Latest / Baba ji Vijay Vats / 5 May 26 - 'भीतर उतरने' और वर्तमान में ठहरने का असली मतलब? "सिर्फ मेरे ज़रिए ही खुदा मिलेगा"—अहंकार या सत्य?
Transcript
- 0:13प्रणाम बाबा जी बाबा जी क्या जीत से सुभारत आए थे?
- 0:28मैं मानता हूँ कि वह एक एनलाइटन व्यक्ति थे।
- 0:43कृपया नाम लिख दिया करो क्या?
- 0:55जीस से स्वार्थ आए थे? अध्यात्म के राही को इतिहास में
- 1:12रुचि नहीं रखनी चाहिए। जो अध्यात्म के मार्ग पिछड़ पड़ा
- 1:23वह इतिहास की किताबों को फूंक दे, इतिहास की बातें भुला दे।
- 1:33अतीत में जो हुआ जो किया वो भुला दिया ध्यान से सुननी बातों को
- 1:46सिर्फ वो ही और वो ही व्यक्ति। वर्तमान में जा सकता है अपने भीतर
- 1:56जो भूत और भविष्य दोनों को अपराध होता है और तुम्हारा सबसे पहला
- 2:05कर्तव्य अपने भीतर जाकर। यह जानना है नो दायसाई हूँ आर यू?
- 2:19इससे पहले तुम्हारा कोई दायित्व नहीं बनता।
- 2:28कौन हुआ? कौन नहीं हुआ क्या था, क्या नहीं
- 2:32था? यह खिचड़ी बन गई है, इसलिए तुम
- 2:39बोल चूके हो तुम इतिहास के बारे में सोचना भी मत।
- 2:54और तुम्हारी जिंदगी के साथ जो घटनाएं हुईं वो इतिहास हो गई।
- 3:01उन्हें भूल जाना तो तुम्हारा पहला कदम अध्यात्म की तरफ उठेगा।
- 3:12भविष्य की कल्पनाओं में खोजना इसे भी बोलना होगा क्योंकि जितना अतीत
- 3:22तुम्हें उजाता है, उतना ही तुम्हें भविष्य भी उजाता है।
- 3:29और मैंने पहले भी कहा कि हमने पेंडुलम की तरह शितर होना है।
- 3:35मध्य में जब हम ठहर जाएंगे, न भूत काल में जाएंगे, न भविष्य में
- 3:46जाएंगे, न स्मृतियां होंगी। न ही तुम्हारे अरमान होंगे, न ही
- 3:54तुम्हारे आगे के जो नहीं होंगे तो तुम मद में ठहर जाओगे।
- 4:02मद में ठहर जाओगे तो अपने भीतर उधर जाओगे।
- 4:08और बस से तुम्हारा पहला कर्तव्य यही है, इसलिए परमात्मा बच्चे को
- 4:17पैदा करता है। इनोसेंट धीरे धीरे ज़माना उसे
- 4:23होशियार सीखा देता है। मैं मानता हूँ कि वह एक एनलाइटन
- 4:33व्यक्ति थे, यह मानना ही तुम्हारी मुसीबत है।
- 4:46जब तुम इतिहास को भूल जाओ, जब तुम भविष्य की योजनाओं को भूल जाओ तो
- 4:54तुम ठहर जाओगे और ठहरने के उपरांत।
- 5:02तुम वह जान जाओगे जिसके जानने से सब जान लिया जाता है।
- 5:18मैं मानता हूँ कि वो एनलाइटन पर्सन थे।
- 5:22मानने वाने की कोई जरूरत नहीं होती, मानना खोपड़ी का होता है।
- 5:27और खोपड़ी कुछ भी मान सकती है। इसलिए इतने विचार आज सारे संसार
- 5:33में घूम रहे हैं। एक दूसरे को स्ट्राइक कर रहे हैं
- 5:38इसलिए तो हम सिधर नहीं रह पाते इसलिए बाबा ने मुझे रोका।
- 5:48एक कम्यून मत बना लेना। मुझे बाद में समझाया कि कम्यून के
- 5:59अंदर एक दूसरे की स्ट्राइक रोम रोम से निकली हुई आसानी लासानी
- 6:07तरंग। एक दूसरे से टकराती अगर कोई
- 6:13व्यक्ति अपने भीतर उतरना शुरू भी हो गया है तो बाकी सभी की करणें
- 6:19उन्हें भीतर जाने से रोक देंगे। एकांत आवश्यक है साली सूट, लोनी
- 6:28लेस। कैवल्य केवल हो जाना मैं मानता
- 6:41हूँ कि वह एक एनलाइटन पर्सन नहीं मानना।
- 6:57क्या जीसस भारत आए थे? भूल जाओ इन बातों को साधक अतीत को
- 7:12भूल जाए कौन क्या था पहुंचने के बाद?
- 7:21ये सब बातें कारगर हैं, उससे पहले उससे पहले उससे पहले झूठ बोलना
- 7:35पाप है। हिंसा करना पाप है, जोड़ न पाप
- 7:44है। चोरी करना पाप है, शक्ति को खोना
- 7:48पाप है, सत्य हिंसा अस्तेब्रह्मचरा प्रिय ग्रह, लेकिन
- 7:55जब तुमने अपनी मंजिल पा ली उस दिन तो तुम पाओगे।
- 8:07चोरी करोगे दिसकिस झूठ बोलोगे दिसकिस।
- 8:24शक्ति गवाह भी दोगे तो जाएगी कभी क्योंकि तुम जान लोगे की तुम फिर
- 8:35हठ हो निर्भय किस्से बेह करोगे निर्पूर्ण?
