Latest / Baba ji Vijay Vats / 3 Apr 26 - संत की भविष्यवाणी को ब्रह्मांड कैसे पूर्ण करता है? बाबा जी के धैर्य की एक अद्भुत घटना
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- 0:14बलधान संधू बाबा जी पढ़ाओ मैं बॉम्बे स्टेक एक्स्चेंज में एस ए
- 0:32ब्रोकर काम करता हूँ। आपने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की
- 0:40भविष्यवाणी की थी के 70,000 से एक पैंट नीचे भी चाहे हो 69,999 तक
- 0:52चला जाएगा। अब पचड़ा ये है बाबा की मार्केट
- 1:03यहाँ फंसा हुआ है ना तो आग का वो आंकड़ा दर्ज होता है।
- 1:15नहीं मार्केट ऊपर जा सकता है, ऊपर जाता है तो फिर नीचे आ जाता है।
- 1:22अब इसकी क्या व्यवस्था करें? देखिये पुत्र ऐसा है।
- 1:37कुछ शब्द ऐसे होते हैं सभी नहीं कुछ जो हम बांध कर फेंकते हैं
- 1:48भ्रमण में वो जब तक पूरे नहीं होते।
- 1:55वह भ्रमण के अंदर घूमते रहते हैं और उन्हें पूरा होना ही होता है
- 2:04और यही संत की परिभाषा और लक्षण भी है।
- 2:14तो मुझे याद है तुमने भी लिखा कि बाबा आपने 85,890 में बेचा था,
- 2:21ठीक है तो अगर 72,000 का भाव भी आप लगाओ।
- 2:35तुझे कहो, 13141000 प्वाइंट सेंसेक्स टूट गया और 14,000
- 2:45प्वाइंट सेंसेक्स टूटना मेरी दृष्टि से।
- 2:52मेरे जीवनकाल में मैंने नहीं देखा हो गया होगा शायद 14,000 प्वाइंट
- 3:00के करीब घर जाना थोड़ी सी अवधि के अंदर या कभी हुआ नहीं।
- 3:11खैर अब तुमने पूछा है पुत्र बता रहा हूँ अब क्या किया जाए?
- 3:20बेचे तो फिर मार्केट वहीं आ जाते हैं।
- 3:251000 2005 गेन कर लेते हैं। खरीदते तो वही झगड़ा नीचे बैठ
- 3:33जाती है तो बेटे या तो स्टिल रहो या तो स्टिल रहो, क्योंकि यह शब्द
- 3:48तो पूरा होगा ही होगा। यह वाक्य मिठ्या नहीं जा सकता।
- 3:57जो तीर कमान से निकल गया वह निशाने पर लगेगा और लगकर निशाने
- 4:05पर जैसे सुदर्शन चक्र वापस आ जाता है भगवान कृष्ण का।
- 4:11ऐसे ही मेरे शब्द मेरे तक वापस आएँगे।
- 4:20तुमने पूछा कि बाबा क्या करें? कुछ बातों को मैं?
- 4:28बांध कर फेंका करता हूँ भ्रमण में, जैसे आपको फिर याद कर रहा
- 4:33हूँ बहुत बार बोला भी है मैंने और ये बहुत बड़ी भविष्यवाणी भी है।
- 4:45कि आरएसएस और बीजेपी का नाम लेवा पानी देवा झंडा उठावा कोई नहीं
- 4:53बचेगा। याद होगा तुम्हें अब यह प्रक्रिया
- 5:01मामूली नहीं है। करोड़ों लोग?
- 5:05करोड़ों लोग इस बात के साथ जुड़ें और यह सत्य होगी क्योंकि ये
- 5:21बिल्कुल नहीं हो सकता। केक कृष्ण का छोड़ा हुआ चक्रव
- 5:28बिना संहार किए वापस आ जाए तो मैं अलंकारों में समझाता हूँ।
- 5:38इनका अभिप्राय आप निकाल लें। कुछ भी बना, कुछ भी हुआ आपने
- 5:49कितना भी नज़रअन्दाज़ किया कोई फर्क नहीं पड़ता उससे लेकिन गाहे
- 6:00बगा है। जैसे आपके मोदी जी ने कहा कि
- 6:05कांग्रेस मुक्त भारत था नहीं हुआ, अभी भी कांग्रेस जिंदा है।
- 6:14अभी भी 100 सीटें कांग्रेस के पास हैं लोकसभा की।
- 6:23और दो चार स्टेटस भी होंगे। शायद तो ऐसा नहीं हुआ।
- 6:30कांग्रेस मुक्त भारत नहीं हुआ, लेकिन आरएसएस और बीजेपी मुक्त
- 6:37भारत क्या वैड ही हो जाएगा? उसका कोई झंडा उठाने वाला नहीं
- 6:43होगा। ये शब्द वैसे ही तो रिकॉर्डेड है
- 6:49मेरे बहुत से प्रदर्शन में, लेकिन तुम भी अगर संबंधित हो तो अपनी
- 6:55पूरी। पूरी ताकत भी लगा लेना।
- 6:58मैं तुम्हें ये नहीं कहता हूँ कि मान लो पूरी ताकत लगा लेना कि
- 7:04आरएसएस बची रह जाए, कोई ढील मत रहने देना के बीजेपी बची रह जाए।
- 7:12पूरी कोशिश कर लेना। लेकिन तुम पाओगे के आखिर में मेरी
- 7:21बहुशवाणी ब्राह्मण ने सत्य सिद्ध कर दी।
- 7:27यह सवाल ब्राह्मण का है और ये जिम्मेदारी ब्राह्मण की है, संत
- 7:34बोल देता है। पूरे करने की जिम्मेदारी ब्रम्हंड
- 7:39की होती है, अन्यथा वह दोषी ठहराया जाएगा।
- 7:44अब यह ब्रम्हंड की जिम्मेदारी है कि वह कैसे इनके पचड़े उधड़ेगा
- 7:51उधड़ रहे हैं हम तो देखते थे। अपने आप को इतनी शालीन, इतनी
- 8:05सभ्यता सुसंस्कृत से लदी हुई आरएसएस।
- 8:18बीजेपी आज क्या हाल हो गया है? तुम कहोगे प्रमाण प्रमाण जब तक
- 8:27व्यक्ति गद्दी पर बैठा है, प्रमाण पूरे नहीं आया करता क्योंकि तब तक
- 8:34ये वैश्य? वैश्य जब मीडिया को बिकी हुई
- 8:40मीडिया को मैं वेश्या कहता हूँ, वैश्य शब्द वैश्य से बना है वैश्य
- 8:47जो व्यापार करता है, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, सूत्र, वैश्य जो
- 8:54व्यापार करता है। लेन देन करता है।
