Latest / Baba ji Vijay Vats / 13 Mar 26 - मान्यताओं का मोतियाबिंद: क्या आप भी धर्म के नाम पर अंधे हो गए हैं? नाम दान या आनंद दान?
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- 0:13प्रणाम बाबा जी आपने कहा बाबा अगर एक पीढ़ी भी मर जाए तो मुझे दुख
- 0:32होता है। लेकिन रावण मर गया है, कंस मर गया
- 0:43है तो आपको ज़रा भी तकलीफ नहीं कृपया इस अंतर्द्वन्दक को।
- 0:59समाप्त करने का कष्ट करें। किड़ी भी मर जाए तो मुझे दुख होता
- 1:08है, रावण भी मर जाए, कंस भी मर जाए तो मुझे कोई दुख नहीं होता
- 1:15है। यह बिल्कुल बरोदी बातें हैं।
- 1:19बाबा क्यों ये मैं क्यों कहता हूँ
- 1:40ध्यान से सुनिएगा? कीड़ी निर्दोष है कीड़ी मासूम जो
- 1:53बेज़बान जानवरों को काटकर खा जाते हैं।
- 2:03तो मैं उनकी आँखों में मेरी ही आँखों में क्षमा की भावना दिखती
- 2:11नहीं होगी। हम खरगोश काटे करते थे।
- 2:21मैं प्री मेडिकल में था और खरगोश की आँखों में झाँकता तो उसे काटने
- 2:27का मन नहीं होता, वह जैसे भीतर से पुकार कर रहा हो।
- 2:35मुझे खेलने दो। आसमान में छलांगें लगाने दो।
- 2:42मुझे मत मारो, लेकिन हम उसको क्लोरोफिल सँघा देते हैं और काट
- 2:49लेते हैं। इसको ही अज्ञान कहते हैं।
- 3:04किड़ी मर जाए तो बहुत दुख कंस मर जाए तो कोई दुख नहीं क्योंकि
- 3:15कीड़े निर्दोष मासूम कंस ने बड़े किशोर किये।
- 3:2610 मिनट पहले बच्चा जनवा अभी आँखें भी खुली ना थी, उसने उठाया
- 3:38और दीवार से टकरा के मृत। इसलिए जब इतना उत्पुड़न हो जाता
- 3:46है तो मुझे किसी न किसी रूप में अवतरित होना पड़ता है।
- 3:56अपनी सृष्टि में सुख और शांति बनाए रखने के लिए बैरेंस रखने के
- 4:00लिए उसी को अवतार कहते हैं। जो ठगी से चोरी से।
- 4:23अपने दिमाग की शरारती चालों से बिसात बिछा के भोग तो सभी को लगती
- 4:34है। तन सब का वस्त्र मांगता है, सर्दी
- 4:41भी है कर सभी को वातानुकूलित कमरे चाहिए।
- 4:53यह इस अनुसार किसी एक प्राणी के लिए नहीं है।
- 5:04यहाँ मेरी बातों में द्वंद्व दिखाई पड़ता है।
- 5:09पुत्रे चिकन द्वन्द्य ज़रा भी नहीं।
- 5:25जज की कुर्सी पर बैठा हुआ व्यक्ति जीस व्यक्ति को फांसी की सजा
- 5:33सुनाता है, उसमें कोई पर्सनल जाति दुश्मनी नहीं क्यों सुनाता है?
- 5:44क्योंकि इसने घिनौना अपराध किया है।
- 5:46अरे रेस्ट ऑफ द यार मासूम व्यक्ति की जान इस लिए ले ली गई।
- 5:58क्या वह कमजोर था? रावण सीता को उठा के ले गया कोई
- 6:10बात नहीं लेकिन छल से उठा के ले गया साधु के वस्त्र में डालकर।
- 6:23धोखे से बिसात बिछा के यह महापा हो गया।
- 6:32कृष्ण कभी मेकअप नहीं करता, राम कभी मेकअप नहीं करता।
- 6:42यह सीधे सीधे ठोकते हैं। क्यों?
- 6:51आतताइयों को मारने के लिए ये भी एक आत ताइपन है के परमात्मा ने
- 7:02जगत के लिए। सभी चीजें मुहैया जो कराएं वो सभी
- 7:07के लिए के आपस में बांट ले मैंने की सरस्ते बनाई सभी को प्रयोग
- 7:17करने के लिए जीता है भाई सभी। कुंती के पास पांडव आ गए थे।
- 7:27कुंती अपने काम में मगन थी तो जिदिष्टर ने कहा माँ तू देख हम
- 7:36क्या लेके आए है द्रौपदी को जीत के लाए।
- 7:43माँ तो माँ होती है सहज स्वभाव से बोली पुत्र आपस में बांट लो।
- 7:54अब कसूर का कोई कुंती का भी नहीं था।
- 8:00द्रौपदी अपनी इच्छा से पांच पति बनाती।
- 8:03वह बात अलग थी तो द्रौपदी ने बड़ों का सम्मान किया, आदर किया
- 8:12और द्रौपदी ने कहा माता ने जो कह दिया वह ठीक कहती।
- 8:22लेकिन तुम तो खोपड़ी लड़ाओगे ये तुम्हारी विकास दिविकृति ये
- 8:29तुम्हारे खान, ये तुम्हारे आचार्य दिमाग लेकिन वो ज़माना कुछ अलग है
- 8:38यहाँ खोपड़ी से है। अस्तित्व से काम किया जाता है
- 8:42जहाँ खूब हैं हृदय की भावनाओं चलती हैं वहाँ झुकता है बंदा और
- 8:50उससे झुकने में ही आनंद है लाख साल का राज़ हुक्म देने वाला।
- 9:00और एक क्षण भर का राज़ हुक्म मानने वाला तो एक क्षण वाला राज़
- 9:07जीत जाएगा, इतना आनंद आएगा उसमें इस फिर से सुन लो हुक्म मानने
- 9:18वाला। एक कपल का राज़ बगराज होता है
- 9:22खुशी का पल कौन छोड़ता है अपने अहंकार को?
- 9:28और अगर अहंकार को ही तुमने छोड़ दिया तो विश्व का एक।
- 9:36सिर पे रखा हुआ तो करा तुमने घरा दिया बस वही तुम्हारे दुख का
- 9:42मुख्य कारण था और तुम तो खोपड़ी को निशानाध पालने बोसने में लगे
- 9:52हो, इसलिए तुम सब कमा लोगे। जो धरती पर ईश्वर ने क्रिएट किया
- 10:02तो ईश्वर तो है ही नहीं, तुम्हारे हिसाब से फिर काम करेगी तुम्हारी
- 10:07खोपड़ी और खोपड़ी सदा ऐसे ही ताने बाने को न करती।
- 10:18दूसरों को भूखा नंगा करके उनको अन्न के अभाव में मार देना और
- 10:34अपनी तिजोरियों में उनके हक का मार रख लेना इससे बड़ा पाप नहीं
- 10:41होता। क्योंकि फिर याद रखना मैं फिर फिर
- 10:46बोलेंगे मैं फिर फिर बोलेंगे तुमने कुछ बनाया नहीं तुमने ठगा
- 10:52है इधर से ठगा हो, उधर से ठगा हो, ये सब ठगा है।
- 10:59इतनी बड़ी बड़ी इमारतें, ये डेरे, ये संस्थान ये सब ठग्गी से बने
- 11:06हुए हैं। बनावटी कृत्रं स्वप्निल जाल दिखा
- 11:19के कृत्रिम विकास से दिखा के। सब वो माल है जो गरीबों का हक था।
- 11:32गरीब बीमार होता है, मरने के बाद हॉस्पिटल उसकी लाश नहीं देता।
- 11:42और अमीर मज़े से अपना इलाज करवाता है।
- 11:49अमेरिका में बड़े बड़े मुल्कों में तो मैं कहता हूँ मासूम को सजा
- 12:02नहीं मिलनी चाहिए। और जालिम को माफी नहीं मिलने
- 12:07चाहिए। जालिम को माफी नहीं मिलने चाहिए,
- 12:16मासूम को सजाने ही मिलने चाहिए। बस यही कारण है मेरा पुत्र।
- 12:25जब घेड़ी मचती है, नरदोष होते हैं उसने कोई चाल बाजी की नहीं वह
- 12:31मासूम थी, तुम्हारे पांव के तले आके दब के मर गए?