- 8:45किस्से भय होगा तुम जब दूसरा कोई है ही नहीं, यह बाद की बातें हैं
- 8:54अभी आप मानने की चेष्टा मत कीजियेगा।
- 9:03आइए हम स्टेप ब्य स्टेप चल रहे हैं ध्यान रखना।
- 9:14क्या ईशा वार्ता? इसे तुम छोड़ दो, ये बात तुम्हें
- 9:17बतानी युगनी तुम खुद ही खंगाल। मैं मानता हूँ कि वह एनलाइटन
- 9:35पर्सन थे तुम्हारी मानने से जब तुम बाहर से तुम्हारी खोपड़ी शितर
- 9:45हो गई, मन ठहर गया, तुम भीतर जाके देखोगे।
- 9:55एक ही टेबल के अर्थ अगर कबीर भी बैठे हैं, नानक भी बैठे हैं, ईसा
- 10:01भी बैठे हैं, मीरा भी बैठी है, दया भी बैठी है, राबिया भी बैठी
- 10:05है, पल्टू भी बैठी है। अरे दास भी वहीं हिस्सा भी।
- 10:17वहीं हजरत भी वहीं बैठी हैं और बीच में शराब की सुराही भी एक है।
- 10:29उससे एक ही सुराही से सब के पैग भरे जाते हैं और सभी पैर बिठाके
- 10:37चीयर्स करते हैं, गटक जाते हैं। यह दृश्य देखकर तुम्हारी आँखें
- 10:44ठहर जाएँगी। वहाँ जाकर भेद खत्म होता है।
- 10:52वहाँ जाकर वेदांत का अद्वैतवाद प्रत्यक्ष नग्न आँखों से निहारा
- 10:57जाता है। खोपड़ी के तल के ऊपर अद्वैत की
- 11:02व्याख्या करना नेक्स्ट वेम का शिविर असंभव है।
- 11:10परंतु जैसा कि जीसस बोलते हैं कि सिर्फ उन्हें ही भगवान को पाया जा
- 11:23सकता है उनसे ही। भगवान को पाया जा सकता है और
- 11:31सिर्फ एक ही जन्म होता है जिसने उन्हें मसीहा मान लिया, वह स्वर्ग
- 11:42जाएगा हमेशा के लिए। और जिसने उन्हें नहीं माना वो
- 11:49हमेशा के लिए नरक जाएगा, इस से सबका क्या मतलब है बाबा मेरे समझ
- 11:58में कुछ आता नहीं है। खैर, प्रश्न पूछने वाली है तो
- 12:16पुत्री लेकिन भाषा प्रयोग कर रही है।
- 12:21लड़के की गुरु घर में भी टकियां चलती है, इसलिए मैंने कब नाम लिख
- 12:34दिया? अब समझिए जीसस कहते हैं जो मेरी
- 13:02बात को मानेगा। वह स्वर्ग जाएगा श्रद्धा की और जो
- 13:13नहीं मानेगा वह नरक में सड़ता रहेगा और एक ही जन्म होता है।
- 13:27तपुत्री मुझे ये बताओ कृष्ण ने क्या कहा?
- 13:36अन्य न्यास चिंतन तो माँ जी जनह परिपास्त्र देशाम नृत्य गुप्ता
- 13:43नाम योग शिवम् बाहम मेरी शरण में आजा सर्वधर्माण प्रतिज्ञमामीकम
- 13:53शरण ब्रज छोड़ दे सभी को कृष्ण कहते हैं जी सबको छोड़ दे।
- 14:06कृष्ण कहते हैं सब छोड़ दे इसका गहरा अर्थ समझो इसका गहरा अर्थ ये
- 14:16है के भेद रहित हो जा एक हो जा यूनाइटेड हो जा।
- 14:21योगी होजा बाइफरकेट मत्र है मल्टीडायमेंशनल मत्र है
- 14:38कृष्ण को सुनने वाले ईसाई यही भाषा बोलेंगे वो कहेंगे ऐसा कैसे
- 14:48हो सकता है? सिर्फ कृष्ण को मानने वाले ही
- 14:55मुक्त हो जाएंगे और ईशा को मानने वाली वीडियो में जकड़ते रहेंगे,
- 15:06नरक की सड़ांध में सड़ते रहेंगे। बस वो बिलकुल ऐसा सोचेंगे।
- 15:13थीम में कोई ज्ञान नहीं है। शब्द सब ने पकड़ लिया।
- 15:17शब्दों की व्याख्या करने वाले आचार्य बहुत बैठे हैं।
- 15:20सर लोग बैठे हैं, आचार्य लोग बैठे हैं, भीतर कोई उत्तरण है?
- 15:32आओ फिर से शुरू करते हैं। क्या जीसस क्राइस्ट भारत आए थे,
- 15:39इसको भूल जाओ किसने तो अच्छे भले वो शो को बढ़वा दिया नहीं हसो।
- 15:49मैं मानता हूँ कि वो एक एनलाइटन व्यक्ति थे मारने वारने से कुछ
- 15:53नहीं होता छोड़ दो वाने को आँखों से देखो पर हाँ, ये बुद्धि शंका
- 16:03पैदा करता है जैसा कि जीस। कि सिर्फ उनसे ही भगवान को पाया
- 16:11जा सकता है सब ये सब बस एक बात समझ लेना।
- 16:21दादी के दो छोर होते हैं एक छोर। नानक का है।
- 16:34नानक दूसरी भाषा का प्रयोग करेंगे जो नमाणीय भाषा है मिठासनी मीनान
- 16:41का गुण जंजैया तत्व। नान कहेंगे, वण छको नान कहेंगे
- 16:53कृत्य करो नान कहेंगे जो तुध पाप है साई गल चंकी।
- 17:10जो तुझे अच्छा लगता है। धागे का दूसरा छोर कृष्ण का है,
- 17:17लेकिन ध्यान रखना धागा एक है दो पहलुओं से बोला जा सकता है धागा
- 17:25एक है। इसे ही अद्वैतवाद कहते हैं।
- 17:30अद्वैतवाद की परिभाषाएं देने वाले व्याख्यान देने वाले बहुत
- 17:35मिलेंगे। तुम्हें कर्महेशु योगकोश जैसे
- 17:51धागा युक्त होता है। दोनों छोर मिले होते हैं।
- 17:56जैसे बिजली की तार एक होती है छोर चाहे दो नजरें विरोधी लेकिन जद्र
- 18:04भी छुओगे करंट लगेगा मरोगे बात ना ना कोई वो ही कहते है।
- 18:15शब्द बदल जाते हैं, तरीका सिलिका बदल जाता है।
- 18:18बात कृष्ण भी वही कहते हैं, तरीका सिलिका बदल जाता है, नान्य का कम
- 18:25परमात्मा नहीं और कृष्ण ज्यादा परमात्मा नहीं, ईसा कम परमात्मा
- 18:33नहीं। हजरत ए ज्यादा पर मत मानी बस दावे
- 18:38के दो छोर बोलने के दो ढंग है। इसे ही अद्वैतवाद कहते हैं तुम
- 18:45अपनी आँखों से देखो, बुद्धि से मानना पूर्ण नहीं होता।
- 18:52बुद्धि तो अधूरी है। बुद्धि तो खंड खंड करती है वि
- 18:56भक्त करती है तुम वि भक्त मत हो तुम भक्त हो जाओ तुम यूनिफिकेशन
- 19:04में आओ यूनिफिकेशन का मतलब भक्त है योग हो जाना जुड़ जाना।
- 19:12मर्ज हो जाना, उसमें समा जाना, समाहित हो जाना बुद्धि को फर्क
- 19:23लगेगा। मैं इधर जाऊं या उधर जाऊं किधर भी
