Latest / Baba ji Vijay Vats / 15 Feb 25 - सर्वश्रेष्ठ साधना कौन सी है? किस साधना से परमात्मा तक पहुंचना सबसे आसान है?
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- 0:12सर्वश्रेष्ठ साधना कौन सी है? थोड़ी सी मैं शब्द बोलेंगे,
- 0:26उन्हें हृदय के डायरे में रख लेना।
- 0:33तुम ना तो कभी कुछ खो सकते हो ना कुछ कभी पा सकते हो सिर्फ दावा है
- 0:45तुम्हारा कि हमने कुछ पाया। सिर्फ दावा है तुम्हारा मान्यता
- 0:56है तुम्हारी कि हमने कुछ खोया ना तुम कुछ खो सकते हो ना तुम कुछ पा
- 1:07सकते हो इस बात को हृदय में गांठ पाद रहा हूँ।
- 1:14कृष्ण ने भी कहा है मुझ में कुछ और संभाल नहीं सकता और मुझ में से
- 1:26कुछ और निकाला नहीं जा सकता। मैं परिपूर्ण हूँ, मैं संपूर्ण
- 1:31हूँ। रोज़ मुक्ति तुम्हारे इस दावे को
- 1:39खारिज करती है। तुमने कुछ कमा लिया रोज़ मृत्यु
- 1:45तुम्हें सबक सखाती है कि तुमने कुछ नहीं पाया।
- 1:51देखो जो उपाय आज माटी हो गया तुम कहते हो मैंने कुछ खोया लेकिन
- 2:02मृत्यु कहती है, आज वो भी खो चले जिसने पाया था।
- 2:13आज वो भी खो चले जिसने कुछ पाया था दहे भी छोड़ चले, मन भी छोड़
- 2:20चले ना कुछ तुम पा सकते हो ना कुछ तुम खो सकते हो।
- 2:30तो पूछा सर्वश्रेष्ठ साधना कौन सी है?
- 2:38जेही विधि राखे राम। तेही विधि रही है जो होता है होने
- 2:51दें। विराट की इच्छा से हो रहा है वह
- 2:58विराट जिसके बारे में तुम सोच भी नहीं सकते खोजना तो बहुत दूर की
- 3:05बात है। उस विराट की इच्छा से हो रहा है
- 3:09और तुम्हें पता कुछ नहीं। तुम्हारे मैं का खोना पाना सब
- 3:15धाबा है तुम कुछ नहीं खोते, कुछ नहीं पाते इसलिए जो होता है होने
- 3:23दो। जो?
- 3:30मिल गया, उसी को मुकदर समझ लिया। जो मिल गया उसी को मुकदर समझ
- 3:45लिया। जो खो गया मैं उसको भुलाता चला
- 3:55गया, जो खो गया, मैं उसको भुलाता चला गया।
- 4:08हर फिक्र को धुंए में। उड़ाता चला गया।
- 4:16जो मिल गया उसी को मुकद्दर समझल गया, जो खो गया, मैं उसको बुलाता
- 4:26चला गया। कब तक याद रखोगे?
- 4:301 दिन तुम भी खो जाओगे तुम भी शमशान की अमानत हो, तुम भी
- 4:37कब्रिस्तान की अमानत हो, गड्ढा आज खोदा जाए या 20 5000 वर्ष बाद
- 4:50खोदा जाए। कोई फर्क नहीं पड़ता तुम शमशान की
- 4:55कब्रिस्तान की अमानत हो, न कुछ पा सकते हो न कुछ खो सकते हो फिर
- 5:02चितकार क्यों? फिर हाहाकार क्यों व्यर्थ है
- 5:06तुम्हारा चितकार व्यर्थ है तुम्हारा हाहाकार।
- 5:10व्यर्थ है तुम्हारा जोड़ना और व्यर्थ है तुम्हारा लूट जाने का
- 5:14दुख कुछ भी सार्थक नहीं। संत कहते हैं तेरा पणा मीठा लाके
- 5:25जो तुद पा वह सोइपली कर? तू सदा सलामत नरंकार पल्टू कहते
- 5:36हैं मेरी तो यही मर्ज़ी कर वही मेरी तो यही अर्जी कर वही जो तेरी
- 5:43मर्ज़ी वो तो करता ही है जो उसकी मर्ज़ी है।
- 5:50सर्वश्रेष्ठ साधना है दो अक्षर मैं बता दूँ छोड़ दो सब विज्ञान
- 5:54भैरव तंत्र के उपाय उपाय करने से कभी न किसी को खुश मिला, न कभी
- 6:02किसी को मिलेगा हमारा बोलना सब व्यर्थ।
- 6:08हम बोलते हैं, बोलते हैं इसीलिए बोलते हैं क्योंकि चुप हो जाओ ये
- 6:16चुप कराने के लिए भी बोलने का इस्तेमाल करना पड़ता है।
- 6:32बोला इशारा है शायद वो जाना तो नहीं जा सकता, वो समझाया तो नहीं
- 6:46जा सकता, लेकिन शायद। इशारे काम कर जाएं।
- 6:52बस इसीलिए इशारों का प्रयोग करते हैं।
- 6:55वो चाहे बोलने में करें, चाहे शरीर के इशारों से करें, बस
- 7:05प्रयोग है सिर्फ। सार्थक भी हो सकते हैं, व्यर्थ भी
- 7:10हो सकते हैं। देखिए छोड़ दे सब कुछ उसकी मर्ज़ी
- 7:26पे छोड़ दे। जो होता है वो नहीं दे।
- 7:32वैसे भी जो हुआ उसे तू रोक नहीं सकता था और जो होगा उसे भी तुम
- 7:39रोक नहीं पाएगा। यही कृष्ण कहते हैं कि अर्जुन इन
- 7:45मेरे द्वारा मारे गए लोगों का तू हनन कर दे।
- 7:52मार तो मैंने दिए, तू सिर्फ हिस्से ले ले करता तो वही है,
- 8:03लेकिन तुम्हारा अहंकार इस बात को मानने को तैयार नहीं और जब तक
- 8:10नहीं मानेगा तब तक दुख खुद ही पाएगा।
- 8:16अगर तुम्हारा अहंकार नहीं मानता कि सब कुछ वो करता है तो ठीक है,
- 8:21फिर दुख पाने की भी तैयारी रखो, जो उस पर छोड़ के सो जाता है वो
- 8:30घोड़े भेज के सो जाता है। फिर कुछ चोर के चुराने का फिक्र
- 8:34नहीं रहता। तुम धन कमाते हो, पहले कमाने में
- 8:39परिश्रम करते हो, फिर कमाकर जोड़ने में परिश्रम।
- 8:47करते हो? फिर जोड़कर उसकी रक्षा चौकीदारी
- 8:51करने में फिक्र करते हो। उमरे द्रास मांगकर लाए थे चार
- 9:00रोज़ दो आरजू में कट गए दो इंतजार में।
- 9:07ऐसे ही बीत जाती है। कुछ कमाने में कट गई, कुछ गिनने
- 9:12में कट गई, कुछ चौकीदारी में कट गई।
- 9:15तुम्हारे पहले ठन ठन गोपाल आखिर में घर पड़ते हो, धरती पर मुँह पा
- 9:21देते हो, तुम को भी लोगों को उठाना पड़ता है।
- 9:28कंधा दूसरे दिया करते हैं तो सर्वश्रेष्ठ साधना कौन से बस
- 9:42मुकद्दह तो नहीं बना सकता? ये मूर्ख हैं लोग।
- 9:49ये संसार के नियमों को समजते हैं, लेकिन आध्यात्मिक व्यक्तियों के
- 9:56नियमों के हिसाब से इनसे बड़ा मूर्ख कोई नहीं है।
- 10:00ये समझदार लोग नहीं है। जो मिल गया उसे को मुकदर समझ लिया
- 10:14मुकदर समझ लिया जो खो गया मैं। उसको भुलाता चला गया।
- 10:27हर फिक्र को धुएँ में। उड़ाता चला गया जो।
- 10:36खो गया जो मिल गया बस तेरी मर्ज़ी।
- 10:46आसान से आसान और मुश्किल से मुश्किल साधना यही है मुश्किल मैं
- 10:54तो कहता हूँ कि तुम्हारा अहंकार मानता नहीं और तुम्हारे आसपास के
- 10:59मोटिवेशन स्पीकर तुम्हें मानने नहीं देंगे।
- 11:02वो कहेंगे ऐसा कैसे हो सकता है? करके दिखाएंगे, करके दिखाओ भाई ये
- 11:16खुद ही चले जाएंगे, करके क्या खाक दिखाएंगे?
