Latest / Baba ji Vijay Vats / 30 Oct 25 - मन के दृष्टा कैसे बनें? संत एक ही प्रकार के रंग को क्यों पहनते हैं? सच्ची घटना पर आधारित! Baba Ji Vijay Vats Satsang
Transcript
- 0:22प्रणाम बाबा जी यशवंत कुमार ये संत लोग एक ही प्रकार के रंग का
- 0:40इस्तेमाल क्यों करते है? अपने शिष्यों को एक ही प्रकार की
- 0:48ड्रेस पहनने को क्यों कहते हैं? प्रश्न सुंदर है, लेकिन गहरा है।
- 1:17मन भटकता है। मन रोज़ नए नए रंगों के वस्त्र
- 1:30पहनना चाहता है। नए नए डिजाइन, नए नए फैशन, नई नई
- 1:45रंग मन की इस आदत को तोड़ने के लिए।
- 1:54संत यह सब कुछ अपनाता है एक रंग इसका दूसरा अर्थ ये है बहुरंगी मत
- 2:12रहो, यकरंगी हो जाओ। संसार में तुम बहुरंगी हो जाओ और
- 2:24ब्रह्मात्मा में तुम यक रंगी हो जाते हो।
- 2:32मन चाहता है आज ये ड्रेस बदलो। यहाँ तक छोड़ो मन तो ये चाहता है
- 2:40कि घंटे पहले ये ये ड्रेस से घंटे बाद ये ड्रेस डालो।
- 2:48ऐसे लोग मनमुखी कहलाते हैं और शांत जानते हैं।
- 3:02कि मन पल पल भटकाता है, जो मन के पीछे लगा वह घर का गया, तुम आज
- 3:16दुखी हो। तो मन के कारण दुखी नहीं हो।
- 3:25थोड़ा सुन दिनों बाद कहो मन है तुम्हें क्या तकलीफ है?
- 3:36तुम मन के साथ जुड़ जाते हो, एकाकार हो जाते हो इसलिए दुखी हो।
- 3:44मन कहता फ़िल्म दिखाओ तुम फ़िल्म देखने चले जाते हो, मन कहते यह
- 3:53स्वादिष्ट बजार सहफालो तुम ऑर्डर करते हो?
- 4:00मन कहता है घूम लो हिल स्टेशन तुम चले जाते हो और तुम्हारे दुख की
- 4:09रोक की जड़ मन मन लो भी मन लालची। मन चंचल मन चोर मन के मते न चलिये
- 4:31पलक पलक मन हो संत जानता है कि उपाय बाहर से करना होगा।
- 4:45बाहर से उपाय करके भीतर उतरना होगा।
- 4:50मन बहूरंगी है जल्दी ऊब जाता है। तुम एक ही फ़िल्म को कितनी बार
- 4:59देख सकते हो? तुम एक ही सब्जी को?
- 5:05रोज़ नहीं खा सकते। मन बदलाव चाहता है, इसलिए कितना
- 5:17ही अच्छा राजा प्रजा उसे बदल देती है।
- 5:27कारण क्या है? अच्छा भला काम कर रहा था।
- 5:32मन के कारण मन बदलाव चाहता है क्योंकि मन खुद बदलता है।
- 5:42मन के मत लेना चाहिए। पलक पलक मन और खुद भी बदलता है और
- 5:52मन बदलता है तो मन की चाहतें भी बदलती हैं।
- 5:56चाहतें बदलती हैं तो मन बाहर के नजारे भी बदलना चाहते हैं।
- 6:05चलो घूम आएं अभी तो शिमला मंसूरी गए थे, अब चलो पहलगाम ही जाएं।
- 6:18अब कश्मीर भी जाना है। भटकन है, और संत वह जो मन के इस
- 6:35चाल को पहचान गया, संत वह जो मन जान गया।
- 6:48मन अब दूसरे मन की बात करते हैं, जो तुम वास्तव में हो, वह जान गया
- 6:56कि यह झूठा मन तुम्हें भड़काता है।
- 7:02इस दूसरे मन के शब्द को हम बदल लेते हैं आत्मा केआत्मा जान लेती
- 7:11है कि मन भटकाता है, खुद भी भटकता है और मन इच्छा रखता है कि दूसरे
- 7:19भी भटकें। चैन से बैठा हुआ आदमी मन को भाता
- 7:27नहीं दौड़ धूप के सताए हुए लोग मुझे अक्सर बड़े तीखे कमेंट कर
- 7:37देते हैं। क्यों बैठे हो बाबा?
- 7:40क्या मिल जाएगा? मैंने मेरे बैठने पे किया, अरे
- 7:53भाई तुम सेल्स पार्टी कर लो, मैं बैठा हूँ तुम्हें क्या परेशान?
- 8:05तुम घूम लो देश विदेश घूम लो सुंदर सुंदर दृश्य, पहाड़ी
- 8:14स्टेशन, ठंडी हवाएं, गिरते हुए बर्फ़ मन माहौल बदल लेता है।
- 8:26इसलिए तुमने देखा मिठाई दीपावली के दिन खूब खा लेते और अगले दिन
- 8:35पर चटपटा अनकूट अगले दिन मिठाई नहीं चल रहे थे।
- 8:42मन उब गया, इतना खा लिया। सब मीठा, मीठा, मीठा नाक मुड़
- 8:50जाएगा। मन कहेगा नहीं और नहीं तो अगले
- 8:55दिन सब चावल, पकौड़ा, कढ़ी, बैंगन।
- 9:04खूब निगी मिर्च मसाले बिलकुल ओरटू से मन का स्वभाव है।
- 9:20तुम्हारी आदत है कि तुम अपने कुकर।
- 9:26कुकर्मों को दूसरे के ऊपर सोंप देते हो तुम्हारी सब गलतियाँ तुम
- 9:35मन के ऊपर सोंप देते हो, मैं तो मन भटका देता है भाई संत को क्यों
- 9:44नहीं भटकाता? तुम्हें ही भटकाता है संत भी तो
- 9:52तुम्हारे जैसा, हार्ट मास्क का पुतला है नहीं, मन नहीं भटकाता,
- 10:02मन तो खुद ही भटका हुआ है। ऐसा ऐसे समझो जैसे चलती हुई
- 10:09रेलगाड़ी तो मैं थोड़ा कहती हूँ अगर तुम छलांग लगा के चढ़ जाओ,
- 10:16मैं तो खुद भाग रही हूँ। तुम छलांग लगा के खुद चढ़ जाते हो
- 10:24वरना छलांग छोड़ो। तुम तो बहुत दिन पहले रिजर्वेशन
- 10:28करवा देते और फिर शिकायत करते हो कि गाड़ी दौड़ती है, ऐसा ही मान
- 10:36है मन दौड़ती हुई गाड़ी है। और इसका कोई कसूर मन का स्वभाव है
- 10:47बटकन और थोड़ा रुक जाइए, मन का स्वभाव है बटकन।
- 11:04भटकाना नहीं। तुम खुद छलांग मार के गाड़ी पे
- 11:14चढ़ जाते हो, मनोरोपी गाड़ी। मन कब कहता है, गाड़ी कब कहती है?
