Latest / Baba ji Vijay Vats / 29 Nov 25 - साक्षी भाव, सतोरी - भीतर उतरने का सीधा मार्ग! दुख, कर्ज और तनाव ख़त्म करने का Formula! Baba Ji Vijay Vats
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- 0:14सुरेश चंद्र कृपालु बाबा जी क्या भगवान है आपने देखा है?
- 0:41यह प्रश्न मत पूछो बेटा, यह प्रश्न पूछने योग्य नहीं यह
- 0:54प्रश्न देखने योग्य है अनुभव योग्य है।
- 1:00इस प्रश्न को पूछने से कुछ हल होने वाला नहीं।
- 1:10अतीत में बहुत से शास्त्रों ने गुरुओं ने ऋषियों ने, मुनियों ने
- 1:17आपको जवाब दिए हैं लेकिन आप कहाँ संतुष्ट हुए?
- 1:25आप आज भी पूछ रहे हैं बाबा भगवान है क्या आपने देखा है?
- 1:35हजारों वर्षों से शास्त्र कह रहे हैं कि वह है।
- 1:43संत भी कह रहे हैं कि वो है, लेकिन तुम आज भी प्रश्न पूछे जा
- 1:50रहे हो, भला इसके पीछे कारण क्या होगा?
- 2:01कारण होगा कि तुम्हारे पूछने से दूसरों के दिए गए उत्तर तुम्हें
- 2:08संतुष्ट नहीं कर पाते, जैसे तुम भूखे हो।
- 2:21तो किसी संत ने भोजन कर लिया, उससे तुम्हारी भूख नहीं मटेगी
- 2:29लेकिन इस बात को तुम समझते क्यों नहीं हो, भगवान है या नहीं है?
- 2:41मैं तुमसे एक बात पूछता हूँ, ईमानदारी से उसका जवाब देना पुत्र
- 2:53क्या तुम सुखी हो नहीं? तुमने सदा ही कहा है नहीं, मैं
- 3:06सुखी नहीं, तो फिर तुम्हारी असली तकलीफ क्या हुई?
- 3:12ये बताओ असली तकलीफ तुम्हारी भगवान का होना या नय होना हुई?
- 3:24यह असली तकलीफ तुम्हारी दुख हुआ सोच के बताना तुम्हारी असली तकलीफ
- 3:37है, तुम दुखी हो। ये क्यों पूछते हो कि भगवान है या
- 3:46नहीं, क्योंकि तुमने मान लिया है और तुम्हारे शास्त्रों ने कहा है
- 3:54तुम्हारे गुरुओं ने कहा है? कि भगवान मिल जाए तो सुख मिल जाता
- 4:03है। मैं इस बात को काटता नहीं है, मैं
- 4:12तुम्हारी तकलीफ को इंगित करता हूँ कि तुम्हें लगी है भूख।
- 4:23तुम भूख की बात नहीं करते, तुम कहते हो ताजमहल कितना ऊँचा है तुम
- 4:33कहते एवरेस्ट कितना ऊँचा। और अगर तुम्हें मैं उचाई बता भी
- 4:41दूँ कि भाई ये 8000 किलोमीटर ऊँचा है तो क्या उससे आपका दुख मिट
- 4:51जाएगा? ऐसे ही तुम सही प्रश्न पे नहीं
- 5:00आते जो तुम्हारी तकलीफ है। और संसार में प्रत्येक व्यक्ति की
- 5:07तकलीफ एक ही है। दूसरी कोई तकलीफ ही संसार में है।
- 5:17इन। जानकर तुम्हें बड़ी हैरानी होगी,
- 5:23तुम्हें तकलीफ तो यह है कि तुम दुखी हो, इसी कारण से तुम अपने मन
- 5:33को भटका लेते हो। और ये भटका हुआ मन तुम्हें और
- 5:41दुखी कर जाता है। तुम पुश्ते हो, के भगवान है क्या?
- 5:54मेरे उत्तर देने से क्या इतने शास्त्रों में लिखा होने के
- 5:59बावजूद? कविता ने ऋषि मुनियों, संतों,
- 6:05महात्माओं ने जवाब दिया। कबीर ने कहा मैं कहता आँखों देखी
- 6:14तो क्या तुम्हारा भ्रम बैठा? खोपड़ी का मिट गया होगा।
- 6:22तुम अंध हक्त हो गए होंगे, लेकिन दुखी तो आज भी हो, खोपड़ी को
- 6:32उत्तर मिल जाता है और खोपड़ी को उत्तर मिलने से।
- 6:38सुखी होने का कोई संबंध ही नहीं है।
- 6:43एवरेस्ट की उचाई पता होने से सुखी होने का क्या संबंध है?
- 6:50बस तुम ऐसे ही मन को बहला लेते हो तुम मूल प्रश्नों पे आते ही नहीं।
- 7:00जैसे मूल प्रश्नों का तुमने उदगार करना ही छोड़ दिया है।
- 7:12मूल प्रश्न अपनी। स्थिति में यथास्थिति बने ही रहते
- 7:17हैं और तुम अन्य अन्य तरह से अपने मन को भटकाते हुए सुखी होने का
- 7:26प्रयास करते हो, मैं तुम्हें कहता हूँ चीजें वहीं मिला करती हैं
- 7:33जहाँ हुआ करती। परमात्मा है या नहीं है?
