Latest / Baba ji Vijay Vats / 12 Jul 25 - बाबा आप चमत्कार क्यों दिखाते थे?और अब क्यों दिखाना छोड़ दिया? क्या समाधि भी एक चमत्कार है?
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- 0:02बाबा जी पर राम भरोसे यादव आप चमत्कार क्यों दिखाते हो और आप
- 0:16चमत्कार दिखाना क्यों छोड़ दिए? ज़िन्दगी के इतनी चमत्कार हमने
- 0:27यहाँ गिझर बहा में आके बहुत से लोगों से पूछा आपकी सभी बातों में
- 0:34सत्यता पाई? मुझे हैरान भी हुई कि सब कैसे हो
- 0:43गया? इतनी प्रतिभा और रखे हुए व्यक्ति
- 0:55अपने ही शहर में चुपचाप बैठे हैं और यह भी तो एक चमत्कार है।
- 1:01कि 14 वर्षों से कुछ कहा नहीं तो होश बाहर नहीं जा रहा या कुछ
- 1:10चमत्कार से कम है। फिर आपने छोड़ के उनके बाबा?
- 1:23राम भरोसे बिलकुल मैंने चमत्कार दिखाई आज भी कभी कभी, लेकिन पूछने
- 1:34हैं दखन। यही बात अड़ंगा काट देती है।
- 1:45छोड़ क्यों दिया? ये पहले बता देता हूँ सिर्फ एक
- 1:49परिवार के कारण। जीसको इतने बड़े चमत्कार दिखाए,
- 1:58वह मात्र बेसिक कारण है। मैं नाम नहीं लूँगा, लेकिन मैं ये
- 2:10अवश्य कहूंगा ज्यादा गहराई से जानना चाहते हो?
- 2:13तो रोहित से पूछ ले वो सब जानता है चमत्कार अभी दिखता हूँ।
- 2:25अभी कुछ दिन पहले एक प्लाट की बोली हो रही थी घोड़ा।
- 2:35पर मैंने रोहित से कहा कि ये आपको मिलेगा कंग्रैचुलेशन्स यू विल गेट
- 2:43इट इन 1,00,00,000 ₹11,00,000 इतना से ठीक है?
- 2:53कैसा पता लगा उस परिवार को? मैंने पांच वर्ष पूर्व पता किया
- 3:04कि आपके घर दो बेटे हो गए और शर्त इस बात पे लगी।
- 3:11कि उसका बड़ा भाई कहता अगर ना हुए तो मैंने कहा मेरा से पार्ट है
- 3:20किसी तन पर जाकर देखा मैंने उसी तन पर तुम भी जा सकते हो मैं रोज़
- 3:26उस तन की बात करता हूँ। चमत्कार मैंने इसलिए दिखाए कि
- 3:36आपको अपराधशक्ति पे विश्वास हो जाए।
- 3:43जीस दिन आपको अपराधशक्ति पर विश्वास हो गया उस दिन आप ऐसे
- 3:48नहीं रहोगे जैसे आज। अमूल चूल प्रवर्तन हो जाएगा तुम
- 3:56छोड़ने लगोगे थोड़ा थोड़ा परमात्मा के उपाय अभी तो तुम्हे
- 4:00कोई पता नहीं हम छोड़ दें और संभालने वाला कोई ना हो तो क्या
- 4:06होगा? मन 1000 शंकाएं उठाती हैं और ठीक
- 4:11भी क्योंकि देखो मेरा मन शंका नहीं उठाता क्योंकि ट्रेन की वो
- 4:17इंसिडेंट कैसी शंका उठायेगी। 170 सिकलों के व्यक्ति को उठा के।
- 4:26प्लेटफार्म के भीतर पटक देना मैं कभी भूल थोड़ी जाऊंगा उस बात को
- 4:35और हनुमान जी का मिलन और हनुमान जी का कहना कि तुम वापस घर चले
- 4:41जाओ, तुम्हें घर बैठे सब मिल जायेगा एक एक बात सत्य साबित हो।
- 4:46कैसे भूल जाऊं? और फिर एनलाइटनमेंट की घटना एक
- 4:51नहीं हजारों हजारों लोगों को मैंने चमत्कार दिखाई प्रत्यक्ष
- 4:58मैं कैसे जानता कि कोई व्यक्ति शराब मांगेगी और शराब मांगी?