- 11:21मेरे ऊपर छलांग लगा के चढ़ो, कहते हैं कसूर किसका गाड़ी का ऐसा ही
- 11:40बुद्धू बनो। तुम जन्मो जन्मो से करते आये हो,
- 11:48इच्छा तुम्हारी होती है, दो शमट देते हो तुम दूसरे मेरे पास बहुत
- 12:00से कपल आ जाते हैं। मन को बहाना चाहिए बाबा मैं तो
- 12:10ब्रह्मचारी रहना चाहता हूँ लेकिन मेरे धर्म दूसरे पे मट दिया ना
- 12:18दोस्त और उसके धर्मपत्नी में मेरे पास तुम नहीं क्या करो?
- 12:27मेरा पति यही तो झगड़ा है एक दूसरे को प्रदोष लगा देना।
- 12:40पत्नी कहती पति का। पति कहता पत्नी का कसूर कसूर न
- 12:45पत्नी का, न पति कसूर वासन न वासना उससे थम पाती, न वासना उससे
- 12:55थम पाती। बात वासना की है।
- 12:58तुम असली मु्द्दे को क्यों नहीं पहचानते?
- 13:04जो निर्वासन हो गया बैठा है, लेकिन मन की आदत सदा ही है।
- 13:18मैं तो ठीक ठाक इसने मुझे वटिका दी, भाई कोई संत को नहीं वटिका
- 13:27था। तुम ही भटकने के लिए बने मन
- 13:38बहुरंगी है, पलक, पलक, मन और। ऐसा नहीं दिन को कुछ और शाम को
- 13:51कुछ और रात को कुछ और नहीं हर पल मन बदलता है।
- 13:58इसी को सहन से आत्मा कहते है और इसी को कृष्ण कहते हैं विनस्यति
- 14:06तुम्हारा विनाश हो जाएगा। कारण?
- 14:12कार तुम मन के पीछे लगोगे, यार मन हर पर बदलता है और तुमने जाना है
- 14:23वहाँ जहाँ कोई बदलाव नहीं है जहाँ सदा स्थिरता है।
- 14:31यहाँ सदा ठहराव है एक लोह है, ठहरी तुमने वहाँ जाना, यहाँ कोई
- 14:44हिल गर्ल नहीं। लेकिन तुम तो तुम्हारा मन तो कभी
- 14:54स्विस जाना चाहता, कभी न्यूजीलैंड जाना चाहता, कभी अमेरिका जाना
- 14:58चाहता और तुम मन के पीछे हो तो इससे निजात कैसे पाएं?
- 15:06मन की दृष्टता बन के मन को गौर से देखो आनंद से नेहारो मन को ये
- 15:19क्या क्या गुल खिलाता है सुबह से शाम तक कितनी बार बदलता है?
- 15:28और जल्दी ही मन की चंचलता तुम्हारी पकड़ में आ जाए और जैसे
- 15:36ही मन की चंचलता तुम्हारी पकड़ में आ गई तो मन का पीछा करना छोड़
- 15:41दोगे। जिसने मन का पीछा करना छोड़ दिया
- 15:47वही गुर मुखी हुआ मन तुम्हें बाहर भटकाता है, गुरु तुम्हें भीतर ले
- 15:54के जाता गुरु बाहर वाला गुरु नहीं मैं तो तुम्हें भटकाता है, आज
- 15:59सारे गुरु लोग ही हो गए। मेरे पास सो ना जाते हैं बाबा आप
- 16:05वैसे ही क्यों करते हो? हमारी भी तो परिवार, हमारी भी तो
- 16:09कुछ ख्वाहिशें हैं आप बिलकुल सरे की बात करके तोड़ देते हो सब कुछ।
- 16:23मैं कल हिंदू धर्म के बारे में बोल रहा हूँ।
- 16:27बहुत से लोगों के कमेंट आए। बाबा ऐसे मत करो आपने तो उगाड़ दी
- 16:34चमड़ी। मैंने कहा मैंने चमड़ी नहीं
- 16:41उखाड़ी, मैंने बहुत से लोग बोले हमारी भावना को तोड़ दिया।
- 16:50मैंने कहा नहीं मैंने पाखंडों को तोड़ा।
- 16:57तुम्हारी भावनाओं एक पखंडी होगी तो टूट गई होगी तो तुम पखंडी दरने
- 17:04तुमने बनाई क्यों तुम्हारा कसो रहा है?
- 17:09शीशा हो जाते लोह आखिर टूट जाता है मैं न तोड़ूंगा, कोई और तोड़
- 17:14दे। संतो ने सदस्य यह काम किया है।
- 17:18पथर पूजा हरि गले तो मैं पूजू पहाड़ ये क्रांतिकारी होते हैं वो
- 17:27कहते हैं तुम्हारी मूर्ति को पूजा से अगर हरी मिल जाए तो मैं पूरे
- 17:31पहाड़ को पूजना। लेकिन पूजा से वो मिलता नहीं।
- 17:35क्या करें? और तुम कबीर की इस बात को 1000
- 17:40बार बोल चूके हो? हर्दा में नहीं उतरे, फिर भी
- 17:44पत्थर को पूजे जाते हो। सी जे आई गणेश की मूर्ति की पूजा
- 17:49करता व दिखता है। और उस व्यक्ति को अपना पागलपन से
- 17:55नहीं आता। अरे गोबर गणेश हो गया गणेश की
- 18:02पूजा कर रहे हो जीसको तुमने देखा नहीं?
- 18:18इसको तुमने चखा नहीं एक बल के लिए भी निहारा नहीं।
- 18:30उसकी पूजा का औचित्य क्या रह जाता है?
- 18:39लोग मैं देखता हूँ हाथ में माला लिए फर्ते गंगातीर्थ मंदिरों में
- 18:46माशबों में गुरुद्वारा मैं पूछता हूँ क्या कर रहे हो आप भगवान को
- 18:58याद करो। भगवान है, धरती खसक जाती है, हाँ
- 19:07है बस ऊंचे से वही बोलेंगे, ये जानता नहीं होगा ज्यादा ऊंचे
- 19:17घोषणा करने। का मतलब है झूठ बोल रहा है।
- 19:25उसे लगता है कि शायद ऊंचा बोलने से झूठ सच में तब्दील हो जाएगा,
- 19:30लेकिन होता नहीं है, बिल्कुल है, मैं कहता हूँ, फिर है।
- 19:38तो पीते क्यों? अगर अमृत है अगर पानी है अगर भोजन
- 19:49है तो हमें भूख लगी है खाते क्यों पानी है शीतल?
- 19:58प्यास लगी है, पीते को अमृत है और तुम मरने से डरते हो तो अमृत को
- 20:07पीते क्या जप क्यों करते हो इसको? मैंने तो नहीं देखा, लेकिन कबीर
- 20:21ने तो देखा, नानक ने तो देखा, कृष्ण ने तो देखा बिल्कुल देखा तो
- 20:31अगर मैं खाना खाऊंगा तो पेट मेरा ही भरेगा ना?
- 20:37तुमने कैसे बांध लिया कि तुम्हारा पेट भर गया?