- 7:43कितने शास्त्रों ने जवाब दिया, कितने ऋषियों ने जवाब दिया लेकिन
- 7:50आज भी तुम्हारा। प्रश्न बा दस्तूर वहीं खड़ा और
- 7:57तुमने कभी चेष्टा नहीं की कि यह प्रश्न बा दस्तूर वहीं क्यों खड़ा
- 8:06जबकि हमें तो पता लग गया शास्त्रों से?
- 8:14तथाकथित प्रवचनकर्ताओं से ऋषियों मुनियों से संत महात्माओं से
- 8:24आचार्यों से पता चल गया कि वो है। लेकिन फिर वो है और तुमने पढ़
- 8:32लिया तुमने सुन लिया तुम्हारा प्रश्न फिर वहीं के वहीं क्यों है
- 8:43क्योंकि वह लिखा लिखी के है नहीं देखा कि बात?
- 8:51भूखे हों तो रोटी रोटी न तो जब से पेट भरेगा, गुर्दे खराब हैं तो
- 9:03दवाई लेनी ही पड़ेगी। शरीर में कोई व्यादी हैं तो दवा
- 9:10करानी ही पड़ेगी। रोटी रोटी का जाप करने से पेट
- 9:18थोड़ी कभी भरा है, लेकिन तुम्हारे ऋषिमुनि संत तो यही समझाते हैं,
- 9:28कितना भी समझाते रहें। लेकिन क्या तुम्हें घर जाकर रोटी
- 9:34नहीं खानी पड़ती? भूख मिटाने के लिए पड़ती है?
- 9:42राधे राधे तुम करते रहते हो? क्या राधे राधे कहनी करने के
- 9:49बावजूद भी तुम तुम्हारे दुख से निजात पा सके?
- 9:58नहीं पा सके। अगर नहीं पा सके तो उसका सीधा और
- 10:02सीधा सरल उत्तर है। कि वह अनुभव की चीज़ है, भगवान
- 10:12जपने की चीज़ नहीं, वह अनुभव की जाती है।
- 10:25तुम दुखी हो। तो दुख का कारण तलाशो कारण से
- 10:35छूटने का उपाय ढूंढो और जैसे ही तुमने उपाय ढूंढ लिया सर्च कर
- 10:46लिया। व्हाटस दी रीसन बिहाइंड इट
- 10:53प्रतिक्षण तुम दुख को तिरोहित करने में लग जाओगे।
- 11:00यह प्रथम पड़ाव है दुख से मुक्त होने का।
- 11:08और जब तुमने प्रथम कदम उठा लिया, तो फिर आखिरी कदम कोई बहुत दूर
- 11:15नहीं है मुश्कलात। तो तब पैदा होती है जब तुम प्रथम
- 11:28कदम उठाते नहीं, तुम शब्दों में उलझे रहते हो सदा और तुम।
- 11:43दुख को मिटाने के नकली नकली जो ढंग बताए जाते तुम्हारे गुरुओं के
- 11:50द्वारा तुंबव बनाते रहते भले दर्द हो रहा है शरीर को।
- 12:01और मैं तुम्हें वाटर फार इन्जेक्शन का टीका लगा दूँ, क्या
- 12:08दर्द ठीक हो जाएगा नहीं होगा क्योंकि दर्द असली है।
- 12:18साइकोलॉजिकल होता तो ठीक हो जाता लेकिन दर्द असली है तो फिर यह
- 12:27जाएगा डिक्रोफेनिक्स से एनल जैसिक से, ट्रिमेडोल से।
- 12:38ज्यादा है तो फोटमिन से उससे भी ज्यादा है तो मोरफिन से नॉरफिन से
- 12:46और बिल्कुल ज्यादा है तो ऐनेस्थीसियस दुखों की अपनी लिमिट
- 12:52होती है। तुम आज इतने दुखी हो।
- 12:56इसीलिए तो बेहोशी के आलम में खोए रहते हो।
- 13:02व्यक्ति शराब पीता है और उसके घर वाले कहते हैं बाबा और वो खुद भी
- 13:09कहता है मैं शराब का आदि हूँ। किसी तरह इसकी शराब छुड़ा दो।
- 13:20इनका तुमने इसका मूल दुखी ही नहीं पहचाना।
- 13:27इसके शराब पीने का कारण यह दुखी है।
- 13:38पल भर के लिए। मेहमान यहाँ।
- 13:50पल भर के लिए। मेहमान यहाँ मालूम है।
- 14:10मंजिल है। पल भर के लिए पल भर के लिए तुम
- 14:24अपने दुखों को भूलना चाहते हो। शराब पीने की लत ऐसी ही नहीं हो
- 14:32जाती। कहीं से शुरुआत होती है इसकी और
- 14:40शुरुआत होती है इसकी कि तुम दुखी, दुखी हो और शराब घड़ी दो घड़ी के
- 14:52लिए तुम्हें। मु्द्दे से वटका देती है, बेहोश
- 15:00कर देती है एनेस्थीसिया की तरह और तुम समते हो कि शायद मैं सुखी हो
- 15:13गया। शराब तुम्हें एक भ्रम देती है और
- 15:22भ्रम इस चीज़ का देती है कि तुम दुखी थे।
- 15:27शराब पीने के बाद तुम सुखी हो, तुम गलती में हो।
- 15:35तुम दुखी थे और अब भी दुखी हो, लेकिन शराब पीकर तुम दुख से निजात
