Latest / Baba ji Vijay Vats / 10 Oct 25 - Meditation Tips ध्यान की सूक्ष्म प्रणाली! खड़े होकर ध्यान करने से चेतना का विस्तार होता है?
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- 0:00बाबा जी प्रणव मैं जैन सम्प्रदाय से हूँ, भगवान महावीर ने अपनी
- 0:18सारी तपस्या बैठकर क्यों नहीं की? खड़े रहकर क्यों की?
- 0:28यह गुत्थी आयक समझ में नहीं आई। मैंने सभी संतों से पूछा, मुनियों
- 0:34से पूछा, लेकिन कोई सटिस्फैक्टरी जवाब नहीं मिला।
- 0:47कृपा करके मेरी इस गुंडी को समाप्त हुई है, प्रश्न गहरा भी
- 0:56है, और आध्यात्मिक वेह। थोड़ा शांत होके सुनिएगा?
- 1:07इसको मैंने एक वीडियो में आपसे कहा था कि आप अपना ब्लड प्रेशर
- 1:16110 सत्र रखिए। जबकि नॉर्मल होता है 120, 80 से
- 1:28स्टोलिक। इसका क्या अर्थ है?
- 1:41सभी प्राणियों की तरफ़ देखिए सभी धरती के पैर में जलते हैं कुत्ता
- 1:51हो, सूअर हो, गाय हो, भैस हो, हाथी हो।
- 1:59छोटे बड़े जीभ सभी धरती से 90 डिग्री के ऊपर से रोता अंक यानी
- 2:10180 डिग्री के बिल्कुल स्पॉट। लेकिन मनुष्य सीधा फिलहाल होता है
- 2:29लंबवत उससे क्या होता है। जब तक मनुष्य पशुवनी में था तब तक
- 2:44वह धरती के पैदल ही चलता था और जब धरती से वह लंबवत हुआ।
- 2:5590 का कोण बनाया उसने? वह खड़ा हो गया।
- 3:01पहले वो हाथों से चलता था, हाथ भी उसके पैर से चार पैर थे, उसके दो
- 3:09पैर और दो हाथ ऐसे ही चलता था जैसे जानवर चलते थे।
- 3:15जैसे आज बंद। बंदर खड़े भी हो जाते हैं।
- 3:34मनुष्यता का विकास हुआ, चेतना का विकास हुआ क्यों हुआ?
- 3:40क्योंकि मनुष्य ने खड़े होना सीख लिया, खड़े होकर चलना सीख लिया और
- 3:50मनुष्य आज आदी हो गए। वह धरती से लंबवत।
- 3:5890 डिग्री के ऊपर खड़ा होता है तो क्या होता है?
- 4:09जैसे ही हमारा सिर धरती के करीब होगा धरती का गुरुत्वा कृष्ण
- 4:17हमारे ब्रेन पर प्रेत। और जैसे ही तुम खड़े हो जाओगे,
- 4:28धरती का गुरुत्वाकर्षण घट जाएगा। थोड़ा सा इसलिए लोग गए पहले ऊंचे
- 4:37स्थानों पर जहाँ धरती की। वेबिटेशन फोर्स घट जाती है।
- 4:51जैसे ही पशु खड़े होने में असमर्थ समर्थ हो गया, जैसे ही उसमें
- 5:01समझदारी विकसित हुई, उसका कारण क्या?
- 5:08आपने देखा हार्ट, हमारा हार्ट, उसके बिल्कुल पास हमारा दिमाग और
- 5:17हमारे पैर के नाखून बहुत दूर पड़ते हैं।
- 5:23तो हार्ट को पंप करना पड़ता है। अगर आप धरती से पैदल चलोगे तो
- 5:33आपके ब्रेन को जितना ब्लड सप्लाई होगा वह बाढ़ की तरह होगा।
- 5:40वह खून बाढ़ की तरह होगा। और जब खून बाड़ की तरह चलेगा आपकी
- 5:46बेंच में तो वह सूक्ष्म नब्ज को उत्पन्न नहीं होने देगा उस बाड़
- 6:00की तरह चलेगा। सूक्ष्म तंतु विकसित नहीं होता
- 6:09है। सूक्ष्म तंतु टूट जाएगा।
- 6:16यही होता है ब्लड प्रेशर जिसका ब्लड प्रेशर ज्यादा होता है।
- 6:21मैं सदा कहता हूँ ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करो इसीलिए भी कि वह
- 6:28तुम्हारे शरीर के लिए ठीक है और इसीलिए भी कि वह तुम्हारे
- 6:32अध्यात्म के लिए उचित है जब तुम्हारा बीपी।
- 6:40नॉर्मल से थोड़ा सा कम होगा। 110 70 महीने का 1010 गिटार जैसे
- 6:53ही पशु खड़ा हो गया तो ग्रैविटेशन फोर्स कम हो गया।
- 7:01उसके ब्रेन और ब्लड का फ्लो। थोड़ा सा वेग में कमी आई तो
- 7:12सूक्ष्म नाड़ियाँ तंतु बनने लगे हैं।
- 7:16इतने बहाव से जो खून जाता था वो कम बहाव से जाना शुरू।
- 7:25वह नीचे की तरफ ज्यादा भय नहीं लगा क्योंकि हमने अपना पोस्चर बदल
- 7:31दिया। यह बात महावीर को पसंद था किसी ना
- 7:42किसी तल पर। यह 23 तीर्थंकरों की प्रणाली में
- 7:50आया हुआ एक अपश्न कि आप ऐसे तहन करो तो ज्यादा।
- 8:01चाहे आप दीवार के सहारे खड़े हो जाओगी, गिर न पड़े, आसपास सारी
- 8:07व्यवस्था कर लो ताकि गिर न जाए। आपने देखा योगी कहते हैं कि बैठो,
- 8:20लेकिन रीढ़ की हड्डी को सीधा करो। बस उसमें सिर्फ कारण यही था।
- 8:29उन्हें इस बात का ज्ञान नहीं था की खड़े होने में रीढ़ की हड्डी
- 8:33स्वयं ही स्ट्रीट हो जाती है। अगर दीवार के सहारे कौन खड़े हो
- 8:43जाओगे? तो वह रीढ़ की हड्डी स्ट्रेट
- 8:46होगी। हर वक्त तुम्हारी सुसुमना में से
- 8:52हुई थी। शक्ति कुंडली में से सहसरार में
