Latest / Baba ji Vijay Vats / 23 Mar 26 - देख पराई चोपड़ी: ईर्ष्या और कंपटीशन से मुक्ति का सूत्र!! काम करते हुए भी प्रबुद्धता संभव है
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- 0:08बाबा जी प्रणव आपने बाबा जी कोरोनाकाल में आध्यात्मिक प्रवचन
- 0:23शुरू किया था। और पता ही नहीं लगा 6 साल में किन
- 0:28संकरी गलियों में से निकाल के आप मैंने उस सच खंड में ले आए, वो
- 0:37मरने के बाद नहीं जीते जी मिला करता है।
- 0:44कहीं ऐसा तो नहीं कि अब आप राजनीतिज्ञ बातें करते हो?
- 0:53कहीं राजनीतिकता की ये बातें कहीं और जाके तो समाप्त नहीं हो
- 0:58जाएंगी? कुलभूषण कुमार और बहुत से लोगों
- 1:06ने सवाल पूछा हाँ पुत्र ऐसा ही है और मैं ये सब क्यों कर रहा हूँ?
- 1:22सबसे पहले इसको समझना जरूर है। मैं जानता हूँ कि प्रत्येक
- 1:32व्यक्ति की आंतरिक आवश्यकता प्रयास उस प्रेम के।
- 1:43होती है, जो उसके ही अंत में विराजमान है।
- 1:49इसके अलावा कुछ और इच्छा उसकी नहीं होती, लेकिन वह उसी को
- 1:58प्राप्त करने के लिए। हमारी तथाकथित नकली गुरु डबा में
- 2:06उलझ जाता है, भटक जाता है हास क्या लगता है दुख घर से तो हम चले
- 2:18थे। खुशी की तलाश में गुमराह में खड़े
- 2:23थे, वही साथ हो गया। खुद दिल से दिल की बात कही और रो
- 2:32लिए यूं हसरतों के दाग मोहब्बत में धो लिए।
- 2:44ऐसा है पुत्र तुम चाहते हो बदलाव। तुम्हें हैरानी होगी जानकर मैं
- 2:58तुम्हें कहाँ ले जाऊंगा। राजनीति पर भी मैं तुम्हें उस
- 3:04मुकाम पर ले जाऊंगा जहाँ जाकर तुम हैरान हो जाओगे।
- 3:11मैं बदलाव नहीं चाहता। को की बदलाव में तो तुम भारतीय
- 3:19जनता पार्टी को बदल दोगे, कांग्रेस को ले आओगे, कांग्रेस को
- 3:25बदल दोगे, किसी अन्य पार्टी को ले आओगे?
- 3:30ये होता है पुत्र बदलाव। मैं बदलाव नहीं चाहता।
- 3:37मैं बदलाव में विश्वास ही नहीं करता।
- 3:42फिर मैं क्या चाहता हूँ? जीसको भी आप चुनोगे उसके भीतर कुछ
- 3:52वास नहीं होंगे। उसकी कुछ जरूरतें होंगी, उसकी कुछ
- 4:01अन्काक्षाएं होंगी, कुछ समृतियाँ होंगी, कुछ सपने होंगे, कल्पनाएं
- 4:08होंगी। कुछ उसने भविष्य के सुनहले सपने
- 4:15सजाये होंगे, ये सब उसके भीतर होगा।
- 4:31तुम चाहते हो बीजेपी बदल जाए, कांग्रेस आ जाए।
- 4:39कांग्रेस चौधरी जाए, बीजेपी आ जाए ये होता है ट्रांसफर्मेशन मैं
- 4:49क्या चाहता हूँ मैं चाहता हूँ रेवोलुशन रेवोलुशन क्या है?
