Latest / Baba ji Vijay Vats / 7 Dec 24 - ब्रह्माण्ड को अपने अंदर कैसे खोजें? जानें इसे अनुभव करने का तरीका!
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- 0:02सिद्धार्थ प्रकाश यथा पिण्ड तथा भ्रमण्य।
- 0:17इसका सही अर्थ कह बाबा। ये शब्द चर्क संहिता से भी लिया
- 0:31गया है और ये शब्द यजुरवेश से भी लिया गया है।
- 0:40इसलिए। यह वैज्ञानिक भी है।
- 0:45यह अध्यात्मिक भी है। चरक वैज्ञानिक हैं, जड़ी बूटियों
- 0:57के साइंटिस्ट हैं। और यजुरबित अध्यात्म से संबंध
- 1:05रखता है। इसका उत्तर तुम कई प्रकार से समझ
- 1:15सकते हो लेकिन मेरे देखे जो उत्तर बनेगा।
- 1:24यही बनेगा जो पिंड में है। उसी का फैलाव ब्रह्मांड में यथा
- 1:36प्रिंड है, यथा ब्रमंड है। मैंने कहा मेरे देखे तो मैं
- 1:48अनुमान से नहीं कहता हूँ मैं अनुभव से कहता हूँ।
- 1:58आजकल बहुत से पागलपन यूट्यूब पे आते हैं।
- 2:04ब्राह्मण के इस रहस्य को तो हमें समझ लेना चाहिए और मेरे पास रोज़
- 2:15क्लिप्स आ जाते हैं। बाबा देखना।
- 2:22ये व्यक्ति ठीक कह रहा है। मैं उनसे बोलता हूँ कि तुम मुझसे
- 2:31सर्टिफाइ करना चाहते हो, अगर मेरे पे इतना विश्वास है तो मुझको ही
- 2:39सुन लो। किसी शब्द को सर्टिफिकेशन कराने
- 2:46के बजाए जिससे सर्टिफाइ करवातें हो उसी को सुन लो ना ज्यादा ठीक
- 2:54नहीं रहेगा। खैर, मैं बतला देता हूँ।
- 3:03यूट्यूब के ऊपर बहुत सी वीडियो मिलेंगे।
- 3:07भ्रमंड के इस रहस्य को समझना अवश्य करें क्यों अवश्य करें ये
- 3:16लोग आपको फायदे दिलाएंगे। खुशी मिलेंगे, जो मांगोगे मिल
- 3:27जाएगा, पल भर में मिल जाएगा, लेकिन ऐसा पागलपन का जवाब मैं
- 3:34नहीं देता। जो मांगोगे तुम नहीं जाएगा तुम आज
- 3:45कहते हो बाबा ने बहुत साल पहले कह दिया, जो मांगू ठाकुर अपने थे सोई
- 3:53सोई दे वे। और ये तो बहुत आसान सी बात है
- 4:05अपने भीतर उतरो, जंक्चर पॉइंट पे चले जाओ, जो मांगोगे मिल जाएगा,
- 4:10इतनी मशक्कत करने की जरूरत है। मेरी बात एक गौर से समझ लेना।
- 4:19संसार में जीतने लोग मशक्कत कर रहे हैं।
- 4:25अगर उसे 1000 गुणा का मशक्कत अपने भीतर उतरने में कर ले तो तुम उसी
- 4:33जंक्चर पैंट पे पहुँच जाओगे जहाँ जो मांगोगे।
- 4:39वह मिल जाएगा। ऐसे पागलपन की बातों से कुछ नहीं
- 4:44होता। तुम इन्हें मान के देख लो।
- 4:49मान के देख लो पहले पा के भ्रम टूट जाए है तो ये भ्रम।
- 4:58ब्राह्मण के किसी भी रहस्य को जान लोगे, उससे जो मांगोगे वो मिल
- 5:06जाएगा, लेकिन एक चीज़ नहीं मिलेंगे जिसकी तुम्हें जरूरत है
- 5:18जिसकी पुकार। अंतः प्राणों से उठ रही है निरंतर
- 5:27यह जो अनाज चौबीसों घंटे तुम्हें आवाज देता है, ये भीतर के अंतःकरण
- 5:40की पुकार है, तुम्हें कुछ चाहिए। वह जो तुम्हारा अंतःस्पुकार करता
- 5:51है वह ना मिलेगा। अगर तुम जो भी मांग लोगे, वह मिल
- 5:58जाएगा। ये तो मामूली सी बात है।
- 6:06बहुत सिरख पाई की आवश्यकता नहीं है ना जो मांगोगे वो मिल जायेगा।
- 6:19ब्रह्मण्ड के इस रहस्य को समझ लो लेकिन तुम पहले इसको आजमा लो।
- 6:30मिलेगा नहीं। मुझे पक्का पता है क्योंकि जहाँ
- 6:35मिलता है उस तल को मैं जानता हूँ और तुम्हें गाहेब गाहेब बहुत बार
- 6:44बतराया भी है। मैं तुम से भी कह के तुम मुझे जब
- 6:52सर्टिफिकेशन के लिए कोई वीडियो भेज देते हो।
- 7:00अगर इतना ही यकीन है तो मुझे ही सुन लिया करो ना।
- 7:07लेकिन इसमें दिक्कत आती है। तुम मुझे सुनना तो चाहते हो लेकिन
- 7:13अपनी तरह सुनना चाहते हो यही मुश्किल आ जाती है।
- 7:19तुम चाहते हो मैं बोलूं, लेकिन तुम्हारी तरह बोलूं।
- 7:23तो फिर मैं तो अज्ञानी हो की भाषा ये बोलेंगे, क्योंकि तुम अज्ञानी
- 7:26हो जत्थापिंडे तथाप्रमिंडे अब इसका अर्थ क्या है, सही अर्थ क्या
- 7:44है इसका? किसी ग्रंथ से, गीता से, यजुर्वे
- 7:52से, अथर्ववे से, श्याम वै से रिगवेश से मैं इनके ऊपर इतना यकीन
- 7:59नहीं करता। मेरी बात इनसे बैठ जाती है तो
- 8:02मिला देता हूँ। लेकिन मुझे यकीन नहीं है और तुम
- 8:09भी यकीन मत करना क्योंकि अगर इनके ऊपर यकीन करोगे तो इनमें ही खप
- 8:16जाओगे और जीवन इतना छोटा है और ग्रंथ इतने महान हैं, वृहद हैं।
- 8:24कि कई जिंदगियां चूक जाएँगी, साहित्य न पड़ पाओगे, ये साहित्य
- 8:30है महज ज़रा देखो कितने नक्शे हैं संसार में अगर तुम सभी नक्शों।
- 8:42पर चलना शुरू हो जाओ तो क्या नाक पाओगे इस पृथ्वी को नाक पाओगे
- 8:48नहीं, नाक पाओगे तो ये ब्राह्मण कैसे न पा जा सकता है?
