Latest / Baba ji Vijay Vats / 5 Mar 25 - तुम्हारी आध्यात्मिक यात्रा कैसे होने चाहिए? आज मेरा ग्रन्थ सम्पूर्ण हुआ! Very important
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- 0:14बाबा जी प्रणब जड़ से चेतन तक की यात्रा बड़ी सुखद रही।
- 0:33मन को बड़ा आनंद होगा। गहराइयों में उतरे उस प्रेम का
- 0:45स्वाद चखा आपका बहुत बहुत धन्यवाद।
- 1:10एक प्रश्न आखिर आपने कहा वह बोला नहीं जा सकता, फिर बोला।
- 1:32सवाल काम का है, अंतिम प्रश्न भी आपका इसका जवाब भी मैं दूंगा।
- 1:46जब बोला नहीं जा सकता तो बोला क्यों?
- 1:52करूणा वश बोला वो तो बोला ही कुछ और भी कारण थे।
- 2:04इसे समझिएगा एक छोटा बच्चा बोल नहीं सकता।
- 2:11उसका पेट दुःख रहा, सिर दुःख रहा, वह चिल्लाता है, रोता है।
- 2:24रोता है तो आप समझ जाते हो यह अभोर बच्चा इसका कुछ दुख रहा है
- 2:38एनर्जेसिक दे देते हो। मौन रहकर मन के ऊपर चेहरे के ऊपर
- 2:55अभिव्यक्ति न लाकर दर्द के बताया नहीं जा सकता।
- 3:02ऐसा ही परमात्मा है। मैं मौन तो था, इतने सन्तों ने
- 3:13मुझे क्यों कहा कि बोलो मौन तो था ही 35 वर्षों से मौन था।
- 3:23कोई कारण तो रहा होगा। कारण ये है के बोलने से सुविधा हो
- 3:36जाती है। इशारा करने से भी सुविधा हो जाती
- 3:43है समझने में। और बोलने से भी सुविधा हो जाती
- 3:50है। चंद्रमा वो रहा ये कहने के लिए
- 4:02इशारा करना पड़ता है और बोलना भी पड़ता है।
- 4:11न बोलने से अच्छा है बोल देना परमात्मा के बारे में नए बोलने से
- 4:26अच्छा है बोल देना। बच्चा रोएगा नहीं तो आपके मन में
- 4:38ये बात नहीं जाएगी कि इसका पुष्य दुख रहा है।
- 4:41खेलता रहेगा, दूध पीता रहेगा, किलकारगी मारता रहेगा।
- 4:48उछलकूद करता रहेगा तो आपको ज़रा भी शक नहीं होगा।
- 4:55इसका कुछ दुख रहा है और दुखता क्यों नहीं होता?
- 5:03बच्चा बड़ा मासूम है। कुछ लाकर बता देता है कि कुछ दुख
- 5:11रहा है। अगर न बताता तो मुश्किल थी, दर्द
- 5:21होता रहता। दर्द बुलवा देता है।
- 5:30यहाँ समझना बात को हमें भी दर्द आपका दर्द।
- 5:45बोला तो नहीं जा सकता। बोलकर वहाँ जाने की सुविधा
- 5:54उत्पन्न की जा सकती है। इसलिए सन्तु ने कहा बोलो मैं
- 6:01बोला। और आज ये अध्याय समाप्त हो गया।
- 6:07मेरा ग्रंथ पूर्ण हो बोलना तुम्हें स्पष्ट स्पष्ट बताता है
- 6:21तुम डॉक्टर के पास चलते हो। डॉक्टर को तुम बताते हो की ये
- 6:31तकलीफ है। ये ये तकलीफ है तो डॉक्टर को
- 6:41ट्रीटमेंट करने में आसानी हो जाती है।
- 6:43डायग्नोज़ करने में आसानी हो जाती है अगर छूट से जाके बैठ जाओ
- 6:50मूर्ति की तरह। और डॉक्टर से ये कहो तुम्हीं देख
- 6:55लो लक्षण तो बताने ही पड़ेंगे न आपको हमारे सामने आप बैठ के रोते
- 7:04हो? ऊंट पटांग के सवाल करते हो, हम
- 7:10जानते हैं इन्हें पता नहीं, कई भक्तों को पता नहीं होता कि उनका
- 7:18क्या दुःख रहा है तो यह हमें समझना पड़ता है।
- 7:27और हम बखूबी समझते हैं कि आपका क्या दुख रहा है, वह शांत क्या जो
- 7:34समझ न सके आपकी तकलीफ क्या है? क्यों बेचैन हुआ?
- 7:42क्यों रातो की नींद आपके हराम हुई जाती है।
- 7:46क्यों जागते हो सारी सारी रात? कुछ तो गडबड है अन्यथा सवस्थ
- 8:00व्यक्ति सो जाता है। गुराटे मरता है क्यों भाग रहे हो
- 8:09तुम? गद्दियाँ मिली तो हैं।
- 8:15रही। किसके पास धन कमाया तो है गया
- 8:24किसके साथ? मान सम्मान मेला तो है, लेकिन 1
- 8:34दिन तुम विदा हो जाते। हो?