- 15:45नहीं पाए। वर्ण दुख की तरफ तुम्हारा ध्यान
- 15:50नहीं दिया, तुम बेहोश हो गए। जैसे रात को सो जाते हो, कभी
- 15:58तुमने सोचा कि तुम कर्जदार हो, तुमने लोगों के करोड़ों रुपए देने
- 16:06हैं, लोग तुम्हें परेशान करते हैं।
- 16:13कर्ज चुकाने को तुम्हारे पास रकम है नहीं दिन भर तुम परेशानी के
- 16:22आरंभ में खोए रहते हो रात तुम सो गए दिन के थके हरे मादे चूर।
- 16:32अपने भीतर चले गए तो ज़रा सोचो कि तुम गहन निद्रा के उस आलम में चले
- 16:43गए सुशप्ति में चले गए। जहाँ तुम्हें याद नहीं रहा कि मैं
- 16:53करस्ता हूँ, बस शराब इतना ही काम करती है, शराब को पीने से तुम्हें
- 17:07याद नहीं रहता कि तुम दुखी हो। जैसे रात की निद्रा में सुसुक्ति
- 17:17की गहन अवस्था में तुम समस्याओं से दूर चले जाते हो समस्याएं
- 17:26तुम्हारी खोपड़ी में। और निद्रा अवस्था में तुम खोपड़ी
- 17:34से बहुत दूर सुसुक्ति में चले जाते हो खोपड़ी में और सुसुक्ति
- 17:43में डिस्टेंस है तुम समस्याओं से भरी खोपड़ी।
- 17:51उससे दूर छिटक जाते हो और तुम्हें याद नहीं रहता कि तुम करस्ता हो
- 18:06यही शराब करते। यही शिशुक्ति के करीब हो न करता
- 18:12है, लेकिन ध्यान रखना एक बेहोश कर देती है।
- 18:21शराब एक तुम्हें उस सतल पर बैठा देती है।
- 18:29जो तुम्हारे अस्तित्व के करीब है वह सुश्रुति है सुश्रुति में तुम
- 18:36वहीं पहुँच जाते हो जहाँ तुम्हारा स्वयं के तत्व का।
- 18:50ठहराव है अस्तित्व है तुम वहीं बैठे हो जहाँ शशूरती में तुम्हारा
- 18:59मन पहुँच जाता है, खोपड़ी से बहुत दूर।
- 19:08तो ये फार्मूला हुआ की अगर दुख से कर्ज से छुटकारा पाना तो खोपड़ी
- 19:17से दूर हो जाओ। यह आज एक फार्मूला दे रहा हूँ मैं
- 19:21तुम्हें। तो कोई शराब पी के खोपड़ी से दूर
- 19:28हो जाता है। वह बेहोश हो जाता है।
- 19:34कोई निद्रा में सो कर खोपड़ी से दूर हो जाता है।
- 19:38वह शुशुति में चला जाता है, लेकिन ये सब घटनाएं।
- 19:45शराब से घटें या निद्रा से घटें यह कुछ घड़ी दो घड़ी के लिए होती
- 19:54हैं। एक ऐसा भी ढंग है जिससे तुम सदा
- 20:01के लिए। उन समस्याओं से दूर हो जाओ, तुम
- 20:08कर्जदार हो, तुम दुखी हो, बेहतरी का है ध्यान ध्यान यानी अपनी
- 20:20खोपड़ी से भीतर उतर जाना दूर चले जाना।
- 20:31जब तुम खोपड़ी के दुख दर्द हो मांगने वाले कर्ज मांगने वाले
- 20:39तुम्हें परेशान करते हो चुकाने के लिए तुम्हारे पास रकम नहीं है,
- 20:48तुम मजबूर हो जाते हो। इस मजबूरी को के आलम में या तो
- 20:54तुम शराब पी के बेहोश हो जाओ या तुम थकचूर के रात को निद्रा के
- 21:03आलम में चले जाओ, लेकिन दोनों ही घटनाओं में।
- 21:09तुम खोपड़ी से दूर हो जाते हो, एक में खोपड़ी को भूल जाते हो, वो है
- 21:18शराब और एक में खोपड़ी से दूर हो जाते हो वो है निद्रा एक और भी
- 21:26तीसरा उपाय। वो है ध्यान ध्यान अपने आप को
- 21:36रिलैक्स कर दो कुछ मत करो ना राम राम करो, ना राधे राधे करो।
- 21:47ना जो तुम्हारे वक्त के प्रचलित नाम हैं।
- 21:51भगवान के कोई भी नाम ना जप क्योंकि उसका कोई नाम नहीं है,
- 21:58इतनी सृजना उसने बनाई क्या? तुम सोच सकते हो कि उसने कैसे
- 22:04बनाई? क्या इस प्रश्न का जवाब कभी
- 22:08खोपड़ी खोज पाएगी? वैज्ञानिक खोज पाएंगे, नहीं खोज
- 22:15पाएंगे उसकी बातें तो वो ही जाने लाखों ही पंडित करोड़ों हिंसाने।
- 22:27खुदा की बातें तो खुदा ही जाने उसने कैसे बनाई नहीं पता कर सकोगे
- 22:37तो फिर व्यर्थ में मगज़ गवाई क्यों की जाए?
