Latest / Baba ji Vijay Vats / 28 Sep 25- गर्भ संस्कार क्या है? भगवान शिव से सीखी अद्भुत और रहस्यमयी विधि! आज आप सबके लिए!
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- 0:06बाबा जी पर हाँ एक शलोक बाचूंगा उस शलोक को
- 0:24बताइए, इसका अर्थ क्या है और कहाँ से लिया गया है?
- 0:34मॉम भैष्टा, वाम ब्रह्माण गर्व अभ्या पुरुषों महान विष्णु भक्तों
- 0:49महाभाव। सर्व लोकेश्वर विश्वतः।
- 1:00यह श्लोक बागत प्रांत से लिया गया है।
- 1:07सातवाँ संकंद है, दूसरा और तीसरा अध्याय है।
- 1:14ये शब्द नार्द ने कही। आइए इसकी कहानी की गहराई मिर्च
- 1:29पहली बात तो तुम्हें पता था मैं प्राणों का तिरस्कार तो करता हूँ।
- 1:38लेकिन तिरस्कार इन पाखणियों को करता हूँ, जो प्राणों के अर्थों
- 1:44को गलत कर लेते हैं। तिरस्कार तो मैं उन पाखणियों का
- 1:49भी करता हूँ जो जपजी का गीता को पृष्ठ, उपनिषद इनका अर्थ अर्थ कर
- 1:56लेते। प्राणों का विरोध ही नहीं हुआ।
- 2:01प्राणों को जीस ढंग से बांचा गया। उसका विरोध बहुत बार मैंने कहा
- 2:08पुराने की जलेबी कितना है? उसके भीतर रस भरा पड़ा है।
- 2:16तो आइए। इस श्लोक की गहराई में चले
- 2:22प्राचीन कहानी कहानी है। जब मैं कहूँ तो समझ लिया करो।
- 2:35इसके भीतर कुछ अर्थ हैं। कहानी गलत है, जैसे कोई फ़िल्म
- 2:48हो, उसका मोहर आपको दिखाने के लिए कुछ पात्र गढ़ लिए जाए।
- 2:59और उन छात्रों का चाल चलन चरित्र बोलचार उनसे तुम समझ सको की इस
- 3:08कहानी का मोरू समझाना क्या चाहती है?
- 3:13कहानी देवताओं में और दैत्य में युद्ध हुआ।
- 3:23दैत्यों में युद्ध हुआ तो दैत्यों का युग महादिराज था।
- 3:29हिरण्यकश वह तप में नहीं था, हिरण्यकश तब कर रहा था।
- 3:45और मौका देख कर देवताओं ने जच्चो पे आक्रमण कर दिया।
- 3:59अगर राजा ना हो तो अकेली फौज सेनापति का करे कमांड तो है।
- 4:08बड़ी मुश्किल में आया है। थोड़ी देर तो झगड़ा हुआ, लड़ाई
- 4:11हुई। बहुत से देवता हमारे है, तुम
- 4:21पूछने चाहोगे क्या दैत्य भी तब करते है हम लोग को जब हम मंदिरों
- 4:28में जाते है? दत्य गुरुद्वारा में जाते हैं,
- 4:32मस्ज़िदों में जाते हैं, चर्चों में जाते हैं, गिरजाघरों में जाते
- 4:37हैं, इनके ऊपर अकेले देवताओं का साम्राज्य नहीं आदि कहते हैं।
- 4:45दोनों के लिए खुला है भगवान का दर्श।
- 4:48कोई भी जा सकता है दत्य भी तब करता है कभी कभी तो दत्य जा के
- 4:59उपदेश भी देने लग जाते हैं। उनका नाम उजागर नहीं करूँगा।
- 5:08तुम खुद ही समझ लेना। जो गलत शिक्षा देते हैं, मानवता
- 5:14को गलत रह के भटकाते हैं, वही तो देते हैं और जयते कोई सींक थोड़ी
- 5:20लगे होते हैं, कोई दांत थोड़ी बाहर आए होते हैं, साधारण मानव की
- 5:26तरह मानव। जो व्यक्तियों को कहानियों के
- 5:32माध्यम से ठाकुर जी को नामदेव की माता बनाते हैं, गर्भवती करते हैं
- 5:42और दैत्य ही तो हैं और क्या है ऐसे ही अनेक?
- 5:51पहचान लेना इन जैतों को और पहचान लेना उन देवता को देवता को जो
- 5:59तुम्हें देता है सही मार्ग, सही मार्ग से बड़ा उन्य और कुछ और गलत
- 6:09मार्ग के। हिलावय कोई बात नहीं होता जो
- 6:13तुम्हें भटकाता है, किसी स्वार्थ के निहित वहरक्ष्य देत जिसका कोई
- 6:23स्वार्थ नहीं करुणावश्य तुम्हें भटकाता नहीं, सही राहत।
- 6:30वह दैत्य नहीं, वह देवता है। भयंकर युद्ध हुआ तो दैत्य हारने
- 6:42लगे क्योंकि हिरण्य का शुक्र तब कर रहा था देवताओं ने।
- 6:52सभी राक्षिशो को बंदी बनाना शुरू कर दी।
- 7:02हिरण्यकशब की धर्मपत्नी थी कयाधूँ कयाधूँ उस वक्त गर्भवती सभी को
- 7:13कैद कर लिया तो कयाधूँ वो भी कैद कर।
- 7:16क्योंकि वो महारानी थी, मुख्य राक्षस ही तो वही थी, उसको भी
- 7:26पकड़ लिया क्या जब मारने के लिए ले जाया क्या?
- 7:31हमको तो रास्ते में कहानी है। तुम इनका वद करोगे नहीं?
- 8:09उस वक्त यह शरूख नारद के मुख से निकला।
- 8:20यह भागवत महापुराण का शब्द है। सात में स्कंद का दूसरा तीसरा
- 8:30अध्याय। क्यों कहा गया?
- 8:42इसका अर्थ क्या है रहस्य आत्माकृत क्या है?
