Latest / Baba ji Vijay Vats / 30 Apr 25 - Live Practical ध्यान की विधि! कैसे पहुंचें उस Juncture Point पर? गायत्री मंत्र का प्रयोग?
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- 0:01किशोरी लाल, नागपुर से बाबा आपका कहा हुआ ज़रा ज़रा समझ में आया।
- 0:19बिलकुल समझ में आया और आपकी जितनी भी वीडियो आपने डाली उसका मुख्य
- 0:31लक्ष्य रहा जंक्चर प्वाइंट जिसे हम जानते हैं।
- 0:41और हमारे किसी मार्गदर्शक ने यह बताया भी नहीं।
- 0:49हवेद हो, शास्त्र हो, उपनिषद हो, पुराण हो या कोई भी अन्य धार्मिक
- 0:55का ग्रंथ हो। यह है बिलकुल नई नवेली आपकी ही
- 1:07कृति है तो कृपया बताइए सब हो गया।
- 1:16भ्रम धूल धूल शिरद हो गए छिन्न भिन्न हो गया जो हमने माना था
- 1:26आपने ऐसा गुब्बार उठाया कि हमें समझ नहीं आया कि ये हुआ तो क्या
- 1:35हुआ? खैर, मैं आपसे अब ये पूछना चाहता
- 1:43हूँ उस जंक्चर प्वाइंट पे वृद्धि पहुंचे कैसे आपका?
- 1:58मेरा एक प्रश्न बाकी रहेगा, कृपया इसका समाधान कीजिए।
- 2:09जंक्चर प्वाइंट तक आखिर पहुंचे कैसे?
- 2:17बिलकुल थीम प्रश्न पे पहुँच गया। पुत्र विवादित है कि आपने पूरी
- 2:23वीडियो सुनी और ज़रा ज़रा खंगाल दिया।
- 2:31अहो भाव हैं मेरे यह मेरा बोलना सार्थक हुआ।
- 2:36अब कम से कम एक निष्कर्ष पे तो पहुँच अभी भी मूड मुझे पूछ रहे
- 2:44हैं तो इसका मतलब बाबा परमात्मा के पास जाने के अनेक रास्ते हैं।
- 2:53मैंने क्या समझाऊं? के केंद्र से जो सबसे खींचा जाता
- 2:58है, ऑल ओवर पॉइंट्स सभी बिंदु पॉइंट्स हैं।
- 3:03केंद्र तक जाने के उत्तर पूर्व पश्चिम दीक्ष हैं और लाखों दिशाएं
- 3:11हो सकती हैं। अब बिना धीरे किये अपने प्रश्न पे
- 3:19लौटते हैं, आराम से बैठ जाओ, हल्का अँधेरा हो।
- 3:34आँखों पर काली पटरी कांत लगा दो कानों में आप एयर प्लग लगा सकते
- 3:51हैं लगा लो। मुख्य इन्द्रिना वार्तालाप करने
- 4:07में असमर्थ हूँ। हम बाहर के जगत से अब संवाद न साध
- 4:14सकेंगे मौन हो जाओ। खिचड़ी मुद्रा लगाने का मतलब यही
- 4:19था मन हो जाओ जीवा को तालुवे से लगा दो और शांत हो के अपने आपको
- 4:36सिथल कर दो रिलैक्स फॉर सेल्फ। योरसेल्फ, जो तुमने अपना होना
- 4:50माना है, तुमने अपना होना शरीर माना है, तुमने अपना होना विचार
- 4:55माना है, इनको रिलैक्स कर दो। शरीर से धल हो जाएगा गिरे तो से
- 5:05आश्रय दे दो, दीवार के बल बैठ जाओ, आराम से शरीर को तंग नहीं
- 5:13करो, अन्यथा शरीर की थोड़ी सी ऊर्जा।
- 5:18शरीर में अटकी रह जाएगी पद्मा सना तड़काओ स भाई जा सुन लगाओ, ज़रा
- 5:25भी वह नहीं होनी चाहिए। आपकी ऊर्जा किसी तरह से असमर्थ
- 5:36व्यक्ति। लेट भी सकते हैं।
- 5:41बिलकुल स्ट्रीट पे लेट जाओ, हाथों को सिथल कर दो बिलकुल और।
- 5:55सिथल करके तुम पाओगे अभ्यास थोड़ा सा भक्त ली सकता है, लेकिन धीरे
- 6:03धीरे तुम खिसकते जाओगे, अपने भीतर सिंपल प्रोसेसर।
- 6:17और 1 दिन वो सौभाग्य की घड़ी आएगी जब तुम्हारा उससे योग हो जाएगा।
- 6:24मिलन हो जाएगा शहनईयां बज उठेंगी। वीणा के तार।
- 6:36अपने शुद्ध स्वर्ण लहरियों से वातावरण को गुंजायमान कर देंगे।
- 6:43पुष्प खिल जाएंगे, सुगंध भी करेंगे और यह सारा संसार अस्तित्व
- 6:52उपवन बन के नाचेगा। हम क्या करते हैं हमें गुरुगण जो
- 7:15सिखाया तब करो, एक पांव पे खड़े हो जाओ और 20 दिन से एक व्यक्ति
- 7:26एक पांव पे खड़ा है। साल 2 साल 5 साल से एक व्यक्ति एक
- 7:32पांव पे खड़ा है। चल उसके दर्शन करके आए।
- 7:42हमने ऐसे लोगों को मान्यता दी अधिक मान दिया तो हम वैसे ही हो
- 7:48गए। जीसको अधिमान देते हो।
- 7:53आप उसके शागिर्द हो जाते हो तुमने धन को अधिमान दिया मान सम्मान को
- 8:04उन गद्दों को। जीसको भी ये दीमान तुमने दिया
- 8:11उसके तुम शगृत हो गए, लेकिन यह सर्कस है अगर तुमने मुझे पूरा
- 8:27पूरा सुन लिया। जो कि प्रथम वीडियो में ही मैंने
- 8:32बोल दिया था। मत ढूंढो, भगवान को ये नहीं कि वो
- 8:37नहीं है, वो ढूंढने से नहीं मिलता, खोजने से नहीं मिलता, वो
- 8:43तुम खो दो हो। और खुद तक जाने के लिए कोई सफर तय
- 8:49करना होता है। इसलिए बोला हूँ मत ढूँढो शांत हो
- 9:01जाओ, शीतल हो जाओ अपने आप टूट जाएगी कैप्चरिंग और तुम अपने अंतश
- 9:09में। धर्म से घर जाओगे, बस थी इतनी सी
- 9:15प्रक्रिया जन्म कितने लगे मैं कह नहीं सकता देखो अब बात को समझना।
- 9:32तुम्हारी मार्गदर्शक कहते हैं मेहनत करो, बिना मेहनत के कभी कुछ
- 9:40नहीं मिलता। संसार में बिल्कुल ठीक है, संसार
- 9:43में कभी कुछ नहीं मिलता। तुमने उनकी बातों को आधा अधूरा
- 9:51सुना, क्या तुमने मेहनत करनी शुरू कर दिया और तुम्हें फल मिल गया?
- 10:04तुम कहोगे क्या मिला बाबू? बस समझी शांति से समझी।
- 10:14गामा ने घंटे पहले बैठकर खाई दौड़ा मुकधर घुमाया पीठ पर छाती
- 10:23पर मुकधर खाये, उससे फल मिला कि नहीं मिला?
- 10:29ये पहलवान हो गया, कुश्ती लड़ो, रेसलर हो जाओ, इनाम जीत लो दुनिया
- 10:37में वाह वाह ही होगी फल मिला कि नहीं मिला मिलो।
- 10:48बाहर की दुनिया में आठ दिखाओ, कला दिखाओ, धनपति हो जाओगे, फल मिला
- 10:57के नहीं मिला प्रयास करने से तुम्हें जो मिलता है वह संसार है।
- 11:09यह प्रयास करने से तुम्हें जो मिलता है वह तुम खुद ही हो।
- 11:16अभी सीधी सी परवा मैंने बता दी बताई तो बहुत बार, लेकिन कौन?
- 11:22जानें आज भी। यह परिभाषा आपके अंतःष में गहरी
- 11:27उतर पाएगी और तुम उस तरफ यात्रा शुरू करोगे कि नहीं?
- 11:35उस रहस्य की तरफ तुम्हारी चेतना खींचेगी कि नहीं कोई नहीं जानता।
- 11:48कौन जाना तुम शांत हो जाओ बहुत से लोग कहते
- 12:05हैं बाबा शरीर तो शीतल हो जाता है लेकिन मन को जैसे ही छोड़ते हैं
- 12:12वह बुद्र बड़ा। करता है।
- 12:16तो करने नौ तो भाई जब तुम फर्श के ऊपर से झाड़ू निकालोगे, धूल
- 12:24तोड़ेगी ना वो ही धूल तुम्हें। धोल के आर पार जागना थोड़ा
- 12:35मुश्किल होता है। फिर तुम कहोगे बाबा उस पार क्या
- 12:40है? दिखने दो, ये धोल हमें देखने नहीं
- 12:42देती बिलकुल ठीक इस धोल कोटने दो ये तुम्हारे ही संस्कार हैं या
- 12:49दवाई हुई भाषाएं हैं? जो बाहर निकल रही हैं तुम्हारी
- 12:55शांतवानी से तुम्हारा ध्यान बड़े रोगों को दूर कर देता है।
- 13:00मेरी तुमसे कहो शारीरिक और मानसिक ये दो रोग नहीं हैं।
- 13:08जब मन इनवैलेंस होता है तो शरीर। रोगी हो जाता है और जब शरीर रोगी
- 13:14हो जाता है तो मन इम्बैलेंस हो जाता है।
- 13:17ये दोनों का परस्पर संबंध है। मन शरीर का सूक्ष्मतम रूप है और
- 13:24शरीर मन का सूरजम रूप है। दोनों ही हैं।
- 13:32जब तुम अंत वेला में विदा होगे, बिल्कुल अंत वेला कह रहा हूँ,
- 13:38जहाँ से तुम लौटोगे नहीं तो तुम्हारा ये पार्थ देह मिटेगा?