- 22:44असली? तुम्हारे दुख का कारण क्यों ना
- 22:52देखा जाए कि तुम दुखी हो क्यों और उस कारण का उपाय खोजा जाए?
- 23:06उपाय करके उस कारण से मुक्त हुआ जाए।
- 23:12अब तुम सुखी हो जाओगे, दुख से छुटकारा मिल गया।
- 23:21प्रश्न ये करना चाहिए ये मत पूछो कि भगवान है कि नहीं?
- 23:26असल में तुम्हें तुम्हारे गुरुओं ने ऋषियों ने यह समझाया ये तो
- 23:33नहीं समझाया कि तुम दुखी हो। ये समझाया कि भगवान है बस उसका
- 23:40नाम जपों यहीं चूक गए वो भी और यहीं तुम्हें भी चुकवा रहे हैं।
- 23:46वो असल कारण है कि ना तो उन्हें पता है और ना वो आपको बता पाते
- 23:56हैं। काग पढ़ाया, पिंजरा पड़ गया चारों
- 24:02वेद। समझाए समझा नहीं अरे अडेड का ढेड
- 24:08तुम मूर्ख के मूर्ख ही रह जाते ना जिसने बताया तुम्हे राधे राधे
- 24:13करते रहो, वो ढेड़ हैं, मूर्ख हैं, वो मूढ़ हैं ना?
- 24:19उनको दुख से निजात मिली। न तुम्हें दुख से निजात दिला
- 24:24पाएंगे। दुख से निजात तुम्हें दिला कौन
- 24:28पाएगा दुख से निजात वो दिला पाएगा जो खुद से दुख से निजात पा गया?
- 24:44तुम उनके समक्ष भिक्षा पत्र लिए खड़े हो जो खुद ही भिखारी हैं और
- 24:52मज़े की बात दो भिखारी आमने सामने खड़े हैं।
- 24:59उसका भिक्षा पात्र तुम्हें दिखता नहीं जिससे मांग रहे हो तुम्हारा
- 25:05भिक्षा पात्र उसे दिखता है और वह तुम्हारे भिक्षा पात्र का नाजायज
- 25:11जो उपयोग करता है। वो कहते राहते राहते करते रहो।
- 25:16असल में उसे विषय की जरूरत है। उसने भगवान को ना देखा, ना भगवान
- 25:23को देखने की उसकी कोई चाहत है अन्यथा सही कारण खोजता वो।
- 25:31वो नहीं आपको कहता कि राधे राधे करो ना कहता राम राम करो ना कहता
- 25:36प्रभु का नाम स्मरण करो। वह जान लेता कि नाम स्मरण करने से
- 25:42कुछ भी तो नहीं होता जो इंजेक्शन आपको।
- 25:51डिकलोफेनिक का लगेगा वह आराम देगा दर्द से क्या उसका नाम दोहराने से
- 25:58तुम दर्द से मुक्त हो जाओगे? डिकलोफेनिक डिकलोफेनिक डिकलोफेनिक
- 26:04सोडियम पटाशियम ये करते रहोगे क्या तुम्हारा दर्द मिट जाएगा।
- 26:12नहीं मिटेगा ना बस ऐसा ही ना रोटी रोटी कहने से भूख मिटे ना
- 26:21डिकलोफेनिक के रेपेटिशन से दर्द मिटे।
- 26:27यही समझाया तुम्हारे मूर्ख गुरुओं ने और तुम उनके चरण पकड़े हो, तुम
- 26:35भिक्षा पात्र लिए जाते हो बाबा मैं दुखी हूँ, दर्द से मारा जाता
- 26:40हूँ, आगे वो भी दुखी है। वो सोचता है कि अच्छा शिकार फंस
- 26:47गया, वह तुम्हें लूट लेता है, उसने व्यवस्था करानी है।
- 26:58उसका गुर्दा खराब है। उसने इलाज कराना है, उसने
- 27:09डायलीसिस कराना है, उसने किडनी को ट्रांसप्लांट करना है, उसकी अपनी
- 27:18समस्याएं और तुम फंस जाते हो। तुम्हें लूट लेता है ध्यान रखना,
- 27:31उसको आराम के लिए बड़ा सा महल भी चाहिए जैसे जैसे तुम उसके अनुयायी
- 27:39बढ़ते जाओगे। वैसे वैसे उसकी वासनाएँ बढ़ती
- 27:42जाएगी। फिर वह अन्य दवाओं का प्रचार
- 27:47करेगा क्योंकि उसको धन की आवश्यकता है, वह दुखी है धन के
- 27:57अभाव के कारण। फेल ओवर ऑफ किडनेस के कारण
- 28:05तुम्हें पता नहीं कि तुम दुखी हो। क्यों दुख का कारण ढूंढो?