- 8:47गहरे चल जब जब रहस्य की बात होगी, मैं उन आनंद के समुद्र में गहरा
- 8:57उतर। क्योंकि रस उसके सिवा और कहीं
- 9:02नहीं है, रस वही रस है, खोपड़ी में रस नहीं खोपड़ी में ऊब है
- 9:11तर्क है, तलवार की धार है तीखा पर है।
- 9:17रस नहीं जो मिश्री सी घोष है तुम्हारे वन में सुलाते लोरी तो
- 9:27देवाशीर अर्थ ने कहा हे इंद्र इसके घर में जो बच्चा है।
- 9:37अरे नारायण भक्त निकलेगा तुम इसको छोड़ दो।
- 9:45अब लुटिया डूब चुकी थी। सारे हिरण्य कश्यप का साम्राज्य
- 9:49ध्वस्त हो गया था तो नारथिनी का पुत्री तो मेरे आश्रम में रहो।
- 10:00इसको श्रेष्ठ शृंगार, इसको श्रेष्ठ सुविचार संस्कार यहाँ
- 10:12चौबीसों घंटे श्रीहरि की। कथा होती है।
- 10:19अब आइए हम इसके साइंटिफिक मु्द्दे पे हैं जब बच्चा घर में होता है
- 10:31चार महीने तक बच्चे को सुनने की। कोई क्षमता नहीं होती, ना देखने
- 10:40की क्षमता होती ना सुनने की क्षमता होती।
- 10:45यह क्षमताएं बाद में विकसित होती हैं।
- 10:52तीसरे महीने। बच्चे का लिंग निर्धारण हो जाता
- 10:58है। पता चल सकता है तुम्हें मशीनों के
- 11:01द्वारा बच्चा स्त्री है या पुरुष चार महीने तक श्रवण यंत्र।
- 11:14और शक्षु यह डेवलप्ड नहीं होते तो श्रवण यंत्र शुरू होता है।
- 11:20पांच महीने, चार महीने बीत जाने के बाद धीरे धीरे प्रक्रिया को
- 11:27समझ ले तो गर्भवती स्त्रियों। पांचवाँ महीना छठा और सातवाँ
- 11:38आठवाँ सारी नींव इन महीनों में रखी जाएगी।
- 11:49वैज्ञानिक कहते हैं सकारी ज्येष्ठ कहते हैं।
- 11:54कि व्यक्ति ने 7 साल में जो सीख लिया, बच्चे ने सारी उम्र वश वो
- 11:58ही करेगा, गलत है। कभी खोज होनी बाकी बच्चे ने जो
- 12:08माँ के गर्भ में सीख लिया वो ही सीख लिया।
- 12:12इसलिए गर्भवती स्त्री को पहले अच्छे माहौल में सुसंकृत माहौल
- 12:22में, धार्मिक माहौल में, आध्यात्मिक माहौल में, वीरता के
- 12:28माहौल में। रखा जाता था।
- 12:37उसे वीरों की कहानियों सुनाई जाती थी।
- 12:47महाराणा प्रताप शिवाजी मरकटा बहुत से वीर हुए उससे पहले।
- 12:57अनगणित वीरपुर तो ध्यान रखना, मैं फिर बोलेंगे सबको तीन महीने तक
- 13:07लिंगन निर्धारण और पाँचवा महीना शुरू होते श्रवण यंत्र।
- 13:18बच्चों को थोड़ी थोड़ी सुनाई पढ़ना शुरू होता है, वो
- 13:22प्रतिक्रिया देता है, ध्वनियों का रिएक्शन करता है, लेकिन अभी दिखना
- 13:29शुरू नहीं होता। बच्चों को फिर चने, चने?
- 13:38पांचवां छटा सातवां और आठवां इन महीनों में उत्तरोत्तर उसके श्रवण
- 13:51की क्षमता बढ़ती करती है। और आठवें महीने में तो बच्चा तेज
- 14:00आवाजों से घबराता है। आठवें महीने में बच्चा तेज आवाजों
- 14:07को रिएक्शन भी करता है। जैसे ही कोई तेज आवाज़ होगी, जैसा
- 14:12फ़िल्म में चलेगा गर्भवती श्री को।
- 14:17पाँचवें महीने शुरू होने के बाद बच्चे के जन्म तक तेज होने वाली
- 14:27शोरगुल के वातावरण में नहीं रहना चाहिए।
- 14:33और मूवी से बचना चाहिए। बिल्कुल कतई बचना चाहिए।
- 14:47प्रार्थनाएँ सुनें ईश्वर भजन सुनें, भक्ति गीत संगीत सुनें,
- 14:56गाथाएं सुनें वीरों की। कहानियों सुनाएं सुंदर सुंदर
- 15:12कहानियों ध्यान रखना, खास तौर से साथ में महीने में।
- 15:28सातवें महीने में बच्चे की सुनने की क्षमता इतनी प्रभावी हो जाती
- 15:33है कि वह अक्षर से माँ का सुना हुआ एक एक शब्द सुनेगा।
- 15:45और वह कनेक्टेड है। माता अगर माता सुनते सुनते सो गई
- 15:51है तो उसे कुछ सुनाई नहीं पड़ेगा क्योंकि उसके सुनने की क्षमता तो
- 15:56विकसित हो गई लेकिन वह कनेक्टेड है।
- 16:01माता की कहानी से। अगर माता सो गयी तो फिर बाहर क्या
- 16:07हो रहा है, उसे कुछ पता नहीं। यही कहानियों वीरभूम्य द्रोपदी को
- 16:20चक कर वृहो के भीतर प्रवेश करना सीखा रहे हैं।
- 16:24बता रहे हैं अर्जुन उन लोगों को ज्ञान था कि गर्भ में बच्चों को
- 16:37जो समझा दिया जाए बस वो आखिरी उनकी संपत्ति होगी।
- 16:42मानसिक संपत्ति। बाहर आके तो तुम्हारे सर तुम्हारे
- 16:47आचार्य पता नहीं क्या क्या ठूंस देते हैं तुम्हारे नूर आंसू और
- 16:51बात अलग है, मैं बात करता हूँ गर्व के भीतर मुझे भी सुन लेना।
- 17:04मैं किसी लिखी लिखाई सुनी सुनाई कहीं कहीं विवाद के पर यकीन नहीं
