Latest / Baba ji Vijay Vats / 22 Mar 26 - विक्रमी संवत 2083 की ज्योतिषीय भविष्यवाणियाँ !! राजा विहीन "रौद्र" वर्ष का आगमन !!
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- 0:15बाबा जी पण? शत्रुघ्न अवस्थी बाबा जी नव सम्मत
- 0:28की हार्दिक बधाई। कल्याण वस्तुभावा पुत्र आज विक्र
- 0:43में सम्मत 2083 का आगाज हो रहा है।
- 0:57आप जरूर जाना चाहेंगे कि यह वर्ष कैसा है?
- 1:15इस वर्ष इस संवृतसर का नाम रौद्र है।
- 1:20रौद्र रौद्र का मतलब होता है भयानक कार्य यानी यह है वर्ष।
- 1:38पांच तारीख की मई की पांच तारीख अंग्रेजी के हिसाब से तक बिल्कुल
- 1:48भी शुभ नहीं है। एक बात तुम्हें और बता दो
- 2:01पंचांगों में आपने देखा होगा एक तरफ लिखा होता है राजा दूसरी तरफ
- 2:12लिखा होता है मंत्र। और आपको जानकर हैरानी होगी कि आप
- 2:20सभी पंचांगों में राजा बृहस्पति पाओगे।
- 2:25गुरु और मंत्री मंगल पाओगे। मंत्री तो ठीक है जब सूर्य मेघ
- 2:38राशि में प्रवेश करता है। लेकिन मुझे यह जानकर हैरानी हुई
- 2:47जब आबा ने मुझे बताया। मैं खुद नहीं कुछ बोला करता हूँ।
- 2:52ये सारे शब्द उस अपार विद्वान से आया करते हैं जीसको मैं शंकर कहता
- 3:01हूँ और वह पारंगत हैं इस विद्या के।
- 3:10उन्होंने बताया कि इस वर्ष का राजा कोई भी नहीं है।
- 3:19यह साल राजा विहीन साल है। राजा होता है अब जैसे 2083।
- 3:38का विक्र भी समर शुरू हुआ है, जो चित्र शुक्ल प्रतिपदा को जब शुरू
- 3:47होती है प्रतिपदा उस वक्त जो वार होता है उसको राजा कहते हैं।
- 3:58लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी मैंने पिछले वर्षों के पंचांग
- 4:06नहीं देखे लेकिन जब बाबा ने मुझे कहा कि इस सब वर्ष राजा है ही
- 4:14नहीं कोई। निरंकश रूप से राजा विहीन यह धरती
- 4:25है यानी प्रजा राजाओं का कतल करे। अपने हाथों से राजाओं से विहीन कर
- 4:44देगी। जैसे गाथा है कि परशुराम ने एक के
- 4:52सवार क्षत्रिय विहीन किए। धरती को यह कहानी है इसके
- 5:02रहस्यत्मक वर्णन कभी पूछ लिया तो मैं बताऊँगा चित्र शुक्ल प्रतिपदा
- 5:13गायब है। फिर तुम जरूर ये पूछोगे कि अगले
- 5:20दिन होगी ना ना तुझे आज है ना ये कल है प्रतिपदा ही गाय है इस साल
- 5:31का आगाज। राजा के शह से होता है और राजा
- 5:42ऐसे ही काम करेंगे। अमेरिका का राजा ट्रंप अपनी गलती
- 5:49को बचाएगा। भारत का राजा वोट मांग रहा है से
- 5:59उसने तो देश की मैनेजमेंट कभी की ही नहीं, वोट ही मांगता रहता है।
- 6:04उसे पता है के वोटों में जीतूंगा। तो राजा बनूँगा।
- 6:11और वोट मांगूंगा तो वोट मिलेंगे तो राजा होशियार है, लेकिन मूर्ख
- 6:20है। चित्र शुक्ल प्रतिपदा कक्ष है।
- 6:292083 का वर्ष आज शुरू हो गया विक्रमे संबंध और बहुत अद्भुत बात
- 6:39है कि आज प्रतिपदाक्षय है। ऐसा भी नहीं है कल सूर्य दो के
- 6:46समय। प्रतिपदा होती तो चलो हम कल के
- 6:51दिन से शुरुआत मांग लेते, लेकिन प्रतिपदा है ही नहीं।
- 6:55ना आज है ना कल है इसलिए इस साल को राजा विहीन साल कहा जाता है और
- 7:06इसका नाम है रौद्र। हस हाने हाने हाने वह जंतगानी की
- 7:24हानि हो वह धन की हानि हो। वह आपके सुविचारों की हानि हो, वह
- 7:35तरक्की की हानि हो, वह जनता की हानि हो, वह राजाओं की हानि,
- 7:46पदार्थों की हानि हो या विश्वास की हानि हो।
- 7:51यह वर्ष हानि का वर्ष है। रौद्र संवत्सर ठीक है पुत्र तुमने
- 8:08मुझे शुभकामनाएं। और मैंने भी तुम्हें कह दिया
- 8:15कल्याण हूँ अस्तुभवा तुम्हारा कल्याण हूँ।
- 8:24इस भ्रमण के सभी प्राणियों को मेरा सुभाषित कल्याण हो कल्याण
- 8:35हो। जो शुभ विचार शुभाव मैं पैदा कर
- 8:43सकता हूँ। इससे ज्यादा मैं कुछ मेरे हाथ में
- 8:45कुछ है। उस लीलाधर की कहानी है।
- 8:59उसने ही अपने सर्जनों को बनाया। हमारी तो समझ से बाहर है,
- 9:11खुशबुद्दू लोग आ जाते हैं जो कहते हैं हमें पता है तो मैं उनको कहता
- 9:18हूँ कि तुम यहाँ से चले जाओ। अगर तुम्हें पता है तो तुम इसका
- 9:25लुत्फ उठाओ। मुझे क्या बताना है?
- 9:32लेकिन ये पता कैसे हो गया? बेल लेना पाया पंडती।
- 9:41ये लिखिया वेद, पुराण, बेल, लगन पाया, काट जिया।
- 9:49किसी ने भी इसका वक्त नहीं पाया। कब शुरू हुआ?