- 8:59पहुंचती रहती थी। अगर तुम खड़े हो जाओगे तो वह जो
- 9:07छोटी सी बाधा है वो भी समाप्त हो जाएगी क्योंकि बैठने में कुंडली
- 9:13से जो नाड़ी जाती है सुसुम न तक वह थोड़ी सी मुड़ जाती है, मुड़ने
- 9:22में पीछे के जाती है। थोड़ी सी इस थोड़े से ही फर्क पड़
- 9:27जाता है। दो तीन बात है, एक तो ग्रैविटेशन
- 9:34फोर्स कम हुआ, एक ब्लड प्रेशर कम हो जाएगा, फलों कम हो जाएगा, बहाव
- 9:41वार्ड की तरह नहीं होगा। खून का सहज सहज भाव थोड़ा सा घट
- 9:49जाएगा। भाव और सबसे अहम बात।
- 10:01खड़े होने से चेतना के लेवल में बढ़ोतरी होगी।
- 10:07कॉन्शसनेस लेवल आपका बढ़ जाएगा और अध्यात्म कॉन्शसनेस से ही संबंध
- 10:13रखता है। उसका शरीर से कोई संबंध नहीं,
- 10:18अध्यात्म का मतलब है। हाउ टू इंक्रीज़ यूर कॉन्शसनेस
- 10:22लेवल? तो खड़े होने से हमारा कॉन्शसनेस
- 10:30लेवल बढ़ता है, यह बात कही। उनके पूर्वजों से राइट होगी,
- 10:39क्योंकि लंबी श्रृंखला महावीर आखिरी तीर्थंकर थे और इससे पहले
- 10:4923 तीर्थंकर हो गए थे और 23 तीर्थकों की परंपरा का मतलब।
- 10:5723 व्यक्तियों का अनुभव उनके संगथा बुद्ध अकेले थे।
- 11:02बुद्ध के पास कोई परंपरा नहीं था, बिलकुल नहीं।
- 11:09परणक महावीरणयमुक्त विकसित की और आप आज तक उसे समझ नहीं पाए।
- 11:16के महावीर क्यों खड़े हुए? और से लोग ने मुझसे प्रश्न जो
- 11:25समझदार लोग हैं वो तो संत पुरुषों के चरण बोलने, खाने, पीने, सोने,
- 11:34उठने, बैठने, बातचीत करने के। पूरी प्रक्रिया को नोट कर उन्हें
- 11:42पता है किन की प्रत्येक क्रिया के पीछे आध्यात्मिकता का कोई कारण
- 11:47हो। अगर तुम खड़े हो के ध्यान करोगे
- 12:00तो तुम्हारा कॉन्सीसनेस लेवल जल्दी बढ़ेगा, लेकिन तुम्हें
- 12:08थोड़ा मुश्किल लगेगा। ये बड़ा अजूबा सा ढंग का महावीर
- 12:15का और देखने वालों ने कहा ये भी कोई ध्यान है बड़ी मस्ती में करे
- 12:25सदा खड़े रहते किसी पेड़ के। और कभी कभी तो अपने आपके शरीर को
- 12:32बांध रहे थे तुम्हें इन बातों का पता है उस पेड़ के साथ अपने शरीर
- 12:40के छाती को बांध रहे थे किसी कपड़े के साथ खड़े होकर जान।
- 12:50कारण कारण यही जो मैंने आपको बताया।
- 12:56ब्लड का वेग घटता है। बुद्धि की तरफ बुद्धि को जितना
- 13:02तेज बढ़ाव दोगे। बुद्धि उतनी ही स्थूल होती जाएगी
- 13:10जितना भाव कम करोगे। बुद्धि की तरह बाढ़ की तरह भाव न
- 13:15हो। सिंपल एक नहर की तरह 000 ब्लड
- 13:22जोड़े। तो उसके तंतु सूक्ष्म तंतु विकसित
- 13:26होंगे और व्यक्ति बुद्धिमान हो जाएगा।
- 13:30कॉन्शसनेस सिलेबल उसका बढ़ जाएगा। भगवान महावीर का एक शब्द है नानम
- 13:37दुख खखई करेय। ज्ञान दुख का नाश करता है, ज्ञान
- 13:55बंधनों का नाश करता है और ज्ञान होता है, सूक्ष्म बुद्धि से और
- 14:06सूक्ष्म बुद्धि उपस्थिति है। जब आपका बीपी हल्का सा लोभ होता
- 14:15है या कुछ मूल मंत्र साइंस के साथ एकाकार करके दे रहा इतना भी मत
- 14:25कटा लेना बीपी को। हॉस्पिटलैज़्ड होना पड़ेगा।
- 14:33अगर आपका बीपी 140 50 है तो ज्यादा है किसी भी उम्र में मेरा
- 14:40बीपी 110। अब थोड़ा सा इसके ऊपर हम विचार कर
- 14:52रहे है पैदल चलो, मैं सात किलोमीटर पैदल चलता था, छः सात
- 15:05किलोमीटर रोज़ पैदल चलता था। कभी कभी दौड़ लगा लेता हूँ, कभी
- 15:11कभी पैदल चल लेता हूँ, लेकिन इतना नहीं चलना होता था और इस चलने के
- 15:19दौरान मैं लगातार ऊंचे अंग से सांस लेता रहता जिसे मैं क्रायोग
- 15:25कहता हूँ। लगातार ऊंचे ऊंचे सांस लेना, ऊंचे
- 15:30ऊंचे सांस छोड़ो, ज़रा सोचो सात किलोमीटर लगातार दौड़ना और फिर
- 15:37सात किलोमीटर लगातार वापस आना दौड़ के जाता और चल के आता या चल
- 15:44के जाता और दौड़ के आता। और इससे 14 किलोमीटर के दौरान या
- 15:5312 किलोमीटर के दौरान मैं क्रिया योग्य कभी नहीं छोड़ता।
- 16:03ऊंचे ऊंचे स्वास्थ्य लगातार लेता हूँ।
- 16:05उससे क्या होता है? बीपी नॉर्मलाइज़ से कम होता था।
- 16:15तब से मेरा बीपी मैंने बहुत बार चेक करा है यहाँ पर हमारे डॉक्टर
- 16:23होते थे टी एन गई। मैं उनको मलाई देने के लिए जाया
- 16:27करता हूँ। मलाई करने का बड़ा शौक मलाई में
- 16:30चीनी डाल के पंडित जी मेरे को मलाई भेजा दो तो कहती तुम्हारे
- 16:42चेहरे पे ये आ भा इतनी शांति क्यों आओ तुम्हारे?
