Latest / Baba ji Vijay Vats / 26 Mar 25 - ध्यान में उतरने का महा सूत्र! Best Video on Dhyaan | Explanation of Yam ke 5 Niyam |
Transcript
- 0:20आपने कहा बाबा जी, पतंजलि, भगवान, बुद्ध, भगवान महावीर।
- 0:37इन्होंने पांच नियम दिए। सत्य, अहिंसा, अस्त्य,
- 0:46ब्रह्मचर्य, अपग्रह बाबा चार बातें तुम हमारे वश में सत्य हम।
- 1:05जैसे तैसे बोल लेंगे, हिंसा भी जैसे तैसे नहीं करेंगे, चोरी भी
- 1:21नहीं करेंगे, जोड़ेंगे भी नहीं। लेकिन पाँचव अंक प्रमंचर्या यह हम
- 1:39चाहते भी हैं तो हो नहीं पाता। तो पतंजलि के अष्ट्रांग युग में
- 1:54प्रथम अंश यम, उसके पांच अंग यम, नियम, आसन, प्राणायम, प्रत्याहार,
- 2:03धारणा, ध्यान, ध्यान, समाधि, यम के पांच अंग।
- 2:08सत्य अहिंसा, अस्तेब्रह्मचार्य कैसे निभा पाएंगे उसको चार को
- 2:25निभा लेंगे, किस तरह निभा लेंगे? पांचवा नहीं निभता क्या ये संभव
- 2:33है? पश्चिम के वैज्ञानिक भी कहते हैं
- 2:45के ब्रह्मचर्य कपोल कल्पना है आज के सदगुरु।
- 2:58अच्छा अच्छा आज के मार्गदर्शक यही कहते हुए सुनते हैं।
- 3:17इस गुंडी को थोड़ा स्पष्ट करने की कृपा करेंगे।
- 3:25गुंडी है ही नहीं। सरल मसला है।
- 3:36जैसे और चीजों के संस्कार बना दिए, समाज ने वैसे ही ब्रह्मचर्य
- 3:43का। संस्कार भी बना दिया।
- 3:50सत्य आज कितने लोग बोलते हैं? अहिंसा कितने लोग चोरी?
- 4:05चोरी का मतलब ये नहीं कि तुम दूसरे के खीसे में से पैसे निकाल
- 4:09लो। चोरी का मतलब बड़ा महत्त्व कह रहा
- 4:14है। छुपा लेना महावीर नग्न हो जाते
- 4:29हैं, अचोर्य का भाव प्रस्तुत करने के लिए कोई चोरी नहीं नग्न खलों।
- 4:43मन की बातों को छुपा लेना। घर में कोई मेहमान आ गया, हाथ पैर
- 4:51जोड़ोगे पांव हाथ लगाओगे, जय हो जय हो, चिड़ी के घर भगवान आ गए।
- 5:02और भीतर से कहोगे कब यह दुष्ट यहाँ से विदा होगा?
- 5:10यह चोरी है, अपग्रह जोड़ना नहीं, तुम भी ना जोड़ोगे।
- 5:26लेकिन सूचना ही तो जोड़ोगे जब जोड़ना हो क्या?
- 5:34अब प्रिक्रह और आपको बताऊँ द्रव्य जोड़ लो, कोई बड़ी बात?
- 5:46सूचनाएं जोड़ना ज्यादा घातक है। आज सारे संसार में द्रव्य तो बहुत
- 5:55है, झगड़ा है, सूचनाओं का झगड़ा है गॉड।
- 6:11राम अरला वह गुरु, यह सूचनाएं किसी ने देखा नहीं झगड़ा सभी करते
- 6:23हैं। अगर मैं गलत हूँ तो नीचे कमेंट
- 6:34में लिख दिया करो, घबराएं मत करो, देखा किसने झगड़ते सभी।
- 6:56पदार्थ तो ज्यादा भी इकट्ठे कर लो, कोई हर्ज नहीं पदार्थ तुम्हें
- 7:04कुछ नहीं कहते हैं, सूचनाएं तुम्हें विचलित कर देते हैं,
- 7:11सूचनाएं तुम्हारी रात की नींदें हराम कर देती हैं दिन का।
- 7:15चैन छीन लेते हैं। सत्य अहिंसा आस्ते ब्रह्मचर अपखरा
- 7:33पूछा शारदा ने। क्या ब्रह्मचर्य संभव है?
- 7:53क्या यह है नेचुरल प्रोसेसर नहीं है बनना तो नेचुरल है इम्पोर्टंट
- 8:05व्यक्ति के भीतर बनता है। बनना नेचुरल है।
- 8:14खर्च करना तुम पर डिपेंड है जैसे खून बनता है, नेचुरल है।
- 8:26तुम दान दे दो बात अलग है। प्रश्न तुम्हारा जायज है।
- 8:38क्या करें पाश्चात्य का सारा संसार डॉक्टर्स और तुम कहते हो कि
- 8:49मेरे देखे उन्होंने ज्यादा उन्नति की।
- 8:52साइंस में साइंस में उन्नति की होगी।
- 9:00हम मानते हैं इस बात को धन कैसे कमाएं?
- 9:09ये कला है लेकिन तुम भूल जाते हो। धन को खर्च कैसे करें?
- 9:15जो भी ये कला है बिलकुल उन्होंने तरक्की की सांस
- 9:34की, वे कहते नेचुरल प्रोसेसर है उन्नेचुरल कौन कहता है?
- 9:44सभी नेचुरल कहते हैं, लेकिन खर्च करना तुम्हारे अधिकार में है
- 9:52तुम्हारी इच्छा पर। मनुष्य ही ऐसा जीव है जो अपनी काम
- 10:09भाषा पर नियंत्रण कर सकता है। पशु नहीं कर सकता पशु पाश में
- 10:17बंधा हुआ है पाश बंधन। नियंत्रण का अभाव बंधन होता है
- 10:30तुम्हें तुम्हारी वासनाओं पर नियंत्रण नहीं है, पशु कर भी नहीं
- 10:35सकता। और इसलिए पशु इतना काम करना है,
- 10:46पशु एक निश्चित वक्त पर मिलन करता है।
- 10:55तुम्हारा कोई वक्त नहीं। तुम तो ऑफिस में भी कोई जगह ढूंढ
- 11:02लेते हो? पशुओं का कोई समय निश्चित है,
- 11:14रितु निश्चित है। मनुष्य का कोई समय निश्चित है।
- 11:27पश्चिम में जहाँ मन आए वहाँ मिलन हो जाता है।
- 11:36पूर्व में ऐसा कुछ विधान अभी तक नहीं आया।
- 11:41अगर ऐसा रहा तो धीरे धीरे आ जाएगा।
- 11:50अभी से ये बातें उठनी शुरू हो गईं क्योंकि नियंत्रण करने में
- 12:00मुश्किल बड़ी पेश आती है और पश्चिमी वैज्ञानिक ने समझा दिया
- 12:10कि इसके खो जाने से कुछ नहीं होता।
- 12:14और तुम बेफिक्र हो गए, तुमने इसे खो जाने दिया।
- 12:26पश्चिम के वैज्ञानिक कैसे इट्स नेचुरल और तुमने इस बात का बड़ा
- 12:37मजाक उड़ाया? मौज लग गई।
- 12:43मौज वोज नहीं है। असल में जिन जिन चीजों को तुम ऐश
- 12:51कहते हो, मौज कहते हो, संत की दृष्टि में वो वो चीज़े विश है।
- 13:05तुम भोग को मोज कहते हो संत भोग को विष कहते हैं।
- 13:12संत कहती हैं, भोगो लेकिन भोग से मिलेगा दुख है, विश भोग कर देख
- 13:22जरूर लेना चाहिए। नहीं तो आत्म अतरृप्त रह जा के
- 13:38दिन भर रात जिसकी तलाश में हो, सब जगह कंगाल ही लेना चाहिए।
- 13:48ज्यादा अच्छा है। सारी दुनिया को हम लो, कहीं चैन
- 13:57आए जो जो तुम्हें ऐसे स्थल लगते हैं देखने को ओके दर्शनीय हैं जाओ
- 14:15और आखिर में छज्जु कहते हैं जो सुख छज्जु दे चौबा रे।
- 14:20ना बल्ख ना बुखार है, इसका मतलब तो कुछ और था।
- 14:27खैर आपने कुछ और समज लिया। छज्जू का चुब्बारा सच घंटा।
- 14:45ऊंचे से ऊंचा शतल शरीर का सच खंडहर वहाँ जो सुख मिला कहीं नहीं
- 14:55मिला। नख से सीखा तक न बालक, न बुखार
- 15:03है। दर्शनीय सतल पर्यटन स्थल।
- 15:08सभी घूम लिए सुख नहीं मिला तो छज्जू कहते हैं सुख तो वही
- 15:21मिलेगा, टूटी हुई चारपाई हो। लेकिन तुम्हारा ध्यान तुम उसके
- 15:36आगोश से घरे हो, उस मस्ती के आलम में खो गए हो।
- 15:47शांति का साम्राज्य हो, कहीं कोई बेचैनी ना हो, वध करना हो, कोई
- 16:02तड़पन ना हो। दुनिया कहाँ भटक गई है तुमने कहाँ
- 16:16नहीं ढूंढा मिला नहीं बात अलग है क्योंकि वहाँ था नहीं।
- 16:32और देखते ही देखते हैं संतों की संख्याएँ रोज़ बढ़ जाती हैं।
- 16:42भाई किस्मत तो आजमानी चाहिए ना। मेरे पास रिकॉर्डिंग्स आ जाती
- 17:03हैं। कई बार मैं गाता हूँ तो उसके सुर
- 17:12में वो भी गाना चाहता हूँ और गा कर मेरे पास भेज देते हैं और
- 17:19रिकॉर्डिंग मैं सुनता हूँ। बस कुछ कहता नहीं उनसे क्या तुम
- 17:35गाने का मन तो होता है गाने का मन किसका नहीं होता?
