Latest / Baba ji Vijay Vats / 1 Jan 26 - NO MIND का रहस्य | क्षणिक vs स्थायी नो-माइंड | एनलाइटनमेंट का सच देश, काल, परिस्थिति | imp.
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- 0:16दिव्य प्रभा न्यू यॉर्क से बाबा।
- 0:42प्रश्न बड़ा महत्वपूर्ण है और ये प्रश्न मुझे दशकों से उलझाये खड़ा
- 0:55है, मैं करीब 50 साल की हूँ, न्यूयॉर्क में रहती हूँ।
- 1:13किसी व्यक्ति को बुद्ध के पास, किसी को महावीर, पातंजलि, किसी को
- 1:25मंदिर, गुरुद्वारा, चर्च, अमशित। किसी को किसी गुरु के पास किसी को
- 1:36आपके पास भी होते होंगे। मुझे आपके पास हुआ है, फिर क्या
- 1:51आप में ज्यादा खासियत थी? मुझे आपके पास आके वो सुकून मिला
- 2:01जो बरसों तक मुझे कहीं नहीं मिला, फिर लोग कहीं श्याम बाबा, कोई
- 2:12सालासरधाम और तो और छोड़ो। लोग नदियों तक को गुज रहे हैं।
- 2:25ये सब क्या है बाबा इस ऐसे से पर्दा उठाइए कृपा करके।
- 2:36पतंजलि का एक बड़ा शानदार सूत्र है योगा यित व्रती नरोदा।
- 2:49बहुत से विद्वत जनों ने इसके बड़े बड़े अर्थ किए हैं।
- 2:56लेकिन इसका असली अर्थ ही ये है जो तुमने।
- 3:07चित की व्रतियों से जब तुम टूट जाते हो, पार हो जाते हो चित की
- 3:16व्रतियों से जब तुम छिटक जाते हो परे।
- 3:25तो योग हो जाता है। उस विराट में जीसको कोई परमात्मा,
- 3:33कोई अल्लाह, कोई गॉड कह के पुकारना है।
- 3:39योगाश्चितवृत्ति नरोदा चितवृत्तियों से निरोध टूट जाए,
- 3:53चिप का हठ टूट जाए। डेमोरिशन ऑफ क्रिंगनेस शिप कहत
- 4:12टूट जाए, ध्वस्त हो जाए, मट जाए तो उसको योग कहते हैं।
- 4:20योग? परमात्मा से मिलन का नाम है योग,
- 4:30उस आनंद में चले जाने का नाम है किसे?
- 4:36कृष्ण मय कहते। योग उस दशम में पहुँच जाने का नाम
- 4:46है जिसे बाबा उक्मी कहते हैं। नानक, जिसे कबीर सोरती कहते हैं।
- 5:07प्रश्न बड़ा गजब का पूछा पुत्री तुने और ऐसे प्रश्न हिंदुस्तान के
- 5:16लोगों से मैं उम्मीद नहीं रखता क्योंकि बाहर के लोगों पर आज।
- 5:27शरीर के पालन पोषण का निर्वाह नहीं है।
- 5:31बोझ नहीं है दिमागों पर यह बोझ नहीं सुबह उठ के कि हमने
- 5:42रोज़मर्रा की। अपने बाल बच्चों की पर वर्ष के
- 5:48लिए धन जुटाना है बाहर के मुल्कों में यह होने लगा है।
- 6:02जीस मुल्क से तुमने यह प्रश्न पूछा वह मुल्क का अमीर मुल्क है
- 6:09जो कोरोना काल में चिंदा मांगता नहीं, वरना तुम्हें घर बैठो को
- 6:17तुम्हारे पोषण पालन के लिए खर्चा दिखता है?
- 6:22अनन्या चिंतन तो मान के जनह पर वास्तव तेशाम नित्यभुक्ताना योग
- 6:29शमाम बाहम यह है आज अमेरिका की प्रस्तुति।
- 6:36इसलिए लोग अमेरिका में भागना शुरू हो गए।
- 6:41इसलिए अमेरिका ने वहाँ से इनको भगाना शुरू कर दिया।
- 6:57एनलाइटनमेंट की घटना का देशकाल और परिस्थितियों से ज़रा भी।
- 7:12तो किस्से संबंध है, बाबा चित्त की वृतियों से दूर छिटक जाना
- 7:23ऊनोमनी अवस्था में चले जाना। मन से दूर हो जाना, मन को पार कर
- 7:29देना इससे संबंध है चित्र के वृत्तियों से संबंध है, ना के
- 7:37बाहर की परिस्थितियों से संबंध है और तुम पर डिपेंड करता है।
- 7:49तुम चाहो तो अभिमुक्त हो सकते हो, लेकिन आपके पास आकर मुझे क्यों
- 7:58हुआ? मैंने वृंदा बन गई बहुत जगहों की
- 8:05खापछनी हिमालयों पे। बरसों से जो धुनी जमाए संत उनके
- 8:15पास में कहीं कहीं कुछ नहीं मिला। आपके पास क्यों है?
- 8:27हम्म परसेंट ठीक। जड़ मूर्ति के पास जाओगे तो जड़
- 8:39मूर्ति के पास सिर्फ तुम्हारी आस्था काम करेगी और मैंने पिछले
- 8:45ही प्रवचन में तुलसीदास के प्रवचन में कहा कि तुलसीदास आधे सत्य
- 8:51हैं। आधे सत्य का भी उन्हें पता।
- 8:57तुम श्रद्धा लिए तो जाते हो लेकिन मूर्तियों से वह प्राण ऊर्जा
- 9:05विकिरण नहीं होते तो मार्ग नहीं मिलता तुम्हे श्रद्धा परिपू में।
- 9:12यहाँ आगे मार्ग मिल जाता है। यहाँ वह कंडीशनिंग पूरी हो जाती
- 9:18है। 50% तो आप में ही है और 50% मैं
- 9:26उड़ेल देता हूँ 100% हो गया। और आप उस उनमनी नो माइंड, नो
- 9:38माइंड का सही अर्थ है? मन की वृत्तियों से पार हो जाना,
- 9:44मन की वृत्तियों से दूरी बना लेना।
- 9:47योगाश चित्रवृत्ति नरोध। तो योग होता है तो मिलन होता है
- 9:53तो ईद मनते हैं देश काल परिस्थितियों पर ज़रा भी निर्भर
- 10:08है। सोचिए तुमने मेरी एनलाइटनमेंट की
- 10:14वीडियो जो सुनी होगी बताये। ज़रा सोच ये पल भर के लिए।
- 10:33मेहमान यहाँ मालूम नहीं मंजिल है कहाँ पल भर के लिए।
- 10:52मैं मानु यहाँ मालूम नहीं मंजिल है कहाँ पल भर के लिए।
- 11:12अगर ओशो ये बात कह गए के मेरे जाने के बाद जीवंत गुरु को तलाश
- 11:19कर लेना तो उसका यही कारण था अब तो मैं हूँ।
- 11:29ओशो कहते हैं अब तो मैं हूँ। ईमानदार है।
- 11:35ऑनेस्ट प्रश्न बुद्धत्व को उपलब्ध हुआ व्यक्ति ऑनेस्ट होता है
- 11:42महात्मा गाँधी इतने ऑनेस्ट क्यूँ हो गए थे कि सत्य के प्रयोग अपनी
- 11:46कमियां किताब में लिख डालें? जिन्हें तुम छुपाना चाहते हो।
- 11:55बस इसका अर्थ ये है कि तुम ऑनेस्ट नहीं हो, ईमानदार नहीं और बेईमान
- 12:02छिपाने के लिए तुमने मीडिया रखा हुआ है।
- 12:10और तुम सिर्फ अपनी कमजोरियां ही नहीं छुपा रहे हो जाने अनजान तुम
- 12:16अपने आनंद को भी बता रहे हो के आया नहीं, चाहे जनता ने मुझे पीक
- 12:26सिंहासन दे दिया। लेकिन आनंद नहीं आया।
- 12:29मुझे सुख नहीं मिला, तृप्ति नहीं आई ज़रा सोंची जीस दिन मुझे
- 12:40एनलाइटनमेंट हुआ 28 अक्टूबर 1985 को रात शरद पूर्णिमा की वो रात।
- 12:52अगर मैं कहीं और होता गौशाला मंत्र ना गया होता गौशाला मंदिर
- 13:01पर मैं सीधी सड़क पे जाके दायें हाथ न मुड़ा होता और फिर दायें
- 13:08हाथ न मुड़ा होता फिर बाएं हाथ न मुड़ा होता।
- 13:11जहाँ शाम ने बोना वृक्ष था और नीचे ईट रखी थी।
- 13:17अगर कहीं और होता तो क्या मुझे एनलाइटनमेंट नहीं होता?
