Latest / Baba ji Vijay Vats / 1 Nov 25 - अपने अंतस तक पहुंचने के 2 अहम सूत्र! दुःख और अध्यात्म का संबंध! नाम मत कमाना, नाम मत लेना! Baba Ji Vijay Vats
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- 0:20शालीन कुमार बाबा जी, क्षमा करना ऐसा प्रश्न पूछ रहा हूँ जो पूछना
- 0:42चाहिए नहीं था। 1987 में आपके पिताजी के निधन के
- 0:59बाद मैं घर पे आया था। आपने बहुत सी बातें कही शास्त्रों
- 1:14को और सभी बातें तो समझ में आ गई लेकिन एक बात सिर के ऊपर से गुजर
- 1:32गई। आपने कहा नाम मत कमाना और नाम मत
- 1:50लेना। अगर इन शब्दों का रहस्य उद्घाटन
- 1:59कर दें तो बड़े कृपा। नाम मत कमाना क्योंकि नाम कमाने
- 2:18की कोई आवश्यकता नहीं है, यह तुम्हारी बात सुना है, वासना और।
- 2:26आवश्यकता में जमीन आसमान का फर्क आवश्यकता जरूरत होती है और वासना
- 2:39गैर जरूरी है। धन चाहिए, धन कमा लेना, वस्त्र
- 2:54चाहिए, मकान चाहिए ये सब कमा लेना।
- 3:02लेकिन नाम नाम की क्या आवश्यकता है?
- 3:13नाम गैर जरूरी है। इसलिए संत के पास अगर आप जाओगे तो
- 3:27वह आपके समृद्धियों को तोड़ने के लिए।
- 3:31आपका नाम बदल देगा क्योंकि नाम के साथ आपकी पुरातन यादें जुड़ी है
- 3:49और नाम गैर जरूरी है। जरूरत भर की चीज़ कमा लेना आवश्यक
- 3:59भी है, लेकिन नाम कमाना इसकी कोई जरूरत भी नहीं और नाम लेना।
- 4:17पुकारना किसी संकट की वेला में जब आपको आवश्यकता हो परमात्मा है।
- 4:33तो जीस, वे नाम से आप उसे पुकारना चाहो पुकारो लेकिन हर वक्त तो
- 4:42संकट नहीं है तुम्हे और तुम तो ऐसे व्यवहार करते हो परमात्मा के
- 4:52साथ। बिना संकट के भी उसका नाम लेते
- 5:00हो? हमने संतों की बातों को अर्थों को
- 5:18अनर्थ कर लिया है। दुःख में स्मरण सब करें, सुख में
- 5:30करें न कोई जो सुख में स्मरण करें दुख कायो को।
- 5:47इस शब्द को यहीं छोड़ देते हैं, एक प्रश्न पहले ले लेते हैं,
- 5:56अभागा कौन और भाग्यशाली कौन? अभागा वो?
- 6:07जो बुद्धि के तल पर ही जिया और बुद्धि के तल पर ही मर गया।
- 6:15बुद्धि के तल से नीचे नहीं उतरा, हृदय के तल पे नहीं आया और।
- 6:27हृदय के तल से रहस्य के तल पे नहीं गया और रहस्य के तल पर ही
- 6:32तुम्हारा भाषण है। वह अभागा है, जो बुद्धि के तल पे
- 6:39जिया और बुद्धि के तल पर ही मर गया या चार लोग या सब लोग?