- 19:28जाओ, करंट तो एक ही बहता है। यह धागा मेटल का है।
- 19:36यह कंडक्टर है। इन्सुलेटर नहीं, दोनों छोरों में
- 19:41किधर भी हाथ लगा दोगे? करंट खाओगे और झटका लगेगा, जैसा
- 19:49कि जीसस बोलते हैं। उनसे ही भगवान को पाया जा सकता
- 19:53है। बिल्कुल जो व्यक्ति वहाँ जाएगा वह
- 19:56इतना संकल्पवान हो जाएगा वह बोलेंगे कि मैं ही जीतूंगा और
- 20:02जीतेगा भी। भाई इतना संकल्पवान व्यक्ति ही
- 20:09जीतता है। या दूसरे अल्फाज़ में समझो जो उस
- 20:17स्तर पर जाकर जीत गया। वह इतना संकल्पवान हो जाता है।
- 20:23दोनों बातें कहें, तुम्हें अलग लगूंगी, जो जीत गया।
- 20:30उस स्थल पर पहुँच गया जिसने वे कारों पर विजय प्राप्त कर ली।
- 20:39वह संकल्पवान हो गया और संकल्पवान व्यक्ति ही मैं करता हूँ।
- 20:49अहंकारी व्यक्ति भी बोलेंगे, तुम्हें भेद करना मुश्किल हो
- 20:53जाएगा, लेकिन ध्यान रखना अहंकारी व्यक्ति आग में जलता होगा और मैं
- 21:01बोलेंगे। निर अहंकारी व्यक्ति, संकल्पवान
- 21:09व्यक्ति, उस स्तर पर जाने वाला कृष्ण मैं कहेगा, लेकिन निधि वन
- 21:18में जाके गोपियों से रासर जाएगा, आनंद बिखरेगा।
- 21:27प्रेम बरसाए का करुणा बरसाए का? दोनों के लक्षणों में फर्क होगा।
- 21:34शब्द यज्ञा मालूम पड़ेगा, इसलिए बहुत बार तुम गच्चा खा जाओ।
- 21:43शब्द अहंकारी के बिल्कुल वही होंगे जो भगवान के होते हैं तो
- 21:49वहाँ कौन काम करेगा, वहाँ लक्षण कौन करेगा?
- 21:56कोई आचार्य भी कह सकता है कि मैं जो बोलता हूँ ठीक एनलाइटनमेंट
- 22:02होता नहीं। कोई मार्कर्स भी बोल सकता है।
- 22:06मैं जो कहता हूँ ठीक भगवान नहीं होता, कोई नीचे भी बोल सकता है
- 22:12गॉड इस दट। वह मर गया है कोई चार वाक भी बोल
- 22:16सकता है यहाँ कोई लेने देने का हिसाब नहीं।
- 22:24भस्मभूत से देह से पुनर्गमनमुकतः यदा जीवित सुखी जीवितृणमकृत व
- 22:36ग्रंथम पीवित कर्ज उठालो घी भी जाओ, मुकर जाओ।
- 22:47आज तो हम लोगों को गतियों पर बिठा देते हैं, सारे दिन काम नहीं
- 22:54करते, सांझ का इंतजार करते हैं। घर जाकर कब बोतल खुलेंगे?
- 23:03हँसा। आज हम देश का प्रमुख चुन देते
- 23:14हैं, वह उड़ता ही रहता है। हम सोचते हैं किसी देश में अनुबंध
- 23:25करने गया, लेकिन पता बाद में चलता है।
- 23:30वह तो आइसलैंड पे गया। हम सोचते हैं कि यह कोई योजना बना
- 23:39रहा है, लेकिन जब गौर से देखते हैं तो रजिस्टर के ऊपर पेन एक इंच
- 23:47ऊपर होता है तो लिखेगा क्या खाक? लिखना ही नहीं आता जो ईशा के कहने
- 24:04पे कि जो मेरी बात मानेगा वही परमात्मा को पहुंचेगा और स्वर्ग
- 24:13को भोगेगा, अनंतकाल तक और जो नहीं मानेगा?
- 24:18वह सड़ेगा नर्क में अगर तुमने समझा कि ये अहंकारी व्यक्ति है तो
- 24:28तुम मार खा गए। ऐसे ही ईसाई कृष्ण को अहंकारी
- 24:34कहते हैं। जैन धर्म के लोगों ने कृष्ण को
- 24:40साथ में नर्क में डाल रखा है। इससे बड़ा अहंकारी और हिंसक
- 24:45व्यक्ति हो ही नहीं सकता। जिसने 40,00,000 लोग मरवा दिए, ये
- 24:51हत्यारा है, अपनी ही मामा को मार देता है, शिशुपाल का वध कर देता
- 24:57है। भला इनकी मान्यताएँ इनको कैसे
- 25:08सत्य को व्याख्यायित करने देंगे। अड़े क्योंकि इन्होंने मान लिया
- 25:14है कि परमात्मा हिंसा नहीं करता। तो हिंसा तो रोज़ होती है, फिर
- 25:20कौन करता है? कृष्ण कहते हैं, मैं करता हूँ
- 25:28मज़े की बात है। जैनी कहते हैं, जो हिंसा परमात्मा
- 25:35नहीं है, इसलिए जैनियों ने। कृष्ण को सातवें नरक में डाल
- 25:40लिया, आखिरी नरक होता सड़ेगा एक और सनातन ने कृष्ण को फूलों की
- 25:52सेठिया पे बैठा रखा है। नाचे रे मधुवन, राधिका नाचे रे,
- 26:13गिरधर की मुरली आवाज़े रे। मधुवन में राजी का नाच रहे वो ही
- 26:32कृष्ण है जो 12 वर्ष तक निधिवन में जाकर प्रेम बरसाते हैं, अकूत
- 26:39प्रेम की वर्षा करता है। और वो ही कृष्ण है जो काल बनकर खा
- 26:49जाते हैं। 40,00,000 तुम कहोगे ये बह रुपिया
- 26:56है नहीं, यही तो अद्वैत है, तुम्हारी बुद्धि में नहीं आता।
- 27:06उस सतल पर पहुंचा हुआ व्यक्ति जो भाषा बोलेंगे वो तुम्हारी समझ में
- 27:13नहीं आएगा क्योंकि वह भाषा बोलेंगे।
- 27:17यूनिफिक्शन की योग के और तुम्हारी बुद्धि भाषा समिति है।
- 27:22खंड खंड की मल्टीडाइमेंशन की तुम चीजों को समझना चाहते हो और कृष्ण
- 27:32उस तल पर उतर जाया करते हैं जहाँ चीजें समझ में आ जाया करती हैं
- 27:37चीजें अनुभव कर रही होती हैं। एनालायसिस नहीं करना होता, उन्हें
- 27:45काटना पीटना नहीं होता। वैज्ञानिक की तरह उसने समूचे
- 27:50समूचे देखना होता है। जैसे फूलों की सुगंध को सिर्फ नशा
- 27:54कुटा में सुगना होता है उन पेटल्स को।
- 27:59या उसको सारे को काट लेंगे तो तुम्हें तत्व का पता चलेगा।
- 28:03यह एलिमेंट्स से मिल के बना है यह फूल, लेकिन तुम खुशबू को कभी खोज
- 28:12न पाओगे। और सारी बात खुशबू की है।
- 28:17तुम फूल के पास जाती हो इसलिए कि वह खुशबू देता है, मधुबन खुशबू
- 28:29देता है इसलिए जाते हो तुम? मधुवन में खुशबू बहती है, ऐसा
- 28:42कहते हैं जो मेरी बात को मानेगा, क्या बात है?
