Latest / Baba ji Vijay Vats / 29 Jul 25 - राम को इतने कष्ट क्यों सहने पड़े? रावण एक मर्यादित महान पुरुष? Unheard Story of Ramayana.
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- 0:02कौशल भट्टाचार्य, बाबा जी। रघु को लरीक सदा चली आई प्राण जाए
- 0:25पर वचन ना जाए इस दोहे को। रहस्यत्मक तरीके से कृपा करके
- 0:41समझाने का कष्ट करें हम दुविधा में पुत्र कौशल इन शब्दों में
- 0:54सिर्फ तुम ही नहीं। बड़ो बड़ो के कुल नष्ट करती है और
- 1:07उन बड़ो बड़ो के आगे तुम्हारी हैसियत कुछ भी नहीं आइए।
- 1:18इसकी गहराई में चलते हैं। आपके आदेश के अनुसार रघुकुल इस
- 1:33रीती शब्द ने धरती पर जितना तनाव दिया है।
- 1:43कष्ट, क्लेश, दुख, द्विदा, संताप, मानसिक, हरी ध्यान से सम्मेलन हो।
- 1:55इसको हृदय में उतार लें। हरी शब्दों ने कुलों तक को नष्ट
- 2:08कर दिया और तुम कहते हो मैं दोगुजा हूँ, ओके?
- 2:20तुम्हारे कुल की कुछ रीत होगी मैं पूछने से लेकिन एक बात को ध्यान
- 2:27में रखना, प्रकृति के हिसाब से चलना मनुष्य की थोकी हुई।
- 2:41व्यवस्था के पीछे मत चलना, भगवान राम ने यही गलती की थी।
- 3:00नहीं गर्मी में मत करो। और भगवान राम की इसी गलती के कारण
- 3:21ही कमिटेड सूइसाइड? हम मर्यादा पुरुषोत्तम नाम देख
- 3:37पुरुषों में उत्तम। ये खिताब उनके लिए सही बैठता भी
- 3:45है। जीस धैर्य से उन्होंने पालन किया।
- 3:52वो धैर्य सराहनीय है, लेकिन पुत्र तुम राम नहीं हो, कोई लाखों लाखों
- 4:04सर एक राम होता है, राम रोज़ पैदा नहीं होता, तुम्हारे लिए नहीं है
- 4:10ये शब्द? प्रत्येक समाज की प्रत्येक खानदान
- 4:22की प्रत्येक एक रीती होती है अगर उस रीती को सहेजे सहेजे तुम
- 4:38निभाबो तो निभादन। मेरे शब्दों को ध्यान से सुनें
- 4:48अगर उस रीती को तुम सहजे सहजे ना निभा पाओ तो नहीं निभाना अब हम
- 4:57आगे चलते हैं। आपको जानकर बड़ी हैरानी होगी की
- 5:05अंग्रेज लोग इतने सान्याल थे की अंग्रेजी में आपको मर्यादा का
- 5:13सटीक शब्द नहीं मिलेगा। ढूंढ के देख लो सारी दीक्षांत।
- 5:22मर्यादा के समीपस्थ आपको बहुत से शब्द मिलेंगे।
- 5:30डिग्निटी और बहुत सी चीजें मिलेंगे।
- 5:37डिसिप्लिन एक अध्यांत को डिसिप्लिन, अनुशासन, मर्यादा सही
- 5:52सही चाल चला वर्चू। दया आपकी जानकर बड़ी हैरानी ये
- 6:04बाबा ने मुझे शुरू शुरू में कहा इंग्लिश ही हो बाय पोर लैंगुएज तो
- 6:14मैंने पूछा मैं कौन से बादशाह का इस्तेमाल कर वही सीख लेता हूँ?
- 6:22कोई ज्यादा दिन ना लगेंगे। ऐसे तो बाबा ने कहा सिर्फ संस्कृत
- 6:30और संस्कृत से निकली हुई हिंदी। मैंने कहा अंग्रेजी।
- 6:39बहुत से सदबरुंगरी जी बोलते है, कहते है इंग्लिश से भरे इसमें कोई
- 6:49पता नहीं कौन सा शब्द बोले ही ना गूंगा हो जाता।
- 6:59वो भगवान की कृपा से ही बाचाल होता है।
- 7:02मुँह का हो ये बाचाल पंख उछड़ें गिरवर कहूँ जासू कृपा सो दयाल
- 7:08द्रव उर शकाल। कलिमलक दहन अंग्रेजी को भी पसंद।
- 7:18और हम क्योंकि गुलाम है अंग्रेजों निश्चित हमारे खून के रोगों में
- 7:24हजारों सालों की गुलामी और 200 साल की अंग्रेजों की गुलामी, सब
- 7:32अपना अपना नजला हम पे फेंककर। अभी मैं कल एक प्रवचन रिकॉर्ड कर
- 7:40रहा हूँ। सूक्ष्म से किसी ने सवाल पूछा
- 7:45बाबू ये हमारे ग्रंथों में तो है नहीं है।
- 7:51मैंने कहा तो बख्तियार खिलजी की भेंट छिड़कई नालंदा में।
- 7:56वो अभी आपको नहीं मिलेगा, बस अभी तो आप सुन लो, सही पूछो हमारे
- 8:06साइंटिस्ट की दृश्यों की मुनियों की खोजें लालंदा यूनिवर्सिटी की।
- 8:12आग की भेंट चढ़ गई और उसको चढ़ाने वाला था बख्तियार खेंच और वो इतना
- 8:21बेरहम इंसान था कि जिन वैदिक हकीमों ने उसको ठीक किया।
- 8:31ला इलाज बिमारी को उसके हकीम जवाब दे गए थे।
- 8:38उसने कहा चलो नालंदा में से वहाँ की हकीम ने उसका इलाज कर दिया।
- 8:49और बख्तियार खिलजी ने नालंदा यूनिवर्सिटी के विश्वविद्यालय के
- 8:55सारी साहित्य को आगे कर दिया। हम तो डूबे हैं, सनी आपको भी ले
- 9:02डूबे? हमारी बुलामी हमको वो दे दिया जो
- 9:20लाखों लाखों सालों तक रोयेगी धरती।
- 9:32और वो ऋषि पैदा नहीं कहीं हज़ारों साल में कोई एक कार्य वो एक आध
- 9:46उगाड़ देगा सृष्टि पर पड़ी हुई। लेकिन फिर वही है चाल बेड़ंगी जो
- 9:56पहले थी वो अब भी है तो सिद्धुस्त ने नालंदा यूनिवर्सिटी के ऋषियों
- 10:07की सभी खोजों को समाप्त कर। एक व्यक्ति की कोम के कारण पूरी
- 10:17कोम को दंड देना अनुचित ही नहीं। पापा दादा, परदादा कोई गलत काम
- 10:30करे और उसके नतीजे बच्चे भोंके यह न्याय नहीं।
- 10:38जैसे हम बिमारी का नाम होता है फेफड़ों के लंग्स की इन्फेक्शन
- 10:43नमोनिया उसको लिखने में सबसे पहले पी आएगा पीएनईयू।
- 10:52एमओएनआई निमोनिया तो मैंने कहा ये पी मैं पी निमोनिया बोलता था, वो
- 11:02कहते पी नहीं लगेगा, मैंने कहा क्यों कहते पी साइलेंट मैंने कहा
- 11:09फिर यार ठीक है। ऐसी ही मूर्ख भाषा है अंग्रेजी।
- 11:19अगर ये बोलेंगे नहीं, चुप है तो चुप शब्द का अर्थ क्या है?
- 11:24शब्द कभी चुप तो होता ही है, शोर का नाम शब्द है।
- 11:31और शब्द ही अगर चुप हो जाए तो इसके लगने का अर्थ क्या है?