- 9:54लेकिन विक्रमादित्य कहते हैं। हमारे शस्त्र कहते हैं कि ब्रह्मा
- 9:59जी ने सृष्टि की शुरुआत इसी दिन से की थी, अब कुछ तो मानना ही
- 10:06पड़ेगा, लेकिन जानता कुछ भी नहीं है।
- 10:10यह अकटके सत्य है। वैसे तो कर्मकांडों का कोई
- 10:25महत्त्व नहीं होता लेकिन फिर भी आपने पूछा कि बाबा घटिया स्थापन
- 10:32कब करें? पुत्र घटिया स्थापन अभी भी तो
- 10:37मुहूर्त में कर लेना। क्योंकि आज प्रतिपदा तो
- 10:45सूर्योदयव्याप्नी प्रतिपदा तो है ना तो वह कब आएगा?
- 10:53वह 12:10 से शुरू हो। के।
- 10:5612:58 पर समाप्त हो जाएगा। इस दौरान आप घट स्थापना कर सकते
- 11:03हो। ये प्रतीक से थोड़ा सा प्रतीकों
- 11:09का अर्थ समझाते है। अग्नि का जलाना दीपक का जलाना इस
- 11:22बात की अभिव्यक्ति थी। इच्छा थी कि हमारे हृदयों में यह
- 11:27प्रकाश जलता रहे। ज्ञान, ज्ञान।
- 11:36यानी आज मैं हूँ, कल नहीं रहूंगा। यह ज्ञान है और इससे बड़ा कोई
- 11:44ज्ञान नहीं होता। अगरबत्तियों का जलाना सुगंध
- 11:55पदार्थों का हवन करना इस बात की सूचना के उस स्थल पर पहुंचा हो
- 12:05जहाँ सुगंधी ही सुगंधी जहाँ दुर्गंधी है।
- 12:12दुर्गंध होती है सदा भेद में और तुम्हारा असली तत्व बैठा है अभेद
- 12:22में जहाँ जाकर सारे भेद समाप्त हो जाते हैं।
- 12:29वहाँ तुम विराजमान हो, उस तख्त पर तुम्हारा स्थान है, उस प्रज्ञा
- 12:37में तुमने सिद्ध होना है इस बात को आप हृदय में उतार लेना।
- 12:49परंतु शुभ दिन शुभ घड़ी जात पढ़ें जब ना लग्न, मुहूर्त, झूठ सब और
- 12:57बिगाड़े काम, शुभ दिन और शुभ घड़ी।
- 13:07तुम्हारी लालची, लोभी, पाखंडी, झूठे, मक्कार, जालसाज इन्हें न
- 13:16बनाएं अन्यथा उसकी सृष्टि में सब शुभ है।
- 13:27तुम तो अशुभ का निर्माण भी नहीं कर सकते।
- 13:32तुम गंगा को निर्मय तो कर ही नहीं सकते, तुम गंदे नाले का निर्मय भी
- 13:39नहीं कर सकते, तुम कुछ निर्माण कर ही नहीं सकते।
- 13:42यू कैन नॉट क्रियेट एनीथिंग? तो दीपक जलाते हैं, घट रखते हैं
- 13:57और उसमें जल भर देते हैं। इसका मतलब था कि हमारा इस शरीर
- 14:05में शीतलता रहे। पानी के समान पानी शीतल होता है।
- 14:20इस घाट में यह पानी से भरा रहे। यानी।
- 14:30इसके स्वभाव में शांति रहे, इसके स्वभाव में आनंद रहे।
- 14:39उसके ऊपर हम नारियल रख देते थे। नारियल बिल्कुल व्यक्ति की खोपड़ी
- 14:46जैसा होता है। वैसे ही उसके ऊपर की दो जात होती
- 14:54है। हमारी बालों जैसी होती है, दो
- 14:56आँखें होती है उसको फोड़ा जाता था आखिर के देन।
- 15:08मतलब ये था कि इन नौ दिनों में हमारा अहंकार ऐसे ही टूट जाए।
- 15:14हमारी खोपड़ियाँ टूट जाए लेकिन काश आज खोपड़ियाँ को बढ़ाने वाले
- 15:23लोग बहुत हैं। वो कहते हैं कल्याणकारी हो गई, ये
- 15:26कल्याणकारी हो रहा है क्या? ये आस पास जो गिर रही है
- 15:30मिज़ाइलें तुम कहते हो दीपावली पे पटाखे मत चलाओ, प्रदूषण होता है
- 15:41कैन टनों टनों टन टन टन टन टना टन।
- 15:48ये प्रदूषण नहीं होता। क्या वास्तुवरण ये किस ज़ालिम ने
- 15:56शुरुआत की यह शुरुआत की ज़ालिम ट्रंप ने नेतन्याहू ने।
- 16:07क्योंकि नेतन्याहू की अपनी जमीन नहीं है, उन्होंने छीनी है अरबों
- 16:14से और इजराइल पचासियों वर्षों से ये इंतजार कर रहा था कि अमेरिका
- 16:27की गद्दी पर कोई मूर्ख आए। और वह जैसा मैं कहूं वैसा कर दे।
- 16:39उस व्यक्ति ने इसे और भी बहुत से राष्ट्राध्यक्ष हैं।
- 16:44इसमें हमारे मोदी की भी शामिल है। एपिस्टीन कांड में उलझाया दुनिया
- 16:53की नजरों में तुल्य महत्त्व में गिर्वा वस्त्र पहनते हैं, तिलक