- 6:47ऐसे ही अभाग्य बुद्धि के तर्प पर जीते हैं बुद्धि के तर्प पर मर
- 6:58जाते हैं ना अंत में उतरे ना हृदय को छूआ।
- 7:09न रहस्य कुछ हुआ और भाग्यवान वो जो बुद्धि के तर से नीचे उतरे
- 7:22बुद्धि को छोड़कर ह्रदय में उतरे प्रेम में जिए।
- 7:30और प्रेम के तल से नीचे उतरे रहस्य में जिए रहस्य में ही मरे
- 7:39वहाँ मरे जहाँ मरना होता नहीं बुद्धि के तल पे मरना होता है।
- 7:50हृदय के चल पे मरना होता है तुम्हारा प्रेम आज है, कल मर
- 7:54जाएगा, लेकिन रहस्य के चल पर कभी कोई नहीं मरता, मैं न मरूँ मरह सं
- 8:09सारा। मोहे मिला जिला मन हर के जिला मन
- 8:16हर रहस्य कतल है, जहाँ व्यक्ति कभी नहीं वर्षा श्रद्धा के लिए
- 8:24अमर हो जाता है, श्रद्धा के लिए जीत जाता है फिर उसकी मौत नहीं
- 8:29होती। अभागा, वह जो बुद्धि के तल पे
- 8:35जिया बुद्धि के तल पर जन्मा और बुद्धि के तल पर ही मर गया उसकी
- 8:48कॉन्शसनेस वेवल। ध्यान रखना आई क्यू में समझ लेना
- 8:55आई क्यू और कॉन्शसनेस लेवल में बहुत विशाल अंतर है।
- 9:07बुद्धि कतर पर कॉन्शसनेस लेवल बहुत थोड़ा सा होता है।
- 9:16यही 5710 बस इससे ज्यादा हृदय के दर पे कौन से लेवल 2025 हो जाता
- 9:28है और रहस्य के दर पर 100% हो जाता है।
- 9:40तुमने बुद्धि के तल से यात्रा शुरू करनी, हृदय के तल पे उतरना,
- 9:49रहस्य के तल को छू लेना। अब आइये अब शब्द पे चले दुख में
- 10:06सुमरण सब करें, सुख में करें न कोय, ये सुमरण शब्द को बिगाड़
- 10:16लिया गया। ये शब्द स्मरण है याद आना तुम्हें
- 10:25अभी पता नहीं जब तुम्हें शोक लगता है तो जीस स्मरण की बात संत करते
- 10:40हैं, उस तल पर तुम एक बार भी चले जाते हो।
- 10:46जितना गहरा शोक, उतने गहरे तल पे तुम निकल जाओगे दुःख से आता है
- 11:02शोक शोक तुम्हें लगा तो एक बार की तुम उस तल पर निकल जाते हो।
- 11:10जिसे संत रहस्य का दल कहते हैं। कबीर तुम्हारे रहस्य तुम्हारे दुख
- 11:23की बात नहीं कर रहे, तुम्हारे दुःख तो बड़े छोटे हैं, सिर में
- 11:31दर्द है। आँख में दर्द है, दाँत में दर्द
- 11:36है, किडनी खराब हो गई, यह छोटे हैं।
- 11:43ये यंत्र के विकार हैं। तुम्हारे दुख इसी में हैं,
- 11:47क्योंकि तुम चिपटे हुए हो उससे? दुख में सुमरण शुक्र है।
- 11:59जब दुख आता है तो बुद्धि से चुभकाहट हट जाती है।
- 12:04एक बार के तो जितना गहरा शोक। उतने ही गहरे तर पे तुम उतर जाते
- 12:18हो शक छोटा होगा तुम हृदय में उतर जाओ शोक भारी होगा तुम रहस्य के
- 12:27तर पे उतर शोक शक। एक संजीवनी है तुम्हारे लिए कुंती
- 12:41बड़ी समझदार थी, कुंती ने सिर्फ दुख मांगा और दुख भी झोली भर के
- 12:50मांगा। कुंती ने कहा ये वासुदेव।
- 12:59मेरी झोली दुख से भर दो बेसिक चीज़ मान ली दुख मांग लिया दुख से
- 13:19लगेगा शोक। क्योंकि कुंती ने शोक का स्वाद ही
- 13:28चखा था और तुम बड़े हैरान हो गए। शोक का भी स्वाद होता है बिलकुल।
- 13:39शोक का स्वाद इतना भारी कि तुम्हारे सुखों के स्वाद तो ओछे
- 13:46पड़ जाते हैं छोटे पड़ जाते हैं दुख का स्वाद अगर दुख इतना गहरा
- 13:54लग जाए तुम्हें शोक इतना करंट इतना गहरा लग जाए।
- 14:01तो तुम एक पल के लिए अपने अस्तित्व के तल को छू सकते हो और
- 14:08कुंती से भलीभाँति जानते हो? कुंती का पति जवानी की उम्र में
- 14:16ही स्वर्गवास हो गया। शक लगा इसलिए दुखी व्यक्ति को
- 14:28मात्र स्थान हो सके तो उसकी इमदाद हो।
- 14:40क्योंकि दुख ने उसे पहले ही गहरा धकेल दिया है।
- 14:48अपने भीतर दुख के कारण वह अपने भीतर खींच गया।
- 14:58दुखी व्यक्ति को सताओगे तो वो गहरे तल पे है।
- 15:04गहरे तल से दी हुई बदवाह गरबल को न सताइए ताकि मोटी आह बिना जीभ की
- 15:19आह के लोहा वसन हो जाए। लोहे को भी भस्म कर देते हैं।
- 15:28इस शास्त्र में कहाँ गया जो स्त्री जवानी में विधवा हो गई?