- 11:37आप देखना नमोनिया को जब अंग्रेजी में लिखेंगे डॉक्टर्स तो पी
- 11:40लिखेंगे पी निमोनिया। जब भाई इसको मुँह की ही रखना है
- 11:53तो लिखने की आवश्यकता क्या है? ऐसी ही रेत रेत शब्द और है।
- 12:10और मर्यादा शब्द सही मायने में मर्यादा का अंग्रेजी में कोई शब्द
- 12:19नहीं अगर कोई शब्द गरीब भरता है, मेरे देखे तो वो शब्द आता है
- 12:26बॉन्डेज। बोन डैश बंधन सलेवर दास्तां बंधन
- 12:44अब तुम हैरान हो गए चौंकन मर्यादायी बंधन।
- 12:56किसी युग में रही होगी किसी काल में रही होगी किसी कुल में रही
- 13:02होगी और कुल में चलती हुई चीजें अगर तुम नहीं मान सकते हो।
- 13:16तो तोड़ दी ना भला होगा, अगर तुम नहीं तोड़ोगे तो आने वाली
- 13:24पीढ़ियां दुख भोगेंगे। इस शब्द का कोई अर्थ भी नहीं होता
- 13:33है। किसी की दास्तां सलेवरी बंधन
- 13:37बॉन्डेस अधीनता मर्यादा मर्यादा बड़ा अच्छा शब्द रखता है।
- 13:50वह मर्यादित व्यक्ति है। बड़ा अच्छा शब्द के बाबा ने कहा
- 13:59संस्कृत ऐसी शानदार भाषा है। सैंट्रिस्टिक हिंदी उसका कोई शब्द
- 14:11व्यर्थ नहीं। जैसे की व्यर्थ है, साइलेंट है तो
- 14:17व्यर्थ है। हम बच्चे थे, हमारे पंडित गीशाराम
- 14:25जी हमें पढ़ाया करते थे, बोलो बेटी है।
- 14:31हम कहते ए करते ए अरे क्यों बकरी के तरह मिड मणा दे तुम, तुम भीड़
- 14:42हो, क्या भिड़ें करती हैं ऐसे पंडित जी कहते हैं यार नहीं बैठे?
- 14:51इसको बोलो ये ये मैं क वे क ख ग घ न इन में ये जोड़ोगे प्लस क प्लस
- 15:05ए बनेगा कै इतनी शुद्ध पक्ष? यहाँ वर्णमाला भी इतनी शुद्ध है
- 15:18कि उसका उच्चारण कहाँ तालुआ काम करेगा कहाँ जीभ को दायें बाएं
- 15:26दांतों के साथ दांतों को बीज के होंठों को बीज के?
- 15:30कैसे बोलना है रघुकुल रहित सदा चली आई सबसे पहले तुम्हारे घर में
- 15:41जो रीती चलती है, मैं नहीं कहता उसको तोड़ देना मैं कहता हूँ उसको
- 15:52निभा सको तो निभा देंगे। अनेसा तोड़ते हैं क्योंकि अक्सर
- 15:59रीतियां बंधन होते हैं। अक्सर और तुम तोड़कर अपने आने
- 16:08वाले पीढ़ियों को मुक्त कर जाओगे। इस रीतियों तो रघु भी रघु कुल में
- 16:19ये रीती रही होगी की प्राण जाए पर वचन ना जाए लेकिन वचन भंग करना
- 16:27पड़ेगा अगर किसी स्थान पे। आज हमारे सुप्रीमो जो हमने सबसे
- 16:38ऊंची गद्दी पे बिठा दी वो हमे यही सिखाते है की वचन भंग करना पड़े
- 16:45तो कर देन झूठ बोल देना। 15,00,000 दे दूंगा 2,00,00,000
- 16:50रोजगार भी दे दूंगा वचन भंग करना पड़े तो कर देना गद्दी बिना कीमत
- 17:00नहीं वचन कीमत ले लेना अच्छे से। फिर कुर्सी के ऊपर फेबिकोल की माँ
- 17:11लगा के बैठ जाना फिर तुम्हें कोई हिला नहीं पायेगा।
- 17:15अंगद के पांव की तरह कभी उठा दो। अगर उठता है तो बड़े बड़े धुरंधर
- 17:27ज़ोर लगा लेंगे। वह फेबिकोल तुम्हें उठते नहीं।
- 17:37मर्यादा रघु कुल रही तो सगाह चली आई।
- 17:43प्रत्येक के घरों में कुल्लू कोई रीती होती है और मेरा काम है
- 17:53तुम्हें बंधन से मुक्त कर मुक्ति। अच्छा किया उत्तरद हमने प्रश्न
- 18:03नहीं शायद ये प्रश्न अनउत्रित ही रह जाते है, क्योंकि भगवान राम की
- 18:11मर्यादा के अंदर चला हुआ शब्द गलत कैसे हो सकता है?
- 18:15बिलकुल गलत है ये शब्द। मर्यादा नाम की कोई चीज़ नहीं
- 18:22होती अंग्रेजों के लिए और वो उन्मुक्त जीवन जीते हैं।
- 18:32मर्यादा के बिना बड़ी अच्छी तरह से ज़िन्दगी को जिया जा सकता है।
- 18:38कैसे परमात्मा की सृजना की एक अपनी बनाई हुई नेचुरल मर्यादा है?
- 18:53ध्यान से सुन लें। परमात्मा की सृष्टि की संरचना की
- 19:01नैचुरल प्राकृतिक मर्यादा है पर वो तुम्हें निभानी ही पड़ेगी, वह
- 19:12तुम छोड़ ही नहीं सकते चाहते हो। मर्यादा है कि सीधा चलोगे तो
- 19:18बुरोगे मर्यादा है कि स्लिपरी जगह के ऊपर चलोगे तो स्लिप हो जाओ।
- 19:27ये उसकी मर्यादा है। उसकी रेकी है।
- 19:36बस उसका पालन करो और दूसरा जो हमने कुछ फैसले कर लिए आदमी के
- 19:48समाज में समूह में। जीरे के तरीके जिसे हम संविधान
- 19:54कहते हैं, उनका पालन करना है, क्योंकि हम सब में इकट्ठे हो गए।
- 20:05यह मर्यादा बांटी है। यह मर्यादा आवश्यक है जिंदगी जीने
- 20:10के लिए। लेकिन कुछ मर्यादा ही संविधान से
- 20:15बाहर हमारा समाज निर्मित कर देता है।
- 20:21जैसे एक जाति दूसरी जाति से शादी नहीं कर दी, यह मर्यादा संविधान
- 20:27में नहीं। जो चीज़ तुम्हारा समाज कहता और
- 20:32संविधान न कहता उसको मत मानो क्योंकि ऑलरेडी संविधान तुम पर एक
- 20:44प्रकार की मर्यादा है उससे बड़ी मर्यादा हुई।
- 20:48वहीं तुम्हारे लिए धर्म है, वो ही तुम्हारे लिए कर्तव्य है उससे अलग
- 20:54से चार लोगों के बीच में या एक परिवार के बीच में बांधी हुई कोई
- 21:01भी मर्यादा तुम मत मानो इसको रीती कहते हैं।
- 21:08इन रीतियों को तोड़ते हैं एक थोड़ा सा हास्य प्रश्न मैंने
- 21:22थोड़ी सी बड़ी उम्र में शादी की थी, 4040 में तो हमारी रीती होती
- 21:29है, रात को जागना। सर्दी का वक्त नवंबर का महीना सभी
- 21:36बुलावे भेजी जाती है पर बार भरा था गिरात्रि जागरण है, पित्रों का
- 21:46जागरण है देवताओं का जागरण है। तो गीत गाएंगे, गीत गाएंगे, जब तक
- 21:55गाए जाए तो उसके बाद सो जाए। वो कध के ऊपर कध के ऊपर दीवार के
- 22:03ऊपर पंजे पुंजे से लगावट है। तो माता नहीं सब जगह ब्लावा
- 22:24मैंने कहा ये क्या कर रहे हो? अरे सुबह के गए हुए छक्के हारे,
- 22:29हम आए शादी इतनी दूर गए करीब 200 किलोमीटर का शव।
- 22:42और वहाँ की परंपरा है, पंडित जी ही जान खा लेते हैं उठो ये गांठ
- 22:57बांध हो। वह मिलिट्री की ब्रेड आगे हो जाओ
- 23:04और पीछे हो जाओ। अब मिस्त्री आगे हो जाए।
- 23:10अब आदमी आगे हो जाए और बीच में छोटी सी अग्नि जला लेते हैं।
- 23:16अब फेरे ले लो। मैंने पंडित से सिखारा क्यों शक
- 23:24से सिख रहा है उल्लू और यहीं से गए थे पंडित मैंने कहा तू वही है
- 23:34जो शरारत की गालियां ने कहा, दुष्ट ने बड़ा भोजन करवा दिया।
- 23:41तो मेरे को तो जानता ही है मत कर ये पंगा खाना 2005 यार लेने मेरे
- 23:48से ज्यादा ले लिए हो के तने मेरे कान में कहने लगा आप पंडित जी आप
- 23:58चुप चाप बैठ रहे हो देखो? ये शादी का मसला है।
- 24:02हमें अपनी रसम रिवाज पूरा करना। हमने भी तो अपनी दाढ़ी बनानी है
- 24:10हाथ जोड़ने लगा मगर चलो ठीक है तो यहाँ बुलावा ही भेज दिए गए।
- 24:16रात को किस तरह इकट्ठे हुए? मैंने कहा जान कैसे इकट्ठा हुए?