- 17:02लगाते हैं, कर्मकांड करते हैं। तुम कहते हो कि अपवित्र शुद्र
- 17:12व्यक्ति के मंदिर में जाने से मंदिर अपवित्र हो जाता है।
- 17:20एक हद तक यह पाठ है। शुद्र मनोवृत्तियों वाला वृत्त
- 17:27है। शूद्र जाति वाला नहीं, जाति से
- 17:32कोई शूद्र नहीं पैदा होता। जाति से सभी इंसान पैदा होते हैं
- 17:39शूद्र वह जिसके भीतर वासनाओं का बराबर न रहा।
- 17:47और वह अपनी वासनाओं को पूरा करने के लिए तुम्हारे धन से कमाया हुआ,
- 17:54तुम्हारे कर से कमाया हुआ और जहाज लेकर एपिस्टीन आइसलैंड में पहुँच
- 18:00गया तो इस व्यक्ति ने जगह जगह है। सब झगड़ों की जड़ है।
- 18:12नेतन्याहू ये बड़े चालाक व्यक्ति हैं क्योंकि ये जानते हैं कि
- 18:23हमारी कोई जमीन है। ये जमीन अरबों की है।
- 18:33आज मुझे याद आता है कि अगर परमात्मा जगोतियो का मरवा रहा था,
- 18:41हिटलर के हाथों तो उसका ये फैसला गलत नहीं था।
- 18:49उसका ये फैसला सही था। ईश्वर के फैसले कभी कभी मनुष्य को
- 18:57देरी से समझाते हैं। हमने आज समझाया ये सबसे ज्यादा
- 19:04दुष्ट कौम अगर कोई है। तो वह है यहूदी यहूदी कहता है कि
- 19:20मैं सिर्फ मैं और में परमात्मा के द्वारा उत्पन्न किया गया
- 19:28श्रेष्ठतम प्रण। इसलिए ये कभी किसी को येहूदी नहीं
- 19:34बन सकता। ये कहते हम सिर्फ येहूदियों की
- 19:37संतान येहूदी होगी धर्म परिवर्तन आप येहूदियत में नहीं कर सकता,
- 19:44तुम येहूदी बन के दिखाते हो और यही अहंकार।
- 19:54गलत है कि मैं सर्वश्रेष्ठ अहंकार सदा से ही मानता रहा है कि मैं
- 20:02सर्वश्रेष्ठ यही तो अहंकार है, जबकि दुनिया का ज़रा ज़रा
- 20:10परमात्मा से युक्त है। कौन श्रेष्ठ कौन निक्कृष्ठ ना कोई
- 20:16श्रेष्ठ ना कोई निक्कृष्ठ सभी समान है।
- 20:21सभी उसकी क्रियेशन है। उसने कुछ श्रेष्ठ नहीं बनाया।
- 20:28हाँ, उसने कुछ प्रयोजन पर जरूर बनाया।
- 20:33श्रेष्ठ या निक्कृष्ट? उसने कुछ नहीं बनाया।
- 20:36उसने प्रत्येक चीज़ परियोजन वश बनाई, उसने जहर भी बनाया, उसने मल
- 20:45भी बनाया, उसने अमृत भी बनाया। और उसने खून भी बनाया।
- 20:54उसने जीवनदायिनी शक्तियां भी बनाई और उसने मृत्युदायिनी रसायन भी
- 21:00बनाया। उसने अपनी सृष्टि में सब बनाया,
- 21:06वो तुमने आज खोज लिया या नहीं खोज लिया?
- 21:10ये बात तो मायने नहीं रखते। यह जो बोल रहा है इस में मेरा
- 21:17अपना कुछ भी नहीं जैसे ए लिखे तिस शरण ना जब वो फरमाए, देव तेपा
- 21:27जैसे उसने कहा। हूँ बहू मैं वैसा वैसा बोल रहा
- 21:31हूँ। इस 2083 विक्रमी संवत रौद्र नामक
- 21:41संवत्सर का कोई राजा नहीं है। राजा विहीन प्रजा है।
- 21:48सब कुछ श्रृंखला होगा, सब उत्पाद होगा यहाँ स्वतंत्र कोई नहीं होगा
- 21:59यहाँ स्वतंत्रता से विचरने वाले लोगों।
- 22:10और मैंने पूछा बाबा यह शुरुआत है या फल?
- 22:17बाबा कहते हैं, यह फल तो मैं समझ गया।
- 22:23लोगों ने जो कर्म किए थे उसके फल आने शुरू कर।
- 22:31एपिस्टन कांड में छोटी छोटी बच्चियों को भूनकर खा जाना
- 22:36तुम्हें दर्द नहीं आया तुम्हारे बच्चियां हैं?
- 22:44तुमने उत्पात नहीं मचाया, तुमने राजा के गले में जाकर हाथ नहीं
- 22:48डाला कि तुम उस अपने महान दुष्ट कृत्य को।
- 22:59ध्यान हट जाए वहाँ से इसलिए तुमने और बेगुना हर लाखों मार दिया है
- 23:07ईरान की जंग शुरू कर दी, जबकि तुमने 12 दिन पहले ही खत्म कर दी
- 23:10थी। तो अचानक रावण को याद आता है कि
- 23:20हाँ याद आया, याद आया मारी। इसी तरह ट्रंप महक याद आया कि हाँ
- 23:31याद आया कैसे छुपाया जाए ईरान? मेरी बात समझ लो सुन लो रिकॉर्ड
- 23:48रद्द है, जब मन करे तब सुन लेना इंसान कौन है?
