Latest / Baba ji Vijay Vats / 24 Jul 25 - ध्यान में शरीर से बाहर कैसे निकलें? पिछले जन्मों में जाने का तरीका! कुछ रहस्य और शक्तियां।
Transcript
- 0:01बाबा जी सादरचंद्र स्पर्श जब मैं ध्यान में बैठकर सीधा होकर जश्यव
- 0:14आसन में लेटकर ध्यान लगाता हूँ। तो मस्तिष्क के बीचों बीच बहुत
- 0:22तेज पूर्ण के साथ बहुत अधिक आनंद की प्राप्ति होती है और अचानक से
- 0:30ही रीढ़ की हड्डी झटका लग कर सीधी हो जाती है।
- 0:39जो आनंद में वृद्धि करती है और अनंत की ध्वनि जो आमतौर पर धीमे
- 0:48सुनाई पड़ती है, वह तेज हो जाती है।
- 0:52शक्ति योद्धा। आइए यहाँ तक प्रश्न को हम चालू
- 1:00करें फिर उससे आगे चलेंगे। मैंने आपसे कहा था कि रीढ़ की
- 1:06हड्डी को सीधा करने का प्रयास मत करना क्यों जब वह चेतना जगेगी?
- 1:16कुंडलनी जो आनंद से भरी पड़ी तो उसके दबाव से रीढ़ की हड्डी स्वतः
- 1:25ही सीधी हो जाएगी। इसलिए तुम रीढ़ की हड्डी का ख्याल
- 1:30ही मत करना। रीढ़ की हड्डी को जैसा वो मुड़ती
- 1:35है मुड़ने को। तुम ध्यान की फिक्र करो, तुम कुछ
- 1:41न करने के मूड में आजाओ अचानक से आनंद बहुत गहरा हो जाता है और
- 1:53रीढ़ की हड्डी से भी हो जाती है। हाँ ऐसा ही होगा।
- 1:59जब आनंद फूटेगा और आनंद तेज गति से निकलेगा तुम्हारी मेरुदंड के
- 2:11भीतर से तुम्हारी सुशमना में से। तो रीढ़ की हड्डी स्वभावगत रूप से
- 2:23सिद्ध हो जाएगी, चाहे तुम लेटे हो बैठे हो या जैसी हो, क्योंकि रीढ़
- 2:32की हड्डी सीधे होकर उस आनंद को पास होने के लिए मार्ग देंगे।
- 2:41मैंने यहाँ तक प्रसन्न इसलिए लिया था कि आपको समझा दूँ कि किसी भी
- 2:49तरह के सर्कस करने की आवश्यकता है बेहतर का वो फ्लॉप इतना तेज होता
- 2:56है। कि रीढ़ की हड्डी स्वतः ही सीधी
- 3:00हो जाती है, लेकिन बहुत देर तक इस स्थिति में रहने के बाद भी इससे
- 3:13आगे की यात्रा समझ नहीं आती। न तो किसी तरह शरीर से बाहर
- 3:20निकलने की युक्ति सूज रही होती है और न ही पिछले जन्मों में जा पा
- 3:30रहा होता हूँ। कृपा से पर व्यक्तिगत।
- 3:34या वीडियो बनाकर आगे का मार्गदर्शन करें।
- 3:38कमल सिंह लोधी, उम्र 29 वर्ष एमपी बिल्कुल यही स्थिति मेरी पत्नी की
- 3:46भी है, जब एक ही तरह के कई लोगों के प्रश्न इकट्ठे हो जाते हैं।
- 3:55तो मैं वीडियो बनाता हूँ कि यह बहुत लोगों का ओब्स्टेकल बन गया
- 4:04है परमात्मा की राह में पहुंचने के लिए।
- 4:09या किसी विशेष प्रश्न का, जिसका मैं समझता हूँ की ओर कोई ये
- 4:14प्रश्न पूछेगा नहीं तो जवाब दिया करता हूँ, मैं इसलिए कह रहा हूँ
- 4:22के बहुत से व्यक्ति एक प्रश्न करके है पांच 4 दिन के बाद।
- 4:27फिर पूछना शुरू कर देते हैं बाबा मेरे प्रश्न का क्या हुआ?
- 4:33इकट्ठे जब तक 2030 लोगों के प्रश्न इकट्ठे नहीं होते तब तक
- 4:38मैं वीडियो नहीं बनाता। वो तुम्हारा निजी मसला है, वो
- 4:42तुम्हारा निजी प्रश्न है, आगे का प्रश्न।
- 4:46बड़ा महत्वपूर्ण है। बहुत देर आनंद की इस अवस्था में
- 4:54रहने के बाद मुझे अपने पिछले जन्मों में या अपने शरीर को
- 5:02छोड़ने की ज़रा भी युक्ति नहीं पता होता।
- 5:06कि मैं क्या करूँ? ये प्रश्न विचारणीय है, विचारणीय
- 5:16इस तरफ से है कि मैंने बोला तो बहुत बार, लेकिन इसको मैंने
- 5:24विभक्त नहीं किया। क्योंकि प्रश्न नहीं आया ऐसा जब
- 5:29तुम ऐसे पॉइंट में बैठ जाते हो, न कुछ करने की स्थिति में ध्यान
- 5:38अवस्था में बस कुछ नहीं करते हो, खाली बैठे हो?
- 5:45मैंने तुम्हें कहा खाली मन में परमात्मा उतरता है तो आनंद बरसता
- 5:52है, आनंद बरसेगा। जैसे ही तुम नॉन बिज़नेस में आ
- 5:59जाओगे तो आनंद बरसेगा। बी जी नस में कभी भी आनंद नहीं
- 6:04बरसा करता, इसलिए मैं जाप की मनाही करता हूँ।
- 6:12तुम परमात्मा के लिए जाप करो। ये रास्ता गलत है।
- 6:18तुम संसारिक चीजों के लिए जाप करो, ये रास्ता ठीक हो सकता है।
- 6:23तो जॉब भी एक परिश्रम है, धनोपार्जन का साधन करना।
- 6:29वो भी एक परिश्रम है तो बाहर के लिए प्रयास करना और अगर अपने अंतत
- 6:37से मिलने चले हो। हीर राजे से मिलने चले तो फिर
- 6:44अपने आप को छोड़ देना होगा, समर्पित कर देना होगा।
- 6:49उसके चरणों में फिर कुछ नहीं करना और कुछ नहीं करने को भी समर्पण
- 6:56कहते हैं। नथ्थिंग टु डू।
- 7:02नथ्थिंग टु डू इस कॉल्ड सरेंडर हाँ अभी चले चल तुम एक स्थिति पे
- 7:18आ गए। जहाँ से जंक्चर प्वाइंट बहुत दूर
- 7:22है, अभी जंक्चर प्वाइंट की निशानी ये है कि वहाँ जाकर 100 में से
- 7:3599% लोग कुछ मांग नहीं पाते हैं। इतने मदहोश हो जाते हैं, मदमस्त
- 7:42हो जाते हैं कि इतना भी होश नहीं रहता कि मैं क्या मांगने आया था,
- 7:54अभी तुम उस जंक्चर पॉइंट से दूर हो।
- 8:00अगर तुम अपने शरीर से बाहर होना चाहते हो या पिछले जन्मों में
- 8:09जाना चाहते हो तो रास्ता सही है। आपका बिल्कुल इसी रास्ते से जाना
- 8:16हो। समय को बढाइए जैसे जैसे भीतर ओर
- 8:24जाओगे गहरे लक्षण आएँगे। के आपका आनंद गहरा गहरा और गहरा।
- 8:35और गहरा उतर जाएगा। ये लक्षण है एक पॉइंट ऐसा आ जाएगा
- 8:44वहाँ जाकर तुम भूल ही जाओगे कि तुम आए किसलिए आओ यही मुश्किल है।
- 8:57इसलिए अगर मनुष्य कुछ अलग है, शरीर से बाहर होना है, पिछले
- 9:06जन्मों को देखना है। तू यह राज़ पथ से अलग का रास्ता
- 9:12है। राजपथ क्या है?
- 9:14जैसे ही तुम ध्यान में बैठोगे ध्यान तुम्हें गहरा लेके जाएगा
- 9:20तुम्हारे अपने पास, स्वय के पास निज के पास अगर तुम इसको।
- 9:29कोई मोड देना चाहते हो तो जंक्चर पॉइंट पे आके मोड देना पड़ेगा, वो
- 9:35हैं पॉइंट जहाँ से कई लाइने निकलती हैं।
- 9:39मैंने बहुत बार बोला फिर आपको लेकिन जंक्चर पॉइंट पे तो आना ही
- 9:45पड़ेगा। वहाँ बुद्ध भी आते हैं, महावीर और
- 9:48कृष्ण भी आते हैं, कबीर और नानक भी आते हैं।
- 9:53तुम्हें भी आना पड़ेगा। इसलिए जीतने भी लोग जाती में गए,
- 10:03आफ्टर एनलाइटनमेंट गए। बिफोर एनलाइटनमेंट कोई जा ही नहीं
- 10:10सकता। ये कोई कला नहीं है।
- 10:14अगर बिफोर एनलाइटनमेंट कोई कहता है कि मैं अपने पिछले जन्मों में
- 10:19चला गया तो वह झूठ बोलता है। ये है सीधा मार्ग जो मैं तुम्हें
- 10:25बारीकी से याद समझा रहा हूँ नैचुरली ऐसा प्रश्न भी आ गया।
- 10:30ऐसे प्रश्न पहले भी पड़े थे जंचरपाण से हजारों शाखाएं निकलती
- 10:40हैं, इतनी शाखाएं निकलती हैं? कि उनकी गणना नहीं हो सकती।
- 10:48तुम किसी को भी चुन सकते हो, लेकिन एक बाधा है यहाँ पर क्या
- 10:55बाधा है हीरो पायो गांठ गटिया। हंसा पायो मानसरोवर ताल तलैया
- 11:09क्यों रोले एनलाइटनमेंट से पहले तो तुम्हें मोड़ लेना बहुत
- 11:17मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि वह चुंबक, जो तुम्हारे
- 11:23भीतर बैठा है नहीं जा स्वरूप में मैं तुम्हें खींचेगा और उसके
- 11:29खिंचाव से तुम बच जाओ, यह करीब करीब असंभव है, तो तुम खींच ही
- 11:37चले जाओ। इसलिए बुद्ध भी खिचे महावीर भी
- 11:43खिचे, कबीर और नानक और कृष्ण भी खींचे।
- 11:47ये स्वभाविक है और इसे होने दो। तुम्हें एतराज क्या है?