- 8:57जो अथाह है जो विराट है। इसका कोई और छोर नहीं है।
- 9:01नो मेजरमेंट कोई पैमाना नहीं तो तुम क्या पूछा?
- 9:11बेटे तथा भ्रमण है, उसका अर्थ क्या है?
- 9:23पहले तुम्हें पिंड में उतरना पड़ेगा।
- 9:27स्व अपने भीतर उतरना पड़ेगा। यह पिंड है हमारा जैसे मैं
- 9:32इंस्ट्रूमेंट कहता हूँ। यह हमारा पिंड है और पहले इस पिंड
- 9:39में उतरना पड़ेगा। फिर उस जंक्चर प्वाइंट की जो मैं
- 9:45बात करता हूँ वहाँ पहुंचोगे लेकिन वहाँ से मसला हल नहीं होगा।
- 9:51वहाँ से मांगें पूरी होती हैं ध्यान रखना इस बात का।
- 10:01जो मैं आगे शब्द बोल रहा हूँ खतरनाक है वहाँ से मांगे पूरी
- 10:07होती हैं, जरूरतें नहीं और तुम्हारी जरूरत क्या है ये
- 10:14तुम्हें नहीं पता तुम्हारे अंतः को पता है।
- 10:19अहर्निष् पुकार कर रहा है जो तुम्हारे प्राणों से उठता हुआ यह
- 10:25उदघोष अहर्निष् पुकार कर रहा है किस चीज़ की कि मुझे इस चीज़ की
- 10:36जरूरत है? क्या पुकारना है वो आवश्यकताओं तो
- 10:45तुम्हारी बहुत हो सकती हैं इच्छाएं तो तुम्हारी वास्प नहीं
- 10:49तो तुम्हारी बहुत हो सकती हैं, लेकिन मैंने एक शब्द कहा।
- 10:57जरूरत और कमाल की बात है। हम सब इकट्ठा कर लेते हैं और
- 11:06जिसकी जरूरत है उसे चूक जाती है। इसीलिए तो प्रत्येक व्यक्ति मारा
- 11:14मारा सा लटका लटका सा। आनंद विहीन कोई नृत्य नहीं, कोई
- 11:22गाय नहीं, कोई झूमता नहीं, कोई उसका कंठ स्वर लहरियों से बर्तन
- 11:33तुम कभी प्रसन्न दिखे नहीं मुझे। सारा संसार छान लेते हो और इसी
- 11:44में जीवन व्यतीत कर देते हो। इधर घूम लिए उधर घूम लिए एक जगह
- 11:51से बोर हो जाती हो, मन कहता नहीं है उधर चलो।
- 11:54दूसरी तरफ, चलो अंग्रेजी में एक शब्द आता है डिमांड और उसका हिंदी
- 12:02दर्ज में तुमने किया है जरूरत मांग, लेकिन ध्यान रखना जो
- 12:10तुम्हारी मांग है। दैट इज़ नॉट अल्टीमेट, वह अंतिम
- 12:18मांग नहीं है, तुम वासना की मूर्ति चाहते हो, बड़े कार चाहते
- 12:28हो, बड़े प्लेन चाहते हो? ये चाहते हैं तुम्हारे वासनाएँ
- 12:38हैं तुम्हारी लेकिन मैंने तुम्हें पहले एक शब्द कहा था जरूरत तुम
- 12:48कभी पूरी नहीं करते। इच्छाएं को तुम पूरी कर लेते हो,
- 12:53इसे ध्यान से बांट लेना, पोटली में इन शब्दों को बांट लेना जरूरत
- 13:04को तुम कभी पूरा नहीं करते। मांगों को तुम सदा ही पूरा करते
- 13:11हो डिमॅंड और जरूरत इसका तर्ज में तुम्हें एक ही मिलेगा, लेकिन जो
- 13:25तुम मांगते हो। वह तुम्हारी जरूरत नहीं है
- 13:32तुम्हारी चाहत तो कुछ और है तुम्हारी जरूरत कुछ और है तुम
- 13:43तुम्हारी जरूरत से दो कदम दूर हो। सिर्फ दो कदम पहला कदम है।
- 13:56बाहर से सारी शक्तियां को खींचकर जंगचर प्लांट पर ले जाना।
- 14:00ये पहला कदम है। लेकिन जंक्चर फ्लाइट में वहीं कुछ
- 14:06है जो वहाँ है गलती मत खा जाओ, बाहर भी तुम फरमाइशों में घर जा
- 14:22जाओ। तुम किसी दुकान पे जाते हो, कपड़ा
- 14:25खरीदने के लिए तुम्हें रंग ही पसंद नहीं होता है और दुकानदार
- 14:35कपड़े के सारे थान खिलार देता है। तुम बा मुश्किल जाकर पनपने से
- 14:41वापसी पसंद करके लेके आते हैं। घर पे वो तुम्हारी पसंद नहीं होती
- 14:50हैं जैसे बाहर हो तुम प्राइम मिनिस्टर बन जाऊं, चीफ मिनिस्टर
- 15:01बन जाऊं। आजकल यही झगड़े देखने को मिलेंगे।
- 15:05तुम्हें इसे राजनीति कहते हैं। पंडितों को मैं सावधान कर दूँ कि
- 15:20पंडितों को इन राजनीतिज्ञों के लिए और इस मीडिया वालों के लिए।
