Latest / Baba ji Vijay Vats / 14 May 26 - 99% लोग नहीं जानते नींद का ये आध्यात्मिक सच! (समाधि का द्वार)! आनंद का असली रहस्य!
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- 0:20सतीश पाण्डेय एक कहानी है बाबा जी महाराजजनक नर्क में गए।
- 0:38नरक की फेरी लगाई और सारा नरक खाली हो गया।
- 0:51कृपया इस कहानी को रहस्यत्मक ढंग से वर्णित करने की कष्ट करें।
- 1:10आइए इस कहानी को हम बुनयाद से उठे महाराजा जनक नरक में।
- 1:20गए और। सारा नरक खाली हो।
- 1:25गया। इस नर्म में खुश बातें समझने वाली
- 1:40नरक हो या स्वर्ग हो, सतलोक हो या सत्यकंडा हो, ये कोई भौगोलिक
- 1:49स्थान नहीं है। नरक और स्वर्ग मेंटल स्टेट हैं।
- 2:00मानसिक दर्शन सचखंड और सतलोक आध्यात्मिक स्थित है।
- 2:17जब तुम मनुष्य में दुखी होते हो, वह नरक ही तो होता है और जब
- 2:25तुम्हारा मन खुशी से लहलहा उठता। है।
- 2:31वह स्वर्ग ही तो होता है। और जब ना सुख होता है ना दुख होता
- 2:44है तुम दोनों के पार होते हो अच्छाई से भी परे होते हो बुराइ
- 2:56से भी परे होते हो। दोनों से पार तो सतलोक होता है,
- 3:08सत्यखंड होता है। जैसे ब्राह्मणों ने नरक और स्वर्ग
- 3:17का निर्माण किया, वैसे ही तुम्हारे।
- 3:21पाखंडी गुरुओं ने सतलोक और सच्चखंड का निर्माण किया।
- 3:29कल के प्राचीन में मैंने सच्चखंड के बारे में बोला था, सच्चखंड तक
- 3:36की यात्रा तुम्हें करनी होती है। जीते जी करनी होती है, मरकर नहीं
- 3:48करनी होती सचखंड कोई भौगोलिक स्थान नहीं।
- 4:00सच खंड इस ए स्टेट ऑफ युअर कान्शस्नस तुम्हारी चेतना की एक
- 4:08अवस्था। है।
- 4:11और सत्यलोक हो या सच खंड हो। वहाँ तुम सुख और दुख दोनों से पार
- 4:20होते हो। स्वर्ग में तुम सुखी होते हो नरक
- 4:26में तुम दुखी होते हो समझाने के लिए दीज़ आर सिम्बोलिकरी
- 4:31प्रेजेंटेशन दे अरे कॉल्ड अब्रेविएशन।
- 4:36सिंबल हैं ये प्रतीक जन जैसे हमने मूर्तियां बना दी।
- 4:49ध्यान रखना शब्दों से ज्यादा प्रतिक चिरस्थाई होते हैं, शब्द
- 4:58मिट जाते हैं। प्रतीक बहुत देर में बैठते हैं
- 5:07इसलिए सनातन ने प्रतीकों का निर्माण किया, मूर्तियों का
- 5:14निर्माण किया। वैसे तो भाषा भी एक प्रतीक है।
- 5:28विश्वाभर में करीब 7000 भाषाएं हैं।
- 5:347000 भाषाएं सबसे ज्यादा बोलने वाली भाषा है अंग्रेजी जिसे 1.4
- 5:42अरब लोग बोलते हैं। कुल आबादी आठ अरब की है।
- 5:48154 लोग अंग्रेजी बहुत दर्शन दूसरी भाषा है।
- 6:00चीन तीसरी भाषा है अंग्रेजी क्षमा करना हिंदी ये भाषाएँ हैं।
- 6:11पर इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
- 6:14आपको किसी एक भाषा में वह परमात्मा का नाम भी हो सकता है और
- 6:21दूसरी भाषा में वो गाली भी हो सकती है भाषाएं अपने ढंग से।
- 6:32गढ़ी गई। मैंने कल भी बताया था भाषाओं का
- 6:37प्रयोजन है अपने मन की बात कह देना, अपने विचार, अपनी भावना,
- 6:46अपनी जरूरत, अपने दुख तकलीफ। और भाषा बड़ी बोझिल हैं।
- 6:53तुम्हारे दिमाग ये भाषा ही तो हैं जो तुम कहते हो?
