Latest / Baba ji Vijay Vats / 2 May 25 - What is Time Travel & How it Works? क्या सच में पिछले समय में जाया जा सकता है?
Transcript
- 0:02व्हाट इस टाइम ट्रैवल आइए पिछले प्रवचन में यह प्रश्न रह गया था।
- 0:18यहाँ तक पहुंचा था मैं के उस संधि क्षेत्र में पहुँच जाइए, उससे
- 0:27नीचे टाइम ट्रैवेल की मैंने व्याख्यान नहीं की।
- 0:33थोड़ा सा यहाँ समझ लें। जो भी चीजें इजाद करती हैं, साइंस
- 0:41विज्ञान उससे पहले इजाद कर चुका होता है।
- 0:47अध्यात्म जैसे अध्यात्म में पहले कृष्ण ने कहा आत्मा न जन्मती है।
- 0:56नमस्ते और साइंस ने बाद में यही कहा मैटर कैन नीदर बी गैरिएटेड
- 1:05नॉर कैन बी डिस्टर्ब्ड पहले बोला अध्यात्म, फिर बोला विज्ञान वही
- 1:15चीजें। तब टाइम ट्रैवेल वैज्ञानिक तो अभी
- 1:23चुप है, वैज्ञानिक ने अभी कुछ नहीं खोजा, सिर्फ टाइम टेबल उनकी
- 1:32जेहन में आया है। उन्होंने थोड़ा सा हवा का झोंका
- 1:45टाइम ट्रैवेल का उससे टकराया है उनसे आके लेकिन अभी पता नहीं
- 1:52उन्हें होता क्या है? तो पहले करेगा व्याख्या ज्ञातम
- 2:00फिर इसकी व्याख्या कभी करेगा विज्ञान तो मैं पहुंचा संदेश
- 2:11क्षेत्र में यहाँ थोड़ी सी बात बड़ा गहरा प्रश्न है।
- 2:17अध्यात्म को विज्ञान के साथ मिला देना दुष्कर कार्य होता है।
- 2:27तो आप शांत हो जाइए, किसी प्रकार की कोई तिरंगा मुझमें मत फेंको।
- 2:36शांति से सुनते रहो अगर थोड़ा सा भी आपने हिलनजुलन किया कुछ फेंका
- 2:46तो वो तार टूट सकती है। इधर उधर हो सकती है आज तक का सबसे
- 2:53महत्वपूर्ण सवाल। टाइम ट्रैवेल क्या है, वैज्ञानिक
- 2:58तो नहीं बता पाए, लेकिन अध्यात्म को पहले बताना होगा।
- 3:04यह परंपरा है। देखिए फ्राइड ने कहा चेतनमन?
- 3:14फिर अचेतन की उसने दो बात कर दिया।
- 3:17अब चेतन और अचेतन अचेतन वो जो भारी कर्मों को अपने भीतर समाहित
- 3:24करता है याने जो कर्म बाद में भुगते जाते हैं जो इतने भारी होते
- 3:30हैं कि वो नीचे बैठ जाते हैं। सतह पे और जो हल्के होते हैं वो
- 3:37ऊपर ऊपर रहते हैं भारी तलपे चले गए जो हल्के थे वो ऊपर ऊपर रह गए
- 3:48उन ऊपर ऊपर जो कर्म रह गए उनको राइट ने कहा।
- 3:53अवचेतन मन सब कॉन्शस, मैएंड और कॉन्शस मैएंड, चेतन और अवचेतन तब
- 4:07ये समझ लो कि चेतन और अवचेतन इन दोनों को छोड़ दो आप।
- 4:13अब तीसरा आ गया अचेतन जीसको सेक्वेंट राइट ने पूरा व्याख्यात
- 4:20नहीं किया। कर नहीं सका तो वह जो परिभाषित
- 4:28नहीं कर सकता। फ्राइट उसको अध्यात्म कहता है।
- 4:40संधि क्षेत्र वहाँ से शुरू होता है मन का वो तल जहाँ अवचेतन
- 4:48समाप्त होता है और अवचेतन के बाद अचेतन का वो भाग शुरू होता है।
- 4:55जो फ्राइड कंगा लिंग सका पूरे रूप से तो वहाँ से शुरू होता है यह
- 5:01जंक्चर पॉइंट। इसलिए अगर बहुत भीतर से कोई अचेतन
- 5:12मन के बहुत भीतर से कोई संकल्प उठे तो ततक्षण पूरा हो जाता है।
- 5:17क्यों? क्योंकि वह जंक्चर पॉइंट संधि
- 5:23क्षेत्र के बिलकुल करीब है। इसको थोड़ा सा और आगे लेकर फिर
- 5:30काम हमारा काफी मात्रा में एक गति पकड़ लेगा।
- 5:45चेतन अब चेतन से आगे और जब हम अध्यात्म के हिसाब से अपने
- 5:54अंतर्मुखी होंगे और उस स्तर पर पहुँचेंगे जो विचारों और भावनाओं
- 6:01से पार है। और जीसको मैं जंगसेर पॉइंट कहता
- 6:06हूँ और संदी क्षेत्र हिंदी में वहाँ पर पहुंचोगे उससे थोड़ा सा
- 6:10नीचे जब हम जाएंगे वहाँ से किया जा सकता है टाइम ट्रैवेल व्हाट इस
- 6:22थिस? होता क्या है ये?
- 6:27अब इसे थोड़ा सा हल्का सा समझने की चिष्टा करें छोटी सी उदाहरण और
- 6:36आप समझ रहे कल। मेरे पास एक अलमारी की चाबी थी,
- 6:52वो चाबी मेरी धर्मपत्नी ने मुझे सौंप दी।
- 7:00मैंने वो ऐसा कतकीय के नीचे रख दूँ समझ के।
- 7:06तकिये के नीचे रख दी, लेकिन जब उसने चाबी मांगी, कुछ उसमें से
- 7:16वस्त्र वगैरह निकालने थे तो चाबी मैं ढूंढने लगा।
- 7:24मुझे चाबी ना मिली। अब ध्यान से समझिएगा तो समझा
- 7:27जाएगा आपको चाबी मैंने ही रखी तकिये के नीचे रखी जब इसको जरूरत
- 7:40होगी हाथ मरूँगा तकिये के नीचे से निकाल के।
- 7:48चाबी की जरूरत पड़ गई। मैंने तकिये के नीचे हाथ मारा,
- 7:56चाबी नहीं मिली, फिर मैंने अच्छी तरह से तकिया उठा लिया।
- 8:03सारा खंगालिया नहीं मिला, इधर उधर देखा नहीं मिला है।
- 8:10जीस पर वीडियो बनाता हूँ ट्राइपोड वगैरह।
- 8:12ये सब खंगालिया नहीं मिला फिर क्या करना चाहिए?
- 8:20अब बस लग कहाँ हल होता है? छोटी मोटी जादूगरी का काम मैं
- 8:26इससे लेता हूँ और मैं अपने लिए तो इसे कतई ही शायद वरतू प्रयोग में
- 8:35लूँ अन्यथा मुझे इसकी आवश्यकता नहीं पड़ती या मैं इसको प्रयोग
- 8:40में लाता नहीं। लेकिन कल ऐसा वक्त आ गया कि मैंने
- 8:49स्नान करके वस्त्र बदलने ऊर्जा भी है।
- 8:54नहीं क्या किया जाए? चाबी मैं ही रख के कहीं भूल गया।
- 9:02मुझे याद ऐसा आता कि मैंने सिराने के नीचे रखा नहीं मिला फिर क्या
- 9:08किया अब क्या इलाज है टाइम ट्रैवेल टाइम ट्रैवेल कैसे रखा इस
- 9:16जंक्चर पॉइंट पे संधि क्षेत्र पे आके?
