Latest / Baba ji Vijay Vats / 20/3/26 - अप्प दीपो भव: अपना दीपक स्वयं कैसे बनें? अनहद नाद: आत्म-साक्षात्कार का गुप्त मार्ग!!
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- 0:15लालचंद अगरोही बाबा जी आपने कहा था।
- 0:32बुद्धश्री का वचन अप दीपो भव को दूसरे अर्थ से भी समझा सकता हूँ।
- 0:47अगर आप मुझे प्रश्न करेंगे तो। हाँ, आप दूसरे ढंग से समझना चाहते
- 0:59हैं, समझे? बुद्धा ने कहा अपने दीपक स्वयंभन
- 1:13लो, इसका अर्थ क्या है? रास्ता गुरु से पूछ लो और फिर
- 1:34श्रद्धापूर्वक चलते हो। अपने दीपक खुद जलाओ गुरु के दीपक
- 1:49से अपनी बत्ती को भिड़ा के अपने दीपक जलाओ।
- 2:02और फिर अपने रास्ते पर चल पड़ा निर्बाध रूप से निशंक रूप से कोई
- 2:15सिनशाई न रहा। नहीं शंशा तुम अपने मार्ग पे चलते
- 2:28ही रहो अगर तुम बिना रुके तो के बिना श्रद्धा विहीन हुए।
- 2:44चरेबेती चरेबेती चलते ही रहे, चलते ही रहे तो अपने मुकाम पे
- 2:52पहुँच ही जाओगे ये वो धन्यवाद। मैं कहता हूँ एक शब्द आपने सुना
- 3:09होगा लाई लक किसी से सुन लिया किसी से सुन लिया एक दूसरे से
- 3:23सुनकर हम बेड़ों की जमातों की तरह?
- 3:28किसी एक गुरु के पास चले जाते हैं पुरुष गुरु के पास अपना दीपक जलता
- 3:40हुआ है। अध्यात्म में बड़ी से बड़ी कठिनाई
- 3:48यही होती है। अंधे के पास आंखें नहीं है और
- 4:03जिसके पास आंखें नहीं वह यह नहीं जान सकता कि जिससे मैं रास्ता पूछ
- 4:11रहा हूँ उसके पास आंखें भी हैं कि नहीं?
- 4:17बड़ी से बड़ी मुसीबत यही है और यही एक मुसीबत है।
- 4:25वरुण सारी दुनिया कब की पहुँच जाती है?
- 4:31कोई एक भी न अटकता था। अध्यात्म में अगर मुश्किल है तो
- 4:39सिर्फ ये शिष्य के पास आंख में तो बिना आँखों वाला ये कैसे तय करें?
- 4:54कि दूसरे व्यक्ति के पास आंख है कि नहीं।
- 5:04फिर हमने नकली नकली साधन पैदा कर लिए।
- 5:13फिर हमने रंगों के बारे में सवाल पूछने शुरू कर दिए बालंजरा जी
- 5:23सोचो। अगर तुम्हारे पास आंख नहीं है, तो
- 5:34रंगों के संबंध में तुम जो भी कुछ पूछोगे, क्या वह प्रश्न सही होगा?
- 5:47और जिसके पास आँखें हैं? वह अच्छी तरह से जानता है कि यह
- 6:00जो प्रश्न पूछ रहा है और ऐसे ऐसे तरीके से पूछ रहा है।
- 6:13यह सिद्ध करता है कि इसके चलने की इच्छा नहीं है और गुरु पहचान लेता
- 6:22है और गुरु धीरे धीरे उसकी तरफ त्वचा नहीं देता।
- 6:32और एक वक्त ऐसा आता है कि गुरु अपनी शत्रशया से उसे बेहन कर देता
- 6:40है बड़ा टेढ़ा फैसला है। अगर गुरु से कोई यह सवाल पूछे के
- 6:55गुरु जी पीले रंग की कितनी टाँगें होती हैं?
- 7:10अगर तो कोई आँख हवाला गुरु वह कहेगा पुत्र तुम तो अपने घर जाओ,
- 7:27वह शिष्य कहेगा, मैंने गलत क्या पूछ लिया?
- 7:32गुरु कहेगा कुछ भी नहीं, तुम अपने घर चले जाओ, क्योंकि गुरु जानता
- 7:47है कि यह किसी का पढ़ाया हुआ तोता है और तोते।
- 7:56कभी सही सवाल नहीं पूछेगा। इसलिए मैं तुमसे रोज़ कहता हूँ,
- 8:05मेरे पास आना तो पूरे कागज़ बन के आना।
- 8:15कोरा कागज था ये मन मेरा लिख दिया ना उसपे तेरा?
- 8:34कोरा कागज ता ये मन मेरा लिख दिया ना उसपे तेरा।
- 8:56अगर मैं तुम्हें कह देता हूँ कि तुम्हारे इस कागज पे मैं कुछ लिख
- 9:03न सकूंगा तो ठीक कहता हूँ क्योंकि मैं जानता हूँ कि इतना लिखा जा
- 9:11चुका है। कि मेरा भी लिखा हुआ बीच में ही
- 9:17गड़ मड़ हो जाएगा। तुम्हें कुछ समझ नहीं आएगा कि
- 9:22अबके वाले गुरु ने क्या लिखा है? पहले वाले गुरुओं की कालिख के
- 9:31भीतर ही। यह भी एक कालिख बन जाएगा।
- 9:43बुध कहते हैं अप दीपो बाबा बुद्ध स्वयं बहुत भटकित थे।
- 9:55बुद्ध ने 22 गुरु बदले। लेकिन 22 गुरुओं के वास्ते मिला
- 10:11नहीं। वो सबर का प्याला, ये सबर के
- 10:20प्याले को पीकर नानक का कंठ। उसकी महिमा के गीत गाने शुरू कर
- 10:29देता है। जीस सबर का पहला पी के मीरा मधोशी
- 10:40के आलम में भूल जाती है कि मैं राजघराने की बहू हूँ।
- 10:46बैठी हूँ और राजस्थान की सड़कों पर समाज इसकी इजाजत नहीं देता।
- 11:01वह तो गली गली कूचे कूचे। घूमती है, उसे कोई पता नहीं पर
- 11:15लोग किधर है। लोग कहते हैं ये बाबरी हो गए।
- 11:35बुद्ध ने कहा अब वह दीपों बाबा मैं विजय ही कहता हूँ।
- 11:45मैंने शुरू शुरू में कहा था मैं 500 शीर्षक ही रखूं।
- 11:54और मुझे पता था अगर 500 मिल जाए तो मैं धन्य भाग्य पीने वाला धन्य
- 12:10भाग्य नहीं, मैं धन्य भाग्य। तुम्हें पता है जब हम ब्राह्मण को
- 12:18खाना खिलाते, खाना भी खिलाते और उसके बाद गुरु दक्षिणा भेजते
- 12:27दक्षिण का है कि तुमने मेरा भोजन स्वीकार किया।
- 12:39अगर इंकार कर देते तो मेरा क्या जोश था?