- 6:59बाबा हमारा मन बोलता हैं क्योंकि भाषा विजाति ही अद्रव हैं।
- 7:05अब इसको ठीक से समझ लो। आप रात को सो जाते हो, रात को
- 7:15हमारा तंत्र शरीर का विजातीय द्रव्य जो फॉरेन मटेरियल्स होते
- 7:22हैं, उनको साफ सफाई करके। मूत्र के जरिए बाहर फेंक देता है।
- 7:29सारी रात सफाई होती है आपका शरीर सारी रात भीतर के ऑर्गन साफ सफाई
- 7:41में जुटे रहते हैं। आप सो जाते हैं।
- 7:49और वह सुबह मूत्र मार्ग से निकल जाती है।
- 7:57इसलिए आपने देखा होगा ये प्रयोगशाला के लोग जब मुत्र को
- 8:02चेक करते हैं वो कहते हैं सुबह सुबह का पहला पेशाब लेके आना।
- 8:09मतलब उसमें सारा गंध, अंड, वंड सब उसमें होगा फिर वही आप भी जाते
- 8:18हो। सुबह मराज जी देसाई का सुबह सुबह
- 8:22का ये बेपदार्थ था। और फिर मुझे लोग कहते थे कि मराड
- 8:31जी साई मूत्र पीते थे, 100 साल जिए, यही तो तकलीफ है तुम्हे अगर
- 8:38मूत्र ना पीते तो 125 साल जीते। एक भाषा में जो अच्छे के लिए नाम
- 8:54होता है वो दूसरी भाषा में बुरे के लिए भी हो सकता है।
- 9:01भाषा विजातीय द्रव्य के कारण है। जो बाहर निकलना चाहती है इसलिए
- 9:06आपका मन बोलता है क्योंकि शरीर उसको बाहर फेंकना चाहता है।
- 9:17वॅन टू इवैपरेट वांट टु कैथोरसेस बाहर निकालना चाहता है, रीचन करना
- 9:32चाहता है फेंक देना चाहता है, शरीर की स्वभाव का प्रक्रिया है,
- 9:37जो शरीर को नहीं चाहिए जो मन को नहीं चाहिए बाहर फेंक देता हूँ।
- 9:45इसलिए आपका मन बोलता है तुम्हारे शरीर के नेचुरल तंत्र में और
- 9:56तुम्हारे मन में यही तो झगड़ा। है।
- 10:01तंत्र कहता है मैं इस विजाती या द्रव्य को रहने नहीं दूंगा।
- 10:05इट्स हर इन मटेरियल मैं इसको कसरस कर दूंगा, बाहर निकाल दूंगा लेकिन
- 10:15तुम्हारा मन उसको पकड़े रहता है। अरे नहीं ये तो भगवान का नाम है।
- 10:24लेकिन तंत्र सही होता है। नेचर इस राइट प्रकृति बिलकुल ठीक
- 10:35और प्रकृति को अपना काम करते रहना चाहिए।
- 10:39करते देते रहना चाहिए। ये झगड़ा है प्रकृति में और
- 10:46तुम्हारे मन में तुम्हारी भाषा बाहर से आई थोपी गई।
- 10:55ना तो हमारे शरीर ने बनाई ना हमारे मन ने बनाई और तुम्हारी
- 11:01प्रकृति हर पल हर घड़ी इस भाषा को कैथो सेस करना चाहती है, एवपोरते
- 11:07करना चाहती है, वातावरण में यही झगड़ा होता है।
- 11:09इसे ही तुम कहते हो बाबा मन बोलता।
- 11:13है। फिर आप उससे पापा इंतजाम क्या है?
- 11:22हर वक्त बोलता रहता है बेहतर की प्रकृति फॉरेन मटेरियल्स को
- 11:33बिजाती है, द्रव्यों को हर वक्त बाहर धकेलने में लगी रहती है।
- 11:39और शब्द तुम झकड़ लेते हो, पकड़ लेते हो के भूल जाएंगे, फिर क्या
- 11:44लिखेंगे? एग्ज़ैमनेशन में यही दुविधा है।
- 11:51ये झगड़ा होता ही रहता है और तुम इसी से त्रस्त हो।
- 11:58मन से त्रस्त हुए हुए लोग एक जितनी आत्महत्या करते हैं, इसी
- 12:05झगड़े के कारण करते हैं। आज आत्महत्या का तुम्हें मैंने
- 12:10आंतरिक कारण बता। प्रकृति चाहती है बाहर से थूपी
- 12:16हुई प्रत्येक चीज़ को बाहर फेंक देना कोई काम नहीं है।
- 12:20भाई तुम्हारा यहाँ नो नीड जाइए बाहर।
- 12:36और तुम मन को पकड़े रहते हो, तुम कहते नहीं हो भाई, तुम्हें पता भी
- 12:43नहीं होता कि प्रकृति इसको बाहर फेंक रही है, फेंकना चाहती।
- 12:49है। तुम्हारा मन को जबरदस्ती ज़ोर से
- 12:53पकड़ लेना और प्रकृति का पूरे ज़ोर से उसे बाहर निकाल देना तो
- 12:56कौन हारेगा तो मारो। इसलिए मैं कहता हूँ नींद बड़ी
- 13:05जरूरी है। अब समझिए।
- 13:11इस साइंस को नींद में प्रत्येक विजाती है।
- 13:16द्रव्य प्रकृति बाहर एक्सक्रिट करती है तो शरीर के भी विजाती है।
- 13:24द्रव्य फौरन मैटेरियल्स और मन के और मन में शब्द पड़े।
- 13:33प्रकृति शब्दों को भी बाहर फेंक देती है।
- 13:38तुम्हें पता भी नहीं चलता सारी रात तुम्हारे इकट्ठे किए गए फालतू
- 13:48आलतू के झगड़े। इकट्ठे किए गए शब्द सब बाहर फेंक
- 13:56देती है। प्रकृति इससे बेहे तो तुम सुबह
- 14:01तरोताजा महसूस करते हो। दिन में तुम बेड़ियों से जकड़े