- 11:25सबसे श्रेष्ठ साधन अपने भीतर उतरने के लिए सारी फिकर छोड़ दी।
- 11:32उसकी शर्म में चले गए। माँ वेकम शर्म ब्रज तो उस पे छोड़
- 11:39दे जो करता है ठीक तुम्हारा कुछ जाता नहीं, तुम कुछ लेके आए थे
- 11:45क्या तुम्हारे पास कुछ रहता नहीं? मृत्यु तुमसे सब कुछ छीन लेती है,
- 11:56न लेके आए थे न तुम साथ लेके जाओगे बस यहीं का तमाशा है।
- 12:06इन गुत्थियों को गिनते रहो और प्रसन्न होते रहो।
- 12:121 दिन ये छूट जाएंगी और तुम कहीं न पहुंचोगे तुम्हारे हाथ वही ठन
- 12:17ठन गोपर सर्वश्रेष्ठ साधना है उसकी मर्जी के ऊपर छोड़ जाओ यही
- 12:27कृष्ण कहते हैं। कि तू इनको बचा ना पाएगा जिनके
- 12:43भाग्य मैंने लिख दिए हैं मृत्यु में तुम मन को जला न पाओगे और
- 12:52जिनके भाग्य मैंने लिख दिए हैं जीवन।
- 12:54उनको तुम मिटाना पाओगे फानूस बनकर जिसकी हिफाजत हवा करे वो शब में
- 13:10क्या मुझे जिसे रोशन खुदा कहे जीसको मैं मिटाऊंगा।
- 13:18वो बचेगा नहीं और जीसको मैं बचाऊंगा, उसको मारने वाला कोई
- 13:25नहीं इसलिए तुम उस विराट की मर्ज़ी पे छोड़ दो, जहाँ भी जा।
- 13:38उस विराट की मर्ज़ी से सब होता हुआ जान ले, मान ले तो तू सुखी भी
- 13:45रहेगा और शांत भी रहेगा और जिंदगी आसानी से कट जाएगी, बस यही
- 13:53सर्वश्रेष्ठ साधना है। जो हो गया उसके लिए शोक न कर और
- 14:02जो नहीं हुआ उसके लिए दुखी मत हो। ये दोनों चीजों को गांठ बांध रहा
- 14:08हूँ। जो हो गया उसके लिए शोक न कर।
- 14:14जो नहीं हुआ उसके लिए दुखी मत हो। ज़िन्दगी बड़े मज़े से कट जाएगी।
- 14:24फिराक गोरखपुरी ने लिखा है। ज़िन्दगी है 4 दिन की बहुत होते
- 14:38हैं हजारों 4 दिन भी 4 दिन कौनसा कमे होती है?
- 14:43तुम चार पल नहीं जी पाते सो साल के जीवन में तुम चार पल खुशी के
- 14:50नहीं जी पाते। और तुम्हें सत्य कहता हूँ मैं अगर
- 14:56तुम एक पल भी सत्य का जी लो तो तुम्हारा जीवन उसी वक्त बदल
- 15:02जाएगा। ट्रांसफॉर्म हो जाएगा उसकी एक
- 15:05बूंद का पीना तुम्हें क्या से क्या बना देगा अगर तुम अभी वो ही
- 15:11हो। दुखी के दुखी तो समझो तुमने आज तक
- 15:16एक बूंद भी नहीं आनंद दी। बस यही कसौटी है, मुझे लोग पूछ
- 15:21लेते हैं मैं पहुँच गया हूँ क्या कसौटी है आनंद ही कसौटी है, सुख
- 15:28नहीं आनंद कसौटी है। और आनंद का विपरीत कुछ नहीं शांति
- 15:37का विपरीत होता है, अशांति सुख का विपरीत होता है।
- 15:42दुख आनंद का विपरीत कुछ भी नहीं होता।
- 15:46और सुख भी किसी कारण से आता और दुख भी।
- 15:48किसी कारण से आता और शांति भी किसी कारण से आती और अशांति भी
- 15:52किसी कारण से आती, लेकिन आनंद किसी कारण से नहीं आता और किसी
- 15:58कारण से आनंद जाता है। आनंद तो बस एक बार आता है और आता
- 16:04है तो बस आ ही जाता है। सूक्ष्म से एक प्रश्न आया है बाबा
- 16:20आपने चुटकुला नहीं सुनाया? बहुत दिन हो गए कोई भजन गीत सुना
- 16:25दो या चुटकुला सुना दो चुटकुला क्या सुनाऊं?
