Latest / Baba ji Vijay Vats / 22 Apr 25 -True Life Incidents! आध्यात्म का रास्ता क्यों चुनें? साक्षी की अब तक की सबसे सुंदर व्याख्या!
Transcript
- 0:02हम मन को जैसे बच्चों को सुलाते हैं, लोरी देख के थपथपा के बच्चे
- 0:16सो जाते हैं। जैसे बच्चों को सुलाते हैं।
- 0:22हम थपथपा के मीठी रागिनी सुना के वैसे ही हम अपने मन को सुला देते
- 0:34हैं। इन शब्दों को ध्यान से सुन लेना
- 0:42विकास मलिक का ये सवाल कैसे सुलझाते हैं अपने मन को हम
- 0:54किन्हीं मान्यताओं से? किन्हीं असक्तों से जो हम जानते
- 1:05हैं, हम अपने मन को इन्हीं थौपी हुई।
- 1:19मान्यताओं के द्वारा सुलाए रखते हैं, मन जागता है, हम फिर सुला
- 1:25देते हैं ऐसा कुछ जन्मो जन्मो से हो रहा है, कौन है जो सुला देता
- 1:39है आपके मन को? आपकी ही मान्यताएँ आपने गढ़ ली।
- 1:46मन उठता है बात करता है लेकिन आप उसको कोई नशीली दवा सुंघा देते
- 1:54हो, वह फिर से सो जाता है। इसलिए मार्क्सस ने कहा धर्म अफीम
- 2:06का एक विषय है, इस दिशा में तो उसने बहुत सत्य कहा है।
- 2:15मन जो सत्य देखता है। और उस सत्य पर जब विचार करना
- 2:24चाहता है तो आप थपथपा के उसे किनहीं मान्यताओं के सहारे किनहीं
- 2:35ग्रंथों के सहारे। किन मार्गदर्शकों के शब्दों के
- 2:40सहारे अपनी सुला देते हो यह सोया हुआ मन तुम लिए लिए आज तक फिर रहे
- 2:51हो और ध्यान रखना सोया हुआ व्यक्ति।
- 2:58आनंदित नहीं होता तो विकास मलिक पूछते हैं बाकी लोग जो प्रश्न
- 3:14पूछते हैं वो कुछ लोगों के लिए होता है, एक दायरा होता है उनका।
- 3:24लेकिन विकास मलिक जो प्रश्न पूछते हैं उस सभी का प्रश्न है?
- 3:31आपका भी प्रश्न है तो इस प्रश्न को अवश्य सुन लेना।
- 3:42आप सबका प्रश्न है, क्या कहते हैं विकास मलिक?
- 3:54आप नास्तिकता की बात करते हैं? इसका सबसे बड़ा कारण है कि जो
- 4:05जितना गंदा जितना करप्ट जितना सौलस इंसान है, जिसकी आत्मा भी मर
- 4:19चुकी है। बहुत ना ही बलवान, अमीर और ऐश
- 4:32नौकर चाकर फार्म हाउस, शराब, शबाब।
- 4:40फूल इज्जत, समाज में लोग पैर छूते हैं हर जगह वाहवाही।
- 5:00पहले इस छोटे से हिस्से का विश्लेषण करना है।
- 5:12मैं समझता हूँ कि मेरे प्रवचनों ने सही असर किया।
- 5:23आप हैरान मत होना मैं खुरसता गया, खुरसता गया, खुरसता गया और भीतर
- 5:32से ये निकला तो विकास मलिक ये ना सोचे।
- 5:40कि ये मेरा सवाल है, नहीं इतना खुर्च लिए गए तुम बड़े पुराने
- 5:46शराब के इतना खुर्च लिए गए कि बाहर की माटी रेत।
- 5:55सब विदा हो गया और जो था यह आ गया।
- 5:59यह भी आना ही था क्योंकि यह आपके भीतर भरा हुआ था।
- 6:07सच पूछो तो अकेला विकास मालिक नहीं।
- 6:13सारी दुनिया का प्रश्न मैं क्यों कहती हूँ?
- 6:16क्योंकि आप भी सब यही चाहते हैं, इसलिए मैं कहता हूँ इस प्रश्न को
- 6:23और जवाब को अब सुन लेना क्योंकि ये प्रश्न आपका है।
- 6:36जो जितना भ्रष्ट होगा गंदा करप्ट साउललेस जिसकी आत्मा मर चूके उतना
- 6:49ही बलवान, अमीर और ऐश नौकर। चक्कर, फार्म हाउस, शराब, शबाब,
- 6:59फुलइज्जत समाज में लोग पैर छूते हैं।
- 7:05हर जगह वाहवाही हुई। कहीं न कहीं विकास में लिखा तुमने
- 7:12ये चाहा होगा। क्योंकि ये आया कहाँ से भीतर से
- 7:24ही तो आया और भीतर तुम्हारा है और तुम्हारे ही भीतर ही भरा हुआ है।
- 7:37तो जब छैनी हथोड़ी कुदाली चली प्रवचनों के तो अब के भीतर से
- 7:43निकला और ये बिल्कुल सही है इससे पहले के प्रश्न।
- 7:51ऊपरी ऊपरी सत्ता से आयत है। यह प्रश्न सही अंतरंगतलों से आया
- 7:58है, इसका जवाब देना अति महत्वपूर्ण है क्योंकि ये सिर्फ
- 8:04एक व्यक्ति का स्वाद नहीं, पूरे समाज नहीं, पूरे देश नहीं पूरे
- 8:09विश्व की। प्रश्न है बस थोड़ा सा, मेरे
- 8:21शब्दों को हम गरीब हैं, तो किन्हीं मान्यताओं के आधार पर
- 8:31हमें समझाया गया कि पूर्व जन्म का कोई कर्म होगा।
- 8:35इसीलिए गरीब हो भाई कहीं कोई छोटा मोटा रोग हो गया है तो वो समझाया
- 8:45गया है। अब से कोई ठगी बईमानी हो गयी है।
- 8:52आपको समझाया गया आप थोप लेते हैं। ये सब मीडिया तंत्र का काम है।
- 9:00झूठी खबरें फैलाना, झूठों के लिए फैलाना ठीक मान लिया, मैं सब
- 9:11जानता हूँ। जिन गलियों से तुम आज गुजर रहे हो
- 9:23पुत्र मैंने सदियों पहले ये गलियां छानकर खेलकर रेत में
- 9:31लिपटकर छोड़ दी है। इसलिए गुरु अनोखा है।
- 9:45गुरु आपके भी उन मरहालों से गुजरा जिन मरहलों पे आप आज कदम रख रहे
- 9:53हो और अच्छी तरह से गुजर। तुम्हारे पास साधन नहीं हैं लेकिन
- 10:07गुरु गुरु के पास इतने प्रचुर मात्रा के साधन रहे हैं कि उसने
- 10:13अच्छी तरह से भोग लिया और जान लिया और देख लिया जब ये सारा।
- 10:23जो आपने पूछा पुत्र जब कोई व्यक्ति से भोग लेता है यह जो तुम
- 10:31एयाशी कहते हो अमीर धन के अम्बार और ऐश।
- 10:49मैंने बताया, ऐश आपकी इंद्रिया करते हैं, ज़रा देखो सत्य आपके
- 10:53सामने है हाथ कंगन को आरसी क देखो कौन भौंक रहा है।
- 11:04जब तुम खाना खाते हो, स्वाद जीवक आता है, अगर इसमें कोई फर्क हो तो
- 11:12मुझे चैलेंज करे। जब आप स्वादिष्ट खाना खाते हो तो
- 11:19आपको टेस्ट वर्ड्स को स्वाद लगता है।
- 11:26लेकिन आप ये भ्रांति में होते हो कि ये स्वाद मुझे आया क्या?
- 11:36इस भ्रांति के कारण यह स्वाद तुम्हें आया।
- 11:41तुम अपनी इंद्रियों से जो स्वाद लेते हो, कानों से मधुर संगीत,
- 11:47आँखों से मधुर दृश्य, खोपड़ी से सुंदर कल्पनाएं, सुंदर सजावटें,
- 11:55सुंदर सपने। तुम जो समते हो मैं बन जाऊं,
- 12:04राष्ट्रपति बन जाऊं, मैं प्राइम मिनिस्टर बन जाऊं, मैं राजा हो
- 12:10जाऊं, मैं हुकुमरान हो जाऊं, मैं हुकुम करूँ, यही तो मन चाहता है,
- 12:17अगर कुछ और चाहता है तो बता दो। अपना तो स्टार्ट इसे आप एस कहते
- 12:24हो, मैं तुम्हें कहता हूँ थोड़ा सा जाग जाओगे तो तुम खुद ही अपनी
- 12:36मूर्खताओं पर हँसोगे। सच में ये स्वाद मुझे तो नहीं आ
- 12:43रहा है, उसकी खाना इतना पड़ेगा रियली आवाज विटनेसिंग ये अद्भुत
- 12:54है। मैं सिर्फ साक्षी था, जीवा को
- 12:59स्वाद आया और अगर जीवा के टेस्ट को कुछ हो जाए तो जीवा के ऊपर
- 13:07क्या स्वाद खट्टा मीठा आपको नहीं आएगा।
- 13:13मेरे जीजा को जीवा का कैंसर हो गया।
- 13:18अब कुछ भी खाता किताब तो बस ज़िन्दगी बेकार है।
- 13:22मैंने कहा क्यों बेकार है ये जीव के टेस्ट बड्स को कैंसर हो गया
- 13:30है, फिर ज़िन्दगी क्यों बेकार हो गयी है?
- 13:36स्वाद नहीं जहाँ वह ज़िन्दगी कैसी, बस यही तुम्हारी है एक
- 13:47थोड़े से छोटी सी जीवा शरीर के मुकाबले कितना प्रतिशत है उसका?
- 13:54कोई काटता नहीं, उसके टेस्ट वर्ष उन्होंने काम करना छोड़ दिया।
- 14:03अभी प्राण नहीं निकले, खूब हट्टे कट्टे हो, लेकिन टेस्ट वर्ष ने
- 14:10काम करना छोड़ दिया। तुम मीठा खाते हो?