- 28:48क्या कहते हैं? ओनली दे विल एंटर इन माय गॉड्स
- 28:57किंगडम हू विल बी इनोसेंट जस्ट लाइक ए चार्ज क्या गलत कहते हैं
- 29:04बेबानी मत कर झूठ मत बोल, मासूम हो जा।
- 29:12सर हृदय हो जा, सहज समाधि भली रसाद हो ऐसा क्या गलत कहते हैं
- 29:22प्रेम को बरसाया ऐसा बस इसी शब्द ने ऐसा को टांग दिया।
- 29:30मैं करता हूँ। और सन्नतन बड़ा समझदार था, वो ही
- 29:35शब्द कृष्ण ने बोले थे और बिल्कुल वही शब्द।
- 29:403000 साल बाद ईसा ने बोले थे, लेकिन तब तक समाज घर पहुँच चुका
- 29:47था। पहले समाज बहुत बढ़िया था।
- 29:52तब तक समाज अपनी नीचाइयों पर जा चुका था।
- 29:56सनातन ने कृष्ण को टांका दी, सनातन ने कृष्ण को स्वीकार किया।
- 30:04सनातन कहने पर तो ठीक प्रेम वाटना ही तो कर्तव्य है व्यक्ति का।
- 30:15राह में आए जो दीन दुखी सबको गले से लगाते चलो प्रेम की गंगा बहाते
- 30:32चलो। यही कृष्ण वह प्रेम की गंगा बहती
- 30:41है, कोई जानता नहीं ईसा प्रेम की गंगा बहती है और वह कहते हैं कि
- 30:48मैं परमात्मा हूँ और कृष्ण भी यही बात कहते हैं।
- 30:52लेकिन ईसा को टांक दिया जाता है। मंसूर के हाथ पांव काट लिए जाते
- 30:58हैं। वही बात मंसूर कहते हैं, अन्नल हक
- 31:00मैं खुद खुदा हूँ लेकिन इस्लाम संकीर्ण इस्लाम कहता है, हमारा
- 31:07धर्मशास्त्र याज्ञा नहीं देता। यू कैनट स्पीक दीज़ वर्ड्स दीज़
- 31:15अरे प्रोहिबिटेड इन आवर ग्रंथ इन आवर कुरान, ये हमारी कुरान में
- 31:21परहेब्ड हैं, ये मत बोलो लोग कहते हैं मैं क्या करूँ?
- 31:29मनसूर कहते हैं मैं क्या करूँ? मैं बोलता नहीं, वह आकर मुझ में
- 31:34से बोल जाता हूँ, मैं उसे रोक नहीं सकता, तीनों धरने मैंने नहीं
- 31:47तो समझदार कौन हुआ? शमीदार सनातन स्नात्र ने स्वीकार
- 31:56किया प्रेम का और जो प्रेम को स्वीकार करेगा वहीं तो पहुंचेगा
- 32:04परमात्मा का प्रेम है द्वार। यही शब्द का हक जीस, लव इस गॉड
- 32:19उसको टांग दिया गया क्योंकि उसने दूसरा अल्फाज़ कृष्ण का बोला था,
- 32:28जो मेरी बात मानेगा। वह स्वर्ग भोगगा अनंत काल तक जो
- 32:34नहीं मानेगा, वह नरक में सड़ेगा नरक और स्वर्ग के यहाँ अर्थ समझ
- 32:39लो यह कोई भौगोलिक संस्थान नहीं होते, ना नरक, ना स्वर्ग, ना
- 32:46सचखंड, ना सतलोक यह तुम्हारे चित्त की दिशाएँ।
- 32:51लाख स्वर्ग होंगे कहीं लेकिन अगर तुम्हारा चित्त उदास है तो तुमने
- 32:56स्वर्ग को क्या चाटना? वह है स्वर्ग तुम्हारा क्या
- 32:59करेगा? पड़ोसी के घर में सोने के अम्बार
- 33:05लगे हैं। तुम्हारे किस काम के स्वर्ग कहीं
- 33:08होगा? सच खंड कहीं होगा, लेकिन तुम्हारे
- 33:11अचेत जल रहा तो तुमने सच खंड से क्या करना है और वह सच खंड गुरु
- 33:19कहते हैं, मरने के बाद दिखाऊंगा, तो तुमने क्या आग लगानी है सच खंड
- 33:24की। छोड़ दो कृष्ण कहते नहीं मैं
- 33:32तुम्हें जीतेगी, स्वर को दिखाऊंगा, मरकर देखा तो क्या
- 33:37देखा? और मरकर कभी कोई देखता है ज़रा
- 33:41देखना वही व्यक्ति जीसको कल तुम घूर रहे थे।
- 33:48और उसने शिकायत कर दी थी कि यह मेरे सतनो की तरफ बोल रहा है।
- 33:58अब बना ये मूर्खता की निशानी है। सतनो का मालिक ये कैसे हो गया?
- 34:04सतनो का मालिक तो स्तन है। पृथ्वी है मालिक यह एक पदार्थों
- 34:12से बना हुआ है। बच्चे को दूध तू पिलाने के लिए
- 34:15होता है लेकिन मूर्खता चरम पे आ गई और आज तो मूर्खता और भी चरम पे
- 34:24आ गई। आज तो छोटे छोटे बच्चों को
- 34:31कॉम्पिटिशन बस अगर हिंदू मुस्लिम करोगे तो परिणाम ऐसे ही आएँगे।
- 34:43वो उन्होंने मदरसा खोल ली। तुमने नफरत की दुकान में खोल ली,
- 34:51प्रेम कौन फैलाएगा? और परमात्मा तो प्रेम से मिलता
- 34:56है। परमात्मा का अर्थ क्या है?