- 15:37जो बच्चा बचपन में अनाथ हो गया? जो वृद्ध व्यक्ति का पुत्र का
- 15:48निधन हो गया। बुढ़ापे का वक्त उनको सताना मत,
- 15:55उनकी सहायता करना इसे बड़ा पुण्य धरती पे कुछ।
- 16:05ये तीनों शोक बहुत बड़े हैं। ये करंट ऐसे हैं कि जीस व्यक्ति
- 16:17को लगते हैं। वह अपने अस्तित्व के तल में समा
- 16:22जाता है। पर जहाँ व्यक्ति होता है वहीं से
- 16:28श्राप देगा और वहीं से आपको आशीर्वाद देगा, उसकी सेवा करोगे,
- 16:36आशीर्वाद निकलेगा उसको सताओगे। तो बदवा तुलसी ने कहा ताकी मोटी
- 16:48आह निर्बल को न सताई बिना जीभ की आहट बोलेंगे तुने लोहा हसन।
- 17:04इसलिए राजा लोग अगले जन्मों में इतने दुखी होते हैं।
- 17:14मैंने अपनी ही कहानी सुनाई। पावर होती है, अंकार होता है।
- 17:24और पावर के साथ अहंकार के साथ अगर पावर आ जाए तो अनिष्ट कारी ही
- 17:32होती है। आनंदपुर में एक चीज़ को छोड़कर
- 17:44बशर्कित के तुम संत न हो कर। अगर तुम संत हो गए और जंक्चर
- 17:53पॉइंट को क्रॉस कर गए, फिर तो तुम्हारे लिए सभी तुम्हारे बच्चे
- 18:01हो गए, तुम अनंत के विस्तार में सुन गए, सारा अनंत तुम्हारा अपना
- 18:08हो गया। सारा आनंद अपना कि नहीं तुम खुद
- 18:13ही हो गए, दुख मांगा कुंती ने और दुख भी कहा कि झोली पर दो मेरे हे
- 18:30कृष्ण। दुखों से जोड़ी भरता हो और भगवान
- 18:38मुस्कराए क्योंकि इस रहस्य को भगवान ही जानता है, तुम तो दुखों
- 18:47को भुगतते हो, भगवान जानते हैं। दुख ही वो कीमियां हैं जीसको अगर
- 18:58गले से लगा लोगे तो वह तुम्हें अंत में ले जाएगा और अंत में
- 19:03रहस्य के भीतर आनंद भरा पड़ा है। इसलिए संत से अगर तुम गहरे से
- 19:17गहरा आशीर्वाद मांगोगे गहरे से गहरा आशीर्वाद वह तुम्हें यही
- 19:28कहेगा कि तुम्हारा स्वेग समाप्त हो जाए जो तुमने बनाया।
- 19:38सब समाप्त हो जाए जो तुमने बनाया और अहंकार तुम्हारा बनाया हुआ है
- 19:45नॉट कृष्णगथ दट्स दी कृष्ण ऑफ यूर सेल्फ।
- 19:53एक मात्र अहंकार ही तुम्हारी निर्माती है।
- 19:58बाकी सब भगवान ने बनाया और अगर ये जो तीन रामकृष्णा कहा
- 20:15करते थे इन तीन व्यक्तियों को। अगर तुम दुख न देखकर सुख दोगे तो
- 20:27जहाँ से आशीर्वाद आएगा, बड़ा गहरा तल है पल में ही तुम्हें पल पल
- 20:33में ही तुम्हें खुशियों से नहला जाएगा, आनंद से नहला जाएगा।
- 20:46इस दुख की बात करते हैं दुख में तो याद आ ही जाता है अपना तार सुख
- 20:54में तुम शरीर होते हो दुख में तुम शरीर नहीं रहते, शरीर से तोड़