- 13:28नहीं पुत्री मुझे एनलाइटनमेंट फिर भी होता, उस स्थान कुछ और होता।
- 13:39बस फिर जो अमृत बरसना था, जो मेरे ऊपर छलका, जो मैं पी गया और कुछ
- 13:49ऐसा जो मैं पी ना सका छिटक गया बाहर गगगग्या भर जाती है।
- 14:01फिर जो और ऊपर से गगन मंडल से जरा करता है, वह बिखरा करता है तो आज
- 14:10भी यह शहर पवित्र हो गया उनके से। तो मैंने आपसे कहा कि 1 दिन गिलड़
- 14:21वह क्षेत्र तीर्थ हो जाएगा तो इसी बात के लिए कहा जैसे बोधिवृक्ष के
- 14:31नीचे। एनलाइटनमेंट और बौद्ध ही वृक्ष आज
- 14:36पूजनीय हो गया। उषा को एनलाइटनमेंट हुआ वह वृक्ष
- 14:45पूजनीय हो गया। जीस चीज़ को जहाँ एनलाइटनमेंट हुआ
- 14:54वो स्थान पूजनीय हो गई। इसलिए नहीं कि वो स्थान पवित्र है
- 15:01नहीं, अगर मैं किसी और स्थान पर होता उस वक्त यह घटना तो चित के
- 15:07साथ संबंधित है। मैं नो माइंड की अवस्था में सदैव
- 15:14के लिए पहुँच गया। थोड़ा ध्यान से सुन नो मैएंड की
- 15:26अवस्था में सदा के लिए पहुँच गया और ऐसा पहुंचा कि फिर मैं नो
- 15:33मैएंड की स्थिति से बाहर आई नहीं हो सका।
- 15:37यह संपूर्ण एनलाइटनमेंट है। अब तुम्हारे प्रश्न का जवाब सुनो
- 15:45पुत्र तुम फर्ज करो कि उस वक्त में खाटू शाम होता है इत्तेफाकन
- 15:56या कोई किसी कारण। मुझे कोई मित्र कह देता, कोई
- 16:04परिवारजन कह देता कि चलो हम चलते हैं वहाँ आप भी बैठ जाओ तो मैं
- 16:12वहाँ तो ये घटना। चित्त की वृत्ति का नरोद की ये
- 16:19घटना खाटू शाम होती है। मेरे लिए वो स्थान पूजन ही लेकिन
- 16:36जो क्षण भर के लिए नो माइंड हो जाते हैं।
- 16:43कोई साला घर में नो माइंड हुआ क्षण भर के लिए तो दो तरह के नो
- 16:50माइंड होते हैं एक तो पल भर का नो माइंड, एक श्रद्धा के लिए नो
- 17:00माइंड हो जाना। पल भर के लिए नो मैडम कहीं भी हो
- 17:10सकता है बाबा नानक मोदी खाने में व्यापार करते करते तकड़ी हाथ में
- 17:23है तराजू? 1212131313 में हो चुका है।
- 17:31सटोरी की घटना को नो माइन क्षणिक कहते सदैव के लिए नहीं परमानेंटली
- 17:41नहीं क्षणभर के लिए बिलकुल वही घटना आती है।
- 17:47चीत की वृत्ति के साथ निरोध हो जाता है चीत की वृत्ति के साथ तुम
- 17:52छिड़क जाते हो पार पल भर के लिए और तुम्हें बड़ा आनंद आता है यही
- 18:04संभव कि। घटना में होता है इसलिए तुमसे पक
- 18:08जाते हो, बार बार संभोग के उन क्षणों को चखना चाहती हूँ कोई
- 18:18सालासर में नो माइंड हुआ एक पल भर के।
- 18:21कोई खाटू शान में हो कोई हरिद्वार ऋषिकेश में कोई काली मठ में हो
- 18:31कोई कोई व्यक्ति किसी किसी स्थान पर भी हो सकता है कभी कभी नो
- 18:37माइंड की स्थिति में और जो कहीं भी कभी भी।
- 18:43नो माइंड की स्थिति में नहीं उपलब्ध हुआ।
- 18:47वो मार्क का सो जाता है। वो कहता है नहीं कुछ नहीं सारी
- 18:53चीजें मैं बराबर खोल रहा हूँ तुम इसको ध्यान से अपने अंत में उतरने
- 19:00देना। अपने आपको कलेश छोड़ देना, इन
- 19:04हवाओं के लिए तुम रास्ता मोहिया करना कि मेरे ये आनंद के घूँट
- 19:13आपके गले से नीचे उतर पाए। नो माइंड की अवस्था अगर किसी
- 19:25विशेष स्थान पर घटती है। आपकी कोई इच्छा थी यहाँ आकर पूरी
- 19:33हो के आपकी कोई इच्छा थी? आचार्य प्रशांत के बादशाह की पूरी
- 19:41हो गई। बाबा बागेश्वर के बादशाह की पूरी
- 19:44हो गई। यहाँ तक कि गंगा नदी के पास जाकर
- 19:50पूरी हो गई किसी विशेष स्थान पर जाकर पूरी हो गई।
- 19:57और ये तो छोड़ो। लोग थपेड़ों से चिपके जाते हैं,
- 20:00किसी जांड के साथ किसी पीपल के साथ किसी धरती विशेष के साथ जहाँ
- 20:08भी तुम्हें वह घटना हुई तुम वहाँ एक बड़ा आनंद अनुभव करते हो पल भर
- 20:16के लिए। लहर के लिए मेहमान या मालूम नहीं।
- 20:43पल भर के लिए लेकिन ये पल भर के लिए होता है लेकिन चित चित।
- 20:58चिपक जाता है जरूर ही इस दान में कुछ होगा जो मुझे ऐसा कुछ होगा।
- 21:07मैं नहीं चिपका उस स्थान के साथ, क्योंकि बुध जानते हैं।
- 21:19कि जगह का ज़रा भी विशेष महत्त्व नहीं है, महत्त्व है।
- 21:28असली महत्त्व तो ये है कि मेरी चित्त की वृतियों का।
- 21:34से दूर छिटक गया में यह मेरी चित्त की वृत्तियों को निरोधता का
- 21:42परिणाम था ना कि किसी स्थान विशेष का परिणाम था।
- 21:49अब मैंने देखा जहाँ बहुत से लोग दंड पीपल वट वृक्ष, तुलसी का पौधा
- 21:57इनसे चिपते बैठे इनमे खासी भी है। औषधि की तरह कभी किसी की मंशा
- 22:17खाटूश्याम के पास हो रही हो। सालासर।
- 22:21मेहंदीपुर में पूरे हो गए गंगा, यमुना, सरस्वती, कावेरी,
- 22:29ब्रह्मपुत्र किसी नदिया के पास हो गए।
- 22:33किसी तीर्थ में गए थे अमरनाथ, केदारनाथ, बद्रीनाथ।
- 22:39महा तुम्हारी मनो इच्छापूर्ण होगी तो यह मोरू का मन चिपक जाएगा उस
- 22:49स्थान के साथ क्योंकि अभी तुम अशुद्ध हो।
- 22:58अभी तुम शुद्ध नहीं हो और जब तुम चुपके जाओगे, मूर्तियों के साथ
- 23:09किसी की मूर्ति के साथ वो मूर्ति चाहे कोई भी चाहे।
- 23:14गणेश की थी काली दुर्गा, सरस्वती, हनुमान कोई भी थी वहाँ आपकी इच्छा
- 23:24पूरी हो गई तो आप उस मूर्ति से चिपक गए, तुलसीदास राम की मूर्ति
- 23:33से चिपक गए। इसलिए किशन के आगे सिर झोंकने से
- 23:38इंकार कर दिया। कारण कारण तुलसीदास को भी समझने
- 23:47इसलिए मैं तुलसीदास को मुर्ख कहता हूँ आदा सत्य वो जानते हैं कि
- 23:56मेरी सरदा से हुआ। आधा सत्य उन्हें पता नहीं कि
- 24:02श्रद्धा के बाद मार्ग भी तो होता है।
- 24:09एनलाइटनमेंट के दिन 28 अक्तूबर 1985 के तय था दिन रात 8:30 बजे
- 24:16के करीब। अगर मैं इस मोड़ पे ना गया होता,
- 24:21किसी अन्य मोड़ पे गया होता तो वह मेरी घटना निश्चित आज दी।
- 24:28इवेंट्स आर प्री डिटरमाइन्ड सभी घटनाएं पूर्व निश्चित।
- 24:39कहाँ घटेंगी? यह निश्चित है।
- 24:44अगर मैं उस दिन कहीं और गया होता, वहाँ भी ये घटना घटती है, लेकिन
- 24:56वह पवित्र क्यों हो जाता? वह बरसा।
- 25:00पूर्ण बरसा और वह कितना वृहद है कि तुम उसका नापतोल भी नहीं कर
- 25:05सकता, तो सारा तो कोई भी नहीं पी सकेगा, न कबीर ना नक न रहदास न ही
- 25:14मैं पी पाया। सारा नहीं पी पाए तो क्या होगा?