- 14:13नमकीन खाते हो तुम्हारा मन करता है यह काम, लेकिन टेस्ट वर्ड्स
- 14:21उन्हें पहचानने से इंकार कर देता है।
- 14:30फिर स्वाद से आया फिर स्वाद आया ही नहीं।
- 14:36उस दशा को भी तुम देखते हो, थोड़ी गहरी बात, इतनी जिद्द पर अड़ा ना
- 14:48करो फुल इज्जत। शराब, शबाब, फार्महाउस, नौकर चाकर
- 14:58अमीर लोग पैर चुंघते हैं। हर जगह वाहवाही बस ये ही जीवन है।
- 15:14एक वक्त आएगा विकास तुम्हारे जीवन में या तुम्हारे जीवनों में जब
- 15:23तुम्हारा नाक उमड़ जाएगा, इतने स्वाद के पदार्थ होंगे।
- 15:34यह है मेरा आशीर्वाद समझो। यह सभी के साथ होने वाली
- 15:46प्रक्रिया है। कुछ भी समझो लेकिन ऐसा वक्त आएगा
- 15:51चारों तरफ तुम्हारे कदम होंगे। नौकरशाह पर होंगे क्या वो नौकर
- 15:58चाकर वो ये नहीं सोचते कि काश जिसकी सेवा हम कर रहे हैं, ऐसी ही
- 16:04हमारी भी कोई सेवा करें। उनके मन नहीं होता क्या?
- 16:12जो हमारी नौकरी करते हैं दास हम जो सोचते हैं दास दासियाँ नौकर
- 16:21नौकरणियाँ क्या उनका मन नहीं होता?
- 16:29उनका भी मन होता है काश। थोड़ी सी पलट उलट हो जाए बस उधर
- 16:34मैं हो जाऊं और इधर तू हो जाए सभी का मन करता है 1 दिन आएगा जब
- 16:47तुम्हारे सामने ये सब बड़ा होगा। और तुम्हारा मन कहे का और नहीं ये
- 16:59तुम्हे जो सुख लग रहा है आज जीसको सिर्फ याद करके मात्र हो।
- 17:09तुम दुखी हुए जाते हो जीसको सिर्फ याद करके मात्र तुम ललचाये जा रहे
- 17:16हो, तुम समझ रहे हो इनमें स्वाद है लारिन टपक जाती है।
- 17:23शराब शबाब क्या बात है? इज्जत लोग पांव चूमेंगे क्या पांव
- 17:29चूमने वाले लोग नहीं हैं क्या वो भी तो तुम्हारे जैसे हैं?
- 17:34बस हमोकी की तलाश है कि ये हरामी यहाँ से उठ जाए, हम इसकी जगह बैठ
- 17:41जाये इसलिए मैं सदा ही कहता हूँ। प्राइम मिनिस्टर से सबसे ज्यादा
- 17:48सावधान रहने की जरूरत उस व्यक्ति से है जो तुम्हारी कुर्सी के करीब
- 17:52टांग के पास बैठा है। सबसे पहले तुम्हारी कुर्सी की
- 17:57टांग वही मरा देगा क्योंकि उसको ही तुम्हारी अय्याश की नजर आती
- 18:03है। तुम्हारी तरह ही वो भी मूड है।
- 18:08और जिसने भी बगावत की जो दुश्मनों से ना मारा, वह अपनों के हाथी में
- 18:19बैठ गया पृथ्वीराज को। नहीं मार सका महमूद कोरी मारा
- 18:33जयचंद्र एप्पल मेरे पास। कोई राजस्थान है व्यक्ति आगे बाबा
- 18:48ये राणा सांग के बारे में आज कल जो है मैंने कहा राजनीतिक छूट ले,
- 18:56तुम इसमें समय बर्बाद न करो तो ज्यादा अच्छा है तुमने क्या लेना?
- 19:04कहते नहीं, हमारे तो राजस्थान में पड़ी मान्यता है इनकी पूजा होती
- 19:09है। मैंने कहा वो व्यक्तिपूजन नहीं था
- 19:18महाराणा सांगा संग्राम सिंह के नाम से।
- 19:24आगे उनकी तीसरी पीढ़ी जाके महाराणा पर था।
- 19:32महाराणा सांगा के पुत्र उदय और उदय के पुत्र महाराणा पर था।
- 19:39ये वंशावली ऐसे ही चले। किसी घटना में लड़ाई में उन्होंने
- 19:49आंख खो दी, एक आंख खो दी, एक आंख खो दिया, एक पांव खो दिया।
- 19:57अब देखिए ऐसा व्यक्ति किस हालत में होगा।
- 20:02तुम थोड़ा सा फ़ैक्ट्स पर ध्यान कर लिया करो।
- 20:09उस अवस्था में उसने छक्के छुड़ा दिए।
- 20:12अपने दुश्मनों के महाराणा सांगा ने जिसका एक हाथ नहीं एक आंख ने।
- 20:26एक पांव पहले खो चुका वो सब करीब पर आधा आदमी रह गया और उस आधे
- 20:34आदमी ने छक्के छुड़ा दिए तो उसे क्या कहोगे वीर कहो।
- 20:41या गद्दार को होता है। इन्हीं गलत वृत्तियों ने ये धारणा
- 20:47फैलाई और राजस्थान की आनबान शान है।
- 20:58यह है वंश। महाराणा प्रताप तो तुम्हें भी
- 21:01ज्यादा होगा। तुम कहते हो नौकर जाकर ऐश यह वो
- 21:12व्यक्ति है जिसने सब कुर्बान कर दिया।
- 21:16राजा है मेवाड़ का। घास की रोटी खा रहा है लेकिन
- 21:27संकल्पवान है। यह जिद्दी नहीं है।
- 21:32जिद्द और संकट में मैंने फर्क बता दिया था।
- 21:36जिद्द आता है बुद्धि से, मस्तिष्क से, ब्रेन।
- 21:41संकल्प आता है हृदय से आत्मस बहुत बेतरी तनु से यह संकल्पवान है घास
- 21:50की रोटी खाना मंजूर, अन्याय के आगे झुकने वाले नहीं।
- 22:02मैंने कहा तुम पुत्र उसके बारे में क्यों पूछ रहे हो?
- 22:08बस बाबा आजकल ऐसा ही कुछ बहस से चिढ़ा है।
- 22:12मैंने कहा वो लोग मूर्ख। महाराणा संग्राम सिंह की वीरता पर
- 22:23कुल संदेश में न ही महाराणा पटक ये राजस्थान के ये हिंदुस्तान का
- 22:35आन। बान शान है।
- 22:36है कौन नहीं फखर करता आज इन पर लेकिन कुछ गलत तरीके के लोग वो
- 22:48इतिहास जिन्हें वो जानते नहीं। इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ सब बन
- 22:57जाना, खबरें खोदने वाला मत बनना या नहीं इतिहास मत बनना बेशर्ते
- 23:07के आप सर लोग नहीं सर लोगों के तो ये विचारों की मजबूरी है।
- 23:14खबरें खोदनी ही पड़ती है और सारे झंझट और जमेले इन सर लोगों के जो
- 23:21आप भी गुमराह हुए है और आपको भी गुमराह करते है तो मैंने आपसे एक
- 23:27बार कहा था जब ये सर लोग अजमल की कथा सुनानी शुरू कर दो कर दे।
- 23:34तो समझ लेना के आनंद तक जाने के सब रास्ते बंद होंगे क्योंकि ऐसा
- 23:46बेठ बेठ ढंग से ये प्रसारित करेंगे।
- 23:49बता देना अगर कोई करता हो तो। कि व्यक्ति अगर आस्तिक होगा तो
- 24:00नष्ट प्रचारगा इनका बताने का ढंग कहीं गहरे में उतार भी मत लेना।
- 24:09मेरी बात को ध्यान से सुन ले इन प्रचारकों से इन सर लोगों से।
- 24:16खुजलाहटों को तो मिटालिन उसके लिए हमारे पास वक्त नहीं है, लेकिन
- 24:30हृदय में महत्त्व पर। खबरों को खोदने वाले लोग ये सर
- 24:40हुए, आचार्य हुए सब जानते हैं लेकिन कुछ नहीं जानते।
- 25:05बाबा नानक कहते हैं जे युग चारे आर जा और दुसुणी होए अगर चार
- 25:14युगों की उम्र और 10 गुना भी हो जाए।
- 25:24नवा खंडा में जानिए नौ खंडों पर आपकी इज्जत हो जाए जिससे आप इज्जत
- 25:31कहते हैं। सभी पाम चुनने लग जाएं।
- 25:36जय जयकार हो, वह वहीं हो। विकास मल्लक आपके लिए कह रहा हूँ
- 25:43में जानिए नाली चल रहा है सब कोई जीसको पुकार लोगे वो साथ चलेगा
- 25:50तुम्हारे कंधे से कंधा जी जो के चारे अरजा हो।
- 25:58और जशूणी होय नावां खंडा जानिए नाल चले सब कोई जगह नाव रखा है के
- 26:09जश कीरत जग ले जग में आपको जश मिले गिरती मरे।
- 26:17ज्योतिष नजर न आवें तब बात न पूछते सब मिल जाए आपको क्या कहते
- 26:32हैं, सुनिए? इतने करुणा भरे भाव से हमारे लिए
- 26:40लेके गए हैं बाबा खुद तो उन्होंने वो प्यारा भी लिया अमरत कहा जिसे
- 26:50पीकर व्यक्ति निहाल हो जाता है। जे जुग चारे आरजा होर द सोनी होय
- 26:59नमाकंडा में जानिए नाली चले सब कोय।
- 27:05चंका नाव रखाए के जस कीरत जगले, जेक सन्ना धरना मैं त बात ना पूछे
- 27:13के इसका अर्थ क्या होगा? जी, तिस से नजर न आवने अगर तुमने
- 27:23सब्र का गला नहीं किया। अगर तुमने सबर का प्याला, तृप्ति
- 27:38का प्याला, सब कुछ भोग भाग के लोग भी साथ चले।
- 27:42नौ खंडों के प्रसिद्धि भी हो गए। तख्त तो ताज भी मिल गए लेकिन अब
- 27:52सबर सुभरी नाय, तृप्ति नाय। जीतती से नजर ना आवे।
- 27:58बस इस कंप्लीट ये अगर सब्र फिर भी ना आया अब तो घबरा के ये कहते हो
- 28:06कि मर जाएंगे अगर मरते भी चढ़ना पड़ा तो किधर?
