Latest / Baba ji Vijay Vats / 29 Mar 25 - सप्तऋषि मंडल, ध्रुव तारा कैसे आध्यात्मिक यात्रा में सहायक हैं? नवरात्रों में चूक मत जाना!
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- 0:03स्वामी प्रेमकाश, भोपाल चरणों में प्रणाम स्वीकार करें बाबा बचपन से
- 0:17यह शब्द। सप्तऋषि सुनते आ रहे हैं पर आज तक
- 0:25नहीं पता आखिर यह सप्त ऋषि कौन? अध्यात्म में इनका योगदान और आपके
- 0:33जीवन में इनकी भूमिका आज के संबंध में।
- 0:38सब स्टार बताने की कृपा करें। और क्या ये अभिशाधकों की सहायता
- 0:47करते हैं और हाँ तो कैसे? प्रश्न अध्यात्म से ही संबंधित है
- 1:06और अच्छा किया, आपने वक्त पे प्रश्न पूछ लिया।
- 1:18सप्तर्षिव मंडल सात ताराओं का एक समूह है।
- 1:26इसमें चार तारे वर्गा का रूप। में।
- 1:32और तीन तारे। उसकी पूंछ के रूप में एक विशेष
- 1:38आकृति बनाती है। सत्य श्री मंडल सात ऋषियों के नाम
- 1:50पे बना है। प्रत्येक मनवंतर में ये सात्र ऋषि
- 1:57बदल जाते हैं। ऐसा कथन है।
- 2:06अभी जो व्यवस चल रहा है उसके अंतर्गत।
- 2:14अतिरिक्त विशिष्ट विश्वामित्र, जमदग्नि, कश्यप, भारद्वाज और अति।
- 2:34ये सात नाम है लेकिन ध्यान रखना ये बदलते रहते हैं।
- 2:46यह तारामंडल पृथ्वी से करीब 100 प्रकाश वर्ष दूर है।
- 2:58इससे बिल्कुल ऊपर पोलटस्टार जिसे हम ध्रुव तारा कहते हैं, वह
- 3:06विद्यमान है। वह करीब 440 प्रकाश वर्ष दूर है।
- 3:12धरती से। पुषक इसका आध्यात्मिक प्रभाव क्या
- 3:23है और आपके जीवन पर इसका जात का प्रभाव क्या पड़ा?
- 3:29सिर्फ मेरे जीवन पर इसका आध्यात्मिक प्रभाव नहीं पड़ता।
- 3:34प्रत्येक प्राणी के जीवन पर। इनका आध्यात्मिक प्रभाव पड़ता है।
- 3:48बहुत बुनियादी प्रश्न बुनियादी मैं इसलिए कह रहा हूँ कि मेरे काम
- 3:59का कृष्ण है? जड़ से चेतन और महाचेतन होने की
- 4:06प्रक्रिया में ये सात्र ऋषि और ध्रुव तारा महा सहयोगी है।
- 4:19ध्रुव तारा उत्तर में स्थित है। उत्तरी गोलार्ध में उसकी रेंज सात
- 4:27ऋषियों पर पड़ती है। ऊपर वर्गाकार है, नीचे पुष की तरह
- 4:37तीन तार में द्रौह अपनी आध्यात्मिक चेतना को सप्तृशयों पर
- 4:45बिखेरता है। और सप्त ऋषि अपनी आध्यात्मिक
- 4:50चेतना समेत सारी इकट्ठी करके धरती पे फेंक देता है और भी बहुत सी
- 5:02स्थानों पे जाती है, लेकिन यहाँ हम सिर्फ पृथ्वी की बात करेंगे।
- 5:11ध्रुव अपनी आध्यात्मिक शक्ति को सप्तृष्टि पर बिखेरता है और
- 5:17वर्गाकार उसके नीचे जो पूछ है वहाँ से एक सेंटर बनाती हुई।
- 5:25यह आध्यात्मिक शक्ति पृथ्वी पर आ जाती है।
- 5:31ये अनुभव की बातें हैं। कृपया तार्किक मन इनका कटाक्ष न
- 5:44करें। मान न हो तो मान न मान न हो तो मत
- 5:48मान आध्यात्मिक प्रभाव सभी के जीवन पे पड़ता है अब थोड़ी सी और
- 5:59गहराई की बात बता। उन लोगों पे?
- 6:07ज्यादा पड़ता है जो अभिजीत नक्षत्र में पैदा हुए हैं।
- 6:14अब थोड़ा तुम्हें समझा दो अभिजीत नक्षत्र।
- 6:21दिन और रात में दो बार आता है। यद्यपि हमारे ग्रंथों में इसका
- 6:26जिक्र एक बार किया जाता है। दिन में 11:36 से 12:24 तक 11:36
- 6:40सुबह। मध्यान्ह जैसे हम कह देते हैं और
- 6:44रात्रि को 11:36 से 12:24 तक, यह 24 घंटों में दो बार आता है।
- 6:54अभिजीत नक्षत्र वैसे नक्षत्र कोई भी हो।
- 7:02अभिजीत समेत 28 नक्षत्र हैं। अभिजीत को इसलिए काउंट नहीं किया
- 7:08जाता क्योंकि यह वृद्ध अल्प समय के लिए आता है।
- 7:12चंद्रमा जिन नक्षत्रों की परिधि करता है, उन नक्षत्रों को।
- 7:18अश्विनी भरणीय कृतिका, रोहणी वृक्षार तारा पुनर्वासुबुक ऐसे ही
- 7:22ये 27 नक्षत्र हैं अट्ठाईसवाँ नक्षत्र अभिजीत नक्षत्र हैं ध्यान
- 7:33से सुनना ऐसे प्रश्न। ना तो रोज़ पूछे जाते हैं, ना
- 7:39रोज़ बताए जाते हैं। जो व्यक्ति दिन में अभिजीत
- 7:51नक्षत्र में पैदा होता है वह अवतार होता है।
- 7:58और ऐसा ही जो रात को अब ही जीत नक्षत्र में पैदा होता है, वह भी
- 8:05अवतार होता है। अवतार क्या है?