- 24:08इंसान वो है जो भाईचारा मेरे है हे इस सब सुखी में कोई ना हो
- 24:18दुकान सर्वे भवन्तु सुखी ना सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि
- 24:25प्रशिक्षण। माँ आकर्षित तो के भाग पर कोई ना
- 24:32हो दुख सब हों निरोग भगवान दान दानी के भंडारे सब भद्रभाव देखें
- 24:42सन् मार्ग के पथिक हों। दुखिया न कोई होवे सृष्टि में
- 24:47प्राणभाई ये बात सिर्फ दोहराने से लफ्जि से अलफ्जों से ये बात सिद्ध
- 24:57नहीं होती। यह एक करत्यों से सिद्ध होती है।
- 25:03तुम्हें ऐसी सोच भीतर पनपानी होगी।
- 25:07ऐसी आत्मवृत्ति तुम्हें बनानी होगी कि धरती का हर जीव सुखी रहे।
- 25:15जैन मुनि पांव भी रखता है तो देखकर रखता है और जब बूढ़ा हो
- 25:21जाता है। तो भिक्षा मांगने नहीं जाता।
- 25:26वो कहता है मेरी आँखों की दृष्टि देख नहीं रहे कहीं मेरे शरीर के
- 25:34बाहर से कोई शूद्र जीव न मर जाए। इसलिए वह अपने जवान शिष्य को कहता
- 25:42है पुत्र भिक्षा तुम ले आओ महावीर खुद नहीं जानते इतना मन के भीतर
- 25:59सभी जीवों के प्रति समान भाव है। जैसे तुम मरने से डरते हो जैसे
- 26:07तुम कटने से डरते हो, लेकिन वैसे तुम्हें खौफ नहीं आया जब तुमने
- 26:16छोटी छोटी बच्चियों को काट कर खाये।
- 26:23तो पता है 1 दिन कर्मों का फल अचेतन से चेतन में आया करता है।
- 26:31यह फिलॉसफी में बहुत बार बोल भी चुका हूँ और रिपीट भी कर चुका
- 26:36हूँ। तो जब वह सताने लगा इतने वर्ष बीत
- 26:43गए, एपिस्टीन भी मर गया तो तुम्हें कहीं चैन नहीं आया, फिर
- 27:00तुमने कहा कि हम सर्वोपरि हो जाते हैं।
- 27:05हम राजपाट वोटिंग में खड़े हो जाते हैं, राजपाट ले लेते हैं,
- 27:11राष्ट्रपति बन जाते हैं, फिर हमको कोई दंडित नहीं कर सकेगा, लेकिन
- 27:17नहीं तुम भूल जाते। आक्रोश में आई हुई जनता ये नहीं
- 27:23देखती। कि तुम्हारा 3 साल बचा कि
- 27:26तुम्हारा 3.5 बचा कि तुम्हारा दो बचा कि तुम्हारा एक बचा वो
- 27:32तुम्हें पार्ट ही देगी। इसीलिए आज शुभ दिन रौद्र संवत्सर
- 27:41के। प्रतिपदा तो नहीं है लेकिन प्रथम
- 27:45दिन उसके ऊपर रखा जाता था। नारियल नारियल को घोड़ा जाता था।
- 27:58अंतिम दिन परिणामस्वरूप जाने हमारी बुद्धि आज टूट गयी।
- 28:04तुम्हारी बुद्धि तो कभी भी नहीं टूटते।
- 28:08तुम्हारी खोपड़ी को तो तुम्हारे बच्चे तोड़ते हैं लट्ठ से आखर में
- 28:13यह भी प्रतीक था कि जिंदगी में जीते जी तो तुमने इस खोपड़ी को
- 28:21नहीं टूटने दिया, बचाए रखा लेकिन ये देख?
- 28:25तेरे मरने के बाद तेरा अपना खून ही तुझे तुम्हारी खोपड़ी को तोड़
- 28:30रहा है तुम इतने दुष्ट हो कि अपनी ज़िन्दगी में जीते जी अपने अहंकार
- 28:38की बलि दे ही नहीं सकते और इसलिए तुम दुखी हो।
- 28:46उस परम्रस को पीने के लिए उस सुख की अवस्था तक जाने के लिए खोपड़ी
- 28:54का टूटना जरूरी है, लेकिन तुम तो खोपड़ी को और ज्यादा शेरिंग करने
- 28:59में लगे हो। प्रशिक्षित करने में लगे हो।
- 29:02तुम कहते हो कि अगर आयश नहीं होगा, आयश नहीं होगा तो इस देश की
- 29:09व्यवस्था को कौन संभालेगा? मूर्ख हो जिसने बनाया वो संभाल
- 29:20लेगा। तुमने ठेका ले रखा है, तुम कहते
- 29:27हो, वे तो है नहीं और यही ही तो तुम्हारी खोपड़ी का पैगाम है, इसे
- 29:33खो जा नहीं, तुम कैसे कह सकते हो कि वो है नहीं।
- 29:39जिन खो जाते हैं ना पानी गहरे पानी बैठ बहुत गहरे जाना होता है
- 29:48और इल्यूश़न्स को तोड़ना होता है। यह खोपड़ी इल्यूश़न है इसमें जो
- 29:55हमने भर लिया है न्यूरोस में। सभी कुछ इल्ल्यूशन है, सभी कुछ
- 30:01भ्रम है, इन भ्रमों को तोड़ना होता है।
- 30:06नौ दिनों में यह 9 दिन विशेष रखे थे।
- 30:11हमने दो बार नवरात्र आती हैं, दो बार गुप्त नवरात्र आती हैं।
- 30:18लेकिन 36 दिनों के बाद भी हम इस खोपड़िया को टूटने नहीं देते
- 30:23बल्कि और भी शाइनिंग कर लेते हैं, नए नए प्रारूप हटते हैं, नए नए
- 30:29अर्थ लगा लेते हैं, जबकि उनमें से कोई भी अर्थ तुम्हारा।
- 30:36ऊपर से उतरा नहीं होता, आनंद से उतरा नहीं होता गगन मंडल से जिसने
- 30:43बनाया दो कण कण में व्याप्त उसकी दरगाह से नहीं होता तो हमारी
- 30:52खोपड़ी की उपज है। तो गटस्थापन अगर तुम संक्षिप्त
- 31:04रूप से ठीक ठीक मोटे मोटे समझो तो 12 से एक हफ्ते तक गटस्थापन कर
- 31:11लेना, जल का घड़ा रखना मतलब। हमारा ये घाट यह भी हमारा घड़ा
- 31:20है। इसमें पानी की तरह शीतलता रहे,
- 31:24कभी गर्मी न आए, यह आक्रोश से भर न जाए।
- 31:33यह क्रोधित न हो। हर हाल में शांति बनाई रखें।
- 31:41आपने देखा कि पानी कितना भी उबल जाए लेकिन फिर ठंडा होने के बाद
- 31:49वह अपनी शीतलता में पुनः वापस आ जाता है।
- 31:55इसी तरह तुम्हें क्रोध भी आएगा, लेकिन तुम अपना स्वभाव कभी खोते
- 32:02नहीं। तुम चाहो तो भी नहीं खोते पानी
- 32:06अगर चाहे कि मैं गर्म ही बना रहूँ तो यह उसकी सोच गलत है।
- 32:15जब हीटिंग व्यवस्थाएँ हटा दी जाएंगी तो पानी अपने मूल स्वरूप
- 32:20में वापस आ जायेगा। जो की ठंडक है तुमने पानी से कभी
- 32:25सीखा नहीं, जबकि पानी से सीखने वाली बहुत सी बात है।
- 32:32सबसे पहली शीतलता और दूसरा फ्लक्चुएशन फ्लेक्सिबिलिटी पानी
- 32:45अपने आप को ढाल लेता है अवस्थाओं के अनुसार।
- 32:50तुम घड़े में भर दोगे, घड़ा हो जाएगा, ग्रास में भर दोगे, गलास
- 32:54हो जाएगा, कोहली में भर दोगे, कोहली हो जाएगा, अंजलि में डाल
- 33:00दोगे तो अंजलि बन जाएगा वह बड़ा फ्लेक्सिबल होता है अगर तुम उससे
- 33:06ये सबक सीख सको पानी से। हर हाल में तुम फ्लेक्सिबल बने
- 33:11रहो तेरा पाना मीठा लागे जो तुद का है सोई पली का तू सदा सलामत
- 33:20नरम का पानी में यह कोण है? इसलिए हम जब ईश्वर का?