- 9:20वहाँ आकर संकल्प करना होगा कि मैं पिछले वक्त में चलता चलूँ एक रील
- 9:36घूमेगी आपके सामने। यह कोई परियों की कहानी नहीं सुना
- 9:42रहा हूँ, मैं कल ही की बात अपने साथ बीते चलचित्र की तरह चलता है
- 9:54सब। और मेरी आँखों के सामने गुजरता है
- 10:02चाबी मैंने कहा रखी और चित्र सामने आ गया चाबी मैंने यहाँ पर
- 10:10एक लिफाफा उसमें कहीं भूल गया। क्योंकि मस्ती में रहता हूँ कहीं
- 10:19भूल गया वो चाबी उठा के मैं और दवाइयों का लफाफा था, उसके अंदर
- 10:24रख दी और उस पोलीथिन के लफाफे को बंद कर दिया।
- 10:29अब उसको खंगालने का सवाल ही नहीं पैदा होता।
- 10:33क्योंकि ये तो दवाइयां है बहुत देर से पड़ीं और सब कंगा लिया च
- 10:42भी नहीं मेरी क्योंकि वहाँ थी नहीं तो वहाँ क्या करना होगा हमें
- 10:50इसलिए मैं तुम्हें रोज़ कहता हूँ। कि कुछ भी करके तुम उस जंक्चर
- 10:55पॉइंट पे पहुँचो ये बड़े काम का है।
- 11:02तुम्हारे दैनिक जीवन के अंदर भी ये बड़ा काम आएगा।
- 11:06और अगर मार्क्स की बात आचार्यों की बात।
- 11:15चारवाक की बात नष्टकों की बातों को मानकर के सकते हैं, जबकि
- 11:23तुम्हें पता है इन्होंने जाना नहीं, इन्होंने खोजा नहीं।
- 11:30इनको पता कैसे चल गया? इतनी बड़ी थीम इतनी सृजना बनाई
- 11:35किसने? इनको पता कैसे लगा, वो है की
- 11:37नहीं? क्या ये महज आपको खोपड़ी की
- 11:41इज़ाज़ नहीं लगती? जब मार्क्स कहता है, नीच से कहता
- 11:46है, गॉड स्टैट। क्या तुम्हें यह मात्र खोपड़ी का
- 11:50कल्पना और ईजाद नहीं लगता? बिल्कुल लगता है क्या जब कहता है
- 11:58कोई लेने देने का संबंध कर्म, फिलॉसफी नहीं होती।
- 12:02चार वाक। तो क्या आपको ये ठीक नहीं लगता कि
- 12:06जब वो गलत बोल रहा है क्योंकि हमने देखा गलत करने वालों को कई
- 12:12बार तो हमारे सामने ही दौड़ता है? हमें अपने भीतर उतरना होगा।
- 12:25बहुत बार मैंने तो समझाया। कि मुख्य बिंदु है।
- 12:29ये मुख्य रास्ता है अपने भीतर जाने का और इसके बिना बात न
- 12:35बनेंगे। अध्यात्म का रास्ता यहीं से होकर
- 12:39गुजरता है। मात्र यही गली है।
- 12:42इस कूचे में से आपको निकलना ही होगा।
- 12:48इस मार्ग से गुजरोगे तो वह आएगा और वहाँ से सब रस्ते खुलते हैं।
- 12:56मैंने बहुत बार पहले भी कहा हजारों रस्ते खुलते हैं, पिछले
- 13:00जन्म में चले जाओ, एस्ट्रल ट्रैवलिंग कर लो।
- 13:08कुछ भी सोच लो पूरा हो जाएगा। कुछ भी सोच लो, बुरा सोच लो वहाँ
- 13:18जाके बुरा तो नहीं सोचा जाता वहाँ जाके अच्छा भी नहीं सोचा जाता, ये
- 13:23समझ ले। क्योंकि वहाँ जाके व्यक्ति
- 13:27निर्भेद हो जाता है वहाँ ना ईर्ष्या बचती है, ना प्यार बचता
- 13:35है। दोनों ही कदम इसे ही कहते हैं।
- 13:40निर्लिप्तता, अलीपा। सर्वव्यापी सदा अले प तोहे संग
- 13:48सनाए काहे रे बन खोजन जाए उस स्थान पे जाके न तोईरशा मचेंगी?
- 14:00और इच्छा नहीं बचेगी। ये तो बिल्कुल जचती है बात प्रेम
- 14:04भी नहीं बचेगा प्रेम यानी जिसे मोह कहता हूँ मैं शुद्ध प्रेम तो
- 14:10तुम वास्तविक खुद ही हो, उसको नहीं मैं कह रहा हूँ।
- 14:15मैं कहता हूँ मोह भी नहीं बचेगा और ईर्ष्या और देश भी नहीं बचेगा,
- 14:19नफरत भी नहीं बचेगा तो तुम ये सोच नहीं सकते वहाँ जाके अगर सोच लिया
- 14:26जाए अगर कहीं गहरे से कुछ ऐसी बात गहरे में उतर जाए।
- 14:33तो वह तत्क क्षण हल हो जाएगी तुम्हारा कोई शत्रु, तुम्हारा कोई
- 14:41ऐसा तंग करने वाले श्री कहते संत हृदय को मत सताओ, क्या कर देगा?
- 14:48उसके पास न तो की तलवार है। ना कोई बंदूक है अड़तीस और की ना
- 14:56कोई दुनाली है, ना कोई बॉम्ब है, ना कोई आइटम है, कुछ भी तो नहीं
- 15:04नहीं, लिप्त भाव से बैठा है, मलंगों की तरह मिल गया, खा लिया,
- 15:10इच्छा हुई तो खा लिया, नहीं तो वो भी नहीं खाया।
- 15:16जिसकी जीवन की इच्छा तक पुरोहित हो गई, वह अभेद हो जाता है।
- 15:23निर्भेद हो जाता है। वह नहीं सोचेगा कि फना जी जाए या
- 15:31फना मर जाए। नहीं सोचेगा क्यों?
- 15:34क्योंकि अवैध दृष्टि को वह पाल गया।
- 15:42सब दीवारें भेद की मिटने अच्छी थीं या बुरी थीं दोनों मिटने?
- 15:53उस स्थान पे पहुँच गए टाइम ट्रैवेल हम मुख्य बिंदु पे आ जाते
- 16:00हैं। मैंने ये संकल्प किया मैं बीते
- 16:04हुए समय में पहुँचूं संकल्प करना पड़ता है।
- 16:11अगर एस्टरिल ट्रैवलिंग करना तो आप संकल्प करोगे, मैं शरीर से बाहर
- 16:17हो जाऊंगा, शरीर से बाहर हो के तुम संकल्प करोगे, मैं उस आग्रह
- 16:24पे पहुँच जाऊं तब तक क्षण पहुँच जाओगे देखिए।
- 16:33आइंस्टाइन का नियम कहता है कि कोई भी तरंग या कोई भी वस्तु
- 16:44इलेक्ट्रिक गति से विद्युत की गति से ऊर्जा की गति से तेज नहीं कर
- 16:50सकते। और ऊर्जा की गति क्या है?
