Latest / Baba ji Vijay Vats / 22 Feb 25 - क्या आपके कर्म सही हैं? जानिए कर्म करने की सही विधि! अज्ञात आध्यात्मिक रहस्य!
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- 0:01बाबा जी प्रणव आज के वीडियो में आपने भ्रम की बात की।
- 0:10ब्राह्मण मिथ्या ये जो भ्रम है पूजा पाठ, हवन, यज्ञ।
- 0:19स्नान, श्रद्धा, श्राद्ध और भी बहुसेवरम पाखंड आदि उसकी ही बात
- 0:31कर रहे हैं। ना बाबा कृपया बताने का कष्ट
- 0:38करें। आपके श्रीचरणों में प्रणाम,
- 0:55यह ऊपरी ऊपरी सतह ही भ्रम है, सिर्फ चलना होगा एवं भ्रम को
- 1:05तोड़कर। एक संस्कार पढ़ जाएगा आपको
- 1:13ब्रह्मों को तोड़ने का। फिर आखिर में असली साहस तो आखिर
- 1:21में जुटाना पड़ेगा, जब तुम्हारा ये भ्रम भी टूटेगा।
- 1:26आई ऍम नॉट दी बॉडी, आई ऍम नॉट दी मैएंड इस्राफ्ट भ्रम है, धोखा है,
- 1:37प्रवंचना है, मैं श्री नहीं हूँ, मैं मन नहीं हूँ।
- 1:45यह भी तुमने मान लिया है इस शुभम ने बड़े बड़े धराशाई कर दिया।
- 1:55है और जब तक जानने वाले लोग बैठे। हैं।
- 2:07तब तक तो वो बता जाएंगे, उसके बाद आपका क्या होगा?
- 2:17ये पास्ट लाइफ रिग्रेशन पिछले जन्मों का पता करना तुम कौन थे ये
- 2:26कष्ट आया। किस कारण से आया ताकि आप आगे से
- 2:30ये काम न कर सको। भाई सीधा सा काम है, पाप करना बंद
- 2:37कर दो, ये किस कर्म का प्रणाम है? आगे से न करो फिर भूल जाओगे अगले
- 2:44जन्म में। पाप ही बंद कर दो पाप यानी मैं
- 2:56भाव से किया हुआ कर मैंने किया यह पाप है हमारे दो जन्मों के बीच
- 3:08में एक बहुत मोटी फौलादी दीवार होती है।
- 3:13मैंने पहले भी आपको समझाया था। उसकी कुंजी चाबी हमारे पास है और
- 3:23किसी के पास नहीं। नोबडी एल्स कैन सी दट।
- 3:29कोई भी दूसरा व्यक्ति उसे देख नहीं सकता।
- 3:34लेकिन आज हैं जो पहले 400 लेते थे, अब फ्री में बताते हैं कि आप।
- 3:41कौन थे पिछले साल? वो फ्री का तो एक धोखा।
- 3:46है। लूटने का प्यार से?
- 3:51अवकाश मिथ्या यानी प्रवंचना, छल, धोखा के कर्मकांड पूजा।
- 4:15यहाँ से चलो लेकिन ऋषि तुम्हें ये क्यों समझाता है कि बड़े आसानी से
- 4:22छोड़े जा सकते हैं? बहुतों ने छोड़ भी दिए।
- 4:30अब देखिए बाबा नानक ने गुरुओं ने। कुंभों में स्नान करने का मनाही
- 4:40किया और यहाँ सिख लोग हैं जो कुंभ स्नान करने चाहते हैं।
- 4:48ये सिख हैं, शंका है। पांच कक्के धारण किए हुए लेकिन
- 5:02सीखने की कोशिश इन्होंने कभी नहीं की जो कह गए बाबा तीर्थ।
- 5:08नवा जे तिस पावे बीन पानी की नाई करें।
- 5:22उसके चाहने से तीर्थ पर स्नान होगा और वह तीर्थ कौन सा तुम्हारे
- 5:28भीतर का बाहर कहीं तो समझाने वाले बाबा समझा गए।
- 5:42अब वो शो कह गए मेरे जाने के बाद। जीवंत गुरु तलाश लेना 10 और पक्षी
- 5:503535 वर्ष हो गए। कितनों ने नया गुरु तलाश कितनों
- 5:55ने जीवंत गुरु तलाश वो ही पुराने डर्रा मार कहा महाकुंभ।
- 6:05बनवा रहे हैं वहाँ मनुष्य लोभी है कैसे?
- 6:23खुद बन जाऊं? अब वो तो गए और कह गए।
- 6:29के जीवंत गुरु को तलाश लेना तो मैं ही जीवंत गुरु हूँ तो खुद को
- 6:34ही बना लो। महाकुंभ में खुद को ही बैठा लो
- 6:40ओशो तीर्थ संगम बना लो, वह जीवंत तो गया।
- 6:48अब नकल चलेगी। मैं एक चुटकुला कहा करता हूँ।
- 6:532100 में एक व्यक्ति किसी से पूछ रहा था तुम क्या खाते हो?
- 7:02खत्म मैं रोटी खाता हूँ, सब्जी खाता हूँ, दाल खाता हूँ।
- 7:08सब ठीक तुम पहुंचे हुए नहीं हो मतलब कहने का लोग पहुंचे होते हो
- 7:19और रोटी नहीं खाते, वो दूध भेजते हैं।
- 7:20सिर्फ अब मेरे साथ ही चिपकने वाले लोग ऐसा ही कुछ करने वाले हैं।
- 7:26मैं जानता हूँ। और तुम्हें पहले से ही बताए थे,
- 7:30तुम कैसे आज कृष्ण भक्त मोर मुकुट वाले के इंतजार में बैठे हैं और
- 7:38कितने मोर मुकुट बिना मोर मुकुट के हो के चले थे?