- 12:55जीस प्याली को पीकर, कबीर शांत हो जाते है, फुर्ती उनकी लग जाती है।
- 13:08फकीरी के आलम में खो जाते हैं, ऐसे तृप्त हो जाते हैं।
- 13:18के कबीर कहते हैं मैं कबीरी में ही तृप्त हूँ।
- 13:26और एक बात और भी ध्यान में रख लेना तुम दूसरा कुछ भी बन जाओ।
- 13:36इस सूत्र को आप इसको सर्किल में रख।
- 13:47कोई कहता मैंने आई ए एस बनना तुम्हें आई ए एस बनाने वाले लोग
- 13:52मिल जाएंगे। कोई कहता मैंने चीफ मिनिस्टर बनना
- 14:01एमएलए बनो। एम सी बनना, एमपी बनना, प्राइम
- 14:06मिनिस्टर बनना, राष्ट्रपति बनना और बनाने वाले लोग तुम्हें मिल
- 14:10जाएंगे पर थोड़ी सी ठगी ठोरी मारनी पड़ेगी, थोड़ा झूठ कफ़र
- 14:20तोलना पड़ेगा। थोड़ा थोड़ा दुश्मनों के घाटे
- 14:26उतारने पड़ेंगे और फिर उन घाटों को उतारकर स्वयं को निर्दोष भी
- 14:34स्थापित करना होगा। कतरो गारित भी करनी होगी।
- 14:40और दुनिया से छुपानी भी होगी? गेरुआ वस्त्र पहनकर बोमनाम किया
- 14:46होगा। सही व्यक्ति कपड़ों की परवाह नहीं
- 14:57करता है। शान शोकत की।
- 15:05चेहरे मोहरे सजाने की, वस्त्र बदलने की वही व्यक्ति कोशिश करता
- 15:14है जिसके भीतर कुछ कालिख होती है। सीधा साधा व्यक्ति।
- 15:25कभी मेकअप नहीं करता, जैसा हूँ वैसा परमात्मा ने जैसा बनाया वैसा
- 15:34ही दिखूंगा, वैसा ही दिखूंगी और अगर वो।
- 15:44जवां रखेगा तो जवां रखेगा अगर वो वृद्ध कर देगा तो वृद्ध हो जाऊं
- 15:55और अगर वो मार देगा तो मर जाऊंगा, वह उसकी रजा से बाहर नहीं।
- 16:15आइए फिर वहीं आ जाएं। बुध कहते हैं तुम अपना मार्ग खुद
- 16:24चलना और मैंने एक शब्द बोला लाई लक।
- 16:37किसी के कहने से किसी को गुरु मत बनाना और आज तो ये फैशन है की अगर
- 16:55तुम्हारा कबीला किसी एक धर्म में निशाना है दीक्षित है।
- 17:01तो सारा कबीला ही दीक्षित हो जाएगा।
- 17:14नहीं ये धर्म ने, परमात्मा ने तुम्हें इंसान की तरह पैदा किया।
- 17:27अपना मार्ग, अपना धर्म तुम्हें स्वयं खोजना है।
- 17:34एक भाई रावण की प्रवृत्ति का होता है, वह अटैक कर प्रवृत्ति का होता
- 17:42है। एक भाई विभीषण के प्रकृति का होता
- 17:48है, वह एक्सेप्टर की प्रवृत्ति का होता है और सबकी वृतियां अलग अलग
- 17:55होती हैं। एक ही माता की कोख से जन्मे भाई
- 18:02अलग अलग प्रवृत्तियाँ रखते हैं। तुम किसी के कहने से लाई लग मत बन
- 18:13जाना अप दीपो भावा का गहरा आरती था लाख दुनिया का है, लेकिन
- 18:30तुम्हारा मन कहता है कि नहीं? फिर तुम्हारी रेंजिस उस व्यक्ति
- 18:41से मिल गई और काम करना रेंज काम करना।
- 18:52तुम्हारी समर्पण मैंने पहले भी यह बात बहुत बार कही जहाँ जाकर
- 19:05तुम्हारा सर झुक जाए बिलाल शर्त। बस वही गुरु है तुम्हारे लिए
- 19:21बेशर्त और अगर गुरु शर्त रखता है। फिर उसने गुरु की गरिमा खो दी।
- 19:38मेरे पास रोज़ ऐसे कैसा जाता है बाबा मेरे गुरु ने मेरे से बिलत
- 19:54कर दिया, कहते तुमने मुझे कहा था। शरीर तुम्हारा तन तुम्हारा धन भी
- 20:06तुम्हारा और मन भी तुम्हारा और हम शब्दों को पकड़ने के आदी इसलिए तो
- 20:21गुरु हमें शब्द दे देता है आनंद नहीं देता।
- 20:27वैसे तो होता ही उनके पास शब्द है और कुछ देने को आनंद वानंद होता
- 20:35भी नहीं, वे दे भी नहीं सकते और तुम्हें चाहत भी नहीं उमड़ी।
- 20:45अबे तुम्हें नाम दान दे के चलता कर देते हैं, जाओ नाम दान मिल गया
- 20:55तुम घर जाओ चरखड़ी घुमाते हैं कन्ना बत्ती को?