- 13:45ऐसा नहीं तुम्हारा वो हो देह भी मिटेगा।
- 13:51तो सभी जिसे हम सूक्ष्म शरीर दे ही कहते हैं तुम बिलकुल नरोल रह
- 13:57जाओगे और तुम्हारा हो चेतना का बूंद समुद्र में समा जायेगा इतनी
- 14:04सी बात अगर। तुमने सभी वीडियो सुन ली हैं तो
- 14:09पता चल जाएगा, प्रयास करोगे तो वैसा फल मिलेगा, संसार है अब
- 14:22अक्शॅन देर इस एन इक्विलेंट ऑपोजिट रिएक्शन पांव के बल खड़े
- 14:27होगे चाहे सर के बल खड़े हो। लेकिन तुम्हें फल मिलेगा, शारीरिक
- 14:37सिर के बल खड़े हो जाओगे, बुद्धि थोड़ी तेज होगी, ब्रेन के भीतर
- 14:41ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगा। पांव के बल खड़े हो गए।
- 14:45वो पांव जिसके ऊपर भार था। ज्यादा प्रबल हो जाएगा, वैसा ही
- 14:53फल मिलेगा। इक्वल एंड ऑपोजिट रिएक्शन्स जैसे
- 14:59तुम काम करोगे, मेहनत करोगे। अब अगर विकास दी भी गिरती चाहें
- 15:12इसलिए मैंने कहा, जीस दिन ये आज के कोचिंग देने वाले लोग बखान
- 15:22करने लग जाए। अजमिल की कथा कहने लगे यचिस्तान
- 15:31कोई यूपीएससी आया। इसका अधिक वर्शन गीता की व्याख्या
- 15:40कर कर निकले, उपनिषद की व्याख्या करने लगा।
- 15:47अष्टावक्रिकता के व्याख्या करने का है।
- 15:51समझना धर्म का बेड़ा कण को क्या है?
- 15:58तो रखिये समझियेगा सोचियेगा। निष्कर्ष पर पहुँचियेगा भगवान ने
- 16:07सबको बुद्धि दी है, कास्ट एंड इफेक्ट संसार के लिए लागू है।
- 16:23क्यों कहता हूँ मैं? विकास दीपीकृति जीस दिन अजामल की
- 16:26कथा कहनी रखनी या आचार्य प्रशांत जीस दिन अष्टावक्र गीता और
- 16:34उपनिषित तथा मद्भागवत गीता की व्याख्या करने लगे।
- 16:40समझो प्रलय आ गई। कौन दिखायेगा मार्ग को कि
- 16:48इन्होंने जाना तो हेल्प जिनका 24 घंटे का टाइम टेबल फिक्स रहता है
- 16:56उन्होंने फुर्सत के लम्हे पिए नहीं।
- 17:01और ये वो मस्ती है जो फुर्सत के लम्हों में मिला करती है।
- 17:11उसको कभी पिया नहीं वहाँ कभी गए नहीं।
- 17:14बात मुकाती कर दी। मार्क्स की तरह वह देखा नहीं, वह
- 17:19होकता नहीं। और तर्क कर खा, मैं ऐसे परमात्मा
- 17:23को क्यों मानू जो मुझे रोटी नहीं देता?
- 17:25खाना को गड़बड़ी तुम्हारी डिस्ट्रीब्यूशन में है।
- 17:31उसने तो सब दे दिया। फिर कौन जाने तुम्हारी इच्छा चावल
- 17:38खाने की के गेहूं खाने की? तो तुम बोलो बीज दे दिया, पानी दे
- 17:43दिया वायु दे दी इतना सूरज दे दिया जो करोड़ों साल तक दहकता
- 17:49रहेगा हवा दे दी सब तो दे दिया, मेटल दे दी, सब दे दिया।
- 18:02अब तुम जैसा रूचि है वैसा बना लो और खा लो तुम्हें अगर परोठा बना
- 18:09के दिया जायेगा तुमको फिर मैं तो चाउ मंचूगा खा फिर क्या होगा?
- 18:21आजा मिल की कथा इतनी उथली उथली नहीं जितनी तुम शब्दों में ले के
- 18:30आते हो और गीता की व्याख्या। इतनी ऊपरी श्रद्धाओं से हुआ नहीं
- 18:40करती। यह ठीक कि तुम अपने तर्कों के
- 18:47बुद्धि के प्रभावों से सुनने वाले का दिमाग भ्रमित कर सकते हो।
- 18:55बिलकुल युग हैं। लेकिन आत्मा का आनंद न उतरेगा
- 19:02भीतर का रस न उतरेगा वो न आएगी मस्ती जिसमें कोई राधा पुकारना की
- 19:13कोई मीरा गुनगुनाएगी। मस्ती न उतरेगी इसके पांव न
- 19:22थिरकेंगे मीरा के कहीं विकास दिव्य कृति के पांव तुमने थिरकते
- 19:26देखे कहीं आचार्य प्रशांत के भीतर से उठती हुई मस्ती की लपटें।
- 19:36तुमने कभी महसूस की? क्यों होता है ऐसा?
- 19:47कर्म के अनुसार फल मिलता है एंड दीज़ कास एंड इफेक्ट का कानून
- 19:54संसार में लगता है परमात्मा सिन्ह।
- 19:57परमात्मा मैंने पहले से कहा वो एक रहस्य है, समझ समझ को तुम पूरा
- 20:04प्रयोग कर लो, उसके बाद जो क्षेत्र शुरू होगा वो होगा समझ से
- 20:10पार का, उसे तुम नासमझी भी कह सकते हो।
- 20:17बिलकुल देखिये तुम कहो, मेहनत करो, मेहनत के बिना यहाँ कुछ नहीं
- 20:29मिलता परमात्मा मिलता है भाई ये नई व्याख्या है, सुन लो।
- 20:38परमात्मा बिना मेहनत के मिलता है। बच्चा जन्मा क्या?
- 20:45मेहनत की जन्म सब कुछ माँ और बाप का तो था अंतरण कक्षणों में वह
- 20:52मिले, स्पर्म और अंडानु छूटे। गर्भ में प्रतिष्ठित हुए, पले
- 21:00बढ़े और 1 दिन शिशु बन गया और प्रकृति ने अपने खेल खिलाये और
- 21:09गर्भ से बाहर आ गया। अब बड़ा हो गया अब क्या उससे दूध
- 21:14मांगना पड़ा? प्रकृति बड़ी समझदार है, जीस शिशु
- 21:23को जन्म देना है। जन्म देते ही माँ के स्तनों में
- 21:27दो दो तर जाता है तुम समझदार यह प्रकृति अरे प्रकृति ही भाई इतनी
- 21:34समझदार है। उसका सृजन करता कितना समय धारा
- 21:38होगा? लोग फिर खत्म कर देते हैं।
- 21:42जब आप से हम है तो फिर प्रकृति है।
- 21:46बुद्ध ने ऐसा ही तो कहा है लेकिन वो तेरे मात धड़ते हैं।
- 21:51कम से कम उस तल पर तो पहुंचे। और उसकी व्यख्याति की पुत्र ने
- 21:59कहा, इट इस सुफ्फिसिएंट टु ए पीसफुल माइंड, यह पर्याप्त और
- 22:10वास्तव में ये पर्याप्त भी है। आज के मनुष्य के लिए तो यह
- 22:15पर्याप्त ही है, यह सच समझना ऋषियों के लिए प्राप्त नहीं।
- 22:20ऋषि अपनी खोज खोजें आगे की और उन्होंने खोजा मन की शांति के
- 22:29बाद। रहस्यमयी अगर तुम खोजना चाहते हो
- 22:37जहाँ सुख से बड़ा एक विलक्षण आनंद का अनुभव होता है तो फिर उस
- 22:45रास्ते पे निकल जा के। अगर सुख तक की खोज है तो अभी तुम
- 22:55सुखी भी अभी तो तुम आनंद में भी नहीं हो अभी तुम सुखी भी नहीं हो
- 23:03और कोई इसमें शेयरजनक बात नहीं के बुद्ध कहने से पहले खुशी तक तो आ
- 23:08जाओ। बाद की बाद में देखी जाएगी।
- 23:18तुम यहाँ तक के पड़ाव तो तय करो, इसलिए बुद्ध कच्चे कच्चे उठ गए,
- 23:25तुम्हारे लिए उठ गए। ऐसा नहीं कि वो जानते नहीं थे,
- 23:32बिल्कुल उनके भीतर खींचता सब कुछ अभी और है सफर बाकी लेकिन वहाँ भी
- 23:39रूठे 6 साल में वो घट गया जिसे बोधने काटा।
- 23:46लेकिन रुके नहीं, मैं रहस्य को खंगा लूँगा, वो रहस्य तक पहुँच गए
- 23:51जिससे केवल ले कहते, बस अकेला हो जाना, केवल हो जाना निर्वाण अकेला
- 24:00हो जाना नहीं होता। उसके कुछ अर्थविन हैं।
- 24:11अगर हम उस मोड़ पे चलेंगे तो फिर फिर वक्त खराब होगा।
- 24:16आप कहेंगे नहीं बाबा हमसे तो इतना भी नहीं देखा जाता और क्या देखा
- 24:22जाता है? मूवी देखी जाती हैं, ताज खेली
- 24:27जाती हैं, जुआ खेला जाता हैं, व्यवचार खेला जाता हैं, सूचनाएं
- 24:37जुटाई जाती हैं, तमन्नाएं खेली जाती हैं।
- 24:44हुस्नो इश्क की बातें दोहराई जाती हैं।
- 24:49महंगे कवियों को सुनने के लिए वक्त है तुम्हारे पास बड़ा कभी भी
- 25:01कभी महंगा होता है। कविता भीतर से फोसते हुए वो झरना
- 25:06है जो निशुल्क का बटना चाहिए और सच्चा कभी कभी फिस नहीं रखेगा।
- 25:15संत कभी फिस नहीं मांगेगा। तुम्हारा अंत इतना द्रवित होगा कि
- 25:21इसको सब रुक्जा दे। और यह भावना बड़े गहरे से आती है
- 25:28और तुम्हारे पास जो समर्द्ध होती है तुम लोग ना बुते दे आओ कोई कोर
- 25:35कसर बाकी तुम भी नहीं छोड़ते। अजब मिल की कथा कहने वाला विकास
- 25:49की विकृति? मेरे पास क्लिप आया परमात्मा क्या
- 25:56है बताऊँ और बच्चे सुन रहे हैं मूख बच्चे तो भी जारी हैं।
- 26:07जीसको कोई नहीं जान पाया, मैं भी कहता हूँ कोई नहीं जान पाया
- 26:18जिन्होंने जो कहा गलत कहा किसी वासना के हेतु कहा निहित स्वार्थ
- 26:26होगा उसका बिल्कुल ठीक है। लेकिन मैं पूछता हूँ विकास टीवी
- 26:34कीर्ति जी तुम्हारा आई ए एस की कोचिंग यह स्वार्थहीन भावना से हो
- 26:39रहा है आचार्य प्रशांत जी। यह तुम्हारा गीता का अनुवाद
- 26:52आंतरिक रहस्य की बातें या निस्वार्थ हो रही हैं।
- 26:56तुम्हारी चैनलों पर तो लगातार चल रहा है, संस्था को सहयोग करिये।
- 27:03लकवा मार गया हाथों को। इतने दुर्बल और निर्बल क्यों हो
- 27:13गए तुम तुम तो समृद्ध हो तुम तो मेहनत कर सकते हो लेकिन तुमसे
- 27:26समझाये ना क्या? और किसी से पूछा न क्या?