- 8:59कोठे में बैठी हुई वैश्य अपना शरीर सुपुर्द कर देती है।
- 9:03पैसे के बदले राजनीति के लोग पैसे के बदले औरते के बदले अपना ईमान
- 9:13व्यय देते हैं, अपनी आत्मा को गिरवी रख देते हैं।
- 9:18न्यायपालिका की कुर्सी पर बैठा हुआ न्यायाधीश पैसे के बगरे अपना
- 9:23ईमान और न्याय व्यय देता है। इन्हें ना तो न्यायाधीश कहा करो।
- 9:39न इन्हें मीडिया के बोलने वाले एंकर कहा करू ये वैश्य हैं जैसे
- 9:52आप किसी दुकानदार के पास ये दुकानदारी करते हैं।
- 9:57दुकानदार के पास जाते हो लो भाई मूंगी की दाल दे दो, सब्जी
- 10:05मार्केट में जाते हो, फल मार्केट में जाते हो, आप पैसा दे देते हो,
- 10:08फल ले आते हो, सब्जी ले आते हो या व्यापार हो, जहाँ लेन देन हो वो
- 10:15वैश्य होती है। फिर किसी ने अपनी इंटेलेक्चुअलिटी
- 10:21बेची, किसी ने अपना ईमान बेचा, किसी ने अपना शरीर बेचा, किसी ने
- 10:27सामान बेचा, ओह बेचा कुछ भी हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन
- 10:32वैश्य मैं उन्हें कहता हूँ। अब ये वैश्य हैं जो सत्य को झूठ
- 10:39में परोस रही हैं। आपके समय हालांकि धर्म इस बात की
- 10:45इजाजत नहीं देता। इनके भीतर भी आत्मा कहीं न कहीं
- 10:49तल पर कीचड़ से लिपटी पड़ी है। वह आवाज़ देती है लेकिन इनको
- 10:58सुनाई नहीं पड़ता। इनको पैसे की छन छनट अच्छी लगती
- 11:03है इसलिए ये बिक जाती हैं। पैसे के बहाने से कोठे पर बैठी
- 11:11हुई वैश्य। पैसे से बिक जाती है और बहुत से
- 11:20गद्दार हुए तख्त तो तहस के कारण बिक गए, वो भी वैश्य हैं
- 11:30जिन्होंने आजान प्रदान किया। वो सब व्यापारी हैं।
- 11:33आप इसकी वास्त डेफिनिशन को समझना। इट्स ए ह्यूज डेफिनिशन वाइटल
- 11:45डेफिनिशन वाइटल डेफिनिशन। जो आदान प्रदान करता है, वो वेश
- 11:59तो मैंने पहली भी परमात्मा ही है जो वेश नहीं है।
- 12:08क्योंकि वह बदले में आपसे कुछ नहीं मानता।
- 12:14लेकिन क्या करें जब कोई धर्म जब सारे धर्म उसको जबरदस्ती वैश्य
- 12:24बनाने पर तुलजाएं? मतलब मतलब लोग कहें कि नहीं हम
- 12:32थोड़ा बहुत तो वापस कर दें। चलो इसका नाम ही ले दे घंटा तो
- 12:37घंटा बैठ के इसकी पूजा आरती, प्रतीक्षा।
- 12:43सौर सो प्रचार पूजन इस काल भैरव का दही, कपूर, देसी घृत दूध के
- 13:00साथ ही स्नान करके थोड़ा सा तो चुका दें।
- 13:05तो याद रखना तुमने परमात्मा को वैश्य बना दिया जबरदस्त कभी
- 13:12परमात्मा ने मांगा कि तुम मेरा नाम जपो।
- 13:19इस सारे तुम्हारे ढोंगी व्यापारी लोग गर्मात्मा को वेश्या बनाने पे
- 13:25तुले हैं जबरदस्ती जबरदस्ती जबकि उसने कभी नहीं कहा।
- 13:3621% ऑक्सीजन परमात्मा ने हमारे वातावरण में हमें दी है 78%
- 13:47नाइट्रोजन है 1% बाकी की गैसेस, कार्बन डाइऑक्साइड, हीलियम वगैरह।
- 14:01तुम ऑक्सीजन ले लेते हो, कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ लेते हो, हर पल
- 14:06छोड़ते हो, हर पल ऑक्सीजन लेते हो अन्यथा तुम जी नहीं सकते।
- 14:10कोरोना में ऑक्सीजन के बिना क्या हाल हुआ?
- 14:18वह तुमसे कभी वापस नहीं मांगता तुम उसकी हर जीवनदायिनी चीज़ को
- 14:25मल मूत्र में कार्बन डाइऑक्साइड में गंदगी में बदल के फेंक देते
- 14:29हो वह ज़रा भी गला। तुम उसकी पाप बनाशिनी गंगा को बैज
- 14:43से युक्त कर देते हो, ज़रा भी नहीं मैं इन लोगों से कहा करता
- 14:55हूँ तुम राधे, राधे करो या पांच नाम करो या राम राम करो।
- 15:01तुम परमात्मा को जबरदस्ती वैश्य बनाने पे तुल गए हो और इसका अंजाम
- 15:07अच्छा नहीं होगा। तुमने कभी देखा नामधारियों को कभी
- 15:16सुखी देखा तुमने? भागवत कथा के वाचिकों को तुमने
- 15:26कभी सुखी देखा? सरकार उनको पद्मश्री से, पद्मभूषण
- 15:34से, पद्मविभूषण से भारत रत्न से सम्मानित कर सकती है।
- 15:39लेकिन वो तो कागज है। परमात्मा की कचहरी में ये कभी मान
- 15:48नहीं पा सका था। पंचे पांवई दर का मान तो जिसने
- 15:57अपनी। पांचों इंद्रियों को कंट्रोल में
- 16:03कर लिया। वो है पंच वो महावीर हो गया और
- 16:11परमात्मा की कचेहरी में उसे ही सम्मान मिलता है।
- 16:17इस कचहरी में भी हम महावीर को सम्मान देते हैं।
- 16:21यद्यपि नाम तो उनका वर्धमान हम उनको खिताब देते हैं।
- 16:28महावीर बहुत मुश्किल काम तुम जिनके पांव पूजते हो।
- 16:38पश्चिम के तो डॉक्टर ने घोषित कर दिया है इट इस इम्पॉसिबल टु बी
- 16:44सेलिब्रेट ब्रह्मचारी होना असंभव है।
- 16:51उनसे क्या कहोगे जिन्होंने साथ लिया है?
