन एच टू ओह
- 1:13:50समुद्र में समज सकता है सेम है फॉर्मूलेशन।
- 1:13:53लेकिन बुद्धि नहीं समझ सकती। बुद्धि को छोड़ के जानी पड़ती है
- 1:13:57जहाँ हम जूती निकालते हैं तो बुद्धि निरस है, बुद्धि में रस
- 1:14:03कहाँ है? तुम बुद्धि से कोशिश करो, करते
- 1:14:09रहो लेकिन पाओगे अंत में। हाथ में कुछ भी न मिला, हाथ खाली
- 1:14:27के खाली रह गए। बुद्धि निरस है और आचार्य लोग ये
- 1:14:38सर लोग अगर अजामिल की कथा कहेंगे। अजामिल की कथा में तो बड़ा रस है।
- 1:14:46तो मार खाएंगे मुँह पर नहीं गिरेंगे, उल्टे मुँह गिरेंगे।
- 1:14:57कोई हम दम न रहा। कोई सहारा न रहा।
- 1:15:21कोई सहारा न रहा, हम किसी के न रहे।
- 1:15:39हम किसी के न रहे कोई हमारा नर कोई हम दम न रह।
- 1:15:59कोई सहारा ना रहा, हम किसी के ना रहे, कोई हमारा ना रहा।
- 1:16:18कोई हम दम न रह, कोई सहारा न रह। बती यही नहीं छोड़ पाएगी।
- 1:16:38कोई नहीं शंक, नीरस के संग कौन होता है?
- 1:16:45नीरस की पांडारे खाली हूँ 1 दिन खाली हो जाया करती हूँ रस बुद्धि
- 1:16:58आखिर में हाथ मिलती रह जाएगी। कोई हम दम न मिला को की बुद्धि का
- 1:17:05संग कौन देगा? रस तो दे नहीं सकता कोई सहारा न
- 1:17:13रहा कौन सहारा देगा? रस रस को सभी सहारा देंगे।
- 1:17:18रस की तरफ सभी टूट पड़ेंगे। यहाँ तक मक्खियां तक टूट टूट
- 1:17:22पड़ती हैं। शेर पे हम किसी के न रहे, बुद्धि
- 1:17:31किसी के नहीं होती। जो हिसाब करेगा, जो गणित करेगा जो
- 1:17:38गणित से चलेगा। कोई हमारा न रहा तुम्हें सब
- 1:17:54मिलेगा वह जो नीरस है दन कमालू, पदवी कमालू, सन्मान, कमालू पदार्थ
- 1:18:02कमालू, जमीन जायदाद कमालू, मंजिलें कमालू।
- 1:18:07कार्य कोठियां कमा लो, बंगले कमा लो, सब कमा लो, लेकिन सब नीरस है।
- 1:18:14बुद्धि से यही कुछ मिलेगा जो गणित बैठाएगी।
- 1:18:19बुद्धि तुम कहते हो, संस्थाओं के हाथ मजबूत करो, दान करो बिलकुल हो
- 1:18:26जाएंगे। क्योंकि तुम जैसे ढींग से व्यक्ति
- 1:18:32बहुत हैं, जिनको तुम्हारी बात समझती है।
- 1:18:36बुद्धि को बुद्धि बात समझाये बुद्धि को प्रेम की भाषा समझ।
- 1:18:44और बुद्धि आखिर में रस के न मिलने से हाथ मिलती ही रह जाती है,
- 1:18:51क्योंकि रस के बिना जीवन जीवन नहीं होता।
- 1:19:00रस के बिना बेका जीना होता। है।
- 1:19:03तुम बिना जीवन कैसा जीवन तुम बिना जीमन कैसा जीवन।
- 1:19:24पूछो मेरे दिल से पूछो मेरे दिल से रस के बिना।
- 1:19:39जीना कैसा जी? मेरे दिल से पूछो दिल रस के स्वाद
- 1:19:48को जानता है बुद्धि रस के श्वाद को नहीं जानती बुद्धि कहती परिहट
