Latest / Baba ji Vijay Vats / 5 Jan 26 - भलो भयो हरि बिसरो: कबीर | माया महा ठगनी: असमानता और राजनीतिज्ञों का पर्दाफाश।Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:12माया महाठगने हम जानें इस शब्द के गहरे रहस्यों को खोलने का प्रयास
- 0:28करें बाबा। ध्यान से सुनिएगा असमानता
- 0:44राजनीतिज्ञों की रीढ़ की है। असमानता खत्म हो जाए।
- 0:54तो राजनीति ठहर न सकेगी। असमानता सभी क्षेत्रों में अगर
- 1:04मैं तुम्हें दानु से सम्मान कर दूंगा तो राजनीतिज्ञ हारेंगे।
- 1:15राजनीतिज्ञ तुम्हें हिंदू मुसलमान के नाम पे असमान करेंगे।
- 1:28धर्मों के नाम पर, मैं तुम्हें वहाँ ले जाना चाहता हूँ जब कोई
- 1:34धर्म नहीं था। जब सनातन भी नहीं था, मैं तुम्हें
- 1:46उस अवस्था में ले जाना चाहता हूँ जब कोई धर्म नहीं होता था।
- 2:00और संपत्ति के मामले में भी मैं तुम्हें वहीं ले जाना चाहता हूँ
- 2:05जब सारी धारा सब के थे कृषि एक के नहीं थे माया महाठगनी हम जाने।
- 2:23पैसा संपत्ति राजनीतिज्ञों के राज़ करने की रीढ़ की हड्डी है।
- 2:32अगर यह टूट जाए तो राजनीतिक ठहरे की नहीं।
- 2:37वह असमानता चाहे किसी भी प्रकार की को ना हो।
- 2:44राजनीतिज्ञ अपनी गलियों को बचाने के लिए अन्य अन्य तरीके सोचेंगे।
- 2:58क्यों केन के खोपड़े को जलाती रहती है?
- 3:05अगर कोई मास्टर रिटायर हो जाए तो वह छड़ी नहीं छोड़ता, हाथ का रोल
- 3:16हाथ में ही रखता है। स्कूल में छोड़ते नीयत इसीलिए
- 3:25टीचर लोगों के घरों में दंध रहता है।
- 3:31रिटायर होते वक्त उसे हाथ का रूल स्कूल में ही छोड़ आना चाहिए था।
- 3:39लेकिन वह उस रूल को साथ ले आए। अब वो घर वालों पे चलाएगा क्योंकि
- 3:47आदत हो गई इतने वर्षों का संस्कार बच्चों को पीटने का हो गया है तो
- 3:56बच्चे तो हैं नहीं। रिटायर हो गया तो घरवालों को
- 4:02पिटेगा शांति भंग आओगे इसलिए तुम किसी भी टीचर के घर में जाके देख
- 4:14लेना। किसी न किसी बात पे विवाद होगा।
- 4:18उसका कारण कौन? उसका कारण वह टीचर ज़ोर रिटायर हो
- 4:26गया। तुम्हें जानकर बड़ी हैरान हो गयी
- 4:38माया माँ ठगनी हम जाने। बहुत से प्रश्न है, छोटे छोटे
- 4:46विश्व में कवर करता जाऊंगा ध्यान से सुनते जाना बाबा ये राज़ है
- 4:57समाप्त कैसे हो? बेटा राज़ वह तो समाप्त हो जाएगा
- 5:05जब मैं समान कर दूंगा निनान में प्रतिशत आपके भय का कारण है
- 5:19असमानता क्रोध का कारण है असमानत। ईर्ष्या का कारण है असमानता,
- 5:36द्वेष, तनाव का कारण है असमानता नैनान में प्रतिशत।
- 5:49मुझे कल ही एक कमेंट आया, बाबा मैं गरीब हूँ, आपका शिष्य हूँ, आप
- 6:02मुझे जल्दी जल्दी अमीर बना दीजिए ताकि मैं लोगों को दिखा सकूँ।
- 6:08कि मैं बाबा विजय वत्स का शिष्य हूँ।
- 6:14मैं उससे कहना चाहूंगा कि बाबा विजय वत्स ने कब कहा कि मेरी
- 6:18मनादी करो, बाबा से तो पूछ लिया होता है।
- 6:29तुम्हें धन चाहिए, उसकी फरियाद से भी नहीं कर सकते या अपने अहंकार
- 6:38की इस गुत्थी को पहले रखना होता है तुम मुझे भी।
- 6:45उस खाई में धकेलना चाहते हो? मैं करूँगा नहीं का बे क्योंकि
- 6:50मैं जागा हुआ इंसान क्या दिखाओगे? लोगों को दिखावा करना डेप्युटरशिप
- 7:01है। अंबानी को सोने में कुछ नहीं
- 7:07मिलता तो सोने की पुशाके पहन कर दिखाता है आपको दिखाता नहीं
- 7:12चिढ़ाता है और यह उसका दिखावा उसके भीतर की अवस्था को।
- 7:21इंगित करता है कि यह आधुनिक खुश नहीं हो जो फटे हाल भी प्रसन्न
- 7:28हों, तालियाँ मारे, गुन गुनाए गीत गाए।
- 7:36तुम उसके फटे हाल को देख सकते हो। लेकिन वह अपने आनंद की मस्ती में
- 7:44भीगा हुआ गुनगुना रहा है। गीत जैसे तुम सपने में भी नहीं
- 7:49सोच सकते कि हम कभी गीत गुण न सकते हैं।
- 7:53तुम्हारे चेहरे तो देखो। इन चेहरों पर तीन बजकर पौने 33
- 8:01मिनट तभी तुम खिलखिलाए बच्चों के साथ क्यों तुम्हारे ऊपर 1000 सोप
- 8:12नहीं है, मैं तुम्हारी तोपनाओं को नष्ट कर देना चाहता हूँ।