- 17:42सुख में जाने का मन तो तुम्हारा भी है।
- 17:49लेकिन जब ब्रह्मचर्य की बात आती है तो तुम कहते हो कि पाश्चात्य
- 17:53हो साइंटिस्ट डॉक्टर्स तो फिर उनकी बात मान लो न तुम्हारी
- 18:04गर्दन। किसने पकड़ी तो मैं स्वतंत्र हूँ।
- 18:24पूछा है कि कोई हमारे भारतवर्ष में आदि सनातन ऐसा कोई दुष्टांत
- 18:40आपकी नजर में है? जो पति पत्नी संग रहे है और मिरर
- 18:51न किया हो बिल्कुल है। बरा पड़ा है सनातन का इतिहास।
- 19:05लेकिन तुम जो खंगालना चाहते हो वो खंगाल लेते हो।
- 19:12मोबाइल में कितना कुछ होता है? तुम जो खंगालना चाहते हो वो खंगाल
- 19:18लेते हो जिसने भजन सुनना भजन सुन लेता है।
- 19:24जिसमें पोर्न देखना पोर्न देख लेता है।
- 19:28दोनों हैं उसमें ऐसे ही यह संसार हैं।
- 19:43तुमने उदाहरण मांगा उदाहरण तो बहुत हैं।
- 19:48कौन कौन से उदाहरण तुम? ज़्यादा दूर न जाए, ज़्यादा दूर न
- 20:03जाए तो रामकृष्णा परम है शादीशुदा शारदा तुमने क्वेश्चन पूछा?
- 20:18शारदा उसकी धर्मपत्नी का नाम था इकट्ठे रहे शारदा गरवार का काम
- 20:40करती है रामसिंह परमहंस। ईश्वर की बातों में संलग्न रहता
- 20:50है। ऊपर ऊपर से देखने में तुम्हें
- 20:56लगेगा ये भी क्या खाक जीना हुआ क्या जख्म मारते होंगे?
- 21:06पैसे ही गड़बड़ हो जाती है जब तुम किसी को आइकॉन मान लेते हो, अब
- 21:17आइकॉन मानना तो तुम्हारी इच्छा है।
- 21:23तुमने पश्चिम के वैज्ञानिक को दृष्टांत मार लिया की वो ठीक है,
- 21:35लेकिन राम कृष्ण से चूक गए। फिर ये बातें तुम्हें उलझन भरी
- 21:39लगेंगी। तुम्हारी बात तो छोड़ो, तुम यूएसए
- 21:50से आई हो, वहाँ की नागरिक भी हो। लेकिन मैं तुम्हें बहुत बचपन से
- 22:04जानता हूँ, वहाँ जाकर सब बदल गया है वहाँ
- 22:27संस्कार कुछ और है मेरे भाई बहन कहा करते हैं।
- 22:37कि जब भारत में थे, एक परिवार में रहते थे, बड़े प्रेम से घनिष्ठ
- 22:48प्रेम था। विपत्ति एक के ऊपर आती भागते सब
- 22:58है आज अपनी अपनी डफली, अपना अपना राख तो मुझसे कहते हैं अमेरिका
- 23:09में आके भईया खून सफेद हो जाता है?
- 23:17बस इस बात में सभी बातें आ जाती हैं।
- 23:24अमेरिका में आके खून सफेद हो जाता है, डालरों की चमक अपना रंग
- 23:33दिखाते हैं। खून लाल नहीं रहता
- 23:49और लाली के बिना मजाक लाली मेरे लाल की।
- 24:00जीत देखूं तित लाल लाली देखन में जली, मैं भी हो गई लाल।
- 24:20हम प्रसंग के ऊपर ही हैं। आज तो सबसे पहला शक्ति का व्यय
- 24:35सिर्फ यही नहीं जो तुम कहते हो। मात्र काम वासना से शक्ति व्यय
- 24:45नहीं होती मात्र ये जो तुम चार 6 घंटे आंखें गढ़ाई।
- 24:58मोबाइल देखते हो सबसे बड़ा दुश्मन है तुम्हारा ब्रह्मचर्य का साधन
- 25:07है तुम्हारा बेकार अगर तुमने 6 घंटे मोबाइल देख लिया।
- 25:21अब कल ही एक बहुत ही निकटस शिष्य का वक्तव्य आया बाबा मुझे
- 25:39पाकिस्तानी स्किट देखना बहुत अच्छा लगता है, उलझ जाती हूँ
- 25:45पाकिस्तानी स्किट्स? अच्छे भी बहुत होते हैं।
- 25:58स्कार्स ही है कि पाकिस्तानी स्कर्ट्स में जो मज़ा है और
- 26:06तुम्हारे भी करना है। तुम्हें पता नहीं है यार कौन सी
- 26:12चीज़? तुम्हारे अचेतन पर क्या इफेक्ट
- 26:15डालेगी? शुरू?
- 26:24शुरू में थोड़ा मुश्किल लगेगा। संस्कार बन गया वक्त पे ज्यादा एक
- 26:37स्किट का टाइम आ गया। देखें, मैंने तुम्हें एक फार्मूला
- 26:44बताया, उसको प्रत्येक चीज़ के लिए आजमा लेना कुछ भी हो।
- 26:56भीतर से मन में कुछ भी आया। कुछ भी आये उसे आने देना, वह आएगा
- 27:11और कुछ देर रुकेगा चला जायेगा। सीधा सीधा फॉर्मूला तुम्हें आज तक
- 27:18समझ नहीं आया कमाल की बात है, आजमा के तो देखो गड़बड़ कहाँ होती
- 27:29है तुम आजमा के तो देखो। गडबड होती है जब तुम उन पर विचार
- 27:42हूँ वासनाए हो, इच्छा हो तो नफरत हो।
- 27:52जब तुम उसके पीछे हो लेते हो, तुम तटस्थ नहीं रहते।
- 28:00अपने आप बड़ी से बड़ी साधना ये है इसमें चूक होगे।
- 28:11मुझे पता है। बार बार चूकोगे और बार बार
- 28:18तुम्हें होश संभालना पड़ेगा। घबराना मत इतनी बार नाकाम हो गए।
- 28:30एक बार नाकाम होगे सोमवार 1000 बार नाकाम होगे, लेकिन होश को
- 28:37जगाना भूल मत। मन का काम है भटकना।
- 28:47मन का काम है नए नए दृश्य पैदा करना वह अपना काम करेगा।
- 28:55सृष्टि सारी सृष्टि अपना अपना काम करती है, मन भी अपना काम करता है,
- 29:03वक्त पे चाँद निकलता है। वक्त पे सूर्य निकलता है और क्षिप
- 29:09हो जाता है तारे उधा हो जाते हैं, वक्त पे सब होता है ईश्वर की
- 29:19सृष्टि लेकिन। लोग हैं कि व्यर्थ की बातों के
- 29:29ऊपर शक्ति बर्बाद करते रहते हैं। मैं तुम्हें एक बात बताऊँ, हमें
- 29:41तो बोलना पड़ता है लेकिन बोलने की बिमारी नहीं होनी चाहिए।
- 29:51तुम जब एकांत में बैठे होते हो तो तुम्हें बोलने की बिमारी है।
- 30:01मैंने बहुत से व्यक्ति देखे, सड़क के ऊपर चलते बोलते रहते हैं।
- 30:07वो हिसाब किताब करते रहते हैं, किसी के पास मिल नहीं रहे हैं,
- 30:13अभी से हिसाब कर रहे हैं। ये कहूंगा वो कहूंगा ये बोलेंगे
- 30:17तो ये कहूंगा तुम देखना हाओ भाव सिर्फ दिमाग में नहीं चलते, जो
- 30:24थोड़ा ज्यादा पागल हो जाते हैं। वो इशारे भी करने लग जाते।
- 30:31हास पांव मारेंगे सिर झटकेंगे आंख मिच खाएंगे थोबड़ा इधर उधर करेंगे
- 30:41तुम देखना ज़रा चलते रहो। ये क्या है?