- 7:45उन्होंने अपना वो मुकाम छू लिया था।
- 7:50और कितने पागल तुलसी दास आज भी सुमित में बैठे हैं।
- 7:56बंसरी नहीं चलेगी, धनुष चलेगा तब सिर निभेगा, अन्यथा नहीं निभेगा।
- 8:10मुझे अक्सर लोग कहते हैं उसके शब्दों का इस्तेमाल करते हो और
- 8:16उसको ही गलत बताते हो। बिल्कुल जो चुगने वाला है वो मैं
- 8:21चुग लेता हूँ, ये छोड़ने वाला है उसको मैं छोड़ देता हूँ।
- 8:32यह तो जीवंत व्यक्ति का लक्षण है। वह सही से ही चुन लेगा, हीरामोती
- 8:38चुन लेगा, गंध फंद फेंक देगा। हमारा शरीर भी यही करता है।
- 8:50फॉरेन मैटेरियल्स को बाहर निकाल देता है।
- 8:52पसीने के जरिए बलमूत्र के जरिए और अच्छा अच्छा अपने भीतर रख लेता
- 8:59है। यही परमात्मा के यही संतों की
- 9:02प्रक्रिया है। पूछा है ज्योति
- 9:28बाबा ये पूजा पाठ ये सभी कर्मकांड क्या बस यही है या और भी है और भी
- 9:39बहुत कुछ है। और आप आज के जमाने में देख सकते
- 9:49हैं राजनीतिक लोक साधु का वेष धारण करके राजी चला रहे हैं।
- 10:01उन्हें टल बजाना चाहिए था, लेकिन टल बजाने की जगह राजकाज बजा रहे
- 10:11हैं, चला नहीं रहे हैं, बजा रहे हैं, गड्डम गड्डम कर रहे हैं।
- 10:20टल बजाना चाहिए सर उनका काम थोड़ी दोगलापंथी जो होगा वह ऐसा ही कुछ
- 10:39करेगा। बगल में छुरी मोमे राम।
- 10:51पूछा। ज्योति ने इसकी बात की है।
- 10:58ब्रह्म, सत्यम, जगत, सत्यम ब्र्रह्म, मिथ्या भ्रह्म वैसे भी
- 11:05भ्रम होता है। भ्रम फ्राउड है, ना जगत फ्राउड
- 11:13है, ना ब्रह्म फ्राउड है ये सत्य है पर मैंने जो कहा।
- 11:27आपके आस्तिक भी प्राध हैं, आपके नास्तिक भी प्राध हैं सही आस्तिक
- 11:37व्यक्तित्व कभी कभी है हजारों साल नरगिस अपनी बेनौरी पे रोती हैं।
- 11:45बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा वर पैदा हजारों साहब नरगिस
- 11:55अपनी बेनूरी पे रोती है उनके बिना कोई नूर नहीं है धरती।
- 12:01पे वो ही धरती का नूर। क्या क्या पाखंड बनाम
- 12:18उने सितम आपकी खाते क्या क्या न सहे।
- 12:31हम सितम आपकी खातिर ये जान भी जाएगी सनम, आपकी खाते हैं।
- 12:51ये जान भी जाएगी सनम, आपकी खाते उस आनंद के लिए हम क्या क्या से
- 13:09कम नहीं झेलते। तुम कैसे हो ये हमारे वाइबल में
- 13:17नहीं लिखा, ये हमारे कुरान में नहीं लिखा, ये हमारी धर्म ग्रंथ
- 13:25में नहीं लिखा नहीं लिखा होगा। थोड़ा बहुत लिखा होता है।
- 13:35उसका हम प्रचार प्रसार शुरू कर देते है।
- 13:44गैलिली ओह। गैलिली ने कहा कि नहीं घूमता है
- 13:52सूरज पृथ्वी घूमती है सूरज के अर्ध करता।
- 14:00कैथोलिक चर्च के आदरियों ने कहा नहीं हमारे धर्मग्रंथ में नहीं
- 14:07लिखा वी कैननॉट एक्सेप्ट? इसलिए तुम्हें हम जेल करते हैं।
- 14:16घर के अंदर ही नजरबंद कर दिया गैलिजो गैलिजो ने कहा कि धरती
- 14:25घूमती है सूरज के गर्द घूमती है। और वह बेचारा मरने तक अपने घर में
- 14:34कैद रहा। उसने दीवारों के ऊपर चित्र बना
- 14:38दिए। सूरज के और धरती को आस पास घूमते
- 14:42दिखा दिया और गैलिलियो गैलिलियो ने नीचे लिख दिया एंड स्टिल इट
- 14:50मोज़। और अब भी यह घूम रही है, लेकिन
- 14:57तुमने क्या कहा? यह हमारे धर्मग्रंथ में नहीं लिखा
- 15:00है, इसलिए हम नहीं मानेंगे मत मानो सत्य को न मानने से।
- 15:08सत्य का क्या बिगड़ेगा? मूर्ख मार्कस को ये नहीं पता कि
- 15:17परमात्मा को ना मानने से परमात्मा का कब बिगड़ेगा।
- 15:21आज ही बहुत से लोग हैं। जब पक्का पता है कि परमात्मा नहीं
- 15:25है तो फिर आप मानते क्यों हो? परसों ही एक व्यक्ति ने मुझसे कहा
- 15:32मैंने कब? पक्का पता है।
- 15:34आपको कहता हाँ मैं किसने कहूं, कहता मार्क्स ने कहा फिर आपको
- 15:41कैसे पता चला? कहा मार्क्स ने पक्का पता उसे भी
- 15:47नहीं था। आपको पक्का पता चल बस ऐसी ही हैं
- 15:52हमारी मान्यताएँ आस्तिक भी कोई कम नहीं तुमने देखा वो कहेंगे हमने
- 16:06तो नहीं देखा लेकिन ये जो शास्त्रीय लिखा है इसने देखा।
- 16:11लाओ उसको, वो तो गया मर गया अब कौन बताएगा लिखने वाला मर गया
- 16:20पक्का पता है इसीलिए कहा था उस समय जीवत गुरु ढूंढ लेना जीवत
- 16:26कहेगा हाँ, मैं कहता आंखन देखी? तुम कहते का गद्दी के लिए कीजिए
- 16:33थफा उसकी आँखों की लश्क देखा है उसकी।
- 16:43आवाज का जादू। देखा है।
- 16:48तुम्हारे भीतर एक अज्ञात प्रेरणा चल के।
- 16:50की एक शांति का पूंज बाहर आने का तुम मदमस्त हो जाओगे।
- 17:01ये कारण था ओसु ने कहा मेरे जाने के बाद।
- 17:07जीवंत गुरु की तलाश करना ना कि तुम महाकुंभ बना लेना खुद के ओशो
- 17:12महाकुंभ बना के वहाँ पर मूर्ख ही प्रचार करेंगे और मूर्ख तो सदा से
- 17:18प्रचार करते ही रहेंगे, अब और कर लेंगे तो क्या फर्क पड़ता है?
- 17:29हजारों सालों का नर किसका रोना फिजूल कर देते हो तुम बड़ी
- 17:37मुश्किल से होता है चमन मैं दीदा पर बैठा वह जिसने अपनी दीद से
- 17:42देखा आँखों से देखा। सन्तों ने लिखा है अगर कोई
- 17:58व्यक्ति की आपको भनक भी पढ़ जाये, उसके एक बार दर्शन शुरू करते न
- 18:05मेरे पास यहाँ बहुत लोग आ जाते हैं, जो समझते हैं इस बात को बाबा
- 18:12पूछ न कुछ नहीं है, बता तो बहुत बहुत कुछ दिया आपने।
- 18:17सिर्फ दर्शन करना देखना है ऐसे व्यक्ति जो पा गए वो होते कैसे
- 18:23हैं? आ जाओ भाई, पहले देखोगे?