- 5:02रेवोल्यूशन वह है जीसको लागू करने से तुम्हारे अंत में शांति बढ़
- 5:08जाए। वह जलता हुआ धो धो करता हुआ संसार
- 5:15शांत हो जाए, खामोश हो जाए। ये तोहफों की गड़गड़ाहट, मैं उनकी
- 5:22शांति में तब्दील हो जा। यह बदलाव नहीं है, क्योंकि जीसको
- 5:32भी चुनोगे। इसे लोग पार्टी बदल लेते हैं।
- 5:38वो ही कल बीजेपी में था, आज कांग्रेस में आ गया, वो ही कल
- 5:43कांग्रेस में था, आज बीजेपी में आ गया।
- 5:49अन्य अन्य पार्टियों से तुम बदलते चले जाओगे।
- 5:55लेकिन बदलाव कहाँ हुआ? बदलाव तो तब होगा जब तुम दुख के
- 6:04कगार से आनंद के कगार पे पहुँचो। तुम्हारा रोमा रोमा शांति में
- 6:12तब्दील हो जाए। तुम भीतर से खुश हो जाओ और यह
- 6:21तुम्हारे बदलाव से नहीं आएगा। सभी पार्टियां चोर हैं, चाहे
- 6:32बीजेपी हो चाहे कांग्रेस हो। चाहे कोई भी पार्टी, सभी चौक असल
- 6:40में लोग राजनीतिक दल बनाते ही इसलिए हैं अपनी वासनाओं की पूर्ति
- 6:46के लिए इसलिए आज राजनीतिक पार्टियां अपनी वासनाओं को पूरी
- 6:54करने में लगी हैं। इसमें आपको आश्चर्यचकित नहीं होना
- 6:58चाहिए क्योंकि वो तो आए ही। इसलिए फिर क्या कोई ऐसा व्यक्ति
- 7:05होगा जिसके भीतर वाश नहीं होगी? नहीं ऐसा वाश नहीं तो सभी के भीतर
- 7:13होंगे लेकिन कम होगा। वह नहीं चाहेगा।
- 7:26राज करना वह चाहेगा मैत्रीपूर्ण संवाद करना।
- 7:33वह नहीं चाहेगा हुक्म चलाना वह चाहेगा तुमसे तुम्हारे दुख पूछना
- 7:40और उसके इलाज करना और इसको ही मैं रेवोल्यूशन कहता हूँ मनेजमेंट जो
- 7:51चलाएगा। राजनीति में जो आएगा मैं जानता
- 7:57हूँ भरी भाँति संत तो राजनीति में नहीं आएगा, क्योंकि उसकी वासनी
- 8:03मिट गई, उसके जीने की तमन्ना मिट गई।
- 8:09उसके सारे सपने चकने शुरू हो गए, उसकी स्मृतियां नष्ट हो गई, उसकी
- 8:13कल्पनाएं उजड़ गई, वह खामोश हो गया और वह ऐसे तल पर पहुँच गया
- 8:20जहाँ आनंद की सुगंध के अलावा और कुछ होता है।
- 8:27मैं मनुष्य को उस स्थल पर लेकर जाना चाहता हूँ जहाँ वह मनुष्य
- 8:37नहीं रहता, देवता भी नहीं रहता, डाकू भी नहीं रहता, वह हो जाता है
- 8:48जो वास्तव में वह है। और तुम्हारा अंतिम ध्येय भी यही
- 8:56इससे धीरे धीरे स्टेप ब्य स्टेप जैसे मैंने आध्यात्मिकता को एक एक
- 9:02कदम एक एक पौड़ी में चड़ता गया और आखिर मैं आपको उस मकान पे ले आया।
- 9:11उसके बाद कोई प्रश्न नहीं था। उसके बाद कोई छत के ऊपर कोई सीढ़ी
- 9:17नहीं थी। राजनीति में मैं ऐसा ही कुछ चाहता
- 9:24हूँ क्योंकि मैंने। ऐसे ग्रहों की व्यवस्थाएँ देखें
- 9:37तुम भी ऐसा क्यों नहीं कर सकते? वहाँ भी ऐसा ही पंचभौतिक तत्व है,
- 9:45सब कुछ ऐसा है। लेकिन फिर वहाँ इतनी शांति का
- 9:53वहाँ हर 10 व्यक्तियों के भीतर सिर्फ दो व्यक्ति नोन आठ व्यक्ति
- 10:01एंड अपने भीतर जाके अमृत का रस। नानक की तरह तो क्या वो काम करना
- 10:09छोड़ देते हैं? नहीं, नानक की तरह हलवे चलाते
- 10:13हैं, कबीर की तरह चदरियाँ भी बनते हैं, वो सब करते हैं जीसको जो आता
- 10:22है और ज्यादा ईमानदारी से करते हैं।
- 10:26ज्यादा गुणवत्ता से भी करते हैं और ज्यादा बेहतरीन ढंग से भी करते
- 10:35हैं। ज्यादा मात्रा में भी करते हैं।
- 10:39क्वालिटी बदल जाती है, क्वांटिटी बदल जाती है।
- 10:45तुम्हें शायद मेरी बात आज समझना है, लेकिन किसी दिन तुम्हें समझ
- 10:52आएगा मैं क्या चाहता था। मैंने व्यवस्थाएँ देखी हैं और तुम
- 11:00जो आज जीवन की खोज में मारे मारे फिर रहे हो।
- 11:08खोज करते रहो मैं आपकी खोज को नकारता खोज की, तो आज आपने कुछ
- 11:16खोज लिया, लेकिन उस खोज को। विनाश में प्रयोग मत करना उस खोज
- 11:26को रचना में प्रयोग करना आज आपने साइंटिफिक खोजों को विनाश में
