Latest / Baba ji Vijay Vats / 22 Sep 25 - अनाहत समाधि यात्रा! समाधि का असली मार्ग: सचखंड, अनाहत और अकेलेपन का अनुभव!
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- 0:04दीप्ति कौशल बाबा सुना है कि नरम मधुमक्खी।
- 0:20अपने प्रथम संभोग में मृत्यु को प्राप्त होता है।
- 0:28क्या यह सत्य है? और अगर है तो क्यों और कैसे?
- 0:48सिर्फ मनुष्यों में ही राजा नहीं होते, पशु पक्षियों में भी राजा
- 0:55रानी होती है बस तुम्हें पहचान होती है पशु पक्षियों को राजाओं
- 1:04की रानियों की पहचान। और मनुष्यों को पशु पक्षियों में
- 1:11राजा और रानी की पहचान नहीं होती। मनुष्य अपनी अकड़ में ही ले जाता
- 1:18है। उसे पता नहीं होता।
- 1:26कि संसार में कोई अन्य व्यक्ति मुझे जानता ही नहीं कि मैं राजा
- 1:33हूँ या रानी। मधुमक्खियों में भी ऐसा है।
- 1:44रानी मधुमक्खी उड़ती है, इसको मेट फ्लाइंग कहते हैं।
- 2:00वह बहुत से नर मधुमक्खियों के साथ संभव करते हैं।
- 2:10कबीर ने एक शब्द कहा है नारी की झाई परत अंधा होत बज़ंग कबीरा।
- 2:20तिन की क्या गति जो नृत्य नारी के स्थानों को नारी को कंडम करने की
- 2:34श्रेष्ठानों पर कबीर के कहने का स्वास्थ्य कुछ और है?
- 2:47रानी मधुमक्खी झोटती है बहुत से नर मधुमक्खियों से संभव करता और
- 2:56जब नर मधुमक्खी रानी मधुमक्खी से संभव करता है।
- 3:08तो उसका प्रजनन अंग एन्डोफेरस कहते हैं।
- 3:15वह रानी के गुप्तंग में ही रह जाता है, टूट जाता है और देखिए
- 3:22पता होता है कि मर जाऊंगा। लेकिन फिर भी वह संभोग करता है।
- 3:33क्यों? ये बड़ी समझने की बात है और बहुत
- 3:45बड़ा कुदरत ने इसमें इशारा दिया है।
- 3:52उसकी एक झलक के कारण संभोग में उसका दर्शन होता है।
- 3:58किसका आनंद का, खुशी का नहीं आनंद का।
- 4:05बाकी सभी अंग तुम्हें खुशी करते हैं, जीवा तुम्हें स्वादिष्ट
- 4:12पदार्थ, त्वचा तुम्हें सुंदर स्पर्श आँखें तुम्हें सुंदर दृश्य
- 4:20और कांड तुम्हें रसीरा सा संगीत मिलाती है।
- 4:31नाक सूंघते हैं खुशबू को बस एक संभोग ही ऐसा है जो खुशी नहीं
- 4:46तुम्हें आनंद देता है दूर से तुम आनंद की झलक।
- 4:54वह गौरी शंकर की ध्वजा यद्यपि दूर बहुत है, अगर देखा जाए तो मनुष्य
- 5:07को परमात्मा का प्रथम दर्शन प्रथम संभोग में होता है।
- 5:17इसलिए उसे हनीमून आज वो दिन ना रहे।
- 5:29आज तो 36 हनीमून बना के तुम प्रक्रियाओं को पूरा करते हो।
- 5:38और ये तो मात्र छलावा है। पुराने जमाने में जब प्रथम मिलन
- 5:48होता था, उस रात्रि को हनिमून करता था, शहद जैसा।
- 5:54चाँद लगता था उस टाइम क्यों? क्योंकि वो शहद दूर से देख लिया
- 6:07जाता था जिसे मेरा से कहते हैं। इसलिए संत तुम्हे समझाते हैं जब
- 6:21दूर से देखकर। तुम अपने आप को खोने को तैयार हो
- 6:26जाते हो तो फिर उसमें डूब ही क्यों नहीं जाता है?
- 6:36बार बार उसे देखने की तमन्ना बार बार उसे देखने की तमन्ना?
- 6:46तुम लाख वह उसी उसी प्रक्रिया में उलझर लेकिन उसके गुलाम है इसलिए
- 6:58आज सारी दुनिया मैथन की गुलाम। क्योंकि दूसरा रास्ता उन्हें पता
- 7:05है, कोषों का रास्ता ठीक था समझाने में विफल रहे कोई
- 7:16अतिशोक्ति कही होंगे। और ये अतिशोक या व्यक्ति को मार
- 7:25देते हैं। समझ नहीं समझाने की बातें गलत हो
- 7:30जाती हैं। हमसे आया ना गया हम?
- 7:39असला प्यार में दोनों से मिटाया। तुमसे आया।
- 8:12कितनी हैरानी की बात है परमाना जानता है क्षमा मैं चला जाऊंगा तो
- 8:18जल जाऊंगा, जीवन शेष न बचेगा। फिर भी परवाहना क्षमा में बसम हो
- 8:27जाता है। तुम कहते हो बेचारा ना समझ है,
- 8:37यही तो समझदार है, तुम सोचने वाले ना समझो।
- 8:43जो राख हो गया, जो खाक हो गया उसके प्रेम में वही तो जमीदार है
- 8:50मात्र तुम देखने वालों को क्या पता है?
- 9:01परवानों पर क्या गुज़री है, कितने आनंद के क्षणों में वो चले गए।
- 9:08मरकर ही तो पाया जाता है जब तक तुम वसीम भूत न हो, अपनी इच्छा से
- 9:18वसीम भूत न हो। राख न हो जाओगे तब तक वो आनंद
- 9:28तुम्हें दिखेगा भी। जिससे सतौरी की झलक मिल गई, वह
- 9:34मिटने को राजी हो जाता है। सतौरी की झलक का।
- 9:42यही मुनाफा होता है। जैसे ही ससुरी की झलक दिखी के वह
- 9:46है तो मरने मिटने को तैयार हो जाते हो, गलने को तैयार हो जाते
- 9:54हो। हनीमून के वक्त प्रथम बार।
- 9:58अभी आज वह परंपरा हो गई। हमारे विश्व ने बड़ी सुंदर परंपरा
- 10:02बनाई। 25 वर्ष तक ब्रह्मचर्य, उसके बाद
- 10:08प्रथम संसर्ग और प्रथम संसर्ग में जब प्रथम बार शहद को चकते हो।
- 10:23तो पुकार उसके हो के अल्लाह मुझे तेरा सब फैसला का बोझ है, तुम
- 10:37समर्पित हो जाते हो, तुम याचिक हो जाते हो।
- 10:54आनंद तो है, लेकिन बहुत दूर से देखा हुआ और प्रथम संकेत है
- 11:03प्रकृति का कि जो दूर से तुम्हें इतना नहला जाता है, फ्रेश कर जाता
- 11:09है तरोताजा कर जाता है। अगर तुम उसके करीब चले जाओगे तो
- 11:21कितनी सुन्दर रातें वो हसीन रातें कैसे गुजरे?