- 18:39देखोगे, उसका सायित्व देखोगे, उसकी स्थिरता देखोगे भी कहीं भाग
- 18:46नहीं रहा। है।
- 18:47क्यों? क्योंकि उसे सब मिल गया है भागता
- 18:51वे। जिसे अभी कुछ पाना है।
- 19:00वह कुछ खाता नहीं क्यों, क्योंकि उसके लिए असली स्वाद मिल गया।
- 19:10तुम्हारा कोई भी बाहर का भोजन उसे स्वाद नहीं दे सकेगा।
- 19:16उसके टेस्ट वर्ड को संतुष्टि नहीं मिलती इसलिए फिर शरीर को चलाने के
- 19:22लिए मात्र कैलोरीज दे दो और वो भी कर सकता है या दिल धड़कता रहे।
- 19:33ये फेफड़े श्वास लेते रहे, भीतर के सभी ऑर्गन्स, उन कैलोरीज से
- 19:40काम करते रहे। बस यही तो हो सकता है वह एक स्थान
- 19:46पर बैठेगा। क्यों?
- 19:50नहीं बाहर झांका, झांकी ही नहीं करेगा, तुम्हारी तो आदत है अच्छा
- 20:03जहाँ जाते हो झांका झांके ही करते हैं।
- 20:07या तस्वीरें खिंचाते हो, यादगार रह जाए कि मैं किसी वक्त इस उदय
- 20:14पे था। तुम बड़ी क्षय हो।
- 20:34प्रचार किया जाता है। जो व्यक्ति इतिहास में जीता है,
- 20:49जो व्यक्ति इतिहास में जीता है, वह इतिहास की सभी सूचनाओं को
- 20:56इकट्ठा कर देता है। वह इतिहास सज्ञ हो जाएगा।
- 21:07वह सर हो जाएगा जिसे तुम सर कहते। हो?
- 21:11तुम्हें बड़े बड़े सपने दिखाएगा। तुम आई एस बन जाओगे आई पीएस बन
- 21:19जाओगे पीसी एस बन जाओगे आओ मेरी क्लासेस लो चाहिए का पीसा इन
- 21:30नेक्स्ट संग्रामों से पूछो। पैसा नहीं मिलेगा नाचो नृत्यंगणाय
- 21:38कभी नहीं नाचेंगे, पैसा नहीं मिलेगा तो नाचो भी नहीं मिलेगा।
- 21:46इन महंगे कमियों से कहो पैसा नहीं मिलेगा।
- 21:49राम कथा का पैसा होता है क्या? भगवान राम को बेचोगे अरे दुष्टो
- 21:59तुम्हे शर्म नहीं आती? वो राम कथा की ज्यादे पीसे क्यों?
- 22:06क्योंकि वो राम कथा अनमोल रामकथा के तेरी अधिकारी जिनको सत्संग अति
- 22:24प्यारी रामकथा के कई अधिकारी। जिनको सत्य संगति अति प्यारी,
- 22:33तुमसे तो तुलसीदास ही समझदार थे, तुमको तो पीसे की संगति प्यारी
- 22:40है। तुलसी कहते हैं जिनको संत की
- 22:43संगति प्यारी है वो अधिकारी होते हैं रामकथा कहने और सुनने के।
- 22:54में के कवियों ने नष्ट भ्रष्ट कर दिया।
- 22:59इनकी बेहतरी इच्छा है राज्यसभा की किसी तरह कुर्सी पा जाए और उससे
- 23:05आगे बढ़ते बढ़ते पीएम हो जाए ईश्वर करे तुम हो जाओ।
- 23:13अल्लाह खैर करे और हम क्या दुआ कर सकते हैं?
- 23:26नहीं ये बेचारा भटकता रहेगा इसके वफा।
- 23:31इसको कोई ना कोई ठिकाने लगा दो भाई।
- 23:39मुझको लोग कह देते हैं आप गाँधी जी थे लाभ क्यों नहीं उठा लेते?
- 23:43मैंने कहा लाभ कैसा? घोषणा कर दो गद्दी मिल जाएगी।
- 23:50मैंने कहा गद्दी तो तभी भी नहीं ली जब ले सकता था।
- 23:55हम्म। गद्दी जब ले सकता था और कोई रोकता
- 24:00नहीं था और बूट सूट पड़े थे जो विलास से।
- 24:18बैरिस्टर बन के आया हो। उसने बूट सूट उतार दिए और पड़े थे
- 24:24अभी और कोई कद काठी का फर्क नहीं पड़ा था।
- 24:28बिलकुल फिट आते आजाद तो हो गया। था।
- 24:36उठ सूट पहनते हैं पर बैठ जाते हैं मैं पीएम भाई कौन कहता तुमने सभी
- 24:47धन्यवाद करते हैं बलौब हो आपने शिफ्ट कर लिया।
- 24:57अरे, तब नहीं लिया अब क्या मांगू, अगले जनम में क्लेम करूँ क्या मैं
- 25:07बिडरला था मुझे मेरी धन संपत्ति दे दो, ये हवाई बातें मत किया
- 25:12करो। और क्यों करूँगा?
- 25:21क्यों करूँगा? कारण जिन्होंने कुछ छुपाना है वो
- 25:31करें। गाँधी ने तो उस जन्म में भी कुछ
- 25:38नहीं पाना था। स्वाधीनता संग्राम के जश्न के
- 25:45भीतर उन्होंने जश्न नहीं मनाया। घर बैठे उनका मेरा काम पूरा।
- 25:51होगा। जश्न आप मनाओ।
- 25:55आनंद खेरो होली मनाओ दिवाली जिनकी बेड़ियां कटिंग जश्न मनाओ, मैं घर
- 26:04बैठे आनंद मना लूँगा, मुझे ज्यादा आनंद है, ज्यादा खुशी है आप नाज
- 26:11कूद के मना लो मैं घर बैठे उछल कूद के मना लूँगा।
- 26:22जवाहरलाल की प्रथम प्राइम मिनिस्टर की ओर सेरेमनी में गाँधी
- 26:27ने कहे क्या करना है जाके मेरा काम पूरा हुआ है।
- 26:39और जीस, कांग्रेस को तुम कहते हो गाँधी उसे बहुत पहले छोड़ चूके
- 26:46थे। कांग्रेस के सदस्य।
- 26:50नहीं थे वो। इतना जरूर कहा अब काम पूरा हो
- 26:54गया। कांग्रेस का खत्म कर दो।
- 27:01दूसरी गोलमेज कान्फरेन्स में जब वो इंग्लैंड गए, उन्हें नहीं पता
- 27:15था इस बात का मेरी जांच पंचम से मुलाकात आखिरी हो गई।
- 27:24लोग मुझे कह देते हैं जो प्रजा के अधिकारी उत्पाद करते हैं उसका
- 27:33सारा बोझा राजा को करता है। क्या आप सहमत हैं सहमत नहीं मैं?