- 11:56अगर तुम्हें याद रहता है? कि मैंने पिछले जन्म में जाना,
- 12:02जाति समर में जाना या मैंने एस्ट्रल ट्रैवलिंग करनी, तो इसका
- 12:07मतलब तुम अभी जंक्चर पॉइंट पे हो नहीं जंक्चर पॉइंट पे इतना आनंद
- 12:13का रस गहरा होता है। कहा, व्यक्ति को याद नहीं आता कि
- 12:19मैं गरसी चला किस लिए थे? यही मुश्किल हो जाती है, लेकिन
- 12:26फिर भी बाबा नानक कहते हैं कि अगर तुम कुछ मांग लोगे बा तो उसके पास
- 12:31वहाँ उपलब्ध है, जो मानू ठाकुर अपने ते सोई, सोई देबे।
- 12:39यह जंक्चर पॉइंट के ऊपर संधि क्षेत्र में जाकर बोले गए शब्द
- 12:44हैं। यद्यपि तुम मान नहीं पाओगे, भूल
- 12:51जाओगे, जो छोटे से आनंद से सम्मोहित हो जाता है।
- 12:59बहते बड़े आनंद का सामना कैसे कर पाएगा?
- 13:04कई बार सोचिए, आंतरिक क्षणों का संभव का आनंद इसकी तरफ तुम
- 13:14लालायित रहते हो। लोग कहते हैं कि आफ्टर एनलाइटन
- 13:18में इसकी तरफ तुम खींच गए तो बड़ी अजूबी सी बात है।
- 13:25क्यों खींचेगा कोई जब वो परम रस में उतर गया?
- 13:33परम रस में उतरने से पहले शुद्ध रस में उतरेगा।
- 13:38यह संभावना तू देखती है, लेकिन परम रस में उतरने के बाद शुद्र रस
- 13:45में वह उतरेगा, यह संभावना बिल्कुल है।
- 13:49फिर भी यह एनलाइटन पर्सन क्यों उतरते हैं?
- 13:55किसी कारण हेतु से उतरते हो। कृष्ण उत्र संख्या कम थी,
- 14:06जनसंख्या कम थी और कृष्ण बहुआयामी सोचते संख्या कम है।
- 14:17जन्म देने वाली स्त्रियाँ ज्यादा हैं तो जन्म ही क्यों न दे दिया
- 14:22जाए? अब और करना क्या है?
- 14:27तो कुछ बात जुदा है। तुम उसकी नकल मत करना।
- 14:33कृष्ण ने अपना काम पूरा कर लिया। जीवन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया।
- 14:39उनके पास सब हैं, साधन भी हैं, एंड के बाद मेरे पास ये भी प्रश्न
- 14:51आए हैं कि कोई व्यक्ति इतना आनंद पाने के बाद क्षुद्र आनंद में
- 14:56क्यों खींचेगा? अक्सर तो नहीं खींचेगा।
- 15:01बहुत आयत में तो नहीं खिचेगा अबुद्ध कहाँ खींचते हैं और आनंद
- 15:10को शक होता है के यह बुद्ध। कहीं ऐसा तो नहीं कि हमें बेवकूफ
- 15:18बना रहा है तो आनंद मुझसे कहते हैं भैया मैं तुम्हारा भिक्षुक तो
- 15:24बन जाऊंगा, लेकिन मेरी एक शर्त है, शर्त है कि मैं चौबीसों घंटे
- 15:32आपके पास रहूंगा। बहुत कहते हैं बिलकुल ठीक 2400
- 15:38घंटे मेरे पास हैं, ना मेरे पास गोपनीय रखने को कुछ है ही नहीं।
- 15:44महावीर नग्न हो जाते हैं। इसका अर्थ क्या गोपनीय रखने के
- 15:48लिए कुछ भी नहीं बचा? कुछ भी नहीं बचाना है।
- 15:58जो सीक्रेट हो इसलिए खुल जाते हैं वो शरीर को नग्न करने की।
- 16:07यह एक सिर्फ सिमौलिक रिप्रजेंटेशन थी।
- 16:13के इस व्यक्ति के पास छुपाने को कुछ नहीं।
- 16:16बाजा तो नग्न हो जाते हैं शक्ति योद्धा अगर तुम ये चाहते हो
- 16:32तुम्हारा कोई अलग से। संकल्प है कोई भी है तुम्हारा अलग
- 16:41से संकल्प है। अगर तुम सीधा ध्यान में जाओगे तो
- 16:46तुम अपने पास पहुँच जाओगे, तुम्हारा ध्यान सीधे वहाँ जाएगा
- 16:52जहाँ चुम्बक उसे खींच लेगा। लेकिन अगर तुम्हारी कुछ तमन्ना
- 16:58है, तुम किसी तमन्ना को लेकर ध्यान में उतरे हो, तुम उसे
- 17:03जंक्चर पॉइंट पे पहुँचो और ध्यान करने से पहले इस बात को संकल्प
- 17:10में ले लो जैसे अब तुम बैठे हो? इस स्थिति में संकल्प लिया जा
- 17:16सकता है। अभी तुम्हें होश है।
- 17:21होश का मतलब अभी तुम्हें याद है कि यत्न करने के बाद भी मैं पिछले
- 17:27जन्मों में उतर नहीं सकता। इतना होश है।
- 17:32और यत्न करने पर भी मैं शरीर से बाहर नहीं हो सकता।
- 17:36ये तुम्हें याद है इसका मतलब अभी तुम जिंगचर पॉइंट पे पहुंचे नहीं
- 17:41बहुत दूर हो अब ध्यान से सुनना मेरी बात को।
- 17:50तुम नथिंग टु डू में बैठे अपने भीतर उतरे, इस स्थल पे आए, जिसकी
- 17:58बात कर रहे हो तुम तो नथिंग टु डू करने से पहले कुछ संकल्प मत करना,
- 18:05क्योंकि वहाँ तुम्हारे पास संकल्प करने की शक्ति ही नहीं।
- 18:11कुछ शक्ति तो आए, कुछ संकल्प लेने के लिए बिंदु शक्ति की आवश्यकता
- 18:19होती है जैसे ऋषिकाण शराब देते थे, उनके शराब के पीछे वृहद शक्ति
- 18:28होती थी। तो शिक्षण प्रकृति को मानना पड़ता
- 18:32था, लेकिन तुम भी सारे दिन शराब देते हो, लोगों को तुम आशीर्वाद
- 18:39भी देते हो, लेकिन ना किसी का कल्याण होता है ना किसी का बुरा
- 18:45होता है क्यों? क्योंकि।
- 18:48तुम्हारे संकल्प की विशेष शक्ति है संकल्प के पीछे वृहद शक्ति
- 18:55होना, संत होना और संत जो कह देगा था में उस संकल्प की वृहद शक्ति
- 19:06के संग। कहेगा, वह प्रकृति को मानना ही
- 19:11पड़ेगा। ये सारी बात समझ गए तुम ठीक अब जब
- 19:19तुम यहाँ पहुँच जाओ, जहाँ की बात कर रहे हो मेरु दंड सीधी हो जाए,
- 19:25आनंद आए। और मेरुजंड के सीधे होने से रीढ़
- 19:30की हड्डी के सीधे होने से तुम्हें आनंद और ज्यादा तेज हो जाए।
- 19:34क्यों एक चीज़ पहले दबी हुई थी, ऐसे मढ़ी हुई थी?
- 19:39अब वो सीधी हो गई तो नैचुरली उसको बाइपास करने के लिए?