- 12:38तुमने ज़रा भी तो अफसोस नहीं किया?
- 12:40तुम्हें तो पता भी नहीं चला। इसलिए अगर जैन मुनि संभल के चलता
- 12:50है तो यूं ही नहीं चलता है क्योंकि कीड़ी का मरना निर्प्राध
- 12:59का मरना। और कृष्ण अगर दुर्योधन के वध पर
- 13:06विषम के वध पर द्रोण के वध पर कोई महत्त्व नहीं करते तो बिलकुल ठीक
- 13:12हैं क्योंकि वो दुष्ट दुष्टों को साथ देने वाला व्यक्ति।
- 13:19चाहे कितना ही धर्मात्मा क्यों न हो चाहे 10 शेर सोना रोज़ दान
- 13:29करता हो करण की तरह, लेकिन दुष्टों का संघ देने वाला व्यक्ति
- 13:35दुष्ट हो। उसने दुष्टता की पावर को बढ़ा
- 13:38दिया। इस संतो ने कहा कि दूरसंगति को
- 13:49साथ मत देना, दूरसंगति के साथ मत होना, अकेले रह लेना।
- 14:02तो कीड़ी मरती है तो वह मासूम होती है, कण स्मरता है तो वह
- 14:08गुनाहगार होता है और गुनहगार भी इतना कि जिसका कोई फर्ज है हमारे
- 14:15संविधान में। इसका कोई फर्ज नहीं।
- 14:20ये अपराध चोरी छिपे होते हैं। फिर मैं कैसा संसार चाहता हूँ?
- 14:30मैं संसार चाहता हूँ, सब बनाया सब के लिए बनाया।
- 14:36तो जैसे कुंती ने कहा पुत्र आपस में बांट लो, सारी माताएं यही
- 14:43कहेंगी क्या आपस में बांट लो, मैं भी यही कहूंगा, मैं भी माँ हूँ
- 14:52तुम्हारी। अभी ऐसे आप उसमें बाँट खाओ, यही
- 15:05नानक ने कहा। वंडी छको।
- 15:11जो ऐसी बातें कहता है वो सब जो छोटी छोटी बच्चियों को धोखे से
- 15:18लॉलीपॉप दिखा के चॉकलेट दिखा के आइसलैंड पे ले जाता है और रेप
- 15:24करता उनको मार देता उबालता और उनके अंगों को खा जाता।
- 15:29उनकी सजा क्या होनी चाहिए? तुम कामना करते हो संस्थानों में
- 15:43बैठकर कि मेरा भी भला हो तेरा भी भला हो मेरा मुँह।
- 15:52तेरा मुगल, सबका मुगल होए और ये वो ही व्यक्ति है जो अपनी दुकान
- 15:58से गर्दने काट के आए हुए हैं, वो अपनी दुकानों से गर्दने काट के आए
- 16:06होते हैं मासूम इतने इतने महल कैसे बन गए?
- 16:12ये किसी की गर्दने काटी होंगी ये गर्दने काटना क्या होता है?
- 16:16किसी को भ्रांतियों में ले जाना, यही तो भ्रांति है।
- 16:24अरे दादी में बाबा गए मैंने कहा कि दादी में तो बाबा नहीं आते,
- 16:28दादी के ऊपर तो बाबा आ सकते हैं। दट।
- 16:33इस पॉसिबल जो लोग कह सकते हैं बाबा आपको लुक्काम लोग क्यों
- 16:43सुनते हैं मैन का पुत्र सुनने के लिए कलेजा चाहिए शेर।
- 16:54उनमें कलेजा नहीं होता, वो कायर कृष्ण की गीता को अर्जुन के सिवा
- 17:00कोई समझ भी नहीं सकता। सुन भी नहीं सकता कृष्ण की गीता
- 17:06को सुनने के लिए कलेजे की आवश्यकता होती?
- 17:10और कलेजा इनमें प्रसारित करने वाले आचार्यों में है।
- 17:14नहीं ज़रा देखो कितना उत्पाद मच रहा है।
- 17:18इन्होंने कोई भी पार्टिसिपेट किया कोई भी एक भी डिस्कोर्स ऐसा है जो
- 17:27सीधा सीधा आँखों में आंखें मिलाएं।
- 17:33तानाशाह कि तुम ये क्या कर रहे हो नहीं दाईं से दाईं से अगर फिर मैं
- 17:42बोलेंगे तो ये मुझे मार देंगे। तो फिर मार देंगे तो मौतमी तो मार
- 17:49देगी, क्या अमर हो जाओगे? तुम अगर यह नहीं मारेगा तो क्या
- 17:55तुम अमर हो जाओगे? लेकिन यह इस बात का स्रोत है कि
- 18:02यह उस स्तर पर पहुंचे नहीं जहाँ कर्ज ही कर्ज है।
- 18:06है। कर्ज के सिवा या न तो कोई
- 18:10चापलूसी, न कोई व्योत्बंदी न ही कायर था का तूफान जहाँ सिर्फ साहस
- 18:20और शक्ति के लिए लड़ने का साहस कृष्ण सत्य के लिए लड़ें।
- 18:30गुरु गोविंद सिंह सत्य के लिए लड़ें वो तो डेफिनिशन ही ये देते
- 18:37हैं सुरा सुई जानिए जो लड़ें दिन के हे पुरजा पुरजा कथमरा कब होना
- 18:48छाड़। अगर गोविन्द सिंह भी तुम्हारे
- 18:55जैसे होते तो उसके चार पुत्र सलामत रहते।
- 18:57उसकी पीढ़ियां चलती और गुरु तेग बहादुर भी तुम्हारे जैसे धोखेबाज
- 19:04होते हैं, बिसाते बिछाने वाले होते हैं।
- 19:10तो उनकी भी आज वंशावली चद गुरु गोबिंद सिंह ने अपने पिता को भी
- 19:19कह दिया जाओ शहीद हो जाओ। क्योंकि शहादत चाहिए और शहादत
- 19:26देने के लिए बलिदान का मादा कहाँ है?
- 19:28लोगों में सिर्फ आप यहीं के भितर है।
- 19:32माता आप ही जाइए पिताश्री और फिर खुद भी शहीद हो गए चार पक्षों की
- 19:41भी कृपाणी से। जालिम के आगे जालिम के आगे झुकना
- 19:49जालिमाना हरकत को बढ़ाना होता है जालिम के आगे गाँधी की तरह स्टील
- 19:56की फौलाद की। चार हड्डियों को खड़ा कर देना
- 20:05क्या होता है? करेश तुम तो चार हड्डियों से भी
- 20:08बहुत मोहब्बत करते हो, तुम तो 56 इंच का सीना है और तुम्हारे में
- 20:15जिगरा है। चिड़िया से भी कम।
- 20:25कोई इसमें किसी प्रकार का चकित कर देने वाली विस्मयकारी बात नहीं
- 20:34है। इस कायर को मने आरएसएस का एक भी
- 20:38चिड़िया का बच्चा शहीद नहीं हुआ तो इसमें किसी प्रकार का कोई
- 20:45विस्मयकारी बात नहीं है। सीधा सीधा गणित है, जिग्रा नहीं
- 20:51था, साहस नहीं था, बलिदान का मादा नहीं था, बचने का माद्दा था।
- 20:56और इनके सारे काम शुरू करने के अंत तक खंगालों बचने का मादा है।
- 21:06बचने की इच्छा है, किसी तरह बच जाए और कितनी देर बचोगे?
- 21:14मौत तो 1 दिन आएगी। परमात्मा ने मृत्यु यूं ही नहीं
- 21:18बनाई है। इससे सबक लेना होता है और सबक
- 21:24क्या लेना होता है? जो खून नहीं ले गए?
