Latest / Baba ji Vijay Vats / 16 Jun 25 - क्या है नैनो टेक्नोलॉजी? जिससे इंसान अमर हो सकता है! अमर होने का सूत्र!
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- 0:02बाबा जी प्रणब बाबा जी मेरे एक प्रश्न का जवाब दें नैनोवेज़
- 0:16टेक्नोलॉजी क्या है? जिससे व्यक्ति अमर हो जाएगा।
- 0:252035 40 तक कृपया करके इसे विस्तार से समझाने का कष्ट करें।
- 0:42अरुण भारद्वाज लखनऊ से मनुष्य ने हमेशा जो भी चाहा है उसको अंधकार
- 1:01के गर्त में ले के गया है। मनुष्य ने शक्ति चाही शक्ति का भी
- 1:14ली खोज भी कर ली अनुम बम बना दिया।
- 1:21लेकिन क्या? मनुष्य उस उच्चतम तल जिसे आनंद
- 1:28कहते हैं जीने का मज़ा कहते हैं उठापाई मनुष्य बेहोश है।
- 1:46विक्षिप्त है। बेहोशी के क्षणों में वह क्या
- 1:56करता है उसे मालूम नहीं है और वह जो करता है उसके परिणाम क्या
- 2:05होंगे? ये उसे मालूम नहीं चाहता था।
- 2:16मनुष्य चक्रवर्ती सम्राट हो रहा हूँ।
- 2:20सभी चाहते हैं वह जो कोई एक बिरला चाहता है कि चक्रवर्ती सम्राट न
- 2:33हो। वर्ण शांत हो जाऊं, आनंदित हो
- 2:39जाऊं। वह कभी कभार कोई होता है।
- 2:42इस धरती पर तथागत की तरह आता है, ठहरता है और चला जाता है।
- 3:02शक्ति चाही मनुष्य ने शक्ति मिल गई, अनुपम के द्वारा तुमने क्या
- 3:11चाहा? इसका परिणाम क्या होगा ये तुमने
- 3:16कभी सोचा नहीं। अनुबंग से एटम से एटोमिक एनर्जी
- 3:29से बिजली पैदा की जा सकती है। व्यक्ति के सुख साधन आराम के लिए
- 3:39कारोबार चल सकते हैं, कारखाने चल सकते हैं।
- 3:44मनुष्य का जीवन सतर्क सुधर सकता है, आरामदायक हो सकता है।
- 3:56लेकिन क्या किया मनुष्य ने? अगर तुम मुर्षित हो तो तुम्हारी
- 4:09इच्छाएं अगर पूरी कर दी जाए तो उस अमोरषित मन से तुम जो भी कुछ
- 4:17करोगे वह दुखदायी साबित होने वाला है।
- 4:28तुमने शक्ति मांगी, कुदरत ने तुम्हें शक्ति दे दी और आज तुम
- 4:35उसका उपयोग कैसे कर रहे हो, खुद ही देख लो।
- 4:43अकारण थोड़ी सी चिढ़ के कारण 2 साल से भी ज्यादा हो गए रशिया और
- 4:54यूक्रेन ऐप्स में। रशिया बाप है, यूक्रेन बच्चा है,
- 5:01उसका ड्रा रहा है, धमका रहा है तू ऐसा हो जा, तू ऐसा हो जा, नहीं तो
- 5:19मारेंगे। अनुभव करा देंगे।
- 5:30मूर्च्छित मन अगर कुछ पा भी ले तो वह कल्याणकारी साबित नहीं हुआ
- 5:38करता। वह विनाशकारी साबित होता है।
- 5:49शक्ति पाली तुमने संपत्ति पाली तुमने लेकिन संपत्ति बाकी क्या
- 5:56हुआ तुम दौलतमंद हो गए। क्या तुम्हें आनंद मिला?
- 6:10तुम ठहरे तुमने उस दौलत का उपयोग दूसरों को चिढ़ाने के लिए कर
- 6:16लिया? यही मूड़ता है मानव मन की इसलिए
- 6:32ऋषि कहते हैं। किसी के पास शक्ति आने से पहले
- 6:41परमात्मा उसको शुद्ध उपकर देता है क्योंकि अशुद्ध मन के पास अगर
- 6:49शक्ति चली जाएगी वह विनाशकारी होगी।
- 6:56शुद्ध मन के पास अगर शक्ति चली आएगी, वह कल्याणकारी होगी।
- 7:09तुम मूर्छित मूर्छित रहे या मोर्चा में तो गए नहीं, जागे तो
- 7:12है नहीं। और ध्यान रखना जागृति में कामना
- 7:17होती ही नहीं। सब कामनाएं मोर्चा की देन हैं।
- 7:26बेहोशी के क्षण में कामनाएं जन्म लेती हैं।
- 7:35परम होश के क्षण में कामनाएं होती ही नहीं।
- 7:42बेहोश मन काम ना करता है। मुझे ये मिल जाए, वो मिल जाए और
- 7:49उसे पता भी नहीं कि अगर ये मिल गया तो इसका परिणाम क्या?
- 7:58उसके लिए हितकारी होगा। मानवता के लिए हितकारी होगा या
- 8:04विनाशकारी होगा? ऐसा ही मानव मन ने सदा ही किया
- 8:10है। मानव मन का स्वभाव है।
- 8:23शक्ति योग्य व्यक्तियों से निकलकर राजनीतिज्ञों के हाथ में चली गई
- 8:31और राजनीतिज्ञा बल दर्जे के पागल होते हैं।
- 8:48अगर पागलों का जमावड़ा देखना हो तो भाई तब चले जाना अमेरिका सब
- 8:56पागल मिलेंगे। वह एक तरह का छोटा पागल खाना है
- 9:03अमेरिका का। बड़े बड़े बागले वहाँ रहते हैं।
- 9:11सभी राजनीतिज्ञों का यही हाल है। कौन सा बागा क्षण था जब हमने इन
- 9:23व्यक्तियों के हाथ में? शक्ति से और उस शक्ति से इन्होंने
- 9:31मूर्छित मन विनाश ही करेगा। मैंने पहले ही कहा था अमूर्छित मन
- 9:38जागा हुआ मन सृजन करेगा। परमात्मा जाग हुआ है, इसलिए उसने
- 9:47इतना सृजन कर दिया। अगर सोया होता तो वह एक ज़रा भी न
- 9:52बना सकता। ये सारी सृजना हुई उसके जागने के
- 9:59कारण, जो वृहद मालिक है संसार का। नगर वो सोया रहता एक ज़रा भी ना
- 10:07बनता जागने से होता है सृजन मोर्चा होता है विनाश।
- 10:26और तुम्हारी दिक्कत ये है कि तुम मोर्छित रहना चाहते हो और शक्ति
- 10:30भी मांगते। इसी दुविधा के कारण आज मानवता आज
- 10:38नहीं चिरकाल से कितनी बार ध्वन सुबह।
- 10:45कितनी बार ये धरती गर्थ हुई, कितनी बार प्रलय हुई और कितनी बार
- 10:54फिर से आबाद हुई? बस ये सिलसिला कब से चल रहा है?
- 11:04इससे ही तुम समय का चक्र कहते हो, सत्ययुग से कलयुग, मूर्छित मन को
- 11:16शक्ति देना, विनाश का हेतु है, परमात्मा के दो काल होते हैं।
- 11:26एक सृजन काल एक विनाशकार जब जागता है परमात्मा तो सृजन करता है, जब
- 11:37सोता है तो प्रलय करता है जब उसे आराम करना होता है।
- 11:46तो प्रलय कर देता है। मूर्च्छ तो हो जाता है परमात्मा
- 11:54शब्दों को मत पकड़ लेना, शब्दों के भीतर छिपे हुए रस को पकड़
- 11:59लेना, मैं थोड़ा थोड़ा। एस्ट्रोलॉजी पर भी काम कर लेता
- 12:08हूँ। बचपन से मैंने सीखी है 1 दिन एक
- 12:14महाशय मेरे पास है। मुझे कहने लगे कि बाबा एक बात का
- 12:19जवाब दो। ये देव सो जाती हैं देव उठ जाती
- 12:27हैं देव उठ नहीं गयारस देव शाई नहीं गयारस ये क्या है?