- 33:34प्रयोजन शुरू करते हैं। अपने अंत में जाने के लिए तो हम
- 33:39पानी को साक्षी रूप में रखते हैं। पानी का पहला कि वह शीतल होता है।
- 33:52वह अगर गर्व भी हो जाए तो भी वक्त पाकर।
- 33:57वह अपने मूल स्वरूप में वापस आ जाता है।
- 34:00जो की ठंडक होता है। दूसरा, वह बड़ा फ्लेक्सी पर है।
- 34:06जीस पात्र में डालोगे, उसी पात्र में आ जाएगा, हो जाएगा उसे कुछ भी
- 34:12बना लो, वह हर परिस्थिति में डालने को तैयार।
- 34:16ऐसा ही अगर तुम पानी से ये सबक सीख लो तो तुम ज़िन्दगी में कभी
- 34:22दुखी न होगे। पानी कभी हाहाकार करता है, पानी
- 34:27को अगर इतना ज्यादा तपा दोगे तो वह वाष्प बन जाएगा लेकिन उसका
- 34:33स्वभाव नहीं खोयेगा वो। पानी नीचे की ओर बहता है, पानी
- 34:45जहाँ से गुजरता है पहले गड्ढे को भरता है जो अपने से नीचे है।
- 34:54उनको पहले अपने जैसा बना लो, पानी जब जाता है तुमने देखा होगा।
- 35:05पानी को नहरों में छोड़ते हैं जहाँ गड्ढा होता है पानी उसके ऊपर
- 35:11से नहीं गुजरता। पानी पहले उस गड्ढे को भरता है,
- 35:17समानांतर करता है, फिर आगे गुजरता है।
- 35:22काश तुमने बाबा नानक की यह बात सुनी होती, वंड इच्छा हो?
- 35:32बस इसका यही मतलब था। तुम अडानी अंबानी की तरह लुटेरे
- 35:39मत बन जाना तुम इन एक नंबर के सेठों की तरह, लुटेरे मत बन जाना
- 35:54क्योंकि लुटेरे बन कर तुम। फिर छोटी छोटी बच्चों को काट के
- 36:01खाओगे? इसलिए मैंने कहा कि आदमी को कभी
- 36:11भी आजादी न दो और आज नहीं कल। मानव को यह पॉलिसी अख्तियार करनी
- 36:19पड़ेगी क्योंकि उसको राहत कहीं से नहीं मिलेंगे।
- 36:24बस बाबा का यह फॉर्मूला महादेव का यह फॉर्मूला शंकर का यह फॉर्मूला
- 36:32ही आपके काम आएगा। आखिर में।
- 36:36तुम लाख तरीके बना लो तुम लाख पैदा कर लो अपने तंत्रों को
- 36:49संविधानों को, लेकिन आखिर में तेरी का यही काम आएगा।
- 37:00तुम कहते हो कि स्वतंत्र जो जितना कमाए उसका हो जाएगा ना ये तरीका
- 37:08क्योंकि प्रकृति में कुछ अपाहिज भी होते हैं।
- 37:12प्रकृति में कुछ लाचार भी होते हैं।
- 37:15स्त्रियां स्वभाव से ही निर्बल होती हैं, कमजोर होते हैं।
- 37:19इसलिए किसी भी स्त्री का कद तुम पुरुष से ज्यादा नहीं पाओगे और
- 37:27अगर वो है तो वह कुछ अपवाद है। भाई बहन दोनों के कद बराबर नहीं
- 37:37होंगे। बहन का कद छोटा होगा।
- 37:45अगर बहन कद में ऊंची तो कुछ अपवाद है तो तुम्हें आखिर में।
- 37:58यह प्रक्रिया पानी की प्रक्रिया माननी पड़ेगी।
- 38:05तो मैंने कहा, शीतलता स्वभाव है उसका, ऐसे ही तुम्हारा भी स्वभाव
- 38:09शीतलता है, तुम अपने भीतर जब पाओगे, वहाँ शीतलता का रसास्वादन
- 38:16करोगे। बहुत ही ठंडक है जो तुम
- 38:22अगरबत्तियां चलाते हो। तुम जाके देखना कितनी सुगंध है वो
- 38:29जो लोग ज्यादा ध्यान की गहराइयों में चले जाते हैं।
- 38:34उन्हें अपने घर के कमरों के अंदर बहुत खुशबू नजर आती है।
- 38:40वो कहाँ से आई कहीं से नहीं आई तुम्हारे भीतर के उस क्षेत्र से
- 38:44आई जहाँ सुगंदी ही सुगंदी है, दूसरा पानी का सोफा।
- 38:57वह अपने आप को फ्लेक्सबल, जिसे पात्र में डालोगे, उसी पात्र में
- 39:03हो जाएगा, गम आए, खुशी आए, जिसने बनाई सृजना।
- 39:16उसकी इच्छा जानकर मान लें परिवार का शौक मना न फजूल था।
- 39:37बर्बादियों का शो मनाना फजूलता बर्बादियों का जश्न मनाता चला
- 39:52गया। हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला
- 39:59गया मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया पानी कितना हो जाना
- 40:11ज़िन्दगी का साथ निभाना। जो भी कुछ हो रहा है, उसकी रस्म
- 40:20में हो रहा है और हम कर भी क्या सकते हैं?