- 21:30मरो मरो। और संत भी यही कहते हैं कि मरो हे
- 21:39जोगी मरो मरो मरण हैं, मीठा ऐसी मरणी मरो जिससे मरणी मर गोरखड़ी।
- 21:53और तुम इनके पीछे चलते हो। मुझे किसी ने पूछ लिया अगर बाबा
- 22:05तुम्हारी सरकार आ गई, खुदा न खास्ता मैंने कहा नहीं आइए बाबा
- 22:11अगर आ गए तो? अगर आ गए तो सुपोस चलो अलजबरा का
- 22:19सवाल सही कर लेते हैं। सवाल तो अलजबरा का है, लेकिन
- 22:27सुपोस के मेरी सरकार आ गई। तो मैं क्या करूँगा?
- 22:36एक बिमारी होती है आँखों की कैट्रिक्स उसमें आँखें खराब नहीं
- 22:41होती, आँखों के आगे धुंआ छा जाता है।
- 22:47कैट्रिक्स उसको मोतियाबिंद भी कहता है।
- 22:52तो फिर उस धुंधले लेंज को निकालकर क्रीतरिम लेंज डाल दिया जाता है।
- 22:58इसको कैट्रिक्स का ऑपरेशन है तो उस व्यक्ति को ठीक दिखना शुरू हो
- 23:03जाता है क्योंकि दिमाग के भीतर जहाँ इमेज बनती है।
- 23:08उसको बनने से रोकता था। ये धुंआ आज हिंदू धर्म के ऊपर ही
- 23:20नहीं सभी धर्मों की आँखों में कैटरिक्स यह जो मान्यताएँ हैं, यह
- 23:30कैटरिक्स। और मैं इसको कैटरिक को हटाने के
- 23:39लिए मैं सर्जन हूँ। इसको हटा के जाऊंगा, नया लेंस डाल
- 23:44के जाऊंगा। ताकि तुम्हें साफ सुथरा दिखाई
- 23:51देने लगे। उस बच्चे की तरह जो नवजात शिशु को
- 23:56ये दुनिया साफ साफ दिखती है, मेरा मंतव्य बिल्कुल सपष्ट है।
- 24:09ज़रा भी हेर फेर नहीं हुआ मैंने कभी बदला नहीं।
- 24:14मैं तुम्हारी आँखों से धुआं हटाना चाहता हूँ ताकि तुम्हें साफ साफ
- 24:22दखाई हो रहे दो बच्चे लड़ रहे सर किसी कायर कौन के होवे?
- 24:35अब नाम तो मैं क्या करूँ? एक थोड़ा सा एक बलवान था, एक
- 24:42थोड़ा सा कमजोर सा एक ही क्लास में से लड़ पड़े।
- 24:48जिसके पास बल था उसने निर्बल को खूब पीटा।
- 24:56अब निर्बल कर तो कुछ नहीं सकता था लेकिन भागता भी नहीं था।
- 25:00चलो भाग ही जाओ तो छित्तर तो मत खाओ, बैठना भी वहीं है।
- 25:09तो जब खूब पिट लिया, पीटने की शक्ति होती है, खाने की सहन शक्ति
- 25:15भी होती है तो भागने लगा कहता है सुन ले मेरी बात ने कहा ये क्या
- 25:26करेगा ये? अब इतना तो बूट लिया मेरे सामने
- 25:30और मैं खड़ा देखता रहा ऐसी ऐसी तमाशी देखने में मुझे बड़ा लुसफत
- 25:38है, बच्चों की चाल है क्या करते हो तो देखें तो सही बच्चों के
- 25:45भीतर डाला क्या जाता है? दिमागों में क्या भरा जाता है वह
- 25:54बोला जो पिट लिया था सुन मेरी बात आज रात को 12:00 बजे।
- 26:11ये क्या घोषणा कर रहा है? हमारे कार्य प्रधानमंत्री तो 8:00
- 26:17बजे का वक्त ये 12:00 बजे आज रात को 12:00 बजे देवी माता आएगी।
- 26:28अच्छा थोड़ी थोड़ी वास्तुम जाने लगी और वह तुझे पटका, पटका के
- 26:35मारेगा और इतने कह के भाग लिया मैंने उसे पकड़े लिया।
- 26:43मैंने कहा कोई नहीं। कहता वो मैं तू ठहर जा उससे मैं
- 26:48निपट लूँगा ये कब आयेगी कहता रात को आयेगी 12:00 बजे मैं कहा इसको
- 26:54ना मेरे पास भेज देना उसकी तो आँखों में आंसू बाहर वो तो मेरे
- 27:03से लिपट गया। बाबा तुमने ये बात क्या की?
- 27:09समझदार था, मैंने कहा ठीक देबी आएगी ना, नहीं बोला मैंने कहा
- 27:22चलो। अगर देबी आई तो उसको कह देना इसकी
- 27:28पिटाई करके बाबा के घर पहुँच जाए। उसका पलंग भी थोड़ा बड़ा है और
- 27:39उसकी पत्नी भी मायके गई हुई है। उसको जरूरत है।
- 27:49ये सब कैट्रिक्स है तुम्हारे आँखों के ऊपर कल ही मैं कह रहा था
- 28:00गजा सोचे कि मेयर भी, घोड़ा मेयर भी घोड़ा मेयर भी घोड़ा हो जाए।
- 28:08एक जमात यह शिक्षा देता है अपनी अपनी डफली, अपना अपना राख, एक
- 28:17बुद्धू बैठा दाढ़ी को ही पीला करी उसके लोग दर्शन करते हैं मैं कहा
- 28:21क्या आप दर्शन कर रहे हो? भाई इसके दाढ़ी है, दाढ़ी पे
- 28:25हल्दी लगा रही है और क्या? अरे, तू अपनी बेशक कीमती नींद को
- 28:33क्यों ठुकराता है? इस मूर्ख लोक व्यक्ति है, फिर तू
- 28:38घर से भागा हुआ है और इसको कुछ पता है?