- 12:33क्या परमात्मा भी सो जाता है? परमात्मा भी उठ जाता है क्या
- 12:39माजरा है? इनका ज्यादा मत पूछो पागल हो
- 12:47जाओगे ज्यादा सवाल जवाब करने से व्यक्ति पागल ही हो जाया करता है
- 13:00इसलिए सवालों से वचन। बृजदारणिक उपनिषद में गार्ड की
- 13:14पुष्टि है। हे जा के बलक।
- 13:26यह सारा संसार किस पर निर्भर है? ये किस पे खड़ा है तो यज्ञ बलक ने
- 13:40कहा हे गार्गी यह सारा संसार आकाश पर खड़ा है लेकिन गार्गी तो।
- 13:53शास्त्रार्थ के मूड में थे। गार्गी ने कहा यज्ञ बालक फिर ये
- 14:02आकाश किस पर खड़ा है? यज्ञ बालक भान हो गए।
- 14:12क्योंकि प्रश्न वो है जिसका कोई जवाब नहीं है और अगर तुमने कभी
- 14:19जवाब ढूंढने की चेष्ठा की तो निश्चित ही तुम पागल हो जाओगे।
- 14:28इसलिए आज के धर्मोपदेशक पागल हो गए हैं।
- 14:33तुम उन्हें पहचान नहीं पाते, उनकी वेशभूषा देखों ये किश्ती नो टोपी।
- 14:44ये नकल करके बड़ी बड़ी वह जयंती मालाएँ।
- 14:49ये टीका तिलक ये पीली काली दाढ़ी पागलपन के निशानी है, जो उसके
- 15:03बारे में सवाल करेगा उसका पागल हो जाना निश्चित है।
- 15:15अवश्य भावी रूप से वह पागल हो जाएगा वह विराट चारों तरफ देखो,
- 15:22अगर तुम्हारे पास आँखें हैं, तो दिन के उजाले में देखो।
- 15:31अमावस्या के अंधेरे में देखो चाँद तारों को देखो गृह नक्षत्रों को
- 15:38देखो सूरज और अन्य अन्य ग्रहों को देखो झलघलाते हुए तुम्हें?
- 15:49अश्रंख के तारिक आसमान में नीरावलम खड़े हुए पाएंगे।
- 15:56कोई लैंटर नहीं, कोई सपोर्ट नहीं और इतना भार है इतना भार है।
- 16:09कि पृथ्वी से 12121515 22000 गुणा ज्यादा बढ़े और ऐसे खड़े हैं
- 16:18आसमान में निरवलंबा कोई सहारा नहीं, कोई लैंटर नहीं डाला
- 16:25निरवलंबा खड़े हैं। लेकिन ये पागलपन नहीं तो और क्या
- 16:35है? की तुम कहते हो की ग्रैविटेशन के
- 16:38कारण ये खड़े हैं ये बात तो ठीक है लेकिन बात तो ये है की
- 16:46ग्रैविटेशन फोर्स ऑफ अट्रैक्शन बनाई किसने?
- 16:53व्हाटस दी कॉज़ बिहाइंड इट हूँ इस दी क्रिएटर ऑफ ग्रैविटेशनल फोर्स
- 17:05ये तुमने कभी सोचा नहीं? बस तुम यूरे का यूरे का करना
- 17:11जानते हो और तुम्हारे पल्ले कुछ है नहीं मिल गया मिल गया।
- 17:26बस खोज को तुम कहते हो मिल गया बना कैसे अगर तुम इसकी खोज करोगे,
- 17:36कैसे बना तो तुम तागली ही हो जाओगे, यही बात यज्ञ बलके कहते
- 17:42हैं। वह दायर अन्य के उपनिषद में ले,
- 17:46गार्गी आगे मत पूछो तुम्हारा दिमाग खंड विखंड हो जायेगा तुम
- 17:54भ्रष्ट हो जाओगी, फट जायेगा तुम्हारा दिमाग चुप हो जाओ।
- 18:06यह क्रोध न था, यह चेतावनी थी विवाह नहीं मत पूछो, क्योंकि इसका
- 18:15कोई उत्तर है ही नहीं। और जो लोग उत्तर देने में इतने
- 18:21उतावले रहते हैं वो जानते नहीं कि उसका कोई उत्तर नहीं है, ना मिला
- 18:29है, ना कभी मिलेगा। सब जान लोगे।
- 18:37लेकिन ये न जान पाओगे ये बनाया किसने कैसे बना जान लोगे,
- 18:48इलेक्ट्रॉन है, प्रोटॉन है, न्यूट्रॉन है।
- 18:55इन चीजों के आपसी मिश्रण से बनी है ये है केमिकल फॉर्मूलेशन,
- 19:04लेकिन बनाया किसने ये नहीं पता चलेगा यहाँ पर होती है असली
- 19:13परीक्षा, क्योंकि बनाया किसने? यही है सवार बना बना तो हम
- 19:22मुद्दतों से देखते चले आते। लेकिन मूलतः सवाल ये है कि बनाया
- 19:32किसने? बस प्रश्न पूछना तो ये पूछा करो
- 19:41कैसे बना ये तो वैज्ञानिक आज नहीं कल पता जो चीजें कल उगड़ी
- 19:50नक्शियाँ आज उगड़ गई। आज हजारों मील दूर बैठा व्यक्ति
- 19:59तुम पर मिज़ाइल छोड़कर तुम्हें मार सकता है और तुम्हें पता भी
- 20:03नहीं चलेगा, उसके हाथ का इशारा और तुम ढेर हो जाओगे।
- 20:11तो जिसने ये चीज़ पैदा की, जिसने ये नियम पैदा किया, क्या वह नहीं
- 20:17जानता? इसको जिसने बनाया तुम कहते हो?
- 20:25ये संसार को परमात्मा कैसे होल्ड कर सकता है?
- 20:31जैसे चंद्रयान तीन को यहाँ से बैठे बैठे हमारे वैज्ञानिक दिशा
- 20:38दे रहे थे यहाँ उतर जाओ यहाँ ठहर जाओ यहाँ चक्कर लगाओ यहाँ नीचे
- 20:45आओ, यहाँ साइड में जाओ, लेफ्ट जाओ राइट जाओ।
- 20:50यहाँ बैठे बैठे दिशा निर्देश दे रहे थे और चंद्रयान चल रहा था।
- 20:55उसी तरह यही तो संत कहते हैं कि वह नचा रहा है तुम्हें, तुम
- 21:06कठपुतली हो उसके हाथ की। लव से बोलते हैं तो तुम्हें पागल
- 21:12रखते हैं। वैज्ञानिक बोलते हैं तो तुम
- 21:16उन्हें समझदार पहनते हो। नोबेल दे देते हो बस वैज्ञानिक को
- 21:25सतल पे न चला जाएगा जा पाएगा। जीस संतल्प पर याज्ञवले के पहुँच
- 21:31जाते हैं कृष्ण पहुँच जाते हैं जहाँ यात्रा समाप्त होगी
- 21:37अल्बर्टाइस्टीन की आर के मेडिस की न्यूटन के।
- 21:46वहाँ से यात्रा शुरू होगी या गवार यहाँ तुम्हारे विज्ञान थक जाएंगे
- 22:00वहाँ अध्यात्म की शुरुआत होगी। तुमने शक्ति मांगी, तुम्हें शक्ति
- 22:12मिल गयी, इतनी शक्ति मिल गयी और तुम ये जाके चंद्रमा पे भी पटक
- 22:17सकते हो और इतना भारी पंप बना सकते हो वहाँ जाके चंद्रमा पे पटक
- 22:26के यहाँ जाओ। चंद्रबन भ्रष्ट कर जाएगा खंड
- 22:32विखंड हो जाएगा मुर्ख के हाथ में जब शक्ति लग जाती है, वह सदा
- 22:43विनाशकारी होती है। राजनीतिज्ञों के हाथों में
- 22:50वैज्ञानिक खोजें बढ़ गई हैं तो राजनीतिक मूड व्यक्ति तो मूर्खता
- 22:59के लिए ही इस्तेमाल किया करता है। तुमने किसी को वोट देके
- 23:08लोकतांत्रिक ढंग से राजा बनाया और वह सदा राज़ करूँगा जब तक मर ना
- 23:14जाऊं इसकी कामना पा ले तो यह मूडता नहीं तो और क्या है?
- 23:27भला कल का किसी को भरोसा है कौन कह सकता है कि हम तो साल जीवित
- 23:34रहेंगे? आने वाले कल की तुम्हें खबर है
- 23:42सामान्य 100 बरस का पल की खबर नहीं मूड व्यक्तियों के हाथों में
- 23:53शक्ति देना अपराध आज नहीं कल विज्ञान को जो चीज़ खोज ली जाएगी।
- 24:06वे गुप्त रखनी पड़ेगी और इन अंधे लोगों से बचाना पड़ेगा कि कहीं ये
- 24:17शक्ति का स्रोत उनके हाथ में ना लग जाए।
- 24:26इनके हाथों में वो शरारती अंदाज है के सोने को हाथ लगाई माटी हो
- 24:33जाए ये राजनीतिज्ञ कहलाते हैं। आज तुम्हारे हाथ में शक्ति है,
- 24:49तुमने शक्ति मांगी, लेकिन तुमने शक्ति का कैसे उपयोग किया?