- 15:27ये दिन भर रात जो कुछ बोलते हैं इनके लिए अलग से नर्क बनाना
- 15:37पड़ेगा क्योंकि ये जो तुम्हारे नर्क हैं कड़ाहों में उबाल देंगे।
- 15:46जला देंगे, पकौड़े तल देंगे दीज़ आर इनसफिशियंट यह पर्याप्त है, वह
- 15:55पर्याप्त है और बड़े मज़े से यह कह देते हैं।
- 15:59यह तो धंधा है। बेईमानी करते हो, झूठ बोलते हो,
- 16:04बड़े मज़े से कह देते हो, राजनीति में ऐसा ही चलता है तो इन पंडितों
- 16:15को फिर से शास्त्र लिखने पड़ेंगे। फिर से वेद व्यास उस बेचारे के
- 16:22लिए सरदर्दी और हो गई। इनके लिए अलग से नर्कों का
- 16:28निर्माण करना पड़ेगा। तुम्हारी कुम्भ ही पाक नर्क आर
- 16:35इनसफिशियंट कुकिंग का क्या फल मिलेगा तुम समझ ही नहीं सकते मेरा
- 16:44उस तलब पे आके देखना। जहाँ जजमेंट होती है, मैं मानता
- 16:49हूँ तुम आज तक उस पैंट पे गए हैं लेकिन जो गए हैं वो अच्छी तरह से
- 16:54देखते हैं। 10 का असर क्या होगा?
- 16:57लास्ट जजमेंट में निकलेगा क्या? हर चीज़ का अर्थ गलत कर लिया है।
- 17:15निहित स्वार्थों के लिए, निहित स्वार्थों के लिए हर बात के अर्थ
- 17:24बिगाड़ लिए गए हैं। बाढ़ में जाए सुनने वाले।
- 17:30हमारी इच्छा पूरी होनी चाहिए। कोई इच्छा चाहे भीड़ को पीछे
- 17:35लगाने की है, चाहे धन प्राप्ति की है, बड़ी पद्मियां पाने की है,
- 17:41जमीन जायदाद इकट्ठा करने की है। बस हमारी इच्छा पूरी होनी चाहिए
- 17:55शब्दों के अर्थ बिगाड़ लिए गए हैं, यथा पिंट है तथा यहाँ तक
- 18:00सीमित कर दिया गया है इसका अर्थ। जो पंचभौतिक शरीर जिससे बना है,
- 18:06उसी से ब्राह्मण बना है, बस इतना सार्थ है इसको ये तो रेत का शव
- 18:22महज इतनी कीमत रखता है। हर तो मैं ठीक कहता हूँ, इन्हें
- 18:32जला ही देना चाहिए क्योंकि चर्क जैसे आम व्यक्ति है, जो वैद्य है,
- 18:39हकीम है, वह भी लिख देता है यथा पिंड तथा ब्राह्मण।
- 18:52इसका अर्थ है कि उस ब्रहमंडल में निकलने के लिए एक रास्ता जाता है
- 18:59और वो जाता है तुम्हारे पिंड में से मैंने तुमसे कहा।
- 19:10तुम तुम्हारी जरूरत से दो कदम दूर हो, ओनली टू स्टेप्स अवे।
- 19:20पहला संसार में बिखरी हुई शक्तियां को इकट्ठा करके जंक्चर
- 19:25प्लांट में ले जाना फर्स्ट स्टेप। लेकिन वहाँ तुम ऐसा ही कूड़ा का
- 19:31बड़ा पाओगे गलती मत खा जाना, वहाँ भी बड़े रास्ते में मिलेंगे बड़ी
- 19:42शाखाएं निकलेंगी वहाँ से और फिर तुम घबरा जाओगे।
- 19:49फिर तुम शिशु कंज में पड़ जाओगे किन कर्तव्य विमोड हो जाओगे?
- 19:58भ्रम की स्थिति वहाँ भी तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ने वाली है भ्रम
- 20:04बना रहे का? बाहर तुम देखते थे कौन सा रंग
- 20:09चुनो, कौन से रंग का कपड़ा पहनो उस जंक्चर प्वाइंट में जाकर तुम
- 20:15सोचोगे पिछले जन्मों में जाऊं धन दौलत अपार धन समूह हो।
- 20:26हिमालय पर्वत जैसे विशाल सोने के पर्वत मांगलू वृहद्य जमीन का
- 20:37टुकड़ा, मांगलू सारी धरती मेरे पीछे अनुकरण करे यह मांगलू।
- 20:48सारे संसार की गद्दी मांगो, वहाँ भी अनेक शाखन वो ही है चार बैठंगी
- 21:00जो पहले थी वो अब भी है। खोपड़ी में बैठे बैठे भी तुम यहीं
- 21:06कुछ करामात करते थे यहाँ भी तुम्हारी चॉइस पूरी नहीं होती और
- 21:20वहाँ निकल जाओगे जंक्चर बांट रहे वहाँ भी तुम घबरा जाओगे।
- 21:28क्योंकि भीतर तो बड़ा भूत सा भरा पड़ा है, कभी कहोगे पिछले जन्म
- 21:35में जाना है देख के हम क्या क्या था?