- 28:45अपने भीतर के तत्व की बाहर की जानकारीयों की बात नहीं, मैं करता
- 28:49हूँ शास्त्र की बात इसे पता होगा, सुन ली होंगी, पढ़ ली होंगी,
- 28:55लेकिन भीतर के तत्व की कोई बात इसे पता है तो दर्शन किस चीज़ का
- 29:02करना चाहता है? लेकिन पागलों की कोई कमी थोड़ी है
- 29:06सब जगह बैठे हैं बर्बाद है गुलशन करने को, बस एक ही उल्लू काफी थाम
- 29:20हर्षाक पे उल्लू बैठा है। हर्षा को लो बैठा है, अंजाम है।
- 29:37कोई कहता है ये पितर मारेंगे, कोई कहता है जो दिखता नहीं वो होता
- 29:43नहीं, ये तुमने खिचड़ी नहीं तुमने अन्नकूट बना लिया है, अन्नकूट सो।
- 29:49तो दिवाली का दिन दिन आता है। गोवर्धन पूजा अन्नकूट में सब कुछ
- 29:56डाल दो, चावल डाल दो, बैंगन डाल दो, मुली डाल दो, गायर डाल दो
- 30:04जितना चाहे मसाला डाल दो मिर्च डाल दो, धनिया डाल दो।
- 30:091000 चीजें डाल दो उसको अन्नकूट पे आज धरती अन्नकूट की तरह
- 30:19विचारों वाली हो गई। मैं एक शब्द बोलता हूँ।
- 30:25अब तो अंधभक्त कम हो गए? क्योंकि मेरे पास फॉर्मूला मैं
- 30:30झकाही नहीं करता, दूसरों के पास फॉर्मूला नहीं है और वो झकाही
- 30:36करते हैं क्योंकि जानते नहीं हो तो मैं तो सीधा गुंठा लगा देता
- 30:41हूँ, फिर देखो चाहे ऐसे गुंठा लगवा लो, चाहे ऐसे गुंठा लगवा लो,
- 30:46तुम्हारी मर्जी है। मैं का नशा तो हूँ नहीं, अगर
- 30:55तुम्हें प्यास नहीं लगी तो मैं घूंठा लगा देता हूँ, बहुत से लोग
- 31:01हैं जो कह देते हैं अनसस्क्र। मैं चुप कर जाता हूँ, मैं भी इधर
- 31:11से गूंठाछेप देता हूँ लेकिन फिर वो साल 2 साल के बाद फिर आ गया,
- 31:20फिर फिर उनके कॉमेंट्स दिखने लगे। लेकिन मैं कोई जवाब नहीं देता।
- 31:28मुझे पता है इन्हें प्यास होने लगी।
- 31:32ये खेल रहे हैं इनको खेलने वाले साथी चैन और मैं।
- 31:42अंगूठा लगाते हुए कह देता हूँ भाई अपने साथियों को खोजो जिससे खेलना
- 31:46चाहता हूँ, भरी बड़ी है जमात और कुछ तो मैंने ही कह कह के बनाए
- 31:52हैं भाभी ऐसे कौन बाबा बनता है? मैंने कहा अच्छा बनता है भाई मोदी
- 31:58जी का अमृतकाल चल रहा है, बेरोजगारी है।
- 32:02भयंकर कम से कम बाल बचे तो पल जाएंगे बाबा बन जाओ गंदा अच्छा
- 32:09है, बस ऐसा है कि बोलो मत अगर ज्ञान नहीं है तो।
- 32:19तो बाबा बन जाओगे, मौनी बाबा बन जाओगे लेकिन इतह से तो मिल जाएगा
- 32:23कि अपने बाल बच्चों को पाल लो। सारी दुनिया बंदी नहीं है, थोड़ा
- 32:35थोड़ा दिखता भी है, कैट्रिक्स है इस कैट्रिक्स के इलाज करने के
- 32:43लिए। जदा जदा ही धर्मश्य गला नीर भवती।
- 32:48भारत अब तुम्हारी आँखों में ये शैडो पड़नी लग जाती है
- 32:55एकाएक्ट्रिक्स की मोतियाबिंद की अभ्युत्थानम अधर्मस्य।
- 33:06तदात्पनम सज्जा में हम पित्रनाय साधुना विनाशाई से दुष्क्रिता जब
- 33:17जब भी ऐसा होता है मेरी सृजना में।
- 33:24तुम्हें धुंधला दिखाई देने लग जाता है, होता कुछ और है तुम गधे
- 33:30को घोड़ा मानना शुरू कर देते हो कैसी कैसी बेवकूफियां चर पड़ी हैं
- 33:38और मैं जानता हूँ। किसी ने संस्था बनानी है, अपने
- 33:43अपने प्रलोभन है। अपनी अपनी वासनाएं हैं, अपनी अपनी
- 33:47इच्छाएं सभी ने पूरी करनी है और किसी की इच्छा बुरी नहीं होती।
- 33:54यही तो मज़े की बात है। इच्छाएं वासनाएं दुष्पूर हैं।
- 33:59लेकिन सभी ने वासनाएँ को पूरा करना है।
- 34:03कहाँ तक गर्कोगे कहाँ तक गर्कोगे छोटी बच्चियां 4466 साल की आठ 8
- 34:14साल की। इस जीवंत, छोटे छोटे बच्चों को
- 34:22तुम अपनी हवस का शिकार बना लेते हो।
- 34:27मुझे पूछा है कि इनका हश्र क्या होना चाहिए?
- 34:34मैंने कहा सबसे पहले इनकी गद्दियाँ छीननी चाहिए क्यों?
- 34:39क्योंकि इनके पास ऊँगली है, इशारा करने के लिए हुक्म मानने को पाबंद
- 34:49हैं। वो लोग जो ईमानदार हैं।
- 34:53जो देश के प्रति वफादार हैं और ये समझते हैं कि राजा के प्रति
- 35:00वफादार हैं और ये पागल हो गए हैं। इन्हें पागल कुंए का पानी पी लिया
- 35:06है तो इनको गद्दियों से उतार दो। सबसे पहला।
- 35:12उपाय क्योंकि अगर गद्दियों से ना उतारे तो ये हुक्म कर देंगे अपनी
- 35:18तोपों के मुँह जनता की तरफ कर दो। इन विचारों का कोई कसूर नहीं
- 35:24इन्होंने भी बच्चे पालने कितनी मशक्कत से इन्होंने भी पढ़ाई की
- 35:30पुलिस की। सीआर पी ऐफ़, बीएसएफ सेना कितनी
- 35:36मशक्कत की है? सभी ने अपने बच्चे पाले सभी के
- 35:40भीतर वासनाएँ अनीता अपने घर बैठते ये वासनाएँ हैं, तुम्हें दौड़ाती
- 35:47हैं, फिर तुम्हें चीफ जस्टिस बना दें।
- 35:51सुप्रीम कोर्ट का यह तुम्हें पीएन लगा दे।
- 35:56यह वासना ही हैं जो तुम्हें पीएन लगाती हैं और वासना ही हैं जो
- 36:01तुम्हें पीएम बनाती हैं। अगर वासनाएँ न होती तो न तो तुम
- 36:06पीएन बनते न तुम पीएम बनते। वह सुनाई ही दौड़ाती हैं और दौड़
- 36:16में अंधे अंधे तुम्हें पता ही नहीं चलता कि हम कहाँ पहुँच गए
- 36:19हैं। जैसे आँखों के आगे लेंस के आगे
- 36:37कैट्रिक सा जाता है, धूल आ जाती है, शैडो आ जाती है और तुम्हें
- 36:41देखने में बाधा देती है। ऐसी ही ये मान्यताएँ तुम्हें अपना
- 36:46स्वरूप देखने में बाधा डालती हैं। तुम इस मोतियाबंद को निकालना है
- 36:55ताकि तुम्हे बिलकुल स्पष्ट दिखना शुरू हो जाए।
- 36:59ये सब कुछ धूँधला धूँधला से दिखाई न पड़े तुम बिलकुल अंधे भी तो
- 37:05नहीं हो, थोड़ा थोड़ा दिखता भी है तुम्हें?