- 16:58लेकिन मज़े की बात ये है कि जिसके क्या है उसको इन्होंने देखा नहीं
- 17:08और उस व्यक्ति की वृत्ती ऐसी हो जाती है कि वह दिखावा करना नहीं
- 17:13चाहता। तो इनको पता भी कैसे चलेगा तो
- 17:19इसमें किसी प्रकार के आश्चर्य करने की बात नहीं है।
- 17:23ये मार्क्स कह देते हैं कि परमात्म नहीं ज़रा भईया शर्म मत
- 17:28करना। नीच से कह देते हैं कि नहीं है,
- 17:32परमात्मा मर चुका है। चारवाक कह देते हैं कि परमात्मा
- 17:39क्या यहाँ लेन देन का कोई हिसाब नहीं होता।
- 17:46टैक्सपेयर के पैसे से जहाज खरीद लो?
- 17:50चाहे तुमने एपिस्टीन के आइसलैंड पे ही क्यों न जानो ऋण मुकृत व
- 17:59गर्दनम पे बैठो, वस्त्र मुक्त से देहस्य।
- 18:08हुनर आगमनम कुतह अब यह एक्शन और रिएक्शन के सिद्धांत को भी नहीं
- 18:14मानता। ये कहता है उधारी ले लो, मोड़ना
- 18:19नहीं पड़ेगा और तर्क बिल्कुल साफ सुथरा है।
- 18:25कि जब कोई वित्तीय ऋण देने वाला मर गया तो वापस किसको करोगे और
- 18:34कर्ज लेने वाला भी मर जाएगा? यह मांगेगा किस्से।
- 18:41तर्क बड़ा साफ सुध है। असल में तर्क साफ सुथरे ही होते
- 18:45हैं। इसलिए तो समझ में आ जाती हैं
- 18:48आचार्य की बातें आपको आचार्यों की बातें आपको समझ में आ जाती हैं
- 18:56क्योंकि साफ सुथरी होती हैं। तुम उसी तल पर बैठे हो।
- 19:00जस तल पर आचार्य बैठे हैं। संवाद आसान हो जाता है।
- 19:13कृष्ण के साथ संवाद आसान ही नहीं होता, क्योंकि कृष्ण तुम्हारी तरफ
- 19:19से नहीं बोलते। कृष्ण तुमसे बहुत दूर हो, उनकी
- 19:29आवाज़ तुम्हें सुनाई ही नहीं पड़ती है।
- 19:32इसलिए संवाद इतना आसानी से नहीं हो पड़ता।
- 19:38पंचों का गुरु एक। पांचों वृत्तियों पर विकार पर
- 19:47कैसे विजय प्राप्त हो? ज्ञान के दौरान बाबा ने बोला, सब
- 19:54कुछ है, लेकिन अगर कोई मूर्ख शब्दों का।
- 20:00अर्थों का अनर्थ कर लें तो बाबा तुम्हें रोकेंगे नहीं रोकेगा कोई
- 20:10संत जो बाबा के तल पर पहुंचेगा कभी आएगा वो तो पंच भिकारों पर।
- 20:19विजय प्राप्त करने वाला महावीर होता है और उसको सम्मान मिलता है।
- 20:26उसकी के चेहरों में पुत्र तुम्हारे प्रश्न को हाल सिर्फ तभी
- 20:43होगा। यह सेंसेक्स 69,999 के अंक को
- 20:52छूएगा क्योंकि यह सारे ब्राह्मण की जिम्मेदारी है।
- 20:59मेरे शब्दों को पूरा। मैं तो बोल के निश्चिंत हो गया।
- 21:13बहुत साल पहले तीसो साल पहले मेरे पास एक व्यक्ति आया था शादी के
- 21:22लिए। मुझे फोटो नहीं कुछ मैंने कहा कि
- 21:26इससे बेटे, बेटे, बेटा होगा, इससे बेटी बेटी होगी, इससे दो बेटियां
- 21:33होंगी, इससे दो बेटा होगा और ला दे फोटो मैं तुझे बता देता हूँ।
- 21:45उसने जिसके बेटे होने से वो लड़की चुन ली ये अभी की बात है।
- 21:50कोई ज्यादा पुरानी इसी जन्म की बात है।
- 21:54मेरी उसकी शादी हो गई। उसके दो बेटे भी हो गए।
- 22:01बेटी होने के बाद वो कहता है कि परमात्मा होता ही नहीं, कई बार
- 22:11ऐसा करता नहीं कि अब बेटा ले ले। भाई जी कहाँ से लेगा?
- 22:22लेकिन अकड़ आदमी की अकड़ रस्सी जल गई मगर बल नहीं आपने रस्सी देखी?
