Latest / Baba ji Vijay Vats / 9 Aug 25 - खुद को जानो! तुमने क्या लेना हनुमान से, राधा से? तुम कब समझोगे? दुनिया कभी नहीं बदलेगी!
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- 0:00अनुव्रत चौहान बाबाजी जब देख लूँगा कि दुनिया में वह नहीं है
- 0:15जिसके भीतर क्या है। तो अध्यात्म में आ जाऊंगा।
- 0:24अब आप अदृश्य रूप से मेरे साथ रहेंगे।
- 0:31इतना मैं हनुमान हनुमान करूँगा। और हनुमान जैसा महाबली हो जाऊंगा।
- 0:49अनुब्रत चौहान मैंने पूछा कि पुत्र तुम्हारी उम्र क्या है?
- 0:58कोई जवाब नहीं आया आ जाएगा, मैं जानता हूँ छोटी उम्र से से दूर
- 1:11है। या लोवल कॉन्शस लेवल लोह
- 1:20कॉन्शसनेस के प्रश्न है, या तो आपकी चेतना इतनी विकसित नहीं है?
- 1:36ये आपकी उम्र इतनी छोटी। है कि अभी आप उसे चेतना के योग्य
- 1:42नहीं हो पाए। ये जो कहानियों हैं कि ध्रुव
- 1:48प्रहलाब 5 साल की उम्र में 7 साल की उम्र में प्रबुद्ध हो गए।
- 1:56यह घर ऐसा नहीं हुआ करती क्योंकि परिपक्वता नहीं आती, बहुत तेज
- 2:09करंट गुज़रने के लिए। उतनी ही सशक्त वायरिंग की
- 2:15आवश्यकता होती है अन्यथा 11,000 वोल्टाकरण तुम्हारी आम तारों में
- 2:24से गुजर नहीं हो सकता। किसी और कारण से ये बताई गई
- 2:30होंगी। उसका अभी जिक्र करना ठीक नहीं।
- 2:38प्रसंग शुरू में ही उड़ जायेगा। तो उस बेटे ने पूछा कि ठीक है जब
- 2:49तक संसार में? भोग कर व्रक्ति नहीं होती तब तक
- 2:58आप मेरे संग्रह न और। जब व्रक्ति हो गई तो मैं अध्यात्म
- 3:09में छता जाऊंगा। तब तक मैं क्या करूँगा?
- 3:16तब तक मैं हनुमान, हनुमान, हनुमान करूँ और हनुमान जैसा परम बलिष्ट
- 3:25हो जाऊं। हमने देखी है जन्नत की हकीकत लेकर
- 3:37दिल के बहलाने को गालिब ये ख्याल अच्छा है।
- 3:47आपको समझ आती हो कि ये बोला बच्चा क्या बोलता है?
- 4:00जब तक भोग नहीं लूँगा परिभोग? तब तक अध्यात्म की यात्रा शुरू
- 4:06नहीं करूँगा। तब तक मैं क्या करूँगा?
- 4:08हनुमान हनुमान तो अभी आप क्या कर रहे हो सारी दुनिया क्या कर रही
- 4:13है कभी भोगों की? अगनी भोग अगर शांत हुई।
- 4:24इसलिए तो सारी। दुनिया अनुमान हनुमान, राधे, राधे
- 4:29राम, राम कृष्ण, कृष्णा कर रही अप्रपक्वता की निशानी मैं क्या
- 4:40कहता हूँ? और मेरे लिए ये दुर्भाग्य की बात
- 4:49है, है तो आपके लिए भी। के इतना बोलने के बाद भी अगर आज
- 5:04ये निष्कर्ष सामने आया इतना बोलने के बाद भी अगर रस रूप में ये शब्द
- 5:11आज मेरे सामने आए तो कहीं कोई गलती है।
- 5:24आज सारी दुनिया क्या करेगी कोई ये शो ये शो कर रही कोई?
- 5:36अल्लाह हाँ, अल्लाह कर रहा। है।
- 5:40कोई वहगुरु वहगुरु कर रहा। है।
- 5:43कोई राम राम, कोई राधे राधे यही तो तुम कर रहे हो प्रश्न बड़ा
- 5:52प्यारा। है।
- 5:58लेकिन उतना ही मूढ़तापूर्ण है। मैं कहानी सुनाया करता हूँ कि दो
- 6:10बूढ़ें जब वक्त ही बूढ़ा हो जाता है रिटायर हो जाता है तो घर वाले
- 6:17कहते है जाओ सब्जी लेके आओ, बच्चे को स्कूल छोड़ के आओ, बच्चे को
- 6:22स्कूल से लेके आओ। बच्चे का खाना दे के आओ बच्चे
- 6:29गड्डी खेल लेते हैं यही काम धाम हो जाते हैं आफ्टर रिटायरमेंट।
- 6:46जो बहक जाता है वो बच्चा अब ये बच्चा कह रहा है कि ठीक है मैं
- 6:59भोगूंगा अगर भोगम में कुछ नहीं पाया तो फिर आ जाता मैं आ जाऊंगा।
- 7:05तब तक आप। मेरे संग रही हो।
- 7:08और मैं क्या करूँगा? मैं हनुमान हनुमान करूँगा तो
- 7:13हनुमान क्या करेगा, हनुमान क्या करेगा?
- 7:22अगर हनुमान आपकी रक्षा नहीं करेगा तो मेरी क्या आवश्यकता?
- 7:26है। ये दोगली बातें बच्चा तुम्हारी
- 7:32उम्र पढ़ने लिखने की है। मैंने तुम्हे बहुत बार पहले कहा
- 7:36है मुझे सुनना बंद कर दो ये उम्र नहीं है सुनने की।
- 7:44पढ़ो लिखो विद्वान बनो अपने पांव पे सृंड हो जाओ भोगों के कैसे
- 7:50भोगों के लिए सामग्री जुटाओगे कैसे अगर तुम उसके योग्य नहीं
- 7:54होगे कुछ अर्न करने के योग्य नहीं हुए तो भोग की सामग्री ले के कहाँ
- 8:02से आओगे? और फिर इतनी सामग्री कि बौद्ध
- 8:07जैसे वैराग्य हो जाये। इतने तो तभी आयेगे ना जब तुम किसी
- 8:13बड़ी पत्नी पर आ जाओ। मैं तो जब से देख रहा हूँ ऐसे ही
- 8:18पागलपन के प्रश्न होते हैं। मैं कहता हूँ तुम्हें भी और तुम
- 8:28जैसे बच्चों को भी यह वेला नहीं, लोग कहेंगे प्रभु भजन का वेला है,
- 8:38मैं कहूंगा नहीं। हमारे ऋषिगण मूर्ख नहीं थे, जो 25
- 8:44साल तक व्यक्ति को ब्रह्मचर्य आश्रम में रह गए।
- 8:49सिकल, सीखो उस वक्त की जो स्कील थी वह वेद पाठ, उपनिषद पाठ वगैरह
- 8:57वगैरह थे। धनुर विद्या वगैरह वगैरह थी,
- 9:00घुड़सवारी थी। येस ही को?
- 9:10अच्छा स्किल बदल गए। आज धन और विद्या नहीं रही,
- 9:19कंप्यूटर आ गया। आज जो विद्या आज जो सिक्का चलता
- 9:29है। संसार में वो कुमला और बहुत से
- 9:37बच्चे मुझे कह देते हैं। हम घर से भाग नहीं चाहते, मैंने
- 9:46कहा बच्चे भाग कर क्या करोगे ना खुदा ही मिला ना वसाली सना माँ
- 9:54बाप की शरण में रह करता हूँ। अपने पांवों पे स्टैंड और योग्य
- 9:59तो हो जाओगे कमाने उनकी छत्रछाया से दूर हो के तुम्हारे बिछोड़े से
- 10:08तुम्हारे माँ बाप भी कपेंगे अभी पिछले दिनों कर अर्चना कुमारी नाम
- 10:14फ़ोन आया मेरा बेटा चलो। जल्दी करो बाबा, कहीं ऐसा वैसा न
- 10:19कर। ले तुम घर से भागते हो की बात
- 10:27करते हो, कच्ची उम्र के एष्कर्ष हैं और तुम्हारे मार्गदर्शक और
- 10:38साधू संत। तो इसीलिए ही है तुम्हारी
- 10:42संस्थाएँ और संघ इसीलिए ही तो है एक से तीन बच्चे पैदा करो एक अपने
- 10:55पास रखो एक आर्मी में भेज दो ये तो ठीक है तीसरा हमें दे दो तीसरे
- 11:04का तुम क्या करोगे? खुद पैदा कर खुद तो एक भी नहीं
- 11:07पैदा किया। क्यों?
- 11:15अपने घर में आग लगे तो आग पड़ोसी के घर में आग लगे तो वह।
- 11:20संतर खुशी मनाते हो वसंता। ज़रा सोचो ये नस्ली वेद से तुम
- 11:34जिन बच्चों को मरवा देते हो वो किसी के लाड़ले हैं।
- 11:39इसी तरह मखन मिश्र से पहले। तुम ज़रा एक दो, कुर्बान कर दो और
- 11:49संघ की शुरू से ही यह सियासत रही। हाय तिलक मुझे कोई भी विद्वान बता
- 11:56दे स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई के भीतर एक भी संधि से ही दुआ।
- 12:05बता बलिदान देने के लिए महात्मा गाँधी आगे लगा दिया।
- 12:21खुद चरण चंभक बन गए और आई ढूंढ़ते हैं।
- 12:24गदियाँ मिल भी गई। कब मिल गई एंड राइपुंड मेंटालिटी
- 12:34के कारण इन बच्चों के जैसे मेंटालिटी?