- 25:20बाकी बिखर जाएगा तुम जितना पी सकते हो, पी सकते हो।
- 25:28बाकी बच गया। पात्र तो बहुत है, इसमें तो पूरे
- 25:31में से पूरा भी निकाल लिया जाए तो पूर्ण ही शेष बचता है।
- 25:37पूर्णस्य पूर्ण मादा ही पूर्ण मेवा विशेष थी तो वह बिखर जाएगा।
- 25:46उस स्थान को तीर्थ कहेंगे हम इसलिए वर्षों से हम हर की पूड़ी
- 25:53के ऊपर दीपक जलाये चले जाते हैं। मनोस्थिति को बदलने की ज़रा भी
- 25:58श्रेष्ठ नहीं करते। आज पागलों की किताब लगी है हर की
- 26:03पूड़ी के ऊपर बस चित्र को नहीं बदलते यह रास्ता नहीं पता उन्हें
- 26:12श्रद्धा का पता है। जी कभी मुक्त ना हो पाएंगे
- 26:18क्योंकि आधे रास्ते अध जल गगरी छलकत जाए।
- 26:23फिर अहंकार आएगा, मैं पुजारी हूँ, मैं रोज़ गंगा की आरती करता हूँ।
- 26:30यह उनके लिए अहंकार बन जाएगा और अहंकार ज्यादा खतरनाक है।
- 26:45योगा चित्तवृत्ति नरोधा को हिंदी अंग्रेजी में अगर रूपांतरित किया
- 26:51जाए तो उसको कहेंगे नो माइंड की अवस्था स्टेट ऑफ नो पॉइंट
- 27:00चित्तवृत्तियों से दूर छिटक जाना। चित्तवृत्तियों से दूर छिटक जाना,
- 27:11बार बार बोल रहा हूँ, चित्तवृत्तियों से दूर छिटक जाना,
- 27:18हट जाना विचारों से पार। भावनाओं से पार योगास योग हो गया
- 27:30चित्तवृत्ति नरोदा चित्त की व्रतियों से दो छिटक जाना, क्रॉस
- 27:38कर देना, मनुष्य वृतियों को क्रॉस कर देना।
- 27:52कि तुम कहीं जा रहे हो, किसी धाम में जा रहे हो, मुसलमान मक्का मत
- 28:06देना चाहता। कोई यरुशलम जाता है, कोई कही
- 28:17जाता, कोई कही जाता आज सिर्फ कर्मकांड रह गए।
- 28:29तुम्हारे पास श्रद्धा तो बहुत है? कुंभ के लिए श्रद्धा है, लेकिन
- 28:41मार्ग देने वाला चेतन कहाँ? नदियों ने भी वो श्रद्धा पी ली।
- 28:51जब कोई संत जब कोई ऋषि मुनि वहाँ पहुँच गया वो दीवारों ने उन
- 29:00किनारों ने उन मिट्टी ने धराने वो सब भी लिया।
- 29:12लेकिन वह चला गया जिसके ऊपर घटना घटी थी।
- 29:18आज उसकी रेंजेस है। तुम श्रद्धा से जाओगे तो वहाँ
- 29:24तुम्हें बड़ा आनंद आएगा। मार्कस अगर वहाँ जाते हैं तो
- 29:28मार्कस को तो उतना भी आनंद नहीं आएगा।
- 29:31चार वक्त को तो उतना भी नहीं आएगा।
- 29:35आपको आधा अधूरा आनंद आएगा क्योंकि आप में श्रद्धा है और वो श्रद्धा
- 29:41का आनंद प्लस उस व्यक्ति की करने संत की ऋषि की, मुनि की।
- 29:49जो वहाँ पहुंचा था वो तरंगें दीवारें पी गईं, धरती पी गईं, वो
- 29:55लगातार विकिरण होती रहेंगी और वो आपको भी छुएंगे और आप ही उससे
- 30:04बड़े प्रश्नचित हो गए। और आके कहोगे बात तो खुश है है
- 30:13बिल्कुल है। मैं श्रद्धा से कहता आया हूँ कि
- 30:18संत व्यक्ति की मृत शरीर को, जिसमें वह 5060, 100 साल 70 साल
- 30:26रहा। उसको किसी एक स्थान विशेष में दबा
- 30:31देना। यह हमारी सनातन की संस्कृति रही
- 30:34है। मैं अपनी कबर पास में ही बना रहा
- 30:37हूँ। क्यों आने वाली पीढ़ियां इसका
- 30:42युद्ध उठा सकें? इसके करीब जब तुम बैठोगे और उसके
- 30:49करीब का मतलब बिलकुल नहीं कि उसके पास ही सट के बैठ जाओगे, दूर तक
- 30:55इसकी दूर तलक इसके गिरने जाएंगे। हजारों फिट के दायरे में इसके
- 31:04करने जाएंगे। और जब तुम इस शहर की बाउंड्री में
- 31:12प्रवेश करोगे, जहाँ तक ये जाती हैं करने तो तुम कहोगे आह बाबा का
- 31:19मुकाम आ गया। बड़ा सुन्दर है यहाँ की हवाएं।
- 31:29बड़ी प्यारी है चित को छूती है आनंदित करती है तेरे दान।
- 31:45से जुआ को सलाम चुनू में। उस जुबां को जीस प्यार तेरा नाम
- 32:14सब से अच्छी सुबह तेरी सबसे रंगी। तेरी शाम तुझे पे दिल कोरबा।
- 32:31किसी को जंड के किसी वृक्ष के पास हुआ होगा वृक्षों घी की तो मैं
- 32:39बात कर रहा हूँ। उस बौने वृक्ष के करीब भरा समय तो
- 32:44वृक्ष का इसमें ज़रा भी कोई योगदान नहीं था।
- 32:49बौद्धि वृक्ष का ज़रा भी योगदान नहीं था।
- 32:53जीस वृक्ष के तले ओशो एनलाइटनमेंट को उपलब्ध हुए ज़रा भी योगदान
- 32:59नहीं था। बस ये घटना घटी और उस वृक्ष ने भी
- 33:03पी ली। यह उसकी महत्त्व है इसलिए वो
- 33:09पूजनीय हो गए। तुरंत एक पल पहले वो पूजनीय नहीं
- 33:13थी। एक पल पहले तो यह शरीर भी पूजनीय
- 33:17नहीं था। एक पल बाद सब कुछ पूजनीय हो गया।
- 33:24यह शहर पूजनीय हो गया। इसका जर्रा जर्रा पूजनीय हो गया।
- 33:32भारत भूमि का ज़रा ज़रा क्यों पूजनीय है?
- 33:37क्यों यह धर्म धरती कहलाती? क्योंकि यहाँ पर ऋषियों, संतो,
- 33:43मुनियों के चरण, राज्य बिखरे पड़े हैं हीरे मोतियों की तरह तुम्हें
- 33:50मालूम नहीं पड़ता तुम आज जर के गुलाम हो गए हो जर।
- 33:59धन कहें तो ध्यान से समझना बेटी तुमको समझाया होगा क्षणिक घटनाएं
- 34:14नो माइंड की जहाँ गति किसी को जंड के के पास किसी को पीपल के के
- 34:23पास। किसी को, किसी तीर्थ स्थान में,
- 34:29किसी को, किसी पर्वतीय क्षेत्र में, मैदानी क्षेत्र में हरे भरे
- 34:33इलाकों में, किसी बिल्कुल राजस्थान के इलाके में यहाँ
- 34:38बिल्कुल मरुस्थल है। कुछ भी तो नहीं है।
- 34:45तो बात स्थान की नहीं है। देश, काल और परिस्थिति की बिल्कुल
- 34:50भी बात नहीं है। इन तीनों को भूल जाओ।
- 34:54क्या वक्त था, कौन सा देश था और क्या परिस्थिति थी, इनको भूल जाओ।
- 35:01बुध को सुबह सुबह होता है। शुक्र जब डूब रहा होता है और
- 35:08महावीर को दोपहर बाद होता है। जब वह अपने आसन पर खड़े हुए बैठते
- 35:13हैं वो दो आसन में आते हैं तो उन्हें हो जाता है।
- 35:20मुझे रात्रि की उस वेला में हुआ। शरद पूर्णिमा के दिन हुआ तो इससे
- 35:25शरद पूर्णिमा पूजनीय नहीं हो गयी। ध्यान रखना भीतर की चित्तवृत्ति
- 35:35से दूर छिटक गया पूर्ण रूप से मैं।
- 35:39योगा चित वृति नरोसा चित की वृत्तियों से बहुत दूर छिटक गया।
- 35:46मैं बहुत दूर, बहुत दूर, बहुत दूर। ुरी
- 35:58चेला बहुत दूर चला गया। चित की वृद्धियों से टूटकर अब तक
- 36:09मैं चित की वृत्तियों का हिस्सा था।
- 36:13मैं चिपका हुआ था, फेविकोल गहरी लगी हुई थी।
- 36:19अब आज टूटा चित की वृत्ति से मेरा लगाव छिटकाब हुआ और टूट के मैं
- 36:27अपने अंत में चला गया और अंत में जाते जाते स्टेच्यू की तरह खड़ा
- 36:34हो गया। इसमें ज़रा भी उन परिस्थितियों का
- 36:37ज़रा भी योगा नहीं नमो वृक्ष नमो बाबा की समाधि, न मंदिर, न
- 36:53दीवारें। अपना स्थान ज़रा भी उनकी अहमियत,
- 37:00अहमियत किस चीज़ की है? अहमियत इस चीज़ की है कि मैं
- 37:06योगाशितवृत्ति नरोदा चितवृत्तियों से मैं छिटक गया।
- 37:16भीतर की चित्त की दशा ऐसी हो गई वहाँ हो गई।
- 37:22बात अलग है, कहीं भी हो सकती थी फिर क्या हुआ?