- 17:10करता मैं जानता हूँ मैंने देखा है और गर्भवती स्त्रियाँ और जिनके
- 17:19अभी 7 दिन हुए अभी बच्चे। जन्म देनी है।
- 17:25उन्होंने इन बातों को ठीक से समझ ले।
- 17:35पाँचवें महीने के बाद तो अर्जुन सुना रहे हैं चक्रव्यूह के भीतर
- 17:42प्रवेश करने का मार्ग दिल का। वे टु एंटर इन चक्कर विवाह सारा
- 17:55सुना देता है, बड़ी कठिन प्रोसेसर है और बड़े ध्यान से द्रौपदी
- 18:01सुनती है। और अर्जुन सुनाता जाता है,
- 18:06द्रौपदी सुनती जाती है, बड़ा लंबा प्रसंग है, द्रौपदी सुनता, सुनता
- 18:12सो जाती है। प्रसंग सुनाता रहता है अर्जुन
- 18:26द्रौपदी सो जाती है अर्जुन अपने देखे अपने समझे सारा प्रसंग सुना
- 18:33देता है कैसे प्रवेश करना है चक्रव्यूह में और कैसे तोड़ के
- 18:39बाहर निकलना है अर्जुन तो जानता है महारथी।
- 18:44लेकिन द्रौपदी बस प्रवेश करने तक का सारा भरोसे सच्ची तरह से सुन
- 18:50लिया उसने और बच्चे के दिमाग में भिड़ोगे यहाँ से हम भी लेना बात
- 18:54है बच्चे का दिमाग माता के साथ संयुक्त होता है।
- 19:03यह दो दिमागों में जाता है, माता के दिमाग में भी जाता है और बच्चे
- 19:07के दिमाग में भी जाता है। दो स्थानों पे भीड़ हो जाता है,
- 19:19सारी कहानी कह दी गई आदि सुनी आदि श्रीश रह गई।
- 19:30वक्त आया चक्रव्यूह का अर्जुन को और काम था अर्जुन उधर उलझ गए इधर
- 19:42चक्रव्यूह की संरचना की वाघूमन बोला।
- 19:46पिता श्री मुझे आता है प्रवेश करना अर्जुन वहाँ मार खा गया,
- 19:54गलती लग गई अर्जुन से अर्जुन को ये पता नहीं था के भेदते वक्त जो
- 20:00मैं सुना रहा था, वो द्रौपदी ने सुनी नहीं सो गई थी।
- 20:16भीतर प्रवेश तो करके और उसकी इतनी कुशलता देखकर सातों के सातों
- 20:21महारथी खुद द्रवणों किसको सिखाया किसने?
- 20:29इसने कभी वाण विद्या सीखी है? ये सीखा कहाँ से?
- 20:36लेकिन तुम्हें नहीं पता बच्चा गर्व में ही आइंस्टीन बन सकता है
- 20:45अगर कोई विद्वान व्यक्ति उसको फॉर्मरेशन समझाना शुरू कर दे।
- 20:50मेरे इस सत्य को अच्छी तरह समझाना, ये तथ्यात्मक सत्य है
- 20:57बच्चे को जो भी बनाना चाहते हो तो सिखाओ उसको ई इज़ इक्वल टू एम सी
- 21:06स्क्वायर। अच्छी तरह से समझाओ और बच्चा जन्म
- 21:14से ही विद्वान हो जाएगा बच्चा जन्म से ही भौतिकी में बस ऐसा
- 21:23समझो मास्टर हो। इसलिए मैं आपसे एक बात कहा करता
- 21:30हूँ, शायद आपने गोर नहीं किया, मैंने आपसे कहा कि आप मेरे
- 21:40प्रवचनों को रात को लगा के सो जाया करो।
- 21:44क्यों कहा चेतन सो जाएगा? चेतन में वो भीड़ होता रहेगा जो
- 21:57चीजें बोली गई हैं वो रहस्यत्मक है।
- 22:03अर्जुन ने जो बात समझाई वो रहस्य की बात नहीं थी, वो एक कला थी और
- 22:09कला? पूरी पूरी बुद्धि से समझी जाती
- 22:12है। जब कोई व्यक्ति तुम्हे समझायेगा
- 22:19और तुम्हारी बुद्धि जागती होगी तो तुम्हे थोड़ा थोड़ा समझायेगा उस
- 22:27बच्चे को। तो जो अर्जुन समझा रहा था वो
- 22:34संसार की बात थी, विद्या थी वर्ण विद्या, वो कोई रहस्य की बात नहीं
- 22:43थी, लेकिन मैं आपसे कहता हूँ रहस्य की बात।
- 22:52गर्भास्थ शिशु के वक्त अगर माता इन रहस्यत्मक वीडियो को सुनती रहे
- 23:01रात को सोते वक्त और सुनते सुनते सो जाए सो जाए।
- 23:11यही मैंने आपसे कहा नींद आए अजब वो आपके रहस्य की बातें आपके भीतर
- 23:17चली जाएंगी। उस अंतःस्थल पर जहाँ रहस्य खुद
- 23:21विराजमान है वो आपके अचेतन के गहरे मन में।
- 23:31फील्ड हो जाएंगे। जरूरत बढ़ने पर वह बाहर चेतन में
- 23:37आ जाएंगे। फिर आपको गुरु की कोई आवश्यकता
- 23:41है। ये एक मेथड मैंने आपको बहुत पहले
- 23:47बता दिया था। बहुत से लोग इसका इस्तेमाल करते
- 23:50हैं। उनकी ज़िन्दगी में बदलाव आने शुरू
- 23:55हुए हैं। उनकी ज़िन्दगी मेरा सुतरना शुरू
- 23:58हुआ है। उनके स्वभाव में बड़ा विशाल फरका
- 24:01है। वो दिनभर दीवानों की तरह मस्ती
- 24:04में रहते हैं और अपने काम की एक बात को सुने।
- 24:08अगर तुम क्रोध में होगे तो कम काम करोगे।
- 24:13अगर तुम मस्ती में होगे, आनंद में होगे तो काम भी दुगना करोगे।
- 24:19ये अलग ही बात है। क्रोधित व्यक्ति।
- 24:27ठीक से ढांक से निपुणता से काम को नहीं कर पाता है।