- 14:09जकड़े से। मरे मरे से किसी भार के तले,
- 14:19इसलिए मैं रोज़ कहता हूँ इन संत महापुरुषों के दर्शनों में मत उलझ
- 14:26जाना, दर्शन करने को एक स्थान है। बस उस स्थान पर चले जाना ही।
- 14:36तुम्हारा टारगेट है। हेम है लक्ष्य है, और वहाँ जाकर
- 14:47तुम पाओगे, संसार में सब कुछ देखा।
- 14:51संसार में सब भोगा सब चखा, लेकिन कुछ नहीं मिला।
- 15:03अगर वह नहीं मिला तो फिर कुछ भी नहीं मिला।
- 15:16इन मूर्तियों के इन तीर्थों के बेहतर पानी है मूर्तियां कभी किसी
- 15:30पर्वत पर थीं उखाड़ी गईं। तराशी गईं और तुमने तो देखी नहीं,
- 15:39मैंने देखी मूर्तियाँ बनती हैं मूर्तियाँ बनाने वाले कारीगर के
- 15:44मुँह में भान। होता है मूर्ति।
- 15:48को छैनी हथौड़ी से वो काटता पीटता है, नहीं नहीं, नक्ष बनाता है।
- 15:55और जब मुँह भर जाता है पीख से, तो वहीं पर उसके ऊपर ही थूक देता है
- 16:00जैसे आप कल को। पूजोगे और।
- 16:07मन में ये भ्रम उत्पन्न करोगे कि इसमें पंडित जी ने प्राण
- 16:10प्रतिष्ठा होती प्राण प्रतिष्ठा। प्राण प्रतिष्ठा चीत न का प्रवेश
- 16:28करा देना। मामूली बात में कुछ गिनती चिंती
- 16:34का योगी जड़ में। प्राण प्रतिष्ठित चेतना को डाल
- 16:41सकते हैं। उनमें एक शिव हैं, जिसे हम भगवान
- 16:46शंकर के नाम से भी जानते हैं। शिव खुद अपने आप में ही चेतना
- 16:53हैं। वह पत्थर में चला जाए, वह माटी
- 17:03में चला जाए। वह धातु में चला जाए तो चेतन हो
- 17:08जाती है, लेकिन हमने आज सब नकली बना दिया है।
- 17:14आज सब नकली है। विध्वत्ता नकली है, ज्ञान नकली है
- 17:24तुम्हारी भगवान नकली हैं, तुम्हारी तीर्थ नकली हैं, भगवान
- 17:30तो भीतर है, तीर्थ भी तो हमारे भीतर हैं।
- 17:36तीर्थ नावण जयते स्वभाव। है।
- 17:42उसकी इच्छा हो तो मैं अपने भीतर जाकर उस तीर्थ में स्नान करूँगा,
- 17:47लेकिन तुम तो बाहर जाकर हाज्य कराते हो, तुम तो बाहर जाकर
- 17:52गंगासागर कराते हो, उसे तीर्थ कहते हो?
- 17:59ये सब तुमने बनाई भाषा तुमने बनाई तीर्थ से तुमने बनाई मूर्तियां
- 18:06तुमने बनाई और मैंने कहा पी कगरा देते हैं मुख्य।
- 18:13फिर दो स्वर की अच्छी तरह फिर वो तुम्हारे मंदिरों में सजा देते
- 18:19हैं और पंडित की झूठी मूठी प्राण प्रतिष्ठा करते हैं।
- 18:25मैंने कहा प्राण प्रतिष्ठा करने वाले कुछ गणेश में रोग हैं संसार।
- 18:32उनमें से एक शिव है जिसने पार्वती को विज्ञान भैरव तंत्र के 112
- 18:40सूत्र दिए। शिव खुद ही जीते शुरू है।
- 18:56गुरुवाणी में एक शब्द आता है ढिठ है सभ्यताओं सभी स्थान देखें,
- 19:02मैंने तीर्थ देखा सागर देखें हज देखें पर्वत, देखें नदियां देखीं।
- 19:15बर्फीली पहाड़ियाँ देखीं गुफाएं, कंदराएं देखीं वृक्ष पेड़ देखें
- 19:23डिट्ठे सभ्य थु नहीं तुथ जे है आप कहीं आनंद नहीं आया सभी जगह में
- 19:32गया। नहीं तू तो जे है आ तेरे जैसा कोई
- 19:37नहीं बस वो ठीक है दूसरी जगहों पे आपको खुशी तो मिल सकती है वणों
- 19:47में जाओगे शुद्ध ऑक्सीजन तो मिल सकती।
- 19:49है। पर्वतों में जाओगे ठंडक तो मिल
- 19:53सकती है। लेकिन गुरवाणी कहती है कि आनंद
- 20:05नहीं तू ध जे है, आप आनंद तो अपने भीतर जा के मिलेगा एक ही स्थान है
- 20:16आनंद को। और वह है।
- 20:21है तुम्हारी विचार तुम विडंदा बन जाओ तुम हरिद्वार जाओ ऋषिकेश।
- 20:34तुम काली। मठ जाओ।
- 20:37तुम हज। जाओ।
- 20:39तुम मक्का जाओ, मदीना जाओ, कहीं जाओ।
- 20:44एक बात को। ध्यान में रख लेना जैसे गए थे
- 20:47वैसे ही वापस आ जाओगे थके मारदे शरीर थक जाएगा।
- 20:56लेकिन। आनंद को साथ नहीं लेकर आओगे।
- 21:10वहाँ जाकर जहाँ दुख न सें सुख कर ला जा।
- 21:15एक स्थान। ऐसा है तुम्हारे भीतर जहाँ जाकर
- 21:19तुम्हारे सारे दुखड़े। नष्ट हो।
- 21:22जाते हैं। सुख।
- 21:24कार्यालय जवाब। पर सुख तुम्हारे।
- 21:28पास आ जाता है। उस स्थान।
- 21:32कहाँ है बार कहें। उस स्थान।
- 21:36तुम्हारे भी तरह है। और मैं बहुत।
- 21:43बार बोलता हूँ, रोज़ बोलता हूँ ये गुरु जन?