- 28:15पर वह सब्र का ब्याला ऐसा कि उसको पीकर आपके लक्षण जीने के ढंग बदल
- 28:24जाते हैं। अगर वो सब्र का ब्याला बाबा कहते
- 28:29नहीं हो जाता मैं। सब भोग लिया भोगकर, अगर तुम्हारी
- 28:35भूख ही नाम है क्या? फिर कैसा भोजन खाया तुमने?
- 28:41शीतल जल पीकर भी अगर तुम्हें प्यास लगी रही तो फिर तुमने कैसा
- 28:48जल पिया? क्या वो जल था?
- 28:55प्रश्न तुम्हारा बहुत शानदार है इसलिए मैंने कहा तमाम विश्व का ये
- 28:59प्रश्न है। सभी देखते हैं दूसरे सुखी और संत
- 29:05तुम्हें पढ़ाई का आसान तरीका बताता है।
- 29:13दो दो आपके पास मार्ग है या तो उसी मार्ग पे निकल जाओ इस मैराथन
- 29:19की दौड़ में शामिल हो जाओ और देख लो तुम भी कुछ न कुछ तो बन जाओ,
- 29:30लेकिन सावधान। तुम हृदय से चाहती हो नहीं मन
- 29:37मानता संतो के वचनों से तो संत कहता भाई आजमा के देख।
- 29:51अगर तुम किसी चीज़ को प्रत्यक्ष समझ कर ही मानोगे और प्रमाण के
- 30:00रूप में नहीं मानोगे तो फिर तुम प्रत्यक्ष देख लो, बस संत लोग
- 30:05बातें तुम्हें कहती हैं या तो इस दौड़ में खुद ही शमर।
- 30:21आपने कभी प्राइम मिनिस्टर का चेहरा गौर से देखा, कभी गौर से
- 30:28देखा नहीं, शायद देखा नहीं होगा। ये जीते हुए खिलाड़ी हैं।
- 30:39रस विहीन ये शब्द आप नोट कर ले। ये जीते हुए खिलाड़ी हैं।
- 30:46रस विहीन, भीतर रस नीरस लेकिन जीते हुए और उस जीत का क्या करना
- 30:55जो रस न लेके आये मैं रोज़ कहता हूँ उस गन्ने का क्या करना एक का
- 31:01क्या करना जो बढ़त जाए 20 फुट? लेकिन जब से खाने लगो, चूसने लगो
- 31:09तो रस ना निकले। बस संसार ऐसा ही एक है, बड़ा
- 31:14बढ़ता है बड़े स्वप्न सोते जगते, तुम्हारी नींद हराम कर देते हैं
- 31:21और तुम। बराबर मैराथन की दौड़ में शामिल
- 31:24हो जाते हो। दो ही वेज़ हैं, तरीके हैं जाते
- 31:34हो इस मैराथन की दौड़ में शामिल हो जाओ, अगर तुम्हारा मन थपथपाई
- 31:38से नहीं सोता। किसी नोरी का प्रभाव उस पे नहीं
- 31:43होता। संतो के वचन की नोरी का प्रभाव आप
- 31:47पे हो जाए तो आप प्रमाण के रूप में ले लोगे।
- 31:50बात को फिर प्रत्यक्ष करने की चेष्टा नहीं करोगे लेकिन अगर ना
- 31:56माने बच्चा ना सोयेब, थपथपाई से लोरी।
- 32:01देने से तो फिर रोग गहरा है। आपका रोग गहरा है तो आप इस की
- 32:09दौड़ में खुद भी शरीक हो जाओ। तो फिर क्या कहती है?
- 32:21फरीद कहते हैं, रूखी सूखी खाई के ठंडा पानी पिए और अगर नहीं मंजूर
- 32:33देख पराई चोपड़ी मत ल जावे जी। रोखी सूखी खाई के ठंडा पानी अगर
- 32:42तुम्हारा मन मानता नहीं तो कोई बात नहीं क्या तकलीफ है फिर दौड़
- 32:49में शाम हो जाओ, लेकिन देखिए घुटों मत।
- 32:56घुट घुट के मरना अपने आपको दंडित करना है और तुम निरपराध हो, तुमने
- 33:01कोई अपराध नहीं किया। निरपराध व्यक्ति को तुम खुद ही
- 33:08दंडित करते जाओगे, वह न्याययुक्त नहीं होगा।
- 33:16फिर देखो तमाशा देखो चंका नाव रखा इ के जस कीरत जगले देखती स नजर न
- 33:28वे तबाद न बुचक। अगर गन्ना तो बहुत ऊँचा हो गया,
- 33:35फसल तो बहुत ऊंची होगी। गेहूं की बल्लियाँ बड़ी बड़ी लगी,
- 33:40लेकिन जब उनको मशीन मेरे से गुज़ारा क्या?
- 33:51लेहू न निकला फल न निकला सिर्फ घास निकली, पशुओं के काम तो आ
- 34:00जाएगी तुम्हारे काम नहीं। कीटा अंदर कीट कर दोषी दोष तरे
- 34:21नानक के निर्गुण गुण करे तो गुण गुण।
- 34:31बाबा कहते हैं, हमें कहते हैं अब उस कीड़ों के समान हो कीटा अंदर
- 34:41कीट कर ऐसा व्यक्ति जो यश कीरती नौ खंड में रेल लेता है।
- 34:49पांव पुजवाता है, ऐश करता है, नौकर चाकर सब है, लेकिन परमात्मा
- 34:59का रस नहीं किया तो तुम उसके कीड़े के समान हो कीटा अंदर कीट
- 35:05कर दोषी दोष धरे। जीस तरह आपने कोई दोष किया, आपने
- 35:11अपराध किया नानक निरगुण गुण करे, अगर तुम उसके शरण में चले गए तो
- 35:18तुम्हें कोई भी गुण नहीं तो वह गुणहीन को भी अपना लेगा।
- 35:27नानक। निरगुण गुण करे गुणबत्तियां गुणते
- 35:32और जो गणमान्य है उनको और ज्यादा गुणवान बना देगा तेहा कोई ना
- 35:37सूझाई जे तीश्य गुण कोई करे ऐसा कोई नहीं जो उसके ऊपर उपकार करे।
- 35:44लोग परमात्मा के उपकार करते है। हनुमान जी मुझे कह रहे थे ये लोग
- 35:51मुझे मुर्ख बनाते हैं, अब भला मेरे घर सभावनी की कोई कमी है?
- 36:03मैंने कहा नहीं तुम्हारे तो ये मुझे क्यों चिढ़ाती है, सवमणि कर
- 36:10दूंगा क्या मैंने कभी सवमणि देखी नहीं ये बलिष्ठ माहिर देखो ये तो
- 36:16मेरा मुकदर हिला नहीं सकेंगे, मैं घूमा देता हूँ, खोपड़ा पढ़ दे।
- 36:24और ये कहते हैं बाबा हमारा काम कर दो, एक नौकरशाही की तरह काम करते
- 36:29हैं, मुझसे पूछ लेते हैं बाबा बागेश्वर बताओ वो वो खुमरन बन गए।
- 36:40वैसे तो हुक्म करना कुछ आया नहीं। हाथ पर लेके आया हाथ पर लेके आया
- 36:49लेकिन कल्पना में हो कमरान बनना बड़ा आसान है तो फिर ऐसे ही बन
- 36:58जाते हैं। ये दूसरा तरीका है मन जिसे
- 37:03साक्षरत पानी सकता वो कल्पना में पा लेता है जीस प्रेमिका को
- 37:10प्रेमिका को तुम सच में नहीं पा सकते स्वप्नों में अक्सर वो आती
- 37:16है। तुम्हें उसी का सपना हमारे
- 37:22हरियाणा में एक कहावत है बिल्ली को चूहे के सपने बिल्ली को सपने
- 37:31आते हैं आते हैं लेकिन किसके चूहे?
- 37:37मैंने चूहा खा लिया दो, खा लिए भूक लगी थी।
- 37:41आज तो पूरा पेट भर गया और 900 चूहे खा के बेली आज कुछ न नानक
- 37:53निर्गुण गुण करे गुण बनते गुण दे। तेरा कोई ना सूझई जे तीर्थ गुण
- 38:00कोई कर तुम तो परमात्मा पे आशीर्वाद भी फिरते हो तुम ऐसे
- 38:09मूर्ख हो ये मन्नत। उसके पास कुछ ना होने का सबूत है
- 38:23तुम्हारी फरियादें ये मन्नतें चुन्नी चला दूंगी बताओ।
- 38:34पुत्र दे दो चुन्नी चिड़ा दूंगी तो माँ मुझे कहने लगी बाबा क्या
- 38:43मेरे पास चुन्नियों की कमी है? मैंने कहा नहीं माँ तो तो जगती
- 38:50जननी है तो फिर ये लोग क्या मुझे? बीप पन्ने समझते हैं नहीं माँ तुम
- 38:59तो सर्वसम तुम तो जगत दात्री हो किसने कहा ये इसने कहा मैं
- 39:07तुम्हें चुन्नी चढ़ा दूंगी, साड़ी चढ़ा दूंगी मैंने कहा इन मूर्खों
- 39:11की बातों को मत सुना करो, कहते नहीं मैं कहाँ सुनती हूँ?