- 21:04तू चेला तेवेंगुर तरदी मार्तिक कर्णोत्तर
- 21:21गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरा, गुरु साक्षात पर
- 21:30ब्रह्मा तश्मे श्री गुरु वेनमय। ब्रह्म भी गुरु है, विष्णु भी
- 21:39गुरु है, महेश भी गुरु है। शगल ब्रह्मण्ड का मालिक भी गुरु
- 21:49है। मैं उस गुरु को प्रणाम करता हूँ
- 21:57अगर ऐसा तुम्हारे भीतर भाव आ गया, तुम कारण बताओ नोटिस जारी नहीं
- 22:03करोगे तुम गुर्गों से अदालतों जैसा व्यवहार करते हो।
- 22:17कारण बताओ तुमने ये क्यों कहा और वो पीडिताइन मुझे कहती है की
- 22:25मैंने कहा हाँ शरीर तुम्हारा। कहते फिर ठीक मैंने उपयोग कर
- 22:31लिया। मैंने कहा फिर अब तुम क्यों रोती
- 22:37हो? जब गुरु ने कहा था शरीर मेरा तभी
- 22:46चौकन्ना हो जाना था। यह तो मंगता है यह तो भीख मांग
- 22:54रहा है और वह तो दाता है सबना जियाँ का एक दाता है सो में विसर
- 23:05न जाए। सभी जीव जंतुओं का एकताता है बस
- 23:16मेरा फिक्र यही है वह मुझे भूल ना जाए।
- 23:21मैं याद करूँ या भूलूँ। इस बात की फिक्र न करें गुरु कभी
- 23:31तुम्हें ये नहीं कहता कि ये ले जाओ ना।
- 23:37इसको जप और गुरु जानता है। आज तक धरती पर कोई व्यक्ति नहीं
- 23:41ऐसा हुआ। जो चौबीसों घंटे नाम ही जपता रहे
- 23:48और गुरुओं ने बड़ी दुर्लभ खोज कर ली।
- 23:55इट एस ए इन्वेंशन ऐसी शर्त लगा दो जो।
- 24:02शीशे पूरी ही ना कर अब जब तुम जाओगे गुरूजी भजन में मन नहीं
- 24:16लगता तो गुरु के पास कोई तजर बात तो है ये भीतर की यात्रा।
- 24:27यह अंतर यात्रा का पड़ाव है। और जीसको तुमको ये नाम बांटने
- 24:38वाले अपने अंत समय अगर उतर जाते तो पक्का के ये नाम को छोड़ देते।
- 24:46शब्दों को छोड़ देते हैं, जो अपनी गहरी सुरती में उतर जाता है।
- 24:58वह किसको याद रखेगा, नाम को याद रखेगा।
- 25:02वह तो स्वयं का आपा भी भूल जाता है।
- 25:15नाम कैसे याद रहेगा उसे, जिसे स्वयं के होने का आभास भी खो गया।
- 25:25कौन हूँ मैं, कहाँ हूँ मैं यह तुम्हारे शब्दों को याद कैसे
- 25:32रखेगा? और तुम्हारे तो सारे धर्म ही टिके
- 25:36हुए हैं। इस बात पर जिसे याद ही न रहा हो
- 25:45और ऐसा तल हमारे भीतर है जहाँ जाकर सुदी बुदी।
- 25:53खो जाती है। तुम्हें याद नहीं रहता मैं कौन
- 25:59हूँ कहाँ हूँ? उसे कहा गया इगोरसनेस स्वयं का
- 26:09बहुत न होना। समय का बोध न होना इसे कहागा टाइम
- 26:16ब्लेसनेस जब तुम्हें समय का पता नहीं जब तुम्हें स्वयं का होना
- 26:26पता नहीं। फिर गुरु कहेंगे तुमने पुत्र याद
- 26:33नहीं किया होगा और याद नहीं करोगे तो इम्तिहान में पास कैसे होंगे?
- 26:50भला जी कोई संसार की इम्तिहान है परमात्मा का इम्तिहान संसार के
- 26:58इम्तिहान से बिल्कुल उल्टा होता है।
- 27:02संसार में याद करना होता है, परमात्मा में बोलना होता है।
- 27:21संसार तुम्हे याद करना चाहता है। संसारिक गुरु भी तुम्हे स्मरण
- 27:26कराना चाहता है। ये उलटी राही है।
- 27:32क्या तुम उसे याद कर सकते हो जिसे कभी देखा नहीं?
- 27:40सवाल जो पूछने वाले थे, हम गुरु से पूछते हैं, हम और ही ऊंट पटांग
- 27:51सवाल कर देते हैं, जिसे देखा नहीं कभी?
- 28:01वे हमारी न्यूरॉन जो उसकी छवि को पकड़ नहीं पाते पुनः उसको हम याद
- 28:09नहीं कर सकते जो कभी देखा ही नहीं हमेशा याद उसे कर पाए।
- 28:18जो कभी याद किया होगा आप इम्तिहान में बैठते हो।
- 28:24एक बार आपने याद किया, दो बार आपने याद किया और जीसको तुमने कभी
- 28:35कुछ याद ही नहीं किया पीएचडी की किताबों में?