- 8:41नॉलेज तुम इकट्ठे ही करते हो यूपीएससी के लिए कॉम्पटीशन के लिए
- 8:57नॉलेज काहे इकट्ठा कर रहे हो? विधि व्यक्ति जीने के लिए यह ढंग
- 9:10है एक जीने का स्टेप ब्य स्टेप बड़े हो गए पढ़ो, रोजगार ढूंढो।
- 9:26फिर आगे अपनी दुकानदारी को भराओ कबीलदारी को भराओ बोलना जरूरी है।
- 9:41बोलना सुविधा देता है। तुम प्यासे हो अगर कह दो कि
- 9:56प्यासा हूँ, पानी दे दो या भूखे हो कह दो, मैं भूखा हूँ भूख खाना
- 10:02दे दो। इससे आसान हो जाती हैं।
- 10:08चीजें सुविधापूर्ण हो जाती हैं। बोलना बस यही काम आता है और यह
- 10:16बहुत बड़ा काम है। आसान कर देता है, संतों के काम को
- 10:25आसान कर देता है। मेरे पास लोग आ जाते हैं।
- 10:34अभी आज का प्रश्न ओट प्रश्न पूछ लेते हैं।
- 10:41सब आविक है, इन्हें डांट भी लगानी पड़ती है।
- 10:54दुख तो रहा है तुम्हारा जख्म और बात तुम कर रहे हो।
- 11:01मनोरंजन के मनोरंजन से जख्म का दर्द कम नहीं होगा।
- 11:11सीधी सीधी बात करो। के जख्म में दर्द हो रहा है, हम
- 11:16पट्टी कर देंगे, एनर्जिस दे देंगे, इंजेक्शन लगा देंगे,
- 11:22डायग्नोज़ करेगा, ट्रीटमेंट करेगा।
- 11:29अगर पूछेगा क्या पेट भी मुक्त होने की इच्छा?
- 11:33बड़ा अनर्गल प्रश्न है, इसलिए तुम्हें बुरा लगता होगा और 2000
- 11:49वीडियो में बहुत कुछ ऐसा कहा गया। वह सिर्फ कूड़े कबाड़े को रोकने
- 11:59के लिए था और उसका कोई मकसद नहीं था।
- 12:07मुझे डांटने की बिमारी नहीं है। ना ही मैं किसी के ऊपर हुकुमराण
- 12:19होना चाहता हूँ, मैं स्वतंत्रता से जीने देना चाहता हूँ, मौज से
- 12:26जियो। लेकिन डांट लगानी जरूरी है, डांट
- 12:38लगाने से व्यर्थ के प्रश्न घर जाते हैं और सार्थिक प्रश्न चाहते
- 12:44हैं अजय सार्थिक प्रश्न है बड़ा सार्थिक प्रश्न है?
- 12:49जितना तुम्हें लगता है, उससे भी कहीं ज्यादा बोला नहीं जा सकता।
- 12:56फिर बोला तुम क्योंकि बोलने में सुविधा हो जाती है, जिसके बारे
- 13:03में बोल रहे हैं उसके बारे में कुछ।
- 13:07स्पष्टता में जाती है। सीधे सीधे बात समझ आती है जैसे
- 13:16शीशा रख दिया जाए। आपके सामने आप अपना चेहरा मोहरा
- 13:23निहार सकते हो, बिना शीशे के नहीं निहार पाओगे।
- 13:38आपको सच में पता ही नहीं है क्या बेचैन क्यों हैं ग्रंथ तो पूर्ण
- 13:52होगा अब ग्रंथ के बाद की बातें जो थोड़ी सी रहती हैं।
- 14:03ये भी खत्म हो जाएंगे। मेरा ग्रंथ मेरा काम पूरा हुआ और
- 14:16बाबा ने मुझे कहा था कि शिवरात्रि के बाद हमने वो वीडियो डिलीट कर
- 14:22दी। पूछुंगा चैनल के कंट्रोलर से अगर
- 14:30वो वीडियो पड़ी हो तो फिर से डाल देगा।
- 14:35मैंने कहा था अभी मत डालो ग्रन्थ को सम्पूर्ण हो जाने का बाबा ने
- 14:41कहा था शिवरात्रि के बाद भोजन को घटाना।
- 14:47बहुत चिंता मेरा दूध है आपको पता है, जहाँ तीन बार वहाँ आप दो बार
- 14:53कर देना, फिर एक बार कर देना फिर एक बार भी छोड़ देना।
- 15:04धीरे धीरे कुछ वक्त लगेगा। यह शरीर शांत हो जाएगा, क्योंकि
- 15:10इस शरीर से जो काम लेना था और बिल्कुल वही हुआ।
- 15:21शिवरात्रि के बाद ही यह कथा संपूर्ण भी।
- 15:28आज आज ही ये कथा पूर्ण हुई। आज ही मुक्ति की अंतिम गाथा आपसे
- 15:35बोली गई मुक्त कौन होता है? चला सब पत्थर से।
- 15:47और पहुँच गया मुक्ति यथासंभव मैंने सब कहने का प्रयास किया
- 16:01बहुत से लोगों को। ठेस भी लगी होगी।
- 16:12मुझे दुख है संत किसी के ह्रदय को दुख दे।
- 16:24अति दुखदायी बात है लेकिन कई बार मजबूरी होती है।
- 16:31कई बार सर्जन की तरह काम करना पड़ता है।
- 16:34तुम्हें चाहे कसाई लगे हालांकि सर्जन वो ही करता है, काटता है,
- 16:41पीटता है। तुम्हारे अंगों की और कसाई भी वही
- 16:46करता है और कई बार सर्जन भी तुम्हें बुरा लग सकता है, लेकिन
- 16:58मैंने इन करीब पांच वर्षों की अवधि में सर्जन का काम किया है।
- 17:06मान्यताएँ उगाड़ी हैं और सत्य में उगाड़ी हैं।