- 11:34परिवर्तन कर लिया। साइंटिफिक खोजों को आपने रचना में
- 11:40प्रयोग नहीं किया। तो राजनीति भी परमात्मा तक
- 11:46पहुंचने का एक ढंग है। जैसे मैंने कहा राम से पहले पेट
- 11:56की भूख मिटानी होगी। ब्रह्म से पहले अन्न चर्चा आवश्यक
- 12:03है, लेकिन अन्न चर्चा के बाद ठहरनी नहीं चाहिए जैसे मार कसने
- 12:12का अन्न। चर्चा के बाद बात आगे चलनी चाहिए।
- 12:21अन्य चर्चा पर ही कॉम्पिटिशन न होता हो कि आज एलन मॉस्क 239
- 12:29ट्रिलियन डॉलर के मालिक हो बिलियन डॉलर के मालिक हो तो मैं उससे आगे
- 12:34निकल जाऊं। यह मुड़ता है।
- 12:39मुड़ता है कि वो करेगा क्या? इतनी कितनी उम्र होती है व्यक्ति
- 12:47के सपने हैं तुम कहोगे लाख से जी लेंगे तो ज़रा।
- 12:55मेरी बातों को संजो के रखना अगर कहीं विज्ञान ने ऐसा चमत्कार कर
- 13:02लिया कि तुम्हारी उम्र लाख साल की हो गई तो तुम देखना तुम मृत्यु की
- 13:10भीख मांगोगे। आज तुम जीवन की भीख मांगते हो
- 13:18डॉक्टर 2 दिन का जीवन इसे और दे दो, किसी तरह इसको जला दो, फिर
- 13:27तुम कहोगे किसी तरह इसे मार दो। मैं तुमसे आज कहता हूँ, अगर किसी
- 13:35वक्त मेरे इस शरीर के ऊपर यह अवस्था आ जाए कि मैं 96 घंटे से
- 13:44ज्यादा कोमा में चला जाऊं। किसी दिन मेरे शरीर पे ये अवस्था
- 13:50आ जाए कि मैं 96 घंटे से ज्यादा कोमा में चला जाऊं तो आप मेरे
- 14:00लाइफ स्पोर्टिंग सिस्टम को खींच लेना बिना देरी किये।
- 14:08क्योंकि मैं चला गया होऊंगा तुम नाजायज ही इस मलबे को ढोते रहोगे।
- 14:2096 घंटे याद रखना 96 घंटे बीतने के बाद।
- 14:26अगर कहीं ऐसी पोज़ीशन आ जाती है कि मैं कुमा में रहता हूँ, आंख
- 14:35नहीं भरकता किसी बात का जवाब नहीं देता।
- 14:40सोच समझ वा की ना रहे लाइफ स्पोर्टिंग सिस्टम पे मैं जीवित
- 14:46हूँ। यानी साँस ले रहा हूँ।
- 14:49लोहार की धौंकनी के सिवा की तरफ याद रखना लाइफ स्पोर्टिंग सिस्टम
- 14:57तथा क्षण खींच रही है। जब मैं जीते ही हूँ, तुम्हे एक
- 15:04वसीयत करके जा रहा हूँ। और वो घड़ी कब किसके ऊपर आ जाये
- 15:10कोई पता नहीं। फिर तुम सुप्रीम कोर्ट में
- 15:17प्रटिशन्स मर्सी प्रटिशन्स डालते फिरोगे इस व्यक्ति को इच्छा
- 15:23मृत्यु दे दो। नहीं, मैं पहले ही तुम्हें आगाह
- 15:28कर देता हूँ। मुझे किसी जज की जजमेंट की जरूरत
- 15:36नहीं जो कुछ भी जानता नहीं है के बारे में मैं अपनी।
- 15:45ढंग से जिया हूँ और मैं अपने ढंग से ही मरूंगा।
- 15:49मैं अगर कहीं ऐसा वातावरण आ जाए कि 96 घंटे तक मैं कोमा में रहूं,
- 16:03सिस्टम चलता रहे। लाइफ सपोर्टिंग सिस्टम पर ध्यान
- 16:08रखना लाइफ सपोर्टिंग सिस्टम पे अगर यह जीवन चलता रहे तो लाइफ
- 16:17सपोर्टिंग सिस्टम हटा ले ताकि मैं आराम से।
- 16:29उस अनंत में विलीन हो सकूँ मेरे पास और कुछ करने को वास न बाकी
- 16:38कुछ खाने को द्रव्य नहीं कुछ भोगने को पदार्थ नहीं, न मैं सुख
- 16:44चाहता हूँ। ना मैं दुख चाहता हूँ आनंद का रस
- 16:48मैंने इतना पी लिया है बेशुमार अब मेरी कोई इच्छा है अब तो आनंद के
- 17:00उसे सागर में अटकलियाँ करना चाहता हूँ, उसमें गोते लगाना चाहता हूँ।
- 17:07ये मेरी तमन्ना नहीं है, इससे मेरी इच्छा मत मानें।
- 17:14यह तो सिर्फ बाहर के आपके जज सहबान की आपके कृपा मांगने ना चले
- 17:21जाओ कि इस व्यक्ति को इच्छा मृत्यु दे दो।
- 17:25इसलिए मैं खुद बोल के जा रहा हूँ अगर ऐसा कोई आ जाये घड़ा तो आपने
- 17:34क्या करना है लाइफ सपोर्टिंग सिस्टम खींच लेना बिना हिचकिचा।
- 17:44क्योंकि मैं जानता हूँ जो पाना था वह पालिया जो जानना था वह जान
- 17:54लिया अब करने धरने को कुछ बाकी है।