- 37:10लेकिन वह दिखता सर, तुम सी को ओह कह सकते हो, तुम डी को पी कह सकते
- 37:21हो ये मुश्किल। तो मान्यताओं को आज परमात्मा मान
- 37:30लिया है। एक स्वाद छोटा सा बीच में ले।
- 37:42आप कहते हो कोई देव देवता नहीं होता।
- 37:48और किशन कहते हैं कि तुम जीस देवता को श्रद्धा पर्व का नमन
- 37:53करोगे, मैं उसी देवता में तुम्हारी आस्था दृढ़ कर दूंगा।
- 38:00ठीक है सर, मैं भी यही कर रहा हूँ।
- 38:04अब सुनिए मैं तुम्हें सर्व क्षमता में समझा दूँ।
- 38:07क्योंकि कृष्ण के पास जो लोग समझने वाले थे वो बड़े समझदार थे।
- 38:13आज दुनिया की अकलों पे पर्दा पड़ गया इसलिए मुझे सरलीकृत भाषा
- 38:20बोलनी होगी। एक बात तुम जब भी फरियाद करते हो,
- 38:39जब भी मदद की गुहार लगाते हो। और तुम्हारे सामने ओबजक चाहे कोई
- 38:48भी हो, ओह हनुमान हो, दुर्गा हो, पार्वती हो, शंकर हो, वो ईसा हो,
- 38:58ओह मोहम्मद हो ओह जर्क, सुस्त हो और लवजे हो।
- 39:05तुम जब भी जीसको भी जीस भी आवाज जीस भी शक्ल में पुकार करते हो अब
- 39:14इस शब्द को यह जान है तुम्हारे अध्यात्म की धार्मिकता की नहीं।
- 39:20धार्मिकता और आध्यात्मिकता ये दो अलगअलग पहलू हैं।
- 39:25धार्मिकता तुम्हारी मान्यताएँ आध्यात्मिकता तुम्हारा अस्तित्व
- 39:33है। धार्मिकता तो कुछ भी हो सकती है
- 39:38लेकिन आध्यात्मिकता एक ही होता है।
- 39:40केंद्र एक होता है सभी और बड़ा लंबा चौड़ा होता है पूरा सरकार।
- 39:48जब भी जिसने भी यही कृष्ण ने कहा जीस से भी रूप में पुकारा तो उसने
- 40:03मुझे ही पुकारा। तो मैं उसी रूप में उसकी सहायता
- 40:11कर एक चुटकुला भी सुनाया करता हूँ।
- 40:20चार व्यक्ति जा रहे हैं कस्ती डूबने लगी।
- 40:31इसाई ने कहा, ओह येशो प्लीज़ सैफ मैं गॉड वह बच गया।
- 40:44मुसलमान ने का यह अल्लाह। ल इलाहा इलेल्लाह मोहम्मदुर रसू
- 40:54लल्लाह बहबी वचिक सिख ने कहा उसे चेपा शाह वाहे गुरु सतनाम।
- 41:09बचा लो, वह भी बच गया। हिंदू कहता है भगवान राम जल्दी
- 41:21करो, बाकी बच गए, अब तो कश्ती में पानी बहुत भर गया।
- 41:28बचार हिंदू में बड़ी जल्दबाजी होती है और जल्दबाजी तो मैं डुबो
- 41:35देती हूँ। फिर देखा कि आई नहीं, अगर
- 41:41अध्यात्मिक होना हो तो मेरा एक सबक सीख लेना, धैर्य रखना।
- 41:49और धैर्य इतना रखना कि चाहे कभी भी ना मिले तो भी चलेगा।
- 41:57अब भी तो बिना मिले ही चला रहा हूँ तो जैसे तैसे हम तो गुजर कर
- 42:06ही लेंगे। तुम आए चाहे ना आए, अगर इतना सब्र
- 42:11हो तो वह इसी क्षण भी आ सकता है तो हमारा धैर्य अनंत हो तो उसका
- 42:21आना इसी क्षण हो सकता है। जब बातें बड़ी उलट हैं दे कह सकते
- 42:28हैं अस्तित्व इतना ही सत्य है और इतना ही विरोधी भी है तो उसने कहा
- 42:36हे कृष्ण भगवान बचा ले। लेकिन फिर नाव तो डूब जा रही थी।
- 42:52फिर कहता है हनुमान बचालो में तो गए हो?
- 43:03थोड़ी सी तो देर लगती है ना भाई हरकतें ऐसी नहीं बात बनी कि तुम
- 43:12चालाकी हो, वे तो चलते हो। अगर आदमी को कोई बात कहनी हो तो
- 43:17होम मिनिस्टर से शुरू करनी होती है गृह मंत्रालय से।
- 43:23तो अमित शाह से शुरू करनी होती है।
- 43:26अमित शाह गृह मंत्री है। घरवाली है तो वहाँ से शुरू कर लो,
- 43:35कान में फूक मार दो। तो घर वाली कहेगी घर वाले से वह
- 43:42उसकी तो फिर मान ही जाएगा, पता ही है रात तो आएगी तो, जोरू का भाई,
- 43:52एक तरफ सारी खुदाई एक तरफ। वह डूब गया।
- 44:05उसने जाके शिकायत करती, भगवान के दरबार में देखो मैंने आपको फरियाद
- 44:11लगाई थी, डूब गया, बाकी सभी बच गए।
- 44:17मैं अकेला क्यों डूब गया? कारण बताओ नोटिस शो का आज नोटिस
- 44:22जारी कर दिया कारण बताओ नोटिस तो बुलाया भगवान को अब भगवान आ गया
- 44:35तू यमराज बोला भगवान। आपके खिलाफ़ शिकायत फर्स्ट
- 44:45इन्वेस्टीगेशन रिपोर्ट दर्ज कर ली।
- 44:49इसीलिए बुलाया है पीसी के लिए हुकम दीजिए, क्या फैसला करना है।
- 45:00इसकी शिकायत है कि मैंने डूब रहा था जाग, तीनों बच गए।
- 45:05मैंने कहा राम बचा लो नहीं आए। मैंने कहा भगवान कृष्ण बचा लो,
- 45:12फिर हनुमान बचा लो, फिर सीता माता बचा लो।
- 45:17लेकिन डूब गया अब कारण बताओ नोटिस है तुम क्या जवाब देना चाहते हो?
- 45:24क्या दलील है तुम्हारी? अपने बचाव में?
- 45:32भगवान कहते देखो यमराज इसने मुझे बुलाया तो था।
- 45:40मेरी सुनिका भगवान राम मैंने जल्दी से अपना धन की दुकान उठाया,
- 45:49तरकश सब उठाया, मैंने धोती बांधी और मैं आने को ही थाई के तक है
- 45:58भगवान। मैंने फेंका धनुष जल्दी से मुरली
- 46:03उठाई पिताम पर धारण किया मोरू मुकुट धारण किया, इतने में लगा न
- 46:12बचा लो मैं इधर उधर देख के लंगोट उठाया।
- 46:18जल्दी से अपने शरीर को लाल सिंदूर लगाया और बस बंदा ही था आने को
- 46:31तैयार था वहाँ तो मैं आधे रास्ते आ गया था।
- 46:38ये कहता है सिकता माता सिकता माता बचाना अब क्या करूँ भाई ये तो
- 46:47ढांगरंग ही बदलना पड़ेगा तो पुत्र मैं वापस गया, अब तुम्हें पता है
- 46:55साड़ी बांधने में कितनी देर लगती है?
- 47:01अब पेटीकोट की नाला भी नहीं बांध रहा था और साड़ी का ब्लू जल्दी
- 47:08जल्दी बांध के सही कर रहा था। इतना डूब के मैं क्या करू?
- 47:22तो भगवान कृष्ण कहते हैं, जो जीस देवता में श्रद्धापूर्वक मुझको
- 47:27बजता है, मैं उसको उसकी भावना में दृढ़ कर देता हूँ समझो कृष्ण क्या
- 47:35कहते हैं? कृष्ण तुमसे खलवाड़ कर के एक?
- 47:39बस तुम्हारी भावना उसमें दृढ़ हो जाएगी।
- 47:44बड़ा शानदार श्लोक है अगर तुम इसको ठीक से ले लो तुम पत्थर को
- 47:51भी भगवान मान लो मान लो लेकिन भगवान क्या कहते हैं
- 47:56श्रद्धापूर्वक? जो मुझको बजता है और मेरा सहारा
- 48:01लेकर फिर मैं क्या करता हूँ? मैं उसकी श्रद्धा को परिपूर्णता
- 48:07तक ले जाने की कोशिश करता हूँ एंड व्हेन यू आर रेडी टु इन्सर्ट
- 48:14कंप्लीटली यूरसेल्फ़। तो तुम पहुँच गए तुम्हारी श्रद्धा
- 48:24भावना को परिपूर्णता तक लाने के लिए भगवान सारे वैसे ही ढांग बना
- 48:28देगा, लेकिन फॉर्मूला वही रहेगा। कंप्लीट्ली इन्सर्ट यूरसेल्फ़।
- 48:38इन दट ऑब्जेक्ट ओब्जेक्टलेसनेस होने के लिए यह एक फॉर्मूला है।
- 48:47होना तो है ओब्जेक्टलेसनेस जहाँ ओब्जेक्टिव हो जाए इस सब्जेक्ट।
- 48:53ऑब्जेक्ट और सब्जेक्ट के बीच का दर्शन भी हो जाए।
- 48:57थोड़ा सा गहरा है इसको बार बार सुनो देखने वाला वीक हो जाए,
- 49:02दृष्टा दृश्य भी हो जाए जो चीज़ दिखती है ऑब्जेक्ट और दर्शन भी हो
- 49:11जाए। बस वो ही बचे जो है अस्तित्व बच
- 49:16जाए लेकिन तुम्हारी भावना दृढ़ होती कहाँ है?