- 16:57ऊर्जा की गति है करीब 3,00,000 किलोमीटर पर सेकंड ठीक।
- 17:112,92,700, कुछ एक्यूरेट फिगर अभी भी एक्यूरेट नहीं है।
- 17:20करीब करीब 3,00,000 किलोमीटर पर सेकंड की रफ्तार से अगर कोई चीज़
- 17:27चले। तो वह ऊर्जा की गति होगी, विद्युत
- 17:32की गति होगी और आइंस्टीन का फॉर्मूला इस इक्वल टु एमसी
- 17:38स्क्वायर यह कहता है कि विद्युत की गति से तेज कोई चल ही नहीं
- 17:43सकती। लेकिन साइंस तो ऐसा ही करती
- 17:47रहेंगी क्योंकि उन्होंने एक सिद्धांत पे ठहर कर सारी चीजों की
- 17:54खोज करनी है। मूलभूत सिद्धांत अगर उखड़ गया तो
- 17:57सारी खोज रुक जाएगी। लेकिन।
- 18:04इससे भी एक तेज गति होती है वो गति होती है संकल्प के संकल्प
- 18:11करोगे वीथिन नो टाइम तुम वहाँ पहुँच जाओगे तुमने कहा चंद्रमा पे
- 18:23पहुँच। चंद्रमा 3,84,400 किलोमीटर है।
- 18:33ये इसको पगता ना देने में फर्क पड़ सकता है।
- 18:39लेकिन उसके लिए अगर। गति के हिसाब से चलोगे तो एक
- 18:46सेकंड से ज्यादा वक्त लगेगा, लेकिन अगर तुम संकल्प की गति से
- 18:56चलोगे तो एक सेकंड नहीं होगा। आप सोचते ही चंद्रमा को चले
- 19:03जाओगे, चलो चंद्रमा को छोड़ो। यहाँ कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता
- 19:06क्योंकि रफ्तार बिल्कुल उतनी ही है।
- 19:10आप सोचो कि मैं इस वेब मिल्की वेब से आगे निकल जाऊं।
- 19:18मैं छः और क्रॉस कर जाऊं आकाश गंगा वो तो बहुत दूर हो गया ना
- 19:25जिसे आप कहते हो द्रोह तारे पर पहुंचा।
- 19:31करीब करीब 400, 400 का आंकड़ा है। अनद्रोह का 440 बोले।
- 19:43कोई बात नहीं, मैंने एक्यूरेट में सही नहीं सीखा रहा हूँ।
- 19:48440 वर्ष लगेंगे अगर विद्युत की रफ्तार से गए ठीक चंद्रमा से तो
- 19:59फैसला नहीं होगा। आप चुप जाओगे दर्द से ध्रुव के
- 20:02ऊपर जाने। ध्रुव अगर विद्युत की गति से हम
- 20:06चलते हैं तो तुम कितनी देर में पहुंचोगे?
- 20:13440 प्रकाश वर्ष। 440 वर्ष लगेंगे प्रकाश की गति से
- 20:22पहुंचोगे 440 वर्ष अब आइए संकल्प अब आइन्स्क्रीन कहते हैं कि
- 20:33विद्युत की गति से तेज कोई गति होती ही नहीं।
- 20:36चलो उनको मानना पड़ेगा। वो तो जिद करेंगे ही करेंगे,
- 20:40क्योंकि अगर जिद ना करेंगे तो और पूज्य नहीं होंगे।
- 20:43उनका बेसिक सिद्धांत इज़ इक्वल टु एम सी एस क्या?
- 20:48लेकिन संकल्प की गति इससे कहीं जाता है?
- 20:54अब देखिये 400 वर्ष प्रकाश की गति से।
- 20:59यहाँ फर्क मिलेगा आपको 400 वर्ष और कहा एक क्षण छुटकी में आपने
- 21:07सोचा धरो तारा पोलर स्टार आप गए कितना वक्त लगा।
- 21:18संकल्प किया। वहाँ पहुंचे तो इसकी कोई गति
- 21:22नहीं। असीम असीमित गति और इसके लिए दूरी
- 21:28महत्त्व नहीं रखती। संकल्प के लिए चंद्रमा भी उतनी ही
- 21:36दूर है। होलस्टार भी इतनी दूर है।
- 21:41अन्य अन्य आकाश गंगाएं भी दूर हैं।
- 21:44भ्रमण का कोई भी छोर उतनी ही दूरी में तय कर देगा।
- 21:48ये जितनी दूरी में चंद्रमा को तय करेगा।
- 21:55ये अद्भुत संरचना है अध्यात्म की। मैं आपको बखान करने चला हूँ।
- 22:02किसी वक्त किसी वक्त शायद विज्ञान इसको ईजाद कर ले, किसी ढंग से कोई
- 22:12नहीं पता। तो संकल्प की गति हमारे कोई कोई
- 22:19शब्दाता भी है कि मन की गति से बड़ी गति किसी की नहीं होती है ना
- 22:25बस वो संकल्प की गति होती है। क्षण में तुम पहुँच गए ध्रुवतर और
- 22:31क्षण में वापस आ गए। यह क्षण में सोचा और क्षण में
- 22:37वापस आया। ये संकल्प भी शक्ति है, लेकिन ये
- 22:41कल्पना से आपने सोचा वो सही में आप वहाँ पर पहुँच जाओगे, इधर सोचा
- 22:48आपने शरीर से बाहर हो जाऊं, संकल्प किया, आप बाहर हो गए।
- 22:52फिर आपने कहा पोलर स्टार पे पहुँच गए तत्कशन पहुँच गए लेकिन विद्युत
- 22:57की गति से आइंस्टीन का सिद्धांत कहता है कि वर्ष लगेंगे 440।
- 23:04अब यहाँ फर्क आपको पता चल जाएगा अब हम भीतर फिर जाएंगे उसी दल पे।
- 23:12व्हाट टाइम ट्रैवलिंग? ऐसा संदिग्ध क्षेत्र आता है
- 23:21जंक्चर प्लांट शायद कुछ लोग जंक्चर प्लांट के नाम से ऊब गए
- 23:29हों। इसलिए हिंदी का नाम मैंने संदिग्ध
- 23:33क्षेत्र दिया। ममता भी यही है तो संसदीय क्षेत्र
- 23:39में जब आप जाओगे थोड़ा सा नीचे उतरोगे थोड़ा सा ए बिट।
- 23:48वहाँ पर जो आप संकल्प करोगे तो क्षण पूरा हो जायेगा।
- 23:52फिर वो संकल्प क्या है? इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, फिर
- 23:56वहाँ संकल्प करो, मैं चंद्रमा पे पहुँच जाऊं या वहाँ संकल्प करो,
- 24:01मैं ध्रुव पे पहुँच जाऊं या वहाँ संकल्प करो, मैं चौथे भ्रमण को
- 24:05क्रॉस कर दूँ। देर उतनी ही लगेंगी।
- 24:09दूरी का यहाँ कोई मतलब नहीं है। अद्भुत परमात्मा की अद्भुत लीला
- 24:17है। यहाँ कोई ये नियम नहीं है नियमों
- 24:23से पार सब कुछ यहाँ होता है। तुम्हारे हिसाब से तो नियम बड़े
- 24:30गड़बड़ा जाएंगे। यहाँ बिल्कुल गड़बड़ा जाते हैं।
- 24:34उस सर्जनकर्ता के पास सर्जना की सब व्यवस्थाएँ समाप्त हो जाती हैं
- 24:41तो इसलिए मैं सदा कहता हूँ कि सर्जनकर्ता के सामने।
- 24:45तुम्हारी सर्जना के सभी नियम फीके पड़ जाते हैं, टूट जाते हैं।
- 24:50वो चाहे तो तोड़ दे क्योंकि वह सुप्रीमो है मालिक वो है सामान
- 25:01उसका तरतीब उसकी। नियम, कायदे, कानून उसके वह चाहे
- 25:07तो बदल भी सकता है। क्या मुश्किल है?
