Latest / Baba ji Vijay Vats / 30 Jun 25 - बाबा जी ग्रन्थ का अंतिम अध्याय शुरू... जापानी कैसे पहुंच गया और हम कहां गलती कर बैठे?
Transcript
- 0:17अभिमन्यु प्रसाद बाबा जी चंद्रवश मैं आपका पांच वर्ष पुराना हूँ।
- 0:33श्रावकों लगातार कोई वीडियो मैंने छोड़ी नहीं, लेकिन एक बात समझ
- 0:45नहीं आती। आपने कहा जापान का एक व्यक्ति जो
- 0:53जानता नहीं, हिंदी पंजाबी वह मुझे सुनता है और वह उस स्तर पर पहुँच
- 1:08गया। जिसे आप अल्टीमेट जंक्चर कहते हो।
- 1:17हाउ इट कैन बी पॉसिबल जीसको भाषा की ही समझे नहीं।
- 1:30पहुंचा तो कैसे पहुंचा? मेरे भीतर उबाल था।
- 1:36आपकी एक भी वीडियो का एक भी शब्द मैंने कभी चुकाने क्या हुआ, कहाँ
- 1:46मात खा गया? मैं क्रियायोग भी रोज़ करता हूँ।
- 1:50ध्यान भी रोज़ करता हूँ, बड़ी शिद्दत से करता हूँ और समर्पित
- 2:01हुई पूरा। लेकिन यह प्रश्न मेरे आड़े आता है
- 2:08क्या उस व्यक्ति में कोई खासियत थी?
- 2:13या कि मेरे में कोई कमी या कि बात कोई और है वह जेपनी व्यक्ति कैसे
- 2:23पहुँच गया और मैं कैसे अटका हूँ माना मुझे जीने का ढंग आ गया।
- 2:32माना ज़िन्दगी से भर गई ज़िन्दगी के बहुत से बोझ जो नाजायज ढो रहा
- 2:39था, मान्यताओं के रूप में वह समाप्त हो गए लेकिन फिर भी मन में
- 2:46यह प्रश्न बना रहा कि आखिर क्यों? अभिमन्यु तुम्हारा पश्न बड़ा जायज
- 3:01है, लेकिन तुम इतनी वीडियो सुनकर भी वीडियो की गहराई में नहीं
- 3:14पहुंचे? हैलो मैं तुम्हें आज।
- 3:21र स्वरूप में बात समझा देता हूँ जो शब्द तुम सुनते हो वीडियो में
- 3:34वो बाधा हैं तुम्हारे पहुंचने में।
- 3:42क्योंकि शब्द तुम समझना चाहते हो और समझ कर तुम पहुँचना चाहते हो
- 3:51और शब्द ही तुम्हारे आड़े आ जाते हैं, जबकि मेरी वीडियो में।
- 4:00कुछ और भी सोरूर है पीने के लिए वो तुम पीते नहीं पीते हो शांत हो
- 4:12जाते हो जीने का डंगा आ गया मान्यताएँ टूट गई बहुत सी गठड़ी
- 4:17ऐसा लगता है बोझा लिए फिरता था, आज उस गठड़ी को फेंक दिया।
- 4:24लेकिन फिर भी उस पार्ट पे क्यों नहीं पहुंचा?
- 4:27तो आज अच्छी तरह से समझ लो। इस बात को वह जापानी का पहुंचा और
- 4:37जो भी व्यक्ति हिंदी पंजाबी नहीं जानता होगा।
- 4:42वह मेरी वीडियो को सुनकर जल्दी पहुँच जाएगा।
- 4:45बड़ी अलग सी बात है। किसी संत ने यह बात नहीं कही।
- 4:54कहते तो हैं, लेकिन आपको समझ नहीं आता कहते सभी संत ऐसे हैं शब्दों
- 5:00को मत पकड़ो। शब्दों के भीतर छिपा हुआ रस पकड़ो
- 5:07रसोग्य और जब तुम शब्दों का अर्थ समझने में लग जाते हो तो हमारी
- 5:15बुद्धि पकड़ लेती है शब्दों को। तो तुम शब्दों के अर्थ में व्यस्त
- 5:21हो जाते हो और चूक जाते हो उसे जो शब्दों के पीछे रहस्य की तरह छिपा
- 5:28हुआ और रास्ता था जो मेरे शब्दों में धार बन के आया, जो मेरे
- 5:34शब्दों में प्रेम बन के बरसा। उसे चूप गए तुम और बस वही पीने की
- 5:46चीज़ थे तुमने फूलक खा लिया रस फेंक दिया।
- 5:57और जेपनी व्यक्ति ने रस भी लिया, फ़ोलक फेंक दिया और फिर सुन लो।
- 6:08मेरी वीडियो को कोई भी व्यक्ति जो हिंदी पंजाबी नहीं जानता, उर्दू
- 6:14वाले भी जानते हैं। हिंदी।
- 6:17क्योंकि लफ़्ज़ से बराबर होते हैं कोई ओह भाषा में इटालियन हो किसकी
- 6:31और भाषा के तमिल हो, बंगाली हो, मलयालम हो यही के भाषाएँ उठा लो
- 6:39तुम। जो हिंदी समझ ही नहीं पाते अगर वो
- 6:46मेरी वीडियो को सुनेंगे तो इतनी शिघ्रता से पहुँच जाएंगे जितनी
- 6:52शिघ्रता से तुम नहीं पहुँच पाओगे। अर्चन क्या है?