- 16:33एक दादा पोते से कहने लगा पोता जी मैं अपने जमाने में ₹10 ले के
- 16:40जाता था, सारा सामान ले आता था। कटियाना का वास्पती चावल आटा
- 16:47मशाल। दाल, भात, सब्जी भी ले आता था,
- 16:53दूध भी ले आता था ₹10 में पोता भोला दादा ज़माना बदल गया है।
- 17:05हाँ, हाँ, ज़माना बदल गया है। पोता कहता हाँ, बाबा ज़माना बदल
- 17:12गया है। आज कल सभी दुकानों पे सीसीटीवी
- 17:16लगे होते हैं। हंस के गए।
- 17:26ज़माना पत्र क्या है? ₹10 में सब कुछ ले आता था।
- 17:33कह तो बाबा आजकल सब दुकानों पे सीसीटीवी लिखे हुए हैं तो
- 17:39तुम्हारी फोटो खींचने के उठाते होंगे।
- 17:45अगले प्रश्न पे चलें कृष्ण इतना पाप करते हैं, शिशु पाल का वध कर
- 17:52देते हैं ना उकसाते अर्जुन को तो 40,00,000 लोग न मरते 40,00,000
- 18:02तो मरे। बाकी उनके परिवार, उनकी
- 18:07धर्मपत्नियां, माँ बाप, बाल बच्चे कितना बात किया, कितना हाहाकार
- 18:12मचाया और ये सिर्फ कृष्ण की वजह से हुआ।
- 18:20बाबा क्या इसका दोष नहीं लगेगा? हाँ प्रश्न बड़ा प्यारा है,
- 18:28तुलसीदास ने एक शब्द लिखा है समृत को नहीं दोष को सें इसको जहन में
- 18:36रखना समृत को दोष नहीं लगता। आप इसको किसी और तरह से व्याख्या
- 18:49कर लेते हो और आपके आचार्य गलत तरीके से व्याख्या कर लेते हैं।
- 18:59समृद्ध जहाँ बैठा है वहाँ तक दोष नहीं पहुंचता वो समृद्ध जहाँ आग
- 19:07नहीं पहुंचते। न दुखी, न सूखी शांति वहाँ नहीं
- 19:14पहुंचते, समृद्ध को न ही दोष को सएँ अब इसे ऐसे समझो।
- 19:28हत्यारों को फांसी की सजा दी जज ने हत्यारे को फांसी की सजा दी।
- 19:38जज ने सब प्रमाण देख के गवाहिया देख के सब सबूत जुटाके।
- 19:47तो ज़रा सोच के बताना क्या उसने पाप किया?
- 19:56सजा तो उसी ने सुनाई ना वो चाहे तो मुक्त कर सकता था उसके हाथ में
- 20:04लेकिन हत्यारे को सजा सुनाई। सब सबूत देख के गुहार देख के तो
- 20:12क्या उसे दोष लगेगा? तुम्हारा जवाब भी होगा और सभी का
- 20:21जवाब होगा नहीं, उसे दोष नहीं लगेगा।
- 20:24बस ऐसे ही समरथ को दोष नहीं लगता। कृष्ण कहते हैं इनके कर्मों के
- 20:31कारण हे अर्जुन मैं इन्हें पहले से ही मार चुका हूँ।
- 20:35तुम उठ और श्रेय ले ले, इन्हें मार दे।
- 20:42कृष्ण ने कहा मारे कृष्ण ने सिर्फ जजमेंट।
- 20:49जज की तरह लिखा, भाग्य निर्धारण किया उसके कर्मों के आधार पर
- 20:57समृद्ध को नहीं दोष को सुनी। समृद्ध का मतलब न्यायाधीश
- 21:03न्यायकारी उसको दोष नहीं लगता। किसी जज को कभी दोष नहीं लगा अगर
- 21:12सबूतों के आधार पर सही उसने फैसला दिया अगर रिश्वत का कि फैसला दिया
- 21:19तो बिलकुल दोष लगेगा। अगर बिक गया है न्यायाधीश।
- 21:25तो कई बार जाते हैं कुर्सियों के लिए राज्यसभा की कुर्सियों के लिए
- 21:30कई बार भी जाते हैं। उन्हें दोष लगता है और तुम देखना
- 21:39उन लोगों के हसर मैं आज बोल रहा हूँ शायद रहूं न रहूं।
- 21:45लेकिन तुम उन लोगों के असर देखना जिन्होंने पैसे खा के न्याय किया,
- 21:55पैसा तो यहीं रह जाएगा, कुर्सी भी यहीं रह जाएगी।
- 22:02लेकिन फल उन्हें भुगतना पड़ेगा, यही मुसीबत है करम जंजाल की
- 22:13तुम्हारे हाथ में अगर पावर दी है शक्ति दी है पर मत मन तो उसकी
- 22:18अमानत समझ के जो काम करेगा वह खुशहाल रहेगा।
- 22:25जो खुद की कमाई समझ के काम करेगा वह बदहाल रहेगा।
- 22:29आज नहीं कल बस प्रोसेसिंग में देरी लगेंगी।
- 22:33सिर्फ जितनी देर बीज को वृक्ष बनने में लगती है फल लगने में।
- 22:40उतनी देरी लगेंगी, लेकिन फल आएगा जरूर।
- 22:44बीज अपना फल जरूर देता है। कर्मों का बीज ऐसा ही बीज है
- 22:51समृद्ध को नहीं तो वो सोएं। ये इस तल पे बोला गया शब्द है
- 22:57जहाँ कृष्ण कहते हैं। नैनम से धन ती शस्त्राणी नैनम
- 23:01दहती पावका माँ कोई दोष नहीं जाता जैसे जज को दोष नहीं लगता जैसे
- 23:10परीक्षा तुम्हारे पेपर्स का निरीक्षण करने वालों को दोष नहीं
- 23:16लगता। वो तुम्हें फेल कर देता है
- 23:19क्योंकि तुम फेल करने की योग्यता है।
- 23:23प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर देता है क्योंकि तुम योग्यता है
- 23:27ज़रा भी तो उसने यह कृष्ण के तल पे पहुंचे हुए लोग।
- 23:37सदा ही मुक्त रहेंगे या छूते रहेंगे उसके प्रभाव से इसलिए मैं
- 23:43तुम्हें कहता हूँ अगर बंधनों से डर गए हों तो बंधनों से दूर चले
- 23:51जाओ, बंधनों को तोड़ो मत। फिर समझ लो इस बात को बंदरों को
- 24:00तोड़ो मत। बंदरों से दूर चले जाओ क्योंकि
- 24:04बंधे हुए तुम हो नहीं तुम सोए हो, स्वप्न देख रहे हो और स्वप्न में
- 24:13जो घटित होता है वो सच में घटित नहीं होता।
- 24:18तो उसका एक ही उपचार है, आँखें खोल लो, जाग जाओ, दूसरा कोई उपचार
- 24:23नहीं बंधे हुए तुम नहीं हो दूर हट जाओ जाग जाओ, आँखें खोल लो।
- 24:38घूँघट के पट उठा दो सोये मत रहो, जाग जाओ, सभी पाप नष्ट हो जाएंगे।
- 24:56घूंघट के पटखोल रे तोहे पिया मिलेंगे।
- 25:11घूंघट के फट खोले तो है यहाँ मिलेंगे गट गट मैं तेरे।
- 25:30राम बसत है, घट घट मैं तेरे राम बसत है कटुक वचन मत बोल र।
- 25:51तोहे पिया मिलेंगे कटुक वचन मत बोलर तोहे पिया मिलेंगे।
- 26:07गुट के पटखोल रे। संतोष प्रसाद आपके कहने के अनुसार
- 26:19अगर सभी व्यक्ति मस्त होना शुरू हो जाए।
- 26:26तो काम कौन करेगा? बुद्ध की तरह मांगना शुरू कर दे
- 26:30कपिल वस्तु को छोड़कर तो संसार चलेगा, क्या देगा?