- 1:19:57दो और दो बता कितने होते हैं? हृदय रस की भाषा जमते है।
- 1:20:04तुम अभी न जीवन कैसा जीवन पूछो मेरे दिल से बुद्धि नहीं बता सके।
- 1:20:18जो लम्हे तेरी याद में गुजरे, तेरे अभाव में गुजरे उलम्हे बेकार
- 1:20:27कर उलम्हे फोंके गए तुमने सब कमा दिया।
- 1:20:37उस भिक्षुक की तरह जो मांग नहीं चला था, राजा मिल गया, रास्ते में
- 1:20:44अकाल पड़ा था। जोशियों ने कह दिया राजा भीख मांग
- 1:20:49भरपूर फसल हो गई राजा सुबह सुबह रस में निकला भीख मांगने।
- 1:20:56आगे मिला भी तो भिक्षुक मिला, भिखारी मांगता हूँ, तुम इतना ही
- 1:21:05सोच लिया करो, जो तुमसे वोट मांगने आता है, तुमको देगा क्या
- 1:21:13खाक देगा? मगता तुम्हें क्या दे सकता है?
- 1:21:18शहंसा तुम्हें दे सकता है क्यों मांगने ही आ गया मगता उसका स्वभाव
- 1:21:29है मांगना यह तुम्हें देगा क्या खाक देगा कुछ नहीं देगा दे सकेगा
- 1:21:35नहीं, मंगते का स्वभाव नहीं होता। बुद्धि का स्वभाव देना नहीं होता,
- 1:21:40बुद्धि का स्वभाव इकट्ठा करना होता है, हर्दा बांटता है, सो
- 1:21:46हाथों से इकट्ठा कर बुद्धि करती है।
- 1:21:511000 हाथों से बांट दो हर्दा बांटता है।
- 1:21:56तो हृदय को रस की पहचान, बुद्धि को रस की पहचान है, बुद्धि रस
- 1:22:03विहीन रह जाती है और तुम बुद्धि से उपनृत की व्याख्या करते हो।
- 1:22:09तुम बुद्धि से अष्टावक्र की व्याख्या करते हो, तुम बुद्धि से
- 1:22:14कृष्ण के वचन की व्याख्या करते हो।
- 1:22:18क्या ये हद नहीं हो गई? मूढ़ता की पराकाष्ठा नहीं हो गई
- 1:22:24और तुम अपने आप को समझदार कह जाओ, बस।
- 1:22:36संस्था के हाथ मजबूत करने हो जाएंगे।
- 1:22:40कल्याण मस्त तू बाबा बिलकुल हो जाएंगे लेकिन आखिर में पाओगे राजा
- 1:22:50उतरा। आगे से भिक्षुक आ रहा था।
- 1:22:55भिक्षुक जब घर से जाते हैं, थोड़े से चावल के दाने डाल के लेके जाते
- 1:22:58हैं, खड़काती हैं कि हाँ, दूसरे ने भी दिया है, उससे मनोवृत्ति
- 1:23:03बढ़ती है कि चलो दूसरे ने डाला तो हम गए गुजरे तो नहीं, हम भी थोड़ा
- 1:23:08सा डालते। अहंकार को ठेस लगती है।
- 1:23:11अगर नहीं डाले तो और इस मनोविज्ञान को अच्छी तरह से जानते
- 1:23:17हैं। मगते तो वो ऐसी ऐसी बातें करेंगे
- 1:23:22जिससे तुम्हारा मनोविज्ञान उखड़ेगा।
- 1:23:28तो खड़का के दिखा देगा वो देखो है किसी और ने भी दिया है।
- 1:23:34राजा नीचे उतरा, भिक्षु ने कहा मोच बन गए अरे राजा रसपिस वार
- 1:23:43मेरी तरफ़ आ रहा है, उसने तो जौली फेला भिक्षा पात्र के लिए रख
- 1:23:50दिया। जोली फलाल तो क्या देखता है कि
- 1:23:55राजा ने उसके सामने जोली फलाल वह तो मजबूर था।