- 20:43यह ठीक है या गलत है? फिर उन्हें थोड़ी थोड़ी समझ जाती
- 20:48है, बात तो ठीक है। यह किसी मूर्ख व्यक्ति ने तुम्हें
- 20:58भटका दिया, शब्दों की अर्ल कर, यह सब स्मरण तुमने स्मरण करना है।
- 21:08उसका जो भी स्मरण हो गया है, क्या विस्मरण हुआ तुम आनंद के खुद ही
- 21:14कजानी? बस भूल गए उसे ही याद करना कैसे
- 21:25जाता है वहाँ जहाँ है कहाँ है बाहर नहीं।
- 21:38बाहर कहीं भी नहीं बाहर तो भटकर जैसे भरी गर्मी में बाहर लू चलती
- 21:50है तो तुम भीतर आ जाते हो। एसी के अंदर बैठ जाते हो, शांति
- 21:54मिलती है। बाहर संसार के तबेड़े रोज़ खाते
- 22:04हो, दुखी होते हो? तुम भूल ही गए हो कि हमारा कोई घर
- 22:09है। भूल गए कि हमारा कोई घर है उसमें
- 22:15एसी बिलखो। उसमें पावर का कनेक्शन भी है, बटन
- 22:24भी है और बड़ा सुंदर ऐसी है बस भूल गए हो है तू?
- 22:36बाहर गलियों में सड़कों पर रेगिस्तानों में धूल भरी आंधियों
- 22:44में भटकते फिरते हो तुम? छन नहीं तुम्हें बेचैन तुम जल रहे
- 23:02हो हम। प्यार में जलने वालों को छन कहाँ।
- 23:38चैन कहाँ? है, प्यार में जलने वालों को चैन
- 23:54है। आराम भी है तुम जल रहे हो क्योंकि
- 24:06तुम बाहर दूध भरी आंधियों में लोगों में खड़े हो रेगिस्तान।
- 24:1452 में जूते न ऊपर से दुपहरी का तपता हुआ सूरज डिहाइड्रेशन हो गया
- 24:23है पसीना पसीना हो गया, प्यास लगी और तुम कहते हो प्यार में जलने
- 24:31वालों को चैन का। आराम का यह हमारी नीती है, नहीं
- 24:39तुम्हारी नीती, यह कहाँ है तुम्हारी नीती है, तुम शहंशाह
- 24:49तुम्हारी नीती धक्के खाने की। त्यौहार की नीती इन धूल भरी
- 24:58आंधियों में रेगिस्तान में नंगे पांव दोपहरी का सूरज गर्म रूए।
- 25:11यह तुम्हारी नीती बिल्कुल नहीं है।
- 25:13यह तुमने पैदा की है, चाहे तुम्हारे दिमाग की शरारत हो, जब
- 25:21तुम्हारे गुरुओं की शरारत हो, तुम भटक गए हो, बस या तो गुरु भटके
- 25:29हुए मिले। यार, तुम्हारे मन ने तुम्हें भटका
- 25:35दिया तीसरी कोई बात तो इसे नीती मत समझ लेना, चैन कहाँ?
- 25:49आराम कहाँ है भाई तुम चैन ही तो हो, तुम आराम ही तो हो, तुम
- 25:59तुम्हारे घर को भूल गए, उसे ही तो याद करना है ये हाथ में मालक
- 26:04छोड़ो। फटक दो इस तसबी को कबीर के तस
- 26:15विहार से कर जाते हैं। ये भी एक बोझ था।
- 26:26पांच नाम जपने हैं नहीं जपने हैं तो कृपा नहीं करेगा।
- 26:30गलती में हो तुम तुमने उसका मूल्यांकन गलत कर लिया।
- 26:38वह तो प्रेम का स्वरूप है। वह अपनी कृपा की एवज में तुमसे
- 26:45कुछ भी तो नहीं मानता क्योंकि जानता है कि तुम्हारे पास है क्या
- 26:52वह जानता है सब मेरा इसका कुछ है ही नहीं।
- 27:01तुम छोटे बच्चे की सेवा करते हो क्या?
- 27:04कुछ काम न करते हो नहीं बस सेवा करते हो, बच्चा रोहि ना बच्चा
- 27:18दर्द से ग्राहिन। नहाते हो, देखभाल करते हो, बच्चा
- 27:27पेशाब कर देता है, मैं उस जगह खुद लेटी जाती है।
- 27:35क्यों करते हो? बच्चा है तुम्हें कुछ लौटा भी
- 27:40नहीं सकता, उसके पास क्या है? कुछ भी तो नहीं है।
- 27:46परमात्मा जानता है तुम्हारे पास लौटाने के लिए कुछ भी नहीं है।
- 27:57वह तुम्हें बेशर्त लुटाता है। कल ही एक बड़ी छोटी सी कहानी बड़ी
- 28:04प्यारी कहानी मुझे किसी मेरे प्रिय शिष्य ने भेजे।
- 28:16एक वृद्ध व्यक्ति का हार्ट का परीक्षण किया गया, 4 घंटे लग गए।
- 28:22ऑपरेशन दो 4 दिन के आराम के बाद उसे छुट्टी दे दी गई जाओ घर जाओ।
- 28:42तो शिववृत्ति ने पूछा डॉक्टर साहब पैसा कितना?
- 28:47तुम आजकल तो पहले पैसे जमा करा लेते हैं, लेकिन भैला मानो से
- 28:52डॉक्टर हो गया, कोई बेचार आजकल कहाँ है?
- 28:56इतवार? क्योंकि इनके लिए वैसा ही भगवान
- 29:01है, कोई ऐतबार नहीं। इंसानियत का कौन जान मुकर क्या है
- 29:13कौन जानू? हाँ, दुकानदार के पास कोई चला गया
- 29:17था, दो ठग थे, भूखे थे, भूख लगी थी।
- 29:25उन्होंने प्लान बनाई, गुसर बुसर किया, बैठ गए, एक पहले बैठ के
- 29:30ऑर्डर दे दिया खाने का। खूब खाने पकौड़े मंगाए, पेट भर
- 29:39गया, इतने में दूसरा आ गया, उसने भी अपनी मनपसंद ऑर्डर दिया, चाव
- 29:49में चूक गए ये ले आओ वो ले आओ। दोनों ने ही इशारा किया कि ठीक
- 30:00चलो हो गया काम पेट भर गया। ठग से ठगों का ऐसे ही काम होता
- 30:08है। बाहर निकलने लगे है।
- 30:19काउंटर के ऊपर जा कर बोला कितना कुछ कहते अभी ₹80 उन दिनों 1000
- 30:29का नोट चलता है। कहते 20 मरो।
- 30:33इसका है मुड़ मैंने तुम्हे सो दी है सो दी नहीं तुमने कोई सो नहीं
- 30:41दी दिए भी नहीं थे थे ही नहीं। वो कहता भाई तुमने कोई शो नहीं
- 30:56दिए, तुम भूल में हो और कहता अपना गला चेक करो, देखो गले में होते
- 31:03तो हैं, कहता भाई तुमने पैसे तो नहीं दिए देखो गले में तो पैसे
- 31:10होते हैं, सुबह से बट रहा हूँ। लड़ाई झगड़ा शुरू हो गया।
- 31:16थोड़ा ऊँचा बोलना शुरू हो गया। लोगबाग इकट्ठे होने शुरू झगड़ा था
- 31:24₹80 का दुकानदार कहता मेरे 80 दो। ग्राहक कहता है मेरे बीच से लौट
- 31:32आओ, खूब झगड़ा हुआ, लोग बाग इकट्ठे हो गए, हाथापाई में नौबत आ
- 31:39गई। दोनों के सांस फूल गए।
- 31:45इतने दूसरा व्यक्ति उठा। झगड़ा अपने चरम पे क्या उसने
- 31:55दुकानदार के पीठ पे हाथ फेरा, अरे भाई मुझे तुम कोई नजर आते हो?