- 19:46रास्ता ज्यादा विड्थ का मिल गया चौड़ाई का मिल गया समझाती है
- 19:51तुम्हें बात पहले नैरो थी उस स्थान से जहाँ से तुम्हारी शक्ति
- 19:59ने निकलना था, अब वो थोड़ी रिलैक्स हो गए।
- 20:06क्योंकि तुम्हारी रीढ़ की हड्डी सीधी हो गई, तुमने नहीं करनी है
- 20:10वो शक्ति अपना मार्ग खुद ही बना लेगी।
- 20:12मैं बार बार तुमसे कह रहा हूँ, अगर तुमने प्रयास किया तो चूक
- 20:16जाओगे, कोई प्रयास मत करना, यहाँ आकर तुम्हारी शक्ति खुद उठेगी खुद
- 20:24जागृत होगी। खुद ही अपना मार्ग बना लेगी।
- 20:27शक्तियां अपना मार्ग स्वयं ही पैदा कर लिया करती हैं।
- 20:33तुम्हें अपना मार्ग नहीं पैदा करना है।
- 20:36वो इतनी वृहद शक्ति है परमात्मा की कि अपना रास्ता खुद बना लेगी।
- 20:42तुम्हें अपना रास्ता बनाने की जरूरत नहीं उसके लिए रास्ता बनाने
- 20:45की जरूरत नहीं आगे चला तो यहाँ तुम पहुँच गए जहाँ परेड के अड्डे
- 20:58से भी हो गए। ये दर्शाता है कि तुम उस पाइंट पे
- 21:04आ गए तो जंक्चर पाइंट से आंधी आंधी दूरी तुमने कर ली, अपनी
- 21:13बुद्धि से अपने जंक्चर पाइंट के बीच में जो मध्यमार्ग है।
- 21:21बीच का बिंदु है वहाँ पर तुम आ गए जहाँ न तो तुम मदहोश हो, बिलकुल
- 21:28होश तुमने गंवाया नहीं और न ही तुम जागृत हो, ये बीच का बिंदु है
- 21:35यहाँ संकल्प करना है आके जहाँ आनंद भी है।
- 21:42आनंद उलांघ ही मार रहा है पलांघ ही मार रहा है वहाँ तुम सोचना
- 21:51संकल्प करना कि जैसे ही मैं जंक्चर पॉइंट पे पहुँच जाऊं, वहाँ
- 21:57तो संकल्प लेना मुश्किल हो जाएगा तुम्हें।
- 22:00पहले बता देता हूँ मैं अगर वास्तव में वहाँ जाने की इच्छा।
- 22:06है। एनलाइटनमेंट के बाद क्यों संकल्प
- 22:12लेते हैं बूथ? क्यों महावीर जाति स्वर्ण में
- 22:15जाते हैं? क्योंकि वहाँ तो पहुँच गए जहाँ
- 22:17पहुंचना। अब मज़े से उस स्थान पर पहुँच के
- 22:23संकल्प लिया जा सकता है क्योंकि ओवर खुश करने को बाकी नहीं है,
- 22:29लेकिन तुम्हारे पास और खुश करने को बहुत बाकी है।
- 22:33अभी तुम्हे अपना टारगेट तय करना है।
- 22:37अभी तुमने अपना लक्ष्य प्राप्त करना है, लेकिन फिर भी अगर
- 22:42तुम्हारी इच्छा है कि मैं पहले ही जाना चाहता हूँ तो ठीक तुम ऐसा
- 22:46करना। इसी अवस्था में जैसे ही रेड सीधी
- 22:50हो जाए, तुम संकल्प लेना जो भी तुम चाहते हो, एक संकल्प लेना।
- 22:57चाहे तो पिछले जन्मों में जाने का, चाहे शरीर से बाहर होकर
- 23:01एस्ट्रल ट्रेल विंग करने का, क्योंकि ये तो दो संकल्प हो गए
- 23:09तुम शरीर से बाहर भी जाना चाहते हो, तुम अपने पिछले जन्मों में भी
- 23:14उतरना चाहते हो। दो इच्छाएं हो गई तुम्हारी दो
- 23:18संकल्प हो गए। पहले तो ये डेटा मेंशन करो कि
- 23:25दोनों में से क्या तुम चाहते हो, पिछला जन्म चाहते हो या सीरीज से
- 23:30बाहर होना चाहते हो, ये पक्का करो।
- 23:34फिर। इस स्थिति पे बिल्कुल जिसका तुमने
- 23:38वर्णन किया यही है जहाँ मेरु दंड स्थिति होगी अपने आप तो यहाँ पर
- 23:46संकल्प करो, जो भी तुम्हारी इच्छा हो, जो धन चाहता है धन मांग ले।
- 23:54पदवी जाता है पदवी मांग ले जो तुम्हारी इच्छा है वो मांग लो,
- 24:05लेकिन बुरा मत मांग लेना क्योंकि यहाँ तुम बुरा मांग सकते हो
- 24:09तुम्हें मैं पहले बता दूँ। जैसे जैसे पावर ज्यादा होती है,
- 24:15व्यक्ति के पास वह अगर किसी का बुरा करना चाहेगा तो उसको दंड भी
- 24:21उतना ज्यादा मिलेगा क्योंकि तुमने बा होश पाप किया इसलिए मैं कहता
- 24:30हूँ राजा अगर पाप करे। राजा अगर कतल करे तो उसकी सजा
- 24:37अधिकतम होनी चाहिए। अधिकतम जो भी तुम दे सकते हो
- 24:43क्यों? क्योंकि वो शक्ति सम्पन्न है अगर
- 24:47निर्बल व्यक्ति। वो ही पाप करें तो उसकी सजा कम
- 24:53होनी चाहिए, लेकिन क्या करें? हमारा संविधान एक है, ठीक है
- 24:59हमारे पास और कोई उपाय भी नहीं है।
- 25:02सच में परमात्मा के दरबार में न्याय ऐसे होता है जो मूर्शित है,
- 25:09उससे हो गया। बड़ा थोड़ा सा पाप लगेगा तुमसे
- 25:14कीड़ी मर गई, मच्छर मर गया, पांव के नीचे कोई दब के मर गया प्राण
- 25:20बहुत कम पाप लगेगा क्यों तुमने जान के नहीं मारा और अगर तुम
- 25:26पूर्ण हो गई तुम्हारी आँखें हैं देख मक्खें उड़ रही है।
- 25:30तुमने मक्खी को झटक के मार दिया, मैं जागृत हो के तुमने पाप किया,
- 25:38तुमने अपने बल का नाजायज उपयोग किया दुरुपयोग किया कृत्य एक है,
- 25:46फल एक है, मक्खी मरी। दोनों का फल एक लेकिन चेतना की
- 25:54अवस्थाएँ दो हैं, एक अवस्था में तुम मूर्छित होते हो, गलती से मर
- 25:59जाती है और दूसरी अवस्था में तुम जानबूझ के मारते हो तो फिर इनका
- 26:07दंड भी अलग अलग होगा। हमारे संविधान में इतनी सूक्ष्म
- 26:13व्याख्या हुई नहीं क्योंकि की नहीं जा सकती, लेकिन परमात्मा का
- 26:18संविधान बड़ा सूक्ष्म है। परमात्मा का संविधान सब जान लेगा
- 26:26कि तुमने जान के किया। क्या अनजाने में हो गया अनजाने
- 26:32में हो गया तो बात तो है हत्या हो गई।
- 26:36थोड़ा सा बात लगेगा बहुत थोड़ा लेकिन अगर जानबूझ के तुमने मक्खी
- 26:44को पकड़ा। पकड़ के फिरुश को बेच के मार दिया
- 26:49या हाथ पटक के मार दिया तो बाहूश तुमने अपनी शक्ति का इस्तेमाल गलत
- 26:56काम पे किया, समझा गई अब यह मूर्छित और अमूर्षित अमूर्षित
- 27:04व्यक्ति पाप कर ही नहीं। क्योंकि वह किसी की जान लेने से
- 27:09पहले किसी की जान लेने से पहले ही जैसे ही अमुरषित हुआ, वैसे ही
- 27:16ततिक्षण अहिंसक भी हो जाएगा, फिर इसे फिर समझो।
- 27:22जैसे ही वो अमूर्षित हुआ उसकी मुर्चा टूटी प्रत्यक्षण, उसका
- 27:27परिणाम अहिंसा के रूप में आएगा। अहिंसा शादी नहीं जाती, लेकिन अगर
- 27:33शादी जाए तो शुभ है। अहिंसा स्वयं में भी आती है जब
- 27:40तुम्हारी मुर्चा टूट गई। तो उसके बाद जो हिंसा होती है, वह
- 27:47तुम जानबूझ कर कर रोके जैसे कृषण करते हैं।
- 27:52शिशु पाल का वत कृषण जागे हुए समझना बात को।
- 28:00कर्मविधान में बड़ी सूक्ष्म बात है, इसको ध्यान से सुन लें।
- 28:08कृष्ण जागे हुए हैं, कृष्ण को हत्या का पाप बहुत ज्यादा लगेगा।
- 28:14कृष्ण जानते हैं राम? धोखे से बाली का वध कर देते हैं
- 28:22और राम अमूर्षित हैं। उनकी मुर्चा टूट गई है।
- 28:30मुर्चा टूटने के बाद भी व्यक्ति पाप कर सकता है, लेकिन उसका पाप
- 28:36का आयाम बदल जाएगा। जैसे राम भी करते हैं, जानते हैं
- 28:45सामने गया तो आधा वाला आ जाएगा इसमें, लेकिन इसने पाप भी बहुत
- 28:52किया है। इसने सुग्रीव को उसके राज़ हक से
- 29:00भगा दिया और इसकी पत्नी पर अधिकारियों वाली और अत्याचार कर
- 29:06रहा है। दर दर की ठोकरे का रहा है।
- 29:09सुभरी सगा भाई है का मालिक है। लेकिन शक्ति के बल पर इसने भगा
- 29:17दिया और इसकी पत्नी पर भी काबिज हो गया।
- 29:22तो हमारे मर्यादा पुरुष उत्तम श्रीगांव मर्यादा भंग नहीं करते,
- 29:32मर्यादा भंग नहीं करते समझना बात को।
- 29:35मर्यादा का उल्लंघन करते हैं, भंग करना और बात है उल्लंघन करना और
- 29:40बात है क्या फर्क है? आइए प्रसंग का गया तू इसको समझ
- 29:44कृत ही चले भंग करना होता है कि तुम पाप तो कर दो लेकिन पाप का फल
- 29:51भोगने से बचो। कतल करके छुपते फिरो या उसे कतल
- 29:57करने की प्रोसेसर को छिपाते फिरो ये है भंगपु बहुत से राजनीतिक ऐसा
- 30:08काम करते हैं। मार देते हैं, हत्या कर देते हैं,
- 30:13कतल कर देते हैं, छुड़वाते करते हैं, ये है मर्यादा भंग करण भगवान
- 30:19राम भंग नहीं करते हैं, उल्लंघन करते हैं, उल्लंघन करते हैं, इसको
- 30:27गौर से सुन लेना। उल्लंघन का अर्थ ये है कि पहले
- 30:32तैयार करते हैं अपने आप को कि मैं इस वध का जो परिणाम होगा उसे
- 30:37भुगतूँगा आई विल बेयर ऑल दी रिज़ल्ट्स?