- 24:55मुझे बताने की आवश्यकता है एक उत्तर कोरिया का पागल बैठा वो
- 25:01कहता कि मेरे तो टेबल के ऊपर। एटोमिक बम कार्य मौत बड़ा होता
- 25:08है। हर वक्त क्या दिखलाना चाहता है?
- 25:14संसार पूजा यही दिखलाना चाहता है कि मैं सबसे ज्यादा शक्तिमान वह
- 25:26भूल गया कि ये शक्ति तुमने खोजी नहीं, किसी वैज्ञानिक ने खोजी थी।
- 25:35तुम मातृ मूर्ड़ता के कारण इसको दुरुपयोग कर रहे हो?
- 25:41शक्ति का उपयोग। साधु योग होना चाहिए, भलाई के लिए
- 25:45कल्याण के लिए होना चाहिए। परमात्मा ने इसलिए बनाई थी
- 25:55परमात्मा मृत भी बनाता है, जहर भी बनाता है लेकिन जहर बनाने का कण।
- 26:04जहर अच्छे भले व्यक्ति को मार सकता है और दूसरा देखो अगर तड़पता
- 26:10हुआ व्यक्ति हो मेरे पास आ जाते हैं लोग बाबा मेरी माता है, मेरा
- 26:18पिता है, मेरा दादा है, मेरी दादी है।
- 26:23मुद्दतों से तड़प रही है प्राण नहीं निकलते उसके कुछ उपाय करो
- 26:31मैंने कहा क्या उपाय करूँ, मार दूँ उनको तो चुप हो जाते हैं मुँह
- 26:37उतर जाते हैं और क्या कहने आये हो मुझे यही तो कहने आये।
- 26:44सुंदर सुंदर अल्फाज प्रयोग करते हैं उसको मुक्ति दे दो कहना वो
- 26:51यही चाहते हैं कि उसको मार दो, सुंदर शब्दों का प्रयोग करके
- 26:57तुम्हारी मनोवृत्तियों को तुम छपवा लेते हो।
- 27:00सत्यो को तुम छपा लेते हो तुम चाहते हो वह मर जाए, तड़पे ना,
- 27:06क्योंकि तुमसे उनका तड़पना देखा नहीं जाता, वही जहर है जो अच्छे
- 27:12भले व्यक्ति को मर सकता है और वही जहर है जो तड़पते व्यक्ति को मार
- 27:18दे तो कल्याणकारी होता है। ओशो डेथ बर्ड विथ है अब छोटी सी
- 27:31कहानी बता दो बस ये फौज नाराज ना हो जाए जो चिपटी पड़ी है ओशो से
- 27:41जो चले गए। और सारी उम्र में कहते रहे मेरे
- 27:46जाने के बाद मेरे से चपट मत जाना, लेकिन दुनिया का बेहोशी का।
- 28:02मेजरमेंट इतना गहन है कि वह संतों की गई हुई बात को मानता नहीं है।
- 28:10कहता है किसी क्षण में कहते हो स्पष्ट कह गए, मेरे जाने के बाद
- 28:19मेरी सब विधियों बेकार हो जाएँगी। जैसे कोई कैटेलिटिक एजेंट कहे कि
- 28:25मेरे जाने के बाद तुम्हारी राह आने का क्रिया ही बंद हो जाएं तो
- 28:31इसमें गलत भी क्या है? मैं आज बैठा हूँ।
- 28:38सभी काम धाम चल रहा है। और कल मैं चला जाऊं, मेरे ही होने
- 28:46से तो खेलते थे गुलशन मेरे चले जाने से बस यहाँ आएगी।
- 29:05छाती, पीठ, पीठ के जहरे मेरे जाने के बाद तुम प्रबुद्ध हो सकोगे
- 29:11छोड़ दो मेरी बातों को याद रखना, लेकिन लोग आज साहित्य से चुपके
- 29:16बैठे हैं। क्योंकि तुम प्रबुद्ध होने के लिए
- 29:22गए ही नहीं थे, वहाँ तुम दुकानदार थे, तुम व्यापार के लिए गए थे और
- 29:28तुम व्यापारियों ने आज संस्थानों पर कब्जा कर लिया।
- 29:35बगाहे तुमने ऐसी करामातें की कि तुम उन संस्थाओं पे काबिज हो गए,
- 29:46तुमने उनकी खोजों को बेच दिया, विकृत कर दिया तो तड़प रहा था
- 29:54उसो। डेथ बैठ के पड़ा ओशो बोले मुझे
- 30:01पाजनेस इंजेक्शन दे दो, आई वांट टु डाइ सून, शीघ्र मरना चाहता
- 30:16हूँ, मैं तड़पना नहीं चाहता। उसको जहर का इन्जेक्शन दे दिया
- 30:25गया। 10 मिनट के भीतर भीतर प्राण से
- 30:33रूठ के। ये सब बंद कमरे में हुआ।
- 30:38आज तक किसी को मुश्किल नहीं, उसका कोई साक्षी नहीं।
- 30:43ये तो कुछ लोग हैं जो दूसरे लोगों की खबर रखते हैं।
- 30:48वो तुम्हें कभी भी बतला सकते हैं कि क्या हुआ था।
- 30:52सत्य क्या था? और क्योंकि तुम उन संस्थाओं में
- 30:56कब्जा करना चाहते थे तुमने जल्दी की, तुम तो चाहते ही तो कैसे मार
- 31:00दूँ तुमने जल्दी से उसकी लाश उठाई बुद्धा हाल में रखी बस कितनी देर
- 31:07में घड़ियाँ छिनी गईं इतनी देर के लिए तुमने दिखावे के लिए?
- 31:13मुद्दा हाल में उसकी जड़ बड़ी रखी वह व्यक्ति जिसका शंक सरकार पूरे
- 31:22देश विदेश से उसके मानने वाले, उसे प्रेम करने वाले आके उसका
- 31:27अंतिम दर्शन करता है। उसके चरणों में उसके पास आके
- 31:41प्रेम का रुझन रोते उसकी याद में तड़पते दो घड़ी।
- 31:51और मौका ही नहीं दिया था। व्यापारी सदा डरता है मेरी पोल न
- 31:58कुलजा और राजनीतिक व्यापारी। इसलिए बुरी बातों को गलत बातों को
- 32:08जल्दी से छिपाने के उन्होंने छिपाने के लिए एक मीडिया रखा।
- 32:13अगर कुछ गलत हो जाए, जल्दी से छिपा देना, ऊंचे ऊंचे बोलने लग
- 32:17जाना, शोरगुल में सच छिप जाएगा, मिट जाएगा वह व्यक्ति जिसका
- 32:29संस्कार। चंदन की लकड़ियों में होना चाहिए
- 32:33था। करोड़ो लोगों की मौजूदगी में होना
- 32:38चाहिए था। अस्त्र बहाते हुए सभी लोग चाहे हश
- 32:46खुशी से उसको विदा करते हैं। चाहे रुद्रभरी आँखों से उसे विदा
- 32:51करते हो लेकिन सबकी मौजूदगी में वो विदा होता है।
- 32:56पंचतत्व में विलीन होता उसका शरीर और तुमने क्या किया?