- 32:04तुम्हारी लड़ाई में मेरा 1000 का नोट मत भूल जाना ऐसा चलता है।
- 32:15डॉक्टर बड़े समझदार होते हैं। ऐसा कुछ सहा होगा विचारों ने।
- 32:23रोहित ने लोगों को पैसे देना बंद कर दिया।
- 32:27गरीब था, घर में रोटी नहीं बनती थी, दो टाइम के बनती थी वह
- 32:31मुश्किल अपना चैनल कंट्रोल की बात करता हूँ एक अमीर परिवार के बच्चे
- 32:40को, जिसके माँ बाप दोनों सरकारी नौकरी पे दो बेटे ही बैठे।
- 32:47कोई बैठी नहीं अपना खूब बड़ा घर महाली में तीन मंजिली कोठी अच्छा,
- 32:56खूब खजाना, पैसा, सोना लेकिन उसे पता है ये तो मेरा है।
- 33:04और फिर ठगी कैसे मारू? कुछ बाहर से लूट के लूँ, जिसके घर
- 33:10रोटी नहीं पकती थी, वह शरीफ रोहित को लौटना शुरू करती।
- 33:23देखिए बाबा झूठ नहीं बोलते पहले बात यह सत्य बात है।
- 33:29तुम्हें भी मोबाइल आएगा, सुन के कोई भी सच्चा पर शोभा रहेगा।
- 33:49रोहित ने अपनी बहन की शादी रख दी, तब तक थोड़ा थोड़ा कमाने लग गया
- 33:54था। बहन की शादी रख दी तो कहा मित्र
- 34:00मेरे पैसे वापस कर दे। जरूरत है पहला कहता नहीं।
- 34:07अभी है नहीं मेरे पास मैं कमाता ही नहीं भाई तू कमाता क्यों नहीं
- 34:14तू कमा और अब तुम्हें गुस्सा आएगा पुरोहित, जिससे अब शादी हुई इस
- 34:29लड़की को रिजेक्ट करके आ गए थे। मैंने बाबा से पूछा बाबा कहते
- 34:34नहीं, शादी तो यहीं होगी? इसके मैंने रोहित से कहा, देखो के
- 34:41ऐसा नहीं हो सकता, तुम लड़की को फिर से देखो, अब कैसे देखने देंगे
- 34:48दूसरी बार? हर एक आदमी की इज्ज़त होती है भाई
- 34:53तो गुर्दे वो देखने नहीं देंगे। अब मैंने कहा देखो शादी तो ही
- 34:57नहीं फिर अब क्या किया जाए? बिचोड़े को फिर से कहा गया, क्या
- 35:07आप लड़की को दूसरी बार दिखा सकते हो?
- 35:10वो बेचारे सारे ध्यान दिखा देंगे। क्या हमने लड़की की शादी करनी
- 35:20लड़की फिर से देखेगी? और वही लड़की जिसे रिजेक्ट करके
- 35:23संत आ गए संयोग। उसी लड़के से शादी हो गई।
- 35:36आके उसने पेपर क्लियर किया। नेट वगैरह जो आज कल चलता है।
- 35:40जॉब मिल गई तो वह व्यक्ति क्या कहता है?
- 35:45शब्द शून्य उसके। अभी भी तंगी है तुम्हारे पास अब
- 35:50तो तुम्हें वो कमाई भी आनी शुरू हो जैसे उसकी खुद की घरवाले कमा
- 36:00रही है। लोग इतना इतना अधिकार भी जमा लेते
- 36:07हैं और सब है। रोहित की तरह भूख नहीं मरता है,
- 36:17इसका हाल तो ये था तुम्हें रोना भी आएगा।
- 36:29जब पढ़ता था, कभी कभी चोप करके भूख लगती गुरु द्वारा जाके खाया
- 36:36ऐसी विकट परिस्थितियों में इसने पढ़ाई और जो इसका मित्र था, उसने
- 36:44कभी निकाला क्लासमेट। कि भाई मैं चार रूठे ले के आया चर
- 36:50एक तू खा लू ऐसा व्यक्ति अपने आपको मित्र कहलाने के योग्य है।
- 37:01कहत रहा ठीक है, दूंगा ज्यादा नहीं 10,00,000 लेने 2,00,000
- 37:06दूंगा। संयोग वश नहीं दुर्भाग्यवश इसके
- 37:17मित्र की शादी हो गई। शादी हो गई, आगे शत्रु मिला।
- 37:28एक नंबर का बदमाश कंजर पॉलिटिकल व्यक्ति बदमाश ही होता, उसने भटका
- 37:41दिया तो काहे पैसे देता है ऐसे? तो भाई मैंने दी नहीं कोई लेखक
- 37:49पढ़ नहीं, कोई परो नोट चेक नहीं और फिर आपको पता है मैं क्यों
- 37:57कहता हूँ पॉलिटिक्स नर्क मुझे लोग कह सकते हैं बाबा आप गाँधी से
- 38:03क्लेम क्यों नहीं करते? मैंने कहा मुर्ख हो क्लेम करना
- 38:07होता तो पिछले जन्म में ही कर देता।
- 38:11अरे जो सेवा की है वो क्लेम काहे करेगा?
- 38:19मैंने कोई वेतन लेना है, मेरे भीतर कोई लालच सा है।
- 38:25कोई इच्छा आकांक्षा है? काहे का दावा करूँ तो अगर बापू आप
- 38:34अपना पैंट कोट वही रजिस्ट्री वाला डाल लेते तो आप कम से कम आप तो
- 38:39मरते तो नहीं, आपको गोट से मार तो नहीं सकता सर।
- 38:46क्योंकि सेफ्टी ही इतनी होती, मैंने कहा मरा तो मैं अब भी नहीं
- 38:51अब कहाँ मरा ये देखो बेटा और वो एक साध्वी की बात याद आ जाती है।
- 39:03मुझे मैं नहीं थी उस वक्त अरे भाई हो जाती तुम्हें किसी ने कहा कि।
- 39:10तुम हो जाती नहीं तो यह शुभ काम गॉड से नहीं पर मेरे हाथों से
- 39:14बताता मैंने कहा बेटी तू अपने हाथों से भी कर ले आजा अभी जल्दी
- 39:21बैठा है और देखो मरने के लिए ही मैं घोषणा करता हूँ कि मैं गाँधी।
- 39:30गद्दी के लिए बिलकुल नहीं। यह गलती मत खाये जाना जिसकी जीने
- 39:37तक की कामना खत्म हो गई, वह गद्दी की कक्षा करेगा।
- 39:4213। बरसों से इसने खाना नहीं खाया, वह
- 39:45गद्दी की अभिलाषा करेगा। वह मशरूम खाने के भलासा करेगा।
- 39:51वह जहाजों के ऊपर चढ़कर सारे देश विदेश घूमेगा।
- 39:57जो व्यक्ति खुद से शरीर छोड़ के घूम लेता है स्टिल ट्रैवलिंग
- 40:01दूसरे ग्रहों पे चल जाता है जहाँ तुम स्वप्न ही देख सकते हो।
- 40:05वह जहाजों पर छिड़कर अमेरिका। यूएई और दबाई जाएगा।
- 40:13नहीं तुम गलती हो न मैं तेरा वर्ष से बैठी हूँ लोग मुझे कहते हैं
- 40:21बाबा क्या पता लगता है भीतर खा ले चोरी छुपे खा लेते होंगे मैं कहा
- 40:26ठीक है, खा लेता हूँ। तुम्हें क्या आ सकती है?