- 37:28पूजनीय क्यों हो गया? क्योंकि चित्त की व्रतियों का
- 37:32अनुरोध होते ही दूर छिड़कते ही और पूर्ण रूप से दूर छिड़कते ही वह
- 37:38अज्ञात बरसता है, जिसका कोई और छोर नहीं है, जिसका कोई पैमाना
- 37:44नहीं है मापने का और जिसका कोई वजन नहीं है।
- 37:51जिसकी कोई सीमा नहीं, वह बरसा। अक्सर हम कहते हैं समुद्र में बोझ
- 38:02समा गई या आखिरी पड़ाव? लेकिन उस घड़ी में एनलाइटनमेंट की
- 38:08घड़ी में क्या होता है? बूंद पर समुद्र उंडेल दिया जाता
- 38:12है, बड़ी प्यारी घटना है, तो वह सारा पिया नहीं जाता फिर आस पास
- 38:26खंड जाता है बिखर जाता है उंडेल दिया जाता है।
- 38:30सारा नहीं पी सकता कोई व्यक्ति क्योंकि वह इतना असीम है फिर उसकी
- 38:37असीमता है कि क्या हुई अगर तुम सारा पी गए निश्चित ही बार भी
- 38:46करेगा। बाहर बिखरेगा तो वह तीर्थ तो हो
- 38:52गया, लेकिन याद रखना आज मैं भुना वृक्ष के पास नहीं खड़ा हूँ।
- 39:01आज मैं उन ईंटों के पास नहीं ऊपर नहीं खड़ा हूँ।
- 39:06आज वो खेत खलिहान आस पास नहीं है। बाबा धर्मदास की समाधि है सब बदल
- 39:12क्या है ना वो दीवारें हैं पांच पांच फुट ऊंची ना वो गोदाम है।
- 39:24ना वो राही हैं जो वही का रहा जाता था सब बदल गया है।
- 39:30मैंने देखा नहीं खैर मैं गया नहीं हूँ इतने सालों में एक स्थान पर
- 39:38बैठे बैठे मुझे नहीं पता दुनिया बदल गई।
- 39:48अब पुत्री तुम्हारा उत्तर तुम्हें मिल गया होगा, लेकिन मैं थोड़ा सा
- 39:51संक्षेप में बताता हूँ। दो तरह की चित्तवृत्ति निरोध होता
- 40:01है क्षणिक और सथायी। क्षणिक तुम्हें जहाँ भी हो गया,
- 40:13वह मेरे पास हो गया। वह ओशो के पास हो गया।
- 40:19वह कबीर के पास नानक के पास किसी गुरुद्वारा में, किसी गऊशाला में।
- 40:26किसी मंदिर में, किसी चर्च में, किसी घाटू श्याम में सालाधर धाम
- 40:35में, किसी बाबा बागेश्वर के पास और किसी भी व्यक्ति जया किशोरी के
- 40:42पास भी हो गया। ये छोड़ो किसी वैश्य के पास हो
- 40:47सकता है, ये छोड़ो तुम्हें किसी हत्यारे के पास भी हो सकता है।
- 40:56अनिका तारी गणिका तारी तारे सदना कसाई।
- 41:03जी मुझको सितारों तो जानू कृष्ण मरारी तुम कृत्यों से मत देखना।
- 41:13व्यक्ति को यहाँ रत्नाकर वाल्मीकि हो जाते हैं और भगवान राम के
- 41:20बच्चों को परवर्ष देते हैं, शिक्षा देते हैं।
- 41:24यहाँ अंगुली माल पल भर में ब्राह्मण हो जाता है घटनाओं को मत
- 41:31देखो, पुत्र देखो हुआ क्या था अब मैं तुम्हें रस रूप में बताता
- 41:42हूँ। इसलिए उपनिषदों में ये शब्द आता
- 41:46रसोवैसा बहरहस इतना स्वाद भरा उसने कि तुम्हारी जीवा उसका
- 41:56व्याख्यान कर कैसे पाएगी और व्याख्यान करेगी तो नीर से नीरस
- 42:01सा होगा। उजड़ा उजड़ा सा होगा उखड़ा उखड़ा
- 42:07सा होगा नहीं तुम उसका व्याख्यान नहीं कर पाओगे पल भर के लिए घटना
- 42:19घटती है तुम श्याम बाबा के यहाँ जा रहे हो।
- 42:22सालासर धाम जा रहे हो तुम आज की यात्रा पे जा रहे हो तुम गंगोत्री
- 42:30गोमुखी काली मठ इन तीर्थ स्थानों पे जा रहे हो हरिद्वार ऋषि।
- 42:44लेकिन जा कौन रहा है जा रहे हो तुम तुम अगर पल भर के लिए जहाँ भी
- 42:58वो घटना घटी। जिसे मैं नो माइंड कहता हूँ योगा
- 43:03चित्रवृत्ति निरोध क्षणिक नो माइंड हुए तुम नो माइंड जैसे ही
- 43:12हुए आनंद आया, रस आया और नो माइंड जैसे हुए।
- 43:18परमानेंटली स्थाई तो तुम उस रास्ते में लगातार डूबे रहोगे।
- 43:26बस वो अंतरिम घटना है, अंतिम घटना है, हाँ अंतिम भी है और अंतरिम भी
- 43:34है, अंतर में घटती है। और अंतिम घटना है, उसके बाद कोई
- 43:39घटना नहीं घटती। अब समझाई तुम छिप के जाते हो
- 43:50चीजों से किसी स्त्री पुरुष को पल भर के लिए देखा तुम्हारे भीतर नो
- 43:58माइंड की वर्षा आ गई अब प्रेमी। प्रेमी जान इसे ध्यान पूर्वक सुन
- 44:07लैला मजनू की आँखें चार होती हैं लैला काली है नै नै?
- 44:13नक्ष भी कोई खास नहीं मजनू सुंदर है।
- 44:21हीर और राजा तो दोनों ही सुन्दर थे लेकिन किसी क्षण में प्रेमिका
- 44:36प्रेमिका की आँखों में दोनों ने झाँका आँखें चारो दोनों के भीतर
- 44:44वो घटना घटी। जीसको मैं नाम देता हूँ नो माइंड
- 44:48मैं नहीं, योगियों ने बहुत पहले नाम दे दिया योगा शित वृत्ति
- 44:53नरोदा तुम नो माइंड की स्थिति में पहुंचे उस क्षण, लेकिन यह भी याद
- 44:58रखना पल भर के लिए पहुंचे। तो फिर ये घटना बिल्कुल वही है जो
- 45:09पल भर के लिए तुम्हे खाटू श्याम में घटी, सालासर में घटी जंड के
- 45:14वृक्ष के नीचे घटी पीपल के वृक्ष के पास घटी या किसी व्यक्ति विशेष
- 45:19के पास घटी या किसी स्त्री पुरुष के आँखें मिलाने से घटी।
- 45:25लेकिन मूर्खता तुम्हारी ये कि तुम चिपक गए हो तुम्हारे भीतर ये बात
- 45:38घर कर गयी कि इस स्त्री की आँखों में झांकने से और स्त्री के मन
- 45:44में ये घर कर गयी बात कि इस पुरुष की आँखों में झांकने।
- 45:49के बाद मुझे वो आनंद आया। मेरा मन ठहर गया और तुम अगर स्थाई
- 45:55रूप से मन को ठहरा लो, स्थाई रूप से मन ठहर जाए, जो प्रेम की
- 46:02घड़ियों में क्षणिक रूप से ठहरा था।
- 46:07तो तुम एनलाइटन हो गए, तुम प्रज्ञापन हो गए तुम प्रबुद्ध हो
- 46:11गए रस रूप में कहूँ तो एक क्षण में तुम नो मैएंड की स्थिति में
- 46:23अगर आ जाओ तो वो होती है सटोरी। वह शनि का घटना है।
- 46:33अगर वह घटना परमानेंट बनी रहे तो वह प्रबुद्धता की घटना है।
- 46:41फिर समाधान हो गया फिर समाधी लग गई।
- 46:53लेकिन मनुष्य की गलती क्या है? मनुष्य की गलती यही है।
- 47:00तुम कहीं भी गए मैंने ऐसे मुसलमान देखे है जो किसी के साथ प्रेम वश
- 47:08चले गए। गंगासागर।
- 47:13या हिंदू के कोई धार्मिक स्थल पर और वहाँ उसे नौ माइंड की घटना घट
- 47:18गयी। उसने धर्म परिवर्तित करना पड़ा।
- 47:25कहता है नहीं, नहीं मुझे यहाँ बड़ा आनंद आया।
- 47:28ये धर्म बड़ा श्रेष्ठ है। कोई धर्म सृष्ट नहीं, तुम्हारी
- 47:32चित्तवृत्तियों का निरोध, यह सृष्ट कहाँ हो जाए?