- 49:23मसला तुझे यो जो जाम जाम? तनु भक्त श्रद्धयार चित्र बिच्छति
- 49:39तस्य तस्य अचलाम श्रद्धां काम एव विद्याधाम जो जो मुझको अचल अचल
- 49:51श्रद्धा से समर्थ श्रद्धा। चला इमान अचल श्रद्धा से परिपूर्ण
- 49:59श्रद्धा से यो यम यम जो जो जीस, जीस के देवता के भीतर या पत्थर के
- 50:09भीतर या ऑब्जेक्ट के भीतर। तुम अपनी श्रद्धा को अचल कर लेते
- 50:21हो, जो डग मगाए ना तुम्हारी तो भावना है, डग मगा जाती है।
- 50:28मैं काली की टांग तोड़ देता हूँ, तुम्हारी भावना टूट जाती है, मैं
- 50:37काली को गाली निकाल देता हूँ, तुम्हारी भावना टूट जाती है, भाई
- 50:40काली जानें और अब मैं जानू, हमारा मसला है तुम कब इसमें पड़ते हो
- 50:48तुम्हारी तो माँ है ना? तुम्हारी भावना क्यों टूटे?
- 50:59जो तबाही तो हमारे दिल प्यारे
- 52:23मैं अपनी बात करता हूँ तुम करो ते हो।
- 52:30तुम्हारी माँ है तुम्हारी माँ ही रहे अरे भाई किसी की घरवाली भी
- 52:36होगी यहीं बिदक जाते हैं भगत बस यही कृष्ण कहते हैं, बिदकना मत
- 52:46क्योंकि भाई देखो। अगर तुम्हारी कोई माँ है तो
- 52:52तुम्हारा कोई बाप भी होगा। अगर बाप कहें कहिए तो मेरी पत्नी
- 53:00है तो तुम्हें क्या ऐतराज? मेरे पास लोग आ जाते हैं।
- 53:12बाबा आप ऐसी भद्दी भद्दी बातें करके कैसे लेके जाओगे उस परम
- 53:16पवित्र के पास? मैंने कहा ये भद्दी बातें हैं
- 53:19नहीं बेटा, यह तुम्हारी कैट्रिक्स को उतारने का एक ढंग है मैं
- 53:27तुम्हारी उस लेंज को जो धुंधला हो गया है दिखता।
- 53:32इसको उतारना चाहता हूँ और बहुत बढ़िया, सेंसिटिव लेंस डालना
- 53:38चाहता हूँ। इसलिए यह सब मुझे छीनना पड़ेगा,
- 53:42क्योंकि यह नकली है असली है गुलाब का फूल प्लास्टिक का है, किसी
- 53:49फैक्टरी में बना है। और मैं चाहता हूँ कि धरती का गर्भ
- 53:55फाड़ कर आए आर्टिफिशियल नहीं नैचुरली आए कल ही बने फूल खिलें,
- 54:05सुगंध बिखरे और तुम्हारी नासापूटों को सुगंधित कर दे।
- 54:09मैं ऐसा फूल खिलाना चाहता हूँ और सभी धर्मों में सभी धर्मों में
- 54:18सभी धर्मों में आज ऐसी कैटरिक हो गई है।
- 54:22सभी सबके देखने के यंत्र धुंधले हो गए।
- 54:30सभी का इलाज करना होगा। सभी की आँखों के ये जो अवरोध पड़े
- 54:38हैं कैट के मोतीबंद के लिए उतारने होंगे, नए लेंज डालने होंगे।
- 54:44ये नए लेंज हैं। इनको स्वीकार कर लो पुत्रे
- 54:50तुम्हें साफ साफ नजर आएगा तुम मेरी आँखों से देखो जैसे मजनू ने
- 54:56कहा था लैला को देखने के लिए मजनू की आँखें चाहिए तुम मेरी आँखों से
- 55:03देखो भगवान को। तुम तुम्हारी आँखों से न देखो
- 55:07क्योंकि तुम्हारी आँखों में मौत या तुम रो मत अगर मैं कुछ कहता
- 55:15हूँ उसे सीखने का प्रयास करो, मैं कुछ कहता हूँ अपने रिस्क पे कहता
- 55:24हूँ। और मैं कोई रिस्क नहीं लेता।
- 55:26मेरे पे कोई रिस्क आ ही नहीं सकता।
- 55:32मैं वो शे हूँ जो कायेनाथ की खबर रखता हूँ और मैं वो शे हूँ जो
- 55:39क्यामत की खबर रखता हूँ। होगी।
- 55:46तुम्हारी मत होगी पूजो मैं नहीं करता, लेकिन मेरी तो घरवाली है न
- 55:52भाई? तबाही तो हमारे दिल पे आई, आप
- 56:10क्यों रोए? आप।
- 56:19बहुत से कैटरिक से तुम्हारी आँखों के ऊपर पर्दा बनकर झिली बनकर छा
- 56:24गए। वो सभी वर्दे में उखाड़ दूंगा।
- 56:35उसे तुमने नाम कुछ भी दिया हो तुम्हें नाम शैतान दिया हो या
- 56:40तुमने नाम भगवान दिया हो, उसे कोई फर्क नहीं पड़ता हँसी आती है
- 56:45मुझको हरकतें इंसान पर गलतियाँ तो खुद करे और दोस्त दे भगवान।
- 56:54मैं आग्रा जाया करता था, कानपुर जाया करता था।
- 57:00कानपुर साइड में यूपी साइड में पान बहुत खाया जाता है।
- 57:04खासतौर से लखनऊ में तो जब मैं लखनऊ में गया तो वहाँ का नवाब
- 57:10शाहना अंदाज। तो पान चबा रहा था, मूर्ति कार
- 57:16मूर्ति बना रहा तो दुर्गा की मूर्ति थी और उसके ऊपर पीक थूके
- 57:24जाता था। कहाँ थूके मूर्ति बना रहा है,
- 57:28उसका नाक बना रहा है, उसके ऊपर थूक दिया, वो पीक थूक दिया।
- 57:37मैं देखा अभी अज्ञानी था, लेकिन मैंने क्रोध नहीं किया।
- 57:42मैंने पूछा भैया ये क्या कर रहे हो?