- 40:28वह जैसा बनाएं जैसे ही परिस्थितियां आ जाएं।
- 40:32उसके जो भी निकले, रिसाल्ट के परिणाम उनको तत्क क्षण स्वीकार कर
- 40:39लेना बिना विचलित हुए, बिना विचलित हुए एक शब्द मैंने कहा,
- 40:47क्योंकि तुम्हारी भीतर का वह स्वभाव विचलित नहीं होता।
- 40:52वह सिधर रहता है। अमनितुम दंभितुम, हिंसा
- 40:59शांतिराज्यमं, आचार्यो पासनम, शौचुम् स्थैरम स्थैरम सिधर रहनु
- 41:07आत्मा विनंक रहा। अपने भीतर ही केंद्रित रहना, उस
- 41:14अत्मस्थ प्रज्ञा में स्थित रहना, स्थिति परज्ञ रहना तुम हल्ला
- 41:28डुलना नहीं। तुम अपने स्वभाव में ही चले जाना।
- 41:33तुम पाओगे कि तुम्हारा स्वभाव कभी हिलता नहीं, वह सिधर रहता है
- 41:45डगमगाती है तुम्हारी बुद्धियां तुम्हारा मन विचलित होता है।
- 41:53पाप कर्मों का इफेक्ट एक्शन का रिएक्शन आता है अचेतन से चेतन में
- 42:00और तुम विचलित हो जाते हो और तुम्हें याद आता है अपने किये हुए
- 42:08कर्मों का वो कांड के हूँ। मैं लोगों के सामने घरवाली को
- 42:16छोड़कर देश सेवा की बातें करता हूँ, लेकिन सच में तो ऐसा नहीं।
- 42:23आत्मा हर पल बोलती है तुमने क्या समझा?
- 42:28यह सृजन मालिक के विहीन है। यह सृजना बस इस तर्क से काट दोगे
- 42:38के अगर सृजना को सृष्टा ने बनाया, तो सृष्टा को किसने बनाया?
- 42:43महज परमात्मा की एग्ज़िस्टन्स को तुम शब्दों से काट दोगे।
- 42:52नहीं फिर उसका क्या होगा? जिसने परमात्मा को देखा फिर उसका
- 43:02क्या होगा, जो सूरदास कहते हैं माँ छुडाए जात हो।
- 43:10निर्बल जान के मोह मैं देखता तो कुछ है नहीं, बाहें छुड़ाए जात
- 43:16हो, निर्बल जान के मोह हृदय से जो जाओ तो तो मर्द कहूँ मैं तो फिर
- 43:25क्या होगा मीरा की? वह किसकी याद में बिरहा की आग में
- 43:31तड़पती है, जलती है, वह कौन है? वह विधवा है, उसका पति युद्ध में
- 43:44मारा गया है भोजराज। वृद्ध व मीरा बिरहा के गीत गाती
- 43:54है। बहुत जराज के गम्भीर है क्योंकि
- 43:59वह तो जब छोटी बच्ची थी तभी से कृष्ण की मूर्ति को शग लेकर सोते
- 44:06थे। आज उसमें ये उमाड़ गुमराह नहीं
- 44:12है। ये तो बचपन से ही ऐसे थी।
- 44:15बचपन से ही बर्रा की मूर्ति मीरा तो पानी के स्वभाव जैसे हो जाना,
- 44:24इस बात को सर्कल में चलो। मिठत नीमी नान का गुण चंगिया तट
- 44:35नमन से चलना, नमन से चलना इसलिए हमने बुध होने धर्मों ने।
- 44:49श्रद्धा से कहा बुद्धं शरणम् गच्छा संगम शरणम् गच्छा सभी ने
- 45:02मंत्र तो तुम्हें दिया, लेकिन काश।
- 45:07तुमने उनको शब्दों में न बांधा हो, तुमने उसको जीवन में उतार
- 45:12लिया होता, तो फिर तुम देखते परिणाम यार की मर्जी के आगे यार
- 45:21कदम भर के देख। यार की मर्ज़ी के आगे यार का दम
- 45:26भर के देख अर्जे उल्फत कर चुका है यह भी उल्फत करके देख सभी धर्मों
- 45:37ने झोंकना है नमन करना। हम परमात्मा की मूर्ति के आगे नमन
- 45:45करते हैं, अभ्यास करते हैं, नमन होने का नमाज़ पढ़ते हैं, नमन
- 45:50करते हैं, अभ्यास करते हैं, उस अलह पर्वत गार का जो कण कण में
- 45:58मौजूद है। हर रंग में, हर रूप में, हर शब्द
- 46:06में वह है, उसका शकर गुजार करते हैं और उसके आगे नमन करते हैं।
- 46:21महावीर ने कहा, नम, अरिहंतरण नम। थानम नमो आर्यनम नौ व जायना नमन
- 46:33किया। उन्होंने यह नमन का एक मूल मंत्र
- 46:39हमें हमारे सनातन विद्या नमन नमस्कार।
- 46:51उसने थपेड़ों को नविष्कार किया, उसने माता को नमन किया, धरती माता
- 46:57को नमन किया, माँ गंगा को नमन किया, कावेरी को नमन किया,
- 47:02ब्रह्मपुत्र सरस्वती को नमन किया। उन्होंने नमन किया या नहीं झुके।
- 47:08जब भी उसकी याद आई तो वो झुके एक बात और भी याद रख ले जब तुम्हें
- 47:20तुम्हारा अहंकार याद आता है तो तुम अकड़ जाते हो।
- 47:25और जब तुम्हें उस विराट की याद आती है तो तुम नमन हो जाते हो।
- 47:32इसलिए पल्टू कहते हैं कि वह घड़ी और वह दन शुभ है पल्टू शुभ दिन
- 47:39शुभ घड़ी याद पड़े जब नाम। ना नमन से बनाना जब तुम झुक जाते
- 47:47हो जब उसकी याद आ जाती है फिर तुम झक जाते हो और जब तुम्हें अपनी
- 47:52याद आ जाती है क्या मैं मैं तो कलेक्टर हूँ?
- 47:56मैं तो प्राइम मिनिस्टर हूँ, मैं तो गृह मंत्री हूँ।
- 48:02खाख कर दूंगा, गृह को राख कर दूंगा, जेल में बंद कर दूंगा, यूए
- 48:09पीए लगा दूंगा एनएसए लगा दूंगा, लगा दो भाई क्या सदा के लिए
- 48:19लगाओगे? 1 दिन तो तुम भी खाक हो जाएंगे।
- 48:38हो रही बुलबुल क्यों गोल पर ये निशा?
- 48:51है खड़ा माली वो पीछे होशियार हो रही निशान?