- 47:38यह सृष्ट नहीं स्थान विशेष परिस्थिति विशेष या काल विशेष का
- 47:47कोई समंत नहीं है। तुम्हारी चित्र वृत्ति निरुद्ध
- 47:50हुई, टूट गई, तुम पार छिटक गए अपने मन से यह मायने रखता है
- 48:00स्थान विशेष रहे और कुछ ऐसे हिंदू भी हैं जो मुसलमान के साथ किसी
- 48:07प्रिय मित्र के साथ। प्रिय तमा के साथ हाँजी चले गए
- 48:15वहाँ घटना घट गई नो माइंड तो उसने कहा नहीं नहीं ये तो बकवास है सब
- 48:24हिंदू धर्म तो बकवास है। शहीद धर्म तो मुस्लिम है क्योंकि
- 48:30उसे नो माइंड की घटना काबा जा के कटी मक्का मदीना जा के कटी हज कर
- 48:38के कटी, अब समझ गई पुत्री। अनेकता में तुम्हारी बाहरी
- 48:48क्षेत्र ले के आते हैं। तुम्हें कोई कहीं चिपका है, आज
- 48:53कोई कहीं चिपका है आज और ये चिपका हटे सही भी हैं।
- 49:02क्योंकि कभी किसी व्यक्ति को एक क्षण के लिए वहाँ से रस टपका था।
- 49:08अपने भीतर टपका क्यों था कि उसने योगाचित वृत्तिनिरोध योग कर लिया
- 49:17था, उस रस के साथ चित की वृद्धियों से परे?
- 49:22छिटक के और तुम उस स्त्री पुरुष से चिपक जाते हो, मर जाऊंगा लेकिन
- 49:36मैं तो शादी यही करूँगा मर जाऊँगी लेकिन शादी यही करूँगी क्या हुआ?
- 49:41क्यों अंधभक्त बन जाती है जी लोग? किसी व्यक्ति विशेष के सान्निध्य
- 49:48में नौ माइंड की घटना घट गई। हाँ इसको बेटा सर्किल में ले लो
- 49:55जहाँ तुम्हें नौ माइंड की घटना घट जाए वह मोदी खाना जहाँ बाबा नानक
- 50:02को नौ माइंड की घटना घटी। वह सटोरी की घटना जहाँ घटी वह भी
- 50:11कम महत्त्व नहीं रखता, क्योंकि सटोरी की घटना में कुछ न कुछ
- 50:16बिखरा। वह स्थान भी पवित्र है।
- 50:24जहाँ दो प्रेमियों की आँखें मिलीं और नो माइंड की घटना घटी।
- 50:38इसे तुम प्रेम कहते हो? नो माइंड की घटना घटते ही रस
- 50:48बिखरता है। इसलिए ओशो को लोग ठीक से समझ नहीं
- 50:55पाए। ओशो बंदा बना था, शरीफ था,
- 51:04ईमानदार था लेकिन अपनी बातों को फिलैसफर था।
- 51:12उसने एम ऐफ़ रश की लेकिन अपने शब्दों को उस भीतरी रहस्य को
- 51:19उद्घाटित ना कर सका। यह चूक गया यहाँ पढ़ाई लिखाई काम
- 51:25नहीं पड़ती तुम्हारी बुद्धि कितनी प्रवीण कर दी तुमने?
- 51:30कितनी एजुकेट कर दी तुम्हें? इस इसका ज़रा भी प्रभाव नहीं है।
- 51:37यहाँ कबीर भी उस रहस्य के अंतरिम कोनों तक चले जाते हैं जिनकी
- 51:42बुद्धि ज़रा भी का खागावी नहीं जानती।
- 51:49कागज कदम छुओ नहीं और ओशो ने तो फिलस्फी की एमए की थी, पीएचडी भी
- 51:57की थी। लेक्चर और भी रहा है वो भीतर का
- 52:05रहस। प्रकट कौन कर पाएगा?
- 52:11एजुकेटेड बुद्धि नहीं पढ़ा कितना है?
- 52:19नहीं नहीं, इससे नहीं वह कितनी प्रवीणता से आपको समझा सकता है।
- 52:31कितनी दक्षता से, कितनी निपुणता से आपको बात को सरलीकृत करके बता
- 52:40सकता है तुम्हें यह है प्रवीणता। बुद्धि की दक्षता ये आपकी सब
- 52:50डिग्री तो कागज की है, कभी भी जलाई जा सकती है।
- 52:58लेकिन वह पल में जो तुमने अमृत पी लिया वो जलाया नहीं जा सकता।
- 53:03वर्षों तक प्रेमी प्रेमिका को भूल नहीं सकती।
- 53:07और क्योंकि वह घटना मूवमेंट टेररली थी, क्षणिक थी और तुमने
- 53:15तुमने उसको परमानेंट मान लिया, तो फिर तुम क्या करोगे?
- 53:20तुम उस स्त्री पुरुष के बिना रह ना सकोगे।
- 53:25तुम सालासर जाए बिना न रह तुम खाटू श्याम जाए बिना हज करने के
- 53:32बिना या गंगा सागर या तीर्थ या कुंभ का मेरा जहाँ भी कहीं नौ
- 53:40माइंड की घटना तुम्हें घट गई, तुम उसके गुलाम हो गए।
- 53:45प्रत्येक व्यक्ति उसका गुलाम हो जाता है, वह प्यारा ही।
- 53:53अगर कोई व्यक्ति काम का भी गुलाम हो गया है तो इसमें ज़रा भी कुछ
- 53:58उत्पाद करने की जरूरत नहीं है क्योंकि उस क्षण में।
- 54:03वह नो माइंड की स्थिति में पहुँच गए तो निश्चित रूप से तुम भीतर की
- 54:09नो माइंड की अवस्था तक परमानेंटली तो नहीं पहुँच सके, लेकिन मूवमेंट
- 54:14टरली तो पहुंचते हो। संभोग की घटना के दौरान पीक पॉइंट
- 54:20पे आके। जब झरते हो तुम वह होता तो
- 54:29मूवमेंट अर्ली है, लेकिन फिर वहाँ उसी उसी चीज़ को देखने का मन करता
- 54:39है, तुम छिप के जाते हो। बस उसी को अंधभक्ति कहते हैं।
- 54:46ये है अंधभक्ति तुमने शक्ति को नहीं पहचाना कि घटा क्या था।
- 54:55उस वक्त संत इसको पहचान लेता है। घटा क्या था मोमेंटेरली घटना घटी
- 55:07नो माइंड की, फिर संत कहता ठीक अब पा लिया रहस्य।
- 55:15अब इस घटना को स्थायित्व प्रदान करूँगा।
- 55:20क्षणिक को मोमेंटली को परमानेंटली घटाऊंगा एंड आई विल ट्राई मैं
- 55:29बेस्ट मैं अपना पल पल इसके लिए कुर्बान कर दूंगा।
- 55:38ये होता है बलिदान तुम मर मिटे उस शैक्षणिक घटना के आनंद के वेग में
- 55:58तुम इतने मर मिटते हो कि तुम किसी बंदे भी शीष का साथ नहीं छोड़
- 56:03पाते। तुम मर जाते हो, तुम कहते हो नहीं
- 56:07यहाँ मलोट का एक जोड़ा था, यहाँ से 15 किलोमीटर दूर है एक शहर
- 56:16बड़ी पुरानी घटना है, एक जोड़ा था नाम नहीं लूँगा।
- 56:23उनको आपस में प्यार हो गया। स्वाभाविक है मोमेंटरली घटना घट
- 56:28गई, मन ठहर गया और अगर मन पल भर के लिए ठहर जाए तो बड़ी प्यारी
- 56:37बात है, तुम्हारा मन पल भर के लिए भी तो नहीं ठहरता?