- 39:20जितना पाप ये जागरण करने वाले करते हैं उतना पाप कोई नहीं करता।
- 39:27हालांकि ये समते और तुम्हारे समझने से कुछ ये बिलकुल सही पाप
- 39:32है। आप जागो बिलकुल जागो।
- 39:37पहली बात तो ऐसे न जागो उस जागे हुए तत्व को जानना ही जागना है।
- 39:45भीतर जो सदा से लो जग्र ही है उसको जान लेना ही जागना होता है।
- 39:54लेकिन अगर तुम ये नहीं कर सकते तो कम से कम।
- 39:57अपनी नींद कुर्बान करो, सिर्फ अल्लाह को बिहारी है कुर्बान तो
- 40:02चलो अपनी नींद कुर्बान कर दो वो बजारा हमारे सामने के चाचू कुंदन
- 40:10बूढ़ा था। रात को नींद नहीं आती थी।
- 40:14डॉक्टर त्रिलोकनाथ गयी थी, नींद की दवाई लेके आये दवाई लेके सोता
- 40:19और ये जागरण हर रोज़ कोई ना कोई महाविशाल जागरण यानी आज ज्यादा
- 40:24जान खाएंगे तुम्हारी आज पूरी रात जान खाएंगे।
- 40:36महिमा मंडी तो होते हैं ये लोग अल्लू प्रसाद बैंगनराम ऐसा नाम
- 40:45होता है खुद जाको क्या मुसीबत है? अपने घर में जागो तंबू लगा लो
- 40:57उसमें जागो कौन रोकता है भाई तुम्हें स्वतंत्र हो तो जागरण
- 41:05होता यूनिट लगाते बड़े बड़े और यूनिट भी एक ले।
- 41:11जात चढ़ मुल्ला भागती क्या बहरा हुआ खुदा है क्या ईश्वर बहरा उसे
- 41:23सुनाई नहीं पड़ा। उसने सुनने की क्षमता खो दी।
- 41:32नहीं नहीं ऐसा वो कभी नहीं हो पाएगा।
- 41:36ये बड़ा सेंसिटिव ब्रिटिशिंग पावर है, ऐसा कभी नहीं हो सकता।
- 41:42तुम समझ सकते हो कैसे सुना दी ऊंचा सुना दी, लेकिन तुम वास्तव
- 41:47में लोगों को सुना रहे हो, तुमने फंड इकट्ठा करना है जागरण के नाम
- 41:52पर। और उस फंड में से कुछ कहा ना?
- 41:57मैं तुम्हारी अंतरंग रंगों को जानता हूँ।
- 42:04मेरे सामने एक डोसा लगा प्रधान रहता था।
- 42:12मैं छोटा ही था, लेकिन इतना छोटा नहीं कॉलेज में पढ़ता था वो
- 42:20व्हीलचेयर पे बैठा कोई उसका सेवक व्हीलचेयर घूमाने ले जाता।
- 42:271 दिन उसने बुलाया। मुझे।
- 42:30मेरी माँ कहती थी, सो बल्ले माथे वाले के क्री मत जाना हम माओं का
- 42:37अपना अपना मुँह है, उसका माथा वाक्य ही बल्ला था, काला था अब
- 42:45उनके अपने अपने मापदंड होते हैं। मैं तो चला गया, उसने आवाज दिया
- 42:51बेटा बात सुनो मैंने कहा कोई काम होगा, कोई बाजार सी चीज़ मंगाता
- 42:57होगा उसकी बेटी जहाँ मैं पढ़ता था वहाँ पर ब्याही थी कोई चीज़ ले
- 43:03जानी होगी कई बार दूध की मटकी दे देता छोटी सी।
- 43:09टोक नहीं मिल जाता। मुझे कोई शर्म नहीं आती, लोग मजाक
- 43:18उड़ाते बच्चे देखो टोकने लिए करता है।
- 43:21अभी आदत ना गई दूध। मैंने कहा कोई काम होगा, मैं चला,
- 43:31बताईये जी पुत्र तो मैं एक बात कहूँ कहो कहो ताऊ जी तयार थे उम्र
- 43:44में थोड़े से बड़े थे मेरे पिताजी।
- 43:50बेटा मेरी एक बात को ध्यान से सुनना, मैं तो चला जाऊंगा।
- 43:59उसके दोनों पांव नहीं थे दोनों पांव।
- 44:04तुम कहते हो चंगा ना वर खाई के ऐश होती है सुन लेना, मेरी बात को
- 44:12नौकर चाकर होते हैं इसके भी हैं नौकर चाकर ऐश भी है देख ये
- 44:17व्हीलचेयर पे बैठा घूम आता है। सारा शहर घूमा देते हैं।
- 44:25सेवक सुबह से शाम तक सेवा होती है, जिसके दोनों पाम नहीं वह
- 44:34पराशित है। पराधीन वह नहायिका भी खुद नहीं
- 44:39नहा सके। चल तो सकता ही नहीं पता है वह शौच
- 44:46लघु शंका भी दूसरे करवाएंगे उसको देखिए चंगा नाव रखाइके और अच्छा
- 44:54नाम था उसका। गौशाला के प्रधान ने बड़ी मौज की।
- 45:02आढ़त की दुकान थी एक नंबर की आढ़त थी मेरे बिलकुल सामने घर सब था,
- 45:19नौकर चाकर थे, धन था, अम्बार था धन का।
- 45:25और जिनके पास ज्यादा होता है उनको ही हम दे देते हैं कि आप ही यह
- 45:32गल्ला भी तो उसने अपनी करुण गाथा सुनाई।
- 45:38पुत्र मुझे गऊशाला का प्रधान। फिर तो फिर बेटा वरोट रहा, कैसा
- 45:51कहता आँखों में आंसू थे उसके द्रवित हो गया।
- 45:56मैंने उसकी आंसू से पूछा, मैंने कहा ताऊ जी मन में?
- 46:02थोड़ा शांत हो जाओ, मैंने सेवक से कहा थोड़ा पानी ले आओ, पानी
- 46:07पिलाया। मैंने कहा अब तुम चले जाओ, कुछ
- 46:09कहना चाहती हूँ मुझसे ही कहना चाहती हूँ इस व्हीलचेयर को मैं
- 46:17थाम लेता हूँ। आंख भर आया कैसापुत्र गऊ साधा के
- 46:29वरदान न बन मका उनका मुझे कौन बनाता है?
- 46:36मैं गरीब अब रखती हूँ। एक हलवाई का बेटा हूँ मुझे कौन
- 46:41बनाएगा पुत्र कभी तुम राज़ करोगे? आवाज आए खलक नकारें खुद।
- 46:55तुम्हारे एक इशारे से दुनिया चलेगी और दूसरे इशारे से दुनिया
- 47:01ठहर जाएगी या बुजुर्गों का आशीर्वाद है?
- 47:05अपंग था, अपाहिज था लेकिन आत्मा तो थी और आशीर्वाद।
- 47:14आत्मा से निकला करते हो और मैं तुमसे कहता हूँ किसी अपाहिज का मन
- 47:20ना दुखद है लेकिन अगर कोई व्यक्ति अपाहिज होने पे गर्व करे आप दा की
- 47:38तलाश करें ध्यान से सुन रहे हैं ना?
- 47:40इन बातों को मुझे लोग कह कहते हैं।
- 47:42आप प्रेमानंद के बारे में बोलते हो, मैं बिलकुल बोलता हूँ, सत्य
- 47:45बोलते हो। उसके दोनों किडनैंस खराब हैं।
- 47:48मैं बिलकुल सत्य बोलता हूँ, तुम्हे तरस नहीं आता।
- 47:53मैंने कहा तरस बिलकुल आता हैं। उससे ज्यादा पूजा होती हैं तो
- 48:00उसका मन क्यों सुखाते हो? मैंने कहा उसका मन दुखता है, मैं
- 48:04नहीं दुखता अगर वो इस झूठ का सहारा न लेता के राधा रानी मुझे
- 48:14जीवित रखी है तो मैं ये शब्द कभी ना बोलता हूँ।
- 48:22मतलब साफ है वह तुम्हें मूर्ख बनाता है।
- 48:30मैं इस कारण से बोलता हूँ आज वो ये बात बोलना बंद कर दे वो कहते
- 48:35रात ही रात ही करता रहो। क्या बंद कर दे?
- 48:42मैंने कहा डायल से बंद कर दे फिर राधा का नाम तुम नहीं, उसके सारे
- 48:49शीशे भी लेना शुरू कर दो। अगर वो फलक भी जाए उसकी एक फलक।
- 48:57वो भी हिर जाए तो मैं जिम्मेदारी दंड मैं उठाने को तैयार हूँ।
- 49:01जो भी आप दोगे ऐसे गुमराह ना करो और मेरा तो काम मुझे श्राप दो,
- 49:11कोई बात नहीं तुम्हारा मन दुखे कोई बात नहीं।
- 49:16बशर्दी कि मैं बिल्कुल सत्य बोल रहा हूँ।
- 49:19आपकी मान्यताएँ गलत मान्यताएँ टूट रही हैं।
- 49:22बस मेरा मंतव्य पूरा हुआ मुझे चाय फांसी रुक जाए।
- 49:35मैं ब्रह्मों का नाश करने के लिए आया हूँ पित्रण आय साधु नाम जो
- 49:40बचना चाहते हैं, साधु हैं, अच्छे वह बच जाए और लेकिन यह तो बिगाड़
- 49:45रहे हैं रात को 1:00 बजे जगाना कोई शुभ होता है क्या?
- 49:52तो मैं ना बोलूं और कौन बोलेंगे? और कौन आएगा, कब आएगा?
- 49:55आप तो मुख भी नहीं खोलते। सीधी सी बात करते आप डायलीसिस
- 50:04रानी को बंद कर दो, राधा रानी को मैं आप डायलीसिस रानी को बंद कर
- 50:12दो। फिर राधा रानी में कितना दम?