- 6:56मेरे शब्द अर्चन है। और शब्द बोलने जरूरी भी है।
- 7:03संत क्या करें तुम्हें स्टेबिलिटी देने के लिए, तुम्हें बैठाने के
- 7:10लिए, तुम्हें स्थिर करने के लिए शब्द बोलने आवश्यक भी है।
- 7:18और क्योंकि तुम्हारे से मुखातिब हूँ तो तुम्हारी भाषा में ही
- 7:23बोलना पड़ेगा। जापानीज़ न मुझे आती है हिंदी उसे
- 7:27समझ नहीं आती, बस मेल मिल गया, उसे हिंदी नहीं समझती।
- 7:37लेकिन हिंदी के पीछे छिपा हुआ वो आनंद का रस जिसमें लेबड तेबड के
- 7:42ये शब्द आए मैं रोज़ बोलता हूँ वो पी लिया उसने क्योंकि शब्द तो
- 7:51उसकी समझ में ही नहीं आए भरो भयो, हरी भी सरो सर से टली भला।
- 8:00इसलिए मैं तुम्हें एक नई बात बताता हूँ, आज जो हिंदी बिलकुल
- 8:05नहीं जानता, एक शब्द भी नहीं जानता वो अगर मुझे सुनेगा, सिर्फ
- 8:10सुनेगा, देखेगा नहीं आँखें, बंदो लो आँखें मूँद लो।
- 8:16सिर्फ मेरी आवाज़ सुनो, उसके भीतर की झनक सुनो, उसके भीतर की वीणा
- 8:26की तरंग सुनो, ये बिखरती हुई चेतना का प्रारूप तुम्हें छुएगा।
- 8:37और शब्द तुम्हारी खोपड़ी पकड़े गई नहीं, क्योंकि समझ नहीं आती
- 8:41खोपड़ी को पर मैंने 1000 बार कहा खोपड़ी ही वादा है तब क्या किया
- 8:50जाए या तो? मेरी वीडियो को जापानीज़ या किसी
- 8:55और भाषा में अनुवादित कर दिया जाए, अनुवादित कर दोगे तो शब्दों
- 9:01के पीछे का बरस छुप जाएगा और जापानीज़ मुझे नहीं आती लैटिन
- 9:07मुझे नहीं आती। ग्रीक भाषा मैं नहीं बोल सकता
- 9:16मजबूरी है दोनों तरफ की जो भाषा में अच्छी तरह से बोल सकता हूँ।
- 9:24वह भाषा ही भीतर से लेबट तिवड़ के आएगी, उस रस से परिपूर्ण हो के
- 9:29आएगी। तुम शब्दों का बड़ा ख्याल रखते
- 9:33हो, जैसे शब्द ही महत्वपूर्ण हैं तुम्हारे लिए और मैं रोज़ कहता
- 9:39हूँ शब्दों को आग लगा दो, फूंक दो जला दो।
- 9:44शब्दों में कुछ नहीं शब्दों के पीछे जो रास छिपा है वही है, उसे
- 9:50ही पीना है रोज़ गाता भी हूँ, बताता भी हूँ काश।
- 10:03तुम्हारी समझ में कभी आ जाए बात तुम समझने की चेष्टा ही क्यों
- 10:08करते हो, ये समझने की चीज़ है ही नहीं।
- 10:12शराब पीने की चीज़ है या समझने की चीज़ है?
- 10:17जीने वाले, रोने वाले तुझे रोने का सलेका ही नहीं।
- 10:23तुम मुझे सुनते तो हो, तुम्हें सुनने का सलेका नहीं आया रोने
- 10:29वाले तुझे रोने का सलेका ही नहीं अश्क पीने के लिए है या की बहाने
- 10:34के लिए बड़ी मुश्किल हो गई यह पीने के लिए होते हैं।
- 10:43या बहाने के लिए नहीं होता है, पर तुम गाहि बगाही इन्हें बहाना शुरू
- 10:52कर देते हो, चूक जाते हो तुम कहते हो किसी संत ने यह बात नहीं बोली
- 11:00बोली तो। मौन रह के बोली तुम सुन नहीं सके
- 11:04मौन कहाँ सुन पाते हो तुम? तुम्हारी दिक्कत ये है कि तुम
- 11:10हिंदी समित हो और यही दिक्कत है। तुम्हारी दिक्कत ये है कि तुम
- 11:16पंजाबी समझते हो बोर तू समझते हो? और जो जो उर्दू भाषा समझता है, वो
- 11:21हिंदी को भी समझता है। ये एक माँ जाई बहनें हैं, माँ
- 11:28मासी की बेटी हैं, दो नहीं हैं, उर्दू जवान भी हिंदुस्तान में परी
- 11:35जन्मी बढ़ी। और हिंदी भी है।
- 11:40दोनों सखी बहनें हैं। तुम्हारी दिक्कत मैं समझता हूँ,
- 11:46बड़ी अच्छी तरह से बोलता भी हूँ, लेकिन आज तुमने परेशान कर दिया।
- 11:53प्रश्न कर दिया तो बहुत गहरे रहस्य को समझाना पड़ेगा।
- 11:57एक्सप्लनेशन के जरिये अब समझ लेना देखिये, मैंने पहले दिन भी कहा था
- 12:07आई ऍम जस्ट साइलेंट, मैं एक जेल की तरह हूँ।
- 12:18मुझमें कंकड़ फेंकोगे तो लहरें उठेंगी अन्यथा नहीं उठेंगी।
- 12:23अगर तुम कहो कि मैं बोलूं, खुद से बोलूं तो मुश्किल ही नहीं है,
- 12:28असम्भव भी है। मुझे यह बोलने की बिमारी भी नहीं
- 12:34और आदत भी नहीं। नहीं, अब उछल भी नहीं और मुझे कोई
- 12:40रोग भी नहीं बोलने का, इसलिए मैं क्यों बोलू?