- 12:45बाद में तो उसने सुसाइड कर लिया। सर मुझे कहने लगा बाबा गलती से
- 12:58मैं संघ में जाने लगा। और मेरे साथ ही जोनाचार किया।
- 13:09गलत बातें सिखाई गईं, इतिहास गलत पढ़ाया गया।
- 13:15खैर घर की सर्कमस्टैंसेस से तंग आकर किसी कारण से उसने सुसाइड कर
- 13:22दिया। मैं कहता हूँ जो लोग मार छकेंगे
- 13:31उनके भीतर वेरी तो पैदा होगा और पैदा होगा तो शादी यह करवाती
- 13:36नहीं, मैं आपको इतना कटु सत्य बताता हूँ कि इनके आग लग जाएगा।
- 13:47तो फिर ये भीतर का बना हुआ स्वर्म निकालेंगे।
- 13:49कैसे? इन्हीं बच्चों का ही तो इस्तेमाल
- 13:52करें? इसलिए मैं तुमसे कहता।
- 13:59हूँ खबर तो। बच्चे पैदा कर ना अपने लिए, बस एक
- 14:06ही बच्चा पैदा करना ये तुम्हारी सेवा कर वो भी न करना इनसेक बोलो
- 14:13अब तुम बहुत पीस लिए चखियों के तले तुम बहुत पीस लिए अब इनसेक
- 14:19कहो के तुम बच्चे पैदा करो। हमारे लिए बच्चे पैदा करते देखते
- 14:25हैं कब तक निभते हैं ये अब तक तुम तो निभ गए गलती से भी अपने बच्चे
- 14:37को संघ में मत भेजना। मैं एक साइंटिफिक पद्धति बता रहा
- 14:43हूँ। अगर वीर्य ना बने तो आपको शरीर के
- 14:51चलने मात्रा के लिए ही कैलोरीज की आवश्यकता है।
- 14:58ना ज्यादा खाओ, बस शरीर चले, इतनी सी कैलोरीज मिले।
- 15:05इसे ही कहते हैं कृष्ण युक्त आहार विहारृश्य आहार युक्त होना चाहिए।
- 15:18अगर तुम लोहा पेड़ते हो तो उसी ढंग से आहार होना चाहिए।
- 15:24अगर तुम ध्यान करते हो तो उसी तरह का ही आहार होना चाहिए और पुस्तल
- 15:35पर पहुंचने के बाद तुम्हारी कोई इच्छा बाकी नहीं रह जाती न सहर से
- 15:41पाटी। न चीजों को भोगने की, न हवाई
- 15:45जहाजों पे उड़ने की, न कहीं लेक्चर झाड़ने की, न भोगने की कुछ
- 15:52भी वाक्य नहीं रहता तो फिर तब शरीर ये अभी इन्हें पता नहीं चला।
- 16:00इट्स एप्रेटस। यह एक उपकरण है और इस उपकरण को
- 16:10शक्ति की जरूरत है कैलोरीज तो जब तुम एनलाइटन हो जाओ।
- 16:18तो इस शरीर को उतना सा ही भोजन दो जीस शरीर से एक अनूरी मिलती रहे,
- 16:24हृदय धड़कता रहे और फेफड़े सांस लेते रहे।
- 16:28सुचारू रूप से सारी प्रनालियाँ काम करती रहे और फिर धीरे धीरे
- 16:35तुम ब्रह्मचर्य को साथ। थोड़ा बहुत एकदम से तुमने ठूंस
- 16:42लिया फेज़ भर के हलवा पूड़ी कचोडी होशो की तरह, तो फिर 300 गर्ब।
- 16:50फ्रेंड ही होंगी। बुरे से बड़ा काम मगर किसी ने
- 17:01राइट हैंड पर सन्न किया तो दो व्यक्तियों को मैं गुनहगार मानता
- 17:05हूँ और खुले आम गुणाहना होता है। अच्छा तुम्हारे दिमाग पर छा गए
- 17:14तुम्हारे चरित्र पर कहाँ छाये? और चरित्र रहना होगा।
- 17:22तुम पागलपन की कगार पे पहुंचे हुए श्रृंखलावस्था में स्वच्छंद
- 17:27अवस्था में कद्रोधारित करनी शुरू कर दी तो पतंजलि कहते हैं, वहीं
- 17:34जरूरत पड़ेगी। कल को तुम तुम्हारे आत्म सत्ता
- 17:38आने वाली है तुम प्रबुद्ध होने को है, यंग से शुरू करो, ये साध लो
- 17:50सत्य, अहिंसा, अस्तय, ब्रह्मचर्य, परिग्रह, शोज, संतोष, तप,
- 17:54स्वाध्याय, ईश्वर प्राणी, धवन। इनको साध लो भाई इनको साधोगे तो
- 18:00पीक पॉट पे पहुँच गए। आप चरित्र को सही मत रख सकोगे ये
- 18:09कारण पतंजलि मुर्ख नहीं पतंजलि जानते हैं।
- 18:16यह व्यक्ति अगर ठीक तरह से पालन करेगा तो यह पहुंचेगा आसन
- 18:24प्राणायाम पर त्यौहार धारणा, ध्यान समाधि समाधि में जाएगा।
- 18:31समाधि में जाकर उस स्थल पर पहुंचेगा जहाँ वो कुछ भी कर सकता
- 18:35है। तो कुछ भी न करने का दो मतलब हो
- 18:39सकता। है।
- 18:41अब आज मैं बोलता हूँ। मैंने कहा सीधा अचटा बकरी में
- 18:45पहुंचने का क्या नुकसान है? सीधा आकर्षण में पहुंचने का क्या
- 18:50नुकसान है? सीधा ओश में पहुंचने का क्या
- 18:54नुकसान है? मेरी बात अलग है, मैंने पिछले
- 19:05जन्म में इतनी साधना कर ली कि इस जन्म में जरूरत महसूस नहीं है,
- 19:16लेकिन अगर तुम बिल्कुल नए हो, पिछले जन्म के संस्कार तुम्हारे
- 19:19संग नहीं आए। इस बात को ध्यान में रखना, चरित्र
- 19:25निर्वाण से शुरू करना। मैं ब्रह्मकुमारियों को इस मामले
- 19:30के अंदर अभिमान देता हूँ। जदपि ये धर्म मूर्ख मान्यताओं का
- 19:34धर्म है। आगे जाके फिसल जाते हैं।
- 19:39सिर्फ चरित्र के ऊपर रहना साधुवाद फिर भी अच्छे हैं, कम से कम
- 19:48स्वच्छंदता तो नहीं बिगड़ती। कम से कम मूढ़ता तो नहीं फैलाती?
- 20:00किसी को कष्ट तकलीफ तो नहीं देते, सभी धर्मों से अच्छी अच्छी चीजें
- 20:06खोज लो निकालो, कहीं से चरित्र निर्माण मिलेगा, कहीं से ध्यान
- 20:14मिलेगा। कहीं से कुछ मिलेगा, कहीं से कुछ
- 20:18मिलेगा। लोग कहते हैं कहीं का ईंट कहीं का
- 20:22उड़ा, मैं कहता हूँ बिल्कुल जोड़ लेना जिससे यहाँ अच्छी चीज़ मिले
- 20:28अपने आप तक पहुँचने के उससे वो चीज़ ले लेना।
- 20:34बस। तुम्हारा लक्ष्य है उस स्थल पर
- 20:37पहुंचाना और सुनिए तुम चूक कहाँ रही हो?