- 22:32बली में बड़ी रस्सी जिसमें बट्ट उठते हैं, अक्सर बाजार में मिल
- 22:36जाती है वो पटसन की बनी होती है। उसको आग लगा देना, वह बिल्कुल
- 22:46उसका बल नहीं जाएगा, काली हो जाएगी, जलते और काली क्या हो
- 22:52जाएगी, बल विहीन भी हो जाएगी, उसको थोड़ा सा हाथ लगाओ तो वह
- 22:58सारी काल में तब्दील हो जाएगी। तो रस्सी जल गई, मगर बल नहीं हो
- 23:06गया। ऐसे ही अहंकार ही लोग दुख भोगते
- 23:15रहते हैं। अहंकार कैसे खत्म हो और हम सुखी
- 23:21कैसे हो जाएं? गुरु से इसका फॉर्मूला कभी नहीं
- 23:28पूछते हैं, लेकिन धन्यवाद ही हैं वो लोग जो गुरु से इसका फॉर्मूला
- 23:36पूछते हैं। गुरु तो सदा ही बांटने को तैयार
- 23:44आया ही बांटने के लिए गुरु के भीतर अगर परमात्मा अवतरित हुआ वो
- 23:53खुशबू पैदा हुई है फूल के भीतर। फूलने उस खुशबू का क्या करना है
- 24:02इसलिए वो बांटता है कुछ नशा पुटियां सुगंधित हो जाएं, कुछ
- 24:13दिमाग खिल जाएं। किसी व्यक्ति का रोम रोम आनंदित
- 24:20हो उठे। झूठ यही कामना है।
- 24:25फूल के वो एक मूर्ख कवि है। उसने लिखा।
- 24:32मुझे फेंक देना बन माली मुझे तोड़ लेना बन माली उस पथ पर तुम देना
- 24:39फेंक मातृभूमि पर शीश कटाने जाते हों जहाँ भीर अनेक।
- 24:46मैंने कहा ये मुर्ख है। हर व्यक्ति की जीवन यहाँ स्वतंत्र
- 24:55है और यह सत्तासीन लोक या तानाशाही की वृत्ति के लोग।
- 25:18ये फेंक देते हमसे मैं इनसे कहता हूँ सावधान फूल की निजी ज़िन्दगी
- 25:28है वह पल दो पल का शहर सुबह खेला है सांज डल टाइप।
- 25:39उसकी निजी स्वतंत्रता और निजी ज़िन्दगी जिन्हें कहा हकदार है हे
- 25:49कभी श्रेष्ठ वैसे तो मैं मुर्खा कहूंगा तुम्हे क्या तुमने फूल से
- 25:56भी पूछा कि उसकी इच्छा क्या है? क्या फूल से पूछा कि उसकी इच्छा
- 26:04क्या है? वह भगवान के चरणों में अर्पित
- 26:10होना चाहता है, यह वह दुष्ट। राजनीतिज्ञों के ऊपर बरसना चाहता
- 26:21है या वह मातृभूमि के लिए सर कटाने वाले वीरों के पांव के तले
- 26:29आना चाहता है कभी फूल से पूछा था? तुमने अपनी खोपड़ी से ही विचार
- 26:37करके लिख दिया इनको मैं आचार्य कहता हूँ जो दूसरों की स्वतंत्रता
- 26:48को छीनकर अपनी बुद्धि से। व्याख्यायित किया करते हैं,
- 26:54डिफाइन किया करते हैं चीजों को अर्थों।
- 26:59ऐसे ही बुद्धूओं ने गीता अष्टवक्र गीता उपनिषद।
- 27:10और ऐसे ऐसे शानदार गुण ग्रंथ जो उपजे उस भीतर के रस में तत्व के
- 27:19पास जाकर ये खोपड़ी में बैठे बैठे बोल देते हैं, उसका अर्थ भले ऐसा
- 27:28हो सकता है। मैं यहाँ बैठा बैठा ताजमहल को
- 27:33देखे बिना ताजमहल के सौंदर्य का व्याख्यान करता रहूँ और मैंने
- 27:44ताजमहल की मूर्ति भी कभी ना देखा। तुम जीस परमात्मा के विषय में बोल
- 27:51रहे हो, उसकी कोई मूर्ति होती भी नहीं।
- 27:57मुझे कल ही किसी ने पूछ लिया बाबा आप कहते हो परमात्मा आपके पास आता
- 28:03है, किस रूप में आता है? मैंने कहा वह मालिक है, किसी भी
- 28:13रूप में आ सकता है तो इतना व्रत आपके पास साकार रूप में कैसे आ जा
- 28:21सकता है? मैंने कहा तो इसका मतलब ये है।
- 28:26के परमात्मा साकार रूप धरने में असमर्थ है तो उसकी बोलती बताओ, वह
- 28:36सर्वसमर्थ है वह कुछ भी कर सकता है जो चाहे।
- 28:48तुम कहते हो कि इतना विराट सीमित होकर तुम्हारे सामने बैठ जाता।
- 28:53हाँ, तुम देखना कभी भरी गर्मी के अंदर जून जुलाई के महीने में एसी
- 28:59जलता होगा और मेरे पांव के पास एक कम्बल रखा होगा।
- 29:07तुम देखना कभी आके एक कंबल किस लिए है क्या मुझे इतनी गर्मियों
- 29:15में भी ठंड लगती है? नहीं, यह है कंबल सिर्फ उस
- 29:21परमात्मा के लिए जीसको थोड़ी सी मैं ऊंची गद्दी पर बैठाना चाहता
- 29:27हूँ। प्रभु आप यहाँ बैठ जाओ, मैंने
- 29:30बहुत बार लोगों से कहा है तो प्रणाम करके जाते हैं, उसे चूम के
- 29:36जाते हैं, मैंने कहा यहाँ आकर परमात्मा बैठता, बहुत सालों से
- 29:41मैं यही बात कह रहा हूँ आपसे तो मैंने बात अभी खोली न?
- 29:48लेकिन मेरे पास आने वालों को तो बहुत पहले से बता रहा हूँ।
- 29:52मैं तो यह कम्बल उस सर्जन हारे के लिए बना है कि आप यहाँ बिरा जाओ।
- 30:05थोड़ा ऊंचे बैठो मेरे से विख्यात नी हुई नाक का गुण संज्ञा तत हे
- 30:16जहाँ बना हे सारे ब्राह्मणों के बाली बाली।
- 30:28यह आपका ही बनाया हुआ तंत्र और यंत्र आपके चरणों में नृत्य है
- 30:40शब्दों में आपको बोला नहीं जा सकता।
- 30:50लेकिन नियम नहीं होते। लेन देन नहीं होते।
- 30:53तुम किसी का खाके मर गए, अगला जन्म नहीं होता तो ये तुम्हारी
- 31:00दिमाग की काटें। इस्लाम कहता है इसाईयत कहती है बस
- 31:05एक जन्म होता है किसने बताया तुम्हें?