- 8:20सिर्फ एक ही थोपना और वह थोपना नहीं, वह है अनुशासन, अनुशासन
- 8:31संविधान का। खाओ पियो करो आनंद लेकिन अनुशासन
- 8:40के भीतर हो खाओ पियो करो आनंद अनुशासन के रहो पाबंद संविधान में
- 8:53रह के करो। और बाकी थोपना को आग लगा दो।
- 9:06ये थोपना तुम्हारे सर के ऊपर व्यर्थ का बोझ है।
- 9:13लोग मुझे समझाने के लिए अलग अलग से बातें करने लग जाते हैं।
- 9:20और गुस्से में आके फिर कह देते हैं अनसबस्क्राइब्ड मैं कहता हूँ
- 9:29मैं कहता हूँ भलो भयो, मेरी गगरी फूटी वो तो परमात्मा सबको कह देते
- 9:40हैं। कि माला मेरे हाथ से करके है
- 9:58तुम्हें बड़ा खुशी नसीब ने राम राम का नाम जप छूट गया
- 10:05चित्तवृत्ति निर्मल हो गई। भगवान का नाम जपना भी तुम्हारे
- 10:20चित के ऊपर मैल है, तुम्हें पता नहीं तुम कहते हो जिसकी नाम के
- 10:31उच्चारण से जीवा पवित्र हो जाती है।
- 10:34मैं कहता हूँ उसके नाम के उच्चारण से चित विकृत हो जाता है।
- 10:43चित्त मल रहित नहीं होता, मल रहित तब होगा जब ये नाम छूटेगा।
- 10:55बड़ी बड़ी भ्रांतियां तुमने पाल लीं जिसने ये जात तुम्हारी चित से
- 11:06घर जाएगा। तो यह जाप पांच नाम, एक नाम, 1000
- 11:12नाम यह चित्र के ऊपर बोझ था। यह मैल है, तुम तब तक निर्मल नहीं
- 11:20हो सकते जब तक तुम जाप कर रहे हो। ये उलटी बात है।
- 11:28यह जाप करना तुम्हारे चित के ऊपर मैल की तरह एक बोझ है।
- 11:34निर्मल अवस्था को तो तुम बिल्कुल ट्रांसपेरेंट होकर ही पहुँच सकते
- 11:40हो। जाप भी न रहे।
- 11:44अक्षर ही तो है। फिर किसी को गाली निकालो तो वो भी
- 11:48अक्षर है, फिर भगवान का नाम लो, वो भी अक्षर है भला।
- 11:53अक्षरों, अक्षरों में वर्क क्या होता है?
- 11:57दोनों ही बोझ है, गाली निकालो या नाम जीव से।
- 12:05दोनों ही बोझ हैं। चित्र के ऊपर हमने निर्मल चित्र
- 12:10होना है। दोनों बोझों को गिरा दो, न गाली
- 12:16निकालो, न राम राम जपो राधे राधे करो पाछे न जपो।
- 12:29कबीर के हाथ से माला गिर के भूल गए राम राम करना और बड़े मज़े की
- 12:36बात है तुमने आजमा के दिखन बल्कि तुम्हारे गुरु कहते है थोड़ा सा
- 12:44और 232323। भलो भयो, हरी भी सरो सर से टली
- 12:55बाला नाम को वो भला कहते हैं। तो पता तो तभी चलेगा ना जब ये भार
- 13:07छूट जाएगा। भार के गिरते ही पता चलता है
- 13:13निर्भार होते ही पता चलता है कि यह भार था उठाये उठाये पता नहीं
- 13:21चलता। तुम उठाते रहोगे सारे जीवन भर तो
- 13:29मौत तक तुम्हें पता नहीं चलेगा। यह भार था चित के ऊपर निर्मल चित
- 13:34नहीं होता। जब तक कोई भी भार होता है तो
- 13:39शब्दों का भार भी एक भार है। फिर वो गाली हो या परमात्मा का
- 13:46नाम है भलो भयो, हरी भी सरो सर से टली बला, जब ये बला सर से उतर
- 14:01जाएगी, तुम तो अभी चिपटे हो। तुम भूल जाते हो तो याद किए किए
- 14:07जाते हो, तुम फिर से उसे पकड़ने की चेष्टा करते हो, यही तुम्हारी
- 14:15मोरू कथा है। अच्छा हुआ।
- 14:25जो मैं नाम लेना भूल गया भलो भयो हरी बिसरो बिसर गया वो सर से टली
- 14:33भला इसलिए नानक कहते हैं कि मैं भूल जाऊं प्रभु तुम्हें।
- 14:40देखिए नानक का शब्द नानक कहते हैं, प्रभु मैं तुम्हें भूल जाऊं,
- 14:49लेकिन तुम मुझे मत भूलना, तुम मुझे मत भुला देना।
- 14:59सबना जियाँ का एक दाता सो में विसर न जाए, वह मुझे भूल न जाए और
- 15:08कबीर कहते हैं कि मैं तुम्हें भूल जाऊं बड़ा आनंददायक है, क्योंकि
- 15:14यह याद करना तो एक आभार था। तुम्हें तुम्हारी प्रेमिका प्रेम
- 15:21की याद आती है तो यह याद एक बार है और जब तक ये याद आती रहेंगी तब
- 15:32तक बार छित पर। पढ़ा ही रहेगा, निर्मल नहीं हो
- 15:37पाओगे और भगवान कहते हैं निर्मल चित निर्मल चित मुझे पा सकता है।
- 16:00कबीर कहते हैं, बहुत अच्छा हुआ जो ये बाहर उतर गया।
- 16:06नानक कहते हैं कि हे प्रभु मैं तो तुम्हे भला ही दूं, ऐसे ही करवा
- 16:11कर और तुम कहते हो उसे याद करो, तुम उल्टे तो नहीं चल रहे होंगे?