- 21:42कवि को हो गए अपार धन संग्रह पदवीयां जगत मान सम्मान सारी
- 21:51दुनिया का एकमात्र नेता बन जाऊं सर्वशक्तिमान हो जाऊं।
- 21:59सब जगह बिखर जाऊं, सर्व व्यापक हो जाऊं सब जान लूँ, सर्वज्ञ हो जाऊं
- 22:03ये जो तुम एक चैनल से दूसरे चैनल पर फुदकते हो फ्रॉक्स की तरह मेढक
- 22:13की तरह। यह कभी खत्म नहीं होता, वहाँ जाकर
- 22:19भी खत्म नहीं होता। यह तुम चाहते हो सब कुछ इकट्ठा कर
- 22:25लेना जो जिसके पास है, लेकिन तुम्हें एक बात बता दूँ, सभी कुछ
- 22:31किसी के पास भी नहीं है अगर मेरी इस बात को गांठ बांध लिया।
- 22:38तो दूसरे चैनल पे कभी नहीं जाओगे मेरे चैनल पर भी नहीं आओगे क्यों?
- 22:48क्योंकि सभी कुछ कोई भी नहीं जानता।
- 22:52आइंस्टीन जैसे महा परख मरते हैं तो कहते हुए मरते हैं।
- 23:01इट इज़ नॉट ओनली अननोन। वह ऐसा नहीं कि अभी जाना नहीं गया
- 23:06हो। आगे शब्द देखिये तुम इससे समझे
- 23:11क्या हो सिर्फ एक फॉर्मूलेशन ई इज़ इक्वल टू एम सी स्कर।
- 23:17दूसरी भी तो बात गजब की हो सकती है और ई इज़ इक्वल टू एम सी
- 23:22स्क्वेयर। मैं इसको ज्यादा धीमान नहीं देता।
- 23:25तुम देते हो क्या? मैं उसकी इस बात को अभिमान देता
- 23:29हूँ ही इस नॉट ओनली ही इस नॉट ओनली अननोन।
- 23:39बट ऑल्सो नौ नौ एप्पल वह जाना नहीं गया ऐसा नहीं वह जाना जा
- 23:49नहीं सकता ऐसा है क्या करोगे तुम साइंटिशों से पूछ कर?
- 23:57ब्रह्मण के इस रहस्य को जान लो तो सब जान लोगे ब्रह्मण के इस रहस्य
- 24:03को जानना जरूरी है तुम्हारे लिए क्यों जरूरी है पूछो इनसे मैं
- 24:08पूछता हूँ सर ब्रह्मण के इस रहस्य को जानना क्यों जरूरी है?
- 24:18इनके पास खुद के पास जवाब नहीं क्योंकि ये कुछ ढूंढ रहे हैं और
- 24:26जो ढूंढ रहे हैं वो इन्हें मिला नहीं और अगर इसी तरह चलते रहे तो
- 24:33मिलना मुश्किल है। तुम दो कदम नाक लो, वो मिल जाएगा
- 24:53जिसके मिलने से सब मिल जाता है एक साथ है सब साथ है।
- 25:02ये संत जो बोल के गए हैं बकवास नहीं करके गए हैं अर्क निकाल के
- 25:08देके गए हैं आपको एक निर्भाग हो तुम भाग्य ही हो तुम
- 25:17दुर्भाग्यशाली हो तुम जो इस अर्क को।
- 25:22पी नहीं पाते, अभागे अभागे ही आए और अभागे ही चले जाओ।
- 25:33अन्यथा संतों ने कोई कोर कसर बाकी छोड़ी।
- 25:39पूरी तन्मयता से और शक्ति से उन्होंने खोजा और खोज के तुम्हें
- 25:45बताया, लेकिन तुमने कोई कीमत नहीं पाई।
- 25:49कीमत यही थी कि जैसा वो कहते वैसा तुम बन जाते।
- 26:00कबीर कहते हैं, एक जान एक जान में से सब जान लिया जाता है एक साधय
- 26:12सब सजाय है सब साधय सब जाय, तुम कुछ भी नहीं कमा पाते।
- 26:20इसका अर्थ है तुम सबको साधना चाहते हो, धन भी साधु हूँ पद्वी
- 26:28भी साधु हूँ मान सम्मान भी साधु हूँ दुनिया में एक अजूबा बनकर रह
- 26:35जाऊं, मेरा नाम अमर हो जायेगा। तुम सदा के लिए जीना चाहते हो तुम
- 26:44मूर्ख हो, क्योंकि तुम्हें पता है कि तुम कभी मरते ही नहीं, तुम सदा
- 26:52के लिए अमर हो। तुम्हें सदा के लिए अमर बनना नहीं
- 27:00है, सदा के लिए अमर होने का कोई प्रयास नहीं करना है।
- 27:06यू आरए मोटर तुम अमर हो और अमृता के लिए तुम्हें कोई प्रयास करने