- 31:12हजरत ने बताया हजरत को किसी ने बताया और हमारे संत कहते हैं वह
- 31:33अनंत अनंत अनंत अनंत जन्मो तक। तुम्हारे साथ रहता है जब तक
- 31:42तुम्हारी चेतना का वह शून्य अंश परिपूर्णता तक नहीं पहुँच जाता।
- 31:56लेकिन अगर तुम कहोगे कि लव क्रिबिटेशन नहीं है और ऐसा चारबाक
- 32:05पैदा हो सकता है जो कहें कि लव क्रिबिटेशन डज़ नॉट इग्ज़िस्ट।
- 32:14कह सकता है कोई आपत्ति नहीं, लेकिन क्या चीजें ऊपर फेंकोगे तो
- 32:20नीचे नहीं आएँगी, नियम काम करेंगे, नहीं करेंगे, करेंगे तो
- 32:29एक व्यक्ति अगर मूर्ख हो गया। तो क्या उसके पीछे तुम वाद बना के
- 32:34बैठ जाओगे? मार्क का स्वाद चाणक के वाद क्या
- 32:46तुम वाद बना के बैठ जाओगे नहीं? बस अपनी पहुँच के अंदर ही रहो तो
- 32:54श्रेष्ठ तुम ईमानदार उस दिन कहलाओगे, जीस दिन कहोगे मुझे कुछ
- 33:04पता नहीं परमात्मा का लेकिन मैं अंदाज़े से बोल रहा हूँ अपनी
- 33:11खोपड़ी की। तहूं को उधार उधेड़ के नीरोंंज को
- 33:17छांट काट करके अपनी ही देखी हुई, सुनी हुई समझी हुई पढ़ी लिखी हुई
- 33:25महान पुरुषों से सुनी हुई चीजों को जोड़ तोड़ के बोल रहा हूँ कहीं
- 33:31की ईंट कहीं का रोड़ा। भानुमति ने गुण बाजोड़ा
- 33:48तुम्हारा कुछ भी बोलो ना याद रखो तुम्हें देना होगा क्योंकि वो
- 33:56झूठ। मैं रोज़ बोलता हूँ।
- 34:10यूट्यूब के ऊपर मेरा सारा डेटा उपलब्ध है और इस डेटा को अगर आप
- 34:17बिखेर दोगे तो बहुत दूर तो किसका फैलाव होगा?
- 34:26लेकिन अगर मैं इसे कॉम्प्रेस करके छोटे से यंत्र में डालू तो ये आ
- 34:36जाएगा ना उसमें और वही डेटा होगा। जब तुम चाहोगे तब इसे खोल लो और
- 34:47सारा कुछ सुनते रहो। उस डेटा को कंप्रेस करके सारा
- 34:56यूट्यूब वेरी 3000 वीडियो। उस डेटा को कॉम्प्रेस करके एक
- 35:12छोटे से यंत्र में डाला जा सकता है कि नहीं जा सकता है तो क्या
- 35:20परमात्मा? अपने सारे विस्तार को एक जगह पे
- 35:27हिम्मत नहीं कर सकता कर सकता है और देखो वह तुम्हारी छोटी सी
- 35:35यंत्र में भी पड़ी रहेंगी। चीज़ यूट्यूब पे भी पड़ी रहेंगी।
- 35:40किसी व्यक्ति ने डाउंलोड करी होगी, वहाँ भी पड़ी रही होगी और
- 35:45पता नहीं कहाँ कहाँ यही डेटा पड़ा रहा होगा हार्ड डिस्क में भी हो
- 35:57सकती है, लेकिन मैं तुमसे पूछता हूँ कि इतना विशाल करता।
- 36:053000 वीडियो दो 2 घंटे की हैं कई तो उसको कॉम्प्रेस करके हम एक
- 36:17छोटे से यंत्र में नहीं डाल सकते हैं डाल सकते हैं।
- 36:23क्या उससे वह मर जाएगा? उसकी तो मर जाएगी।
- 36:26नहीं मरेगा। जैसे ही हम इसको प्रकट करना
- 36:31चाहें, हम उसको प्रकट कर सकते हैं।
- 36:36समझाने का प्रयास कर रहा हूँ क्योंकि तुम बुद्धि से ही समित
- 36:39हो। उसके सिवा तुम्हारे पास इससे
- 36:48श्रेष्ठ यंत्र है ही नहीं। देखिए तुम इतनी बातों को एक पेन
- 36:59ड्राइव के अंदर डालकर ले जा सकते हो, हार्ड डिस्क में डाल सकते हो
- 37:05और किसी को पता भी नहीं चलेगा कि इसके अंदर।
- 37:08कितना मसाला है अगर तुमने कहीं भी किंतु परंतु की उसका सीधा सा मतलब
- 37:19है कि तुम उसे सीमित समझ रहे हो तुम समझते हो कि वह।
- 37:29सिर्फ निराकार है नहीं, मुझसे लोग पूछ लेते हैं बाबा वह निराकार है
- 37:37कि साकार है सगुण है कि निरगुण मैंने कहा यह प्रश्न तुम्हारा
- 37:46व्यर्थ है। प्रश्न सही नहीं, दोनों ही साकार
- 37:53भी हैं, निराकार सगुण भी हैं निरगुण और तुम्हारी बुद्धि यकसन्न
- 38:05सोचती है एक तरफ़ सोचती है इसलिए ऐसा प्रश्न उठता है।
- 38:10तुम जब जाके वहाँ देखोगे अनंत विस्तार को तो तुम पाओगे दो है ही
- 38:18नहीं साकार निराकार शगुण निरगुण का भेद वहाँ बैठ जाता है और बाबा
- 38:25जब आकर समाधि से कहते हैं पहली बात एक।
- 38:31सौगण भी वही, नरगण भी वही, पापी भी वही गर्मात्मा भी हुई, चोर भी
- 38:37हुई, डाकू भी हुई, दाने भी हुए और अगर डाकू अलग है तो उसे फिर अपना
- 38:45अलग से शैतान बनाना होगा। एक परमात्मा इस नॉट असफिशियंट फॉर
- 38:54हिम, लेकिन उस विस्तार में जब तुम जाओगे तब तुम देखोगे जिधर देखता
- 39:04हूँ उतर तू ही तू है। हर जरे में तू ही तो रुक तो अगर