- 11:38प्रकृति तुम्हें यही समझाने की चिष्टा करती है।
- 11:41मात्र एक ही अनुभव है जो इंद्रियों में है, लेकिन इंद्राया
- 11:47तीर्थ का दर्शन करवाती हैं। प्रयास तो ठीक किया, घोषणा गड़बड़
- 11:59हो गई कहीं। समझने समझाने में
- 12:15अनुभव तो वो बिल्कुल वही है। सतौरी का अनुभव बिल्कुल वही है जो
- 12:22समाधि का अनुभव है और संसद का अनुभव।
- 12:27भी बिलकुल वही है। जो समाधि वही वही शिला देखी जाती
- 12:34है, वही कलश दिखता है और ज़रा भी चलाव नहीं होता।
- 12:44ज़रा भी कल्पना नहीं होती। बिलकुल सही सही तुम देख सकते हो।
- 12:52इसलिए जब संत बोलता है तो तुम उसकी अर्थगत लगा लेती हो।
- 13:02मैं कहता हूँ तुम पी के देख लो यहाँ की शराब का नशा कैसा है?
- 13:09थोड़ा अंदाजा रख जाएगा कि वहाँ की शराब का नशा।
- 13:15और फिर तुम शराब पीते चले गए और पीते ही चले गए और किसी के घरवाले
- 13:23का किसी की घरवाले का मेरे पास मैसेज आता है अब मेरी घरवाली मेरे
- 13:31सामने बैठ के। मेरा घरवाला मेरे सामने बैठ के
- 13:35पिता और छोड़ता ही नहीं छोड़ यहाँ भी संकल्प चाहिए दृढ़ संकल्प
- 13:45चाहिए एक बार मज़ा उठा लो नहीं रोकता है कोई।
- 13:52यह प्रिय संसार भी इसीलिए मैंने बनाया इतना मीठा, इतना सुगंधित,
- 14:07इतना आनंद देने वाला, खुशबू से युक्त।
- 14:13मेरी रचना भी बा कमाल इससे घृणा मत कर ना तो ये माया है, ना ये
- 14:30झूठ है ना ये पाखंड है। ये बिल्कुल सत्य है इसलिए मैंने
- 14:37शंकराचार्य की बात को बिल्कुल काटा।
- 14:41ब्रह्म सत्यम जगत सत्यम ब्रह्ममित्या जगत बिल्कुल सत्य
- 14:50है। टक्कर मार के देखो।
- 14:55दीवार में लहू लोहान तो माया कैसे हुए ब्रह्म सत्यम जगत मिथ्या और
- 15:07सही शंकराचार्य कवाडा। उसने जड़ और चेतन में भेद उत्पन्न
- 15:16कर दिया। जबकि जड़ और चेतन एक ही रास्ते के
- 15:20पत्थर हैं। जड़ से चेतना शुरू होती है और परम
- 15:25चेतना प्रजा कर वो तब्दील होकर। मानव के इजामे में परिपूर्ण हो
- 15:32जाती है। बस यही तो सफर है और अगर तुम
- 15:37कहोगे ब्रह्म सत्यम जगत मिथ्या तो फिर तुमने द्वैत खड़ा कर दिया और
- 15:42द्वैत की कितनी ही बातें करता हूँ?
- 15:50तो कितना जो तर्क देते हो, जो उदाहरण देते हो, वो द्वैत खड़ा
- 16:01करते हैं, ब्रह्म को सत्य बताते हो, जगत को मिथ्या बताते हो, जबकि
- 16:06जगत बिल्कुल सत्य। रुको छोड़ो, शंकर आचार्यों को ये
- 16:14मोड़ हैं अव्वल दर्जे के अंदर मैं कहता हूँ ब्रह्म सत्य है और
- 16:20ब्रह्म तक जाने के लिए माया भी सत्य है, जगत भी सत्य है।
- 16:27जगत में संभोग है। एक ऐसी दूर भी जो की हर्बल जेम्स
- 16:34वेव टेलीस्कोप की तरह काम करती है।
- 16:37जैसे दूर से हम आकाश गंगाओं को देख लेते हैं, दूसरे भ्रमणों की
- 16:44तरफ निगाहें जाती है हमारी। वैसे ही संभोग सेंसर के उस वेला
- 16:51में हमें वो बिलकुल साफ साफ नजर आता है।
- 17:01काश तुम ने इसके आदी न होकर। इसकी लत न डालकर तुमने कोई सबक
- 17:14लिया होता है फिर तुम नास्तिक न रहते।
- 17:20तुम कैसे समझते हो? मार्क्स में कभी संभव का आनंद
- 17:23नहीं होता, बिल्कुल। लेकिन बात तो ऐसी है कि ऐसी
- 17:30बुद्धियां बुद्धुओं से भी कम होती हैं।
- 17:39कितनी ही फिलॉसोफिकल ज्ञान दे दिया, लेकिन बात तो बतवारी की रही
- 17:44ना? उनका उद्देश्य कहाँ पूर्ण हुआ है?
- 17:51कहाँ बटा दो परमात्मा का दिया था तो शांत दो बातें कहते हैं या तो
- 17:58बाँट को खालो बनाने के लिए कहा। बंड छको?
- 18:05अगर नहीं कोई ऐसा आ गया है डिक्टेटर तो हमारे सर पे बैठ गया
- 18:09है हिंदुस्तान करीब 1000 वर्ष तक तो क्या उस वेला में संत नहीं
- 18:20हुए? गुरु नानक हुए, कबीर हुए, दाद हुए
- 18:27मेरा हूँ। उस काल बेला में उस कालखंड में
- 18:33क्या शांत नहीं हुए? हम बाहर से तो बोला था बिलकुल थे,
- 18:41क्योंकि ये बेड़िया बाहर की नहीं, जो दिख जाए ये बेड़िया तो भीतर की
- 18:47है। जैसे प्रेम के धागे बड़े महीन
- 18:49होते हैं ऐसे ही ये बेड़ियां भी बड़ी महीन हैं, तुम्हें देखती हैं
- 19:01बाहर से कितने भी गुलाम हो ये डिक्टेटर की तरफ भी डिक्टेटर बन
- 19:10जाएं। तो मैं अपने भीतर से नहीं रोक
- 19:14सकूँ तुम्हें बाहर घूमने से रोक देंगे।
- 19:19बिल्कुल ठीक है, मैं बाहर जाता ही सच पूछूं तो बाहर जाने की जरूरत
- 19:27भी क्या है? ना घर से बाहर जाने की जरूरत, ना
- 19:32कमरे से बाहर जाने की जरूरत। अपने बेहतर ही तो मस्ती का आनंद
- 19:42है वो ऐसा वृहद समुद्र आनंद का जीसको पीकर तुम प्रथम बार निहाल
- 19:52हो। संसद का प्रथम दर्शन तुम्हें
- 19:59बताता है, राहतें और भी हैं, फसल की राहत के सिवा जिसे तुम राहत
- 20:09समझते हो। सिर्फ यही राहत नहीं है, इसके इतर
- 20:15भी बहुत सी राहते हैं। संत तुम्हें ही समझाता है, बाहर
- 20:22से गुलाम हो, कोई बात नहीं तुम भीतर डुबकी लगा लो।
- 20:26तुम्हें कौन रोकता है? रात को सोते हो तो भीतर ही डूब के
- 20:31लगाते हो कौन रोकता है? कोई रोक ही नहीं सकता।
- 20:37तुम्हारा अंत है जब ज़रा गर्दन झुकाए देख ले दिल के आईने में
- 20:45अच्छी तस्वीरें यार। तुम्हें कोई नहीं रोकता तुम्हारे
- 20:51सुबह तुम्हारी क्लिंगन नेसेस तुम्हारी चिपकाहटें ही याद रखना