- 21:01देते हो अपने आपको मुँह। इसलिए दुखी व्यक्ति चलती पहुंचता
- 21:07है। बात उलटी लगेंगी, लेकिन सत्य
- 21:14परमात्मा दुख दे तो शिकायत मत करना।
- 21:26आहो भाग्य कहना अपने आपको तुमसे बड़ा कोई भाग्यशाली है परमात्मा
- 21:37ने दुख दे दिया संत जानते थे दुख के बिना न मिलेगा।
- 21:47भोगों से भी तुम्हें दुख मिलता है तो वैराग्य उत्पन्न होता है।
- 21:53अगर भोग तुम्हें सुख देने लग जाए तो वैराग्य उत्पन्न नहीं होगा।
- 21:58फिर तुम भोगते ही चले जाओ। भोगों से मिलता है दुख इसलिए
- 22:09तुम्हें ब्यारा भी आता है। इसलिए कुंती बड़ी समझदार थी।
- 22:16उसने भोग नहीं मांगे। उसने सुख नहीं मांगा।
- 22:25उसने फाउंडेशन मांगे फाउंडेशन है दुःख।
- 22:33हे कृष्ण वासुदेव देवकीनंदन मेरी झोली में दुखी दुख लड़ना और कृष्ण
- 22:46मुस्कुराए। कृष्ण के सेवक ये बात कौन समझेगा,
- 22:52संत ही समझ पाएगा, इसलिए कबीर ने कहा दुख में सौमरण
- 23:11शंकर है दुख में तो तुम शरीर से परे हट जाते हो, वह तो नैचुरली
- 23:18है। सुख में करे न कोई सुख में तुम
- 23:22शरीर के साक्षी पड़ जाते हो इसलिए अध्यात्म के रास्ते पे सुख अच्छा
- 23:32नहीं होता, लेकिन तुम्हारा मन? मरना नहीं चाहता इसलिए सुख मांगता
- 23:41है, यह उसकी मजबूरी है, मन मरना नहीं चाहता, अहंकार मरना नहीं
- 23:49चाहता तो वह सुख मांगता है, सुख में करे न कोई, फिर तुम परमात्मा
- 23:56को याद नहीं करता। इसका तो बड़ा गहरा है सुख में तुम
- 24:02अपने अंत स्थल में उतर ही नहीं सकते।
- 24:04कितनी ही चेष्टक हो दुख में तुम एक पल में भीतर उतर सकते हो।
- 24:16अगर किसी ऐसे व्यक्ति की मौत हो जाए तुम्हारे सामने जैसे तुम्हें
- 24:21बड़ा मोह है, तुम एक पल के लिए अपने अंतःस्थल को छू लोगे।
- 24:28बस मिल गया मकान दुख के भरे हुए। वातावरण में आनंद की एक हल्की
- 24:39सीकरण तुम्हें दिखाई पड़ेगी और तुम हतप्रभ रह जाओगे हैं।
- 24:46इतने बड़े दुख के लम्हे में यह आनंद का क्षण आया किस?
- 24:54और तुम्हारी खोज शुरू हो जाएगी। कबीर के कहने का अर्थ तुमने
- 25:04शब्दों का अर्थ कर लिया है, लेकिन कबीर के कहने का रहस्य आत्मकशता
- 25:14दुख में तो प्रकृति ही तुम्हें दकेल देती है अपने।
- 25:18स्वय के पास सुख में तुम शरीर का मुँह छोड़ना नहीं चाहते, इसलिए
- 25:26सुख तुम्हें कतई नहीं पहुंचाता। सुख तुत में हृदय तक भी नहीं ले
- 25:33के जाता सुख तुत में खोपड़ी में रखता।
- 25:39सुख तो अगर ₹99 हो गए तो सुख तो लालच करेगा।
- 25:43100 कर 1000 कर लाकर दर्द बढ़ता है, क्या जूं जूं तबा के?