- 16:54वैसे भी मेरा उनके घर पे वैसे भी आनंद था क्योंकि मेरे गुरु मैडम
- 17:03प्रवीण मुझे पढ़ाती थी। बाई।
- 17:11तो घरेलू आने जाने से अभी मौत था। कहते चलो मैं आपका बीपी सकता हूँ
- 17:19देखा 110 70 मुझे कहते लॉन्ग लाइफ।
- 17:26बड़ा शानदार बीपी है। इस उम्र में इतना होना नहीं
- 17:30चाहिए। आम तौर से बच्चों में ज्यादा होता
- 17:32है। बीपी को कंट्रोल करें।
- 17:41सबसे पहले मैं अब इन बातों को ध्यान से सुनें, क्योंकि ऐसे
- 17:46प्रश्न रोज़ तो पीछे नहीं रहते? अभी सारे शरीर से संबंधित आ गया।
- 17:54शरीर से लेकर आत्मा तक की बात करूँगा, आज इस भरोसे मैं पहले
- 18:06शरीर का बीबी 110 70 तक लेके आओ। सुबह उठते ही जो जलपान आपने करना
- 18:19है, चाय वगैरह पी लो कोई हर दिन खाली पेट वगैरह की कोई बात नहीं,
- 18:23कोई फर्क नहीं पड़ता, इससे तुम चाय पी के चले जाओगी, मैं तो
- 18:28तुम्बा भर के चाय पी के जाती हूँ दो गिलास भर के चाय।
- 18:37हालांकि वो दूध में पत्ती होता था क्योंकि हमारे तो दूध में पत्ती
- 18:41चलता था तो फिर सात किलोमीटर पैदल चले।
- 18:52सनान, ध्यान, मेरे वस्त्र वगैरह नहीं थे।
- 18:54मुझे अलग से कोठरी दे दी गई थी। सब वहाँ पड़े हुए पैदल चलता, दौड़
- 19:06के आता दौड़ के जाता पैदल आता ऐसे 14 किलोमीटर या 12 किलो।
- 19:11नहीं नहीं, सांप लगा रखा है यहाँ तक छह और यहाँ तक सात किलोमीटर
- 19:22यहाँ से हमारे गांव आता है कर्मगढ़ वहाँ तक पहुँच जाता तो
- 19:26सात किलोमीटर उससे थोड़ा इधर हो जाता छह किलोमीटर।
- 19:33रोज़ आना रोजाना डेली वक्त कोई भी हो, कई बार तो मैं सुबह 2:30 बजे
- 19:382:00 बजे से, कई बार 9:00 बजे से, क्योंकि मेरा एक असूल था कि मैंने
- 19:47नींद पूरी कर ली। कभी उन्नति स्थितियों में मैं
- 19:53नहीं गया, नींद को तोड़ के नहीं रखा।
- 19:56ब्रह्म मूर्त जैसी मूर्खता मैंने कभी मानी ही नहीं।
- 20:04जब आंख खुलती। तब मैं पहले चाय पान करता, फिर
- 20:11मैं आराम, आराम से कदमों से उस हरियाली की छाँव में निकल पड़ता।
- 20:19पैदल चलता क्रिया योग करता सारे दौरान इस बात को मत भूल लगातार
- 20:24क्रिया योग करता। चलते चलते दो काम जितना तुम
- 20:33दौड़ोगे या पैदल चलोगे तुम्हारी उतनी ही बुद्धि।
- 20:37सूक्ष्म शायद क्यों? क्योंकि पांव की तरफ ब्लड फ्लो
- 20:44ज्यादा होगा। और बुद्धि की तरफ ब्लड फ्लो कम
- 20:48होगा। इससे बीपी भी नॉर्मल हो जाएगा।
- 20:51रात को सोते वक्त भी ध्यान रखना अगर किसी की कोई बिमारी है तो बात
- 20:58अलग है। किसी को सर्वाइकल वगैरह डॉक्टर
- 21:04कहता है, बिलकुल पैर न ले को आप उसकी बात अगर तुम बिलकुल नॉर्मल
- 21:14हो सवस्थ हो तो अपने सिर को थोड़ा सा ऊंचा रखो।
- 21:21ताकि सोते सोते भी जब ब्लड सर्कुलेट करें तो सीधे सोने में
- 21:27आपका ब्लड सर्कुलेशन ज्यादा होगा और थोड़ा सा उचाई पर सोओगे तो
- 21:32ब्लड सर्कुलेशन कम होगा और जितना कम ब्लड सर्कुलेशन होगा।
- 21:40सर्कुलेशन जितना चाहिए, वह तो बॉडी अपने आप अप डाउन कर लेती है।
- 21:45तुम्हे आवश्यकता नहीं है। जब तुम खड़े होते हो तब भी बॉडी
- 21:49सर्कुलेट करती है, नॉर्मलाइज़ हो जाती है उसका तुम मत फिक्र करना
- 21:57लेकिन हमेशा। गर्दन को ऊंची रखना, सिर को ऊंचा
- 22:02रखना, उससे ब्रेन के तंतुओं को तुम्हें बाढ़ की तरह खून नहीं
- 22:09मिलेगा। तुम्हारे सूक्ष्म तंतू जो उभर गए
- 22:14हैं, वो उस बहाव में बहेंगे नहीं? रोज़ रोज़ ज्यादा नए उत्पन्न होते
- 22:21रहे मुझे तुम्हारी चेतना शायद तुम्हें पता नहीं, महावीर जब सोते
- 22:33थे तो भी थोड़ा सा सर ऊँचा रखते थे।
- 22:36अब ये बातें शायद। जैन साहित्य में लिखी हूँ या ना
- 22:42लिखी हूँ, मुझे नहीं पता, मैं तो महावीर का जीवन जानता हूँ,
- 22:49साहित्य में जब सोते तो भी थोड़ा सा सर।
- 22:57जब ध्यान करते तो भी खड़े होते प्रथम शान्ता ध्यान लगा बा कमाल
- 23:06धन और उस आखिरी लेवल पे पहुँच गए आपने कभी देखा भगवान कृष्ण की
- 23:13तस्वीर सदा खड़े रहते? एक बात आपने और देखी, थोड़ा सा
- 23:23समझ लेना इस बात में बड़ी वैज्ञानिक था।
- 23:31वह बाएं टांग को दाईं तरफ क्यों रखते और दाईं को बाएं तरफ क्यों
- 23:35रखते, ये आपने कभी ध्यान दिया? हम उनको टेढ़ी तांग गँवाना करते
- 23:44है। अब कभी भगवान कृष्ण की मूर्ति को
- 23:46दे। ऐसे में बैठा तो जाने इस सब
- 23:53पोस्टर में बैठ नहीं सकोगे। तो भगवान कृष्ण खड़े मिलेंगे,
- 24:01इससे तुम कुछ नहीं समझ पाए। भगवान कृष्ण आपको खड़े मिलेंगे।
- 24:09बहुत ही तस्वीरें देखिए, आप राधा के साथ खड़े मिलेंगे अर्ध नारी
- 24:13सुर। उनका जो स्वरुप है वो आपको खड़े
- 24:17मिलेगा। उनका बायां पैर दाएं और दाएं पैर
- 24:26बाएं। अगर तुम ऐसा कर सको तो ध्यान बड़ा
- 24:30मजेदार लगेगा, एक सूक्ष्म प्रणाली है।
- 24:37रंगों की जैसे आपने देखा कि हमारा दायां दिमाग बाएं हिस्से को
- 24:44कंट्रोल करता है और हमारा बाएं दिमाग दाएं हिस्से को कंट्रोल
- 24:49करता है, ये तो आपको पता ही होगा। वैज्ञानिक।
- 24:55लेकिन पांवों को दायें वायें करने का चम्ब क्यों करते हो?
- 25:01जी आपको कुछ समझा रहे हो? इट्स वेरी सिग्निफिकेंस इन इट तो
- 25:10बाएं पांव को दाईं तरफ कर देते हैं।
- 25:12कैनची। क्यों करते हैं वो?
- 25:19ऐसे खड़े होने से चेतना बढ़ती है अब मैं शरीर की कोशर भी आता हूँ
- 25:28आप ध्यान से समझ लेना ऐसा कभी कभी।
- 25:33तुम प्रयास करना, खड़े होकर ध्यान करने की कोशिश आस पास ध्यान रखो
- 25:48क्योंकि तुमने कभी खड़े होकर ध्यान नहीं किया, ना ही तो मैं
- 25:51किसी ने सिखाया। यहाँ तक कि जैन धर्म के लोग भी
- 25:54बैठे रहते हैं। और कभी उन्होंने प्रश्न पूछा, कुछ
- 25:59लोगों ने प्रश्न पूछा है तो मैंने यही जवाब दे दिया तो उसके मुझे
- 26:13खुद को हैरानी हुई। जब मैंने बाबा से पूछा ये नया
- 26:16सवाल है तो बाबा ने सारे? इसका कारण है जैसे बायां और दायां
- 26:25दिमाग अपने उलट से हिस्से को कंट्रोल करते हैं, वैसे ही
- 26:30नॉर्मलाइज़ कर देते हैं। पांव को इधर उधर करके भगवान अपने
- 26:39शायद प्रयोग में किया। गाते वक्त अगर तुम पांव को उलट कर
- 26:50दोगे, तुम्हारी आवाज में थोड़ी तब दे दिया जाए।
- 26:57खैर ये गायकों की बात है। भगवान कृष्ण जब आपको दिखेंगे कभी
- 27:07आपने सोचा नहीं सोचा, भगवान राम नहीं है, बिलकुल स्ट्रेट लाइन में
- 27:14कड़े बनेंगे आप तो कृष्ण अगर दायें बाएं पांव करती हैं तो
- 27:19चेतना का फॉर्म स्वरूप। उनसे ऊंची चेतना शायद मानवता ने
- 27:27सोंची नहीं होगी। कभी उम्र वो भी आज से 5000 साल
- 27:32पहले उसके खड़े होने का ढंग, बोलने का ढंग चलने फिरने का ढंग,
- 27:39उनके खाने पीने का ढंग। आपको देखना चाहिए सिर्फ पूजा के
- 27:45रूप से काम चलेगा छोड़ 100 पूजा पूजन करने से काम तुम तो लक्ष्मी
- 27:50तक की पूजा करते हो, हमारा मुल्क आई सी पूजा करके काम चला लेना
- 27:59चाहता है। और पूजा करने से कुछ नहीं होता।
- 28:05पूजा करने से आलीश्य पूजा करना एक बिमारी हाँ।
- 28:21सीधे खड़े रहने से तुम्हारी चेतना का विकास होगा।
- 28:26मनुष्य जब से पशु खड़ा हो गया, चेतना का विस्तार होते चला गया।
- 28:35अगर मनुष्य आप भी झोंक के चलना शुरू हो जाए वैसे।
- 28:38हाथों की हाथों का काम पांव की तरह लेने लगे तो मनुष्य फिर वैसे
- 28:43ही होती में आ जायेगा। तुम पशुओं को देखो, अगर पशु खड़े
- 28:51हो जाएं पशु आज खड़े होना सीख जाएं तो उनका कौन सी?