- 8:14परिभाषा आपके शास्त्रों में कुछ भी हो।
- 8:19अवतार वो होता है जिसके ऊपर आध्यात्मिक प्रवाह गिर पड़ता है,
- 8:33किसी भी विशेष व्यक्ति के जीवन को जब आप देखोगे आध्यात्मिकता की
- 8:40कसौटी पर। तो वह अभिजीत नक्षत्र में या उसके
- 8:47आसपास पैदा हुआ होगा। हम इसको 9 मिनट का रिलैक्सेशन
- 8:55देते हैं। ये सभी बातें मैं बाबा से पूछ कर
- 9:00बता रहा हूँ कृपया नोट कर लेना। 9 मिनट का इसमें कंसेशन हम देते
- 9:07हैं। 1136 1220 दिन में होरा।
- 9:21मध्यान्ह में और अर्ध रात्रि में आपको थोड़ी सी उदाहरण दे दूं।
- 9:31भगवान राम का जन्म मध्यान्ह में 12:24 हुआ है।
- 9:39वक्त में थोड़ा सा फर्क है क्योंकि वह ईसा से करीब 5100 वर्ष
- 9:50वैल्यू है और भगवान कृष्ण करीब 3100 वर्ष का ही है।
- 9:57ईसा से। तो भगवान राम का जन्म इसी इसी दौर
- 10:05में हुआ। अभिजीत नक्षत्र में कहीं 12:15
- 10:10बताया जाता है। कहीं 12:09 बताया जा सकता है जाता
- 10:17है। लेकिन हमने जो कैलकुलेशन की उसके
- 10:27हिसाब से इतना सा साफ होता है कि वो अभिजीत नक्षत्र में पैदा हुए।
- 10:32चैत्र शुक्ल नौ में। और भगवान कृष्ण तो आपको पता है
- 10:41रात्रि को 12:00 बजे पैदा हुआ है और ये दोनों अवतार हैं।
- 10:49जमदग्णी के पुत्र परशुराम भी रात्रि को विदा हो रहे हैं।
- 11:02इस वक्त को आप नोट कर लेना। मैंने पहले भी किसी वीडियो में
- 11:06बताया है। मुझे याद आता है कि अगर आपको कोई
- 11:11भी मुहूर्त न मिले तो एक अमूर्त रोज़ होता है, स्वयं शुद्ध
- 11:17मुहूर्त होता है, वो होता है। अभिजीत मुहूर्त अब रात को तो कोई
- 11:26मुहूर्त करता नहीं है। दिन में ही मुहूर्त होते हैं
- 11:3111:36 से 12:24 तक ये दो घड़ियाँ। अड़तालीस मिनट स्वयं सिद्ध
- 11:44मुहूर्त कहलाते हैं और इसमें आप कोई भी काम कर सकते हो, कोई भी
- 11:49योग यह ज्वालामुखी योग को भी नष्ट कर देता है।
- 11:59अभिजीत महूर्त इसलिए थोड़े से समय के लिए आता है।
- 12:03नक्षत्र नक्षत्र भी थोड़े से वक्त के लिए आता है।
- 12:08इसे अट्ठाईसवां नक्षत्र गाना गया है और यह मुहूर्त भी सिर्फ
- 12:15अड़तालीस मिनट के लिए आता है 24 घंटों में।
- 12:21एक एक शब्द को नोट करते जाना ग्रहण करते जाना तो क्या होता है
- 12:34अभी मैं साइंस बताऊँगा आपको साइंटिफिक कार्फ़िस्क।
- 12:41शास्त्रों में लिखे शब्दों को मैं नहीं बताऊँगा।
- 12:44वो कहानियों मिथक हैं मिथक तो कोई कुछ भी बना सकता है, उनका मैं
- 12:51जिक्र नहीं करूँगा, वो तो बहुत से हैं।
- 12:56जो मैंने जाना, जो मैंने पूछा जो संतो से पूछा जो ऋषियों से पूछा
- 13:02जो शिव से पूछा और जो मुझे अन्य अन्य स्थानों से ज्ञात हुआ उसका
- 13:14निष्कर्ष आपको बता रहा हूँ? यह सप्तशी मंडल हमारी मिल्की वे
- 13:27गैलेक्सी में है। हमारी इसी जिसमें हम रह रहे हैं
- 13:33मिल्की वे गैलेक्सी कहलाती है। इसके भीतर ही यह सत्याशी मंडल है
- 13:39और ध्रुव तारापी है। ध्रुव, तारेक और सत्याशी मंडल को
- 13:47बहुत से लोग हजारों हजारों लाखों वर्षों से।
- 13:55नाविक लोग समुद्री तट पर यात्रा करने वाले रहने वाले इसको एक दिशा
- 14:04निर्देश की तरह इस्तेमाल करते है। आज भी समुद्री जहाजों में
- 14:10सप्तशीमंडल और द्रव्य का उपयोग किया जाता है।
- 14:15बहुत पुरातन वर्ष से ये पोल स्टार और सप्तदशी मंडल दिशा निर्देश का
- 14:22काम किया जाता है, लेकिन इसकी अध्यात्मिक कहानियों भी बहुत हैं।
- 14:30तो उन कहानियों का मैं जिक्र नहीं करूँगा क्योंकि वह कहानी है,
- 14:34लेकिन उनके भीतर जैसे मैंने कहा यह एक जलेबी है, रस बराबर है।
- 14:44ध्रुव तारा। देखिये कहानी है कि ध्रुव ने बड़ी
- 14:49तपस्या की। तपस्या आजाद में करती है और उसको
- 14:55स्थान दे दिया गया ध्रुव तारे ये सभी तारे सात के सात तारे हैं।
- 15:05और ध्रुव भी तारा है। यह आठों की आठों तारे हैं।
- 15:09तारा जिसका प्रकाश स्वयं का होता है, ग्रह है, जिसका प्रकाश स्वयं
- 15:14का नहीं होता है। ध्रुव ने बहुत तप किया, बड़ी
- 15:30आध्यात्मिक शक्ति है उसमें इसे हम चेतना कह देते हैं।
- 15:39ध्रुव अपनी भरपूर चेतना से समाप्त न्योति जैसे हमारे अंतिस का बैठा
- 15:46हुआ वह तत्व कभी चेतना कम नहीं होती, कभी बढ़ते ऐसे ही द्रव तारे
- 15:55में चेतना कभी कम नहीं होती। निरंतर अगाध प्रवाह।
- 16:02चेतना का वो फेंकता रहता है कहाँ फेंकता है सप्तश्री मंडल में यह
- 16:11एक वर्गाकार आप देख सकते हो? खुली आँखों से सभी को दिखे हुए
- 16:16हैं रात को ये समूह तारा मॉडल। बहुत से ऋषि गण रात्रि को साधारण
- 16:30में बैठने से पहले इन्हें नमन करते हैं।
- 16:33इनका बड़ा योगदान है। नमन इस रूप में करते हैं कि यह
- 16:37पूज्यनीय है बड़ी चेतना का। अगाध विकट प्रभाव यहाँ से उंडेलते
- 16:48हैं। ये सारे आठों के आठ और व्यक्ति की
- 16:56सहस्रार इसको पी जाती है। अब थोड़ा सा यहाँ रुक जाएं, यह
- 17:08चेतना गिरती किसके ऊपर है? ध्रुव तारे की चेतना और सप्तरशी?
- 17:15यह भी ऋषि इन्होंने भी बड़ा तप किया है।
- 17:19तो इनमें आध्यात्मिक चेतना के प्रवाह को ही आप गिरना और यह
- 17:25प्रश्न भी आध्यात्मिक है। ध्रुव तारा अपनी आध्यात्मिक चेतना
- 17:32और सातों ऋषि अपनी आध्यात्मिक चेतना के प्रवाह को फेंकते हैं।
- 17:37धरा पे। और यह सोखता है हमारा दश्म द्वार
- 17:45सहस्रार ब्रह्मरुद्र जिसे हम कहते हैं यह खेच लेता है।
- 17:58इसलिए पंडितों ने सहसरार के पास बोधी बढ़ाई चोटी यद्यपि
- 18:16इन्सुलेटेड होती है, कंडक्टर में होती है।
- 18:21लेकिन यह एक सन्न इंगित करने के लिए था हमारे सिख धर्म में भी बाल
- 18:33रखने का केस रखने का महत्त्व बताया क्या?