- 30:47सभी परिणामों को मैं भुगतूँगा जो भी आयें, यह है उल्लंघन करना भंग
- 30:56करके तुम भागोगे बचोगे, अपने आप को छुपाओगे पापों को छुपाओगे।
- 31:06लेकिन छुपा दो के संसार से बिलाश्रम छुपा भी लोगे?
- 31:14लेकिन परमात्मा की व्यवस्था बड़ी सूक्षम भी है और बड़ी सटीक भी है
- 31:22एको। उससे नहीं से पास हो तो कहते हैं
- 31:33कहते हैं कहानी है, सच नहीं, कृष्ण राम के अवतार में।
- 31:44लेकिन राम को भोगना पड़ेगा। राम ने जो मार दिया इसको बाली को
- 31:50जान के मुझे भोगना पड़ेगा। इसलिए खुशी खुशी भोगते भी हैं।
- 32:02अब तुम जानकर हैरान होगे और कृपया करके प्रतिकार मत करना।
- 32:11राम ने जीतने भी पाप दिए, निर्दोष सीता को बाहर निकाल दिया।
- 32:18अपने ही वो बच्चे, अजन्मे बच्चे जो गर्भ में थे, उनको जन्म से
- 32:22पहले ही वनवास दे दिया जाओ। ये ऐसे पाप थे जिनका कोई हाल ही
- 32:31नहीं होता। बालिका वत।
- 32:38कोई हर नहीं होता, निर्दोष है और बाली ने कहा कि और राम के हृदय को
- 32:45छेद गई बात लेकिन बात को समझा गए वो तुलसीदास कहते हैं, समझाने का
- 32:51प्रयास है, तुलसीदास सच्चाई को जानते नहीं हैं, कवि हैं।
- 32:56महाकवि हैं सच्चाई को जानते नहीं। इसलिए अपने ही हिसाब से लिख देते
- 33:03हैं कि छोटे भाई की बहू पुत्री के समान होती है।
- 33:10लेकिन इन लोगों ने जो कविताएं लिखीं वो कविताएं थीं, कहानियों
- 33:14थीं। उसमें कर्म व्यवस्था को ये जानते
- 33:18ही नहीं तो क्या करें? अगर जानते नहीं ये तो कोई संत ही
- 33:23बता पाएगा जो उस स्तर पर गया हुआ है।
- 33:27राम जानते हैं कर्म करने से पहले कि मुझे भोगना पड़ेगा तैयार करते
- 33:34हैं अपने। क्या मैं भोग पाऊँ का तैयार हो
- 33:38जाते हैं? ठीक भोगूंगा जो भी कुछ रहेगा,
- 33:43लेकिन यह पाप तो नहीं होने दूंगा? उन्होंने छुप के तीर मार दिया।
- 33:53बाली मर गया। तो बाली पूजता है मरता हुआ बाली
- 33:59तड़पता हुआ पूजता है हेरान मैं बैरी सुग्रीव प्यारा।
- 34:08कारण कवननाथ मुहिम। मैं बेरी हो गया कारण क्या सुगरी
- 34:18प्यारा हो गया कारण क्या अगर सीता ही चाहिए थी तो मुझे बता दे मैं
- 34:26सीधा रावण के पास जाता, उसके दो मार कर चपते।
- 34:33रावण को कितनी बार परास्त कर चुका हूँ तुम्हें इतना सा बल है मेरी
- 34:39काठ में आ जाए अगर सीता के कारण मुझे मारा तो तुमने गलत मारा, अब
- 34:50किसी और कारण से तुने मुझे मारा? तुम बताओ, मैं बैरी सुग्रीव
- 34:57प्यारा कारण कबननाथ मूवी मारा किस कारण से हे नाक आपने मुझे मार
- 35:04दिया कारण क्या था मेरा और आपका बैर?
- 35:12क्यों था? मैं क्यों बेरी हो गया और सुग्रीव
- 35:18ने आपका क्या भला किया था? सुग्रीव आपका प्यारा क्यों हो
- 35:23गया? अगर सीधा चाहिए थी मुझे बताया हो?
- 35:31मैं सीधा लंका में जाता और बाली के पास यह वरदान था कि जिसके भी
- 35:37सन्मुख बाली खड़ा हो जाएगा उसका आधा बल उसमें आ जाएगा।
- 35:42चाहे कोई भी हो निश्चित रूप से वो प्रत्येक संसार के प्राणी को
- 35:48शक्तिशाली प्राणी को। मार सकता था।
- 35:52बिलाशक तो मुझे बताया होता, प्रभु हे नाथ तुम अवतार होके भी क्यों?
- 36:03यह गलती करके यह बात तुमने क्यों की?
- 36:09खैर। तुलसी अपनी बात बताते हैं, लेकिन
- 36:12तुलसी जैसी मान्यता रखते होंगे वैसी लिख दी।
- 36:15बात तो यह नहीं थी, बात तो यही थी जो तुलसी ने लिखी नहीं बात यही
- 36:25थी। जब कोई भली व्यक्ति नरबल को सताना
- 36:29शुरू करते हैं और तुम्हारे पास ये खबर लग जाए और तुम उसके पाप को
- 36:39मिटाने में क्षमता रखते हो। तो उस पापी को मिटाना तुम्हारा कर
- 36:49सकता है। असल बात ये है ये तुलसी ने लिखी
- 36:54तुलसी ने और ही समाज की व्यवस्थाएँ गनाती छोटे भाई की
- 37:00पत्नी बेटी का बराबर होती है। सामाजिक परंपराएं ऐसा कुछ भी नहीं
- 37:09था। सीधी सीधी बात थी, सीधा सीधा हल
- 37:15था क्या था, क्यों मारा? राम ने बाली को क्यों मारा?
- 37:22क्योंकि बाली को अगर राम ना मारता और कोई मार भी नहीं सकता था, अगर
- 37:33तुम्हें सीता चाहिए थी तो मुझे बता सकता है मैं सीधा जाता रहा
- 37:40लंका रावण की गर्दन मरोट लेता। चार मारता जन्नाटेदार थप्पड़ और
- 37:52रावण से बोलता ऐसा कर अपना पुष्प का विमान उठा सीता को बँटा और
- 38:00जाके मेरी राजधानी में भगवान राम बैठे हैं।
- 38:03उनकी अर्धांगणी है ये उनके पास छोड़ के लेकिन राम जो लिखा बकवास
- 38:18तुलसी ने ऐसा कुछ नहीं। राम ने बाली को क्यों मारा?
- 38:26ये बहुत सी बात मेरे पास आ जाती है, बहुत बार आ जाती है।
- 38:36मैं आज इस संदेह का निवारण कर दिया।
- 38:41उसने हड़प लिया था। सुग्रीव की घर वाली रोमा को ये
- 38:47कारण? उसने सिंहासन हड़प लिया था।
- 38:52ये भी करना ऐसे तो औरंगजेब ने ही सिंहासन हड़प लिया।
- 39:00औरंगजेब ने अपने बड़े भाई दारा सीखो का कतल कर दिया।
- 39:08और खुद राजगद्दी पे बैठ के अपने बाप को जेल में डाल दिया, अपनी
- 39:12बहन को जेल में डाल दिया तो राम ने बाली को क्यों मारा?
- 39:24इसका उत्तर यही है। जब कोई व्यक्ति बल के नशे में
- 39:30इतना अंधा हो जाए उसको ठीक या गलत दिखना बंद हो जाए।
- 39:37विवेक खो जाए ठीक क्या गलत? क्या वो पाश्विक वृत्ति में उतर
- 39:43जाए? अगर कोई व्यक्ति बल रखता है तो
- 39:51उसको उसको मार देना चाहिए। ये है असली कारण?
- 39:57इसलिए भगवान राम ने बाली को मारा अगर मैं नहीं मारूंगा।
- 40:02तो फिर रावण तो नहीं मार सकेगा रावण को?
- 40:05तो कितने बार ये पहले ही परास्त कर चूका है?