- 24:32वह अव्यस्थ है, अस्त व्यस्त है, शांत व्यक्ति बड़े धीरज से काम
- 24:41करेगा, उस संसार को या अध्यात्म? तो ये मत समझीना कि अगर हम
- 24:51परमात्मा की राह पर चल पड़े तो परमात्मा की राह में चलने से
- 24:57संसार में बाधा बनेगी। तुम गलती हो, तुम्हें किसी ने
- 25:00बताया है परमात्मा। की राह में चलने से तुम शांत होते
- 25:06जाओगे और शांत व्यक्ति की कार्य क्षमता कैपेसिटी टू वर्क
- 25:15इम्युनिटी बढ़ती जाएगी। सहन शक्ति भी बढ़ती जाएगी।
- 25:36रात को रहस्यत्मक वीडियो को रग को कान में लगाकर सूचना फ़ोन को
- 25:48एयरफोन को वीडियो सुनती जाए। तुम जागते रहोगे वीडियो एक लोरी
- 25:56की तरह चलती जाएगी तुम दिन में ही सो जाते हो बहुत से लोग मुझे कहते
- 26:02हैं बाबा पांच बार सुन पूरी सुन नहीं सो जाते।
- 26:13स्वर्ग है क्योंकि आवाज उस स्थल से आई जहाँ से आनंद का गुंजार
- 26:22होता है और उसकी आवाज इतनी मठी है, लोरी का काम करती और तुम सो
- 26:29जाते हो। बचपन से ही तुम्हें यह संस्कार
- 26:35है, तुम उसे माँ की आवाज़ समझ लेते हो और तुम सो जाते हो तो जब
- 26:51तक तुम जगते रहो, जगते रहना। तुम पाओगे जिन लोगों को नींद नहीं
- 26:58आती वो जो फॉर्मूला 1 दिन 2 दिन 4 दिन तुम पाओगे, 1 दिन तुम्हें
- 27:05नींद आ ही गई इसकी लोरी को तुम्हारा दिमाग कब तक इग्नोर
- 27:14करेगा? सोना ही पड़ेगा।
- 27:16उसे नींद आए तो सो देना और जब तुम
- 27:37सोओगे वीडियो चल रहा है ऐसा पक्का है कि जो इसके बाद आएगा।
- 27:46वह तुम्हारा चेतन तो फिर नहीं कर पाएगा, लेकिन अचेतन में गया हुआ
- 27:50बड़ा गहरा होता है। अचेतन गहरा है चेतन के बाद
- 27:58अवचेतन, सबकॉन्शियस और अवचेतन के बाद अचेतन, अचेतन, गहरा।
- 28:09तो चेतन सोया तो अचेतन में ये स्टोर हो और एक बात और ध्यान रखें
- 28:20जो कुछ भी तुम्हारे अचेतन में स्टोर हो गया।
- 28:24वह कहीं नहीं जाता, तुम्हारे भीतर ही रहता है और अगर तुमने आनंद की
- 28:32बात सुनी तो तुम पाओगे अगर गर्भस्त्र शिशु के वक्त माता
- 28:45सुनेगी। तो बच्चा इन शब्दों को पहचानेगा
- 28:52इस आवाज़ को पहचानेगा इस समुद्र को पहचानेगा इस रस को पहचानेगा और
- 29:03इस रस की भनक लगती ही। बच्चा सो जाएगा या ध्यान में चला
- 29:10जाएगा या योग निद्रा में चला जाएगा।
- 29:13यह कर्मार्थ जितना तुम्हारे चेतन में फेल हुआ उससे इतर।
- 29:29जो तुम्हारे अचेतन में जाएगा वह तुम्हारी ज़िन्दगी भर के लिए
- 29:33तुम्हारी संपत्ति हो जाएगी वह तुम्हें पता भी नहीं चलेगा वह
- 29:40अचेतन में उतरा हुआ तुम्हारा आनंद का रस धीरे धीरे वाष्प भी तोता
- 29:45है। और वाश भी हो के वो तुम्हारे
- 29:51क्षेत्र में आता है और तुम खुश रहते हो सारी तुम्हें पता ही नहीं
- 29:56चलता ये खुशी आई का ये खुशी वो है जो तुम्हें किसी अज्ञात लम्हे
- 30:05में। तुम्हारे भीतर उतर गई और तुम्हें
- 30:08पता भी न चला तुम्हें यानी चेतन मन को पता न चला।
- 30:15यह आनंद का भंडार तुम्हारे भीतर इकट्ठा हो गया जब तुम सो रहे थे,
- 30:21एक अपंत दो काज हो रहे थे। तुम्हारे शरीर के टिश्यूज़ भी
- 30:25रिस्ट्रक्चर हो रहे थे, प्रकृति अपना काम कर रही थी और अध्यात्म
- 30:33का काम भी तुम कर रहे थे। इस अलगाव को अच्छी तरह से समझ
- 30:42लिया तुम ये जो सुनोगे। तुम ये मत समझना ये बेकार जाएगा।
- 30:50यह जब इतना स्टोर हो जाएगा तो तुम अनजाने बिना किसी कारण के अकारण
- 31:02प्रसन्न रहने शुरू हो जाओगे। और आनंदित रहने सो जाओगे।
- 31:07तुम्हें पता भी नहीं चलेगा कि मैं आनंदित क्यों?
- 31:14मैं तुम्हें बताता हूँ तुम क्यों आनंदित हो जो उन लम्हों में
- 31:19तुम्हारे भीतर यह रश उतरा है। शब्द नहीं जाएंगे।
- 31:27रस रस की एक एक तह जमती जाएगी, जमती जाएगी और जतिन विशाल इतना रस
- 31:41इकट्ठा हो गया है। उस वह वाष्प बनना शुरू हुआ।
- 31:48एवपोरटे एवपोरटीओन विल हैपन उसके वाष्प तुम्हारे चेतन मन में
- 31:56आएँगे। वह इतने ठंडे होंगे, इतने मदमस्त
- 32:01होंगे। इतनी खुमारी से युक्त होंगे और
- 32:06तुम उन्हें लम्हों में कुछ भी करते हो, तुम आनंदित होना शुरू हो
- 32:13जाओगे और पता भी नहीं चलेगा। ये आनंद आया उस बच्चे को ही यह
- 32:19पता नहीं चलेगा, मैं आनंदित क्यों?