- 56:40यही तुम्हारा दुर्भाग्य है। दुस जोड़े ने लड़की ने माँ बाप से
- 56:49और लड़के ने भी माँ बाप से कहा बात बनी सामाजिक थोपनाएं अड़ गई।
- 57:01कहीं कुछ भेद अभाव होगा। नहीं माना।
- 57:06उनकी शादी नहीं होने दी तो उन्होंने मशविरा किया कि मिलने तो
- 57:12नहीं देंगे। अपना पूर्ण प्रयास किया विचारों
- 57:15ने। मुझे आज भी रोना आता है, इतना
- 57:24प्यारा जोड़ा था वो अगर उसकी बालीदान मेरी इस घटना को सुन ले
- 57:34तो उस घटना को याद करके वो भी रोयेंगे।
- 57:43मैंने कहा उस मित्र को मित्र मुझे पता है तुम्हारी दशा क्या है और
- 57:57तुम इसके बिना नहीं रह सकते, लेकिन अब मैं क्या करूँ?
- 58:03समाज ने बंधन खड़े कर दिए हैं। उसने मुझसे कुछ सहयोग मांगा था।
- 58:14प्रॉब्लम हल करो, मैंने कहा प्रॉब्लम कुछ नहीं है भैया
- 58:21प्रॉब्लम समाज की थोप नहीं है। जो इन अरोडे रुण्ड मुण्ड लोगों ने
- 58:30बना दी है, अगर कोई आज अपनी धर्मपत्नी को साथ फेरे का वायदा
- 58:38करके भाग जाता है। और बात करता है कि देश के लिए देश
- 58:43ने कब कहा था कि अपने घर वाले को छोड़ो, देश ने गाँधी को तो कहा
- 58:47नहीं, अपने घर वाले को छोड़ो। देश ने सावरकर को भी कहा, कहा कि
- 58:53अपने घर वाले को छोड़ो। तुम्हारे सभी आइकॉन किसी को कोई
- 59:08दिक्कत नहीं है। कृष्ण को कोई कहता है कि छोड़ दो,
- 59:12रुको मणि को हाँ, बाधा भी क्या है?
- 59:17कबीर को किसी ने कहोगे लोई को छोड़ दो।
- 59:23बुद्ध तो किसी कारण से खुद ही चले आए और उन्होंने अकेले यशोधरा और
- 59:28राहुल को थोड़ी छोड़ा। उन्होंने तो भरी पूरी साम्राज्य
- 59:32को छोड़ दी। जीसको पाने के लिए तुम लालायित
- 59:37ठुठा उठाये फिरते हो। मुझे वोट दे दो मुझे वोट दे दो
- 59:43तुम्हारी तृष्णा ना भरी है, ना भरेगी तृष्णा कभी पूर्ण नहीं होती
- 59:55नेवर फुलफिल। तो फिर वो बेचारे हाथो में हाथ
- 1:00:07बांध के बड़ी नहर में गूद गए। यहाँ से छह सात किलोमीटर दूर
- 1:00:15पड़ती है जिसमें मैं गिरा था और दो नहरें जाती हैं पास।
- 1:00:25एक का नाम शायद इंदिरा गाँधी के नाम पे है भाई उसका नाम बदल दो
- 1:00:30क्या पानी अमृत हो जाएगा? रख दो सावरकर रख दो मोदी क्या
- 1:00:37इसका पानी फिर तो गंगा को? पवित्र करने के लिए क्या यंत्र
- 1:00:46लगाने की जरूरत ही नहीं? इसका नाम बदल के गंगा से मोदी कर
- 1:00:52दो मोदी माता च। लेकिन ध्यान रखना ये पवित्र ज़रा
- 1:01:03भी नहीं हो पाएंगे। नाम बदलने से ना ज्यादा गन्दी
- 1:01:08होंगी, ना ज्यादा पवित्र उतनी ही रहेंगे।
- 1:01:11पानी उसी गति से चलेगा, गंगा को तो पता भी नहीं होगा कब तुमने
- 1:01:16उसका नाम बदल दिया? गंगा को ये भी नहीं पता कि मेरा
- 1:01:20नाम गंगा है, ना यमुना, ना कावेरी, ना सरस्वती, ना
- 1:01:25ब्रह्मपुत्र किसी को नहीं पता ना नर्मदा, तुमने अपनी पहचान के लिए
- 1:01:34ये नाम रखे हैं। नर्मदा और गंगा को तो बिल्कुल
- 1:01:37नहीं पता कि मेरा नाम क्या है, वो हमरा रूप में आ जाये पुत्री सुन
- 1:01:49लो नो माइंड की घटना इसको आप हृदय पे लिख लो।
- 1:01:59जहाँ भी कहाँ आपको ये नो माइंड की घटना घट गई, वो सटोरी की घटना और
- 1:02:08उस क्षण में आपको बड़ा आनंद आएगा अगर जीवन में वो एक घटना घट जाए।
- 1:02:21फिर तुम एक मुड़ता मत करना, पुत्र से तुम उससे चिपकों मचाना, किसी
- 1:02:32वृक्ष से, किसी व्यक्ति से, किसी बच्चे से, किसी धर्म से।
- 1:02:40किसी शब्द से, किसी धार्मिक ग्रंथ से, किसी गुरु से जैसे तुमने कहा
- 1:02:48कि आग के पास आकर बाबा वो घटना घट के नो माइन के तो देवी कृपा करो,
- 1:02:56छिपक मत जाना। अन्यथा मैं तो 1 दिन विदा हो
- 1:02:59जाऊंगा, फिर तुम करोगी क्या तुम छाती पीट के रो ओशों के साथ यही
- 1:03:13गधा ओशों के मरने के बाद? बहुत से लोगों ने सुसाइड कर लिया।
- 1:03:20यह पागलपन है। मैं तुमसे अलर्ट करता हूँ, आगाह
- 1:03:26कर देता हूँ, कोई मुझसे कम प्यार नहीं है, तुम्हें मुझे पता है।
- 1:03:34और मैं 1 दिन विदा होऊंगा और 1 दिन सभी विदा होते हैं।
- 1:03:42कहाँ हैं तुम्हारे पर? दादा सड दादा तुम्हारी दादी
- 1:03:48तुम्हारी पर दादी सड? दादी आज कहाँ हैं विदा हो गई ना?
- 1:03:53ऐसे ही तुम भी विदा हो जाओगे तो जैसी मूडता ओशो के शिष्यों ने की
- 1:04:05वैसे तुम मत करना प्रेम से मुझे विदाई देना ये मैं जानता हूँ कि
- 1:04:17तुम्हारी के में। भिक्षोह की पीड़ा होगी, दर्द होगा
- 1:04:28क्योंकि तुम्हारा लगाव हो गया मेरे से और इसी को मैं बार बार
- 1:04:33बहुत सी प्रवचनों में कह चुका हूँ देखो गौतम।
- 1:04:37इसी मोह में उलझ गया था वर्धमान महावीर और बरसों वर्षों तक बना
- 1:04:44रहा और महावीर से जानते थे तो उन्होंने एक जरिया तराशह।
- 1:04:57भिक्षा मांगने के लिए भेज दिया और पीछे से देख त्याग कर दिया और
- 1:05:01पर्ची लिख के दे दी कि ये जब आए खूब रोयेगा गौतम गौतम था उसका जब
- 1:05:11खूब रो धो ले। वो रोने में मेरे से जो चपकाहट थी
- 1:05:16वो बह जाए और जब हल्का हो जाए, सारी चपकाहटों का शुद्धिकरण बिखर
- 1:05:28जाए और उसका मन पवित्र हो जाए, शीतल हो जाए।
- 1:05:32यह मेरे से चिपकाहट भी तुम्हें दूषित करती है।
- 1:05:35याद रखना सिर्फ श्याम बाबा सालासर धाम या जंड के वृष की पूजा ही
- 1:05:43तुम्हें दूषित नहीं करती। संत पुरुष के साथ चिपका हठ भी
- 1:05:47तुम्हें दूषित करती है क्योंकि भीतर किसी तल पर जाकर तुम भी वही
- 1:05:52संत हो। ईशा वास में तुम सर्वम यत किंच
- 1:05:57जगत आम जगत जगत के कुण कोण में वह ही है।
- 1:06:05जहाँ जाकर तुम नो मैएंड की अवस्था में जाते वहाँ तुम्हारी इच्छा
- 1:06:12पूरी हो जाती बड़ी बड़ी कमाल की बात है और मैं रोज़ बोलता हूँ तुम
- 1:06:19नो। तुम उस जंक्चर पॉइंट पे पहुंचोगे
- 1:06:22जब तो नो माइंड की अवस्था में होगे सहसा ही तुम इतने गहरे चले
- 1:06:28जाते हो जिसका तुम्हे अंदाजा ही नहीं होता लेकिन लेकिन वो घटना
- 1:06:36होती है क्षणिक। यह थीम मैं समझा पाया तो बड़ी
- 1:06:45मुश्किल से समझा पाया। तुम्हारा प्रश्न तो बेटी बहुत
- 1:06:52चैलेंजिंग था। लेकिन उन तलों पर गहरा उतर के
- 1:07:02क्योंकि मैं पैदल चला हुआ यात्री हूँ और धीमे धीमे पैदल चला हूँ
- 1:07:07देर पहुंचा बहुत देर पहुंचा मैं बहुत पुरानी रूह हूँ और पैदल चला
- 1:07:15हूँ। इसलिए सारे मुकामों की गहराई से
- 1:07:20जानता हूँ यह नीम है यहाँ माइलस्टोन आएगा, यहाँ कांटे विषय
- 1:07:27हैं, यहाँ कांच बिखरा है, यहाँ उबड़ खाबड़ है जमीन यहाँ राजभत है
- 1:07:35तुम्हें सब बता दूंगा। नो माइंड की घटना जहाँ घट जाए उस
- 1:07:48घटना के ऑब्जेक्ट से चिप कमाते जाना।
- 1:07:57और वह जोड़ा मैंने कहा हाथो से हाथ से मार के दोनों प्रेमी
- 1:08:03प्रेमिका बड़ी नहर में कूद गई। उनके पास और चारा भी था, इतना
- 1:08:07साहस भी नहीं था। मेरे से पूछा उसने?