- 17:14इसको फिर सुन लीजिए, मान्यताएँ थोप नहीं तुमने जो ऊपर से थोप
- 17:20लिया मान लिया। ये पाखंड धारणा इनको मैं नहीं
- 17:28दौड़ा टूट गई हूँ, बड़ा शुभ है, अगर अभी भी बनी हुई है तो फिर
- 17:42मेरे बोलने का कोई अर्थ न हुआ। आज ही क्षमा चाहूंगा, सर्जरी
- 17:54सम्पूर्ण भी गले हुए, अंग बाहर निकाल दिए गए जितना मैं कर सकता
- 18:01था। यद्यपि अभी गला बहुत कुछ बाकी है।
- 18:10नए नए अंग गलते रहेंगे नहीं नहीं, सर्जन पैदा होते रहेंगे, रिमूव
- 18:18करते रहेंगे। ये सिलसिला चलता ही रहेगा।
- 18:27ईश्वर की इस सृष्टि को समझना असंभव है।
- 18:36अगर कोई व्यक्ति कहे मैंने समझ लिया।
- 18:41तो वह खुद भी गुमराह है और आपको भी गुमराह कर रहा है वहाँ से उठकर
- 18:47आ जाना है क्योंकि वह ना समझा जाता है जैसे प्याली में सुद्र
- 18:56नहीं आता। नहीं बोला जा सकता है।
- 19:02बस बोलना है सुविधाजनक है तुम्हें बातों को समझने में या उस दिशा
- 19:13में चलने में सहायता कर देता है। ऐसे तो प्याली का काम भी कुछ तो
- 19:24काम प्याली भी करते है। समुद्र को नहीं समझ सकती प्याली
- 19:31लेकिन ये संकीर्तन, ये सत्संग ये थोड़ा थोड़ा आपको सहायता करते है।
- 19:41शोर हैं लेकिन थोड़ा थोड़ा सहायता करते हैं तो सहायता ये करते हैं
- 19:49कि वो वक्त जो आपका किसी बुरे काम से गुजर सकता था।
- 19:59वह वक्त यह बता देती है। कीर्तन, सत्संग, भजन बस इतना सा
- 20:06काम करती है। अब घर बैठे माला फिर रहे, चाहे
- 20:14उसका कोई भी प्रयोजन न हो। लेकिन एक प्रयोजन तो है कि उस
- 20:20वक्त में आपने कतल तो नहीं किया? उस वक्त में आपने दूसरों को दुःख
- 20:29तो नहीं दिया है, इतना फायदा तो जरूर होता है।
- 20:36और अगर तुम कहो के माला फेरने से भगवान मिल जाता है नहीं ये नहीं
- 20:49है को संगति से तुम बचे जाते हो सत्संग में आके।
- 20:59संकीर्तन में आकर तुम जब नाचते हो, एकबार ये भूल जाते हो, घर बार
- 21:12की पीड़ाओं को भूल जाते हो। तुमने देखा?
- 21:19कोई प्लेयर होता है, हॉकी का उसे चोट लग जाती है, पांव में खून
- 21:25बहता है, दर्द हो रहा है, लेकिन जब तक वह खेलता रहेगा तब तक न तो
- 21:32उसे दर्द का पता चलेगा। नहीं, उसको ये पता चलेगा कि खून
- 21:38निकल रहा है क्यों? वह मस्त है?
- 21:45वह खेल में व्यस्त है, व्यस्त होने के अपने गुण हैं।
- 21:54लेकिन व्यस्त होने का ये गुण नहीं के व्यस्त होने से तुम परमात्मा
- 21:59मिल जाए। परमात्मा तो ये व्यस्त होने से ही
- 22:05मिलेगा, लेकिन इन चीजों का महत्त्व जरूर है।
- 22:14जो वक्त आपने सत संघ में भजन में कीर्तन में गायन में बिता दिया वह
- 22:22वक्त आपका कुकृत्य करने में नहीं गुजरेगा।
- 22:30ना आप झगड़ा करो कुछ वक्त। कोई लड़ाई, कोई द्वेष, ईर्ष्या,
- 22:35नफरत कुछ नहीं करोगे, प्रभु भजन करोगे और कुछ लाभ होगा।
- 22:44थोड़ी शांति भी आई है वो मानसिक ही हो चाहे लेकिन आएगी।
- 22:58तो आज भी जाते जाते एक प्रश्न पूछ लिया, बोला नहीं जा सकता था तो
- 23:04बोलो बस यही बोलने का मतलब था बोलकर चीजें आसान हो जाती है।
- 23:16डॉक्टर को डायग्नोज़ करना आसान हो जाता है, ट्रीटमेंट करना आसान हो
- 23:20जाता है। मैं बोला तो तुम्हें पता चला मूड
- 23:29धारणा को मैंने तोड़ा, तुम तोड़ो या ना थोड़ा स्वतंत्र रहो।
- 23:36तुम्हारी माल कीयत तुमसे कोई नहीं छीन सकता तुम चाहो तो गोबर खाओ,
- 23:46तुम चाहो तो स्वादिष्ट पकवान खाओ तुम मालिक हो।
- 23:59हमने मूड धारणाओं को तोड़ने का प्रयास किया है और इन मूड धारणाओं
- 24:05को तोड़ने में देखिये खंडहर इमारत यह शिकायत न कर के मुझे करा दिया।
- 24:19अगर हम नई न वो सह रहे तो शिकायत जारी है।
- 24:24खंडहर इमारत को गिरा। दिया नीम।
- 24:30तक गिरा दिया। नीम तक पाड़ दिया, नई नीमय बिछा
- 24:35दी। और उसके ऊपर बड़ा सुन्दर महल उतार
- 24:38दिया। इतना सा काम हमने कर दिया।
- 24:45अब खंडहर ये शिकायत न करे के मुझे गिरा दिया क्योंकि इसके बिना संभव