- 28:57मनुष्य जैसा ही हो जाएगा। वृष तो बहुत रखेंगे।
- 29:02मनुष्य कब से खड़ा हुआ है? धीरे धीरे उसके सूक्ष्म तंतू
- 29:07विकसित होते गए और सूक्ष्म तंतुओं ने चेतना को बढ़ाने में मदद की।
- 29:20ब्रेन का सूक्ष्म तन कुओं से भर जाना तुम्हारी चेतना पे प्रभावित
- 29:27करता है। कुछ आसन नहीं जो हमारे हठ योग ने
- 29:34बनाई। उन आसनों से हम हल्की हल्की
- 29:39तरक्की तो होती है लेकिन हल्की हल्की और कुछ लोग तो सर की तरफ
- 29:50जैसे। सीर शासन करने से आपका ब्लड फ्लो
- 29:59इतनी तेजी से सिर की तरफ बढ़ता है वह व्यक्ति थोड़े से दिनों में
- 30:05पागल भी हो सकता है। मैं बहुत ही लंबा सीर शासन किया
- 30:14था। कई कई घंटे तक सीर सेशन करता हूँ
- 30:20और मुझे लगातार चक्करों की समस्या हुई।
- 30:26मेरी पापा से कुछ चाहिए क्या? यदि आपकी शीश सेशन?
- 30:36शरबंगासन बिल्कुल शरबंगासन में बाकी सारे अंग मोठों के मुकाबले
- 30:46में हो जाती हैं, पांव पर बुझाते हैं, अकेला सिर नीचे रहता है,
- 30:52उसमें भी फ्लो ऑफ ब्लड ब्रेन में पहुँच जाता है।
- 30:57फलो ब्लड ब्रेन में शरीर के सारे अंगों से कम होना चाहिए इस
- 31:06फॉर्मूला को सुनिए ब्लड का फलो सारे शरीर के अंगों से कम होना
- 31:14चाहिए ब्रेन में। तो आपके ब्रेन की सूक्ष्म तंतु
- 31:20ग्रो करेंगे, विकसित होंगे, नए बनेंगी और सूक्ष्म से सूक्ष्म तम
- 31:27बनेंगे और जीतने जीतने सूक्ष्म बनेंगे।
- 31:31उतने उतने आप ज्यादा समयदार होते चले जाओगे।
- 31:36पटकने वाले बच्चों के लिए ये कुछ भी याद करना आपको याद नहीं हो
- 31:41रहा, तो आप 15 मिनट पैदल चले। किसी हरियाली वाली जगह पे जहाँ पर
- 31:52ऑक्सीजन प्रचुर मात्रा में है। हल्के हल्के कदमों से चहल कदम
- 31:59प्रेम से करते हुए 15 मिनट चले आप और चलते चलते आप ऊंचे उठू,
- 32:09सांसें। ज्यादा ज़ोर न लगाएं।
- 32:12लंबे लंबे सांस पूरे फेफड़े को भर लें।
- 32:15नाक से सांस ली, मुँह से छोड़ दे। हल्के से कोई ज़ोर नहीं लगाना है।
- 32:22अगर चेतना का विकास करना है, पढ़ाई के लिए ये सब अलग अलग चीज़
- 32:26है। अगर तुम कॉम्पिटिशन में बैठना
- 32:31चाहती हो तो तुम लंबे श्वास लो, लेकिन ज़ोर मत लगाओ, उसमें शक्ति
- 32:40में मत करो। श्वास लंबे लो ऑक्सीजेनेटेड करो,
- 32:45ब्लड को प्यूरीफाई करो। और 15 मिनट क्रय योग से आप हल्की
- 32:53हल्की चहलकदमी करते आके अपने असली पे बैठ जाओ, 15 मिनट विश्राम करो,
- 33:01चेक थोड़ा सा ऊँचा। फिर 15 मिनट के बाद याद करके देखो
- 33:07सामंतकारी परिणाम होंगे आप जो याद करोगे दीर्घकाल तक तुम तुम सुमन
- 33:15रहेगा या जो याद करना चाहते हो वो मैंने एक फॉर्मूला पहले बता।
- 33:25गानों में एयर प्लग लगा दो और नींद आ जाए वह टीम चलती रही।
- 33:34अचेतन मन में वो बैठ जाएगी चीज़ और तुम्हें पता भी नहीं चलेगा तुम
- 33:39कब कितने चेतना बन हो गए, कितने समयदार हो गए।
- 33:45क्योंकि हमारा चेतनमन सभी चीजों को अवसर्व करता है।
- 33:48तुम सो जाते हो, चेतनमन नहीं सोते हो चेतनमन में बड़ी खबरें अचेतनमन
- 33:56चेतन का? चेतन से आगे अब चेतन अब चेतन से
- 34:02आगे के हिसाब से अब चेतन के हिसाब से अचेतन फिर कोलेक्टिव अनकॉन्शस
- 34:08और फिर कोलेक्टिव कॉन्शस तो अपनी कान में अब बहुत से लोग नींद के
- 34:18लिए। मेरी इन टेपों का इस्तेमाल करने
- 34:21लगे, बाबा रात को नींद नहीं आती, अब हम टेप लगा के सो जाते हैं।
- 34:27बड़े मज़े से नींद आती है और इतनी बढ़िया नींद आती है क्वालिटेटिव।
- 34:34इतनी बढ़िया नींद आती है कि हमने कभी सपने में नहीं सोचा था कि
- 34:38इतना फ्रेश करेगी। बस आप जो आपको अच्छी लग गई वीडियो
- 34:45उसको एक तरफ अलग रखे वो रात को सोते वक्त कान में।
- 34:54उस वीडियो ऑन कर दे कोई ख्याल मत करना, समझने की चेष्टा मत करना
- 35:04मैं क्या कह रहा हूँ, क्या नहीं कह रहा हूँ, क्या बोल रहा हूँ
- 35:08जैसे आप सुना अनसुना करे, बस आप सोने जा रहे हो।
- 35:15धीरे धीरे आपको नींद आ जाएगी, वो आवाज आपको लोरी की तरह सुला देगी
- 35:21तुम आजमा और तुम्हें पता ही नहीं चलेगा तुम कब सो गए और इतनी सी
- 35:28नींद से जब भी रहता हूँ। 12 टाइम स्ट्रीम लेते थे।
- 35:34इन्हें झपकियों ने ही उसे इतना भगवान बनाया।