- 1:08:16मैंने कहा तुम चिंता त्याग दो। मैंने अपनी तरफ से बहुत कोशिश की,
- 1:08:24उसके भ्रम की निवृत्ति की, लेकिन दिल है कि मानता नहीं।
- 1:08:33अभी वो उस मुकाम पे खुद नहीं न आए थे, कैसे छोड़ पाते मैं उस मुकाम
- 1:08:39पे था बहुत पहले से ये घटनाएं घटनी शुरू हो जाती हैं।
- 1:08:48कमिंग इवेंट्स कास्ट देयर शैडोज बिफोर?
- 1:08:52इस शब्द को भी आप दायरे में लिख लो।
- 1:08:56आने वाली घटनाएं अपनी प्रतीक्षा को पहले ही बिखेरना शुरू कर देती
- 1:09:03हैं। कमिंग इवेंट्स कास्ट देयर शैडो
- 1:09:07बिफोर मैं बहुत दिन पहले से ही। बड़ा हल्का महसूस कर रहा था।
- 1:09:13अपने को एनलाइटनमेंट के दिन जो होना था तो उस दिन में कहीं भी
- 1:09:18होता तो वहीं ये घटना घट जाती। अगर घर पर भी होता तो घर पर ही घट
- 1:09:24जाती। किसी और क्षेत्र में होता वहीं घट
- 1:09:30जाती। लेकिन बहुत दिनों से मैं महसूस कर
- 1:09:33रहा था जब मैं स्मृति में गया तो मुझे पता चला यह हल्कापन बहुत
- 1:09:40दिनों से जल रहा था। धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे
- 1:09:47मुझे नहीं पता था ये होगा क्योंकि ये पहली बार होता है और एक ही बार
- 1:09:52होता है। दूसरी बार तो आवश्यकता ही नहीं
- 1:09:58रहती। तो इतना हल्का, हल्का, हल्का
- 1:10:05हल्का होता गया होता गया होता गया यह मैं स्मृति को खंगाल के बता
- 1:10:10पाया। अब एकदम से घटना घटी नहीं है।
- 1:10:17बहुत पहले धीरे धीरे धीरे धीरे घटता गया।
- 1:10:20हल्का होता गया हल्का होता गया। और 1 दिन वह सारा जो गर्दोगुबार
- 1:10:26था वो निकल गया और हल्का होता होता बस मैं वहाँ पहुंचा था बोना
- 1:10:34ब्रिस्ट के सामने ईंट पर पांव रखे थे और उसके हुक्म आने शुरू हो गए।
- 1:10:42कहते हैं मोहम्मद के ऊपर आयते उतरी।
- 1:10:46कहते हैं बाबा के ऊपर जब जी उतरी तो ये सब नो माइंड की उस पूर्ण
- 1:10:52अवस्था में उतरी संबोधि की अवस्था में उतरी।
- 1:11:00ये तो बाद के शिष्य गड़बड़ चौथ कर देते हैं।
- 1:11:06अब क्या किया जाए ना? नानक कुछ कर सकते हैं ना?
- 1:11:10कबीर कबीर का नाम लेकर कोई जेल में हो आता है।
- 1:11:18तो भी सभी का नाम लेकर कोई बच्चियों से रेप कर जाता है, कोई
- 1:11:30400 व्यक्तियों को नपुंसक बना देता है।
- 1:11:34अब मेरी समझ में ये बात आती है न? इन्हें क्या?
- 1:11:38मेरा ये तो फिर वो ही हो गया जो संजय ने जबरन नसबंदी की एक नंबर
- 1:11:49का मूर्ख था, संजय ने मुझे ही पूछ लिया, अब तो।
- 1:11:57दो आई वॉज़ नॉट एनलिक। लेकिन इतनी सी तो बात उसे बता
- 1:12:01देता। इब जबरन नसबंदी मत करो, उत्तेजना
- 1:12:08हीन होने के साधन बताओ ताकि ये बच्चे कम पैदा करें।
- 1:12:15बच्चे न पैदा करें, स्टेट ऑफ मैएंड को बदलो तो पुत्री अब हम
- 1:12:26ज्यादा न विस्तृत होते हुए कन्डेन्स होना शुरू करें और रास
- 1:12:33रूप में आए। बूंद रूप में आ जाये।
- 1:12:38नो माइंड की घटना सतौरी की घटना है अगर वह क्षणिक रूप में आती है
- 1:12:50और अगर क्षणिक से। वह स्थायित्वों को प्राप्त होती
- 1:12:56है, परमानेंटली अवस्था में आ जाती है, तब वो समाती है परमानेंटली वह
- 1:13:07घटना का घट जाना प्रत्येक व्यक्ति चाहता है, लेकिन तुम?
- 1:13:12ओब्जेक्ट से चिपक जाते हो जैसे तुम काम से चिपक गए हो।
- 1:13:21किसी व्यक्ति को अहंकार में भी मज़ा आ सकता है।
- 1:13:24वह अहंकार से चिपक जायेगा और तानाशाह बन जायेगा।
- 1:13:36नो मैएंड शीत वृत्तियों से दूर खड़े हो जाना।
- 1:13:45एस ए विटनेस एस ए ऑब्जर्वर मैंने कल भी बताया था।
- 1:13:57फिर ऑब्जेक्ट और ओब्सर्वर में बहुत दूरी हो जाती है और अगर ये
- 1:14:05परमानेंटली हो जाए तो वह समाधि अगर वो क्षणी को हो जाए थोड़ी देर
- 1:14:13के लिए हुई। और फिर ऑब्जेक्ट ऑब्जर्वर में
- 1:14:17समाहित हो गया, तो फिर वही हो गया, वही मंद बुद्धि हो गए।
- 1:14:26मेरे ख्याल में तुम मेरी बात को समझ गए होगी, बेटी।
- 1:14:32यह सारा साइंटिफिक विश्लेषण है। आध्यात्मिक विशेष सतोरी की घटना।
- 1:14:46मैंने कहा अगर तुम एक बार कहीं वालो लैला मजनू।
- 1:14:56फिर फरे हाथ, हीर, राँझा बड़े प्यारे।
- 1:15:12उन्हें किसी नो माइंड की अवस्था में यह चीज़ मिली लेकिन दुर्भाग्य
- 1:15:18उनका कि वो उनको परमानेंट नहीं कर सके।
- 1:15:24कहते हैं कि हीर पहुँच गई थी लेकिन मैंने जब आकाशी ब्रम्हंडई।
- 1:15:33स्मृतियों में जाके देखा तो मुझे पता चला कि अभी थोड़ा सा फंसना
- 1:15:38बाकी है। हीर पूरी नहीं पहुंची थी लेकिन
- 1:15:43रांझा तो बिलकुल नहीं पहुंचा था। हीर काफी दूर तलक के चली गई थी।
- 1:15:50उसके करीब आ गई थी। जो उसने जी शब्द कहे तिदो नी
- 1:15:59मैंनवा खो रंझा रंझा अभी भी कहती है मेरे को रंझा को बस ये फर्क रह
- 1:16:06गया, हीर कहे कि मैं हीर हो गयी। बस ये फर्क रह गया तीदो नी मेनू
- 1:16:16अखो राँझा हीर न आँखें कोय रांझण रांझण कर दी मेहता अबे रांझण हुई
- 1:16:24यही होता है नामदारियों का अंजाम राधे राधे करते करते तुम राधे।
- 1:16:33लेकिन स्वयं ना हो सकोगे और तुम्हें होना है स्वयं तुम कौन हो
- 1:16:42यह जानकर उसमें प्रविष्ट होना है। मृज होना है उसमें विलीन होना है
- 1:16:50जैसे। परवान क्षमा में घुसकर बस में भूत
- 1:16:55हो जाता है तो हीर तो ना रही लेकिन रांझा तो रहते हैं, वहाँ
- 1:17:06दोनों ही मच जाते हैं। वहाँ भेद रहता ही नहीं है।
- 1:17:09अभेद इसे ही कहते हैं। अद्वैत इसे ही कहते हैं।
- 1:17:14अगर हीर रांझे में पूर्णतः समाज जाती तो वह ये ना कहती कि मुझे
- 1:17:20रांझा कहो वो कहती मैं हीर और रांझे के दोषी चक्कर से बाहर हो
- 1:17:28गयी। मैं वहाँ चली गई ना जहाँ हीर और
- 1:17:33ना जहाँ रांझा सभी प्रेमियों में दूर तलक जाने वाली दूरतम तलक
- 1:17:43स्थिति में जाने वाली हीर थी मात्र बाकी भी प्रेमी जन गए तो?