- 30:49भीतर के विचारों के साथ तुम चिपक गए हो एकाकारों का बड़ी सरल बातें
- 30:58मैंने आपको बताया भूल जाते हो। मिरेकल के अंतिम प्रवचन पे कमेंट
- 31:14आया के बाबा एक बार दोहरा दो जो मुख्य मुख्य चीजें हैं ध्यान के
- 31:19बारे में क्रिया योग के बारे में। योग निद्रा के बारे में, भोजन के
- 31:28बारे में और विशेष चीजों के बारे में जिससे कि हम अपने अंत में
- 31:34पहुँच सकें जहाँ आनंद ही आनंद है। ठीक है, प्रश्न देखूंगा, लेकिन जो
- 31:53बात मैं बतानी चला हूँ बोलने में भी शक्ति व्यय होती है।
- 32:04देखने में भी शक्ति व्यय होती है। सभी इन्द्रियों से शक्ति व्यय
- 32:12होती है। अब तो मैं और बात बता दूँ।
- 32:20ये इंद्रीया शक्ति व्यय करने के लिए ही है।
- 32:24इंद्रीया शक्तियां को संग्रहित नहीं करते, शक्ति को संग्रहित
- 32:31करती है, तुम्हारी भीतर की प्रणाली, डाइजेस्टिव सिस्टम
- 32:38मेटाबोलिज्म। कैटाबोलिस एनाबोलिस ये चीजें
- 32:46संग्रहित करती हैं इंद्रीणा शक्ति को खर्च करते हैं, विचार आता है,
- 32:58शक्ति खर्च होती है। विकार आता है, शक्ति खर्च होती
- 33:04है। इन सबसे शक्ति खराब होती है,
- 33:11बोलने से भी खराब होती है। पूछा है ब्रह्मचर्य बाकी तो ठीक
- 33:25कर लेंगे, जोड़ेंगे भी नहीं। बहुत से लोग हैं, जिनके पास
- 33:30जुड़ता ही नहीं, सारी उम्र जोड़ने में लगे रहते हैं, लेकिन जुड़ता।
- 33:36नहीं। झूठ बोलना पड़ता है, चाहे अंचाहे
- 33:51हिंसा हो जाती है और नहीं तो चलते चलते पांव के नीचे कीड़ी आ जाती
- 33:58है। हिंसा तो वैसे भी हो जाती।
- 34:04हम बीमार हो जाते हैं, डॉक्टर हमें इन्जेक्शन देता है,
- 34:09एंटीबायोटिक्स देता है। एंटीबायोटिक्स क्या होती है?
- 34:15भीतर के बिमारी के कीटाणुओं को बैक्टीरिया को मार देना, ये भी तो
- 34:20इंसान है। तुम्हें पता ही नहीं चलता, तुम
- 34:26अपने आप को जैन मनी समझे बैठो। भीतर जंग चल रहा है महाभारत का
- 34:37तुमने एंटीबायोटिक से ले लिए हैं। तो एंटीबायोटिक्स, बैक्टीरियल,
- 34:43फंगल इनको मारते हैं। तुम्हें पता नहीं तुम अपने हिसाब
- 34:52से तो बड़े अहिंसकों तख्ती लिए बैठे हो।
- 34:56अहिंसा परमा धर्मः। लेकिन जो दवा खाली तुमने उसका
- 35:07इफेक्ट तुम्हें नहीं पता कि तुम्हारे भीतर के तंतू वो दवा मार
- 35:12रही है और अगर तंतुओं को न मरोगे। वो तुम्हारा शरीर मर जाएगा
- 35:24तुम्हारा शरीर एक कुरुक्षेत्र का मैदान है, तुम आँख भी झपकते हो।
- 35:35तो भी कुछ बैक्टीरिया का हनन हो जाता है।
- 35:40मैं बोलता हूँ, न जाने कितने बैक्टीरिया से मर जाता और मैं
- 35:46जानता हूँ इसलिए उतना बोलो जितनी आवश्यकता है।
- 36:02मौन, मौन होना सब प्रकार से लाभप्रद है।
- 36:09शक्ति बची जाती है वो बैक्टीरिया जिनके लिए हमारी जीवा उलट पुलट
- 36:18होती और उनको मार देती है इतने। इतने सूक्ष्म उनके लिए सुमेरु
- 36:27पर्वत का काम करती है हमारी जीवा लेकिन फिर भी हम बोलते हैं।
- 36:42क्या करें वृहद कामों को करने के लिए शुद्र चीजों का त्याग बलि
- 36:58देनी पड़ती है। यही कहा था अल्लाह को प्यारी है
- 37:12कुर्बानी लेकिन तुमने वृहद चीजों की जीवन की कुर्बानी देना शुरू कर
- 37:20दिया एक इल्ल्यूसन के लिए। एक भ्रम को मिटाने के लिए मांगा
- 37:30था भ्रम का निवारण मार दिया तुमने बकरे का बच्चा मेभना।
- 37:43समझदारी की बात तो न हुई, ये तो मुर्दा की बातें तुमने कहा बाकी
- 37:59तो कर लेंगे बाकी भी नहीं कर पाओगे।
- 38:06सबसे मुश्किल तो सत्य है। इसलिए प्रथम कदम पे रखा सभी ने,
- 38:17सभी सन्तों ने सत्य को प्रथम कदम पे रखा एकुंकार सत्य न।
- 38:33वह एक है, वो सत्य है, पतंजलि भी कहते हैं।
- 38:39सत्य, अहिंसा, महावीर भी बौद्ध भी और सभी संत कहते हैं।
- 38:49शक्ति के बिना नहीं मिलेगा और सत्य से शुरू करके सत्य के पास
- 38:54जाना होगा। थोड़ी बात टिढ़ी है, समझा आ
- 39:02जाएगी, आज नहीं। कभी समझा आ जाएगी सत्य से शुरू
- 39:12करना है फौके सत्य से जिसका कोई अर्थ न जिन शब्दों से तुम लड़ाई
- 39:21झगड़े करते हो, मारपीट कर देते हो।
- 39:27अदालतों के चक्कर लगाते हो मेरी तो मान हानि करते लौ 1000 करोड़
- 39:36रुपया तुम्हारे शरीर पे ₹1000 का माल ले 1000 पीसे का माल ले?
- 39:46बल्कि जब मर जाता है तो इसको फूंकने के लिए पैसे खर्च होते
- 39:52हैं। ऐसी है इसकी वास्तविकता, लेकिन
- 40:01तुम अदालतों में घसीट लेते हो आई विल सी।
- 40:05इन दी कोर्ट कोर्ट में देख लो भाई वहाँ कौन से समझदार लोग बैठे हैं?
- 40:15वहाँ भी उल्लू भी बैठे हैं, उन्हें भी नहीं पता सत्य क्या है?
- 40:26न्याय का खाक करेंगे, फैसला कर लें।
- 40:29इतना ही बहुत है ये मत भूल जाना। कि बड़े ओहदों पर बैठे हुए लोग
- 40:42सत्य को जानते हैं। बड़े ओहदों पर बैठे हुए लोग सत्य
- 40:48को कम जानते हैं। अनपढ़ लोग ज्यादा जानते हैं, कबीर
- 40:53कबीर पूर्ण जानते हैं और अनपढ़ हैं कागज का।
- 41:04नानक पाठशाला में जाते हैं, लेकिन कितनी देर टिक पाते हैं तो
- 41:12बिल्कुल मत मान लेना। अब ये न्यायाधीश की कुर्सी पे
- 41:20बैठे हुए लोग मेरे ऊपर मान मानहानि का केस कर सकते हैं।
- 41:26लेकिन उन मूडों को ये नहीं पता कि जिसका मानहानि हुआ वो तो पदार्थों
- 41:34का बना है, तुम्हारा कहाँ है? तुमने मान रखा है कि मेरा है, मैं
- 41:42हूँ, इसमें मेरा कसूर थोड़ी है। सत्य का फैसला करने वाले
- 41:55न्यायाधीशों क्या तुम्हें पता है कि सत्य का है?
- 42:03जीस दिन तुम्हें पता चल गया कि सत्य क्या है उस दिन होगा न्याय,
- 42:12उससे पहले होंगे डिसीजंस फैसले। एक बात बताऊँ तुम्हे ये जो
- 42:28अदालतों में मुकदमे चलते हैं 99% मुकदमे इन में गलत होते हैं,
- 42:35जिनका कोई वास्तविकार्थ नहीं होता और मैंने कम कह दिया है।
- 42:44सही तो ये कि शायद शायद शायद प्वाइंट 01% मुकदमा से ही होता
- 42:56होगा। बाकी सब कोरी बकवास और इन बकवासों
- 43:07को सॉल्व करने के लिए बैठे हैं। कुर्सियों के परिणयदेश इनको खुद
- 43:18को शक्ति का पता नहीं। तुम कहते हो सत्य तो हम साधेंगे,
- 43:26बहुत मुश्किल है सत्य बोलने से शुरू करना है, झूठ को नकार देना
- 43:36बड़ा मुश्किल होता है। हम न्याय को नकारते चले जाते हैं।
- 43:52न्याय तभी होता है जब तुम सत्य का निचोड़ नकार लेते हो।
- 43:59सत्य का निचोड़ तुम निकाल नहीं पाते हो उसका कारण है।
- 44:05उसका कारण है तुम तुम्हारी अपनी कमजोरियां तुम्हारी कंपकपाहट
- 44:15तुमने अपने आप को जो माना भूकंप होता है अगर ये फैसला दे दिया।
- 44:24तो इससे यह हो जाएगा। इससे वो हो जाएगा जिसके विरुद्ध
- 44:28फैसला दिया हो। वह ऐसा कर देगा।
- 44:32टांगड़ी तोड़ देगा अचीतन मन में हज़ारों हज़ारों शंकाएं होती हैं।
- 44:45तुम समझते हो न्यायाधीश समझते का मुक्त हो के फैसला देते हो, तुम
- 44:53अपने मन के भीतर कभी गरे मैं कहता हूँ प्रत्येक न्यायाधीश को या
- 45:03प्रतीक। उच्च पदस्थ व्यक्ति को न्यायाधीश
- 45:10बनने से पहले न्यायाधीश बनना तो बहुत मुश्किल है।
- 45:13परमात्मा की बराबरी है। उच्च पदस्थ लोगों को सबसे पहले
- 45:22जानना चाहिए कि वो है कौन? उनसे पाप नहीं होगा, फिर जो होगा
- 45:33वो कृष्ण की तरह होगा। बाद में तो कृष्ण ने अभी किया
- 45:3740,00,000 लोगों को और भगवान का हेला।
- 45:46राज़ पूछे जाते हैं। बट राम ने भी किया, सीधे सीधे भी
- 45:57किया, पीठ के पीछे से भी किया। क्यों?