- 25:58सुख में लो पड़ेगा सुख में तुम शरीर के साथ चिपड़ जाते हो दुख
- 26:11में जाने अनजाने। प्रकृति तुम्हें शरीर से बहुत
- 26:19तुड़वाकर अपने अंतः में दखल देती है, अखबार उस लम्हे का लाभ उठा
- 26:27लेना वह लम्हा बड़ा कीमती है। उस लम्हे में डूब जाना, उसका रस
- 26:37चखने 1987 में पिताजी के निधन के वक्त
- 26:52मैं आया था। तुमने कहा नाम मत कमाना नाम कमाना
- 26:58गैर जरूरी है। एक बार की शांत वन से सोचिए, भोजन
- 27:08की जरूरत है, धन की जरूरत है, धन की जरूरत है।
- 27:16कुछ आराम की कुछ जरूरत की वस्तुएं खरीदने के लिए भोजन की जरूरत है,
- 27:26पेट भरने के लिए, शरीर को जीवंत रखने के लिए।
- 27:31लेकिन नाम की क्या जरूरत है? नाम तो एक सिंबल है, बस कोई
- 27:42तुम्हें उस नाम से पुकारना और तुम देखोगे, लेकिन ज़रा सोचो सारी
- 27:49दुनिया तुम्हें पुकारना शुरू कर दे जैसे जागरण में।
- 27:59माँ माँ कृत्य माँ मुझे कहती है मैं इन्हें श्राप देती हूँ, ये
- 28:12दुष्ट रात को इसे सोने नहीं देते। दिन तो किस तरह बीत जाता है इनके
- 28:24दुखड़े सुन सुन के ये दुष्ट रात को भी सुनने नहीं देते।
- 28:28पहाड़ा वालिया, मेरा वालिया, शेरा वालिया।
- 28:39इसलिए तुम देखोगे जागरण करने वाले और जागरण करवाने वाले तुम्हें कभी
- 28:44सुख ही नहीं मिलता, क्योंकि माता इन्हें आशीर्वाद देती हैं, वह परम
- 28:56माँ सर्प। उसी बच्चे को आशीर्वाद देती है जो
- 28:59उससे तंग न करता, जो हर वक्त रोता ही रहता है, चिल्लाता ही रहता है
- 29:08उससे तो माँ वैसे ही अक जाती है, तंग आ जाती है।
- 29:15ज़रा सोचो। नाम तुम्हारा सिंबल है, पुकारने
- 29:19के लिए जब तुम किसी संकट में हो, कोई तो पुकारना हो उसे नाम ले के,
- 29:27लेकिन बिना संकट आए किस पापी ने सीखा दिया किसी दुष्ट ने सीखा
- 29:34दिया। के पुकारना रहो पुकारना रहो बिना
- 29:41कारण से पुकारना रहो, तो याद रखो, बचपन में हम कहानी पढ़ा करते थे।
- 30:00अगर हर वक्त राधे राधे करते थे तो फिर यही गति हो गई, तुम्हारी उसके
- 30:12बड़े खेद थे। उसका बाप मर गया था, उसे शरारत
- 30:22सूझे, कहता शेर आया, शेर आया, शेर आया, लोग अपने हथियार लेके भागे,
- 30:32जिसके पास जो था लेके भागा। लाठी थी, तलवार थी, गंडासा था,
- 30:41टाकुआ था, कापा था। जब पास आए तो बच्चा उन्हें देख के
- 30:49हंस पड़ा। बच्चा कहता मैं तो मजाक कर रहा
- 30:53था। लेकिन उस बच्चे की आदत हो गई है।
- 31:06मज़ा आता था उसे जब मैं खुद को संकट में घोषित करूँगा तो ये
- 31:15भागेंगे कोई लट्ठू उठाएगा, कोई गापा उठाएगा, कोई तलवार उठाएगा,
- 31:21जिसके पास जो शस्त्र होगा। अस्त्र हो उठाये उसने तीन चार बार
- 31:28ऐसा ही किया। भगवान भी ऐसा ही सुजते हैं।
- 31:40पहले पहले तो एक दो दफ़े आते हैं मेरा भक्त है।
- 31:46कोई संकट होगा फिर उस बच्चे ने वास्तव में 1 दिन शेर आ गया, वह
- 31:56चिल्लाता शेर आया बजाओ बजाओ शेर आया बजाओ अरे खा जाएगा बचाओ,
- 32:03दहाड़ रहा है बचाओ। लेकिन सभी किसान अपना अपना काम
- 32:10करते रहे। इसका तो रोज़ का जिंदा है।
- 32:13जब जाएंगे तो वाश पड़ेगा, वह 30 ही खोल के दिखा देगा।
- 32:19कोई नहीं गया और शेर उसे खा लिया। यही तुम्हारी भी हालत होगी
- 32:32तुम्हारे साथ कोई ऐसा करे तो क्या वो मजाक नहीं होगा?