- 35:37नींद तो वो 10 घंटे लेते थे और 10 घंटे में नींद इतना काम नहीं करती
- 35:42थी जितना काम झपकियां कर जाती थी। दिन में सोना तुम्हारा ध्यान बन
- 35:49जाता है। रात को सोना।
- 35:52तुम्हारा सिर्फ जो टूटे हुए टिशूज़ हैं, उनकी मरम्मत करने में
- 35:57भी जाता है। दिन और रात के सोने में बड़ा फर्क
- 36:01है। दिन का सोना तुम्हारे लिए बन जाता
- 36:05है योग निद्रा। योग निद्रा को सिखाने के लिए आज
- 36:15बड़े बड़े होर्डिंग्स लगते हैं। बड़े बड़े शिविर लगाकर बड़े बड़े
- 36:21फिश रखते हैं। तुम्हें इनके पास नहीं जाना
- 36:24चाहिए। तुम पराधीन हो जाओगे, तुम अपनी
- 36:28योग निद्रा खुद बनाओ, ज्यादा बढ़िया बनेंगे।
- 36:32इन व्यापारियों की व्यापार में मत उलझो शिवरा में मत जाओ तुम लंबे
- 36:38लंबे सांस लो नाक से सांस लो, मुख से छोड़ लो, जो क्रिया जोग मैं
- 36:43कहते हूँ और उसके बाद जब तुम्हें नींद आएगी उसके पास।
- 36:49वह नींद होगी। योग निद्रा सच में योग निद्रा
- 36:53किसी ने तुम्हें सम्मोहित नहीं दिया।
- 36:56बिना सम्मोहन के तुमने सिर्फ ऑक्सीजेनेटेड करके शरीर को और
- 37:02दिमाग को तुम योग निद्रा में पहुँच गए।
- 37:07यह योग निद्रा है। रात को योग निद्रा नहीं, क्योंकि
- 37:10योग निद्रा रात को कार्बन डाइऑक्साइड के कारण होती है।
- 37:16योग निद्रा होती है। ऑक्सीजन की मौजूदगी और रात को तुम
- 37:21सोते हो। एक तो वैसे ही वातावरण में कार्बन
- 37:24डाइऑक्साइड ज्यादा होती है। 11:00 बजे के बाद।
- 37:27वृक्ष कार्बन डाइऑक्साइड छूटने शुरू कर देते है।
- 37:33इसलिए मैं अक्सर कहता हूँ कि रात को 11:00 बजे के बाद 3:00 बजे तक
- 37:374 घंटे के लिए योग मत करना नुकसान नहीं होगा उससे लेकिन फायदा भी
- 37:43नहीं होगा। उसके बाद 3:00 बजे के बाद करना है
- 37:5011:00 बजे से पहले तो ये खेल है ऑक्सीजन का ऑक्सीजनेटेड सो जाना
- 38:01ये है। आपकी योग निद्रा और कार्बन
- 38:08डाइऑक्साइड के कारण सो जाना मेलाटोनिन के कारण सो जाना
- 38:14सेराटोनिन के कारण सो जाना यह तो धूप जाते ही सूर्य छिबते ही।
- 38:21आपके भीतर प्रकृति मेलाटोनिन का निर्माण करना शुरू कर देती है।
- 38:26मेलाटोनिन एक हार्मोन का नाम मेलाटोनिन सेराटोनिन और ये दोनों
- 38:34नींद लाने के लिए जिम्मेदार हैं। मेलाटोनिन ज्यादा जिम्मेदार है।
- 38:40सैराटोन खुशी देता है आपको वो रात के अंधेरे में पैदा होती है।
- 38:48ये आपको नींद लाने में बड़े कारगर होते हैं जब तुम क्रिया योग
- 38:55करोगे। तो उससे ऑक्सीजनेटेड जब तुम होगे
- 39:01तो उससे तुम्हारे भीतर थोड़ा सा मैलाटोनिन का निष्कासित हो जा
- 39:08निष्कासित बाहर आएगा। चेतन में मैलाटोनिन आ जाएगा, उससे
- 39:14तुम्हें नींद आएगी। तुम सो जाओ, लेकिन यह सोना बड़ा
- 39:21यूज़फुल है तुम्हारे लिए ऑक्सीजन तुम्हारे ही शरीर को जागृत करेगी
- 39:31और मैलाटोलन आपकी चिंतन को सुलाव देगा।
- 39:34लेकिन अचेतन को सक्रिय रखेगा। उस कंडीशन में जो सोना है वो रात
- 39:43की सुसुक्ति से 10 गुणा ज्यादा लाभ करते हैं।
- 39:52रात की सुसुक्ति के 10 घंटे। और दिन की योग निद्रा का एक घंटा
- 40:01बराबर होता है। जब लोग अब कह तो देते हैं हम आपको
- 40:08थोड़ा सुला के आपकी नींद का पूरा कर देंगे।
- 40:11काम लेकिन कहाँ होता है नहीं? क्योंकि ये प्रोसेसर नहीं
- 40:15करवातें? ऑक्सीजेनेटेड शरीर को करते नहीं,
- 40:22शरीर को ऑक्सीजेनेटेड किए बिना मेलाटोनिन पैदा नहीं होता और
- 40:29मेलाटोनिन पैदा नहीं होता तो आप योगेंद्र में जा नहीं सकते।
- 40:34नहीं नहीं, ऐसा नहीं। कहते हैं, मेलाटोन की गोलियां
- 40:38खाली करनी है या फिर तुम एडिक्ट हो जाओ किसी प्रकार की हार्मोन की
- 40:45बड़ी निखानी हुडपमिन हो सेराटोनिन हो, मेलाटोनिन हो इनकी गोली नहीं
- 40:51खानी यू विल बी एडिक्टेड। एडिक्ट तो होना ही है प्राकृत रूप
- 41:01से चलना है। वर्धमान तो बड़े अट्रैक्टिव रहते
- 41:07थे, वाह होश रहते थे ध्यान जब करते तो बड़े वाह होश।
- 41:14बिलकुल सीधे स्ट्रीट खुले रहते ज़रा भी हाथ पानी लोग उन्हें
- 41:20बुलाते और कुछ भी जवाब नहीं देते लोग समझ के पागल है लोग उनके
- 41:25कानों में कीले ढोंकते थे। ये हमारे खेत में आके खड़ा होता
- 41:32है। पता नहीं कौन है कौन है?