- 40:31तो फिर आत्मा प्रशंसा मत न करो। मैंने कहा ये आत्मा, प्रशंसा यह
- 40:38है, सत्य है आत्मा प्रशंसा बिलकुल है।
- 40:47और सत्य बोलना अपराध नहीं है। अपराध झूठ बोलना है तो उस बदमाश
- 40:57ससुर ने कहा रे मूर्ख तो पैसे क्यों देता है?
- 41:07जब कोई लिखत नहीं कोई पढ़ नहीं। यारी दोस्ती के अंदर कोई लक्ष्य
- 41:14फड़त होती है। प्रेम की बातें प्रेम में कोई
- 41:22स्वाकिब होता है। वो व्यापार होता है भाई चेक पे
- 41:28दस्त कर दे पर नोट पे दस्त कर दे कोई सोना गिरवी रखिया ये बातें
- 41:34व्यापार की बातें हैं, प्रेम में थोड़ी होती हैं।
- 41:37यारी दोस्ती में थोड़ी होती हैं लेकिन उस व्यक्ति ने ऐसा दुष्ट
- 41:41निकला। उस व्यक्ति ने ज़रा भी तर्स नहीं
- 41:49खाया कि यह वही व्यक्ति है जिसकी घर रोटी नहीं बनती थी।
- 41:56आज इसने अपनी सख्त मेहनत के 7 दिन रात जागकर प्रभु का आशीर्वाद इसके
- 42:02ऊपर बरसा। आज उसके पास सब कुछ है, है तो उस
- 42:09व्यक्ति के पास भी सब कुछ लेकिन खुद का कमाया एक पैसा भी नहीं, वह
- 42:15कमाई का भी नहीं। बात को कमाना पड़ रहा है और देखिए
- 42:26बेरोजगार हरियाणा में बेरोज़गारों, तुम्हें मैं कहता
- 42:31हूँ झंडा उठाओ, तुम्हें रोजगार नहीं मिलता।
- 42:39इसके बाद और इसकी माता को तीसरी बार रोजगार मिला है सरकार को।
- 42:4758 से 60 कर देते, 60 से 65 कर देते।
- 42:5065 से कह दो जब तक मरेगा नहीं तब तक नौकरी ही करता रहेगा तो फिर जो
- 42:56नए जन्मे है बेचारे उनके ऊपर पानी के बोझारे ही करते रहोगे।
- 43:06उनके ऊपर तुम्हारी पुलिस डंडे ही बरसाती रहेंगी।
- 43:11क्या इसी हिंदुस्तान की कल्पना की थी हमने?
- 43:15क्या ऐसे हिंदुस्तान की आज़ादी के लिए 7,35,012 लोगों ने कुर्बानी
- 43:21दी थी? कोई खांसी चढ़ गया, कोई कोलो में
- 43:28पिट गया, किसी की गर्दनें उड़ा दी गईं पर शब्दों से जो मरे।
- 43:42क्या इसीलिए अंबर है? पर?
- 43:46इतना ही नहीं उस व्यक्ति ने हेरा फेरी की लाख रुपए का उसने गूगल पे
- 43:53कर दिया तो मैं सत्य बोलता हूँ। और तुम अपनी आत्मा से ही विचार
- 44:07करना यह शरीफ बच्चा कितने दुखदायी वातावरण में पला।
- 44:16लेकिन कहते हैं क्या को राखे मेरा सतगुर प्यारा उसे कौन है महाराण
- 44:22हरा वह आज भी खास छोड़ रहा है। उसने उल्टा इसके ऊपर मसल पावर
- 44:30लगाकर छः चार बदमाश ले आए। और इन बदमाशों को भी साथ चलते
- 44:36शर्म नहीं आती कि हम किसके साथ चल रहे हैं।
- 44:43दहशत दिखाई उसने थाने में बुला लिया।
- 44:45ये मुझे गालियां निकालता है, ये मुझे वो करता ना जाए जब भैसे
- 44:49मांगता है, ये फिरौती मांगता है ये सब हुआ।
- 44:56फिर वह नहीं आ रहा। उसने दावा कर दिया कि मैंने इससे
- 45:01पैसे लेने है लाख रुपए ये देखो मैंने गूगल पे किया अब गूगल पे
- 45:11कोई ऑथेंटिक प्रमाणिक। डॉक्यूमेंट है गूगल पे तो हम एक
- 45:20दूसरे को करते ही रहते है। क्या इसका मतलब वो कर्ज है?
- 45:28समीधार थे जज सहवान। उन्होंने फैसला दिया और ये केस
- 45:36हार गया। दूसरा केस अब भी चढ़ा है।
- 45:40रोहित ने डेफेमेशन डाल दी। देखिये इसने मुझे परीक्षण किया,
- 45:44मन नाजायज परीक्षण किया। पांच वर्षों से ये केस हो रहा है।
- 45:53इन्होंने मारने की धमकी दी, हाईकोर्ट से प्रोटेक्शन लिया
- 46:02₹2,50,000 वहाँ लग गया देना क्या था?
- 46:06₹5,00,000 ऊपर लगा। पुण्य है यप्पा फैसला तुम करो
- 46:14कहानी मैंने सुना दी और ये व्यक्ति फिर भी कुछ नहीं बोलता।
- 46:24चुप है, डरता है क्योंकि इसका ससुर कहता है हम पॉलिटिक्स का।
- 46:34पोलिटिकल बैन मेरी उससे बनती मेरी उससे बनती मेरी उससे बनती ऐसे
- 46:47डराने वाली आज राजनीति हो गई संत हृदय कहाँ जाए इनोसेंट मैएंड क्या
- 46:56करें? ये रोज़ लोग कहते हैं बाबा आप उठो
- 47:07मैंने कहा बेटा अब मेरे से कम उठ जाएगा, ज़रा सोचो जब खाया ही कुछ
- 47:15नहीं और आजकल तो दूध भी मुझे ऐसा मिलता है चाय चाय जैसा।
- 47:23ऐसे ही आते हैं दूध आपको पता है आज कल गाय भैंसों को कुछ डालते तो
- 47:28हैं नहीं है बड़े माँ पहले चने ये डालते थे आज कल नहीं है कुछ फील्ड
- 47:35है आज कल कैटल फील्ड तो क्या क्वालिटी ले आती होगी?