- 40:07सारी कहानी वो जानते है, लेकिन राम कहते है ऐसा कुछ नहीं है।
- 40:17बाली तुम्हारी मेरे साथ कोई दुश्मनी नहीं है।
- 40:23तुम्हारी दुश्मनी सिर्फ यही है मेरे साथ कि तुमने अपने बल का
- 40:28दुरुपयोग किया और ये बहुत बड़ी दुश्मनी का कारण है।
- 40:34निर्बल के बलराम मैं सदा निर्बलों का बल।
- 40:44मैं सदा निर्बलों का बल क्यों गए? कृष्ण अर्जुन के साथ कभी सोचा
- 40:54क्यों? कृष्ण ने जाके द्रोपदी की लाज
- 40:57बजाई, उस क्षण बजाई। जब भद्रोपति मेरा विलंब हो गई,
- 41:05असहाय हो गई, निर्बल हो गई। पुकार करने लगी तो राम कहते हैं
- 41:12मेरी कोई दुश्मनी नहीं है, न तुम दुश्मन हो, न तुम बहरी हो, न
- 41:18सुगरी प्यारा है। मुझे बैर है तुम्हारी शक्ति के
- 41:24नाजायज प्रयोग तुम्हारे पास जो शक्ति है, वो भला भी किसी का कर
- 41:31सकती है। तुम उसी शक्ति से किसे गिरे हुए
- 41:35को उठा सकते हो? किसी सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त
- 41:40वृद्धि को उठाकर हॉस्पिटलैज़ कर सकते हैं और उसी शक्ति को जाते
- 41:46हुए किसी वृद्ध व्यक्ति को झापट मार के घराव भी सकते हैं।
- 41:52दोनों काम उसी शक्ति के द्वारा हो सकते।
- 41:54हैं। राम ने बाली को इसलिए मारा यह
- 42:01मर्यादा बांटने के लिए कि शक्ति संपन्न व्यक्ति को अपनी शक्ति से।
- 42:16राजकाज ही चलाना चाहिए। अपनी शक्ति को राजकाज ही चलाने
- 42:20में व्यय करनी चाहिए, ना के जुल्मों को करने में।
- 42:30दुर्बलों पे नैबलो पे अपने से कमजोरों पे।
- 42:37खर्च नहीं करनी चाहिए। सत्ता की पावर यही से खाया राम ने
- 42:45बाली को मारकर जो व्यक्ति सत्ता का दुरुपयोग करता है।
- 42:53राम कहते हैं, मैं उस निर्बल की रक्षा करता हूँ, यह मेरा कर्तव्य
- 42:58है क्योंकि मेरे संपर्क में आ गया।
- 43:02शुक्रिया इसलिए मैंने तुम बली होते हुए तुम्हें मारने का रास्ता
- 43:08चुन लिया, मैंने तुम्हें मार दिया।
- 43:13ये थक्का जब बलि अपनी अति पर पहुँच जाए, अंधा हो जाए मदानंद
- 43:26उसको मार ही देना चाहिए ये कहते हैं।
- 43:33और कोई हेल्प भी नहीं। यही कृष्ण के युद्ध से पहले
- 43:40शंखनाद हो चुका था। अर्जुन कपड़े हैं, टाँगे कांप रहे
- 43:46हैं। कृष्ण से कहते हैं कि ऐसा नहीं हो
- 43:56सकता कि मैं युद्ध ना करूँ, मैं भाग जाऊं।
- 44:04भगोड़ा बनने को कौन नहीं तैयार होता चरण?
- 44:07चुम्बक बनने को सभी तैयार होते हैं।
- 44:11मुश्किल तो लड़ना है किसी भी तरीके से नर्बल हो के बिना
- 44:16हथियारों के लड़ना यही तो मरदान भी है।
- 44:21चल तू जब जाए पकड़ या कोई वीरता थोड़ी है।
- 44:28अर्जुन कहते हैं। प्रभु ऐसा नहीं हो सकता।
- 44:31मेरा मन करता है कि मैं सिन्हिश्त हो जाऊं, अच्छी अच्छी बातें करने
- 44:35लगा। राम राम ऐसा नहीं हो सकता, मैं भी
- 44:42राधे राधे करने रहता हूँ हंसो। तो कृष्ण कहते हैं अब अति भली
- 44:53योद्धाओं को अपने सन्मुख युद्ध क्षेत्र में खड़ा हुआ देखकर
- 44:59तुम्हारी टाँगें घप रही है और अब तुम्हें सन्यास की याद आई।
- 45:08अर्जन तू कायरता की बातें मत कर अर्जन तू कायरता की बातों को
- 45:15त्याग दे और कायरता की बातों को तू शुगर कोटेड न कर, क्योंकि मैं
- 45:23घट घट के अंतस की जान मैं जानता हूँ।
- 45:28तू भागना चाहता है, तू वही है जो कह रहा था हे के शव मेरे रथ को
- 45:37दोनों सेनाओं के बीचो बीच के ले चलो ताकि मैं देखूं के मेरे विरोध
- 45:45में कौन उतरा है मुझसे जंग। पर मैं तुम्हारे आदेश से ही दोनों
- 45:52सेनाओं के बीचोबीच रथ को ले के आ गई हूँ।
- 45:58अब तुम भीष्म पितामह को देवव्रत को देख कर तुम्हारी टांगी का
- 46:03फ्रेंड है। जिससे धनुर् विद्या, शिखा, गुरु
- 46:08द्रोण को देखकर तुम्हारी टाँगें, तुम्हारी सारी रूह कंप रही है, थर
- 46:14थर कर रहा है शरीर इस सर्दी के महीने में हमें पसीना आ रहा है।
- 46:26तो कायरता की बातें मत कर छोड़ दे तो शोक को त्याग दे, जिनके लिए
- 46:35शोक कर रहा है वो शोक करने योग्य नहीं है।
- 46:39अर्जुन। लेकिन अर्जुन है।
- 46:49उसने भागने की बहुत कोशिश की। 700 श्लोक बोल दिए गए, देखे डर का
- 46:58मारा क्या क्या प्रश्न करता है युद्धभूमि में खड़ा है।
- 47:03फिर सन्यास विषय कहते हैं भगवान पाम कम पड़ेगा।
- 47:11क्या ऐसा नहीं हो सकता कि मैं भी ऋषि हो जाऊं, मुन्नी हो जाऊं?
- 47:16वो कहते हैं, हाँ हो जाना कैसे हो जाना।
- 47:22अभी तो तुम जग के मैदान में ही है आँखें खोल अभी तो शंखनाद पारसी हो
- 47:30चुका है। अब मैं पाँच्यजन्य को शंखनाद करने
- 47:35चला हूँ। अब याद आता है अर्जुन को।
- 47:42हे भगवान, हे कृष्ण भगवान, क्या मैं ऐसा नहीं हो सकता?
- 47:48मैं भी राधे राधे करना शुरू करता हूँ ये बेचारे कायरता के मारे
- 48:02इन्हें पता तो कुछ है नहीं। मात्र तुम्हे गुमराह कर सकते हैं।
- 48:06वो ये कर रहे हैं इससे ज्यादा कुछ कर भी नहीं सकते।
- 48:15अर्जुन सवाल पूछता है, कृष्ण से भगवान तुम तो सबल हो, महाबलि हो
- 48:25की ऐसा नहीं हो सकता? इनका हृदय परिवर्तन बहुत तरह के
- 48:34प्रश्न करता है, साइकोलॉजिकल भी, धार्मिक भी, सामाजिक भी बहुत तरह
- 48:40के प्रश्न करता है। अध्यात्म भी।
- 48:45लेकिन कृष्ण कृष्ण जीस तल से भी प्रश्न पूछेगा।
- 48:50अर्जुन उस तल पर कृष्ण तैयार खड़े बैठे होंगे।
- 48:54उत्तर देने के लिए बहुत से तलों से प्रश्न पूछा अगर गीता में
- 49:01तुम्हें तल बदलना आता है? तो तुम देखोगे गीता एक सकोलॉजिकल
- 49:11उपन्यास की भाँति देखोगे? मनोवैज्ञानिक उपन्यास है नवलि अगर
- 49:21तुम्हे सही प्रशिक्षण करना आता है।
- 49:25तो अर्जुन की प्रत्येक बात और कृष्ण की प्रत्येक बात तुम उस
- 49:30गहरे तल पे जाके देख सकते हो। यह एक साइकोलॉजिकल पुस्तक है
- 49:37सगीरूप परचिन पूछता है ये प्रभु? क्या आप इनका हृदय पूर्ण नहीं कर
- 49:45सकते? इनके मन में शांति आ जाए, ये
- 49:52युद्ध करने की भावना को छोड़ दें, मरने मारने की भाषा को त्याग दे,
- 49:58ऐसा नहीं हो सकता। कृष्ण कहते हैं।
- 50:04नहीं पार्थ ऐसा नहीं हो सकता। मन किसी के बस में नहीं है, मन
- 50:09नहीं बदला जा सकता। सभी कुछ पूछ कर अर्जुन पूछते हैं,
- 50:15प्रभु फिर दुष्टों का हल क्या है? धीरे धीरे धीरे धीरे जायज के
- 50:23प्रश्न पर आ गए अंतिम प्रश्न अर्जुन कहते हैं, हे भगवान, अगर
- 50:34तुम इनका हृदय परिवर्तन भी नहीं कर सकते नहीं कर सकता क्योंकि ये
- 50:40स्वतंत्र है। मैं इनके हृदय को बदल नहीं सकता,
- 50:44जैसा चाहेंगे करेंगे। हाँ उनका फल दे दो।
- 50:47कर्मण्य व अधिकार रास्ते में फल मेरे अधिकार क्षेत्र में है।
- 50:55कर्म तुम्हारे अधिकार क्षेत्र में है।
- 50:59मैं इनका हृदय प्रवर्तन नहीं कर। तो फिर इनका हल क्या है?
- 51:04दुष्ट व्यक्ति का हल क्या होता है?