- 26:35कौन सभी मगते बन जाए और कोई काम न करे?
- 26:51तो क्या होगा? संसार में कैसे तरक्की करेगा
- 26:54संसार? संतोष कुमार ने संतोष खो दिया।
- 27:06बस यही दिक्कत आती है बुद्धि से समझने में।
- 27:13मेरी एक बात का जवाब तो जब आप शांत होते हो, परम शांत तो जो भी
- 27:26आपका दायित्व है दुकानदारी का है, ऑफिस का है।
- 27:33क्लेरिकल जॉब है, मैनेजर शुभ है। ये दुकानदारी है ज्यादा बखूबी तब
- 27:44उस अवस्था में काम कर पाते हो या जब क्रोध अवस्था में होते हो,
- 27:51चिड़चिड़े होते हो। दुखी हो तो भीतर से तो ज्यादा
- 27:57बढ़िया ढंग से तुम तब काम कर पाते हो या शांति के व्यवस्था में
- 28:07तुम्हारा मेंटल बैलेंस खराब कर दिया क्रोध ने।
- 28:12तुम जो काम करोगे, वह तब बढ़िया करोगे या तुम्हारा मेन्टल बैलेंस
- 28:19शांत है कोई दुविधा नहीं, कोई तरंग हिलती नहीं है, तुम तब
- 28:25बढ़िया ढंग से करोगे ये बताओ मुझे।
- 28:32अनिश्चित तुम्हारा जवाब होगा। यह सभी का जवाब है कि जब मन शांत
- 28:37होगा तो पूरी निपुणता से कम होगा। पूरी शक्ति से काम होगा, पूरी
- 28:45इन्वॉल्वमेंट से काम होगा और तुम उस काम का मज़ा उठाओगे।
- 28:52मन में क्रोध होगा। घर से लडकियां कोई चिंता से तनाव
- 28:58से ग्रसित हो। तब तुम काम करने की क्षमता खो
- 29:05दोगे, घटिया से घटिया काम करोगे, उस वक्त ग्राहक आएगा, चिड़चिड़े
- 29:14शबाब से बोलोगे, उसको गाली निकाल। दोगे?
- 29:18ऑफिस में तुम्हारे पास आएगा घर से लड़के आये हो गुस्सा उस पे
- 29:23निकालोगे अक्सर ये टीचर लोग बच्चों पे गुस्सा निकाल देते हैं,
- 29:33बुरा काम करते हैं, उनके बच्चे टीचर निकाल देते हैं बच्चों पर।
- 29:45तुम गलत समझ गए, मस्त होने का मतलब परम खुशी तुम्हारा रोम रोम
- 29:52तुम्हारा एक न्यूरॉन परम खुशी से भर जाएगा, शांत हो जाएगा, रिलैक्स
- 29:59हो जाएगा, तो तुम में काम करने की क्षमता ज्यादा हो जाएगी।
- 30:04बढ़िया ढंग से काम कर पाओगे और ज्यादा कर पाओगे और तुम्हारा काम
- 30:09सिर्फ उसी वक्त ही पूजा बनता है जब तुम पूरी शक्ति से पूरी
- 30:17इनवॉल्वमेंट से कोई काम करते हो तो काम पूजा हो जाता है।
- 30:23और जब मरे खरे से घर से लड़ाई करती आये सो बोझ हो दिमाग़ पर मन
- 30:34चिढ़ चिढ़ा है तो ग्राहक के भी गल पड़ोगे लेना लो नहीं जाओ तो फिर
- 30:42क्यों आएगा आपके पास? सुक्खी वाले कहते हैं, आप भी तो
- 30:54ऐसे ही करते हो, आप कहते हो सुनना सुनो, नहीं मत सुनो तो मैंने कौन
- 31:00सा ग्राहक बनाने भाई मैं कोई व्यापार थोड़ी कर सकता हूँ भगवान
- 31:07के नाम का? व्यापार नहीं हुआ करता।
- 31:13मैं कोई महंगा कवि थोड़ी हूँ जो श्री राम कथा का प्रवचन का महंगा
- 31:23पैसा लूँ वो तो मैं हूँ ना। मैं सिर्फ संपूर्ण प्रज्ञा से
- 31:33संपूर्ण अनुभव को बांट सकता हूँ। बस आपसे कुछ नहीं मांगता हूँ।
- 31:40कारोबार नहीं है, मेरा धंधा नहीं है अगर सभी शांत हो गए।
- 31:51संतोष प्रसाद दुनिया में क्रांति आ जाएगी।
- 31:58फिर कोई देश परमाणु बल के ऊपर गौरवान्वित नहीं होगा।
- 32:05किसी को विद्ववन से करने में फखर महसूस नहीं करेगा, उसकी छाती
- 32:10चौड़ी नहीं होगी। करोड़ों आदमियों का वध करके उसकी
- 32:15छाती चौड़ी नहीं होगी बल्कि वो रोएगा।
- 32:20काश ऐसा दिन आज आए जो तुमने कहा। तुम्हारे सोचने के ढंग उलटे पता
- 32:31नहीं कहाँ से ऐसे ढंग लेकर आये हो, कैसे तुम्हारी सड़ी हुई
- 32:34खोपड़ी में ऐसे प्रश्न आ जाते हैं और तुम सभी खुश रहना चाहते हो
- 32:40देखो। और प्रश्न करते हो, अगर सभी सुखी
- 32:44हो गए, आनंद में आ गए तो क्या सभी मांगने लग जाएंगे?