- 39:19तुम कहते हो कि बाबा अब थोड़ा सा 12 1500 प्वाइंट कराया गया है, अब
- 39:29इसके लिए कोई? कृपया ये है कि मैं अपने संकल्प
- 39:37को वापस नहीं देता। जितना गिर गया, गिर गया और वह
- 39:45नहीं वापस करेगा। ब्राह्मण जद जद।
- 39:48भी कर बैठता है। ब्राह्मण चित्र कर लेता है नहीं
- 39:52अब वापस नहीं होगा। ये तीर कमान से छूट गया, अब यह
- 39:57पूरा करके ही वापस होगा तो दो ऑप्शन है, मैं कह के देख लूँगा,
- 40:04वैसे तो गनी गयी छोड़ी रही होगी, बीती जाए।
- 40:11अब इतना नुकसान खा लिया 85,890 से शुरू करके तुम कहते हो बाबा भक्त
- 40:22चार से भी नीचे आ गया तब रिहा किया गया।
- 40:2870,000 से अगर एक पॉइंट कम रह गया तो मेरी बात ठीक हो गयी तो 1800
- 40:372000 पार्टी है तो मैं वापस से ले लेता हूँ कि चलो भाई तुम अपनी
- 40:44मर्जी से कह लो। ब्राह्मण को मुक्त कर दूंगा,
- 40:50लेकिन ब्राह्मण अगर मेरी बात नहीं मानेगा की नहीं, ऐसा होता नहीं
- 40:54है, वैसा होता नहीं है। आप तो दूसरा तो कोई काट ही नहीं
- 41:01सकता। संत खुद चाहे तो काट सकता है।
- 41:08तो अगर तुम इसी 1000 1500 पॉइंट से मरे जा रहे हो और 15,000 पॉइंट
- 41:15से तुम नहीं मरे तो कोई बात नहीं मैं वापस ले चूका।
- 41:29फिर वह जानें, बेहतर ले भी आएगा 1000 2000 पैंट और नीचे कर देगा,
- 41:36कोई खास बात नहीं, मैंने इतना कम तो बोला भी नहीं।
- 41:41मैंने 69999 तक लेके खींचे थे। अब वहाँ तक कुछ ज्यादा बचा भी
- 41:47नहीं है शेष, लेकिन फिर भी चलो मैं वापस ले लेता हूँ।
- 41:56अगर आपका कोई फायदा होता है तो मैंने वापस ले लिया।
- 42:05अब उठेगा ऊपर उठ जाएगा, नहीं उठेगा, नहीं उठेगा उस कुछ भ्रमण
- 42:09की इच्छा अकेला मैं बहुत से शांत हैं यहाँ जिन्होंने अपनी अपनी
- 42:20भविष्यवाणियां कर रखी। और वह सबकी सुनता है।
- 42:38तुने पूछा पुत्र के आपने कह दिया ठीक तो हो गया हाँ ठीक तो हो गया
- 42:44क्रिप प्रिप ठीक हो गया लेकिन फिर भी चलो।
- 42:52मैं वापस ले लूँगा ले लिया अब चाहे ऊपर जाए, चाहे नीचे जाए,
- 42:59मेरा कोई मतलब एक और क्वेश्चन थोड़ा सा आ रहा
- 43:12है। सूक्ष्म से उसका जवाब मैं दे दूँ
- 43:16कि टाइम बैंड अगर कोई भविष्यवाणी होती है ना वो तो होएगी ही होएगी।
- 43:22जैसे मैंने आपसे कहा कि 20 अप्रैल 2138 को शाम को 4:00 बजे के करीब
- 43:31कुछ मेंटें दूर हो सकता है, उनका पात होगा और भारी विनाश हो जाएगा।
- 43:4020 अप्रैल 2138 यह टाइम बैंड हो रही है।
- 43:47यह भविष्यवाणी टाइम बैंड है। यह भविष्यवाणी टाइम बैंड नहीं थी
- 43:54देखने में तो आमतौर से। यह सेंसेक्स बहुत कम था जब से मैं
- 44:05इसका भाव देखा करता था 12 1300 हुआ करता था 12 1300 हाँ तो वहाँ
- 44:13से उठा वहाँ से उठा कहाँ तक पहुँच गया?
- 44:21तो टाइम बैंड विश्वाणी छोटी सी बात मुझे याद आ गई।
- 44:25एक व्यक्ति अमीर परिवार के बेटे के साथ मेरा झगड़ा था।
- 44:31झगड़ा मेरा नहीं था, एक पूरी की पूरी संस्था का झगड़ा था।
- 44:37उन्होंने मुझे हेड के रूप में नियुक्त कर दिया था कि जैसे बहुत
- 44:43से लोग आके मुझे पैसे दे जाएं, आप अपनी जिम्मेदारी को पें किसी आदमी
- 44:50को वह पैसा दे दो? और उससे वापस लेते रहो
- 44:56इंस्टालमेंट्स तो ये किया मेरे भाई ने शुरू किया लेकिन उसकी डेथ
- 45:01हो गई थी सुरेश की तो मैंने उसको संभालना।
- 45:06मैंने कहा कोई बात नहीं, तुम चिंता मत करो, मैं संभाल लूँगा
- 45:09इसको। तो मेरे संभाले संभाले एक बहुत
- 45:14अमीर घराने का बच्चा थोड़े से पैसे उस वक्त में 30401000 होगा
- 45:26शायद पक्का याद नहीं। तो मुझसे संस्था बोली कि आप इसको
- 45:37नोटिस भेज दो, अब पैसा तो उनका था, वो जा के वकील को खुद करे,
- 45:43वकील की फीस दे आये। मेरे पास तो वकील को देने की फीस
- 45:47भी नहीं थी। तो समनिंग उसके घर में चली गई।
- 45:55उसने समनिंग को पढ़ा, अमीर का बेटा अहंकार अहंकार को चोट लगी।
- 46:10वह शाम को शराब पी के मेरे पास आए।
- 46:19खूब शराब पी। उसने मेरे पास आया, मैं दुकान पर
- 46:22ही सोया करता था। ऊपर अकेला 1982 की बात है, शायद 8
- 46:33जुलाई की रात की। वह मुझे बहुत गालियां निकालने