- 24:20रात को जागेंगे, क्यों जागेंगे, दिमाग खराब है, गीत जायेंगे बगबो
- 24:26गाओ, लेकिन सर्दी में क्यों मर रहे हो?
- 24:29आराम से सो जाओ अरे ठंडी रात है। नवंबर का आखिरी में है निकत दिन।
- 24:42तुम सो जाओ, आराम से तुमने देवी देवताओं से करने गया उसे, मैं
- 24:45निपट लूँगा उनसे निपटना मेरा काम तुम्हारा और क्यों इसको बहू को
- 24:57जगाते? सारे दिन की थकी आ रही है इसको
- 25:03100 लेने दो कहते नहीं हमने तो माता मनानी है हमने तो पितर बनाने
- 25:12हैं मैंने कहा वह मेरे पे छोड़ दो माता मित्रों को मैं मना लूँगा।
- 25:27तुम आराम से सो जाओ, तुम कष्ट मत उठाओ, शादी का जश्न मनाओ, घर में
- 25:35आना, खाने पीने को सब कुछ पड़ा है खाओ पियो, गिरते डालो, नाचो गाओ।
- 25:47लेकिन इस तरह से बंधन वाले रीती वाले काम ना करें, ये मुझे अच्छे
- 25:54नहीं लगते खरीदियों से मैं सदा की।
- 26:03मुझे कई व्यक्ति पूछ लेते है बाबा भगवान राम के जीवन से आपने क्या
- 26:08सीखा? आप रोल करते हो?
- 26:14मैंने कहा सीखा के तो बहुत गए हो अगर आप सीखोगे तो।
- 26:21भगवान राम तुम्हें सिखाते गए हैं कि जो दूसरों की बात को अगर राजा
- 26:28आँखें मूंदे स्वीकार कर लेगा, फिर सुन बात को, दूसरों की बात को,
- 26:36अगर राजा आंख मूंद के स्वीकार करते?
- 26:45तो 1 डे यू विल हैव टु कमिट सुसाइड 1 दिन उसको आत्महत्या करनी
- 26:52पड़ेगी? ये भगवान राम सीखा के गए राम राजा
- 26:57थे और प्रजा के अंदर। लांछन वगैरह लगते ही रहते है, ठीक
- 27:11सीता के ऊपर लांछन लगाती है। राम ने कोई जेपीसी बलाई जॉइंट बार
- 27:26कोई गुफ्तगू की, राम जीके पास सब कुछ थी, अपनी कैबिनेट को बुलाते
- 27:36भी ये मसला है सीता को बुलाते। अरे दोबिन को भी बुलाते दोबी को
- 27:42ही बुलाते किसने इलज़ाम लगाए थे दोबी से पूछते भाई तुने क्या देखा
- 27:51तू बता तुने इसके ऊपर इलज़ाम क्यों लगाए अगर तेरे पास कुछ
- 27:58प्रमाण हैं? तू साबित कर नहीं तेरा गला उड़ा
- 28:03दे अब तो ऐसी ही व्यवस्था थी तुने अपनी घरवाली पे एग्जाम बताया था
- 28:14तू एक रात घर से बाहर रह के मैं कोई राम नहीं हूँ।
- 28:21तुने सीधा मेरे ऊपर इलज़ाम लगा दिया जो कि 13 महीने तक सीता रावण
- 28:32की कैद में रही और भगवान राम ने। उसको स्वीकार कर घर में रानी बना
- 28:42के बैठा है तो इसको व्याख्या का अब जैज लोग सुन रहे होंगे।
- 28:52मुझे बता देना अगर मैं कहू चाहिए था, दोनों पक्षों को सुना जाता
- 29:04है। दोनों पक्षों को सुनकर जज
- 29:08निष्पक्ष फैसला करता है कि कौन ठीक कौन कर?
- 29:15वे शर्ते को उसे निष्पक्षता के भीतर गाँधी जी न आ जाए।
- 29:20समझती है बात अगर गाँधी जी आ गए तो फिर मुश्किल हो जाएगी बात फिर
- 29:28तो पक्ष आ गया गाँधी जी बड़े पक्षपाती।
- 29:34हो तो 70,000 करोड़ के गुनहगार को।
- 29:38गाँधी जी तो गंगा स्नान करवा के परले पर ले जाते हैं, 70,000
- 29:43करोड़ गाँधी जी ऐसे पक्षपाती हैं। लोग कहते हैं नोटों से गाँधी जी
- 29:50की फोटो हटा देंगे। मैंने कहा कल नहीं आज आउट आउट।
- 29:53और लगाई ही क्यों थी? कभी गाँधी ने कहा मेरे मरने के
- 29:58बाद फोटो लगा देना, कभी कहा तुम लोग के पीछे तुमने क्यों लगाई?
- 30:06लगाई तुमने दोष गाँधी को? आराम अंधे थे।
- 30:20न्याय के मसले में क्या राम को पता नहीं था कि सीता भी इसकी
- 30:26प्रजा में शुमार है? घर का मेंबर है, छोड़ो इतना प्रजा
- 30:34तो है पर धांगणी है छोड़ो प्रजा तो है न्याय बनता था कि सीता जी
- 30:46को भलाई कटघरे में। डोबिन को बुलाए धोबी को बुलाए और
- 30:52खुद भी खड़ा हो राम खुद भी खड़ा हो वहाँ के मैं सीता का पति शपथ
- 31:03उठाता हूँ के मैं नहीं। अयोध्या में लाने से पहले सीता जी
- 31:10की अग्नि परीक्षा दी थी। तत्पश्चात में इसको योद्धा में
- 31:16कदम रखने चाहिए। बात खत्म हो जाती है।
- 31:21तलवार उठाते और धोबी का असर काटते ये कन्या।
- 31:28करना था। राम ने बता रहा हूँ मैं मैं राम
- 31:32जी का रोल 14 साल किया लेकिन लव कुश का ड्रामा में कभी निकला।
- 31:39मैंने कहा ये बात। एक राजा के पुत्र गर्भावस्था में
- 31:52राजा के कालीनों पे उसने अपने बचपन गुजारना था उसमें।
- 32:02और वो चला कच्ची धरती पे वाल्मिका एक राजा के पुत्र, दो पुत्र और
- 32:13राजा इतना अन्यायित तब कोई मशीन तो थी ना के पुत्र हैं के पुत्री
- 32:18तब कोई भेद भी नहीं था। ये सौदेबाजी तो बाद में ही चली तो
- 32:30राम को चाहिए था अपनी कैबिनेट जेपीसी बताते सभी को बुलाते जैसे
- 32:35अकबर के पास नव रत्न थे। मिला के मसला रखते है, खुद भी बैठ
- 32:42जाते है। लो मैं भी बैठा हूँ भाई मैं भी
- 32:45अपराधी की तरफ बैठा हूँ। मजदूर पर लिखा रहे है।
- 33:00पहले वफा कना हम भी खड़े हुए हैं। गुनहगार की सलाह?