- 16:22और उसका परिणाम है जन्मो। जन्मो से तुम पहुंचे नहीं, यह
- 16:26परिणाम तुम्हारे सामने है और मैंने उसे बुला दिया और माँ ऍम
- 16:32पहुँच गया तो यह परिणाम भी तुम्हारे सामने है।
- 16:39भुला के पाया कि याद करना एक बोझ था।
- 16:47जब तक बाहर गिर न जाए तब तक पता नहीं चलता कि ये बाहर था।
- 17:00कमली सड़ी फकीर दी हस्या ताड़ी मार फकीर के कमली से मोड़ों पर
- 17:08सोया करता था। बेचारा जहाँ राज़ बढ़ गई, वहाँ
- 17:13किसी वृक्ष की आड़ में जाकर सो गया।
- 17:19कंबली सड़ी फकीर्ति हस्या ताड़ी मार चंगा ए भी ले गया मोड्या मतों
- 17:28पार बहुत इच्छा हुआ यह भी एक वो जी था मेरे मूढ़ों पर।
- 17:39उस विराट को शब्दों में नापना असंभव है।
- 17:45इट इस इम्पॉसिबल टू से इन वर्ड्स इट्स इम्पॉसिबल टू से हिम।
- 17:54इनवॉइस तो उन्हीं शब्दों के नास्तिकता के लिए और आस्तिकता के
- 18:06लिए उन्हीं शब्दों से सहारा लेना पड़ता है।
- 18:18शब्द पहुंचा नहीं सकते और तुम्हारे भीतर यह गहरा भ्रम है कि
- 18:26शब्द हम पहुंचा देंगे, इस भ्रम को तोड़ दो, मौन पहुंचायेगा शब्द
- 18:34नहीं पहुंचाएगा। शब्द हीन होकर जब तुम मौन में उतर
- 18:41जाओगे, महा मौन में तो पाओगे वह सामने पूछा है राज़ वैसे मुक्ति
- 18:58पाने का आपने क्या फॉर्म बोला सोचा।
- 19:04एक साथ है। यही फॉर्मूला है।
- 19:11माया निनानवे प्रतिशत अपराधों को जन्म देती है।
- 19:21तुम कहते हो ये पुलिस वाले तंग करते हैं, मुझे घेर लिया था चालान
- 19:27करने के लिए, ऊपर से हो कम आया 31 मार्च से पहले पहले इतनी चालन
- 19:34देना। ये कर्त्य क्यों है?
- 19:38सब कुछ कारण को दो। इसका पुलिस वाला रिश्वत चाहता है।
- 19:52रिश्वत आगे जाएगी बड़े अधिकारी को।
- 19:57ये पंजाब में डीआईजी के पास देखो करोड़ों रुपए निकला है ये करोड़ों
- 20:03कहाँ से आए? ऐसे ही तुम मुझ जैसे गरीबों को
- 20:10सता के उनकी जेबों से निकाला होगा।
- 20:16सताया। लोगों के मनों को गरीबों को
- 20:21तड़पाएं पैसे वसूल किया है। इतना रुपया जोड़ लिया रंग लाती है
- 20:30हिना पत्थर पे गिस जाने के बाद लेकिन यह है।
- 20:37रिश्वत से कमाया हुआ पैसा याद रखना पटवारियों याद रखना पंचायती
- 20:49ऑफिसर्स यह घिस घिस के निकलेगा। रंग लाती है हीना, पत्थर पे घिस
- 20:59जाने के बाद फिर होश में आओगे तुम होश में आता है बंदा वो करें खाने
- 21:07के बाद तुम कहोगे ये क्या पैसा भी गया और इतनी देर दुख भी होगा।
- 21:19पैसा आता अकेला है, पैसा आता अकेला है और जब पैसा आता है तो
- 21:30साथ में दुख को लेके आता है। और जब ये जाएगा तो परीक्षा चला
- 21:36जाएगा। यह दुख तुम्हारे पास रह जाएगा या
- 21:40तभी अकेला है पीछे लोग पूछते हैं बाबा ट्वह करके पैसे कमाते हैं,
- 21:57क्या आपके यहाँ दान कर दिया करें आधा?
- 22:01मैंने कहा भाई मैं तुम्हारा गोबर नहीं कहूंगा, मुझको बता के जाए कब
- 22:08एक यहाँ पर कोई बंदा ₹500 देगा? मैंने कहा खोजो उस बंदे को कौन है
- 22:15ये? बड़े परेशान सभी बाबा कहते हैं ये
- 22:27तो हराम की कमाई है इसलिए मैं कहता हूँ कि तुम मुझे दान करने
- 22:34वालो दान मत किया करो, पता नहीं तुम्हारा कैसा पैसा होता है।
- 22:44जैसा खावे अन्न, वैसा होवे मन और तुम्हारे रिश्वत, मैंने इसीलिए
- 22:51रिश्वत खोरम को छोड़ दिया राम खोरम को छोड़ दिया वैसा होवे मन।
- 23:00मुझे बता के जाना भाई मैं बाबा से पूछुंगा और देखो यहाँ सिर्फ वो ही
- 23:06पैसा स्वीकार होता है, तुम्हें पता नहीं है यह तो मेरे वेतर की
- 23:12बात है। बाबा कहते हैं ये शुद्ध है, सही
- 23:18है। इसने अपने हक का हलाल से कमाया है
- 23:26तो मुझसे रख लेता हूँ जब बाबा कहते इसमें सो ये रिसौत का पैसा
- 23:32है और रिसौत देने वाला दुखी था बहुत तुम्हें फिर।
- 23:38बेटे से कहता हूँ पुत्र ऐसा कर इसको गायों को ज़रा डाल दो कोई
- 23:45थोड़ा बहुत सर्दी है, कम्बल मँगा लो, थोड़ा इसे दान कर दो, थोड़ा
- 23:54कुत्तों को रोटी, दूध पीला दो। जानवरों को मछलियों को आटा खिला
- 24:01दो सबसे बड़ा पुण्य है मछलियों को आटा खिलाना, क्योंकि कुत्ता हो
- 24:11गाय हो अगर भूखा होगा तो चल फिर लेगा गली महल्लो में दुकानों में।
- 24:17इधर उधर मुँह मार लेगा, लेकिन मछलियां बेचारी कहाँ जाएंगी?