- 33:02उस व्यक्ति के साथ तुम्हें शर्म आनी चाहिए।
- 33:10कि वह जल्दी जल जाए। उसके कारण तुमने उसके ऊपर मिट्टी
- 33:16का तेल छिड़का, घी नहीं छिड़का, मिट्टी का तेल छिड़का, पेट्रोल
- 33:25मिक्स छिड़का। ताकि इसकी बॉडी पोस्टमॉर्टम के
- 33:32योग्य न रहे। हमारी पोल न खुल जाए और जैसे ही
- 33:39वो धू धू करके जलने लगा, तुम्हारे हृदय सुकून से भरना लगा।
- 33:47हमारी चाल पूरी। ओके चाल पूरी हो गई है लेकिन
- 33:55पुत्रो तुम भी क्या लेकर जाओगे यहाँ से वह व्यक्ति जो संसार को
- 34:03बहुत कुछ अवधि देने में समर्थ था। उसको तुमने कौड़ी के भाव मार दिया
- 34:16और यहाँ से विदा कर दिया। धक्के देती है उसे और तुम्हें
- 34:22ज़रा भी लज्जा नहीं है। वह व्यक्ति जो विश्व की अमानत था,
- 34:30उसके भीतर एक वो अंतिम प्रहर का अनुभव छिपा था।
- 34:39उसको तुमने प्रकट नहीं होने दिया। बहुत सी चीजें थी अभी।
- 34:45जो नहीं बोल पाए थे ओशो और सदा ही शेष रह जाती है कोई कितना ही भूल
- 34:50जाए क्योंकि वह अनंत है, जिसके बारे में बोलने चले है और अनंत को
- 34:58बोला नहीं जा सकता। अनंत सदा ही कुछ अन्नबोला रह
- 35:04जाएगा और से ही पूछो तो सब अन्नबोला रह जाएगा कुछ बोला जाए
- 35:10ये गनी मत समझो तुमने संतों के साथ ऐसा ही व्यवहार किया है।
- 35:23मूर्ख के हाथ में शक्ति आ जाए, बिल्कुल ऐसे ही है जैसे बच्चे के
- 35:29हाथ में हम रिवॉलवर दे दे बंतर के हाथ में हम रिवॉलवर दे दे क्या
- 35:35होगा? बंदर के हाथ में उस तरह दे तो
- 35:41ब्रेड पकड़ा दो देखो क्या होता है समझ के बिना सभी चीजें विनाशक हो
- 35:52जाती है। समझ हो तो सभी चीजें।
- 35:57सृजनात्मक हो जाते हैं। हर व्यक्ति गुरुर में है और तुमने
- 36:12आज धरती को पहले तो श्मशान घाट अलग होते थे, बस्तियां अलग होती
- 36:18थीं, आज मुझे बताओ बस्तियां कहाँ? कोई बता पाएगा आज बस्तियां हैं ही
- 36:27नहीं कोई एक व्यक्ति प्रबुद्ध, किसी एक एकांत कमरे में बैठा बस
- 36:33वही बसते, बाकी सब शमशान। पहले कुछ स्थानों पर शमशान होते
- 36:43थे और बाकी बस्तियां होती थीं। आज बस्ती तो कोई है नहीं, सारा
- 36:51सारा संसार तुमने शमशान बना दिया है ज़रा खुली आँखों से निहारकर
- 36:57देखो, संसार को तो पता चलेगा। यूक्रेन है, रशिया है और कल तो
- 37:07मैंने सुना ये पागल ट्रम्प ये सब दिखाना चाहते है कि हाँ हम हुए
- 37:15थे, लेकिन याद रखो बेटा। इतिहास तुम्हें भूल ही जाएगा और
- 37:26तुम्हारा नाम तुम कहते हो रह जाए। नाम तो गुडसे का भी रहता है।
- 37:33नाम तो वीर जाफर का भी रहता है। नाम तो जयचंद का भी रहता है,
- 37:41लेकिन वो विख्यात नहीं होके रहते। वो कुख्यात होके रहते हैं।
- 37:49अगर ऐसे उपद्रव करोगे और नाम को अमर करने से कोई व्यक्ति थोड़ी
- 37:55अमर हो जाता है। ये सब तुम्हारे मन की चाल बाजियां
- 38:02हैं। बच्चे पैदा कर लो, नाम रह जाएगा
- 38:06यह लिखेगा मेरा ये नाम मेरे बाप का ये नाम मैं अमर हो जाऊंगा।
- 38:14तुम पीढ़ियों को सिर्फ इसलिए जाम देते हो कि तुम्हारा नाम अमर हो
- 38:19जाएगा, वह बच्चा लिखेगा, लेकिन बच्चे ज्यादा समझदार हैं, बच्चे
- 38:29आज अपना नाम लिख देते हैं या नीचे लिख देते हैं।
- 38:33पिता का नाम हिरण्यकश्यप क्या करोगे सर जब तुम उन्हें मारोगे?
- 38:43जब पिता पुत्र को मारेगा तो पुत्र पिता के बारे में क्या संज्ञान
- 38:48देगा? हिरण्यकश्यप?
- 38:51क्योंकि रण्य कश्यप ने भी तो अपने पुत्र को मारा मारने की चेष्टा
- 38:55की। ऐसे किसी के मारने से कौन मरता
- 38:59है? जाको राखे साईयां मार सके ना कोय,
- 39:06बाल न बापू कर सके जो जग वैरी होय।
- 39:14यहाँ से मैंने शुरू किया अब तुम्हारी बात को मिल गई कल मेरे
- 39:20अच्छे से एक क्लिप भेजी मुझे हमारे महान श्रद्धगुरु।
- 39:30उसको सेना के जवानों ने पकड़ रखा है।
- 39:32पुलिस ने और लिखा है ऑल ऑफ दी इंडिया, इस मोरनी सारा भारत मोरनी
- 39:44बना हुआ है हसोमत भाई? ऑल ऑफ दी इंडिया, इस मोरनी सारा
- 39:54भारत मोरनी बना हुआ है? मैं कहा भारत को क्या हुआ भाई?
- 40:02सदगुरु नहीं अपना? क्राइम कन्फेस कर लिया।
- 40:09उसकी सिटीजनशिप समाप्त हो जाएगी। मैंने कहा कोई राजनीतिक चालबाजी
- 40:15होगी। मैं इन्हें अच्छी तरह से जानता
- 40:19हूँ। ये कोई राजनीतिक प्रचार का तंत्र
- 40:23होगा? भला सद्गुरु से इंडिया ने लेना
- 40:30क्या है? वह मोरनी क्यों बनेगा?
- 40:33उसने क्राइम कन्फेस कर लिया है। अब मैं क्या करू?
- 40:45राजनीतिक धंधे हैं। इतना कमा लिया तुमने इतना कमा
- 40:51लिया खाओगे पापा आराम कब करोगे कोई थोड़ी बहुत अकल की बात भी कर
- 41:07लिया करो। काम धाम कमाई धंधा इसीलिए होता है
- 41:12कि जोड़ रहो ताकि बाकी की उम्र में हम आराम से अपने भीतर की
- 41:17यात्रा को शुरू कर सके। किसी को क्यों परेशान करना अगर
- 41:25सभी लोग महात्मा बुद्ध की तरह मांगने लग गए?
- 41:29जो कि मांगना तो बहुत मुश्किल है। इससे बड़ी बात और क्या होगी?