- 5:072025 लोगों के बीच शराब मची और मैंने शराब मका पे थी, लोग कहते
- 5:14थे काजू लोग कहते थे दाल भुजिया का पैकेट खायेंगे हैलो भाई खाल
- 5:21भरी, सर्दियों में कहते थे आइस क्रीम खायें।
- 5:29चमत्कार से मेरा मुँह मूड किया हुआ है, इसीलिए सिर्फ उस प्रवाह
- 5:35के क्योंकि मैं चाहता था कि व्यक्ति अपने अन्तश में उड़ें,
- 5:51अप्रशक्ति होती है इसका विश्वास उसको मिल जाए।
- 5:55अभी एक व्यक्ति का मोटरसाइकिल दो बार घर से चोरी हो जाता है और मैं
- 6:00उसे बता देता हूँ कि वहाँ मिलेगा जाओ ले आओ और दूसरी बार उसे कह
- 6:06देता हूँ कि आपका घर सुबह 5:00 बजे छोड़ गया होगा कोई आदमी वो
- 6:10छोड़ गया। कहाँ शक है, कितनी बार आजमा हूँ
- 6:15आप? कितनी बार बताऊँ आपको, लेकिन मन
- 6:22मन फिर बार बार हावी हो जाता है और इसी मन का मैंने इलाज किया था।
- 6:29फिर बाप ने कहा बंद कर दो उसको। दिखाने में भी उतनी ही शक्ति लगती
- 6:36है। इतनी काम करने में लगती है काम
- 6:40करो, दिखाओ मत मूड बन जाना मूर्ख बन जाना जब कोई कहे चमत्कार दिखाओ
- 6:47किसी कीमत पे न। उसी शक्ति से काम देना और उसी
- 6:54शक्ति से कमी वेशियों को दूर कर देना बहुत से लोग हैं, मेरे पास
- 7:00आती है। उसी घर में एक लड़की थी, एक बेटा
- 7:05और था जिसके पुत्र नहीं था, दो पुत्रियां थी।
- 7:09बाबा मेरे बेटा नहीं है का हो जाएगा और हो गया क्या कहा बताऊँ
- 7:18किस किस को बताऊँ 1000 हूँ चमत्कार हैं लेकिन मेरे बैठे कोई
- 7:25बोलेंगे नहीं। व्यन सिंह की घटना का मैंने सरे
- 7:31आम जी कर किया, लेकिन किसी ने डॉक्टर ब्रह्मपाल से नहीं पूछा।
- 7:35ये बात में सत्यता है क्या आप गए थे उसे बताने के लिए?
- 7:42लेकिन मेरे जाने के बाद पूछा। या उनके जाने के बाद कुछ दोष देना
- 7:48स्वाभाविक है? क्योंकि तुम्हारा मन मरना नहीं
- 7:51चाहते और कसूर है तुम्हारे मन का जो मरना नहीं चाहते और जूल से
- 8:01तर्क निकाल लेता है। और उन तर्कों से सत्यो को
- 8:06प्रमाणित करने की चिष्टा करता है। तो फिर जब मैं नहर में घिरा बाबा
- 8:15ने कहा मैंने तुम्हें ऐसे बचाया सब उलट उलट।
- 8:25मैंने छोड़ दिया उस दिन के बाद मैंने कोई चमत्कार नहीं दिखाया
- 8:28करता हूँ अभी करता हूँ श्रेय ने कभी पहले लिया नाज लेता हूँ काम
- 8:38करता हूँ, क्योंकि शक्ति उतनी ही। चमत्कार को दिखाने में लगती है
- 8:45जितना वो काम करने में लगती है। बहुत घरों में बच्चे हुए बैठे हुए
- 8:54बेटियां हुई। मन्नत मान के गए बहुत लोगों के।
- 9:01अलग अलग से काम हो रहे, लेकिन मैंने कभी जताया नहीं।
- 9:10हल्के से संकेत कभी निकल गया है ब्रश फूटन हो जाता है।
- 9:15भीतर से वो बात अलग है और तुम कहोगे।
- 9:22कि हमें दिखाओ देखो चमत्कार तो वह देखेगा जो पास बैठे पता नहीं कब
- 9:29भीतर से स्वर ना आ जाए, मैं बोल दूंगा और जो पास होगा वही तो
- 9:34देखेगा, ये चमत्कार है, तुम दूर बैठे कैसे दिख पाओगे काश?
- 9:41शाम मानव जैसे लोग उस वक्त मेरे पास आ जाते।
- 9:46जीस वक्त मैंने इसे तलांजलि नहीं दी अब तलांजलि दे दी।
- 9:51अब मैं कुछ नहीं कह सकता, लेकिन इतना कह सकता हूँ नास्तिक मत बनो
- 9:56वह है। बस इते से तुम्हें समझाया जाए तो
- 10:01अच्छा है। नहीं समझाया जाए तो अच्छा है।
- 10:09तुम समझते होगे शायद श्रेय लेने के लिए ख्याति बढ़ाने के लिए
- 10:14लेकिन ना तो मैंने ख्याति बढ़ाई ना मैंने श्रेय लिया।
- 10:20फिर भी दिखाता था क्योंकि दिखाने की शक्ति थी और यही बात मैं कहता
- 10:24हूँ लोग मुझे पूछते हैं परमात्मा ने सृष्टि क्यों बनाई?