- 33:22मैं जरूर हली कर रहे हैं अहले वफा का नाम हम भी खड़े हुए हैं
- 33:28गुनहगार की तरह हराम भी गुनहगार हैं तुम्हे पता हैं?
- 33:37ये राम ने क्या किया? इसलिए मैं कहता हूँ राम के जीवन
- 33:52के अंधा अनुकरण मत कर लेना, मरोगे।
- 33:57यू विल हैव टू कम सोसाइटी इन सरयू परिवार तुम्हें भी छलांग लगानी
- 34:02पड़ेगी। हमारे चाचाजी राम भगत थे और आखिर
- 34:08में कह के मरे कि मेरे को कोई संस्कार वगैरह न करें।
- 34:13मेरे को तो सरयू में ही बहा देना बस।
- 34:22बातों की कोई गिनती है? अगर करी जाए तो राम की लेकिन तुम
- 34:28करते हो फेत तो मैं भी राम का लेकिन उसके कारण कुछ।
- 34:40मुझे तो राम का कैरेक्टर इतना शानदार लगता है।
- 34:47किमस का फैन क्या मैं कड़चा हूँ उसका कड़चा चमचा कड़चा बड़ा चमचा
- 34:53सब्जी वाला उसको कड़चा। लेकिन मैं उसकी विशाल ह्रदयता का
- 35:03अंधायन उपकरण पर इति सहन शक्ति सूखती हूँ जानता हो भी स्वीकार
- 35:13लेकिन राम खुद सीता के साथ जब। मैंने सीता परीक्षा अग्नि परीक्षा
- 35:27ले ली, तुमने सीता पर लांछन लगाया।
- 35:32अगर तुम अग्नि परीक्षा पे विश्वास नहीं रखते तो मैं क्योंकि।
- 35:37वेटनेस हूँ इसलिए अगर सीताओ का वनवास है तो राम भी जायेगा।
- 35:42सनी जैसा न्याय या तो न्याय वैसे ही करते है राजा की तरह के धोबी
- 35:54जी महाराज। अपने सबूत रखो तुमने किस बिना के
- 36:07ऊपर कहा अपनी घरवाली को एक रात तुम बाहर लगाई मैं गुराम नहीं।
- 36:17तो 13 महीने तक सीता रावण के घर में गुजार के वापस आई और राम ने
- 36:24उसे अपना दिया। पहली बात तो अपनाया नहीं, सबसे
- 36:30पहले ही राम ने सीता को कहा हे सीते मैंने तुम्हें बचाया।
- 36:36अपनी कुल की मर्यादा करते है, लेकिन अब मैं तुम्हें स्वीकार
- 36:44नहीं करता। शिट के तो होने से पहले तुम्हें
- 36:51अग्निपरीक्षा देनी हो अग्नि में से गुजरना हो।
- 36:56अब वह गुजर गए, सही साबित हुई, कोई अंग ना जला, उसको अंग छोड़ो
- 37:07सर के बाल तक नहीं जले, सत्यता का प्रमाण है, कहानी है।
- 37:17कहानी थोड़ी सी सच्ची भी होती है, थोड़ी सी झूठी भी होती है, उसका
- 37:22उसका रस, उसका अर्थ सच्चा होता है, बाकी फोक भी होता है, उसमें
- 37:28जो फेंकना पड़ता है। तो राम लिया है।
- 37:39धोबी ने लगाया लाइमसन तो वहाँ राम के दो फर्ज बनते थे।
- 37:47लाओ भाई सबूत पेश करो, सीता हाजिर हो, सबूत पेश करो।
- 37:54तो सीता तो कह देती सबूत तो मैंने अरे राजन पहले ही दे दिया राजन
- 37:59नहीं कहती तो पति थे, अब थोड़े सबूत तो अयोध्या में कदम रखने से
- 38:06पहले ही मैंने अग्निपरीक्षा के रूप में दे दिया।
- 38:11अब तो इससे पूछो। यह कहानी को बिगाड़ दिया जाता है
- 38:20अपनी बात को सिद्ध करने के लिए जैसे कल हमारे एक आचार्य बोल रहे
- 38:26थे, अपने जीवन की कथाएं सुनाती हैं उसको।
- 38:33एक रात अचानक में पेड़ के ऊपर बैठा लुढ़क गया और मैंने देखा मैं
- 38:38तो हूँ पेड़ शरीर मेरा नीचे पड़ा तो क्या करके देते हैं क्योंकि
- 38:45उन्होंने अपने आप को सिद्ध करना है, बस मंशा देखी है तुमने?
- 38:52जो व्यक्ति पहले धार के चलाए की मैं हिंदू वह मुस्लिमों की सारी
- 38:57चीजों को खोज लेगा, जो कि गलत है। लगती तो जब आचार्य ने ये सोच लिया
- 39:05कि मैं सत्य हूँ, सोच लिया हमारी तरफ।
- 39:09तो अपने सत्य होने के प्रमाण कोई भी जुटा ले ये तो उन शब्दों की
- 39:14हेरफेर है दो दारु तलवारें इधर से काटोगे तो भी काटेगी इधर से
- 39:19काटोगे तो भी काटेगी तो बोल रहे हैं।
- 39:28वो शब्द सुना रहे हैं एनलाइटनमेंट इस ए लार्ज संबोधि सम्राधि झूठ है
- 39:39कुछ पा लिया ये झूठ है बिलकुल झूठ है अस्तवकर कहते हैं सारे उपनिषद
- 39:47कहते हैं। फिर तुमने नई बात क्या खोज ली और
- 39:52ओशो ने अगर कुछ कहा तो ओशो ने किस संदर्भ में कहा तुम ये सारा
- 39:57संदर्भ सुनो, लेकिन जो काम की बात है और इनकी जो टीम है।
- 40:07आई टी कितने वो छाँट ले वो प्रकाशित कर देगी।
- 40:14क्यों हमारे आचार्य से ही इसलिए इसलिए ऐसा कूड़ा कपड़ा मैं करता
- 40:21ही हूँ, सीधा सीधा बोलता हूँ। और सीधा सीधा एडिट करने वालों को
- 40:29कह देता हूँ उसको डालते हूँ कोई ऐड नहीं कोई लोगों में प्रचार
- 40:39नहीं ना शेयर करना है। ना सब्सक्राइब करना है, ना ही
- 40:51किसी प्रकार का और कोई बिगाड़ शिकार करना है।
- 40:58इसको सीधा सीधा डाल दो। और जो भी व्यक्ति उस स्तर पर
- 41:04पहुँच गया होगा उसको विश्वास हो जाता है।
- 41:06संसार को चलाने वाले एक शुक्ति है, मैं कहता हूँ और जीसको
- 41:21विश्वास हो गया वो है। पर मेरी तो ज़िन्दगी की शुरुआत ही
- 41:25है, मैं तो खरगोश काट रहा हूँ, उस दिन भी खरगोश काट रहा था रैब्यूज
- 41:32पकड़े हमने रैब्यूज काटा हमने और मेरी बालोजी के प्रोफेसर कहने लगे
- 41:40विजय तुम्हें बोल रहा हूँ पांच डेकेडिमेशन कौन सा?