- 25:11जिसने ऐसा बना दिया उसने वैसा बना दिया।
- 25:13कैसा है वो पता नहीं बड़े मज़े की बातें तुम कहो की बातें भी कर रहे
- 25:20हो पता नहीं हाँ पता नहीं। बस उसका स्वार्थ बदला सकता हूँ,
- 25:27वह कैसा है? ये नहीं बदला और ना कोई बदला
- 25:32पाएगा, ना कोई बदलाव पाया है। अंदाजा लगाने में सब दक्ष हैं,
- 25:40लेकिन ईमानदारी से जब तुम देखोगे। तो उसके बारे में उसके बारे में
- 25:46आप कुछ नहीं बोल सकोगे सिर्फ इतना कि वह मस्ती का सैलाब है।
- 25:52वह आनंद का घना समुद्र है, उसका कोई और छोर नहीं है।
- 25:59वह बेतरतीब ढंग से ऐसा घेरता है तुम्हें?
- 26:03कि तुम उसके आगे समर्पित होने को बाध्य हो जाते हो।
- 26:08इससे ज्यादा तो आप कुछ कह नहीं सकते।
- 26:11वह क्या है यह कुछ नहीं कह सकते। कहाँ से आया पता नहीं इतना कुछ
- 26:18कहाँ से लेके आया पता नहीं। ये सब जो वैज्ञानिक ने व्यवस्थाएँ
- 26:23बनाईं ये सिर्फ उनकी मानसिक कल्पनाओं से अधिक और कुछ भी नहीं
- 26:32कल्पनाएं एक गोला था गर्म वो फटा बिखर गया।
- 26:39फिर वो ठंडा हुआ, फिर वो तारे बने सब कल्पनिक व्याख्यान सत्य इसमें
- 26:47कुछ भी नहीं क्योंकि उसके बारे में तो कुछ नहीं कहा जा सकता।
- 26:57हाँ इतना है। किंतु संसार में चीजों को खोज लो,
- 27:02उसका आनंद ले लो। लेकिन एक बात साफ है कि जितना
- 27:08जितना व्यक्ति विज्ञान की खोज करेगा उतना उतना आरामप्रस्थ हो
- 27:16जाएगा। और जैसे जैसे आराम प्रस्त हो
- 27:20जाएगा, वैसे वैसे उसकी इम्युनिटी कम हो जाएगी।
- 27:27कहीं कुछ तुम पाते हो तो ये मत सोचना कि मुफ्त में पा जाते हो।
- 27:33कहीं उसके बदले में कुछ खोते भी हो और बिल्कुल बराबर का खोते हो?
- 27:40वहाँ आराम पाया। साइंस के जरिए ये ऐसे चल रहा ये
- 27:44पंखा चल रहा और। वहाँ तुमने साइंस की टेक्नोलॉजीज़
- 27:55से जो भी चीजें बनाईं, उसे आराम मिला शरीर को, लेकिन तुम भूल गए
- 28:01कि तुमने कुछ खोया भी है क्या? खो दिया तुमने बॉडी की?
- 28:07इमेनिटी पावर खोदी। यह मुफ्त में मिला हुआ आराम नहीं
- 28:11है। समझ लेना, पर महात्मा की बनाई हुई
- 28:15सृजना से तुम उपरांत नहीं हो सकते?
- 28:20अगर तुम 40 वर्ष जी लिए और इतनी सुन्दर क्वालिटेटिव लाइफ जी लिए
- 28:27तो क्वांटिटेटिव लाइफ डोएसन्त मैटर।
- 28:30तुम 100 साल की ज़िन्दगी भी उतने आनंद में न जियो तो कम आनंद में
- 28:36जीओगे फिर 100 साल की ज़िन्दगी भी जी सकते हो और अगर तुम 20 साल की
- 28:41ज़िन्दगी जीओ और इससे कहीं ज़्यादा आनंद में जीओ तो बात
- 28:46बराबर हो गयी। मेरी बात को ध्यान से समझा नहीं
- 28:51समझाई तो बार बार पलट के सुना 20 साल की जिंदगी परम आनंद में
- 28:58गुजारी जब कोई साधन नहीं था तुम्हारे पास, बिजली का शरीर पे
- 29:05कोई वस्त्र भी नहीं था ठिठुरता हुआ मैं।
- 29:11ठंडी हवाओं में शीतल हवाओं में चलता फिरता रहा और फिर साइंस ने
- 29:18कोच की फिर हीटर बनाए। फिर वस्त्र बनाए, रझाइयां बनी
- 29:26कंबल बने। लोइयां बनीं और हमने डाँप दिया।
- 29:31अपना शरीर हम कहते हैं बड़े मज़े में है बिलकुल मज़े में हो और तुम
- 29:38कहोगे तब तो जीते थे हम 40 वर्ष अब तो जीते हैं 100 वर्ष बिलकुल
- 29:44जीते हो। लेकिन बात तो ये है, यहीं भूल हो
- 29:47जाती है जो 40 वर्ष में तुमने आनंद लिया वो अब तुम 100 वर्ष में
- 29:53ले पाओगे, बढ़ा लो जिंदगी परमात्मा के आगे नहीं चलती से से
- 30:02स्याणा पर लखोगे तो एक न चले न। मैं उस जीव का नाम भूल गया, उस
- 30:16जीव का नाम भूल गया मैं जो जीवन में सिर्फ एक बार संभोग करता है।
- 30:25और विज्ञान कहता है कि मनुष्य जीवन में 4000 के करीब बार संभोग
- 30:31करता है, मनुष्य और 4000 बार में साइंस कहता है।
- 30:414000 बार में वो जितना आनंद ले पाता है, अब ध्यान से सुनना वह
- 30:50जीव एक बार के संभव में इतना आनंद ले लेता है।
- 30:55हिसाब बराबर हुआ नहीं हुआ। क्या समझे?
- 31:02बस हिसाब बराबर हो गया। तुम कहोगे इतनी देर में बिलकुल
- 31:11इतनी देर में वह जीव उस स्तर पर पहुँच गया।
- 31:16जीसको तुम जंक्चर प्वाइंट से आगे का स्वयं का प्वाइंट समेट हो वहाँ
- 31:254000 क्या 40,000 4,00,000 गुना भी कहोगे तो कम जो तुम्हारी
- 31:32बुद्धि आनंद लेती है वहाँ। उसका कोई रेश्यो बढ़ता ही नहीं
- 31:37है। क्योंकि क्वांटिटेटिव तो फर्क है
- 31:41ही नहीं ना फर्क है क्वालिटेटिव सुख में और आनंद में सुख तो आप
- 31:514000 बार लो। और आनंद आप एक बार भी हो तो बड़ा
- 31:57आनंद का ही भारी होगा नहीं। कबीर कहते हैं हंसा पायो मानसरोवर
- 32:11ताल तलैया क्यों ढूंढ रहा है? मन मस्त हुआ फिर क्यों बोलें?
- 32:21आओ टाइम ट्रैवेल में चले हम फिर लौट आए वहाँ तो चाबी मैं कहीं रख
- 32:29के भूल गया और मैं गया टाइम ट्रैवेल में।
- 32:33कहाँ पीछे रखी तो मैंने ना और मैंने रखी।
- 32:39वह मेरी स्मृति में फीड होगी, निश्चित रूप से क्योंकि मेरी
- 32:44समृद्धि को देखने वाला एक साक्षी निरंतर हर वक्त मौजूद है।
- 32:50और उसकी मौजूदगी में घटती है। सब घटनाएं जो भी मेरी इंद्रियाँ
- 32:56करती हैं तो मेरे हाथों ने वह चाबी जहाँ रखी होगी, वह मेरा
- 33:04दिमाग भूल गया। अब क्या किया जाए?