- 27:14की आवश्यकता अब नहीं है। और नहीं है उस विराट ने तुम्हें
- 27:21जो बनाया, जो भी बनाया वह मरता कभी नहीं एवरीथिंग इज़ एम वाटर
- 27:33हेयर। ऐसा नहीं कि यहाँ सिर्फ
- 27:37यूनीसेल्युलर जीव अमीबा ही इमोट है यहाँ तुम भी इमोट हो तुम कभी
- 27:45नहीं मरते हैं और अमर होने का प्रयास अगर कर रहे हो तो छोड़।
- 28:01महज धूल में लट्ठे चलाने का कोई फायदा नहीं होता।
- 28:05बेकार जाएगी, मेहनत किया जाओ। अगर तुम्हारी इच्छा है तो क्योंकि
- 28:13तुम मन के पीछे लगने वाले इंसान हो और मन कभी सही रास्ते पर डालता
- 28:20नहीं क्योंकि मन ने वो राहें नहीं देखी।
- 28:25मन ने वो मंजिल नहीं देखी जो तुम्हारी जरूरत है।
- 28:31मैं फिर घूम फिर के वहीं आ जाता हूँ जो तुम्हारी जरूरत है, वो
- 28:40तुम्हारा मन नहीं जानता, तुम्हारा मन और और जानता है तुम्हारा मन और
- 28:45और तर्क इकट्ठे कर देता है। मुझे ये चाहिए सन्मान चाहिए, धन
- 28:52चाहिए, भेड़ चाहिए, मेरा भाषण सुनने वाले लोग चाहिए, सारी
- 29:04दुनिया मेरी पूजा करे, मेरे मंदिर बने लेकिन तुम्हें पता नहीं यू
- 29:09अरे ऑलरेडी। तुम पहले से ही पूजनीय हो तुम्हे
- 29:16और पूजा की आवश्यकता है नहीं, तुम पहले से ही पूजनीय हो।
- 29:27वॉटेवर यू आर जो भी कुछ तुम हो। दैट इस वर्शिप एबल वह वर्शिप एबल
- 29:36है। पूजने के योग्य है पूजा करने के
- 29:39योग्य है। ज़रा भी तो कमी नहीं है तुम्हारी
- 29:46और जिसमें कोई कमी नहीं होती। को ही भ्रमण कहते हैं और अगर
- 29:55यजुर्वेद में यह बात लिखी कि यथा पिंटे तथा भ्रमण है तो भ्रमण के
- 30:06भीतर जाने से तुम। सर्प व्यापक हो जावे, ओमनी
- 30:14प्रेसेंट और सर्प शक्तिमान, ओमनी पोटेंट और ओमनी श्रेयंट सब कुछ
- 30:22जानने वाले सर्वज्ञ। तुम्हारी इच्छा तो है सदा से
- 30:34इच्छा रही है तुम्हारी कि मैं सर्वा के हो जाऊं, लेकिन रास्ता
- 30:41मिला नहीं। वो जुदा क्या हुए ज़िन्दगी खो गए
- 31:01वो जुदा क्या हुए? ज़िन्दगी।
- 31:09खो गई, क्षमा चलती रही, रौशनी खो गई।
- 31:25बहुत कोशिशों की मगर दिल ना बहला बहुत कोशिशों की।
- 31:44मगर दिल न बहला कई साजु छेड़े कई गीत।
- 32:02जब याद आए बहुत याद आ गमैं जिंदगी के आधरों में।
- 32:20हम चिरागए मोहब्बत जलाये जब याद आये।
- 32:42बहुत याद कोशिशे भरेंगी। कई साज छुर हैं कई गीत काहे जब वो
- 32:57याद आती है? तो बड़ी जात आते हैं वो रसीली
- 33:05हवाएं, वो उभरती हुई आनंद की शीतल लहरें।
- 33:27जिया पिया ले गई जिया थोड़ी पहली नजर पिया ले गई जिया।
- 33:44तेरी पहली नजर कैसा जादू किया तुने मोपे हो जादूगर पिया ले गए ई
- 33:57जिया। तेरी पहली नजर।
- 34:03कैसा जादू किया तुने? मोपे हो जादूगर पिया ले गई जिया
- 34:14तोरी पेहली नजर। तुम तुम से दो कदम दो।
- 34:25तुम तुम्हारी जरूरत से दो कदम दो, बाहर से इकट्ठी करो, सारी
- 34:31शक्तियां को बाहर कुछ मिलने वाला है।
- 34:36यदुर्वेद के शब्द में यही तंत्र है।
- 34:41जो ब्रमांड में तुम ढूंढ रहे हो और ब्रमांड में ढूंढने वाले तो
- 34:48टाई टाई फर्स्ट सो जाते हैं। अल्बर्ट आइंस्टीन जाते हुए कहते
- 34:53हैं इस नॉट ओनली अननोन बटाल्सो अननोनबल वह जाना भी नहीं जा सकता।
- 35:00अज्ञात ही नहीं है, वो सिर्फ वह अज्ञेवी है क्या?