- 46:40लगा, गालियां निकालते देखकर क्योंकि लोग मुझे बहुत ही जानते
- 46:45थे, प्रेम करते थे, वो सब इकट्ठा हो गए थे, एक व्यक्ति उनमें से
- 46:51बोला। कि तुम मिट्टी के हो क्या इतनी
- 46:58गालियां निकालने के बाद तुम में से कुछ भी नहीं कहते मैंने करनी
- 47:07है अभी नहीं अगर मैं कुछ कहूंगा। तो वक्त आने पर कहूंगा अभी पाप का
- 47:16गढ़ा पूरा भरा ना खैर वह और गालियाँ निकालता रहा, बहुत
- 47:27गालियाँ निकाली उसने। काफी देर तक फिर उसने मेरे मुँह
- 47:34के ऊपर पान खा रहा था, पान थूक दिया, पीठ पान के मैं जेब में
- 47:40सफेद रुमाल रखा करता था। मैंने रुमाल निकाला, मुँह पोंछ
- 47:45लिया। लेकिन उसने फिर गालियां निकालनी
- 47:51शुरू कर दी। ये टाइम बैंड ब्यूशोनी की बात
- 47:56करता हूँ। 8 जुलाई की वो रात के 10:00 बजे
- 48:02होंगे। बहुत जनता इकट्ठी हो गई।
- 48:09इसी गजड़वा शहर की बात मेरी दुकान के आगे डॉक्टर धर्मपाल की दुकान
- 48:18के एक दुकान छोड़कर हमारी दुकान होते थे।
- 48:26उसने फिर काफी गाली निकालने के बाद फिर और सभी बोलने लगे कि देख।
- 48:33तू गाली मत निकाल भाई, ये ब्राह्मण व्यक्ति है, तुझे बोलता
- 48:41कुछ नहीं और हमें पता है हमारे ही पैसे हैं, वो तो इकट्ठे हुए थे
- 48:46उनमें से बहुत लोग। थे, उसमें संजय दा किस से होती
- 48:50है? वो इंस्टॉलमेंट्स कमिटी से कहते
- 48:54हैं उसे आज भी चलती होंगी। उसने फिर मेरे मुँह के ऊपर थूक
- 49:04दिया। मैंने उसे कहा भाई सो जाने दिया
- 49:12मुझे, मैं सोने से रहा था, तू बाकी सुबह निकाल लेना तो मीरा
- 49:21इतना कहते ही वह भोला। गाली निकाल के बोला कि सुबह तक तू
- 49:34जीवत रहेगा बमना पंडित जी को ब्राह्मण कहते हैं, बमना बमना अगर
- 49:41सवेर तक तू जीवत रहेगा तो ही तेरे को गाली निकालूँगा।
- 49:48अब मेरे भीतर का परमात्मा बोल उठा और वहाँ प्रत्यक्ष दृश्यों ने
- 50:01मेरे ये शब्द सुने मैंने कब से ठीक है?
- 50:07फिर जाओ। लेकिन एक बात सुनते जाओ मैंने
- 50:13उसकी कालद पीछे से पकड़ लिया वो कहता मैं जाऊंगा मलोट अपने ससुराल
- 50:25में और ट्रक भर के आदमियों को लेके आऊंगा तेरा सिर काट के लेके
- 50:30जाएंगे। तो जब वो वापस जाने लगा तो मैंने
- 50:37पीछे से उसका कॉलर पकड़ लिया। यह थी टाइम बैंडब्यू सॉरी मैंने
- 50:49कहा देखो। ये इतने लोग प्रत्यक्षदर्शी हैं।
- 50:54सुबह यह यह गर्दन तो ऐसे ही रह गया।
- 50:58सुबह ये गर्दन तो ऐसे ही रहे और सो गा मुझे पता नहीं लेकिन तू सो।
- 51:11तुम्हारी ये गर्दन सुबह नहीं होगी अब वहाँ खड़े हुए लोग मुझे जानते
- 51:20थे, वो कांपने लगे, डरने लगे मुझे एक मित्र ने कहा आपने ये क्या कह
- 51:29दिया? मैंने कहा मैंने नहीं कहा ये उसने
- 51:37कहा जो सर्जन आ रहा है इसमें मेरा कोई रोल है, मैं आराम से सो गया
- 51:44और देखो जब संत बोलता है मुझे बहुत से लोग पूछ लेते हैं।
- 51:49एक बिटिया ने पूछा, आपने जब कहा कि तेरे दो बेटे होंगे तो मैं
- 51:53नींद ठीक से आ गई थी। मैंने कहा हाँ क्योंकि ये
- 51:58भूश्रृणी मैंने नहीं की थी, ये भूश्रृणी जिसने की थी वह खुद
- 52:03करेगा ये से ए लिखे, तिस से। जब फरमाए थे थे, मैंने बोला ही
- 52:12नहीं, बोला ही परमात्मा ने और उसके दो बेटे ही हो गए।
- 52:23फिर परमात्मा नहीं, वो कहते परमात्मा होता है।
- 52:29परमात्मा मुझसे कहने लगे रोटी आती।
- 52:32कहते कोई बात नहीं विजय मैं इससे निपट लूँगा।
- 52:44अब परमात्मा कैसे निपटता है मुझे कुछ नहीं पता, लेकिन यह परमात्मा
- 52:52के शब्द हैं कि विजय मैं इससे निपट लूँगा।
- 53:06ये होती है और सुबह मुझे खबर मिली मैं किसी चाय की दुकान पे जाकर
- 53:13चाय पिया करता था। जब चाय के घूंट में भरने लगा तो
- 53:20वहाँ पर बैठे हुए उसे मैं चचा जी कहता था, चचा जी।
- 53:24आज मीठा थोड़ा सा ज्यादा करती है। कहती कोई बात नहीं, आज मेरा दिमाग
- 53:34मेरे पड़ोस में रात को एक लड़का। उसका सिर किसी ट्रक ने या किसी बस
- 53:50ने निचोड़ दिया। बस ऊपर से सिर के ऊपर से चली गई।
- 54:02वह सिर मांग रहा था। मेरा और परमात्मा बोला कि तेरा
- 54:11सिर सुबह नहीं रहेगा या तू सिर से रहेगा?