- 33:08वहाँ टाइम ट्रैवल की आवश्यकता है। तुम्हें तुम्हारे ही थोड़ा सा बैग
- 33:19पांच 4 घंटे पहले तुमने रखी पांच 4 घंटे पहले तुमने चाबी रखी, अब
- 33:29तुम भूल गए। तो क्या है इसका हल?
- 33:34वर्ष सर्वेक्षण तुम्हें उस वक्त में जाना होगा देखना होगा और यहाँ
- 33:45हर क्षण की वीडियो कैद है। क्योंकि हर क्षण वह दो आँखें
- 33:55साक्षी की तुम्हें निरंतर निहार रहीं हैं और रिकॉर्ड हो रही हैं
- 34:00चरवाक लाख कहें लेकिन अनुभव अपनी बात कहता ही रहेगा।
- 34:09अनुभव नहीं, फिर सकता। चारबाग दिमाग से काम करता है,
- 34:15अनुभवी अनुभव से काम लेता है। अनुभव ज्यादा गहरा है।
- 34:21दिमाग की बजाय तो मैं टाइम ट्रैवेल किया समझ आ गया आपको।
- 34:29आ रही है। मैं पीछे गया, हल्का हल्का पीछे
- 34:34गया, पीछे गया, पीछे गया 3 घंटे 4 घंटे मुझे अक्चवल टाइम भी नहीं
- 34:39पता था क्यों? घड़ी तो आयी नहीं, मेरे पास वक्त
- 34:42मैं देखता नहीं गुजर जाता है। ऐसे ही बैठे बैठे 13 वर्ष बीतने
- 34:49को हो गए। पता नहीं लगा कब सूरज होगा, कब
- 34:53सूरज छुपा बिलकुल एक्यूरेट वो वक्त आ गया जहाँ मेरे हाथ उस चाबी
- 35:02को उस दवाई के पॉलीथीन के लिफाफे में रख रहे हैं।
- 35:07बस मैंने झट से फिर वहीं आ गया। अब पता चल गया था कि मैंने रखा था
- 35:15वोट तो कहीं नहीं ठोस है। ये है टाइम ट्रैवल कि कोई कहानी
- 35:24नहीं, कोई परी की कहानी नहीं। जीवन का सत्य और बिल्कुल प्रगाढ़
- 35:32नग्न सत्य खंगाला मैंने मेरी धर्मपत्नी देख रही है नहीं मिला
- 35:43क्या करेंगे अब? मैंने जल्दी से पॉलीथीन का लिफाफा
- 35:50खोला और चाबी निकाली। मैंने कहा ये लो ये मिल गया क्या
- 35:59हुआ? मैं कुछ जादू करता हूँ मैंने इस
- 36:03टाइम टेबल। अब विज्ञान कब खोजेगा, क्या
- 36:08खोजेगा ये तो वो जाने लेकिन इट इस टाइम ट्रैवेल यह पीछे के वक्त में
- 36:16मैं चला गया। मैं इस विधि को जानता हूँ।
- 36:20अब आगे की विधि कई बार आपसे भी ऐसा होता है।
- 36:24आपको कुछ सोपन्न के जरिए कुछ सोपन्न ऐसे आ जाते हैं।
- 36:28मैंने बहुत से लोगों से सोपन्न सुनी है जो मुझे पहले कह के गए और
- 36:34कुछ दिनों के बाद वो ठीक हो गए। यह बिल्कुल वैसा है जैसे आपने
- 36:41मेरे प्रवचनों को देखा होगा। वह कोई स्वप्न तो नहीं था हो तो
- 36:46बाबा मुझे बताके गए कि वर्ष टाइम आ गया है विपत्ति काल शुरू
- 36:55मार्गदर्शन शुरू अब तुम मुक्त के लिए तैयार हो जाओ।
- 37:03बुरा वक्त आएगा, घोर दर्द भी आएगा और करीब ये 30 तारीख को अप्रैल को
- 37:091 साल पूरा हो जाएगा। अभी भी मैं पूरा ठीक से चल नहीं
- 37:13सकता। ये छठी शायद आपने कभी देखी हो
- 37:18इसका सहारा मुझे लेना होता है। ज्यादा दूर चलने में मुझे भाकर का
- 37:25भी सहारा अभी भी लेना पड़ता है। दर्द की स्थिति में मुझे एनलजेसिक
- 37:31दवा भी लेनी होती है। 10 दिन पहले 20 तारीख को बता के
- 37:36गए 30 तारीख को मेरा चूकना टूट गया।
- 37:40यह क्या था? यह भीतर से आई हुई चीज़ नहीं थी।
- 37:45भीतर तो रिकॉर्ड है लेकिन यह बताया हुआ भगवान शिव का उनके पास
- 37:52अपना अलग सा रिकॉर्ड है। वो भविष्य में झांक सकते हैं, ये
- 37:57होगा। कभी कभी आपको भी ऐसे सुपन आ जाते
- 38:02हैं जो पूरे हो जाते हैं। बिल्कुल वैसा ही जैसे मैंने आपको
- 38:06बताया। बीएन सिंह जी का सपना कि उनका
- 38:10मर्डर हो गया, हम पता नहीं चले गए।
- 38:13अभी डॉक्टर धर्मपाल जी जिंदा हैं। अगर कोई पूछना चाहे तो पूछ सकते
- 38:17हैं। वैसे वो 80 साल से ज्यादा हो गए
- 38:20हैं। फिर आप पछताओगे भी अगर ना पूछो
- 38:24कोई तो पूछ के आए कि हम गए थे की नहीं गए थे उन दिनों में जहाँ पर
- 38:30दीपक गर्ग के प्रचार चुनाव प्रचार का अभियान चल रहा था।
- 38:35और बीएन सिंह जी जहाँ पूरे लाल लश्कर के साथ आए हुए थे, अकेला
- 38:40चुनाव था और कहीं उनके पिताजी प्रधान जी ने कहा वो चुनाव उनका
- 38:45कैंसिल हो चुका था। शोक दिल के मुकाबले में थे।
- 38:52तो द्वार से उसके चुनाव हो रहे थे।
- 38:54उप चुनावी से कहते थे उप चुनाव तो एक और पूरी की पूरी पंजाब की
- 39:00मशीनरी यहाँ बैठी हुई है। और मुझे ये दृष्टांत दृष्टांत आया
- 39:07तो मैंने कहा ये तो ठीक होगा। जाके बताया जाए उसको मैंने सारी
- 39:14चीज़ डॉक्टर धर्मपाल जी से बताया, वो कहने लगी कि हमें बतानी चाहिए।
- 39:20सरदार जी यहाँ पर हैं, उनको बताना चाहिए।
- 39:24वह थोड़ा सा होशियार रहेंगे कि सिक्योरिटी टाइट करेंगे।
- 39:29हम चले गए। लेकिन चले गए।
- 39:31सारी कहानी आपको बताई वहाँ पर मेरे एक शिष्य उन्होंने देख लिया।
- 39:39मामला कुछ खराब है। उन्होंने बुलाया मुझे बाहर गया
- 39:43मैं गुरूजी क्या बात है? मैंने सारी बात बताई, कहते आप चुप
- 39:48करके मेरे साथ बैठो चलो। झिप्सी में बैठ के हमें घर छोड़
- 39:52दिया दोनों मैंने पूछा क्या बात है कहते ये इतना फीम का गोरा चक
- 40:02लेता है। सुबह जब आपने कहा ना कि आपके
- 40:07मर्डर की प्लानिंग हो रही है। तो ये सबसे पहले हमें कहेगा इसको
- 40:12पकड़ लो, इससे पूछो ये क्या प्लानिंग कर रहा है, इसको क्या