- 46:03धर्म संस्थापना अस्थाई। सत्य को स्थापित करने के लिए सत्य
- 46:22बोलने से शुरू करना होगा, जो सत्य है वास्तव में वहाँ तक जाना होगा।
- 46:41मैं नहीं कहता कि सत्य बोलना पाप हैर शुरू यहीं से करना होगा।
- 46:49पहली पड़ाव यही है पहली सीढ़ी का पहला पड़ाव यही है धीरे धीरे धीरे
- 46:56धीरे। बाकी सीढ़ियों तुम्हें और फिर छत
- 47:02आ जाएगी। सत्य बोलने से शुरू करो, सत्य
- 47:08क्या है वहाँ तक तुम पहुँच जाओगे सीधा सीधा सा रास्ता है कोई
- 47:14गड़बड़ घोटाला यहाँ है नहीं। तुम चूक जाते हो अहिंसा पस्ते तुम
- 47:28तो अपने आप से चोरी रखने का प्रयास करते हो, दूसरों से चोरी
- 47:33रखते ही रखते हो। बहुत से मूर्ख लोग अपने आप से भी
- 47:39चोरी रखने का प्रयास करते हैं। ₹2 इस गोजे में डाल लेते हैं, दो
- 47:46इसमें डाल लेते हैं, दो अंदर जेब में डाल लेते हैं और जानते हैं और
- 47:54अपने आप से ही छुपाने का इज्जत करते हैं।
- 47:58ऐसे भी बुद्धू मैंने देखे अप्रिग्रह जोड़ो मत नहीं हो सकता
- 48:13कुछ न कुछ तो जोड़ो। और आज तो दुनिया ऐसी हो गई है एक
- 48:27चैनल छोड़ती है दूसरे चैनल क्योंकि मन खाली होना बर्दाश्त
- 48:37नहीं करता। किन्हीं भाग्यहीन क्षणों में एक
- 48:46शब्द बना दिया गया, पर उस शब्द ने विश्व को नर्क में धकेल दिया।
- 48:56वो शब्द क्या था? तो मैं जानकर हैरानी होगी मैं
- 49:05कहता हूँ कि नी भाग्यहीन लम्हों में वह शब्द उकेरे गए, वह
- 49:11तुम्हारे लीविस का काम करने लगे। आज भी वह शब्द क्या है?
- 49:19खाली मन शैतान का घर। तुम्हारे डॉक्टर भी तो मैं समझाती
- 49:31हूँ, बीज़ी रहो, व्यस्त रहो। डॉक्टर खुद भी व्यस्त रहते हैं।
- 49:42यहाँ मेरे शहर में एक डॉक्टर हार्ट का डॉक्टर जब कोई ग्राहक ना
- 49:49होता तो पुराने गीत सुनता छोटा सा टेलीविज़न रखा हुआ था मैन का,
- 49:58डॉक्टर सा। तुमसे खाली नहीं बैठा है ज्यादा
- 50:10मुझे कहने लगे पंडित जी खाली मन तो शैतान का घर होता है, कुछ ना
- 50:15कुछ वो करेगा। मैंने कहा किस और लू के पठे ने
- 50:21समझाया तुम्हें? खालिमन भगवान का घर होता है,
- 50:31फुर्सत के लम्हों में वह अमृत उतरता है और तुम्हें मालूम भी
- 50:41नहीं और कितनी बार तुम्हारे दर को चूमे हैं।
- 50:47कितनी बार उसने तुम्हारी दर प्याके दस्तक दी है?
- 50:56बिज़नेस का मतलब नो एंट्री तुम बीज़ी होते हो, वह समझ जाता है नो
- 51:04एंट्री वह वापस चला जाता है। द्वार को खटखटाने का कोई फायदा
- 51:14नहीं है। तुम्हे पता नहीं है, जीस परमात्मा
- 51:19को तुम ढूंढ़ते हो लाखों बार तुम्हारे द्वार को छूकर, चूमकर
- 51:26वापस लौटा है। क्यों क्योंकि तुम व्यस्त है तुम
- 51:36और कुछ नहीं तो तुम गीत ही सुन रहे थे।
- 51:50कुछ भी करने में शक्ति व्यय होती है।
- 51:54गीत सुनो जाप करो, पाठ करो, पूजा करो, कुछ भी करो शक्ति व्यय होगी।
- 52:08बेकारों में जाते हो शक्ति, वह होती है तुमने पूछा बेटी कोई
- 52:21उदाहरण बिल्कुल है रामकृष्णा परमहंस के धर्मपत्नी शारदा।
- 52:34उनकी कोई संतान भी नहीं हुई और उन्होंने कभी आपस में मिलन भी
- 52:40नहीं किया। मैं तुम्हें जानकर बड़ी हैरानी हो
- 52:44गयी। लोग मुझे सुनाने लग जाते हैं।
- 52:50आग और घी का तो मेल होता ही नहीं। ये देख लो मेल हो गया रामकृष्णा
- 53:03अभी हुए और ज्यादा पीछे जाओगे तो वाचस्पति मिश्र उधारणें बहुत हैं।
- 53:13लेकिन वो लोग गुप्त आए और गुप्त चले गए, गुप्त आए और लुप्त हो गए।
- 53:25उन्होंने कोई पादे चिन्ह भाग्य नहीं छोड़ा।
- 53:29क्यों? जो चाहिए था मिल के?
- 53:41हीरो पायो गांठ गठ आयो। फिर उपायों गांठ गठ आयो बार बार
- 54:05बाको क्यों खोलें? बार बार को क्यों खोले?
- 54:18मन मस्त हुआ तो क्यों बोले? मन मस्त हुआ तो क्यों बोले?
- 54:33जो मिल गया। बुध बहुत बोले, सारी उम्र बोलते
- 54:39करुणा और बुध के पुत्र राहुल। जब पहुंचे तो क्षण क्षण लगा गया।
- 54:54जरूरत क्या है? 99 में पैंट 99% कम बोल दिया।
- 55:07वैसे लोग पाते ही निकल लेते हैं। कोई कोई करोड़ों में एक रुकता है
- 55:23हमारे लिए तुम्हारे लिए कोई रुकता है कबीर कोई रुकता है नानक इसलिए
- 55:32वो पूछे जाते है। कोई राम रुकता है, कोई कृष्ण
- 55:40रुकता है, बाकी चले जाते हैं बार बार बा को क्यों खोल रहा है गांठ
- 55:57में गठियालो? मिल तो गया, जिसकी तलाश थी अभी तो
- 56:10तुम्हे तलाश है सर। सारी उम्र बड़ी प्रेमपूर्वक बताई।
- 56:21तुम्हारी वासनाओं से कहीं उच्चतम श्रेणी होती है।
- 56:27प्रेम की ये बात अलग है कि तुम्हारे जीवन में उसकी एक झलक
- 56:34कभी आती है। और जो झलक कभी आती नहीं उसको
- 56:47निकालना ही पड़ता है। फिर तर्क देने पड़ते हैं अक्शॅन
- 57:00का रिएक्शन होता है। वैज्ञानिक भी कहते हैं, संत भी
- 57:04कहते हैं। लेकिन चार वाक्य नहीं मानते नहीं
- 57:11होता। रिणम, कृतु, यदा जीवित, सुखी,
- 57:17जीवित बस में भूत से देहस्य पुनः आगमनम कुत्ता।
- 57:24बस कर्ज ले लो, घी पी लो वापस करने वाला भी मर जाएगा, ऋण देने
- 57:35वाला भी मर जाएगा। कौन आया है, कब नहीं आया उस रूप
- 57:41में कभी नहीं आया। तर्क बढ़िया तार्किक खोपड़ियों को
- 57:48जचेगा इसलिए आचार्यों की बातें बढ़ी जाती है क्योंकि तर्किक होती
- 57:54है कोई काम की बात तो इन्हें पता नहीं है काम की बात तो तभी पता
- 58:02चलेगी उस दिन। जीस दिन ये उस स्थल पर पहुँचेंगे
- 58:05जहाँ कृष्ण उससे पहले तो जीवों की लपलप है कितनी ही की है जो।
- 58:28इन्हें कुछ पता नहीं गीता का व्याख्यान देते है।
- 58:37फिर व्याख्यान देते हो तो मीडिया में प्रसारित करने की आवश्यकता
- 58:43क्या है? करुणा वश?