- 28:17दुख का कारण है अज्ञान। दुख का कारण है कि मैं कौन हूँ,
- 28:26इसका सही सही तुम्हें खबर नहीं है।
- 28:30यह दुख का कारण है, यही बुद्ध कहते हैं।
- 28:38दुख का कारण जब तुमने ढूंढ लिया अज्ञान तुमने माना है कुछ हो तुम
- 28:48कुछ और इसलिए तुम दुखी हो द्वंद है।
- 28:55क्योंकि हो तो तुम और माना तुमने और तो द्वंद पैदा होता है, खिंचाव
- 29:02पैदा होता है और ये खिंचाव तुम्हें और ज्यादा दुखी कर जाता
- 29:08है। तुम बहुत दुखी है, भगवान है कि
- 29:16नहीं है, इससे तुम्हें क्या लेना है तुमने तुमने टिंडे लेनी है,
- 29:21भगवान से भगवान हो कि नहीं, तुमने क्या अंडे लेनी है, उससे होगा तो
- 29:30क्या नहीं होगा तो क्या? बात अपनी करो कि तुम हो दुखी
- 29:37तुम्हारी तकलीफ है कि तुम दुखी हो और तुम्हारे ऋषियों ने समझाया कि
- 29:44भगवान सब दुखों को दूर कर देते हैं इसलिए तुम पूछते हो कि क्या
- 29:49वो है? और संत कहते हाँ, वो है जिसने
- 29:56देखा वो तो कहता मैं तो मोहर लगाता हूँ और जिसने नहीं देखा वो
- 30:01भी कहता कि हाँ है, नहीं देखा तो भी कह देता कि मैं हाँ, मैंने
- 30:06देखा है। और तुम पहचान कैसे पाओगे?
- 30:12अंधा कैसे पहचान पाएगा? के सामने वाले की आँखें हैं के
- 30:19नहीं हैं। सामने वाले के पास आँखें हैं के
- 30:25नहीं हैं, यह तो आँखों वाला ही पहचान पाएगा।
- 30:30तो अंधे के सामने अंधा खड़ा है। मैं रोज़ कहा करता हूँ कि
- 30:36तुम्हारी वार्तालाप तुम्हारे सारे शास्त्रार्थ बिल्कुल ऐसे ही हैं
- 30:42जैसे अंधा अंधे से शास्त्रार्थ कर रहा है।
- 30:46एक अंधा कहता हरे रंग के छे। टांगे होती हैं, दूसरा कहता नहीं
- 30:53चार होते हैं। तीसरा कहते तुम सभी करते हो, उसकी
- 30:59टांगे तो आठ होती हैं। चौथा कहते हैं, आठ नहीं उसकी तो
- 31:07इतनी टाँगे हैं जो गिन ही नहीं जाती बस तुम्हारे सारे
- 31:12शास्त्रार्थ बिल्कुल ऐसे ही शास्त्रार्थ हैं भला अंधे रंगों
- 31:18को जानती ही नहीं? तो उसके बारे में बात क्या
- 31:24करेंगे? रंग कैसा होता ये पहचान में आता
- 31:27आँखों से और रंग को पहचानने वाला मूल आंख तुम्हारे पास है नहीं।
- 31:39तो फिर तुम जो शास्त्रार्थ करोगे वह अंधों का शास्त्रार्थ होगा।
- 31:45सदियों सदियों से शंकराचार्य के आदि वेला से अंधों का शास्त्रार्थ
- 31:52चल रहा, क्योंकि शंकराचार्य खुद अंधें।
- 32:00उनको पता ही नहीं आँखें हैं ही नहीं उनके पास।
- 32:04इसीलिए तो वह मंडल मिश्र को कहते हैं कि आओ, शास्त्रार्थ करें, बट
- 32:10जिसने देख लिया वह शास्त्रार्थ करेगा।
- 32:17जब उसको पता चल गया कि उसके बारे में कुछ बोला जा नहीं सकता।
- 32:23सब बोला हुआ मात्र बकवास है वह इतना विराट, विशाल सब बोला हुआ
- 32:32व्यर्थ है, शब्दों से पार है वो। शब्दों में समाता नहीं।
- 32:37वो फिर भी शास्त्रार्थ करेगा। फिर भी शास्त्रार्थ करने के लिए
- 32:43भारती को और को झंडी दिखाएगा कि आओ, शास्त्रार्थ करो।
- 32:52ये उनकी अज्ञानता की निशानियां हैं, लक्षण हैं और भगवान कृष्ण
- 32:57यही बात कहते हैं किसी के कुछ कहने सुनने पे विश्वास मत करना,
- 33:07लक्षणों से पहचान। और लक्षणों से अगर तुम्हें पहचान
- 33:11आ जाए तो लक्षण ये है कि वह आनंदित होगा जिसकी सभी समस्याएं
- 33:19समाप्त हो गईं। वह खुशी में आनंद के प्याले
- 33:24पिएगा। मद के प्याले पी के मदहोशी के आलम
- 33:27में खोया रहेगा। उसे शास्त्रों से लेना क्या है?
- 33:36वह कहेगा शास्त्रों को फूंक दो, तुम्हारी जिंदगी की समस्याएं
- 33:44शास्त्र नहीं हल कर सकेंगे। जिंदगी की समस्याएं जिंदगी से ही
- 33:51हल होंगी। तुम जिंदगी की समस्याएं शास्त्रों
- 33:56से हल करना चाहते हो। कैसे होगा डिक्लोफैनिक?
- 34:03शास्त्रों में लिखा हुआ तुम्हारे दर्द का नवारण करेगा कैसे?
- 34:09बोर्ड पे लिखी हुई रोटी हमारा पेट कैसे भरेगी?