- 32:22माता ने इसके लिए प्रयास किया। अगर माताएं वास्तव में बच्चे को
- 32:33ये चार महीने का वक्त दे दें तो बच्चे की सारी जिंदगी आनंदमयी हो
- 32:43जाएगी। आज तुम आनंदित व्यक्ति को दिया
- 32:48चेराग ले लेके ढूंढ़ते हो तुम्हें मिलता नहीं फिर आनंदित व्यक्ति ही
- 32:55पैदा होंगे अगर इस मेरी बात को तुम मान दोगे, गर्भस्थ शिशुओं को
- 33:01गर्भस्थ माताओं को। मैं यह विधि बता रहा हूँ और जो
- 33:07शिशु उत्पन्न हुए हैं कुछ पर होंगे कुछ वो जब थोड़ा डबल होंगे
- 33:17तो आप उनकी मानसिकता देखना। छोटी सी उम्र में वो बुद्ध को मात
- 33:26देते है। उनके चेहरे का लावान्य और नूर
- 33:33बुद्ध से कमतर नहीं होगा और उन्होंने किया भी कुछ नहीं होगा
- 33:38ये तो मेरे को वो। विधि बता रहा हूँ जो मैंने बाबा
- 33:49से सीखी है। भगवान शंकर से आई हुई ये बातें
- 33:55तुमने विज्ञानभरे तंत्र तो पढ़ लिया।
- 33:58लेकिन मात्र 112 विधियों ही नहीं हैं और भी बहुत सी विधियों हैं।
- 34:03करोड़ों करोड़ों विधियों हैं, अरबों अरबों लोग हैं और सब की
- 34:11विधि अलग है तो बाबा द्वार बताई गई ये विधियों।
- 34:18उनमें से एक शानदार भी थी, श्रेष्ठतम भी थी माताओं के लिए
- 34:24मैं बता रहा हूँ गर्भस्थ माता के लिए अपने शिशुओं के लिए चार महीने
- 34:32अगर तुम्हें आने वाले बच्चों से स्नेह।
- 34:37वो लड़का है या लड़की, इसका फिक्र मिस करना है।
- 34:41तुम देखोगे? उसके संस्कार ऐसे होंगे कि देवता
- 34:45शर्मा जाएंगे वो इतने शांत स्वभाव के होंगे बच्चे कि उनका सांनिध्य।
- 35:00पाते ही तुम खुद खेल उठोगे ये तुम्हारा ही खलाया हुआ फूल
- 35:05तुम्हें ही खुशबू दे दे, कहा तुम ही लुत्फ उठाओगे, इसकी खुशबू का
- 35:14सारी उम्र और कभी मर जाएगा नहीं ये ऐसा फूल है।
- 35:30तपुषा ये श्लोक कहाँ से आया? ये मजभागत की दसियाँ है।
- 35:35पुराण से सातवाँ खंड है, दूसरा तीसरा अध्याय है वहाँ से आप पढ़
- 35:48लेना। उसका अर्थ मैंने आपको बता दिया।
- 35:55यद्यपि ये कथावाचक आपको अर्थ नहीं बता पाएंगे।
- 35:59जानते नहीं, बेचारे इनको कुछ मालूम नहीं है, लेकिन धंधा है
- 36:11इनका मेरा धंधा सिर्फ बांटना है अंत।
- 36:19मेरा धंधा फीस वसूल करना नहीं, आनंद बांटना किस तरीके से दम और
- 36:27तुम्हारे होने वाले शिशु आनंद को प्राप्त हो जाए जो कि तुम्हारा
- 36:35आखिरी मुकाम। तुम्हारी आखिरी मंजिल है वो बस
- 36:44मेरी यही तमन्ना है कि प्रत्येक प्राणी से धरती का सिर्फ कामना
- 36:52करने से सुखी नहीं होगा, उसे मार्ग बताना होगा।
- 36:59अँधेरा घना है, राक्षस घने हैं बताने वाले दत्तराज घने लेकिन लाख
- 37:11साल का अँधेरा बिकू न हो मेरी एक बात को याद रखना 1 दिन का दीपक।
- 37:191 मिनट पहले जगा हुआ दीपक लाखों साल के अंधकार को नष्ट कर देता
- 37:25है। ज्योति में बड़ी ताकत है, आनंद
- 37:33में बड़ी ताकत है तो मुझे कोई फिक्र नहीं।
- 37:38के अँधेरा घना। मैं जानता हूँ ये अंधेरे की मेरे
- 37:46उजाले के आगे ज़रा भी तो कीमत नहीं है तो ऋषियों ने परमात्मा से
- 37:51प्रश्न की तुम सो मा जो दुर्गम है हे परमात्मा।
- 37:58हे परमृता परमात्मा अमी तमस में से अंधकार में से तमसो मा
- 38:05ज्योतिर्गम है, उज्वलता की तरफ ली जाओ, पुजारी की तरफ ली जाओ।
- 38:17जहाँ वो शनाई घनी जहाँ खुशबू हो, जहाँ आनंद के सागर हों, झीले हों,
- 38:25मुस्कुराहटें हों, नृत्य हों, साज हों, आवाज हों।
- 38:35तो मुझे ज़रा भी फिक्र नहीं, कितने दैत्यराज है, आएँगे और चले
- 38:40जाएंगे। मैं जानता हूँ कि धरती को जितना
- 38:44गंदा करके जाएंगे मैं उसे कुछ ही देर में जैसे ही तुमने इस गंदगी
- 38:51से निजात पाया। 1 दिन तो गंदगी के सड़न से
- 38:54व्यक्ति। दूर होता ही है मुझे ज़रा भी फिर
- 38:58करना मैं तो तुम्हें कहता हूँ एक बार उस गंदगी को सुन के जरूर आओ,
- 39:05कहानियों सुन ही लिया करो नामदेव की फिर तुम जब मेरे पास आओगे तो
- 39:11टूटेंगे तुम्हारे भ्रम। तड़क तड़क होगी आवाज़ तो तुम्हें
- 39:17वो वीणा की सुरक्षा देते नजर आएँगे फिर निजी वन का वो दृश्य
- 39:29तुम्हारे सामने आएगा। जहाँ गोपियां और कृष्ण रात्रि
- 39:34चाहते हैं तो नारक जी क्या धो को आश्रम में जाते हैं भगवान विष्णु
- 39:51के कहानियों? बच्चा सुनता है।
- 40:01चार महीने के बाद बच्चा एक एक बात को सुनता है, 7 साल बच्चे के लिए
- 40:10है। वैज्ञानिक को खोजना होगा।
- 40:17जो बच्चे ने गर्भ में सीख लिया, सीख लिया बस उसके बाद तो उसे कुछ
- 40:26नहीं सीखा पाओगे। तो सिर्फ पांच या 10% बच्चा जो
- 40:38सीख सकता है वैसे सब गर्व में सीख के आता है।
- 40:47मेरे स्वास्थ को ध्यान में रख। जरूरी नहीं कि वैज्ञानिक ने यह
- 40:52खोजा ही हो। कभी खोज ले कर अनुभव इन्वेंशन से
- 41:02बड़ा होता है। तुम्हारे वैज्ञानिक वो इन्वेंट ना
- 41:05कर पाएंगे जो संतो ने ऋषियों ने लाखों वर्ष पहले खोज लिया था और
- 41:11वह विष्णु का भक्त बना। नारायण नारायण इससे श्रद्धा अगर
- 41:25भक्ति करो तो प्रहलाद जैसे करो, भक्ति करो तो ध्रुव जैसी करो।
- 41:41और प्रहलाद भक्ति करते हैं। फाउंडेशन फाउंडेशन पहले होता है
- 41:49वह फाउंडेशन बाहर नहीं पड़ता। फाउंडेशन गर्भ में पड़ जाता है।
- 41:55मैं तुम्हें यही समझाना चाहता हूँ।
- 41:59अगर इस स्त्री को मात्र गर्भावस्था में के लिए छोड़ दिया
- 42:05जाए, सुंदर आध्यात्मिक माहौल में छोड़ दिया जाए तो उसके संस्कार
- 42:17बताए जा सकते हैं। ये बच्चा कैसा?