- 32:50अरे मूर्ख सभी देने लग जाएंगे परमात्मा परम आनंद है, दाता दे
- 32:55लंदा थकपा जुगा जुगन्तर खाई खा ये बांटता ही रहता है।
- 33:01जो परम आनंद में होता है, परम कुमारी में होता है, परम खुशी में
- 33:06होता है, वैचीन नहीं सकता है, सिर्फ बांट ही सकता है, जो दुखी
- 33:11होता है, वैचीनता है, तुम्हारे सारे साहूकार धनपति दुखी हैं।
- 33:17तुम्हें पता भी नहीं है, उन्हें भी पता नहीं है।
- 33:21इसलिए तुम्हारा धन छीने चले जाते हैं।
- 33:24तुम्हारे सारे राजनीतिज्ञ दुखी हैं, इसलिए तुमसे तुम्हारी
- 33:33स्वतंत्रता छीने चले जाते हैं नहीं।
- 33:38ये दुखी लोगों का काम है छीनना सुखी लोगों का काम है, बाँटना इस
- 33:47पर भाषा को लिख लेना तुम भी देखोगे जब तुम प्रसन्न होते हो तो
- 33:52प्रसाद बाँटते हो बाँटते हो। जब तुम दुखी होते हो तो छीनते हो
- 34:03जो छीनता है वह कितना भी अमीर हो, लेकिन दिल से द्रिद्र है दिल भरा
- 34:13नहीं अभी हो सका। काश ऐसा देन आ जाएगा ये धरती
- 34:25खुशहालों से भर जाए मस्तों की धरती हो जितना काम आज तुम करते
- 34:32हो। उससे चार गुना काम करेंगे और मज़े
- 34:36से करेंगे। हँसते खेलते करेंगे, हँसी बो खेली
- 34:41बो धारी बो ध्यान गाई बो खाई बो धारी बो ध्यान।
- 34:52संतों का निष्कर्ष है जितना व्यक्ति सुखी होता है, छोड़कर भाग
- 35:01नहीं जाता। दुखी व्यक्ति छोड़कर भागते हैं
- 35:03ध्यान रखना। सुखी व्यक्ति तो वहाँ पालथी मारकर
- 35:07बैठ जाता है। तुम दुखी होते हो तो जंगलों की
- 35:16सोचती है, पर्वतों की सोचती है क्योंकि दुखी हो शायद वहाँ सुख
- 35:21हो, झल्ला के हो पत्नी की बातों से, बच्चों की चेंव में से शोर
- 35:26शराबे से तो छोड़ के भागना चाहते हो।
- 35:31ये सुखी लोगों का काम नहीं है। सुखी लोगों का काम है बैठना शांति
- 35:37से और जो बैठता है वो दिखाई पड़ेगा एक स्थान पे वह परम खुशी
- 35:42है। एक और बात तुम्हें बताता हूँ जो
- 35:50पालथी मार के बैठ गया वो भी काम तो करेगा।
- 35:56काम तो मैं भी करता हूँ तुम्हें पता नहीं है, बस बेल्ट बनाता हूँ
- 36:06सामान मंगवाता हूँ, ग्राहकों से बातचीत करता हूँ, बेटे के साथ
- 36:12व्यापार में हाथ बँटाता हूँ। बही खाते का काम करता हूँ, प्रवचन
- 36:17करता हूँ, तुमसे भी बातचीत करता हूँ, तुम्हें भी सुझाव देता हूँ
- 36:22यह काम नहीं है, काम है लेकिन डॉक्टर कन्सल्टेशन फीस ले लेता है
- 36:29मैं वो आपसे नहीं मानता। बस यही फर्क है संत में और डॉक्टर
- 36:34में। अगर डॉक्टर भी कंसल्टेशन फ्री कर
- 36:39दे तो वह भी संत है। जीस दिन दुनिया इस महाने पे पहुँच
- 36:52गई कि प्रत्येक व्यक्ति परम खुशहाली से ग्रस्त हो गया उस दिन
- 36:58दुनिया। को स्वर्ग में ढूंढने की आवश्यकता
- 37:01नहीं। जन्नत यहीं हो जाएगी।
- 37:10जहाँ ऐसा व्यक्ति होता है वहीं जन्नत होती है, उसके चरनार
- 37:15बिंदुओं में जन्नत होती है। जहाँ ऐसा व्यक्ति बैठा है जो परम
- 37:21खुशहार हो गया, तुम तो हो नहीं सकते तो ऐसी बातें बनाते हो, ये
- 37:27तुम्हारे ना होने का प्रमाण है जो तुमने प्रश्न पूछा और तुम्हें पता
- 37:31भी नहीं तुम्हारा अहंकार बहाने ढूंढता है।
- 37:39लेकिन गलत पंगा ले लिया। संतोष याकि टोपी वाले महाराज नहीं
- 37:46हैं, जो रावण से बात करेंगे, मैं सीधा तुमसे बात करता हूँ।
- 37:55तुम जब शांत मर हलो में कोई काम करोगे, तुम देखना तुम में काम
- 38:03करने की निपुणता आ जाएगी, प्रवीणवत्ता आ जाएगी और जब तुम
- 38:09क्रोध की अवस्था में होगे, पहली बात तो काम करने का मन ही नहीं
- 38:12करेगा। और करोगे तो जलाये जलाये से और वो
- 38:17काम क्या नहीं तो राँद काट लोगे तुम किसी तरह निपटाओगे वो काम
- 38:28नहीं होगा संत का काम पूजा होती है।
- 38:33तुम क्या कहते हो? कबीर छोड़ के बाद रोज़ कबीर के
- 38:41दोहे गाते हो रोज़ कबीर के भजन गाते हो कबीर छोड़ के भाग्य जा।
- 38:53बराबर काम करते हैं, चदरिया बनते हैं, खेस बोलते हैं और मगन हुए
- 39:00हुए गीत गाते हैं, भजन गाते हैं, परमात्मा का शमरण भी करते हैं,
- 39:06काम भी करते हैं, क्या दिक्कत है? कोई दिक्कत नहीं।
- 39:13काम करते करते बजन गुनगुनाना दिक्कत क्या है?
- 39:17काम करने का कुशल्य बढ़ जाता है, यही तो तुम्हें पता नहीं क्योंकि
- 39:24ये अवस्था तुम पे आई नहीं है तुम्हारी खूब बड़ी सोचती है।
- 39:29भूल जरूर बातें क्योंकि खोपड़ी अहंकार मरने से डरता है।
- 39:36नए नए तर्क ढूंढता है अगर सभी फिर हो गए मांगने लग गए।
- 39:42बुद्ध भी ऐसे नहीं मांगने लगे। कपिल वस्तु का सिंहासन छोड़ के आए
- 39:47हैं। कोई कमी नहीं है।
- 39:49इसके पास या कोई भिखारी या मगता नहीं है।
- 39:54यह आज भी राज़ इसका है जब चाहे कपल वस्तु का राज़ संभाल सकता है।
- 40:02आफ्टर एनलाइटनमेंट जब घर गए बुथ तो उसके पिता ने कहा, आ गई धारण
- 40:10ठिकाने, मुझे पता था तुम आओगे एस ओह आराम सुस्वादू पदार्थों को
- 40:22खाने वाला कितने दिन टकेगा? हमारे पंजाबी में कहावत है मुड़
- 40:32कुड़ खोती बोल उठू आ गए ना फिर? लेकिन तुम लोग बुद्ध को समझने में
- 40:42भी गलती कर दोगे उसके मुखार बिंद की।
- 40:48शीतलता तुम न देख पाओगे जब मुखार बिंद की शीतलता ही तुम्हें ना
- 40:58दिखेगी तो भीतर का आनंद की शीतलता तुम्हें क्या खा के दिखेगी?