- 1:24:02उसके क्षेत्र में अकाल पड़ गया था।
- 1:24:06और संत? पुरुषों ने कहा था कि राजा भीख
- 1:24:09मांगे, वैसे तो राजा भीख ही मांगता है।
- 1:24:16जब जब भी आपत्ति आती है तो राजा भीख मांगता है वोटों के।
- 1:24:30राजा ने भी झोली आड़ दी भिक्षु तो देख के हैरान या तो राजा मैंने तो
- 1:24:37सोचा था पात्र क्या भर देगा, आज तो बस सारी जिंदगी भर की कमाई दे
- 1:24:43जाए, लेकिन उसने तो झोली आड़ दी। बड़ा परेशान हो राजा है, डर भी
- 1:24:55गया राजा ने कहा कुछ भिक्षा भिक्षाम देव भिक्षाम देव घर से
- 1:25:04थोड़ी सी चावल ले गया। अपने भिक्षा पात्र में हाथ मारा,
- 1:25:10थोड़े से ज्यादा आ गए थे तो वहीं थोड़े से कम कर दिया।
- 1:25:16भिक्षु का कंजूस बहुत होते हैं। वोट मांगने वाले लोगों की तरह ये
- 1:25:23देते नहीं, लाख करोड़ दे दूँ। दे दो, बातों बासों में दे दो
- 1:25:30गप्पो की तरह दे दो और 50,00,000 करोड़ ले लो देखते क्या है तुम भी
- 1:25:40जानते हो, मैं भी जानता हूँ। मुट्ठी थोड़ी सी भीतर से खाली की
- 1:25:52ज्यादा वर्ग इतना जिगरा नहीं था। कहाँ होता है जिगरा?
- 1:26:00इन मांगने वाले मंगतों का शुरुआत ही मंगतों से हुई।
- 1:26:05इन्होंने अपनी असलियत दिखला दी। इसलिए मैं कहता हूँ जो राजनीति
- 1:26:10में चल गया वो खाली है, सोना है, मंगता है और भिक्षापत्र ले के
- 1:26:17तुम्हारे सामने आएगा यदि उसके भिक्षापत्र नहीं दिखेंगे कल मेरे
- 1:26:23पास दीपावली के दिन? सुबह सुबह किसी राजनैतिक का फ़ोन
- 1:26:28आया, कई राजनैतिकों के फ़ोन आए। मैं फला फला बोलता हूँ अपनी
- 1:26:39डेसिग्नेशन बताइए। आपको दीपावली का त्यौहार बनती
- 1:26:46छोड़ दिवस की बहुत बहुत परमात्मा आपको खूब बड़ाई चढ़ाई।
- 1:26:52रोशनइयों से भरा ये त्यौहार आपके दिल के दीए को रोशन कर जाए।
- 1:27:00मैं हँसा। मेरे पास बैठा हुआ बेटा कहता
- 1:27:09क्यों से मैंने कहा बुझा हुआ दिया कहता है जले हुए दिए को के भगवान
- 1:27:16तेरे दिए को रोशनाई तेरे को। जिसके पास कुछ है नहीं देने को वह
- 1:27:26आशीर्वाद देता है। बहुत मैसेज आए, ईश्वर कल्याण करे
- 1:27:36ईश्वर समृद्धि ले के आए प्रोस्पर्टी प्लेज़र।
- 1:27:42हैपीनस मैंने पुत्र से कहा पुत्र क्या ये सब मेरे पास नहीं है क्या
- 1:27:51तो पुत्र ठाका वार ये जो मुझे दे रहे हैं, क्या ये मेरे पास नहीं
- 1:27:59है क्या? लेकिन मुझे शक होने वाला तो है
- 1:28:02नहीं। मैं तो दिन भर रात पीता सदा
- 1:28:10दिवाली सादगी और आठों पहर आनंद तुम आज अभी मुझे बधाइयां दे रहे
- 1:28:16हो, मैं किसको बधाईयाँ? किसको बधाइयां दूँ?