- 50:15राधा रानी में तो बहुत दम है। राधा रानी के जाप करने में कितना
- 50:20दम? ये मैं कहता हूँ वो तो चेतना है,
- 50:22बहुत बार बोल चुका हूँ, लेकिन तुम इस रम में न रखो, न रहो अगर तुम
- 50:31भ्रम में हो। तो इस भ्रम को लोगों में मत
- 50:34बांटो। बस मेरी इतनी सी बात तुम खुद भी
- 50:38समझलो और उसको भी समझा दो डायलीसिस रानी के ऊपर तुम डिपेंड
- 50:46ना हो और राधा रानी के ऊपर तुम डिपेंड हो जाओ और फिर तुम जी कर
- 50:51दखो। थोड़े से दिनों के लिए डायलीसिस
- 50:57रानी को बंद कर दो, राधा रानी को अपना काम कर दो, फिर देखेंगे हम
- 51:06यह तर्क नहीं है। यह सत्य का उदघोष है।
- 51:14तर्क का सदा ही गलत नहीं हुआ करते।
- 51:18तर्क सत्य का उदघोष के रूप में भी बोलते हैं और ये तर्क सत्य का
- 51:26उदघोष आज भी आज भी मैं क्या? दोगले न रहो, न दोगलापन लोगो को
- 51:41सिखाओ तुम जीवत हो डायलीसिस के कारण में तुम्हारी मूडता को ठेस
- 51:51पहुंचाना चाहता हूँ। मैं तुम्हारी मूडताओं को ठेस
- 51:58पहुंचाना चाहता हूँ, गांड मारना चाहता हूँ के मूडताएं टूट जाएं
- 52:03क्योंकि आप करोड़ों लोगों को राहत दिखा रही है।
- 52:12तो मेरी माँ ने इसे खाया था, चोर को कभी ना मारो, उसको मारो जो चोर
- 52:19जनती है, चोर की माँ को मारो, ये मूड यहाँ से पैदा होते हैं मूड हो
- 52:29की माँ को मारो। जहा से उत्पन्न होते हैं और
- 52:34मोड़ों की माँ से कोई वरला ही लड़ पाएगा अन्यथा सभी नतमस्तक हो
- 52:40जाएंगे। तो मुझे बोले वो पुत्र गौशाला के
- 52:49प्रधान कभी मत बन जाना। मैंने कहा नहीं बनूँगा कभी ऐसा
- 52:55होगा, मैंने कहा आपका शुरुआत आप बुजुर्गों के आशीर्वाद से हम चल
- 53:04रहे हैं। उसकी आँखों में आंसू निरंतर छलक
- 53:13रहे थे। पुत्र मेरी इच्छा भी थी।
- 53:19लोगों ने भी कहा और मैं चाहता था ये बहुत बड़ा सम्मान होता है
- 53:24गउशाला का प्रधान बन जाना। और मुझे गउशाला का प्रधान बना
- 53:30दिया गया। थोड़ी सी अक्टिंग सेक्टिंग की
- 53:34बनना तो चाहता है नहीं नहीं, किसी और को नहीं, नहीं प्रधान जी, आपको
- 53:43तो अच्छा चलो ठीक है कर दो साइन यह हो गया।
- 53:50और पुत्र मैंने गुआ का खा लिया बहुत खा लिया गमुओ का खा लिया
- 53:58मैंने पुत्र और देखो आज मैं आधा आदमी हूँ, मैं भी रोया।
- 54:07बिलकुल आधे आदमी हो जब सारे पांव गए तो बाकी जो बचा आधा शरीर वो
- 54:14आधा आदमी ही तो है मेरे मन में ना जाने की ऐसी परमात्मा की तरफ से।
- 54:25कि मैं तुम्हें कहूँ, तुमने अच्छा किया, उस मेरे सेवक को भेज दिया
- 54:34अन्यत मैं शायद ये राज़ कभी उगल न पाता और उगल पाता तो मेरे सेवक के
- 54:40मन में क्या जाती? मैंने कहा कोई बात नहीं ताऊ जी
- 54:46देखिए, जब आपको दंड मिल गया किसी कर्म का तो फिर अफसोस करना व्यर्थ
- 54:53है, फिर व्याशित मत करो। जब परमात्मा की दरगाह में तुम्हें
- 54:59दंड मिल गया तो फिर आप प्रयाशित छोड़ दो क्योंकि।
- 55:03उसने प्रयासित करवाना शुरू कर दिया।
- 55:07थोड़ा सा सब्र की घूँट आई उसे दूध भी लेकर जाना था बेटी के लिए,
- 55:16मैंने कहा लाओ दूध दे दो, ले जाऊंगा।
- 55:24तुमने कहा विवेक विकास इतने गंदे। आत्मा मर के ही हो जो कभी मरती
- 55:42नहीं ये शब्द उदगार कहाँ से आ रहे हैं?
- 55:48मैं क्षेत्र से जानता हूँ पुत्र ये सड़े हुए तंत्र से आ रहे हैं,
- 55:59लेकिन मैं तुमसे पूछता हूँ सब है उनके पास?
- 56:08हिमालय जैसा धन, कार, कोठियां सब हैं, सुख सुविधाएं हैं, वो तो
- 56:14उसके पास हुई थी जिसकी दोनों टाँगे कट गई।
- 56:19क्या नहीं था उसके पास? चमचमाती कारें, एक नंबर का सेट
- 56:24हमारे शहर का। पर वो आज लाचार मेरे सामने रो रहा
- 56:28है और मैं उससे कह रहा हूँ चुप हो जाओ, शांत हो जाओ, जब परमात्मा
- 56:34न्याय करने पे उतर आया तो अब तुम पश्चात अपना करो, मैं तुम्हें भी
- 56:38कहता हूँ पाप करके तुम प्रयास मत करना, वह व्यर्थ हैं।
- 56:46क्योंकि परमात्मा की सृष्टि का एक नियम समझा दूं मैं जैसे ही तुमने
- 56:52पाप किया वो तुम्हारे भीतर हो गया।
- 56:55उस सुपर सेंसिटिव कंप्यूटर में और उसकी पनपने की प्रोसेसिंग
- 57:00प्रतिक्षण शुरू हो जाती है। लोग कहते हैं कि उसके घर अधेर
- 57:04नहीं। बस देर इस प्रोसेसिंग का होता है।
- 57:07जब तक बीज वृक्ष नहीं बनता और फल नहीं देता, उसे प्रोसेसिंग पीरियड
- 57:12कहते हैं तो अँधेर नहीं है। इट्स में प्रोसेसिंग प्रोसेसर ऑफ
- 57:23युअर करमास। देर तो है ही नहीं, तब तक क्षण
- 57:29प्रोसेसिंग हो जाती है तो तुम प्रयास मत करना।
- 57:32पाप सभी से होते हो ह्यूमनिस्ट एरर्स मनुष्य गलती का पुतला है
- 57:38यानी पाप करता है तो गलती हो जाए तो ठीक।
- 57:46लेकिन प्रयासित मत करना क्योंकि कमान से निकला हुआ तीर जबान से
- 57:54निकला हुआ शब्द और शरीर से निकली हुई आत्मा कभी वापस नहीं आती।
- 58:06तुम प्रयाशित मत करना, बस इतना ही प्रयाशित करे ना कि आगे से वो
- 58:12कर्म गलत मत करना। ये सबसे बड़ा प्रयाशित है सुधार
- 58:16करना। इसलिए हमने जेलों को सुधार गृह
- 58:19कहा। दंड गृह नहीं कहा सुधार गृह का
- 58:24शायद। यहाँ सूत्र छाये तो पुत्र तुमने
- 58:37जो प्रश्न किया वह रोज़ मैं बात बात में करता ही जिसका तुमने
- 58:48जिक्र किया सबका। ये ऐश, ये ऐयाशी, ये शराब, ये
- 58:56शबाब, ये नौकर, ये चाकर, ये सेवक, ये सभी पदार्थ ये सूरतें, ये
- 59:10कोठी, ये कारें? जी जहाज ये हेलिकॉप्टर जब नहीं
- 59:18थे, जिसके पास नहीं होते वो एकांत गंगतीर पर बैठे।
- 59:34सोनी के लंका का माल करवा भगवान शिव से यही प्रयास करता है।
- 59:41कधा नीलिम्प निरझरी निकुंज कोट रे वसन, ही मुक्त धुरमति सदाशिर।
- 59:52समंजली वाहन बिलो लो लो चेनो ललाम बाल लग्न कह शिवैति मंत्र मचरण
- 1:00:05कथा सुखी वहाँ म। वे लोल लोल लो चुनो ललाम भाल लगन
- 1:00:14के मेरी आँखों में तेरे धन्यवाद का आंसू होगा अश्कों का ललाम भाल
- 1:00:24लगन के मेरे दोनों हाथ शुक्राने में माथे पर जुड़े होंगे हे प्रभु
- 1:00:30तेरा धन्यवाद। शिकायत नहीं होगी।
- 1:00:34यह तो शिकायत है पुत्र और यहाँ लंका सोने की लंका है तो प्रतीक
- 1:00:45सोने की लंका का हमारी क्रावण क्या मांगता है?
- 1:00:50कहाँ बैठकर मांगता है गंगा घाट पर किनारे पर बैठा छोटी सी कोठियां
- 1:00:59हो उसकी इच्छा देखिए सोने की लंका न हो, तुम कहते हो सोने की लंका।
- 1:01:08कदा नीलम पनीर झरी निकुंज कोट रे वसन छोटी सी कुटिया में बैठूका है
- 1:01:23बिलोल लो लोचन, तेरे धन्यवाद का आभार मेरा अस्तित्व सहन न कर सके
- 1:01:32और आँखों में आंसू आ जाए। तेरे उपकार के तुने क्या कुछ नहीं
- 1:01:38दिया? सबसे पहली चीज़ चिंता रहने के लिए
- 1:01:44प्राण बायोग से ये न देता तो तुमने कोरोना में लाशें गंगा में
- 1:01:48प्रवाहित दृश्य आज भी याद होगा। रिमाइंड करो, रिवाइंड करो, हैं
- 1:01:58याद आया याद आया ललाम भार लग्न कहें बिलोल लोल लोचनो।
- 1:02:12लाम बाल लग्न का श्वेत मंत्र मिश्रण कदा आंसू की बहाम में हम
- 1:02:18शिव, शिव, शिव, शिव भीतर से ये उठेगा कृत कृत होकर में सब।
- 1:02:33प्रह्लाद से भरी हुई मेरी आत्मा झूमे दी।
- 1:02:40मैं कब सुखी हूँ देखिये कितना तरस आता है इस राजा पर सोनी के लंका
- 1:02:49का मालिक? प्रयाग करता है भगवान शंकर के आगे
- 1:02:53कि मैं छोटी सी कोठियां गंगा के किनारे बैठ कर तिरा सुकराना अदा
- 1:03:00कब करूँगा मस्तक भी हाथ? धन्यवाद से जुड़े होंगे हाथ आँखों
- 1:03:12लबालब अश्क गिरते हो वो वक़्त कब आएगा पर मैं तेरा शुक्रिया अदा
- 1:03:20करता हुआ कब मदहोशी के आलम में खो जाऊंगा सुखी कब होगा प्रभु?