- 58:47कि प्रलोभन वश ये विचारों को खुद भी नहीं पता है।
- 59:06और फिर जब वह उस स्तर पर गए नहीं जब चारवाक ने ये जाना नहीं कि
- 59:17जहाँ प्रत्येक कर्म का प्रतिकर्म होता है एवरी एक्शन देर इस निकट
- 59:22अपोज़िट एक्शन। तो वो कहेगा नहीं कोई लेना देना
- 59:26नहीं होता, मौज करो खाओ, पीओ आनंद करो न वापस न रे लेने वाला, न रे
- 59:34न देने वाला कोई नहीं बचता खाक हो जाता है बस हम भूत से दे हस से
- 59:40पुनर आग में नमक होता फिर कभी आते देखा उसे।
- 59:44बिल्कुल नहीं आएगा। ठीक है तो मेरी बात तर्क बड़ा
- 59:48उजायस है और तर्कों के आधार पर ही तुम मान लेते हो और तर्क सत्य
- 1:00:05नहीं होते। तर्क शादी के होते हैं, सत्य नहीं
- 1:00:12होते हैं, सत्य होता है, अनुभव अनुभव में ये ले जा नहीं सकेंगे,
- 1:00:23न सद्गुरु ले जा सकेगा। ना आचार्य ये तर्कों से ही काम
- 1:00:30चलते हैं। क्या करें मजबूर और तुम्हारी
- 1:00:37अच्छी पड़ती है क्योंकि तुम बनना चाहते हो आज तुम बड़ी नौकरी।
- 1:00:44तो मैं हाथ में डंडा उठाके और कमरान बनना चाहती हूँ, तुम्हारी
- 1:00:50बड़ी पटेगी। कैश जंगल में अकेला है, मुझे जाने
- 1:00:56दो, खूब गुजरेगी, मिल बैठेंगे दीवाने दो।
- 1:01:04तुम्हारी बड़ी बढ़ती है उनके साथ जीस तत्व को जाना नहीं है, उस
- 1:01:16तत्व का व्याख्यान इसलिए मैं कहता हूँ इन लोगों को।
- 1:01:28इनका अंत बड़ा भयानक होगा। सब बना लेंगे, काम कुछ भी ना आएगा
- 1:01:41और जो कोई कुछ भी नहीं बनाते। उनके जो कमाते हैं, सब काम पड़ता
- 1:01:48है, थोड़े गहरे शब्द हैं, बार बार सुन लेना,
- 1:02:06लिव इन में रहो, ये नहीं कहते के हम कायर हैं।
- 1:02:15हम अज्ञानी हैं, बंधन क्या है ये जान नहीं पाए, लेकिन शो तो यही
- 1:02:26करेंगे कि हम जान गए, हम वो हैं जिनको बंधन बांधता नहीं।
- 1:02:33शस्त्र काटता नहीं, अग्नि चलाते हैं वचन बोरेंगे कृष्ण के अर्थ
- 1:02:40करेंगे स्वयं के अर्थ कृष्ण के कैसे कर सकते हैं?
- 1:02:47अर्थ कृष्ण के उस दिन होंगे जीस दिन कृष्ण के तर से।
- 1:02:51जहाँ वो बोले वहाँ पर पहुँचेंगे स्थिति परज्ञ हो जाएंगे अब उसका
- 1:03:00तो नाम सुना है वहाँ का लुत्फ तक कभी नहीं चुका।
- 1:03:12ऋण की वाणी से स्पष्ट लगता है तर्क में अपनी आप एक दुर्गंध होती
- 1:03:21है अनुभव में अपने आप एक सुगंध होती है।
- 1:03:30अनुभव तो में मोह लेता है, अनुभव तो में भीतर खिसका लेता है, खेच
- 1:03:36लेता है, चुम्ब की तरह तर्क खोपड़ी तक सीमित रहता है, न्यूरोस
- 1:03:44को भर देता है और कुछ नहीं करता, हृदय में भी नहीं उतरता।
- 1:03:52और तुम चाहते हो क्योंकि जैसे ही अचार हो, वैसे ही तुम हो इसलिए पट
- 1:04:00दी है। बड़ी शारदा रामकृष्णा परमहंस सारी
- 1:04:10उम्र इकट्ठे रह है। शरीरों का कोई मतलब नहीं।
- 1:04:21दोनों के भीतर से आती हुई वह मासूम आसानी तरंगें।
- 1:04:32अगर माहौल को खुशनुमा न करेंगी तो और क्या करेगा?
- 1:04:37तुम्हारी अल्फाज़ तो खुशनुमा नहीं करते वो तो शोर है तुम ज़रा देखना
- 1:04:47प्रैक्टिकल करके देखना। दो कमरों में एक कमरे में ध्यान
- 1:04:53समुद्र में एक व्यक्ति को उठा देना ये प्रैक्टिकल करने जैसी
- 1:04:58चीज़ है और बगल के कमरे में एक व्यक्ति उठा देना जो जाप कर।
- 1:05:10और 24 घंटों के बाद दोनों कमरों में जाना है, तुम्हें फर्क पता चल
- 1:05:15जाएगा ये बात मैं अनुभव की करता हूँ जहाँ जॉब हो रहा था, वहाँ
- 1:05:25तुम्हें शोर मिलेगा, शांति नहीं मिलेंगे।
- 1:05:28जहाँ ध्यान हो रहा था वहाँ तो मैं शांति हो लेके मेरे पास यहाँ लोग
- 1:05:34आ जाते हैं, बाबा जाने को दिल नहीं करता और उससे पहले कभी आए
- 1:05:43नहीं हो प्रसंगदार आई। और जाने को जी नहीं करता।
- 1:05:55निशाने किस बात की है? मैं तो रोकता नहीं हूँ उन्हें मैं
- 1:06:01तो जाने को भी नहीं करता। लेकिन कुछ तरंगें हैं जिनकी पकड़
- 1:06:08में वो आ गए हैं, वो तरंगे उन्हें जाने नहीं देते।
- 1:06:17वो तरंगे उन्हें भीतर से पकड़ लेती हैं और उन्हीं तरंगों ने जो
- 1:06:24संत बैठा होता है। उसको जकड़ में लिया होता है, आगोश
- 1:06:30में लिया होता है, वो दिन भर रात एक स्थान पर इसलिए बैठ पाता है।
- 1:06:41उसे किसी ने दंडित नहीं किया। उसे किसी ने किसी प्रकार का अपराध
- 1:06:54के भीतर जेल नहीं की। कोई इसका खाना दाना नहीं रोका,
- 1:07:00लेकिन वह मस्त है। और मस्ती में जो मिलता है वह सब
- 1:07:08जरूरतों को पूरा कर देता है। यही हुआ विवेकानंद के पास
- 1:07:20विवेकानंद गए। माता के पास राम किशन कहने लगे
- 1:07:23माँ आई है, जा के मांगल है। भी पन्नता हे पिता मर गया था सारा
- 1:07:30बोझा नरेंद्र के ऊपर आ गया जा मांग ले भीतर गया माँ कहने लगी
- 1:07:38बोलो पुत्र क्या माँ मुझे शक्ति दे, मुझे भक्ति दे, मुझे मुक्ति
- 1:07:46दे? तथा अस्त पुत्र मांगने तो कुछ हो
- 1:07:50रहा था नहीं माता और क्या होता है?
- 1:07:55शक्ति मुक्ति भक्ति चला गया। रामकृष्णा ने माथे पर हाथ मारा,
- 1:08:03जानता था नहीं मांग पाएगा। वहाँ जाकर कौन मांग पाया है?
- 1:08:12वहाँ जाकर कोई मांग पाया है? अब तो मैं तो यह कोई नहीं कहता।
- 1:08:19वह ऐसा स्थल है जहाँ जाकर सब मांगें समाप्त हो जाती हैं।
- 1:08:24सब जरूरतें समाप्त हो जाती हैं जहाँ लोग बूटियों की खोज करते
- 1:08:29हैं, जीसको खाने से भूख मच जाती है, प्यास मट जाती है लेकिन एक
- 1:08:35भीतर हमारी तल है जहाँ जाने से ना भूख लगती है, ना प्यास लगती है।
- 1:08:42और उसका जीता जागता उदाहरण में बैठा हूँ।
- 1:08:53बस थोड़ा सा खा लेता हूँ, शरीर जल जाता है, इतने से डॉक्टर भी हैरान
- 1:09:00हैं। घर वाली परीक्षा।
- 1:09:08और इतना बोलता हूँ और इतनी गहरी बातें बोलता हूँ, शक्ति नहीं
- 1:09:14व्यर्थ होती। इसमें बहुत शक्ति व्यर्थ होती है
- 1:09:19लेकिन तुम्हें नहीं पता कई शक्ति आती कहाँ से?
- 1:09:27यह व्यर्थ होती ही नहीं, इससे ज्यादा पूर्ति होती रहती है।
- 1:09:35जिसने बलवाना है, वो शक्तिपुंज है, ओम्निपोटेंट है।
- 1:09:42बराबर है शक्ति का सर्वशक्तिमान्य उसके घर में शक्ति की कोई कमी जब
- 1:09:50उससे संबंध बन गया तो अन्य शक्ति की आवश्यकता क्या है?
- 1:09:58नई शक्ति की कमी है। ना चेतना की कमी है इसलिए हम उसको
- 1:10:06सत्य चित आनंद कहते हैं। ना आनंद की कमी है, आनंद की कमी
- 1:10:15नहीं इसलिए भागता नहीं हो गया। उसको अपने भीतर से ही मिल गया।
- 1:10:25तुम अभी बाहर तलाश रहे हो जब भी मिलेगा याद रखना तुम्हें मिलेगा
- 1:10:34मिलेगा मिलेगा भीतर किसी भी शर्त के शस्त्र को खंगालो।
- 1:10:43इसके अतिरिक्त कुछ नहीं मिलेगा। मिलेगा भीतर से तेरे सा है, वो है
- 1:11:01तुझ माहि। तेरे साहब हैं तुझे माहि बाहर
- 1:11:14नैना क्यों खोल बाहर नैना? क्यों खोले?