- 1:17:51लेकिन हीर बहुत दूर तक चली गई और अगले ही जनम में वह प्रबुद्ध भी
- 1:17:59हो गई। थोड़ी ही एक माइनर बाल के समान।
- 1:18:09दूरी रह गई थी और इतनी दूरी भी बड़ी तंग करती है।
- 1:18:16बाल के सामान भी दूर ही रह जाए तो अज्ञान तो बना ही रहता है तो तुम
- 1:18:22इतनी भी दूरी मत रहने देना हालांकि।
- 1:18:26सतोरी और समाधि में कोई बहुत ज्यादा दूरी नहीं है।
- 1:18:30सतोरी बिल्कुल करीब पड़ती है समाधि उसका रस्म तुम्हें अपने
- 1:18:39प्रकाश में ले लेने को उतावला है। और तुम भी ज़रा अपने आप को
- 1:18:44समर्पित करने की चेष्टा करो तो वह तुम्हें अपने आप में मर्ज कर
- 1:18:49लेगा। तुमने पूछा पुत्री सब जगह
- 1:18:56परमात्मा है इसीलिए और तुम क्योंकि अभी अज्ञानी हो।
- 1:19:02तो तुम वस्तुओं को पकड़ लेते हो। नो माइट की घटना जहाँ घटी तुमने
- 1:19:08श्याम बाबा को पकड़ लिया, चलो वहाँ चलो, वहाँ कुछ भी नहीं है
- 1:19:15भाई कुछ भी नहीं है चलो साला चर्च चलो, वहाँ कुछ भी नहीं है।
- 1:19:23मैंने पांच 4 दिन पहले एक वीडियो डाला के हनुमान से मैंने कहा भाई
- 1:19:27पैर पूर दबा दो, दुख से है खाया पिया कुछ नहीं, ये दुखते, घने
- 1:19:33दुखते, अपना घुटनों की तरफ रख दो। हालांकि ये मेरा तुम्हारे
- 1:19:40ब्रह्मों को तोड़ने का एक ढंग था। लेकिन बहुत से भक्तों नाराज की
- 1:19:48मांगते है। बहुत से अभी भी भक्त हैं जो
- 1:19:53चिपकाहों सो चिपकाहटों से युक्त हैं और अपनी चिपकाहटें जैसे ही
- 1:20:00तुमने वर्नित की। जैसे ही मैंने अंगूठा मारा, जीस
- 1:20:06व्यक्ति के भीतर लोभ नहीं है, वह तुमसे भी थोड़े ही बंधेगा जो सभी
- 1:20:13चीजों से मुक्त हो गया। वो तुमसे थोड़ी बंधेगा कि तुम
- 1:20:17छोड़ के न चले जाओ कभी अरे भाई कल जाते हो आज जाओ।
- 1:20:21आज जाते हो तो चले ही जाना था, आएगी क्यों से?
- 1:20:29वो तुम्हारी चिपकाहटों से कभी प्रभावित नहीं होता, वो बस ये समझ
- 1:20:34लेता है कि नहीं इतना कुछ बोलने के बाद भी यह नहीं चिपकाहटों को
- 1:20:40तोड़ पाया तो फिर? लगा हुआ अंगूठा वक्त किसी और को
- 1:20:45देंगे, किसी और को परखेंगे। यह तो 5 साल सुनने के बाद भी हुड
- 1:21:00का मूड रहा। का तो पढ़ाया पिंजरा फट गया।
- 1:21:06चारो विथ सारी वीडियो तुमने सुनी होंगी।
- 1:21:11बिलकुल बात आई ता समझाई समझा नहीं रिया डेढ़ का ढेर लेकिन तुम वैसे
- 1:21:19ही मूर्ख रह जाओ। मेरा तो मतलब ही ये था कि तुम
- 1:21:24डेढ़ से कैसे मुक्त हो जाओ? इससे चपकाहटों से कैसे मुक्त हो
- 1:21:29जाओ वो चपकाहटें तुम्हारी बनी में खत्म नहीं हुई, बस वो रिप्लेस कर
- 1:21:35ली तुमने। इसलिए मैं पहले तुम्हें वार न कर
- 1:21:40देता हूँ कभी मैं मैं भी तुम्हारी चबकाहटों का कारण न बन जाऊं बार
- 1:21:48बार तुम्हें अलर्ट करता हूँ देखना क्योंकि ऐसे व्यक्ति प्यारे बहुत
- 1:21:56होते हैं। उनसे मोहब्बत होना लाजिम है,
- 1:22:05लेकिन तुमने अलर्ट रहना है। मेरे जाने के बाद सूरे घोंप के मर
- 1:22:10मत जाना नहीं, मैं कहीं नहीं गया, मैं यहीं रहूंगा।
- 1:22:16और श्रद्धा के लिए रहूंगा। यह शरीर अपने अपने तत्वों में
- 1:22:22बिखर जाएगा। इससे मेरा कुछ लेना देना भी नहीं
- 1:22:26है। यह तो सिर्फ मेरे एक आपसे संवाद
- 1:22:30करने का ढंग मात्र है। इसमें सारे।
- 1:22:39वो तंत्र लगे हैं, उपकरण लगे हैं जो आपसी सम्बन्ध बना सकते है।
- 1:22:47नो माइन्ड की घटना जहाँ घटी उस ऑब्जेक्ट के साथ चिपक मत जाना।
- 1:22:55वो गंगा हो, गंगा सागर हो, वो हज हो, वो काबा हो, मदीना हो, मस्जिद
- 1:23:01हो, वो चर्च हो, वो गुरुद्वारा हो, वो मंदिर हो, मस्जिद हो, कुछ
- 1:23:12भी हो। कोई बाघ बगीचा हो, कोई खेत खलिहान
- 1:23:17हो, तुम चिपक मत जाना, बस मेरा यही पैगाम है, घटनाएं घटती हैं
- 1:23:30तुम्हारे चित की दशा के अनुसार। ना की परिस्थितियों के अनुसार
- 1:23:39देशकाल और परिस्थितियां ज़रा भी काउंटर नहीं होती हैं।
- 1:23:42हम गुलामी के वक्त यहाँ बहुत से व्यक्ति एनलाइटन हुए कोई गुलामी
- 1:23:51का फर्क पड़ा बिल्कुल नहीं पड़ा। क्योंकि देशकाल और परिस्थितियों
- 1:23:56से संबंधित है ही नहीं, अपने भीतर चले जाना तुम रोज़ जाते हो अपने
- 1:24:01भीतर, लेकिन सोये सोये जाते हो, उसकी की अवस्था में तो तुम जगह
- 1:24:06जगह भी जा सकते हो। गुलामी होते हुए भी तुम जगह जगह
- 1:24:10जा सकते हो। सोये सोये तो रोज़ जाते हो क्या?
- 1:24:15जब तुम गुलाम थे भारत 1000 वर्ष तक तो क्या तुम सोये नहीं?
- 1:24:22बिलकुल सोये क्या तुम उसके पास बैठे नहीं, जिसे शक्ति में
- 1:24:29परमात्मा के पास बैठा हूँ, ना कहते हैं बिलकुल।
- 1:24:33पहुंचे तो जगह जगह ही पहुँच सकते हो।
- 1:24:38बाबा नानक हुए जा इतने गुरु हुए हम बता बतक गुलाम ही तो थे लेकिन
- 1:24:48सभी एनलाइटन हुए। गुरु अर्जुन देव गुरु तेग महथ।
- 1:24:53गुरु गोविंद सिंह गुरु नानक के लिए सभी अनलाइक हूँ और गुलामी के
- 1:24:59दौर में अनलाइक हूँ। लेकिन बड़ी बात तो ये है कि अगर
- 1:25:08ये गुलामी न हो। तो थोड़ा जल्दी पहुँच जाते होते।
- 1:25:15लड़ाई वडाई करते नहीं फिर तुम्हें आसान बाहर की परिस्थितियां अगर
- 1:25:22अच्छी न हो तो ज्यादा बढ़िया है, लेकिन कई बार क्यों छोड़ देते हैं
- 1:25:29बुद्ध इन परिस्थितियों को? जिन्हें तुम तलाशते हो बुद्ध छोड़
- 1:25:33देते हैं, इन महलों को छोड़ो क्योंकि वो जानते हैं
- 1:25:38परिस्थितियों से उस अंतरिस्थिति का ज़रा भी संबंध नहीं, वो तो
- 1:25:45कहीं भी।