- 18:41ये भी इसी बात का इंगित था। तुम्हारे बारों से कोई फर्क नहीं
- 18:48पड़ता, तुम चोटी रखो या केस रखो, लंबे केस रखो या सिरम मडाओ लेकिन
- 18:55ये एक। सिर्फ चिन्ह था प्रतीक चोटी वाले
- 19:02स्थान पर ब्रह्मरंद्र खींचता है अध्यात्म चेतना को और जो लोग केस
- 19:15लंबे रखते हैं वो लंबे रखें या छोटे रखें।
- 19:21वह प्रवाह पड़ता किस पर है? अब मैं ये बात आपको समझा रहा हूँ।
- 19:26कौन खींचता है इस प्रवाह को आध्यात्मिक प्रवाह को जो ध्रुव
- 19:36तारे से सप्तशिमंडल से आता है, धरती के ऊपर आता है, उसको खींचता
- 19:41कौन है? जिसमें समर्पित भाव होता है इसलिए
- 19:49कृष्ण का सर्वधर्माण पृथक्य मा निकम् शर्म पक्ष जिसके भीतर
- 19:58समर्पण का भाव होगा अग्रषण नहीं होगा।
- 20:03समर्पण होगा, वह खाली होगा, वह खें चलेगा।
- 20:15यह बोधी रखना चोटी रखना तो सिर्फ एक स्थान को इंगित करना था कि
- 20:21हमारा यहाँ से खींचता है। यदि आप जानते हो कि बाल
- 20:27इन्सुलेटेड हैं, कंडक्टर नहीं है, यहाँ से शक्ति भीतर प्रवेश कर
- 20:32नहीं सकते बाहर भी नहीं जा सकते। लेकिन इसका द्रव्य के साथ कोई
- 20:41संबंधी नहीं है। चेतना का द्रव्य के साथ कोई संबंध
- 20:45नहीं है। चेतना का, चित्त की दशा के साथ
- 20:48संबंध है, दशा हो, समर्पण की तो यह प्रवाह।
- 21:00आपके भीतर उतर जाएगा। मेरे ख्याल में शायद आपको बात
- 21:04समझा गई होगी। ध्रुव की आध्यात्मिक चेतना और
- 21:12सप्तशियों की आध्यात्मिक चेतना इकट्ठे होकर धरती पर जब आती है।
- 21:18तो कौन खींचता है उसको जो समर्पित मन का होता है वो खींचता है।
- 21:30इसलिए बाबा ने कहा हुक्मे अंदर सबको बाहर हुक्मना को है।
- 21:37इसलिए बाबा ने कहा तुम हकुम न बनो, तुम हुकुम को मानने वाले
- 21:44बनो, समर्पित हो जाओ, अग्रेशन में बताओ।
- 21:57संघार्क ना बनो, हमला करने वाले, ना बनो खेंच ले वाले बनो समर्पण
- 22:08भाग जिनके चित्र में होगा वो एन। शक्तियां को है, चेतनाओं को है,
- 22:20इसका शारीरिक कोई संबंध नहीं। जो लोग गंजे हो जाते हैं, इनके
- 22:30केस नहीं होते। सिख भी होते हैं, हिंदू भी होते
- 22:34हैं, मुसलमान, ईसाई सब होते हैं। कई स्त्रियों को तो स्वभावता ही
- 22:40बाल ज़्यादा होते हैं और जैन मुनियों ने स्त्रियों को कह दिया
- 22:45कि ये पहुँच के नहीं हो सकती। फिर क्या होगा इनका इनका तो जुड़ा
- 22:50हमेशा ही रहता है। संबंध है भीतर के समर्पित भाव से
- 23:03अगर आपकी भावना समर्पण की है, अगर आप सरेंडर हो गए।
- 23:09चित्त आपका सरेंडर हो गया, अब खाली हो गया, समर्पित हो गए तो आप
- 23:18योग्य हो गए इस चेतना को खींचने के वह व्यक्ति खेच पाता है, हर
- 23:27वक्त आता है। रात को ये ज्यादा होता है।
- 23:33वक्त की बात है जैसे सूर्य की गर्मी दिन में होती है, रात को
- 23:37नहीं होती तो रात को ये तारामंडल का प्रवाह और ध्रुव का प्रवाह।
- 23:49ये चेतना का आध्यात्मिक प्रवाह धरती पे बहुत होता है।
- 23:57यही नवरात्रों का मतलब था हमारे जो भी त्यौहार हुए रात्रि गांव
- 24:03में शिवरात्रि हो जन्मोष्टमी हो। नवरात्र में दो बार आते है और सही
- 24:11तो चार बार आता है तो आम नवरात्र हैं जो हमारे प्रसिद्ध हैं और जो
- 24:21गुप्त नवरात्र हैं वो ज्यादा में है तो वो कार्य में।
- 24:27बात को ज्यादा विस्तार नहीं दूंगा क्योंकि फिर आप वो सुन नहीं पाते
- 24:33हो। बस सबसे बड़ी कमी मेरे बोलने में
- 24:38कोई कमी नहीं है। मैं और भी बोल सकता हूँ लेकिन कमी
- 24:47है आपकी एवरेज क्यूँ डायरेशन जो कोई बात ना हुई 3040 मिनट की
- 24:54एवरेज क्यूँ? डायरेशन और वीडियो 1 घंटे से।
- 25:04आप पूरी सुना करो कई बार बिल्कुल आखिरी पड़ाव के ऊपर नष्कर्ष आता
- 25:10है। जैसे कहानी के आखिर में मोरल होता
- 25:13है और आप उसी को सूख जाते हो। फिर विवाद उठते हैं, फिर प्रश्न
- 25:21उठते हैं। क्योंकि आपने आंधी वीडियो सुनी,
- 25:25मेरे पास रोज़ कमेंट आ जाते हैं और मुझे कहना पड़ता है कि आप
- 25:29वीडियो पूरी सुनो भाई तो रात को इसका प्रभाव ज्यादा होता है
- 25:40आध्यात्मिक सतदर्शी मंडल और धर्म का।
- 25:44अध्यात्म का प्रभाव रात को ज्यादा होता है।
- 25:48इसलिए कृष्ण का एक कहने का कारण यह भी था कि जब सांसारिक रात को
- 25:55सोता है तो मेरा योगी रात को जागता है।
- 26:01क्या था कारण? कारण ये था कि रात को
- 26:08सप्तर्षीमंडल और ध्रुव इन आठों का आध्यात्मिक प्रभाव करीब तीन गुना
- 26:15ज्यादा हो जाता है, जो दिन में था तीन गुना ज्यादा रात को होता है।
- 26:23इसलिए रात्रि का इतना महत्त्व भगवान कृष्ण ने कहा कि सांसारिक
- 26:32जब सोता है मेरा योगी रात्रि में जागता है।
- 26:41क्यों जागता है? क्योंकि तीन गुणा प्रवाह चेतना का
- 26:46इन आठों तारों से आता है रात को आता है और बड़ा तेज वेव से आता है
- 26:56एक गहरे रहस्य हैं अपनी कहानियों सुनी।
- 27:01कहानियों मैंने भी पढ़ी पर मैं सदा कहता हूँ बड़े गहरे रहस्य।
- 27:10ये वो जलेबी है जो रत से भरी पड़ी है।
- 27:15इसमें मैदा कम है लेकिन बिगाड़ दिया मैदा ने।
- 27:19लेकिन मजबूरी थी क्या करें? कहानियों कहनी पड़ती हैं, चीजों
- 27:24को ज्यादा ड्यूरेबल बनाने के लिए। अब ये ज्यादा ड्यूरेबल थी तो
- 27:35कहानियों को आज कोई बताने वाला आ गया?
- 27:39पड़ी रहती हूँ, पड़ी रहती हूँ और इन प्रत्येक कहानियों को मैं
- 27:48जाऊंगा तो सारी कहानियों बाँझ कर नहीं जाऊंगा।
- 27:52मुझे भी पता है, लेकिन बहुत सी कहानियों।
- 27:58बहुत से प्रतीक जो अनसुलझे रहस्यों की तरह रह जाएंगे, वह कोई
- 28:04और आएगा, वह बाँच देगा इसको हमारे आध्यात्मिक त्यौहार हमारे त्यौहार
- 28:20वैसे तो आध्यात्मिक ही होते हैं। आमतौर से जो अध्यात्मिक नहीं होते
- 28:27वो दिन में होते हैं, जैसे होली, होली का कोई मतलब नहीं आध्यात्मिक
- 28:32होली तो सिर्फ जश्न है कैथोडिस का, वह तो तुम्हारी दबी हुई
- 28:38भावनाओं को कैथोडिस करने का एक। समाज ने साधन बना दिया।
- 28:43वो कहानी गढ़ ली गई। उस कहानी में कोई तत्व और तंत
- 28:47नहीं है, वो दिन में मनाया जाता है, रात को जो मनाये जाते हैं,
- 28:55त्यौहार असली आध्यात्मिकता उनमें है।
- 29:01दीपावली की रात नवरात्रों की रात नौ नवरात्र और फिर नौ नवरात्र और
- 29:08दो गुप्त नौ नवरात्र, 36 दिन तो ये हो गए।
- 29:15वर्ष भर में अगर 36 दिन कोई व्यक्ति राहत जाग लेता है और
- 29:21विशेषतः इस वक्त में जाग लेता है। कब साढ़े 11 से साढ़े 12 तक आप एक
- 29:33घंटा रख लो। मिनटों में वही जाओगे तुम साढ़े
- 29:4011:00 बजे से साढ़े 12:00 बजे तक रात्रि को आप जाप क्या करो मंत्र
- 29:48जप करो। ध्यान में बैठ जाओ, कुछ नहीं
- 30:01करना, एक घंटा शीतल हो के बैठ जाना।
- 30:06वैसे भी अगर आप सो जाते तो शीतल ही होते ध्यान रखना।
- 30:11अगर आप सो जाते तो इस वक्त में आप शीतल होते हो और नींद में गए होते
- 30:15हो और नींद में आपका ये चक्र जागृत नहीं होता है।
- 30:21ऐसा इसलिए बहुत बहुमूल्य वक्त में आप सो जाते हो।
- 30:33जिसका इतना गहरा प्रभाव नहीं था। उसमें आपके ऋषि जागने को कहते हैं
- 30:38आपके ऋषि शब्द वर्तमान में जब उसमें कोई विशेष शत्रत्व की बात
- 30:45नहीं है, थोड़ी सी बात है। जो जागनी की वेला थी, भगवान कृष्ण
- 30:54ने भी इशारा ही किया। सर जो भी एक सांकेतिक भाषा में ही
- 30:59आपको बता के क्या जब संसारिक सो जाता है?