- 28:39क्या लिखा तुमने कुछ याद नहीं किया तो तुम इम्तिहान में लिख के
- 28:44आओगे, कुछ भी नहीं लिख के आओगे क्योंकि याद नहीं किया यह संसार
- 28:52की कवायद और परमात्मा की कवायद से बिल्कुल उलटे।
- 29:00मेरे पास लोग आ जाते हैं बाबा नाम दान दीजिए।
- 29:09मैंने कहा मैं तो नाम छीनता हूँ, दान नहीं देता।
- 29:21बाबा किसी ने तो कहा था कि आप बहुत बढ़िया नाम दाम देते हैं।
- 29:31मैंने कहा उसने गलत कह दिया तुम्हे पुत्र तुम ठीक से ठिकाना
- 29:38पूछ के आओ उसका। यहाँ से तुम्हारी समस्या हल नहीं
- 29:47होगी, यह नाम दाने की समस्या है। समस्या चाहिए तो कुछ लोग हैं।
- 29:57इस समस्या को देने वाले उनके बाद चली जाएगी।
- 30:02मैं तो। नाम दान नहीं देता नाम को खींच
- 30:07लेता हूँ, भुलाता हूँ तुम्हें तुम कहते हो हमें सुमरण करना है कैसे
- 30:18करें। मैंने कहा यह तो मेरा काम है, मैं
- 30:22तो भूलना सीखाता हूँ जो अब तक तुम्हें गुरुओं ने सिखाया वो भूल
- 30:28जाओ। मेरा कुछ काम उल्टा है, यह
- 30:38तुम्हारे गुरु उल्टे हैं। दोनों में से एक बात सत्य है या
- 30:45तो मैं उल्टा हूँ या तुम्हारे गुर उल्टे हैं।
- 30:49मैं तो स्मरण करना सीखाता नहीं, मैं तो भूलना सीखाता हूँ भूलना
- 30:56चाहते हो तो बैठ जाओ। याद करना चाहते हो तो जो याद
- 31:02करवातें हैं उनके पास चले जाओ। या तो वह खुद ही आ जाएगा।
- 31:12उसको याद क्या करना है जो हमारा आंतरिक अस्तित्व है?
- 31:19उसको कभी याद करना होता है वे तो माशूका की तरह याद आ?
- 31:25जाते हैं। ओह ही गन जिसे हम।
- 31:35किस किस यत्न से निकाला था इस दिल से दो वो चल कर।
- 31:54कयामत किचला गया, उछलकर कयामत किचला गया हुई।
- 32:14शान का ख्याल आ गया वो ही ज़िन्दगी का सवाल।
- 32:32गया, कोई शाम उनका ख्याल आ गया। वो माशु का की तरह प्रेमी की तरह।
- 32:52तुम आराम से बैठे होते हो और उसकी याद उतर जाती है, तुम्हे याद करना
- 32:59नहीं पड़ता जिसे याद करने में मशक्कत करनी पड़ी वो किताबी काम
- 33:05होते हैं। परमात्मा का स्मरण जो तुम करते हो
- 33:14वो व्यर्थ है वो लेखे नहीं लगता और परमात्मा का स्मरण जो वह करता
- 33:24है तुम्हें याद वह लेखे लगता है। इसलिए बाबा नानक कहते हैं, सबना
- 33:33जिया का एकता ता सो में विसरण न जाए, वह मुझे भूल न जाए, मैं तो
- 33:41विसर हूँगा। और सो काम धाम करने होते हैं।
- 33:47संसार के तो विसर विसर जाऊं लेकिन हे सच्चे बादशाह तुम मुझे भूल मत
- 33:56जाना। पलटू कहते हैं पलटू।
- 34:10शुभ दिन शुभ घड़ी याद पड़े जब नाम पलटू शुभ दिन शुभ घड़ी याद पड़े
- 34:21जब नाम। पलटू कहते हैं, वही शुभ दिन है।
- 34:30वही शुभ घड़ी होती है जब स्प्रे इसी की याद आती है जब स्प्रेमी की
- 34:39याद आती है। लग्न, मुहूर्त, झूठ सब और बिगाड़े
- 34:46काम तुम जो लग्न मुहूर्त निकलवाते हो वो गलत है।
- 34:56पल्टू कहते हैं ये जो तुम सुबहः ब्रह्म मुहूर्त में बैठते हो।
- 35:01लगन, मुहूर्त, झूठ सब ये झूठ है ना उसकी याद नहीं आती तुम्हें तुम
- 35:09उसे याद करते हो और भला तुम किसको याद करते हो?
- 35:17कित्ते बेईमान तुम कब से हो गए? मैं तुम्हें ईमानदार कैसे कह तू
- 35:28जैसे कभी देखा नहीं उसे याद करोगे कैसे तो तुम बेईमानी कर रहे हो
- 35:38स्वयं के साथ। तुम्हें मैं ईमानदार कैसे कह दूँ?
- 35:44तुम गुस्सा हो जाओ, मुझे कोई तकलीफ नहीं, मैं सत्य बोलता ही
- 35:53रहूँगा। सभी संतों ने यही कहा तुम कहते हो
- 35:59सभी संत नाम की। व्याख्या करते हैं।
- 36:02हाँ ऐसे ही करते हैं जैसे मैंने कहा तुम अर्थ का अनर्थ कर लेते हो
- 36:09तुम्हारे पंडित, तुम्हारे ज्ञानी तुम्हारे तथाकथित खालसा अर्थ का
- 36:16अनर्थ कर ले तो इसमें मेरा क्या दोष?
- 36:22मैंने जो जैसा जाना मैं वो वैसा बोलेंगे।
- 36:29पल्टों शुभ दिन शुभ घणियें याद पढ़ें जब नाम, लगन, मुहूर्त, झूठ
- 36:38सब। और बिगाड़े काम पल्टू कहते हैं,
- 36:46वही दिन शुभ है और तुम्हारे भ्रम वेला को तुम्हारी अमृत वेला को
- 36:51छोड़ दो। तुम्हारी अमृत मुहूर्त और ब्रह्म
- 36:56मूर्त को छोड़ दो। ये तो काम बिगाड़ देंगे ये तो
- 37:00तुम्हारी नींद में ही कल डालेंगे। मैंने बहुत से लोग देखे हैं।
- 37:05ऐसे जो ब्रह्म मुहूर्त में उठने के लिए अलार्म लगा के सोते हैं
- 37:131:00 बजे सोए 4:00 बजे उठ गए नींद कहाँ पूरी हो गई?