- 20:56कि छोटी सी वर्षा में चूक गया बच्चा बातें बड़ी बड़ी।
- 21:02सारे भोग लूँगा और जब तक भोग से नफरत न हो जाएगी भाई ऐसे तो नहीं
- 21:07नफरत होगी, राजाओं जैसा ऐश्वर्य होगा और राजाओं जैसा ऐश्वर्य तुम
- 21:18भोगोगे। ठीक आपको मज़े की बात बताऊँ यद भी
- 21:26तुम विश्वास मत करना करोगे भी नहीं।
- 21:29मुझे पता महाराजा पटियाला अगले ही जन्म में पहुँच गए।
- 21:37कारण? 365 रानियाँ थीं और तुम्हारा सबसे
- 21:45बड़ा जो बंधन है, वह काम बासन है, इताब होगा उसने इताब होगा, 365
- 21:55रानियाँ थी उसके पास और वर्ष में 365 ही दिन होते हैं।
- 22:03ये मुगले इतने क्यों पहुंचे तुम्हें तो खैर पता नहीं पाता
- 22:06हूँ। मुसलमान सल्तनत इतनी इतनी मात्रा
- 22:13में क्यों पहुंची? क्योंकि उन्होंने बिल्कुल आखिरी
- 22:21जरूरत जहाँ से वह परमात्मा दूर से दिखाई पड़ता है काम उसको प्रचुर
- 22:28मात्रा में रोक दिया। और यही नहीं तुम रोज़ इसको गाली
- 22:34निकालते हो? कि शादी चार करना इससे कम उसका
- 22:44मात्र यही कारण था। तुम कोई भी दलील दे सकते हो ये
- 22:48खोपड़ी की बात। है।
- 22:50दलील आती है, खोपड़ियों से लेकिन सत्य आता है अनुभव से।
- 22:56प्रत्येक व्यक्ति चार शादियां करें।
- 22:59उसका मतलब यही था कि आपकी आखिरी जो कड़ी रह जाती है जो टूटे से
- 23:05टूटती नहीं लाक प्रहार करने से वो टूटती नहीं, हथौड़े मारो घण मारो
- 23:11वो टूटती है वो है काम वासना क्योंकि काम वासना में।
- 23:16बाकी सभी विचारों में परमात्मा के दूर से दर्शन नहीं होते।
- 23:21वो क्रोध हो, वो लोभ हो, मो हो, अंका हो, मद हो मत, सर्व हो, समझ
- 23:27लेना बात को गहरी लेकिन एक मात्र बेकार है जिसमें परमात्मा दूर से
- 23:33दिख जाता है। बात गहरी है समझने की चिष्ठा ना
- 23:40समझाये तो रुबाइंड करके सुन एक मात्र।
- 23:47ऐसी चीज़ जो दूर से वो कलश। परमात्मा को दिखाई देता है दिखाई
- 23:57दूर से पड़ता है, लेकिन तुम्हें तुम्हारा एक लक्ष्य मिल गया
- 24:04क्योंकि उसको देखने से ही इतनी शांति आ जाती है।
- 24:09उसको देखने से ही तुम इतने। आनंदित हो जाते हो तुम्हारा रोमा,
- 24:16रोमा ये सब हमारे पंजाबी में कहते है।
- 24:25लू घंटे खड़े हो गए। ऐसा हो जाता है।
- 24:29रोम रोम झरनाटी में आ जाता है। वो झरनाटी का ही तुम आनंद कहते हो
- 24:38वो जो झरनाटा आता है काम के पीक पॉइंट पर, उसमें तुम कहते हो बड़ा
- 24:44आनंद आया है दूर से। परमात्मा का दर्शन काम भाषण के
- 24:53अतिरिक्त किसी और विकार में नहीं आता दिखे।
- 24:56मैं शब्द कर रहा हूँ विकास कहीं और मत ले जाना।
- 25:11चार शादी करो। इतना भोगलो इतना भोगलो कि
- 25:19तुम्हारी आखिरी दास्तां तुम्हारे आखिरी बंधन।
- 25:26टूट जाए तुम्हारा आखिरी बंधन क्या है काम काम दूर से दिख जाए उसकी
- 25:37झलक और तुम इसीलिए बार बार चाहत करते हो काम में जाने की।
- 25:45तुम जा नहीं पाती क्योंकि तुम्हारा उपकरण जवाब दे देता है,
- 25:52लेकिन तुम्हारी चाहत बनी रहती है और अगर सेगमेंट फ्राइड कहते हैं
- 25:56तो बिलकुल ठीक कहते हैं इस दृष्टि से जैसे प्रेमिका।
- 26:04या प्रेमी का चेहरा तुम कितना ही देखते रहो मन नहीं भरता।
- 26:15ऐसे ही उस काम वासना में जो झलक मिलती है दूर से।
- 26:18परम आत्मा की मन नहीं भरता। तो तुम बार बार इच्छा करती हो कि
- 26:25मैं और दर्शन कर रही हूँ, इसका ये मैं कोई आपको पाप की बात नहीं
- 26:32समझा रहा हूँ। मैं आपको परमात्मा हूँ कि दर्शन
- 26:35की बात जीस कारण से उसका दर्शन दूर से होता है या सोचो।
- 26:42अगर इतनी दूर से दिख जाए वो और आपका रोम रोम नाटक आ जाए और आनंद
- 26:49से लहलहा उठे और तुम आराम से चैन की नींद सो जाओ तो कैसा होगा?
- 26:57वो अगर उसके बिलकुल समीप चले जाए? काम वासनेक द्वार था।
- 27:04सही कहा, उसको गलत नहीं बोलते, लेकिन मुश्किल तो ये पड़ गई के
- 27:12चरित्र हनन कर दिया, चरित्र हनन कर दिया।
- 27:20कृष्ण ने था। कृष्ण ने बड़े मज़े से भोंगा और
- 27:26चरित्र हनान किया। ये होती है समझदारी इसलिए अगर मैं
- 27:34इनको ना समझ कह दूँ तो मैं इसके लिए क्षमा नहीं मांगूंगा।
- 27:42कि मैं बखूबी जानता हूँ के अवश्य ना समझ इसलिए तो मात खा गए।
- 27:49इतनी जबरदस्त इंटेलेक्चुअलिटी होते हुए भी तर्क शक्ति,
- 27:54विश्लेषण, शक्ति होते हुए भी वह व्यक्ति ऐसी मौत मरा।
- 28:04के दुश्मन भी न मरे, मेरी आत्मा रो जाती है।
- 28:10मैं जानता हूँ वो कैसे मरे तुम्हें तो पता नहीं उन घंटों में
- 28:17क्या हुआ जिन घंटों की तुम्हें कोई खोज खबर नहीं।
- 28:20लेकिन मैं तो जनता। हूँ
- 28:35जब तक मैं भोगों से तृप्त न हो जाऊंगा।
- 28:38अध्यात्म मैं नहीं जाऊंगा तो पुत्र तुम एक काम करो, मैं तो
- 28:44तुम्हारे संग रहने वाला है नहीं। ये भ्रम तुमने क्यों काट लिया?
- 28:53हनुमान हनुमान करते रहो, देखते हैं हनुमान तुम्हारी रक्षा करता
- 28:58है कहीं और तुम मेरे चैनल से निकल जाओ, मैं तुम्हें अभी ब्लॉक
- 29:08करूँगा। कैसे मूर्खता पूर्ण स्वास्थ कब तक
- 29:12तुम मुझे पूछते रहोगे? दो 2500 लंबी लंबी वीडियो कम होती
- 29:19है और एक एक शब्द खंगाल नहीं हो गया।
- 29:25और तुम्हारा भ्रम अभी नहीं मिटा। तुम्हारी मोड़ता भी गई।
- 29:28नहीं, मैं कुछ कहता हूँ, तुम उन बूढ़ों की तरह कुछ और कहते हो तो
- 29:34मैंने कहा बूढ़ों का काम होता है, सब जी ले आओ, वृद्धावस्था में
- 29:40सुनने में भी कम लग जाता है, मुझे भी कम सुनना ही पड़ता है।
- 29:43अब मेरे पास यहाँ कुछ आते हैं लोग।
- 29:51मुझे कहते हैं कार मुझे सुनता है कार तो क्या किया जाए?
- 29:59वृद्धावस्था में भाई श्रवण शक्ति कमजोर हो गई।
- 30:09ये मतलब शरीर के और गन्स का है? धीरे धीरे धीरे धीरे घिसते हैं ये
- 30:17और इस अवस्था प्यार के घिसने लगे हैं तो दोनों बहरे हो गए थे उम्र
- 30:23के हिसाब से। लेकिन बोलना नहीं छोटा था, जवाब
- 30:29देते थे, सुनता? कुछ भी नहीं था एक आ रहा था एक जा
- 30:36रहा था, तो एक बहेरे ने पूछा क्या हाल है?
- 30:45जाने वाला जो व्यक्ति जा रहा था अभी सब जो आ रहा था उससे पूछ रहा
- 30:50था वो कहता है बैंगणी लेके आया हूँ बैंगणी बैंगण लेके आया हूँ
- 31:01उसने पूछा क्या हाल है कहता बैंगण लेके आया हूँ?
- 31:07अब सुना तो उसे भी है, दोनों ही जकसा हैं बराबर वो कहता वो बाल
- 31:14बच्चों का क्या हाल पता ही होता हमें ये क्या कहेगा?
- 31:21कुछ आगे कोई कुछ कहे ना कहे, हम सब चीज़ आते हैं क्या कहे कहता है
- 31:26और बाल बच्चों का प्यार है और समझ तो उसे भी नहीं आया सोना तो उसे
- 31:35भी उसने सोचा पूछ रहा है इन बैंकरों का क्या करोगे।
- 31:39कहते हैं इनको भून भून के भरता बना के कह दे वो कहता है बच्चों
- 31:44का क्या है, कहता है भूंद भून के बढ़ता बना के कह दे ऐसा ही बहरे
- 31:53तुम बस मेरे में बहरह में भी। बहरे तुम भी हो बस फर्क इतना है
- 32:09के बहरे के साथ तुम मूर्ख भी हो, लेकिन मैं बहरा हूँ।
- 32:17लेकिन मैं ज्ञानी मुझे पता है मैं हूँ कौन तुम्हें नहीं पता कि तुम
- 32:26कौन हो और देखिए बड़े गजब की बात है कितने में कुछ कहा सुना तुमने
- 32:33मिट्टी बोलीत कर दी। तुमने कवर में दफन कर दिया, मैं
- 32:40कहता क्या हूँ सेंस से क्या है मेरे कहने का खुद को याद करना।
- 32:57हू आर यू हू एम आर खुद को याद करना है और तुम याद क्या करते हो
- 33:12हनुमान? तुम हनुमान को याद करो और हनुमान
- 33:17ही हो जाओ हो जाओ गोट न उठा लो फिर क्या करो तुम्हें पता है
- 33:28हनुमान होने के बाद भी? अगर वो एक तत्व ना मिला तो हनुमान
- 33:35का बल किसी काम नहीं आया। चंद गी राम दारा सिंह ये हमारे
- 33:42बड़े बड़े पहलवान गामा पहलवान ये पहलवान तो बन गए।
- 33:53लेकिन जब तक खुद को नहीं जाना, शरीर को बढ़ा दिया ठीक लेकिन अपना
- 34:01होना नहीं जाना तो फिर तुम दुर्बल हो या हनुमान की तरफ लष्ट हो।
- 34:06दोनों एक ही बात है। हनुमान हो जाओ, कोई डर नहीं,
- 34:13शारीरिक रूप से बलिष्ट हो जाओ, लेकिन हनुमान की तरह उस चेतना को
- 34:22भी पहचान। और हनुमान हनुमान करने से उस
- 34:30चेतना को नहीं पहचान मैंने लाखों बार।
- 34:35को हजारों बार को। उस चेतना को पहचानने के लिए उस
- 34:40चेतना के करीब जाना आचार्य उबासनम।
- 34:46आचार्य के समीप जाना तुम दूसरे को बज रहे हो, इसी को तो मैं काट
- 34:55करता हूँ कितना बोला? लेकिन आपने फिर वही बात गुड़ गोबर
- 35:02कर दिया ना? बढ़ता बना के खाएंगे बच्चों को वो
- 35:09ही जवाब दे दिया। ना मैं क्या कहता?