- 1:11:27मन मस्त हुआ तो क्या बोल मन मस्त हुआ तो क्या बोल?
- 1:11:48मुझे रो पूछ लेते हैं बाबा हमारे आने से आपको क्या दिक्कत आती है?
- 1:11:56मैंने कहा तुम्हारे आने से कोई दिक्कत नहीं आती।
- 1:12:00तुम ये जो बाहर से लासानी तिरंगों को ले आते हो, दिक्कत उससे आती
- 1:12:04है। तुम थोड़ा बाहर बैठ जावे को।
- 1:12:08ऊपर जाके बैठ जाया करो, एक घंटा 1 घंटे में सारा वातावरण में बिखर
- 1:12:13जाएगा फिर तुम यहाँ आ जाया करो, कोई परेशानी नहीं है।
- 1:12:24भगवान महावीर ने एक नियम बनाया था, मेरे पास यो बाहर से आए।
- 1:12:33दो घड़ी कर ये बाहर बैठ जाए, एक आसन था उसके ऊपर बैठ जाए।
- 1:12:37आज भी जैन धर्म में ये प्रयोग होता है।
- 1:12:41एक आसन पर जहाँ स्त्री बैठी है, आज तो स्त्री पुरुष में बट गई है
- 1:12:45बात लेकिन ऐसी बात नहीं थी। व्यवस्थाएँ बिगड़ती, बिगड़ती,
- 1:12:54बिगड़ती, बिगड़ती कुरु पहुँच जाती जहाँ कोई बैठी स्त्री वहाँ 24
- 1:13:03मिनट तक कोई न बैठे। ये व्यवस्था बिगड़ गयी।
- 1:13:09असल बाती के बाहर से आए। तुम देखना, यहाँ आकर बड़ी शांति
- 1:13:15महसूस करते हो क्यों करते हो? हर वक्त आसानी तरंगें यहाँ से
- 1:13:20निकल रही है। भीतर से वो शांति हर वक्त बाहर बह
- 1:13:25रही है, भर जाता है, दीवारें पी जाती हैं।
- 1:13:30और तुम जब बाहर से आते हो, तुम कहते हो बाबा, यहाँ तो बढ़िया
- 1:13:34आनंद है, क्या है जहाँ जाने को दिल नहीं करता?
- 1:13:38कुछ भी नहीं है यहाँ तुम भी ऐसा ही बना सकते हो क्या कमी है तुम
- 1:13:46में? एक नूरते सब बच जा कौन पड़े कौन
- 1:13:54मन्ते ऐसे ही तुम बैठ जाओ बाहर की तनंगों से बच जाओ, जब भी फुर्सत
- 1:14:03मिले, एकांत में बैठ जाओ। धीरे धीरे धीरे वो क्षेत्र चार्ज
- 1:14:13होने लगा इसलिए दशरथ ने समझदार से बड़े को उपभवन बनाया।
- 1:14:26पूजा रूम अलग होता है। पूजा रूम का मतलब क्या मंत्र
- 1:14:30क्यों बनाते हैं? वह तरंगें श्रद्धा युक्त होती
- 1:14:35हैं, दीवारें भी पी जाती हैं, मूर्ति भी पी जाती है।
- 1:14:41वहाँ की शोखटें वहाँ चों की प्रत्येक चीज़।
- 1:14:49उन तरंगों को पी जाती है और वहाँ जो जाता है श्रद्धा को लेकर जाता
- 1:14:57है। श्रद्धा निकलती है जब रोम से बाहर
- 1:15:05तो आसपास के क्षेत्र में फैल जाती है, संग्रही तो होती है।
- 1:15:12और जो भी कोई आता है श्रद्धा से भरा पूरा आता है।
- 1:15:19कितने लोग आए? जितना पुरातन मंत्र होगा, उतना ही
- 1:15:25आसानी तरंगों से भरा होगा। ये कारण था।
- 1:15:31मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा तुम घर में स्थान नहीं बना पाते तो
- 1:15:37सामुही का मंत्र बना लिया गया अगर घर में स्थान बना सको।
- 1:15:48तो सामूहिक मंत्र बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
- 1:15:52घर का कमरा तुम चार्ज कर सकते हो इसलिए मंदिरों में जा के
- 1:16:02गुरुद्वारों में जा के धार्मिक स्थलों में जा के चर्च में जा के
- 1:16:07मस्जिद में जा के तुम शांत हो जाते हो।
- 1:16:11तुम कहते हो यहाँ परमात्मा का वास है बस वो तरंगें जो तुम्हारे भीतर
- 1:16:20से निकलीं, वो परमात्मा से ही आईं।
- 1:16:26इसलिए तुम्हें इतना सुकून मिलता है वहाँ।
- 1:16:30सारी खेल तरंगों की वाचस्पृति मिश्रा जब जवान हुए तो
- 1:16:56माँ बाप ने कहा पुत्र शादी कर लो। अब तुम शादी की उम्र के योग्य हो
- 1:17:04गया? वाचस्पति मिश्रा एक ग्रंथ का टीका
- 1:17:12कर रहे थे। जो काम था उस वक्त का वही करना
- 1:17:16होता है। आज ग्रंथ नहीं लिखे जाते।
- 1:17:22फिर आज जो भी काम है कंप्यूटर चलाए जाते हैं तो उस वक्त ग्रन्थ
- 1:17:28लिखे जाते थे, लेकिन ऐसा नहीं है कि ग्रन्थ लिखते हुए ही ये काम हो
- 1:17:35सकता है। कोई भी फंक्शन निभाते हुए यह काम
- 1:17:42हो सकता है जो वाचस्पृति मिश्र ने किया।
- 1:17:47तुम कंप्यूटर भी चला सकते हो, तुम हथौड़ा भी चला सकते हो, तुम पत्थर
- 1:17:56भी कूट सकते हो। तुम दुकान पर भी बैठ सकते हो, तुम
- 1:18:00ऑफिस में बैठ सकते हो, तुम किसी भी पदवी पे हो।
- 1:18:06प्रत्येक व्यक्ति योग्य है तो ब्रह्मसूत्र का वाश्य लिख रहे थे।
- 1:18:17बहुत से व्यक्तियों को ये बात गले से नीचे उतरेगी नहीं या कहलों के
- 1:18:22वे उतारेंगे नहीं, वो ही बात जो देखा नहीं वो है नहीं।
- 1:18:36तो चार बार कहते हैं लेने देने का कोई सिस्टम नहीं है।
- 1:18:39इस जगत में खाओ, पीओ, मौज करो, उधारी उठा लो, शराब पी लो, घी पी
- 1:18:46लो, छुकाओ मत कोई नहीं मांगेगा। फिर कौन आया, किसने देखा, देखा तो
- 1:18:55वाकई किसी ने? जो मर गया वो फिर नहीं आया, लेकिन
- 1:19:01उस मूर्ख को क्या पता कि सदा से ही आते रहते हैं लोग?