- 37:18और दिन में टुडे खाते फिरते हैं और फिर शेक ही मगाड़ते हैं।
- 37:29रात को 1:00 बजे सोया तुम सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना ही होता
- 37:34है। मैंने कहा क्यों?
- 37:44कहते, फिर नाम स्मरण भी तो करना होता है ना अच्छा ये पाप भी तुम
- 37:52करते हो नींद पूरी नहीं होती इसलिए तो दिन में ठूडे खाते फिरते
- 37:58हो। तुम कामों को पूरी निषिणता से
- 38:04कैसे कर पाओगे? और कृष्ण तो कहते हैं, कर्मण्य
- 38:08वाधिकार से पूरी निषिणता से काम कर उसमें खो जा कर।
- 38:20कर तक हो जाए कर्म ही बच जाए भला तुम 1:00 बजे सोये 4:00 बजे जाग
- 38:29गए ब्रह्मवूर्त में यह लोभ नहीं तो और क्या है?
- 38:36और फिर तुम कहते हो सारे सन्तु ने कहा तुम्हें क्या पता वो संत थे
- 38:42के नहीं। अंधों को पता होता है के हरे रंग
- 38:49की कितनी टांगें होती हैं, लाल रंग की कितनी टांगें होती हैं?
- 38:56और तुम्हें जगह जगह पे हर नुक्कड़ पे ये अंधे शास्त्रार्थ करते
- 39:02मिलेंगे रंगों की विषय पर तुम्हारा झगड़ा और कोई झगड़ा नहीं
- 39:10है तुम सिर करम कर देते हो इन्हीं बातों का।
- 39:17हरे रंग के छः टाँगे वो कहते चार टाँगे, गेरुआ के आठ है तुम्हारा
- 39:26रंग गेरुआ है मैं कहता हूँ तो फिर बिचारा तरबूज।
- 39:36ऊपर से मुसलमान है, भीतर से हिंदू है, ऊपर से हरा है, भीतर से घेरुआ
- 39:45है, उसको कौन सी कैटेगरी में रखो? पागलों की दुनिया है अंधों की
- 39:59दुनिया में अगर कोई सुजाखा आ जाए तो तुम उनका जो हश्र करते हो को
- 40:12तुम जानते हो। ईसा कसौली पे चढ़ाव देते हो और
- 40:18कारण तो तुम कोई न कोई बना ही लेते हो क्योंकि बगयार्ड नी लैला
- 40:29को खाना है। बस बाकी तो सब बहाना है, तुम कोई
- 40:38न कोई कारण खोज लो शेर की कहानी पानी को झूठा क्यों करता है?
- 40:49लैला अरे मैं मैं ना जनाब। पानी तो तुम्हारी तरफ से आता है
- 40:58बल्कि तुम्हारा झूठा पानी मैं पी रहा हूँ अरे तू बोलता है तुने
- 41:05मुझे गाली निकाली नहीं जी, मैंने तू गाली नहीं निकाली।
- 41:13मैंने तो माह जी ये कहा था कि झूठा आपका पानी मैं पीता हूँ,
- 41:22पहले पानी आपके पास से गुजरता है तो फिर तुमने गाली नहीं निकाली तो
- 41:30तुमने पिछले साल गाली निकाली होगी।
- 41:33तब भी मैं यहीं से पानी पी रहा था।
- 41:36कहता जी, पिछले साल तो मैं जन्मा ही नहीं था, मैं अभी तो एक दो
- 41:40महीने का ही हूँ अच्छा तू चबर चबर बातें करता है तो तू नहीं तो तेरे
- 41:49पिता ने निकाल। पिता जी मेरे पिता जी तो मर गए
- 41:55थे, मेरे जन्म से थोड़े पहले फिर तो पक्का ही तेरी माता ने गली
- 42:01निकाली और इतना कह के उसको खा गया बस और कुछ नहीं ये नाम दान तो
- 42:10सिर्फ बहाना है। असल में तो तुम्हारा माल हड़पना
- 42:15है। असल में तो इनका लक्ष्य तुम्हारा
- 42:19खजाना है। नाम दाम तो एक बहाना है तो मैं
- 42:28कहता हूँ भाई क्षमा करो। मैं तो स्मरण करना सीखाता ही
- 42:35नहीं, तुम पहले ही पागल हुए जा रहे हो।
- 42:44जिन्हें हम भ। जिन्हें हम भूल न चाहें वो अक्सर
- 43:00याद आते हैं। जिन्हें हम भूलना चाहें वो अक्सर
- 43:14याद आते हैं, बुरा हो, बुरा हो। इस मोहब्बत का बुरा हो इस मोहब्बत
- 43:33का वो क्यों कर याद आते? जिन्हें हम भूल ना चाहें वो अक्सर
- 43:51याद आते। तुम तो खेच धोके लेके आते हो नाम
- 43:58जब उस प्रेमी से पूछो जिससे। अपनी प्रेमिका की तस्वीर भलाई
- 44:07नहीं बोलते जो भूलना चाहता है और गोलियां खा लेता है, बार पीरियड
- 44:22से खा लेता है। किसी तरह भूल जाओ।
- 44:27जीस दिन नाम ऐसे चलने लगे उसकी याद उस दिन उसकी याद फलीभूत हो
- 44:35गई। इस याद की बात करते हैं, बट।
- 44:40बटू शुभ दिन शुभ घड़ी याद पड़े। जब नाम इस तरह से तुम उसे धकेलना
- 44:49भी चाहो तो वो याद आएगा अनंत नाद की तरह तुम सो जाते हो।
- 44:59अनदनाथ सौतन जब तुम उठते हो, देखते हो वही मीठी मीठी आवाज़,
- 45:10वही संगीत के वीणा के तार जनक जनक।
- 45:18तोरी बाजे पायलिया, जनक जनक तोर बाजे पायलिया प्रीत के गीत।
- 45:37सुना है आयलिया जनक जनक तोर बाजे आयलिया।
- 45:50लोग कहते हैं ये आवाज जनक जनक की कहाँ से आती है?