- 24:51भी नहीं था। खंडहर को गिराना ही पड़ता है।
- 25:02नई महलों को वो शारित करने के लिए आया है तो हमने गिराया फिर भी।
- 25:12खंडहर इमारतों से हम क्षमा प्रार्थी हैं, क्या आपको घराया
- 25:21आपसे क्षमा चाहते हैं? बहुत से लोग कहेंगे राधे राधे का
- 25:28मजाक उड़ाया हाँ खंडहर घराया। महल उसारा सही रास्ता बताया चुप
- 25:40हो जाओ अपने भीतर उतर जाओ फिर भी राधे राधे करने वालों को भावनाओं
- 25:48को ठेस लगी तो क्षुम पर अर्थी। और कोई रोकथा नहीं किसने तुम्हारे
- 25:59गल में फंदा नहीं डाला? ये फंदा डालने वाले गलत हैं।
- 26:10और कोई छुड़ाता नहीं, तुमसे के रात दे रात दे छोड़ो ये भी गलत
- 26:15है। उन्होंने अपनी बात बता दी।
- 26:22हमने अपनी बात बता दी जैसा उन्होंने।
- 26:26अनुभव किया वो बता दिया। जैसा हमने अनुभव किया वो बता
- 26:31दिया। आपको जो अच्छा लगे वो चुन लो।
- 26:40इसमें नाराजगी, शिकायत की कोई बात नहीं।
- 26:50जड़ से चेतन तक परिपूर्ण प्रक्रिया मैंने बताई कर्म फिर
- 26:57पीपीआइ सब जो मैंने किया, लोग मुझे कहते थे पापा एस्टल
- 27:03ट्रैवलिंग जयति नहीं मैंने कहा तुम ना जे जाओ।
- 27:10अगर जचती नहीं तो तुम जिंचाते क्यों हो?
- 27:15मैंने कब कहा तुम जिंचाओ अगर कुछ मेरा कहा तो मैं भाता नहीं हूँ
- 27:24ठीक नहीं लगता। गप लगता है बुरा लगता है तो तुम
- 27:32मालिक हो भाई मैंने तुम्हारा गला नहीं दबाया कि मानो नहीं नहीं संत
- 27:41ऐसा करेगा भी। तुम चाहो तो मानो तुम चाहो तो न
- 27:49मानो क्योंकि मैं जानता हूँ एक ही अस्तित्व के हम अंश में कोई किसी
- 28:02से श्रेष्ठ नहीं। प्रश्न तो उठेंगे जब कृष्ण बोलते
- 28:15हैं कि हाथियों में मैं ऐरावत आती हूँ, घोड़ों में मैं उच्च श्रव
- 28:21घोड़ा हूँ, जल भंडारों में मैं सागर हूँ।
- 28:30तो वह सर्वोच्च की बात करते हैं। क्या भेद की बात करते हैं?
- 28:33नहीं, उनका बोलने का मकसद कुछ और था, वो मैंने समझा दिया आपको वो
- 28:44आपके मनोबल को ऊंचे से ऊँचा लेके जाते हैं।
- 28:48कि तुम वो हो जहाँ जाकर तुम उच्चतम हो जाते हो इसलिए वो
- 28:55उच्चतम की बात करते हैं, इशारा करते हैं, उच्चतम का।
- 29:05जो हाथी एरावत नहीं उसको कन्डेम नहीं करते।
- 29:11तुम समझ लेते हो कि दूसरे हाथियों को कन्डेम नहीं करते हैं, लेकिन
- 29:16ऐसा नहीं है। सिर्फ कामधेनु ही गाये नहीं और भी
- 29:23गाये हैं। देसी है, राठी है, सभी गायें हैं
- 29:36और जो हमें पोषण देता है, वो हमारी माता जो प्यास बजाता है वह
- 29:44गंगा माता। जो भूख मटाता है वो।
- 29:48आता है मैंने। इसलिए बोला कि बोलने से सुविधा हो
- 30:00जाती है, बच्चा बोल नहीं सकता, मुश्किल आती है।
- 30:04पता नहीं क्या दुख रहा है, दुख तो रहा है, इसमें तो कोई शक नहीं है
- 30:11अन्यथा। चीखो पुकार न करते अगर तुम दुखी न
- 30:15होते तुम कुछ ढूंढ तो रहे हो बेला शक अन्यशा धन में क्यों ढूंढ़ते
- 30:29क्या ढूंढ रहे हो? पदवी में क्यों ढूंढ़ते हो, क्या
- 30:35ढूँढ़ रहे हो? मान सम्मान में क्या ढूँढ़ रहे हो
- 30:45सुख सुख देने वाली? पदार्थों में तुम क्या ढूंढ रहे
- 30:53हो कुछ तो ढूंढ रहे हो और संत जानता है तुम क्या ढूँढते हो, मैं
- 31:02तुम्हें ढूँढने देता है और ढूंढ ढूंढ के तुम थक गया हो।
- 31:18थक? जाते।
- 31:25हो ढूँढत ढूँढत नैना हारे ढूँढत ढूँढत नैना हारे।
- 31:40चलते चलते पांत के ढूँढत ढूँढत नैना हारे चलते चलते हाथ के।
- 32:00कैसे जियोगी बिना पिया के कैसे? जियोगी बिना पिया के।
- 32:17ये तो मुझे। बतला कैसे जियोगी बिना पिया के ये
- 32:27तो बता दो मुझे कुछ तो ढूंढ रहे हो अन्यथा ये।
- 32:37सुखी, सुखी, रूखी, रूखी, अँखियाँ, ये रूखे, रूखे वार।
- 32:45ये। उदास चेहरा ये गमगीन नोहर।
- 33:00या ढलती गिरती। हुई चाल।
- 33:05यह वीरान सी। रानी कुछ तो कहती।
- 33:18तुम्हारा कुछ हो गया। है।
- 33:25तुम उसे ढूंढ रहे। हो?