- 1:28:25हर वक्त पीता हुआ व्यक्ति दीपावली मनाता हुआ व्यक्ति उसके भीतर का
- 1:28:31दीया जग रहा है। दिन भर रहन और किसको बधाइयां दे।
- 1:28:38लेकिन मुझे तो तुम्हारी दशा पे रोना आता है, मेरी आँखें हैं भाई
- 1:28:46राजनीतिज्ञों मेरे से चलप्रेब न करो जलता हुआ दिया आँखें रखता है
- 1:28:54और जानता है कि सामने वाला जो दुआएं दे रहा है।
- 1:28:58भुजा हुआ दिया तुम्हारे भीतर इतना संकल्प कहाँ संकल्प होता तो तुम
- 1:29:06गद्दी पर बैठते ही सोने का भारत बना देते गपोर शंख हो तुम दो
- 1:29:14व्यक्ति पंचायती धर्मशाला में मेरे।
- 1:29:17दोनों के पास शंख थे, एक ने दूसरे को शंख दिखाए।
- 1:29:22देखो ये शंख है इससे जो मांगो मैं दे देता दूसरा कहता भाई
- 1:29:30प्रैक्टिकल दिखा वो कहते तू मांग। कहते इससे मांगले ₹10 उस वक्त ₹10
- 1:29:38बहुत होते थे, पुराने जमाने की बात वो कहते ₹10 दे दो, शंख
- 1:29:43महाराज उसने ₹10 दे दिए, ये लोग सच में ₹10 दे दिए।
- 1:29:53बड़ा हैरान हुआ। कहता शंख तो मेरे पास हुआ है अब
- 1:30:00तुम मैं सुना मत कहते, अच्छा दिखाओ उसने अपना शंख जोले में से
- 1:30:08निकाला उसके शंख के सामने तो। और पहले वाले का शंख जिसने ₹10
- 1:30:16दिया था, वो बड़ा बोना मालूम पड़ता, वो कहता है ये ये जितना
- 1:30:22मांगता है उतना नहीं देता है, उससे दुगना देता है।
- 1:30:26अच्छा दिखा प्रैक्टिकल। उसने कहा बोल क्या मांगना है कहता
- 1:30:34वो ही माल ₹10 दे दे, वो कहता शंख जी महाराज ₹10 दे दो, तो शंख जी
- 1:30:46महाराज हसन मत शंख जी महाराज बोले ₹20 ले ले।
- 1:30:54अरे वो ही बात की ना देख हसना शुरू कर दी, उसने कहा या तो कमाल
- 1:31:00हो गए मैं कहा अच्छा चलो 20 मांगो 20।
- 1:31:11उसने कहा शंख जी महाराज ₹20 दे दो तो शंख जी महाराज ₹20 दे दो और
- 1:31:21शंख जी बोले 40 ले लो भाई। तुम्हारे पास तो शंख गट गया भाई
- 1:31:31वैसे भी अधना सा लगता है इसके सामने ये तो शंख बहुत बड़ा अब
- 1:31:38लाली से आया मन पे मूर्ख को यह नहीं पता, जब उसे दुगने को देता
- 1:31:45है, तो तू ही दुगने मांग ले। 20 मांग ले 1000 मांग ले जो देता
- 1:31:53है उससे मांग ले वो कहता है अच्छा तू ऐसे ही कर तू कैश को ₹100 दे
- 1:32:00दे ₹100 तो बहुत होते थे उनके ₹1100 में पिताजी ने?