- 27:40मैं इसको स्टेम्प्ड। करता हूँ।
- 27:46अगर तुम्हारे क्षेत्र में कोई भी अधिकारी रिश्वत लेता है तो तुम
- 27:51रिश्वत लेते हो, जो बड़े होतदार तुमने ऐसे आदमियों को बैठाया
- 27:56क्यों? जार्ज पंचम दो तिहाई पृथ्वी पर
- 28:04राज्य करता था। जार्ज पंचम और इतना क्रूर शासक था
- 28:09वो आपको शायद सारी बातें पता न? जॉर्ज पंचम अपने बेटों की कनपटी
- 28:20पे मारता एक बच्चा तो उसने बहरा कर दिया ज़ोर से मारता जे नाटेदार
- 28:28कान पे मारता इतना क्रूर लगती। अपने ही बच्चों को ऐसी कनपटी पे
- 28:40मारता वो एक बच्चा बहरा हो गया ऐसा क्रूर शासक और उसके सामने।
- 28:54ये। नंगा फकीर एक उनका अद नंगा।
- 28:57तो क्या था? जान बूझकर अपनी धोती को लंगोट बना
- 29:03लिया। जान बूझकर कुछ तो था ही ऐसा अकेली
- 29:11धोती और कुछ जान बूझकर उसको और छोटी कर ली।
- 29:17लंगोट बना लिया। तुम्हें नहीं पता वो क्यों मरा
- 29:21जार्ज पंचम जार्ज पंचम गाँधी के इन शब्दों से डिप्रेशन का और
- 29:30जार्ज पंचम को महात्मा गाँधी ने जो शब्द कहे वो आज तक कोर्ट नहीं
- 29:34किये गए। महात्मा गाँधी ने सिर्फ ये नहीं
- 29:40कहा मेरे देशवासियों को उसने कहा सारी धरती के कपड़े आपने छीने।
- 29:46हैं। तुम सिर्फ मेरी बात करते हो, वो
- 29:51बात पंचम के लड़ गए। इब आज ए चैन स्मोकर दिन भर रात
- 30:02दुआ फेंकने में लगा फेफड़े गल गए कुछ पहले कमजोर।
- 30:07थे। अंत में क्षणों में उसकी जीने की
- 30:14इच्छा। समाप्त हो गई थी।
- 30:16जीने की इच्छा तो महावीर की भी। समाप्त होती है।
- 30:22लेकिन खुद जानकर मैं शरीर नहीं हूँ, फिर जीने की इच्छा समाप्त
- 30:27होती। है।
- 30:29जीने की इच्छा जॉर्ज पंचम की भी समाप्त होती है लेकिन खुद के पाप
- 30:34को देखकर जीने की इच्छा समाप्त होती है।
- 30:37जीने की इच्छा होटल की भी समाप्त होती है।
- 30:40मुसोलनी की भी समाप्त होती है, लेकिन वो खुद को गोली मार लेते।
- 30:45हैं। डिक्टेटर खुद को गोली मारकर ही
- 30:49मरता है या उसे लोग मार देता है? महात्मा गाँधी के ये शब्द के सारी
- 31:01दुनिया के वस्त्र तू खा गया केला। लड़के उसके दिन भर रात यही आवाज़
- 31:18भीतर से आती इतनी गहरी तल से आई हुई आवाज़, दर्दनाक आवाज़ उसके
- 31:23हृदय में प्रवेश कर गई और दिन भर रात जैसे ही जाप करते हैं ना राधे
- 31:28राधे ऐसे ही जाप होने लगे। तुम उसको अजूपा जाप कह देते हो।
- 31:34ये अजूपा जाप था, वो बहुत रोप था लेकिन रोकता नहीं था।
- 31:42जो चीज़ इतने गहरे बैठ जाए वो अजूपा जाप में तब्दील हो जाती है।
- 31:49उसका लाभ कुछ नहीं होता। उसका नुकसान?
- 31:51होता है। विचार तो विचार ही रहते हैं।
- 32:01तुम परमात्मा हो इसको बहुत गहरे तेलों पर यह शब्दों को ले आओ तो
- 32:08परमात्मा हो नहीं जाओगे, समझ लेना, परमात्मा होगे तो अपने को
- 32:14जानने से। हूँ एमआइ शब्दों का भीतर धकेलने
- 32:20से परमात्मा नहीं हो जाओगे। इन शब्दों को थोड़ा गहराई से हसना
- 32:24करो। तुम शब्दों को भीतर धकेल देते हो
- 32:29और गहरे और गहरे। ठूस ठूस के ठूस ठूस के।
- 32:33तभी तो इसे बोलते हैं राधे राधे, राधे राधे करते रहो करते रहो और
- 32:42उसको भीतर भीतर कूटते गोटना लेके आपने देखा?
- 32:46वो मुँह, सेलो और गोटना सामान डाला जाता है ऊपर से कोटा जाता।
- 32:52है। तह बैठ जाती है नीचे उसे अजपाज आप
- 32:58कह देते हो, आप है वो कूड़ा, दूसरे को याद करने से स्वयं की
- 33:09याद कैसे आ जाएगी? कभी कोई जवाब दे सकेगा मुझे।
- 33:13अगर दे सकेगा तो जरूर दे देना। मैं उसके चरण दूंगा।
- 33:20दूसरे की याद करने से अगर स्वयं की याद आती हो तो मुझे अवश्य बता
- 33:28देना। यह दर्शन ही गलत है।
- 33:34तुम्हारा स्वयं को याद करने से सेल्फ रिमेम्बरिंग स्वयं की याद
- 33:41आती है, दूसरे को याद। करने से दूसरे।
- 33:47को याद आती है। तुम पदार्थ को याद करते हो पदार्थ
- 33:52याद आते हैं। सपने में मैंने सोना ले लिया,
- 34:00मेरा सोना कुछ छीन के ले गया, मुझे गद्दी मिल गई, मेरी गद्दी
- 34:06किसी ने छीन ली। तुम बाहर को याद करो, कोई याद
- 34:11नहीं। सेल्फ रिमेम्बरिंग गुरजफ कहते
- 34:17हैं, फिर याद आएगा कि मैं कौन रिमेम्बर याद करो, फिर से याद
- 34:27करो। भूल गए हो?
- 34:43अपने आप तक पहुंचने के लिए दूसरे तक की यात्रा करनी पड़ती है क्या?
- 34:53बताओ अपने आप तक पहुंचने के लिए दूसरों तक की यात्रा करनी पड़ती
- 35:02है फिर पहुंचोगे अपने आप तक की यात्रा में उतरना होता है।
- 35:09तो अपने आप तक पहुँच जाओगे, इसलिए मैं कहता हूँ इन नीम हकीम खतराए
- 35:19जानों से बचना ये तुम्हारे भीतर संस्कारों की तह जमा देंगे।
- 35:32और बेचारे आने वाले बुद्ध इनको साफ करते रह जाएंगे।
- 35:37इसलिए उनको करूणा बान कहते हैं। तुम्हारे तथा के संत गंध खलार
- 35:44देते हैं और वो आके समेटते हैं। ये फैला आ जाती है और तुम फैला
- 35:52नहीं देते हो तुम भला कोई व्यक्ति 2:00 बजे आके 1:00 बजे आके जगाये
- 36:00उसका विरोध करना नहीं बनता क्यों जगाता है उसको तो दंड दे दिया,
- 36:05भगवान ने उसकी तो रातों की नींद नहीं छीन ली, कुछ किया होगा।
- 36:11तुमने तो कोई बात नहीं की। तुम्हें तो आराम से सोने दे, अब
- 36:19क्यों? पाप कब आ रहा है तुम्हें जगा के
- 36:26किसी को ना आ जाए ये जगा देना। मेरे पिताजी कहा करते।
- 36:31थे। अपनी भाषाओं में कहा करते
- 36:36ब्राह्मण और संत को सोए हुए को नहीं जगाना चाहिए?