- 41:36मांगना बड़ा मुश्किल है, मांगने में अहंकार टूटता है और महात्मा
- 41:43बुद्ध तो राजा है। बारिश है, अपनी गलती को छोड़ के आ
- 41:47जाती है, फिर मांगने लग जाते हैं। इसके भीतर तो कोई कारण था, कारण
- 41:57था अगर तुम्हें वास्तव में उस तत्व तक पहुंचना है।
- 42:04तो तुम्हें अपने आपको खतरों से घेरने देना होगा।
- 42:11खतरों में रहना होगा। यह था रस उसका जब तक तुम खतरों
- 42:23में नहीं गिरोगे। तब तक वह तत्व नजर नहीं आएगा जैसे
- 42:32थोड़े से जुगुणों को देखने के लिए भयंकर काली रात का होना जरूरी
- 42:37होता है। जुगनों की चमक बहुत थोड़ी होती
- 42:39है, दिन में नजर नहीं आती। जुगलों की चमक दिन में नजर नहीं
- 42:46आती रात के घोर अंधकार में और वह भी अमावस्या की रात हो तो घने में
- 42:52हो ज़रा भी कहीं से भी तारे की चमक न हो।
- 43:02अगर खुद के उस जीवन तत्व को देखना है तो खतरे में पड़ना होगा।
- 43:09अनसेक्योर होना होगा, मेरा विलंब होना होगा।
- 43:14तुम अविलंबन ढूंढ़ते हो और अविलंबन के तुम।
- 43:20तरीके खोजते हो और साधनों पर उपलब्ध करवातें हो ये धान्य,
- 43:24धान्य, पद्वियाँ, प्रतिष्ठा, घर, बार, मकान, बड़े बड़े बंगले वगैरह
- 43:33ये सब तुम्हारी सुरक्षा के उपाय। सब तुम सुरक्षित होना चाहते हो,
- 43:41कहीं ऐसा न हो जाए, कहीं ऐसा न हो जाए।
- 43:44अब मेरी बात ध्यान से सुन लेना। जिसने अपने आप को सुरक्षित किया
- 43:56वह मर गया। जिसने अपने आप को असुरक्षित किया
- 44:05वह जीवित हो जाएगा। यह उल्टा काम है लेकिन सत्य है
- 44:09सत्य की भारभाषाएं यूँ ही की जाती हैं।
- 44:17अगर शक्ति को ढूंढना है तो बुद्ध का बिल्कुल रास्ता सही, यू विल
- 44:25हैव टु बी अनसेक्योर और तुम देखो अपनी जिंदगी में जो भी कर रहे हो,
- 44:31सब सिक्योर होने के लिए कर रहे हो।
- 44:34जीवन बीमा करा रहे हो, कार का बीमा करा रहे हो, अपना बीमा करा
- 44:40रहे हो, माल का बीमा करा रहे हो तो हमें पता नहीं है, इससे बड़ी
- 44:47मोड़ता और कोई नहीं है। क्योंकि इसकी वेश में यू वांट टु
- 44:56बीसी के और और सी के और होना बस अध्यात्म से दूर होना है।
- 45:05इसको एक फॉर्मूले की तरह ले लो, पहली बात है जो मैं अंडरलाइन करवा
- 45:09रहा हूँ। सीख और होना अध्यात्म से दूर होना
- 45:14है। अनसिक और होना अध्यात्म के करीब
- 45:17जाना है जैसे जैसे तुम अपने आप तक पहुंचोगे यू विल हैव टु मेल्ट।
- 45:31तुम्हें पिघलना होगा पिघलना होगा पिघलना होगा उस पानी की तरह जो
- 45:37100 डिग्री पे भाप बन जाएगा और जैसे ही तुम बिल्कुल उसके करीब
- 45:41जाओगे, 100 डिग्री पे उबल जाओगे और फिर तुम उसमें मिल सकते हो।
- 45:49100 डिग्री पे वास्प बन जाता है ट्रांसफर्मेशन होता है पानी में
- 45:54लिक्विड टर्न्स इंटू गैस और हवाओं में उड़ जाता है, नाचता है बादलों
- 46:01में जाकर मेघ बनता है तो इस फॉर्मूला को याद रख लेना।
- 46:12इफ यू वांट टू बी रियली? हैप्पी सच में तुम सुखी होना
- 46:18चाहते हो, सच में सुखी हो, न आनंदित होने को कहते हैं।
- 46:29तुम्हें असुरक्षित होना होगा। बहुत बड़े समझदार थे बुध के भीतर
- 46:37पर मत में उतरा या किसी गुरु ने बताया बाहर जाओ घर से ही यहाँ सब
- 46:43सुविधाएं। जहाँ सुविधाएं न हों, दोपहर की
- 46:51मिल गई, साझ को मिलेंगे, नहीं मिलेंगे, कन्फर्म न हो यहाँ तो
- 46:56हुक्म चलता है। ऊँगली उठती है और आ जाता है सब
- 46:58कुछ वहाँ चले जाओ, यहाँ कोई पता नहीं।
- 47:09बूंद छिपी किस बादल में बूंद छिपी, किस बादल में कोई जाने ना।
- 47:25कोहरे ताल मिले, नदी के जल में नदी मिले सागर में सागर मिले कौन
- 47:40से जल में? को भी जाने ना कोहरे, ताल मिले
- 47:51नदी के जल में जहाँ शाम का भरोसा ना हो ऐसा मारते हैं शाम का
- 47:59भरोसा। बुध हुए वही चले जाते हैं जहाँ
- 48:05शाम का भरोसा नहीं। बुध पहले हुए ऐसा बात में हुए यह
- 48:12एक फॉर्मूला है। तुम्हारे बड़े बड़े महल अटारियाँ
- 48:18साथ साथ सुरक्षा घेराव में चलना। तुम्हारा सुरक्षित होना एक बात
- 48:22निश्चित है। तुम अध्यात्मिक कभी नहीं हो
- 48:27पाओगे, अध्यात्मिकता का प्रचार लापकर सारी दुनिया सारा भारत
- 48:36तुम्हारा गुणगान करने लगे, जयकार करने लगे।
- 48:40लेकिन तुम अध्यात्म कभी नहीं होगे।
- 48:43तुम राजनीतिक हो, संसारिक हो, संसारित ही रहोगे, क्योंकि
- 48:47आध्यात्मिक होने के लिए असुरक्षा का होना अनिवार्य है।
- 48:50गाँधी की तरह असुरक्षित पटेल ने कहा तुम्हें मार देंगे, आज मैं
- 48:57सपे से लाया हूँ। मुझे ये भनक लगी है।
- 49:03गाँधी ने दो टूक जवाब दिया और मैंने अब करना भी क्या है?
- 49:10तुम जाओ, अपना राजकाज संभालो, अल्फाज़ सख्त थे लेकिन सत्य थे।
- 49:19जानते थे गाँधी इस राज़ को असुरक्षित होना, परमात्मा के करीब
- 49:24होना, इसलिए बेधड़क होकर जारजे पंचम के सामने नंगी खुली छाती लिए
- 49:33खड़े हो जाते हैं चार हड्डियों वाले को।
- 49:36वो इस राज़ को जानते हैं। असुरक्षित होना परमात्मा के करीब
- 49:41होना है। यह क्या है जो व्यक्ति को अमर
- 49:47बनाती है? लोग इस पर थोड़ा सा विचार करें।
- 49:54बाबा क्या है टेक्नोलॉजी जिससे व्यक्ति भविष्य में अमर हो जाएगा।
- 49:57मेरे घना हमारी मांसपेशियां एक विशेष उम्र के बाद गस्ती हैं।
- 50:06घस्ती तो सजाई है लेकिन रिपेयर हो जाती हैं।
- 50:12सरल भाषा मैं समझाऊंगा क्योंकि प्रत्येक इस गुरु विद्या को गहन
- 50:16विद्या को जानता नहीं क्योंकि साइंटिफिक है।
- 50:24हमारी मांसपेशियां गस्ती हैं। 3040 वर्ष तक तो पता नहीं लगता
- 50:34क्योंकि नहीं बनती रहती। तुम्हें पता है जो तुम आज हो,
- 50:43तुम्हारी विराज कौन है? मैं एक महीने के बाद नहीं रहेगा,
- 50:48सारा बदल जाएगा। नहीं पता वो सारा मर जाएगा, नया
- 50:55खून पैदा हो जाएगा, तुम्हें पता भी नहीं चलता।
- 51:00ऐसे ही हमारी मांसपेशियां घसती रहती हैं।
- 51:04मैं बोलता हूँ मांसपेशी हैं घसरी में।
- 51:11तुम रात को सो जाती है। भोजन और स्लीपिंग हमारी
- 51:17मांसपेशियों को फिर से सुचारु ढंग से चलने में योग्य बना देती है।
- 51:23रिपेयर करती है रात को। प्रकृति हमारी मांसपेशियों को और
- 51:30रिपेयर करने की एक सीमा है तो सीमा के बाद आके रिपेयर होती है।
- 51:37फिर तुम घसते ही चले जाते हो, घसते ही चले जाते हो, इसी को
- 51:41बढ़ावा खाते हो। फिर एक वक्त ऐसा आता है कि
- 51:46मांसपेशियां घिसती तो हैं, नई नहीं बनती और जब नई नहीं बनती,
- 51:52घसती ही चली जाती हैं और इतनी घस जाती हैं कि व्यक्ति उठने के
- 51:58बैठने के बोलने के और सांस लेने तक के योग्य नहीं रहता।
- 52:02इतनी भी। नहीं शक्ति भक्ति के हृदय भी धड़क
- 52:06जाए उसे ही मृत्यु कहते हैं सरल भाषा में मेहनत में समझाती है
- 52:15तुमने कुछ भी किया, मैं कहता हूँ राम राम करो राधे राधे करो,
- 52:19तुम्हारी मांस कैसे करते रहो, करते रहो।
- 52:24यू विल फील योरसेल्फ एनर्जीलेसनेस एनर्जीलेसनेस ये रात को सो जाओगे
- 52:32फिर से वो तुम्हारे भीतर की प्रकृति इसको रिपेयर कर देगी सुबह
- 52:37उठोगे तरो साझा लेकिन कुछ उम्र तक यह होगा उसके बाद।
- 52:42बननी कम हो जाएंगी, घिसनी ज्यादा हो जाएंगी, फिर उसके बाद बननी बंद
- 52:48हो जाएंगी। घिसनी ही घिसनी रह जाएंगे, फिर
- 52:52क्या होगा, घिसती ही चली जाएंगी। घिसती ही चली जाएंगी और 1 दिन हो
- 52:58जाएगा। सोन्य शक्ति नहीं बचेगी, मांसपेशी
- 53:01नहीं बचेगी तुमने कभी संत को देखा?