- 40:18पता? अब जो व्यक्ति उस स्थल पे नहीं
- 40:22पहुंचा वह बिल्कुल ऐसे ही बात करेगा।
- 40:25अरेस्ट हिं व्हाट ही इस गोइंग टु प्लेन मुझे मारने की क्या योजना
- 40:39बना रहा है? जी से पूछो मुझे उसकी बात जैसे।
- 40:47क्योंकि निशा खा के दिमाग तो रहता नहीं तो वो किस प्रकार का रिएक्शन
- 40:54करेगा समस्या पार और अक्सर रिएक्शन तीखा करते थे।
- 40:59वो मुझे हमें दोनों को बिठा के जिप्सी में छोड़ आए।
- 41:11चल या फिर से मत आ जाना, हम गए वे नहीं और थोड़े दिनों के बाद ये
- 41:19काम हो गया, ब्लास्ट हो गया। आपको भी जीवन में कोई न कोई कभी
- 41:26सत्य हो जाने वाली घटना सोपन्न में आई होगी।
- 41:31क्या होता है कि कहाँ से आती है वो घटना भीतर से आती है टाइम
- 41:36ट्रैवेल में से भविष्य की घटनाओं से जंप मारकर वो आ जाती है, हमारे
- 41:41अचेतन और अचेतन से जंप मारती है, अब चेतन और अवचेतन से जंप मारती
- 41:46है, चेतन में आ जाती है। क्षेत्र में तुम्हें लगता है
- 41:50स्वप्न आया लेकिन वो स्वप्न नहीं? वो भविष्य की घटने वाली घटना है।
- 41:57अक्सर बहुत से लोग चूक जाते हैं लेकिन वो होने वाली घटना होती है।
- 42:05इट इस टाइम ट्रैवेल। होने वाली घटनाएं हमारे भीतर हैं।
- 42:12हमारा कलेक्शन बैठ गया वहाँ से या उस होने वाली घटना ने जंप लिया और
- 42:18हमारे चेतन तक आ गया। हमने वो होने वाली घटना देख ली और
- 42:22स्वप्न समझ के उसको लेट वो कर दिया जब।
- 42:28सपना है, कोई बात नहीं वो जब बीत गई तब समझ में आई सपना तो नहीं था
- 42:35सभी की जिंदगी में कुछ ना कुछ ऐसा घटा होगा किसी के ज्यादा किसी के
- 42:43कम अक्सर ध्यान करने वाले। लोग साधारण सरल चित्र के लोगों को
- 42:53ये घटनाएं ज्यादा होंगी। वाश्विक वृत्ति के लोगों को ये
- 42:57घटना न के न के बराबर होंगी। नकली जी वाले ये कहाँ से आया?
- 43:06यह टाइम ट्रैवेल में से आया घटनाएं टाइम में छुपी हुई हैं।
- 43:11क्या होगा? अब हम गीत तो गा देते हैं, क्या
- 43:17होगा कौन से पर में कोई जाने नहीं, ऐसी कोई बात नहीं बिल्कुल
- 43:22जानता है कोई कोई जानता है। वो जो भीतर बैठा है चेतन वह जानता
- 43:29है, अगले पल में नहीं। अगले साल में क्या होगा, कब क्या
- 43:35होगा? लेकिन एक बात आपसे और कही जो उस
- 43:41पे पहुँच गया वह मन हो जाता है। वह सारी लीला के वेश को देख लेता
- 43:48है और वो समझता है जो घटेगा उसको बोलने का फायदा जो घट ही जाएगा
- 43:57जीसको तुम मोड़ नहीं सकते, उसको बताने का क्या फायदा?
- 44:02अवश्य ही कोई ना कोई तुम्हारी। इसके भीतर प्रशंसा या पैर दबवाना
- 44:09या अपनी इज्जत करवाना कुछ ना कुछ निहित सार्थ रहता है।
- 44:14फिर तुम बताते हो देखो मैं कितना बड़ा ज्योति हूँ।
- 44:19मैंने ये बताया था ठीक हो गया, लेकिन ज्योतिष के कारण मैं नहीं
- 44:23गया था कम से कम। मैं करुणा वश किया था, लेकिन मुझे
- 44:29पता नहीं था ऐसा भी होता है इसलिए कबीर अगर तुम्हें मूड कहें तो
- 44:39इसमें किसी प्रकार की कोई अतिशयोक्ति नहीं है।
- 44:44सच में वो तुम्हें मूड कहते हैं क्यों जो चीज़ तुम भीतर डुबकी लगा
- 44:49के जान सकते हो वह बाहर गुमा फिरा के तुम क्यूँ जानोगे?
- 44:56बिल्कुल उस रक्षा वाले की तरह जिसकी मैं बात बताया करता हूँ
- 45:01मीना बाजार में जाना लुधियाना में।
- 45:04और वो कहने लगा ₹30 लूँगा भाई, सस्ते जमाने में मैंने कहा ₹30 ले
- 45:09लेना, कोई बात नहीं। पहली बार गया था महीना बाजार तो
- 45:12बिल्कुल पास ही था। बाएं मुड़ो और आगे गेट आ गया।
- 45:18वहाँ भी महीना बाजार शुरू हो गया तो उसने मेरे को सारा कमाया।
- 45:22गुड़ मंडी के जोड़ा बाजार का पश्चिम बाजार का सब उसने घूमा करा
- 45:28कि आखिर में मीना बाजार में लिया है।
- 45:32लो बाबू जी उतरो, सरदार जी सर्दी का वक्त था, मैं उत्तर गया।
- 45:43बस वैसा तुम वैसा ही करते हो। संत क्या करता है?
- 45:50संत जानता है वो रक्षा भारत जानता था कि कितनी दूर है और वो मुझे भी
- 45:55जानता था कि ये उल्लू फंस सके। आज पहली बार आया लगता है।
- 46:00इसको लूट लो लेकिन ध्यान रखना संत लूटे नहीं जाते, कितना ही लूट लो
- 46:11संत को संत नहीं लूटेगा। संत का असली धन उस तिजोरी में बंद
- 46:18है। जीसको कोई नहीं खोज सकता ये लोग
- 46:26कहते हैं कि पास्ट लाइफ फ्री ग्रैशन मुझे हँसी भी आती है इनकी
- 46:31वृत्तियों पर और इनकी हूँद पर। बड़ा दुख होता है कि देखो व्यक्ति
- 46:48पापी पेट के लिए या कुछ अपनी विषय शक्तियां को पूरा करने के लिए किस
- 46:55कल तक आ गया इतना झूठ? कि मैं आपको आपका पिछला जन्म बता
- 47:03दूंगा, जबकि इनके खुद के मुँह के ऊपर 12:00 बज के 3.75 मिनट होते
- 47:09हैं। देखा करो लटका हुआ मैं मर गयी और
- 47:14मैं तो यमराज के पास गयी। वहाँ तो नरक था स्वर्ग था, कुछ
- 47:20नहीं था भाई सब बकवास है, इसलिए एसी बी के ब्रह्मकुमारीज़ को मैं
- 47:30उड़ के पढ़ता आओ मुझे बताओ मैं कौन था विशल जम तो तुम्हें पता
- 47:37है। उससे पिछला बताओ कौन था नहीं बता
- 47:42पाए जी खुद का ही नहीं जानते। अगर खुद का ही जान लिया जाए तो
- 47:53उसका एक लक्षण आएगा। सबसे बड़ा क्या?