- 45:56ये जिंगुर की आवाज मैंने कहा तुम भाग्यशाली हो, उसने तुम्हें याद
- 46:04करना शुरू किया और तुम कहते हो बुरा हो इस मोहब्बत का वो क्यों
- 46:11कर याद आते? प्रेमी बड़ी कोशिश करता है और
- 46:23प्रेमी भुला भी देता है। प्रेमिका को तुम तो नाम दान देने
- 46:33वालों के पास। नाम लेके आते हो और कहाँ याद आता
- 46:37है वो जिसे जानते ही नहीं उसकी याद आएगी वे कैसे वो चाहे पास से
- 46:43गुजर जाए और तुम्हें पता नहीं वो तो 1000 दफ़े तुम्हारे दरवाजे
- 46:50रोज़ खटकाता है। तुम्हें पहचान ही नहीं आती उसकी
- 46:56तो तुम दरवाजा बंद रखते हो भाई मांगने वाले तुम अगले घर जाओ यहाँ
- 47:10कुछ है नहीं और वो मांगने वाला भगवान कहता है अब मस्त।
- 47:16ऐसा ही होगा। तुम्हें कहाँ पहचान है?
- 47:21उसके इन पापियों ने तुम्हें नर्क में सड़ा दिया है भला तुम अपने
- 47:31भगवान तक को नहीं पहचान पाते, इससे ज्यादा दुर्दशा।
- 47:36और क्या करेंगे? पल्टू कहते हैं, जब उसका नाम याद
- 47:49आया और बुलाई से न भूलें तो वह दिन शुभ है।
- 48:00वह घड़ी शुभ है। तुम्हारी लग्नो मुहूर्त तो सब झूठ
- 48:07हैं। इनके पाखंडों में मत उलझ जाना
- 48:11लग्न मुहूर्त झूठ सब और बिगाड़े का फिर तुम दिन में धक्के खाती
- 48:17फिर होगे। ना खुदा ही मिला ना बसा ले सनम,
- 48:25ना इधर के रह ना उधर के रह रात की नींद खोई दिन को तुम ठुड्डे खाते
- 48:36फिरते हो। दोनों तरफ से गए धोबी का कुत्ता न
- 48:45घर का, न घाट का, वो तो याद है, जब पढ़ता है तो भलाई से भूलता था।
- 49:05और तुम्हें गुरुर हो जाता है के रात को तुम सोए वो याद नहीं है,
- 49:12लेकिन सुबह उठते ही वह फिर जंगूर की प्यारी प्यारी आवाज।
- 49:26हमें तो यही था गुरु गमे यार है हमसे दूँ।
- 49:45ये भी गुरुर हो जाता है हमें गमी जा रहे हैं, हमसे दूर वो।
- 49:51ही गम जिसे हम किस, किस यत्न से? निकाला था इस दिल से दूर।
- 50:10कभी सो गए, कभी मूवी देखने चले गए, कभी सर्कस देखने चले गए, कभी
- 50:17राजनीतिज्ञों का भाषण सुनने चले गए।
- 50:24बड़ी कोशिशों बहुत। शादमाते उन्हें हम।
- 50:39भुला कर। बड़ा अहंकार के थमन।
- 50:46अच्छा नक ये क्या हो गया? जब नींद खुली तो पाया।
- 50:59के चेहरे पे उन के मला लग गया के चेहरे पे उन।
- 51:13के। मलाला गया वैशाम उनका ख्याल गया।
- 51:32वो ही ज़िन्दगी का सवाला गया। जब याद आएगी ना उसके तो तुम्हे
- 51:45तुम्हारी ज़िन्दगी का सवाल पैदा हो जायेगा तुम बचो तो कैसे बचो?
- 51:51वह तुम्हारे अहंकार को निस्त नाभूद कर देगा, वह गला देगा, जला
- 51:57देगा, बसु में भूत कर देगा, राख भी न बचेगा जब उसने पग डाल लिया
- 52:07तुम्हारे हृदय के ऊपर। तो फिर तुम्हें कहाँ याद रहेगा?
- 52:16फिर तो वो याद आता है और तुम उसे भुलाने की चेष्टा करते हो।
- 52:24तुम कहते हो किसी तरह ये भूल जाए। लेकिन उसकी याद तुम्हें सताते है,
- 52:32बहुत ही है याद तुम्हारे नाम दान और तुम्हारा सिमरन तो महज कागजी
- 52:41और कागजी शेर शेर नहीं हुआ करता कागजी शेर।
- 52:48तो मैं जख्मी नहीं कर सकता। तुम्हारे सभी नामदान कागजी हैं तो
- 52:59मैं कह देता हूँ पहले कोरे हो के आओ।
- 53:03तुमने कितने गुरुओं से क्या कुछ लिखा दिया।
- 53:06ये गच्च मच्च सा मुझे तो समझ में नहीं आता।
- 53:10सब ने अपना अपना काला अक्षर भैस बराबर लिख दिया अब मैं इसके ऊपर
- 53:15क्या खाक लिखूं? मैंने तुझे लिखना था तो मुझे तो
- 53:22कोहरा कागज चाहिए। खत लिख दे, खत लिख दे सांवरिया के
- 53:37नाम बाबू खत लिख दे। संवरिया के नाम बाबू?