- 51:07अब यहाँ सुनने वाली बात है गौर से सुन लेना।
- 51:11कृष्ण कहते हैं वध दुष्ट वध मैंने भी किया अर्जुन दुष्ट का वध ही
- 51:20करना। और कोई तरीका नहीं मैंने अपने सगे
- 51:25मामा का वध कर दिया। कंस कर दिया।
- 51:35दुष्ट का एक ही उपाय है वध। वध और वध दुष्ट वध दूसरा कोई भाई
- 51:52भगवान राम ने भी यही किया। यही बात यहाँ आ गई थी।
- 51:59आत ताई का वध राम जी ने की। और आत ताई के वध करने के बाद
- 52:05कृष्ण कहते हैं और कृष्ण कहते हैं देखिए अर्जुन न हन्नते हन्न माने
- 52:13शरीर आत्मा का हनन नहीं होता। शरीर का हनन होता है और शरीर
- 52:25बिल्कुल वैसा है जैसे हम एक वस्त्र को उतार दे और नया वस्त्र
- 52:30बह ले की जीर्णनी अथा विहाय नवानी घृणाती नरो प्राणी तथा श्री राणी
- 52:37विहाय जीर्णाननयानी संयति। आत्मा इस शरीर को छोड़ देती है,
- 52:46दूसरे शरीर में दे ही प्रवेश कर जाता है।
- 52:55अर्जुन तो चाहता है कि मैं सुनिष्ट हो जाऊं, मैं भाग जाऊं
- 53:02तुम्हारा मन भी करता है। सर्कमस्टैंसेस ऐसे हो गए हैं तो
- 53:07प्लान कर जाएं बाग जां या आत ताई के चरण पकड़ ले।
- 53:22कृष्ण कहते हैं लोग कहते हैं ज़माना बदलता है अक्सर।
- 53:30लोग कहते हैं ज़माना बदलता है अक्सर मर्दवे हैं जो जमाने को बदल
- 53:36देते हैं तुम जमाने को बदल दो अर्जुन हे पार्थ मेरी बातों को
- 53:44गौर से सुन नहनते आने माने शरीर ये नहीं मरेंगे।
- 53:52इनका शरीर मरेगा लेकिन नहीं मानता अर्जुन फिर कृष्ण को वही करना
- 53:59पड़ता है कि उसे दूर से अपना आपका दिखाना पड़ता है।
- 54:04ये देख ये तू है। ये मेरा विराट फिर तसल्ली होती
- 54:12है। अर्जुन को जब वह अपना आपा देख
- 54:16लेता है तो वास्तव में मैं नहीं मरूंगा।
- 54:20मैं ना मरू मरे संसार यह कपड़ा। यह संसार, यह पंच भौतिक देह यह
- 54:31संसार मर जाएगा, मैं नहीं मरूँगा ऐसा देखने के उपरांत धीरज को
- 54:39उपलब्ध हुआ। अर्जुन फिर भगवान कृष्ण से कहता
- 54:45है। नष्टो मोह स्मृत लबधा नष्टो मोहा
- 54:56मेरा मोह नष्ट हुआ स्मृत लबधा मुझे समृत हुआ स्मरण हुआ नष्टो
- 55:04मोहा। इल्यूजन टूटा नष्टो मोहा स्मृति
- 55:11अलकधा याद आया मुझे शमरण आया हूँ एमआइ पथ प्रसाधान मयाज्योत आपके
- 55:23प्रसाद से। मैं अकंप हुआ, मैं डमाडोल नहीं
- 55:30होता, अब अब आपकी कृपा हो गई, अब मुझे याद आया अब इल्यूसन भंग हुआ
- 55:42निष्टो मोहा। समृत लगता मुझे समृत हुआ तुम तो
- 55:50स्मरण करती हो समृत चाहे किसी का भी करे नहीं करना होता है समृत
- 55:58आता है उस तत्व को देखकर स्मरण आता है।
- 56:03जब तुम उस तत्व को देख लेते हो जैसे अर्जुन को स्मरण आया कि मैं
- 56:09हूँ कौन, यही स्मरण होता है, आता है, किया नहीं जाता, तुम तो सारे
- 56:15दिन स्मरण करते रहते हो, माला पड़े फिर तुम मुझसे पूछते हो बाबा
- 56:2140 वर्ष हो गए। हम तो पांचे नाम कर रहे हैं भाई
- 56:241000 नाम कर लो तुम्हारा मुँह अभी नष्ट नहीं।
- 56:32हुआ है। इसलिए तुम्हारा इल्यूज़न ईगो ईगो
- 56:38इस इल्यूज़न इसको फिर सुन लो। मुझसे पूछा है, व्हाटस इल्यूज़न
- 56:46ईगो? इस इल्यूज़न अहंकार, भ्रम,
- 56:52अहंकार, भ्रम जगत, भ्रम ने यह समझ लेना शंकराचार्य के यह शब्द मैं
- 57:00बहुत बार काट चुका हूँ। ब्रह्म सत्यम जगत, सत्यम
- 57:09ब्रह्ममिथ्या जो इल्ल्यूजन है वो ब्रह्म है।
- 57:15पूछा भ्रम क्या है? व्हाटस इल्ल्यूजन ईगो इल्ल्यूजन?
- 57:23भ्रम है तुम्हारा अहंकार तुम्हारा अहम तुम जो वास्तव में हो वो तुम
- 57:31अपने आप को रेकग्नाइज़ नहीं करता है, तुम पहचानते नहीं अपने आप को।
- 57:37तुमने किसी और को अपना होना मान लिया यही इलूशन है बहुत गौर से भी
- 57:43अगर हम देखे तो शरीर को हम देख सकते हैं विचार को आते जाते हम
- 57:50देख सकते हैं। भावनाओं के तूफान को हम आते जाते
- 57:54हुए देख सकते हैं और जीसको हम देख सकते हैं वो हम नहीं इस एनालिसिस
- 58:01को गौर से हृदय पे लिख लेना और बार बार इसको रिपीट करके सत्यापन
- 58:07करने की कोशिश करना कि क्या मैंने सत्य बोला है?
- 58:13जीसको भी तुम देख सकते हो तुम नहीं तुम मुझे देख सकते हो देख
- 58:20रहे हो मेरी आवाज को सुन रहे हो क्या मैं आवाज हूँ।
- 58:30क्या मैं शरीर हूँ? तुम कहोगे हाँ तुम शरीर हो, तुम
- 58:44आवाज़ हो, अगर मैं भी ये समझता हूँ कि मैं शरीर हूँ, मैं ये
- 58:52आवाज़ हूँ तो इट्स मैं इल्ल्यूज़न।
- 58:55इट्स मैं ईगो, यह फिर मेरा फ़िल्म है जीस दिन मैंने जान लिया, जीस
- 59:05दिन मैंने जान लिया नहीं हूँ मैं शरीर शरीर से बाहर हूँ, मैं शरीर
- 59:12से पार हूँ, मैं अनंत हूँ। मैं विस्तृत हूँ उस विस्तार में
- 59:17जीस दिन उतर गया जीस दिन मैंने ब्राह्मण के साथ आँखों से आंखें
- 59:23मिला लीं अपने आपको जोड़ लिया बूंद समा गई समुद्र में उस दिन
- 59:30मेरा अहंकार विलेन हो गया। तुम मुझे देख सकते हो, मैं
- 59:40तुम्हें समझाने की चेष्टा करता हूँ, बुद्धि के तत्व से तुम
- 59:45तुम्हारे विचारों को देख सकते हो, तुम तुम्हारी उठती हुई भावनाओं को
- 59:50देख सकते हो, तुम्हें क्रोध उठ रहा है, तुम्हें किसी के प्रति
- 59:54नफरत की भावना उठ रही है। कृषि के प्रति प्रेम उपज रहा है।
- 1:00:00ये क्योंकि भावनाओं को तुम देख सकते हो इसलिए ये भावनाएँ तुम
- 1:00:04नहीं। सीधा सरलसा गणित है ये सिंपल
- 1:00:10मैथेमेटिक्स। तुम भावनाओं को देख सकते हो तो
- 1:00:15भावना ही नहीं, तुम देख सकते हो कि तुम्हें क्रोध आ रहा है दूसरे
- 1:00:20पे तो क्रोध तुम नहीं तुम देख सकते हो तुम्हें दूसरे पे प्रेम आ
- 1:00:26रहा है तो प्रेम तुम नहीं। ऐसे ही तुम बोलते हुए अगर गौर से
- 1:00:33भीतर देखोगे, बोलते हुए ऊँट तुम नहीं हो, गला बोल रहा है, तुम
- 1:00:39स्पष्ट देखोगे, गला बोल रहा है जैसे ही तुम अपने अंतर में गहरे
- 1:00:45गहरे गहरे और गहरे जाओगे, वैसे ही एक तरह ऐसा आ जाएगा।
- 1:00:49जब तुम अपने आप को बोलते हुए भी देख सकते हो जी बिल्कुल ऊपरी ऊपरी
- 1:00:58सतह के ऊपर है, अपने आप को देख लेना कोई ज्यादा मुश्किल है जैसे
- 1:01:04आपको देख लेना या आप मुझे देख लो। कितना आसान है वैसे ही तुम अपने
- 1:01:12विचारों को भी देख सकते हो। इतना ही आसान है और तुम कहते हो
- 1:01:17ये विचार मुझे बहुत परेशान करते हैं।
- 1:01:19फिर तुमने देखे ही होंगे ना? अपने विचार देखे होंगे तभी तो
- 1:01:24तुम्हें लगा कि ये मुझे परेशान करते हैं।
- 1:01:27अगर नहीं देखे होंगे तो फिर परेशान कौन करेगा?