- 32:39सारी दुनिया के लोग दिन भर रात उसका नाम ले रहे हैं।
- 32:44बिना संकट आए उसका नाम ले रहे हैं।
- 32:47नाम है पुकारने के लिए संकटकाल द्रौपदी सदा ही कृष्ण कृष्ण नहीं
- 32:55कहते थे। द्रौपदी ने पहले सभी सहारे देखे,
- 33:01उनको पुकारा, कोई नहीं आया तो अंत में पुकारा उसने।
- 33:06एक बार पुकारो, तुम कहाँ गए महाराज करो मत देर दुख हरो द्वार
- 33:19का नाथ शरण में तेरे हे द्वार का नाथ एक बार पुकारा और वो आके।
- 33:30तुम्हें भगवान बचने आते कौन है? भगवान भी समझता है ये रोज़ की तरह
- 33:38मजाक करते है। ये तो बावरे हो गए हैं, वो रहा गए
- 33:50हैं, क्यों आएँगे? और तुम्हें तो लत बढ़ गए।
- 34:02लत एक बिमारी है राधे राधे करते हो?
- 34:07राम राम करते रहो अरे वो बोरा जायेगा, घबरा जायेगा वो फिर जब सच
- 34:19में तुम्हारे ऊपर संकट आता है तुम कहते हो हे राम मरा वाते ही नहीं।
- 34:30कोई बहरा नहीं है, सुन जाता है उसे, लेकिन तुम्हारी आदत है रात
- 34:38को चैन न दिन को चैन तुम इसे पुण्य समझते हो, यह बड़ा पाप है।
- 34:46ऐसे ही किसी को तंग मत किया करो। राधा मुझसे शिकायत करती है, बाबा
- 34:54कैसे भी? मैंने कहा नाम बदल ले और कोई हल
- 35:01नहीं। संत जब शिष्य बनाता है तो
- 35:08तुम्हारा नाम बदल देता है ताकि जो तंग करने वाले लोग थे, एकबारगी
- 35:17तुम्हारा नाम ही नहीं जानें। तुम्हारा जुड़ाव टूट गया, अलगाव
- 35:28हो गया उस नाम से तुम मुड़ते नहीं?