- 21:48छर्क से। आपके पास से निकल जाते हैं, रोज़
- 21:50ही दर्शन हो गए। सब नकली नकली फूल हैं कोई दर्शन
- 21:56वर्शन नहीं, न तो इन्होंने कुछ पाया एक राधास्वामी व्यक्ति मेरे
- 22:05पास आएगा। अपनी।
- 22:09समस्या। मैंने कहा, दीक्षित?
- 22:14हो नहीं बाबा, मैंने तो नाम दान लिया।
- 22:25है। तो फिर ये।
- 22:32समस्या है क्या तुम्हारा गुरु सॉल्व नहीं कर सकता?
- 22:37कहते जी। सॉल्व तो वो कर सकता।
- 22:40है वो तो जल। थल कर दे मैं कहा, वो तो कर देगा।
- 22:45जल थल। तो बाढ़ भी कर देगी।
- 22:50वो तो परेल। ले आ गई।
- 22:51मैं कहा वो तो आइटम बम पी ले आया। नई बात क्या है?
- 22:56वो तो हाइड्रोजन बम पी ले आया जल थल कर दे परेल ले ले आए।
- 23:02ये सब तो। नेचर कर देगी, लेकिन तुम्हारे
- 23:05गुरु क्या कर सकते हैं? अपने गुरु।
- 23:09से तकलीफ कहते क्यों है गुरु बनाया का है?
- 23:14गुरु ने तुम्हें अपनाया का है। कहता बाबा।
- 23:22वो तो बात ही नहीं करते, मिलते नहीं।
- 23:29मैंने कहा। फिर अगर डॉक्टर रात को पेट में
- 23:32दर्द हो रहा है। और तुमने कोई?
- 23:38फैमिली डॉक्टर कर लिया। तो कैसे?
- 23:42पकारोगे। अपनी फैमिली डॉक्टर को ही फ़ोन
- 23:49करोगे। और तुम कहती।
- 23:51हो की वो तो मिलते नहीं तो फिर क्या करना पड़ता है?
- 23:55बाबा चिठ्ठी लिखनी पड़ती। है।
- 23:58अच्छा फिर चिठ्ठी। आज कल व्हाट्सएप का ज़माना।
- 24:05है फ़ोन का? ज़माना है।
- 24:07यार डायल का ना और सीधा लग जाता है और अपनी तकलीफ बता दो नहीं
- 24:12कहता हूँ इस बक बक में पड़ते ही नहीं तो मैंने कहा बक बक करने के
- 24:16लिए मैं ही रखा हूँ क्या? अरे?
- 24:24हरामखोर। गुरु का?
- 24:29काम ही करना है। बक बक करें, कुछ करें, तुम्हें
- 24:32समझाएं। तुम्हारा दुख।
- 24:34सुनें तो। दूर कर।
- 24:38सकता है। हर उपाय करें जैसे आपका फैमिली
- 24:40डॉक्टर। नहीं कर।
- 24:46सकता तो प्रेम से कह दे, देखिए ऐसा तेरे को नहीं ठीक होगा भाई
- 24:56फैम्ली डॉक्टर आपने बनाया? आंधी रात।
- 24:59को आवाज दो और आंधी रात को आवाज आप तभी दोगे।
- 25:04जब सिरे से मैटर होगा ऐसे नहीं। हुआ।
- 25:11मैंने कहा यही। तो मुश्किल है।
- 25:19तुम कहते। हो दीक्षा दो बाबा अभी आज एक।
- 25:28पुत्री का मैसेज आया शिवानी। हम लोगों को।
- 25:32चाहते हैं। वो आपके पीछे।
- 25:35लगू हो जाएं। तो हम समझाने।
- 25:40की चेष्टा करते हैं। लेकिन वो।
- 25:45मानते ही नहीं। हम उनका भला करना चाहते हैं कि
- 25:49किस हिसाब से ये तर जाए। हमें पता है।
- 25:54आपके। साथ आपकी बातें सुनकर ये तर
- 25:57जाएंगे। लेकिन ये?