- 20:59हाँ तुम्हारी चिपकाहटें तुम्हारी क्लिंगन नेसेस।
- 21:06ही तुम्हें रोकती हैं ही तुम्हारी बाधाएं ही तुम्हारे पहुंचने में
- 21:11पत्थर है। अगर तुम पहुँच नहीं रहे तो एक बात
- 21:15पक्की है कि तुम्हारा जुड़ाव कहीं ना कहीं है, अब भी कहीं भी हो।
- 21:29तो बजाएं अपना समय मंत्रों को जपने में खराब करो, बजाएं जाप और
- 21:39सुमरन को दोहराने में पुनरुक्ति करने में रेपुटेशन करने में खराब
- 21:43करो, अपने भीतर उतर जाओ, उस वक्त का लाभ सर्च करो।
- 21:55क्या है बंधन, क्या है चिपकाहट किस चिपकाहट ने मुझे भीतर जाने से
- 22:04रोक लिया और मैं तुम्हें कहता हूँ।
- 22:07बिल्कुल पक्की चबका हटवाती रह गई बहुत से लोग मेरे पास एक मेरे ही
- 22:22शिष्य का केस आया। बड़ी साधना करता न रोयेगा।
- 22:33उसकी बातों से लगता कि बस वह तो पहुंचा पहुंचा है।
- 22:41उसने जो लक्षण बताए तो हैरानी होती कि यह व्यक्ति अटका क्यों
- 22:50है? फिर खोज बानू शुरू तुम्हारे
- 22:59इनवेंटर इन्वेंटर देने वाले लोग तो है नहीं रेपुटेशन करने वाले
- 23:04लोग, वो चाहे पांच नाम जापूँ चाहे राधे राधे।
- 23:14चाहे सत्य साहब जब वो नए नए नाम तुम रिसर्च करते हो लेकिन उसको
- 23:20रिसर्च नहीं करते जीसको रिसर्च करने के बाद सब रिसर्च समाप्त हो
- 23:28जाती है। इन्वेंशन समाप्त हो जाती हैं।
- 23:33प्रयास ही बंद हो जाते हैं। उसको सच नहीं कर सकते।
- 23:50मैंने कहा कोई बात नहीं बटे मैं कोशिश करूँगा कोशिश क्या थी?
- 24:02सब ठीक था, कोई कर्ज ना था, कोई फर्ज ना था, कोई मर्ज ना था।
- 24:13एक छोटी सी चिपकाहट जो उसको पहुंचने में बाधा बनती है और सोच
- 24:19भी नहीं सकते हम कि यह छोटी सी चिपकाहट इसको उस परम दरबार तक
- 24:26जाने से रोकेगी। हाँ, बिल्कुल रोकेगी।
- 24:35वो उस स्थान पर आ गया था जहाँ से कभी भी उसकी चिब्का हाथ टूट जाए।
- 24:46जैसे आपने देखा किसी का दांत हिल जाता है फिर भी चुपका रहता है।
- 24:53और कभी किसी आलम में ऐसा वेला आता कि उस दांत को थोड़ा सा कुछ कर लो
- 24:59और बाहर आ जाते, कोई लघु नहीं निकलता, कोई कुछ नहीं होता, बस
- 25:06ऐसी ही उसकी चपका। उसको अपनी मात्र से बड़ा और उसकी
- 25:23माता मरणशैया पे पड़ी उससे कह गई थी पुत्र शादी कर लेना।
- 25:34अब जो बातें समझ में नहीं आई जब मैंने उसको थोड़ा सा हाइपनोसिस
- 25:39में ले के गया, इसी जन्म की बात थी हाइपनोसिस में दूसरा व्यक्ति
- 25:47इसी जन्म में ले जा सकता है, पिछले जन्म में नहीं ले जा सकता,
- 25:52पिछले जन्म में तो तुम ही जाओगे। उस दीवाल को बहुत मोटी दीवाल
- 25:57फौलाद जैसी, उसको तुम ही तोड़ोगे। अगर तुम्हें कोई व्यक्ति कहे की
- 26:06मैं के द्वारा तुम्हें पिछले जन्मों में ले जाऊंगा तो वह झूठ
- 26:12बोलती है। हिप्नोसिस में इसी मन के गहरे
- 26:19तलों को छूआ जा सकता है। इसी मन के इसी जन्म के लेकिन
- 26:27पिछले जन्मों के तलों को नहीं छूआ जा सकता है।
- 26:32क्योंकि उसके बीच में एक फौलादी दीवार पर मत में रख रही है।
- 26:37वो इसलिए रख रही है कि सीक्रेट बना रहे उसकी चाबी तुम्हारे हाथों
- 26:42में यानी यू कैन ओपन ओनली ओनली यू कैन ओपन तुम चाहो तो जा सकते हो।
- 26:52और कोई चाहे तो नहीं जा सकता, लेकिन आज आज ऐसे लोग हैं जो कहते
- 27:03हैं पिछले जन्म थे। पिछले जन्मों में जाना इतना आसान
- 27:09होता है और पिछले जन्मा में जाकर जो लक्षण सामने आते हैं।
- 27:14सबसे पहला लक्षण आएगा कि तुम मृत्यु से डरना छोड़ दोगे, तुम
- 27:19साहसी हो जाओगे। जयपुर में ऐसा ही कांड डूबा।
- 27:24मैं जयपुर जाया करता था तेरे जवरात लेने के लिए वहाँ पर।
- 27:31एक होटल पक्का सा, मैं रुका करता था अब तो पता नहीं है कि एन
- 27:36इवनिंग इन वह करीब अंग्रेज लोग ही रहते थे थोड़ा महंगा था, लेकिन
- 27:45मुझे अच्छा लगता था मैं। जयपुर में एक व्यक्ति को मेरे पास
- 27:54लाएगा। वहाँ मेरे बहुत से प्रेमी हैं।
- 27:58भाई देखो ये पहुँच गया है, ये पिछले जनम में चला जाता है।
- 28:06कई जन्मों में पिछले जन्मों में चला जाता है।
- 28:08इसने बहुत सी बातें भी बताईं मैंने इकट्ठे कोई बात नहीं तुम कल
- 28:15आ जाना भाई आज मेरे बाजार का वक्त हो गया है 11:00 बजे बाजार खुल
- 28:21जाता है अभी मैंने पहुंचा दिया। फिर मुझे मेरी मनपसंद की चीज़
- 28:29नहीं मिलेंगे इसलिए तुम कल आ जाना आते आते एक खिलौना रिवर ले आया जो
- 28:35देखने में बिल्कुल असली लगता था। रिवर ले आया था वो बच्चे।
- 28:47देखने में बिल्कुल ओरिजिनल लगता था।
- 28:520.09 शाम को घर आया वो लोग मेरे पास
- 29:11आए। बाबा, ज़रा पहचान करके बताओ हम
- 29:18इसे ही सूंघ लिया करेंगे। बात शेरी बड़ी गदर की है, बात
- 29:25नहीं, बड़ी बड़ी, बढ़िया बढ़िया करता है।
- 29:31मैंने कहा हाँ लगता तो है। मुख्य मंडल से शांति भी है।
- 29:41तो मैंने बातों बातों में उसकी छाती पर पिस्तौल तान दिया था तो
- 29:47वो बच्चों का टॉय खिलौना पिस्तौल का जब छाती पर का थर थर का।
- 29:59कोई आरएसएस का पुजारी होगा। कच्ची डाल रखी थी, दोनों तरफ से
- 30:02गिर गया। मुझे लोग पूछ लेते हैं बाबा
- 30:14इन्होंने ऐसी ड्रेस क्यों रखी है आरएसएस वालों ने?