- 10:31मैं कहता हूँ क्योंकि वह बना सकता था इसलिए बनाई तुम बना लो।
- 10:37अगर बना सकते हो तो। तुम ये बात जश्ती नहीं नहीं जैसे
- 10:43मुझे क्या जवाब बिल्कुल ठीक है, वह बना सकता था उसने बना लिया,
- 10:54तुम बना सकते हो तो तुम बना लो, तुम तो गुज़ारा नहीं बना सकते।
- 11:00उसका विराट अस्तित्व देखो, उसका विराट होना देखो तुम्हें पसीना आ
- 11:07जाएगा। हाँ मेरे जाने के बाद सपोर्टिंग
- 11:20मैंने ये देखा मैंने ये देखा, मैंने ये देखा।
- 11:24आज कोई नहीं बोलेंगे। आज मैं भी कहता हूँ कि जाके पूछ
- 11:28लो किसने पूछा है आगे किसने नहीं पूछा सरे आम नाम बता रहा हूँ सरे
- 11:34आम घटना बता रहा हूँ और मेरा खरीदा हुआ नहीं, ईमानदार आदमी है
- 11:39मुझे तो तेरा वर्ष हो के मिले नहीं।
- 11:43कोई भी व्यक्ति नहीं है ऐसा एक व्यक्ति होता था।
- 11:50मेरा शिष्य था प्रवीण, उसने सैकड़ों हजारों चमत्कार देखे और
- 11:56वही नासिक था। मैं तुम्हारे मंच का एक बहुत बड़ा
- 12:04प्रचार अचानक चमत्कार देखता देखता नस्ती हो गया, एक नया मंच जला था,
- 12:15विचारों का देवपुर शहर गए। उसका सदस्य बन गया।
- 12:22मेरे पास आया पुस्ताजित देवपुर से हार गए।
- 12:27ये कहते हैं इनके चैतन्य को स्वीकार कर ले 1020 ₹50,00,000
- 12:32मिलेगा। मैंने कहा नहीं ऐसा मैं इकट्ठा
- 12:35नहीं करना चाहता, मैं मालिक से मांगी।
- 12:42क्योंकि यह आस्था का विषय है प्रकट होना अच्छा मेरे दिखाने से
- 12:48अगर मैं दिखा भी दूंगा, तो तुम्हारा मन कहाँ ठहरेगा?
- 12:54भीतर से आवाज देता रहेगा। कोई हाथ की सफाई ना?
- 12:58कोई ऐसी चीज़ ना हो जो हम अभी ना जानते हैं।
- 13:03बाद में जाने जैसे आज टीआई का इस्तेमाल हो गया।
- 13:07चंद्रयान तीन को चंद्रमा पे पहुंचाया जाता है।
- 13:10किसी को पता है कि तरंगें आप काम कर रही हैं इन चंद्रियों को इधर
- 13:15उधर। सुफेरा घटना लगाने के लिए घूम रहा
- 13:21है, लेकिन खुद घूम रहा है नहीं, यहाँ से रेन ले जाते हैं तो होता
- 13:29है तुम्हारा मन एस्टाबलिश हो नहीं सकता।
- 13:35तब तक जब तक कि तुम अपनी नैनो से देख नहीं लोगे, उसको उस दिन तुम
- 13:42में बदलाव होगा। सच इन चर्म चिक्शों से देखा हुआ
- 13:47तुम इतना बदलोगे? थोड़ा सी फर्क पड़ जाएगी।
- 13:52लेकिन वो मैं नहीं समझता के फर्क पड़ा हूँ क्योंकि वही लोग जिन्हें
- 13:58साक्षरत मैंने चार 5 साल पहले कहा तुम्हारे दो पुत्र होंगे इस लड़के
- 14:04से शादी कर लो, इससे करोगे दो बेटियां।
- 14:09उसने कहे अनुसार उससे की और दो बैठे हुए और आज वो नास्तिक है,
- 14:14नास्तिक नहीं है, आस्तिक है, लेकिन भटकते हुए आस्तिक है, किसी
- 14:22जोशी के पास चाहते हैं, किसी बाबा के पास चाहते हैं।
- 14:28मंदिर मसीह में जाते हैं, पहुंचे नहीं इनका द्वंद मिटाने हैं बाबा
- 14:41के निर्दली असम में चमत्कार दिखाओ मत चमत्कार करो भीतर से बिना कहे।
- 14:52बिना जताए चमत्कार तो अब भी रोज़ होती है, रोज़ होती है, लेकिन बस
- 15:06तुम्हें पता नहीं चलने देता हूँ। इसलिए जब भी ये कहता हूँ कि आप
- 15:13मेरी मौजूदगी में। कुछ मन्नत मान लेना तो मैं
- 15:17सिरफिरा नहीं हूँ, कोई दिमाग नहीं खराब हो गया।
- 15:22मैं ना भी बोलेंगे तो कुछ गड़ नहीं जाएगा और फिर ज्यादा लोगों
- 15:28को मैं आने भी नहीं देता। भीड़ बढ़ते से मैं बड़ा डरता हूँ।
- 15:36कहीं कोई मुर्ख ना आ जाए, फ़ोन मुर्खों ने मुझे ऐसा सबक सिखा
- 15:44दिया। छोड़ा क्यों?