- 26:01लोग। आपके बारे।
- 26:03में भला बुरा बोलते हैं। हम तो उनका।
- 26:12भला चाहते हैं लेकिन वो लोग आपके बारे में भला बुरा बोलते हैं।
- 26:18मैंने कहा बेटी ये बताओ पहले। मेरे से।
- 26:25दीक्षा लेके तुम सुखी होगी। ईमानदारी?
- 26:29से जवाब दे ना कहती पूरी सुखी नहीं है।
- 26:42उनका फिर जब। तुम पूरी सुखी हो जाओ ना?
- 26:46तब बात। करना उससे।
- 26:48अभी। अधूरे अधूरे कोई पता नहीं अभी तुम
- 26:53खुद तो बदल लो या मन की चाल बाजी है।
- 27:00उसका भला कर? दें, उसका भला कर दें और मैंने
- 27:03सख्त पाबंदी लगा रखा है। जीवन में।
- 27:07हजारों वीडियो बोली कभी मैंने कहा मुझको फॉलो करो।
- 27:14बल्कि ये। कहा मुझको फॉलो मत करना, अंधे
- 27:18होकर फॉलो मत करना, सुन सुनिए, सिर्फ सुनिए सुनिए दुःख बाप का
- 27:26नाश अगर सुनने से तुम्हारे दुःख दूर होते हैं।
- 27:30भ्रांतियां दूर होती हैं तुम्हारे कष्ट क्लेश कट जाते हैं और फिर
- 27:34आगे कदम दूसरा फिर करिये क्रिया योग करिये, ध्यान करिये।
- 27:47फिर परवचन। सुनिए।
- 27:51उस परमात्मा की वाणी को श्रवण कीजिए।
- 27:55अगर अभी। तुम्हारा ही कल्याण नहीं हुआ?
- 27:59क्यों दूसरों? को घसीट रही हो और फिर अगर ले भी
- 28:02आओगी तो अगला रजामंद हो गया। ठीक है चलो बाबा के पास।
- 28:09यहाँ स्वीकार तो हो जाएगा वह मुश्किल तुम कितनी देर में
- 28:15स्वीकारते हो? पांच पांच।
- 28:20साल से लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवा रखा है।
- 28:23आज मैंने तुम आगे तो देखो। ना खुदा ही मिला ना वसाली सनम
- 28:34इसको जीस राह पे चलता है चलने दो। ये भी एक तरीका है पहुंचने का
- 28:42इसलिए मैं ज्यादा मशक्कत नहीं करता।
- 28:45तुम्हारे धर्म तोड़ने की बस बात कह देता हूँ, टूट जाए तो टूट जाए,
- 28:50भटकना भी एक रहा है। एक।
- 28:59अनुभव तो ले लो के भूरती पूजा की थी।
- 29:03नहीं कुछ मिला, भटके। नाम जब।
- 29:07किया था नहीं कुछ मिला भटके एनर्जिलसनेस हुए।
- 29:13तुम्हें पता है। मैंने राम राम का कितना नाम किया
- 29:16है? मैं भी ऐसे ही गुरु की गृहस्थी
- 29:21में आ गया था। और वह।
- 29:27ज्ञान ही निकला। राम रामू।
- 29:31करते रहो। चलते फिरते।
- 29:34बैठते उठते, सफर करते राम रामू करते रहो।
- 29:39मैं राम रामू। करता रहा।
- 29:43राम राम हो। गए।
- 29:471 दिन कह दिया। राम राम, गुरू जी।
- 29:50चल क्योंकि कुछ मिला। ले।
- 29:56यह भी एक रास्ता है भटको। भटकोगे तो तुम ध्यान से सुनो मेरी
- 30:05बात फिर तुम्हारा मन में भटकाएगा नहीं कि देखो वो पड़ाव तो तुमने
- 30:13अन खोजा छोड़ दिया। सारी दुनिया जो नाम स्मरण कर रही
- 30:18है, तुम क्यों नहीं करते? मन तुम्हारा।
- 30:23बार बार उतर जाएगा। और ये मन?
- 30:28ही तो तुम्हारा रोग है, इसको पूरा ही कर दो।
- 30:34ये भी एक। रास्ता है भटकना भी तो एक रास्ता
- 30:38है सही रास्ते पे जाने के लिए फिर भटकोगे नहीं मिलेगा।
- 30:45फिर तुम किसी। से पूछोगे?