- 24:22उनके लिए तो वही तालाब है, बस वहीं से कुछ मिलेगा तो खा लेंगे।
- 24:30इसलिए बड़ी मछली छोटी मछली को खा लेती है तो वह पाप इसीलिए नहीं
- 24:35होता। क्योंकि वह और जाए कहाँ वेइट भरने
- 24:39के लिए तुम क्या सकते? मैं मैं कहूंगा केस को मार तो
- 24:49इनको नहीं नहीं ऐसा नहीं कहूंगा। मछलियों को आटा डालना, पेट भरना
- 25:04जब छोटी मछली भी खाएगी, बड़ी मछली भी खाएगी तो तुम्हें पुण्य
- 25:10मिलेगा। अज्ञात के घर से कि तुमने छोटी
- 25:15मछलियों को मरने से बचा दिया, अन्यथा बड़ी मछली उसे खा जाती।
- 25:22और उनको मांगने के लिए कोई जगह भी नहीं है।
- 25:25झील से बाहर तो आ नहीं सकते, तालाब से बाहर तो आ नहीं सकते,
- 25:32उनके लिए तो वसुथला सफीरा है जो डाल दोगे तुम।
- 25:39तो मछलियों को अन्न डालना सबसे बड़ा पुण्य है।
- 25:44मैं तुम्हें बताऊँ एक गुप्त बात यहाँ हमारे कचेहरी के बेक साइड पे
- 25:57एक छोटी सी झील थी। मैं जब बहुशल आ जाता तो पांव अध
- 26:07सेर 500 ग्राम बदाना ले जाता। मीठा तो पंछियों को दाना वगैरह
- 26:17डाल के। फिर मैं घूम फिर लेता।
- 26:22जब थोड़ा सा मुझे लगता कि बस अब क्रिया योग थोड़ा सा आराम करना
- 26:28चाहिए तो मैं वहाँ झील में जाकर मछलियों को बनाना डालता मीठा।
- 26:38तो भाई यह पौने कर्मों के फल हुआ करते हैं।
- 26:49मछलियों को बदाना मीठा वदाना उनका मुँह मीठा हो जाता।
- 26:56खाते ही उनका पेट भी भर जाता और बड़ी आनंद में।
- 27:03उनके भीतर से दुआ बसती है। पुलिसवाला आपसे रिश्वत तो मांगता
- 27:12है कि वो या तो ऊपर से उसके डंडा चढ़ा है, लाओ भाई हमारा महीना दो
- 27:21उसको ऊपर से डंडा चढ़ा है और ये बात जाके।
- 27:24बिल्कुल आखिरी सिरे तक पहुंचती है।
- 27:27अब आप आखिरी सिरे का मतलब समझ सकते हो।
- 27:32भाई साहब के खान पीन परिधान का इंतजाम करना है।
- 27:39संसार को घूमने का इंतजाम करना है इसलिए लाओ और उस वक्त।
- 27:44देखिए कहाँ पहुंची साहब का खान पान परिधान का इंतजाम संसार को
- 27:53घूमने का इंतजाम करना है तो छोटे बच्चे सहरे सुतमा के थे, जिसके
- 28:00पास थाई कुछ नहीं बेचारे के पास। जब तुम सबके पास 25,00,00,000
- 28:06आएगा माया महा ठगनी हम जानें। मैंने कहा 99 प्रतिशत गुनाहों का
- 28:17अपराधों का मूल कारण है। जर, जोरू जमीन अब आज, जोरू तो
- 28:27बेकार हो गए जोरू ने तो खुद ही घूँघट उठा दिया आज तो जर रह गया
- 28:44वो चल रूप में हो या अचल रूप में? माया महाठगनी हम जाने तुम कहते हो
- 29:01राजभैसी कैसी मुक्ति होगी तो बताओ कैसे व्यय होगा तुम्हे जब मैं
- 29:07संस्थाओं ही भंग कर दूंगा? तो इन्कम टैक्स का कौन बंदा आपसे
- 29:15पूछेगा? भाई ये पैसा कहाँ से आया?
- 29:23कहानी सुनाने में मेरा दिल थोड़ा गम खाता है, लेकिन सुना देता हूँ।
- 29:40संत को चाहिए कि वह शेयर बाजार का काम न करें।
- 29:45क्यों मस्ती लग जाती है और शेयर बाजार तो मिनटों में उलट पुलट हो
- 29:49जाता है तो मैं गलती से कहीं शेयर बाजार का काम कर बैठा हूँ।
- 29:58मस्ती के दोनों लग गई। बाजार ऊपर नीचे हो गया, मुझे
- 30:02नुकसान पड़ गया। क्या करूँ?
- 30:16अब जुआ खेलने के लिए परमात्मा शर्मई?
- 30:26मांगने में भी शर्म आई, पता तो है उसे जुए में हार गए।
- 30:34युधिष्ठिर भी तो जुए में आ रहा था।
- 30:43तो फिर वो लेन देन के चक्कर में शेयर बाजार में उल्टा उल्टे
- 30:47ट्रांसक्शन बहुत हो जाते है। मैं अब नाम भी लूँगा, कोई बात
- 30:52नहीं, मुझे कोई आपत्ति नहीं है। इधर मेरे पुत्र की मृत्यु हो गई
- 31:01थी। मार्च का महीना था।
- 31:07अब देखिए आप एक क्षेत्र के ऊपर तस्वीर बनाइए।
- 31:15जवान पुत्र की मृत्यु। और आई टी का एक इंस्पेक्टर नाम
- 31:28जमनलाल नाम बताता हूँ देखो मैं वो कहता है जी 50,000 लगेंगे।
- 31:38आपने ये ट्रांसक्शन की मैंने कभी ट्रांसक्शन है क्या कोई पैसे का
- 31:43लेन देन हुआ है? हमारे ट्रेड होते हैं बिना पैसे
- 31:52के इतना बेस दिया, इतना खरीद लिया देना लेना कुछ नहीं, पैसा वगैरह
- 31:57कुछ नहीं। लाभ हानि देखना होता है।
- 32:00सिर्फ जो हानि थी वो मैंने चुका दी, हानि हुई थी वो कहता है आप
- 32:10ट्रांसक्शन कहाँ से किया इतना पैसा वरना तो उसे समझ है शेयर
- 32:15बाजार। तो उसने जीना हराम कर दिया।
- 32:21सारे परिवार का और इनकम टैक्स ऑफिसर था।
- 32:30याद करो ज़रा बताओ मेरी टीम क्या? धर्मपाल चौधरी, धर्मपाल चौधरी।
- 32:46उसका नाम था इट का ऑफिसर था। उसने डंडा दिया चमनलाल के चमनलाल
- 32:54मेरे पास से यहाँ घर आया भरले मकान पुत्र के मृत्यु का आघात सहू
- 33:07या नुकसान जो दे दिया है नुकसान तो दे दिया।
- 33:13मेरे पिताजी जाते हुए जाने से पहले बड़े समझदार थे।
- 33:171982 में मेरे नाम दुकान करा गए थे कि पुत्र यह तुम्हें खाने को
- 33:23रोटी नहीं देंगे, तुम्हारी वृत्ति साधू वृत्ति है, कहाँ जाके
- 33:29मांगोगे? घर में बैठ के वचन करो ये दुकान
- 33:33मैं तुम्हारे नाम करा देता हूँ, नाम करवा दिया आज वो दुकान
- 33:372,00,00,000 से ज्यादा की है शायद 3,00,00,000 की है बीच बटके मैंने
- 33:46पैसा दे दिया नुकसान का। अब ये कहता की 50,000 तो किसी
- 33:57मित्र को बीच में डाला गया तो 25,000 में निपटा लिख लो।
- 34:07नाम अच्छी तरह से लिख लो इनको मैं तो जो सुलटूँगा सुलटूँगा ही।
- 34:13अब आप नाम लिख लो वो इंस्पेक्टर जो मेरे पास घर आया था, चल के
- 34:18क्यों आया था भाई क्या आफत पड़ गई थी थोड़ा सा घर बार का हाल तो देख
- 34:28ले। तुम मत रो ऐसे संकतों से निकला
- 34:39हुआ इंसान हूँ मैं इसलिए तुम्हारी दुख और दर्द और पीड़ा को बखूबी
- 34:47समझता हूँ इसलिए मैंने वचन दिया। जब तक मेरे देश का एक एक बच्चा
- 35:01पेट भर के नहीं सोएगा, तन बदन पे कपड़े होंगे, सर पे छत होगी, मैं
- 35:07खाना नहीं खाऊंगा, यह आय तुम्हें प्रतिज्ञा बता देता हूँ।
- 35:18प्रतिज्ञा करके मैं बैठा तो मेरे पास धन आए कहाँ से?