- 35:16हूँ मैं तुमसे एक बात कहता हूँ शुरू से।
- 35:26एक साथ है सब सत है। अगर एक को साथ लिया तो कोई आयास
- 35:32नहीं बनना होगा। कोई सर नहीं बनना होगा, कोई
- 35:34आचार्य नहीं बनना होगा, कोई आयास की कुर्सी ठुकराना ही नहीं होगी।
- 35:40इनके तो गहरे मंतव्य होते हैं। स्वार्थ परायणता होती है और तुमने
- 35:45अगर घर छोड़ दिया मेरे पास रोज़ आ जाते हैं ऐसे मैंने कहा देखो घर
- 35:52तो छोड़ दो लेकिन घर छोड़ न अपने पांव पे स्टंट तुम बाहर जहाँ भी
- 36:01जाओ। वहाँ अपने शरीर का पर्व पोषण करो,
- 36:06कहीं ऐसा न हो कि भूख के कारण तुम्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी।
- 36:12तुम जाओ, घर से बाहर जाओ अगर तुम्हारी बुद्धि का उत्थान होता
- 36:19है और तुम तरक्की करते हो। पर अपना जीवन यापन करने के लिए
- 36:25ढंग जुटाते। हुए।
- 36:27तो बाहर जाओ क्या हर्ज है, लेकिन प्रेमानंद बनने के लिए बाहर चले
- 36:32जाते हैं। फिर वो मुक्त करोगे आता जाते तो
- 36:37कुछ नहीं। बस ये जो झूठ बोलते हैं, गफ बोलते
- 36:44हैं। इसके पीछे एक वृद्ध कारण है।
- 36:46इनका दिमाग खराब नहीं है जो इतना पाप मोड़ ले।
- 36:50मैं इस कारण को बड़ी अच्छी तरह से समझता हूँ।
- 36:57अगर बातों से आप नहीं समझते। तो ये कमंडल के गंगाजल का डर
- 37:02दिखाएंगे आप कि मेरे कमंडल में गंगाजल है तो फेंक दो ना चाइना पे
- 37:16क्या विध्वंस का काम ही करता है तुम्हारे गंगाजल का?
- 37:20रचनात्मक काम नहीं करता। कंस्ट्रक्टिव काम नहीं करता
- 37:24डिस्ट्रक्टिव काम ही आता है तुम्हारा गंगा जल तो खुद के ही
- 37:29तुम कैडरनेस पे छिड़क लो। इसको ठीक क्यों नहीं कर देते?
- 37:35क्यों पागल बन रहे? हो क्यों पागल बना रहे हो?
- 37:40अगर इस सब वक्त तुम घर से भाग गए बिना पांव के श्रवण हो गए नौकरी
- 37:47तो वैसे ही परमात्मा की कृपा, बेरोजगारी बहुत बुरी तरह से तुम
- 37:562,00,00,000 रोजगार देंगे। अगर रोजगारी ही मिल जाते भाई तो
- 38:03तुम्हारे पीछे कौन मूर्ख हुआ करता?
- 38:06कौन झंडा डंडा उठा के नारे लगाता है, जो समझदार हो गया जो
- 38:12इंडिपेंडेंट होगी, जो स्वतंत्र हो गया वह तुम्हारे पीछे।
- 38:19झंडा झंडा थोड़ी उठायेगा। यही तो तुम चाहते हो कि कोई अपने
- 38:25पांव पर स्टैंड ना हो जाए। अगर स्टैंड हो गए जे तो फिर हम
- 38:32भिक्षा देंगे किसको ये भिक्षा? पांच किलो अनाज?
- 38:38तुम्हें देंगे किसको और तुम तुमसे वोट मांगेंगे?
- 38:43घर से तुम्हें पता नहीं वितरी षडयंत्र रहेंगे, मैं तुम्हें
- 38:50सीखाता हूँ। अपने आप तक पहुंचो, किसी भी तरह
- 39:00पहुंचो, रोज़ बोलता हूँ किसी तरह किसी भी तरह तुम उस सतोरे की झलक
- 39:09देख लो, विश्वास हो जाए तो वह मेरे ऊपर तो कृपा हो गई, मैं
- 39:15तुमसे बोलता हूँ। नदरी मोख द्वार बाबा का यह शब्द
- 39:20बड़ा सार्थक, सटीक फिट हुआ। मैं नदर से ही मुक्ति का द्वार
- 39:28खोला। मैंने कुछ नहीं किया था, मैंने
- 39:31कदर बताया। मैं तो डड्डू जी रहा था, फरक जी
- 39:34रहा था रैबट जी रहा था वो बेचारे मासूम चेहरे मुझे आज।
- 39:37भी याद आते। वो बेचारे छपटाते वो हार्ड लगाते
- 39:42मुझे छोड़ दो लेकिन मैं उन्हें काट देता जब भी पुण्य किया था
- 39:47मैंने और क्या मिला मुझे? लेकिन पूर्व जन्म के इतने बड़े
- 40:01पुण्य के कारण साउथ अफ्रीका में उसके बाद हिंदुस्तान में जब सभी
- 40:08चरणार बिंदु बन गए, मीडिया की तरह।
- 40:11तब गाँधी जितनी छाती थी, विचारों की 56 तो नहीं थी, 1626 ही होगी
- 40:18और कितनी होगी? उसको तान के खड़े हो गए की भाई
- 40:22चार हड्डी को कौन गोली मारेगा? बताओ जार के पंचम ने जब ये दाई
- 40:28हड्डी देखी। तो वो भी खुद भीतर भीतर हंसने
- 40:32लगा। अब तेरे को मारूंगी तो मारू क्या
- 40:37और तेरे पीछे बंदे बहुत हैं, तू तो कुछ नहीं कर सकता।
- 40:42मुझे पता है हाथ में लट्ठ है ज्यादा से ज्यादा लट्ठ मार देगा
- 40:45मेरे सर में इससे ज्यादा तू कुछ नहीं कर सकता।
- 40:49पंचम स्वामी दर्द पंचम हसन पंचम में सिर्फ यही पूछा मिस्टर गाँधी
- 40:57व्हेर आरए क्रॉस आपके वस्त्र कहाँ?