- 1:03:31अभी दुखी है तुम कहते हो ये ऐश तुम ज़रा पूछो ये बेईमान लोग अपना
- 1:03:41अनुभव सत्य बताती हूँ मैं जिसका नाक कट जाता है भद्दे लगते हैं
- 1:03:47वो। ये विकृत चेहरे ज़रा गोर से देखना
- 1:03:51या शांति पीएम के चेहरे पर देखना सीएम के चेहरे पर देखना हवाई
- 1:03:56उड़ते मालूम होगी। हवाई जहाज में उड़ने वाले के मुख
- 1:04:02पर हवाईयां होगी। ये जीते हुए ज्वारी हैं, जो रस को
- 1:04:09हार गए। ये वो फसल है जिनकी बलियों में
- 1:04:16दाना नहीं है, जिनकी बलियों में फ्रूट नहीं है।
- 1:04:21फ्रूट लेस क्रॉप। क्या तुम अपनी जिंदगी को ऐसा
- 1:04:28चाहते हो? तो फिर पुत्र इस समरा सिंह की
- 1:04:33दौड़ में तुम शाम हो जाओ, आज नहीं कल और जन्म में कितना ही कहे
- 1:04:40कितना ही कहे मुसलमान। कितना ही कहें ईसाई उनके कहने का
- 1:04:44कारण और था, लेकिन लाखों लाखों जन्म है कभी ना कभी तो तुम्हें सब
- 1:04:51मिल जाएगा और अगर थोड़ी सी बात मान लो उस जंक्चर पैंट में जा के
- 1:04:56अपने पूर्व जन्मों में जाकर तुम देख सकते हो।
- 1:05:00कितने बार तुम राजा रह चूके हो आज फिर वही ख्वाहिश फिर?
- 1:05:05वो ही फिर वो ही। वही तनहाई ए फिर वो ही।
- 1:05:28वो ही वो ही वो ही जो जन्मो जन्मो से तुम कर रहे हो, और फिर तुम
- 1:05:33कहते हो, ओके बाबा। जी करने वाले लोग सुखी हैं।
- 1:05:39तुम ये चाहते हो पुत्तर शराब सबाब पदवी, लोक पांव चूमे, बिल्कुल
- 1:05:46चूमे चूमेगे पुत्र कल्याण भव मस्तो तो निकलो मेरा थिन की जोड़
- 1:05:54में बिल्कुल तुम जीतोगे मेरा आशीष।
- 1:06:03लेकिन याद रखना, अब तो घबरा के ये कहती हूँ की मर जाए, गर्म रख के
- 1:06:11भी छान न पाया तो उधर जाओगे, फिर भी नहीं मिलेगा।
- 1:06:19इनके पोशाकों को ये पांच बार छह बार बदलते हैं।
- 1:06:23या जिन्होंने लोगों का जनता का धन लूटकर अपनी जेबें भर ली।
- 1:06:30संदूक और बैंक भर लिए तुम इनकी ये मत देखना कि 10 बार साड़ियां
- 1:06:36बदलनी है, ये पुत्र ये मत देखना। तुम्हें नहीं पता ये भीतर से
- 1:06:43कितना दुखी क्यों? क्योंकि मैं अंतर्जामी हूँ गट गट
- 1:06:48के अंतर की जानत ये बहुत दुखी है पुत्र तुम बहुत सुखी हो, भले बड़े
- 1:06:56की पीर पहचान। अब मैं तुम्हें सत्य भाषण कर रहा
- 1:07:01हूँ, ईश्वर न करे, तुम इन जैसे हो जाओ, लेकिन अगर तुम मैराथन की
- 1:07:07दौड़ में शामिल हो जाओगे तो मेरा आशीष तुम्हारे सामने साथ रहेगा।
- 1:07:18मैं सदा संगम तुम्हारे अगर तुम इस मूडता में ही उतरना चाहते हो तो
- 1:07:26कल्याण वस्तु बाबा लेकिन ध्यान रखना दुखी हो तो मैं पहले से ही
- 1:07:35चेता देता हूँ। अगर फिर भी तुम दौड़ में शामिल
- 1:07:38होना चाहते हो, बिल्कुल मज़े में हो जाओ रोकता कौन है?
- 1:07:45तो मैं नहीं पता। राजनीतिज्ञों की जिंदगी भी कोई
- 1:07:52जिंदगी है। उसका कतल करवा दिया।
- 1:07:56वहाँ से न पकड़ा जाऊं वहाँ से न पकड़ा जाऊं।
- 1:07:59सभी शक होता है, ज़रा सी आहट होती है तो दिल सोचता है।
- 1:08:10ज़रा सी आहट। वो होती है तो दिल सोचता है कहीं
- 1:08:27ये वो तो नहीं कहीं जनता तो नहीं? आती।
- 1:08:34कहीं ये वो तो नहीं कहीं जनता की यूनिटी तो नहीं कहीं ये वो तो
- 1:08:45नहीं कहीं ये? वो तो नहीं।
- 1:08:58तुम्हें नहीं पता मैं इनके भीतर की रख को जानता हूँ पुत्र अगर
- 1:09:03मेरी बातों पे यकीन हो यही तो कहा संतों ने तुम्हें प्रमाण ना मिले,
- 1:09:08प्रत्यक्ष ना मिले। तो तुम संतो के भक्षणों को प्रमाण
- 1:09:12मान लेना, गुरु बनाने का यही मतलब था उसके पास अनेकों जन्मो के
- 1:09:21अनुभव है, जरूरी नहीं है कि आग में हाथ देखकर जल ही जाना है और
- 1:09:28फफलों को। का दुख ही भोगना है जो आग में जल
- 1:09:32गया। तुम्हारे सामने देखो उसके बोलो को
- 1:09:35वो कैसा दुख भोग रहा है, ये भी तो एक प्रत्यक्ष ही है।
- 1:09:44इससे लाभ उठा लो नहीं। अगर ज्यादा मूड हो तो पुत्र फिर
- 1:09:50निकलो फिर वक्त बीता जाता है एक पल और गंवाया तो एक पल चूक गए, एक
- 1:10:01पल पीछे रह गए वक्त बड़ा। मैं रोज़ समझाता हूँ, इसके अलावा
- 1:10:13और क्या समझाता हूँ मुझे बता दो इस इस प्रैक्टिकल रीयल लाइफ
- 1:10:24प्रॉब्लम पे कुछ सलूशन देने का कष्ट करें।
- 1:10:29गुरूजी अति कृपा ओके। बिलकुल कृपा कर जी इसको कृपा समझो
- 1:10:38या मार्गदर्शन देखिए ईश्वर पर दिनकर ईश्वर तुम्हें स्वतंत्रता
- 1:10:50ही प्रदान करता है। और गुरु भी तुम्हें परम स्वतंत्र
- 1:10:55करता है। तुम स्वतंत्र हो इस दौड़ में
- 1:11:00शामिल हो जाओ, मेरा आशीष तुम्हारे संग रहेगा।
- 1:11:08तुम जहाँ। जहाँ चलेगा मेरा साथ होगा मेरा
- 1:11:26साथ। मेरा साया मेरा साया मैं अगर
- 1:11:40बिछड़ी भी जाऊं कभी मेरा। अवम न करना मैं अगर बिछड़ भी
- 1:11:54जाऊं, कभी मेरा अवम न करना मेरा प्यार।
- 1:12:06याद करके कभी आँख न करना तो जो मुड़।
- 1:12:21के देख लेगा। तू जम के देख लेगा मेरा सा साथ
- 1:12:36होगा मेरा साया मेरा साया। मेरा सा मेरा सा।
- 1:12:52चिंता मत करना मैं तुम्हारी लेकिन फैसला तुम्हारा किधर जाना मेरा
- 1:13:05सुन में शामिल हो ना? जब मेरा थिन से निकल के बाहर एक
- 1:13:09कोने पे बैठ जाना इन दौड़ तुमो को देखना चॉइस तुम्हारी यू अरे
- 1:13:16इंडिपेंडेंट, तुम स्वतंत्र हो फैसला तुम्हारा, लेकिन मैं
- 1:13:22तुम्हारी संग। तुम दुखी हो, तुम सुखी हो, तुम गम
- 1:13:29मत कर मेरा संघ तुम्हारे साथ तुम्हारी साई की तरफ शेडों की तरह
- 1:13:37रोको। इसे ही गौरव कहते हैं और गुरु?
- 1:13:46अंतिम वक्त तक तुम्हारी देखभाल करता है ये शरीर ये इन्स्ट्रुमेंट
- 1:13:53जो पूर्जा रहे ना रहे गुरु तो इसके भीतर बैठा मैं हूँ जो कभी
- 1:14:02मरता नहीं सिधता नहीं जलता नहीं गलत नहीं।
- 1:14:06जो उड़ता नहीं हवाओं में तू फानों में वो मैं हूँ कहाँ जाऊंगा कहीं
- 1:14:14नहीं जाऊंगा यहीं रहूँगा हमेशा यहीं रहूँगा तुम फिकर मत करना
- 1:14:23लेकिन जीने को जीने कट्ठा हूँ। तुम्हारा खुद मैं तुम्हारे लिए
- 1:14:31कोई तरक्की व नहीं जुटा पाऊंगा, तुम्हें अपने ही ढंग पैदा करने
- 1:14:35होंगे, मैं तुम्हें बता दूंगा। निचोड़ अगर इधर जाओगे तो ये
- 1:14:42मिलेगा। अगर इधर जाओगे तुझे मिलेगा, अब
- 1:14:48चुनोगे तुम इतना भी तो वो श्रिंक का नहीं होता।
- 1:14:58इतना भी तो हिंसक नहीं होता गुरु। परमात्मा का तुम गाली निकाल देते
- 1:15:05हो परमात्मा को तुम उसके अस्तित्व को अस्वीकार कर देते हो, मारकस बन
- 1:15:12के तुम उसके कर्म सिद्धांतों को अस्वीकार कर देते हो चारवाक बन के
- 1:15:19तुम नीच से कितना कह देते हो? गॉड इस दट।
- 1:15:24लेकिन परमात्मा कभी गुस्सा किया छोटे बच्चों पे कभी गुस्सा आता है
- 1:15:30तो उसके बच्चे हो और तुम्हारा मार्जिन क्या है?
- 1:15:35इस विशाल सृष्टि को एकल्पना नहीं है, यही तो मैं कहता हूँ।
- 1:15:43कि शंकर ने तुम्हें ये अद्वैतवाद का सिद्धांत दे के जो संसार को कह
- 1:15:51दिया देश गुलाम होना शुरू हो गया, तब से क्या हुआ?