- 35:26लेकिन उस बंदे ने ₹25,000 कहा था, इससे कम नहीं चलेगा तो मेरे बेटे
- 35:34के किसी मित्र ने वो ₹25,000 दिया।
- 35:43मैंने दोनों नाम बता दिए है आपको धर्मपाल मैं नाम भूल जाता हूँ,
- 35:49बता दिया करो चौधरी चौधरी और जो यहाँ आया था उसका नाम था छिमला वह
- 35:59इंस्पेक्टर। आई टी के ऑफिसर्स ईडी के
- 36:09सिपहसालारो इन दोनों नामों को नोट करो ईडी को तो मैं सुलटूंगा आकर
- 36:21अभी ठहर जाओ अभी वक्त थोड़ा सा पड़ा है।
- 36:29और झूठ मैं बोला नहीं करता, रिश्वत मांगते क्यों और बढ़ जाए
- 36:39और बढ़ जाए और बढ़ जाए। अडानी के पास जो है अंबानी के पास
- 36:44जो है। क्या वो इतना खा सकते हैं?
- 36:49फिर वो इकट्ठा क्यों करते हैं? अपरिग्रह संतों ने कहा, पातंजलि
- 36:55ने बुद्ध ने बुद्ध के पास तो जो प्रीग्रह किया हो सब वो भी छोड़
- 37:00के आ गए। और महावीर के पास जो परिग्रह किया
- 37:03होता है वो भी छोड़ के आ गए। अब प्रियग्रह ये क्यों जोड़तें
- 37:07चले जाते हैं? धन के अम्बार क्यों लगा लेते हैं
- 37:18ध्यान से समझना? लगा लेते हैं, खा नहीं सकते।
- 37:30दो फुल के भी और गरीब बंदा 10 फुल के खा जाता है, भूखा फिर भी रहता
- 37:36है। जोड़तें हैं कि अपन तो मर जाएगा
- 37:44फिर अपन बच्चा उसे भी तो चाहिए। खान पीन पहन सर पे छत या तो जरूरत
- 37:53है ना ज़िन्दगी तो जो क्लीन कंट्रीज़ है।
- 38:02जो ऑनेस्ट कंट्रीज़ हैं, तुम तो कह देते हो कि वे ऑनेस्ट बनाए गए
- 38:07हैं, भाई, इसी तरह मेरे फॉर्मूले के तहत।
- 38:18जब असमानता होगी ही नहीं, जब असमानता हो गई बार बार बोल रहा
- 38:25हूँ। जब असमानता होगी ही नहीं, असमानता
- 38:30अनइक्वलिटी कोई क्यों रिश्वत मांगेगा?
- 38:36ये बड़े प्यार से बात करेगा। भैया क्या आपने ये अपराध किया है
- 38:45जो संविधान के अनुसार अपराध होगा? प्रेम से पूछेगा रिश्वत तो उसने
- 38:51कहा ही नहीं। रिश्वत उसको कठोर होने पर बाधित
- 38:56कर देती है। कह तू कठोर हो फिर ये रिश्वत
- 39:01देगा, फिर ये ये बल्कि करेगा। रिश्वत का मूल कारण यही है।
- 39:14जब मैं सम्मान कर दूंगा तो रिश्वत क्यों मांगेगा और आपको तंग क्यों
- 39:23करेगा? यह जो ₹25,000 छोटे बच्चे से ले
- 39:26गया बहुत साल पहले की बात है 18 की 18 के बाद 2018 के बाद।
- 39:33अब 26 आने का होगा तो रिश्वत मत लिया करो भाई पता
- 39:50नहीं मोदी जी का कद बड़ा ऊँचा है, तुम फिर इसे ले आओ, क्या पता लगता
- 39:57है? और कौन जाने कल को कोई बाबा आ जाए
- 40:02आखिर 1 दिन तो तुम्हें याद मेरी आएगी 1 दिन तो तुम्हें मेरी याद
- 40:11आएगी तुम धन के अम्बार भी लगा लो। अडानी कहता अपने बच्चों के लिए और
- 40:23फिर तुम्हारे बच्चे भी तो इतना नहीं खा पाएंगे, इतना काहे जोड़े
- 40:27चले जा तो जोड़े ही चले जाते कुछ तो फिर पोतों के लिए।
- 40:35तुम्हें पक्का यकीन है कि तुम्हारा वंश चलेगा, पक्का यकीन
- 40:43है अडानी को अंबानी को कि मेरा वंश ही चलेगा।
- 40:47कितने वंश सेठों के खत्म हो गए, तुम्हें पता है?