- 42:25तुम आज बच्चों को जो संस्कार दे रहे हो, गर्भवती स्त्रियाँ पोर्न
- 42:32मूवीज़ देख रहे है, फिर तुम कहते हो बलात्कार होते है, क्या ये हरि
- 42:42भजन करेगा? गर्भ में संस्कारित हो जाते हैं
- 42:47बच्चे बच्चे को संतों की आवाज़ सुनाओ रसीली आवाज़ बच्चे के भीतर
- 43:02वो भीड़ हो जाये। और जागते जागते सुनु उस प्रवचन को
- 43:14कानों में लगा कर सो दो, बच्चा सुनेगा।
- 43:27भिन्नी भिन्नी सुगंधी जो उठती है तुम्हारे भीतर जो रस इकट्ठा हो
- 43:33गया, आज तो तुमने अवगुणों का पहाड़ जोड़ दिया, धन जोड़ लिया,
- 43:41पदार्थ जोड़ लिए, सुविधाओं के साथ जोड़ लिए रस तो ना जोड़ा।
- 43:48और जरूरत तो रस की होती है। व्यक्ति के पास सारी संसार की
- 43:55संपदा भी क्यों न हो, लेकिन रस न हो।
- 44:01हृदय दुखी हो तो सम्पदायी बेकार गुजार करते।
- 44:06संपदाओं का कोई मूल्य नहीं होता। संपदा एक ही संपदा है विश्व में,
- 44:21संसार में अस्तित्व में, ब्राह्मण में, ब्राह्मणों में
- 44:27एग्ज़िस्टन्स। ब्रो संपदा है आनंद अगर तुमने वो
- 44:33संपदा नहीं कमाई तो खैर तुमने कुछ भी नहीं कमाया तुम सब खो के चल
- 44:38रहे ये। कजरारे चंचल।
- 44:48अंखिया ये गजरारी चंचल अंखिया ओंठ गुलाबी ओंठ गुलाबी।
- 45:08ओल की पतियां ये कजरार चंचल अंखियां अंखियां अंखियां।
- 45:28ये कजरारी चंचल अँखियाँ ओंठ, गुलाबी पुल की पतियां लट बिखरे।
- 45:46तो गाल पे ठहर रहे हे, लट बिखरे तो गाल पे ठहरे होश जिया के उड़ाए
- 46:03पायलियां। होशजियाक उड़ाए पयली हाँ।
- 46:15छनक छनक छनक छनक। तोरे बाजे पायलिया।
- 46:24छनक छनक। सौह रे पा जे पायलिया।
- 46:32भीतर से ऐसा संगीत है, तुम्हारा मन शांत हो जाए इस रस को।
- 46:52यह मदहोशी तुम्हारे रोम रोम में छा जाए, ओंठ, गुलाबी फूल सी
- 47:01पत्तियाँ। जब बाहर से लिपस्टिक लगा के आठ
- 47:07गुलाबी मत कर ये भीतर का लाभान्य आनंद कर उठे तो तुम देखना उनकी
- 47:17खूबसूरती ही कुछ और आज नकली नकली ज़माना।
- 47:27सब श्रृंगार सांसारिक व्यक्तित्व श्रृंगार करता है पर बहुत ही दुखद
- 47:36बात है के अध्यात्मिक व्यक्तियों ने भी श्रृंगार करना शुरू कर दिया
- 47:41है। ये अध्यात्मिक श्रृंगारिक व्यक्ति
- 47:52अध्यात्मिक हुआ ही नहीं करता, अध्यात्मिक व्यक्ति को तो पता ही
- 47:56नहीं होता, मैंने क्या पहन रखा है, महावीर को कुछ और महावीर को
- 48:04सर्वश्रेष्ठ सुंदरतम। पुरुषों में जाना जाता है महावीर
- 48:12नकल कृष्ण यह सुन्दरतम पुरुषों की श्रेणी में आती है और वो तो कोई
- 48:20श्रृंगार नहीं करते। वो तो वस्त्र नहीं पहनते, वो तो
- 48:23जयंती माला नहीं पहनते, वो तो मोरू मकट नहीं लगाते।
- 48:28वो तो अंग वस्त्रों को भी करा देते हैं, खोल देते हैं, नग्न और
- 48:33नग्नता में भी इतना सुंदर लगते हैं वो कि उनको सुंदरतम पुरुष की
- 48:41उपाधि से संशोभित कर दिया जाता है।
- 48:48सुंदरता का मापदंड तुम जानते हैं कितनी ही सौंदर्य प्रतियोगिताएं
- 48:59करवाओ, लेकिन मापदंड तुम खुद ही नहीं जानते।
- 49:03कि मापदंड है क्या? मैंने सुना है चंडीगढ़ के बस
- 49:10स्टैंड पे एक लाइन लगी थी टिकट लेने के लिए।
- 49:28आके खड़ी स्त्री ने अपनी पत्नी से अपने पति से शिकायत की ये पुरुष
- 49:35मुझे छेड़छाड़ कर धक्के भागता है ये पुरुष उठ क्या है?