- 31:07मेरा योगी रात को जी जानता है, इसके बहुत से अर्थ और भी हैं वक्त
- 31:13वक्त पे इसके और भी अर्थ मैंने बोले होंगे और और भी अर्थ शायद
- 31:17बोलो ये भी एक अर्थ है जो महत्वपूर्ण है।
- 31:25इस दौरान अगर आप जागोगे शरद पूर्णिमा की रात को जाओ बहरात
- 31:33बड़ी महत्वपूर्ण है। शायद मैंने जिक्र नहीं किया।
- 31:40शरद पूर्णिमा का दिन बड़ा शांत है।
- 31:45यह है दिन को पवित्र जान के भगवान राम ने जल्द समाधि ले ली।
- 31:50क्या दिया आपने? शरीर दान का महत्त्व?
- 31:55दान का शरीर दान करो, अपना अंहकार दान करो।
- 32:01लेकिन लोगियों ने इसको पैसे के दान करने में डाल दिया क्योंकि
- 32:09लोग ही तो धन की ही कामना करेगा छोड़ो और भगवान राम अति कर देते
- 32:21हैं, छोड़ना है। तो शरीर को ही छोड़ देते हैं।
- 32:27चलो शरद पूर्णिमा का वो दिन भगवान राम ने शरीर त्याग दिया बड़ा शुभ
- 32:37दिन होता है कभी बताऊँगा वक्त नहीं होता।
- 32:42अब सुनने वालों मैं नहीं हूँ। आप आचार्यों के बकवास सुनने में
- 32:47बड़ा वक्त व्यतीत कर देते हो। अब आपको क्या बताऊँ आपके निरुंज
- 32:53भरे बड़े हैं। अध्यात्मिक रहस्यों को आप सुनते
- 32:59हैं जिससे आपका जीवन तब्दील हो जाए।
- 33:03और जीना इसी को कहते हैं जो रहस्य से परिपूर्ण हो इधर से इकट्ठा
- 33:14किया, उधर से इकट्ठा किया, बोल दिया, अपना दिमाग लड़ा के बोल
- 33:18दिया। लेकिन बोलते हैं ये खोपड़ी से।
- 33:22उस अतल पर जाकर न तो इन्होंने देखा न इनके पास अनुभव है, बस
- 33:30ब्रेन है, वोकबुलरी है तर्किक मन है कॉम्पिटिटर मन है ये जानते हैं
- 33:37सब। लेकिन जो सब जानता है वो कुछ नहीं
- 33:41जानता। ये सारे लोग क्या जानते हैं, कुछ
- 33:43नहीं जानते क्या? खा के जानते हैं जिसने अपने भीतर
- 33:50जाके वो तल नहीं जाना, उसने समझो कुछ नहीं जाना, वह मूर्ख का मूर्ख
- 33:58रहा। काक पढ़ाया पिंजरा पड़ गया।
- 34:03चारों वेद तुम चारों वेद पड़ गए यानी सब तरह का ज्ञान तुमने पढ़
- 34:07लिया। समझाए, समझा नहीं, कितनी भी कोशिश
- 34:13कर ली संत आपको उस तल पर समझाने की बात अरे और डेढ़ का डेढ़।
- 34:19तो हम डेढ़ के डेढ़ ही रहते हैं। बात उस तल की समझने की थी जो
- 34:26समझाया नहीं जाता, इशारे भी करते हैं, समझाते भी हैं, शब्द भी
- 34:33प्रयोग करते हैं। गहरे से गहरे।
- 34:36इशारे और शब्दों का प्रयोग करते हैं, लेकिन तुम ये आचार्य लोग
- 34:41डेढ़ के डेढ़ ही रह जाते हैं। हम आगे चलें रात को।
- 34:571236 से 1136 से 1224 तक ये दो घड़ी हैं अड़तालीस मिनट हैं।
- 35:06इस वक्त अगर आप खाली मन से बैठ जाओगे, आराम से बैठ जाओगे, मन
- 35:12चलेगा वैसा ही। जैसे ध्यान में चलता है चलते दिन
- 35:24सर पर आपके क्या है क्या नहीं इसका फिक्र ना करना है।
- 35:27ये आध्यात्मिक रेंज जैसी रेंज है। यह पारदर्शी होती है।
- 35:32यह तो दीवारों को क्रॉस करके आ जाती है।
- 35:38सिर पर आपकी पगड़ी है नहीं है जुड़ा है नहीं है, सिर्फ मुंडा
- 35:46रखा है, इसकी ज्यादा बाहर की परवाह न करना, परवाह करना, आपके
- 35:53जागरण की सोए मत रहना, सोए में नहीं, यह एक्सेप्ट होगी।
- 35:59जागने में एक्सेप्ट होंगे तो जागो उस वक्त जागो इसे जागरण कहा गया।
- 36:07आप सारी रात जागते हो? माँ माँ चिल्लाते रहते हो, समझाने
- 36:13वाले कुछ और समझा के गए थे, तुम समझ गए कुछ और?
- 36:19अब तो मटर जी आलू जी सारे रात जागते हैं, आपको भी चगाते हैं,
- 36:28मिलता मिलाता कुछ नहीं, किसी को वे चार पीसे अच्छे इकट्ठे कर रहते
- 36:34हैं, वो संघ नहीं रहते। ऊपर से जो आती हैं तीन गुणा
- 36:47ज्यादा रात्रि को हो जाता है इनका प्रवाह अध्यात्मिक प्रवाह स्वामी
- 36:59प्रेम प्रकाश ने जो प्रश्न पूछ रहा हूँ।
- 37:06उसका कारण लगता है सप्तशों की कहानियों बहुत पढ़ी होंगी।
- 37:12मैंने भी बहुत पढ़ी, लेकिन उन कहानियों में तो कोई सार नहीं है।
- 37:19उन कहानियों के भीतर सार है। कहानियों का खोल तो मैदा का है,
- 37:28रस उस मैदा के भीतर है जो व्यक्ति जन्मे दो अभिजीत मुहूर्त होते
- 37:44हैं। मैं आपको बताया दिन में भी रात
- 37:47में। समय वही 1136 से 1224 तक सही एकल
- 37:56वक्त है, लेकिन आप साढ़े 11 से साढ़े 12 तक का लगा लो।
- 38:03मोटे मोटे रूप में याद रह जाएगा आपको?
- 38:10इस वक्त आप कोई मुहूर्त कर सकते हो।
- 38:16रात को विशिष्ट प्रभाव होता है। ऐसा नहीं कि दिन में प्रभाव नहीं
- 38:19होता है। तीसरा हिस्सा होता है।
- 38:23इसलिए हमारे संध्याकाल में मध्यान्ह संध्यावित थी
- 38:30संध्याकालीन शाम की विधि और सुबह की विधि प्रभात संध्यावित थी।
- 38:36मध्य की विधि और शाम की विधि। दिन में प्रवाह तो होता है लेकिन
- 38:44दिन में आपने कामधम करने होते हैं।
- 38:50रात्रि को आप ये वक्त निकाल सकते हो।
- 39:00ये इसका सारा कैलकुलेशन थोड़ा और। सूक्ष्म से पूछ रहे हैं थोड़ा और
- 39:10विस्तार से एस्ट्रोलॉजी के हिसाब से समझा दो ध्रुव तारे से और ये
- 39:24सात तारे हैं आठ तारे हो गए ये फेंकते हैं।
- 39:31किसी भी बाधा को पार कर जाते हैं। जैसे आत्मा सभी बाधाओं को पार कर
- 39:38जाते हैं। बाधा तो आपकी सूरज की रोशनाई कर
- 39:43जाती है, शीशे में से नकड़ जाती है।
- 39:56आज के इस प्रवचन में कई प्रश्नों को मैं समेट नहीं चला हूँ।
- 40:01माधव पांडे का बम्बे से है। आपने कहा दुर्गा सप्तशरी का पाठ
- 40:07मत करो और क्या करें? ध्यान में बैठो, खाली हो के बैठो।
- 40:15नवरात्रि हैं पाठ आप दिन में करते हो खाना क्यों सिंपल रखा हुआ है
- 40:28जितना महीन खाना हो गया जितना सूक्ष्म खाना हो गया अल्प आहार?