- 41:08सरजाज पंचम यू हैव स्टेप्ड ऑल ऑफ इंडिया स गारमेंट यू हैव टेकन अवे
- 41:19ऑल दी गारमेंट ऑफ इंडिया नोट ओनली में।
- 41:27मेरे ही नहीं आपने तमाम भारत वंशियों के भारतवासियों के वस्त्र
- 41:34छीन लिए हैं। जार्ज पंचम शहर जार्ज पंचम भीतर
- 41:41से कपा फेस इम्प्रेशन से पता चलता था।
- 41:49लेकिन छुपा गया ये राजनीतिक लोग इमोशन्स को छुपाने में दक्ष होते
- 41:56हैं। लेकिन छुपाया छुपना सका।
- 42:06याद पंचम के भीतर ही एक त्रिशूल की तरह से पकड़ और कमजोर से कमजोर
- 42:15होते चले गए। चारपाई पकड़ ली और आखिर में
- 42:23उन्होंने अपने डॉक्टर से कहा। मुझे कोकेन का इंजेक्शन दे दो, आई
- 42:28वांट टु डांस, ये बात मैं जफरनामे में आपको सही करूँगा।
- 42:37गुरु गोबिंद सिंह जी ने जब जफरनामा भेजा और इंचेब के पास
- 42:45मुख्य रूप से यही बात कही थी, उन्होंने और बात कही के औरंगजेब
- 42:56तुने मेरे चार लाल शहीद कर दिए। छोटे छोटे बच्चे इनको धर्म का कुछ
- 43:02बताओ? कोई उम्र होती है 7 साल अनुसार और
- 43:09सारे उसके कारनामे गिनाए। और।
- 43:14कारनामे गिनाने के बाद देखिए जब तक अचेतन की बात चेतन में कोई
- 43:20लेके न आएगा तो पापी को। उसने क्या बात किया है ये पता
- 43:25नहीं। चलो
- 43:37दुष्कर्म कर देते हैं लोग। लेकिन उसके फल से बचने की चेष्टा
- 43:45करते हैं। सारी दुनिया में यही हो रहा है।
- 43:47मेरे पास कितने मैसेज आते हैं? मैंने कहा वह परमात्मा पागल नहीं
- 43:53है, न्यायकारी है, बड़ा सुव्यवस्थ है, उसने अगर तुम्हें कष्ट दिया
- 43:59है तो किसी कारण से दिया है। तुमने कुछ किया होगा तभी दिया है,
- 44:03मैं उसे जानता हूँ अब और क्या कह रहे हो तो भोगनो चुप करके क्यों
- 44:11क्यों होल चुहल मचा रखी है। भोगनो तो पड़ेगा।
- 44:21आज नहीं, कल कल नहीं परसों नर्सों जब पाप का बीज फलीभूत होकर फल लग
- 44:30गए हैं और फल गिर गए हैं, तुम्हें खाना ही पड़ेगा।
- 44:37अब उपद्रव काहे में जा रहे हो मानो।
- 44:40तुम्हारी चेतन को जात नहीं और यही बात मैं तुम्हें कहता हूँ।
- 44:45जार्ज पंचम के चेतन को पता नहीं था, मैंने इतने पास किया चर्चल
- 44:48विंग्सटन चर्चल को पता नहीं था, मैंने इतने पास किया बंगाल के
- 44:52अंदर भूख से मारे गए करोड़ों। लोग।
- 44:59और विंक्स्टन चर्चल के दिमाग पर कोई बात ही नहीं आई।
- 45:05चेतन तब तक नहीं हिलता, जब तक उसके किए हुए पाप जो अचेतन में
- 45:11स्टोर हो जाते हैं, उनको निकालकर बाहर चेतन में।
- 45:17लाने वाला कोई नहीं जन्मता इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ, आप तो कोई
- 45:26कितना भी कर सकता। है।
- 45:32मैंने साइकोलॉजी पढ़ी। मैंने साइकोलॉजी का सफर तय किया
- 45:39है। बुद्धि से चला स्वयं तक पहुंचा और
- 45:47रास्ते में जो आया वो सारा सफर मन का था और मैंने ठहर ठहर के ये
- 45:55चीज़ देखी। नक्षनाथ हो गया मैं और अब तो
- 45:59पक्का नक्षनाथ अब तो गैर बदलने में इतना कुशल कारीगर हो गया हूँ
- 46:05बड़े आराम से मैं गैर बदल लेता हूँ।
- 46:10तो मैं इसी तरह से जानता हूँ इस देश के वारशिंदों।
- 46:19अगर तुम रोज़ चिल्लाते हो, तुम रोज़ इसकी पुष्टि करते हो की
- 46:26हमारे जो हमने गद्दी के ऊपर गद्दी नशीनों ने।
- 46:31फिर चलो भारत किया फनाह का किया फनाह का किया फनाह किया, यह
- 46:35ध्रुवराज की बोल रहा, श्याम मीरा सिंह बोल रहे और बहुत से लोग।
- 46:39बोल रहे हैं। इनको याद कराओ और याद करा कर इनके
- 46:47बल को एक बार छीन लो। यह एक साइकोलॉजी का अंश।
- 46:54है। अगर ये निर्दोष साबित होंगे तो
- 47:00इनको फिर से बिठा देना, लेकिन एक बार 10 साल के बाद।
- 47:07जांच में जरूरी हो जाता। है।
- 47:11बड़े समझदार थे अंग्रेज अमेरिका में डी रूजवैट आए, वो तीन बार जीत
- 47:19गए। उन्हों राजकीय चौथी बार जीत गए,
- 47:21फिर जीत गए। बड़े अच्छे आदमी थे और उनके होते
- 47:27हुए द्वितीय विषय भी हो, लेकिन उनके जाने के बाद अमेरिकन वासियों
- 47:38के दिमाग में बात आई। बड़ी क्षोभ थी आपके भी आ जानी
- 47:42चाहिए। दो बार से ज्यादा किसी व्यक्ति को
- 47:50उच्चस्य पदवी देने की आप ये जो है संविधान के अंदर लिखी हुई धारा
- 47:58इसको काट। दो।
- 48:02अमेरिका पैदल। नहीं।
- 48:05उससे रुजवेल्ट से पहले यही कुछ था।
- 48:08डी रुजवेल्ट चार बार राष्ट्रपति बन।
- 48:14लेकिन उसके जाने के बाद वो बड़े ईमानदार व्यक्ति थे।
- 48:18व्हील चेयर पे बैठा रहता था, बीमार था।
- 48:20लेकिन बड़ा कुशल कारीगर था राजनीतिक बेशक दौड़ कर वो प्रेम
- 48:28पर नहीं चढ़ता था क्योंकि उसके अंग नहीं काम करते थे।
- 48:33अंक तो स्टीफेन वॉकन के भी नहीं करते थे।
- 48:40वह तो ऊँट भी नहीं हिला सकता था, लेकिन कैसी कैसी चीज़ आपको
- 48:44बख्सेगा वो ये दौड़ के सीढ़ियों चढ़ना, इसमें कोई कुशलता नहीं है।
- 48:53बात इसकी है सारा काम सारी। प्रज्ञा इसमें है।
- 49:05यह कितना सूक्ष्म या। कितना महीन है, यह कितनी
- 49:11सूक्ष्मता से सोचता कितनी दयाद्रता से सोचता अपने देश का
- 49:15प्रतीक। तो उन्होंने एक कानून बना दिया।
- 49:20वहाँ 4 साल का होता है। एक दो बार से ज्यादा कोई भी
- 49:24व्यक्ति राष्ट्रपति निबन से कहा कानून पास हो गया लेकिन यहाँ की
- 49:28चाल पहली बात तो अनपढ़ भी बन सकता है।
- 49:32बड़ी शर्म की बात है अभी तक तुम्हें शिक्षा का मूल्य ही नहीं
- 49:37फसल जहाँ गंदे नाले में से गैस निकालने वाले व्यक्ति तुम्हारी
- 49:46चरम गद्दियाँ पर बैठे हैं, क्या ये चंद्रजान तीन को भेज देंगे?
- 49:55चंद्रयान तीन को भेजने वाले लोग पर्दे के पीछे छपके और गंदे नाले
- 50:03से गैस निकालने वाला व्यक्ति झंडी भराता है।
- 50:07वो भी तब दो तो फैल हो गया तब तो आया तीसरा कामयाब हो गया तो श्रेय
- 50:14लेने में आ गया। आगे।
- 50:18भाई तुमने क्या किया तुमने प्रोजेक्ट को मंजूरी दी हम जान
- 50:24अच्छी बात संसार ऐसे ही चलता है, देश को जरूरत है अन्यथा पूछ के
- 50:32जाओ क्या? सभी ने किया।
- 50:35आपने अपने कार में सभी ने किया जब हमारे पास कोली चमच भी नहीं थी,
- 50:41आजाद नए नए हुए थे, तो आपको पता है जवाहर लाल को थाली, चम्मच,
- 50:47कोली ग्लास सब नए पैदा करने पड़े, किन परिस्थितियों में उसने?
- 50:53भारत को उबारा जब तुम्हारे पास जब मिट्टी के सकोरे चलते थे, ऐसे ही
- 51:01नहीं चलते थे हमारे पास दांतों के हम सकोरों के अंदर हमने दूध पिया
- 51:07हुआ। है।
- 51:10ये शोक से नहीं बनाये गए थे। हमारे पास धातुएँ नहीं थी, हम
- 51:15निर्बल थे। अभी अभी आजादी है तो एक चम्मच से
- 51:20लेकर जहाज तक उसने। बनाया आई एमआइ एम किसने खुलवाया?
- 51:30ये तो पता बेचे किसने खुलवाए, किसने नौ रत्नों में से कितने
- 51:36रकने बेच दिए। डेक्कन खुलवाए किसने और फिर उल्टा
- 51:40चोर बहुत बार उड़ाते है? मैंने सदा ही कहा तुमने खुद को
- 52:00जानना है राधा से तुम्हे क्या लेना है?
- 52:04पागल हो मैं हनुमान से तुमने क्या लेना है क्या लेना तुमने ब्रह्मा,
- 52:11विष्णु, महेश? क्या लेना तुमने दुर्गा पर फिर
- 52:21अगर तुम सब कुछ भोगकर ही अज्ञा तुमको अपनाओगे तो फिर वैसे तो मैं
- 52:29तुम्हें ब्लॉक कर दूंगा अभी, क्योंकि ऐसे मूड प्रश्न मैं कब तक
- 52:34जवाब देता रहूँ? तुम बच्चे।
- 52:40हो लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं। मुझे सुनने का तुम्हें अधिकार
- 52:45नहीं है। अगर तुम ऐसे ही प्रश्न 2500
- 52:50वीडियो लंबी लंबी वीडियो है, इसका मतलब तुम सुनते नहीं हो?
- 52:54और सुनते हो तो गुणते नहीं हो, अन्यथा मैं तुम्हें बताऊँ मेरी
- 52:58कोई भी वीडियो। उठा।
- 53:01बस एक ही वीडियो तुम्हें पहुंचा दूंगी कोई भी।
- 53:04उठा उस मेरा से यहीं निकलेगा नो द।
- 53:12बड़े आयामों से बोला, बड़े सफीर के आयामों से बोला, प्रत्येक
- 53:20बिंदु से बोला, कोशिश के के उस केंद्र की तरफ इशारा करो।
- 53:26विरोधी शब्द भी प्रयोग करने पड़े। क्या करूँ जब साउथ से बोलेंगे?