- 12:54कबीर कहते हैं जिसने पा लिया वो क्यों बोले जिसने मानसरोवर के
- 13:12भीतर छलांग लगा दी, वो ताल तलैया में क्यों डोले?
- 13:18वो तो मस्त हो गया, मन मस्त हुआ फिर क्यों बोले कुछ नहीं बोलेंगे
- 13:26वो, वो बोलेंगे ही नहीं, उसे तो बुलवाना पड़ेगा और फिर वह जो भाषा
- 13:33जानता है वह ही तो बोलेंगे। यह मेरी मजबूरी लेकिन तुम्हारी
- 13:40कोई मजबूरी नहीं मेरी मजबूरी के मेरे शब्दों के साथ जो लबड़तेबड़
- 13:46के आता है वह शब्द है, मैं उन्हीं को जानता हूँ और कोई भाषण नहीं
- 13:53जानता मैं, लेकिन तुम तुम तो समझदार हो।
- 14:01तुमने तो ट्रांसफर होना है ट्रांसफर मिशन तुम्हारे भीतर
- 14:06घटेगी। मैं तो मिट गया अब मिटने को कुछ
- 14:13बाकी बचा नहीं। तुमने अभी मिठना है तुमने अभी
- 14:22दुखों से पार होना है, दुखतीत होना है तुमने और तुम्हारी बिमारी
- 14:30ही ये है तुम इस चैनल को छूट देते हो, समझ नहीं आता तुम्हे?
- 14:34गुड़ रहस्य की बातें होती हैं, लेकिन देखिये अगर रहस्य की बातें
- 14:39हैं तो भी अगर साधारण बातें तो भी आवाज़ तो लिबड़ तिबड़ के वहीं से
- 14:45आएगी मैं कोई भी कुछ भी बोलूं टॉपिक कोई भी हो राजनीति को।
- 14:54सामाजिक हो, धार्मिक हो या कोई भी हो आवाज़ उस छोर से आएगी जहाँ पर
- 15:06मैं बैठा हूँ और मैं कहाँ बैठा हूँ मैं वहाँ बैठा हूँ।
- 15:12जहाँ अमृत का सरोवर है, जहाँ से व्यक्ति बैठा वहीं से बोलेंगे।
- 15:22अन्य जगह से बोलना उसके लिए असंभव है।
- 15:26जो खोपड़ी में बैठा वो खोपड़ी से बोलेंगे।
- 15:30जो हृदय पे बैठा वो हृदय से बोलेंगे, जो अस्तित्व में बैठा वो
- 15:35अस्तित्व से बोलेंगे, जो उसकी मजबूरी भी है तो मैं तो वही से
- 15:41बोलेंगे और मेरे शब्दों के साथ जो आएगा, जो भड़के।
- 15:50तुमने उसको पीना है इसलिए मैं रोज़ कहता हूँ इस शराब का
- 15:58एनालायसिस मत करना। यह तो एक महफिल में जमी हुई
- 16:05याकड़ों की जमात है। इसको पी लेना बस जाम उड़ेल दिए
- 16:13हैं, भर दिए हैं, सुराही भी भरी पड़ी है और सुराही ही नहीं संघ
- 16:20सरोवर भी भरा है और सरोवर ही नहीं संघ समुद्र भी भरा है।
- 16:26तुम पीने वाले बनो, सारा संसार शराब है, सारा संसार मैखाना है।
- 16:44वह जहाँ बैठा है, वहीं मैं खाना है, वह खुद शराब है, तुम्हें पता
- 16:53नहीं, मैं रोज़ कहता हूँ शब्दों से मत चिपटो शब्दों का एनलिसिस मत
- 17:00करो। तो इससे अच्छा मैं कहती हूँ तुम
- 17:04सुनो मत, जब तुम शब्दों का करते हो कमेंट करते हो तो मुझे कोई
- 17:11चाहत नहीं है, कोई बड़ा कमी खड़ा करने की कोई धर्म नया मैं नहीं
- 17:18खड़ा करना। मुझे थोड़े से प्यासे लोग चाहिए
- 17:28कि उनको मैं पानी पिला सकूँ और उनकी प्यास गुझ सके।
- 17:31बस यही मेरा लक्ष्य है और यही तुम्हारी जरूरत है।
- 17:35प्यासों की जरूरत पानी ही तो हुआ करता है।
- 17:41और तुम्हारे लिए पानी मेरे पास आज़र है और प्यालों का पानी नहीं
- 17:46इतनी ही शराब नहीं मेरे पास ये खत्म हो जाएगी।
- 17:51सुराही भरी पड़ी है और उड़ेल दूंगा और सुराही भी खत्म हो गई तो
- 17:56सरोवर पास है। वहाँ से सराहियों को भर लूँगा और
- 18:00सरोवर भी खत्म हो गया तो भूल मत समुद्र भी है मेरे पास समुद्र से
- 18:08सीधा डायरेक्ट कर दूंगा तुम्हें पीते रहना, जीतने पीना है, पीते
- 18:13रहना, तुम कहते हो मैं। उसमें क्या खूबी थी?
- 18:22मुझमें क्या कमी है? अभिमन्यु पूछते हैं कोई कमी नहीं
- 18:27है पुत्र तुम शब्दों से पीना चाहते हो?