- 18:01अब जीने का अर्थ भी क्या है? जीवेशण जीवेशण थोड़ी देर के लिए
- 18:10धागा बांधा था और उस धागे से मैंने काम लिया।
- 18:19आपके लिए थोड़ा सा द्रव्य छोड़ के चला आध्यात्मिकता के रूप में और
- 18:28अब राजनीति की रूप में तो मैं पोड़ी दर पोड़ी।
- 18:37आध्यात्मिकता से बात राजनीतिक बात अब से करना चाहता हूँ और ये है कि
- 18:50प्रत्येक व्यक्ति की जरूरत आखिरी जरूरत उस रस को पान करना है और
- 18:59इसकी तलाश में। वो कहीं कहीं कहीं कहीं खैरात
- 19:04मानता फिरता है और दरवाजे पे उसे मिलती नहीं।
- 19:13इसलिए मैं ऐसा राजनीतिक वातावरण कहता हूँ चाहता हूँ जहाँ छीना
- 19:19छपटी ना हो। तुम अपना जीवन छीना छपटी में
- 19:24गुजार दोगे तो अपने अंतश को कैसे पहचानोगे अपने अंतश को पहचानने की
- 19:31तरफ आपके पास वक्त ही नहीं होगा तो मैं कहता हूँ बस 2 जून के
- 19:39रोटी। साईं इतना दीजिए जहाँ में कोटा
- 19:44में समय मैं भी भूखा न रहूं, साधू न भूखा जाए, देख पराई चौपड़ी मत
- 19:56रल जावे जी कॉम्पिटिशन मत करना, ये मत देखना।
- 20:02ऐरन मस्क के पास 200 उतारें सिविलियन डॉलर, है ना उसके पास?
- 20:09इससे ज्यादा भी हो तो सारी धरती का मारक भी हो जाए तो बर्बाद
- 20:14तुमने उससे कोई कॉम्पिटिशन नहीं करना।
- 20:17तुमने उस स्थान पे जाना जहाँ पर एक जर्रा आनंद की कीमत समग्र
- 20:24सृष्टि से भी ज्यादा होती है इसे फिर सुन लो तुमने वहाँ जाना है
- 20:32जहाँ एक जर्रा आनंद की कीमत। समग्र ब्राह्मणों की सृष्टि के
- 20:38मुकाबले पदार्थों से ज्यादा है कीमत उसके जो खरीदा नहीं जाता जो
- 20:47किसी खेत में उगता नहीं जो किसी दुकान पे बिकता नहीं।
- 20:56वह तुम्हारे ही भीतर है। प्रेम न बाड़ी उपज प्रेम न हार्ट
- 21:02बिकाये राजा प्रजा जहे रुचय शीश दही ले जाए मानो तो तुम्हें
- 21:11तुम्हारा अहंकार ही गलाना होगा। यह तुम्हारा मुख्य कर्तव्य है।
- 21:20दूसरा तो अंकार गलाना ये बाद की बात है।
- 21:26पहले तुम्हारा पेट भर होना चाहिए। लेकिन मुश्कला तो तब पैदा होती है
- 21:33जब तुम पेट भरने की जगह वा सुनाओ का भरना शुरू कर देते हो।
- 21:47मैं तुम्हें पेट भरने की बात कह रहा हूँ।
- 21:51मैं तुम्हें वासनाओं को भरने को नहीं कह रहा हूँ, बस देख पराई
- 22:04झोपड़ी मत ललचा बैची उसके पास इतना है।
- 22:09उसके पास 100 मंजिला है। अटलांटा है बड़ी बड़ी कार उसकी
- 22:17तीसरी मंजिल पर कुत्ते रहते है। उसकी सातवीं मंजिल पर नौकर चाकर
- 22:24सेवक रहते है। सब ठीक है।
- 22:29लेकिन उसके हृदय के भीतर सुकून नहीं है।
- 22:36फिर क्या करना है? ऐसे ही अटलांटा का मैं कहता हूँ।
- 22:46देख पराई चोपड़ी मत ललचावय जी रूखी, सुखी खाई के ठंडा पानी से
- 22:56अगर तुम जीवन को ऐसे झेलोगे तो बिलकुल ठीक राजनीति का मेरा
- 23:05लक्ष्य पूरा। अगर तुम कहोगे राजनीति का लक्ष्य
- 23:10पूरा करते करते पेट तो भर जाए, फिर वासनायी भरने में लग जाओ तो
- 23:16तुमने फिर मेरा मूल मंत्र समझाना, इसलिए मैं कहता हूँ जिनके पास
- 23:23साधन हैं। इस मंचते हुए गदर में इस लगी हुई
- 23:28आग में खाने के लिए रोटी है रहने के लिए छत है पहनने के लिए वस्त्र
- 23:39है वह आराम से एक कमरे में बैठ जाए एकांत।
- 23:46अपने मौन में उतरे और 1 दिन वह अपने अंतश का वो आनंद का रस पी
- 23:52लेगा। बस उसके लिए बहुत छोटा सा रास्ता
- 23:59मैंने बदला किया है। तुम्हारे लिए बड़ा रास्ता इसलिए
- 24:04करना पड़ता है क्योंकि अभी तुम भूखे और तुम्हारी ये पुकार ठीक
- 24:11है, लेकिन मैं तुमसे कहता हूँ कहीं यहाँ बहक न जाना तुम।
- 24:20पेट को भरते भरते वासनाओं को भरना शुरू करता हूँ, फिर अब ये भी
- 24:25कमालू, फिर अब ये भी कमालू ये वासनाओं को भरना हो क्या?