- 30:20मैंने कहा एक फायदा सबसे बड़ा फायदा तो बहुत है, अगर नहीं लग
- 30:23जाऊंगा तो सुबह हो जाएगा। लेकिन एक सबसे बड़ा फायदा है कि
- 30:30ये अड़ना नहीं जानते। ये चरण चुम्बक हैं, भाग नहीं
- 30:34जानते और ये आदि। हाफ पेंट भागने में बड़ी सहायता
- 30:41करती है। पूरी पेंट का पहुंचा नहीं अड़ता
- 30:44भागने में एक तो सबसे बड़ा फायदा यह है भागने में दक्ष हैं और
- 30:51भागने को तैयार रहते हैं। लक्षण है लक्षण अगर ओके कहें, मैं
- 31:02पिछले जन्म में चला गया एक है कोई कोर कोर है नाम नहीं भूल जाता हूँ
- 31:06मैं किस किस का नाम जा सकूँ। कहाँ तक नाम?
- 31:15िनवाएं सभी ने हमको लूटा है? इस दुनिया को ये समित दें कि हमने
- 31:28लूट लिया। लेकिन इन विचारों को पता नहीं ये
- 31:34खुद ही लूट पुट गए हैं। जीस वक्त में इन्होंने गुमराह
- 31:38करके कुछ सिक्के इकट्ठे किए। डालरों की चमक तो आई इनके पास महा
- 31:47आनंद कारस इन्होंने खोदी। इसलिए मैं संदेश देता हूँ तुम
- 31:55प्राइम मिनिस्टर हो, चीफ मिनिस्टर हो, एमएलए हो, एमपी हो, आईआईएस
- 32:00हो, आईआईपीएस हो हो किसी भी पदवी पर बैठे हो, मैं तुम्हें कहता हूँ
- 32:06सिक्के तो तुमको मारो। सिक्के तो सिकंदर ने बहुत ही कठिन
- 32:10किए थे लेकिन आखिर में उसने ये आदेश दिया था।
- 32:18उसे मान था कि मेरे वैद्य मुझे बचा लेंगे, लुकमान मुझे बचा लेगा,
- 32:24लेकिन लुकमान बचा नहीं सका। जर सिकंदर का यहीं पर रह गया जर
- 32:42सिकंदर का यहीं पर रह गया, मरते दम लुकमानविजे रह गया क्या?
- 33:00ये घड़ी, ये घड़ी। ये घड़ी हरगिज नताली जाएगी जब
- 33:17तेरे धोली निकाली। जाएगी।
- 33:25बे मोहूरत? के।
- 33:29उठा ली जाएगी। जब तेरी जब तेरी डोली निकाली
- 33:39जाएगी बे मोहूरत के उठा ली जाएगी। तुम झूठ बोलकर लोगों को गलत
- 33:47रास्ता दिखलाकर कुछ डॉलर तो कमा सकते हो, लेकिन याद रखना फिर मरता
- 33:54हुआ सिकंदर कहता है मेरे वो वैद जिनका दावा था।
- 34:02कि हम तुम्हें मरने नहीं देंगे, वो मेरी अर्थी को मेरे जनाजे को
- 34:07कंधा देंगे और जो मैंने लूटपाट करके गर्दनों को जड़ से अलग करके
- 34:15खून बहाया। जो संपत्ति लूटी सोना।
- 34:21चांदी गिरे जोहारा और मेरी अर्थी के जनाजे के ऊपर से वार देना सब
- 34:29बकवास है, लेकिन क्या करें, वेला भी चुका था?
- 34:41वो दिन गए जब तुम सच्चे हीरे मोती कमा सकते थे ओह जीवन गया तुम लूट
- 34:54गए तुम पिट गए, अब लाचार हो। अब तो चार भाई ही तुम्हें उठाएंगे
- 35:05और आग लगाएं या धरती में दबाये उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 35:12तुमने एक मौका फिर खो दिया तो मैं कहता हूँ।
- 35:20तसल्ली के लिए देख लेना की ऐसा कुछ होता है और संसद के उन क्षणों
- 35:27में पता चलता है कि वह आनंद है और आनंद की हित में पुकार है।
- 35:32भीतर से आनंद की हित में जरूरत है।
- 35:35भीतर से भीतर का मन मांगता है वही आनंद।
- 35:45और संसार की सबसे प्यारी घटना अगर कोई है तो वह संसर्ग है।
- 35:53इससे प्यारी घटना और कोई है नहीं। यह एक मात्र अकेली घटना है जो
- 36:01तुम्हें उस मन के पार। जिसकी मैं बात करता था।
- 36:05मन्ने का दृश्य दिखाती है, पहुंचाती है पहुंचोगे तो तुम अपना
- 36:14सर्वस्व कर बांध करके जो घर बार अपने चले हमारे साथ ये तो।
- 36:24प्रेम मिलनों की चा प्रेम मिलनों की चा।
- 36:42शीश तली दर, शीश तली धर, शीश तली दर।
- 37:21जेतों प्रेम मिलन की चाल। संभोग से देखो, वह है।
- 37:37शराब के नशे से देखो वह मन से पार कुछ चीज़ तुम्हें ले जाते हैं,
- 37:47लेकिन बात सुनो इसके आंधी हाथों में ये समझाना था मेरा किसी से
- 37:54था। उसी के पास चला जा।
- 38:02मैंने कहा अभी क्या सीक किया है? कहते ली ब्रज सेक्स मैंने कहा
- 38:09ऑथेंटिक सेक्स प्रमाणिक सेक्स। उसने मुझे सारी बातें बताई अगर
- 38:22मैं बताऊँगा समाज बुरा मान जाएगा, थोड़ा समाज का ख्याल रखना चाहिए
- 38:33जैसे कृष्ण ने रखा। जो व्यक्ति वहाँ पहुँच गया वह
- 38:44विराट हो गया। उसकी रगिबरात होगी और देखिए अगर
- 38:52उस बैराट तक पहुंचने के लिए। ओशोवेलियम फाइव वेलियम 10 का
- 38:57इस्तेमाल करते हैं तो ये शर्म की बात है।
- 39:0190 गोलियां, 90 गोलियां वेलियम की खा जाना तो भाई तुम्हारी नर्व तो
- 39:10ब्रॉड होंगी ही होंगी। क्योंकि केमिकल फॉर्मरेशन यही है
- 39:17कि नर्व्ज़ को चौड़ा करती हैं, यही तो भंग करती है।
- 39:23इसका केमिकल इफेक्ट क्या है? तुम्हारी नर्व्ज़ को ये थोड़ा सा।
- 39:31फ्लेक्सिबल कर देती हैं चौड़ा कर देती हैं और तुम विराट हो जाते हो
- 39:37कल्पना में थोड़ी देर के लिए क्या खाद से खाया ये तो एलएसडी भी कर
- 39:44देती है, ये तो बैंक भी कर देती है।
- 39:49फिर तुमने क्या सिखाया? उसने मुझे बताया नाम क्या लूँ?