- 1:19:16मार्कस कहता है परमात्मा नहीं है धर्म अफीम का नशा है, कुछ तो धर्म
- 1:19:25अफीम का नशा है, अभी कुछ तो बात होगी जो मार्कस जैसे समझदार
- 1:19:33व्यक्ति को यह बात बोलनी पड़ी। कुछ बिगडैर तरह के लोग पुजारी बन
- 1:19:44गए। ये बात भी रही होगी, लेकिन इसका
- 1:19:50अर्थ नहीं के मार्क्स? ने खोज लिया है कि वो नहीं खोजा,
- 1:19:58बोजा नहीं। मार्कस जो जानते हैं उसको
- 1:20:04इम्प्लिमेंट करने की चेष्टा करते हैं, कर नहीं पाते क्या करें कहाँ
- 1:20:11चला मार्कस वास। पिट गया लेकिन बस यही मानवता के
- 1:20:28भीतर एक कमी है जिसने लेन देन का सम्बन्ध नहीं देखा, वो कहता है कि
- 1:20:36उन्हें कुछ नहीं मोड़ना पड़ता। तुम खाओ, पियो मोज़ करो।
- 1:20:40इसलिए लोग दौड़ जाते हैं बाहर कर्ज उठाकर भाग जाओ भाई हमारी
- 1:20:51पंजाबियों में कहावत है कि चोर को खाते हुए मत देखो।
- 1:21:02चोर को पीटते हुए देखो जब पीटेंगे तो पता चलेगा फिर कहेंगे हमने तो
- 1:21:10इसी जन्म में कुछ नहीं किया। ऐसे कोई इसे घर में कुछ नहीं
- 1:21:15किया। घर बदल लिया।
- 1:21:18तो क्या कर्म भी बदल लिए? कर्म तो वही रहेंगे।
- 1:21:26क्षेत्र बदलने से कभी कर्म बदला करते है, तुम भी ऐसा ही करते हो,
- 1:21:32पाप की है। चलो कुंभ में स्नान कर ले बालक
- 1:21:38क्षेत्र बदलने से। पानी में स्नान करने से कभी पाप
- 1:21:44धुलें। पानी से पाप धुलने का फार्मूला
- 1:21:52क्या है? कहीं कोई तालमेल दिखता नहीं।
- 1:21:59और पानी से पाप धुलते बिन है देखिये मेरी एक बात ध्यान से समझ
- 1:22:04लीजिए, मैं रोज़ कहता हूँ, बुरा मत करो, किसी को दुख मत दो अगर दो
- 1:22:14तो ये समझ के दुख दो कि ये वापस आ जाएगा।
- 1:22:19मैं नहीं कहता कि तुम पाप न करो, मैं कहता हूँ करो लेकिन ये समझ के
- 1:22:24करो कि ये पाप तुम्हारे ऊपर वापस आएगा, किसी पे हुक्म चलाओ चलाओ
- 1:22:32लेकिन ये समझ के चलाओ। कि किसी दिन तुम भी दाबू होगे।
- 1:22:36इसके हुक्म के निशा, यह सब चीजें ये चक्कर की तरह संसार को चक्कर
- 1:22:44कहा जो आज ऊंचे तल पर है वो कल नीचे तल पर होगा ही होगा।
- 1:22:56जो आज नीचे तल पर है वो चक्र है क्योंकि वो ऊपर तल पर कभी आएगा।
- 1:23:02वक्त बदलता रहता है और वक्त सभी का आता है।
- 1:23:11जेड़ियाँ पिंगा जड़ना सामान नूना हेठा होना जो पिंगा होती है न
- 1:23:20झूलते हैं झूले आसमान को लग जाती हूँ, वो नीचे आती हैं नीचे आना ही
- 1:23:26पड़ता है। यह संसार एक चक्र है।
- 1:23:31कभी ऊपर भी आएगा, कभी नीचे भी जायेगा, लेकिन यह मत समझना कि सदा
- 1:23:38ही ऊपर रहेगा। यह सदा ही नीचा रहेगा।
- 1:23:42बस यही मोटिवेशन है। घोर पीड़ा के क्षणों में भूल मत
- 1:23:50जाना रात जीतने भी संगीत होगी सुबह उतने।
- 1:24:24सुबह तू निहिरंगी न गम न कर गम न कर घर है बादल।
- 1:24:43घने राम किसके रोके रुका है? सवेरा रात भर का है में है, माँ।
- 1:25:02अंधेरा आज ही ये चक्र ऊपर है, कल वो सिरा नीचे भी होगा।
- 1:25:16वक्त बदल जाता है और वक्त हरका आता है।
- 1:25:21घबराना। आज सर्कमस्टैंसेस तुम्हारे विपरीत
- 1:25:29डर मत जाना, मेरे इन शब्दों को याद रखना मानव आज विपरीत हैं
- 1:25:41दिशाएं आज हवाएं उलट बह रही हैं। आज तूफान बन गया है, लेकिन कल कल
- 1:25:51तुम्हारे पक्ष में भी आएगा। ये तूफान तुम्हारे पक्ष में भी
- 1:25:54चलेगा इसलिए हत उत्साहित मत होना, हौसला रखना।
- 1:26:08यह जो चक्र नीचे गया है, ऊपर भी आएगा।
- 1:26:13यही संसार का नियम है। इसलिए ऋषियों ने सन्तों ने इसे
- 1:26:18संसार चक्र कहा। बाचस्वती मिश्र कहने लगे, हाँ माँ
- 1:26:36पिताश्री, अगर तुम कहते हो शादी कर दो शादी करते क्या?
- 1:26:52ढई नवेली दो रन। तुम तो 1000 तर्की में लड़ते हो,
- 1:26:58मोतिया के फूल के आते हो, बालों को गूंथते हो, श्रृंगार सब हुआ
- 1:27:09लेकिन ब्याह के लिए किया घोड़ी से उतरा।
- 1:27:14तब गाड़ियां नहीं होती और जो ब्रह्मभाषी छोड़ के गया था उस
- 1:27:20विकरे को पूरा करना शुरू कर दिया। माँ बाप ने समझाया कि ब्रह्मभाषी
- 1:27:30लेकर आया है, समझने वाले आँखों का इशारा समझ लेते हैं।
- 1:27:45तुम परमाणु मांगती हो जब सोना होता कोई आता दीपक बजा जाता कोई
- 1:28:02आता जब भूख लगती वक्त होता। खाना परोस देता हाथ धुला जाता
- 1:28:15अंगूछा दे जाता हाथ पूछ लो ब्रह्माभाष फिर लिखने लग जाता, थक
- 1:28:24जाता सो जाता। कोई आता सुबह दीपक जला जाता, तुम
- 1:28:38इसको कहानी समझोगे लेकिन ये कहानी नहीं है।
- 1:28:44ये सत्य जीवन की कहानी है, 30 वर्ष विच गया है।
- 1:29:061 दिन ब्रह्मभाश्य पूर्ण हुआ। वह चस्पति मिश्र ने इति ब्रह्मभाष
- 1:29:22पूर्ण किया। ग्रंथ?
- 1:29:26रिलैक्सेशन आई है, ठंडी सांस भरी है, अब मुम्मशुगण जिज्ञासुगण इससे
- 1:29:39लाभ उठा सकेंगे। मार्ग के दर्शन प्राप्त कर
- 1:29:41सकेंगे। आराम का सांस लिया ही था, रात भी
- 1:29:48घनी हो चली थी। कोई आया दीपक को बजाने लगा।
- 1:30:01वाचस्पति मिश्र ने देखा। यह हाथ कुछ अजूबे से लगते हैं।
- 1:30:09कौन है यह? उसने हाथ पकड़ लिया।
- 1:30:12कौन हो तुम मेरे कमरे में क्या कर रही है?
- 1:30:24नाम था बागमती। बागमती ने चरण में पकड़ लिया है।
- 1:30:32स्वामी मैं आपकी अर्धांगन इतने वर्ष तक दीपक मैं ही चलाती रही
- 1:30:40बजाती रह। खाना मैं ही परोसती रही सुबह शाम
- 1:30:48सुबह वक्त पे दिया जला देते खाना परोसती थी शाम खाना परोसती थी
- 1:30:57दिया बजा देती मुझे पता था सोने का वक्त।
- 1:31:03माता ने बता दिया था कितना कितना वक्तबीत क्या नाम क्या है
- 1:31:13तुम्हारा, मेरा नाम है भामती। लाल चूड़ा पहने हुए आज भी नई
- 1:31:29नवेली दुल्हन की तरह हाथों में वो ही मेहंदी बालों में वो ही गजरा।
- 1:31:51वाचस्पति मिश्र की आँखें सजल हो उठ ऐसा त्याग 30 वर्ष तुमने आहट
- 1:32:13भी न होने दी। हमने भगवान बुद्ध को कहा तथा गत
- 1:32:18जैसे आए वैसे चले गए। उसका यही मतलब है भामती भी जैसे
- 1:32:25आई वैसे ही चली गई थी तथा गत का भी यही मतलब होता है।
- 1:32:37ये भारतवर्ष इस लिए इसको महान कहते हैं, ऐसी ऐसी महतआत्माएं
- 1:32:49यहाँ जन्मी बहुठा। वाचस्वति मशरब था बामती के चरम
- 1:33:01समझ के बावती ने रोका स्वामी। क्या कर रहे हैं मेरे मालिक को?
- 1:33:20यत्र नारीयस्त पूज्यन्त है नर्वसन्ति तत्र देवता जहाँ नारी
- 1:33:26की पूजा होती है, वहाँ देवता नवास करते हैं।
- 1:33:33हम अपने सिद्धांतों को भूल गए। दुष्ट मैकाले ने हमसे हमारी
- 1:33:41सभ्यता छीनी हमसे हमारी पद्धतियां छीननी आज बच्चे कॉन्वेंट के अंदर।
- 1:33:51डोनेशन दे के पढ़ते हैं, क्या खाक पढ़ते हैं?
- 1:34:02बाचास्पती मिश्र ने कहा, क्षमा करना मैं संकल्प ले चुका हूँ।
- 1:34:12इस ग्रंथ को सम्पूर्ण करते ही मैं वन गमन कर दूंगा।
- 1:34:16वन मैं निकल जाऊंगा, मेरे साथ चलना है, सुन सकती हो तुम मेरी
- 1:34:22सहचारिणी हो रुकूंगा। यही सीता ने किया और तो मैं कुछ
- 1:34:42नहीं कर सकता यह ग्रंथ सम्पूर्ण किया इसका नाम तुम्हारे नाम पे
- 1:34:48लिख देता हूँ। ब्रह्माष्य सूत्र आज भी है बागमती
- 1:34:59के नाम पे वाचस्पति मिश्र की धर्मपत्नी का नाम था माता पिता
- 1:35:09स्याज्ञा जी। बाबमती को साथ लेके वह चस्पति
- 1:35:13मिश्र वर्ण गम्भन करता है तुम पुष्टि हो उदाहरण कपोल कल्पना
- 1:35:23नहीं है लोकसभा राम को कृष्ण को कपोलकल्पना मानने।
- 1:35:34और मैं तुम्हें कहता हूँ तुम विश्वास तो मत करना, क्योंकि ऐसा
- 1:35:38ही है काम यहाँ सब ऐसे ही हैं। मैंने राम भी देखे, मैंने कृष्ण
- 1:35:47भी रखे। मैं उस जमाने में भी था।
- 1:35:53बहुत पुरानी रूप मैं कब का भटका, कब आजाद हुआ, कब का भटका?