- 35:07ढूँढोगे उसे ब्रह्मंड की किस बात को जानोगे, तुम जो भी जानोगे वह
- 35:15व्यर्थ है, क्योंकि ब्रह्मंड के जानने से कभी कुछ होता न।
- 35:22सारे भ्रमण को जान लो, कुछ नहीं होगा।
- 35:28आइंस्टाइन कहते है कि पहली बात तो तुम जान ही नहीं पाओगे।
- 35:34हे सर और अगर जान भी लोगे। तो कुछ मिलने मिलाने को है नहीं
- 35:42जो मिलेगा और टक्कर जो मिलेगा हम आयु से मिलेगा और थकावट परेशानी
- 35:58तुम। लाचार हो चौक अभी तक तो भ्रमण में
- 36:05खंगालने से मिल जायेगा। लेकिन जब ऐसी तुम्हारी धारणा थी,
- 36:11लेकिन जब तुमने खंगाली और कुछ न मिला।
- 36:17अब तो घबरा के ये कहते हो कि मर जाएंगे कर मर के भी चैन न पाया तो
- 36:24किधर जाओगे? बात चैन के है चैन तुम्हारी जरूरत
- 36:32है और मैं उसी जरूरत की बात करता हूँ।
- 36:38तुम वासनाओं को पूरी करने में सारी उम्र कमा देते हो सारी उम्र
- 36:42मैंने कहा ठीक कहा, जन्मो जन्मो तक तुमने गंवा दिए हैं, वासनाओं
- 36:51को पूरी करने हैं तो। और सही पूछो तो वासना का मूल
- 36:56केंद्र एक ही है, वह जो तुम्हारी जरूरत है इसको अच्छी तरह से समझ
- 37:03लेना। वह जो तुम्हारी जरूरत है वह
- 37:10वासनाओं की क्रिएशन का हेतु बनता है।
- 37:14उसी से जनमती हैं वासनाएँ वह तुम्हें पुकारना है आ जाओ,
- 37:30हमारी बाहों तुम वादा करके भूल गए, हम आस लगाए बैठे हैं।
- 37:46वह पुकारना है तुम्हें बेहतर से, लेकिन तुम ठीक से सुन नहीं पाते
- 37:55यह जरूरतों के भीतर का पैगाम। जिनके याद शुरू हो गया वो जानते
- 38:01हैं यह तुम्हारी जरूरतों की पुकार है।
- 38:08भीतर कुछ ऐसा प्यासा है जो तुमसे मांगता है, वह जो चाहिए।
- 38:20पुकार किसी और चीज़ की है इकट्ठा तुम कुछ और कर रहे हो इसलिए
- 38:28तुम्हारे लटके हुए चेहरे, सोना, सोना से तुम्हारा हृदय कोई फूल
- 38:36नहीं कहलाता। कोई झरने की शीतल धारा उठती नहीं,
- 38:45तुम रोए रोए से रहते हो सारे जन तुम्हें जो चाहिए वो तुम कमा के
- 38:54नहीं देके आते। तुम लेके कुछ और ही आ जाते हो
- 38:59अपने घर में वो तुम्हें चाहिए नहीं होता जो चाहिए नहीं वो तुम
- 39:05ले आओगे तो उससे खुशी नहीं मिलेगा इसलिए तुम दुखी हो खुशी चाहिए तो
- 39:14जो। सच में चाहिए वो कमा के ले के आओ
- 39:20वो ले के आओ तुम और ही और कुछ इकट्ठा करने में लग जाते हो फिर
- 39:30तुम कहते हो। कई सा जुछड़े कई गीत गाये बहुत
- 39:46साक्षेड़। लिए बहुत गीत गाढ़ लिए और बहुत
- 39:52गीत गाते। लेकिन।
- 39:59एक दो। नाम मिला तुझसे लिपटके जो रो लेते
- 40:26हम। तुझसे लिपटके जो रो लेते हम आंसू
- 40:40नहीं थे वो मोती से कम। तुझसे लिपट के जोरो लेते हम आंसू
- 40:59नहीं थे यमोती से कम। तेरा दामन नहीं ये।
- 41:24आंसू डले भी तो क्या है? एक तो न मिला सारी दुनिया मिले भी
- 41:43तो? क्या है एक तू न मिला?
- 42:00तुम्हारी जरूरत को छोड़। तुम इकट्ठा कुछ और कर देते हो,
- 42:04कूड़ा कबाड़ा तुम वो चीजें इकट्ठी कर लेते हो, जो घर में रखने के
- 42:09योग्य नहीं होती। कचरा घर में फेंकने के योग्य होती
- 42:14हैं। तुम ऐसा कुछ इकट्ठा करके बाहर से
- 42:17लेके आते हो। नहीं नहीं ये तुम्हारी जरूरत
- 42:21नहीं। मैं कहा जरूरत तो तुम्हारी दो कदम
- 42:26दूर है यथा पिंटे तथा प्रमंड है प्रमंड की खोज करने वालों मेरा ये
- 42:37सूत्र पहले से बांध लेना। ब्रह्मण्ड को खोजने की आवश्यकता
- 42:43नहीं ब्रह्मण्ड में फैलने की आवश्यकता है अपना फैलाव और
- 42:53ब्रह्मण्ड तक ले जाओ और वो आएगा प्रेम के जरिये और प्रेम उत्पन्न
- 43:02होगा जहाँ प्रेम का भंडार है। दो कदम दूर हो बाहर से खेंचो अपनी
- 43:10सारी शक्ति को जंक्चर पॉइंट पर ले जाओ और जंक्चर पॉइंट पे भी तुम
- 43:16ऐसे ही रहोगे जैसे अब ये बात रख है।
- 43:23अब तुम्हारे लिए जो चीज़ असंभव है तब तुम्हारे लिए असंभव होगी,
- 43:29लेकिन तब तुम दूसरे प्रकार की दुविधा में पड़ो, तुम उस
- 43:37रेस्टोरेंट में आ गए हो। इसमें संसार की सभी सब्जियां
- 43:40मिलती हैं। और संसार से बाहर की भी सभी
- 43:43सब्जियां मिलती हैं जहाँ हर चीज़ अवेलेबल है।
- 43:49फिर तुम शिशु पंच में पड़ोगे क्या खाएं, क्या ना खाएं?