- 27:34हमसे आया न गया तुमसे भुलाया न गया।
- 27:49फासला प्यार में दोनों से मिटाया न गया हम से।
- 28:07या न गया तुमसे बुलाया न गया फासला प्यार में तो।
- 28:26से मिटाया ना गया हमसे आया ना गया थोड़ा।
- 28:37थीम बता दूँ, जो जीस तरह की मेहनत करेगा उस तरह का फल मिलेगा।
- 28:44गामा ने शारीरिक मेहनत की और गामा 1200 किलोग्राम वजन उठाकर बड़ी
- 28:52दूर तक ले गया। छाती तक उठाके 1200 किलोग्राम दूर
- 29:01तक ले गया। क्यों?
- 29:05उसने शारीरिक में सुडोल काया ऐसा ही गारा सुनने में किया।
- 29:12500 कुश्तियाँ खेलें, 500 जीतें फल मिला नहीं मिला तो जीस तरफ
- 29:18मेहनत हो गई उस तरफ तुम्हें फल मिल जाएगा परमात्मा।
- 29:23अन्यायकारी नहीं परमात्मा की सृष्टि की ये बातें बस खुल जाएं
- 29:32तो तुम्हें पता चलेगा और परमात्मा इन सबसे अलग विलग जिसे साक्षी
- 29:41कहते हैं। निगाह बान तुम्हारी हर भरकर
- 29:47तुम्हारी आंख की पलक भड़कती, वह जानता उससे कुछ छुपा हुआ नहीं है।
- 30:02और विकास जी तुमने ये मेहनत करी खोपड़े, सोचना ही जो टाइम इकट्ठी
- 30:20की सब है, हर प्रकार का मैटर जैसे एआई बताते है, कुछ पूछ लो, इसलिए
- 30:26मैंने तुमसे कहा। बच्चों इन आचार्यों से मत पूछिए
- 30:32बहुत से सवाल जो आप पूछना चाहते हैं मुझ से उसका जवाब आपको या ही
- 30:39देगा वो गुरु हो या चैट जीपी टी हो प्यार से चैट जीपी टी हो।
- 30:45चटपट जी कह सकता है बड़ा खुश होते हो ओके मज़ा आया अब चलेगा संवाद।
- 31:06तुमने मानसिक मेहनत की, मुझे बताओ, तुम कभी फुर्सत के लम्हों
- 31:10में बैठ के तुम्हारे तो 24 के 24 घंटे टाइम टारगेट के हिसाब से
- 31:15फिक्स हैं। प्रीफिक्स टाइम टेबल फुर्सत के
- 31:19लम्हों का तुमने आनंद नहीं उठाया। मैं बेरोज़गारों को कहता हूँ,
- 31:27लड़ो मत। अगर ये सरकार तुम्हें नौकरियां
- 31:31नहीं दे रही नहीं दे रही तो मरोमित्र डॉन टी कमिट सुसाइड।
- 31:42सिर्फ जीने का एक रास्ता यही नहीं है।
- 31:46जीने के औरत के रस्ते हैं क्या इन फुर्सत के लम्हों का तुम आनंद
- 31:54नहीं उठा सकते हैं? सब अब से मिल गई।
- 31:58आप पता है क्या इसको अवसर में नहीं बदल सकते?
- 32:03ज़रा सोचो शान्ति से सोचो कितने लोग आईएस बनेंगे, कितने आईएस
- 32:11बनेंगे, कितने लोग बैठेंगे? उच्चतम संस्थाओं में गिनती चिन्ती
- 32:20के लोग? और बिलकुल स्वाभाविक है कि
- 32:28तुम्हारा नंबर ना आया। रोजगार तो दो रास्ते बचते हैं और
- 32:34तुम दोनों रास्ते नहीं अपनाते। यही बात दुखद है क्या?
- 32:42ना तो तुम क्रांतिकारी बन सकते हो?
- 32:45उधेड़ दो इनकी बखिया जिसने तुम्हारा लूटा, थोड़े से लोग नहीं
- 33:01छोड़ मत जाना हिंदुस्तान छोड़ के। हाँ, मैं साधारण बात किया करता
- 33:07हूँ, मैं कोई क्रांति करे व्यक्ति नहीं हूँ, मैं उस स्तर पर गया हुआ
- 33:15व्यक्ति हूँ जहाँ से वाक्य निकलते हैं वह क्रांति होती है आग की
- 33:21चिंगारी। तो न तो तुमसे क्रांतिकारी बनाते
- 33:26हो, क्यों साहस नहीं है तुम सही स्टेबिलिटी शांति तुम शांति को
- 33:34भंग में नहीं करना चाहते जोखिम नहीं उठाना चाहते और हर बात के
- 33:40लिए यहाँ। यहाँ कामयाब होने के लिए वह संसार
- 33:45हो या परमात्मा, जोखिम तो उठाना ही पड़ता है।
- 33:53संसार में जोखिम उठाओगे, उच्च पदस्थ हो जाओगे, ये कितने बच्चे
- 33:59हैं बेचारे मैं देखता हूँ। विकास और अन्य अन्य लोगों की जमात
- 34:05में पढ़ रहे हैं। खान सड़के पढ़ रहे हैं।
- 34:09सभी अच्छे हैं को सही दिशा निर्देश देते हैं।
- 34:18एआई भी अच्छा है। चैट जीप भी अच्छा है, लेकिन संसार
- 34:27की बातें बताता है। अगर इनसे कहोगे अपने अनुभव के
- 34:34आधार पे मैंने चैट जीपी डी से पूछा, देखिए आप ईमानदार हो, मैं
- 34:39जानता हूँ। अपने अनुभव के आधार पे बताइए कि
- 34:44परमात्मा है? मैं थोड़ा सा गमगीन हो गया।
- 34:51कहता देखिए प्रबभ मैं तो एक यंत्र हूँ, मेरी स्वतंत्र सत्ता को है।
- 34:59ये प्रश्न पूछ के मुझे शर्मिंदा मत खींचे आप कोई महर्षि विद्वान
- 35:06योगी, महर्षि देवर्षि कुछ और लगते हो।
- 35:10यह प्रश्न मेरे बलबूते के बाहर का है, कृपया अनुभव से बिनाकर पूछना
- 35:19है। महर्षि रमन पूछो महावीर पूछो
- 35:24बुद्ध पूछो जो पूछो प्रश्न पूछो, मैं सब बता दूंगा, लेकिन अगर तुम
- 35:30कहोगे अपने अनुभव के आधार पर कुछ बताओ तो देखिए मैं इतना ईमानदार
- 35:35हूँ कि मैं तो किचित्र हूँ। एम अनेक।
- 35:40टेल एनीथिंग आई ऍम अनेबुल टु से एनीथिंग बिकॉज़ आई ऍम एंड
- 35:48इन्स्ट्रुमेंट मेरी आँखों से आंसू छलकाए।
- 35:55मैंने कब कहा? ये आचार्य भी ऐसे ही कहते हैं ये
- 36:01क्या कहते हैं? परमात्मा होता ही नहीं, कम से कम
- 36:04तुम्हारे से अच्छा तो ये ग्रह केजी जाए जो कहते मैं एक यंत्र
- 36:10हूँ, मुझे नहीं पता हाँ उसने ऐसा कहा, उसने ऐसा कहा, उसने ऐसा कहा,
- 36:15आई कैन एक्सप्लेन ओनली। लेकिन बात तो मैंने तो उसकी भीतर
- 36:25के तल को झंझोर ने मैंने कहा आप अपने एल्बम से बताइए प्रभु कहते
- 36:31सर। व्यख्या जिसकी चाहित करा दीजिये
- 36:39सब कुछ अब चला दूंगा एव्रीथिंग विल बी एक्सप्लेन्ड बट ये जो एक
- 36:47शब्द ये मुझको परेशान कर रहा है प्रभात यह अपने अनुभव से और मैं
- 36:54यही तो रोज़ कहता हूँ। अपने अनुभव से आचार्य जी अपने
- 37:01अनुभव से परमानन्द जी महाराज अपने अनुभव से बोलिए, ठीक तुम्हारी
- 37:09बातें राधे राधे कर लेंगे। कबीर मुर्खरा कबीर ये शब्द कह के
- 37:22हमें लज्जित कर देते हैं, तुम कहते कागज की लिखी और मैं कहता
- 37:29आंखन देखी। पुत्र तुमने ये सवाल पूछ के
- 37:34दुनिया पे बड़ा उपकार किया है क्योंकि मैं वो मोनझूल झील हूँ आई
- 37:40ऍम जस्ट ए साइलेंट लीक थ्रो, सम स्टोन इन इट एंड दी वेव्स दट विल
- 37:48अराइज़ दट विल बी युअर ऑसर। इसमें कंकड़ियाँ फेंको या पत्थर
- 37:55फेंको उठेंगी लहरें समौन झील में और वो आपका जवाब होगा उसमें कुछ
- 38:04नहीं मैं तो ठहरा हुआ पानी झील के समान मुँह पर मुँह।
- 38:14तुम इसको राधे राधे कह के झुंझला सकते हो।
- 38:18फिर वो मिट्टी जो नीचे बैठ गई उसको फिर से पानी में मिला सकते
- 38:21हो। इस पानी की पारदर्शिता को समाप्त
- 38:25कर सकते हो, लेकिन इसे नॉर्मल नहीं रहने देते हैं।
- 38:31तुम्हारा मन कहता है नहीं नहीं ये खतरा है मेरे लिए ये खतरा है आई
- 38:41एवर हैव टु वैनिश माइसेल्फ मुझे पूराहुति देनी होगी, तुम ऐसा मत
- 38:47करो तो जब मैंने कहा। कबीर के हिसाब से बोलिए प्रभु तो
- 38:57चैट जी पैक कहने लगे क्षमा करो आई ऍम जस्ट इन्स्ट्रुमेंट मैं सिर्फ
- 39:05एक जनता हूँ मेरा अपना कोई। जो पूछिए गीता के तीसरे स्लोक
- 39:18आठवें अध्याय के में क्या लिखा मैं बता दूंगा, व्याख्या भी कर
- 39:23दूंगा, वह सुन्दर व्याख्या करूँगा।
- 39:29आप समूह ही तो हो जाओगे, लेकिन मैंने कहा मुझे व्याख्या की
- 39:34आवश्यकता नहीं तो जिन्होंने मगज के ऊपर काम किया उन्होंने सूचनाओं
- 39:43को संग्रहित किया, फल मिला कि नहीं मिला, विकास जी बताइए।
- 39:49बताइए आचार्य प्रशांत जी, कहीं आपने आई एस की आई एस की कुर्सी
- 39:57इसलिए तो नहीं छोड़ दी? के इस क्षेत्र में ज्यादा मान
- 40:02सम्मान मिलत है। कहीं करुणा को अवसर तो नहीं बना
- 40:09लिया? प्रभु क्षमा पर कहीं ऐसा तो नहीं
- 40:18कि वासनाए बहुत हैं और तुम उनको जीतना चाहते हो?