- 41:03क्योंकि भीतर जाना तो तुमने सीखा ही नहीं अब तक?
- 41:11कबीर काम करते हैं, चरहरिया बनते हैं और भजन गाते हैं, भगवान का
- 41:15सिमरन करते हैं, बाग नहीं जाते, कहाँ मांगते हैं बताओ वो तो जो
- 41:22आता है उसको खिला के भेजते हैं भाई भोजन करके जाना।
- 41:30प्रभु प्रसाद ज्ञान भी बांटते हैं और जाते हुए व्यक्ति को यह भी
- 41:39कहते हैं कि भाई भूखे मत जाना बहुत देर होगी तो मैं बैठूंगा।
- 41:43लोई ऐसा कर इनके लिए खाना बना। और इतने प्रेम से कहते हैं कि
- 41:53व्यक्ति इंकार कर ही नहीं सकता, तुम तो बड़ी फॉर्मैलटी कर देते
- 41:59हो, तुम तो दांत पाड़ के दिखा देते हो।
- 42:02हाँ हाँ हाँ फिर चाय चलेगी के ठंडा।
- 42:07हालांकि तुम्हारे मन में कुछ नहीं है पिलाने का ये भाग जाए तो अच्छा
- 42:11नहीं आता तो और अच्छा, लेकिन फिर भी तुम पूछते हो फॉरमैलिटीस ये
- 42:17फॉर्मैलटी नाम की चीज़ तुम्हें आनंद से दूर कर देती?
- 42:24इस फॉर्मलटी के कारण तुम सुख ही नहीं हो पाते।
- 42:32नानक ने काम करना छोड़ दिया। जैसे कबीर ज्ञान भी बांटते हैं और
- 42:40काम भी करते हैं घर का। वैसे नानक खेती भी करते हैं।
- 42:46भूल मत जाना। नानक खेती करते हैं लेकिन उनके
- 42:54उपदेशों में तो यही है, कृत कर, वंड छक।
- 43:04किर तो साथ में रखते हैं, वो बात करो और जो उपलब्ध हो उसको बांट के
- 43:14छको नाम जबो वो जो सारी इस रचना में फैला हुआ है।
- 43:21ध्यान उसकी तरफ रहे। आनंद में झूमे, झूमे सभी काम करो
- 43:29तो ज्यादा बढ़िया क्वालिटी का होगा खिजे खिजे से मरे मरे से काम
- 43:35करोगे वह का काम खाक होगा वह विध्वंस।
- 43:41जीतने भी ये नेता हैं। ये रचनात्मक काम कभी नहीं करते।
- 43:46विदवन शात्मक काम करते हैं क्योंकि ये खिच्चे खिच्चे से रहते
- 43:50हैं, न नानक छोड़ते हैं, न काम मिरा छोड़ती है, नाचती है, गाती
- 44:03है, काम भी करती है घर में जा के। तुम क्या समझते हो?
- 44:08आवारा करते हैं ये लोग ये उपदेश भी देते हैं।
- 44:12मक्का मदीना भी चले जाते हैं, नानक रदास काम नहीं करते हैं,
- 44:22बिल्कुल करते हैं, भजन भी गुनगुनाते हैं।
- 44:26काम भी करते हैं। दिक्कत कहाँ है?
- 44:31बताओ तो कहाँ? मांग के खाया रायदास ने कहाँ कबीर
- 44:36और नानक ने मांग के खाया, तुम एक बुद्ध की बात कर लेते हो।
- 44:41बुद्ध ने भी कहाँ मांग के खाया जितना छोड़ के आए थे?
- 44:46उसकी 100 पुश्तें खा सकती थी लेकिन वो तो किसी और खोज में चल
- 44:53पड़े और सभी भागों को त्याग दिया। उसका मांगना तुम्हें खटकता है।
- 45:07उसके चार भूलके तुम्हें खटकते हैं।
- 45:11जो अरबों, अरबों की ज्यादा छोड़ के आए उसके चार भूलके तुम्हें
- 45:17खटकते हैं। किसने काम नहीं किया बताओ?
- 45:23और ये ज्ञान बांटना भी तो काम है। तुम्हारे टीचर क्या करते हैं?
- 45:28बताओ तुम्हारे टीचर सूचनाएं ही तो बांटते हैं ये क्या करते हैं सर
- 45:37लोग? ये टीचर्स क्या करते हैं, सूचनाएं
- 45:41बांटते हैं। नानक ज्ञान बांटते हैं, सूचनाएं
- 45:48संसार से संबंधित होती हैं, ज्ञान परमात्मा से संबंधित होता है,
- 45:57आराम से नहीं बैठे हैं, काम करते हैं।
- 46:03कौन है जो खाली बैठा है? बताओ कोई भजन का रहा है, वो भी
- 46:10आपको आनंद दे रहा है। एक भी आदमी दिखा दो जो खाली बैठा
- 46:17हूँ। शंकर जैसे लोग ऐसे तल पर पहुँच
- 46:27गए। जीस तल पर जाकर जो फरियाद कर
- 46:31देंगे वो विराट से ततः क्षण पूरी हो जाएगी छोटी सी कहानी शंकर की।
- 46:40मांगने के ऊपर बात आ गई। ऐसे लोग भी मांगने चल पड़ते हैं
- 46:47और तुम उन्हें बिखारी समझ लेते हो बिखारी नहीं है।
- 46:50वो सम्राटों के सम्राट हैं, शहंशाहों के शहंशाह हैं।
- 47:07उनका यह संकल्प था कि 1 दिन में 24 घंटों में एक बार एक घर से
- 47:13मांगेंगे शंकर, कहा शंकराचार्य 24 घंटे में एक बार खाएंगे, एक बार
- 47:22मांगेंगे, एक घर से मांगेंगे। अगर इंकार हो गया तो फिर नहीं
- 47:27जाएंगे फिर उपवास फागा चलेगा। 1 दिन ऐसा भी आया जीस घर के आगे
- 47:44अलख जगाई भी शाम दे। वह एक विधवा औरत का घर था, उसका
- 47:53पति जा चुका था। संसार छोड़कर अपने बच्चों का किसी
- 48:01तरह इधर उधर से इकट्ठा करके पाल लेती थी।
- 48:04बेचारे थोड़ा बहुत काम कार घरों में कर देती थी।
- 48:10उसी के उसके बाल बच्चों का पालन पोषण होता था।
- 48:17शंकर ने आके अलग जगा दी। वो स्त्री तो घबराई शंकर आई हैं
- 48:28पता था। किसी और घर में जाएंगे नहीं, आज
- 48:32तो बुखार रहना पड़ेगा, हमारे पास तो कुछ है नहीं कोई धरती उस दिन
- 48:36उसके पास भी कोई काम नहीं, कोई पैसा नहीं, कोई खाने को सामान
- 48:42नहीं। प्रकृति ने चारों तरफ से ऐसा बना
- 48:49दिया। घबराई भीतर से कमपने लगी, इधर उधर
- 48:57देखा रोगियों का कटोर दान देखा कुछ भी नहीं।
- 49:06सब खूंजे आले। खंगाल दिये।
- 49:10एक छोटा सा आंवला मिला आंवला हरा फल कहीं रह गया होगा वहाँ?