- 53:03सिया राम जी को सबने देखा होगा। शायद बस अभी पिछले कुछ दिन पहले
- 53:11ही। उन्होंने अंतिम सुशासी कहीं दिखता
- 53:19था कि इनके शरीर के ऊपर मांस हो, फिर भी थोड़ा सा मांस था, लेकिन
- 53:26मैं उसे देख कर सदा यही कहता बस अब घस गई है सारी अब जय श्री राम
- 53:33बोलने वाले हों। और 1 दिन वो आ गया।
- 53:37जय श्री राम हो गया सिया राम जी का बाबा जी प्रणय करके बस यही है
- 53:48विज्ञान क्या करेगा? किसी ने बंद कर दिया।
- 53:51और परमात्मा क्या करता था? परमात्मा के पास ये ऑप्शन था कि
- 53:56उसने तुम्हारे कर्मों का भुगतान करना है।
- 53:59कर्मों का भुगतान करने के लिए जब तुम्हारा शरीर गया है और भुगतान
- 54:04अभी बाकी है तो वो तुम्हें इस घर से उठा के नए घर में।
- 54:09डाल देता है। लो भाई इस घर में बुख्तलों कर्म
- 54:14भोग ने अभी बाकी यही बात कही है। भगवान कृष्ण ने दूसरे अध्याय में
- 54:22वाशांश ही ऋणानी तथा विहाय नवानि घृणाति नरो प्राणी।
- 54:28तथा श्री रानी विहाय जीरा अनन्याणी सयाती न वाणी देही।
- 54:35जैसे प्राणी वस्त्र त्याग कर तुम नए वस्त्र ग्रहण कर लेते हो, वैसे
- 54:42ही आत्मा प्राणी शरीरों को त्याग कर।
- 54:46नए शरीर ग्रहण कर लेती है। बस यही व्यवस्था है।
- 54:51सरलतम रूप से बताया जाए तो विज्ञान क्या करेगा?
- 54:59इन घिसती हुई मांसपेशियों को रोक लेगा, घिसने नहीं देगा।
- 55:04यह तुरंत वापस नहीं बना देगा। दोनों में से कोई उपाय करेगा ठीक
- 55:10है ये तो हो गया मनुष्य कभी नहीं मरेगा, नहीं मरेगा ऐसे काल भी
- 55:17आएँगे इस धरती पे जब मनुष्य की मानव की।
- 55:25उम्र हजारों साल तक आज भी कहानियों हैं, सत्य नहीं हैं,
- 55:34कहानियों हैं ये भगवान राम ने 10,000 साल तक राज़ किया।
- 55:41लेकिन ये इंगित करता है कि कभी ज़माना था इस त्रेता में, नहीं तो
- 55:52किसी और त्रेता में, क्योंकि त्रेता कौन सा है किसी और त्रेता
- 56:00में। उम्र 10,000 साल होगी 20,000 साल
- 56:0450,000 साल लाख साल उम्र का मतलब नहीं है।
- 56:12मनुष्य का जामा मिलने का मतलब उम्र से कोई लेना देना नहीं है।
- 56:17ये तो घर है भुगतान के लिए। तुमने शरीर को मार लिया, लेकिन
- 56:25तुम्हारे अभी कर्मभोग बाकी हैं तो परमात्मा या कह लो, प्रकृति
- 56:31तुम्हें नया जामा दे देगी, नया शरीर से देंगे, तुम्हारा भुगतान
- 56:37नहीं रोकेगी, कर्मों का भुगतान तुम्हें करना ही पड़ेगा।
- 56:43बस यही व्यवस्था है इसको सूक्ष्म ढंग से तुम समझ लो तुम 10,000 साल
- 56:50जिओगे तो एक ही शरीर में एक ही गर्मियों का भुगतान करवा देगा
- 56:54सारा, लेकिन अगर तुम 100 साल 50 साल जीते हो तो उसके लिए।
- 57:01उसको 200 जन्म चाहिए। तुम्हें भुगतान के लिए 200 जाम ही
- 57:06बदलने पड़ेंगे। तुम भुगतान वो करवा देगा।
- 57:10उसके पास ये फॉर्मूला है। इस घर में तुमने कुछ कर दिया, ये
- 57:16घर टूट गया, ढह गया वो तुम्हें नया मकान दे देगा वहाँ जाकर भुगत।
- 57:22लेकिन बात तो कर्मों के भुगतान की है, इसके पीछे जो कारण है वो
- 57:29कर्मों का भुगतान है, शरीर मिलता है।
- 57:32कर्मों के भुगतान के कारण शरीर बाद में यात्रा है।
- 57:42पहले रचियो प्रारब्ध पाछे में लो शरीर पहले प्रारब्ध, प्रारब्ध को
- 57:47भोगने के लिए शरीर मिलता है, प्रारब्ध कर्म को भोगने के लिए यह
- 57:56नहीं परम करने के लिए। तुम नहीं करो तो ज्यादा अच्छा है,
- 58:01भोग जाएंगे जल्दी इसी शरीर में हो जाएंगे।
- 58:05तुम करोगे तो भाई स्वतंत्र हो ना उसके घर कोई कमी है, दाता दे लंदा
- 58:10थकबा जुगा जुगांतर खली खा उसके पास कोई कमी नहीं, ये सूरज चमकता
- 58:16रहेगा। और अगर ये सूरज खत्म भी हो गया तो
- 58:20उसके पास सूरजों की भी कोई कमी नहीं है।
- 58:24किसी और ग्रहणक्षेत्र में तुम्हें जन्माते गाऊँ, यहाँ बड़े विशाल
- 58:29विराट व्रत ग्रह हैं। मैंने देखे हैं।
- 58:37लिखिए। लिखाई सुनिए, सुनाई बात मैं कभी
- 58:40नहीं किया, मैंने देखे हैं और मैंने बहुत बार बोले भी है, तुम
- 58:47मत मानो क्योंकि तुमने देखा ही नहीं, तुम्हारा मानना सिर्फ
- 58:52काल्पना को होगा। जब तक न देखूं अपनी मैं ही तब तक
- 59:00न मानूं गुरु की कहनी परमात्मा का ये विधान प्रकृति का ये विधान कि
- 59:10उसने तुम्हारे कर्मों का भुगतान करवाना और कर्मों का भुगतान
- 59:14करवाने के लिए तुम्हें सही चाहिए यह जामा।
- 59:20तुम्हारा शरीर तुम्हारा घर है, अगर तुम इसको अमर भी बना दोगे तो
- 59:28वह जो 200 जन्म में भुगत ना था तुमने वह एक जन्म में या फिर और
- 59:34भी रह जाएंगे तो दूसरा जन्म मिल जाए।
- 59:38तुम लाख साल के भी हो सकते हो और वैसे भी तुम लाख साल पुराने लाखों
- 59:43से लाखों साल पुराने पाताल लख आगास आगास ओढ़क ओढ़क पाल थके
- 59:59वेदकणिक बात सहस। 618 पेण, कते बा असोलो, इकतार्थ
- 1:00:07लेखावय तलेखीय, लेखावय विनाश, लख्म पतार, लख्म अवकाश लख्म भोग
- 1:00:19उसके घर में कोई कमी है। और तुम्हारे घर में कमी ही कमी
- 1:00:24है। उसके घर में कोई कमी नहीं, उसके
- 1:00:29पास प्रति से भी अधिक मात्रा में है, तुम्हारा खत्म हो जाता है,
- 1:00:37उसका कभी खत्म नहीं होता और वो कभी चूकता नहीं हो।
- 1:00:42तुम अपने जैसा ही उसे मरंग वो मरंग नहीं वो शहंशाह हूँ का
- 1:00:48शहंशाह है, उसके घर का भी चुकता है अगर तुम साइंस ने कल को
- 1:01:00आविष्कार पर लिया कुछ नहीं होगा। बल्कि एक और दुर्गति होने वाली है
- 1:01:05मानवता उसको मैं आगाह कर दूँ। साइंस को अपना काम करने दो, वह