- 30:47और कभी न। कभी ईश्वर मेहरबान होगा।
- 30:55कर्मी? आवे कपड़ा नजर अमौख द्वार कभी कभी
- 30:59उसकी नजर भूखे। फिर वो तुम्हें।
- 31:03सही रास्ता डाल देगा। तुम्हें गुरु को तलाशने की
- 31:06आवश्यकता नहीं है। गृह हित में।
- 31:11तलाश लेगा। तुम किसी।
- 31:15को मूर्ख बनाने की चेष्टा न करो। तुम किसी को मेरी बात को मानें,
- 31:19मैं खुद ही नहीं कहता तुम कब है चलो।
- 31:27किसी को। सब्सक्राइब करने के लिए न कहो ये
- 31:34गायत्री वगैरह मंत्र देखिए मंत्र है।
- 31:38इनकी बात। अलग है।
- 31:41लेकिन जो। ईश्वर का रास्ता है, वो उससे
- 31:43बिलकुल विपरीत है। ना सब्सक्राइब करने के लिए कहो।
- 31:50ना मुझे। सुनने के लिए कहो ना मेरी बातों
- 31:53पर। तवज्जो देने।
- 31:55के लिए कहो। ना?
- 31:58अनुकरण करने के लिए कहो, बस, तुम अपना ही सुधार लो काफी।
- 32:05ये काफी नहीं है क्या? और ध्यान रखना।
- 32:09जीस से तुम सुधर गए। उस से।
- 32:12इशारा मेरी तरफ करना बंद कर दोगे? यही मैं।
- 32:17चाहता हूँ। तुम्हारा।
- 32:19खुद का दिया का विचार। ये मेरा ऋण है, तुम्हारे ऊपर उस
- 32:27तरह उतर जाएगा। जीस दिन, तुम मेरी तरफ इशारा ना
- 32:32करके खुद ही बताना शुरू कर दो और अनुभव से बताना शुरू कर दो।
- 32:38गबोड़ शंखों से बताना शुरू मत कर। उस ठंडी छॉव में जब बैठ के शीतल
- 32:46जल तुमने ले लिया। तुम्हारा।
- 32:49शुष्क गला दर्द हो गया। उस कड़ी।
- 32:56बोलना दूसरे को बदलाना। उससे पहले मेरे पास भीड़ मत करना।
- 33:04मैं भीड़ का आदी नहीं। मैं कोई राजनीतिक पार्टी थोड़ी
- 33:11बुलाई मुझे मुमुकशु चाहिए व्यासियों की भीड़ चाहिए।
- 33:19तुम। जबरदस्ती किसी में प्यास पैदा
- 33:21नहीं कर सकती और करना भी मत, ये एक बाप होगा।
- 33:28किसी को। मत कहना ये मन की तरकीबें हैं
- 33:32अपने आप को न बदलने की, पर मैं कहता हूँ किसी को मत बदलो खोज
- 33:38बदलो। अभी आज पांच चार और सवार हैं।
- 33:43बाबा घर में। बड़ा क्लेश शायद आपकी वीडियो दो 4
- 33:49दिन ना सुन सको क्षमा करना आप घर के माहौल को ठीक कर दो।
- 33:55घर का माहौल दो तो मैं ही ठीक कर। फार्मूला तुम्हें।
- 34:01बता दिया गया है। टकराव होता है दो चीजों के खटकनक।
- 34:10अगर वो। अभी मूर्ख है, तो तुम सयाने हो
- 34:13जाओ। वो किसी।
- 34:15बात पर अड़ा है। अवश्य ही।
- 34:23यह जो। क्लेश हुआ ना घर में सभी सुन लें
- 34:25इस बात को। तुम भी।
- 34:28अपनी जगह पर अड़े हुए हो। तुमने भी।
- 34:34अपनी धौन में किल्ला फंसा लिया है।
- 34:39स्टेनलेस। स्टील का इस किले को निकाल के
- 34:43फेंक दो, गर्दन झुक जाए जब ज़रा गर्दन झुकाई देख लें सब क्लेश
- 34:49खत्म हो जाए। मेरे पास।
- 34:52लोग आ जाते हैं पौथ ही डाल के। आओ, बाबा।
- 34:58शास्त्रार्थ करें, मैं समझ जाता हूँ, भगत है।
- 35:04भक्तों से क्या शास्त्र? शंकराचार्यों से कभी शास्त्रार्थ
- 35:10करना होता है। शंकराचार्य तो हारे ही हारे हैं।
- 35:14क्योंकि शब्दों से शस्त्र करेंगे देखा इन्होंने कुछ तो इनका उपाय
- 35:20है उपाय क्या है? दूर से नमन कर लूँ श्रद्धा पूर्वक
- 35:26के हाथ लगा लूँ मैं बड़ी श्रद्धा से आँखें बंद करके।
- 35:31दोनों फॉर्म को छूता था और उसका अहंकार।
- 35:35तृप्त हो जाता था और उसको। आशीर्वाद देने पर विमर्श होना
- 35:41पड़ता तो वो कहता, कैलाना मस्त बाबा।
- 35:45मैंने कहा। प्रभा।
- 35:48जल पहन। करो।
- 35:50भोजन। बन रहा है।
- 35:54तरफ़ हो के। जाना।
- 35:56शास्त्रार्थ। करना आया था।
- 35:59भोजन करके जाता है। शास्त्रार्थ एक आढ़ थी।
- 36:08शास्त्रार्थ। झगड़ा था।
- 36:11हम दोनों झगड़ा करते हैं। तुम्हें पता।
- 36:14नहीं चलता शास्त्र अर्थ का मतलब है झगड़ा करना।
- 36:19है वो कहेगा। मैं ठीक वो कहेगा मैं ठीक वो अपना
- 36:21शास्त्र निकालेगा, वो अपना शास्त्र निकालेगा, ये झगड़ा ही तो
- 36:25है बस विनम्र लोगों का झगड़ा है। जो शालीनता से बात करते हैं।
- 36:35ज्ञानी से ज्ञानी मेले, करें ज्ञान की बात ये शास्त्र रक्त
- 36:42मूर्ख से। मूर्ख मिले दे घुसा दे लात।
- 36:48फिर वहाँ पर घूंसे। लाते जलते हैं, तुम्हें पता नहीं
- 36:51है सास तरात तो मैंने भी क्या? उसके पांव?