- 53:31तो यही बोलेंगे कि उत्तर की तरफ चलो अगर उत्तर से बोलेंगे तो यही
- 53:36बोलेंगे कि केंद्र की तरफ जाना है तो साउथ की तरफ चलो उलट वक्तव्य
- 53:45हो जाएंगे, लेकिन बात तो एक है, मैं कहता हूँ केंद्र की तरफ।
- 53:49चलो। मेरे वक्तव्य में आपको असमानता ही
- 53:56नहीं विरोधीता भी मिलेंगे, बस इसका कुलमात्र यही कारण है।
- 54:03कि मैं विरोधी छोरों से बोलेंगे तो आपको लगेगा और बुद्धि से इसे
- 54:07समझने की चेष्टा नहीं करूँगा। फिर भी आपके जो प्रश्न आ जाते हैं
- 54:10वो आप ये समझ नहीं आया मैं तुम्हें फिर बार बार क्या समझाऊ
- 54:15नहीं वो नहीं समझाता, वो पीना पड़ता है, तुम पी लो।
- 54:22और पिओगे तो निहाल हो जाओगे। शराब कोई एनालिसिस करने वाली
- 54:30चीज़, थोड़ी सुगंध, कोई एनालिसिस करने वाली चीज़, थोड़ी फूल की
- 54:36सुगंध का तो आनंद लेना होता है, शराब की मस्ती को तो पीना।
- 54:44और अगर तुम बुद्धि से जानने की चेष्टा करोगे तो मत करना क्योंकि
- 54:49तुम पी न पाओगे तो कहा कि मैं पहले तो संसार को भोगूंगा और इन
- 54:57साहब के पास मैं समता हूँ, छोटी उम्र के अभी पांव पे स्टंट नहीं
- 55:00है। संसार के लिए सुविधाओं को जुटाने
- 55:04के लिए इनमे का विवाद नहीं है। जहाँ तक मैं।
- 55:07हूँ कच्ची उमरिया बाली उमरिया कल्पना लोक।
- 55:16और ऐसा नहीं कि इस उम्र में तुम ही हो।
- 55:19सारा हिंदुस्तान ही ऐसा हो गया है जो गलत गलत नारों को सही समझता
- 55:27है। ऐसा ही नापोलियन के वक्त।
- 55:29होगा जी। और दुनिया सदा ही ऐसी रहने वाली
- 55:34है जब बात ख्याल में रखना। जो व्यक्ति राजनीतिक राज़ करना
- 55:39चाहता है वो मेरे इन शब्दों को देख ले।
- 55:42दुनिया कभी नहीं बदले, तुमने दुनिया का दोहन करना है तो सदा ही
- 55:49यह कह देना इम्पॉसिबल बॉडी इस नॉट फंड ऑन मैं डिक्शनरी तुम चल गए।
- 55:56तुम्हारा सिक्का चला होगा, कुछ नहीं, वो ही शरीर होगा पंच वो ही
- 56:05जन्मे हो, वैसे ही वैसे ही भूख लगती है।
- 56:07तुम्हें वैसे ही वृद्ध हो जाओगे और वैसे ही प्रत्येक व्यक्ति मरता
- 56:14है। ये सारी प्रणाली शरीर के ऊपर से
- 56:16गुजरती हैं और तुमने इसको मैं समझ रखा है बस नादानी तुम्हारी यही
- 56:24मैं इसको मिटाने की चेष्टा कर रहा हूँ कब से लगाऊ एक ही शब्द के ऊपर
- 56:31निशाना रोच। एक ही शब्द के ऊपर निशाना रोज़ और
- 56:35तुम कहती हो हनुमान हनुमान करो, मैं तुम्हें क्या चौपावता हूँ?
- 56:49प्रश्न विचारणीय नहीं प्रश्न झंझोड़ने वाला है पिता कुछ बोलने
- 56:54के बाद भी तुम ये कहती हो? सारी रामायण पढ़ती गई।
- 56:58और सुबह पूछते हैं सीता राम की माँ थी क्या बस यही कुछ तुमने
- 57:05किया है? सारी रामायण पढ़ने के बाद मैं तो
- 57:09शास्त्र को क्रोज़ करने चला हूँ और तुम प्रश्न पूछ रहे हो सीता
- 57:15माता थी क्या राम की? तो?
- 57:20तुम क्या खाक समझे? तुमने कहानी कहाँ सुनी?
- 57:30अगर हम बोलते बोलते चुप हो जाते हैं तो तुम ये मत सोचना।
- 57:40हम थक जाते हैं थक। जाते हैं कोई कितना क्या बोलेंगे
- 57:48एक ही बात तुम भी थक जाओगे करके देखो राम राम राधे राधे थको पांच
- 57:57नाम करके देखो बिल्कुल थकोगे। और आखिर में तुम क्या करोगे?
- 58:02तुम कहोगे होता नहीं, ये प्रश्न रोज़ तुम डेरों में सुनोगे
- 58:07प्रत्येक व्यक्ति कहेगा और गुरु अच्छी तरह जानते है।
- 58:09नहीं होगा 1 दिन थक जाएंगे और प्रश्न फिर ये उठेंगे गुरू जी,
- 58:13ठीक है, तुम तो कहते। हो?
- 58:15लेकिन हमसे तो होता नहीं है, हम क्या करें?
- 58:17फिर भी नहीं होता। तो क्या करें करो?
- 58:21क्या फांसी लगा लो? ये ऐसी ऐसी चीजें आपको सौंप देंगे
- 58:29जो इनफंसी वाला है, जो होती नहीं रात को सो के भी लेकिन ये कहेंगे
- 58:34सोते, उठते, बैठते जगते, जगते फिरते।
- 58:41पांच नाम करते रहो वरना पूछने वालो, सोते सोते हूँ कैसे पांच
- 58:50नाम जगेंगे मुझे, मेरे गुरु ने कहा सोते जगते, उठते बैठते।
- 58:57खाते पीते चलते फिरते राम राम करते रहो, मैंने कहा मेरा हले माई
- 59:02सांप कुन्सिया ती आंख कर चल दिया सरदारी और गुरू जी बोले वापसी
- 59:09उनका जो गॉब आया ऐसे मैं तो ग्रहपुत्र हूँ मैंने बड़ी उम्मीद
- 59:14रखी थी तुमसे यह गद्दी। मैं तुम्हें देना चाहता हूँ।
- 59:21मैंने कहा महाराज मैं जगदी लेना नहीं चाहता, मैं इतना बाप नहीं
- 59:27कमा सकता कि करोड़ों लोगों की जिंदगी का चैन सुकून दांत पे रखो।
- 59:36मुझे पता है राम राम करने से सुकून नहीं मिलता।
- 59:39शोर सुकून में नहीं ले के जाता और राम राम एक शोर, राधा राधा भी
- 59:47शोर, राम राम भी शोर कोई। भी अलफाज़ शोर।
- 59:54तुम तो बात करते हो, मैं कहता हूँ तुम तो मौन भी होते हो तो भी
- 59:58तुम्हारा मन बोलता है, शोर करता है यही तो बाबा ने कहा चुप पे चुप
- 1:00:07न हो भाई ये लाए रहा रेबता जुबान को बंद करके क्या करू?
- 1:00:18चुप वे चुप न हो गई यह लाए रहा ले बता तुम कितनी ही लो लगा के बैठ
- 1:00:23जाओ, अगर तुम्हारा मन चुप नहीं होता तो तुम वहीं नहीं जा पाओगे
- 1:00:29जहाँ पहुंचने चाहते हो। तुम चालाकी करते हो, बस कुछ वक्त
- 1:00:37बिता देते हो और उठ जाते हो। हाँ, ठीक है, पांच काम कर लो।
- 1:00:41और बाबा कहते हैं से से सेणपोंला को ये तुम्हारी सेण है जो तुम
- 1:00:48रोज़ 10,000 20,000 50,000 गोदाम भर लेते हो?
- 1:00:51और कितने भी गोदाम भर लो मेरी बात सुन लो आज सुन लो फिर सुन लो 1000
- 1:00:55तलवा सुन। लो।
- 1:00:58यह उतना ही सत्य है जितना एच टू ओह को पानी फेंकते है।
- 1:01:07शव से नहीं मिलेगा चैन? और परमात्मा के तुमने अच्छे अच्छे
- 1:01:13नाम कर दिए हैं। अल्लाह वाय गुरु सतना राम राधे
- 1:01:19असल में तुम फिराक में हो आनंद की उस परमा की वहाँ जाके ठहर जाता है
- 1:01:29सब। तुम कहती हो, जिसकी जरूरत है वो
- 1:01:35बाद में देखूंगा, अभी तो भोगूंगा और निरक्षर पाऊंगा और फिर जब कुछ
- 1:01:45नहीं मिलेगा। तो फिर मैं में आऊंगा तब तक आप भी
- 1:01:52मेरे साथ रहना क्यों तुम्हारे बाप का गोल्ड रखा हुआ है?