- 40:34लेकिन अल्पाहार ध्यान रखना शरीर कमजोर न हो जाए।
- 40:38मेरी बात अलग है। मैं उस तल से भी ऊर्जा ले लेता
- 40:46हूँ। जब तुम उस तल पर जाओगे तो तुम भी
- 40:49वहाँ से ऊर्जा लेनी शुरू कर दोगे। सूक्ष्म आहार जो आप को तंग न करे
- 40:59पिछले 9 दिन तक जो गृष्ठ आहार थे मांसाहारी बड़ा गृष्ठ होता है।
- 41:10और खराबी हो न हो लेकिन ये गृष्ठ बहुत होता है और बहुत ही गृष्ठता
- 41:20के कारण इसका आध्यात्मिक दुष्प्रभाव अवश्य पड़ता है।
- 41:25मांसाहारी का? अगर आप।
- 41:29इस सब प्रभाव को झेल सकते हो तो खाते रहिये, कोई इंकार नहीं है
- 41:35आपके क्या फिर परमात्मा की तरफ यात्रा बड़ी स्लो हो जाएगी?
- 41:45धीरे धीरे चलोगे तो नवरात्रों में।
- 41:50खाना पीना क्यों कम कर देगा? फलाहार?
- 41:53बस दही लेना है, थोड़ा सा आलू वगैरह रायता ले लेना है।
- 41:59नट का यही महत्त्व था। पेट ज्यादा भरा होना नहीं चाहिए।
- 42:06अब एक बात और बता दूँ ये डॉक्टर से संबंधित है।
- 42:09डॉक्टर से भी नोट कर लें आपकी शक्ति व्यक्ति की शक्ति, भोजन को
- 42:20बचाने में खर्च होती है। अगर आप भोजन इतना ज्यादा ले लोगे।
- 42:26के व्यक्ति की शक्ति भोजन पचाने में ही लग जाए तो वह तो लग ही
- 42:33जाएगी। अगर आप कम खाना ले लोगे, आधे भोजन
- 42:39से चल सकता है तो जो आंधी शक्ति बच गयी।
- 42:46वह आपकी रोगों की भीतर रोगों को नष्ट करने में लग जाएगी।
- 42:52इसलिए कम खाने वाला बीमार बहुत कम होता है क्योंकि होता तो है वो।
- 43:03रोग के कीटाणु तो उसके भीतर जाते हैं, परंतु उसकी जो संगारिक शक्ति
- 43:11भीतर की है वह उन कीटाणु को मार देते हैं।
- 43:17जीस शक्ति को आप भोजन को पचाने में।
- 43:22अतिरिक्त भोजन को पचाने में व्यय कर देते हैं।
- 43:27वह अतिरिक्त शक्ति बच जाती है और आपके रोगों को संहार करने में काम
- 43:33आती है। इसलिए रोगी व्यक्ति अपने खानपान
- 43:37का विशेष ख्याल रखें। यह शक्ति भी आपके रोगों को कम
- 43:42करेगी। दवाई के साथसाथ यह भी एक तरह का
- 43:48उपचार है कि भारी ग्रस्त भोजन खाने वाले मांसाहारी चाउ मिन
- 44:01चुंगा। इतना कृष्ट भोजन कैसे पचेगा जैसे
- 44:13आपने देखा कोई ऊंची स्थान पे आपके व्हीकल को जड़ाना हो तो कितने में
- 44:22ज़ोर लगता है गाड़ी का? भाई ये घूमने लग जाते हैं, खुर
- 44:27खुर करने लग जाते हैं, गाड़ी आके नहीं चल पाती, बिलकुल इसी प्रकार
- 44:34आपकी भीतरी मशीनरी को काम करना पड़ता है।
- 44:38बेचारी असमर्थ हो जाती है भीतर की मशीन।
- 44:43इसलिए भगवान कृष्ण ने कहा युक्त आहार बिहार आहार युक्त लोग थोड़ा
- 44:52अल्प जिससे जीवन जल जाए कमजोर भी न हो तुम।
- 44:58अपना काम दाम देख लो। हमने क्या काम करना है?
- 45:01वजन का काम करना है तो भाई खाना उसी ढंग से पौष्टिक और ज्यादा
- 45:05लेना पड़ेगा, लेकिन सिर्फ बैटरी का काम करना है।
- 45:10कुर्सी पर ये बॉस लोग हैं, सिर्फ कलम चलाते हैं, वो हल्का खाना है।
- 45:20तो नवरात्रों में ये जो हल्का खाना खाने के साथ आध्यात्मिकता का
- 45:24बड़ा संबंध है, हल्का खाना और फिर आस पास का माहौल बड़ा अध्यात्मिक
- 45:37होना चाहिए। सब तरफ से बाहर से भजन, कीर्तन,
- 45:43संकीर्तन ये चलता है और कुछ नहीं हो सकता अगर तुम ध्यान के गहरे
- 45:55तलों पे नहीं पहुंचे। तो कोई आध्यात्मिक कहानी कह लो,
- 46:04अश्लील कहानियों से या अश्लील फिल्मों को देखने से तो ज्यादा
- 46:08अच्छा है, वह तो आपको दूषित कर देगा।
- 46:14मनुष्य में गंदगी को लेके आओगे। तो ज्यादा ये बेटर है, बेस्ट नहीं
- 46:23है, बेटर है तो मैंने आपसे कहा कि इस वक्त में जन्म लेने वाले हैं,
- 46:38दिन में जन्मे हैं भुगान राम। 12:00 बजे के बाद करीब साढ़े 12
- 46:45से पहले पहले उनका जन्म हुआ। शुक्ल पक्ष था चित्र का महीना था
- 46:56और मध्यान का वक्त। और भगवान कृष्ण बोलिए।
- 47:06उसी मुहूर्त में अभिजीत मुहूर्त में भगवान कृष्ण 12:00 बजे रात्रि
- 47:15इस वक्त में जन्मे। और जमदग्नि के पुत्र क्षमा करना
- 47:22परशुराम वो भी रात्रि को जन्मे और तीनों अवतार अवतरण क्या जिनके
- 47:35भीतर परमात्मा की वो शक्ति अवतरित हो जाए?
- 47:40परमात्मा की शक्ति क्या है? सत्य को जानना हू एमआइ ये बेश है
- 47:50जिसने ये जान दिया उसके भीतर आध्यात्मिक शक्ति उतर गयी, चेतना
- 47:56उतर गयी। हू एमआइ रेमेम्ब्रेंस तुम्हारे
- 48:03अपने होने के रेमेम्ब्रेंस यह परमात्मा का अवतरण है, जिसके भीतर
- 48:10भी उतर गया वह अवतरित हो जाता है राम के भीतर उत्तरा।
- 48:16कृष्ण के भीतर उतरा, परशुराम के भीतर उतरा इसलिए ये अवतार कहलाये
- 48:27साधारण मनुष्य जो संसार में फिर रहे हैं, वो भी अगर इन अभिजीत
- 48:34मुहूर्त में जन्म लेते हैं। तो अपने जन्म के वक्त का खास
- 48:41ख्याल रखना। अगर आप इस वक्त में जन्मे हो तो
- 48:46किसी जोशी से पूछने की आवश्यकता नहीं है।
- 48:49उसको तो पता भी नहीं होगा, वह तो आंकड़ों का।
- 49:01गुनाह नफी करेगा, मल्टीप्लिकेशन करेगा, डिवायडेशन करेगा फिर आपको
- 49:07बताएगा उसको कुछ पता नहीं। इन चीजों का उससे पूछना भी मत और
- 49:15उसको पता भी नहीं है। इसे मैं ही बता रहा हूँ।
- 49:19मेरी ही बातों को समझ लो, जिसका जन्म अभिजीत मुहूर्त में हुआ।
- 49:28सुबह दिन में या रात्रि में 1136 से 1224 तक।
- 49:39तो वह अपना क्षेत्र अध्यात्म जरूर चुनें, क्योंकि इस वक्त में जन्मे
- 49:48व्यक्ति के भीतर अवतरण बड़ा सहज हो जाता है।
- 49:56मैंने आपसे पहले भी कहा। 9 मिनट के 9 मिनट पहले और 9 मिनट
- 50:00के बाद हम रिलैक्सेशन देते हैं क्योंकि तब तक यह प्रभाव काम करता
- 50:05है। अगर ज्यादा भीगने तो 6 मिनट और
- 50:111515 मिनट तक उतना प्रभाव नहीं होता।
- 50:16लेकिन क्षीण होता जाता है जैसे सूरज, डलता, डलता, डलता शिखर से
- 50:23होता है और लेकिन ढलता ढलता। सूर्यास्त के वक्त भी उसकी लाल मत
- 50:29रहती है और सूर्यास्त होने के करीब भी।
- 50:34प्रकाश तो बना रहता है चांदनी सूर्य की चंद्रमा की बनी रहती है
- 50:47सही वेला, ये अड़तालीस मिनट है इसमें जन्मे व्यक्ति।
- 50:54अगर अपनी लाइन चुनना चाहते हैं और कोई भी चुन ले, पारिवारिक निर्वहन
- 51:02के लिए कुछ भी चुन लें, वो अपना रस देखें।
- 51:10किधर उसमें मैं कोई व्यवधान नहीं करता।
- 51:15आप कौन से सब्जेक्ट में इंटरेस्टेड हो ये आप जानते हो?