- 18:35वो सीधी सीधी पीना चाहता है। और कुछ मजबूरी भी है उसकी क्योंकि
- 18:41शब्द वो जानता नहीं है। तुम शब्द जानते हो और ये शब्द का
- 18:49जानना ही तुम्हारे लिए गले की फांस बन गया।
- 18:54काश तुमने सुना होता। इसे ही सच्चा श्रावक कहते हैं।
- 18:58महावीर महावीर कहते मेरे द्वारा बोले गए शब्दों को एनालाइज मत
- 19:04करना, सीधे सीधे बिना किसी सेंसरशिप के उसको भीतर उतर जाने
- 19:10देना। फिर वो शब्द निबड़ते बढ़ते उस रस
- 19:16को पिए हुए तुम्हारे भीतर के मटके को 1 दिन भर देंगे और जब भर के
- 19:25गगरिया तो छल के घी। पर कोई उसे रोक नहीं पायेगा।
- 19:32छलकने से तुमने पूछा। पुत्र और सरलता से मैंने थोड़े से
- 19:42शब्दों में जवाब भी दे दिया। अब तक तुम मुझे शब्दों से सुन रहे
- 19:49थे। आज वही तुम होगे, वही वीडियो
- 19:54होगी, लेकिन तुम शब्दों को मत सुनना, आँखें बंद कर लेना तो मत
- 20:00देखना। मेरे आओ बाप बहुत से लोग तो मेरी
- 20:05दाढ़ी की रंगत पहचान लेते हैं। बाबा ये मुझे गुकट वाली।
- 20:11वो सुनते ही नहीं, वो देखते भी हैं बस यही तुम्हारी कमजोरी
- 20:18तुम्हारे लिए अभी शप बन जाती है। तुम शक्ल और सूरत को निहारते हो?
- 20:25तुम कपड़े लत्ते देखते हो, मेकअप देखते हो, चूक जाते हो या बंध
- 20:29जाते हो, फिर शब्दों को सुनते हो, कानों से और बुद्धि तुम्हारे
- 20:37शब्दों को एनलाइसिस करने पर तुल जाती है और बुद्धि गड़बड़ाई जाती
- 20:42है। क्योंकि जो मैं बोल रहा हूँ वो
- 20:45बुद्धि से पार है बुद्धि में न कभी आया न कभी आएगा कभी गागर में
- 20:52सागर समय आया क्या कभी नहीं समा पाएगा कोई ऐसी गगरिया नहीं बनेगी।
- 21:00जो किसी सागर को अपने में समाहित कर सके।
- 21:07समझा गया पुत्र बहुत सरलता से समझाया मैंने आज तो आज तो कोई
- 21:15मैंने फ्रसिफिकल बात नहीं की। सीधी सीधी बात की तुम्हें रस की
- 21:21जरूरत है। रस के बिना तुम दुखी हो रस को ही
- 21:26पीना चाहते हो, फिर शब्दों के आड़े क्यों आते हो?
- 21:30फिर शब्दों को छोड़ दो ना सीधी ही चलने दो, नीट पियो।
- 21:37पियो पियो नीट पियो कैसे पियोगे, नीट शब्दों को गटक जाओ, उस रस के
- 21:51साथ गटक जाओ। संग संग रस हो संग संग शब्द हो
- 22:04मज़ा आएगा पीने का, अब तो तुम पीते हो तो कमेंट करते हो कमेंट
- 22:13करते हो, तर्क करते हो। और मैं भी समझता हूँ किसने समझने
- 22:19की चेस्ट ठगी है उसे जो समझ में आता नहीं, हम तो उसे प्रणाम करते
- 22:27हैं। हे परवर्तेगार तो कभी समझ में
- 22:30नहीं आता। वेद कहते हैं, नैती नैती नैती
- 22:36इतना नहीं है, इतना नहीं है, बोला बहुत लेकिन फिर भी बहुत कहाँ
- 22:42बोला? इतना नहीं है नहीं है इसे कहीं
- 22:48पार, कहीं दूर और सितारों से भी आगे।
- 22:53कई जहान हैं आगे पीने वाले तुझे पीने का सलेका ही नहीं शराब पीने
- 23:06के लिए होती है, समझने के लिए नहीं।
- 23:11तुम इस समुद्र को समझने में लग जाते हो, एनालिसिस करते हो,
- 23:18तोड़फोड़ करते हो और तुम्हें पता है फूल खुशबू के लिए होता है, फूल
- 23:26की पंखड़ियाँ कलर लोगे, बिखेर लोगे?
- 23:29फूल की केमिकल संरचना को लिख लोगे इतना यह है इतना यह है इतना यह
- 23:35है, लेकिन खुशबू खो जाएगी और फूल मर जाएगा, ऐसा ही हुआ है तुम्हारे
- 23:41साथ पत्र थोड़ा बहुत मेरे समझाने बुझाने से तुमने कुछ।
- 23:49रस को भीतर जाने दिया। मेरे शब्द थे इसलिए कि ये प्रखंड
- 23:56का आनंद कर दे। शब्द इसलिए लाजिम भी थे।
- 24:02रस था पीने के लिए कि यह तुम्हें रूपांतरित कर दे।
- 24:05दोनों चीजों का तुमने उपयोग कर लिया होता तो बड़े अच्छे होते एक
- 24:11का उपयोग तुमने कर लिया शब्दों का उपयोग ऐसा ही होता है जैसे तुमने
- 24:17कर लिया खंडन मंडन के लिए। जो इन मूडो ने मूर्खों ने,
- 24:24पंडितों ने, राजनीतिज्ञों ने जो भ्रम फैलाये वो तोड़ने के लिए
- 24:29मेरे शब्द कम आये, अच्छे भी हैं लेकिन फिर जो शब्दों के बीचे
- 24:37आनंद। जो खुमारी से बहता हुआ वेग जो
- 24:43फूलों के पीछे सुगंध जो दिखती ना फूल की पंखड़ियाँ से भी इनको नजर
- 24:48आती हैं, लेकिन फूल के पीछे की सुगंध किसी को नजर आती है नहीं।
- 25:01शब्द थे तुम सीधे सीधे पी लेते और दोहरा कम हो जाता, जो से जेपिनी
- 25:08का नहीं हुआ, फिर उससे भी ज्यादा काम तुम्हारा हो जाता।
- 25:12उसके भ्रम नहीं टूटे लेकिन ना टूटे भ्रम कोई बात नहीं और मस्ती
- 25:17का प्याला तू पी गया ना? तुम्हारे भ्रम टूट गए, लेकिन
- 25:23मस्ती के प्यारे से वंचित हो गए न?