- 47:40और कितनी देर जीऊंगा मैं आप समझ सकते हो यह मशीनरी है कितनी देर
- 47:54काम करी है, लेकिन सत्यभाषण। सिर्फ आपको बताने के लिए आप से
- 48:07कोई इच्छा नहीं, आप से कुछ कामना नहीं कामना तो जीने के भी नहीं।
- 48:19इसलिए बेधड़क बोलता हूँ मुझे कोई संकोच नहीं है, मुझे कोई
- 48:35भय नहीं है सत्य बोलने में मैंने किसी के मान्यताओं को नहीं तोड़ा।
- 48:42मैंने दुष्यमान्यताओं को तोड़ा ये गलत है।
- 48:47कल भी मैंने कहा सनातन का अपमान नहीं सेंगे काश तुम जान चाहते उस
- 48:54स्थल पे के सनातन का अपमान हो नहीं सकता तुम क्या खाप करो जीस
- 49:03सनातन को शास्त्र नहीं काट सकता। नैनम चिदंती शस्त्राणी नैनम दाहती
- 49:09भाव का नैनम के लिए जनता को नहीं, उसको ये सनातन का अपना नहीं।
- 49:27एक जज है भाई, उसका ये काम थोड़ी है, तुम्हारी मूर्तियों को ही
- 49:31बनाता रहे। उसने न्याय देना है संविधान की
- 49:36रक्षा करनी अकेली तुम्हारी फाइल थोड़ी है तुम्हारी मान्यताओं को
- 49:40देखता रहे तुम्हारी तो 1000 1000 तरह की पागल मान्यताएँ हैं।
- 49:45तुम तो पागल हुए लोग हो। बड़े कमेंट आए बाबा आप ऐसे मत
- 49:52किया करो रोज़ी रोटी का सवाल है, पेट का सवाल है, देखिए सब कुछ
- 49:55करना पड़ता है। मैंने कहा भाई करो लेकिन ऐसे
- 50:02जीसको सम्मान दिया आज गवई साहब के साथ।
- 50:06के ऊपर जूता फेंका। कल तुम प्राइम मिनिस्टर के ऊपर
- 50:09जूता फेंकोगे। संविधानिक पद हैं, कुछ इनका
- 50:14सम्मान भी तो होना चाहिए और तुम वकील हो, कोई अनपढ़ व्यक्ति हो,
- 50:23अशिक्षित व्यक्ति हो, वह ऐसा काम करे।
- 50:29तुम वकील हो कहत्तर साल तुमने टाट में ले लिए, अब क्या कल मरने के
- 50:38बाद आएगी कब्रों में आएगी क्या कल में?
- 50:49आज न्यायाधीश के ऊपर जूता उछला, कल को गृहमंत्री को उछालोगे,
- 50:55प्राइम मिनिस्टर को उछालोगे, ये तो तुम्हारे संस्कार बन जाएंगे,
- 51:01ऐसे तो ऐसे तुम सिर पर चढ़ जाओगे। नहीं ये कम करते हैं वीथिन बाउंस
- 51:12लिमिट संविधान लिमिट होती है जहाँ तक तुम चल सकते हो इसके आगे यू
- 51:19कैनट क्रॉस दी लिमिट लेकिन चलो यह व्यक्ति।
- 51:30न्यायमूर्ति को न्याय करना चाहिए था।
- 51:33न्यायमूर्ति ने न्याय नहीं किया, मैं आज भी कहूंगा, फिर भी कहूंगा।
- 51:37न्यायमूर्ति ने न्याय नहीं किया, संविधान की रक्षा नहीं की,
- 51:42संविधान का अन्याय हो गया और इस व्यक्ति से हम अपेक्षा नहीं रखते
- 51:46थे। कि यह संविधान का संविधान की
- 51:52शिक्षा नहीं करेगा और अन्याय करेगा।
- 51:54संविधान से बिल्कुल अन्याय हुआ है, वो डर के कारण हुआ है।
- 51:59वो किसी भी कारण से हुआ है, लेकिन मैं कहती हूँ सारी जनता आपके साथ
- 52:04है। धवई साहब।
- 52:08आप न्याय करो, प्रत्येक पदाधिकारी के साथ सारी जनता है, प्राइम
- 52:15मिनिस्टर के साथ सारी जनता है, आप काम करो।
- 52:23सभी के साथ जो हमने चुने सब के साथ चलता है तुम फिक्र मत करो तुम
- 52:28काम करो बिना घबराये काम करो तुमियाँ बोलती है बोलने दो लेकिन
- 52:39मैंने कल भी कहा था न्याय नहीं हुआ, संविधान के ऊपर जूता पड़ी है
- 52:44क्या? सारी विधायिका नेपालिका है
- 52:53संविधान की रक्षा के लिए, लेकिन संविधान की रक्षा हुई नहीं।
- 52:57भाई सत्य सत्य ही बोलेंगे, झूठ कुछ नहीं।
- 53:06और वह मामला रोहित का आज भी अंडर कंसीडेरेशन है।
- 53:13पांच 5 साल लग जाते हैं यहाँ और झूठ फिर भी उड़ नहीं पाता सत्य
- 53:21फिर भी नहीं पहचान में आता। तारीख पे तारीख बढ़ जाती है।
- 53:25छः छः महीनों की। आज हिंदुस्तान में न्याय नाम की
- 53:36कोई सीज़न नहीं है, हम प्रसंग पे आ जाये।
- 53:45तो होटल वाले से कहा उसने भाई मेरे 1000 मत भूग जाना, इसमें तुम
- 53:50इसके शो मुकर रहे हो, तुम तो अब लकड़ लगते हो।
- 53:58ऐसा ही आज हो रहा है सब जगह। किस किस के उदाहरण दूत में है?