- 1:32:06आज ₹2,00,00,000 का मकान वो लिया था अब तो बेच दिया भैया अब नहीं
- 1:32:11कभी आई टी वाले आ जाएंगे अब बेच दिया वो वो हमारी माता का था
- 1:32:25अच्छा ₹100 100 कह देंगे अरे तो 200 दे।
- 1:32:33100 से क्या बनेगा? उसको तो पक्का विश्वास हो गया।
- 1:32:37मैं तो 10 मांगता हूँ, 10 ही देता है ये तो अब 100 मांग लिए, 100 का
- 1:32:42भी कहता है 200 ले ले उसके तो मन में ही दाल जगा तुम्हारी तरह।
- 1:32:53वो कहता फिर ऐसा करे, किसी तरह लालच जगह आदान प्रदान कर ले।
- 1:32:59वो तो चाहता ही था, उन्हें बातचीत करनी शुरू कर दी।
- 1:33:06संबंध बढ़ाना ही शुरू कर दिए। 1 दिन नहीं तो सर्वे में रहना
- 1:33:10होता है। उसके पास ही रहने लगा।
- 1:33:12खाना पीना सब कहता फिर ऐसा कर तुम अपना शंख ट्रांसफर कर लो मेरे साथ
- 1:33:20छोटे शंख वाला बोला बोलता भाई देख ले ट्रांसफर क्या करना है?
- 1:33:28लेकिन मुझे तेरे पिता शक है। टस बहुत आता है।
- 1:33:32मुझे चल बदल ले तो भी क्या याद रखेगा?
- 1:33:39कोई मिला था उसने छोटे वाला शंख ले लिया, बड़े वाला शंख दे दिए,
- 1:33:47जो दुगने देता था, बोलता था। और खिसक लिया।
- 1:33:55कभी वोट लेके कभी वापस आया खिसक गया।
- 1:34:00कभी वापस आए तो वो भी सिर्फ तसल्ली बनाने के लिए कि हाँ हम
- 1:34:05आपका काम करेंगे। करते वरते कुछ नहीं करते, अपना ही
- 1:34:10हैं और जो करते हैं अपना वो संग नहीं जाता।
- 1:34:17फिर वो अदालतों के ही चक्कर लगाते रहते हैं, जिसने सारे पंजाब को
- 1:34:22नशे में धकेल दिया और मार दिया, कहते हैं उसके ऊपर तुम।
- 1:34:29एफआइआर मत करो जिसने सारे पंजाब को नशे में धकेल के मार दिया और
- 1:34:38मैं मैं नहीं जानता सारी सारी दुनिया जानती।
- 1:34:44ये जो पोर्ट के ऊपर 3000 करोड़ रुपए का माल आया था, ये किसका था,
- 1:34:49कहाँ जाएगा? ये पड़ोसियों को दोगे, चाइना को
- 1:34:56दोगे, पाकिस्तान को दोगे? हमारे ही जवानों को मारोगे और
- 1:35:00क्या करोगे और हम नहीं के सोए हो? वो तो खिसक लिया, खिसक लिया तो वो
- 1:35:09तो चाहता था बड़े शंख वाला जिसके पास आ गया ये खिसके वो खिसक लिया
- 1:35:16अब मज़े से उसे कहता कि तू ऐसा कर ₹2000 दे दे मुझे।
- 1:35:24बता 1000 क्या तू 2000 ले चल कहता है चल तू ₹2000 दे ₹2000 तू 4000
- 1:35:35ले संख्या बढ़ती गई दिया विया कुछ नहीं बिहार की तरह।
- 1:35:42कुछ दिया हो तो मुझे बता देना, मैं तुम्हें बता रहा हूँ, मुझे
- 1:35:48नहीं पता 5 दिन रह गए हैं के 2 दिन रह गए हैं के शाम को ही होनी
- 1:35:52है चुनाव, मुझे नहीं पता, मुझे तो ये भी नहीं पता।
- 1:35:55चुनाव शाम को होते के सुबह होते। मुझको तो ये पता है जिसे इलेक्शन
- 1:36:02कमीशन जीता देता है वो जीत जाता है।
- 1:36:04बस मुझे लोगों ने पूछा कौन जीतेगा भाई?