- 25:27और ज्यादा महत्वपूर्ण क्या है? ज्यादा महत्वपूर्ण मस्ती का वो
- 25:31प्याला है जो जन्मो जन्मो से, जिसके लिए तुम तरस रहे हो, तड़प
- 25:35रहे हो। वो पी लेते तो भ्रम चाहे बने
- 25:41रहते, ज़रा भी कोई नुकसान नहीं होती, रात को तुम सो जाते हो,
- 25:47आराम आ जाता है। भ्रम तो बने रहते हैं, ऐसे ही
- 25:52भ्रम बने रहते, कोई तकलीफ न थी। लेकिन तुम रस का प्याला भी लेते
- 26:01है सुरत कलारी भाई मत बा रे। सुरत कलारी भयी मत भा रही मदवापी
- 26:29गई बिना तोल। मन मस्त हुआ फिर क्यों बोले मन
- 26:44मस्त हुआ, फिर क्या बोले? सूरत कलारी भाई मतवारी तुम्हारी
- 26:55सुरती, वो मधु का प्याला नहीं किया, मतवारी नहीं हो गई और अगर
- 27:02तुमने उसका प्याला नहीं किया तो फिर तुम चुप नहीं हो सकोगे।
- 27:08बाबा ने कहा चुप है चुप न हो भाई जय लाए रहा ले बता तुम्हारा मन
- 27:13बोलता ही रह गया, ये गलत है। यहाँ बाबा ने आगा स आगा से क्यों
- 27:19कह दिया? शब्द था आका स आका बस मैं वही
- 27:24समझता हूँ ये मूड कवि समझने से। मैं अंगूठा लगा देता हूँ ब्लॉक और
- 27:33तुम जानते भी नहीं कि मेरा कसूर क्या है क्योंकि तुम ये जानते
- 27:38नहीं हो कि मेरा भी तो कोई कसूर नहीं है मैंने।
- 27:46शराब पिलानी है, तुम अल्फाज़ पीना चाहते हो क्या करें फिर अल्फाज़
- 27:55जिसके पास है कोरे उसके पास जाओ ना जाओ किसी सर के पास जाओ किसी
- 28:03आचार्य के पास। जिनके पास हमें है शब्दों ही कहकर
- 28:07जाना है। यहाँ शब्दों के साथ कुछ शहद भी है
- 28:14जो निबट के आता है और हर संत की आवाज में कशिश होती है।
- 28:21उस कशिश को बहाने से पीना होता है।
- 28:27तुमने शब्दों को पिया नहीं उडेल दिया, तर्क करने लगे, तर्क करने
- 28:35लगे, हाउ इट? इस पॉसिबल?
- 28:37कैसे बाबा अपनी एस्टर ट्रैवलिंग कर रहे?
- 28:40यह संभव नहीं है। कैसे तुमने के वीडियो पे हजारों
- 28:46कमेंट ऐसे आए बाबा इट इस नॉट पॉसिबल।
- 28:49मैंने कहा ये कहो कि हमारे साथ नहीं हुआ ये क्यों कहते हो कि
- 28:54आपके साथ नहीं हुआ? ये कहो हमारे साथ नहीं हुआ नो नो
- 28:59बाबा जी इट्स ए। इट्स नॉट एक्सिस्टेंस मैंने कहा
- 29:04ठीक है आप जीत गए आनंद मानो जहाँ से मिलता है वहाँ से पीओ कौन
- 29:15रोकता है तुम्हें? तुमने पुत्र पूछा मेरे में क्या
- 29:22कमी? कोई कमी नहीं है पुत्र तुम चाहते
- 29:27तो खंडन वंडन शब्दों से कर लेते और रस को पी कर मदहोशी के आलम में
- 29:33डूब जाते। दोनों चीजों का सदुपयोग कर सकते
- 29:36थे। जो जपैनी व्यक्ति नहीं कर सका
- 29:39खंडन मंडल मान्यताएँ तो वहाँ भी बड़ी मूड है आदमी जहाँ भी है सब
- 29:45जगह वहाँ मूड ही है वहाँ अपनी तरह की मूडताएं हैं यहाँ अपनी तरह की
- 29:51मूडताएं। लेकिन उसने शब्द वह जानता ही
- 30:02नहीं। उसने नीट पी ली मधुरस पी लिया
- 30:09उसने मधु का प्याजा पी लिया उसने। शब्दों को तो वो समझ नहीं सकता और
- 30:15मैंने तुम्हें कहा कि जो भाषा नहीं जानता वो अगर सुनेगा तो बड़ी
- 30:21शीघ्रता से पहुँच जायेगा। क्यों?