- 49:46अक्सर पुरुष लोग स्त्रियों को लाइनों में लगा देते हैं।
- 49:49जल्द ही टिकट मिल जाएगा। तो पुरुष उठा, उसने कहा क्यों बे,
- 50:00तेरे को क्या परेशानी? फिर उसने गौर से देखा हैरानी से
- 50:07देखा क्या बात है बंधु तुम घरवाली से छेड़छाड़ क्यों करते हो?
- 50:15कहते कहाँ मैं तो सांस ले रहा हूँ, उसने गोघड़ की तरफ देखा।
- 50:23जैसे 18 महीने का बच्चा बैठे हैं ऐसी घोंगड़ हराए लोग हमारे
- 50:34राजेंद्र से इनकी गोगड़ें देखो थोड़ी कमीज को गार्डन लेना है
- 50:39इनको वोगड़ेंगे। जैसे 18 महीने का बच्चा मैं अभी
- 50:46हॉस्पिटल में गया, ऑपरेशन करा वो दिखाने के लिए गया ऑपरेशन ठीक हुआ
- 50:52था वहाँ बैठा बैठा मैं देख रहा था, मैंने एक व्यक्ति देखा पुरुष।
- 51:00तो मुझे याद आ गयी कहानी चंडीगढ़ के बस स्टैंड पे बस उस व्यक्ति से
- 51:07थोड़ी सी कम ही कोबरा हो गयी इसके मैंने कहा ऐसे ही होगा फिर वो
- 51:15स्त्री को लगता है मुझे छेड़छाड़ कर रहा है दब के तेरा।
- 51:20ओके तो नहीं जी मैं तो सास ले रहा हूँ अब सांस भी नहीं लूँ क्या ये
- 51:26तो मेरा मूल्य का अधिकार है जीवन के लिए आवश्यक है अपहरण वायु तुम
- 51:31कहो तो भाई मैं हट जाता हूँ ये तो बेचारा शरीर बंदा।
- 51:40उस पे लांछे लगा दिया सर मुझे भी हाँ बात तो ठीक कहता है कोई भी
- 51:48समझदार व्यक्ति बच्चे को वो चार महीने कैसे गुजरे पांच महीने?
- 51:58पल पल का सारा लेखा जोखा खाका तैयार करके बता सकता है बच्चा
- 52:02क्या होगा? बस उन पांच महीनों में तुम्हारी
- 52:07जो बे मरता है ना, वो तो लिखने की बात नहीं है बताने वाला पहले
- 52:14बताते है। इन पांच महीनों में तुमने उसे
- 52:19कैसे संस्कार दिया? ये जड़ है, ये जड़ है।
- 52:24फाउंडेशन और डीप फाउंडेशन यहीं से खोदती है, बाहर आकर नहीं खोदती
- 52:32बाहर आकर तो सिर्फ इम्प्लीमेंट होती है।
- 52:41अच्छा कर दिया। बस ये चार पांच महीने बच्चे के
- 52:45लिए छोड़ देना इतना त्याग अगर माता का माँ ऑथेंटिक है पिता
- 52:58प्रमाणिक नहीं है। माँ प्रमाणिक है, इसलिए दोपर युग
- 53:05में माता के नाम से बुलाये जाते थे।
- 53:10कृष्ण कहती हैं, हे कौन सा है? कुंती नंदन माँ के नस?
- 53:18पांडव पुत्र भी कभी कभी कहते हैं लेकिन अक्सर कृष्ण को देवकीनंदन
- 53:31यशोदानंदन माता के नाम से पुकारा जाता था।
- 53:37क्योंकि ऑथेंटिक माता पिता का तो कोई भरोसा नहीं।
- 53:42पिता का कोई भरोसा नहीं है। अपनी बातों का लाभ उठा के ये मूड
- 53:48है श्रेष्ठ वैज्ञानिक बुद्धि तो इनमे है ही नहीं।
- 54:01नामदेव की माता उग्रवादी हो गई और लकड़ी के थे, स्टील के थे, लोहे
- 54:09के थे या कागज के थे या माटी के थे।
- 54:16अब ये खाता नहीं, कुछ कोई लघु शंका नहीं करता।
- 54:22देर की शंका नहीं करता तुम वो सोता भी नहीं, नींद नहीं आती नींद
- 54:28क्या है? ऐसे हरामियों को नींद आती है
- 54:33क्या? नींद का तंत्र?
- 54:35ही नहीं है। सोयेगा कौन?