- 41:46हमारे यहाँ कोई बुलारा है नहीं, मेडिकल आपको ही बोलना होगा।
- 41:51मैंने कहा मैडम देखो साइंस एंड गॉड है, साइंस के बारे में तो बता
- 41:57दूंगा, काफी कुछ बोल लूँगा, 5 मिनट का वक्त है, बोल लूँगा।
- 42:05लेकिन गॉड के बारे में मैं कुछ भी नहीं जानती और मैं कुछ जानता नहीं
- 42:10झूठ मैं बोलता हूँ, अब देखिये ये झूठ है ना बोलना।
- 42:21यह कोई मैंने मर्यादा नहीं किया था, मुझसे झूठ बोला ही नहीं जाता।
- 42:31मैंने मर्यादा की तरह उड़ा नहीं था।
- 42:36प्राकृतिक रूप से ईश्वर की देन थी।
- 42:41मैं सत्य ही थोड़ा बोलता हूँ, सत्य ही बोलता हूँ तुम्हारी
- 42:46प्रोफेसर कहने लग गयी, कोई बात नहीं ले लेके मैं लेके दूंगी
- 42:57बुद्धि तेज है तुम याद कर लेना, बोल देना मैंने।
- 43:02उस दिन मैं रैबिट क्या फ़ोन किया था, कोई फ़ोन नहीं किया।
- 43:13जिसका मुझे फल मिल गया उससे पहले फ्रॉक काटे।
- 43:20मेंढक उसे पहले कॉकरोच काटते ऐसे झज्जा के रख देते प्रदर्शन
- 43:26एक्सिबिशन की तरह ये पंख हैं, इसके पैर हैं, ऐसे अलग अलग रख
- 43:32देते हैं लेकिन वो घट न मेरे जीवन की सर्वोत्तम घट।
- 43:45और वो आधार बनी और वो आधार में आए तत्व में क्या कि किस तरह आधार
- 43:50पैदा कर आधार कैसा विश्वास? बाहर से विश्वास पैदा न करो, बाहर
- 44:02से श्रद्धा पैदा न करो, शास्त्रों को पढ़कर ये मत मानो की परमात्मा
- 44:08है तुम्हारे साथ कुछ ऐसा गठित हो जाये जिंदगी में और जीसको देखिये
- 44:18अब वो इतना विराट है। मैंने आपसे पहले उसके कण के बारे
- 44:24में कुछ भी बताया नहीं जा सकता। कैसे पैदा किया उसने ये
- 44:30इलेक्ट्रॉन बॉटल? बाकी तो बातें छोड़ो।
- 44:37बाकी तो अरबों, अरबों, खरबों, खरबों खरबों खरबों गैलेक्सी है।
- 44:43हमारी मिल्की वे गैलेक्सी के भीतर ही अरबों अरबों खरबों खरबों तारे
- 44:53हम गिना देते हैं। लेकिन हमारा रोवा रोवा।
- 44:58हमारे हलुरे नहीं उठते लू कंडे हम कहते पंजाब में लू कंडे खड़े हो
- 45:03नहीं, ऐसा नहीं, तुम आश्चर्य का भाव नहीं आता हमारे को जब तक
- 45:10तुम्हारे भीतर किसी दृश्य को देखकर अश्चर्य का भाव नहीं उठेगा।
- 45:16तब तक समझो कि तुम योग्य नहीं और उस घटना ने मेरा रोमा रोमा हिला
- 45:22दे। ये कौन था मेरा जीवन भी बचा के और
- 45:29जीवन तो छोड़ो बड़ी बात तो हुई है।
- 45:34कि मुझे उठा के पटक दिया। भीतर जो पैंट शर्ट मैंने डाली थी
- 45:41सब धूल धमास हो गया, बेस बन गया। यहाँ से बाबा नानक के शब्द इतने
- 45:49प्यारे लगने लगे। गर्मी आवे कपड़ा नगरी मोख दवे
- 45:58उसकी नजर के बिना मुक्ति का द्वार निमह तब ठीक है क्योंकि उसकी नजर
- 46:03होगी तो तुम में विश्वास पैदा करेगा।
- 46:06और तुलसी भी लिखते हैं श्रद्धा, विश्वास, रूप नो या व्यायाम बिना
- 46:10न पक्ष वह रूप ही श्रद्धा और विश्वास का है।
- 46:18यहीं से शुरुआत होगी। शुरुआत करने के लिए शास्त्र नहीं
- 46:23चाहिए। शुरुआत करने के लिए गुरु नहीं
- 46:27शायद शुरुआत करने के लिए उसकी कृपा से कृपा प्रसाद, रहमो, करीम
- 46:39अरेहीम बह, कृपा, कृपा निशान, कृपा करे।
- 46:47वहीं से हो जिंदगी की शुरुआत तो नीम इतनी पक्की होगी फाउंडेशन विल
- 46:57बी टू स्ट्रांग? की वो नींव कभी ढाई नहीं जा सकती
- 47:03थी। तुम्हारी नींव तो कभी भी ढाई जा
- 47:05सकती थी। रोज़ मैं बोलता हूँ अब तो आने बंद
- 47:09हो गई। खैर रोज़ गालियां रोज़ नए नए तर्क
- 47:18जो सीखे थे तोतों की तरह वो नजला जो सीखा था मेरे प्यार के शनेक
- 47:23देते। मैंने कहा भाई मैं इस नजर लिखा
- 47:28क्या करूँ? फिर मुझे बाबा ने कहा कि इसको
- 47:33ब्लॉक कर दिया, तुम सिर्फ फ़ोन के लिए बोलो जो सुनना चाहते हैं हर
- 47:3810 और आज वो ही आदमी रहते हैं। जो हृदय से सुनना चाहते हैं, जो
- 47:44कहते हैं और कैसे रहूँ चुपके मैंने पी ही क्या है वो सभी तक है
- 47:59बाकी। और ज़रा सी दे दिशा की और ज़रा सी
- 48:09रहूँ कैसे रहूँ चुपके मैंने पी ही क्या?
- 48:20ओश। अभी तक है बाकी और।
- 48:28ज़रा सी दे दे साखी और ज़रा सी किसे कहते हैं।
- 48:405:05 पर उन्हें पता है के शेड्यूल लगाया पांच पांच पे शुरू हो जाए
- 48:53और इतना शोक होता है तुमने रामायण काल में देखा।
- 48:56रविवार को हम इंतजार किया 8788 में जाए और हम अक्सर कहा करते थे
- 49:07हमारी शहर में गोली चला दो। परले पारसे दौला गेट से चला दो।
- 49:13और थ्री डी गेट को क्रॉस कर जाएगी।
- 49:15बंदा कोई नहीं भरेगा क्योंकि सभी लोग रामायण का स्वादन करें।
- 49:25ऐसा भी जुनून होता है और उस परमात्मा का जुनून इतना ही है।
- 49:34सच्चा जुनून उठाव लोग आते भक्त जलाते स्त्रियाँ आती पुरुष आती
- 49:44टेलीविजन के ऊपर जहाँ प्रसारित होता, फूल मालाएं चढ़ाते फूल
- 49:48अर्पित करते। इतनी श्रद्धा ये श्रद्धा है, ये
- 49:52पागलपन नहीं है, ये श्रद्धा है, पता है रंगीन तस्वीरें हैं पीछे
- 49:59से ब्लड कॉस्ट में, लेकिन उसकी पूजा करते कई लोग आरती करते हैं।
- 50:08थाल से जा के ले के आते पहले छोड़ से प्रचार पूजन करते फिर उसके बाद
- 50:16पता चल जाता कि बस अब वक्त हो गया, अब ऑन कर देंगे आज भी सुनने
- 50:24वाले। लेकिन सुनने वाले वो बिल्कुल वैसे
- 50:28ही हैं जैसे 87 ठाँसी में हम रामायण सुना है, वे नहीं रहे जो
- 50:40कहते कड़वी हैं छी वो कहते हैं और।
- 50:47कड़वी हो, कमिटी हो कड़े लेकिन इसमें कुछ है जो हमें चाहिए और दो
- 50:55दो से अभी आज ही कमेंट पढ़ रहा था और अब 3 घंटे की वीडियो बना दो
- 51:01कृपया। इसी लुक से मोमुक्षु ऐसे होते हैं