- 33:27और संत जानता है। तुम क्या ढूंढ रहे हो और।
- 33:33जब तुम थक जाते। हो?
- 33:36आँख बरस से। जाती हूँ दुख के आंसू अश्क बनकर
- 33:46बरस से जाते हैं। तो संत को बोलना।
- 33:50ही पड़ता है। सब्र की इम्तहा।
- 34:00के सब्र की इम्तहा। और इसकी चीतकार संत को बोलने के
- 34:04लिए विमर्श कर देते थे। इसलिए संत बोलता।
- 34:11है उसे पता है। बोला नहीं जाएगा फिर भी।
- 34:20बोलता है। क्यों बोलने से कुछ सुविधा मिल
- 34:23जाएगी? बोलने से कुछ दिशा।
- 34:26मिल जाएगी। बोलने से कुछ मार्ग समझ में आ
- 34:31जाएगा। इधर नहीं चलना इधर चलना।
- 34:36बस इतना सा समझा। जाए तो काफी है।
- 34:40मेरे देखे काफी है। और संत शपथ।
- 34:46में पथ प्रदर्शन के लिए ही बोलता है।
- 34:53मार्ग सुजाता। है।
- 34:57इधर चले जाओ। ये रास्ता सही है, वही मैंने
- 35:01सुझाया मन से ही है। शोर से ही नहीं।
- 35:06है। शोर करके भी देख।
- 35:11लो। भोग से ही नहीं, भोग के देख लो
- 35:25परमात्मा ने। सृष्टि भोगने के लिए बनाई देखने
- 35:29के लिए ही नहीं बनाई। फिर समझना मेरी बात।
- 35:33को। भोग में नहीं है एकन परमात्मा ने
- 35:43यह। सृष्टि बनाई।
- 35:47भोग में नहीं। है यह जानने के लिए।
- 35:52पता कैसे लगेगा? भोगकर है।
- 35:56जो भी सी बात है भोग में नहीं है, ये पता लगेगा भोगकर।
- 36:05अनुभव में जाए। बिना उसका अनुभव होगा कैसे?
- 36:18परमात्मा ने सृष्टि। बनाई है।
- 36:24इसलिए नहीं कि। सृष्टि में है।
- 36:30इसलिए कि सृष्टि? को भोग लो, देख लो।
- 36:36भोगकर दुख मिलेगा, अंततः दुख मिलेगा।
- 36:46दुख से। वैराग्य आएगा संसार के प्रति
- 36:53वैराग्य। और वैराग्य का अर्थ तुम्हें
- 37:00तुम्हारी बेड़ियों का दिख जाना। फिर तुम बेड़ियों की।
- 37:06चेष्टा करोगे तोड़ने की उसे कहते हैं मोक्ष मुक्ति की इच्छा।
- 37:17और जब मुक्ति की इच्छा। पैदा हो जाती है तो मुक्ति का
- 37:21साधन भी मिल जाया करता है। अगर तुम्हें साधन नहीं।
- 37:27मिला तो पक्का है के मोमुक्षा का जन्म नहीं हुआ।
- 37:39अगर तुम्हें आनंद। चाहिए।
- 37:43तो आनंद की प्यास। नहीं जग पक्का है।
- 37:47जीस दिन आनंद की। प्यास जग गई अब यह मेरे शवदों को।
- 37:54ध्यान से सुनना। कई बार सुनना।
- 37:59आनंद की प्यास। जगन।
- 38:04जीस दिन आनंद की। प्यास जग गई।
- 38:10आनंद चारों तरफ हर जगह वो ही। है बिन नामे नाही कोठा।
- 38:21सारे पसारे में। जीता।
- 38:23किता तेता ना? वह आनंद ही सब जगह है।
- 38:31जीता किता। जितना पसारा है।
- 38:35वो आनंद ही है। परा हुआ है।
- 38:39आनंद ही आनंद। है।
- 38:44लेकिन तुम आनंदित। क्यों नहीं हो रहे?