- 47:57मृत्यु का व्यय खत्म हो जाएगा। देखिए बिलकुल साहब, बात है जब
- 48:02तुम्हें पता चल गया कि मैं पिछले जन्म में भी था, इसका अर्थ मैं
- 48:08मरा नहीं, इसका अर्थ मृत्यु नहीं होती।
- 48:12मृत्यु जिसकी होती है वह शरीर था। और मैं शरीर नहीं हूँ, एकदम से
- 48:19कुछ भेद और कुछ गोल गांठे खुल जाती हैं।
- 48:23इतना सा ही पता चल जाए देवी तो कितनी गांठे, खुल जाती हैं तुम
- 48:30आनंद के अहोभाव से उछलने लगोगी, मीरा की तरह।
- 48:35तुम्हारे चेहरे पे ये सिलवटे नहीं रहेंगे पुत्रे तो मूर्ख मत बनाओ
- 48:44हमें हम सब जानते हैं जो बात तुम बोलते हो।
- 48:53हम देखते हैं उसका परिणाम क्या होगा।
- 48:56वो आ रहा है, नहीं आ रहा और हमारे पास और भी पैमाने हैं।
- 49:00ओरा आपका ओरा हम पहले देख सकते हैं बिलकुल ब्लैकिश वासनाओं से
- 49:07भरा भरा तुम्हारा चित्र क्या चाहेगा?
- 49:11हम भली भांति जानते हैं। औरा सबसे पहले दिखता है फिर आपकी
- 49:17जुबान से निकले हुए शब्द और व्याख्यान और आपकी जो अनुभूतियाँ
- 49:25वो हमारी समझ में फ़ौरन आजाती देर नहीं लगती की यह स्त्री झूठ बोल
- 49:30रही है। बोल काहे रही है वो भी हमें पता
- 49:34है? इसकी कुछ निहित स्वार्थ है या कुछ
- 49:37चाहती है? वो पैसा चाहती हो या वो सम्मान
- 49:41चाहती है? बात एक ही है, उसकी कुछ इच्छा है,
- 49:46चाहत है और जब इच्छाएं हैं तो दुख है।
- 49:51इच्छाएं बहुत हैं तो रुलाई हैं, इच्छाएं कम हैं, शहनशाही हैं,
- 50:00इच्छाएं बिल्कुल नहीं तो खोजाई हैं, परमात्मा की कोई इच्छा नहीं
- 50:05होती। टाइम ट्रैवल।
- 50:10फिर उसी जगह पे आ जाओ वो ही प्रोसेसर भीतर चलो उस संधि
- 50:19क्षेत्र में चलो जंक्चर प्वाइंट पे चलो उससे थोड़ा सा नीचे उतरोगे
- 50:24तुम खुद ही उतर जाओगे किसी गाइड की आवश्यकता नहीं।
- 50:29फिर तो तुम निष्णात हो जाओगे, दीक्षित हो जाओगे, दक्ष हो जाओगे,
- 50:35फिर तुम आराम से 1000 बार जाओगे, 1000 बार आओगे, उसका फरमान भी सुन
- 50:41सकोगे। वो क्या कहता है और उसका फरमान
- 50:44सुनकर तुम जिंदगी को जीने लग जाओगे।
- 50:47ये है सुखी जीवन का लक्ष्य। एक क्षण भी तुम्हारे जीवन में दुख
- 50:51का नहीं आएगा, कोई परिस्थिति तुम्हें दुखी नहीं कर सकेगा।
- 50:58कोई दुख तुम्हारे हृदय में गहरा नहीं उतरेगा।
- 51:03कोई बाहर का वातावरण तुम्हें रुलाएगा नहीं।
- 51:07कुछ भी घट जाए तुम्हारे साथ यह तुम्हारे आस पास के क्षेत्र में
- 51:14तुम कम से कम अंत से दुखी नहीं आओगे बाहर उसकी झलक भी नहीं
- 51:20पड़ेगी ये प्रमाण देखिये ये लक्षण देखिये।
- 51:28और ऐसे ही अगर तुम गप्पो में उलझे रहे, जो बाबा नानक कहते हैं के
- 51:36कितने मूर्ख कितने मूर्ख मलप्पा का खा कितने मूर्ख हैं, जो मैला
- 51:45खाना खाते। मैला खाना क्या है यही दूसरों को
- 51:53धोखा देकर अपना पेट भरने की कवायद?
- 51:57इसे मैला खाना कहते हैं। बाबा तुमने दूसरों का गला दबा
- 52:03दिया। तुमने दूसरों को गलत सूचनाएं दे
- 52:06दी। अपने कुछ नियत स्वार्थों के कारण
- 52:11पूछा है, टाइमटेबल क्या है? ये टाइमटेबल है तुम संकल्प से
- 52:18पिछले। पिछले और पिछले क्षण क्षण करते
- 52:23करते उतर सकते हो। एक दीवार आएगी जो दो जन्मों को
- 52:30विभक्त करेगी वह मोटी दीवार, उसकी चाबी तुम्हारे हाथ में वह तुम्हें
- 52:35संकल्प करना होगा, यह बांध टूट जाए।
- 52:39और मैं पिछले जन्म में प्रवेश कर जाऊ तुम पिछले जन्म में प्रवेश कर
- 52:43जाओगी। आगे ये तो पिछला हो गया सर टाइम
- 52:50ट्रैवल में तुम बीते हुए अतीत में सफर कर रही है ऐसे तुम सारे कुछ
- 52:57देखो। जहाँ से उठी थी ये तरंग, पाथर से
- 53:05मनुष्य तक की यात्रा जहाँ तक आ गई, अब आगे क्या होगा?
- 53:10ये भी टाइम ट्रैवल है। आगे भी बिल्कुल ऐसे ही जाना होता
- 53:16है। सोचो जो आगे घटित होगा वो झट से
- 53:29आपके सामने होने वाली तस्वीरें आ जाएंगी?
- 53:32संत क्यों नहीं दुखी होता? अब उसका जवाब भी आपको पता चल
- 53:36जाएगा। संत के सामने वो चित्र आ जाते हैं
- 53:40जो आपको झंझोड़ते हैं उसको पहले से पता होता है ये होगा इसलिए जब
- 53:47वो घटना घटती है उसको पता ही होता है।
- 53:52इसलिए संत के ऊपर अचानक से वज्र आघात होते हुए जब तुम देखोगे तो
- 53:58उसकी आँखें सूखी हुई पाओगे, उसके चेहरे पर गम का भाव न पाओगे, उसके
- 54:05चेहरे और उसकी आँखों में अश्क ना बहेंगे वो छाती ना पीटेगा।
- 54:12वह अफसोस न करेगा। वह कृष्ण की तरह धीरज और धैर्य से
- 54:17युक्त और को पीछे छोड़ता हुआ यथार्थ की स्थिति में आज और अब
- 54:27में खड़ा हो जाएगा। अब नौ।
- 54:31वर्तमान में ठहर जाएगा वो व्यक्ति जानता होगा आगे क्या होगा?