- 51:17आज भी है पर बिल्कुल पक्के उतने लोगों के लिए मैं बोलता ही मुझे
- 51:24बोलना ही पड़ता है क्या किया जाए? मुझे घर वाले पूछ रहे थे आज तो
- 51:37कुछ तबियत खराब है, गला खराब है, जुकाम भी है, खांसी भी है, आज का
- 51:44दिन ट्रायल कर दो मत बोलो मैंने कहा वो जो सुबह मुझे 5:05 पर 4:00
- 51:50बजे स्नान ध्यान करेंगे। और बैठ जाएंगे और देखेंगे कि
- 51:55वीडियो आएगी उसका क्या होगा? मैं नहीं चाहता किसी एक की
- 52:00श्रद्धा का भी घाट एक की शर्त एक के लिए भी बोलूं और सच बुछो तो एक
- 52:10के लिए ही बोलना होता है। उस एक के लिए बोलना होता है और इस
- 52:18एक के लिए बोलना होता है जो सुनना चाहता है उस एक के बारे में बोलना
- 52:26होता है जो आनंद स्वरूप है जो प्रसाद रूप है।
- 52:33जो मुक्ति का दाता है, जो रस का खान है, जो अमृत का भंडार है,
- 52:42जहाँ से चलती हैं, फिजाएं, सुगंध लिए हुए हैं और तुम्हारे नशा
- 52:48फूटों को सुगंध मान कर देते हैं। तुम झूम नहीं लगते हो।
- 52:52उस रस को भी तो राम की जिंदगी में मर्यादा थी, लेकिन वह मर्यादा ही
- 53:02उसके लिए गाती बन गई। जी उन्हें गाती क्या हुआ गलत
- 53:07फैसला ले बैठे। इस शर्त में मैं राम को बोला बहुत
- 53:16बोला था और इतनी चालाकी तो हमारे आज के छोटे मोटे एम एलए के बिसरी
- 53:26होती है। तुम तो राजा हो, इतने बड़े प्रदेश
- 53:31के राजा हो, हमारे एमएलए छोड़ो, हमारे तो कमिटी के जो मेंबर हैं,
- 53:37जो हार के उन में भी इतना तो होता है जो जीत गए 19 के बाद छोड़ और
- 53:44तुम तो बिलकुल बोले। तुमने तो अपनी सीता को ही कहती है
- 53:48कि जाओ आप तो कोई बात नहीं, कोई न्याय भी ना हुआ इतना भूल अब इसके
- 54:03लिए भी मन करता है कि इसके चरण। मर्यादा वंदन है ये अंधा मर्यादा
- 54:18है राम भोले अपने भोलेपन के स्वभाव के कारण।
- 54:32अपने सरल स्वभाव के कारण अपने कोमल चित्र के कारण कोमल चित्र
- 54:41अति दीन दयाला। कारण बिन रघुनाथ कृपाल अपनी कृपा।
- 54:49वृद्धि के कारण इतने कष्ट जेले और बिना कारण के जेले ये कोई कारण थे
- 55:00जो कष्ट राम ने उठाया उसका सटीक कारण तो तुम खो ही ना सको खोजो।
- 55:10बताओ बिल्कुल रीती को अगर मानते रीती को माना नहीं पहली बात
- 55:21रीतियां दो थी एक रीती ये थी। प्राण जाए पर वचन है लेकिन राम ने
- 55:30वचन नहीं दिया था। याद रखें राम का तो अधिकार था।
- 55:37सबसे बड़ा पुत्र राजगद्दी पर बैठे है, दशरथ ने वचन दिया था।
- 55:52और राम उसके लिए उत्तरदायी नहीं। मैं आपको यहाँ मर्यादा की बात
- 55:58समझाता हूँ। हाँ बहेल मुझे मार उसका अधिकार था
- 56:11सबसे बड़ा पुत्र था। राजा के राज्य की घोषणा हो चुकी
- 56:15थी। थोड़ी देर में राजा बनने वाला था,
- 56:26मंत्रा ने आग लगा दी। कई कई ने अपने वरदान मांग ली।
- 56:35खैर शुरू से ही गड़बड़ उठा रहा है।
- 56:37जो चाहे मांग लो, मेरे से मांग लो, लेकिन केकेई ने भी दशरथ से
- 56:47क्या मांगा कुछ नहीं मांगा। उसने तो राम से ही मांगा अगर गौर
- 56:53से देखो। दशरथ यही तो पीठ का चला था, मर
- 57:00गया कि देखो मैं पाबंद हूँ इस कलमुही का पुत्र मैं निपटूंगा
- 57:08मेरी करनी मैंने गलत स्त्री को वचन दे दिया।
- 57:14अब वो जाने और मैं नहीं जानू, तुम बीच में मत आओ तुम्हारा तो आज
- 57:20राज़ तिलक होना है तुम अपना राज़ तिलक कराओ वैसे से ये बैठे हैं
- 57:27मैं उनको आज्ञा करता हूँ मैं छोड़ता हूँ गद्दी को।
- 57:33और लक्ष्मण भी सहमत है। लक्ष्मण बड़े समितार्थ थे,
- 57:37आज्ञाकारी से और समितार्थ थे, क्लोधी थे लक्ष्मण कहने लगे नहीं,
- 57:43ये गुंडागर्दी नहीं चलेगी। अगर केके सुत्र है अगर हमारे पिता
- 57:55ने वरदान दिया है तो पालन करें, अपने हिसाब से इससे मांगो जो इसके
- 57:59हाथ में है। दशरथ के हाथ में तो उसी वक्त से
- 58:07ही चला गया था राज्य। जब उसने घोषणा कर दी क्या यह वचन
- 58:12नहीं था? दशरथ ने जब कहा कि राज़ मेरे
- 58:22पुत्र को अब गद्दी मैं छोड़ता हूँ।
- 58:28राजाभिषेक समय निकालो, मैंने गद्दी छोड़ दी, उसने तो उसी वक्त
- 58:36गद्दी छोड़ दी। राजा कहाँ रह रहे हो?
- 58:48राम ने कहाँ वचन दिया था, राम ने तो कोई वचन दिया है?
- 58:56राम का तो हक था, अपना अधिकार लेता और बैठ जाता तो राम सेल्फ
- 59:02मेड पंगे लेते हैं। ये सब कठिनाइयां सब जीतने कष्ट के
- 59:10लिए सही जे राम ने खुद आ बैल मुझे माफ़ आह भला दोहरा कट जा,
- 59:23दुर्भाग्य को। दुष्ट शिक्षणों को जानबूझ कर
- 59:27बुलाना, मौत को न्योता देना जबकि रामपा बंध नहीं थे और दशरथ ने कह
- 59:41दिया था कि राज़ तिलक। मेरे सबसे बड़े पुत्र राम का
- 59:46होगा। क्या यह वचन नहीं था?
- 59:49ये बताओ कुछ और यह रंगुकुल का पुत्र नहीं था, वंश नहीं था दशरथ
- 59:55दशरथ ने जब एक बार जुबान से कह दिया वचन दे दिया के राज़ राम का।
- 1:00:04तो क्या ये वचन भंग नहीं हुआ? फिर के के ने वचन भंग करने की
- 1:00:13चेष्टा क्यों की? दशरथ का उस वक्त?
- 1:00:22ये हक था के वचन भंग करने के आरोप में तुझ को मृत्यु दंड दिया जाता
- 1:00:28है के के गर्दन काट लेती और लक्ष्मण ने कहा।
- 1:00:38दशरथ ने कहा पुत्र मैं वचन दे चुका हूँ, ये भी तो वचन भंग है,
- 1:00:45मैं राजा नहीं रहा, मैंने तो कल से ही राजगद्दी तुम्हें छोंप दी,
- 1:00:50अब वक्त देखकर ये तो वशी से जी जाने के तुम्हें कब आ रूड करना
- 1:00:54है, मैंने तो कल से ही छोड़ दिया। जब से घोषणा की सारे राज़ से पूछ
- 1:01:00लो, आप सारे राज़ में मंगलगान हो रहे हैं?