- 40:55तो उनका जोड़ा विकार हुआ कि नहीं हुआ।
- 41:00बहुत से लोग यहाँ से विदा हो जाते हैं।
- 41:03उनके पैसे बैंकरों में धरे के धरे रह जाते हैं।
- 41:13हमारे यहाँ मेरी माता की धर्म बहन बनी हुई थी।
- 41:17विद्या नर्स उसके बाद बहुत सारा सोना था 1 दिन पहले मात्र वो मुझे
- 41:32कहने लगी एक या 2 दिन मुझे ठीक से याद नहीं है।
- 41:37के पुत्र पंजाब नेशनल बैंक में चलो मेरा सोना पड़ा है, मैंने कहा
- 41:43मासी तू थोड़ी देर ठहर जा, मैं काम कर रहा हूँ थोड़ा सा सो बेटा
- 41:50समय पे आजाना मैंने कहा हाँ मैं अपना काम धाम निपटा के चला गया।
- 41:58मैंने कहा बैठो पीछे माँ से चलते हैं, मैं उसे माँ से ही कहा करता
- 42:04था, दाई थी नर्स मैं बाहर बैठ गया।
- 42:14मैनेजर के कमरे में गई चाबी उसके पास थी।
- 42:18एक चाबी मैनेजर के पास थी और चाबी मैनेजर ने लगाई।
- 42:22मैं बाहर आराम से बैठा रहा। मैंने कुछ नहीं देखा।
- 42:25क्या है इसके पास? क्या फिर ज़ोर?
- 42:38जो वो सारा सोना निकाल के झोला ले गई थी साथ में झोले के नाम पे तो
- 42:46मास्क पड़ता है, लेके जाना ही होता है कुछ लेके आएँगे ना।
- 42:57झोला तो चाहिए फिर झोले में डालेंगे और किस में डालेंगे हाथ
- 43:03में नहीं आयेंगे। जब वो बाहर आयी गती बेटा।
- 43:13मैं वृद्ध हूँ मेरे से ये बाहर नहीं उठता, तुम मेरे संग संग चलो
- 43:19या झोला पकड़ लो। मैंने प्रथम बार वो झोला पकड़ा,
- 43:26लेकिन बाघा नहीं झोला उठा के उसके संग संग चला।
- 43:34स्कूटर स्टार्ट किया। मैंने कहा मर्सी बैठ जा, वो बैठ
- 43:42गई, स्कूटर था मेरे पास बजाज छः तक याद है मुझे तो मैंने कहा माँ।
- 43:51अपना झोला संभाल ले बेटा ये आगे टोकरी में रख ले नहीं माता टोकरी
- 43:56में घर जाएगा तो उसको झोली में रख ले झोले को झोली में रख ले तो
- 44:08उसने झोला मुझसे ले लिया। घर पहुंचे, मैंने कहा तू संभाल के
- 44:19लेके जइयो भारी बहुत मेरी दृष्टि से वह 2003 किलो के करीब होगा
- 44:27सोना घर आके मैं उसको छोड़कर। वह घर के भीतर चली गई।
- 44:39मैंने कहा दरवाजा बंद कर ले, अकेली थी बिल्कुल लकड़ी और इतनी
- 44:44बड़ी मंजिल बिल्डिंग आज भी है दान करके वो जैन धर्म को दान कर गई
- 44:49जाते जाते काफी वृद्ध थी। और कुछ ही दिनों में मुझे खबर
- 45:00मिली कि विद्यामासी का देहांत हो गया।
- 45:09वसीयत में लिख के गई थी या नाम करवा के गई थी, जैन धर्म के नाम
- 45:15करवा के थे। ठीक है।
- 45:19उसे सोने का पता ही नहीं लगा कहाँ गया?
- 45:25मैंने यहाँ के अधिकारीगण से पूछा कि भाई उसके पास सोना था, उसके
- 45:34पास सोना था। और उसके पास से ज्यादा लोग आते भी
- 45:37नहीं थे। या तो आपने कुछ पड़ताल की होगी।
- 45:42जब आपने चार्ज संभालना उसके बाद संस्कार किया गया उसका फिर सारा
- 45:48सामान संभालना तो सोना नहीं निकला।
- 45:50उसमें वो साप मुँह करके वो कहते कोई सोना वगैरह नहीं निकला।
- 45:55गया कहाँ पता नहीं? खैर यह इतनी छोटी बातें हैं कि हर
- 46:03बातें बाबा से नहीं पूछनी चाहिए? क्या मैं यह पूछूं कि पेंसिल गम
- 46:09हो गई? यह कहाँ पड़ी है तुम्हारा हालांकि
- 46:12मन करेगा, इतनी ही बातों को भी पूछ लिया करो।
- 46:15क्यों पूछ लिया करे भाई उस पे जो मैंने आपको बताया कि 1500 घड़ियाँ
- 46:21मिलती हैं हमें 600 घंटे देव दर्शन के वो घट जाती हैं और ये
- 46:31बातें बड़ी मायनर हैं। जो द्रव्य यहाँ पर छूट जाएगा उसके
- 46:37लिए पूछना बेकार है। यद्यपि हमारे लिए बहुत बड़ा सवाल
- 46:43है, वो दृष्टि दृष्टि का फर्क है बहुदा मैं इन बातों पे शक्ति नहीं
- 46:53वह करता। कहाँ गया वो जाने जा भाई एक मेरा
- 47:00बड़ा भाई अब भी है। वो दूध डाला करता था, वो घर के
- 47:08भीतर तक चला जाया करता था। देखो मैं किसी का क्वेश्चन करता
- 47:11था। तुम ऐसे मत नहीं नहीं, ऐसी बात
- 47:20नहीं, नहीं नहीं, तुम मत तुम मत मुझे ऐसा आएगा।
- 47:30तो जब मैं ₹25,00,00,000 सबको समान कर दूंगा, असमानता इस शब्द
- 47:35को आप अंडरलाइन कर लो। असमानता अपराधों का मूल है,
- 47:44असमानता अपराधों का मूल है। और जब मैं अपराधों का मूल्य मिटा
- 47:50दूंगा तो मैं ये क्यों मिटा दूंगा?
- 47:55क्यों तत्पर हूँ मैं क्यों इस लाइन में आया?