- 54:09आज इस देश को एक ईमानदार व्यक्ति की जरूरत है, जबकि कमाल की बात है
- 54:16एक ईमानदार व्यक्ति सारे भारतवर्ष में नहीं है, यह शर्म की बात नहीं
- 54:23है तो और क्या है? एक भी और अगर कोई ईमानदार होगा,
- 54:39तो पॉलिटिशियन ईमानदार रहने देंगे।
- 54:44झूठा सच्चा कोई केस डाल देंगे जैसे एक भैस दूसरी भैस को लबड़ ही
- 54:50देती है एक मछली तालाब को गंदा ही कर देती है।
- 54:57इसलिए पॉलिटिक्स सबसे गन्दी चीज़ है।
- 55:00इधर जाना मत। तो हार्ट पेशेंट की सर्जरी हुई
- 55:14ठीक हो गया, रिकवर हो गया, छुट्टी में लगी डॉक्टर ने बेल हाथ में
- 55:21समझ लिया ₹10,00,000 और वृद्ध व्यक्ति रोने लगा।
- 55:41डॉक्टर को वृद्ध व्यक्ति रोते हुए हृदय को सीज गया।
- 55:46डॉक्टर में आज भी दिल बचा हुआ है, डॉक्टर्स आज भी हृदय रखते हैं।
- 55:59तो उसने कहा प्रभु क्या बात है? पैसे ज्यादा हैं, मैं कम कर देता
- 56:09हूँ, कोई बात नहीं जीतने हैं उतने दे जाओ, नहीं है तो न जाओ, कोई
- 56:17बात नहीं। मैं कहता नहीं ऐसी कोई बात नहीं
- 56:23पैसा तो मेरे पास इतना मैं नगर का सबसे प्रसिद्ध सेठ हूँ तुम कपड़े
- 56:29देखकर मत पहचानो कपड़े तो ऐसा ही पहनते हैं हम फकीरा।
- 56:39पैसा तुम 10 की बजाय बीसवी दे देता, कोई बात नहीं, फिर बाबा,
- 56:46तुम रोते क्यों मैं रो नहीं रहा, यह आंसू धन्यवाद के धन्यवाद मुझे
- 56:53दे रहे हो नहीं और। धन्यवाद उस परम प्रभु का दे रहा
- 57:01हूँ जिसने 80 साल तक यह हृदय चलाया और मेरे पास एक पैसे का बिल
- 57:12नहीं भेजा। 80 वर्ष तक रात को मैं सो गया।
- 57:22इसने दिल को संभालना मैं दौड़ा, मैं खेला, मैंने सारे क्रिया
- 57:33प्रदान किए। लेकिन वह दिल को संभालना रहा।
- 57:38उसने एक पैसा भी बिल नहीं लिया। उसकी कृपा से हृदय भर गया तो
- 57:52डॉक्टर साहब तुमने 4 घंटे मेरा दिल संभालना सिर्फ 4 घंटे।
- 57:584 घंटे दिल संभालने के ₹10,00,000 और 80 साल उसने दिल संभालना और
- 58:06क्यों भी नहीं उस प्रभु का दिया हुआ सब कुछ।
- 58:20इतना के तुम धन्यवाद करने के योग्य भी नहीं हो तुम्हारे पास
- 58:24कोई शर्त नहीं है, इसलिए धन्यवाद मत कहो अरदास मत करो, तुम तो
- 58:34शिकायत करते हो? और शिकायत करते हुए तुम्हें ज़रा
- 58:40भी तकलीफ नहीं होती, हे भगवान तुमने ऐसा क्यों कर दिया?
- 58:51तुम तो भगवान तक को न्यायालय में घसीट लेते हो, पेशियां डाल देते
- 58:57हो। वृद्ध बोला जिसने 80 साल तक रक्षा
- 59:06किया, हृदय संभालना बराबर धड़काया मैं सो गया, मैं जैसे सो गया, मैं
- 59:14आराम कर रहा था, वो अपना काम कर रहा था।
- 59:19हे प्रभु मैंने तुम्हें कितना दुख दिया?
- 59:24और उसकी एवज में न मैं कुछ लौटाने योग्य हूँ, न तुमने कुछ मांगा।
- 59:31क्या तुम टेली घटका देते हो? 10 मिनट इसके इसे मुआवजा दिया
- 59:37जाता है। उसका तुम गलती हो।
- 59:41दिल के बहलाने को गालिब ये ख्याल अच्छा तुम चार पन्ने ग्रंथ साहब
- 59:48के पढ़ लेते हो चार गीता के पढ़ लेते हो कुरान पुराण के पढ़ लेते
- 59:52हो इससे उसका बाहर नहीं उतरता बाहर तो उस दिन उतरेगा।
- 1:00:01जीस दिन तुम समूचे के समूचे उसके शरण गति हो जाओगे उससे पहले बाहर
- 1:00:10उतरने को नहीं। जब उसका दर्शन होता है तो मेरा
- 1:00:21रोआ रोआ जोके जाता है। उसके सामने तुम संख्या वहीन
- 1:00:28अवस्था में आ जाती हो वहीं घड़ियाँ होती हैं।
- 1:00:32शुक्रगुजारी। अगर तुमने वास्तव में शुक्र करना
- 1:00:37है तो अपने भीतर वह भीतर बैठा है। मंदिर मत जाओ, मस्जिद गुरुद्वारा
- 1:00:43चर्च मत जाओ वहाँ वो नहीं मिलेगा। ईंटों, पत्थरों लोहे के सिवा नहीं
- 1:00:48है कुछो वहाँ मूर्ति है ईश्वर को ढूंढ रहे हो?
- 1:00:56वह मिलेगा जहाँ है अगर वास्तव में ढूंढ रहे हो तो ठिकाना मैं बता
- 1:01:11देता हूँ। ठिकाना तुम्हारे ही भीतर बैठा है,
- 1:01:25ऐसे गठ में भी है वो रख जाने ना चुपके से भीतर उतर जाओ।
- 1:01:35एक बार मौन की स्थिति आएगी। बस वहीं बैठा है।
- 1:01:40परम शान परममोहन आनंदित अवस्था में परम सुगंधित अवस्था में मौज
- 1:01:51में बैठा है वो लेकिन बाहर तुम ठोंकते हो।
- 1:01:58तो मंदिरों में ढूंढ़ते हो तुम अशिबों में ढूंढ़ते हो,
- 1:02:03गुरुद्वारों में ढूंढ़ते हो चर्चे में ढूंढ़ते हो उसका ठिकाना
- 1:02:13तुम्हारे हृदय में है। मन की आदत है बदलजन बलक बलक मन
- 1:02:30और। और तुमने अगर ये गलती की कि मन के
- 1:02:35साथ तुमने एकात्म साध लिया तो फिर वह भी बदलेगा और तुम भी बदलोगे?
- 1:02:44तो फिर कैसे स्थिर हो जाएं? कैसे बदलाहट खत्म हो, मन का संग
- 1:02:51छोड़ दो? कैसे छोड़ें मन से दूर हट जाओ,
- 1:02:59कैसे दूर हटें, अपने भीतर जाना शुरू हो जाओ, मन से दूर होते
- 1:03:03जाओगे, मन तुम्हें बाहर खींचता है।
- 1:03:13और तुम अपनी भीतर उतरो, तुम छोड़ दो, सब रिलैक्स यूरसेल्फ़
- 1:03:18कंप्लीट्ली रोय रोय को रिलैक्स कर दो, डेली छोड़ दो, शीत लो जाओ और
- 1:03:27तुम पाओगे तुम अपने भीतर खिसकने लगे।
- 1:03:34और धीरे धीरे कर सकते कर सकते को जीवन दाता मिल जाएगा।
- 1:03:49साँझ ढलते ढलते ख्याल आ गया। भीषण उनका ख्याल आ गया।
- 1:04:08वो ही। ज़िन्दगी का सवाल आ गया, हमेशा
- 1:04:20उनका ख्याल आ गया। सांझ ढलते ढलते तुम उसके पास
- 1:04:32पहुँच जाओगे और उसे देखते ही ख्याल आ जाएगा वो जिससे बाहर वनों
- 1:04:38में, जंगलों में। चर्चों में, गुरुद्वारों में,
- 1:04:44मंदिरों में, मस्ज़िदों में, कागजों में शास्त्रों में ढूंढ
- 1:04:47रहा था, गुरूगों में ढूंढ रहा था, वो तो भीतर बैठा है, ये रहा था
- 1:04:56वही जिंदगी का सवाल है, जिंदगी सामने खड़ी है।
- 1:05:03ब्रैग ढूंढा है बन अम्मा तुम बन में ढूंढे कस्तूरी कुंडलवास है
- 1:05:09तुम्हारे ही बेहतर है कहाँ खोजोगे तुम बेईमानी हो मिर्च।
- 1:05:22तुम राजनीतिक गद्दियाँ पा कर सुख ढूंढ़ते हो?