- 41:36ये हमारी बात का जवाब नहीं देता तो लोगों ने संतों को परेशान बहुत
- 41:44किया है, लेकिन संत हैं कि परेशानी में आए नहीं।
- 41:50संत अपनी धुन में मस्त रहे। यही संतत्व है।
- 41:56अपनी धुन में ही मस्त रहे तो पूछा कि खड़े होने में क्या राज़ है ये
- 42:03राज़ और अगर आप खड़े होने में पांव को इधर कृष्ण भगवान की तरह
- 42:10करो केंचिनो? एक ढांचा बना लो, घर में पाइप्स
- 42:15का ढांचा खड़ा कर लो। उसके भीतर जाने में गेट रख लो।
- 42:22गेट खोला, कुंडी लगाई वहाँ पर खड़े हो गया, वहाँ गिरने से हो
- 42:26गया। उस ढांचे को आप भीतर ग्राउंड में
- 42:31दबा दो। वो सहायता करेगा।
- 42:35चलो आप महावीर की तरह, वो तो कभी गिरे नहीं, आप हार्ड पांव तो
- 42:41डालोगे तो उसकी मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं।
- 42:49ऐसा हार्ड पांव टूट जाएगा। अमित शाह ताजा साजा।
- 42:55नहा के आते खूब बाल चुप्पड़ रखे थे।
- 43:00तेल लगा रखा है, साइकिल पे आ रहे है।
- 43:05सारा साइकिल शोर मचा रहा था। अकेली टल्ली रहेगा।
- 43:12बैल काम नहीं करता फड़का हुआ फड़का हुआ साइकिल पूरी आवाज कर
- 43:22रहा था, ब्रेक भी नहीं। ब्रेक भी नहीं थे।
- 43:30आगे से आगे ग्रामीण और तू अपनी धुन में सभा धुन की बात कर और धुन
- 43:38में इस बार तो अमित शाह जी बोल रहे हैं, अरे भाई हट जाओ, हट जाओ,
- 43:44हट जाओ और उसे नहीं सुना। अब जा के बीच में ठोक दिया वो तो
- 43:54गिर पड़ी नहीं उठी है तो लाल सूरत उसका मुँह हो गया अरे अंधे हुए
- 44:03देखता नहीं तुझे और तुने टल्ली क्यों नहीं बजाई?
- 44:10कहता टर्ली बजती नहीं, सारा साइकिल टर्ली से कहीं 100 गुना
- 44:15ज्यादा बज रहा है, ये तुम्हें सुना नहीं क्या हम इन लोगों के
- 44:21पास ऐसे ही जवाब होते हैं? टर्ली है या नहीं?
- 44:27ये साइकिल फुड़का हुआ है इसकी आवाज और फिर मैं बोल रहा हूँ हट
- 44:35जाओ भाई हट जाओ भाई, बात बढ़ गई। तेल चुपड़ा हुआ सारे शरीर को बात
- 44:50बढ़ गई बढ़ते बढ़ते तू तू मैं मैं जा के औरते कैसी लड़ाई करती है
- 44:55आपको पता नहीं जुबानी कलाम में लड़ाई होती है और ऐसे ही जवानी
- 45:02कलाम ही लड़ाई करते, कभी हाथापाई करते देखे आप?
- 45:11बात बड़ी जुबानी कर रहा हूँ तो अमित शाह बोलने लगे क्यों सिर पे
- 45:16चढ़ रही है? हाँ, इतना खड़का क्यों सिर पे चढ़
- 45:22रही है तो ग्रामीण औरत ने सिर के हिसाब से चुपड़ा हुआ।
- 45:30बाल तो एक तो कहती, क्यों तेरे सर के ऊपर चढ़ के मैंने फिसलना है
- 45:36क्या आप इतनी तो मत समझ की मैं तेरे सर के ऊपर पांव रख दूंगी,
- 45:45चढ़ जाऊं? मैंने फिसलना है क्या हार्ड पांव
- 45:48तोड़ा नहीं है क्या? ढांचा तो बना लेना क्योंकि
- 45:56तुम्हारा कोई पता नहीं तो मैं ध्यान करते करते हार्ड पांव तोड़ा
- 46:02लूँ तो मैं कोई जिम्मेवारी लूँ उस बात।
- 46:07सांचा बना लो सांचे में खड़े हो जाओ ये आपके लिए बेनेफिशियल हो एक
- 46:12तो आपकी जो शक्ति मोलाधार से उठ रही है निरंतर हर वक्त उठ रही है।
- 46:17किसी को कुंडली जागृत है या नहीं वो शक्ति हर वक्त ही उठ रही है।
- 46:23यह मार्ग शुमना का खुला ही रहता है।
- 46:27यही आपको एनर्जी देता है चेतना की क्योंकि वहाँ से चेतना उठती है
- 46:35शुद्ध चेतना और जब जागेगी। कुंडली तो कुंडली शक्ति का स्वरूप
- 46:43नहीं है, ये आपको किसी ने गलत बहका दिया।
- 46:47कुंडली चेतना का स्वरूप है चेतन का भंडार तब आप पूर्ण चेतन हो
- 46:53जाओ, वह चेतना चढ़ जाएगी ऊपर सहसराज और तुम?
- 46:58सहस्त्र तल का मलाप का खिल जाएगा हज़ारों पंखड़ियों वाला कम छीतना
- 47:06भर जाएगी उसमें पर यू विल बी एनलाइटन तुम्हें सत्य सत्य की तरह
- 47:11दिखने लगेगा यह सैंतीस्विक। इसको प्रैक्टिकल रूप से करो, करना
- 47:22शुरू करो, जितनी देर तक आप खड़े रह कर ध्यान कर सकते हो करो, उसके
- 47:30बाद आप बैठ के ध्यान करो। फिर आरामदायक अवस्था में ध्यान
- 47:36करो। चारों तरफ फिर आने लगा लो, लेकिन
- 47:40सोते वक्त ध्यान रखो अगर आपको कोई रोग नहीं है, सर, व्हीकल वगैरह तो
- 47:46सिर को हमेशा ऊंचा रखो, इससे बड़ा फर्क पड़ेगा।
- 47:55और सिर की दिशा जब हम सोते हैं तो हमारा सिर दक्षिण की तरफ होना
- 48:02चाहिए। पांव उत्तर की तरफ साउथ की तरफ
- 48:12पांव मत करना। उत्तर की तरफ आपका शर नहीं होना
- 48:19चाहिए शर होना चाहिए दक्षिण की तरफ पाम होने चाहिए उत्तर की तरफ
- 48:31अगर सिर आपका दक्षिण की तरफ होगा। और पांव उत्तर की तरफ होगा तो आप
- 48:38ऐसा कीजिए, एक मैग्नेटिक लीजिए एक मैग्नेटिक को दागे से बांध दीजिए,
- 48:46उसको घूमा दीजिए, ऊपर किसी लोहे की पाप से या चारपाई से बांध
- 48:52दीजिए। घूमता रहेगा, घूमता रहेगा।
- 48:56जब वो ठहरेगा ना, तो आप देखना वो जो दिशा होगी वो नॉर्थ साउथ की
- 49:02होगी। नॉर्थ साउथ यह नॉर्थ साउथ का होना
- 49:16आपके लिए बड़ा अहम मायने रखता है। जब भी सोना आपका सिर दक्षिण की
- 49:26तरफ होना चाहिए, पाम दक्षिण की तरफ नहीं होना चाहिए।
- 49:31जब तुम पाम दक्षिण की तरफ़ करके सो गई तो सुबह अपने आपको सारी रात
- 49:37यह चुंपक है। धरती आपकी शक्ति खींचती रहेंगी और
- 49:44सुबह आप थके थके से हारे हारे से मांदे मांदे से लको?