- 51:19वो मैथ है, फिजिक्स है, बायोलोजी है, सिविक्स है, पॉलिटिकल साइंस
- 51:24है, वो आप जानो, लेकिन मैं बात मेरे बात करने के बाद ही कुछ और
- 51:31है। मैं कहता हूँ अध्यात्म को जरूर
- 51:33चुन लेना। अगर आपका जन्म इस काल खंड में हुआ
- 51:38है, दो अभिजीत मुहूर्त में हुआ है।
- 51:43इन नक्षत्र में अगर हुआ है तो थोड़ा सा और ख्याल कर रहा था।
- 51:50जिसका जन्म अभिजीत नक्षत्र में हुआ है।
- 51:55वह नक्षत्र अलग होता है और अभिजीत मोरू दरक होता है।
- 52:01नक्षत्र अट्ठाईसवां नक्षत्र है। वो तो अपनी लाइन को अगर।
- 52:11आध्यात्मिक रूप से ज्यादा रख लें और सांसारिक रूप से सिर्फ अपनी
- 52:18जरूरतों को पूरा करने हेतु ही रखें तो बहुत बढ़िया रहेगा।
- 52:27जिनका जन्म। अभिजीत नक्षत्र में हुआ है और
- 52:31जिनका जन्म अभिजीत मुहूर्त में हो तो रोज़ होते हैं।
- 52:34दो बार अभिजीत नक्षत्र नहीं होता, वह तो अट्ठाईसवां नक्षत्र है, एक
- 52:44एक नक्षत्र करके चंद्रमा क्रॉस करेगा।
- 52:47और अभिजीत नक्षत्र होता भी कुछ घंटे का ही है।
- 52:53पूछा है स्वामी ने की मेरी ज़िन्दगी पे इसका क्या प्रभाव
- 52:58हुआ? सप्तर्षी का मेरी ज़िन्दगी में
- 53:03नहीं सभी की ज़िन्दगी में ये प्रभाव होता है, लेकिन आप सोये
- 53:06रहते हो? मेरी बायोग्राफी पढ़ना मैं अक्सर
- 53:10रात को बाबा की समाधि में बैठा होता हूँ, रात्रि को शाप गुजरते
- 53:22हैं वहाँ से। बड़े बड़े सांप मेरे शरीर के।
- 53:26ऊपर से गुजरते हैं। और मुझे वहाँ के जमींदार कहते हैं
- 53:32मत जाओ, बड़े बड़े सांप है। हमने आज ही कोबरा मारा है, उनकी
- 53:39कोई बात नहीं सुनता। मैं जाके समाधि के ऊपर बैठ जाता,
- 53:46बाबा धर्मदास सिद्ध पुरुष से वहाँ दफन है, आज भी दफन है, उनकी तरंगे
- 53:55निकलते हैं और मुझे बाबा ने बता दिया था सारे।
- 54:03के जहाँ एनलाइटन पर्सन दर्शन है, सबसे श्रेष्ठ स्थान है वो ध्यान
- 54:12का क्योंकि लगातार वहाँ से प्रचुर मात्रा में आध्यात्मिक रंगों का
- 54:16विकिरण होता है। और जहाँ जो भी व्यक्ति वहाँ बैठा
- 54:21होता है वो पी जाता है, उनको हमने भी ऐसा इंतजाम किया है।
- 54:27पास में थोड़ी सी जगह ली है और अपने शिष्यों से मैं बोल रहा हूँ।
- 54:39के मृत्यु के उपरांत यहाँ दफन कर दिया जाए।
- 54:45वहाँ पर बैठकर ध्यान करने की सुविधा हो तो जिज्ञासु जो ध्यान
- 54:55में जाना चाहते हैं, अपने अंतःस्थ रस पीना चाहते हैं।
- 54:59उनके लिए बड़ा सहज होगा। स्वाभाविक होगा ध्यान में उतरना।
- 55:04हर वक्त उस स्थान पर मस्ती रहती है।
- 55:08करीब 60 फुट के एरिया में रहती रहती है, इसलिए हमने यहीं आश्रम
- 55:18के समीप ही एक स्थान चुना है। क्योंकि मैं समझता हूँ कि एक छोटा
- 55:35सा कर्म जो बाकी है क्या उसको भोगने के उपरांत मेरा ओर कोई कर्म
- 55:39बाकी नहीं भोगना फिर उसकी आज्ञा है।
- 55:49जब ये शरीर आखरी सांस ले ले तो यह दर्शन करते हो ताकि मैं निर्जीव
- 56:00होता हुआ भी या पार्थिव शरीर आपकी सहायता कर सके और जीस तरह मैंने
- 56:07बोला पिछले प्रवचरो में। उस तरह से उस बोध को उतार लेना,
- 56:15भक्ति भाव से श्रद्धापूर्ण उस विराट से प्रार्थना करना किस बोध
- 56:27को यहाँ उतारते रहे? मिस्टर समझा रखा है।
- 56:37ऐसे स्थान पर बैठने से साधकों को बड़ा लाभ होता है और उस स्तर पर
- 56:47आप पहुँच जाओगे जहाँ जाना आपके लिए।
- 56:50असंभव नहीं तो मुश्किल जरूर लगता है।
- 56:59थोड़ा शोर बता दूँ? ये सूक्ष्म से और आ रहा है ग्रहों
- 57:04के बारे में तारा मंडल की बात की। मैंने तो ग्रहों के बारे में
- 57:09थोड़ा सा बता दीजिए। हमारे सौर मंडल में तारा तो एक है
- 57:15सूर्य बाकी ये पंडित रोग ज्योतिषाचार्य, नवग्रह बताते हैं।
- 57:26ये सूर्य को भी ग्रह में गेन लेते हैं।
- 57:29सूर्य ग्रह नहीं है, सूर्य तारा है।
- 57:35नवग्रह शांति, नवग्रह तो शांति होती नहीं, ग्रह तो आठ ही रह जाते
- 57:40हैं और सही तो ग्रह सात हैं सूर्य समेत सूर्य तरह छे ग्रह।
- 57:53जिनके नाम वारों के ऊपर हैं डेस सोम, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र,
- 58:00शनि और सूर्य सूर्य सितारा है अच्छे ग्रह आपने जो राहु केतु
- 58:11बनाए। मैंने पहले भी कहा है।
- 58:15जे। राहु केतु कहीं भी नहीं है,
- 58:19भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, ये सिर्फ बिंदु है जिनका कोई प्रभाव
- 58:24नहीं होता। आपको डराया गया है, मैंने बहुत
- 58:29बार आपको कहा। इसका हमारे जीवन में ज़रा भी
- 58:33समृद्ध नहीं होता। इसका हमारे जीवन में सिर्फ उस
- 58:37वक्त संबंध होता है जबकि ग्रहण लगता है बस उस काल खंड के लिए जब
- 58:45सूतक लगता है। जब आप डर कर भगवान के दरवाजे बंद
- 58:49कर लेते हो कि भगवान कहीं अपवित्र ना हो जाए, वह ग्रहण को बनाने
- 58:55वाला भगवान अपवित्र कैसे होगा? बताओ कभी यह सोचा तुमने जिसने
- 59:04ग्रहण को लगाया? वह अपवित्र कैसे हो गया?