- 1:36:08मैंने किसी से इलेक्शन कमीशन जीता देगा, वो जीत जाएगा।
- 1:36:21सच बोलने में गुरिस कैसी मत डाला करो वोट वोट तुम लाख बहरे बैठाते।
- 1:36:46लगे हैं। शम पर पहर लगे हैं शम पर पहर
- 1:37:00जमाने। की निगाहों के लगे हैं शमफहर
- 1:37:13जमाने की निगाहों के जमाने की। ओके?
- 1:37:28जिन्हें मिलने की हसरत है, जिन्हें मिलने की हसरत है, राग
- 1:37:41बदल जाता है। वो परवाने कहाँ जाएं जिन्हें
- 1:37:51मिलने की हसरत है, वो परवाने कहाँ जाएं?
- 1:38:07कि दो शब्द कर्मी आवय कपड़ा नदरी मुक्त सवार, वैसे तुम्हारा है तो
- 1:38:20कुछ है मानस जामा भी उसने दिया एक कण भी तुम कहीं से ले के आये तो
- 1:38:28बता दो। वो चाहे पशु के शरीर पे लगा अमीबा
- 1:38:33के शरीर पे लगा पत्थर पे लगा रेत के कण पे लगा चांदतारों पे लगा
- 1:38:40ग्रह नक्षत्रों पे लगा अगर एक कण तुमने खुद बनाया हो तो बता दें।
- 1:38:49जिसने बनाया माल उसका तुम्हारा सिर्फ दावा और कितना सत्य
- 1:38:56ब्रह्मात्मा ने बनाया मृत्यु मृत्यु तुम्हें बता देती है कि
- 1:39:00तुम्हारा क्या था, कितनों को बताया।
- 1:39:04तुम समझे नहीं समझे तो जिसके पास वो शंख था उसने कहा 4000 दे दे
- 1:39:148000 दे दे वो बढ़ता ही चला गया, दिया भी आ कुछ ने।
- 1:39:21देते बैठे कुछ नहीं। इस वक्त देश को एक महान ईमानदार
- 1:39:26व्यक्ति की आवश्यकता है। मुझे लोग क्या देते हैं?
- 1:39:31बापू थोड़ा शोर त्याग करता हूँ 1 साल के लिए।
- 1:39:41ये देश सोने की चिड़िया हो जाएगी, हो जाएगी भाई मेरे हार्ड काम नहीं
- 1:39:45करता, मैं इनको मरोड़ तो दूँ लेकिन क्या करूँ?
- 1:39:58जीस ने जीस व्यक्ति ने तुम भी दे करो झूठ नहीं बोल।
- 1:40:0513 वर्षों से मैंने अन्न का एक दान नहीं खाया और अन्न में ही
- 1:40:11प्राण हैं और 13 वर्षों से एक स्थान पे जी बैठ गया भी नहीं।
- 1:40:19लोग तो बेटी से पूछ लेते हैं। फिर पंडित जी को कितने साल हो गए?