- 57:46उसने एक शेयर कहा था आज तुम्हें भी सुना दो।
- 57:52भूत परस्तों का निराला भगवान देखा है, भूत परस्तों का निराला भगवान
- 57:59देखा है खुद धराश है और नाम भगवान रखा है, ये देखो मैं तराश रहा हूँ
- 58:08और मैं थूक रहा हूँ, उसे कोई आपत्ति नहीं।
- 58:11और जब तुम इसी को अगडम बगडम करके वहाँ स्थापित कर दोगे तुम्हारा
- 58:18ब्राह्मण ठगी मार के प्राण प्रतिष्ठा के नाम पर उसने भी
- 58:24बच्चे पालने हैं भाई मैं किसी के खिलाफ़ नहीं हूँ।
- 58:28तो धोखा करे, तूफान करे क्योंकि आज कल दुनिया ही ऐसी है अमृतकाल
- 58:33चल रहा है। मोदी युग में रोजगार तो है नहीं
- 58:36तो ऐसी ठगियाँ मारने वाले ही चलेंगे।
- 58:39अब कल ही मुझे एक मैसेज आया बाबा अब रील जब बना लिया करूँ।
- 58:48कम से कम घर का गुजर बसर तो चल जाएगा।
- 58:51मैंने कहा भाई कुछ भी बना दिया करो पापी पेट का स्वाद तुम घबराओ
- 58:59मत मैं तुम्हारे साथ हूँ बहुत परस्तों का निराला भगवान देखा।
- 59:06खुद दराशा है और नाम भगवान रखा है और दुख दिया उसने ये बोलने के लिए
- 59:12भी तो मुँह खाली होना चाहिए। मैं कैसा चाहता हूँ संसार अगर
- 59:27मेरी बात को मान लोगे तो बड़ा शांत संसार।
- 59:31कोई हो हल्ला ना होगा, कोई मंदिर का सुबह लाउड स्पीकर नहीं बचेगा,
- 59:40ना गुरुद्वारा का ना मसीका कोई यूनिट नहीं शोर मचाएगा।
- 59:52किसी को शिकायत नहीं करनी होगी और देखो मेरी सरकार आने के बाद मैं
- 1:00:00ये घोषणा कर दूंगा। ये जमीनें हैं, जहाँ पर जमीनें
- 1:00:06होती हैं। फसल उपजाने के लिए टादे मदर टादे
- 1:00:15मस्जिद टादे जो कुछ ठेंडा पर किसी का दिल न टाइम इस दिल विच दिल भर
- 1:00:24जिंदा अरे भाई यहाँ फसल उगानी है हमें।
- 1:00:32इतने डेरों की जमीन इतने राम मंदिर की जमीन कितनी तुमने दबा ली
- 1:00:37है और जमीन है फसल के लिए इसने हमारा पेट भरना है और पेट भरकर
- 1:00:42इसने कैलोरिस देनी है। कितने लोग भूखे मर रहे हैं
- 1:00:45तुम्हारे मंदिरों के कार? तुम्हारी मस्ज़िदों के कारण
- 1:00:50तुम्हारे गिरजाघरों के कारण मैं गिरा दूंगा, बुलडोजर तो मैं भी
- 1:00:55चलाऊंगा, लेकिन योगी जी तुमसे बिलकुल तुम भेदभाव करते हो।
- 1:01:07श्चित कराते मैं सभी करा दूंगा, मैं अभेद हूँ, मैं द्वैत हूँ, मैं
- 1:01:14छोडूंगा ही कुछ नहीं धरती का जो काम होता है जैसे मैं जीस संग से
- 1:01:19जो काम लेना चाहिए वो लेता हूँ, मुख से बोलता हूँ, मुख से बच्चे
- 1:01:24नहीं पैदा करता। हम तो ऐसे पग लो के मुख से बच्चे
- 1:01:29पैदा करते हैं। एक बार किसी ने मुझसे कह दिया
- 1:01:36नहीं नहीं देखो आज तो कहता मैं नहीं थोबड़ा फोड़ दूंगा।
- 1:01:41उस वक्त अच्छे डोले होते थे, अब ढल गया।
- 1:01:45कहता आप तो मुख से पैदा हुए, मैंने कहा देखो सभी लोग जहाँ से
- 1:01:50पैदा होते है वहीं से होते है कोई मुख से नहीं, कोई झांक से नहीं,
- 1:01:59कोई छाती से नहीं, कोई पांव से नहीं।
- 1:02:02जान से पैदा होते हैं ये तो पागलों की बातें बुतपरस्तों का
- 1:02:08निराला भगवान देखा है, खुद धारा सा है और नाम भगवान रखा है और
- 1:02:13उसका कोई नाम नहीं है। मत लड़ो नामों पर और मत बांटो नाम
- 1:02:20दान। क्योंकि नाम भगवान नहीं है, भगवान
- 1:02:24तो आनंद है, नाम दान मत करो, आनंद दान करो और आनंद दान करने के लिए
- 1:02:35पहले आनंद को कमाना पड़ता है। धरती का गर्भ पढ़कर फूल तना
- 1:02:46बनेगा, खूब कली बनेगा, कली अपने भीतर मुखबन्ध कर लेगी, सुगंध को
- 1:02:53जोड़ेगी और फिर। जब भर जाएगी सुगंत से तो मुख खोरे
- 1:03:01और बांट दे कली ने खुशबू जोड़ी किसलिए थी बांटने के लिए?
- 1:03:11इसलिए मैं भी तुमसे कहता हूँ आनंद बांटो।
- 1:03:15दान देना है तो आनंद दो फौके नाम दान में क्या रखा है?
- 1:03:26उससे कभी किसी को आनंद मिला नहीं जखाई होती है एनर्जीलेसनेस होती
- 1:03:31है तुम थक जाते हो? रात को चूर हो जाते हो और अपने
- 1:03:36पलंग के ऊपर गिर पड़ते हो थके थके से बस तुम ऐसे ही कर में गुजर
- 1:03:44जाता है और गवार ढल जाती है तुम्हारी आँख खुलती हो और देखते
- 1:03:53हो। सूर्य जी ढल गया उम्र यूँ ही बीत
- 1:03:59जाती है, नाम जपते जपते और जो नाम दान देते हैं थे ये नहीं जानते कि
- 1:04:06दान देना है तो आनंद दो। जो किसी के काम भी आए, नाम का
- 1:04:15क्या चाटेगा नाम को क्या करेगा ये दान ही देना है तो आनंद दूंगा
- 1:04:31जाही शराब पीने दे मस्जिद में बैठकर।
- 1:04:37जाहिद शराब बिन मस्जिद में बैठकर जब वो जगह बता जहाँ खुदा का घर
- 1:04:50तुम्हारी आखिरी जरूरत तुम्हारे अंत से उठती हुई चीख हो पकार।
- 1:04:55वो चाहे वराह के आंसू क्यों न हो, वो चाहे किसी का इंतजार भी क्यों
- 1:05:00न हो, सब आनंद की तलाश तुम तलाश रहे हो, तुम्हें पता ही नहीं तुम
- 1:05:10तलाश रहे हो आनंद तुम्हें दिया जाता है ना?
- 1:05:14तुम तलाशते हो आनंद तुम्हें दिया जाता है नाम और वो भी तुम्हारे पे
- 1:05:21एहसान करके के दान कर रहे हैं क्या तुम्हारे पास दान करने को
- 1:05:28आनंद नहीं है क्या है नहीं भाई। क्योंकि हम उस मुकाम पर नहीं गए
- 1:05:38जहाँ आनंद का सरोवर है, समुद्र है उसमें छलांग नहीं लगाई तीरथनावां
- 1:05:47यतिशपावे बिन वाणी की नाई। तुम उस तीर्थ में कभी नहायेंगे जो
- 1:06:00उसके भाड़े में ही तीर्थ में नहाया जा सकता है।
- 1:06:08ज्योति षष्ठी उपाय बिनकर में की पाइप।
- 1:06:15बिना कर्मों के उपाय नहीं जाती। बिना कर्म और रहम के बिना उसकी
- 1:06:20कृपा के यह पाई नहीं जाती और तुम इसको बांट रहे हो तुम इसको लुटा
- 1:06:25रहे हो तुम्हारे पास एक ज़रा भी नहीं।
- 1:06:30ये थके थके से चेहरे ये मरजा ये मुरझा ऐसे लटके लटके से मुँह क्या
- 1:06:38कहानी सुना रहे हैं मुझको और मुझसे क्या छुपाओगे क्या छुपाओगे
- 1:06:45मुझसे? घट घट के अंतस की जान भरे बुरे की
- 1:06:53पीर पछून एक ही पीर और भला हो या बुरा हो तुम चाहते हो आनंद अगर
- 1:07:01बांटना ही है दान ही करना है तो आनंद आनंद दान करो और आनंद दान
- 1:07:07करने से पहले। आनंद को कमा लो, कमाया तुमने है
- 1:07:12नहीं तो फिर तुम नाम ही बांटोगे पुत्र कुछ तो लिहाज़ करो गरकाते
- 1:07:23हो सारी धरती को पागल बनाते हो। मूर्खों को मूर्खता का रंग
- 1:07:31चिढ़ाते हो, कुछ शर्म करो कुछ आया करो नहीं शर्म आती तो डूब के मरो
- 1:07:41कुछ तो करो। देखो मैं तुमसे कहता हूँ, अगर दान
- 1:07:56ही करना है तो नाम दान तो कभी मत करना नाम दान नहीं न अपनी वो दान
- 1:08:00होता भी नहीं, वो तो जगा ही है वो तो तुम्हारा सारा कुछ ही चोपट कर
- 1:08:04जाएगी दिमाग। थरकियां घुमाते जाओगे समय बर्बाद
- 1:08:09हो जाएगा क्या? शबाब था कि
- 1:08:28उठा। इस तरफ जमीन और आसमान उधर उठा
- 1:08:37थामकर जिगर उठा कि जो मिला नजर उठा।
- 1:08:44कि जो मिला नजर उठा पर कभी यहाँ मगर ऐसी कुछ हवा चली, लूट गई कली
- 1:08:58कली के घुट गई गली गली। और हम लूटे लूटे।
- 1:09:07वक्त के पिटे पिटे शाम। की शराब का खुमार देखते रहे,
- 1:09:18कारवां गुजर गया। कुमार देख तेरे कारवाँ गुजर गया
- 1:09:31हाथ थे मिले के ज़ुल्फ़ चाँद की सवार दूं?