- 15:53इसलिए झोंक दिया, दिखाते क्यों थे?
- 15:57इसलिए कि तुम्हारे बीच श्रद्धा उत्पन्न हो जाए और श्रद्धा से ही
- 16:02कोई व्यक्ति पहुंचता है। तुमसे ने कहा, श्रद्धा विश्वास
- 16:06रूप में हो या ब्याम बिना ना कुछ। इसके बिना देखा नहीं और उस वक्त
- 16:19जब देवपुर से हार गए, मैंने मेरे ही से कहा प्रवीण से चलो ठीक ये
- 16:26राशि हम दान में दे देंगे तुम उनसे कहो चैलेंज स्वीकार करो।
- 16:31लेकिन वो 4 दिन बाद मुझे आके कहने लगा।
- 16:35नहीं उस्ताद वो चैलेंज स्वीकार नहीं करते।
- 16:40पता नहीं क्या होती है उस व्यक्ति ने जिसने सारे चमत्कार घटित होते
- 16:47हुए अपनी रगन आँखों से देखे वह जब नास्तिक हो सकता है देवपुर शहर
- 16:53गए। तो मैंने छोड़ दिया सब मन में
- 16:59श्रद्धा नहीं उत्पन्न होगी, श्रद्धा उस दिन उत्पन्न होगी।
- 17:02जीस दिन ये मन ही गलेगा मन ही श्रद्धा को अपने भीतर प्रवेश नहीं
- 17:09करने देता, यही बात है। मन विश्वास नहीं करेगा।
- 17:19दूसरा प्रश्न है अब भंग की बात करते हैं बिलकुल बाग के सेवन से
- 17:32तुम्हें दूर से पता चल जाएगा वो का रश।
- 17:36के हाँ, कलश है यही जो चमत्कार से मैं दिखाना चाहता था वो जड़ी
- 17:43बूटियां भी कर देंगे और कलश दूर से देख लो के जैसे बाबा नानक ने
- 17:49देखा और तेरा से आगे नहीं बढ़े। बस 131313 वह सटोरी की पहली झलक
- 17:58थी, उससे आगे धीरे धीरे प्रवर्तित होता चला गया और 1 दिन।
- 18:12काली नदी के किनारे उन्हें संबोधित गठित हो गई।
- 18:24बिल्कुल ठीक मात्रा में सेवन करो। कहते भांग के ऊपर प्रतिबंध नहीं।
- 18:30मुझे कल ही किसी का कमेंट आया था। गांजा के ऊपर प्रतिबंध है नहीं
- 18:35मैं भांग की बात। एक बार स्टोरी का अनुभव हो जाए तो
- 18:43वो है यही मैं चाहता था बिना किसी साइकैट्रिक इफेक्ट के।
- 18:53तुम ये विश्वास हो जाए कि कोई अपार शक्ति होती है।
- 19:01हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के डॉक्टर अल्फर्ट रिचर्ड अल्फर्ट, 1938 में
- 19:12डॉक्टर। अल्बर्ट हॉफमैन निक अस्वीकार किया
- 19:20एलएसटी आइसर्जिक एथेंट डाइएथिल एमाइड इसका साल्ट होता है एलएसटी।
- 19:36ये एक ऐसी ड्रग है जो व्यक्ति की चेतना को इतना बढ़ाती है, यक्र
- 19:43रूप से कि वह एक दम इतना विस्तृत हो जाता है।
- 19:52जैसे हम समाधि के वक्त अब देख बिल्कुल वही घटना लेकिन थोड़ी देर
- 19:59के लिए खोजने का खोजने वालों ने ना जमीं छोड़ी ना आसमान छोड़।
- 20:12डॉक्टर अल्बर्ट हाफ मैन 1900 अड़तीसवें एक आविष्कार था अंतर यह
- 20:27एक साइको ड्रग। जीसको खाने से तुम्हारे भीतर कुछ
- 20:36ऐसे इफेक्ट आ जाती है। रंग अनोखे से नजर आती हैं, अनोखी
- 20:47सी गंध नजर आती है जैसे समाधि में होता है और तुम।