- 38:46वह मक्षा नहीं जगी, वह नहीं आया। अभी लगता है पदार्थ।
- 38:54में मिल जाएगा। अभी लगता है।
- 38:57शोहरत में मिल जाएगा। अभी लगता है।
- 39:01मेहंगी घड़ियाँ डालने से मिल जाएगा।
- 39:06तो डाल। लो भाई, हर जगह कुछ नहीं लेकिन।
- 39:16वो मुक्षा जगनी चाहिए। वैराग्य आना चाहिए।
- 39:23अन्यथा महंगी घड़ियाँ। डालना बेकार हो जाएगा।
- 39:28भोगो लेकिन भोगते ही मत। रहो।
- 39:35भोग में दुख है यह सत्व भी। निकालो।
- 39:46और दुख? है और जिसने ये सत्व नहीं निकाला?
- 39:56वह मूर्ख है। वह प्रथम जमात।
- 40:05के उस विद्यार्थी की तरह है। जो कै कलम।
- 40:12उसके साथ ही चिपटा हुआ है। कै कलम होता है।
- 40:17और कुछ नहीं होता है। कै।
- 40:19कलम का ही। होता है।
- 40:23ये मोड़ता है वो बहुत से भक्त। यहीं खड़े हैं राधे राधे राम राम।
- 40:37सत्य है इसमें कोई सख्त तो। नहीं है।
- 40:43राधे? राधे लेकिन कुछ आगे भी चलो ना
- 40:49भाई। एक मशीन सी।
- 40:58कुंए के किनारे पे बैठा था होली पर बोल रहा था 25।
- 41:0525252525। पांच से आदमी गुजरा।
- 41:16एक ही आवाज़। राधे राधे।
- 41:20राधे राधे। खैर, क्या ये क्या?
- 41:23बात है गिनती आती नहीं क्या इसको? राधे राधे वालो को।
- 41:28गिनती आया नहीं करते। क्रीमा क्या?
- 41:37252525। उसने हिलाया फ्रेमचे?
- 41:46को। अरे भाई गिनती आगे भी होती है
- 41:51मैं। तो काम जा रहा।
- 41:52था बड़ा जरूरी? मैंने कहा चलो मैं।
- 41:56उपकार किये जूं गिनती आगे भी होती है।
- 42:04अफेम जी कहने लगा। यकीन न हो तो आगे हो के देख ले।
- 42:12अब वो तो बेचारा। समझाने आया था कि पक्षी से आगे भी
- 42:16होती है। भाई क्या सिर्फ कलम का नहीं होता?
- 42:20यह सिर्फ अनार का नहीं होता। तुम यह क्या कर रहे हो?
- 42:24और राधे राधे इससे भी आगे हैं। शोर नहीं शोर।
- 42:28से भी आगे जाओ, शोर में ही चले जाओ।
- 42:34खींचे कहने लगा जाके। देख ले भाई अगर इतवार ना हो तो?
- 42:3925 ही हैं सर, ऐसा क्या है? वो कुएं के किनारे।
- 42:49किनारे आया उसने भीतर। देखा उसने पीछे से लात मार दी।
- 42:55कहते 262626 ऐसे हैं राधे राधे? वाले?
- 43:08हसते के तो करो। भाई?
- 43:14राम, राम, राधे, राधे कौन कहते हैं?
- 43:17गिनती तो 25 वी। होती है, बिल्कुल ठीक।
- 43:25और अगर कोई तुमसे कहे के आगे भी होती है तो तुम कहोगे आगे जाके
- 43:31देख लो पीछे से धक्का मार देते हो जब तू भी हमारी जमात मंचा तो भी
- 43:35चल बेड़ों के बाड़े में। आगे भी।
- 43:42होती है भाई। तुम्हारे लिए नहीं होती।
- 43:48होगी तो चलो रुक जाओ और क्या है? बोला क्यों?
- 44:03बोलने से सहायता। हो जाती है, सुविधा हो जाती है।
- 44:09कुछ तुम्हें इशारा। मिल जाता है।
- 44:11थोड़ा हौसला हो जाता है। और सही राह मिल।
- 44:16जाए। तुम्हें यही चाहता है संत।
- 44:22संत तुम्हारी आँखों को। रोकते हुए देखना नहीं चाहता है,
- 44:26उसका भी हृदय पिघलता है। संत हृदय।
- 44:31नवनीत समान। मक्खन के समान।
- 44:43थोड़ा सा ताब? लगा बिगड़ जाता है।
- 44:49हम बोलते। हैं।
- 44:52तुम्हारे दुख के कारण बोलते हैं, यह तो ठीक दूसरा भी कारण है।
- 45:02बोलने से। चीजें आसान हो जाती है।
- 45:08डॉक्टर है तो। इलाज के लिए है पड़ गया है पूरा।
- 45:17फिर तुम। अगर बता दो कि पेट दुःख रहा है,
- 45:22वह एंटीस पास मॉडल को दे देगा। तुम कहते हो वजन दर्द।
- 45:27है वह एनर्जी से दे देगा। बस इतना सा सुविधा हो जाएगी उसको।
- 45:41बोला नहीं जा सकता। बिलकुल ठीक।
- 45:47बोलने से सुविधा। हो जाती है।
- 45:52इसलिए संत बोलता। है, बोलना शुभ है, किसी कारण से
- 45:58बोलता है। और इतने लोग आए क्या तुम उन्हें
- 46:05भी। मूर्ख हो गए।
- 46:09मैंने खुद तो नहीं। बोला।
- 46:11उन्होंने कहा बोलो तो बोलने में कुछ होगा ना?