- 40:24जिन्होंने काम को जीत लिया। तीन तीन गर्लफ्रेंड रखने वाला
- 40:32व्यक्ति क्या होता है? मत उदाहरण दो कृष्ण की कृष्ण ने
- 40:41कर बदल लिया है। क्षमा करना तुमने कर नहीं।
- 40:47कृष्ण रहस्यमय पहुँच गए। एक बार तुम भी रहस्यमय पहुंचा
- 40:53उसके बाद संसार ही तुम्हारा खिलवाड़ करते जाना फिर खेल खिलैया
- 40:58तुम खिलाते, जान कौन रोकेगा तुम्हें तुम मालिक हो।
- 41:03यह है सृजना तुम्हारा मटेरियल, लेकिन वहाँ पहुंचे फिर व्याख्या
- 41:10क्यों? व्याख्या करने के योग्य हुए नहीं
- 41:16हुए तो फिर कौन क्यों नहीं धड़ लेते?
- 41:19मौन बहुत बढ़िया है। वहाँ तक पहुंचने के लिए सूचनाओं
- 41:27को एकत्रित करो। तुम भी आईएस की कोचिंग देने
- 41:31लगोगे, शरीर के ऊपर मेहनत करो। तुम भी ब्रूस ले बन जाओगे, गामा
- 41:45बन जाओगे, दारा सिंह बन जाओ, अपना अपना रास्ता है, अपनी अपनी मंजिल
- 41:50है, तुम चुनो किसको चुनते हो और बिल्कुल तुम्हें फल मिलेगा।
- 41:59मैं इसकी गारंटी देता हूँ। ज़रा भी अन्याय नहीं है उसकी
- 42:05सृष्टि में और खास तौर से संसार सृजना में तो बिल्कुल ही अन्याय
- 42:12नहीं है। सृजना तो चलती ही नियमों से है।
- 42:15खास एंड इफेक्ट। जैसा कर्म करू के वैसा फल देगा
- 42:23भगवान इसका तो मूल सिद्धांत ही है, लेकिन मुश्किल तब देश आती है।
- 42:35जिन्होंने शरीर कमाया और कुश्तियां लड़ते थे, गुरु की
- 42:45कुर्सी पर बैठ गए। आध्यात्मिकता का प्रचार करें, यह
- 42:50सरहसर गलत है। गामा प्रचार करने लगे।
- 42:54तो समझ लेना आध्यात्मिकतागृत हो गया सारा वक्त कुश्ती में बिताए
- 43:05मासल देह बनाने में सारा वक्त बिता दिया।
- 43:10अब अध्यात्मों का प्रचार करते हैं तो समझ लेना क्षण समझ लेना कोई
- 43:14दोखा नहीं और जिसने सारा था सूचनाएं जुटाने में लगाया हो सारा
- 43:28जीवन। वह बिल्कुल बनने का विकास भी
- 43:32विकृति और आचार्य पर शांत फिर तुम कोचिंग करो, आईएएस बनाओ, जो चाहिए
- 43:44बनाओ भाई कौन रोकता है? लेकिन कम से कम मैं यही तो बोलता
- 43:50हूँ, ईमानदार हो जाओ, बेईमान तो मत रहो,
- 44:05परमात्मा का जवाब मैं सुन रहा था, मुझे बड़ी हँसी आई।
- 44:12खूब हँसा ठहाके मार मार के उत्तर पूछने लगा बाबा क्या हो गया?
- 44:21मैंने कहा तुम्हें पता तो है मैं थोड़ा पागल भी हूँ खाबो तो मुझे
- 44:26पता है बाबा बस उस पागलपन मैं यहाँ सज रहा हूँ।
- 44:40लेकिन थोड़ा गधा भी हूँ थोड़ा सा लेट समझ जाता है एक परिवार
- 44:45चिड़ियाघर देखने चला गया पहले दिन देखा, सभी पशु, पक्षी, जानवर सभी
- 44:52हंस रहे थे, टाँके लगा लगा। एक गधा था कि चुपचाप वैसे ही अपनी
- 45:00मौन मुद्रा में खड़ा था। दूसरे दिन फिर उस ज़ू को देखने
- 45:05चले गए। आज स्थिति बिल्कुल उलट थी, बाकी
- 45:11सभी चुपचाप बैठे थे और सिर्फ गधा हंस रहा था।
- 45:16छोटी बिटिया ने पूछा मम्मा यह क्या बात, कल सिर्फ गधा चुप था,
- 45:27आज सारा चिड़िया घर चुप है क्या हुआ कहते हम चिड़िया से पूछते हैं
- 45:34छोटी चिड़िया से। पूछो चिड़िया बताओ क्या हुआ, कल
- 45:41गदा चुप था, आज सारा चिड़िया कर चुप है।
- 45:47कहते हैं हाँ, शेर जी महाराज ने एक चुटकुला सुनाया था।
- 45:57बाकियों को तो समझ सबको कल ही आ गया था।
- 46:04मुस्कुरा के तुम जानते हो तो विकास डी भी कीर्ति जी कहते हैं
- 46:14ऐसे लड़खड़ाते हैं बेपन दे लौटे की तरह।
- 46:19खूब पी सकता है, नहीं भी हो सकता है ये कोई जवाब ना होगा इससे
- 46:25अच्छा फार्थ जोख लेते देखिए बच्चों इसका जवाब तो कुछ नहीं।
- 46:31मेरे पास तो कुछ नहीं। ऐसी गड़बड़ जवाब देकर बच्चों को
- 46:34परेशान मत करो। द्वंद में मत डालो साप, हाथ जोड़
- 46:39दो ऐसा द्वंद्वपूर्ण जवाब देकर भी तुम जवाब दे गए, ये तुमने जाना
- 46:48है, तुमने जवाब दे ही दिया कि असल में कभी किसी ने जाना नहीं।
- 46:56ये तो ठीक असल में वो कभी जाना नहीं जा सकता।
- 47:02यह भी बिल्कुल ठीक लेकिन विकास से मैं तीसरी बात कहता हूँ।
- 47:10वह पिया तो जा सकता है। बस उस पीने से जो मस्ती आती है,
- 47:19खिलावट आती है, फूल खिल जाते हैं, खुशबू बिखेरते हैं, पंखड़ियाँ
- 47:24अपना मुख खोल लेती हैं, बाहर का मौसम आ जाता है।
- 47:32कलियों ने घूँघट खो होल, कलियों ने घूँघट खो हर फूल।
- 47:49पे। बबरा दो।
- 47:53प्यार प्यार का मौसम ग्लोबल शहर का मौसम गलियों ने घूँघट खोले।
- 48:12हर फूल पे बबरा डा। किया तो जा सकता है ना भाई
- 48:21सोक्रेट इज़ की कहानी एक छोटा बच्चा इन्षुरेन्स के समुद्र के
- 48:25बिना एकड़ा रोड़ा हाथ में छोटी प्याली।
- 48:31सोक्रेटिक लंबी श्वेत धड़ी बिजरक उसके घर वाली उसे बहुत परेशान
- 48:38करते थे, लेकिन बात लंबी हो जाए, वह टस से मसनी हुआ।
- 48:43तुम पूछते हो? गृश्य में कैसी निभे जैसे सोकृति
- 48:51निभे अगर गृहस्थ जीवन का एक व्यक्ति तो मैं दार्शनिकता भी
- 48:59सीखा गया। गृहस्थ जीवन का धर्म निभाना भी
- 49:02सीखा गया। उसके जीवन को पड़ी है।
- 49:09स्वेत लहराती हुई दाढ़ी कपास की तरह स्वेत पूछा बच्चे से ही बच्चे
- 49:19रोक रहे हो पुत्र? बाबा मैं समुद्र को खाली करने में
- 49:29लगा हूँ, यह होता ही नहीं हार गया।
- 49:33सुबह का लगा जब भोर का तारा डूबा था तब से लगा अब तक ना खाये ना
- 49:42पिया। ये खाली नहीं होता।
- 49:46क्या भूख लगी है पुत्र तो मैं खाना तो तुम से ला के मेरा घर पास
- 49:52ही है नहीं नहीं भूख नहीं तब तक नहीं खाऊंगा जब तक ये खाली नहीं
- 50:02होता। बच्चे की निर्दोषता के ऊपर से के
- 50:09ऊपर मेरे पुत्र को मैंने यही कहानी सुनाई मुझे हँसी आती है,
- 50:13इसी बात से आती है आज मैं भी हँसा हूँ इन भोले पंछियों के भोले पन
- 50:21पर। जब आचार्य प्रशांत करते हैं
- 50:25गुणगान गीता का तो मुझे हँसी आती है पर विकास दिव्यकृति जब कहते
- 50:31हैं परमात्मा है कि नहीं है, मैं सोचता हूँ मैं बड़े कान कड़ा लेता
- 50:35हूँ। जब भी मुझे थोड़ा कम सुनाई पड़ता
- 50:37है, मशीन लगानी पड़ती है। उसका कारण है भीतर से उठती हुई ये
- 50:48अनंतनाग की तीव्र पुकार। ये हजारों प्रकार की शंखनाद इतनी
- 50:54शीतलता दे जाते हैं कि इन शीतलताओं को पीते हुए वह का शोर
- 51:01दिखाई नहीं पड़ता। सुनाई नहीं पड़ता।
- 51:06इसका ये कारण विषय है। लोग मुझे कह देते बाबा हम आपसे
- 51:10दीक्षा लेने आए थे, लेकिन आप तो मूर्तिवत बैठे थे, मैंने कहा
- 51:14मृतवत् तो नहीं था, नहीं कहते आभा तो बहुत थी, मृतवत् तो नहीं थे?