- 49:20उसने कहा अब संत आई है, खली मोड़ना तो बहुत मुश्किल है।
- 49:25चलो अब है ही ये। तो उसने वह फल उठाया, जाके प्रणाम
- 49:35किया, चरण स्पर्श किए और वह आंवला उसके भिक्षा पात्र में डाल दिया।
- 49:45तब तक शंकर सारी बात स्थिति समझ चूके थे।
- 49:51शंकर समझ चूके थे कि इसके पास कुछ नहीं है।
- 49:54विधवा होता है बच्चों का बड़ी मुश्किल से घरों के काम कर करके
- 49:59अपने बच्चों का पालन करती है। किस तरह 2 जून की रोटी?
- 50:04कभी मिलती है कभी नहीं मिलती ओह शंकर, जो तुम्हें भिखारी लगेंगे,
- 50:16ओह बुध जो तुम्हें भिखारी लगेंगे लेकिन आज कपिलवस्तु का राज़ आज भी
- 50:20उनका है, अगर चले गए तो लेकिन छोड़ के आए हैं खुद।
- 50:31शंकर उस स्थिति में पहुँच गए हैं जहाँ कुछ भी कहे प्रत्यक्ष क्षण
- 50:40विराट उसकी बात को मानता है। अब एक बात ध्यान में रख लेना
- 50:46जिसकी वासनाएँ खो गई हैं। जिसका अभिमान नष्ट हो गया है,
- 50:55जिसकी चपकाहटियाँ मिट गई हैं, जो अपने उस समर्थ भाव में चला गया है
- 51:04जहाँ जाकर वह सर्वसमर्थ हो जाता है।
- 51:09मेरे बाहर से तुम्हें मगता लगेगा, लेकिन है तो वह शहंशाह शहंशाहों
- 51:15का शहंशाह, सारी स्थिति को भांपा उसने माँ लक्ष्मी।
- 51:27का आवानन किया, माँ लक्ष्मी प्रकट हुई हाथ जोड़े आद्या करें प्रभु।
- 51:47शंकर बोले हे मार्ते यह विधवा स्त्री बड़ी गरीब है।
- 51:56कंगाली से जूझ रही है इसके घर वर्ष स्वर्ण वर्षा कर।
- 52:08और तीन प्रहर वर्ष हम देखे कणक धारा वो कणक धारा स्तोत्र वहीं पर
- 52:21गया। श्रुति की जब उसने महालक्ष्मी की
- 52:29शंकर ने वह कनक धारा सूत्र के नाम से आज भी प्रसिद्ध है।
- 52:36हम हर है पुलक का भविष्य नाम आश्रण।
- 52:43बिंगने व मूकला भरणम तमालम अंगीकृता खेल विभूत पांग लीला।
- 53:00मंगलदासुमम मंगलदेव ताया। मुख।
- 53:12थामहूर बिदती बदने मोरारे। प्रे मत्र पा प्रण हेतानि।
- 53:21गता गतान माला दृशो मधु करिवमहोत्पलेय साम्य
- 53:31श्रीअम्दिशतुसागर सम्भया। माँ लक्ष्मी की प्रार्थना का
- 53:42आव्हन किया माँ लक्ष्मी प्रकट हुई माते तीन प्रहर वर्ष।
- 53:57स्वर्ण की वर्षा कर कण क धारा कण के सोने को भी कहते हैं।
- 54:07तो माँ लक्ष्मी ने कहा जैसी आज्ञा प्रभु और बरसी खूब बरसी सारा घर।
- 54:17भर गया। सोने से बैठने को भी जगह न बजे छत
- 54:22भी भर गई। पहाड़ बन गया इतना बरसा निरंतर
- 54:26बरसा, उसी से ही कनक धरा स्त्र का प्रभाव इतना बढ़ा।
- 54:35ये शंकराचार्य ने उस वक्त गुनगुनाया।
- 54:42माँ देवी का आह्वान करते वक्त आज भी इसको गुनगुनाने से दृढ़ता मिट
- 54:47जाती है। वो संत गरीब ब्राह्मणी, विधवा,
- 54:58ब्राह्मणी के घर से मांगने जाता है।
- 55:06तुमने प्रश्न गलत पूछ लिया, बुद्धि के सतर्क पर अगर होंगे तो
- 55:11ऐसे ही प्रश्न उठेंगे इसके तल से नीचे उतरो।
- 55:20असत्य से सत्य की ओर निकलो, अंधकार से प्रकाश की ओर जाओ।
- 55:25तनसो मा ज्योतिर्गम है। असतो मा सदग में असत्य से सत्य की
- 55:38ओर। तुम अभी तक असत्य में लिप्त हो और
- 55:45असत्य में लिप्त हुआ व्यक्ति सत्य प्रश्न नहीं पूछ सकता, उसके सभी
- 55:50प्रश्न असत्य से लोट पोट लिप्त हुए आएँगे।
- 56:02ये जो माँगने वाले तुम्हें दिखते हैं आज बेरोज़गारों की भीड़ बढ़
- 56:10गई है। फिर भी सभी बेरोज़गार मांगते हैं
- 56:17क्योंकि उसमें अहंकार टूटता है। लूटना ठीक लूट लो डाका मार लो
- 56:27मांगो मत मांगने से अहंकार जलता है ये तुम्हें शायद पता नहीं कभी
- 56:35गए हो किसी के दर पे मांगने। और देखा है अपने अंत में तुम झुक
- 56:41जाते हो, नम्रता से बात करते हो, नम्रता से बात करते हो, मांगना
- 56:49झुकाता है व्यक्ति को लेकिन ये जो मांगने वाले हैं ये भिखारी नहीं
- 56:57हैं। ये शहंशाह हैं, परम शहंशाह हैं,
- 57:01शहंशाहों के शहंशाह हैं। तुमने यह प्रश्न गलत पूछा,
- 57:12तथ्यात्मक आधार पे नहीं पूछा विराचनात्मक धार पे पूछा विचार
- 57:18तुम्हारे ऐसा कहते हैं बुद्धि तुम्हारी ये ऐसा कहते हैं।
- 57:24अगर सभी मांगने लग गए सभी मस्त हो गए, सभी आनंद में आ गए।
- 57:30सभी खुशहाल हो गए तो काम कौन करेगा?