- 36:55छुए, प्रणाम किया, उसने मुझे आशीर्वाद दिया, मैंने जलपान खाना
- 37:07खा के जाना। तृप्त हो के गया प्रश्न हो के
- 37:12गया। क्योंकि पेट।
- 37:15भी भर गया। अहंकार भी भर गया।
- 37:19दोनों को। तृप्त करके भेजा गया।
- 37:23ढंक। होता है।
- 37:25अगर घर में। क्लेश है।
- 37:32तो भगवान। तक ईश्वर तक पहुंचने की बातों में
- 37:35अड़चन क्या है? सुनने में?
- 37:38तुम्हारे ही। हाथ में ये सब कुछ।
- 37:44उसके हाथ। की कठपुतली, बन जाओ सरेंडर जैसा
- 37:49वो कहता है वैसा कुछ। रो जाते हैं।
- 37:54ऐसे मैसेज आज आया कि मेरे पिता के साथ मेरी ज़रा भी नहीं मानता।
- 37:59मैंने कहा फिर तुम बना लो ना, जो समझदार होता है वो बनाता है, जो
- 38:04मूर्ख होता है वो बिगाड़ता है। अब देखो समझदार तुम हो, वो चाहे
- 38:08उम्र में बड़ा है। लेकिन।
- 38:11मूर्खों के साथ समझदार समझौता कर लेते हैं, ये जानते हुए भी के ये
- 38:18मुर्ख हैं, लड़ाई नहीं करते। मूर्खों से कभी झगड़ा करना होता
- 38:21है। अंदर भक्तों से, मूर्खों से
- 38:24पागलों से झगड़ा करोगे, ईंट हमारे का उठा के।
- 38:28बोबरा फोड़ देगा। तो आज के प्रवचन में अब तक का मूड
- 38:36प्रकृति सभी विजातीय द्रव्यों को बाहर निकालते हैं।
- 38:41तुम्हारा मन। बोलता है इसका मतलब मन विजातीय
- 38:44द्रव्य है। शब्द विजातीय द्रव्य है, फॉरिन
- 38:47मैटेरियल्स है। भीतर समा नहीं सकते।
- 38:49प्रकृति इनको बाहर धकेलने की चेष्टा करती है।
- 38:52तुम सहजे सहजे इनको छोड़ दो। अन्यथा फिर।
- 39:00दुख झेलने की। दोनों में से।
- 39:07एकत चिन्ह नहीं होगा ना? या तो दुख।
- 39:10झेलने की तैयारी करो। प्रकृति।
- 39:16लड़ती है जैसे तुम्हें पता नहीं। हमारी टर्न।
- 39:20सेल्स है। तुम्हें तो पता।
- 39:23भी नहीं चलता। ये लड़ाई झगड़ा।
- 39:26करते हैं। बाहर से आए हुए कीटाणुओं से ये
- 39:30हमारे सुरक्षा गार्ड हैं सिक्योरिटी गार्ड।
- 39:34बाहर से। आए हुए भी जाती है, कीटाणुओं से
- 39:37लड़ते हैं या खुद मर जाते हैं, उनको मार देते हैं।
- 39:43करो जा मरो की राजनीति होती है यह गाँधीवाड़ी।
- 39:51कितना ही। अहिंसक व्यक्ति हो।
- 39:55लेकिन एक। बात समझ लेना अहिंसा ही सब कुछ
- 39:59नहीं होती। एक वक्त ऐसा आता है जब गाँधी जी
- 40:03ने भी कह दिया था। 8 अगस्त 9 अगस्त को गिरफ्तार हुए
- 40:081942 को कुच इंडिया मूवमेंट में। करो।
- 40:13या मरो डू और। ये क्या है, करो या मरो?
- 40:28ये वक्त। अहिंसक लगेगा।
- 40:33लेकिन। बहुत अहिंसक वक्त है।
- 40:39इसके ऊपर। बाद में कभी विस्तार से बताऊँगा।
- 40:43हम बहक जाएंगे अपने रास्ते से। अगर घरों में।
- 40:52झगड़े हैं तो स्वाभाविक हैं। प्रत्येक घर।
- 40:58में झगड़ा होना चाहिए। अवश्य आंधी।
- 41:05तूफान चलते हैं तो। पत्तों पर जमी हुई ढोल छंट जाती
- 41:09है। ऊपर से बारिश तरो ताजा हो जाते
- 41:15हैं। नहा लेते हैं पत्ते लेकिन अगर
- 41:20घरों में झगड़े हैं। तो मैंने तुम्हे।
- 41:24बड़ा सरल रास्ता बताया। ये बात बहुत आगे भी बढ़ जाती है।
- 41:36और फिर। भी तो होश में आते हो।
- 41:42जब कोई। ज्यादा नुकसान हो जाता है।
- 41:46लोग गुस्से में। आकर मोबाइल मेरे शिष्य थे।
- 41:51गुस्से में आके मोबाइल फोड़ दिया। घर वाले से कैसे बात हो गई?