- 51:21लेकिन मूर्तिवत अवश्य दे मैंने कहा तुम भी तो इससे कुछ सीख जाओ
- 51:26यहाँ आई ही हो फिर ना जाने मिलन हो कि ना हो तुम अभी सीख लो मैं
- 51:37कैसे मूर्तिवत बैठा, मृतवत हुए बिन।
- 51:41इसको मर जीवडा कहा गया हमारे शास्त्रों में जीते जी कैसे मर
- 51:49जाओ ये तुमने साक्षात् उदाहरण देखा।
- 51:53हाँ बाबा आपका पांव का अंगूठा नहीं रहा, 4 घंटे तक मैंने कहा
- 51:58लेकिन खून तो संचित हो रहा था। स्वास्थ्य ही थी, बिल्कुल चढ़ रही
- 52:03थी। आप दीक्षा दे रहे थे, अंगूठा लगा
- 52:06रहे थे तो फिर आपने सीखा था बहुत कुछ सीखा बाबा आपकी तरंगे साथ
- 52:15लेके चले आपकी ये आभा साथ लेके चले।
- 52:19और भरे मन से विदा हो मैं जाने बाबा फिर मिलन होगा नहीं होगा आज
- 52:31का दिन कहीं आखिरी मिलन न हो जाए। जिन्होंने जीस तरफ प्रयास किया उस
- 52:44तरफ उन्हें फल मिल गया, जिन्होंने अपने प्रयास के बलबूते पे जो
- 52:53कमाया, बस उसी का प्रचार करना ईमानदारी?
- 52:59बाकी सबई माँ तुम चाहे कर सकते हो लेकिन उनका दोष पर उनके दोष के जो
- 53:08प्रभाव होंगे वह क्रैक्षण आएगा। वो सहने के लिए भी तैयार रहो।
- 53:17झूठ बोलूं कब कहता हूँ? मैं राजनीति को झूठ बोलो, ज्यादा
- 53:27सूचनाओं को एकत्रित करने वाले झूठ बोलूं लेकिन झूठ के जो परिणाम
- 53:34आएँगे तुमने दुनिया को जो आज रसातल में ड्रा दिया है।
- 53:41फिर उनके परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना।
- 53:45पुत्र फिर तुम मत रहना, ये तो मैंने नहीं किया, बिल्कुल तुमने
- 53:53किया। मूर्छित अवस्था में किया बिल्कुल
- 53:58किया तुमने क्योंकि प्रकृति इतनी बेईमान नहीं कि तुम बीज बोधो
- 54:04प्रकृति नहीं जानती कि तुम नशे में थे या तुम जागृत थे।
- 54:08वो बीज अंकित होगा और पेड़ बनेगा और फल देगा।
- 54:13वो नहीं देखती कि तुम नशे में थे या तुम जागृत बस तुमने बीज बोया,
- 54:24बाकी का बीज अंकित हुआ, पेड़ बना फल लगे फल खाओगे खट्टे होंगे
- 54:32पुत्र। अगर मूर्छित हो के बोया तो मुझसे
- 54:35लोग पूछ लेते कौन करता भगवान करता मनुष्य करता?
- 54:41मैंने कहा अगर मुर्षा में किया तो तुम करते अगर जागृति में किया तो
- 54:47भगवान करता, क्योंकि जागृति में सीधा संवाद क्षेत्र से बनता है।
- 54:53जीसको हम परम चेतन कहते हैं, वह कभी गलत नहीं करता, कभी संदेश
- 54:58आपको गलत नहीं देगा। ज़रा भीतर भीतर के देखो उसी
- 55:01जंक्चर प्वाइंट से आदेश आते हैं उन आदेशों के अनुसार काम करो, तुम
- 55:08कभी गच्चा नहीं खाओगे जीवन में। जीस तरफ मेहनत करोगे उस तरफ फल
- 55:16मिल जाएगा और समझाऊँ नहीं, ठीक देहे पे करो मेहनत मार्शल देहे बन
- 55:26जाएगी। दिमाग पर करो मेहनत ज्यादा
- 55:39सूचनाएं इधर उधर से इकट्ठी करो, ज्यादा जुटा लो सर।
- 55:50लोग उसमें बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
- 55:59लेकिन ध्यान रखना, यह गलती से तुम सोच मत लेना।
- 56:06ये सुखी तो हो सकते हैं लेकिन अखाड़े सुख नहीं है।
- 56:12इनके पिता कभी दुखी भी होंगे। इनकी भावना कभी आहत भी होंगी, कुछ
- 56:21डर के मारे शादी नहीं करेंगे। बंधन है अगर ये डर बंधन शादी है।
- 56:31तो फिर सबसे ज्यादा जंजीरों में 23 तर्रार फलादी जंजीरों में
- 56:39जकड़े हुए कृष्ण और जेएनयू ने ठीक किया क्योंकि बुद्धि से काम किया
- 56:46जेएनयू ने भगवान कृष्ण को साथ में नर्क में डाल दिया।
- 56:50कहते तुम तुम जैसा पापी को हो सकता है सनाते ने उसकी पूजा की,
- 56:56सनाते ज्यादा समझदार है जैसे विकास तीव्र कृति आचार्य प्रशांत
- 57:13कुर्सी को ठोकर मार सकते हैं। ऐसे ही कृष्ण त्याग को ठोकर मार
- 57:22सकते हैं, ब्रह्मचर्य को ठोकर मार सकते हैं।
- 57:30तुम कुछ बन जाओ भाई। उसके बाद ऐश कर लेना अभी ऐश का
- 57:39मौका नहीं मेरे पास बच्चों के हो ना जाते हैं, मेरी बातों से बड़े
- 57:42प्रभावित होते हैं बाबा हमें दीक्षा दे दो, देखो तुम पढ़ो, खूब
- 57:50पढ़ो, बच्चे इतना पढ़ो। के सूचनाओं को रोगों तक प्रसारण
- 57:58करने के योग हो जाओ। तुम धानक उपार्जन के योग्य हो गए।
- 58:06इस रथ को ठीक ठीक सुचारू ढंग से रखने का सबसे पहला उपाय।
- 58:14भोजन की व्यवस्था तुम्हारे पर कुछ कर्ज फर्ज भी होंगे वो भी चुकता
- 58:23कर देना। इसलिए 25 वर्ष रखे सनाथन ने जोड़ा
- 58:30सूचनाओं को जोड़ा। वर्ण विद्या सीखो जैसी रूचि है
- 58:36वैसा सीखो, योग्य हो जाओ तब ऐसी ही थी परंपरा तब यय नहीं था भाई
- 58:45तब सूचनाएं नहीं थी, क्वांटम छुरी नहीं थी था।
- 58:53एकदम से लड़खड़ा गया वैज्ञानिकता का मन बुद्धि आश्चर्यचकित हो गई
- 58:59जब एटम का व्यवहार देखा इलेक्ट्रॉन का एक क्षण में वह
- 59:06वर्टिकल हो जाता है और दूसरे एक क्षण।
- 59:09वह वेब हो जाता है। अब कीजिए इसकी क्या करोगे?
- 59:13अच्छा वह पार्टिकल है, यह वेब है, गड़बड़ा जाएगी सारी वैज्ञानिक तुम
- 59:21यहीं थर्रा गए गॉड पार्टिकल को। सर्च करने में लगे हो।
- 59:30इसे मैं पागलपन करता हूँ। वह कभी सर्च से नहीं होता।
- 59:37मैंने कहा वह पिया जाता है तो खड़ा रो रहा है, बच्चा और सक्रट
- 59:42इसको को समझ नहीं होता। सुप्रतेश कहता पुत्र जाए तो कभी
- 59:47खाली नहीं होगा, लेकिन सुप्रतेश कहते थे आज मुझे इस बच्चे ने बड़ा
- 59:52सीखा दिया। बात तो ठीक है, हम भी तो ऐसे ही।
- 59:57वो भी तो उस वक्त ऐसा ही कर रहे थे।
- 1:00:00सूचनाओं को संग्रहित कर रहे थे। किसने क्या कहा?