- 47:58मैं असमानता मिट जाएगी तो आप खाली लम्हों में आ जाओगे, कुछ नहीं
- 48:06करना है पेट भरने के लिए। है अपने पास जो हमें मिला है
- 48:15कर्तव्य कर्म बस वो करेंगे और उसके बाद करेंगे।
- 48:22ध्यान क्रिया योग करेंगे, ध्यान में जाएंगे।
- 48:28या जो भी, जिससे आपको संतुष्टि होती है कि मैं परमात्मा तक पहुँच
- 48:33जाऊंगा? मेरे मेरे मेरे हिसाब से तो चाहे
- 48:38आप राधे राधे भी करते रहो, मुझे कोई आपत्ति नहीं है, उसमें पांच
- 48:45नाम भी चपते रहो, मैं रोकूंगा ना। आपकी भावना में अड़ंगा अड़ाने
- 48:52वाला मैं नहीं हूँ अगर आपको न मिले और नाम, जप और सब विधियों।
- 49:07बेकार हो जाए फिर तुम कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे तड़पता
- 49:25हुआ। जब कोई छोड़ दे तब तुम मेरे पास
- 49:35आना प्ले मेरा दर खुला है। खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए कोई
- 49:53जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे तड़पता हुआ।
- 50:02जब कोई छोड़ दे तब तुम मेरे पास आना भी मेरा दिल खुला है खुला ही
- 50:20रहेगा। तुम्हारे लिए तुम्हारे लिए बिलकुल
- 50:29करना, राधे राधे करना, राम राम करना, 1000 नाम करना, राम जीरा तो
- 50:38माइनस पढ़ना, गीता पढ़ना। कुछ पर लेना, लेकिन अगर तुम्हें
- 50:42उनसे ना मिले, हृदय टूट जाए, ठंड अखंड हो जाए, तुम उस आनंद को छू
- 50:50ना सको तो तुम मेरे पास आ जाना। अहम तुम सिर्फ पापु विमोक्ष
- 51:04स्वामी माँ सोचा मैं तुम्हें उससे मिला दूंगा जिससे मिलने की तड़पन
- 51:15तुम्हारे भीतर बिरहा की आग बनकर तुम्हें जला रही है।
- 51:26और मैं सदा ही उपलब्ध हूँ, चौबीसों घंटे साठों घड़ी तो
- 51:39तुम्हारे ऊपर ये भी प्रतिबन्ध नहीं होगा हिरण्यकशब की तरह के
- 51:44तुम हिरण्यकशब का नाम जपों नहीं। तुम्हें जहाँ सुख मिलता है बीके
- 51:53में मिलता, राधास्वामी मिलता, सच्चा सोंता मिलता, बापू को मिलता
- 52:02आशाराम, पता नहीं आज। आस पूरी करते हैं कि आस लगा देते
- 52:09हैं पता नहीं मुझे कुछ तो आस लगा देते हैं, कुछ आस पूरी कर देते
- 52:18हैं। मैं क्यों करना चाहता हूँ तुम्हें
- 52:29समान कि ये भ्रम हट जाए? तुम्हारा फिर कोई अडानी, कोई
- 52:38अंबानी सोने के वस्त्र बहन के तुम्हें ललचाए ना।
- 52:44यह आडम्बर है, धोखा है, दिखावा है, अपने भीतर के उस मायूसी का के
- 52:49वो पा नहीं हो सके। मैं तुम्हें उनकी मनोव्यथा बता
- 52:53रहा हूँ, वो नहीं पा सके। उन्हें सिर्फ यही गौमान हो गया कि
- 53:00मैं एक नंबर का हूँ। और यह गुमान कभी नहीं पहुंचाता।
- 53:04अगर यह गुमान पहुंचा देता तो बिल गेट्स एपस्टीन कांड में भौंकता न
- 53:11भरता एक नंबर का मिल है। अगर पैसे से तो मैं मिल जाता।
- 53:22और पैसा छोड़ो अगर पैसे से खरीदी गई नाबालिग जोबना मैं मिल जाता तो
- 53:32भी तुम भोंकते न फिरते रोज़ रोज़ तुम ये करते हो, लेकिन पहुंचते
- 53:39नहीं। वो सतल को छू नहीं पाते, क्या
- 53:45नहीं किया तुमने अब तक उसको पाने के लिए बताओ कुछ धोखाधड़ी से लेकर
- 53:55जोड़ने तक बड़े बड़े अम्बार लगाने तक।
- 53:59बड़े बड़े जहाजों में उड़ारियाँ मारने तक बड़ी बड़ी महंगी कारों
- 54:07को खरीदने में तुम आनंद महसूस नहीं करते, तुम दिखावा करना चाहते
- 54:17हो कि मैं सूखी हूँ। और क्यों करना चाहते हो दिखावा?
- 54:21क्योंकि सुखी हो नहीं। जो सुखी नहीं होता वो सुखी होने
- 54:29का दिखावा करता है और यह सोने की पुशाके पहने हुए लोग तुम्हें
- 54:34दिखाते हैं। मात्र।
- 54:36और यह इंकते इसी बात की तरफ करता है कि सुख है।
- 54:42सोना पहनने से मात्र माधकता आती है।
- 54:46माधकता यानी उत्तेजना यानी अहंकार बढ़ जाता है।
- 54:51कणक कणकते 100 गुना माधकता अधिक आय।
- 54:55वो खाये बहूराय हैं, वो पाये बहूराय कनक को खा लेते हो तो
- 55:01सुस्ती चढ़ती है, इसलिए मैं उखाता नहीं ऑलरेडी टोटली अवार्ड।
- 55:10व्यक्ति गृहस्थ भोजन को नहीं करेगा और कनक भी उसके लिए गृहस्थ
- 55:14भोजन है। देखिये मेरे कहने से कनक मत छोड़
- 55:16दे अपने शरीर की बनावट को देखना कणक कणक से सो गुना माधकता
- 55:26अधिकार। सोना तो तुम्हारे अहंकार को और
- 55:32मजबूत कर देता है। सोने से लदा पदा व्यक्ति अगर कोई
- 55:38देखो तो समझ लेना ये अहंकार का दिखावा खरर हमारे एक ब्राह्मण
- 55:45हैं। वो दसों उँगलियों में सोने के
- 55:47छापे डाला करता था। और देखने वाला व्यक्ति उसी से
- 55:51पूछने जाता है, जन्त्री में और अच्छी दक्षिणा भेंट करता की इतनी
- 55:56सोने की छापे में पहने बैठा है। इसकी फीस भी तो ठीक ठीक ही होगी
- 56:02ना तो ठीक ठीक फीस से डाल देता, वह मेरे जैसे नंग के पास थोड़ी
- 56:09आएगा। दसों उँगलियों में और दो दो छापे
- 56:18जो लोग कह देते हैं वाह आप या क्या जुलूस निकाले हो?