- 1:01:32इसको थोड़ा सा विचारण करना। मनन करना बैठकर एकांत में तो तुम
- 1:01:39पाओगे, जैसे ही तुम एकांत में आओगे, मौन में आओगे, वैसे ही
- 1:01:45तुम्हारे विचार तुम्हारे सामने घूमेंगे।
- 1:01:48तो इन घूमते हुए विचारों को भांति भांति के भावों को देखना ये
- 1:01:57तुम्हें दिखेंगे और सीधा सा गणित का फॉर्मूला जिसे तुम देख सकते हो
- 1:02:05वो तुम नहीं। ठीक आगे चले तो अर्जुन ने देखा
- 1:02:17मैं देख रहा हूँ सब कुछ अपने शरीर को भी देख रहा हूँ।
- 1:02:23ये सारा भीतर का और गन सब दिखाई पड़ता है।
- 1:02:28ये सारा ताना पाना दिखाई पड़ता है।
- 1:02:31बाहर का सब कुछ दिखाई पड़ता है, बगीचा, पेड़, पौधे, चाँद, तारे ये
- 1:02:38तुम्हें दिखाई पड़ते हैं। वे सहजे ही समझ सकते हो?
- 1:02:41कि ये तारे ये आसमान में उगता हुआ सूरज ये चंद्रमा ये मैं नहीं ऐसे
- 1:02:49ही। मन के।
- 1:02:51आकाश में उठती हुई भावनाओं मन के आकाश में उठते हुए विचार तुम
- 1:02:58नहीं? बड़े आसानी से देखे जा सकते हैं।
- 1:03:04जैसे ही तुम आसमान में उगते हुए सूरज को देखकर ये जान सकते हो कि
- 1:03:10सूरज मैं नहीं हो, वैसे ही अपने भीतर चिदाकाश चित आकाश में उठे
- 1:03:16हुए। विचारों को भावनाओं।
- 1:03:20को देख कर। क्या तुम अंदाजा नहीं लगा सकते कि
- 1:03:22तुम नहीं? विचार तुम नहीं हो भावनाई तुम।
- 1:03:27नहीं हो कितना सीधा सा सरल सा मैतेमेटिक्स है।
- 1:03:33जीसको तुम देख सकते हो, तुम नहीं। हम उस प्रश्न पे आए एक छोटा सा
- 1:03:45प्रश्न बीच में लेते चलें। चलिए ये प्रश्न आया कि आप कहते
- 1:03:50हैं कि बाहर जो इन्वेस्ट की है एनर्जी आपने?
- 1:03:55उस सारी एनर्जी को खेच लो कछुए की तरह क्या इन्वेस्ट किया हमने क्या
- 1:04:01खींचे हम कछुए की तरह? या राधे राधे करना तुमने इन्वेस्ट
- 1:04:09कर। रखा है इसमें ये राम राम करना।
- 1:04:12तुमने इन्वेस्ट कर रखा। है।
- 1:04:15तुम। मानते हो कि राधे राधे करने से।
- 1:04:17परमात्मा मिल जाएगा राधे राधे करने से आनंद मिल जाएगा तुमने
- 1:04:23इन्वेस्ट किया हुआ है जहाँ खेच लो उसको मैं तोड़ने आया हूँ तुम्हारे
- 1:04:29पाखंडों को तुम मेरे संग संग हो लो तुम तोड़ दो इनको।
- 1:04:36ये मूर्तियों में नहीं है परमात्मा।
- 1:04:39मंदिरों में नहीं है। परमात्मा मस्जिदों में नहीं है
- 1:04:42परमात्मा शास्त्रों में नहीं है परमात्मा तुम ये देख सकते हो तुम
- 1:04:48जिन्हें तुम देख। सकते हो वो तुम नहीं।
- 1:04:54कहाँ कहाँ नहीं तुमने इन्वेस्ट की?
- 1:04:58इन शास्त्रों में तुमने इन्वेस्ट कर रखी है कितनी पंक्तियाँ याद है
- 1:05:02तुम्हें? गीता की उपनिषद की अष्टावक्र गीता
- 1:05:07की हंसो। ये सब इन्वेस्टमेंट है तुम्हारे
- 1:05:11यहाँ और जब तक तुम इन्वेस्टेड रहोगे इनमें यू विल बी आचार्य, जब
- 1:05:19तक तुम तब तक सर। रहोगे तब तक।
- 1:05:23आचार्य रहोगे इस सारी? इन्वेस्टमेंट को।
- 1:05:29वापस लाना होगा रिटर्न बेक ये सारी इन्वेस्टमेंट तुमने खपाई हुई
- 1:05:38है बाहर इसको मैं कहता हूँ, जो जो शक्ति तुमने बाहर के ऑब्जेक्ट्स
- 1:05:46पे थोप रखी है। उस सारी शक्ति को वापस बुला लो,
- 1:05:54संग्रहित कर लो, क्या कहो मैं कुछ नहीं जानता हूँ और वास्तव में तुम
- 1:05:59जानते हो क्या कुछ। आइंस्टीन ने।
- 1:06:09एक फॉर्मूला इजाद किया। इ इस इक्वल टु।
- 1:06:11एम सी स्क्वायर। तुमने तो याद नहीं किया।
- 1:06:17तुमने सिर्फ याद किया याद करना। इजाद करना नहीं।
- 1:06:24तुमने जो कमाया उसके तुम। कमाना।
- 1:06:30बनाना नहीं होता। तुमने बनाया नहीं।
- 1:06:33संसार का कोई ज़रा। तुमने बनाया नहीं।
- 1:06:38तुमने याद किया। तुम कहते हो वो मेरा हो गया जो
- 1:06:44तुमने याद। किया धन तुमने कमाया तुम।
- 1:06:47कहते हो मेरा हो गया। बदवी, तुमने कमाई तुम कहते हो
- 1:06:50मेरी हो गई? तुमने शादी की धर्मपत्नी तुम्हारी
- 1:06:56हो गई? पति?
- 1:06:58धर्मपत्नी का हो गया। कौन किसका मालिक है?
- 1:07:02रोज़ रगड़े। इसी बात पे होते हैं।
- 1:07:06पति कहते हैं, मैं मालिक पत्नी कहती मैं।
- 1:07:08मालिक, मालिक कोई भी नहीं। जीवंत वस्तु का कोई।
- 1:07:13मालिक होता है क्या? जीवन का मालिक वह स्वयं होता है?
- 1:07:18जीवन का मालिक। जीवन इस बात को।
- 1:07:20याद रखना है जीवन का मालिक जीवन ये परमात्मा का कोई मालिक हो सकता
- 1:07:26है परमात्मा परम जीवन उसका मालिक। कौन परमात्मा?
- 1:07:32जीवन का मालिक जीवन। इन्वेस्ट जो तुमने कर दी है बाहर।
- 1:07:42सारी शक्ति को इन्वेस्ट जहाँ जहाँ भी की है वापिस बुला लो और तुम
- 1:07:49हैरान हो जाओगे, तुमने तो सारी शक्ति ही इन्वेस्ट कर दी है कुछ
- 1:07:55शास्त्रों। में कुछ।
- 1:07:57शब्दों में। कुछ व्याकरणों में, कुछ दोहों
- 1:08:01में, कुछ चौपायियों में, कुछ शब्दों में, कुछ गद्दों में, कुछ
- 1:08:05गद्दों में। कोई प्रेमी में कोई प्रेमिका में
- 1:08:10कोई धन। में कोई इमारत में कोई।
- 1:08:16तुमने जीवन की सारी संपदा बाहर इन्वेस्ट कर रखी है कोई बच्चों
- 1:08:21में, कोई पुत्र पुत्रियां में, किसी ने माँ बाप में, किसी ने भाई
- 1:08:30बहन में, किसी ने पड़ोसी में। किसी ने अपनी।
- 1:08:39संस्था में पार्टी में। धर्म में कहाँ कहाँ तुमने एनर्जी
- 1:08:46को इन्वेस्ट किया हुआ है? जब तुम देखोगे तो चकित हो जाओगे।
- 1:08:49अरे इतना इन्वेस्टमेंट हाँ बिलकुल इतना इन्वेस्टमेंट तुमने कर रखा
- 1:08:55है। है तुम्हारा नहीं क्योंकि अगर
- 1:09:00तुम्हारा। होता तुम मरते वक्त तुम्हारे साथ
- 1:09:02जाते हो तुम धम्म से। घर जाते हो एक?
- 1:09:08रेत का तिन का। भी तुम्हारे संग नहीं।
- 1:09:11जाता। मौत तुम्हें बता।
- 1:09:14देती है तुम्हारा अपना। क्या था जो तुमने कमाया वह
- 1:09:18तुम्हारा था या नहीं था? मौत बड़ी न्यायकारी है, मौत
- 1:09:27तुम्हें आईना दिखला देती है कि तुम्हारा है क्या?
- 1:09:37ये शक्तियां हैं जो तुमने इन्वेस्ट।
- 1:09:39कर रखी है। गौर से देखोगे तो जितनी मान्यताएँ
- 1:09:42तुमने इन्वेस्ट कर रखा है, सारी शक्तियां।
- 1:09:46अपनी तुम्हारी। इन मान्यताओं में इन्वेस्टमेंट
- 1:09:49है, इसको वापस खींच लो कछुए की तरह।
- 1:09:55भगवान कृष्ण ने कहा, कच्छकुई की तरह सारी शक्तियां को एकाग्र कर
- 1:09:59लो अपने भीतर समेट लो, 1.2 क्रांति हो जाएगी।
- 1:10:06प्रथम क्रांति यहीं से। शुरू होती है।
- 1:10:10फिर उस शक्ति को साथ लिए लिए अपने भीतर उतरो।
- 1:10:16अब तुमसे मुखातिब हूँ मैं प्रश्नकर्ता से अपने भीतर उतरो,
- 1:10:25इस स्तर पे पहुँच जाओ जब शक्ति उठी।
- 1:10:29रीढ़ की हड्डी सीधी। हुई आनंद घना हो गया।
- 1:10:36अभी तुम याद रख पा। रहे हो ये कोशिश?