- 1:02:05तुम्हे मार के बतला दिया तुम अपने अंदर उतरो, मेरी क्या आवश्यकता
- 1:02:10है? जहाँ मेरी आवश्यकता पड़ी मैं खुद
- 1:02:12हाजिर हो जाऊं? और अनुमान अनुमान करूँगा करते रहो
- 1:02:28भाई, अगर आप भी अनुमान अनुमान करते रहे तो करते रहो मुझे क्या
- 1:02:34करती हो? मैंने तुम्हे नहीं बुलाया था, मैं
- 1:02:38किसी को भी नहीं बुलाता। सर पूछो।
- 1:02:41धक्के जरूर मारता हूँ, बुलाते किसी को तुम चाहे इसको बेदर्दी
- 1:02:49समझ लो, जो चाहे शब्द दे लो, जो चाहे इमोशन दे लो, ये तुम्हारी
- 1:02:55मौज है, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 1:02:57है। मैं चाहता हूँ प्यास से।
- 1:03:01मैं थक गए हूँ। जाप करके भी हनुमान हनुमान करके
- 1:03:05थक गए हूँ राधे राम करके थक गए हों, पंच नाम करके थक गए हों, वो
- 1:03:10मेरे पास आएं, स्वागतम। जो भी थके नहीं है, मैराथन की
- 1:03:18दौड़ में वो दौड़ें और मैं कहूंगा ज्यादा तेज दौड़ें, ज्यादा तेज
- 1:03:24दौड़ें। जब भी थक जाएं फिर तुम थक जाओगे,
- 1:03:31थक जाओगे क्या टूट के घर पड़ोगे? एक गांठ खुली के भागने से नहीं
- 1:03:43मिलता और इस गांठ का खुलना जरूरी था।
- 1:03:51जब वो 1000 नाम जब वो तुम पांच नमक झप।
- 1:03:59लेकिन इतना जपो 24 से घंटे जपो ये यही कहते हैं गुरु बस इनको पता
- 1:04:05नहीं है ये मूड़मती है कि क्यों? कहते हैं रात सोते जगते जबकि रात
- 1:04:12जाप हो नहीं सकता। हो ही नहीं सकता।
- 1:04:17जब सोये सोये तो तुम झप्पोगे कैसे?
- 1:04:21लेकिन जिसने बनाया था उसने ठीक बनाया था।
- 1:04:25बस ये चूक गई थीम को थीम ये था कि इतना झप्पो?
- 1:04:31कि तुम थक जाओ, थक जाओ तो गिर पड़ो।
- 1:04:35गिर पड़ो तो जब हड्डी फसलें टूट जाएगी तो दरन टिकाने आ जाएगी तो
- 1:04:43मैं नहीं कहता, मैं नहीं कहता तुम घर से भाग जाओ, फिर प्रेमानंद
- 1:04:51बनना पड़ेगा। लोगों को गुमराह करना पड़ेगा,
- 1:04:53मजबूरी है। क्या करें भाई?
- 1:04:56इलाज भी करना है, आराम भी चाहिए, दवा भी चाहिए।
- 1:05:00तो फिर लोगों को मूर्ख बनाने के अतिरिक्त मन के पास और उपाय क्या
- 1:05:04है? करूणत इतनी है नहीं, कहानियों
- 1:05:08सुनाएंगे नामदेव की और नामदेव की कहानियों में है क्या?
- 1:05:14नामदेव की कहानियों में यही है कि नॉन बायोलॉजिकल हो कवारी का बच्चा
- 1:05:22ठहर गया है। ज़रा देखो कभी कवारी से बच्चा हो
- 1:05:25सकता है, किसी ने उत्पात मचाया होगा, ना कभी कवारी का बच्चा होता
- 1:05:32है। कुंती का बच्चा हुआ तो वो सूरज
- 1:05:37उतर के नहीं आया। कोई सूरज नाम का बंदा होगा, ऐसे
- 1:05:43नहीं हुआ करता। हमारे दिमाग को खराब करने की
- 1:05:45शिष्ट न करो और खराब होंगे भी नहीं।
- 1:05:52कोई वक्त का फायदा उठा गया होगा। कुंती को गर्भवती कर गया होगा,
- 1:05:58कोई वक्त का फायदा उठा गया? नाम देवकी माता को गर्भवती कर गया
- 1:06:02होगा और बाकी उसका बाप मूर्ख था। वो कहता ठीक।
- 1:06:07ठाकुर जी आये थे। ठाकुर जी ठाकुर जी का वैसे काम भी
- 1:06:10और कुछ नहीं है। यही कुछ ही करते हैं ठाकुर।
- 1:06:12जी। तुम्हारे ठाकुर ऐसे ही कुछ करते
- 1:06:22हैं तुम्हारे ठाकुर को फाई बनाते हैं तुम्हारे ठाकुर उपदेश देने
- 1:06:28में बड़े निशाना। पता तब चलता है जब हकीकत उभरती है
- 1:06:35और झासाराम जी बेहतर उपकक्ष एक कातिल, एक कातिल?
- 1:06:49400 व्यक्तियों को नपुंसक बनाने वाला व्यक्ति यौणाचार्य का अपराधी
- 1:07:01सीबीआइ जैसे वरीष्ठ समझदार जजेस ने फ़ैक्ट्स।
- 1:07:09देखकर जो फैसला दिया क्या वह पागल था अगर वह पागल था, तो उसके ऊपर
- 1:07:18उसके ऊपर अभियोग करना चाहिए करो जांच, वह ठीक था और उसने ठीक दंड
- 1:07:26दिया। तो फिर तुम अपनी स्वार्थ वार्ता
- 1:07:29के लिए इसको पैरोल क्यों देते हो? जिनके ऊपर अत्याचारियों ने किये
- 1:07:40उनका क्या? होगा।
- 1:07:48देखिए रेयबीज़ की हमारी किसी वक्त भी काट सकती है कुत्ता जब पागल हो
- 1:07:54जाता है उसको बंद रखना ही ठीक होता है।
- 1:08:00अब इससे ज्यादा मैं क्या बोलता हूँ पागल कुत्ते को।
- 1:08:06जंजीरों में बांधकर ही रखना चाहिए।
- 1:08:10ये साझेदारी की बात है। 400 लोगों को नपुंसक बना देना आज
- 1:08:16तक धरती पे सुना है कभी धरती पे सुना है कभी क्या बात कर?
- 1:08:25रहे हो? इसलिए मैंने आश्रम की व्यवस्था
- 1:08:32छोड़ दी। मैं मुझे आगाह कर दिया गया था तुम
- 1:08:36बोलो बाबा कमेंट मत करना मुझे। कह देते हैं यहाँ ठहरने की
- 1:08:43व्यवस्था तो होगी। मैंने कहा नहीं।
- 1:08:46व्यवस्था नहीं व्यवस्था है बहुत कौन जाने किस घड़ी इस ज़िन्दगी की
- 1:08:55शाम हो जाए। मैं कहता हूँ तुमने स्वयं को
- 1:09:11तलाशना है, सर्च करना है तुम भूल गए हो तुमने गंवाया नहीं है तुमने
- 1:09:25वो। खोया नहीं है भूले हो, भूले हो और
- 1:09:37भूले हो आज सुबह का पूरा शाम घर आ जाए भूला होते ही तुम भूले हो।
- 1:09:48खोया नहीं है वो खोया जा भी नहीं उसे वह तत्व ही ऐसा है कि वह तत्व
- 1:09:55खोया नहीं जा। सकता।
- 1:09:58कितनी भी चेष्टा करलो, ठीक है, तुम्हारा प्रश्न ठीक है।
- 1:10:04इसको ब्लॉक क्यों कर रहे हो? ऐसे प्रश्नों के जवाब देने के लिए
- 1:10:11यूट्यूब भरा पड़ा है। मैंने 1000 बार कहा है, प्यास लगी
- 1:10:19भूखे हो, सच में तो आ जाओ। पानी मेरे पास अगर भूख नहीं लगी
- 1:10:28है एक्टिंग फेक्टिंग कर रहे हो तो सरकस भाई मेरे पास मत करना सच में
- 1:10:37चाहिए वो खुशी और मैं तुमसे पूछता हूँ चाहिए किसे नहीं?
- 1:10:44धरती का प्रत्येक मानव इसी चीज़ की तलाश।
- 1:10:47में कर रहा है। जब थक जाता है पश्चिम में
- 1:10:50डॉक्टरों की चमक धमक से मेरे ही भाई बहन, मेरे ही मित्र बंधु मुझे
- 1:10:57फ़ोन करते हैं, बाबा हम आ जाए। तुम तो डॉलर की चमक देख लेना नहीं
- 1:11:05फीकी। इनमें खनखनाहट तो है लेकिन आवाज़
- 1:11:11बढ़ी है। शोर बढ़, शांति चढ़ बस ही शांति
- 1:11:16का ही स्वाद। डॉलर की चमक तो तुम्हें मिल
- 1:11:21जाएगी। मिला शक मिल जाएगी तुम सेंटर खोल
- 1:11:26लो, तुम दिव्य संस्कृति जाकृति या ब्रह्मकुमारी, कुछ भी खोल लो।
- 1:11:38200 मुल्कों में खोल लो, वैसे 195 आसमान में खोल लो, सचखंड में खोल
- 1:11:44लो, कहीं खोल लो। लेकिन बात तो।
- 1:11:47ये है कि तुमने खुद को तलाशा, बस जिसने खुद को नहीं तलाशा वह सही
- 1:11:57मार्ग पे गया। और आखिरी बात मेरी सुन लेना अगर
- 1:12:02मार्ग सही नहीं है तो तुम मंजिल पे पहुंचोगे क्योंकि मार्ग ही
- 1:12:09गलत। है फिर बोलो।
- 1:12:16मैं इसलिए कहता हूँ कि एक आदमी के पास टैंक भरे पड़े हैं और वो इतना
- 1:12:21खा नहीं सकते। कल का भरोसा कोई नहीं।
- 1:12:28जिन पश्तों के लिए तुम लौट रहे हो वो पृश्ते होंगी भी कि नहीं हमारे
- 1:12:34भाई के पास और ₹2? और वो पीठता मर गया कि मुझे मेरी
- 1:12:41छाया नहीं मिली, उसके खुद के तो बच्चा नहीं था, फिर अनाथ आश्रम से
- 1:12:48तो आप जितनी चाह लियो वो तो मर दी है ने तो नहीं?