- 30:26क्योंकि शब्दों के पीछे कुछ छपा हुआ तो वो साथ आता है।
- 30:32और वह तत्व तुम्हारी गगरियों को बरदेगा आज नहीं कल अगर तुम लगातार
- 30:38सुनते जाओगे तो वह कानों के जरिये रस बन के तुम्हारे उस मटके के
- 30:45अंदर गगरिया के अंदर स्टोर होता जायेगा।
- 30:49फिर तुम्हारी मान्यताएँ बची रही। कोई बात नहीं ये भी तरीका है तो
- 30:57अपने रस को इतना भर लो उस घरिया को कि छलकने लग जाए।
- 31:04फिर ये अलग पड़ी रहेंगी जैसे तुम रात को सो जाते हो।
- 31:08तुम्हारे भ्रम तो तुम्हारे संग ही सो जाते हैं, लेकिन तुम अगर मधुर
- 31:14रस को पी लिया तो तुम मस्त हो जाओगे तुम्हारा क्या लेते हैं?
- 31:18पड़े रहेंगे तुम्हारा कुछ बिगाड़ेंगे नहीं, इसलिए मैं
- 31:26तुम्हें बताऊँ। खंडन वंडन की ऐसी विशेष आवश्यकता
- 31:32नहीं थी, लेकिन ये भार था जो तुम सिर पे नाजायज ढो रहे थे और मैंने
- 31:39एक मंथ दो कार्य करने ठीक समझे। मैंने कहा तुम जानते भी हो?
- 31:46दोहरा काम हो जाएगा ये दो दारू तलवार, गलत मान्यताओं के थोपनाओं
- 31:54का जो आवरण तुमने पहन लिए बाहर से नकाब तुमने उड़ लिए उनका भी खंडन
- 32:01मंडन हो जाएगा और जो। इसके पीछे छिपी हुई आवाज सरकार रस
- 32:06है वो भी तुम्हें संघ ही पीरोगे सारा ही गटक जाओगे।
- 32:15मैंने तुम्हें ये थोड़ा कहा था कि तुम पी लेना और वह मीटिंग कर
- 32:19देना। तुम तो वोमिटिंग कर रहे हो तो
- 32:22मेरा ही कमेंट बताते हैं यू अरे गोइंग टु वोमिट मेरे वर्ड को तुम
- 32:29कमेंट के रूप में उलट रूप में मुझे देते हो तो इसका मतलब यू अरे
- 32:33गोइंग टु वोमिट तुमने उल्टी की तरह उसे उगल दिया, बाहर नहीं बचा।
- 32:40क्योंकि तुम्हारी मान्यताएँ मेरे बोलने से बिलकुल विपरीत थी।
- 32:45यही है कारण और कोई कारण नहीं है। पुत्र तुमने पूछा मेरे में क्या
- 32:51कमी, कोई कमी वह तुम्हारे में यही कमी कि तुम शब्दों में उलझ गए।
- 32:58बट गया वो रस जितना पी सकते तो नहीं पिया भरी पड़ी है, ये तो रस
- 33:03से लिपटके आती है, पूरा गच्चम गच्च होकर आती है मेरी आवाज़ काश
- 33:12तुम पीने की क्षमता से भर जाते तुम शब्दों से कोई छेड़छाड़ ना
- 33:17करते। अभी संभल जाओ, अभी मैं हूँ अभी
- 33:24मैं ज्ञानी अभी मैं बोलता हूँ तुम अभी से शुरू कर लो, कुछ नहीं
- 33:34बिगड़ा। देर आयत दुरस्तायत जब जागो तभी
- 33:40सवेरा अभी कुछ नहीं बिगड़ा, आज से ही तुम मुझे सुनो लेकिन सुनने का
- 33:49डंक बदलो शराबक बन के सुनो जब महावीर कहते हैं, शराबक की भाँति
- 33:54सुनो। जो नानक कहते हैं कि शीशी की
- 33:57भांति सम्पर्क भी तो हो जाओ, समझाने की बड़ी चेष्टा है इनकी,
- 34:06लेकिन तुम समझ पाओ तो और तुमने अगर एक एक वीडियो सुनी है पुत्र।
- 34:12तो अवश्य ही तुम पांच वर्ष में काफी कुछ तुमने इकट्ठा कर भी दिया
- 34:16होगा ये माना के घडपुर भराने क्योंकि कुछ उमरेदराज मांगकर लाए
- 34:27थे चार रोज़। दो आरजू में कट गए दो इंतजार में
- 34:35उमरेदराज मांगकर लाए थे चार रोज़ दो आरजू में कट गए दो इंतजार में
- 34:43कुछ खोपड़ी ने काट लिया शब्द थोड़ा बहुत।
- 34:49तुमने पी लिया उससे जितनी क्रांति हो सकती थी हुई और जितना रस
- 34:56तुम्हें आनंदित कर सकता था, उसने किया भी।
- 35:00तुम कहते हो हमें जीने का सलीका आ गया, यह रूपांतरण ही तो है।
- 35:10यह ट्रांसफॉर्मेशन है। तुम्हें पहले जीने का तरीका नहीं
- 35:14आता था, अब तुम जहाँ भी हो, तुम्हें जीने का असली कहा गया, ये
- 35:22कोई कम महत्वपूर्ण उपलब्धि नहीं है तुम्हारी।
- 35:27बहुत महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन मेरे ख्याल में तुम्हारे
- 35:35प्रश्न का जवाब मिल गया और काश कोई ऐसा व्यक्ति मुझे सुनना शुरू
- 35:44कर दे। हर वीडियो में इतना रस भरा इतना
- 35:48रस भरा जो भाषा को न जानता हो। तुम कहते हो भाषा भाषा तो बाधा