- 43:56क्या छोड़ें? खोपड़ी के तल पे बैठे बैठे आज
- 44:04तुम्हारी हालत ऐसी है कि तुम इच्छाओं का जाल बुनते चले जाते
- 44:11हो। उनमें से कोई भी इच्छा बुरी नहीं
- 44:12होती और उसे जंक्चर पॉइंट पे जाके बिल्कुल उरडी बात होगी।
- 44:19जहाँ तुम चूस न कर सकोगे के दर्जन क्या खत्म है मीनू में इतना कुछ
- 44:29है और पेट तो छोटा सा है कितनी बास नहीं है तुम्हारी छोटी छोटी
- 44:38बास नहीं। उनको लिए लिए घूम रहे हो।
- 44:41सारे संसार में मेरा भाषण सुनने वाला कोई मिल जाए।
- 44:46जब कोई इच्छा थोड़ी जिनके भाषण नहीं सुनते वो परम सुख ही होते
- 44:51हैं। कबीर किसी को सुनना नहीं चाहते।
- 44:58कबीर बुनगुनाना चाहते हैं, कबीर मस्ती में नाचना चाहते हैं, मेरा
- 45:04पग घुंघरू बांध के बुनगुनाना चाहते हैं नानक उसकी सलाग किए
- 45:15किए। आनंदित होना चाहते हैं।
- 45:22कौन कहता है कि तुम उसका भाषण सुनो, जो कहता है कि मेरा भाषण न
- 45:30सुनो, वहीं सूखी है तो कि उसे तुम्हारी जरूरत नहीं है।
- 45:39वह नितांत अकेला, बड़ा मस्त है और अगर सच पूछोगे मुझसे, तो मैंने
- 45:48तुम्हें बहुत बार कहा है, छोड़ो दुनिया की बातें।
- 45:54उस मुकाम पे चले जाओ जहाँ तुम अकेले हो साली छूट अलेक्सांदर पोप
- 46:03की एक कविता पोयम सबसे बड़ी प्यारी लगती है।
- 46:09लेट मी लाइव अनसीन अननोन एंड अनलीमेंट लेट मी डार।
- 46:16सिड फ्रॉम दी वर्ल्ड नॉट ए स्टोन पेड व्हेर आई लाइ तुम अकेले बहुत
- 46:27सुख हो बाहर आकर तो। तुम दुख की साक्षात मूर्ति बन
- 46:36जाते हो, अकेले हो जाना एक वरदान से कम नहीं।
- 46:44इससे बूंद ये बूंद किसी किसी को मिलता है।
- 46:52तुम अकेले हो जाओ। तुम वहाँ चले जाओ, जहाँ अकेले तुम
- 46:58ही हो नितांत अकेले और दूसरा कोई नहीं उसे ही केवल ने कहा है।
- 47:04महावीर ने बस केवल तुम सिर्फ तुम, तुम ही तुम।
- 47:14और अगर वो बोलते हैं बाबा नानक, तू ही तू तू ही तू उसका मतलब भी
- 47:19यही है कि वहाँ पहुँच जाओ जहाँ वही है एक है जहाँ एक है।
- 47:30और एक अभेद्य है एक अद्वैत है। उसे लोग अद्वैत की परिभाषा पूछ
- 47:36लेते हैं। मैंने कहा किसी दिन बोलेंगे तो
- 47:40सुन लेना। बस ये अद्वैत है जहाँ दूसरा कोई
- 47:44नहीं है, केवल केवल तुम हो। एक है उसे तुम कहो उसे मैं कहूं
- 47:54ज़रा भी तो फर्क नहीं पड़ता कितने सुखी हो जाओगे तुम कितने आनंद के
- 48:07अमृत से भर जाओगे तुम? खाली खाली भिक्षा पत्र लिए सारे
- 48:14संसार में घूमते हो, एक दूसरे से मांगते हो, प्रेम और चूख जाते हो
- 48:22सदा वो सतल जो प्रेम के समुद्र भरे पड़े हैं जहाँ।
- 48:35अखिल होने के लिए हिम्मत चाहिए अकेले होना सौभाग्य है, अनेक होना
- 48:46दुर्भाग्य है। तुम सौभाग्यशाली क्यों नहीं हो
- 48:55जाते? सौभाग्य तुम्हारा इंतजार कर रहा
- 49:02है। ये देखो अनंत की ना 24 घंटे गुझते
- 49:09रहते हैं तुम्हें बुलाती है। लौटा हमारी बह हम आस लगाए बैठे
- 49:26हैं, तुम वापस नहीं जाते बस वह जो तुम्हें पुकारना है वह तुम्हारी
- 49:33जरूरत है। और धन्यवाद वो जिनके भीतर यह नाद
- 49:40शुरू हो जाता है, क्योंकि जरूरत ने उन्हें बुलाना शुरू कर दिया।
- 49:47तुम जरूरतों को बुलाते हो, तुम जरूरतों को पूरा करने को अंजाम
- 49:52देने के लिए संसार में उतर जाते हो, परिश्रम करते हो, लेकिन यहाँ
- 49:56उल्टी बात है। यहाँ उलट बांसी है जो कबीर ने कहा
- 50:07उलट बांसी है क्या, अर्थ के अनर्थ मत करो उलट बांसी वो है जब
- 50:16जरूरतें तो मैं बताती हूँ। जो तुम्हारी जरूरत है वहाँ से
- 50:21पुकार उठती है इसलिए जब मैंने पहली वीडियो डाली, अनंतनाथ के
- 50:32मैंने कहा तुम सौभाग्यशाली हो गए, सौभाग्यशाली होते हैं वो लोग
- 50:41जिन्हें। जरूरतें आवाज लगाना शुरू कर देते।
- 50:51है। आज देख के हमें तुम बुलाओ।
- 51:02आवा जुदे के हमें तुम बुला मोहब्बत में न न हम।
- 51:18को सता हवा। जो देख के सौभाग्यशाली होते है।
- 51:28वो लोग जिन्हें जो तुम्हारी जरूरत है वो तुम्हें पुकार रहा है कितने
- 51:36सौभाग्य की बात है? और तुम ज़रा भी ख्याल नहीं रहा,
- 51:42माँ पुकार रही पिता पुकार और तुम गलियों में बंटे फिर रहा।
- 51:57और फिर इच्छा रखते हो, संसार में जाकर मशक्कत करते हो और शाम को
- 52:03कूड़ा कचरा कमा कर घर आ जाते हो। वह पुकारना है वहाँ चले जाओ।
- 52:15जिसके बिना जीना बेकार है। वो साथी रे तेरे बिना भी क्या
- 52:30जीना। वो साथी रे तेरे बिना भी क्या
- 52:46जीना। फूलों में, कलियों में, सपनों की
- 52:59गलियों में तेरे बिना कुछ कही ना। तेरे बिना कुछ कहना तेरे बिना भी
- 53:19क्या जीना तेरे बिना भी क्या जीना?