- 1:12:57आखिर तक वो कहता रहा मुझे मेरी छाया नहीं मिली भाई तो मैं उसे
- 1:13:04यही कहता संतोष रखो नहीं मिली नहीं मिली अब हम क्या उसके लट्ठे
- 1:13:10थोड़ी मरेंगे? प्रार्थना कर लिए नहीं माना, वो
- 1:13:16नहीं मानता तो नहीं मानता। इसमें कोई भला ही।
- 1:13:19होगा। मैं इसलिए कहता हूँ कि देखो जिनके
- 1:13:23ट्रंक भरे हैं, वो इतना खा नहीं सके और जो भूख से मर रहे हैं
- 1:13:28उन्हें जरूरत है। तो क्या ऐसा नहीं हो सकता कि तो
- 1:13:32मैं ट्रंकों को थोड़ा सा खाली इतना सा कहता हूँ कि ऐसा नहीं हो
- 1:13:39सकता कि उच्च पदस्थ व्यक्ति एक व्यक्ति के लिए काम करना छोड़कर
- 1:13:45सभी ने तुम्हें वोट दिया? सभी के लिए काम करो, ये ठीक नहीं
- 1:13:49है। यह ईमानदारी नहीं है, यह ऑनेस्टी
- 1:13:53नहीं है, है ना? तुम्हारा पेट मांगता है ना कि तुम
- 1:13:59नहीं चाहते कि तुम्हें खाना मिले, वैसे ही जो भूख से मरते हैं वो
- 1:14:03क्या भूख से मरना चाहता था? फिर तुम क्यों ये गद्दारी कर रहे
- 1:14:07हो अपनी ही जनता के साथ? जिसके पास ट्रंक भरा है उसको इतनी
- 1:14:17जरूरत नहीं है। वो खा भी न सकेगा, उल्टियां करता
- 1:14:19फिर और जो भूख से मर रहा है बेचारा वह भूख से मर रहा है उसका
- 1:14:26पेट चूहे के उतरे हैं पेट में। क्यों नहीं तुम उसको बांटते थे?
- 1:14:31यही बाबा नानक ने तुम्हें कहा था और यही से लंगर की शुरुआती जो आज
- 1:14:36तक नहीं बंद हुए। बंद इच्छा को कृत करो कृत करने के
- 1:14:45लिए रोजगार तो होना है ये बच्चे घर में।
- 1:14:49बैठे बैठे आँखों को फोड़ रहे हैं, कार्टून देख रहे हैं, रीत बना रहे
- 1:14:54हैं और करेंगे अब चर्चे कोई काम धाम नहीं है, कृत करो, नाम जपो,
- 1:15:03बंड छको। विश्वरूप का ध्यान कर जिन नाम दया
- 1:15:12गए मसकत काल नानकते मुखो जल कीर्ति छुट्टी पर खुद खुद को
- 1:15:23जानना है खुद को पहचानना है। तुमने तुम्हारी पहचान खो दी खो दी
- 1:15:32है मतलब भूल गए तुम पुनः अपनी पहचान को याद करो और तुमने अपनी
- 1:15:39पहचान तुम भूल गए हो इसीलिए तुम दुखी हो यह थीम बोल रहा हूँ इसको
- 1:15:45सर्किल में दे। दो।
- 1:15:48तुमने अपनी पहचान को भुला दिया है तुमने अपनी पहचान को भुला दिया है
- 1:15:56मात्र इसी कारण से सारी दुनिया दुखी तुम्हें तुम्हारी पहचान
- 1:16:02चाहिए। तब सुख मिलेगा तब शांति मिलेंगे
- 1:16:06तब आनंद मिलेगा दूसरों की पहचान तुमने बहुत कर ली है तुमने सिक्के
- 1:16:13तलाश लिए तुमने नियम कायदे कानून तलाश लिए प्रकृति के लेकिन वो
- 1:16:19मिला मिला नहीं मिला। तुमने राधा रानी को, राम को,
- 1:16:28कृष्ण को, तुमने कितनों को भज लिया, पांच 10,000 नाम तुमने झप
- 1:16:33लिए, दूसरों को तुमने जानने की चेष्टा की, क्या वो मिला नहीं
- 1:16:41हुंदा? यही तो मैं कह रहा हूँ कहीं ऐसा
- 1:16:45तो नहीं कि मार भी भरता है, मर्द ही बढ़ता है और।
- 1:16:53इसलिए तुम कहते हो जब तक नहीं वैराग्य होगा तब तक तो मैं
- 1:16:58भोगूंगा ठीक भोगो, लेकिन कोई भोग नहीं देगा।
- 1:17:04वर्षा पे उल्लू बैठा है बर्बाद उल्लू करने को बस एक ही उल्लू
- 1:17:14काफी है। बर्बाद करने को बस एक ही उल्लू
- 1:17:20काफी है। हर्षा पे लो बैठा है, देखिये किसी
- 1:17:25ने कंठा डाल रखा है। किसने त्रिपुंड सजा रखा है?
- 1:17:32किसने दाड़ी पीली काली कर दी, इसकी आवश्यकता क्या है?
- 1:17:36क्यों झूठ बोलते हो को बाप? को मारती हो।
- 1:17:40थोड़ा होश में हो। जिन नाम पे आया गए मशककत काल
- 1:17:48नानकते मुख जले, केति छुट्टी नाल दूसरों को मुक्त करने की चिष्टा
- 1:17:54करो खुद ही ऐसे तो तुम खुद ही बंध जाओगे बंधे हुए हो।
- 1:17:59इन चाल बाजियों से तुम्हारा शरीर चढ़ जाएगा 10 साल 20 साल और चढ़
- 1:18:03जाएगा, लेकिन मैं बिल्कुल ये दो साहस भी है और यह सत्य भी है कि
- 1:18:16तुम घर से भागे शक्ल कोई है। अब झूठ बोलने के सिवा और कोई शक्ल
- 1:18:24है ही नहीं। इधर से इकट्ठा कर लो, उधर से
- 1:18:27इकट्ठा कर लो। बोल दो इसी को तुम ज्ञान समते हो
- 1:18:31सुनने वालो और इसी को जो ज्ञान समते हैं।
- 1:18:36और फिर 1 दिन आएगा जब तुम कहोगे मेरे एक मंडल में गंगाजल क्या
- 1:18:40करेगा? तुम्हारे गंगाजल क्या करेगा अगर
- 1:18:48गंगाजल ही में कुछ होता? और तुम्हारे भीतर इतनी चेतना जगी
- 1:18:56होती दुर्वासा की तरह तो फिर इतनी फौजो की जरूरत क्या तुम पानी की
- 1:19:08चुली भरते और छिटक देते तुम्हारे दुश्मन?
- 1:19:15लेकिन ठहरों तुमने वहाँ पहुंचना है जहाँ कोई दुश्मन रह नहीं जाता
- 1:19:23जहाँ तुम विश्व मित्र हो जाते हो, विश्व मित्र होने।
- 1:19:32क्या मंतव्य है तुम्हारा? यही है तुम्हारा चरम रक्षक के
- 1:19:37विष्णु के मित्र हो जाओ जहाँ कोई दुश्मन ना बचे और तुम कमंडल में
- 1:19:41पानी क्यों ले फिरते हो? किसको मारना किसी को मार सकते हो?
- 1:19:50कृष्ण तो कहते हैं। कि तुम किसी को नहीं मार सकते हो।
- 1:19:54नैना श्दन्ति शस्त्रण नैना मुदाहती पावका नै चैनम ग्रे धनता
- 1:20:00को न श्दु मारो ता तुम किसको मार सकते हो कोई मरेगा होश में?
- 1:20:08हो होश में हो। खुद बंधनों में ज्यादा मत बंधो
- 1:20:14पहले ही बहुत बंधनों में बंध चूके हो?
- 1:20:17ये परिणाम बहुत इससे कुछ सबक? दो।
- 1:20:23परमात्मा पागल नहीं है। परमात्मा का विधान प्रकृति का
- 1:20:27पागल नहीं है जो तुम्हें इतना दंडित दिया।
- 1:20:29है। तुम करुणा के पात्र हो बिलकुल
- 1:20:32ठीक, लेकिन करुणा का मतलब विजय नहीं कि तुम लोगों को ठगी मारना
- 1:20:37शुरू कर दो। लोगों को भ्रमित करना शुरू कर दो।
- 1:20:40बस यही हमारा काम है। सौमत जागो।
- 1:20:51लगी बा लेना लगी बा लेना कबी। उस तत्व की बात हो रही है जैसे
- 1:21:12कृष्ण कहते हैं तुम्हारा संसार जब सो जाता है मेरा योगी जागदार लकी
- 1:21:20बाले ना? तेरे के में अख लग गई तेरी के में
- 1:21:36अख लग गई अख लग गई। दोहे पख लग गई, अख लग गई दोहे पख
- 1:21:57लग गई, इधर वख लग गई। ओद्रवक लग गए में भी लगी वाले लगी
- 1:22:09वाले ताक दे भी न सोंधे सौंदे मेरे के में हक लग गई।
- 1:22:23तेरी आंख लग गई, धन्यवाद।