- 39:56मर गया आपका बेचा कहता मैं तो 5 दिन तक यहाँ के लोग भूखे जाते हैं
- 40:05सेक्स के बुक जैसे जिंदगी में कभी कुछ।
- 40:09भोगना कैसे मरे? मरे जग मैं अगला जाया करता था।
- 40:16मेरे साथ एक व्यक्ति पेठा लेने जाया करता था।
- 40:19हलवाई नाम नहीं लूँगा नाम लेना जैसे गुनाह हो गया, रास्ते में
- 40:28वैश्य बजा रहा था। तो वैश्य का धंधा ही नहा धोखे शाम
- 40:34का वक्त हम पहुंचते उस बाजार के बीच में से शूज मार्केट में जाना
- 40:39पड़ता। उस मार्केट में वैश्य खड़ी है,
- 40:43बाल किनारे और ग्राहकों को देख कर नखरे बाजी करते हैं।
- 40:48बाल ऐसे ही करती हैं। ऐसे ही करती हैं लिपस्टिक सुर्खी
- 40:51बिंदी पता है यह लाली फेस काउ करती है यह है लाली मेकअप है मुझे
- 41:05कहता भैया मुझे पता था क्या कहे मैंने कहा।
- 41:11कहता मैं थोड़ा सा डूबा हूँ, उसे पता था, मैंने कहा डूबाओ मैंने कब
- 41:19इंकार किया, मैं भी पूछते चुपचाप चले जाते तो मैं अकेला ही भला
- 41:26अकेले ही आए हैं भाई और अकेले ही जाएंगे।
- 41:34दो व्यक्ति इकट्ठे मर जाए, इकट्ठे स्वच्छ केंद्र नहीं जा सकते जैसे
- 41:41आजकल के गुरु दावा करते हैं, मरते वक्त होऊंगा तुम्हारी अंगुली
- 41:46पकडूंगा। और साथ चला जाऊंगा।
- 41:50इन मूर्खों को पता नहीं के भीतर आना मना है दो व्यक्ति का एक साथ
- 42:02वहाँ लिखा हुआ है, जब गए ही नहीं पता क्या हुआ सचखंड के दरवाजे पे
- 42:07लिखा है टू अरे नॉट अलाउड। यह किस्म दो व्यक्ति नहीं आ सकते
- 42:12हैं, चाहे गुरु शिष्य क्यों ना हो, अब क्या करें जिसने देखा नहीं
- 42:21ताजमहल वो तो भरमा लिया जाएगा ना? और जो गुरु आखिर तक तुम्हारा पीछा
- 42:29नहीं छोड़ता, तुम अकेले कब हुए? तुमने अकेले का रस कहा?
- 42:34माना अकेले का ही तो रस मानना था, इसलिए मैं यहाँ से भगा देता हूँ।
- 42:40अरे जाओ भाई घर बार है, तुम्हारा सब कुछ है, अकेले में बैठ के रस
- 42:45को पियो। अकेलापन का नशा, अकेलेपन का रस,
- 42:51अकेलेपन का आनंद, वो खुशबू कुछ अलग ही है और अकेले में ही मिलती
- 43:02है और अगर सच खंड तक भी गुरु साथ न छोड़े।
- 43:08ये कोई गुरु थोड़ी ही हुआ है ये तो दुश्मन हो गया तुम प्रेम भी
- 43:17करते हो तो अकेला बन जाता, ये मुक्ति के लिए भी तुम्हारे संग
- 43:26फिर यही बाधा बन गया। जब दो हुए अद्वैत कहाँ रहा भाई?
- 43:35द्वैत तो हो गया, यह है, साथ जायेगा और जायेगा अद्वैत में
- 43:42जायेगा, फिर तो यही द्वैत हो गया, यही दूसरा हो गया।
- 43:47लेकिन इतना समझे गुण इतनी सूक्ष्म बुद्धि होती किसके पास?
- 43:55मैं जब भी जाता, अकेले जाता शेयर करने।
- 43:58मैंने 4050 साल तक शेयर की गौशाला।
- 44:01अकेला जाता पकड़मियों पे कोई व्यक्ति कैसा बाबा तुम्हारे साथ
- 44:05चलूँगा। मैंने कहा खबरदार मैं भी यहीं बैठ
- 44:07जाता हूँ। अरे जब मुझे अकेले चलने का आनंद
- 44:12ही नहीं आया, तुम बतियाते जाओगे। क्या तुम्हारा मन बोल रहा है?
- 44:18हर वक्त वो बोल रहा है। और मैं शांति को सागर में डूबा रस
- 44:26को अकेले में पीना चाहता हूँ। मुझे मेरे हाथ में छोड़ दो,
- 44:36अकेलापन का रस कुछ और है। अकेलापन में वैराग्य का जन्म होता
- 44:42है। तुम लाख कोशिश कर लो, संसार में
- 44:51वैराग्य नहीं हो पाए, वैराग्य कहता है अकेलापन में।
- 45:02नर मधुमक्खी अपना सब कुछ बर्बाद कर देती है, तुम भी बर्बाद कर
- 45:07देते हो, लेकिन अवशनाई नहीं मिलती है काश।
- 45:26रौशनी हो न सकी, दिल भी जला या मैंने रौशनी हो न सकी।
- 45:43दिल भी जला न मैंने तुमको भुला ही नहीं लाक भुला न मैंने मैं
- 46:00परेशान। मुझे और परेशान न करो आवाज़ न दो
- 46:18मुझको इस रात। की।
- 46:21तन्हाई में आवाज न दो आवाज न दो आवाज न दो।
- 46:38तुम्हें चाहिए रौशनी। आनंद की शहद की मिठास की खुमारी
- 46:44की रौशनी और तुम दिल भी जला देते हो, स्वयं को ही आहूत कर देते हो।
- 47:00रौशनी हो न सकी दिल भी जलाया मैं। कुछ भी जलाते हो घर जला दो डैल
- 47:14जला दो शरीर जला दो ये तुम्हारा, है ना?
- 47:21तुमको भुला ही नहीं आँख भुलाया। मैं तुम्हारे भीतर जो सामान कहते
- 47:34है वो लगातार बोलता रहता है। वह तुम्हें आवाज देता रहता है कि
- 47:43आ जाओ मेरे पास और तुम उसकी आवाज की दिशा नहीं पहचान सकते।
- 47:49बस यही आवाज तुम्हें तंग करती है कि आ जाओ हमारे विवाहों में।
- 47:59हम आस लगाई पेट। तुमको भुला ही नहीं लाक भुला आया
- 48:11मैंने? मैं परेशान मैं परेशान हूँ मुझे
- 48:23और परेशान न करो, आवाज न दो। आवाज़ न दो मुझको इस रात की
- 48:45तन्हाई में आवाज़ न दो। आ आ लेकिन वो।
- 49:01आवाज देता ही चला जाता है पेहो पेहो पेहो।
- 49:12मैं ऐसी शराब की सदा बोलती है तुम्हारे भीतर के पियो, मेरे पास
- 49:19आ जाओ, तुम कहते हो कि परेशान करते हो, मैं पहले से ही परेशान
- 49:26हूँ, मुझे गद्दी चाहिए प्रमिस्क। मुझे धन के अम्बार चाहिए, मैं
- 49:32बड़ा सेठ बनना चाहता हूँ, मुझे मान सम्मान चाहिए, मुझे बड़ी
- 49:38डेयरी चाहिए, मैं सर बनना चाहता हूँ, मैं आचार्य बनना चाहता हूँ,
- 49:45ये सब बाधाएं हैं तुम्हारे। जो पुकारना है उस तक पहुंचने में
- 49:53मैं परेशान हूँ। मुझे और परेशान ना करो।
- 50:06लेकिन वह भी क्या? करे।
- 50:17जिनके आनंद न तो शुरू हो गया, जिनके नहीं हुआ उनको तो तीन ईटर्स
- 50:21की बिमारी है। मगर बंध भी करना चाहें तो कर
- 50:29पाओगे यह अनंथनाथ की मिठास यह प्यार फराह संगीत यह खास यह
- 50:41मदहोशी में डुबोने वाला राख। तुम बंद कर पाओगे चाहते हो?