- 1:15:56हमारे मन के बहुत अंतराल में बैठ गया ये तो।
- 1:16:01बाल बच्चे जन्म तुमने दिए मिथ्या है छोड़ छाड़ के भाग्य इसी बात को
- 1:16:10मैं सुधार कर लेना चाहता हूँ शंकराचार्य के पीछे लगकर इसे
- 1:16:15मिथ्या समझकर छोड़ छाड़ कर भाग मत जाना।
- 1:16:19ये देखो तुम्हारे सामने रंगदास तुम कहते हो ऐश है, शराब है, शबाब
- 1:16:26है, नृत्य है, गायन है, धन है, नौकर हैं, चाकर हैं, दास हैं,
- 1:16:32दासियां हैं, फिर इस दिशा के। इस समस्या का समाधान बताइए?
- 1:16:43इस समस्या ही नहीं है। जैसे तुम कहो देखो उसने तो कतल कर
- 1:16:49दिया, लेकिन तुमने ये तो नहीं देखा?
- 1:16:52यह बेड़ियों के पीछे बैठा है, कर को जजमेंट।
- 1:16:59जज किया जाए। ही शुड बी हैंग्ड टिल डेथ क्या
- 1:17:06करे और तुम इनके कामों को देखते हो?
- 1:17:12मैच मत देखो इनको कामों को इनके फलों को भी देखो।
- 1:17:17इनसे पूछो थोड़ा सा अगर कोई ईमानदार होगा तो मेरे उस पड़ोसी
- 1:17:23की तरह मुझे बुला के कहेगा पुत्र कभी मत करना ज़रा तुम गौशाला के
- 1:17:30प्रधानमंत्री बन मैं बना था देखो मैं आधा आदमी रह गया।
- 1:17:37आज मुझे कहीं जाना पड़ता है पराधीन हूँ मैं और पराधीन सपने
- 1:17:42हूँ, सुखना हूँ, सपने में भी सुख नहीं होता उसमें पराधीन पराधीन
- 1:17:52नहीं होता। परमात्मा ने तुम्हें स्वाधीन
- 1:17:56बनाया, इसीलिए बनाया और ज़रा भी तुम्हारी स्वतंत्रता से छेड़छाड़
- 1:18:00नहीं करता। वो बड़ा समझदार है, उसकी समझदारी
- 1:18:04का कोई प्रमाण है, उसकी समझदारी का कोई सानी है नहीं, वह अकेला
- 1:18:10है। समझदार।
- 1:18:15इसलिए पुत्र इसपे चाहो तो मुझे मेरे पे छोड़ दो क्योंकि मैंने
- 1:18:24तुम्हें कहा मैं घट घट के अंतर की जानता हूँ, भले बुरे के पीर को
- 1:18:30जानता हूँ। मैं हूँ, मैं हूँ उत्तर अगर मुझे
- 1:18:37ये ना पता चला कि ये 100 ₹500,00,00,000 की रिश्वत लेके
- 1:18:45इधर से उधर गंगा स्नान कर लिया है और ये सुखी है कि दुखी है।
- 1:18:50तो फिर फिर मैं संतनी फिर संतनी, फिर अभी तुम्हारी तरह अज्ञानी ही
- 1:19:02हूँ, मैं जानता हूँ। कि इसने क्या किया?
- 1:19:13क्यों डर के मारे इसने गंगा स्नान कर लिया और परले पार निकल गया।
- 1:19:19मैं सब जानता हूँ लेकिन मैं ये भी जानता हूँ जिससे परले पार निकल
- 1:19:24गया। उधर, तो आप की ज्वालाएं धधक रही
- 1:19:28हैं। जलाये इधर भी धधक रही हैं।
- 1:19:31लेकिन किसी का अब ये बात ध्यान में रखना छोटी सी बात हैं।
- 1:19:35वक्त बहुत हो जाता हैं। तुम समझते हो दूसरी पार्टियों में
- 1:19:41तुम्हे बचाने की क्षमता हैं। भीतर से करुणा के कारण ये बात
- 1:19:45उठती हैं। नहीं कोई वरला तो होता हैं।
- 1:19:50लेकिन बहुत तेरे अपनी गदगियों को रैंक बढ़ाने के सिस्टम में विरोध
- 1:19:56करते हैं। शांति इधर भी नहीं, शांति उधर तो
- 1:20:02है ही नहीं। जो राज़ करते हैं उनको तो शांति
- 1:20:05है ही नहीं पक्का। क्योंकि हुकुमरान को कभी शांति
- 1:20:09नहीं होती तो कबीर ने कहा था धोखा खा लेना पुत्र धोखा दे ना उसका
- 1:20:20कोई निराकरण नहीं हैं, उस दोष का कोई निवारण नहीं हैं।
- 1:20:24धोखा दे दोगे बड़े प्रस्ताव। धोखा खा लोगे तो कुछ ना बिगड़ेगा।
- 1:20:33कुछ गया, कोई चोरी हो गया, कोई धन चोरी हो गया, सोने चोरी हो गया,
- 1:20:38चोर ले गए और आज और चला भी गया तो हम इसके बिना कोई मर ना जाएंगे।
- 1:20:49पर संतोष रुको चोर की बात को याद रखना चोर ने कहा अपने पुत्र को
- 1:20:55पुत्र देखते हो? सामने बड़ी सी बिल्डिंग को
- 1:20:58जगमगाती हुई कितनी लाइटें जमजम हो रही हैं?
- 1:21:01हाँ हाँ देखता हूँ पिताश्री ये पुत्र।
- 1:21:05मैंने सात बार लूट लिया। अच्छा पुत्र के तो जैसे ही जान
- 1:21:15निकल गई, कहानी कह के चोर भूल गया।
- 1:21:23रात को सो गए और पुत्र को साथ ले के जाता था।
- 1:21:26थोड़ा वृद्ध हो गया था, कहीं से छलांग लगानी।
- 1:21:31पुराना तजर्बे का अर्थ था यहाँ से फाण जाओ।
- 1:21:35पुत्र साथ जाता था, बड़ी सहूलियत रहती थी।
- 1:21:43उस दिन पुत्र को जगाया चल पुत्र अर्ध रात्रि हो गई।
- 1:21:47चलो चोरी करने चलो क्या करना है पिता श्री।
- 1:21:51रोज़ ही तो जाती हैं बेटा नहीं मैं नहीं जाऊंगा क्या हुआ कोई
- 1:22:00तकलीफ है, शरीर दर्द है, बुखार है कुछ उह वो है नहीं, कुछ नहीं, मैं
- 1:22:07बला चुका हूँ, पिताश्री फिर क्यों नहीं?
- 1:22:13पिता श्री आपने सुबह दिन में बात कही, मेरी क्या कही बेटा हम तो
- 1:22:21दिन में बहुत सी बातें करते हैं उतरा आप पिता आपने कहा, पिताजी।
- 1:22:30कि वह जो सामने बहुत सी लाइटन लगी जगमगाती हवेली चमचम हो रही है जमा
- 1:22:40जम हो रही है। हाँ देखता हूँ ये पुत्र मैंने सात
- 1:22:44बार। बस मेरा मन बल टूट गया इतनी सी कि
- 1:22:56बेटा मैंने तो न जाने कितनी ही टूटी हैं इतनी मेरा तो मन बल का
- 1:23:00भी नहीं टूटता, बढ़ता ही गया जूं जूं खता की आज हौंसला हो कल हौसला
- 1:23:09हो। छोटा अपराध करता है, व्यक्ति और
- 1:23:11राजनीतिक हो जाता है और उच्च पदों पर पहुँच जाता है।
- 1:23:15कितनी कतल गारत करता है? उसी से डरता है ज़रा सी आहट होती
- 1:23:23है तो दिल सोचता है कहीं ये वो तो नहीं जीसको मारा था?
- 1:23:29तड़पाया था गैस चैंबरों में कहीं उसका कोई रिश्तेदार तो नहीं?
- 1:23:34ये जीवन है इसको तुम जीवन कहते हो बस इसको तुम जीवन कहते हो, तुम
- 1:23:44मुझे बताते यहाँ बेटा पत्र लिख दिया करो।
- 1:23:49पत्र लिख दिया करो। अगर कुछ पूछना हो कुछ बताना हो
- 1:23:57क्योंकि मैसेज तो अब मैं नहीं पढूंगा।
- 1:24:01पत्र लिख दिया करो बाबा जीके घर का एड्रेस।
- 1:24:07हम लिख देंगे क्योंकि वो ही वो ही बात तुम सुनते नहीं, समझते नहीं
- 1:24:23ठहरते नहीं, बढ़ते ही चले जाते हो।
- 1:24:28जब से उस बुतिया की बात मेरे पेट में उतरते है, बाबा ठीक करता हूँ।
- 1:24:34मैंने कहा बेटा कोई दवा ले लो, एंटीस स्वास्थ्य, इन्जेक्शन कोई
- 1:24:44ड्रॉट, वायरन वगैरह ले लो मैफेनिकेस वगैरह टेबलेट ले लो।
- 1:24:49नहीं नहीं बाबा तुम ही करो और अभी करो, मैंने कहा ये डॉक्टर का काम
- 1:24:59है मेरा कल को हार्ट पांव टूट गए तो तुम कहोगी, यह जोड़ो और अभी
- 1:25:06जोड़ो। गुरु गोला नहीं उसका लास्ट कमेंट
- 1:25:17आया एंड सब सब्सक्राइब। अगर तुम मेरा मीर पेट दर्द ही दो
- 1:25:27तो नहीं कर सकते हो तो तुम्हारी कचक नहीं बना के खाऊं।
- 1:25:32बस समझ गया, जीस राह पे निकले थे कुछ खामी है संसार को।
- 1:25:43हम लोग थोड़ा कम समझ पाते हैं। और कितनी देर से बोल रहा हूँ टाई
- 1:25:513000 वीडियो मुझे रोज़ कहते हैं मेरे शिष्य को बस करो बाबा बहुत
- 1:25:56हो गया मोर थान सुफ्फिसिएंट इतना गूढ़ ज्ञान इतनी इतनी लंबी
- 1:26:03वीडियो। रोज़ बोलते हो?