- 49:12है खड़ा माली वो पीछे होशियार मारकर गोली गिरा ले जाएंगे।
- 49:29जब तेरी डोली निकाली जाएगी बे बे बे मुहूर्त में उठा ली जाएगी।
- 49:49कोई मुहूर्त नहीं निकलेगा, कोई लगन नहीं निकलेगा, कोई वक्त नहीं
- 49:54निकलेगा, वे मुहूर्त में उठा ली जाएगी, जब तेरी डोली निकाली जाएगी
- 50:04अगर किसी ने। सिकंदर को नहीं मारा तो क्या मौत
- 50:08ने भी नहीं मारा? सिर्फ 32 साल की उम्र में वह मर
- 50:13गया। अगर ये नहीं मारेंगे तो मौत भी
- 50:17मुझे स्पेर कर देगी। नहीं मरना 1 दिन होता है।
- 50:22तुम नाज़ायज़ ही सारी उम्र कांपते रहते हो।
- 50:24इस मृत्यु से। जो 1 दिन आनी ही होती है, ये तो
- 50:30बहाना होते हैं, बिल्कुल बहाना होते हैं, दरअसल तो उसका उसकी
- 50:39इच्छा होती है। हम न रहें।
- 50:42और उसकी इच्छा के कारण मैं 1012 मृत्यु के मुख में बचा।
- 50:46लोगों ने मुझे देखा मरते हुए और उन लोगों ने ही मुझे निकाला और
- 50:53लोग आज भी जिंदा हैं। सभी जिंदा हैं बाकी तो सब बहाना
- 51:00है। दरअसल तो यह उसकी इच्छा ही होती
- 51:08है। हम बचे रहे हैं, उसने कुछ काम
- 51:10लेने होते हैं। उसने 10 बार बचाए तो उसका कोई
- 51:15कारण था। आज समझ आया कि अध्यात्म की जो।
- 51:20मेरे भीतर खुद की जानी गई अनुभव थी, वो मैंने बांटनी थी।
- 51:26लोगों ने लोग सुने ना सुने, उनकी इच्छा है ये तुम्हारी मर्जी है
- 51:34क्योंकि तुम इंडिपेंडेन्ट हो, तुम स्वतंत्र हो।
- 51:40ए विदात तेरी दाता। यह स्वतंत्रता भी परमात्मा की दात
- 51:44है। आपको हम इसमें कोई व्यवधान नहीं
- 51:47खड़ा करता है, लेकिन मैं तुम्हें कहूंगा सूर्यकांत शर्मा जी से जय
- 51:57साहब। मैं आपसे विनती करूँगा क्योंकि
- 52:01मैं तो जानता हूँ लेकिन मेरे कहने से क्या आप ब्राह्मण मान लोगे,
- 52:07नहीं मानोगे? क्योंकि अदालत सबूत मांगती है फिर
- 52:15ये बोलेंगे। हाँ मैंने मारा था हेरेन पांड्या।
- 52:19तो ये बोले कि हाँ मैंने मारा था प्रजापति को मैंने मारा उसकी
- 52:27धर्मपत्नी को जला के मारा गौधरा कांड मैंने करवाया था ये बोलेंगे
- 52:36चाहे आपकी अदालतों ने। इन्हें क्लियर चेक दे दी हो लेकिन
- 52:42ये बोलेंगे आप थोड़ी सी अध्या तो दीजिए आपको आपकी अदालतों का आईना
- 52:53भी नजर आ जाएगा। आपकी अदालतें फैसला करती हैं, इन
- 53:09साथ में फैसले आते हैं और वो भी और उसका कोई फायदा नहीं होता है।
- 53:18रंग अलाती है। हीना पत्थर पे घिस जाने के बाद
- 53:22आदमी के ऊपर बीत जाती है। और वह भोगने के योग्य नहीं रहता।
- 53:27तब उसे पता चलता है कि ये जमीन मेरी है, अब जिसे वो कभी उपज नहीं
- 53:35ले सकेगा, हद नहीं चला सकेगा। बूढ़ा हो गया तब आपका फैसला आता
- 53:42है, न्याय तो फिर भी नहीं होता। न्याय तो तभी होता जो बिल्कुल आप
- 53:49थोड़े से वक्त में न्याय करते थे। 40 साल के बाद न्याय आया, न्याय
- 53:57नहीं होता, अन्याय होता है। फिर तो तुम ये भी ना करते, फैसला
- 54:01भी ना सुनाते तो चलता। उस न्याय का का फायदा जस्टिस डे
- 54:09लेट जस्टिस डे नाइट आप ही तो बोला करते हो, अगर ज्यादा लेट करोगे तो
- 54:19मत करना, फैसला भी इसकी आवश्यकता क्या थी?
- 54:25तो छोटी छोटी बच्चों को आज पूजा जाएगा और छोटी छोटी बच्चों को
- 54:34कितने साल पहले काट के खा लिया गया?
- 54:38तभी तो नवरात्र आए होंगे। और हमने पांव पूजे होंगे।
- 54:44हे देवी स्वरूपा प्रणमा में तो हम प्रणमा में तो।
- 55:10कमले कमलाक्ष बल्लभित्वम करुणापुर तरंग तेई अपाणु अब लोक ए मा किम
- 55:16सना नाम प्रथम पात्रम कृत्रिमम दया आया।
- 55:26तुम दया की भीख मांगते हो छोटी माताओं से और जब वह बड़ी हो जाती
- 55:32हैं, थोड़ी सी तो उसे काट के खाता स्त्रियों को नोचते हो जैसे वो
- 55:40कोई नोचने की चीजें हो। आज प्रथम जन मैं यह बोल रहा हूँ,
- 55:49रौद्र समरस है, प्रभाव तो होता है जल शीतलता का प्रतीक है, जल
- 55:59नम्रता का प्रतीक है हमेशा। निचाई की ओर जाता है।
- 56:05ऊपर तो तुम पंप लगा के भेज देते हो और सबसे बड़ी चीज़ जो मैं
- 56:12बोलना चाहता हूँ बोल भी दिया हूँ, एक अपर लिमिट तय कर लो, आज कर लो।
- 56:24आराम से प्यार से बैठकर टॉक टेबल पर बैठकर एक निश्चय सीमा तय कर
- 56:31लो। इससे ज्यादा व्यक्ति के पास नहीं
- 56:33होना चाहिए क्योंकि इससे ज्यादा जिनके पास था तुम एपिस्टीन क्या
- 56:38इस रैंड में कोई गरीब आदमी नहीं देखोगे?