- 50:48वह बोले ही चला जाता है, आ जाओ और आवाज तुम तक पहुंचती है, लेकिन
- 51:01तुम दबा देते हो। तुम राजनैतिज्ञों की तरह अपने
- 51:05ध्यान को किसी और तरफ बाट देते हो, ये देखो हमने एम जो बना तो
- 51:12दिया तुम लाख रोजगार मांगो, इनसे पेट भूखा है तुम कहो भोजन दे दो
- 51:21ये कही नहीं। जब 100 वर्ष पूरे हो जाएंगे 2047
- 51:27हो जाएंगे भूख अब लगी है भाई मैं परेशान मुझे और परेशान करो आवाज़
- 51:39ना तो। भीतर का वो तत्व तुम्हें पकारता
- 51:42रहता है, आ जाओ, थोड़ा सा रुके जाना है, मैं क्यों कहता हूँ रुक
- 51:54जाओ रुकोगे तो उसकी आवाज सुनाई पड़ेगी रात को नींद क्यों नहीं
- 52:05आती? मौत का 1 दिन में असर है।
- 52:14नींद फिर हमको क्यों नहीं आती? दिन में तो नहीं पता चलता, यह दिन
- 52:20तो किसी तरह भी चलता है। यह रात क्यों आ जाती है?
- 52:29रात को तुम ठहरते हो थोड़ा थोड़ा छटपटाहट मच जाती है।
- 52:37उस रात के सन्नाटे में उसकी आवाज़ साफ सुनाई पड़ती है।
- 52:46वहीं तुम्हें परेशान करते हैं। तुम कहते हो न परेशान करो, मैं
- 52:52परेशान हूँ जीसको इस रात की तनहाई में आवाज़ न दो, लेकिन वो है।
- 53:01के आवाज देता ही रहता है और तुम सोते हो तब जब तुम उसके ऊपर छोड़
- 53:06देते हो कि ठीक आ गई, तेरे पास तो तुम्हें आगोश में ले लेता है, उसे
- 53:14ही तुम नींद कहते हो, जब तक नहीं छोड़ते।
- 53:22किसी फैक्टरी में कोई मजदूर हड़ताल न करें।
- 53:27हमारी कैबिनेट का कोई मिनिस्टर भाग न जाए।
- 53:32कोई 2 घंटे कम न हो जाए, कोई बैसाखियों का सहारा न छोड़ दे।
- 53:39सच बताना मुझे क्या इन लोगों की ज़िन्दगी होती है ये ज़िन्दगी है
- 53:54इनको चैन नहीं, रात को नींद नहीं ये भी ज़िन्दगी है।
- 54:05लेकिन तुम मरे जाते हो हमें तो यही जिंदगी चाहिए।
- 54:12ठीक है भाई कौन रोकता है? कौन किसी को रोक पाया?
- 54:20तुम नकली रौशनी बनाने की चेष्टा करते हो।
- 54:24राम राम जपलो राते राते जपलो वह रौशना ही तुम्हें आवाज देती है और
- 54:32तुम घबरा जाते हो। तुम कहते हो नहीं मुझे आवाज़ ना
- 54:37दो मेरी तंदरा भंग होती है। मेरे पास इतने घर, इतने मकान,
- 54:43इतनी कोठी कारें, इतने महल, बंगले इतना बैंक बैलेंस इतनी जमीन है,
- 54:50आज ही एक व्यक्ति का फ़ोन आया मेरे बेटे ने बताया किसने काला
- 54:58जादू कर दिया है मेरे? तो मेरा पुत्र मुझे पूछने लगा
- 55:07मुझे फ़ोन आया पापा बाबा से बोलो मुझे ठीक कर दे, जितनी जमीन
- 55:15चाहिए, मैंने कहा मुझे कोई जमीन नहीं चाहिए।
- 55:28दो गज जमीन च और नसीब हो ही जाएगी, जमीन चाहिए सिर्फ तुम्हारे
- 55:43बैठने के लिए। ये भी तुमने बना दिया क्योंकि
- 55:50मेरे पास जगह थोड़ी वहाँ तुम्हारे बैठने का इंतजाम है।
- 55:55कहाँ बैठते कहाँ खाते कहाँ सुनते कहाँ प्रश्न पूछते इसलिए ये भी
- 56:03तुमने बना दिया मैंने नहीं? और देखो संतों के पास ऐसा व्यापार
- 56:13नहीं चल रहा है, मैं व्यापारी हूँ, मैं वो व्यापारी नहीं हूँ जो
- 56:23चादर पहन के आ जाऊं। और तुम्हें छात्रा खोल खोल के कि
- 56:28ये देखो ये सारे रोम खुले पड़े हैं, ये सांस लेते हैं, ऑक्सीजन
- 56:33भीतर जाता है और तुम जीन्स मत डाला करो और मैं सारे हिंदुस्तान
- 56:40को शहीदी आजम, भगत सिंह जैसा बना दूंगा।
- 56:44जी याद है वो बात आज बेचारा खुद ही शहीद हो गया जीन्स की पेंटे
- 56:58बेच न ढकता अब उसकी जीन कुछ उसने ऐसी बनाई कि उससे रौम ढके नहीं
- 57:06जाता। असलियत खुल ही जाती है।
- 57:171 दिन कितने दिन तक छुपाओगे नकली चेहरा कभी छुपा है ये टोडे फोडे
- 57:30लोग। हमारे पंजाबियों में कहते रणनी
- 57:36काननी ती नी पुतनी नौलयानी नी ती तोरनी नी लंडा चिड़ा पढ़ा था सब
- 57:45थी। क्या करना है ₹14,000 रुपया और
- 57:55लोग के पट्ठे ये मेरा आशीर्वाद होता है तू लोगों को इतनी देर तक
- 58:09बेवकूफ बनाता रहा अगर जीन ही बेचनी थी।
- 58:14तो ये बहुत क्यों डाला? तो खुद ही जींद पहन के आ जाता ऐसे
- 58:21मूड लुक उनके पीछे तुम लगे हो? तुम्हारे भीतर से वो आवाज देता
- 58:35है, रस का समुद्र तुम्हें पुकारना है, हम आस लगाए बैठे हैं तुम वादा
- 58:45करके भूल गए आ जाओ हमारी बाहों में।
- 58:54लोग मुझे कह देते हैं बाबा ऐसा मत बोलो, मोदी मार देगा, मैंने कहा
- 59:03बेटा सुन अगर मोदी ने छोड़ दिया। तो क्या मौत भी छोड़ देंगे?