- 49:50सुबह रात की सोई हुई ऐसे लगेंगी जैसे एनर्जी एनर्जेटिक होएगी रात
- 49:58जीतने थके थे, उससे ज्यादा थक गई थीसूस का रिपेयर हुआ असर में तो
- 50:05होगा ही ब्लड के कारण। लेकिन ब्रेन आपको थका थका लगेगा।
- 50:13इसलिए लोग व्रत में पढ़ने तो बैठ जाते हैं ना तो निंद्रा पूरी हुई
- 50:18होती है और सारी रात उलट दीक्षा में सोये थे।
- 50:23दक्षिण की तरफ पैर करके सो जाते हैं, कुछ नहीं याद होगा।
- 50:28जी आजुमाते थे दक्षिण की तरफ सेर करना, पांव मत करना, पैर करना।
- 50:35उत्तर ऐसे सुनो बेस्ट स्लीपिंग पोस्चर है और सिर थोड़ा सा अच्छा
- 50:43रखना ताकि रात को बड़ी बारीक तंतु।
- 50:48पैदा होती रही। नब्ज़ बारीक जितनी बरीक नब्ज़
- 50:52आपके भीतर पैदा हुई उतने तुम समझदार हो जाओ आदमी के समझदार
- 51:00होने का कारण मैंने आपको बताया वह ऊंचा उठा खड़ा हो गया।
- 51:08पांव के बल चल रहा था, हाथों के बल चल रहा था।
- 51:14जैसे ही वो हाथों के बल चलने के बजाय पांव के बल दो पांवों पर
- 51:18चलने लगा, उसकी चेतना विकसित होती गई और अगर ये पशुओं को मत बताना
- 51:24नहीं हुआ। हँस हंसते क्यों?
- 51:28अगर आपने पशुओं को बता दिया ना ये कुत्ता आपको खा जाएगा, ये आपसे
- 51:36ज्यादा समझदार हो जाएगा। बस यही है मूल सूत्र अगर पशुओं को
- 51:44यह बात समझा जाए। कि खड़े होने से चीतना बढ़ जाती
- 51:53है तो पशु आपसे कहीं ज्यादा समझदार हो सकते हैं क्योंकि खड़े
- 52:03होने से सूक्ष्म तंतुओं को। जगने में बनने में नब्ज को पैदा
- 52:12होने में उनका आगाज होता है और ब्लड फ्लो उनको तोड़ता है तो
- 52:24बुद्धि जाग्रत होती है। व्यक्ति की चेतनता का विकास होने
- 52:27में। मूलभूत सूत्र जो काम किया सिर्फ
- 52:31मूलभूत एक ही सूत्र काम किया। वो था कि उसने पांव पे खड़ा होना
- 52:36चलना सीख लिया तो जी मैंने आपको कुछ बातें बताई।
- 52:42सुबह सुबह उठ के चाय, चाय वगैरह पी लो कोई खाली पेट वगैरह।
- 52:51और फिर पैदल चलो जिद नहीं चल सकते हो, मेरी नकल नहीं करनी आपको बाबा
- 52:57सात किलोमीटर छह किलोमीटर चलते थे हम भी लेकिन अगर आप दौड़ सकते हो
- 53:01जरूरतों जवानी की उम्र में 35 वर्ष की उम्र तक।
- 53:0740 की उम्र तक आप हल्के हल्के दौड़ सकते हो, जॉगिंग कर सकते हो
- 53:15तो छोटे बच्चे हैं। 202225 के खूब दौड़े, खूब दौड़े,
- 53:21हॉट प्रबल होगा, अब कोटे नहीं आएगा जल्दी।
- 53:29दौड़ लगाना मत भूलो ये जो लोग कहते हैं धीरे धीरे चला करो ये 70
- 53:34के बाद धीरे धीरे चला करो 70 के बाद तो चाहे चला ही ना करो।
- 53:41बस अपने रोज़मर्रा के काम में कर दिया करो लेकिन एक बात ख्याल रखना
- 53:48शोजा के होते ही आप दौड़ लगाना शुरू करो, खूब जोड़ो, खूब पैदल
- 53:55चलो, आपकी बुद्धि का चेतना कहाँ? शरीर का, शरीर के प्रत्येक अंग
- 54:03प्रत्यंग का भीतर बाहरी बड़े सुन्दर विकास होगा, आपकी चेतनता
- 54:08पड़ेगी, आपके ब्रेन्स के नए नए धंतुक बनेंगे जो याद करोगे पड़ोगे
- 54:15याद हो जायेगा। नींद बहुत शानदार आएगी।
- 54:20लेकिन 16 जिले के 354040 तक उसके बाद फिर दौड़ना कम कर दो।
- 54:27थोड़ा सा 23 से चलना शुरू कर दो तो 50 की उम्र 55 की उम्र 60 की
- 54:34उम्र तक हलके हलके चलो लंबे चलो। चार किलोमीटर दो किलोमीटर चलो
- 54:42जीतने चल सकते हैं, उसके बाद हल्के हल्के घर के काम का 60 से
- 54:4870 तक बाजार जाए। ये सब्जी ले इसलिए आपको 60 में
- 54:52रिटायर कर सकते हैं। की भाई आप सब्जी पानी ले आओ, घर
- 54:56भाग। राशन पानी ले आया करो बच्चे का और
- 55:0370 के बाद तो बस अपना खाना पीना सनान ध्यान के करवाओ 70 के बाद आप
- 55:13ध्यान कर सकते हो जो मैं कहता हूँ।
- 55:16कुछ न करो नथिंग टू टू आराम से पोषण कर जाओ देखिए मैं बात करता
- 55:24हूँ खड़े होने की। उस उम्र में 42 वर्ष की उम्र में
- 55:29तो कैवलिक उपलब्ध हो गए थे। पवन मंदिर।
- 55:36आप 42 की उम्र में अगर खड़े होना शुरू हो गए तो तुम ये मुड़ता मत
- 55:40करना। 29 की उम्र में उन्हें शुरुआत की
- 55:46शुरुआत तुमने पहले ही कर दी थी। घर छोड़ा उन्होंने 2930 के करी,
- 55:512930 के क्री में उतने कर चुका। यही उम्र होती है सही साधना बस 30
- 56:02का दशक शुरू हो जाए वहाँ से शुरू करते हैं उससे पहले तुम कला अपने
- 56:10जीवन को कैसे निर्भर है करोगे? उसे हम ब्रह्मचर्य कॉल करते थे।
- 56:1525 वर्ष तक 29 तक कर लो आप 29 के बाद अब थोड़ा थोड़ा उस कलाओं को
- 56:24अपना घरवार का, परिवार का पोषण करो और थोड़ा थोड़ा आप ध्यान में
- 56:30गहरे जाओ। खड़े रहकर तो 42 साल की उम्र में
- 56:40तो महावीर खुद ही अगर आप 42 की उम्र में खड़े रहकर ध्यान करोगे
- 56:47तो यह मुड़ता होगी या कोई उम्र नहीं है।
- 56:49खड़े होकर ध्यान। 35 तक स्वयं का ज्ञान 29672535 तो
- 57:05ध्यान रखना उम्र को नज़रअन्दाज़ मत कर।
- 57:10और दोनों स्त्री पुरुष दोनों में ही ये उम्र काम करेगी।
- 57:14इसी उम्र स्त्री 2 साल पहले शुरू कर सकते हैं।
- 57:212 साल पहले बंद कर सकते हैं, 2 साल का गैर हो सकता है।
- 57:29ये है पूरी धरती मैंने आपको समझा महावीर क्यों खड़े होकर ध्यान
- 57:36करते थे। चेतन का विकास होता है और
- 57:43अध्यात्म चेतन का परम विकास है, तब कोई और काम तो होता नहीं।
- 57:50कोई कल पुरुष नहीं था, कोई और काम दाम नहीं था, कंप्यूटर नहीं होता
- 57:53था तब ए आई नहीं होता था, यही काम होता था, बस सारी गुण खाओ, आनंद
- 58:01आनंद बनाओ। एक छोटा सा प्रश्न और ले ले बस
- 58:09पांच चार मंच का प्रश्न होशया बाबा मैं जल रहा हूँ, क्या करूँ?