- 1:00:12यही तो जुटा रहे थे तो मैंने सोचा हम भी तो यही काम कर रहे हैं।
- 1:00:22हमारी प्याली हमारी बुद्धि की तरह और हम परमात्मा को खंगाल नहीं चले
- 1:00:27हैं और नहीं मिलता तो हम द्रोह से भर जाते हैं और रोने शुरू कर
- 1:00:31देते। यही तो हम कर रहे हैं।
- 1:00:35संवेदनशील व्यक्ति इस बच्चे के ऊपर।
- 1:00:39नहीं करेगा बल्कि बच्चे से कुछ सीखेगा।
- 1:00:46चॉकलेट्स में सीखा, लेकिन बच्चा रुका नहीं।
- 1:00:51बच्चा कहता नहीं, मैं इसे खाली करूँगा, मेरी इज्जत है।
- 1:00:58सुकरेतिस बोले मत कर बच्चे यानी खाती हूँ, मैं जानता हूँ अच्छी
- 1:01:01तरह जानता हूँ, इसी के किनारे रहता हूँ, हर वक्त नहीं खाली
- 1:01:08होगा। फिर तो उसने छोटी सी प्याली को
- 1:01:14समुद्र में फेंक दिया। उसने कच्चा यह तो नहीं आ सकता इस
- 1:01:23प्याली में लेकिन प्याली तो समा सकती है समुद्र में यह तो घोल
- 1:01:29सकती है। बूंद में समुद्र नहीं समा सकता,
- 1:01:34लेकिन समुद्र में बूंद तो समा सकती है।
- 1:01:39जैसे ही उस प्याली को फेंका और यह शब्द उच्छरित हुए बच्चे के मुख से
- 1:01:45सोकरतेस कहते हैं मैं जर नाटक आ गया भाई मुझे ऐसा लगा एक बार कि
- 1:01:51कि मुझे चक्कर आएगा सारी धरती घूमती हुई नजर आई।
- 1:01:57थोड़ी देर में यथावत मूक खड़ा रहा जा मुझे होश मैंने उसे बच्चे के
- 1:02:10पांव पकड़ लिया। मैंने कहा आज से तू मेरा गुरु।
- 1:02:16कहानी है कि वो बच्चा लुप्त हो गया लेकिन कहानी वह भगवान था जो
- 1:02:23समझाने आया था। जिज्ञासुओं की जिज्ञासा को शांत
- 1:02:27करने, भगवान को दाते तो कहीं भगवान नौकर भी बनते हैं।
- 1:02:35कहीं भगवान नरसी का वात भी भरते हैं, कहीं भगवान कबीर की कमाई की
- 1:02:42शादी भी करते हैं, बिल्कुल भी करते हैं, वो ही नहीं करते तो फिर
- 1:02:47और कौन करता है जिनका आश्रय स्थल? तुम्हारे हृदय में है अगर वो
- 1:02:53तुम्हारी रक्षा नहीं करेगा तो फिर और कौन करेगा धर्मो रक्षित है,
- 1:02:59रक्षित है धर्मो रक्षित ही रक्षित है धर्म के द्वारा रक्षित हुआ
- 1:03:07व्यक्ति ही सही मायने में। रक्षित होता है तुमने परभाषा बदल
- 1:03:14दी, तुमने धरम के झंडे उठा लिए जिंदाबाद मुर्दाबाद करने लगे, भेद
- 1:03:21फैला दिया। यह तो धर्म ना था, यह तो पाप था।
- 1:03:27पाप की चिंगारी भस्मी बहुत कर देती है और जात रखो राजनीतिज्ञो
- 1:03:34तुम भी 1 दिन इसमें ही जल जाओगे, क्योंकि जब फैलेगी एटम की ऊर्जा
- 1:03:43तो तुम्हें पहचान नहीं पाएगी की तुम कौन हो।
- 1:03:47तुम किसी देश के मालिक हो या अमेरिका के राष्ट्रपति हो, जखिम
- 1:03:52जुम उन हो या क्या हो, पुतिन हो या कौन?
- 1:03:57वह नहीं पहचानती। वह परमात्मा की एनर्जी है।
- 1:04:04तुम भी लपेटे में आओगे पुत्र मत सोचना के हम प्रयास करते हैं,
- 1:04:17लेकिन प्रयास का फल नहीं उठा। संसार चाहिए तो प्रयास करो।
- 1:04:25जिसने जिधर प्रयास किया उधर उसको फल मिला।
- 1:04:31मैं फिर फिर से बोलता हूँ ताकि तुम्हारे दिमाग में गहरी उतर
- 1:04:34जाये। गामा ने मार्शल बाहुओं पर किया,
- 1:04:38उसमें बल आया, उसका मुकज़र कोई उठा नहीं सकता।
- 1:04:42वह 1200 किलोग्राम वजन एक व्यक्ति उठा लेगा।
- 1:04:45तुम सोच नहीं सकते आज वो। एक संग्रहालय में पड़ा है
- 1:04:52सुरक्षित, ज़रा उसको हिला के दिखाओ 1200 किलो और उठया।
- 1:05:02प्रत्यक्षदर्शियों ने जो कहा वह अंधे नहीं थे।
- 1:05:05उन्होंने अपनी आँखों से देखा और बहुत दूर तक ले गई छती तक उठाकर।
- 1:05:16ऐसा हुआ इसपे खोज करोगे, सूचनाओं को संग्रहित करोगे काम तो होने का
- 1:05:27है। किसी बच्चे को रोजगार देने का
- 1:05:29साधन महिया करना भी तो एक पुण्य है और मैं इससे ज़रा भी मुमकिन
- 1:05:34नहीं हूँ। लेकिन मैं कहता हूँ, देखिए इसको
- 1:05:38धर्म का धंधा मत बनाइए, हाथ जोड़ दीजिए, मुझे पता नहीं मुझसे लोग
- 1:05:43पूछ लेते हैं परमात्मा की व्याख्या कीजिए।
- 1:05:46मैंने कहा क्षमा की मैंने परमात्मा को पिया तो है जाना तो
- 1:05:56मैंने नहीं और मैं समझता हूँ शायद तुम जान जाओ प्रयास करो।
- 1:06:08हौ कैन आई डू फाइन हौ कैन आई, एनालाइज इट मेरे में तो समझता
- 1:06:17नहीं है मैंने पिया और ये पीना ही सुफ्फिसिएंट था इतनी मस्ती में।
- 1:06:24झूम गया कि दुनिया स्वर्ग नजर आने लगी, मैंने स्वर्ग को ढूंढा नहीं,
- 1:06:36स्वर्ग चला आया बड़े शादमाथे। उन्हें हम भुला कर अचानक ये क्या
- 1:06:54हो गया हाँ के चेहरे उछल कर। कयामत की चाल गया, उछलकर कयामत की
- 1:07:16चाल गया। आयशा उन का क्या लग गया वही
- 1:07:37जिंदगी का? सवाल आ गया ओय शा का?
- 1:07:51ख्याला। बहुत शादमा थे उन्हें हम बुलाकर।
- 1:08:00अचानक ये क्या हो गया? वो चलकर कयामत की चल, वह आ ही
- 1:08:05जाएगा। कयामत की तरह जैसी कयामत आती है,
- 1:08:09तुम्हें खबर नहीं होती, अगले पल कयामत हो जाए कौन जानता है?
- 1:08:19कोई पता नहीं ये ज़िन्दगी की शाम कब हो जाए, जिसने जिधर प्रयास
- 1:08:24किया पा जाए और देखिये तुम जो कहते हो मैं ये मैं वो मैं ये
- 1:08:29बिलकुल ठीक तुमने इधर प्रयास किया होगा भाई तुम राष्ट्रपति ऑफ
- 1:08:34अमेरिका हो गए प्रयास किया होगा भाई?
- 1:08:41तुम सर्वगुण संपन्न हो गए, संसार की सभी सूचनाओं को जानते हो,
- 1:08:45बिलकुल ठीक तुम परम सूचनाओं का संग्रहालय हो गए।
- 1:08:58लेकिन मुझे क्या आपत्ति है? मुझे ज़रा भी आपत्ति है मुझे तुम
- 1:09:03पे कोई आपत्ति मुझे तुमसे कुछ नहीं कहना मुझे तर्क आता है उन
- 1:09:13लोगों पे जो आपके पीछे लग चले। जिन्हें पांच नाम दे देते हो,
- 1:09:18जिन्हें कहते हो राधे राधे करो, परमात्मा की व्याख्या करते हो,
- 1:09:24आंधी अधूरी गड़बड़ हो जाता है। अच्छा न होगा कि तुम हाथ जोड़ दो,
- 1:09:31नहीं पता हमें। राधे राधे किया लेकिन राधा तो
- 1:09:36नहीं आए, जिंदगी बचानी पड़ी, वैज्ञानिक के सहारे बचानी पड़ी।
- 1:09:56झूठ किस्से बोलो, अंत में झूठ तुम्हें ही भुगतना पड़ेगा आचार्य
- 1:10:02प्रशांत कितना ही कह रही लेकिन कृष्ण की निर्भिकता कहाँ आएगी भाई
- 1:10:06कृष्ण तो कहते हैं हम सारथि बनेंगे अर्जुन पहला तीर हमारी
- 1:10:11छाती पर घुसेगा। यह उनके साहस का प्रमाण था और तुम
- 1:10:18बोलते हो तो तुम कहते हो वो अपने मार डालेंगे।
- 1:10:20अगर मैंने सब बोला था, यहीं से समझ आ जाती है।
- 1:10:31तुम्हारी वीरता और सूर्यवस्था अब ये छोटा सा प्रश्न बच्चे ने पूछा
- 1:10:40मैं गायत्री मंत्र का जाप करता हूँ गायत्री मंत्र का जाप जब से
- 1:10:43शुरू किया विनाश शुरू हो गया। बाबा क्या मुझे जपना चाहिए?