- 1:01:10रुकेगा नहीं। तुम आज के छोटे से जीवन के भीतर
- 1:01:16मेरे पास रोज़ चार पांच केस आ जाते हैं।
- 1:01:18बाबा अरदास कर दो कि अमर जाए। तुम मरने से नहीं डरते, मेरी बात
- 1:01:24समझ लो, तुम मरने से नहीं डरते। असल में तुम्हें पता ही नहीं है
- 1:01:30इसके पीछे कारण क्या है? असली तुम मरने से बिल्कुल नहीं
- 1:01:35डरते। तुम डरते हो मरने में जो दुख होता
- 1:01:38है, दर्द होता है। तुम सदा दर्द से डरते हो और यह
- 1:01:44असंभव है कि तुम चेतन भी हो जाओ और दर्द भी न हो।
- 1:01:49बस यही बात बिगड़ जाती है। तुम मृत्यु से कभी कोई नहीं डरता।
- 1:01:57मेरे पास रोज़ कमेंट आते हैं बाबा।
- 1:01:59मेरा सिर ले लो, मैं मरने से नहीं डरता, मैं मरने से नहीं डरती।
- 1:02:06मैंने कहा पुत्र मैं जानता हूँ मरने से कौन डरता है।
- 1:02:12बात मरने से डरने से नहीं है। बात मरने में जो दुख होता है
- 1:02:17तकलीफ होती है, कष्ट होता है, क्लेश होता है, उसकी बात है तुम
- 1:02:24डरते हो दर्द से तुम मरने से कौन डरता है रात को रोज़ मरते हो तुम
- 1:02:32तुम मरते नहीं हो रात को जब तुम सो जाते हो।
- 1:02:36678 घंटे जितनी देर सोए रहते हो, मरते नहीं हो, बिल्कुल मरते हो,
- 1:02:43मरने में क्या घबराना होता है मरने से कोई नहीं डरता।
- 1:02:46डरता है सिर्फ उस दर्द से जो मृत्यु के वक्त ऑपरेट करती है
- 1:02:53प्रकृति। करने दो जो साइंस देखिए उसके
- 1:03:03संसार में क्या नहीं है? जो तुम सोच भी नहीं सकते आज वह
- 1:03:09तुम कर कर दिखाओगे जैसे आज। तुमने एआई बना लिया, रिमोट दबाव
- 1:03:20दूर बैठा व्यक्ति 10,000 5000 किलोमीटर पर एक कोरेट निशाना उसके
- 1:03:26सिर पे रख सकता है, धड़ मुझसे मर जाएगा, वो कभी तो बाहर निकलेगा।
- 1:03:33और तुम यहाँ से मिसाइल फेंको सीधी उसके सर के ऊपर लगी आदमी की औकात
- 1:03:39क्या रह गई? आज तुम जहाज में जा रहे हो।
- 1:03:44मिसाइल छोड़ दी सीधी तुम्हारी जहाज में लगेंगी।
- 1:03:50बचने को जगह कहाँ? तुम हर वक्त असुरक्षित हो, लेकिन
- 1:03:54सुरक्षित होने की काम न करते हो सुरक्षित तुम हो नहीं।
- 1:04:01अगर यह कुछ हो गया तो कोई हैरानी की बात नहीं।
- 1:04:07200 जन्म की जगह परमात्मा को निवृत्त हो जाएगी।
- 1:04:10प्रकृति एक जन्म दे के ठीक है इसमें भुगते जाओ यह मुस्तिकल
- 1:04:14गारमेंट गया। तुम्हें आज भी ऐसी इमारतें खड़ी
- 1:04:17हैं जो हज़ारों साल प्राणी हैं। शाहजहाँ के वक्त का ताजमहल आज है,
- 1:04:23बहुत सी इमारतें हैं। ईजिप्ट के ये ढांचे आज खड़े हैं।
- 1:04:31ये हजारों वर्षों प्राणी हैं। इनमें मम्मीज रखी गई हैं।
- 1:04:36ये कब के बने हैं तो पुराने घर हैं, मुश्किल हैं, दूसरे की जरूरत
- 1:04:43नहीं पड़ी। अगर तुम्हें मुश्किल शरीर मिल जाए
- 1:04:46तो प्रकृति का काम थोड़ा कम हो जाएगा।
- 1:04:51लेकिन बात ये है कि शरीर मिलता है तो मैं भुगतान के कारण ऐसे ही कुछ
- 1:04:55नहीं मिलता। फिर एक शंक आने वाला है, दुनिया
- 1:05:02के सामने फिर तुम बीमार हो जाओगे। फिर व्याधियों को कैसे रोकोगे?
- 1:05:11आज करो ना जैसे छोटे छोटे रोग तुमसे रुकते नहीं, कैंसर का सही
- 1:05:17इलाज तुम खोज नहीं पाए? फिर उसके घर बीमारियों के भी तो
- 1:05:22कोई घाट नहीं है। कब थे करो ना ये पहले?
- 1:05:29पहले तो टीबी को ट्यूबरक्लोसिस को ही क्षय रोग को ही राजरोग कहा
- 1:05:35जाता था। राजाओं को होता था और आज हर किसी
- 1:05:40व्यक्ति को हो जाता है। तुम उससे ज्यादा चित्र बनने की
- 1:05:45चेष्टा करोगे, लेकिन तुम ज्यादा चित्र हो नहीं यही बाबा ने कहा है
- 1:05:51सह स्याण अपना लक्खू होवे ता एक न चले नाल तुम्हारे साथ तो एक भी
- 1:05:56नहीं चलेगी तुम 1000 समझदार हो जाओ, तुम लाख समझदार हो जाओ।
- 1:06:02तुम्हारे काम तो एक भी ना पड़ेगी तो तुम मृत्यु को जीत सकते हो,
- 1:06:08बिल्कुल जीत सकते हो कोई इसमें आश्चर्य होने वाली बात नहीं है।
- 1:06:15बस प्रकृति का काम थोड़ा सा कम हो जाएगा।
- 1:06:19तुम्हें रोज़ रोज़ इसे देना पड़ता है।
- 1:06:23एक बार शरीर दिया चलो लाख साल तक शूट कर ठीक हो गया, लेकिन फिर
- 1:06:31क्या होगा अगर कोई मरना चाहे? बात तो ये है कि अगर तुम्हें जीवन
- 1:06:36में खुशी ना मिली जैसा आज माहौल है।
- 1:06:41जैसे तुम्हें शक्ति मिली थी और आज दुनिया नर्क बनकर रह गई है
- 1:06:49क्योंकि समझदार तो यहाँ है नहीं, मूर्ख हैं ये धरती मूर्खों की
- 1:06:54धरती है और मूर्खों के हाथ में। कोई भी कला आ जाए सोना आ जाए, वो
- 1:07:00माटी कर देंगे मूर्खों का ये उसमें चमत्कार होता है मूर्खों का
- 1:07:06सोना उनको दे दो वो मिट्टी कर देंगे कोई भी कला उनके हाथ लग जाए
- 1:07:12मिट्टी हो जाए। एटोमिक पावर तुम्हारे हाथ में लगी
- 1:07:19है तुमने विनाश का कारण बना लिया और आज वो उत्तर कोरिया का मोटू सा
- 1:07:24बैठा है गाले पलाये वो कहता है मेरे तो मेज़ पे ही पड़ा होता है।
- 1:07:31उसने कहता है मार दूंगा और वह जेल से निकला हुआ पागल ट्रंप वह अपनी
- 1:07:40ही बोली बोलता है, असल में तुम श्रेय मांगते हो, तुम्हें कहानी
- 1:07:46ही नहीं पता क्या है हर व्यक्ति, हर व्यक्ति छोटा बड़ा?
- 1:07:51श्रेय मानता है वो कैसे? फिर मैं तो रह गया, मैं आया भी
- 1:07:56था, किसी को पता नहीं लगेगा तो पता लगना चाहिए।
- 1:08:00अरे भाई जिनको पता लगेगा वो ही नहीं रहेंगे कल को जिनके सामने
- 1:08:06तुमने छाती जोड़ी की। वो भी कहाँ रहने वाले हैं?