- 34:15ब्लैक बोर्ड पे लिखा हुआ जल पानी नीर शीतल पेय पदार्थ भारी प्यास
- 34:22को कैसे मिटा पाएगा? इन शास्त्रों ने तुमको उलझा लिया
- 34:30है इन शास्त्रार्थों ने तुमको उलझा लिया है तो तुमने पुत्र पूछा
- 34:39कि भगवान है बाबा आपने देखा है? भगवान है, मैंने देखा है मेरे
- 34:54चेहरे की खुशी मेरे बोलने की मदहोशी का आलम।
- 35:03मेरे आनंद में खोए खोए अल्फाज़ मेरे भीतर से आती हुई आनंद से
- 35:11टकराकर वो लहरें इनसे तुम अंदाज़ नहीं लगा सकते कि वो है।
- 35:23और मैंने पिया है ये अलफाज़ उससे टकरा के आ रहे हैं।
- 35:31अगर वो नहीं होता तो मेरे शब्दों में इतना रस ना होता।
- 35:40मेरे शब्द सूखे, रूखे रेगिस्तान की भाँति जलते हुए होते तो मारे
- 35:52हृदय को शांति न देते। वो है तो जब मैं बोलता हूँ।
- 36:02फल दो पल के लिए तुम उस आनंद के भीतर तुम भी मेरे संग संग हो लेते
- 36:09हो और तुम भी थोड़ी देर के लिए सही।
- 36:17इस आनंद का पान कर लेते हो मेरे संग संग जो तुमने शास्त्रों से
- 36:24नहीं पाया वो संत के अलफाजों में मिल जाएगा।
- 36:34शस्त्र तुम्हें दिलासा देते हैं, शस्त्र बोल नहीं सकते, शास्त्रों
- 36:42को तुम्हें पढ़ना पड़ता है इसलिए शास्त्रों में मत खंगालना मात्र
- 36:55अलफाजों के सिवा वहाँ कुछ नहीं मिलेगा।
- 36:59शस्त्र ही तलाशना तो जीवंत शास्त्र तलाशना मक्का मदीना गंगा
- 37:10सागर, हरिद्वार ऋषिकेश इनको मत तीर्थ।
- 37:16स्थानों को मत तलाशना एक तीर्थ तुम्हारे भीतर भी है।
- 37:24जीस तीर्थ के दर्शन से अज्ञान का नाश होता है।
- 37:30बस अबुद्ध यही बात कहते हैं। तुम दुखी हो।
- 37:36इस दुख का कारण है इस दुख का कारण है अज्ञान और इस दुख को मिटाने का
- 37:45ढंग है समाधान है समाधि तुम अपने भीतर उतरो, तुम्हें वो रस मिलेगा।
- 37:55जो तुम्हारी सारी समस्याओं का समाधान कर दे, तुम्हारे सभी दुखों
- 38:02का अंत कर देगा वहाँ उतर जाओ जहाँ वधू उतरे खोपड़ी से दुख नहीं दूर
- 38:14होता। खोपड़ी से तुम याद कर सकते हो
- 38:21रोटी खाने से भूख मिटती है, पानी पीने से प्यास मिटती है।
- 38:29एनरजेस का इंजेक्शन लेने से या दवा खाने से दर्द मिटता है?
- 38:34न सीता न भर जान पाओगे, न दर्द मिटेगा, न भूख मिटेगी, न प्यास
- 38:41बुझेगी। मात्र सूचनाओं को संग्रहित करना
- 38:51दुखों से निजात पाना नहीं होता, इसको फिर सुन लो।
- 38:57मात्र सूचनाओं को एकत्रित करना के दर्द नाशक दवा खाने से दर्द मिट
- 39:04जाता है। मातृ सूचनाओं को एकत्रित करने के
- 39:10भोजन करने से भूख मिल जाती है। शीतल जल पीने से प्यास सुमट जाती
- 39:18है। यह तुम्हारी समस्याओं का समाधान
- 39:22नहीं करेगा। तो समस्याओं का समाधान कैसे होगा?
- 39:28भोजन खाने से भूख मिटेगी। जलपान करने से प्यास मिटेगी, ढंग
- 39:42उपाय करने होंगे। अज्ञान का नाश करना होगा, ज्ञान
- 39:50का नाश होगा, ज्ञान से और ज्ञान मिलेगा तुम्हें दर्शन से यही सारी
- 40:02कहानी सारी दुनिया दुखी है शब्दों की लफ्वाजी में।
- 40:10तुम ढूंढ़ते हो, सुख नहीं मिलता फिर भोगों में ढूंढ़ते हो सुख
- 40:20नहीं मिलता तुमने कभी सोचा भी नहीं होगा कि सुख तुम्हारी
- 40:27इंद्रियां उठाती। स्वाद तुम्हारी इन्द्रियां चखती
- 40:34हैं। जब तुम स्वादिष्ट भोजन जीवों पर
- 40:38रखते तो टेस्ट व्रत को मज़ा आता कि यह खट्टा यह मीठा यह कड़वा यह
- 40:48कैसैला। तुम्हारे टीस्ट वर्ड्स बताते हैं
- 40:53तो इंद्रियों ने भोंगा सुख इंद्रियों ने भोंगा दुख इसको
- 41:00जानने वाला एक तत्व है वो तो उसको साक्षी कहते हैं साक्षीत की।
- 41:08प्रणाली तुम्हें बताई अपने ही भीतर उतर जाओ, तुम्हें साक्षी का
- 41:19दर्शन होगा, उस साक्षी में अधिश्चित हो जाओ।
- 41:28तुम्हें भेद पता चल जाएगा, मैं दुख को देखने वाला हूँ, मैं दुख
- 41:37का साक्षी हूँ, जैसे पर्दे पर चल चित्र को तुम देखते हो सिनेमा हॉल
- 41:46में। ऐसे ही तुम्हें अपनी मन की
- 41:50स्क्रीन के ऊपर सुख और दुख चलते हुए नजर आएँगे और तुम देखने वालों
- 41:58की तरह। दर्शक बनकर दुष्टा बनकर उसे देखते
- 42:02रहोगे साक्षी बनकर ऑब्जर्वर बनकर तुम देखते रहोगे?