- 59:12वह तो ले ही जाएगी, वह तो ले ही जाएगी, वह तो मोदी को भी ले
- 59:20जाएगी। मुझे तो ले के जाना ही बस मुझे
- 59:25पता है। दो चार पल का मेहमान बुझता हुआ
- 59:33दिया। फफक के फफक के बूझ जाऊंगा 1 दिन
- 59:41बस उसे मालूम नहीं। ऐसे है कि मैं श्रद्धा जीता मैं
- 59:50अमर इसलिए तो लोग नॉन बायोलॉजिकल होने का नाटक रखते हैं।
- 59:56भला नॉन बायोलॉजिकल को हुआ धरती पे इतने अवतार हुए उनके भी माँ
- 1:00:01बाप हुए राम के नहीं हुए, कृष्ण के नहीं हुए।
- 1:00:06परशुराम के नहीं हुए जमदग्नि और रेणुका राम के दर्शित और कुशल
- 1:00:15कृष्ण के वासुदेव और देव के ये नॉनवा लॉजिकल थे अवतार बंदे की
- 1:00:21ज्येष्ठ। अरे मोदी ने ना मारा तो मौत तो
- 1:00:31मार ही देगी ना ये वो भी छोड़ देगी और साथ खूंजा मैं बैठ जाऊ ना
- 1:00:38भीतर। दरवाजों के भीतर बैठ जाऊं कितना
- 1:00:45ही इंतेजामत कर लूँ, उससे नहीं बचा जा सकता क्योंकि उसके लिए
- 1:00:51दीवारें बाधा नहीं है। वह दीवारों में भी आ जाती, डरो
- 1:01:00मत। आज दुनिया को जरूरत है एक ईमानदार
- 1:01:06इंसान की न के झूठे इंसान की एक झूठे, परम झूठे व्यक्ति को आपने
- 1:01:12चरम गलती सौंप दी। बस गलती खा गए, गलती को दोहरा
- 1:01:18हुआ। गलती को रिकवर करो, ठीक करो, एरर
- 1:01:23को ठीक करो, कहाँ गलती हो गई वुमन्स टु एरर्स मनुष्य गलती का
- 1:01:28पुतला है, ठीक है, हो गया अब सुधार कर एक ईमानदार व्यक्ति की
- 1:01:35जरूरत है। वो किसी भी पार्टी से हो।
- 1:01:44कुछ ईमानदार लोगों ने चाइना को 18 टिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बना
- 1:01:51दिया। कुछ ईमानदार लोगों ने अमेरिका को
- 1:01:56कुछ नहीं बड़ी अर्थव्यवस्था बना दी।
- 1:02:00द्वितीय विश्व युद्ध में कुछ ईमानदार लोगों ने समृद्ध देशों की
- 1:02:10नींव रख दी है और कुछ बेईमान लोगों ने जो देश समृद्ध हो गया
- 1:02:17था। कोरे लफाफी नारे के रूप में देकर
- 1:02:23समय कंगाल कर दिया अमेरिका का राष्ट्रपति डी रोजवेल्ट फ्रेंकलिन
- 1:02:31डी रोजवेल्ट प्रथम द्वितीय विश्व युद्ध के समय।
- 1:02:38वह अमेरिका का पेल था। मैं वाहिज था, सदा व्हीलचेयर पे
- 1:02:43रहता था उसको पोलियो हो गया था मैं तुमसे कहूँ कि अगर वो न मरता।
- 1:02:56तो जापान के ऊपर बम नहीं या तो डी रूजवेल्ट मरा उसके बाद ट्रू मैन
- 1:03:06ने हिरोशिमा नगासाकी के ऊपर बम कराने का आदेश दिया।
- 1:03:13लेकिन मैं पक्का यकीन से कहता हूँ अगर फ्रेंकलिन डील इस वेट न मरते
- 1:03:24तो वो कभी भी जापान के ऊपर अनुपम कराने का निर्देश न दे।
- 1:03:31वह मात्र डराते। लाखों लोगों को मारते हैं।
- 1:03:41ऐसे शानदार राष्ट्रपति अमेरिका के इतिहास में बहुत कम है।
- 1:03:51कुछ लोग बना जाते हैं भविष्य तुंग ने चाइना को बना दिया।
- 1:04:03शर्म नहीं बोलेंगे। चार बार के राष्ट्रपति बनने वाले
- 1:04:10एक मात्र व्यक्ति थे फ्रेंकलिन डी रोजवेट।
- 1:04:19और उसके मरने के बाद सब जाया अमेरिकनों को ये तो काम गलत है।
- 1:04:26कोई भी व्यक्ति चेप भी लग सकता है और कह सकता है ईदी अमीन की तरह आई
- 1:04:37ऍम प्रेसिडेंट फॉरेवर। क्या बिगड़ता है सब कुछ?
- 1:04:41उसके हाथ में कह दी आई दी अमीन ने ये तो जनता ने उठ दिया ये भूल
- 1:04:47जाते हैं लोग कि जनता है जनता ने जब गले के अंदर हाथ डाल लिया तो
- 1:04:54बाखड़ा वो जाके सऊदी अरबिया के भीतर।
- 1:04:59छिप गया। लोगों ने बहुत ढूंढा लेकिन वो
- 1:05:04मिलन सऊदी अरबिया ने उसे शर्म दे दी।
- 1:05:12डी रोजवेल्ट बड़ा शानदार रस इन लोगों ने।
- 1:05:17अमेरिका की नींव रख और आज अमेरिका एक नंबर पे है और तुम्हें मैं
- 1:05:28समझा दूँ, ओके दावे तुम कितने भी दिखा दो।
- 1:05:33तुम कम से कम कम से कम 100 साल पीछे हो, अमेरिका के किसी भी
- 1:05:39मामले में अपनी आध्यात्मिकता के ऊपर इतना कमान न करो जहाँ
- 1:05:44धीरेन्द्र शास्त्री जैसे लोग। मोरू लोग बैठे हैं जिनके परले कुछ
- 1:05:59नहीं। मैंने पूछा हनुमान से हनुमान जी,
- 1:06:08आप उसकी चाकरी क्यों करते हो? रहमान जी बोले मैं तो कोई चाकरी
- 1:06:13कभी किसी की करता नहीं, मैं तो चाकरी एक की ही करता हूँ, एक
- 1:06:21अनाता राम जी से दूजा नाता छोड़ दे, मैं किसी और की चाकरी नहीं
- 1:06:26करता मैं तो फिर पर्ची को न करता। कहते हैं, नहीं, मैं पर्ची नहीं
- 1:06:30निकालता, ये तो उसकी ही कोई सर कसर है।
- 1:06:35ये बाबा के शब्द हैं तू सामने आ तो क्यों नहीं से श्याम मानव का
- 1:06:42चैन स्वीकार करता हूँ और मैंने कितनी बार चैन किया?
- 1:06:46तो 110 ग्राम की भट्टी को 10 ग्राम के सिक्के को चांदी के
- 1:06:51सिक्के को एक इंच में लाके दिखा दे और हनुमान जी ने तो फायर उठा
- 1:06:55लिया था। क्यों खत्म किए हुए हुए हुए
- 1:07:02हिंदुस्तान को और माटी में धसाना चाहते हो तुम लोग?
- 1:07:06एक है वो राजे राजे बोल रहा है अपने अपने डफली, अपना अपना राग
- 1:07:15सत्य किसी को पता नहीं एक छोटा सा प्रश्न बोल रही है आप सभी लोग जो
- 1:07:20संत हैं वो एक ही बात क्यों करते हैं?