- 1:26:04निरंतर पांच वर्षों अब बंद कर कभी तो रुकना होगा, किसी ने कोई यह जो
- 1:26:22खोपड़ी की खुजलाहट है यह तो उठती है।
- 1:26:25तुरंत ही उसको समाधान चाहिए। लेकिन पत्र लिखोगे पत्र में तकलीफ
- 1:26:31से लिखोगे मुश्किल होगी आपके जीवन की तो पत्र में लिखो मुझे ये तक
- 1:26:37बिलकुल लिखो, मुझको न लिखोगे और किसको लिखोगे?
- 1:26:42उसका एड्रेस हमारी चैनल कंट्रोलर हरप्रीत या रोहित।
- 1:26:47ये लिख देंगे आपको ये बाबा का घर का नंबर है बस एक इनलैंड लेटर।
- 1:26:54उसमें सारी तकलीफ खूब लिखो अच्छी तरह से मैं पढूंगा जो कचरा होगा
- 1:27:03थैंक यू। लेकिन काम के प्रश्न भी होते हैं
- 1:27:08जैसे विकास में काम का प्रश्न, आपके सभी का प्रश्न, उनका जवाब
- 1:27:14मिलेगा। मिलता रहा है आपको बड़े सुंदर
- 1:27:17अल्फाज़ में और अपने अपने अनुभव में से मिलता रहा है दूसरों के
- 1:27:24अनुभव में मान्य नहीं करता। मैंने जो देखा इस जन्म में देखा
- 1:27:31इसलिए किसी जन्म में देखा आप मानो ना मानो कोई फर्क नहीं पड़ता
- 1:27:38लेकिन मैं बोलता अपने अनुभव से वो किसी घर में मैंने अनुभव किया।
- 1:27:43ये डज़ नॉट मैटर। लेकिन मैंने अनुभव किया तो आप
- 1:27:53पत्र लिखो, सारी समस्या लिखो। जो भी समस्या है, अब तो तुम्हारी
- 1:28:00खारिश होती है। हाँ, तुम सिर्फ।
- 1:28:06एक इमरजेंसी में जब कोई प्राण निकल रहा हो, ऐसे ही किसी के
- 1:28:15प्राण मत निकालने बहुत से लोग ऐसे ही बोलते हैं, एक्टिंग करने में
- 1:28:19पड़े और माहिर होते हैं। फाइल के पुरस्कार मिलने चाहिए।
- 1:28:27कहेंगे बाबा जान ही निकल रही है बचाओ ऐसा उत्पाद नहीं चाहिए
- 1:28:33वास्तव में कोई है कुछ अब देखिए, मैं झूठ तो नहीं बोलता।
- 1:28:39आई कैन डू आई कैन डू? यद् भी मुझे पता है कि मैं भला
- 1:28:45मोर ले रहा हूँ, मैं अच्छी तरह जानता हूँ, लेकिन बात तो ठीक है।
- 1:28:50क्या चटनी बना के खाना है? मेरी इतनी सिद्धियां, 700
- 1:28:55सिद्धियां, इतने अनुभव, हजारों जन्मों के अनुभव फिर क्या चाट के
- 1:28:59खाना है? आपके काम जितना आजम आया भी जहाँ
- 1:29:06जहाँ जरूरत हुई और बताने की आवश्यकता नहीं सब जानते हैं जहाँ
- 1:29:13जहाँ मैं काम आ सकूँगा, मैं आऊंगा क्योंकि मैं जी लिया भला बहुत
- 1:29:19बेहतर चीज़। मुझसे अच्छा कौन जी मैं चाहता हूँ
- 1:29:30तुम भी वैसा जियो वैसी सुखद ढंग से जियो परिस्थितियां कैसी भी हो,
- 1:29:40ढंग सुन्दर हो, छीने का तो ज़िन्दगी जीने का मज़ा आता है।
- 1:29:47अगर कोई प्रॉब्लम है, देखें समस्याएं क्या आती है?
- 1:29:51लेकिन हर समस्या का हाल मेरे पास नहीं है।
- 1:29:54तुम कहोगे मुझसे क़त्ल हो गया, बाबा तो मैं कहूँगा भाई ये तो
- 1:29:57वक्त हो तुम समस्या भी दो, मैं देखूंगा।
- 1:30:04तुम्हारे कामों का वर्णन जब कुछ ऐसा है, बहुत सी चीजों में लोगों
- 1:30:09की सरहते होती हैं। उनका इलाज मेरे पास है।
- 1:30:16एक छोटी सी बात बता दूँ रोहित के दो बच्चे।
- 1:30:23किसी ने तंत्र विद्या से करा दी धर्मपत्नी नेहा उन्होंने मेरे पास
- 1:30:31कहा बाबा ठीक है सर, मैंने देखा, चीज़ साफ हुई, मैंने बताया इस नाम
- 1:30:39की लड़की है, औरत है, तुम्हारे साथ है।
- 1:30:44इससे दूर हो जाओ तो हमने ट्रांसफर करवा दी।
- 1:30:48डबवाली से चालपंच कोई जान अम्बाला इसका हल है।
- 1:30:55देखिए ऐसी बातों का जिनका हल है मेरे पास आई कैन डू एंड आई विल
- 1:31:01डू। यहाँ यहाँ आपको जरूरत है वह मैं
- 1:31:08देखूंगा मैं कहाँ कहाँ आ सकता हूँ देखिये अगर एक टन बाहर रख दोगे
- 1:31:13बाबा जी उठाना है मैं रखूँगा, सॉरी ये मेरे बलबूते से बाहर।
- 1:31:20बिलकुल ईमानदार ढंग से चल रहा हूँ आपको चरम को तुम ठीक समझो, तुम
- 1:31:29गलत समझो आपकी तो ज़रा भी परवाह कभी की नहीं ज़माने की मुझे कोई
- 1:31:34परवाह नहीं आप क्या सोचोगे क्या समझ रहे हो क्या सोच रहे हो?
- 1:31:43मैं उससे ज़रा भी प्रभावित नहीं होता।
- 1:31:47मैं जो हूँ वो हूँ तो समस्या लिखना बिल्कुल लिखना।
- 1:31:51अगर आप मेरे से सहो दीक्षित हो, दीक्षा कब मिलेंगे?
- 1:31:57नहीं मिलेंगे, यह कोई बात नहीं है।
- 1:31:59देखिये मैंने आपको पहले भी कह दिया करे एक व्यक्ति का मेरे पास
- 1:32:05भेजा इन्होंने, चैनल कंट्रोल में कह रहा था बड़ा भ्रष्टाचार अरे
- 1:32:13भाई भ्रष्टाचार तो वहाँ होता है जहाँ कोई।
- 1:32:20कोई टैक्स वगैरह का पैसा भ्रष्टाचार जहाँ कोई पैसा नहीं,
- 1:32:27कोई टका नहीं, जो देके जाते हैं, अपनी श्रद्धा से देके जाते हैं,
- 1:32:31इसमें क्या कोई भ्रष्टाचार करेगा? कोई भ्रष्टाचार वगैरह नहीं है
- 1:32:37भाई। ये सभी बेचारे बड़े सेवक हैं और
- 1:32:44इनको इनकी सेवा का फल इनकी मानसिक शांति से, ह्रदय में शीतलता से और
- 1:32:52प्रभु प्रसाद भी बरसाता है। इनके ऊपर प्रभा प्रसाद बड़ा मीठा
- 1:32:56होता है। तो ऐसी समस्या एक मैंने अपने ही
- 1:33:04शिष्य की एग्जाम्पल देकर तो मैं समझाया।
- 1:33:07ऐसी समस्याएं भी होती हैं और ये बिल्कुल 100 प्रतीक्षा सत्य हैं।
- 1:33:17अगर ऐसी समस्या भी हो सकती है आपकी बिलकुल है ये चीजें भी होती
- 1:33:24हैं किसी जाती हुए व्यक्ति के पीठ में कोई छुरा कोई भी घोंप सकता
- 1:33:29है। कतल करना कोई मुश्किल नहीं।
- 1:33:33बात तो सिर्फ ये है। कि आप कानून से डरते हो और जो
- 1:33:37भगवान के कानून से डरता है, वह ऐसा काम नहीं करेगा तो पत्र में
- 1:33:45लिखना बिल्कुल। हमारे भी दिल्ली वाले जो गुरुदेव
- 1:33:51थे वह पत्र पर लिख कर भेजा करते थे।
- 1:33:53खैर, तब तो सोच नहीं थी। लेकिन अब ये सड़क को जलाने में
- 1:33:57बाबा जल्दी ऐसे नीचे लिखा थोड़ा समझो बाबा खुद मस्ती में।
- 1:34:08और ज़रा सीधे दे साथी और ज़रा सी और।
- 1:34:17और ज़रा सी दे दे साती और ज़रा सी और कैसे रंग चूक के मैंने ही क्या
- 1:34:28है वो सभी तक है बाकी। ये जब तक होश बाकी रहता है तो
- 1:34:37समझो शराब ने पूरा असर नहीं किया और ज़रा सी दे दे सा की और ज़रा
- 1:34:46सी और। आप भी मदहोशी के आलम में खो जाओ,
- 1:34:58झूम झूम जाओ, भीतर से नृत्य उठे, मीरा की तरह नाचने रहो सब लाजवाज
- 1:35:06छूट जाये रहे कोई समाज ना। ये खोपड़ी की बात है कोई बंधन
- 1:35:15नहीं तुम्हारी यार तुमसे कोई बंधन नहीं सब तुम्हारे बनाए हुए बंधन
- 1:35:22तुम डरते रहो, डरते रहो अपने जीवन को खुद ही नर्क बनाओगे।
- 1:35:31श्री? कृष्ण गोविंद पर हे मुरार।
- 1:35:50यनु वासु देवा पितुमात स्वामी सखा अमर।
- 1:36:37हमार हे नाथ नारायण? वासुदेव, श्री कृष्ण, गोविन्द,
- 1:36:58हरे मुरारी। वा सुदवा राधे राधे श्याम मिला दे
- 1:37:20गोविंदा गोपाल हरि। राधे राधे शाम मिला दे गोविंदा
- 1:37:29गोपाल हरि मेरी नैय्या पार लगा दे गोविंदा गोपाल हरि।
- 1:37:39राधे राधे आप भी झुम दिया करोगे सो?
- 1:37:44शाम मिला दे गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे श्याम मिला दे गोविंदा
- 1:37:55गोपाल हरे। धन्यवाद।