- 42:10थोड़ा जाग के देखना तो समझ आएगा कि मैं देखने वाला हूँ यह सामने
- 42:18चलने वाला। तो मात्र श्वेत स्क्रीन के ऊपर
- 42:25चलती हुई फ़िल्म है। मैं मात्र देखने वाला हूँ यहाँ
- 42:30भेद मिट गया मैं अलग। दुख अलग जीसको कर्ज है, वह मुझसे
- 42:43दूर खोपड़ी में है जीसको दुख है वह मुझसे दूर शरीर में है, दर्द
- 42:52है, मेरे शरीर में है, मैं उसका साक्षी हूँ।
- 42:57यहीं से शुरुआत होती है अध्यात्म की सबसे पहला पार्ट अध्यात्म की
- 43:07खोज फर्स्ट स्टेप ऑफ स्पर्चुअलिस्म अध्यात्म का पहला
- 43:15कदम। देखो जागकर देखो घटनाओं को घटनाएं
- 43:24बाहर परिधि पे घट रही हैं ऑन द सफर और तुम हो, केंद्र में तुम
- 43:33अधिष्ठित हो। एस्टब्लिश हो इन दी सेंटर घटनाएं
- 43:41घट रही हैं। उन दी सफियर पर द्वीप घटनाओं को
- 43:46घटते हुए तुम देखने वाले केंद्र पे मौजूद सफियर से बहुत दूर बैठे
- 43:54हो। बस इतना सा देखना और तुम्हारा
- 43:59जीवन बदल गया। इसी को ट्रांसफॉर्मेशन कहते हैं।
- 44:05इसी को क्रांति कहते हैं। क्रांति की जरूरत बाहर नहीं,
- 44:10क्रांति की आवश्यकता तुम्हारे भीतर।
- 44:15तुमने पूछा बाबा आप प्रवचन कितना सुंदर करते हो?
- 44:20फिर फिर राजनीति में कहाँ आए? मैं राजनीति में नहीं आया।
- 44:28कहाँ आया? राजनीति में ये भी पहला कदम है।
- 44:38उस छत तक पहुंचने की पहली सीढ़ी है पहला पड़ाव है।
- 44:47ये राजनीति नहीं है, मैं तुम्हारे भोजन का प्रबंधक नहीं आया हूँ।
- 44:57क्योंकि बड़े से बड़े संत भूख के आगे बेबस हो जाते है।
- 45:02भूखे भजन न होय वो वाला ये लो, अपनी कंठी में लो तो ये मैं बखूबी
- 45:11जानता। के तुम भूखे हो आज की व्यवस्था ने
- 45:18राजनीतिक व्यवस्था ने तुम्हारी रोटी छीन ली है।
- 45:26तुम्हारी रोटी छीनकर अपने ड्रंक को भर लिए हैं।
- 45:32तुम्हारी रोटी छीन कर बैंक में जमा कर लिया है।
- 45:37तुम्हारी जमीनें छीन कर बड़े बड़े प्रोजेक्टर लगा लिए या अपने बाग
- 45:43बगीचे, उद्यान या पशुपालन कर रहे हैं?
- 45:49शेर उनका दिन दिल बहला रहे हैं, सीते हैं शेर हैं लेकिन आदमी
- 45:57भूखों मर रहा है, मैं तुम्हें एक बात कहूं, आज लोग कहते हैं गऊ का
- 46:06वध मत करो। देखिए वज तो किसी का भी करना गलत
- 46:12है गऊ क्या किसी भी प्राणी की हत्या अच्छी नहीं होती?
- 46:21हिंसा कुछ भी हो, कहीं भी हो, बुरी होती।
- 46:27अहिंसा ही अच्छी होती है। अहिंसा ही तुम्हें अपने तत्व तक
- 46:32पहुंचाएगी, वहीं तुम्हें जाकर सुकून मिलेगा, लेकिन अगर कभी ऐसा
- 46:42डोर संसार में आ जाए। कि एक तरफ मानवता को मनुष्यता को
- 46:50बचाना हो और एक तरफ जीव जंतु को बचाना हो।
- 46:55देखिए मैं कंपैरिजन कर रहा हूँ, इसको इतर मत ले लेना अगर।
- 47:05कहीं संसार में ऐसा मौका आ जाए कि या तो मनुष्य को बचा लो या जीव
- 47:16जंतुओं को बचा लो, पेड़ पौधों को बचा लो।
- 47:26तो तुम मनुष्य को बचा लेना, क्योंकि मनुष्य अगर जिंदा रहेगा
- 47:35तो सब दोबारा से खड़ा कर लेगा। दोबारा से पेड़ उगा लेगा।
- 47:41दबारे से जीव जंतुओं को विकसित कर लेगा।
- 47:45अगर मनुष्यक हो गया तो न कुछ पेड़ कर सकेंगे, न कुछ जीव जंतु कर
- 47:52सकेंगे। हिंसा सभी चीजों की बुरी है,
- 47:56लेकिन मैंने एक बात कही है आपसे। इस बात को इतर मत ले लेना।
- 48:04तुमने पूछा पुत्र भगवान है, यह तुम्हारा असली मकसद नहीं है अगर
- 48:14किसी दिन तुम्हें तुम्हारा असली मकसद ये बन जाए।
- 48:21कि भगवान है के नहीं है उस दिन तुम्हारे भीतर बिरहा की आग जगेगी
- 48:28और वह जगेगी सतौरी के बाद सतौरी में थोड़ी उसकी झलक मिलती है
- 48:35थोड़ा पता चलता है कि वह है। और वह जगाता है तुम्हारे भीतर
- 48:42बिरहा की आग बिरहा की आग जग जाए, तो तुम तलाश करते हो कि वह है
- 48:52कहाँ? अंतरंग क्षणों में दूर से वही
- 48:59दिखता है जिसे तुम पर महात्मा कहते हो, लेकिन सिर्फ देखना ही
- 49:06काफी नहीं है। जब वह है तो क्यों नहीं हम उद्यम
- 49:13करके उसके बीच में समाहित हो जाते?