- 57:32काम वो ही करेंगे और ज्यादा बढ़िया ढंग से करेंगे।
- 57:41जो काम चिड़चिड़ा व्यक्ति एक महीने में निपटाएगा, वह परम
- 57:49खुशहाल व्यक्ति दस्ते में निपटा देगा और ज्यादा कुशलता से
- 57:57प्रवीणता से और ज्यादा ऐक्युरेसी से।
- 58:02तुम्हें इस बात का ज्ञान नहीं है, तुमने प्रश्न तो पूछ लिया, लेकिन
- 58:08पिटोगे यह नहीं पता था मांगो मांगो उस दाता से।
- 58:21कि तुम्हें भी दांत में ये मस्ती दे दे वो मस्ती जो तुम्हारे भीतर
- 58:31खिला देगी तुम्हारा सहस्रा दल, कम्बल।
- 58:37और तुम आनंदम झूम उठोगे फिर ऐसा मत समझना कि तुम काम नहीं कर
- 58:41पाओगे, काम तो ज्यादा प्रवीणता से करोगे और ज्यादा मात्रा में करोगे
- 58:51क्या तुम्हारी बुद्धि सोचती है सिर्फ?
- 58:54यह तथ्य नहीं है, सत्य नहीं है, इसलिए गलत प्रश्न पूछ लिया।
- 59:08मैं तो कामना करता हूँ कि सारा विश्व इस प्रकाश में झूम जाए।
- 59:20आनंद की बारिश हो, उसके ऊपर खुशी की बारिश हो, उसके ऊपर प्राण उसके
- 59:29पी जाए। इस खुशी को और नाचने लग जाए तो
- 59:33काम ज्यादा प्रवीणता से कौशल्य से उखा।
- 59:39ज्यादा मात्रा में हम क्योंकि तुम में यह खुशी आई नहीं और बंदर क्या
- 59:51जानें आज का स्वाद। तुम जब तुमने चखा ही नहीं इस आनंद
- 59:59का स्वास्थ, तो प्रश्न तुम पूछ कैसे सकते हो तुम अधिकृत ही नहीं
- 1:00:06है प्रश्न पूछने का आनंद उतरे तो फिर प्रश्न पूछो लेकिन फिर।
- 1:00:14हर प्रश्न उठेगा नहीं, जिसने आनंद को पी लिया, वह तो ज्यादा बेहतर
- 1:00:22तरीके से काम करेगा और जिसने दुनिया सारी दुनिया मस्त हो गई।
- 1:00:30नाचने लगी, झूमने लगी खुशहाल हो गई कोई दिमाग पे बोझ न रहा कोई
- 1:00:35बंधन न रहा कोई दिमाग के ऊपर पाखंड धारण न किए तुमने कोई
- 1:00:40मान्यता न रही उस दिन तुम सोच भी नहीं सकते।
- 1:00:47दुनिया जितनी खुशहाल और आनंद से मग्न हो गई।
- 1:00:52उस दिन मनेगी ईद अब तो तुम आदमी आदमी के पास से कंधा मार के टकरा
- 1:00:59के चला जाता है, लेकिन उस दिन गले मिलोगे?
- 1:01:08खुशी के मौके ईद के मौके होते हैं और खुशी के मौके ईद के मौके होते
- 1:01:16हैं। फिर तुम गले रख के मिलते हो, खुशी
- 1:01:19में ही मिल सकते हो। फरियाद करो ईश्वर बरसे आनंद की
- 1:01:37बारिश तुम्हारे पे हो मंगल कामना करो प्रत्येक प्राणी पे आनंद की
- 1:01:46बारिश हो तो तुम पाओगे। आज संसार खुशहाल हुआ सोना बरसने
- 1:01:56से खुशहाल नहीं होता, आनंद बरसने से खुशहाल होता है।
- 1:02:01सोना तो बहुत बरस लिया, जिनके ऊपर सोना बरसा, उनके चेहरे को लुढ़के
- 1:02:06पड़े। कोई भीतर आनंद की खुशबू आती दिखाई
- 1:02:10नहीं पड़ती, बाहर सोने की पुशाकें पहन रखी हैं, लेकिन भीतर आनंद की
- 1:02:16कोई महक यह प्लास्टिक के फूल हैं, बस देखने में हैं।
- 1:02:24इसके पास जाओगे नशा फुटों में सुगंध नहीं आएगी।
- 1:02:28ये खोखे हैं। ये फोखे हैं बिना सुगंध का फूल
- 1:02:33फोखा ही हुआ करता है, खोखा ही हुआ करता है तो धन न बरसे, स्वर्ण न
- 1:02:42बरसे, उसके बरसने से कुछ नहीं होगा।
- 1:02:46सोना क्या करोगे? खाओगे ना भूख मटेगी ना प्यास वो
- 1:02:53जखी लेकिन आनंद ऐसा जिसके पीने से भूख नहीं लगती, प्यास नहीं लगती,
- 1:03:03तृप्त हो जाते हो। जीस घड़ी मेरी निगाहों को तेरी
- 1:03:14दीद हुई वो घड़ी मेरे लिए ऐश की तमहीद हुई।
- 1:03:23जब कभी मैंने तेरा चाँद सा मुखड़ा देखा, ईद हो या के न हो, मेरे लिए
- 1:03:33ईद हुई। ओह जलवा जो ओझल भी है सामने भी।
- 1:03:41वो जलवा चुराने को जी चाहता है निगाहें मिलाने को जी चाहता है
- 1:03:52दिलों जहाँ लुटाने को जी चाहता है, आके न जाने को जी चाहता है।
- 1:04:03अगर वो वर्ष जाए तो ऐसा ही कुछ होगा।
- 1:04:09ऐसा आनंद की बहार आएगी, काम तो हमारे लिए पूजा हो जाएगा।
- 1:04:16है काम तुम्हारे लिए काम नहीं रहेगा काम तुम्हारे लिए पूजा होगा
- 1:04:27वर्क इस वर्ष पर सही मायने में तुम तभी पूजा कर पाओगे जब
- 1:04:33तुम्हारा काम पूजा हो जाए। धन्यवाद।
- 1:04:51रजाई दे ओढ़न। रजैया दे ओढण नाग निवास सा दे रे
- 1:05:11ना मित्र प्यार नू। मित्र पे यार रे नौं खाल मुरी दा
- 1:05:53दिखे। मित्र प्यार नो मित्र, प्यार नो
- 1:06:08हो, मित्र प्यार, नो मित्र प्यार। मित्र प्यार नु मित्र प्यार नु
- 1:06:33हाल। मुरीद दाँ देखे न दर प्या रे न
- 1:06:52यार। सथरचंगी यारणदेसन सथरचंगी पठ।
- 1:07:11खेड़ियाँ दे रैणा और तू खेड़ियाँ दे रै।
- 1:07:28हाल मुरी दां दे कण मित्र प्यारे न सोल सुरा।
- 1:07:48खंजर, प्याला, सोल, सुराही, खंजर प्याला विंग।
- 1:08:02कसांइयां दे सैणना मित्र प्यार रे न हाल मुरी दा दे कैण।