- 1:07:23क्या आप एक दूसरे की नकल करते हैं?
- 1:07:27एक प्रश्न पूछा है प्रसीन जीतने नहीं नकल नहीं करते देखिए जब
- 1:07:34अनुभव सम होते हैं तो व्याख्याएं भी सम होती है, अल्फाज़ बदल सकते
- 1:07:40हैं, अक्षर बदल सकते हैं जैसे पानी उबलता है।
- 1:07:46गर्म पानी है उसको कबीर हाथ लगाएगा तो कबीर कहेगा गर्म नान के
- 1:07:54हाथ लगाएगा, वो भी कहेगा गर्म कृष्ण लगाएगा, वो भी कहेगा गर्म
- 1:08:00गुरज हाथ लगाएगा, वो भी कहेगा गर्म है?
- 1:08:02तो क्या ये एक दूसरे की नकल करते हैं?
- 1:08:07ओशो हाथ लगाएंगे, वो भी कहेंगे गर्म है, बहुत गर्म है, मीरा हाथ
- 1:08:11लगाएगी, वो भी कहेगी बहुत गर्म पानी।
- 1:08:16क्या ये एक दूसरे की नकल करते हैं?
- 1:08:19नहीं अनुभव समान है? अनुभव समान है और ईमानदार लोग है।
- 1:08:27अगर कोई बेमान व्यक्ति हो, प्रेमानंद जैसा राम भद्रा जा रही
- 1:08:34है। जैसा या धैर्येंद्र शास्त्री जैसे
- 1:08:38ये बेईमान लोग हैं। ये आपके काल बनकर आए हैं, ये आपको
- 1:08:46ऐसी दिशा देंगे। हिंदुस्तान पहले से ही घर का हुआ
- 1:08:49है। यह पूरी तरह धस जाएगा।
- 1:08:53पाताल में ऐसी ऐसी राह दिखाने वाले लोग हिंदुस्तान को।
- 1:09:05उबर कैसे पड़ेगा? अफसोस की बात है, हम तो मजबूर
- 1:09:18हैं, हम बाहर आने नहीं सकते हैं, लेकिन बोलते हैं फिर भी।
- 1:09:29जितना बोला जा सकता है, हम बोलते हैं लेकिन कमाल की बात है।
- 1:09:37इनको डॉलर में ही आनंद नजर आता है।
- 1:09:47बस यही मूड़ता मुझे नजर आती है। गरीबी से मरे हुए लोग जब एक बार
- 1:09:55धन दिख गया तो ऐसे हवड़ के पड़ गए।
- 1:10:00भिक्षा मांगने वाले लोगों को जब एक बार पदवी तक गई तो छोड़ने का
- 1:10:05मन नहीं करता। लेकिन देखो जनता को मैं आगाह करता
- 1:10:11हूँ हमने क्या सबने मरना है भाई हम अकेले थोड़ी मरेंगे।
- 1:10:19प्रत्येक व्यक्ति प्रत्येक शरीर मृत्यु का आहार है।
- 1:10:26कोई बचेगा नहीं। जीस दिन व्यक्ति जन्मता है, उसी
- 1:10:30दिन मृत्यु का आहार हो जाता है। वह फिर 5 साल का मले, 50 का मरे
- 1:10:35या 100 का मरे या 150 का मरे, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 1:10:401 दिन वह मरेगा। तुम डरते डरते जीते हो और मौत फिर
- 1:10:49भी आएगी तो मैं कर प्रार्थना करूँगा कि वेरा है।
- 1:10:59इस वक्त वो किसी भी पार्टी को हो, भारतीय जनता पार्टी हो।
- 1:11:06कोई भी अन्य क्षेत्रीय पार्टी हो या कांग्रेस हो या कोई भी हो, अब
- 1:11:12कोई ईमानदार नेता चुनिए, देश को इस बदहाली से उबर सके, ये लोग तो
- 1:11:18खा जाएंगे, कल ही मुझे कोई कह रहा था।
- 1:11:24कि इतनी जमीन ₹1 के हिसाब से दिल दी बिहार में क्योंकि बिहार को
- 1:11:30जीतना है भाई तू बिहार को जीत लेगा तो क्या करेगा?
- 1:11:34चक्रवर्ती सम्राट भी हो गए तो क्या करोगे?
- 1:11:39क्या सदा के लिए हो गए तुम भूल गए ना?
- 1:11:431 दिन मौत आएगी सभी तो क्यों नहीं मौत के आने से पहले जो मौत छुड़वा
- 1:11:50ले, के तुम छोड़ देते? लेकिन एक कारण है वो कारण है कि
- 1:11:56इतनी गंदगी मचाई, इन लोगों ने इतने गुनाह किए।
- 1:12:03इतनी लाशों के ऊपर पांव रखकर ऊपर यहाँ तक पहुंचे कि फाइल दूसरों के
- 1:12:08हाथ में चले जाए, इधर लटका देंगे। मारने में कोई इन्हें फिक्र नहीं
- 1:12:13होता। डर होता है मर जाने का क्यों भाई
- 1:12:17जब तुम दूसरों को मार सकते हो तो खुद मरने से क्यों डरते हो?
- 1:12:23यही तो साहस है कितना कितना गंध खिलाते हैं कभी महात्मा गाँधी को
- 1:12:32दिखाते हैं आभा और प्रभा जो उसकी बेटियां हैं पोती।
- 1:12:41कंधों का सहारा लेकिन 78 साल का व्यक्ति अगर चलता है नहीं चला
- 1:12:45जाता तो तुम्हें सेक्स से भी नजर आता है।
- 1:12:54तुम्हारे भीतर जो भरा है मवाद। जो फोड़ा है उसके जो चीरा दोगे आप
- 1:13:02तो मवाद होगा तो मवाद निकलेगा, शुद्ध खून होगा तो खून निकलेगा,
- 1:13:08आप चीरा देख देख रहे हो? इन लोगों के भीतर मवाद है, सेक्स
- 1:13:14भरा पड़ा है तो फिर अगर गाँधी को देख लेंगे।
- 1:13:20तो कहेंगे गाँधी तो नग्न औरतों के साथ सोता था, ठीक है भाई सोचा था
- 1:13:24उसने खुद ही बताया क्या मैं सोचा था तुम तो छुपाते हो और छुपाने के
- 1:13:29लिए मीडिया रखा हुआ है, वह तो खुद बताता है भाई।
- 1:13:36तुम क्या बताओगे? बात तो यह है अगर तुम राज़ को
- 1:13:39उगारो तुम वह तो खुद ही बताता है कि मैंने ऐसा किया और मैं तुम्हें
- 1:13:45बताऊँ। गाँधी तो नहीं बता के गए क्योंकि
- 1:13:47उसको मारती है, मैं बताता हूँ वह बिल्कुल कामयाब हुआ।
- 1:13:52ब्रह्मचर्य में 100% सक्सेसफुल, इन सेलेब्स ही वॉज़ ए परफेक्ट।
- 1:14:02सेलिब्रेट रौशनी हो न सखी दिल भी। जलाया मैंने तुमको भुलायी नहीं
- 1:14:21आँख भुलाया मैंने, मैं परेशान। मुझे बहुत परेशान न करो आवाज़ न
- 1:14:41दो आवाज़ न दो। मुझको इस रात की तन्हाई में आवाज़
- 1:15:03न तो आवाज न दो।