- 53:29और साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना।
- 53:38कैसे जी रहे हो तुम कैसे जी रहे हो तुम?
- 53:48बदला हो गया। किस लिए जीते हैं, लोग किसके लिए
- 53:57जीते हैं, बताओ किस लिए जीते हैं, लोग किसके लिए जीते हैं?
- 54:09तुम क्यों जी रहे हो, किसके लिए जी रहे हो और जिसके लिए जी रहे हो
- 54:14वो तुम्हें आवाज देता है, वो तुम्हें पुकार रहा है फिर तुम
- 54:25कहते हो बाबा तुम बोलते रहो। आँखों से अश्क बहते रहे तुम बोलते
- 54:37ही चले जाओ हम सुनते ही चले जाये शुरुआत यहीं से कर लो तुम्हारे ही
- 54:49भीतर है वो मुकाम। जहाँ से मैं बोल रहा हूँ मैं
- 54:54तुम्हें किसी रास्ते भटकाता नहीं है।
- 54:56पुत्र मैं तुम्हें सही राह दिखाता हूँ, तुम्हारे ही भित्र हैं वो
- 55:04यथा पिंडे तथा भ्रमणे भ्रमण में मत खोजो वह पिंड में है।
- 55:11भ्रमण में खोज, सब व्यर्थ हो जाएंगे।
- 55:15पिंड में खोज सार्थक होती है, यही है आर्थिक शब्द का पिंड के भीतर
- 55:23उतर जाओ रास्ता तुम्हें बता दिया यू अरे ओनली टू स्टेप्स अवे फ्रम
- 55:29यू। वो आनंद तुम्हारा इंतजार कर रहा
- 55:35है तुम्हारी माता तुम्हारे इंतजार में तुम्हारा पिता तुम्हारे
- 55:45इंतजार में तुम्हें आगोश में लेने के लिए बेकरार बैठा है।
- 55:59और तुम तुम गलियों में बनते खेल रहे हो, तुम कूड़ा कचरा इकट्ठा कर
- 56:06रहे हो, फूलों में, गलियों में, सपनों की गलियों में तेरे बिना
- 56:17कुछ कहीं ना। कहीं कुछ नहीं यथापिण्ड है तथा
- 56:26ब्राह्मण में कगारने की कोई आवश्यकता नहीं।
- 56:28तुम्हारे बड़े से बड़े साइंटिस्ट भी गए हैं।
- 56:32ब्राह्मण में कुछ न मिलेगा सवाय खोपड़ियों की।
- 56:37सूचनाओं के अतिरिक्त और भ्रमण में कुछ नहीं है और तुम्हें तुम्हारी
- 56:41जरूरत है खुशी तुम्हारी जरूरत है आनंद तुम्हारी जरूरत है उस मुकाम
- 56:50पर पहुंचने की जहाँ जाकर सारा भेद मर जाता है।
- 56:56जहाँ जाकर ज्वालायें जलती हुईं चिंता की नफरत के सब समाप्त हो
- 57:02जाते हैं, प्रेम अपने अघोष में तुम्हें ले लेता है, अपनी बाहों
- 57:07में तुम्हें भर लेता है और वो झलकते हुए आशका।
- 57:14तुम्हारे प्रेम की महिमा गाते हैं तुम बिन जोकन मेरी राते तुम बिन
- 57:27जोकन मेरी राते तुझे बिन मेरे दिल बन जारे।
- 57:37तुम बिन जोगन मेरी राते तुझ बिन दिन मेरे बंजारे मेरा जीवन जलती
- 57:51धोनी मैं जलती हुई ज्वाला हूँ, मेरा जीवन ऐसा है।
- 57:57अंगारों में जल रहा हूँ हर वक़्त तुम ऐसे ही हो बाहर से कुछ भी
- 58:03नाटक कर लो मेकअप कर लो सुर्खी बिंदी लगा लो, भीतर तुम्हारे
- 58:09ज्वालाएं चल रही हैं। लोगों को जलाने के लिए ये काम कर
- 58:15सकते हो। लेकिन असलियत तुम्हारी ये नहीं है
- 58:20तुम बिन जोगन मेरी रात में तुम बिन मेरे धन बंजारे मेरा जीवन
- 58:26जलती धुनी बुजे बुजे मेरे सपने सारे जो सपने सिंजोरे।
- 58:36जो प्यार के सपने सिंजोये एक छोटा सा आँगन हो तुम हो और मैं हूँ और
- 58:49उस छोटे से आँगन के भीतर बैठे। एक दूसरे को निहारते रहे मेरा
- 58:59जीवन जलती धुनी बुझे बुझे मेरे सपने सारे तेरे बिना मेरी मेरे
- 59:10बिना तेरी। ये जिंदगी जिंदगी ना तेरे बिना भी
- 59:20क्या जीता साथी रह तेरे बिना भी क्या जीना फूलों में गलियों में।
- 59:34सपनों की गलियों में तेरे बिना कुछ कही ना तेरे बिना भी क्या
- 59:45जीना लेकिन तुम जीते हो। आज से ही ऐसा जीवन बंद करो जीना
- 59:56ब्राह्मण में बिछरने की ब्राह्मण को खंगालने की इच्छा को तिरोहित
- 1:00:04कर दो, क्योंकि पिंड में ही मिल जाएगा।
- 1:00:09और भीतर जाना आसान है। कोई मशक्कत नहीं करनी पड़ती जब
- 1:00:15ज़रा गर्दन झुकाई देख ली दिल के आई में मैं थी तस्वीरें जाश
- 1:00:25धन्यवाद।