- 20:55हेलनी शुरू हो जाता है। शोध चल रही थी तब 38 में इसने शोध
- 21:06की। उसके बाद इस शोध को जारी रखा गया।
- 21:10फॉरवर्ड यूनिवर्सिटी के डॉक्टर अल्फर्ट रिचर्ड अल्फर्ट ने इसको
- 21:16आगे बढ़ाये। लेकिन इसके साइड इफेक्ट्स है पर
- 21:26विज्ञान कहता है कि जीस चीज़ का साइड इफेक्ट है उसको बिल्कुल
- 21:31जरूरत के वक्त ही इस्तेमाल किया जाए, ऐसा नहीं।
- 21:37के हर किसी काम में उसको इस्तेमाल कर ले जाए।
- 21:41इसलिए हमने सिको ड्रग्स को बैन कर दिया जीसको जरूरत है वह डॉक्टर से
- 21:50परिचित है और ले ले। इस साल्ट का निर्माण हुआ खोज वो
- 22:02करता क्या है ये जो समाधि में गठित होता है मैंने अपनी समाधि की
- 22:07घटना में सब पूरा हुआ कैसे कैसे हुआ, कौन सा वक्त था वो शरद
- 22:13पूर्णिमा की रात? पूरा चंद्रमा और कैसे भीतर कुछ
- 22:20रासायनिक प्रवर्तन हो की मैं फैलता ही चला गया।
- 22:26सारा सोजा टीम मिट गया। ट्रस्ट फिर ऐसे ही हो गया, पर मैं
- 22:33भूल गया सब कुछ। न वृक्ष थे, न पेड़बोधे थे, न
- 22:39सामने बाबा धर्मदास की समाधि थी, न गौशदा मंदिर था, ना गोदाम की
- 22:46दीवारें थी, न धरती थी, न चंद्रमा था, ना काश था ना तारे थी।
- 22:53सब एक एक करके गायब होते चले गए और यह कितने वक्त तक हम मुझे पता
- 22:58नहीं चला। करीब 8.5 का वक्त होगा रात का और
- 23:04जब मुझे किसी ने जगाया पीठ थपथपा के तो दो बच्चे थे।
- 23:12वह किसान था अपने दो बैलों के साथ खेत में वाही करने के लिए आया था।
- 23:21फ्लो करने के लिए उसने जब देखा व्यक्ति स्टेचू की तरह खड़ा है।
- 23:31कुछ ईंटों के ऊपर और स्टील खड़ा है, ज़रा भी हिल ले रहा हूँ बेजान
- 23:37न था मुर्दा न था जीवंत था इतने घंटे से पड़ा था 2:00 बजे गए थे
- 23:445.5 घंटे हो गए थे। मुझे नहीं पता कितनी देर तक मुझे
- 23:51देखता रहा। आखिर में उसने पेट थपथपाई।
- 23:55अगर जिंदा होगा तो कोई रिस्पांस करेगा, फिर थपथपाते ही मैं मेरी
- 24:05पीठ की तरफ। मैंने थोड़ा सा मड़ के देखा, कहते
- 24:122:00 बज के अधीरे से उन ईंटों से नीचे पांव रखा और उस छोटी सी
- 24:23शंकरी गली में से निकलता हो। मेन रोड पे हो लिया, घर पहुँच गया
- 24:30क्या हुआ उस रात को इतना आनंद इतना आनंद कैनट बी एक्सप्रेस इन
- 24:39वर्क बिहोम बग्स हम शब्दों से समझने की चेष्टा करते हैं।
- 24:45न शब्दों से वह एक्सप्लेन होता है, न समझा जाता है।
- 24:50साइकोटिलिक ड्रग एलएसटी के कुछ दुष्प्रभाव थे, इसलिए सरकार ने
- 24:59इसे बैंक में इसकी खोज हो रही थी। बहुत चरम सीमा पे थी और उसको बना
- 25:09रहे थे अल्बर्ट। अल्बर्ट हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में
- 25:18प्रोफेसर थे। उनका पिता भी वहीं प्रोफेसर था।
- 25:24जब उन्होंने खोज की। 1938 में फर्स्ट मेन ने उन्होंने