- 24:31बस पेट भरने तक ही सीमित रहने जैसे ही तुमने कॉम्पिटिशन किया?
- 24:41वैसे ही तुम डूबे वैसे ही तुम्हारा लक्ष्य बदल गया।
- 24:46इसे मैं कहता हूँ रेवोलुशन तुम करते हो?
- 24:53ट्रांसफॉर्मेशन कभी कांग्रेस को लिया है और लोग बड़ा मौका प्रश्न
- 25:04है। वही लोग कांग्रेस में होते है।
- 25:06वही लोग मौका देखकर चलती हवा को पहचान जाती या शैतान होते है, वो
- 25:12ही बीजेपी जॉइन कर देते है। लेकिन आदमी वही है।
- 25:18आदमी की गुणवत्ता कहाँ बदली तुम ट्रांसफॉर्मेशन में मत उलझना, मैं
- 25:30तुम्हें एक बात कह दिया। जो व्यक्ति राजनीति में आ गया, वह
- 25:33चोर है। यह व्यक्ति राजनीति में आ गया।
- 25:38वह मूर्ख है। वह सच में जो पाना चाहता है,
- 25:44राजनीति उसका स्टेप नहीं है। राजनीति वहाँ तक जाती नहीं,
- 25:53राजनीति चेतना सा काम कर लेना। धन कमा लेना, शरीर की जरूरतों के
- 26:05लिए बस रूखी सुखी खाये के ठंडा पान, सोने की भूषकों को डालने की
- 26:13इच्छा मत करना। यह मूड़ता तन ढकने की इच्छा करना
- 26:21वो ठीक वो जरूरत है लेकिन सोने की पोशाकों से तन ढकने की इच्छा यह
- 26:28पागलपन है तो मेरी बात को तुम समझ रहे हो हाँ।
- 26:35तो यही राजनीति का मतलब है। मेरा मैं ट्रांसफॉर्मेशन नहीं
- 26:42चाहता ट्रांसफॉर्मेशन तो तुम एक पार्टी को छोड़ दोगे, दूसरे को
- 26:47चले जाओगे, लेकिन आदमी तो वही है, वही दरिंदा उसके भीतर बैठा है।
- 26:54वो ही लूटेरा उसके भीतर बैठा वो ही खून चूसने वाला उसके भीतर बैठा
- 27:01वो ही अपराधी कादिल हत्यारा उसके भीतर बैठा तुमने मुखौटे बदल लिए
- 27:08चेहरे बदल लिए, लेकिन भीतर का? बेहतर का वह वासनात्मक तत्व ये
- 27:19तुमने कहा बदला वो भी लूट रहे थे, अपने ढंग से ये भी लूटेंगे अपने
- 27:25ढंग से मैं इन चीजों में ज़रा भी विश्वास नहीं करता।
- 27:33इसलिए तुमने पूछा पुत्र कि क्या आप स्टेप ब्य स्टेप हमें किसी और
- 27:40जगह पे ले जाओगे? बिलकुल मैं तुम्हें स्टेप ब्य
- 27:46स्टेप कहाँ लेके जाऊंगा मैंने तुम्हें वो भी बता दिया।
- 27:52मैं तुम्हारी सहन शक्ति को बढ़ाऊंगा, तुम्हारे पदार्थों को
- 27:56नहीं, तुम्हारी सहन शक्ति को बढ़ाऊंगा तुम्हारी वासनाओं को
- 28:02घटाऊंगा तुम्हारी जरूरतों को कम करूँगा।
- 28:05ये शायद तुम मिलना चाहते हो, लेकिन कोई बात नहीं।
- 28:11मुझे 1000 व्यक्तियों की जरूरत नहीं है।
- 28:14मुझे एक उस व्यक्ति की जरूरत है जो प्यासा है और जैसे पानी चाहिए
- 28:20तुम भाग्यशाली हो गए अगर मेरी बातें तुम्हारी खोपड़ी से नीचे
- 28:25हृदय में उतर जाएं तो तुम भाग्यशाली समझना अपने आप।
- 28:31अगर खोपड़ी उसको सेंसर करने लग जाए तो तुम भाग्यशाली नहीं।
- 28:37मेरी बात को बिलकुल निहोर प्योर अपने हृदय में उतर जाने देना।
- 28:43यह तुम्हें ट्रांसफॉर्मेशन नहीं करेगा।
- 28:45यह तुम्हारे भीतर रेवोल्यूशन करेगा।
- 28:49और रेवोल्यूशन मैं ब्लडी रेवोल्यूशन नहीं चाहता।
- 28:57मैं आनंद वाला रेवोल्यूशन चाहता हूँ, मैं खून वाला रेवोल्यूशन