- 49:17उसमें विलीन को नहीं कर देते। अपने आप को विलीन कर दो, मर्ज कर
- 49:25दो अपने आप को ताकि तुम सुखी न हो सको तुम सुख के सागर ही हो जाओ।
- 49:36तुम सुखी न हो सको, अगर तुम सुखी हो गए तो अभी भी भेद बाकी रह गया।
- 49:44तुम सुखी और सुख का सागर अलग दो तत्व हो गए नहीं, मैं कहता हूँ
- 49:52अभेद हो जाओ। सुखी अलग और सुख का सागर अलग ये
- 49:58दो न रहे, सुख सुख के सागर में समा जाए, मर्ज हो जाए, विलीन हो
- 50:07जाए, एक आकार हो जाए, अद्वैत हो जाए, भेद मिट जाए अभेद में चला
- 50:14जाए। या कस हो जाए, उसके साथ एक मिक हो
- 50:18जाए, यही है तुम्हारा लक्ष्य तुम भगवान को ढूंढ़ते नहीं हो, असल
- 50:25में तुम्हारा अभी जो कारण है वो है तुम दुखी हो।
- 50:33और तुम दुखी क्यों हो? ये देखो क्या भूख होने के कारण
- 50:39दुखी हो? क्या कोई कमीबेशी हो तो दुखी हो
- 50:44क्या कर्जदार हो तो दुखी हो या कोई अंग खराब हो तो दुखी हो, दुख
- 50:50का कार्य रख हो, जो। अगर सब है तुम्हारे पास और फिर भी
- 50:56दुखी हो तो फिर आओ तुम अध्यात्म में तुम्हे मिलेगा जब आप उसका
- 51:03सबके रहेती लगता है ऐसे। सबके रहते लगता है ऐसे।
- 51:20कोई नहीं है मेरा। कोई नहीं है मेरा।
- 51:39सबके रहते लगता है ऐसे। कोई नहीं है मेरा कोई नहीं है
- 51:59मैं। सूरज को छू।
- 52:09न निकला। था सूरज को?
- 52:18छू न निकला। था।
- 52:24आया हाथ अंधेरा कोई नहीं है, मैं रहा।
- 52:43कोई नहीं है। मेरा कोई नहीं है मेरा।
- 52:58तुम दुखी हो। भगवान है कि नहीं है, इससे
- 53:03तुम्हें कुछ लेना देना नहीं। इसलिए बुद्ध कहते हैं तुम बातों
- 53:10को इधर उधर मत घुमाओ। मूल कारण पे आ जाओ कि क्यूँ पूछते
- 53:17हो, भगवान है कि नहीं? तुम पाओगे कि तुम दुखी हो, तुम
- 53:25किसी अभाव से ग्रस्त हो, कुछ है जो तुम्हें खोए खोए से लगता है
- 53:33कुछ है जिसे तुम इतने जन्मो से चूके चूके जा रहे हो।
- 53:41अगर वह मिल जाए तो तुम ये प्रश्न ना पूछो कि भगवान है के नहीं है।
- 53:52जहाँ जाकर सभी दुख दर्द मिट जाते हैं, वह भगवान ही तो है।
- 54:01उससे इतर कोई भगवान होता है क्या? जहाँ जाकर तुम्हें सब अभावों से
- 54:08मुक्ति मिल जाए वो ही तो भगवान है, उससे इतर कोई भगवान होता है
- 54:14क्या? जहाँ जाकर तुम्हारी सब दुख, दर्द,
- 54:19कष्ट, कलिश, चिंता, चिंताएं, विषय विकार सब मिट जाएं, वो ही तो
- 54:31ईश्वर है उसके इतर। ईश्वर कुछ होता है क्या?
- 54:38नहीं कुछ नहीं होता। वास्तव में तुम दुखी हो, इस दुख
- 54:43से निजात पालो और दुख से निजात मिलेगा।
- 54:47तुम्हें अपने भीतर जाकर बाहर की वस्तुएं इकट्ठे करने से तुम्हारी
- 54:53भूख मिट जाएगी। प्यास सिमट जाएगी।
- 54:56लेकिन तुम सुखी नहीं हो क्या? धन्यवाद।