- 1:01:04सारे रात भर के लोग मंगल गीत गा रहे हैं, भोर भाई से नगाड़े बज
- 1:01:10रहे हैं, नृत्य हो रहा है, संगीत चल रहा है, ये मेरे वचन के कारण
- 1:01:16ही तो हुआ। तो मेरा वचन भंग नहीं होगा क्या
- 1:01:20तो रघु फूल का तो पात्र मैं भी हूँ फिर केकई ने वचन भंग करने की
- 1:01:32चेष्टा की केकई को वचन यह मांगना ही नहीं चाहिए था।
- 1:01:39क्योंकि इसमें कुल का अपमान था, कुल की मर्यादा भंग होती थी और
- 1:01:46मर्यादा को भंग करने की चिष्ठा के कारण के के को मृत्युदंड सुनाने
- 1:01:55का हक था। और लक्ष्मण थोड़े से उपद्रव कहते
- 1:02:06हैं इसलिए नहीं मानता कि तू सुन्दर है और तेरे को वचन दिया।
- 1:02:15बड़े भाई का हक है राम का और पिताश्री घोषणा कर चूके हैं।
- 1:02:20सारा राज़ सारी अयोध्या नाच रही है तुमने वचन भंग किया है, यू शुड
- 1:02:28बी पनिष्ठ तुम्हें दंडित होना चाहिए और भगवान राम से कहा दशरथ
- 1:02:36नहीं कि मुझे कैद कर लो, मुझे गिरफ्तार कर लो।
- 1:02:42क्योंकि मैं अपना वचन भंग करने की एवज में गिरफ्तार होना ज्यादा ठीक
- 1:02:47से समझूंगा। तुम तुम वनवास जाके मेरा वचन भंग
- 1:02:52करोगे। अयोध्या वासियों की नजर में मेरा
- 1:03:00वचन भंग हुआ कि नहीं हुआ? मैंने कहा राम राजा बनेंगे, कहा
- 1:03:05बने राम तो बनवासु मुझे लगे लेकिन राम बोले वही मैं कहती हूँ।
- 1:03:18सारी जिंदगी में इनके भोलापन, इसके कारण मैं इनके पान सुनता
- 1:03:23हूँ, उनकी इनोसेंस, इतने मासूमियत, बच्चे की तरह।
- 1:03:37इनका भोला स्वभाव मेरे हृदय को खेच लेता है, प्रेम से परिपूर्ण
- 1:03:43करता है, आँखों से अश्कर छलके जाते हैं, इतना सीधा व्यक्ति, सरल
- 1:03:51व्यक्ति। ये पूजनीय है इसलिए नहीं कि
- 1:04:00इन्होंने पालन किया। ये पूजनीय इसलिए हैं कि ये
- 1:04:04इनोसेंट जस्ट लाइक ए चाय बच्चे के सामान के मासूम।
- 1:04:13इसलिए पूजनीय हैं इतने बलवान होकर इतने कीर्तिमान होकर इतने गुण
- 1:04:22ज्ञानी होकर जिसने योग वशिष्ठ का पूरा।
- 1:04:28अध्ययन ही नहीं किया हो उसको गुण लिया हो।
- 1:04:33ऐसा व्यक्ति इतना सरलचित रखता है। बस मैं इस बात के ऊपर कुर्बान
- 1:04:41हूँ। यही कारण?
- 1:04:47उसके चरण को चूमने को बाध्य करता है।
- 1:04:50अच्छा इसी कारण मैं भी बस हुआ कि राम का रोल मैं कर दूंगा और 1996
- 1:05:01से शुरू किया 2010 तक। मरिया दो रामलीलाएं होते थे।
- 1:05:12कभी वो ले जाते, कभी ये ले जाते आप, इस बार तो हमारी रामलीला में
- 1:05:16रोल करो। इस बार आप हमारी राबता को खैर राम
- 1:05:23जी का चरित्र। किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं,
- 1:05:31बड़ा सरल क्षेत्र है। कोमल कृपा ने निधन है वो दयालु,
- 1:05:42दूसरे का अहित नहीं चलती। रावल ने कितना भी बड़ा कुकृत्य कर
- 1:05:48दिया हो, लेकिन दो बार दूध बहते हैं, बार बार दूध बहते हैं,
- 1:05:52हनुमान जीके रूप में भेजते हैं, फिर अंगद के रूप में भेजते हैं।
- 1:05:58शक्ति रखते हुए भी वार्णिक दे देना शत्रु को कि देखो समझ जाओ
- 1:06:04जिंदगी रह जाएगी। नहीं तो युद्ध में तुम्हें पता है
- 1:06:09कोई नहीं जीता होता। दोनों पक्षार्थ हैं और रामेश्वरम
- 1:06:16में जब शिवलिंग की स्थापना होती है।
- 1:06:22तो वहाँ ब्राह्मण के द्वारा कराई जाती है, लेकिन राम जो है राम तो
- 1:06:27क्षेत्रीय है। ब्राह्मण तो वहाँ कोई भी नहीं जब
- 1:06:32वैद्य ज्ञानी हो, जो विधि विधान से पूजन कर सके, ऐसा कोई भी
- 1:06:39व्यक्ति नहीं। तो किसी ने कहा कि आप ऐसा करो
- 1:06:44रावण रावण को बुलाना ज़रा भी उत्पात नहीं मच रहा।
- 1:06:56ये तो विरोधी खेमे का है, ये तो दूसरी पार्टी का है, विपक्षी का
- 1:07:00है नहीं। उन्होंने कहा ठीक रावण को पूरा
- 1:07:05रावण अपने पुष्पक विमान में सीता को साथ लेकर आया।
- 1:07:13इतने वर्षों के बाद यानी वर्ष भर के बाद करीब राम ने सीता को देखा।
- 1:07:21और सीता पर ये पाबंदी थी कि तुम मेरे पास बैठोगी और तुम उसके वाम
- 1:07:29अंग में बैठोगी क्योंकि अर्धांगिनी हो, लेकिन तुम्हारी
- 1:07:37निगाहें नहीं रहेंगी। विश्वास देखिये, प्रेम देखिये
- 1:07:44सरलता देखिये ये सभी चीजें सीखने योग्य इसको अनुशासन कहते हैं।
- 1:07:53मर्यादा मर्यादित शब्द बांधता है। अनुशासन, बांध, अनुशासन शब्द
- 1:08:01ज्यादा बढ़िया है। मर्यादा शब्द एक बंधन की तरह रखता
- 1:08:07है। मर्यादा बांध मत लेना किसी भी
- 1:08:10चीज़ के मर्यादा में मत बंध लेना रीती में मत आ जाना।
- 1:08:14अगर तुम्हारे कुल में कोई रीती चल रही है, वो तुम्हें गलत लगती है,
- 1:08:18उसको तोड़ देना ये बंधन है समाज में कोई रीती चल रही है, तुम्हें
- 1:08:22गलत लगती है उसको तोड़ देना ये बंधन है कानून को छोड़कर जो चीज़
- 1:08:29तुम्हें बांधने की कोशिश करती है। वो अगर ठीक नहीं लगती है तुम्हें
- 1:08:35तो तोड़ देना मेरे एक एक शब्द को ठीक से समझ परिपूर्ण होश के तल से
- 1:08:43बोलता हूँ परिपूर्ण होश का तल जहाँ ज़रा भी मोर्चा नहीं।
- 1:08:53समाज की कोई भी चीज़ अगर तुम्हें खटकती है कि ये ठीक नहीं है, बंधन
- 1:08:59का कारक है, तो बिलाशक उसको निसंकोच उसको तोड़ देना।
- 1:09:05वो समाज की हो तुम्हारी कुल की हो, वो तुम्हारी घरानी की हो।
- 1:09:17रावण आया कुछ को मन सीता साथाई राम जी हुई जानते थे बिना स्त्री
- 1:09:24के संपूर्ण नहीं, सीता बामंग में बैठ गई राम जी उठे।
- 1:09:35रावण के पांव छुए पुरोहित के तो पांव छु नहीं होते।
- 1:09:40यह जमान हमेशा पुरोहित के पांव छूता है और आशीर्वाद देता है और
- 1:09:46देखिए यहाँ आकर तुम्हारी आँखों से पानी आएगा।
- 1:09:54अस्क दुपके रावण को जीतने के लिए रावण को मारने के लिए सीता को
- 1:10:03वापस लेने के लिए लंका विजय के लिए यह सुशोभित किया जा रहा है।
- 1:10:12शिवलिंग की स्थापना? आज भी है रमेश और जब राम जी रावण
- 1:10:23के बांव हाथ लगाते हैं पुरोहित के तुम।
- 1:10:35यहाँ थोड़े भाव बिहवर कुछ रावण क्या कहते हैं विजय भाव?