- 46:16तभी कहा ना उन्होंने। तो बोलो।
- 46:20अनसा क्यों कहते सोए हुए थे चैन? से ओढ़े हुए कफन।
- 46:36सोए हुए थे। चैन से ओढ़े हुए कफन।
- 46:41यहाँ भी सताने। आ गए।
- 46:43किसने पता बता दिया? अगर ये ढूंढ ढूंढ।
- 46:51के आए मर तो गया था 85 में मर गया था।
- 46:5828 अक्तूबर। को कफन ओढ़ा लिया था।
- 47:05यहाँ भी सताने। आ गए।
- 47:07किसने पता बता दिया? फिर क्यों आये?
- 47:13के। बोलो ये तो प्रबुद्ध, हमारे
- 47:19पूजनीय स्थल पे लगते हैं। इनके तरनार।
- 47:25बिंदुओं में हमारा मस्तक नमन है, लेकिन आज गर्म से सम्पूर्ण होगा।
- 47:37इसलिए बोला बोलने से सुविधा हो जाती है।
- 47:42और। परमात्मा ने जुबान।
- 47:44सिर्फ ट्रस्ट के लिए नहीं दी। और भी अंग।
- 47:48हैं बोलने में जो सहायता करते हैं।
- 47:57अवश्य ही ईश्वर। की कोई नियति रही होगी।
- 48:02कारण रहा होगा। जो मनुष्य को।
- 48:07बोलने की संभावना दे। बोलना सुविधा पैदा।
- 48:14करता है। इसलिए बोला।
- 48:24जड़ता से। चेतना का सफर अज्ञानता से ज्ञान
- 48:31का सफर, दुख से आनंद का सफर। तुम भी का दुखित तुम।
- 48:48हो लाख छिपाओ छिप न सके का? असली नकली।
- 49:01चेहरा। दिल की बात बता।
- 49:05देता है असली नकली चेहरा। तुम्हारा चेहरा हो।
- 49:15जाता है। सुखी न।
- 49:23हँसते नहीं हो पर। शान्ति भी नहीं हो मीरा की तरह।
- 49:32नाचो न कोई बात नहीं। कबीर की तरह, सुरती।
- 49:38में न जाओ, नानक की तरह गयो मत। कोई बात नहीं।
- 49:44लेकिन बुद्धि की तरह। महाशांति में मूर्ति की तरह बैठ
- 49:49तो जाओ। लेकिन तुम कुछ भी।
- 49:52नहीं कर पाते। साफ मतलब है कि सुखी तो तुम नहीं
- 49:56हो। पहले स्वीकार करना।
- 50:01होगा कि मैं दुखी हूँ। यह संसार तुम्हें दोगला बनाता है।
- 50:13भीतर दुखी हो तुम। घर कहीं।
- 50:16बाहर जाते हो? फेस पाउडर लगा लेता हूँ।
- 50:24हमारी दुकान थी। कॉस्मेटिक्स की, लेदर की, पश्चिम
- 50:27की ओजारी का। मैं देखता हूँ वहाँ।
- 50:33लेडीज औरते। आती।
- 50:36और कई औरतों को मैं ही अटेंड किया करता था।
- 50:47छः छः फेस और क्या करोगे इसको? लेकिन मुझे पता है एक।
- 50:57के ऊपर दूसरा दूसरे के ऊपर तीसरा चोप लेंगे।
- 51:02वो कुछ और ही बन। जाएगा वो तुम्हारा असली चेहरा
- 51:12नहीं है। ये है फेस पाउडर।
- 51:17है। संसार तुम्हे दोगलापन सकाता है।
- 51:25काश। काश तुम।
- 51:28समाज को काट दो। समाज को मत काटने।
- 51:35लग जाना समाज की मान्यता की बात करते हो?
- 51:42समाज की मान्यता। को काट दो।
- 51:45नितांत अकेले। हो जाओ।
- 51:49स्वतंत्र हो जाओ नितांत अकेले व्यक्ति हो, व्यक्ति हो जाओ।
- 52:05कोई मेकअप करके। बाहर न जाओ जैसे हो वैसे ही नजर
- 52:08हो। संसार की नजरों में।
- 52:13तुम कैसे भी हो? लेकिन एक शक्ति।
- 52:18है जो कण कण में व्याप्त है और। उसे ही मैं कहता।
- 52:23हूँ जिससे मुकक्षा जग गई। के से खेड़ा।
- 52:32छुड़ाना है ये दुख देता है संसार उस कण कण में वो ही है कहीं जाना
- 52:38नहीं पड़ेगा। वहीं उतर आएगा।
- 52:44वो। कहाँ नहीं है वो?
- 52:50बस तुम तैयारी। दिखाओ।
- 52:56सुखी होने की। तैयारी दिखाओ।
- 53:01दुखी हो यह। सरकार को ये पहला स्टेप है।
- 53:08वास्तव में तुम। दुखी हो तुम्हारी अंतरात्मा बीत
- 53:11गई है संसार के तीर खाते खाते जख्मी हो तुम स्वीकार?
- 53:23करूँ कि मैं? दुखी हूँ।
- 53:29जीस शिक्षण तुमने। स्वीकार कर लिया कि मैं दुखी हूँ।
- 53:34उस क्षण निदान। भी मिल जाएगा तुम्हें?