- 53:51तेरा? होगा बड़ा अहसान बाबू खत लिख दे।
- 54:02खत लिख दे सबवरिया के नाम बाबू तेरा होगा बड़ा ए एहसान बाबू खत
- 54:20लिख दे। संवरिया के नाम बाबू खत लिख दे।
- 54:32तुम तो पहले से ही बहुत खत लिखाई करते हो, कुछ समझ नहीं आता किसने
- 54:37क्या मांड दिया? और वो ही गज़ल मचल की हुई चिट्ठी
- 54:44मेरे पास आ जाती है, ये लिखो इसके ऊपर क्या लिखोगे मैं क्या खा के
- 54:50लिखूं इसमें ये सब कुछ मिटा के आ जाओ।
- 54:57कोराकाबीज लेके आ जाओ फिर उसके ऊपर मैं उसका नाम लिखूंगा और वह
- 55:07नाम लिखूंगा जो तुम्हें दिखेगा। मैं वह नाम लिखूंगा जो तुम पढ़ना
- 55:15पाओ। मेरा नाम कुछ अजूबा है, उसमें
- 55:23सुगंधित तो आएगी लेकिन तुम्हें फूल नहीं दिखेगा।
- 55:30उसमें प्यार की सुगंधित तो होगी लेकिन कोई इवायद नहीं होगी।
- 55:39ऐसा लिखने वाला कोई कोई कभी कभी आता है ये वो नगमा है जो हरसाज पे
- 55:45गाया नहीं जाता। मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल
- 55:51मक्सूस होते हैं। मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल महसूस
- 55:58होते हैं या वो नगमा हैं, जो हर साज़ पे गाये नहीं जाता?
- 56:04अगर तुम्हारे आनंद नंद से शुरू हो गया तो तुम इसका इस जीवन में
- 56:09भरपूर लाभ उठा लेना। तुम पूछते हो हमें क्या करना है?
- 56:14बाबा हमें तो 30 साल हो गया, हम तो नाम ही जप रहे हैं, पांच एक
- 56:21बार छोड़ दो इन नाम को परमात्मा की इस वाणी को सुनो यह दूरत दरगाह
- 56:27से आती है। इसका उद्गम स्रोत जब तुम पाओगे तो
- 56:35हैरान रह जाओगे। यह हुंकार की उध्वनि उस मूल उद्गम
- 56:42स्रोत से आती है जहाँ प्रेम का सागर रहता है।
- 56:50तुम इसके संग संग चलना। इसको एक धागा बना लेना और इसको
- 56:56पकड़ के उस उदगम स्रोत में पहुँच जाना जहाँ से ये उखड़ के आता है।
- 57:01उमड़ के आता है बस तुम वहीं पहुँच जाओगे, छोड़ो नाम दाम के धंधे।
- 57:11इसलिए तुम पहुंचे नहीं, परमात्मा तुम्हें पुकार रहा है, मैं रोज़
- 57:16कहता हूँ, तुम्हें दस्तक देता है हजारों बार और तुम भीतर से आवाज
- 57:21देते हो भाई पहचाना तो है नहीं तुमने कभी तुम्हारे गुरु कहते हैं
- 57:28स्मरण करो। और वह रोज़ दरवाजा खटखटाता है।
- 57:32मैंने किसका करें? देखा तो तुमने पहले कभी है नहीं
- 57:36है, वो तो तुम कह देते हो भाई आगे चलो यहाँ कुछ नहीं है देने को तो
- 57:43वो कह देता है ठीक अब मस्तू बाबा। और तुम रीते के रीते रह जाते हो,
- 57:51ये भगवान की वर्णी है। यहाँ इंसाफ होता है यहाँ तदबीरें
- 58:02नहीं चलती यहाँ तकदीरें चलती। इंसाफ का मंदिर है, ये भगवान का
- 58:20घर है, इंसाफ का मंदिर है ये। भगवान का घर है।
- 58:33भगवान के घर से आता है इंसाफ के मंदिर से आता है यह आनंदनाथ जिसके
- 58:41जग गया उसके कर्म जग गए इसको। जैसे कुमार को खेतों में लाल पड़ा
- 58:56मिल गया था, उसने गधे के गले में लटका दिया।
- 59:01बस तुम इसकी इतनी सी कीमत डालते हो सुन्दर लगता है।
- 59:09नहीं, यह तो तुम्हारी जिंदगी को रोशनाई ऐसे कर देगा कि दसों
- 59:19दिशाएं तुम्हारी चमत्कृत हो उठेंगी, तुम्हारा रोआ रोआ आनंद से
- 59:25धड़कने लगेगा। रस के प्याले भर के आएँगे।
- 59:31तुम्हारे लब को लग जाएंगे और तुम बस घूँट भर लेना और गले से नीचे
- 59:37उतार लेना। फिर तुम्हें इसका मज़ा आएगा।
- 59:46फिर तुम कहोगे और ज़रा सी दे दे साखी।
- 59:54और ज़रा सी और। और ज़रा।
- 59:59सी दे दे साखी और ज़रा सी और। कैसे रहूं चुप के?
- 1:00:06मैंने। पी ही क्या है?
- 1:00:10होश भी तक है बाकी और ज़रा सी दे दे साखी और ज़रा सी और।
- 1:00:20कैसे रहूं चुप के मैंने पी ही। क्या है?