- 1:40:35बेटा सब में जाता है कोई बाहर तो कभी नहीं तो बेटा पूछ लेता है किस
- 1:40:44चीज़ को? कहता है पंडित जी दिखे नहीं कहते
- 1:40:50हाँ तो कितने साल हो गए, कब हुए? वो कहते अभी हुए अभी अभी तो हैं,
- 1:40:58अभी होंगे होंगे जी वो ये बिलाशक इसमें कोई पार्ट नहीं ये बताइए।
- 1:41:06मौत मारेगी तो फिर फिर वोट से मारेगा।
- 1:41:13फिर पता चलता है लेकिन कोई भी मारेगा मरना तो इस शरीर को पड़ता
- 1:41:19ही है। ये शरीर माची का पुतला खंड जाएगा।
- 1:41:271 दिन सिर्फ मान ही तुम्हारे हाथ में है और कुछ नहीं, तुम्हारा न
- 1:41:34कुछ साथ जाएगा। मैं तुम्हें बता देती है, इक्की
- 1:41:38तोपों की सलामी पक्का है कि तुम नहीं सुन पाओगे।
- 1:41:43मरते हुए व्यक्ति को अठारहवां अध्याय गीता के सुनाने का कोई
- 1:41:48फायदा नहीं क्योंकि वो सुनता नहीं।
- 1:41:50कौन बोल रहा है। उसके भीतर की सारी व्यवस्था
- 1:41:55प्रकृति बड़ा जबरदस्त ऑपरेट कर रही है।
- 1:42:01सर्जरी कर रही है। एक एक चीज़ को काट रही है, बड़ी
- 1:42:06बारीकी से उसने जोड़ रखा है सब जो तुम्हें दिखता भी नहीं कहाँ दिखते
- 1:42:10हैं तुम्हें चक्र कहाँ दिखती है तुम्हें गुंडलनी कहाँ दिखता
- 1:42:13तुम्हें? सहस्रार ब्रह्म रंद्र ये पीनियल
- 1:42:17ग्लैंड के साथ जो बैठी है बिल्कुल बिल्कुल सधारण सी चीज़ वो तुम्हें
- 1:42:22दिखती नहीं। वो ही कंट्रोल करती है सारा कुछ
- 1:42:31एक रेत के दाने से भी हजारवां हिस्सा, लेकिन संत तो उसे देख
- 1:42:37सकता है। संत की दृष्टि बड़ी पारदर्शी होती
- 1:42:41है। कर्मिया वय कपड़ा नदरी मोघलवार और
- 1:42:58दूसरा ना वह बुद्धि से मिलता, ना शब्दों से मिलता, ना शास्त्र से
- 1:43:07मिलता ना पढ़ने से मिलता ना लिखने से मिलता।
- 1:43:11ना सुनाने से मिलता ना सुनने से मिलता बड़ा प्यारा शब्द है पर
- 1:43:22पूछा भी बड़ा कमाल का तुमने ऐसा शब्द शायद।
- 1:43:28उपनिषद में और कोई है नहीं। मुझे लगता वह सिर्फ उसे ही मिलता
- 1:43:35जीस पर आत्मा खुद ही मेहरबान हो जाती।
- 1:43:39आत्मा जीसको चुन लेती, उसे ही मिलता आत्मा जिसे चुन लेती उसके
- 1:43:44सामने अपनी वास्तविकता को उगाड़ देती है।
- 1:43:48पर्दा उठा देती है। घट के फटखोल रे तो है यहाँ
- 1:44:03मिलेंगे। ये घूँघट का पर्दा ही है तुम्हारे
- 1:44:15और भ्रम के बीच अन्यथा तुम भ्रम होए।
- 1:44:24घोंघट के पटखोलरे तोहे प्यार मिलेंगे घट घट में तो।
- 1:44:46गट गट में तोर राम बस तू कट वचन मत बोल रे।
- 1:45:00तोहे पिया मिलेंगे कटू का वचन मत बोल रे तोहे।
- 1:45:10पिया मिलेंगे कटू का वचन कड़े हुए वचन कटू का वचन झूठ मत।
- 1:45:22सत्य मीठा तुम्हें कड़वा लगता हूँ और तुम सत्य को कड़वा कहते हो, बस
- 1:45:33यही बात बताई गई है यही समझने समझाने की बात।
- 1:45:38कटू को वचन मत बोल रे, सत्य बोलेंगे पर लोग नाराज हो जाएंगे।
- 1:45:47कटू को वचन मत बोल। अब कितने लोग नाराज होंगे पता
- 1:45:52नहीं यहाँ से? कटुक वचन मत बोल रे तोहे पिया
- 1:46:03मिलेंगे घूंघटके पटखोल रे तोहे पिया मिलेंगे।
- 1:46:20उठा दे सर से पर्दा उठा दे सर से पर्दा हम तेरा दीदार करने आए।