- 54:37नेरोन जी नहीं है इनके पिता जाने के दिमाग ही नहीं है और तुम इसकी
- 54:43पूजा करते हो। इसका मतलब तुम इससे भी गाय गुजर
- 54:49जो बिना दिमाग वाले लड्डू गोपाल की पूजा करता है।
- 54:55वह उससे भी गया गुज़ारा दिमाग वाला है गोबर गणेश मत कहा करो
- 55:02गोबर में कुछ तो होता है गिराने के काम आता है चुकाने के बाद,
- 55:07लेकिन इनका तो दिमाग बीजा खाली होता है।
- 55:10तुम छीरके। ये प्रश्न पूछा पुत्र है तो भागवत
- 55:26महाप्राण का, लेकिन इसके भीतकरस ये कथावाचक जानते हैं।
- 55:37अगर इन बातों को भी सुनाना शुरू कर दें।
- 55:41तुम्हें सुझाव दूंगा, कथावाचकों को तुम ज्यादा फीस मुश्किल कर
- 55:45सकते हो, क्योंकि तुम्हारा तो धंधा ही है।
- 55:50मेरा धंधा है आनंद वाटनों और अगर तुम कहानियों में थोड़ा सा आनंद
- 55:55का बिखराव भी कर सको। तो ज्यादा मजेदार रहेगा।
- 56:01फीस भी ज्यादा ले सकोगे और बैठने वाला भी शांति से बैठ सकते।
- 56:15आनंद ही मंजिल है, आनंद ही मुकाम है, आनंद ही टारगेट है, वो ही
- 56:23तुम्हारा। अगर बिना आनंद पाए तो हम निकल गए
- 56:28इस जीवन से तो फिर अनंत यात्रा की शुरुआत अभी खत्म हुई है।
- 56:37वह शुरू ही है थोड़ा जागो। बहुत जन्म बीते मेरे महत्त्व एक
- 56:48जन्म तो उसके लेके लगा दो थोड़ा सा वक़्त तो उसके लेके लगा दो ऐसे
- 56:56ही तड़पते तड़पते मर जाओ। इन वस्तुओं को भोगकर इनका टिस्ट
- 57:05लेके तुम समझते हो कि मैंने भोग लिया नहीं भोग महावीर के वास उसका
- 57:13भगत आया कहता आप बड़े त्यागी है हम निक्कृष्ट भोगी लोग हैं।
- 57:22हमारे ऊपर कृपा रखा कर महावीर ने कहा बैठ से बच्चा बोगी तो है, तुम
- 57:34तो बड़े त्यागी हो मैं तो घबराया क्या गलती हो गई?
- 57:39मैंने बोलने में कुछ गलती कर दी। कितने बोलने में कोई गलती नहीं
- 57:48सत्य की व्याख्या में गड़बड़ है। सत्य की व्याख्या में क्या गड़बड़
- 57:54है? प्रभु तुम इतना विराट त्याग देते
- 57:59हो, क्षुद्र को भोकते हो? और हम इतना विराट भोंकते हैं तो
- 58:05बड़ा भोंखी कौन हुआ? हम अनंत को भोग लेते हैं और अनंत
- 58:13का रस्पी लेते हैं। अनंत को भोंकते हैं, तो बड़ा
- 58:17भोंकी कौन हुआ? तुम शूद्र भोंकते हो?
- 58:20धन संपदा वैभव अच्छे सोने के मिश्रें मान सलमान हम बाहर रह गए,
- 58:29बैंकरों में पीछे पड़े इतनी जमीन इकट्ठी कर ली, ये सब कुछ तुम्हारे
- 58:36साथ नहीं जाएगा, तुम्हारे साथ जाएगा।
- 58:40किया जाएगा। चणक चणक तोर भाजे पायलिया चणक चणक
- 58:56तोर भाजे। हिया रीत के।
- 59:10गीत सुना प छनक छनक थोरे बाजे। यह यह।
- 59:22जाएगा तुम्हारे साथ आनंद से गुनगुनाना, लेकिन आनंद तो
- 59:28तुम्हारे भी तरह है बेसुरे फटे बाँसुरी की तरह तुम गाते हो?
- 59:38तुम्हारी आवाज में कोई रस नहीं आता कि तुम्हारे संग जाएगा और इसी
- 59:53को तुमने कमाया नहीं, इसको तुम चुभते हैं, कब तक चुकोगे?
- 1:00:03याद रखो मेरी आखिरी बात वन डे यू विल हैव टु कम टु मी तुम्हें मेरे
- 1:00:12पास आना ही होगा फिर सुन लो, अंततः तुम्हें मेरे पास आना ही
- 1:00:21होगा। उसके बिना उद्धार में कहीं जाओ
- 1:00:27तुम स्वतंत्र लेकिन भक्त के थपेड़े संसार के थपेड़े तुम्हें
- 1:00:38दुख देंगे, धक्के मारेंगे। बे इज्जत करेंगे और तुम तड़पोगे
- 1:00:49हर आखिर में चैन मिलेगा मेरे आंसर में मेरी गोती में आओ।
- 1:01:00मेरे आगोश मिले पर जाओ, मैं ही तुम्हारा किनारा हूँ, मैं ही
- 1:01:12तुम्हारा साध्य हूँ। मुझबीन चैन ने तुम जाओ जहाँ जाना
- 1:01:26है सारा संसार तुम्हें भोगने के लिए ही मिला है होपो लेकिन एक बात
- 1:01:34ध्यान में रखना तुम कितने ही गंगा में।
- 1:01:38स्नान कर लो, ठंडे पानी में नहा लो यहाँ गंगाएँ भी आती हैं शीतलता
- 1:01:46मांगने की मैं। घोर ये तू हमारा।
- 1:02:02मैं नदिया तू मेरा आ किनारा, मैं गरे तू हमारा, मैं नसिया।
- 1:02:21तुम मेरा किनारा अंग लगा लो, प्यास भुजा दो।
- 1:02:36नदिया बन। पर प्यासी हो नदियां बनकर प्यासी।
- 1:02:48हो क्या? नदियां गंगा भी मुझसे शीतलता
- 1:02:55मांगने आती हैं। यही ठौर ठिकाना मिलेगा तो भटकने
- 1:03:05को बड़ा वक्त तुम्हारे पास है तुम्हें कोई रोकता नहीं, तुम्हें
- 1:03:13कोई बोलाता नहीं। लेकिन सत्य है अंततः तुम्हें
- 1:03:24शांति मिलेंगे, रस मिलेगा, यू विल हैव टु कम टु।
- 1:03:33मेरे पास 1 दिन आना है। चरनन के दाशियों में मन के प्यार
- 1:03:50हो जाने। मन की प्यास बोझाने आ अंतर्घट तक
- 1:04:07प्यासियों में। तू है मेरा हेमदेव का, तू है मेरा
- 1:04:27हेमदेव का गोर? मैं गौरी तू कंत हमरा।
- 1:04:48मैं नदिया तो मेरा किनारा, मैं गोरी हो कंत हमारा।
- 1:05:02मैं नदी आ, तू मेरा किनारा अंग लगाओ, प्यास बुझा अंग लगाओ।
- 1:05:20प्यास बुझा गंगा हो कर प्यासी हो में मन की प्यास बुझा में आई।
- 1:05:40मन की प्यास बजाने आन अंतरघट तक प्यासी।
- 1:05:58प्रेमदेवता तू है मेरा प्रेमदेवता, तू है मेरा
- 1:06:10प्रेमदेवता? धन्यवाद।