- 29:03नहीं चाहता, मैं आनंद वाला रेवोल्यूशन चाहता हूँ।
- 29:08अभी तुम दुखी हो मारे मारे फिर लेकिन मैं तुम्हारा रेवोलुशन करूँ
- 29:14यह क्रांति घटित होगी बदलाव ने तुम बदलाव करते हो लाखों सालों से
- 29:24इस धरती पर अत्याचार। और इस अत्याचार का कारण था बदलाव।
- 29:32तुमने चेहरे बदले, व्यवस्थाएँ नहीं बदले, तुमने चेहरे बदले, वो
- 29:45प्राणी नहीं बदले? जिनके भीतर संतोष था।
- 29:51कोई कोई व्यक्ति आता है, कभी कभी भूल चूक से लाल बहादुर शास्त्री
- 29:56जैसा लेकिन वो बड़े रे रेस्त तारे और वो तरे वो सदा नहीं आया करता
- 30:05कभी कभी आया करता। कि तुम ट्रांसफॉर्मेशन करना चाहते
- 30:18हो, अबकी बार फलानी सरकार, अबकी बार फला सरकार, बहुत हुई महंगाई
- 30:28की मार बहुत हुई अंधों की मार। अबकी बार फनाह सरकार नहीं, मैं ये
- 30:37नहीं चाहता। मैं राजनीति को उस कगार से बोल
- 30:41रहा हूँ। उस शोर से बोल रहा हूँ जहाँ
- 30:44राजनीति वित्त में आनंददायक अलग है।
- 30:49राजनीति का प्रवचन सुनकर भी तुम मुझे कहते तो बाबा ऐसा लगता है
- 30:54जैसे हम आध्यात्मिक प्रवचन सुन रहे हैं।
- 30:58बिलकुल लगेगा क्योंकि यह आता तो उसी तल से है।
- 31:04जीस तल से आध्यात्मिक प्रवचन आता है।
- 31:07उसी तले ही से तो राजनीतिक भरोसा ना होता है, इसलिए वो खुशबू तो न
- 31:15बदले फिर मैं उस बाग में जाकर। कौनसा गीत गाऊं, इससे का फर्क
- 31:27पड़ता है। वो गीत तुम्हें रुलाने वाला हो,
- 31:35वो गीत तुम्हें मस्त करने वाला हो, वो गीत तुम्हारी वीणा को हर
- 31:39ले या गीत तुम्हारी व्यथा को ज्यादा कर दे बेरहा के गीत भी खा
- 31:45सकता हूँ। लेकिन मैं तुम्हें उस गुलशन में
- 31:53ले जाना चाहता हूँ बात गुलशन में ले जाने की है तुम अभी तो दुर्गंध
- 32:02के किनारे पे खड़े हो जिसे तुम राजनीति कहते हो?
- 32:07ये दुर्गंध का गट है। और मैं तुम्हें इस दुर्गंध के गटर
- 32:13से हटा के उस गुलशन में ले जाना चाहता हूँ जहाँ सुगंध ही सुगंध
- 32:20है। अब तुम इन चीजों को ठीक से समझ
- 32:27लेना तुम बदलाव चाहते हो मैं बदलाव नहीं चाहता।
- 32:33मैं क्रांति चाहता हूँ और क्रांति वह उन लोगों को छोड़ होते हैं।
- 32:44ऐसे लोग जब लाल बहादुर शास्त्री जैसे लोग पैदा हो सकते हैं।
- 32:49तो इस संसार से भी तो कभी किसी का नष्ट नहीं होता, बस तुम पहचान
- 32:53नहीं पाते तुम इधर से उधर से मेरे दोस्त ने कह दिया मेरे मामी ने कह
- 32:59दिया मेरे चाची ने कह दिया मेरे फूफे का, ताई का बेटे ने कह दिया
- 33:04तुम ऐसे वोट डाल देते हो और फिर वो परेशान करता है।
- 33:08फिर तुम शिकायत करते हो ये शिकायत तुम्हारी गलत है और सब ठीक है
- 33:18लेकिन जिसके हाथ में तुम चार 5 साल के लिए सारी व्यवस्था सौंप
- 33:24रहे हो, उसको पहले अच्छी तरह से देख लेना।
- 33:31तुम अपनी बेटी को ब्याते हो, बेटे को ब्याते हो क्या कुछ नहीं
- 33:37देखते? कहा कहा से नहीं पता करते पड़ोसी
- 33:41से पूछते हो लड़की का व्यवहार कैसा?