- 53:38मानना पड़ेगा मैं। बीमार हूँ।
- 53:44तो डायग्नोज़ भी मिल। जाएगा।
- 53:50डायग्नोज़ मिल गया तो? ट्रीटमेंट भी मिल जाएगा।
- 53:53इसका ट्रीटमेंट तो है भाई। इस दुख का।
- 54:00तो इलाज है इस दुख का इलाज। तुम खुद ही हो।
- 54:13तुम ही ने दर्द। दिया और तुम दबा देना, तुम ही
- 54:17भटके हो? और तुम ही भटकाव।
- 54:21को छोड़ दो, ठहर जाओ। तो भटकाव मिट जाएगा।
- 54:25दर्द भी मिट जाएगा। एक ही सी बात।
- 54:32है, कोई नहीं शब्द पाता। संसार तुम्हे दोगलापन।
- 54:41सीखाता है बहु गलापन सीखाता है। इसलिए भीतर से लाई।
- 54:50झगड़ा करके आते हो मियाँ बेबी बाहर ठक के लगाते हो?
- 55:00मैंने किसी से पूछ। लिया क्या समस्या है?
- 55:04मैं रोज़ देखता हूँ तुम झगड़ा करते हो।
- 55:07तुम बेलन मार देती। हो?
- 55:12वो चपत लगा देता। है जॉब से?
- 55:18और बाहर तो मुस्कराते। आते हो दोगलापन के बाबा क्या कर?
- 55:30अगर बाहर हँसी नहीं। है।
- 55:34तो पड़ोसियों की आग। कैसे लगेंगी?
- 55:38उन्होंने बोला। तो कुछ और था।
- 55:39खैर। मैं सार्वजनिक रूप से।
- 55:42नहीं बोलूँगा? अगर हँसेंगे नहीं?
- 55:51तो पड़ोसी पड़ोसियों को आग कैसे लगेंगी?
- 55:57तो, मनसा तो तुम्हारी ये है कि पड़ोसियों को आग लगानी।
- 56:02और ढूंढ़ते हो तुम। खुशी आनंद।
- 56:05जो दोगे वो ही मिलेगा याद रख लेना।
- 56:09इस संसार में एवरी एक्शन देर इस इनिकल एंड अपोज़िट एक्शन जो दोगे,
- 56:16जलन दोगे तो जलन मिलेंगे। तुम पड़ोसियों को जलाना।
- 56:22चाहते हो? वापसी में जलन ही।
- 56:27आएगी। फिर पूछना मत के बाबा मैं जल
- 56:30क्यों रहा हूँ? एक बार मेरी।
- 56:37बातों पर यकीन तो करके देखो अमल। तो कर के देखो।
- 56:45मैं कहता हूँ तुम माफ़। कर दो।
- 56:51शत्रु सो बिगड़। गया तुम्हारे।
- 56:58तुम माफ़ कर दो। क्योंकि बिगड़ी हुई चीज़।
- 57:03कभी सुधरती नहीं। ये पक्का अब टूट ही गई।
- 57:13तो तुम। ऐसे ही क्षमा कर।
- 57:14दो अब बदले में तुम क्या पाओगे? क्षमा के बदले भी।
- 57:24तुम भी क्षमा पाप है। अब एक आखिरी क्वेश्चन।
- 57:31का जवाब मैं देता हूँ क्योंकि यहाँ तक आ गया।
- 57:36टोक मुझे कहते हैं। परमात्मा।
- 57:39वक्षणवार है वक्ष। देता है क्षमा कर देता।
- 57:43है, बिल्कुल कर देता। है।
- 57:48अब समझना ठीक से। बात करो।
- 57:51क्षमा उन्हें करता है। जो औरों को क्षमा कर देते हैं।
- 57:59तुम दूसरे के गुनाहों? को क्षमा करता हो?
- 58:05परमात्मा तुम्हें। क्षमा कर देगा।
- 58:08पक्का मैं गारंटी देता हूँ। बेहद शमशीर तो।
- 58:14है। परवर दीगार है तुम्हें माफ़ कर।
- 58:23देगा। लेकिन पहले।
- 58:28तुम्हें माफ़ करना पड़ेगा। अगर तुम माफ़ करना।
- 58:33सीख गए ये कला। अगर तुमने रिवेंज।
- 58:38ना लिया। निकाल दो अपने।
- 58:41हृदय से सब बदलों को सब बदले की भावना को निकाल दो।
- 58:48किसी से कोई बदला। नहीं लेना है।
- 58:54फिर उम्मीद करना। उससे कह दूंगा साफ हसर में पूछेगा
- 59:02घर खुदा। कह दूंगा साफ।
- 59:07हसर में पूछेगा घर खुदा। लाखों गुणा की।
- 59:12है तेरी रहमत के ज़ोर। पर श्रीकृष्ण।
- 59:28गोविंद। हरे।
- 59:33मुरारी। हे।
- 59:37नाथू नारायण वा सुरे। पितुमात।
- 59:56स्वामी सखा हमार पितुमात। स्वामी सखा हमार।
- 1:00:14हे। नाथ नारायण, वासुदेव।
- 1:00:23श्री कृष्णा। गोविंद हरे मुरारी।
- 1:00:32हे नाथ? नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण
- 1:00:39गोविंद, हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:00:49फिर मात स्वामी सखा हमार फिर मात स्वामी सखा हमार हेनाथ नारायण
- 1:01:02वासुदेव श्री कृष्ण। गोविन्द।
- 1:01:07हरे मुरारी हेनाथ नारायण वासुदेव।