- 1:10:58विजयी भवः यशस्वी भवः आशीर्वाद तक देके बैठ जाते और रावण का
- 1:11:10आशीर्वाद उस तल पर पहुंचे व्यक्ति का आशीर्वाद।
- 1:11:14बड़ा काम करता है। तुम ये मत समझना के राम ने अपनी
- 1:11:18अस्त्रस्त्र विद्या से जीता। यह जीता गया सही पूछो तो कारण बना
- 1:11:25उसका असर जीता गया रावण के उस वरदान से।
- 1:11:31जो चरन स्पर्श किये राम ने अगर वो ना करता तो वरदान न देता इस्रि
- 1:11:38मैं तुमसे कहता हूँ, कोई शुभ काम करने जाना हो तुम्हारे तुम्हारे
- 1:11:43बुजुर्गों से माँ बाप से दादा दादी से बनती हो मनभेदन मतभेद हो
- 1:11:48तुम्हारे लेकिन जाते वक्त। उनसे आशीर्वाद जरूर लेकर जाना
- 1:11:55उनके पांव को उनके भीतर से जो आशीर्वाद उठेगा बड़े बुजुर्ग कभी
- 1:12:01दुरूशीष नहीं दिया करते। जो बड़े बुजुर्ग दुरूशीष देते हैं
- 1:12:06वो बुजुर्ग कहलाने के योग्य नहीं होते।
- 1:12:10उनको काट देना ही अच्छा होता है। फिर कृष्ण बन जाना बड़े बुजुर्गों
- 1:12:16के भीतर अपने छोटों के प्रति सदग कल्याण की भावना रहती है और जब भी
- 1:12:21जाना। किसी शुभ काम के लिए, किसी बड़े
- 1:12:24काम के लिए अपने बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर जाना।
- 1:12:28तुम्हारे मतभेद हैं तो कोई बात नहीं, वो बाहर रहने दो, आशीर्वाद
- 1:12:32काम पड़ेगा तो मतभेद तो सो हैं रावण में और राम में बहुत बड़ा
- 1:12:40मतभेद है। लेकिन राम ने बताया है रावण के
- 1:12:45पुष्प के वन से आ गया और काम भी बता दिया और काम बता दिया।
- 1:12:50रावण को पता है क्या क्या सामग्री चाहिए और उसे ये भी पता है के आस
- 1:12:54पास कोई दुकान नहीं देखिए। उनकी विशालता दिखी।
- 1:13:03लंका से सारा समग्र सामान लेके आता है हवन का सारा सामान पूजा का
- 1:13:10उसे पता है कि आसपास दुकान थोड़ी है यह तो समुद्र ही समुद्र है,
- 1:13:15कोई दुकान तो किसी ने करते ही नहीं कोई सारा सामान लंका से लेके
- 1:13:20आते है पूजा। कि पूजन करूँगा।
- 1:13:27भगवान शंकर का पूजन करूँगा। अब आसन करूँगा शोर शुभचार पूजन
- 1:13:33करूँगा वेदों में वर्णित क्योंकि रावण्य तो वेद ही पड़े थे।
- 1:13:40वेदों के हिसाब से रुद्रभिशेक पूजा होती है, उसमें रुद्रभिशेक
- 1:13:47भी होता है और सारे कर्मकांड होते हैं।
- 1:13:53वेदों के हिसाब से रुद्रभिशेक करना तो उसमें सामग्री बहुत चाहिए
- 1:13:57होती है। और रावण जानते हैं अच्छी तरह से
- 1:14:02के राम जी किस लिए कर रहे हैं ये मुझे जीतने के लिए, मुझे मारने के
- 1:14:08लिए, लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए, सीता को वापस लेने के लिए
- 1:14:15और उनका मंतव्य शुद्ध है। तो सारी सामग्री लेके आते और
- 1:14:25बिधिवती सारी बात न करवाती। बिधिवती हो गया जब सीता को वामंध
- 1:14:31में बिठा दिया यही एक कमी रहती वो रावण ने खुद ही पूरी कर दी।
- 1:14:40सामग्री के साथ पूरी विधि विधान के साथ सारा पूजन किया।
- 1:14:45पूजा संपन्न। पूजा संपन्न हुई।
- 1:15:00पूजा के बाद दक्षिणा देनी थी। दक्षिण तो कोई थी ही नहीं।
- 1:15:08सीता के पास एक अंगूठी थी, वह दे नहीं सकती थी क्योंकि सीता।
- 1:15:19इस वक्त रावण के अधिकार क्षेत्र में थी तो राम कहने लगी, राम बोले
- 1:15:31हे ब्रह्मदेव तुम्हे दक्षिणा देने हेतु मेरे पास।
- 1:15:36पदार्थ तो है नहीं मिला अच्छा अब दक्षिण का क्या खेल है?
- 1:15:52रावण वैद्य ज्ञानी ये बात सुनने वाली कभी सुनी नहीं होगी तुम।
- 1:16:02रावण कहने लगे हैं यह जुबान दक्षिणा दी नहीं जाती रावण कहते
- 1:16:12हैं दक्षिणा मांगी जाती है जैसे मेरे पिता ने।
- 1:16:19भगवान शंकर से यह दक्षिणा मांगी थी लंका जो कि शेबो और पार्वती ने
- 1:16:28अपने लिए बनाई थी तो भोजन के उपरांत मेरे दादा ने पलस्त ऋषि
- 1:16:36ने। भगवान शंकर से दक्षिणा मांगी थी
- 1:16:41दक्षिणा दी नहीं जाती दक्षिणा मेरे मान माता के तुम्हें देनी
- 1:16:47पड़ेगी वचन दीजिये रम कहते हैं कल्याण मस्तो तथास्तो बोलिए।
- 1:16:55क्या मांगते हो यज पुरोहित तो रावण ने जो मांगा वो सुनकर
- 1:17:11तुम्हारे भी नेत्र छलक जाएंगे। रावण कहने लगे, हेरान मेरे जीते
- 1:17:21जी मेरा बल देखो, मेरा सूर्य देखो मेरा पराक्रम देखो, मेरी जिद्द
- 1:17:29देखो। कि तुम लंका में पांव नहीं रख
- 1:17:33सके, मैं तुम्हें अपने घर में प्रवेश नहीं करने दिया मेरे जीते
- 1:17:38जी, लेकिन मैं तुमसे दक्षिणा में यह मानता हूँ।
- 1:17:52कि मेरे हनन के बाद मेरी मृत्यु के बाद तुम मुझे अपने धाम में
- 1:17:59प्रवेश करने की मुझे अपने धाम में बसा लेना।
- 1:18:14मेरे प्राण त्याग के पास मैंने जीते जी तुम्हें लंका में प्रवेश
- 1:18:19ने उन्हें दिया, लेकिन तुम अपने जीते जी मुझे अपने दाम में प्रवेश
- 1:18:23करने की अनुमति देते हो। यह मेरी दक्षणा संपूर्ण है।
- 1:18:32रामनेखा कल्याण वस्तु एवं वस्तु ऐसा ही हो, यही रावण के कारण राम
- 1:18:44धरेव न पांव लंका में पांव नहीं रख सका।
- 1:18:49रावण के होते हुए। जही रावण के कारण राम धरेव न पांव
- 1:18:55रामलंका में पांव नहीं रख सकते तही राम के होत में रावण चलेओ
- 1:19:06निज। राम हैं।
- 1:19:24राम उसके धाम में जाने से रोक नहीं सकते हैं, वचनबद्ध हैं जो कि
- 1:19:35भी है। रावण राम के होते हुए उसके।
- 1:19:50धाम में प्रवेश करते हैं। हरे रामा रामा, हर हर हर रामा।
- 1:20:11हरे राम रामा राम हर हर हर कृष्णा।
- 1:20:32हरे कृष्ण, कृष्ण, कृष्ण, हर हरे हरे रामा।
- 1:20:49हरे रामा रामा हर हर हर। धन्यवाद।