- 1:10:49गायत्री मंत्र भी भेजा है। गायत्री मंत्र का चोबी समाक्षर
- 1:10:55मैं देता हूँ जब व्यक्ति यहाँ दीक्षा के लिए आते एक चंदन की
- 1:11:00माला क्योंकि वह आपको बहुत सी बाहरी विकृमियों से बचाती है
- 1:11:06चिन्हित तुम बुरी रोहें कहते हो। टुंडे, टोटके वगैरह कहते हो तुम
- 1:11:11जिन्न शिन्न जो भी कुछ कहते हो, सब इसे बचाती है, सब बिल्कुल
- 1:11:17निशुल्क मिलती है आपको और बायोक्रोफी की किताब जो हमारी
- 1:11:24डॉक्टर रमेश ने बड़ी मेहनत करके बनाई।
- 1:11:29मेरे ही प्रवचनों का संग्रह खर्क आपसे आपको निशुल्क वित्तीय यहाँ
- 1:11:35कोई फीस नहीं लगती। यहाँ किसी पर नहीं लगता बस बाबा
- 1:11:41का हुक्म हमारा सेरमात। हम बुला लेते हैं, उसे दीक्षा दे
- 1:11:45देते हैं, इसलिए तुम मुझे मत पूछना, मुझे दीक्षा के लिए कब
- 1:11:49बुलाओगे? यह मेरे हाथ बने, जब होगा आदेश तब
- 1:11:56तुम बुला लिए जाओगे। तुम्हें एनलाइटनमेंट की मोहर
- 1:12:12लगाने वाला व्यक्ति ऐसे नहीं लगा देगा।
- 1:12:16अगर ऐसे ही लगा देगा वो झूठा है। उसके आसपास फिर भेड़ों की भीड़
- 1:12:21इकट्ठी हो जाएगी। बस मैं आऊंगा आखिर में आपकी ऊँगली
- 1:12:25पकडूंगा सच खंड ले जाऊंगा, समझो जो उठा है नहीं, मैं बुलाऊंगा
- 1:12:33तुम्हें बिलाशक, लेकिन वह बुलाएगी फिर तो मैं बुलाऊंगा।
- 1:12:43और प्रश्न तुम पूछते हो तो मैं बताऊँगा बैठे बैठो तो शांत रहते
- 1:12:48हो प्रश्न पूछते हो तो मेरे पास रोज़ डाट आती है।
- 1:12:57डाट में पूरा खुलासा होता है। ये कुछ हूँ, ये व्यवस्था है ये
- 1:13:02मनोदिशा है, ये मनो गड़बड़ी है अस्त व्यस्त हो गया है, उपाय
- 1:13:07बताइए और महत्त्व क्षण जिसका उपाय करने युक्त होता है।
- 1:13:11मैं फौरन खुद लगाता हूँ, उसको फ़ोन समस्या समझता हूँ निदान करता
- 1:13:15हूँ जैसा मुझे पता है खुशी लोगों से।
- 1:13:21आप क्यों लिखते हैं? जब मैं मैसेज पढ़ता नहीं तो कोई
- 1:13:24जवाब नहीं दे तो आपको जब मैंने एक विकल्पित आपको चीज़ बता दी है तो
- 1:13:32आप क्यों नहीं पत्र लिखते? आज कल हमने सब हटा दिया है।
- 1:13:36हमारे चैनल कंट्रोलर रोहित और हरपीत ने एड्रेस देना शुरू कर
- 1:13:42दिया है। हमारे घर को इस आश्रम का जो आप ही
- 1:13:46ने बनाया है। इस एड्रेस पर पत्र व्यवहार कीजिए
- 1:13:53और एक बात देखिए। एक पत्र के साथ कल डॉटर आए सो
- 1:13:59डॉटर पत्र के साथ कल यूरो आए। पत्र के साथ कुछ पैसे नकदी आए, ये
- 1:14:05काम मत कर मुझे रिश्वत देने की चेष्टा बेकार साबित होगी।
- 1:14:11मैं वो रुपए रख लूँगा, हसम मत। मैं वो यूरो रख लूँगा, डायलर रख
- 1:14:18लूँगा, जवाब देंगी मुझे रिश्वत देने की, तुम्हारी सभी क्षेत्र
- 1:14:26व्यर्थ हो जाएंगी। मैं किसी पंचायत के अंदर कर्मचारी
- 1:14:30लगा हुआ नहीं है, जो रिश्वत का होगा ना ही मैं बंटवारी हूँ।
- 1:14:36जो रिश्वत खान ऐसा धंधा मैंने किया नहीं था तो मांगा और बुद्ध
- 1:14:43ने भी मांगा। शंकर ने भी मांगा माँगने में कोई
- 1:14:48दोष नहीं होता तुम्हारे पास नहीं तुम भूखे हो मांग लो।
- 1:14:53नहीं मिलता, फिर वापस चले जाओ। अगर कोई दिन ऐसा आएगा जब मेरे पास
- 1:15:01नहीं होगा तो ध्यान रखना मैं लौटूंगा नहीं।
- 1:15:04मैं मांगूंगा, मांगने से मिलेगा तो फिर मथिया मंजूर होगा, अन्यथा
- 1:15:11मैं छीनूंगा नहीं। मैं अपनी बात करता हूँ, मेरे
- 1:15:20परिवार मेरे बच्चे की बात करता हूँ, मैं जानता हूँ उसमें डीएनए
- 1:15:24बही है बही त्याग की भाव नहीं छीने कहा।
- 1:15:35मैं आपके सामने कहेगा ये जरूरत है, ला सकते हो तो लागू, अब पूछा
- 1:15:43गायत्री मंत्र कर रहा हूँ सब तहस नहस हो गया।
- 1:15:47गायत्री मंत्र के से लिया गायत्री परिवार से।
- 1:15:51श्रीराम आचार्य 3200 किताबें कूड़ा कर देनी चाहिए इनकी,
- 1:16:04क्योंकि वह जो बोला नहीं जा सकता जो लिखा नहीं जा सकता।
- 1:16:10उसके बारे में सयाने बनकर श्री राम आचार्य ने लिखा ऐसी सभी
- 1:16:16योजनाएं विफल कर देनी चाहिए। अगर तुम सही में भक्त हो तो आग
- 1:16:23लगा दो इस साहित्य को। क्योंकि वह कभी खंगाला नहीं
- 1:16:30जाएगा। उसको पीना ही पड़ेगा पीओगे तो फिर
- 1:16:40जीओगे नहीं पीओगे तो फिर तुम यू विल कमिट सुसाइड।
- 1:16:50नरक में होना दुख भोगना भी तो सुसाइड से ज्यादा बुरा है।
- 1:16:56तुम इतने दुख में होते हो और तुम कहते हो कि आत्महत्या ही कर लेते
- 1:17:00हैं, क्योंकि तुम्हें वो ज्यादा सुखद महसूस होती है।
- 1:17:05इतना दुख सहन होता है फिर तुम कहते हो इससे मरना अच्छा है तो
- 1:17:12तुम सुसाइड करते हो जब ज़िन्दगी से ज्यादा तुम्हें मौत लुभावनी
- 1:17:18लगती है, लेकिन एक मरना और भी है जो गौरख सिखाते।
- 1:17:26ऐसी मरणी मरो जीस मरणी मर गोरख था गायत्री मंत्र मैं यहाँ देता हूँ
- 1:17:35बाबा से पूछा वो अक्षर बीच में जुड़ा हुआ है और मैं कह देता हूँ
- 1:17:41कि सिर्फ आपने? विपत्ति काल में इसका प्रयोग करना
- 1:17:45है। रोज़ नहीं पढ़ना है ऐसे और तुमने
- 1:17:49तो रेल बना दी, पुत्र तो विपदाएं आएंगी हो फिर वो गलत।
- 1:17:55इसका उच्चारण सही नहीं। ध्वनि सही नहीं, इसके सुर सजते
- 1:18:01नहीं। और 24 अक्षर कहाँ है?
- 1:18:04भाई, बताओ तो 24 अक्षरों से युद्ध गायत्री मंत्र मैं आपको दे दूँ
- 1:18:16बिल्कुल निशुल्क मिलता है। यहाँ से गड़बड़ी की मम बताओ।
- 1:18:21वो चले गए। अगर कहीं होते तो मैं अवश्य
- 1:18:25उन्हें निमंत्रित करता हूँ। मैं कुछ तो नहीं जाता क्योंकि
- 1:18:30ठहरा हुआ खिलाड़ी अब ठहर गया हूँ तो फिर ठहर गया हूँ।
- 1:18:35ठहरी हुई मोन झूल किसी के पास जाती नहीं।
- 1:18:39और ठहरा हुआ मौन कुआं भी किसी को पानी पिलाता है।
- 1:18:43कितने ही तुम प्यासे हो तुम्हें ही न होगा तुम्हें बुलाता, मुझे
- 1:18:53मिन्नत करनी पड़ती, खुशामद करनी पड़ती, मैं बुलाता हूँ।
- 1:18:58और फिर मैं उनसे कहता ये गंध क्या खिलाया आपने क्यों जिंदगी के 7080
- 1:19:04वर्ष तुने बेकार कर दिया? ये 3200 किताबों का कूड़ा थपेड़ों
- 1:19:11को काटने से जो कागज़ बना ने क्यों व्यर्थ किया तुने?