- 1:00:25फिर तुम्हारा जहाँ साकी के सामने फ़ैदा ही रहेगा, इसमें और डाल दो
- 1:00:34अभी मन भरा नहीं है अभी अभी तो पीनी शुरू की है।
- 1:00:47अभी अभी तो बाहर ने दावन पकड़ा है।
- 1:00:51अभी ना जाओ, छोड़ कर ये दिल अभी वरा नहीं।
- 1:01:03अभी ना जाओ छोड़कर ये दिल अभी भरा नहीं।
- 1:01:15फिर तुम साथी से कहोगे अभी मन भरा नहीं है।
- 1:01:22अभी छोड़ के मत जाओ अभी अभी तो आए हो बाहर बन के छाये हो हवा ज़रा
- 1:01:31महक तो ले हवा ज़रा महक तो ले नज़र ज़रा बहक तो ले।
- 1:01:40जे शाम ढल तोले ज़रा जे श्याम ढल तोले ज़रा जे दिल संभल तोले ज़रा
- 1:01:49मैं थोड़ी देर जी तो लूँ मैं थोड़ी देर जी तो लूँ, नशे के घूंट
- 1:01:57पी तो लूँ। नशे के घूंट पी तो लूँ अभी तो कुछ
- 1:02:04कहा नहीं, अभी तो कुछ सुना नहीं अभी न जाओ छोड़कर ये दिल अभी
- 1:02:14बारात है। जब ऐसी अवस्था आ जाए तो फिर वो
- 1:02:22होता है सुमरण फिर तुम उसको पहचानने लग जाते हो।
- 1:02:31अभी तो कितने जन्म बीत हैं, बस यही तो मुश्किल है तुम्हारी।
- 1:02:37अभी तो तुमने उसके साथ एक बार भी जान पहचान नहीं, इसलिए मैं कहता
- 1:02:45हूँ वो रोज़ आता है तुम्हारे पास, तुम उसको आगोश में लेते नहीं, तुम
- 1:02:53उसको चोंगते नहीं। तुम उसको अपने गले से लगाती नहीं
- 1:03:03क्योंकि तुम्हें उसकी पहचान नहीं और तुम्हारे गुरु कहते हैं उसका
- 1:03:08नाम जब। तुम दुविधा के अंदर फंसे फंसे
- 1:03:15प्राण त्याग देते हो फिर अगला जन्म फिर अगले जन्म में कोई और
- 1:03:20जंड लग जाता है। ये जंड ही होता है नाम दान देने
- 1:03:25वाले मैं पहचान की बात करता हूँ। मैं तुम्हें पहचान कर आऊंगा, मैं
- 1:03:38तुम्हें पहचान कर आऊंगा, मैं रोज़ बोलता हूँ, इससे तुम्हें पहचान
- 1:03:44नहीं होती हो जानी चाहिए थी। बुध कहते हैं अप दीपो भवः लाई लग
- 1:03:59मत बन जाना वहाँ तुम्हें उलझा लिया जाएगा वहाँ तुम्हारे ऐसे
- 1:04:07फंदे डाले जाएंगे बेड़ियों के गंजीरों के कि तुम छूट न पाओगे।
- 1:04:14फिर तुम रोओगे फिर तुम चलाओगे, फिर तुम पूछोगे, बाबा जी, यह
- 1:04:21तकलीफ है और बाबा जी कहेंगे तुम नाम समरण किया, बाबा थोड़ा किया
- 1:04:29तो ज्यादा किया। अब जी ज्यादा किता को होता है भाई
- 1:04:40ये दिन तो ढल जाता है किसी तरह चाचा जान ये रात क्यों आ जाते
- 1:04:46हैं? कैसे याद करोगे तुम कब तक याद
- 1:04:53करोगे तुम खाना भी खाना होगा ये कहते हैं खाते पीते सोते जगते
- 1:05:05चलते फिरते मुझे मेरे गुरु ने कह दिया।
- 1:05:09मैंने कहा तुम ऐसे करो, तुम मुझे खाते पीते, नहाते धोते, याद करके
- 1:05:15दिखाओ वो तो अच्छा हम भी सो गए, मैंने कहा क्यों लुरम बना रहे हो?
- 1:05:28मन हमेशा एक तरफ जाता है। जब राम राम करूँगा तो फिर दूसरा
- 1:05:37काम मैं कर सकूंगा। फिर दुकानदारी कौन करेगा?
- 1:05:45और जब है याद आता है। तो फिर सब भूल भूल जाता है और तुम
- 1:05:51कहते हो सोते जगते, उठते, बैठते, सफर करते, खाते पीते नाम जप करते
- 1:05:59रहो, मैंने कहा तुम पहले करके दिखाओ अब ये खाओ बुर्की देखता हूँ
- 1:06:05खाते हो? या राम जाप करते वो तो बात है एक
- 1:06:14वक्त पे मान दो काम नहीं कर सकता। कहने में बड़ा अच्छा लगता है या
- 1:06:23तुम खाओगे या चबाओगे। या राम राम करोगे?
- 1:06:29और तुम्हारी तो नाम भी पांच है, तुम्हारी क्या दुर्गति होगी तुम
- 1:06:50पर देय खुशी ज्यादा आती है। बुद्ध कहते हैं अप दीपो भव।
- 1:07:01किसी ने बता दिया तो खुद तुम भी सोचना तुम्हें भी बुद्धि दी है
- 1:07:06भगवान शास्त्रार्थ करने में जिगाई करो बकवास करो या पांच नाम जब वो
- 1:07:18बराबर है। दोनों शब्द हैं शब्दों का खेल।
- 1:07:24राम का नाम लेने से जीवा पवित्र नहीं होती, यह बकवास है।
- 1:07:30अगर राम का नाम लेने से जीवा पवित्र होती है तो गाली देके भी
- 1:07:34उतनी ही पवित्र होगी, क्योंकि यह शब्द हमने बनाए।
- 1:07:39यह मैन मेड है। वो चाहे राम का नाम हो, चाहे गाली
- 1:07:46और मेन मेड नाम से। अगर जीवा पवित्र होती है तो वह
- 1:07:51गाली दे कर पवित्र हो जाएगी। तुम भेद करना सीखे नहीं, इसीलिए
- 1:07:58मैं तुम्हे और लोक है। बुद्ध कहते हैं अप दीपो भवः।
- 1:08:10तुम सोचो कहीं ये व्यक्ति तुम्हारा शोषण तो नहीं करा कुछ
- 1:08:18आनंद का पीला भी रहा है कि। कुछ ऐसा है कि तुम कहो कि थोड़ी
- 1:08:28देर पी भी लूँ। मैं थोड़ी देर जी भी लूँ कि अभी
- 1:08:34तो कुछ कहा नहीं, अभी तो कुछ सुना नहीं, अभी न जाओ छोड़कर।
- 1:08:41ये दिल अभी भरा नहीं धन्यवाद।