- 33:44लड़की का व्यवहार कैसा है? रिश्तेदारों से पूछते हो
- 33:51पड़ोसियों से पूछते हो, जहाँ भी तुम्हारा रास्ता होता है वहाँ
- 33:56पूछते हो और फिर ठीक लगे तुम शादी करते हो, लेकिन वोट पाँचों साल के
- 34:03लिए? तुम किसी के कहने से भी डाल सकते
- 34:10हो फिर अपना दुखड़ा किसी के आगे मत रोना, यह तुम्हारा अपना ही
- 34:15चुनाव है। अगर फिर दुख देव, व्यक्ति चुनाव
- 34:19हुआ तुम्हारे द्वारा तो याद रखना चुना तुमने।
- 34:25चुनाव तुम्हारा इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ मुझे ऐसे लोगों की जरूरत
- 34:33है जो ईमानदार हों, कर्मठ हों और जिनकी तमन्नाएँ थोड़ी।
- 34:46जो थोड़े में गुजर बसर कर सकें, क्योंकि मैं आमूल चूल परिवर्तित
- 34:51करना चाहता हूँ। नियम कायदे कानून तो तुम भी बनाते
- 34:59हो नियम कायदे कानून तो मैं भी बनाऊंगा।
- 35:03लेकिन मेरे नियम, कायदे, कानून किसी राजनीति से किसी लोग से
- 35:10प्रेरित नहीं होंगे। संतोष से प्रेरित होंगे।
- 35:14तुम कैसे संतुष्ट हो जाओ में लक्ष्य को देखकर?
- 35:21नीतियां निर्धारित करूँगा। तुम्हारा आनंद किस तरह फलीभूत हो
- 35:26जाए, यह लक्ष्य को देखकर मैं नीतियां निर्धारित करूँगा।
- 35:33किसी दोस्त के कहने से तुम भी वोट मत डालना मैंने।
- 35:40मैंने तुम्हें पुकारा अगर तुम बिल्कुल बेहतर से ये जानते हो कि
- 35:49मैं ईमानदारी से मेहनतकशी से इस देश की व्यवस्था को संभाल सकता
- 35:56हूँ। अभी गोल्डन नाम की एक वेबसाइट बनी
- 36:04है। उस पर जाओ, अपना नाम लिखो, अपनी
- 36:10क्वालिफिकेशन अपना एड्रेस लिखो और लिखो कि तुम क्या करने की योग्यता
- 36:15रखते हो। हम क्या डिमैंड करते हैं हमारे
- 36:21लिए नहीं, मेरे लिए नहीं तुम्हारे लिए तुम्हारे आस पड़ोस के लिए
- 36:28तुम्हारे मित्रों के लिए तुम बताओ कि तुम ईमानदारी से तुम्हें।
- 36:37कौन सा गुण तत्व है यह अवश्य लिख देना हो सकता है।
- 36:43तुम में से ही कोई प्राइम मिनिस्टर निकल जाए।
- 36:46हो सकता है तुम में से कोई रक्षा मंत्री, कोई गृह मंत्री, कोई
- 36:51ब्यूरो। मैं कोई आसमान से थोड़ी लेके
- 36:56आऊंगा तुम्हीं में से ढूंढूंगा तुम्हें में से छांटूंगा और मेरे
- 37:02पास छांटने की व्यवस्था भी है। मैंने तुम्हें पहले भी बताया था
- 37:08मैं तीन ढंगों से आपको मापूँगा और फिर जब मैं आपको ओके कर दूंगा।
- 37:14तो आप अपनी मेहनत में जुड़ जाना निश्चित ही तुम्हारी विजय होगी।
- 37:22फिर तुम इसे कहते हैं। मातृ सेवा सिर्फ नारी लगाने से ही
- 37:32मातृ सेवा नहीं होते। जीस माता को आजाद करने में जीस
- 37:39पार्टी की एक बूंद खून भी नहीं भाई।
- 37:43वो आज दावा करते हैं, परम भक्ति का यह पाखंड है नहीं मुझे ईमानदार
- 37:52व्यक्ति। दृढ़ता वाले, दृढ़ संकल्पों वाले,
- 38:00सेवा सुशर्षा करने वाले, कठिन मेहनत करने वाले व्यक्ति चाहिए,
- 38:09जिनके भीतर वास में। कम से कम तर हो जिनकी जरूरतें कम
- 38:15से कम तर हो, जिनके भीतर सेवा का भाव हो, मातृभूमि की सेवा फिर हो
- 38:23सके मातृभूमि की सेवा एपिस्टीन की छोटी छोटी बच्चियों से।
- 38:33उनका खून चूसके वह कली जो फूल बनने से पहले मुरझा गई, ऐसे मातृ
- 38:45सेवा नहीं होती तुमने मातृ द्रोह किया है।
- 38:51नारे कम, कुछ भी लगाते रहो, नमामि सदा वत्सरे मातृभूमि छोटी छोटी
- 39:03बच्चों से रेप करके आ हो गया। हमारे धर्म में छोटी छोटी बच्चों
- 39:15को माता कहा जाता है तो उनका खून भी दोहन से रेप करता हूँ।
- 39:24नमामि सदा बतसेले मातृपूर्ण। ये सिर्फ नारा एपिस्टिन कांड में
- 39:31तुमने क्या किया है? इसलिए मैंने कहा सी जे साहब इन सब
- 39:39लोगों के नार्क को टेस्ट की अनुमति दे दो, हम आपसे प्रार्थना
- 39:45करते हैं करवट। हम देखें कौन गुनाहगार कौन बेकसूर
- 39:55कहीं ऐसा तो ये वैसे ही ऐसे कर रहे हैं नमामि सदा वत्सले
- 40:01मातृभूमि छोटे छोटे बच्चों से रेप करें और नवरात्रों में उनकी पूजन
- 40:06कर रहे हैं छोटे बच्चों। कहीं ऐसा तो नहीं है?