- 1:05:24अरे सुख ये सुख है। अगर 1000 फैक्टरी लगाओगे तो
- 1:05:33हजारों का दुख सहना पड़ेगा, उस फैक्टरी में हड़ताल न हो कोई।
- 1:05:41उसने यूनियन ना बना ली हो वो विद्रोह न कर दे और जो जोड़ा हुआ
- 1:05:49है वो कोई छीन न ले। 1000 तरह की हेरा फेरियां,
- 1:05:54बदमाशियां कानून पास करने होंगे। लेकिन एक बात बता दूँ मेरा तेजर
- 1:06:05पर है बोलने का अधिकारी रामकथा के तेई आज।
- 1:06:18कारि। जिनको सत्य संगति अभी प्यारी सत्य
- 1:06:30के साथ संगत करना जिनको अच्छा लगता है।
- 1:06:34राम की कथा को कहने के वही अधिकारी होते हैं, जब महंगे कवि
- 1:06:42सत्य की संगत नहीं करते। ये दान की संगत करते हैं।
- 1:06:54जिनको कछु ना चाहिए वो ही सहिंसा चाह गई चिंता मिट्टी अगर तुम्हारे
- 1:07:03पास 1000 फैक्टरी है तो 1000 फैक्ट्रियों को संभाले संभाले तुम
- 1:07:07बूढ़े हो जाओगे और 1 दिन दम से घर पड़ोगे मर जाओगे।
- 1:07:12लेकिन पूछो संत से जो अकेला आपने छट सी झम्पड़िया में बैठा और कोई
- 1:07:22तमन्ना शेष नहीं जो उसे उलझाये जो उसे भड़काए, जो उसे दूर दराट खींच
- 1:07:29ले चलो हिल स्टेशन देखने चले। उसके तो भीतर ही सब है, भीतर इतना
- 1:07:40प्यारा दृश्य है क्या बखान नहीं किया जा सकता।
- 1:07:48जीसको देखकर सभी तमन्नाएं मिट जाएं ज़रा सोचो वह कैसा होगा
- 1:07:58जीसको देखकर जिया अगहता नहीं कितने वर्ष से पी रहा हूँ 35 वर्ष
- 1:08:08तो पीता ही रहा अब पलक। और 35 वर्ष के बाद आके पापा ने
- 1:08:16कहा बोलो बोलो कोई रहा नहीं, बस बाबा का ये कहना कि कोई रहा नहीं।
- 1:08:29मेरा यह पूछना कि बाबा किसी और कुछ नहीं, ऐसा मत करो मुझे बैठे
- 1:08:35रहने दो। बड़ा मज़े में बाबा कहते अकेले
- 1:08:42अकेले। औरों को बैठो, औरों को भी चाहिए
- 1:08:52प्रेम और भी मांगते हैं अमृत और तुम्हारे बिना कोई अमृत बहला नहीं
- 1:09:01सकता बस एक तुम ही हो जितनी देर। यह प्राण चलते हैं तो अमृत फैलाती
- 1:09:11रहे। मेरा आशीष है तुम्हें और मैं
- 1:09:19कृत्य कृत्य हूँ संग संग यह भी समझाया।
- 1:09:31यह यू ट्यूब पर चलने वाली सभी ठाक ओके बाबा झूठ थोड़ी बोलेंगे बाबा
- 1:09:43झूठ थोड़ी बोलेंगे बाबा कहेंगे और नहीं है कोई।
- 1:09:49मैं उसी दिन समझ गया सब पखंडी बैठे कोई भी है चाहे रोज़ मुझे
- 1:09:57तुम कह देते हो बाबा तुमसा कोई नहीं मैं कहता हूँ ये मैं नहीं
- 1:10:02कहता ये शुभ कहते हैं सब पखंडी। लोग मुझे कह देते हैं, दिखाओ
- 1:10:13तुम्हारा बाबा कहाँ है, मैंने की छूट की भर लेती हूँ कहते ओइ मैंने
- 1:10:22कहा क्या हुआ कहते दर्द हुआ, मैंने कहा दिखाओ।
- 1:10:28कहाँ हुआ दर्द? कहते दर्द हुआ मैंने महसूस किया,
- 1:10:33मैंने कहा मुझे भी तो दिखाओ दर्द कहाँ है, कैसा होता है दर्द?
- 1:10:40अरे बाबा तुमने छूट की भरी मेरे दर्द हुआ।
- 1:10:44बस ऐसे ही मुझे भी वो दिखता है तुम्हें दिखाया नहीं जा सकता।
- 1:10:49तुम जाओ उस स्थल पर देख लो, तुम्हें भी दिख जाएगा अनुभव से
- 1:10:57दिखता है मेरे दिखाने से नहीं दिखेगा वो जैसे तुम अपना दर्द
- 1:11:01नहीं मुझे दिखा सकते। अपना स्नेह नहीं दिखा सकते, अपना
- 1:11:07हर्ष नहीं दिखा सकते, प्रकट कर सकते हो मात्र वैसे ही मैं प्रकट
- 1:11:14कर सकता हूँ वो कर रहा हूँ तुम अपना दर्द नहीं दिखा सकते अपनी
- 1:11:20खुशी अपना हर्ष अपना शोक। अपनी नफरत अपना प्रेम तुम नहीं
- 1:11:30दिखला सकते, लेकिन अनुभव कर सकते हो ऐसे ही है, मैं वह तुम्हें
- 1:11:35नहीं दिखा सकता, मैं उसे अनुभव कर सकता हूँ, लेकिन तुम भी अनुभव कर
- 1:11:39सकते हो। जाओ अपने भीतर जाके देखो, तुम्हें
- 1:11:46भी अनुभव हो जाएगा कोई एक व्यक्ति ने इसका ठेका नहीं लिया के कृष्ण
- 1:11:52ने ठेका लिया वो तो चले तुम भी देख सकते हो ये तुम्हारे लिए वे।
- 1:12:07अपने सारे गम मुझे सुनता, तुम अपने भीतर जाओ सर्वध्रमाण प्रतज्य
- 1:12:18माँ बेगम शरणम प्रच। हम तुम सर्वोपा पे भव मुख्य मैं
- 1:12:24तुम्हारे सारे दर्द तुम्हारे सारे पाप समेट लूँगा और तुम्हें
- 1:12:30निष्पाद कर दूंगा। खुश रहो।
- 1:12:41खुश रहो, हर खुशी है तुम्हारे लिए खुश रहो।
- 1:12:56हर खुशी है तुम्हारे लिए छोड़ दो छोड़ दो आंसुओं को।
- 1:13:12हमारे लिए छोड़ आंसुओं को हमारे लिए खुशी रहो, हर खुशी।
- 1:13:30है। तुम्हारे लिए छोड़ दो, छोड़ दो,
- 1:13:40आंसुओं को हमारे लिए छोड़ दो आंसुओं को।
- 1:13:51हमारे। लिए अहम तम सर्प पापे भ्यमुख्य
- 1:13:57शामी महसूस हो तुम सारे पाप मुझे देता हो, मैं वोट दूंगा।
- 1:14:10नेक्स्ट ईयर धन्यवाद सर।