- 25:31इस शोध को आगे बढ़ाया। इस विच उन्होंने प्रयोग किया खाके
- 25:39देखी। अद्भुत नजारा था, बड़ी मस्ती थी
- 25:47अजीब से रंग दिखने लगे अजीब सी भाग दशा बदलने लगे।
- 25:52इतना आनंद जिसका व्याख्या नहीं हो सकता।
- 26:02डॉ। रीचर अल्पा।
- 26:10उन्होंने कहना शुरू कर दिया कि हिंदुस्तान में जीस घटना को घटने
- 26:14में 12 साल लग जाते हैं। मैं इसको 1 मिनट में घटा दूंगा।
- 26:25घट भी जाएगी। साइकोड्रग और परमात्मा की इस
- 26:32सृष्टि में क्या नहीं है? खोजने वाला चाहिए।
- 26:41शिव ने भांग का आविष्कार कर लिया भांग तुतुरा गोट गोट पीव हमारे तो
- 26:49रोज़ यहाँ भजन चाहते है कहाँ पहुंचते है वो उसी स्थान पर पहुँच
- 26:59जाते है। जीस स्थान पर एक्चुअल समाधि गठित।
- 27:04लेकिन ये आपके लिए। क्योंकि शिव को उस अनुभव की जरूरत
- 27:08नहीं। शिव तो सदा वहीं रहती है वह एक
- 27:14बात और बता दो के हनुमान जी शिव के अंशबदार है, शिव के गण कहलाते
- 27:26हैं। इन दोनों में वेद कोई नहीं।
- 27:30इन बातों को आप गहराई से समझने की चेष्टा मत करना समझ नहीं आएगी।
- 27:41जब उन्होंने कहा, जो हिंदुस्तान में 12 साल में गठित होता है, मैं
- 27:441 मिनट में रखवा दूंगा। एल एस जी का से उन्होंने खुद भी
- 27:53खाई। बड़े मस्त हुए आनंदित हुए बस फिर
- 27:59तो उन्होंने रोज़ खाना शुरू कर दिया।
- 28:02यह एक एडिक्टेडनेस है, लेकिन इस दौरान उन्हें पता चला कि
- 28:08हिंदुस्तान में एक संत है नीम करौली बाबा।
- 28:13वो भी स्मार्ट इष्ट हैं, शंकर के उपासक हैं।
- 28:18क्षमा करना हनुमान जीके उपासक हैं।
- 28:30उनके भीतर ऊहा पोहा उठा बिना एलएसडी के कैसे कोई पहुँच सकता
- 28:35है? ज़रा देखें तो।
- 28:45फॉरवर्ड यूनिवर्सिटी शशिते यहाँ है नेम कर वाली पापा के पास
- 28:53उन्होंने एक पल के लिए अक्चवल समाधि में ले गए और जब उसने
- 29:02कंपैरिजन किया, बिलकुल समाधि तो वही है।
- 29:07जो मैं एलएसटी में देखता हूँ इसलिए मैं कहता हूँ एक बार सूर्य
- 29:11का अनुभव कर लो क्योंकि वो समाधि भी है।
- 29:16आपको पता चलेगा इसाक संसार को कोई अर्धक्षा आत नहीं चाहते हैं, उसके
- 29:23बाद आपका भ्रम टूट जाएगा। अब मन ज्यादा उत्पाद नहीं बखरेगा
- 29:34नीम करौली बाबा ने और भी बहुत से चमत्कारों से दिखाए नीम करौली।
- 29:38बाबा चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध रहे अपने जीवन में, लेकिन उनके
- 29:48चमत्कारों को देखकर कितने व्यक्ति प्रभावित हुए ये मैं पक्का कह
- 29:53सकता हूँ। चमत्कार किसी ने भी दिखाए।
- 29:59व्यक्ति का मन तो मन है और सभी के मन की संभावनाओं यक्त साण है एक
- 30:08जैसी सभी का मन वैसी ही तार्की नहीं मानते हो।
- 30:18भ्रम सिर्फ खुद देखने से उठता है, किसी ने कुछ दिखा दिया?