- 40:12बहुत ब्रान्तियां मिट जाएंगी सूर्यकांत जी आपसे बड़ी हूँ
- 40:20प्रेक्षण ये भूखी आत्मा। आपसे प्रयाग करती है, चाहत है
- 40:32आपसे कि आप इन लोगों के नार्को की अनुमति दीजिए, अपनी मौजूदगी में
- 40:41नरक को करा दीजिए। कोई बात नहीं हम आप पर यकीन कर
- 40:45लेंगे। मैं चाहता हूँ ट्रांसफॉर्मेशन
- 40:54रेवोल्यूशन ऐसे व्यक्तियों को गद्दी पर बिठाना चाहता हूँ जो
- 41:02पीढ़ी दर पीढ़ी संस्कार देके जाएं, अपने बच्चों को के बच्चों
- 41:09का ऐसा जीवन यापन करना। अमर तो यहाँ कोई रहता है लेकिन
- 41:16जितना भी समय प्रकृति ने तुम्हें दिया है, मानवता की सेवा में
- 41:20गुजार देना है और बस प्रकृति से इतना कुछ लेना है जितना तुम्हें
- 41:27जरूरत है। जरूरत के सिवा इकट्ठा करने के लिए
- 41:33प्रकृति से मत मांगना यही मेरी अंतिम सुविधा मिली है तुम्हें
- 41:41प्रकृति सदा तुम्हें लौटाते ही रहते दाता दे लेंदा थगपा।
- 41:48जुगा जुगांतर खायख्वा प्रकृति सदा इनायत बरसाती है तुमपे, लेकिन तुम
- 42:00जरूरत के हिसाब से रखना, बाकी दूसरों के लिए छोड़ देना, वंड
- 42:05छुपो। मैं तुमसे फिर फरियाद करता हूँ,
- 42:11रोज़ ही फरियाद करता रहता हूँ गोल्डन स्वेरू के उस वेबसाइट पे
- 42:18जाइए गोल्डन दी गोल्डन स्वेरू दी गोल्डन स्पर्ब वहाँ पर अपना नाम
- 42:25पता। एड्रेस क्वालिफिकेशन तुम्हारे
- 42:33भीतर क्या अभिलाषा है? देश सेवा के लिए हमे सच्चे
- 42:37देशभक्त चाहिए नकली नारे लगाने वाले ने।
- 42:44नकली नारे लगाने वाले नहीं ये दुबे चौबे छब्बे नहीं चाहिए हमें
- 42:51हमें सच्चे चाहिए सच्चे सबूत भारत माता के सबूत हो रहे हैं, जब भी
- 42:57जरूरत होती है। माँ भारतीय सच्चे सपूतों को आगे
- 43:03कर दिया करती है। आज जरूर तो तुम कहीं भी हो, तुम
- 43:11कृपा करके हमारी इस वेबसाइट पर आ जाओ, अपना नाम दर्ज करा लो।
- 43:20जब हमें जरूरत होगी, हम आपको बुला लेंगे।
- 43:25माँ भारती को आपकी सेवा की आवश्यकता है।
- 43:28तैयार रहिये, चूक मत जाइए, भूल मत जाइए मेरी आपसे पुकार।
- 43:39चला तो हर व्यक्ति जाता है यहाँ से, लेकिन कुछ लोग हैं जो धरती के
- 43:45लिए कुछ कर गुजरते हैं, जो माँ भारती के लिए कुछ कर गुजरते हैं
- 43:50और कुछ लोग ऐसे हैं जो गुलामों की तरह।
- 44:00बूट चाट कर ही चले जाते है तो तुम ऐसे लोगों में मत आना।
- 44:08थोड़ी सी देर का जीवन होता है, बहुत ज्यादा मत समझ लेना।
- 44:14उमरे दराज मांगकर लाए थे चार रोज़ द्वारची में कट गए दो इंतजार में
- 44:25उठो शेरु, उठो शेरिन, तुम्हारी आवश्यकता है माँ भारती।
- 44:34अपने हृदय में ज्योति जलाओ और निकल परो इस मुहिम में माँ भारती
- 44:45आपकी सेवा का पुरस्कार अवश्य दिखता है।
- 44:49धन्यवाद सर।