- 1:08:10एक एक करके सब विदा हो जाएंगे। अजटुरिया किसे कल टूर जाना
- 1:08:19अजटुरिया किसे कल टूर जाना दुनिया एक सराह।
- 1:08:30जो बनी आंसू मिटना आकर रहना रब दाना जो सा आवे, समझ घणी मत।
- 1:08:46जो सा आवे, समझ घणिमत हो रसा की केना हो रसा की केना तुम बा
- 1:09:00ज़िन्दगी गा। जंगड़ी दा सदा नी बाज दे आ रहन,
- 1:09:12तू बा जंगड़ी गा। 1 दिन तार ने टूट जणाये।
- 1:09:241 दिन तार ने टूट जाणा ए जद डा। डे बस पैना तुम बा ज़िन्दगी दा
- 1:09:35सदा नी वजदियां रहना तुम बा जिंदड़ी दा सदा नी वजदियां रहना।
- 1:09:48कल को तुम अमर हो जाओगे, बिल्कुल उम्र हो जाओगे, शरीर अमर हो
- 1:09:51जाएगा, बिल्कुल हो जाएगा लेकिन में दर्द होगा, बीमारियां होंगी।
- 1:10:03फिर इसका भय न सताएगा। मृत्यु का भय फिर भी सताएगा।
- 1:10:10शरीर की उम्र चाहे 50 साल हो, चाहे 50,00,000 साल हो, बात
- 1:10:16तुम्हारी है, तुम सुरक्षा ढूंढोगे और फिर बड़ी मुश्किल हो जाएगी लाख
- 1:10:22सवा। लाख साल का सवाल है।
- 1:10:27इसने तो गोली मार दी तो मैंने तो लाख सा जीना है, मैं जी भी सकता
- 1:10:31हूँ मर्ज बढ़ता ही गया। जूं जूं दवा की तुम करते जाओ खोजा
- 1:10:46आज मेरे पास लोग 20 आते हैं, 30 आते हैं और फला मरना सन पड़ा है
- 1:10:51बाबा कोई अरदास कर दो कल को 20301000 आयेंगे रोज़ वह मरना सन
- 1:10:58पड़ा है उसका फरियाद कर दो। बात अमरता की नहीं है, बात है
- 1:11:12तुम्हारी इमूड़ता की जो शरीर तुम्हें मिलेगा वो लाख साल मिलेगा
- 1:11:17लाख साल ठहरेगा ये इमारत। यह 50 साल ठहरेगा।
- 1:11:22ये इमारत इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 1:11:24रहने वाले को क्या फर्क पड़ता है। बात तो ये है कि तुमने जान लिया
- 1:11:29कि मैं शरीर के भीतर बैठा हुआ एक मसाफिर वैज्ञानिक बचारे रात भर
- 1:11:36दिन जागते हैं। तुम्हारे लिए खोज करते हैं कि तुम
- 1:11:41किसी न किसी तरह सुखी हो जाओ, लेकिन मैं वैज्ञानिक से कहता हूँ
- 1:11:47तुम लाख कोशिश कर लो। इन मूडों को अकाल नहीं आएगी
- 1:11:54क्योंकि इन्हें जो चाहिए मानवता को जो चाहिए।
- 1:11:58वो साइंस नहीं दे सकेगी। साइंस के बलबूते की बात ही नहीं
- 1:12:02है। तुम जो भी कुछ खोजोगे, तुम खोजोगे
- 1:12:09सोना तुम खोजोगे हीरा ये बना लेंगे ये ऐसे मूड है ये बना
- 1:12:15लेंगे, मिट्टी माटी बना लेंगे। तुम खोजते चले जाओ तुम देखना ये
- 1:12:23खोजों को कैसे माटी कर लेते है बिलकुल लाख 2,00,000 50,00,000
- 1:12:34साल व्यक्ति की उम्र तुम कर सकते हो।
- 1:12:38लेकिन फिर तुम देखना फिर तो मरने के इंतजाम फिर हो गए।
- 1:12:43कल को बाजार में गोलियां बिकेंगी। सड़कों पे चौराहों पे केमिस्ट एंड
- 1:12:48ड्रैग्रस्ट की दुकानों पे लिखा होगा।
- 1:12:54यहाँ आराम से मरने की दवाई मिलती है मेरी इस बात को नोट कर लो फिर
- 1:13:01तुम मरना चाहोगे, मृत्यु नहीं आएगी।
- 1:13:06आज ही ऐसा ज़माना आ गया फिर तुम मरना चाहोगे।
- 1:13:14क्यों? क्योंकि तुम्हारी अभिलाषा पूर्व
- 1:13:17नहीं होती। ये जो लोग आज तुम कहते हो अभाव
- 1:13:22में कर लिया, यूं कर लिया जिनके पास सब कुछ होता है वो भी फंदा
- 1:13:27लगा लेते हैं। जिंदगी बेकार नजर आती है।
- 1:13:32और लाख साल की जिंदगी कर दोगे 50,00,000 साल की जिंदगी कर दोगे?
- 1:13:37जिंदगी बेकार है, नजर आती नहीं। जिंदगी की वास्तविकता है कि वह
- 1:13:44बेकार है बेकार क्योंकि यह झूठ है तुम शरीर हो नहीं।
- 1:13:50और शरीर को अपना मान लिया है। ये मान्यता ही तुम्हें दुख देती
- 1:13:54है। फिर इस दुख की तुम अवधि 100 साल
- 1:13:59कर लो या 100 लाख साल कर लो। क्या फर्क पड़ता है?
- 1:14:05सुखी होगे तब जब तुम मूल। इल्ल्यूशन को पहचानूंगा और मूल
- 1:14:14इल्ल्यूशन आज नहीं कल तुम्हें पहचानना ही होगा क्योंकि वो
- 1:14:21तुम्हारी जरूरत है असली खुराक तुम्हारी वो है टु नो दया सेल्फ
- 1:14:28तुम आखिर हो कौन? तुम थोते थोते इलाज करते रहो कोई
- 1:14:36हर जान कौन रोकता है? लेकिन संत तुम्हें सन मार्ग में
- 1:14:42डालने के लिए उद्वत रहता है। संत का जीवन ही इसलिए है।
- 1:14:47वो तुम्हें रोकता नहीं है। तुम करते रहो इन मूड़ताओं को करते
- 1:14:50रहो तुम बंटों से खेलना चाहते हो? खेलो, खिलौनों से खेलना चाहते हो
- 1:14:57खेलो बस व्यक्ति के खिलौनों का शेप बदल जाता है, स्टाइल बदल जाता
- 1:15:03है। पहला बच्चा खिलौनों से खेलता है
- 1:15:06गुड्डे गुड़ियों से खेलता है गुड्डे गुड़ियों की शादी पर वार
- 1:15:10जाता है फिर बड़ा हो जाता है फिर धन के सिक्कों से खेलता है,
- 1:15:16डॉलरों से खेलता है, रूबल रुपयों से खेलता है, यूरो से खेलता है।
- 1:15:22लेकिन खेल वो ही है। थोड़ा डांगा बदल गया है।
- 1:15:28पहले गुड्डे गुड्डियों की शादी रचाते थे, अब उस पुरुष स्त्री की
- 1:15:34शादी रचाते हो, भेद कुछ पर पड़ा नहीं है।
- 1:15:43तुम्हारी मूर्ताएं वहीं की वहीं हैं, बस तरीके तौर तरीके बदल गए
- 1:15:51आज भी तुम बंटे ही कर रहे हो वरना इन सिक्कों में रखा क्या रखा है?
- 1:16:03कुछ मिला बनते खेल के कुछ मिला बड़े होकर बाते हो के वक्त मैंने
- 1:16:10खराब कर दिया। तुम खोज लो तुम लाख साल की जिंदगी
- 1:16:16कर लो, कर लो, कोई नहीं रोकता अच्छा है।
- 1:16:22एक ही घर में बैठे रहोगे? कल को ये तो न कहोगे, मैंने तो
- 1:16:26नहीं किया था जी याद तो रहेगा तुम्हें कि हाँ, ये मैंने ही किया
- 1:16:31था वो बस लाख साल पहले की बात है। फिर तुम किसी को गुनाहगार न बता
- 1:16:42सकोगे। फिर तुम्हें पता होगा ये मैंने
- 1:16:44किया है लेकिन एक बात ध्यान में रखना अमृतत्व देने वालों विज्ञान
- 1:16:54को। तुम्हारी ये मान्यताएँ तुम्हारी
- 1:16:58ये खोजें मूड़ों के हाथों में जैसे ही आएंगी, मूर्खों के हाथों
- 1:17:04में जैसे ही आएंगी, वैसे ही माटी हो जाएंगी और फिर केमिस्ट एंड
- 1:17:13ड्रैगस्ट की दुकानों के बाहर लिखा होगा।
- 1:17:16यहाँ आराम से मरने के लिए दवाई मिलती थी।
- 1:17:25इजी टु डाइ श्री कृष्ण गोविंद। हरे मुरारी ए नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:17:54श्री कृष्ण वोवन हरे मुरा हे ए नाथ नारायण वासुधी।
- 1:18:17पितु महोत्सव सखा हमार हे नाथ नारा।
- 1:18:31यन वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद आरे मोरा हे नाथ नारायण वासुदेव,
- 1:18:47श्री कृष्ण गोविंद। हरे मुरारी हेनाथ नारायण वासुदेव
- 1:18:59पितुमात स्वामी सखा हमारे हेनाथ नारायण वासुदेव।
- 1:19:10श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथनारायण वासुदेव।
- 1:19:36धन्यवाद आपका।