- 54:18तो जब वह बोलता है तो। एक तो समय की अवधि में आ जाता है,
- 54:28एक समय की अवधि के पार्क होता है, उसमें वक्त बैट नहीं होता लेकिन
- 54:33वो घटनाएँ घटती हैं अवश्य। तो अब ये जो घटना मैंने बताई।
- 54:41उस समय बैठ चाहे न भी हो लेकिन करीब करीब उस दिन से शुरू हो गया
- 54:45ढूंढ़ना। तब कोई युद्ध की बात भी नहीं थी।
- 54:53कुछ ऐसा नहीं था। सिर्फ शांत मुहूर्त शायद मैंने 20
- 54:58मार्च के। 20 फरवरी के आसपास ये बोला है
- 55:041820 फरवरी के आसपास और 28 तारीख को जंग शुरू हुआ है ईरान का और
- 55:11अमेरिका का। उसके बाद मार्केट गिरी।
- 55:19लेकिन भविष्यवाणी टाइम बैंड तो नहीं थी लेकिन टाइम बैंड ही होगी
- 55:25एक हिसाब से क्योंकि तब से घटता घटता घटता ये ओवर ही न पाया।
- 55:34खैर। तो वह व्यक्ति का सिर वह स्कूटर
- 55:43पे जा रहा था, कोई बस से कोई ट्रक मैं आराम से सोया हुआ मुझे कोई
- 55:48पतंग सुबह मैं चाय पीने गया तो चाचा ने मुझे बताया कि ऐसा यह हो
- 55:54गया हमारे पड़ोस में तो मुझे पता चला।
- 56:00फिर सारे बाजार में लोग मेरे पास आये, मेरे कहते आप थोड़ा सा ध्यान
- 56:10से बोला करो, मैं बोला ही नहीं, ध्यान से ही कब लो?
- 56:18जब मैं बोला ही नहीं भाई मैं बोला तुम तो कहते थे तुम बट ठीक है, मत
- 56:22हो, बोलते क्यों नहीं कहा ना तुमने फिर मैं कहाँ बोला भाई बोला
- 56:28वही और अंत में वही बोला करता है जब आदमी चुप हो जाता है।
- 56:37तो आदमी की चुप्पी के बाद जो बोला करता है, आदमी की परम चुप्पी के
- 56:44बाद जो बोला करता है वह सृजन आरंभ हुआ करता है।
- 56:49फिर उसका बोल साधु बोले सहज स्वभाव, साधु का बोला बिरथा न
- 56:56जाए। यह साधु उस वक्त परमात्मा होता
- 57:00है, वह परमात्मा बोलता है। यह टाइम बैंड विश्वाणी नहीं यह
- 57:07टाइम बैंड वो बात है जो परमात्मा ने कहा हो के रहे और उसी टाइम के
- 57:14अंतर्गत हो के रहे। अब ये जो मैंने भविष्यवाणी की,
- 57:19तुम देख लेना और मैं सदा ही कहता हूँ बीजेपी वालों से आरएसएस वालों
- 57:24से कि तुम अपनी पूरी कोशिश लड़ा लेना कहीं तुम्हारे मन के किसी
- 57:30कोने में ऐसा कोई संदेह ही ना रह जाए कि हमने कोशिश नहीं की?
- 57:35देखो सरेआम किती बार पुरम और अब फिर कहता हूँ कि पूरी कोशिश करो
- 57:44चाहे और पांच 400, 1000 लाख लोग वैश्य क्रीतरो बोलने के लिए बोलती
- 57:52रहने को झूठ ही तो बोलना है। पैसा दे दो पैसे से ये बिक जाती
- 57:59हैं जो पैसे से बिक जाये वो वेश्या होती है लेकिन फिर भी तुम
- 58:07पाओगे के सभी शिवानी को। तुम टाल नहीं सके तुम देखोगे 1
- 58:19दिन अकाल पर जाएगा। अकाल किसका बीजेपी का और आरएसएस
- 58:25का? मैं किसी पार्टी से संबंधित नहीं।
- 58:32मेरे भीतर से तो परमात्मा ने आवाज दी।
- 58:37अरबी की एक कहावत है आवाज आए खलक नकार आए, खुदा खलक की, आवाज
- 58:48परमात्मा का नगण हुआ करता। और ये नकारा तो बहुत पहले बच गया
- 58:54था। शायद साल डेढ़ साल हो गया होगा।
- 58:58इसको कहे को आवाज आए, खनक नकार आए।
- 59:04खुद यह सत्य होकर रहेगा। इसमें मेरे रहने या रहने का कोई
- 59:15ताल्लुक नहीं है। यह बात ब्रह्मांड ने अपनी
- 59:22रिकॉर्डिंग में फीड कर दी। अब उसकी जिम्मेदारी है।
- 59:27वह निभाएगा ही निभाएगा। वह बड़ी सर्वोच्च सत्ता, बड़ी
- 59:33न्यायकारी? आखिर किसी कारण से ही उसने मुझसे
- 59:38कहलवाया होगा। मैंने तो कहा नहीं मुझे कोई द्रोह
- 59:42नहीं है। किसी का ना बीजेपी से दो है।
- 59:46न कांग्रेस से प्रेम मैं सत्य के पक्ष में बोला करता हूँ और असक्ति
- 59:53के विरोध में बोला करता हूँ, बस इसे तुम कुछ प्रिय कह लो या निंदा
- 59:58कह लो सत्य के। हक में बोला करता हूँ, असत्य के
- 1:00:10बे हक में बोला करता हूँ विरुद्ध बोला करता हूँ बस यही है पर भाषा
- 1:00:17मेरे बोलने की। हे दिल दी भगवान खेल हे क्या जाने
- 1:00:38हे दिल। दे वाने खेल हैं क्या?
- 1:00:50जानें दर्द भरा ये। गीत कहाँ से इन होठों पे आए दूर
- 1:01:14कहीं ले जा। भूल गया क्या भूल के भी है मुझको
- 1:01:37यार। ज़रा सा फिर भी मेरा मन प्यासा।
- 1:01:58मेरे नैना सावन बादों फिर भी मेरा मन प्यासा।
- 1:02:19फिर भी मेरा मन प्यार कृष्णा कृष्णा।
- 1:02:38कृष्णा।