- 30:26वो कहेंगे यह कोई हो सकता है जैसे क्लोरोफिल सुंघाती बेहोश हो गए
- 30:32ऐसा कुछ। मैं नहीं मानता तुम बदल सकते हो
- 30:39थोड़ी देर के लिए, लेकिन परमानेंटली नहीं बदल सकते, इसलिए
- 30:43मैं कहता हूँ तुम खुद जाओ उस स्तर पे अगर सदा के लिए आनंद का रसमान
- 30:51करना चाहते हो तो खुद जाओ उस स्तर पे।
- 30:56अगर शनि का रसपान जाते हो तो फिर इन चीजों का इस्तेमाल कर लेता
- 31:05हूँ। वैसे भी बैंक अमेरिका में भी
- 31:07बैंक। लेकिन अगर बैन नहीं है तो तुम भान
- 31:14का उपयोग कर सकते हो। बड़ी शानदार चीज़ है, उचित मात्रा
- 31:22में है। मात्रा किसी फिजिशियन से या
- 31:27आयुर्वेदाचार्य से कंसल्ट कर। हजारों हज़ारों हज़ारों चमत्कार
- 31:41दिखाये। मुझे तो याद भी नहीं, आप ही मुझे
- 31:48याद कराओगे बाबा ऐसा हुआ ये हुआ मुझे कोई पता नहीं।
- 31:55क्योंकि चमत्कार होते हैं, मैं करता हूँ ये ऊपर से उतरती है घटना
- 32:04और मैं मुँह के रह जाता हूँ अब क्योंकि बताने का कोई फायदा नहीं
- 32:12के पास लोग कैसे आए। बाबा बेटी है बेटा नहीं की इच्छा
- 32:18है हमारी क्या करोगी बेटे को एक बेटी है उसी को बेटा समझ लो नहीं
- 32:24बाबा बेटा चल गया चलो ठीक है, हो जाएगा हो जाता है अभी आज भी है
- 32:33सब। कोई मिट नहीं गया, कोई गया नहीं
- 32:36हूँ कहीं पर झूठ भी नहीं बोल रहा हूँ झूठ तो बोलने की मेरी आदत हुई
- 32:51ये सब होता है। और मैं यही कहता हूँ, संत से अगर
- 32:56तुम कुछ सीखना चाहते हो तो एक चीज़ सीख लेना यही सिखाने का
- 33:00मैंने प्रबंधन किया, चमत्कार दिखाता, रूबरू दिखाता।
- 33:05फिर ऊपर से गिरते हुए मेरा शिष्य प्रवीण मुझे कहने लगा।
- 33:20उस्तादजी नोट बरसाओ ऊपर से 100 100 के बरसाओ मैंने आज पर किया
- 33:27नोट मुझे नहीं पता वो किसी को बता के गया, ये बात नहीं बता के गया।
- 33:34लेकिन सारी गैलरी 100, 100 के नोटों से भर गई।
- 33:37मैं दरें दरें व्यक्ति। मेरे पास एक नाश के है 100 सो के
- 33:44नोटों से भर गया ये हाथ की करामात्री है ये मिरकल है,
- 33:49चमत्कार है जो किसी तल पर घटा जाता है समाधि मिरकल नहीं है।
- 34:00समाधि तुम्हारा होना है, एग्ज़िस्टन्स है, वह मिरकल नहीं
- 34:04है, वह चमत्कार नहीं है, चमत्कार तुम नहीं होते, समाधि तो
- 34:13एग्ज़िस्टन्स है, तुम्हारा अपना होना है।
- 34:16वहाँ जाकर तो तुम श्रद्धा के लिए शांत हो जाओगे, श्रद्धा के लिए
- 34:20खुशहाल हो जाओगे, श्रद्धा के लिए आनंद में झूमने दो वह शरार तो ऐसी
- 34:25कि कभी ना कम होती ना उसका प्रभाव कम होता।
- 34:32कितने ही पिए जाओ कितने ही पिए, जाओ मन भरता ही।
- 34:40इतने वर्ष पीता रहा, ज़रा देखिए 35 वर्ष पीता रहा 35 वर्ष थोड़े
- 34:54नहीं आते। आफ्टर एनलाइटनमेंट जब बाबा ने
- 34:58मुझे जगाया, अपनी सेना के संघयित ऋषिमुनियों के संघयित बाबा तुमपुर
- 35:09बाबा कोई और ढूंढ लो। मैं हूँ, छूती नहीं है काफी मुँह
- 35:18को लगी हुई मेरे से छोड़ी नहीं जाती है, बाबा कहते हैं लोगों के
- 35:24लिए छोड़ो, बिपाशुओं के लिए छोड़ो मोमूख शो के लिए छोड़ो।
- 35:29जो प्यास हैं उनके लिए छोड़ो, जो भूखे हैं उनके लिए छोड़ो, मैं
- 35:38तुम्हारे संग मेरा वरद आशीष हमारे साथ है मैंने बड़ी कोशिश की बाबा
- 35:46और ढूंढ चूके बाबा ने अंतिम शब्द कह के और कोई है ही नहीं इससे
- 35:51ज्यादा मैं। आखिरी शब्द का मेरा रोम रोम जोड़
- 36:01दिया क्या है? और कोई भी नहीं है नहीं और कोई भी
- 36:06नहीं। मैंने कहा अफसोस अफ़सोस की बात है
- 36:11क्या बाकी थी? ये धरा खाली हो गई है।
- 36:16पापा कहते नहीं है तुम है तो लेकिन दूर दराज बैठे हैं, तुम