- 1:09:39औंठ थे खुले के हर बाहर को पुकार लूँ दर्द था दिया के हर दुखी को
- 1:09:51और प्यार दूँ और सांसयों के स्वर्ग भूमि पर।
- 1:09:58उतार दो भूमि पर उतार दो, हो सका न कुछ मगर श्याम बन गई शहर वो उठी
- 1:10:13लहर के। ढह गए, किले बिखर बिखर और हम डरे
- 1:10:21डरे और हम डरे डरे निर नैन में भरे औड कर कफन पड़े।
- 1:10:33बाजार देख तेरे कारवां नजर गया गुबार देख तेरे मांग भर चली के एक
- 1:10:48जब नई नई किरण। ढोल से धौनक उठी, ठुमक उठे चरण,
- 1:10:56चरण शोर मच गया, किलो चली, दुल्हन चली दुल्हन, गांव सब उमड़ पड़ा,
- 1:11:06बहक उठे नयन नयन। बहक उठे नयन नयन, पर तभी जहर भरी
- 1:11:17गाज एक वो गिरी कुछ गया से दूर तार तार हुई चुनरी।
- 1:11:28कुछ गया से दूर तार तार हुई चुनरी और हम अजान से दूर के मकान से
- 1:11:41पालकी लिए हुए कहा देखते रहे। का हर वहाँ गुजर गया, गुबार देखते
- 1:11:52रहे। ये वक्त गुजर जाएगा, जिंदगी गुजर
- 1:11:56जाएगी और तुम गुबार को देखते रहोगे।
- 1:12:03मत उलझो इन दुष्टों में। दान कोई देता है तो सर्वश्रेष्ठ
- 1:12:13दान है। देखो किसी को दान का दान दे दो
- 1:12:16कोई काम तो आएगा वस्त्र दान दे दो, किसी का दन तो डंका जाएगा।
- 1:12:24अन्न दान दे दो किसी का पेट तो भर जाएगा, जल दान दे दो किसी प्यासी
- 1:12:31की प्यास समट जाएगी वो तो प्रस्तों का निराधा भगवान देखा है
- 1:12:42इन दानियों का तो अजीब सा दान देखा है।
- 1:12:45है, देते हैं अंधभक्ति और नाम दान रखा है दान देना तो जरूरत की चीज़
- 1:12:57को दान दो नाम के दान की जरूरत क्या है?
- 1:13:02किसने मांगा तुमसे नाम दान? कुछ पैसा टका तो तुम दान ले लेते
- 1:13:14हो, वस्त्र आभूषण तो तुम दान लेते हो, बस यही तमाशा चल रहा है।
- 1:13:25संसार में मैं कैसा संसार चाहता हूँ?
- 1:13:31जिसके मोतिया बिंद ना हो, इस कैट्रिक्स के मरीजों को सारी
- 1:13:37दुनिया ही मरीज इसको मैं हटा दूंगा, ऑपरेट करके न्यायलेंस डाल
- 1:13:45दूंगा और तुम्हें जिंदगी बिल्कुल साफ नजर आएगी।
- 1:13:50बिल्कुल साफ नजर आएँगे। बिल्कुल साफ नजर आएगा।
- 1:13:57फिर तुम्हें पता चलेगा आह वो क्या वक्त था जब मैं भी भटक रहा था।
- 1:14:04मैं भी इसी वक्त से गुजरा हुआ खिलाड़ी हूँ।
- 1:14:08मैं कहीं ऊपर आसमान से नहीं उतरा हूँ, मैं भी माँ गंगा के गर्भ से
- 1:14:15जन्मा हूँ मैं भी पिता कन्हैया के स्पर्म से जन्मा हूँ मैं कोई ऊपर
- 1:14:21से नहीं उतरा तुम्हारे ही जैसे मैंने भी ठोकरें खाई हैं।
- 1:14:26इसी आनंद की तलाश में गली गली भटका इसी आनंद की तलाश में
- 1:14:33हरिद्वारपुर क्षेत्र भटका नहीं मिला।
- 1:14:39कहीं जब मिला और हमेशा चीजें वही मिला करती हैं।
- 1:14:46जहाँ हुआ करती हैं इसको आप सर्कल में दिलो चीजें वहीं मिला करती
- 1:14:53हैं जहाँ हुआ करती हैं वो है तो तुम्हारे भीतर ढूंढ रहे हो तुम
- 1:14:58मंदिरों में बशर्दों में, थपेड़ों में, नामों में वो है नहीं भाई
- 1:15:05इसमें। वो जहाँ है, तुम्हारे हृदय के
- 1:15:11भीतर है, इसलिए मैं कहता हूँ बेलोशा भी कह गया टादे मंत्र टादे
- 1:15:20मस्जिद बोले शाह ही कहता हूँ। और किसी का दिल न टाइम इस दिल
- 1:15:27विचे दिल पर किसी मंदिर की जरूरत नहीं अपने भीतर उतरने के लिए अपने
- 1:15:36भीतर उतर जाओ चलते फिरते काम करते उठते बैठते, सोते जगते।
- 1:15:41अपने भीतर तुम तो अपने साथी हो सदाम तुम्हें कोई सामान थोड़ा ही
- 1:15:47उठाना पड़ता है। यह नेचुरल अपने अस्तित्व को तुम
- 1:15:53साथ लिए लिए चलते हो जब चाहे डुबकी लगा लो, अपने अंत में उतर
- 1:15:59जाओ। किसी मंदिर की जरूरत नहीं है,
- 1:16:03किसी मस्जिद की जरूरत नहीं है, कहीं जाने की जरूरत नहीं है।
- 1:16:07किसी घर से भागने की जरूरत नहीं है, किसी की जरूरत नहीं है।
- 1:16:11लोग कितने, कितने नामों पर क्या क्या छल नहीं कर देते देशभक्ति के
- 1:16:17नाम पर। कुछ लूटाने की बजाय लूटर लेते
- 1:16:23हैं। लोगों को किताछल हो रहा है, छोटी
- 1:16:27छोटी बच्चियों के मन में विषय भरा जा रहा है।
- 1:16:31यह विषय 1 दिन इन बच्चियों को बर्बाद कर देगा।
- 1:16:35जैसे एपिस्टीन में छोटी छोटी बच्चों की जिंदगी बर्बाद कर दी
- 1:16:39गई। आंख भी खुली न थी के हाय शाम ढल
- 1:16:43गई पांव जब तलक उठे जिंदगी फिसल गई।
- 1:16:55कहीं ऐसा ना हो कि तुम पाम उठाने को तैयारी करो और ज़िन्दगी फिसल
- 1:17:03जाए ज़िन्दगी कहे के राम नाम सत्य है ऐसा ना हो, वक्त को गवाह मत
- 1:17:14देना। यह जामा बड़ी मुश्किल से मिलता
- 1:17:19है। कर्मी आवे कपड़ा नदरी मोक्ष द्वार
- 1:17:27अब उसकी नजर उसकी नजर नाम जपने से नहीं।
- 1:17:35जो आनंद बांटता है उसे लो जिसके पास आनंद है उसे आनंद की एक जैसे
- 1:17:42हम आग परने जमाने में ले के आते थे घरों से ऐसे ही जिसके पास आनंद
- 1:17:50है उसे थोड़ा सा आनंद ले आओ। वहाँ जाओ देखो आनंद कैसा होता है
- 1:17:56तुम्हें बेहतर अब लग जाएंगे बस तुम भी उसी पुकार पे उसी खोज में
- 1:18:01निकल पड़ोगे जहाँ आनंद है और 1 दिन तुम उसका वास्तविक ठिकाना पा
- 1:18:05जाओगे। धन्यवाद।