- 34:58खुशी, आनंद रस रहस्य। रसोब ऐसा वह मदहोशी का आरंभ उसके
- 35:12बिना क्या जीना होता है उसके बिना तनह रहे जाती।
- 35:21वह मिली तो बात बनी, उसका न मिलना तुम्हें गमगीन कर जाता है।
- 35:33फिर न तुम जीते हो, न तुम मरते हो, फिर तुम्हें समझ नहीं आता कि
- 35:40करें तो क्या करें? ऐसे ही मानवता आज जंजू में पड़ी
- 35:47है। उसे समझी ही नहीं आता।
- 35:55ऐसे में करें तो क्या करें तो तुम किसी भी गुरु की शरण पकड़ लेती।
- 36:02इतनहाई कॉल और उस पर आप का न जीते हैं।
- 36:20न मरते बताओ क्या करें हम अकेले हैं चले आओ।
- 36:53अकेले वो नजर भी तो नहीं आता। तुझे आवाज दे तो कहाँ गई और तुम
- 37:04उसको सुमन कर के आओ पता तुम्हें है नहीं, इतना भी तुम्हें नहीं
- 37:11पता कि वो है भी कि नहीं? एक भी व्यक्ति हाथ खड़ा करके कह
- 37:19देगा कि वो है कबीर की तरह स्टेम्प्ड करके मैं कहता हूँ कंधे
- 37:24की फिर तुम समझ में किसका करते हो, कभी सोचा?
- 37:34यह शक्ति की बर्बादी और समय की बर्बादी नहीं तो और क्या है?
- 37:40छोटे छोटे बच्चों को सिखाया जाता है राधे राधे करो छोटे छोटे
- 37:46बच्चों को हम संग ले जाते हैं कहीं बहक न जाए।
- 37:56चलो डेरे में नाम पे तुम्हें पता ही नहीं होता, यह शायद अल्बर्ट
- 38:05स्क्रीन भी हो सकता था तुमने इसको पांच नाम रटनी पे लगा दिया।
- 38:13वह अल्बर्ट आइंस्टीन की तरह इ इज़ इक्वल टू एम सी स्क्वेयर खोज सकता
- 38:17था। तुमने राधे राधे करना शुरू कर
- 38:20दिया। वह सर आइज़िक न्यूट्रिन भी हो
- 38:25सकता था, रदर फोल्ड भी हो सकता था लेकिन तुमने उसे?
- 38:30रामायण का पाठ पड़ना सीखा दिया। गीता कंठा संकरा दी, कुरान कंठा
- 38:34संकरा दी, इनसे कुछ नहीं मिलेगा पड़ पड़े गड्ढे र दिए थे पड़ पड़े
- 38:42हुई खार नानक लिखे एक गलत है, बाकी चकणा चार।
- 38:58जीसस ने कहा, सिर्फ उनके द्वारा ही परमात्मा को पाया जा सकता है।
- 39:07यही कृष्ण ने भी तो कहा था तुम चुप जाते हो माँ ऍम एकम शर्म पर।
- 39:15अहं तो हम शरपा पाती भी हूँ मुख्य श्याम माँ चु चा मैं तुझे करूँगा
- 39:20ऐसे नैया से पार दुःख की नैया से पार मैं करूँगा तुम्हें यह सागर
- 39:27तुम अकेले से पार न कर पाओगे मेरी शरण में आ जाओ यह है पतवार मुझे
- 39:31दे दो मेरी नाव पे स्वाद। और सिर्फ एक ही जन्म होता है, यह
- 39:43एक धारणा है। समझना ऐसा नहीं है कि जीसस जानते
- 39:53हो, अच्छी तरह से जानते हो। ऐसा नहीं है क्या जरूरत जानते
- 39:58हैं? बिलकुल जानते हैं लेकिन जैसे ही
- 40:06हम कहते हैं जल्दी करो भाई। एक ट्रैन किसी स्टेशन पर रुक गई,
- 40:12हम चाय पीने के लिए उतर गए। हम चाय पी रहे हैं, ट्रैन विसल
- 40:19देती हैं। वह एक वॉर्निंग है कि देखो भाई जो
- 40:26चाय वगैरह पीने गए हैं, वो आकर अपने कम्पार्टमेंट में बैठ जाएं।
- 40:35यह सिर्फ एक तुम्हें अलर्ट स्टेशन है।
- 40:40जल्दी से इसी जन्म में कर लो जो होता है अगला जन्म होता नहीं बस
- 40:46ये ढंग था कहने का, हमारे ऋषियों ने भी कहा जवानी में अदम के
- 41:00वास्ते समान करगा फ़िल्म। जवानी में अदम के वास्ते सामान पर
- 41:09राफेल मुसाफिर शब्द से उठते हैं, जो जाना दूर होता है, सुबह सवेरे
- 41:18उठा जाता है जिन्होंने बहुत दूर जाना होता है।
- 41:23बस यह कहने का तरीका है कहने का तरीका अष्टावक्र का भी है कहाँ
- 41:28जाना है अपने ही तो पास है सपना देख रहे हो सपना तोड़ दो एक क्षण
- 41:35में टूट जाएगा कहने के अंदाज में। बात तो दोनों की ठीक है जो कहते
- 41:48हैं तुम दूर निकल गए। बाबू ठीक कहते हैं, कल्पना में
- 41:54दूर निकल गए और अष्टावकर कहते हैं, कहाँ जाना है?