- 36:22आसानी से उपलब्ध हो जाओगे उनको कहाँ खोजोगे तुम एकांत में बैठे
- 36:29हो। यहीं बैठे रहना, यहीं से प्रचारित
- 36:33करना बातें पर मैं भेजूंगा मैं मोक्ष होगा, मैं भेजूंगा जो
- 36:40प्यासी हैं उनको मैं भेजूंगा तो मैंने दीक्षित करते जाना।
- 36:49बस तुम मेरा मोहरा बन जाओ छेरने वाला तो मैं ही हूँ तब से मैं बोल
- 36:57रहा हूँ मेरा अपना कुछ नहीं, मैं रोज़ कहती हूँ, जो है सब दे रहा
- 37:03है। मनुष्य को यही तो हरम होता है।
- 37:09मैं हूँ और मेरा है यही भरमजीसन मिट जाएगा वो सन ना मैं रहूँगा,
- 37:17ना मेरा रहेगा बस जो है वो एक का है, वो मेरा कह लो वो तेरा कह लो,
- 37:23कोई फर्क नहीं पड़ता शब्द उसी के फर्क पड़ता है।
- 37:27बस एक का है, मालिक का है, परमपिता परमात्मा का है और मैं ये
- 37:35तुम शब्दों से कोई अलफाज़ बदलने से कोई सत्य थोड़ा बदल जाता है
- 37:43नीम करौली बाबा ने। बाद में लिखते हैं रिचर्ड एडवांस
- 37:51एल एसटी ने मुझे क्षणिक समाधि आनंद बहुत उतना ही आनंद बाबा नीम
- 37:58करोली की साधना से मुझे मिला लेकिन वो टेंपररी था।
- 38:04कुछ देर के लिए यह प्रमाण है छूटती नहीं है।
- 38:11काफी मुँह को रखी हुई यह कभी उतरते हैं।
- 38:16पिता सफर का ये बहुत बड़ा फर्क है।
- 38:20इसे ही संबोधित करते है। इसे संबोधित करते है।
- 38:24जीसको करने के बाद कुछ और करना बाकी न रह जाए।
- 38:30तुम्हें अपनी इंद्रियों से रस की अनुभूति होती है और तुम रोज़ रोज़
- 38:34उस रस की अनुभूति में गहरे उतरते हो।
- 38:38रोज़ रोज़ उस रस को पीना पड़ता है तुम्हें।
- 38:41लेकिन ये रस ऐसा कि एक बार पी लिया है फिर से पीने की कोई
- 38:47आवश्यकता रह नहीं जाती, बस एक बार पीया है श्रद्धा के लिए पी लिया
- 38:54है। महत्वपूर्ण बात डॉ।
- 39:02रिचर्ड अल्फर्ट जब मैंने उनकी किताब पढ़ी, बी हर नव और भी
- 39:10किताबें अभी यहीं रहो अभी मैं रहो बी हर नव अभी मैं रहो।
- 39:22पहले भी बहुत अतीत को त्याग दो और तुम्हारी समृतियों में है वो बीत
- 39:30गया फिर नहीं आएगा भविष्य में मत जाओ, कल्पनाओं में मत उलजो वह अभी
- 39:36आया है, जो है, उसका रसास्वादन करता।
- 39:42अभी में रहो यही सभी संत कहते हैं बी हियर नाउ और डॉक्टर रीचर्ड
- 39:50अल्फर्ट ने भी अपनी किताब में ये थीम दिया उसे पढ़ना जरूर पढ़ो बी
- 39:58हियर नाउ डॉक्टर रीचर्ड अल्फर्ट और तुम एक सहज सुकून भाव के अतीत
- 40:13को छोड़ो, वह गुजर गया कभी वापस से नहीं आएगा भविष्य को छोड़ो, वह
- 40:19कल्पना है संभावना है अभी आया नहीं।
- 40:24अभी जो है उसको फिर तुम्हें कुछ पता नहीं आगे क्या पीछे क्या बीत
- 40:35गया आगे क्या आएगा तुम आज ही के दिन आज ही के पल।
- 40:43का आनंद क्यों नहीं मना लेते? जश्न क्यों नहीं मना लेते?
- 40:49जाने न तू पीछे भी जाने हैं न तो? जो भी है बस यही एक पल है, जो भी
- 41:13है बस यही एक पल है। आगे भी जाने ना तू पीछे भी जाने
- 41:34है ना तू जो भी है। बस यही एक पल है, जो भी है बस यही
- 41:50एक पल है बी है नौ इसी पल में टूट जा।
- 42:02आज का यही संदेश इसी पल में डूब जाओ वहाँ पहुँच ही जाओगे जहाँ संत
- 42:11आपको ले जाना चाहते हैं तुम क्षुद्र भोगों में अपना जीवन
- 42:16बर्बाद कर रहे हो? इतने जन्मों से भोगते हित वाया बस
- 42:24तुम्हें याद नहीं है, सिर्फ भूल गए हो तुम छोड़ो इसी क्षण में
- 42:35ठहरों। प्रशिक्षण में उतरो, अपने भीतर
- 42:39उतरो, तुम उस अतुल्य सम्पदा को पा जाओगे, वो अतुल्य सम्पदा,
- 42:46तुम्हारी तुम्हारा इंतजार कर लीजिए, वो तुम्हें पुकार रहा है,
- 42:51आओ मेरे बच्चे आगोश में रख जाओ।