- 58:17मेरा हृदय जलता है, मैं क्या? तुम्हारा हृदय जल रहा है क्योंकि
- 58:28तुम उस स्थिति में खड़े हो जहाँ आग जल रही है।
- 58:34अगर आग जलती हुई आग के पास खड़े हो गए तो उसका शेक तो तुम्हें
- 58:39लगेगा। अगर बिलकुल ही तुम आग के बीच में
- 58:43कूद गए तो तुम जल ही जाओगे। और अगर तुम कहते हो कि मैं जल रहा
- 58:48हूँ तो तुम आग के बीच में खड़े हो, फिर क्या है उपाय उस आग से
- 58:54दूर हो जाओ, आग से डिस्टेंस बना लो, दूरी बना लो।
- 59:05यह इल्यूजन तुम्हारी आग है, इल्यूजन का अज्ञान अज्ञान आग है।
- 59:14जब तक तुम ज्ञानी नहीं होते, तब तक तुम जलते ही रहोगे।
- 59:19ज्ञानी होना यानी सत्य को जान लेना।
- 59:22वास्तव में क्या है सत्य? ये है ज्ञान अज्ञान क्या है?
- 59:27सत्य को न जानना अज्ञान तो तुमने अभी सत्य को जाना नहीं, इसीलिए
- 59:32तुम जल रहे हो, लेकिन इतना कर सकते हो कि जहाँ पर जलन है भारी
- 59:38आग जल रही है उसे थोड़ा परी हट जाओ।
- 59:42जलती हुई सर्कमस्टैंसे से दूर हो जाओ वह क्रोध की जलन है, वह काम
- 59:48की जलन है, वह मोह की जलन है, लोभ की जल है, अहंकार की जल है, मद मत
- 59:59सर की जल दंभ है। इनकी जलन है।
- 1:00:03अगर आपको तो इससे थोड़ा दूर हटते जाओ, इनसे दूरी बनाने का प्रयास
- 1:00:09करो। ये ये साधना करो।
- 1:00:11इनसे दूरी जब भी जलते हो, इनसे दूरी बना लो क्योंकि यह आग में
- 1:00:17जलना, आग अलग और तुम अलग। समझो सर्कमस्टैंसेस आग है यह जो
- 1:00:25तुम्हारे आस पास सर्कमस्टैंसेस हैं यह आग है और तुम इनसे बहुत
- 1:00:32दूर हो। तुम जानबूझकर इनमें कूदते हो यह
- 1:00:36इसके करीब जाता। इसके करीब जाओगे तो तुम जलोगे
- 1:00:42इसके बिल्कुल बीच में चले जाओगे तो तुम बसु हो जाओगे।
- 1:00:47इससे जितनी दूरी बना लोगे, ये थोड़े से गहरे शब्द है।
- 1:00:51जितनी दूरी बना लोगे उतने ही तुम आग की तपन से बच जाओगे।
- 1:00:57और अगर इतनी दूरी बना लोगे, जितनी सफीर की और केंद्र की होती है तो
- 1:01:02आग जलती रहेंगी। सफीर पे और तुम केंद्र में मज़े
- 1:01:06से उत्साह को देखते रहोगे? ये है उपाय तुम्हें ये करना चाहिए
- 1:01:11जहाँ आग जल रही है उससे। अपनी दूरी अपने होने की दूरी बना
- 1:01:16लेना, यद्यपि तुम सदा ही दूर हो, कृष्ण भगवान ने तुम्हें समझाया है
- 1:01:22तुम समझ नैनम सिद्धांत शस्त्र राणी तुम वहाँ हो जहाँ पर शस्त्र
- 1:01:29नहीं करते यद् की। बरसते हुए वस्त्रों के बीच में
- 1:01:34तुम फँस जाओगे तो कटोगे नैनं दहाती पांव का ना आग तुम जला सकते
- 1:01:41हो लेकिन अगर जहाँ आग जल रही है सपीर पे अगर तुम सपीर पे कूद
- 1:01:46जाओगे तो तुम जलोगे। नहीं चेनम के लिए देन थे आपको न
- 1:01:53सुशेती मारो तहा न पानी तुम्हें गला सकता है, फिर अगर तुम बाढ़ के
- 1:01:58बीच में ही कूद जाओगे, तो बह जाओगी न सुशेती मारो तहा।
- 1:02:08न हवा तुम्हें उड़ा सकती है, लेकिन अगर तुम तूफानों के भीतर
- 1:02:11खुद जान पहचान के खुद जाओगे, तो फिर तुम तुम्हें उड़ा के ले जाएगा
- 1:02:17तूफान बस इन परिस्थितियों से तुम दूर हो और तुम वास्तविक स्थिति
- 1:02:25में आ जाओ, तुम वास्तव में दूर ही हो।
- 1:02:29तो तुम अपनी अपनी वस्तुस्थिति में आ जाओ, यथा प्रज्ञ हो जाओ, स्थिति
- 1:02:38प्रज्ञ हो जाओ तो तुम मुझसे दूर हो जाओ जैसे केंद्र से दूर होता
- 1:02:44है। परिधि केंद्र से दूर होती है तुम
- 1:02:52परिधि पे ना बैठे रहो सवेरे पे ना बैठे रहो तुम वहाँ से छलांग लगाओ
- 1:02:59केंद्र में आ जाओ या धीरे धीरे कैसे कैसे के आ जाओ जैसे तुम।
- 1:03:06परिधि से दूरी बनाओगे तुम देखोगे? आग ने जलाना काम कर दिया और करीब
- 1:03:12आओगे तुम पाओगे आप थोड़ा कम जला रहे और जैसे ही तुम केंद्र पे आ
- 1:03:17जाएंगे तुम पाओगे कि आग में ये जला ही नहीं पाती ये कि आग जल रही
- 1:03:21है। यही है तुम्हारी बात का की लाश
- 1:03:26बहुत बार समझाया। इतने वचन, इतने प्रवचन मैंने
- 1:03:30इन्हीं चीजों पे दिए हैं। अब पुराने प्रवचनों को बड़ा।
- 1:04:18बिथु मात सो सखा हमार इथु मात स्वामी सखा हमार।
- 1:04:40न प थ नारायण व सुदेव। श्री कृष्ण गोविन्द हरि ए मुरारी
- 1:05:07ए नाथ नारंग। न व सु दे पितुमात स्वामी सखाहम
- 1:05:29पितुमात स्वामी। सखा हमारी हिनात नारा यान
- 1:05:41वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:05:56नाथ नारंग वा सुदेव का ग सब कुछ खाई।
- 1:06:14कहा ग सब कुछ खा अइयो किचन। खाइयो माँ दो नैना मत खाइयो मत
- 1:06:47खाइयो। दो नैना मत खायो, मत खाय मोहे
- 1:07:03पिया मिलन। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरार।
- 1:07:28श्रीनाथ नारायण, वासुदेव, वासु, कृष्ण, गोविंद, अरे, मुरारी, अनाथ
- 1:07:42नारायण, वासुदेव। पितुमात स्वाम सखा हमार पितुमात
- 1:07:56स्वामी सखा हमार। न वासुदेव, श्रीकृष्ण, गोविंद
- 1:08:16हरे, मुरारी केनाथ, नारायण वातु देवा।
- 1:08:36धन्यवाद।