- 59:10और अगर ये सारी सृजना को अपनाने वाला अपवित्र हो सकता है तो आपसे
- 59:18बड़ा मूड कोई नहीं है, इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ कि दुर्गा
- 59:23सप्तस्ती पढ़ने वाले मूड हैं। कुकी वो भगवान की व्याख्या बड़ी
- 59:29शुद्ध कर सकते हैं। वह तो बराबर है।
- 59:33बस दो चार शुभ नशुब मारे महर्ष्या सुर मारे सर्फ़ इसीलिए परमात्मा
- 59:40व्रत होता है। मैंने उस दिन भी कहा था एक एटम बम
- 59:49पलक झपकते ही करोड़ों व्यक्तियों को खत्म कर सकता है और तुमने अपनी
- 59:58शक्ति स्वरूपा माँ को इतनी शक्ति बनाई थी।
- 1:00:04कितनी कम शक्ति में तुमने निपटा दी?
- 1:00:12जी सिर्फ माँ की शक्ति का व्याख्यान नहीं है, आपकी शुद्र
- 1:00:22बुद्धि का व्याख्यान कर रहे हो, वह तो परम शक्ति है।
- 1:00:28इसलिए मैंने कहा ये मजाक है, उस अर्ध नारीश्वर का मजाक है।
- 1:00:38पूछा इन्होंने? माधव पण्ड में ये अगर मजाक है तो
- 1:00:43फिर हम क्या करें? जरूरी थोड़ा है कि अगर कोई पाखंड
- 1:00:52लाखों सालों से चल रहा है और तुम्हें समझ नहीं आई तो तुम उसको
- 1:00:56दोहराते रहो, समझने के बाद नहीं, नहीं इसको बंद करो बिलकुल जे दिन।
- 1:01:06काम के हैं, लेकिन दिन काम के हैं।
- 1:01:09दिन में जागो, सिर्फ इसी वक्त ध्यान में बैठो, बाकी समय की
- 1:01:15आवश्यकता नहीं है। आदमी 24 घंटे से ध्यान में नहीं
- 1:01:18बैठ सकता। साढ़े 11 से साढ़े 12 दिन में
- 1:01:22साढ़े 11 से साढ़े 12 और जागरण भी करना हो।
- 1:01:32अगर माता का गुणगान ही करना है चलो है तो ये मूड था, लेकिन अगर
- 1:01:40कर ही रहे हो। तो रात्रि को दुष्कर्म करने के
- 1:01:45बजाय मद्यपान करने के बजाय वैशदों पर जाने के बजाय अगर तुम माँ का
- 1:01:51संकीर्तन करते हो तो इस वक्त का विशेष ख्याल रखा करो।
- 1:01:54साढ़े 11 से साढ़े 12 रात्रि। मैं आपको थोड़ी सी रेलक्सेशन
- 1:02:04इसीलिए देता हूँ। क्या आप मूड हो मानते तो हो नहीं।
- 1:02:09कितना ही बोल ले, कितना ही तथ्य समझाने लेकिन मानोगे नहीं तो चलो
- 1:02:15कम से कम बुरा काम तो ना करो, अच्छा कहो।
- 1:02:20मैंने तो ऐसे लोग तक एन्जॉय शराब पीकर जागरण करते हैं।
- 1:02:23अब क्या नाम कष्ट होता है आप हमारी संस्कृति को नष्ट कर रहे
- 1:02:42हो, सनातन के ऊपर बोझ हो आप? शराब पीकर जागरण होती है, मूर्ख
- 1:02:51हुए हो, शराब पीकर मुर्छा होती है, जागरण नहीं होता तुमको किसी
- 1:02:59मूर्ख ने बता दिया। बिगड़ते बिगड़ते बिगड़ते
- 1:03:03व्यवस्थाएँ बदल जाती हैं, बिगड़ जाती हैं।
- 1:03:06और फिर तुम बिगड़ी हुई व्यवस्था को निभाते चले जाते हो और अगर कोई
- 1:03:12तोड़ता है तो तुम कहते हो हमारी भावनाओं को आहत कर दिया है।
- 1:03:17ये तुम्हारी भावनाओं हैं, ये दूर बुद्धियां हैं ये भावनाएँ नहीं।
- 1:03:25नवरात्र आ रहे हैं। मुझसे पूछा है उससे लोगों ने बाबा
- 1:03:28पर बताओ क्या करें? सुबह उठो, स्नान करो उस दिन पूरा
- 1:03:36व्रत की तरह रहो, थोड़ा सा शरीर चलाने के लिए खाना खाओ, हल्का
- 1:03:42खाना दही ले लो। राइता ले लो, हल्का फल ले लो
- 1:03:51गृहस्थ भोजन न करो तो मैं तो इन सनातन प्रेमियों से खाऊंगा के
- 1:04:01मास। कि दुकानें नहीं मांस खाना बंद
- 1:04:05करो। ये बहुत गृष्ठ भोजन है, इसके लिए
- 1:04:11जी हत्या तो है ही लेकिन आपके लिए भी गृष्ठ भोजन है।
- 1:04:16आपका पेट है कोई कब्रिस्तान थोड़ी।
- 1:04:21तुम तो इसको कब रिश्ता बनाते हो, मुर्दो का दफन करते हो, ये
- 1:04:27तुम्हारा कोई जीना नहीं है। तुम जीते हो हम जानते हैं लेकिन
- 1:04:32ये जीना कोई जीना नहीं है तुम्हारा।
- 1:04:39फिर भी हम रिलैक्सेशन ऐसे देते हैं कि चलो कोई बात नहीं।
- 1:04:43नवरात्रों में 9 दिन तो शुद्ध रहो चार नवरात्र आएँगे दो गुप्त और दो
- 1:04:50दूसरे नवरात्र जो ओपेन चलते हैं 36 दिन तो तुम शुद्ध रहोगे।
- 1:04:5736 दिन तो तुम मध्यापालन ही करोगे?
- 1:05:02गुप्त नवरात्रों का ज्यादा महत्त्व है।
- 1:05:04कभी किसी ने सवाल पूछा तो जो भी बताऊँगा लेकिन वक्त लग जाता है।
- 1:05:10अब देखिए आप कब तक सुनोगे 1 घंटे से ऊपर की बड़ी आओगे।
- 1:05:16इतना सुन पाओगे और ये सब्जेक्ट नहीं है कोई ये आपके जीवन से
- 1:05:25संबंधित है, सब्जेक्ट तो आपके नूरून से होता है।
- 1:05:30सब्जेक्ट तो आपकी सूचनाओं से होता है।
- 1:05:33यह तो आपके जीवन से संबंधित बातें हैं।
- 1:05:36आप इनको क्यों नहीं सुन पाते? तो मेरे जीवन पर क्या प्रभाव रहा?
- 1:05:44सभी के जीवन पे प्रभाव होता है जो रात को जागते हैं।
- 1:05:47भगवान कृष्ण कहते हैं कि मेरा योगी रात को जागता है और मैं भी।
- 1:05:52बाबा धर्मदास की समाधि में रात को मैंने आज तो बोला नहीं कब का बोल
- 1:06:00चुका भागु से? मैंने वहाँ जाना ही जाना था और
- 1:06:03अक्सर लोगों ने देखा भी होगा। मुझे लोग उन दिनों में पागल कहने
- 1:06:12लगे थे जो लेख से हट के चले, वह पागल ही कहलाएगा।
- 1:06:23और उसे चुप रहना चाहिए, शांत रहना चाहिए क्योंकि अगर कोई पूजा करने
- 1:06:29लगा तो आप पूजा में और इच्छा हो गया।
- 1:06:31कच्चे होते हो भाभी पक्के होके तो तुम पूजा करवाओगे।
- 1:06:36ये पांडाल लगाने वाले पूजा करवाना चाहते हैं या कच्चे?