- 36:42तब मुझे समझ नहीं आती थी, लेकिन अब संत आती।
- 36:49है। संत सोया लगेगा।
- 36:53हो सकता है वह समाधि में आनंद का लुत्फ उठा रहा हो।
- 37:00ब्राह्मण सोया हुआ लपेट। हो सकता है वो कहीं दूर दराज
- 37:06एस्ट्रल ट्रैवलिंग पे गया हो। तो उसको हाथ मत लगा देना।
- 37:15यही बात मैंने पहले बताई थी। औरत छूते पांव के अंगूठ है, गई
- 37:23हुई चेतना वापस है। वह दे ही जो चला गया वापस आ
- 37:28जाएगा। औरत चले गई बाहर आदमी उसके
- 37:36अंगूठों। को छू ले।
- 37:38वापस आ जाएगा। बहुत बार होता है।
- 37:42आशुतोष अभी भटकते हुए हैं। गर्भने मिला।
- 37:46यहाँ से मुक्ति नहीं नया घर मिलता, कभी कभी शीष भी दुष्ट हो
- 38:00जाया करते हैं तो क्या करें बेचारा गिस्सा?
- 38:06अब गच्चा खा गया तो क्या हम कोई अथॉरिटी तो है नहीं जो आदेश कर
- 38:15दे? अरे भाई, 1212 साल तक भी समाधि
- 38:20होती है, कभी लगी है आज तक धरती पे?
- 38:28अब क्या करें? तुमने पूछा बिटिया और कौन से?
- 38:35प्रखंड के सब प्रखंड हैं और क्या है?
- 38:40और वो तो गया गया। इनके प्रखंडों ने एक बेचारी और
- 38:43बिटिया मार दी। वो लेने गई थी उसको नो पड़ी पता
- 38:52नहीं कितने कितने जीवों को लेकर ये पाखंड धर्म देता है जीवन।
- 39:01और अंधविश्वास देता है मृत्यु यह जो मृत्यु दे रहा है, यह धर्म है,
- 39:09धर्म तो जीवन तो देता है, धर्म तो वहाँ दे के जाता है जहाँ जीवन
- 39:14स्थित है, जिसे स्तुतिप्रज्ञ कहते हैं।
- 39:18कृष्ण जहाँ जीवन विद्यमान है, वहाँ धर्म है।
- 39:24उससे आगे सभी अधर में तुम्हारा शरीर तुम्हारी आंतरियाँ तुम्हारा
- 39:30जेघक तुम्हारे फेफड़े तुम्हारा हार्ट तुम्हारे गैस्ट्रो
- 39:34एंटस्टेनर सिस्टम्स तुम्हारा यूरेरी यूटीआइ ट्रैक्ट।
- 39:43ये सब अधर्म है, बस एक ही धर्म है इन सबसे पार इन सबसे दूर इस
- 39:54खोपड़ी से दूर जो हर वक्त सोचता ही रहता है मन शब्दों से परे
- 39:59भावनाओं से परे। शब्दा तीर्थ भावना तीर्थ वह जो
- 40:06दूर है दूर से दूर है। पास से पास है।
- 40:17वह जीवंत तत्व है धर्म तुम्हारी। मुर्दा मान्यताएँ धर्म नहीं हैं।
- 40:31तुम गुरु को सिर के ऊपर। उठाए फिरते हो।
- 40:34गुरु होता है रास्ता दिखाने के लिए मैंने तुम्हें रास्ता दिखा
- 40:40दिया क्या तुम मुझको सिर के ऊपर उठाए फिरो?
- 40:47क्या बिगाड़ दिया तुम्हे रिस्पेक्ट करो जोको मान सम्मान
- 40:55करो ये बढ़ता है क्योंकि जिसने राहत दिखाया।
- 41:05और तुम उस खुशी तक पहुंचे आनंद तक पहुंचे, वह पूजने योग्य है, लेकिन
- 41:12सर के ऊपर डोते भरोगे ये कहाँ की परंपराएं।
- 41:20तुम सत्यो को परंपराओं में डाल लेते हो यही तुम्हारी खराबी।
- 41:24है। और समझ भी नहीं पाते तुम।
- 41:35और क्या कहें, क्या बताऊँ कह तो रहा हूँ।
- 41:42क्या क्या न सहे? किस किस का नाम रखा?
- 41:47है। हम नसीम आपकी खातिर ये जान भी
- 42:00जाएगी सनम आपकी। उसके लिए तुम कितने कितने पापड़
- 42:13बहते हो, सही राह नहीं मिलता सही राह कौन दिखाएगा जिसने खुद ही
- 42:21जान? दावा तो गुरु तेग बहादुर के वक्त
- 42:27सभी। कर रहे थे।
- 42:28मैं गुरु, मैं गुरु, मैं गुरु। वक्त जाता है, परिस्थितियां नहीं
- 42:36बदलते, परिस्थितियां आज वही है। आज भी सभी कहते हैं।
- 42:42कल भी सभी कहेंगे, परसों नर्सों भी यही कह रहे थे और यही कहेंगे
- 42:48मैं गुरु, मैं गुरु क्योंकि वहाँ जाना मौत के मुँह से वापस आना
- 42:56होता है। और तुम वहाँ जाने से घबराते हो,
- 43:02थर्राते हो, बड़े बड़े धुरंधर वापस आ जाते हैं।
- 43:07नरेंद्रनाथ जैसे विवेकानंद जैसे कब जाते हैं उसमृत को देखते हुए
- 43:16जो रोज़ कमेंट आते हैं बाबा। वहाँ जाकर तो मृत्यु दिखती है,
- 43:20मृत्यु झट से बाहर आ गया। क्यों बाहर आ गया इसको गल बकड़ी
- 43:24डाल लेते इसके साथ ईद मनाते हैं और फिर ईद मनाते फिर दीद होता है
- 43:35तुमने मृत्यु के साथ ईद नहीं मनाई।
- 43:43सबसे पहले आएगी द्वारपाल की तरह मृत्यु, उसको गले से लगा लेना,
- 43:50मने की ईद और फिर आगे निकल जाना, डर के भाग मत आना।
- 43:59फिर होगा दीद आगे देखो वह जिसकी खोज कर रहे थे वहीं बैठा है जा
- 44:08ठकर दे दे रे बड़िया जिद थे वह दे ना 1000 कितने संतों ने किस किस
- 44:14प्रकार से कहा। और बुर्ले शाह को मोरगियों ने दफन
- 44:20नहीं करने दिया। अपने कब्रिस्तान में ये काफी है,
- 44:31जैसे गैलिलियों को कैथोलिक की चर्च के पादरियों ने सजा दी, अमर
- 44:36क्या? और आज सत्य निकली उनकी बात,
- 44:39तुम्हारे शास्त्र ठीक के वो ठीक वैज्ञानिक ठीक?