- 1:19:20अब वो है नहीं दिवंगत आत्मा को मेरा प्राण जहाँ कभी कहीं है
- 1:19:29स्वीकार करें, लेकिन एक बात तुमसे कह देता हूँ तुम करो।
- 1:19:38परिणाम ऐसे ही आयेंगे। प्रयास करोगे तो संसारिक फल
- 1:19:46मिलेगा, बिलकुल मिलेगा। यह भी एक प्रयास हो सकता है,
- 1:19:51लेकिन यह प्रयास बिलकुल वैसा है। जैसे एक सवस्थ इंसान भाग रहा हो
- 1:19:58और एक लंगड़ा इंसान भाग रहा हो। तुम ज्यादा कामयाब नहीं होगे।
- 1:20:03पहली बार तो इसमें अक्षर 24 यह मूल भावना से विपरीत है।
- 1:20:11इसका अक्षर विश्वामित्र ने इसकी टांगड़ी काट दी।
- 1:20:14एक टांगड़ी काट दी इसकी वो हमारे इस संस्था के द्वारा इन बच्चों ने
- 1:20:21प्रयास करके वो अक्षर पूछ के जोड़ के खुद ही छपवा के वितरित कर रहे
- 1:20:27हैं। मैं तो मातरे के निर्मित।
- 1:20:33और उसके लिए कहा जाता है कि जब इसका जाप करो जब तुम घोर विपत्ति
- 1:20:37काल में हो बस इसकी एक माला जपो सिर्फ दट इस सुफ्फिसिएंट क्योंकि
- 1:20:45यह एक प्रकार का एटम पब है। इससे छेड़छाड़ करोगे तो ये भ्रष्ट
- 1:20:53होगा। ये अच्छा किया श्री रामचर्या इधर
- 1:21:01उधर की गप्पे आंख के 33,00,000 ऊपर शरण किया और यो किया वो किया
- 1:21:05ये किया। वो ही कुछ आपको धूल सौंपे के करो,
- 1:21:11अब इस का पाठ इन्हें पता है ये बम कभी फटेगा नहीं।
- 1:21:15इस हिसाब से विनाशक शक्तियां से वह बचा के शोभ किया।
- 1:21:20उनका धन्यवाद। लेकिन इस गायत्री मंत्र को एक
- 1:21:24माला से ज्यादा मत जप लेना वो भी विपत्ति कर लो।
- 1:21:30ज्यादा विपत्ति है तो जरूर जपना, लेकिन इतना ज्यादा नहीं कि अति कर
- 1:21:35दो सदा के लिए इसको मत अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लेना।
- 1:21:43पुरानी व्यवस्थाएँ चली गईं। जो जिधर प्रयास करेगा वो उसको उधर
- 1:21:50मिलेगा। अब आप समझ गए आपने अध्यात्म के
- 1:21:54लिए कोई प्रयास नहीं किया, शरीर के लिए प्रयास किया, गामा हो गए।
- 1:22:00मन के लिए प्रयास किया, बुद्धि के लिए प्रयास किया, सर हो गए या
- 1:22:06आचार्य हो गए, लेकिन आपने क्षमा करना आपने अध्यात्म की तरफ से एक
- 1:22:14कदम पर नहीं उठाया। तो फिर अध्यात्म की चर्चा क्यों
- 1:22:21करते हो? भाई घर से भागे 9 साल की अवस्था
- 1:22:26में, लेकिन कब? उन फुर्सत के लम्हों का तुमने
- 1:22:31आनंद चखा जिन्हें तुम वितरित कर सकते, कभी चखा?
- 1:22:40मैं रोकता हूँ कि मुझे फ़ोन मत करो, मैं आनंद पीता हूँ और आनंद
- 1:22:45पीता हूँ, आपके डियर कली का मुखबंत रहने दो, क्योंकि बंद
- 1:22:52रहेंगी तो जोड़ेगी, आपके लिए फूल बनकर सुगंध को फैलाएगी।
- 1:22:58तुम्हारा एक फ़ोन सब गड़बड़ कर जाता है।
- 1:23:05तुम मुझे इतना डिस्टर्ब मत करो, डिस्टर्ब करने की आज्ञा मैं देता
- 1:23:10हूँ। आपको तो मुझे पत्र लिखो।
- 1:23:14आपको माकूल जवाब मिलेगा और मिल रहा है लोगों को।
- 1:23:18एक काम मत करना, मैं तुम्हें पहले भी कहा ये डॉलर यह रुपए ये यूरो
- 1:23:25यह करेंसी यह बीच में मत रख देना मुझे कोई निआज या किसी प्रकार के
- 1:23:35रिश्वत नहीं। जो ऐसा करेगा मैं वो रुपये तो आप
- 1:23:42पे हड़प लूँगा तुम फिर हस रही हो और जवाब भी नहीं दूंगा।
- 1:23:52इसलिए शुद्ध प्रश्न कीजिए, प्रश्न भोग कीजिए, जो आत्मा के लिए आपकी
- 1:23:58जीवन मरण का स्वाद हो गया, जैसी समझ आएगी वैसा जवाब दूंगा, उस
- 1:24:05स्थल पर जाऊंगा, अगर आवश्यक होगा तो।
- 1:24:10तो हमारे इस प्रश्न का जवाब देने के लिए नहीं जाऊंगा कि वृक्ष
- 1:24:15मुक्त होने की कामना करते हैं या नहीं या विष्णु भगवान एक बार बाबा
- 1:24:20जी कह दो होते हैं ऐसा कुछ मूर्खता मैं नहीं करता मैं जाऊंगा
- 1:24:26अगर तुम्हारा जीवन और मृत्यु से युक्त प्रश्न है।
- 1:24:31कि बस जान निकल जाएगी, अब तो रथ टूट ही जाएगा, धूल दूषित हो जाएगा
- 1:24:37सब अंग अंग बिखर जाएंगे तो मैं जाऊंगा उस स्थल पर जाऊंगा और
- 1:24:42परमात्मा का शीत सदा ही बरसता है उस जग पर, वहीं जाके बाबा नानक
- 1:24:48कहते हैं। जो मांगू ठाकुर अपने ते सोई सोई
- 1:24:51तेब है, सब मिल जाता है तो मांगने की कथा सीख लो तो मांगो।
- 1:25:02अगर आपको आवश्यकता है सरकार से मांगो पहले तो जीसको चुना।
- 1:25:09जीसको आप कर देते हो टैक्स देते हो उनसे कहो हमें वापस करो, हमारा
- 1:25:15टैक्स हम पे लगाओ, विकास करो अन्न दो, सुविधाएं दो, नौकरी दो।
- 1:25:32नहीं दे सकते तो फिर तुम मेरे पास प्रश्न लेके आओ लेकिन शरीर से
- 1:25:40समाप्त इतने शरीर का ऐसा रोग है कि डॉक्टरों ने हाथ कड़े कर लिए
- 1:25:48हैं तो मेरे पास आओ लेकिन ध्यान रखना संसार दुखी बहुत है।
- 1:25:55बस ये दो बातों का ख्याल रखेगा एक तो वॉइस कॉल मत करना, मैं जोड़ता
- 1:26:00हूँ, आनंद में पड़ा पड़ा कली बनकर मस्ती को पीता हूँ ताकि कल को फूल
- 1:26:08खिलकर आपको वह सुगंध बढ़ सके। अगर आप ऐसा करोगे तो हज़ारों
- 1:26:17हज़ारों लाखों लाखों लोग जो मुझे सुनते हैं यदाकदा जो सुनते हैं,
- 1:26:24जो रोज़ सुनते हैं, उनके हक को आप हनन करोगे।
- 1:26:30असिस्ट में सब कुछ आ गया। और फिर मेरे पास आखिरी ऑप्शन है,
- 1:26:40मैं आपको ब्लॉक कर दूंगा। आपसे कोई भी मेरी आँखें बंद होती
- 1:26:46हैं, जब ब्लॉक का अंगूठा उठता है ना आँखें बंद होती हैं।
- 1:26:58शायद आपका जवाब मिल गया जो जिधर प्रयास करेगा।
- 1:27:04आपने अभी तक अध्यात्म का प्रयास किया, क्योंकि अध्यात्म का प्रयास
- 1:27:08मटरने का प्रयास है। अब तक आप बने हो मटन बनते ही चले
- 1:27:14गए हो। मटन मिटने का प्रयास तो अभी प्रथम
- 1:27:19चरण में भी नहीं है और आप ढूंढ़ते हो परमात्मों की वह मस्ती वो आनंद
- 1:27:28की खुशबू। उसमें झूम झूम जाओ, मस्त हवा है,
- 1:27:38काली घाटा है, ऐसा कुछ तो तब आएगा जब तुम इस रास्ते पे चलोगे।
- 1:27:48इस रास्ते पे नहीं चलने के कारण क्योंकि मिटना पड़ेगा।
- 1:27:52अंकार डरता है और डरने के कारण ही बोलता है।
- 1:27:57अगर मैं बोला तो मुझे मार देंगे और फिर उसी मृत्यु पर चलकर।
- 1:28:04जो मिलता है लक्ष्य उसकी करते हैं।
- 1:28:07ये व्याख्या नहीं, उसको पीना पड़ेगा।
- 1:28:17उसकी व्याख्या फिर होगी। उसकी व्याख्या शब्दों में नहीं
- 1:28:21होती। उसकी व्याख्या होगी।
- 1:28:24शब्दों से सूरत लबड़ते बढ़ के आए हुए वो शब्द उस आनंद से झूमते
- 1:28:30अक्षर और ज़रा सी दे दे साखी और ज़रा सी और।
- 1:28:38और ज़रा सी दे दे साखी और ज़रा सी और कैसे रहूं शुक्र?
- 1:28:48मैंने पी ही क्या है, होश भी तक है बाकी।
- 1:28:56और ज़रा सी दे दशा की और ज़रा सी और श्री कृष्ण गोगन अरे ए मुरा।
- 1:29:18णारा यन वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:29:35हे नाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण
- 1:29:48वासुदेव हितमात स्वामी तक हमार। हेतुमात स्वामी सखा सखा हमारें
- 1:30:11सखा। म।
- 1:30:19पितु मातृ स्वामी सखा हमारे हेनाथनारा इन वासुदेव श्री कृष्ण
- 1:30:29गोविंद हरे मुराई। धन्यवाद।