- 35:38मैंने कहा पुत्र नाम मत कमाना और नाम मत लेना।
- 35:45ये दो अहम फॉर्मूले हैं अपने पास जाने के और पहुंचना तो स्वय के
- 35:50पास है और कहीं नहीं जाना। नाम मत कमाना क्योंकि इसका कोई
- 36:00फायदा नहीं। कर्तव्य कर्म करो।
- 36:07जरूरत के लिए धनोपार्जन करो अवश्य अन्यथा तुम और तुम्हारी पुस्तक।
- 36:28लेकिन नाम कुमकर क्या करोगे इतना पागलपण जो आज है धरती पे ऐसा
- 36:37पागलपण कभी नहीं हुआ पर सोमवार धरती इतनी पगला गयी।
- 36:48तुम हो के बिना कारण से उसे पका रहे जाते हो क्या आफत पड़ी भाई
- 36:55तुम्हे कौन सा शेर आ गया तुम्हे खाने के लिए किस पागल ने तुम्हे
- 37:04गलत राह पे डाल दिया? किस मूर्ख ने किस मुँह डालना देना
- 37:15तो मैं इस भ्रम में डाल दिया के पुकारते रहो, पुकारते रहो, खूब
- 37:22पुकारते रहो इनको मैं दुष्ट कहता हूँ।
- 37:34वह तुम्हारी चिल्लाहट सुन कर घबरा जाता है और थोड़ा थोड़ा चला आता
- 37:42है आगे पाता है तो उससे कुछ हुआ नहीं तो वज़न खा रहा है।
- 37:52एक दो बार की वो भ्रम खाता है लेकिन फिर राधा अपना नाम बदल लेती
- 37:59है। फिर नहीं आती उसे पता चल गया तो
- 38:07तुम बोरा गए हो, तुम पगला गए हो? इसलिए मैंने कहा पुत्र नाम कमाने
- 38:15की तो कोई आवश्यकता नहीं धन कमाने की आवश्यकता है शरीर का पोषण
- 38:20करना, बाल बच्चों का पोषण करना, गर्मी बनाना जरूरत हो तो वह कर
- 38:28लेना। सिर छुपाने के लिए छत भी बनाना है
- 38:39लेकिन ये ज़िन्दगी तक ही सीमित रह जाती हैं।
- 38:43नाम कमाने की क्या आवश्यकता है? जिन्होंने नाम नहीं कमाया वो
- 38:51ज्यादा प्रेम से रहते हैं। ज्यादा शांति से रहते हैं।
- 38:56जिन्होंने नाम कमाया बड़ी मुश्किलों में आ जाता है।
- 39:05उनके हये को ही पता होता है। दिल को ही पता होता है उनके ऊपर
- 39:09क्या बीतती है। चारों ओर से उन्हें पुकारा जाता
- 39:12है। कहाँ कहाँ जाए?
- 39:13वो एक बंदा कहाँ कहाँ जाएगा और वह नहीं आता तो तुम्हें समझ नहीं आता
- 39:25कि वह क्यों नहीं आया, इसलिए नहीं आया।
- 39:29कि तुमने बिना संकट के उसे पुकारा, मेरी बातों को मजाक में
- 39:35मत ले लेना, तुम्हारी गंभीरता खो जाती है ब्रह्मात्मा के आगे।
- 39:48कह रहे ये तो बताओ कि बिना काम के हर वक्त उसका नाम क्यों लेते हो?
- 39:54तुम कोई बताएगा तंग करने के लिए ताकि वो तंग आ जाए तुम्हें वो
- 40:04अच्छा नहीं लगता मुस्कुराता। चैन से बैठा आनंद से युक्त अच्छा
- 40:11नहीं लगता। लोग मेरे पास फ़ोन करते हैं, मैं
- 40:20आनंद की मस्ती को पी रहा होता हूँ, फ़ोन उठाता हूँ।
- 40:24हाँ भाई बाबा बस वैसे ही दिल कर आया आपसे बात करने का।
- 40:33मैं इनसे क्या कहूं, ऐसे ही तुम्हारा दिल कराहता है राधे राधे
- 40:42करो राधा क्या कर रही है। राजा चाहती है कि तुम उसे पुकारो।
- 40:53कभी भगवान ने कहा मुझे पुकारो, कहा कभी सपने में ही कहा हो नहीं
- 41:05कहा वह क्यों कहेगा? क्योंकि वह नाम नहीं कमाना चाहता
- 41:13और तुम भी नाम ना कमाओ। इसलिए मैंने तुम्हें कहा पुत्र
- 41:18नाम मत कमाओ, तुम परमात्मा को जबरदस्ती नाम दिए जाते हो जबकि वह
- 41:25कहता है कि मुझे जरूरत नहीं है। ले चलो दिल जो मज़ा ऐसी बहारों
- 42:00में ले चलो।