- 44:44होते तो मैं कह रहा था जो अतीत को खंगालेगा याद करेगा, स्मृतियों
- 44:53में बसाएगा। वह आई ए एस हो जाएगा आई पीएस हो
- 44:58जाएगा, जीत लेगा किसी न किसी पत्नी को और जो अतीत को जानकर
- 45:08भविष्य में प्रवेश करेगा। अब इसको गौर से समझाएं।
- 45:14वह हो जाएगा रिसर्च साइंटिस्ट। वह जाने का इतना तो खोज लिया,
- 45:21आइंस्टीन तक तो खोज लिया, अब इससे आगे स्टिफनायेंगे अब इससे आगे कोई
- 45:31और आएगा, क्वॉन्टम। इससे आगे कोई और आएगा और मैंने
- 45:35परसों ही बोला था, भक्त आएगा जब आदमी को लुप्त कर दिया जाएगा, ऐसी
- 45:43प्रणाली है मैं करता रहूँ और लोग अभी चिंता है जिनके सामने ये किया
- 45:50मैंने। तीन किलो लड्डू यहाँ स्वीट हाउस
- 45:59से लेकर आया। उनके पास बैठा हूँ, आज भी मौजूद
- 46:04हैं वो। लोग।
- 46:09दो हो गया। दूसरा रूप जाके स्वीट हाउस से
- 46:16देखिए आपका श्याम नहीं मानेगा, मैं पहले कह रहा हूँ, कभी कह दो
- 46:25कि श्याम के साथ शाम को बुलाते हैं, हम उससे करो।
- 46:34गोष्ठी विचार की विचारनीय बातें नहीं प्रस्तित्व की बात विचारनीय
- 46:38नहीं होती जो रेत का एक कण का नहीं बना सकता और कैसे बना ये
- 46:48नहीं बता सकता वह क्या? खाक करेगा शास्त्र उसको बोलने दो
- 46:55उसको बोलने में मज़ा आता है, खंडन करने में मज़ा आता है।
- 47:03पाखंडों का खंडन करते करते वह सत्यो का खंडन करने लगता।
- 47:08है। उसको इस संस्कार ने घेर लिया के
- 47:14बस खंडन करना है। जो देखता नहीं वो है नहीं, बहुत
- 47:20पुरानी बात है। बस इसी सदस्य के उपर शकता है।
- 47:29मैं कौन ही मानूं? और उन लोगों ने भी कहा मैं कौन ही
- 47:33मानूं तो मैंने वहाँ से ला कर दे दिया ये लो लड्डू खार।
- 47:41आज वो लोग मौजूद होंगे कुछ मर गए हो।
- 47:45मैं तो बाहर निकला नहीं नहीं इतने साल मुझे तो कल ही पता लगा।
- 47:52उनमें से एक वकील थे रतन जी बहुत से लोग थे तब आज हुई हैं।
- 48:07जिन्होंने वो लड्डू खाये, सपने में नहीं सच में खाये तो ऐसा
- 48:12वैज्ञानिक भी बना देंगे किसी को पता था एक बारीक तार में से ऐसी
- 48:21पावर गुजरेगी जो हजारों टन लोहे को ऊपर नीचे ले आए।
- 48:28सोच सकते थे उन लोगों ने मजाक उड़ाए।
- 48:33एडिशन ने कहा कि मैं कतार के जरिए रोशनई कर दूंगा।
- 48:37चारों तरफ लोग मजाक करने सकते हैं क्योंकि तुम्हारी धर्म की किताबों
- 48:44में नहीं लगा। मैं कहता हूँ इन्हें जला लूँ,
- 48:47प्राणी हो गई जैसे जैसे रोज़ दुनिया में नए आविष्कार होते हैं
- 48:55तो प्राणों को जला दो। वो किसी काम के नहीं रहे तो मंसूर
- 49:03ने कहा अनल हक। हालांकि ये बात सनातन में बहुत
- 49:09परानी अहम् ब्रह्मस्मा एम आत्मब्रह्म मैं हीं भ्रम पहुँच
- 49:21गया उस तल पर। उदघोष किया उसने अनलहक अहम्
- 49:29ब्रह्मस्मा मैं ही खुदखुदाऊ तो राजा ने उसके पास संदेश भेजा देखो
- 49:38जो नैत तुम्हारा शिष्य। गुराफती हो गया।
- 49:44जो हमारी कुरान में नहीं लिखा वो ये बोल रहा है ऐसा बोलने का
- 49:50अधिकार किसी इस्लाम धर्म में किसी मुसलमान को नहीं, इसे कह दो, चुप
- 49:58हो जाए, मेरा तुम्हारा प्रेम है। मैं कुरान का रखवाला हूँ, मैं
- 50:06राजा। हूँ।
- 50:08यह खोरा पाती हो गया है, तुम इसको रोक दो तुम्हारा शीशा अन्य तक काट
- 50:16दूंगा इसको। तो जन्नत ने कहा अरे मूर्ख मान जा
- 50:24तू जिसका उदभोष कर रहा है क्या वो मैं नहीं जानता मेरा ही तो शिष्य।
- 50:28है। तू मान जा अच्छा रहेगा कटेगा।
- 50:37तो मशहूर हसा गुरुदेव आप भी कमाल करते हो मैं कटूंगा बताओ तो जुनैद
- 50:47के बस मैं समझ गया अब आगे कुछ नहीं बस जाओ कहो ज़ोर ज़ोर सको।
- 50:56ये शक्ति भी है गुरु के रोके का गुरूजी मैं रुकते जाऊं मैं बहुत
- 51:10रुकने की कोशिश करता हूँ लेकिन ये अलफ़ाज़।
- 51:16तूफान की तरह आते हैं मुझे घेर लेते हैं, मैं मदहोशी में खो जाता
- 51:20हूँ, पता नहीं कब वो भूल। जाता है।
- 51:22मेरे इस इन्स्ट्रुमेंट से पता नहीं लगता तो मैं एक ज़रा भी नहीं
- 51:32हूँ उसकी सृष्टि में। तुम एक ज़रा ज़रा से छोटी चीज़
- 51:38कोई होती नहीं क्या करें अब खोज लिया है इन्होंने इलेक्ट्रान वो
- 51:46भी नहीं हो तुम सृष्टि का इतना अंश भी तुम नहीं हो।
- 51:50वास्तव में अगर सही सही बोलूं तो तुम हो ही नहीं।
- 51:54मैंने पिछले वाक्यों में बोला है प्रवचनों में देख लो पूछ लो सुन
- 51:59लो अच्छी तरह से जिन्होंने सुना उनसे पूछ लो, वो समझा देंगे तुम
- 52:06हो ही नहीं, बड़ा विस्तार से बोला है कि तुम नहीं?