- 56:43ये सभी वो थे जिनके पास अकूत धन सम्पदा थी।
- 56:48कुबेर खजाने थे। कोई गरीब व्यक्ति नहीं पाओगे, बिल
- 56:54गेट्स पाओगे वहाँ, बिल क्लिंग पाओगे यहाँ?
- 57:01ये बिल वालों को बिल में घुसने की ज़्यादा लगता है।
- 57:04क्या बिल क्लिंगन बिल गेट्स ये कुछ ज़्यादा ही पैसा है इनके पास।
- 57:20तो मैं कहता हूँ कि पहले बराबर करता है जल की तरह इस गुण को अपना
- 57:28लो फ्लेक्सी पर हो जाओ राजी हैं हम उसी में जिसमें तेरी रजा है
- 57:34अपनी तो यूँ भी वह हुआ है और यूँ भी वह हुआ है और तुम वाह वाह नहीं
- 57:39भी करोगे। तो उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा।
- 57:44वह अपनी मर्जी से चलता है। वह अपनी चाल से चलता है।
- 57:50न तुम्हारी रिश्वत दिखाता है, न तुम्हारी पूजा प्रार्थना को
- 57:53स्वीकार करता है। वह अपनी मर्जी से चलता है अगर
- 57:57तुम। उसकी सृष्टि को कहो कि सूरज मत
- 58:02निकल के चंद्रमा तू छिप जाओ नहीं छुपता तुम जो चाहें तो?
- 58:18दिन निकलता है तू जो चाहे तो रात होती है जिक्र होता है जब।
- 58:36कयामत, कहा तेरे जलओं की बात होती है तू जो चाहे तो दिन निकलता है।
- 58:57तू जो चाहें तो रात होते उसके चाहने से सब कुछ होता है,
- 59:06तुम्हारी जान से कुछ नहीं होता। तो पहले बराबर करता है समतल करता
- 59:20है पानी पानी से यह गुण सीख ले मानवता तो वह कभी दुख नहीं पाएगा,
- 59:29क्योंकि आज तुम दुखी हो तो अपनी ही मूडताओं के कारण।
- 59:37और मैं इसे अच्छी तरह से जानता हूँ क्योंकि मैं भी इसी तरह 1 दिन
- 59:43दुखित था, फिर मुझे उसके दरबार से ही सुभुधि आए।
- 59:56इसलिए बाबनाने कहते हैं नदरी कर्मी, आवय कपड़ा नदरी मोक्ष जवार
- 1:00:05उसकी इच्छा से ही मानव का जामा मिलता है जो सर्वश्रेष्ठ है।
- 1:00:09और तुम पर जिम्मेवारी है सब जीवों को बचाने की नदरी मोख अखबार और
- 1:00:15हमारी कितनी जंजीरें हैं हमारे ऊपर?
- 1:00:19उनकी कृपा के बिना इन जंजीरों को तोड़ा नहीं जा सकता तो उसने कृपा
- 1:00:24की अन्यथा मैं किस योग्य था? मैं तो खरगोश काट के आया था।
- 1:00:31जब कोई पुण्य कर्म होता है क्या? लेकिन एक इंसिडेंट जो ट्रेन
- 1:00:37इंसिडेंट हुई, उसने जीवन पत्र दिया, उसके परिणाम सब नहीं आए, सब
- 1:00:44देखा, गरीबी आई तो गरीबी देखी, भुखमरी देखी।
- 1:00:48गर्ज देखा सब देखा जवान बच्चे की मौत देखी उसकी लाश देखी भाइयों की
- 1:00:59लाश देखी भाई गाड़ी के नीचे आ गया, उसकी गर्दन उठाई।
- 1:01:08क्या कुछ नहीं देखा उसने वह दिखला दिया जिसकी मैंने तमन्ना नहीं की
- 1:01:18थी, लेकिन उसने मुझे इस योग्य पे बना दिया कि जो मैं करता हूँ।
- 1:01:31उसे चुपचाप स्वीकार करके देखता रहा।
- 1:01:36यह मेरी लीला है। मैं खेलूँगा और इसी तरह खेलूँगा
- 1:01:41और तुम किंतु परन्तु मत करना मैंने उसी दिन से किंतु परन्तु
- 1:01:49करना छोड़ दिया। और उसकी ही कृपा से उस तल पर
- 1:02:00पहुँच गया जहाँ आनंद की बरसात चौबीसों घंटे होती है।
- 1:02:08हर पल दिवाली हर पल होली मंगती है।
- 1:02:14सदा दिवाली सादकी और आठों पर आनंद आज प्रथम दिन 2083 के विक्रम में
- 1:02:24सम्मत पर पानी की तरह सबसे बड़ा आज का ये मेरा।
- 1:02:36आपको एक रिक्वेस्ट है, अगर आपके पास ज्यादा हो तो मोहम्मद की तरह
- 1:02:45सल अल्लाह हूँ अल्लाह हूँ वे सल्लम मोहम्मद की तरह।
- 1:02:52जो बच जाए वो भारत दो, इससे बड़ा गुण नहीं होता, तुम लाख गालियाँ
- 1:02:58निकाली जाओ, क्या होता है? कुछ नहीं होता लेकिन उसके असूल
- 1:03:06जिंदा है। जो बच जाए शाम को कहते हैं फातिमा
- 1:03:11से बात तो कि रात को पड़ा पड़ा ये सड़ जाएगा, अभी किसी भूखे के भूख
- 1:03:19बढ़ जाएगा। इसलिए सभी वो तीर्थंकर हों, वो
- 1:03:31गुरु हूँ। वो अवतार हो?
- 1:03:35सभी ने कहा बांट के खाओ अगर ज्यादा जोड़ा गया है तुम्हारे पास
- 1:03:42आ गया है तो ये उसकी कृपा है क्योंकि तुम साथ लेकर कुछ भी नहीं
- 1:03:47जाओगे, यहाँ बांट जाओ जीते जी बांट जाओ।
- 1:03:52मरकर तो फिर बंट ही जाएगा पीयोगी राम राम झपले अभी पीयोगी राम राम
- 1:04:04झपले अभी फिर भी तो राम राम होती है पर फर्क?
- 1:04:12अभी राम राम तुम करोगे फिर राम राम लोग करेंगे, फिर राम राम लोग
- 1:04:18कहेंगे सत्य है, सत्य है, सत्य है।
- 1:04:28धन्यवाद।