- 1:06:41मैं क्यों बैठा हूँ? छोंक के भीतर एक कमरे में बाहर
- 1:06:49पंडाल से जाता ही नहीं, बाहर दर्शन करता ही नहीं, न दर्शन देता
- 1:06:56हूँ, न कोई जरूर से निकलता हूँ। ये जुलूस की बात से एक थोड़े से
- 1:07:09मजाक की बात है। भाई हमारे यहाँ सुरजीत सिंह
- 1:07:12बरनाला होते थे चीफ मिनिस्टर तो बिजली महकमे वाले ने हड़ताल कर दी
- 1:07:23तो सुरजीत सिंह, बरनाला बड़े समय से आपके पढ़े लिखे।
- 1:07:31तो उन्होंने कहा कि भाई जुलूस मत निकालो, मैं आपकी समस्या को
- 1:07:35सुनूंगा। कोई बात नहीं तो जो प्रचारक था जो
- 1:07:39बाँचता था समाचार वो बोला इस ढंग से कि बड़ी हँसी आई।
- 1:07:49बोला पंजाबी में लेकिन मैं हिंदी में बताऊँगा।
- 1:07:54पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार सुरजीत सिंह बरनाल ने घोषणा की है
- 1:08:00कि बिजली विभाग के कर्मचारी, बिजली विभाग के कर्मचारी कल।
- 1:08:07अपना जुलूस न निकालें। तुम जो जुलूस निकालते हो जी अपना
- 1:08:15जुलूस निकालते हो। अध्यात्म वाते हैं, छः ग्रह हैं,
- 1:08:30एकता हैं, सात। राहु केतु का कोई मतलब नहीं यह
- 1:08:35होते ही नहीं है। ये सिर्फ दो बिंदु हैं जो चंद्रमा
- 1:08:41और सूर्य की विशेष स्थिति से बनाए गए हैं।
- 1:08:47इनका प्रभाव कोई नहीं होता व्यक्ति पर और शीघ्र ही।
- 1:08:54हम एक ज्योतिषीय गणना की पंचांग निकाल रहे हैं जिसमें शुद्ध
- 1:09:00पंचांग आपको मिलेगा और जिसमें जो महादशा होगी वो 120 साल की नहीं
- 1:09:09होगी वो पचानवे साल की होगी। 18 साल का राहु का महातिशा और 7
- 1:09:16साल का केतु का महातिशा निकाल दिया जाएगा।
- 1:09:18बोतें 25 वर्ष घटाओ, 120 में रह गए पचानवे साल पचानवे साल व्यक्ति
- 1:09:26की सही उम्र होती है कोई ज़रा देखना, सोचना।
- 1:09:33यजुर्वेद में जी जो कहा गया जी वेद शरद सतम् जी वेद शरद सतम्
- 1:09:46यजुर्वेद में यह जो कामना की गई यह आशीर्वाद दिया गया।
- 1:09:52कि तुम, तुम सो शरद ऋतु तक जियो, तुम सो शरद ऋतु तक जियो।
- 1:10:08और तुमने महादशाएं बना दी 120 साल के बना जो आपको आशीर्वाद देता है
- 1:10:22जीवन की जो अवधि है वो तो 120 साल है वो घटा के गए हो?
- 1:10:29यहाँ से हिसाब लगाओ, तुम वह कहेगा 125 साल तक जियो, डेढ़, 100 साल
- 1:10:36तक जियो, वह घटा के रहेगा। अगर 100 साल जियो अगर 120 साल की
- 1:10:41महादशा आपने बनाई तो वह क्यों कहेगा?
- 1:10:46100 साल जियो? जी वेद शरद सतम् 100 सर्दियों तक
- 1:10:52तुम जियो यह वेद वचन है ऋतुर्वेद ऋतुर्वेद की तैत्तरीय संहिता में
- 1:11:06यह शब्द पाया जाता है। ज़रा देखो 120 वर्ष की आपकी इसका
- 1:11:16मतलब पूरी महान दशा भी न भोंको यह तो श्राप हो गया वरदान कैसे हुआ?
- 1:11:25सूक्ष्म अर्थ रिया जाए? तो इसका सात मतलब राहु और केतु की
- 1:11:30महादशा नहीं गिनेगी वेदों में ये बाद में बनाए गए राहु और केतु न
- 1:11:38तो इनकी गोचर होती है और न ही इनकी महादशा होती है।
- 1:11:4818 और 725 साल निकाल के पचानवे साल बनते हैं।
- 1:11:52जो आप लोग जीते हो और पचानवे साल कोई जी जाए तो आप बड़े खुश होते
- 1:11:59हो। ढोल, नगाड़े, रंग, गुलाल फेंकते
- 1:12:02हो तो शीघ्र ही मेरे लोग। इस पर काम कर रहे हैं राहु केतु
- 1:12:09को निकाल दिया जाएगा। जैसे आपने प्लेटों को निकाल दिया
- 1:12:17और सही शुद्ध गणित। यह व्यवस्था से युक्त आपको पंचांग
- 1:12:24मिलेगा और उसका बिलकुल सही। गणित रूप से आपको प्रभाव मिलेगा।
- 1:12:33देखना आप मैंने जीवन में बहुत इसका अध्ययन किया है, यह है 25
- 1:12:43वर्ष बिल्कुल नाजायज। क्योंकि न राहू होता है न केतु और
- 1:12:48उसकी महादशा कैसे हो के बताओ कहाँ है?
- 1:12:51दिखाओ कोई भौगोलिक संग्रह है, कहीं कहीं बुद्धिमान है।
- 1:12:58नव गृह पूजन तो आप कर लेते हो लेकिन हैं तो सत्य ग्रह
- 1:13:04सुर्यस्मित। यहाँ गलती हो गई आपसे ये भी
- 1:13:17मुझको। बाबा ने बताया कि नव ग्रह पूजन है
- 1:13:20शप्त ग्रह पूजन होना चाहिए तो शप्त ऋषियों के संबंध में एक छोटी
- 1:13:29सी जानकारी और दे दूँ। शादी विवाह में भी ये काम आता है।
- 1:13:34शादी विवाह में अरुंधति और बृहस्पति ये सप्तदशी मंडल में आते
- 1:13:47हैं घटना वशिष्ठ, बृहस्पति नहीं, वशिष्ठ और अरुंधति।
- 1:14:02इनकी जोड़ी बड़ी प्रसिद्ध है तो विवाह के पश्चात रात्रि काल में
- 1:14:16सप्तर्षी मंडल क्योंकि उजागर होता है।
- 1:14:19कोई भी दिख सकता है तो उस जोड़े को।
- 1:14:24यह जोड़ा दिखाया जाता है। वशिष्ठ और अरुंधति इसका बड़ा
- 1:14:32साइंटिफिक विश्लेषण है। लेकिन वीडियो बड़ी लंबी हो गयी है
- 1:14:38और लंबी हो जाएगी और आप सुन नहीं सकोगे।
- 1:14:40सवा घंटे से ऊपर की वीडियो। तो शादी के बाद इस जोड़े को
- 1:14:50वशिष्ट के बिल्कुल पास एक छोटा सा तरह होता है।
- 1:14:55वो वशिष्ट के धर्मपत्नी अरुंधति का है उसका दर्शन करने से।
- 1:15:01यह मान्यता है कि सुखद जीवन व्यतीत होता है।
- 1:15:05गृहस्थ का खैर जितनी बात में भूल सकता था, भक्त की कमी के कारण
- 1:15:14उतना मैंने बोल दिया। और क्योंकि अभी प्रश्न भी पूछ
- 1:15:21लिया और मैंने अभी अभी वीडियो निकाली थी कि आप सप्त सृति का पाठ
- 1:15:31न करें तो क्या करें? ध्यान करें लेकिन मुझे पता है।
- 1:15:39ध्यान तुम्हें करना नहीं आता, तुम जाप करोगे, पाठ करोगे, सप्तशती का
- 1:15:45पाठ करोगे, लेकिन जो मुझे सुनते हैं, जो मेरी विद्याओं पे अमल
- 1:15:56करते हैं, क्रियाएं पे अमल करते हैं।
- 1:15:59वो ध्यान करें सिर्फ वाकई में जो करना है करो।
- 1:16:07इसका असली जो तात्पर्य है बेहतरीन रहस्यत्मक रस है, वो मैंने आपको
- 1:16:15बता दिया। ये है सारा रस।
- 1:16:18पियो या न पियो या पिच, यह विराट है अस्तित्व उस विराट को प्रणाम न
- 1:16:28इसको समझा जाता न इसको व्यख्यात किया जा सकता।
- 1:16:33आखिर में वेद भी कह देते हैं न? नैति नैति श्री।
- 1:16:43कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ? नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण
- 1:17:05गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण। वासुदेव पितुमात स्वामी सखा हमार
- 1:17:31पितुमात। सामी सखा हमारे, श्रीनाथ नारायण,
- 1:17:44वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद, हरि मुरारी।
- 1:17:54हे नाथ नारायण वसुदेव। धन्यवाद।