- 1:10:41करने के बाद भी। मैं पिछले जनम में या मैं एस्ट्रल
- 1:10:47ट्रैवलिंग में शरीर से बाहर हो नहीं सकता इसी जगह पे बिलकुल सटी।
- 1:10:53स्थान है ये यहाँ पर तुम संकल्प करो, मैं शरीर से बाहर होना चाहता
- 1:11:00हूँ रिपीट करो, मैं शरीर से बाहर होना चाहता हूँ, मैं पिछले।
- 1:11:09जनम में जाना चाहता हूँ। मैं पिछले जनम में जाना चाहती हूँ
- 1:11:15जो भी। इसे बार बार रिपीट करो।
- 1:11:20अभी तुम कर सकते हो, मैं तुम्हें क्वेश्चन करता हूँ जंक्चर वहीं
- 1:11:27पे? जाके तुम्हें याद नहीं रहेगा।
- 1:11:29माँ मदुसी ही इतनी होगी। तुम कहोगे दफा कर क्या लेना है?
- 1:11:35ये आनंद ही बढ़िया सुबह की नींद जैसे हवा ठंडी चल रही है और
- 1:11:41तुमने? किसी को कहा कि सुबह सुबह जगा।
- 1:11:43देना भाई मुझे ब्रह्ममूत्र में और वो जगाने आए तुम।
- 1:11:48कहोगे नहीं। नहीं अभी तो अभी तो।
- 1:11:51बस अभी तो तुम फिर सो जाते हो वहाँ जाकर तो।
- 1:11:56तुम फिर सो जाओगे। वहाँ जाकर नशा गहरा हो जाएगा।
- 1:12:02मस्ती के फूल खिल जाते, बगीचा लहलहा उठेगा, वहाँ जाके बहुत
- 1:12:08मुश्किल है। अगर तुम अपना शरीर छोड़ना चाहते
- 1:12:11हो या देह छोड़ के कहीं जाना चाहते हो या फिर जाति स्मरण पिछले
- 1:12:18जनम में जाना चाहते हो तो यही संकल्प कर लो बार बार।
- 1:12:25क्या होगा एक झटका भी लगेगा तुम्हारा?
- 1:12:27आनंद कम हो जाएगा। क्योंकि जैसे ही इच्छा आयी कोई
- 1:12:33भी। इच्छा है चाहे परमात्मा को?
- 1:12:35प्राप्त करने की इच्छा ही। क्यों ना आयी आनंद टूट जाएगा आनंद
- 1:12:42बहुत कम हो जाएगा तुम्हारी गति। कछुए जैसी हो।
- 1:12:47जाएगी। जो इतनी सहजता से तुम चल सकते थे
- 1:12:53अपने भीतर तुम। गति कर सकते थे।
- 1:12:55जैसे ही तुम्हारे भीतर वासना ही है, ये वासना है धन उपार्जन।
- 1:13:00करना मात्र ही वासना। नहीं होती परमात्मा उपार्जन।
- 1:13:05करना भी वासना। होती है।
- 1:13:08तुम्हारे मन में जो चीज़ हलचल पैदा कर दे, वह विकार है जो।
- 1:13:18तुम्हारे मन में फिर सुन लो जो। तुम्हारे मन में हलचल पैदा कर दे
- 1:13:22तूफान पैदा कर दे, वह विकार है। जो डंबा डोल करते थे, तुम्हारी लो
- 1:13:30को कंपित कर दे अकंप न रहने दे, वह विकार है यही तो अर्जुन ने कहा
- 1:13:42तो प्रसाधान मयाचूत। आपके प्रसाद से, मैं।
- 1:13:50अकंप हुआ। फिर चार डिग्री हो जाएगी आनंद की।
- 1:13:56आनंद घट जाएगा। लेकिन अगर तुम।
- 1:13:59वाजिद हो की हमने तो। पिछले जनम में ही जाना है तुम
- 1:14:03देखना। क्योंकि तुम प्रैक्टिकल कर रहे हो
- 1:14:06इसलिए बड़ा आसान हो जाएगा। जैसे ही तुम संकल्प लोगे कि मैं
- 1:14:11पिछले जनम में। चला जाऊं मैं पिछले।
- 1:14:13जनम में चला जाऊं तुम पाओगे आनंद छंटना शुरू हो गया क्योंकि भाषण आ
- 1:14:19गई। निर्वासित थे।
- 1:14:24इधर वासना में थे तो आनंद गहरा गहरा घना होता जा रहा था।
- 1:14:30जैसे ही वासना आई वासना चाहे कुछ भी आई, हमारा आनंद घना होना कमतर
- 1:14:38होता जाएगा, घटता जाएगा। लेकिन अगर तुम बाजित हो के हमने
- 1:14:43तो पिछले जन्म में ही जाना है तो कोई बात नहीं धीरे धीरे करके
- 1:14:47थोड़ी देर लग जाएगी, तुम पाओगे तुमने इच्छा की इच्छा मात्र ही
- 1:14:56बेकार है कोई इच्छा चाहे कोई भी हो।
- 1:15:01दूसरे की। भले की इच्छा करना।
- 1:15:04भी बेकार है। अब ये क्यों करना जाना है इस बात
- 1:15:08को? क्योंकि पंडित जन कहेंगे हमारी तो
- 1:15:13रोटी छीन ली। सर, दूसरे।
- 1:15:16का भला करने की भी। इच्छा है और इच्छा बेकार है।
- 1:15:20दूसरों की सेवा करने की भी इच्छा है और इच्छा अधिकार है।
- 1:15:24ये बात जुदा है कि सेवा का फल अलग से मिलेगा तुम्हें, लेकिन आनंद
- 1:15:31तुम्हारा कमजोर हो जाएगा वहाँ जाके जो करना धरना।
- 1:15:35है। ध्यान में बैठने से पहले कराना।
- 1:15:41जो तुमने कुछ दान पुण्य करना है, कहीं तीर्थ यात्रा करनी है, स्नान
- 1:15:45करना है कर आना पहले ध्यान में जाते वक्त ये साथ मत लेके जाना की
- 1:15:51हमने तीर्थ में जाना है। कुम्भ में स्नान करना है फिर तो
- 1:15:54तुम भीतर नहीं जा पाओगे। चाल बड़ी धीमी हो जाएगी।
- 1:16:00समझा दी सारी बात तो उस स्तर पर धीरे धीरे तुम पहुँच जाओगे, लेकिन
- 1:16:07संकल्प को साथ लिए जो भी संकल्प था तुम्हारा परमात्मा को पाने का
- 1:16:15संकल्प कभी ना करना क्योंकि। यू अरे ऑन दी वे ऑफ़ गॉड ऑलरेडी
- 1:16:20यू अरे ऑन दी वे पहले ही तुम उसके रास्ते पे हो परमात्मा के पानी के
- 1:16:25रास्ते पे हो उसकी तुम डिमैंड मत करना, वह तो तुम्हें मिलेगा।
- 1:16:31ही वह। तो ध्यान से मिलता ही सहज जुरपीन
- 1:16:34मिलता है। सहज।
- 1:16:37समाधि भलीर साधो इसे ही कबीर कहते हैं कुछ मत सोचो, कुछ कुछ मत
- 1:16:44मांगो सहज सहज अपने। भीतर उतरो।
- 1:16:49तो समाधान हो जाएगा। तुम्हारा उसे ही समाधि कहते हैं।
- 1:16:54सहज समाधि कबीर? तो जंक्चर पॉइंट में तुम पहुँच
- 1:16:59जाओ फिर जंक्चर पॉइंट में जो तुमने संकल्प लिया श्री से बाहर
- 1:17:06होने का तो बाहर हो जाओ ततक्षण पिछले जनम में तो उस तरफ चले जाओ।
- 1:17:13जो संकल्प लिया तुमने पल भर में वह क्रियान्वित यथार्थ में ढल
- 1:17:19जाएगा लेकिन होगा कहाँ? ऑन दी जंक्शन पॉइंट अब सारी चीज़।
- 1:17:25मेरे ख्याल में तुमने स्पष्ट समझ ली होगी और फिर भी कोई प्रश्न रह
- 1:17:31गया। तो मुझे पूछ सकता है यहाँ पर आकर
- 1:17:36तुम्हारा कोई भी इच्छा पुकार अरदास यहाँ पर आकर पूरी होगी।
- 1:17:45क्योंकि परमात्मा की सबसे करीब। जंक्चर पार्ट है जहाँ तक तुम
- 1:17:50पहुँच कर। बने रह सकते हो थोड़ा सा जंक्चर
- 1:17:54बैंड को क्रॉस। किया कि।
- 1:17:56तुम गए। गहरे गहरे, गहरे।
- 1:18:02खोते जाओगे? खोते जाओगे रोज़ अपने आप को?
- 1:18:09परीक्षण ऐसा आएगा। जब तुम खो जाओगे और वह हो जाएगा
- 1:18:16उस दिन तुमने मंजिल पा ली तुम खो गए वह हो गया जब मैं था तब हारी
- 1:18:22नहीं अब हारी है मैं ना प्रेम गली अति सांकरी, तामे दो नशा।
- 1:18:31अब वो मुकाम आया जहाँ तुम खो गए और वो हो गया बस ये आखिरी बिंदु आ
- 1:18:43गया। खंजरू पेयाला फूल सुरा।
- 1:19:17विंग? कसाइयाँ दिस है।
- 1:19:27मित्र ब्याह रे नुम।