- 54:41जानता होगा पीछे क्या हुआ, बिलकुल अच्छी तरह से जानता होगा के आगे
- 54:49क्या होगा। इसलिए कृष्ण कह देते हैं कि
- 54:54अर्जुन मैं इन्हें मार चुका हूँ। देखिए कितना शानदार संकल्प से भरा
- 55:04हुआ संशय हीन प्रवचन। कोई शिनश की गुंजाइश नहीं और
- 55:11भगवान कृष्ण कहते हैं शिश आत्मा तो विनाश हो जाता है अनिश्चित
- 55:18जिसने देख लिया अपनी आँखों से उस टाइम ट्रैवलिंग में जाके वही ये
- 55:24शब्द बोल सकता है मेरे मारे हों को मार दे अर्जुन।
- 55:30अब तू श्रेय तो ले ले सब जानते हैं कृष्ण कृष्ण से कुछ छिपा नहीं
- 55:39इसीलिए बाल काल से लेके पिछले जन्म से ही प्रबुद्ध थे वो।
- 55:47बाल काल से ही प्रेम की बारिश रचाती आयी, रास रचाती आयी, महारास
- 55:55रचाती आयी, प्रेम को बरसाती आयी और प्रेम को बरसाती बरसाती थोड़ा
- 56:04बड़े हुए। तो फिर आ गए दुष्टों का वध करने
- 56:10के लिए अब तुम ये मत सूचना कि संत के दुष्टों के साथ क्या मतलब?
- 56:18संत आते ही इसलिए दुष्टों का वध करने के लिए।
- 56:23अब इससे ज्यादा भगवान कृष्ण स्पष्ट क्या बोलेंगे?
- 56:27क्या मतलब होता है बिना साहित्य दुष्कृता क्या मतलब होता है?
- 56:37क्या वह महज मखन खाने के लिए? धर्म संस्थापना अर्थात अपने
- 56:46स्वभाव में सिद्ध करने के लिए संभवामी युगे युगे।
- 56:52मैं युग युग में प्रकट होता हूँ। यह कोई कल्पना नहीं है यह इस
- 56:57विराट सृष्टि का। एक छोटा सा हिस्सा और किस्सा मैं
- 57:02आपको सुना रहा हूँ कितने कृष्ण इस बराट अस्तित्व की गलियों में खेल
- 57:10रहे हैं जिनका तुम्हें और छू रही नहीं पता।
- 57:17जिनकी तुम कल्पना ही नहीं कर सकते तुम्हारी ये छोटी सी बुद्धि जीसको
- 57:25खंगाल नहीं सकती उसको तुम आगोश में ले लेने के लिए सदा ही उदित
- 57:31रहते हो, यह तुम्हारी मूलता नहीं तो और क्या है?
- 57:38इस टाइम ट्रैप वक्त मैं पीछे चले जाना हौ।
- 57:46इस इट पॉसिबल अपने भीतर तो अब तक तो बहुत बाहर भटक रही है।
- 57:52इतनी शक्ति तुमने भीतर जाने में लगाई होती तो अब तक मुझसे सुनने
- 57:57की जरूरत नहीं थी। तुम खुद ही बोलने लग जाते हो है
- 58:02मुझे प्रवचन करने की आवश्यकता कहाँ थी?
- 58:05मैं चुपचाप अपनी मस्ती को पीता रहता।
- 58:10मैं क्यों बैठा हुआ? कुछ लगा आपको मेरे जीवन में देखकर
- 58:17कुछ तुम्हारे हिसाब से मेरे हिसाब से तो बड़ा आनंद है तुम्हारे
- 58:22हिसाब से कुछ सुख जैसी ज़िन्दगी लगती है ना कुछ स्वादिष्ट खाना?
- 58:30ना कुछ स्वादिष्ट पीना, ना कुछ भ्रमण करना, ना कुछ अच्छे अच्छे
- 58:35चित्र देखना, ना हिल स्टेशन, ना पिज़्ज़ा बर्गर चाउ मन चुग्गा
- 58:45क्या जी कोई फ़िल्म भी नहीं देखते।
- 58:49मन प्रजाबा तो है ही नहीं। अरे भाई जरूरत क्या है?
- 58:54मन ही न रहा पर चाय का किसको और वो मिल गया जिसके मिलने से ओम
- 59:04शांति यहाँ अति होती है। ओम शांति।
- 59:08तुम्हारे बोलने से नहीं होती देवी हो उस तल पे जाके होती है ओम
- 59:14शांति जहाँ ओमकार का नाथ स्वयं भगवान प्रकट करता है उदभोज होता
- 59:21है ओंकार का फिर वो क्यों ताल तरीियों में डोलेगा?
- 59:27और क्यों भटकेगा संसार के तीर्थ स्थलों में या पहाड़ी इलाकों में
- 59:32भ्रमण करेगा। क्यों, क्यों जश्न मनाएगा?
- 59:37क्यों तुम्हारी पार्टियों में जाएगा?
- 59:39क्यों तुम्हारे शादी वह को समारोह को वो अटेंड करेगा?
- 59:45नहीं, उसको किसी चीज़ में रस्म है।
- 59:47उसको मात्र तुम्हारा संसार, एक शोर कोलाहल लगता है और सत्य में
- 59:56लगता है उसके जीवन प्रणाली के जीने के ढंग से सहेसी ही तुम देख
- 1:00:02सकते हो इससे ज्यादा। वह कोई एक्टिंग नहीं कर रहा है।
- 1:00:07ध्यान रखना और अक्टिंग करेगा। क्यों उसको कोई सजा हुई है?
- 1:00:15उसकी सभी वासनायी मीटिंग में सभी इच्छाएं गईं।
- 1:00:21सब का फूल बन के उड़ देगी कुछ ना बचा।
- 1:00:26यहाँ तक के जीने तक का ख्वाब ही न बुना गया।
- 1:00:31अब तो जीने की तमन्ना भी विदा ले गई।
- 1:00:34कब के काहे करेगा वो क्यों बोलेंगे वो?
- 1:00:41नहीं बोलता, सिर्फ एक चीज़ बल आती है वो है तुम्हारे लटके हुए ये
- 1:00:46चेहरे जो पी एल आर तो करते हैं लेकिन ख्वाबों में करते हैं और पी
- 1:00:52एल आर करने का तुम भी सुलेख लेते हो।
- 1:00:55पेट भरने के लिए अच्छा ढंग है बेबानी का?
- 1:01:01ऐसा मत करो, ऐसा मत करो तुम्हें भुगतना होगा।
- 1:01:10मौत से खेलो। ये गलियां तुम्हारे खेलने के लिए
- 1:01:14हैं और खेलते खेलते हँसीबो खेलीबो, गरीबों?
- 1:01:20उस ध्यान में उतर के उस विशाल उल्लास पर्व को तुम मनाओ उसमें
- 1:01:26शरीर को हो जाओ ये सारा अस्तित्व व हर पल झूम रहा है तुमने उसके
- 1:01:32झूमते हुए पग देखे नहीं, तुम अंधे।
- 1:01:40तुम सुनना चाहते हो संत चुप रहना चाहता है, तुम्हारी वजह से करुणा
- 1:01:46वश्य बोलता है हीरो पायो। गांठ गठियायो हीरोपयो गांठ
- 1:02:04गठियायो बार बार बको। क्यों खोले?
- 1:02:17मन मस्त हुआ हुआ हुआ फिर क्यों वो ल मन मस्त हुआ?
- 1:02:30फिर क्यों? वो बोले हंसा पायो मानसरोवर हंसा
- 1:02:47पायो। मानसरोवर ताल कलैयाँ क्यों बोले
- 1:03:02मन मस्त हुआ आह फिर क्यों बोले? मन मस्त हुआ फिर क्यों?