- 42:00तुम हो ही तुम्हारे पास, वो भी ठीक है वो कहते सत्य तो यही है कि
- 42:06तुम कभी चूके हैं ही नहीं। अपने से तुम कहीं जाते ही नहीं।
- 42:12आत्मा कहीं जाती है क्या वह शानक्षी जीर्णानी यथा व्याहाय
- 42:18नमानी घृणाती? नरौ पराणी तथा श्री रानी विहाय
- 42:22जीर्ण अनन्याणी से आती नवानी देह दे ही आता जाता है।
- 42:28आत्मा भला कहीं जाती है आत्मा न कहीं जाती है न कहीं आती है
- 42:34आत्मशित्र। स्टेबल है, साक्षी है और अगर आना
- 42:38जाना शुरू कर दे आत्मा तो मैंने तुम्हें बहुत वार कहा है।
- 42:42उसने साक्षीत्व खो दिया। तुम आने जाने की बात करते हो अगर
- 42:49हमारे भीतर का वो साक्षीतत्व थोड़ा सा भी शेक हो जाए, हिल जाए।
- 42:55तो तद क्षणों पर लह हो जाएगी वह ऐसा आत्म गुमथन में गुथा हुआ है।
- 43:01ऐसी कड़ियों में गुथा हुआ है कि वह हिलतन है और अगर वह हिल जाए तो
- 43:11प्रलय निश्चित है। और जीसस ने कहा जो मुझे फॉलो
- 43:20करेगा, जो प्रेम करेगा जिन प्रेम किए तीन ही प्रभ।
- 43:33और प्रेम असली स्वर्ग है जो मुझे फॉलो करेगा वह सदा सदा के लिए
- 43:46स्वर्ग को भोंगेगा स्टेट ऑफ माइंड जब तुम क्रोध में होते हो तो ज़रा
- 43:54सोचना देखना। तुम जागे नहीं होते सो जाते हो
- 43:57तुम देखना इससे बड़ी कोई आग होती। तुम उस वक्त नर्क में होते हो जब
- 44:09तुम प्रेम की घड़ियों में होते हो उससे बड़ा स्वर्ग कोई नहीं होता।
- 44:17निधिवन में कृष्ण राज़ राज़ रचाते हैं, भला उससे बढ़िया स्वर्ग तुम
- 44:24कहीं पाओगे भाई, देखो वृंदावन की गलियों में जाके लुटेरे बैठे।
- 44:42यहाँ राधा रानी के पांव पड़े थे यहाँ कृष्ण के पांव पड़े थे रखो
- 44:49दक्षिण जैसे फेरों में भ्रमण करते हैं, गऊ दान का संकल्प लो और तुम
- 44:55₹10 निकाल के दे देते हो। 10 रुपयों में गऊ आती है।
- 45:0110 रुपयों में तो 1020 ग्राम दूध आता है।
- 45:05सर गऊ थोड़ी आ जाएगी। आज कृष्ण है आज ठग बैठे हैं जेब,
- 45:27कतरे बैठे हैं लुटेरे बैठे। कोई ना जाए कुंज गलिन में तुझे
- 45:48बिन कलियाँ चुनने कोई ना जाए कुंज गलिन में।
- 45:58तुझे बिन कलियाँ चुनना तरस तरस रहे हैं।
- 46:18यमुना के तट मुरली की धुन सोने को अब तो दर्श दिखा जा नटखट।
- 46:36क्यों दुविधा? मेंढा ला रे अब तो दरिश दिखा जा न
- 46:48तू क्यों दुविधा? मेंढा ला रे बड़ी देर भाई नंदला?
- 46:59तेरी राह तक के ब्रजवाल ग्वाल बाल इक इक से पूछे कहा है मुरली वाला
- 47:11रे, बड़ी दे भाई नंदला। तेरी राह तक के वृद्ध आज वृंदावन
- 47:25की गलियाँ कृष्ण के बिना सोनी है लुटेरे बटर आज निधिवन में रौशनी
- 47:36था। आज निधि वन में राज़ रचने की
- 47:42कहानियों कहकर तुम्हारी जेबें काटी जाती हूँ।
- 47:47वहाँ कोई कृष्ण नहीं अता कृष्ण गए।
- 47:53जदा जदा ही धर्म से गला निर्भक्ति भारत अब भीथानम अधर्म से तदा
- 48:04आत्मानम सीरजा में हम प्रित्रणय साधुना।
- 48:21संभव वाणी योगेश आज कृष्ण को वृंदावन में जाने के लिए।
- 48:33एक कारण है कि इन दुष्टों का वध करना आज वृंदावन में कुंज गलिन
- 48:40में करियां चुनने को कोई नहीं जाता।
- 48:43आज जेब काटने वाले लुटेरे जेब कतरे बैठे हैं।
- 48:49न कोई राधा आती है, न छनक छनक दुरेबाजे फायर लिया कुछ नहीं
- 48:59होता, कोई रास नहीं रहता, कहानियों कहीं जाती हैं, तुम्हारी
- 49:03जेबें काटी जाती हैं और कृष्ण आ गया है।
- 49:12आज वृंदावन को वही नगरी बनाने प्रेम के होशियार डाकुओं, होशियार
- 49:21येव कत्रो बीवेर ऑफ़ मेक ए पॉकेट्स रॉबर्स, डाकुओं सावधान।
- 49:31आज कृष्णा क्या है? 5000 साल हो गए क्या से क्या
- 49:59आह तेरे प्यार में होना था बेवफा तेरे बिना और होना भी क्या था,
- 50:19जहाँ कृष्ण के रसीले पांव नहीं पड़ते मानस्य प्रेम विदा हो जाता
- 50:28है। इसलिए आज सब लुटेरे बैठे बी वेयर
- 50:35ऑफ क्विक पॉकेट सैंड रॉबर्स इन लुटेरों से डाकुओं से सावधान सब
- 50:44अपनी अपनी जमक सब अपनी अपनी राग और अपने अपने गायन।
- 50:53ये ठग्गी मरेंगे कि हम तो विधवाओं को खाना खिला रहे हैं, तुम इतने
- 51:02अमीर कहाँ से हो गए भाई लोगों की जेब काट के डाका मार के?
- 51:12विधवाओं को खाना खिलाना तो बहुत अच्छा है लेकिन अपनी जेब से ऐसे
- 51:23तो डाकू भी माता की मूर्ति के आगे सूख के जाते हैं कि दसवां हिस्सा
- 51:30तेरा क्या रखना? वो ही काम तुम कर रहा कितना
- 51:41ज़माना बदल गया कितने भ्रम हमने नीप लिए?