- 35:58है, इसलिए मैं कहता हूँ बुद्धि को एक तरफ रखी आना मेरे पास।
- 36:06यही कहते हैं गुरु जन संत जन के हमारे पास आना बुद्धि को बाहर
- 36:18जहाँ जूते निकालो वहाँ लगालो लेकिन तुम साथ लेके आ जाते हो।
- 36:25बुद्धि काँठ शाट करने में उलझ जाती है।
- 36:28चूक जाते हो तुम आधा रस जाता है, आधा नहीं भी जाता, कुछ चीज़ समझ
- 36:34नहीं आती। उससे फिर प्रश्न उठते हैं, लेकिन
- 36:37उसे जापानी का प्रश्न कभी नहीं आएगा।
- 36:40आएगा मैं जानता हूँ। वह शुद्ध स्रोत को पी लेता है,
- 36:45पूरा पूरा पी लेता है, नीट पी लेता है, पानी नहीं मिलता, सोडा
- 36:50नहीं मिलता, कारा नहीं मिलता, कोई भुजिया, कोई मूंगफली, कुछ नहीं
- 36:58खाता संग नीट। नीट चखता है नीट गले में भीतर गटक
- 37:04जाता है, इसलिए वह तो पहुँच गया मुकाम पे तुम कब गटकोगे इस नीट को
- 37:16बस गटकना सीख जाओ। शब्दों समेत गटक जाओ कोई शब्द
- 37:24फंसते नहीं, तुम्हारे शब्द उसने भी गटके लेकिन समझ नहीं आए बाहर
- 37:30निकल गए कसर से सो गए। तुम भी शब्दों को गट करो, रस समेत
- 37:36जैसे कोई संतरे को पूरा का पूरा गट।
- 37:39गटक क्या होगा? रस तुम्हारे खून में मिल जायेगा
- 37:46और जो रस जिसमें छिपा था, जो विजातीय द्रव्य होगा, जिसे तुम
- 37:52फलूदा कह देते हो वह तुम्हारी यात्रियों से बाहर एक स्किट हो
- 37:56जायेगा, समस्या क्या है? कोई भी तो समस्या नहीं है।
- 38:03तुम ऐसा ही नीट का नीट पी लो, पूरे के पूरे संतरे की तरह रस
- 38:09तुम्हारे खून में मिलेगा और फूलू दा तुम्हारी आंतणियों से
- 38:13एक्स्क्रिट हो जाएगा तुम्हारे लिए एक भोजन हो गया।
- 38:22ऐसा पीने की चेष्टा करो, ऐसा पियो, इस ढंग से पियो इस ढंग से
- 38:31सुनो अन्यथा महावीर मूर्ख थोड़ी थे।
- 38:34वो कहते हैं कि सुनो लेकिन श्रावक बन के सुनो।
- 38:40तब के लोग समझते भी थे बस आज दुनिया खो गई है, ज़माना है, तुम
- 38:50जानते हो यहाँ पर लाखों चैनल है। असंख्य चैनल हैं।
- 38:58एक चैनल से दूसरे पर चले जाओ। एक की भाषा नहीं आई, एक के शब्द
- 39:02नहीं आए, समझो तो जिसके शब्द तुम्हें समझ आते हैं, असर में तो
- 39:09शब्द गरमाते हैं, सत्य तो ये हैं। सत्य तो ये है शब्द भरमाते हैं,
- 39:20लेकिन तुम तुम्हें जो शब्द अच्छे लगते हैं, तुम सिर्फ उन्हें ही
- 39:24सुनते हो, बस एक भीड़ बढ़ गया, लेकिन तुम मरा से चूक गए।
- 39:34मैंने बाबा से कहा बाबा किसी और को चुन लो, मैं 35 वर्ष से पी रहा
- 39:40हूँ, मौज में क्या नहीं हो सकता ऐसा तो क्या बाबा पागल था, मूर्ख
- 39:48था सृष्टि को जलाने वाला, श्रृंगार करने वाला?
- 39:52यह बोले की ओर नहीं है कोई बोलने वाला तो इसका क्या अर्थ लिया जाए?
- 40:01इसका अर्थ यही लिया जाए कि सभी की मात्र सूचनाएं हैं।
- 40:09रस किसी के पास नहीं है। तुम किसी अन्य अन्य चीज़ के ऊपर
- 40:14मोहित हुए होगे इट इस वी अरे अट्रैक्शन इसे प्रेम नहीं कह सकते
- 40:21तुम जैसे मैंने एक जोड़े से पूछा तलाक लेने चला, मैंने पूछा बेटी?
- 40:32तुम्हारी क्या मजबूरी है? इतने प्रेम से तुमने प्रेम की
- 40:36शादी की लव मैरिज से आज तलाक लेने चली तब इसके मुँह से सुगंध आती
- 40:44थी, अब पता नहीं क्यों बदबू आती है।
- 40:50छोटे छोटे कानो से तुम तलाक ले लेते हो।
- 40:54बाबा के दो शब्द समझे नहीं आए तो चलो जहाँ समझ आ जाते हैं वहाँ चले
- 41:00जाते हैं और तुम्हें पता ही नहीं होता के समझ ही तो आड़े आती है।
- 41:04तुम्हारे यही तो तुम्हें पहुंचने से रोक देती है।
- 41:08इट्स बैरियर। इट इस ऑब्स्ट्रक्शन इट इस
- 41:11ऑब्स्टेकल फार यू तुम उसे सुनते हो जिसकी बातें तुम्हें समझाती
- 41:18हैं और समझने की बात ये है ही नहीं।
- 41:21जो समझ में नहीं आता और जो समझ में नहीं आ सकता वो ही परमात्मा
- 41:27है। जो समझ में आजाये क्या खाक
- 41:33परमात्मा होगा वो तुम्हारी समझ से छोटा होगा?