- 56:22मैंने कहा जुलूस ही निकाले हो, ये एक विज्ञान है।
- 56:33विज्ञान है एस्ट्रोलॉजिकल साइंस ये कानों में मुद्रियां डालना नाक
- 56:45में न थ डालना। ये सब विज्ञान थे।
- 56:47मैंने बोला मेरी पुरानी वीडियो है उसको जाके सुनो।
- 56:53ये है एक विज्ञान एस्ट्रोलॉजिकल साइंस मैं इसे जानता हूँ जानूकार
- 57:00इसलिए मैंने अपने ढंग से पहना है, तुम इसको देखते हो?
- 57:04ठीक है, कोई बात नहीं, लेकिन मैं कहता हूँ इनको मत देखो।
- 57:10तुम अपने भीतर झाँको भीतर देखो तुम कौन हो इनको मत देखो, ये क्या
- 57:16है? मैंने तो बहुत कुछ अढ़ा वढ़ा डाल
- 57:19रखा है लेकिन तुम्हे ये सीखाता हूँ, नौ ताई सर।
- 57:35जीस दिन तुम ये जान लोगे ना? सोने की जरूरत रहेंगी ना?
- 57:43आरटी की जरूरत रहेंगी, जरूरत नहीं रहेंगी, तुम्हारी जरूरतें खत्म हो
- 57:47जाएंगी। फिर जरूरत उत्पन्न होती है करुणा
- 57:53से जो करुणा मेरे भीतर जगे कि अब मैं तो निहाल हो गया और तुम्हारे
- 58:03दुखी चेहरों को मुझे अच्छा नहीं लगता देखना।
- 58:11अगर तुम इसे पाब समते हो तो बस मुझे वोट मत देना, मैं बनूँगा
- 58:19नहीं और तुम्हारा दुख दर्द दूर नहीं होगा, तुम ऐसे ही दो, दो
- 58:25पाटन के बीच में पिसते चले जाओगे। तो मेरी ये तमन्ना नहीं है, ध्यान
- 58:33रखना तमन्ना तो एक वासना होती है। मेरी ये करुणा है, करुणा वासना
- 58:43नहीं होती, करुणा तो ये होती है कि देखो मैं सुखी हूँ क्या?
- 58:48और मैं कैसे सुखी हो गया इसका वे तो मैं बतला दूँ।
- 58:53यह वासना नहीं है, हालांकि हल्की सी ये वासना है हल्की सी ये बुद्ध
- 58:59के विद्र में है और अंत तक रहेंगी जब तक मैं खो ना जाऊंगा।
- 59:05सहसा सहसा मैं गुब्बार बन जाऊंगा वाष्प बनकर इस हवा में खो जाऊंगा
- 59:12तुम्हें पता भी न चलेगा कहाँ क्या है मेरी है तमन्ना।
- 59:27यही है तमन तेरे घर के सामने मेरी जान जाए, मेरी जान जाए।
- 59:47हाय तेरी है तमन्ना मेरी है तमन्ना तेरे घर के सामने।
- 1:00:05उस घर के सामने मर जाऊं मैं उसको देखूँ भंवरे की तरह और उस पर
- 1:00:16न्योछावर हो जाऊं उसे तपती हुई लो।
- 1:00:29जल के भस्म हो जाऊं अगर तुम ऐसा करने का साहस रखते हो जो घर बार
- 1:00:37आपनो, चले हमारे साथ तो मेरे साथ चलो।
- 1:00:43और मैं चाहता हूँ तुम क्यों अटके हुए हो 90% लोग से ज्यादा अभाव के
- 1:00:53कारण अटके हुए हैं देखो जब मैंने सुना कि 80,00,00,000 लोग पांच
- 1:00:58किलो अनाज के भूखे हैं तो मुझे दर्द हुआ।
- 1:01:03मैंने कहा, ये बहुत क्रिटिकल स्टेज है।
- 1:01:07इस देश को इससे पार अगर तुम उबार सको और तुम ही उबार सकते हो और
- 1:01:16कुछ आवाज़ें मुझे खेंच चलाएं जबकि आज मैं।
- 1:01:22त्रिवेणी संगम में गुम हो क्या होता उस क्षमा को देखा और परवाने
- 1:01:33की तरह हस्म हो क्या तुम जब देखोगे अपने भीतर उस जलती हुई
- 1:01:39लोको जो दिनभर रात चौबीसों घंटे जलती रहती है तो उसके आनंद में
- 1:01:45समाने को? विवश हो जाओगे, तुम देखो तो सही,
- 1:01:50तुम देखते ही नहीं भीतर उस क्षमा की जलती हुई लो के आनंद को तुम जब
- 1:01:56पी लोगे भीतर जाकर और पीना ही पड़ेगा, अगर तुमने देख लिया तो
- 1:02:02मैं कहता हूँ एक बार देख तो लो सतोरी की घटना देखना ही होता।
- 1:02:08एक बार क्षमा को निहार तो लो निहारोगे तो तुम उसकी लो पर गलों
- 1:02:16पर मटरों को विवश हो जाओगे, वो खें चलेगी।
- 1:02:21तुम्हें तो परवाना उसकी तरफ खींच जाता है, बस तुम देख लो।
- 1:02:27इसलिए मैं इतनी बार बोला किसी न किसी तरह एक बार तुम सतौरे की
- 1:02:32घटना को देख लो फिर वो शमा की जलती हुई लो तुम्हें खींच लेगी,
- 1:02:40तुम्हें उसकी तरफ जाना ही पड़ेगा चाहे।
- 1:02:44तुम इतना क्रेजिएस हो जाओगे, तुम्हें पता होते हुए भी कि ये
- 1:02:48तुम्हें निगल जाएगी, तुम बसम हो जाने को तैयार हो जाओगे इतना साहस
- 1:02:53जो रखता है वो मेरे साथ चलेगा मेरी है तमन्ना।
- 1:03:07तेरे घर कैसा बने मेरी जान जाए, मेरी जान जाए हाय।
- 1:03:30धन्यवाद।