- 51:45इससे पंचभौतिक तत्व जिसने एक तिन पर नष्ट हो जाना है, इसके दर्शन
- 51:49रात को 1:30 बजे थे। आपकी नींदों को हराम करते हैं जो
- 51:54नींद किसी कीमत पर मिलती ही नहीं, तुम्हें जो भगवान की देन है, जो
- 51:59उस पर महात्मा की देन है, नींद के लिए तुम तरस जाते हो, सारा
- 52:03अमेरिका तरस रहा है, नींद के लिए नींद नहीं आती।
- 52:12बहुत से बच्चे हैं जो मेरी वीडियो से लगा के सोते हैं।
- 52:16बहुत से बड़े बूढ़े हैं, जो वीडियो लगा के सोते हैं बाबा जब
- 52:20तुम बोलते हो तो नींद आ जाते हैं। मैंने कहा बढ़िया जोलफिश का काम
- 52:24बन जाता है, तुम वीडियो लगा दिया करो तुम्हें विचार मिल गया।
- 52:38कुंज गलन में कौन जायेगा अकलियाँ चुनने को जब वहाँ डाकू बैठे
- 52:42होंगे, लेकिन जाते हैं आज, क्योंकि हमारे मन में संस्कार जम
- 52:49जाते हैं। मैंने पहले बताया वह संस्कार हमें
- 52:52घसीटे ले जाते हैं। हम थके हारे माँ दे।
- 52:56उन लुटेरों के हाथों से हम चले जाते हैं।
- 52:59चलो वृंदावन में चले जाओ, प्रेम भी ले आओ और आनंद भी ले आओ मिलती
- 53:05है ठगी ठोरी जे बैंक काटी जाती हैं, औरों को आशीर्वाद देते हैं।
- 53:18खुद डायल से कराना पड़ता है। झूठ नहीं बोलना चाहिए, इसका
- 53:27प्रचार करते और स्वयं झूठ बोलते हैं कि हमारे आशीर्वाद से।
- 53:33ट्रोसियां जीती जाती हैं। लुटेरे अपने शिष्यों का भी पालन
- 53:41करते हैं। डाकू अपने गिरोहों का भी पालन
- 53:45करते हैं। यह उनकी मजबूरी है।
- 53:48क्या करें? बेचारे पढ़े लिखे तो हैं, कोई
- 53:50स्किल भी नहीं। बस यही एक स्किल है झूठ बोरो झूठ
- 53:57बोरो झूठ ही बोलते हैं जिसने उन्हें नहीं माना।
- 54:08वो हमेशा के लिए नरक जाएगा। इस सब का क्या मतलब है बाबा?
- 54:15मेरी समझ में कुछ आतंक बात बड़ी गहरी है।
- 54:21शायद आप ये हल कर सकते हो। कृपा करके इसको सुलझाने का प्रयास
- 54:25करो। आज के प्रवचन में सबसे पहले मैंने
- 54:34कहा, तुम्हारा सर्वप्रथम कर्तव्य है उस आनंद की तलाश जीसको पीकर
- 54:48तुम सारी उम्र। सक्षकारी तो हो जाओगे और तुम्हारी
- 54:54कदम जहाँ भी जाएंगे वहाँ स्वर्ग हो जाएगा नो दायक सर, सबसे पहला
- 55:02काम तुम है प्रभु राधे राधे करने से नहीं मिलेगा।
- 55:08मैंने आपसे पहले भी कहा चीजें जहाँ हुआ करती हैं वहीं मिला करती
- 55:13हैं, गटर की वधु गटर में मिला करती है और फूलों की सुगंध बगीचों
- 55:23में खिला करती है। चीजें जहाँ हुआ करती हैं वहीं
- 55:28मिला करती हैं। सबसे पहला काम अपने भीतर उतर के
- 55:39नौ दाई सर्फ तुम जानो के तुम हो कौन बहुत जन्मो से तुम भटक गए,
- 55:45बहुत जन्म बीते, मेरे मत हो तुम्हें नहीं पता, लेकिन संतों की
- 55:49बात मान लो, हे जन्म तुम्हारे लेख।
- 55:55एक ही जन्म ही तो डेखे लगाना होता है और बस यही कहने का मतलब था
- 56:01हजरत का और यही कहने का मतलब था ही साहब एक ही जन्म है, एक ही
- 56:08जन्म है तो यही जन्म लगा दो। यह तो कंपलसेशन है हमारे लिए
- 56:17क्योंकि एक ही जन्म है, उन्होंने बात ही खत्म कर दी।
- 56:25उन्होंने चीज़ को कान को ऐसे ही नहीं पकड़ा, दूसरे हाथ से पकड़
- 56:28लिया। तुम कहते हो सभी जीवनों में से एक
- 56:33जीवन लगा दो, वो मुद्दा ही गायब कर देते हैं।
- 56:37वो कहते हैं, जीवन ही एक है, यह लगाना ही पड़ेगा।
- 56:42बस ये मतलब है कहने का जब एक ही होगा तो यही तो लगाना पड़ेगा।
- 56:51अगला जन्म आएगा ही नहीं तो संतो ने साफ साफ कह दिया सनातन जन्म तो
- 56:59बहुत है। बुद्ध ने तो पूरी किताबें लिख दी
- 57:05संत स्मरणों की अपने पुराने जन्मो की।
- 57:09अपने पुराने जन्मों के करीब 700, 800 जन्मों का व्याख्यान किया।
- 57:13उन्होंने और बुध, तीसा जैसा प्यारा व्यक्ति धरती पर खोजना
- 57:23चाहो तो नहीं मिलेगा। इतना करुणावतारम इतना प्रेम से
- 57:33भरा होगा तुम सोच भी नहीं सकते। लोभ का महाराज ये है बेचारा सोच
- 57:48नहीं सकता कि कोई व्यक्ति ऐसा भी होगा।
- 57:52जो दीन दुखियों के लिए सोचेगा। तुम्हारा हृदय कभी सोच नहीं सकता,
- 57:57तुम्हारी खोपड़ी कभी सोच नहीं सकती क्योंकि लोग ही व्यक्ति कभी
- 58:01सोच नहीं सकता। लोग ही अपने लिए सोचता है।
- 58:10अपनी नस्ल फसल के लिए सोचता है और जिनके नस्ल फसल नहीं होती वो अपने
- 58:15मित्रों के लिए सोचता है लेकिन यह सब मोह है मोह जिससे हो जाये वो
- 58:21हो जाये, बच्चे से हो जाये और नहीं तो बच्चे से नहीं तो मित्र
- 58:26से हो जाये, मोह तो मोह ही होता है।
- 58:30मोह ही तुम्हे बांधता है, इसलिए मोह को मैं सर्वप्रथम रखता हूँ
- 58:38मोह के कारण ही तुम बंध जाते हो अपनी इच्छा से बंध जाते हो तुम