- 52:19ठीक बेटा तू बोल अब मैं तुम्हें नहीं रो, बट तू दंड सुना दिया
- 52:34क्या काट काट के मारेंगे? तेरे को कोई बात नहीं मार।
- 52:42तीखी तलवार लेडी हाथ काट दिए, पांव काट दिए ज़रा ज़रा काट।
- 52:49दिया, लेकिन मंसूर अनल फक, अनल फक ऐसे सुरमाओं ने धर्म को बचाया।
- 53:04है। जो कट गए सत्य से डिगे नहीं, जो
- 53:11कुछ नोटों की गड्डियाँ देखकर अपने वाक्यों से मुड़े नहीं, जो लालच
- 53:20वश लोभ वश। वापस नहीं गए।
- 53:25ये होती है सत्य की सही प्रचारण तुम्हें ये बात सपना लगे कि ईसा
- 53:35मसीह का शरीर पर चढ़ जाना और कीलें ठोंक देना सपना नहीं।
- 53:40मंसूर का हास पांव कट जाना सपना नहीं, चॉकलेट्स का जहर को खुशी
- 53:46खुशी पी लेना सपना नहीं, उसके ऊपर तो महज थूका था, गालियां निकाली
- 53:54थीं। यहाँ पुराना मुल्क है।
- 53:58आध्यात्मिकता का सहनशीलता बहुत है।
- 54:01इस मूर्ख ने बड़े आयाम देखे हैं। इस माटी ने बहुत खुशबुओं को चखा
- 54:07है, इसलिए ज्यादा सहनशीलता है इसमें।
- 54:19तुम कहती हो बेटी ये जो आपने कहा बस ये प्रखंड और क्या बताये बस एक
- 54:31सत्य है जब आपने कहा एक कोंकार बाकी झूठ है।
- 54:41कहाँ तक नाम गिनवाएं सभी ने हमको लूटा है, सुंदर अलफाज़ हैं इस
- 54:53गज़ल के। कहाँ तक नाम गिनवाएं सभी ने हमको
- 55:06लूटा है, सभी ने हमको लूटा है। तुम्हारी खुशी ये लुटेरे लूट के
- 55:20ले। गए।
- 55:23तुम्हारे पले राधे राधे करते रहो उस काली चुंड में बैठ जाओ उस पीली
- 55:31चुंड में बैठ जाओ राधे राधे करते रहो।
- 55:39जो इनके पास होगा वही तो देंगे बस चार अक्षर, इससे चार अक्षर उससे
- 55:49कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा, पानमती ने कुनबा जोड़ा।
- 55:54सत्य सत्यवादी अगर हैं। ईश्वर को साक्षी करके कह दें कि
- 56:01जो देखा वही बोलते हैं, जो माना वो ही बोलते हैं।
- 56:06जे नहीं, जो सुना वही बोलते हैं। जे नहीं जो देखा वो ही बोलते हैं।
- 56:15लेकिन इनकी आत्माएं इनको धिक्कारगी नहीं देखा है।
- 56:22अभी देखा नहीं है। आई ऍम नॉट शुर पक्का नहीं हमसे
- 56:28अगर पक्का होता तो ऐसे लोगों को रात में नींद हराम करते।
- 56:33किसी ने लोगों की नींद हराम की। ये मूर्ख लोग रात को जागरण करके
- 56:37लोगों का पाप कमाते हैं। कोई वृद्ध है बेचारा बोली खाके
- 56:41सोया नहीं मुझे अक्सर लोग कह देते हैं।
- 56:49बाबा बीमार है तुम घरवाले सब बीमार है।
- 56:52मैंने कहा, जागरण वगैरह तो नहीं करते हाँ करता हूँ बस फिर ठीक है,
- 56:57जाओ जहर पीओगे और फिर कहो कि मर रहा हूँ बाबा तो इसमें मेरा
- 57:14दोस्त। थोड़ी।
- 57:17तुम लोगों की नींदें हराम कर रहे हो और पैसे ले रहे हो बड़ा गायक
- 57:23है बड़ा श्याम बाबा का भक्त है लोगों की नींदें खराब करो यह
- 57:29दुष्कर्म करने पर तत्पर रहते हो बड़े बड़े लग जाते हैं यूनिट्स।
- 57:35और तुम बड़े भावे हो और कई तो खुद ही भावे बन जाते हो।
- 57:42ये नया चमत्कार है क्या क्या बताऊँ, बढ़िया इस आनंद के लुटेरे
- 57:51सभी। सभी शरीक हैं।
- 57:58इस लूट में सभी शरीक हैं। धर्मज्ञों से लेकर राजनीतिज्ञों
- 58:05तक। तुम्हारे आनंद को सभी ने लूट।
- 58:09लिया। कोई एक जिम्मेवार नहीं।
- 58:15और किस किस का नाम क्या नाम है, पूछा है वो शो का है के जीवंत को
- 58:22तलाशना। बिलकुल ठीक है।
- 58:27प्रश्न पूछो, अपने शास्त्रों से क्या जवाब देगा अब?
- 58:34शास्त्र कभी बोलते हैं क्या इतने मूर्ख तुम क्यों हो गए?
- 58:45शास्त्र सम्मान देने के लिए है उनके भीतर रास्ता है।
- 58:50उनको पढ़ो और पढ़कर उनको गुणों और गूनकर उन पर कर्म करो, वैसा चलो
- 59:05अमल करो। शास्त्र नहीं कहते कि मुझे ढो
- 59:12नहीं कहते बहुत समझदार व्यक्ति। था।
- 59:25लेकिन तुम क्यों गुरु हो बैठे जाने वाले तो कह गया।
- 59:32लेकिन तुमने महाकुंभ का आयोजन क्यों कर लिया?
- 59:35क्या तुम पहुँच गए उस स्थान पर? सतौरी की झलक देखने वाला भी किसी
- 59:45वक्त मुड़ सकता है। ध्यान रखना, सतौरी की झलक देने
- 59:49वाला इस नॉट कन्फर्म अबाउट। इट।
- 59:53अभी शक बाकी है। देख लिया उसने कोई हाथ निचा।
- 59:58रहा है। लेकिन ही इस नॉट सो कन्फर्म नहीं
- 1:00:02है। अभी शिशु पंज में हैं, लेकिन वो
- 1:00:08मुड़ना शुरू हो जाएगा, उस तरफ बदलना शुरू हो जाएगा।
- 1:00:13वो चुभ को से खींचना शुरू कर। देगा।
- 1:00:20तो जार से पंचम तड़प रहा। था।
- 1:00:23इतना तड़प रहा था अबे सब लगा लो जब वो कहता है मुझे मार।
- 1:00:29दो। डॉक्टर से कहने लगा मुझे जहर का
- 1:00:34इन्जेक्शन दे दे डॉक्टर। मैं इससे ज्यादा दुख।
- 1:00:43दर्द नहीं मेरी हिम्मत जवाब दे गई आई कैनट बीए मेरा मर्डर।
- 1:00:57इसे आत्महत्या कहो या हत्या कहो उस बेचारे ने किया करें क्या?