- 41:37अगर समुद्र कभी घाघर में समज आए तो उसे समुद्र का खिताब देना बंद
- 41:42कर देना क्योंकि फिर वो घाघर से छोटा हो गया।
- 41:51तुम रस को चूक गए, पुत्र आधे बढ़ गए, दो आरजू में कट गए दो इंतजार
- 41:59में तुम सिर्फ अपनी मान्यताओं को भंग करने पे ज्यादा ज़ोर दिया
- 42:05होगा तुमने। तुम निट के निट सारा नहीं पी गए
- 42:09होंगे, जबकि जरूरी ये था कि मान्यताएँ बनी रहती क्या हर्जाते
- 42:14हैं, लेकिन तुम रस को पी लेते हो, क्योंकि रस को रस को बिखेरने
- 42:24वाला। सदियों सदियों में कोई आता है
- 42:30हजारों साल नरगिस अपनी बेनूरी फिरौती है हजारों साल नरगिस अपनी
- 42:39बेनूरी फिरौती बड़ी मुश्किल से होता है चमर में दीदावर पैदा।
- 42:46यह है जिसकी आवाज उस आनंद के झरोखे से लबड़ के आती वो कभी कोई
- 42:53कभी कोई पैदा होता है रोज़ नहीं पैदा होता और वहीं तुम चूक गए।
- 43:03मैं जब चला जाऊंगा तुम देखना। एक दम से वरमार आ जाएगी सुनने
- 43:08वालो के जो आज सुनने से मेरी वीडियो को स्किप कर देती हैं।
- 43:14आगे मुझे कोई अचरज नहीं है क्योंकि मैं कोई तानाशाह थोड़ी
- 43:19हूँ। तुम बदलना नहीं चाहते, मैं
- 43:23तुम्हें बदलना चाहूं तो तानाशाही तो हो गया।
- 43:28मैं कहता हूँ अगर तुम प्यासे हो तो पी लो, मेरे पास पानी है और
- 43:35अगर तुम मायूस हो तो पी लो, मेरे पास शराब भी है।
- 43:41तुम बोझिल हो, तुम तनाव में हो तो मेरे पास शराब का भी भरा हुआ
- 43:47समुद्र है, आजा आओ मेरी बाहों में आ जाओ, समझ आओ ये अर्चन तुम्हारी
- 43:56बुद्धि है। यर्चन तुम्हारी समझ है तुम जानते
- 44:01हो हिंदी तो ये तुम्हारे लिए अभिशाप नहीं है।
- 44:06ये दोहरा उपहार भी बन सकता है। तुम्हारे लिए शब्दों से काटो, तुम
- 44:11तुम्हारी मान्यताओं को इन लबादों को तोड़ो जो तुमने ओढ़ रखे हैं।
- 44:16और नित जाने दो भीतर फिर चढ़ेगा सुरूर, फिर आएगा आनंद फिर झूमोगे
- 44:25तुम मीरा की तरह पग घुंघरू बांध नाचेगी, मीरा राधा नाचेगी।
- 44:38मधुवन में राधिका नाचे रे मधुवन में राधिका नाचे रे।
- 44:56गिरधर के मोरलिया बाजेरे गिरधर के मोरलिया बाजेरे मधु।
- 45:13राधिका ना? छे रे तुमने मुरली की धुन सुनी
- 45:20कभी? और यही मुरली की धुन जब शब्दों
- 45:24में डाल दी जाती है जैसे ये भी के वाले करते है।
- 45:32जब किशन की मुरली तुम्हें मोहित करती है क्योंकि वो शब्द नहीं तुम
- 45:38चिपक नहीं सकते, उसके साथ उसका मज़ा उठा सकते हो।
- 45:43उसमें कोई शब्द नहीं है जिसका तुम खंडन मंडन कर रहे हो, वो सीधे
- 45:48सीधे तुम्हारे हल्क से नीचे उतर जाएगी कानों से होती है।
- 45:53और सीधे सीधे तुम्हें पीनी ही पड़ेगी इसलिए भगवान कृष्ण ने
- 45:57बंसरी का इस्तेमाल किया। वो जानते थे शब्द नहीं किसी को
- 46:03उपदेश नहीं दिया उन्होंने उपदेश जहाँ जरूरत थी महाभारत में अर्जुन
- 46:08को वहाँ दिया उपदेश। राधा को गोपिकाओं को ग्रामवासियों
- 46:17को तो मुरली के धुन ही पिलाया करता है, ज्यादा समझदार थे,
- 46:23उन्हें पता है शब्दों में जाएंगे ये लोग, धुन को पी लेंगे ये लोग।
- 46:29इस धुन से भर जाएगा इनका घड़ा और जीस दिन घड़ा भर जाएगा उस दिन
- 46:34छलके जाएगा और जब छलकन आती है तो मस्ती खनक जाती है।
- 46:44इसका इंतजार करो, सीधी, सीधी, पियो।
- 46:47नीट नीट पियो। हलक से नीचे उतार लो शब्दों को भी
- 46:56पियो रस को भी पियो शराब को भी पियो शब्दों को भी पियो शब्द तोड़
- 47:03देंगे तुम्हारी मान्यताओं को और रस तुम्हें।
- 47:07आनंदित कर देगा। खोमारी से युक्त हूँ सुरत कलारी
- 47:15भाई मतवाई मदवा पी गई बिन तोलह मदवा पी गई बिन बोलह।
- 47:28धन्यवाद।