- 58:45समर्पण कर देते हो मोह के कारण। तुम परमात्मा को भी निग्लेक्ट कर
- 58:51देते हो, तुम जिससे मोह करते हो, उसके समर्पित हो जाते हो।
- 58:58बच्चा माता पिता को छोड़ के चला जाता है, निरम ही है।
- 59:03आज अमेरिका में क्या हो रहा है? माँ बाप अपने बच्चों को इंतज़ार
- 59:09करते हैं और वह 16 साल के बाद फुर हो गया, पता ही नहीं कहाँ गया है।
- 59:16रोक भी नहीं सकता, रोकेगा तो 911 नंबर है तो ज़रा सोचिये समाज समाज
- 59:28में फर्क? निर्मोही हो गया है।
- 59:34समाज और जो समाज निर्मोही हो जाता है, याद रखना वह कटुता से वह
- 59:45मनुष्य से वैर से नफरत से बाहर जाया करता है।
- 59:55मुफ़ फिर भी प्रेम का थोड़ा सा रस है उसमें, लेकिन निरमहोता में तो
- 1:00:03बिलकुल ही नहीं मोह में प्रेम की खिंचावट तो है, थोड़ा सा रस है।
- 1:00:15जैसे तुमने चुम्बक को लोहे के साथ लगा दिया हो तो तुम पाओगे।
- 1:00:19थोड़ी देर में वह लोहा भी खीचने लगता है।
- 1:00:22थोड़ा थोड़ा बस ऐसा ही होता है। ईसा ने कहा जो मुझे मानेगा,
- 1:00:34बिल्कुल ठीक कहा। तुम इसको किसी को ढंग से लेते हो
- 1:00:40और जो उस स्तर पर चला गया वो कहेगा बिलकुल ठीक बोले कृष्ण अपनी
- 1:00:50आँख से देखेगा, कबीर अपनी आँख से देखेगा, नानक अपनी आँख से, मीरा
- 1:00:54अपनी आँख से। लेकिन देखेंगे।
- 1:00:56उसी को जो सेंटर में विद्यमान हैं, पहुँचेंगे वहीं उसी सेंटर पर
- 1:01:08देखने वाले शरीर अलग अलग होंगे। देखने वाले माध्यम अलग अलग होंगे।
- 1:01:13देखने वाले दीक्षाएं अलग अलग होंगी लेकिन देखेंगे उसी सेंटर की
- 1:01:17तरफ और जब सेंटर की तरफ देखें तो बात जो बोलेंगे उनके उसके अलफाज़
- 1:01:26अलग अलग होंगे। भाषा अलग अलग होगी।
- 1:01:29लेकिन उनका थीम और मर्म एक होगा। श्री कृष्ण हूँ या जीसस हूँ या
- 1:01:37हजरत हूँ, इन्होंने प्रेम ही सिखाया।
- 1:01:43ये सब कहानियों हैं तुम्हारे राज़ करने की।
- 1:01:48लोभ लिए हुए लोभी मनों की राज़ करने की सियासते हैं और कुछ भी
- 1:01:59नहीं तो तुमने कहा पुत्री मुझे समझ नहीं आया आप ही बता सकते हो।
- 1:02:09तो मैंने तुम्हें बता दिया एक ही जीवन होता है बस इसका यही मतलब है
- 1:02:15बहुत जन्म बीते मेरी माँ तो है जन्म तुम्हारे लेखे ढंग है बोलने
- 1:02:21का प्रस्तुत करने का ढंग है। कांड पकड़ लिया, इस हास्य पकड़ा,
- 1:02:28इस हास्य पकड़ा कोई फर्क नहीं पड़ता, कांड पकड़ लिया और जो
- 1:02:36मोज़े तक पहुंचेगा मेरी बात मानेगा, वह अनंत काल तक स्वर्ग
- 1:02:43भोकेगा स्वर्ग वह नहीं। स्टेट ऑफ माइंड तुम खेले खेले से
- 1:02:49रहोगे? अभी देखो तुम्हारे मुँह के ऊपर
- 1:02:52तीन बजकर 3.75 मिनट में गौर से देखो और संतों के चेहरे को देखो।
- 1:03:00जब संत मुस्कुराता है तो बच्चे की खिलखलाहट याद आती है।
- 1:03:07कभी बच्चा ऐसे ही मुस्कराये थे, क्योंकि संत बच्चे जैसा हो जाता
- 1:03:14है। इनोसेंट जस्ट लाइक ए चाइल्ड होता
- 1:03:19तो बूढ़ा है, लेकिन लाइक ए चाइल्ड इनोसेंट होता है।
- 1:03:26और कितनी प्यारी दशा होगी। जब बूढ़ा बच्ची के समान इनोसेंट
- 1:03:32हो जाएगा तो हमारे बूढ़े तो गायब हो जाते हैं तो हमारे बूढ़े तो
- 1:03:37गायब हो जाते हैं, लुटेरे हो जाते हैं।
- 1:03:40वो कहते हैं, बेटे बात सुनो छमे छमे जाईं तो छमे छमे आईं।
- 1:03:48धूप में मत जाना और धूप में मत आना काहे को आना जब छाया है तो
- 1:03:54छाया में आओ और छाया में जाओ। कृष्ण कहेंगे नहीं, एक ही तो जीवन
- 1:04:03है। वह मुश्किल लड़ने का मौका मिला
- 1:04:07है। उड़ा दो बुंदिया, इनके सर उड़ा दो
- 1:04:09उनके काट दो दुश्मनों के और 40,00,000 लोगों का कतल करवा देते
- 1:04:14हैं, फेंकते रहो तुम उन्हें। सातवीं नर्क में लेकिन वह तो मौज
- 1:04:24कर गए। अपने जीवन में कृष्ण ने जो लुत्फ
- 1:04:31उठाया तुम्हारे बड़े से बड़े चक्रवर्ती सम्राट वो लुत्फ नहीं
- 1:04:36उठा सकते जो संत एक पल में रस भी जाता है अगस्त्य जैसा।
- 1:04:42पूरा का पूरा समुद्र पी जाता है और तुम सोच भी नहीं सकते।
- 1:04:46तुम्हारी बुद्धि सोचती रहती है कि कैसे पिया होगा समुद्र समुद्र
- 1:04:51पिया जाता है भाई उसी तल को तो ही संबोधि कहते हैं।
- 1:04:58उसी घटना को ही तो संबोधि कहते हैं प्रभुत्व कहते हैं।
- 1:05:04जब विराट बूंद पर उतरता है, बूंद तो सदा ही विराट बन जाती है,
- 1:05:08समुद्र में जाती है लेकिन जब समुद्र बूंद के ऊपर बरसता है,
- 1:05:13कैसा होगा वो पल? तुम भी उसी बल का इंतजार करो।
- 1:05:29ईश्वर तुम्हारे भीतर की प्यास को बजा दे, ऐसी कामना करता हो उस पर
- 1:05:36व्रत दीगार से। आज के लिए तुमसे विश्राम जाऊंगा
- 1:05:50धन्यवाद।