- 1:01:04इंग्लैंड के नॉर्थ फक में सैन्ड्रिंगम में जॉर्ज पंचम की
- 1:01:09मृत्यु हुई रात को अर्ध रात्रि को उसके चिकित्सक ने।
- 1:01:16उसको दो टीके दे दिए जहर के मर सिंह का माफिया जयार 3/4 और तुरंत
- 1:01:30बाद उसके कोकीन। जीआर वन ये दोनों इंजेक्शन दे दिए
- 1:01:381 मिनट के भीतर और उसके आखिरी शब्द थे जॉर्ज पंचम के कोई
- 1:01:48आशीर्वाद दे के नहीं मरा। जॉर्ज पंचम के आखिरी शब्द थे गॉड
- 1:01:53डैम यू परमात्मा तुम्हे नर्क में भेज दे मृत्यु देने वाले को क्या
- 1:02:02कहेगा गॉड डैम तुम्हारा नष्ट कर दे बाबा।
- 1:02:12वो जार्ज पंचम जो छाती फैला के बैठता था, दो तिहाई विश्व के ऊपर
- 1:02:19जिसकी अधिकृत शाशन थे वह ऐसे मरा तड़प के मरा।
- 1:02:29और इतना तड़पा इतना तड़पा शायद ही कोई राजा इतना।
- 1:02:33तड़पा। या मसोल नहीं इतना तड़पा या जज
- 1:02:39पंचम इतना। तड़पा।
- 1:02:46गॉड टाइम ये श्राप दे के मरा। इतना क्रूर व्यक्ति हचर्य ऐसा ही
- 1:02:56होना चाहिए। प्रकृति बड़ी न्यायकारी है, हम
- 1:02:59रोज़ सुनते हैं लेकिन फिर भी खुद परमात्मा बनने की चेष्टा में
- 1:03:04संलग्न। रहते हैं।
- 1:03:06हम परमात्मा बन जाए, हमें लोग पूजाएं, क्या हो जाएगा?
- 1:03:11क्या हो जाएगा? उससे तुम मूर्ख हो।
- 1:03:21तुम्हें जीने का आनंद नहीं आया इसलिए मृत्यु का भी सलीका नहीं जो
- 1:03:29ठीक ढंग से जिया हो। ओह, मरेगा भूषित ढंग से?
- 1:03:38जिसकी जिंदगी बेमानी गुजरी हो, उसकी मौत आसान हो।
- 1:03:46मेरे ये शब्द हृदय की डायरी में लिख ले।
- 1:03:50कुछ लोगों को पसंद आएँगे, कुछ लोगों को नपसंद आएँगे।
- 1:03:55ये उनकी मर्जी है। मैं बोला अपने अनुभव से।
- 1:04:00बोला? गैलिली वो कहते हैं, पृथ्वी घूमती
- 1:04:09है। और।
- 1:04:13पात्री कहता ना दैट इस नॉट इन आवर वाइफ और मंसूर कहता है अनल हक,
- 1:04:22मैं खुद खुद हूँ राजा कहते ना। ये हमारी कुरान में नहीं है और जो
- 1:04:33कुरान में नहीं है वो सत्य कैसे हो सकता है?
- 1:04:38वक्त बदलता सचाई का अभी तो तुमने खोजा ही क्या है?
- 1:04:49अभी तो कुछ भी नहीं खोजा। है।
- 1:04:53उसने जो बनाया वो बनाने की बात तो छोड़ो, कैसे बना?
- 1:04:57ये भी छोड़ो, जो बनाया उसका एक अंश का।
- 1:05:04अरब मा खरब मा पदम बा शंख मा अंश भी तुम नहीं खोज पाए आजतक कब
- 1:05:12खोजोगे तुम और तुम रोज़ छोटी छोटी बातें, चीजें खोज के अपना नाम
- 1:05:21नोबेल में लिखा देते हो लिखा लो। किसी का नाम यहाँ धरा रह गया है।
- 1:05:28सभी शिलालेख उड़ जाते हैं या शिलालेख को पढ़ने वाले नहीं बचते?
- 1:05:33क्या करोगे शिलालेख? लगाकर?
- 1:05:38क्या करोगे कैप्सूलों को दबाकर? कभी कोई राजा रानी हुआ करते थे,
- 1:05:43हुआ करते थे क्या करें? फिर सबके लोगों ने भुगत लिया।
- 1:05:53मोड़ता की कोई हद नहीं होती और मोड़ता को फैलाने वालों के भी कोई
- 1:05:59हद नहीं। इनको नमस्कार कर दिया करो, अपने
- 1:06:04अनुभव की तरफ मढ़ो खुद ही जानो और खुद के जानने से ही मानना आएगा वो
- 1:06:17ही सत्य हो। तभी कह पाओगे, मैं कहता आंखन देख
- 1:06:24तुम कहते कागज की लेखी, वो बेकार है, किसी ने जाना होगा, किसी ने
- 1:06:31भोजन किया होगा, उसका पेट भरा होगा, किसी ने ठंडा जल पिया होगा
- 1:06:35उसकी। प्यास मची होगी।
- 1:06:38तुमने नहीं पिया तुमने नहीं भोजन खाया तुम भूखे हो, तुम प्यासे हो,
- 1:06:43तुम्हें खुद ही पीना पड़ेगा, तुम्हें खुद ही खाना पड़ेगा,
- 1:06:47तुम्हें भूख लगी है तो खुद खाओ खुद पीओ अपने भीतर उतरो, खुद के
- 1:06:53भीतर उतरना होगा, दूसरे को याद नहीं करना।
- 1:07:23नाथ नारायण, वासुदेव। श्री कृष्णगोविन्द हरे मुरारी हे
- 1:07:48न थिनारां यन वासुदेव। हेतुमात स्वामी सखा हमारे।
- 1:08:13हमारे किंतु मात स्वामी सखा हमार हेनाथ नारायण।
- 1:08:32वा सुदेव वा श्री कृष्ण गोविंद हरमुरारी।
- 1:08:49जन वासुदेव आ रहा ये अँधेरा घना छ रहा तेरा।
- 1:09:06इंसान घबरा रहा, ये अँधेरा घणा चारा तेरा इंसान घबरा रहा।
- 1:09:29हो रहा बेखबर, कुछ न आता नजर सूखा सूरज शिप जा रहा।
- 1:09:46है तेरी रौशनी में जो दम तो अमावस को कर दे पुनः नहीं की पर चले।
- 1:10:05ओरबदी से डालें ताकि हँसते हुए निकले दम एम् मालिक तेरे बंदे हम।
- 1:10:26ऐसी हो हमारे कर्म निखिल पर चले और पति से टालें ताकि हँसते हुए
- 1:10:42निकले दम। मालिक तेरे वंदर हम मात स्वामी
- 1:10:56सखा हमारे। पितमात स्वामी सखा हमारे हेनाथ
- 1:11:09नारायण वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद।
- 1:11:19अरे मुरारी विनाथ नारायण वासुदेव विथुमात स्वामी सखा हमार विथुमात
- 1:11:34स्वामी सखा हमार। हे नाथ नारायण वासुदेव हे नाथ
- 1:11:45नारायण वासुदेव। श्री?
- 1:11:53कृष्ण गोविंद आरे मुरारी। हेनाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण
- 1:12:04गोविन्द हरे मुरारी हेनाथ नारायण वासुदेव ओह।
- 1:12:20धन्यवाद।