- 1:36:09कब पता चला मैं हूँ कौन? मैंने पिछले प्रवचन में भी कहा
- 1:36:16मैंने बाबा से कहा बाबा तुमने संबोधि का दंड यह पूर्णमाक चुनि
- 1:36:27अश्वण के। बाबा कहते हैं ये बहुत शुभ तिथि
- 1:36:37होती है और जीतने भी संत हुए उन्होंने शुभ तिथियों के अंदर
- 1:36:44प्राण त्याग बेषम पिता ने भगवान महावीर तिथि पूछी।
- 1:36:50क्या तिथि, कौन सा नक्षत्र? ऐसे ही तो नहीं पूछी ये है शरद
- 1:37:01पूर्ण मकतन अब मैं क्या गुणगान करूँ उसका इस सुन जो प्राण त्याग
- 1:37:14देता है। तुम्हारे शास्त्र में बड़ा कुछ
- 1:37:17लिखा होगा या इल्यूश़न को त्याग देता है वह सदैव सदैव के लिए
- 1:37:27मुक्त हो जाता है। इसतन भगवान राम ने जल समाधि ली।
- 1:37:33संयोग का किरा? इस दिन शरद पूर्णिमा के दिन इसलिए
- 1:37:44यही दिन तुम्हारे लिए चुना युग तुम पहले हो गए थे, कुछ देर रुकना
- 1:37:52पड़ा सिर्फ। शरद पूर्णिमा के कारण शरद
- 1:37:58पूर्णिमा को चुना दो तीन छोटी छोटी बातें वीडियो
- 1:38:12बहुत लंबी हो गई है। करीब डेढ़ घंटे की हो गई है ऊपर
- 1:38:19हो गई है डेढ़ घंटे तुम सन पाओगे कि।
- 1:38:29अब तो कभी कभी आएँगे, सुन लिया करो आप बाहर का वातावरण तुम्हें
- 1:38:45उत्तेजित करता है वह भोजन हो तुम चाव में चूंग खाओगे वैसे ही हो
- 1:38:52जाओगे। उत्तेजित पदार्थों का सेवन करते
- 1:38:57हो। भीतर भी तो वही मास है उत्तेजित
- 1:39:01हो जाता है बाहर के दृश्यों से थोड़ा अपने आप को।
- 1:39:17बाहर का दृश्य शुद्ध करो, पर अपने मन में इन विचारों को मत लिखो जो
- 1:39:29कामो के विचार है ये पहली तकनीक उसके बाद तुम्हारा मन भटकेगा।
- 1:39:36जो देख चुकी हो पहले वो जब तुम बैठोगे वो तुम्हें तंग करेगा
- 1:39:41क्योंकि खाली मन शैतान का घर ऐसे होता है।
- 1:39:46खाली मन में जो भीतर अचेतन में भरा पड़ा है, वह चेतन में आना
- 1:39:50शुरू हो जाता है। इसे डॉक्टर्स लोग कहते हैं खाली
- 1:39:53मन शैतान का घर। ये शैतान नहीं है इनको बाहर
- 1:39:58निकलने दो या बाहर निकलने के लिए आए हैं अचेतन को खाली करने आए हैं
- 1:40:03तुम इनको दुश्मन मत समझो तुम सिर्फ इनको दृष्टा वापस देखते
- 1:40:07रहो, आने दो जाने दो बादलों की तरह आसमान में।
- 1:40:14निकल जाएंगे, 1 दिन खाली हो जाएगा तुम्हारा अचेतन भोजन शुद्ध लो,
- 1:40:25मिर्ची का सेवन न करो, नमक बिल्कुल कम लो, चीनी बिल्कुल कम
- 1:40:30लो। कि दो पॉइज़न है सफेद साल्ट एंड
- 1:40:36शुगर सफेद पॉइज़न कम से कम पत्र में प्रयोग करो और ज्यादा
- 1:40:54आवारागर्दी से बचो, कम से कम रखो। एक स्थान चुन लो जब तुम शांत होने
- 1:41:02के मूड में बैठना चाहते हो, वहाँ बैठो, वो स्थान चार्ज हो जायेगा
- 1:41:10फिर वो स्थान बैठते ही तुम्हें चार्ज कर देगा, वो तुम्हारा मंत्र
- 1:41:16हो जायेगा। शुभ क्रिया योग कर सारा शरीर रक्त
- 1:41:26शुद्ध हो जाएगा। कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा
- 1:41:33वातावरण में निष्कासित हो जाएगी। ऑक्सीजनेटेड हो जाएगा सर सर फिर
- 1:41:43ध्यान में बैठो ध्यान नथ्थिंग टु डू कुछ नहीं करना रिलैक्स होके
- 1:41:49बैठ जाओ जितना रिलैक्स हो सकते हो बैठो, आराम से बैठो।
- 1:41:55सुख आसन में बैठो, जीस आसन में बैठने से तुम सुविधा महसूस कर
- 1:42:00सको। सुखपूर्वक आनंद आए तो में बैठने
- 1:42:05में और अगर लेटने में आनंद आई तो लेट जाओ कोई बैन नहीं कोई रीढ़ की
- 1:42:11देनी रखनी है। रीढ़ की हड्डी का कोई प्रयोजन
- 1:42:15नहीं जब कुंडल नहीं जगेगी सब मार्ग से पता है इतना वेग होता है
- 1:42:25उसका चेतना का, वो तुम्हारी सीधी रीढ़ की हड्डी को नहीं देखेगा।
- 1:42:34वह चेतना है, उसका रस्ता पहले से ही तय तुमने नहीं बनाया, उस
- 1:42:42निराकार ने बनाया उस सर्जन हारी ने बनाया अपने आप चली जाएगी
- 1:42:50तुम्हें ऋण सिद्धि अप। उल्टी करने की जरूरत नहीं है।
- 1:42:57व्यायाम कर सकते हो, बाकी तो तुम्हारी इच्छा है शुद्ध खाना
- 1:43:01खाओ, सीनेट का खाना खाओ, घी की मात्रा रखो, खाने में नमक मिर्च
- 1:43:09मत खाओ। मिर्च तो बिलकुल ही ना कहो चारों
- 1:43:13प्रकार की मिर्च ना कहो ना सफेद ना काली, ना लाल, ना हरी कुछ ना
- 1:43:18कहो इसमें ये विटामिन होता, ये विटामिन होता कुछ नहीं होता,
- 1:43:22मैंने कुछ नहीं कहा, सब्जी ही नहीं खाई, बाकी तो छोड़ो।
- 1:43:33शुद्ध आहार शुद्ध व्यवहार अपने काम से काम रखो, शास्त्रार्थ मत
- 1:43:43करो क्योंकि जिससे शास्त्रार्थ कर रहे हो पता उसे भी नहीं है।
- 1:43:47पता तुम्हे भी नहीं है। उस गुरु के पास जाओ जिसके पास
- 1:43:56बैठने में आनंद आता हो। शांति आती हो वो फिर चाहे मंदिर
- 1:44:02ही क्यों न हो, मंदिर को गुरु बना लो, गुरुद्वारा को गुरु बना लो।
- 1:44:06बशीद को गुरु बना लो, चर्च को गुरु बना लो, जहाँ बैठकर तुम्हें
- 1:44:12आनंद मिले, शांति मिले वो तुम्हारा कोई धाम हो, तुम्हारी
- 1:44:20मनपसंद जगह हो, तुम्हें पता चल जायेगा तुम्हारा भीतर बहुत
- 1:44:24सूक्ष्म है। सूक्ष्म तरंगों के साथ बड़ा
- 1:44:29एकाकार होता है और जब तुम्हारे भीतर आनंद आनंद बजना शुरू हो जाए,
- 1:44:36फिर तो तुम कहीं भी बैठ जाना बेफिक्र हो गया, फिर तो जहाँ
- 1:44:41बैठोगे वहाँ आनंद ही आनंद है। चलते फुर्ते तुम आनंद की मूर्ति
- 1:44:46हो जाओगे, खुद भी सुगंधित होगे, फूल की तरह और लोगों को भी
- 1:44:52सुगंधित करोगे, जहाँ से गुजर जाओगे वहाँ से फूल के सुगंध छोड़
- 1:44:57जाओगे। शारदा मैंने आज का प्रवचन पूरा
- 1:45:10किया। समझ ना ही हो कोई प्रश्न रह गया
- 1:45:17हो, इससे संबंधित हो ये मत पूछना के वृक्ष?
- 1:45:24मुक्ति की इच्छा कामना करते हैं कि नहीं ये मत पूछो तुम्हारे जीवन
- 1:45:33से तुम्हारे जीवन को तुम खुशहाल कैसे कर जी नहीं योग्य कैसे बना
- 1:45:39लूँ? आज तुम जी नहीं योग्य है नहीं मैं
- 1:45:41जानता हूँ। सब भटक रहे हैं, लोग ठोकरे खा रहे
- 1:45:45हैं। तुम्हें पता नहीं जीना किसका नाम
- 1:45:49है, कोई प्रश्न हो, जीवन के संबंध में वो मुझे व्हाट्सएप पे मैसेज
- 1:45:58कर दिया करो। फ़ोन मत किया करो, बहुत लोगों को
- 1:46:02मैंने कहा है मैं मस्ती में बैठा होता हूँ, अनंत के पैग से सर वो
- 1:46:16मुझे जगाया न करो। आनंद से सोने में मज़ा पड़ा आता
- 1:46:25है। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:46:38हे नाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्णावेन हर है मुराद।
- 1:46:58हिनात नारायण वासुते पितुमात स्वामी सखा हमार पितुमात स्वामी।
- 1:47:18सखा हमारे हेनाथ नारायण वासुदेव। श्री?
- 1:47:31कृष्णविन्द हरे मुरारी। नारायण वासुदेव हो धन्यवाद।