- 41:57बात हो। गई।
- 41:59मोबाइल के ऊपर क्यों झगड़ा करते हो भाई ₹1,50,000 का मोबाइल
- 42:03तोड़ते? सब कुछ लुटा।
- 42:12के होश। में आये तो क्या हुआ सब कुछ लुटा
- 42:23के। होश।
- 42:26में। आए तो क्या हुआ?
- 42:33दिन। में अगर चिराग जलाये तो।
- 42:44क्या हुआ? सब कुछ।
- 42:53लुटा के होश में आये तो क्या हुआ? लौटे पड़।
- 43:03जाते हो सब कुछ। भारी नुकसान हो जाता है।
- 43:07फिर होश में। आते है।
- 43:10रंग लाती। है यहाँ पत्थर पर घिस जाने के
- 43:13बाद। होश में।
- 43:15आता है बंदा ठोकरे खाने के बाद। फिर भी तो रास्तों।
- 43:20पर आओगे अभी आएगा। शांति, शांति से आ जाओ।
- 43:28एक कचरा? बाहर ऊपर छत पर जाओ निकाल दो।
- 43:31बड़ा आसान। रास्ता है कैथोरसिस कर दो ये
- 43:34क्रोध तुम्हारे भीतर है, ये कैंसराइटिस का मवाद है।
- 43:40ये फोड़ा चस चस करता है जो क्रोध जिसे तुम कहते हो।
- 43:46थोड़ा क्रिया। जो करो पांच 4 मिनट इस कचरे को
- 43:49बाहर निकाल दो और फिर देखना जाकर तुम्हारा फैसला बदल जाएगा।
- 43:57तुम्हारा। व्यवहार बदल जाएगा।
- 44:01तुम झोंको और ऐसा नहीं छोड़ता। इधर तुम।
- 44:08भी खींचे हो, इधर वह भी खींचे हैं पूरे ज़ोर से तुम खींचे हो यही
- 44:14तनाव होता है और तुम क्या करो अपनी ओर कैसा +2 अपनी ओर का रस्सा
- 44:27छोड़ दो। और दम से।
- 44:29बढ़ेगा दूसरा? अकल ठिकाने?
- 44:32आ जाएगी। कुछ और भी रस्ते होते हैं।
- 44:48सिर्फ एक। झगड़ा ही रास्ता नहीं होता,
- 44:51राहतें और भी हैं बसल की राहत के सिवा और भी दुखें जमाने में
- 44:57मोहब्बत के सिवा और भी तो काम करना है।
- 45:04भाई झगड़ों में। कब तक उलझी रहोगे?
- 45:11देखो अगर। दूसरा ज्ञानी है, दूसरा भगत है।
- 45:22तो तुम नहीं कर पायेगा तुम अपनी ओर कर ऐसा छोड़ फेंचो मत यही तनाव
- 45:29पैदा करता है। तुम्हें आसान।
- 45:36सा रिश्ता बता? जितना तुम।
- 45:42खींचोगे उतना ही वो ज़ोर से खिचेगा ना तुम झुकोगे ना वो
- 45:45झुकोगे इसलिए तुम झुको मत, तुम रस्साई छोड़ो।
- 45:53अल्लाह भाई। साहब को जियाँ तो यहाँ कर कर दिया
- 45:56सरदारी। अक्षरों की खेप असल में।
- 46:13भीतर क्रोध है। सुबह रोज़।
- 46:17उठकर ज्यादा नहीं 5 मिनट कैसर। क्रिया जो करो बड़ा हल्का हो
- 46:26जाएगा, दिन में ग्राहकों के गल नहीं पड़ोगे।
- 46:31ऑफिस में। जो ग्राहक आते हैं।
- 46:37उनसे दूर। के व्यवहार नहीं करोगे।
- 46:40प्रेम से बोलेंगे। और सभी।
- 46:43तुम्हारी प्रशंसा करेंगे। झगड़े से।
- 46:47बचने का उपाय। वह नरम नहीं।
- 46:50होता तुम हो जाओ। ये तो तुम्हारे।
- 46:55हाथ में, है ना? अब ये मत।
- 46:59कहना कि ये हमारे हाथ में नहीं है।
- 47:02फिर तुम अहंकारी फिर तुम परमात्मा के रास्ते पे नहीं चलना चाहते,
- 47:07परमात्मा का रास्ता यही सखाता है, दूसरा तो नहीं झुकेगा, वह तो अंधा
- 47:11भाग्यता है और भगत कभी झुकते हैं भगत नहीं कभी झुकते भगत झुकाते
- 47:17हैं, तुम झुक जाओ।