Latest / Baba ji Vijay Vats / 24 Nov 25 - Observer कौन है? साक्षी से भी आगे का सच! अध्यात्म या राजनीति? किसे चुनें? समझ नहीं आता! Baba Ji Vijay Vats Satsang
Transcript
- 0:16बाबा जी प्रणव कौशल प्रसाद त्रिवेदी, बिहार बाबा आपने कहा।
- 0:42कि मैं संकल्प करूँगा और आप जीत जाओगे।
- 0:51क्या इन शब्दों को थोड़ा और गहरे जाके व्याख्यात करने का कष्ट
- 0:58करेंगे? कोशिश करके देख लेते शांत होके
- 1:16बैठ जाइए शुरू शुरू में सिर्फ मैं ही था।
- 1:35मैं मैं और सिर्फ मैं फिर मैंने संकल्प किया।
- 1:53एको अह, मैं एक हूँ बहुत स्यान बहुत हो जाऊं और मैं बहुत हो गया
- 2:15मैंने अपने दो रूप बनाए, लेकिन मैं मैं ही रहा।
- 2:22देखिए समझ में नहीं आने वाली बात लेकिन इशारों को पकड़ सको तो शुभ
- 2:29है। मैंने संकल्प किया, मैंने संकल्प
- 2:38करके दो बनाई। वो दो थे जड़ और चेतन, लेकिन मैं
- 2:47मैं ही बना रहा। जड़ और चेतन खेल खेलने की इच्छा
- 3:01हुई। मेरी एक से अनेक हो जाऊं।
- 3:11पहले एक से दो हुआ जड़ और चेतन फिर दो से अनेक हुआ।
- 3:28उदाहरण क्या आप देखोगे अमीबा अमीबा इस एम मर्डर अमीबा में ना
- 3:42कोई नर होता है ना कोई मादा। अमीबा खुद से ही खुद को वाइफ
- 3:49किल्ड कर लेता है। ध्यान से समते जाना अमीबा खुद से
- 3:58ही खुद को वाइफ केट ट्राइफर केट मल्टी क्रिकेट कर लेता।
- 4:06और अमीबा जू का तू बना रहता है अगर वैज्ञानिक को कभी ऐसी धरती
- 4:18में जाए। जहाँ जीवन के अनुकूलत वातावरण हो
- 4:23तो वहाँ एक अमीबा को छोड़ते हैं, आप पाओगे 10,00,000 साल के बाद
- 4:30वहाँ हमारे जैसे मनुष्य होंगे वो धरती आपको मिलेंगे।
- 4:40सप्त ऋषियों से आगे जाकर ध्रुव ध्रुव के बाईं तरफ चले जाना काफी
- 4:47दूर जाकर तुम्हें भस्तियां मिलेंगी।
- 4:49वो उसमें मानव भस्तियां हैं बहुतायत में मानव भस्तियां वहाँ
- 4:56पर है। संक्षेप में आपको बताया वैज्ञानिक
- 5:08को अगर कल को ऐसा जीवन युक्त माहौल मिल जाए तो वह अमीबा को
- 5:15छोड़ देना। अमीबा खुद से ही बाइफरकेट
- 5:22मल्टीफरकेट होकर एक वक्त आएगा 10,00,000 साल बाद वहाँ मानव
- 5:31विकसित हो जाएगा बस्तियां हैं अभी भी।
- 5:38मैंने उसकी लोकेशन आपको समझाई। सप्तऋषि से ऊपर चले जाओ करीब करीब
- 5:46400 प्रकाश वर्ष दूर ध्रुवता रहा है उसके बाइन और लेफ्ट साइड।
- 5:58निकलो दूर चलो दूर चलो वहाँ पर आपको बस्तियां मिल जाएगी अब आज
- 6:06मौजूद हैं, आपने कहा बाबा मैं संकल्प करूँगा।
- 6:18और आप जीत जाओगे हाँ बिलकुल विलासक इसमें क्या शक है?
- 6:27तो आपको सारी प्रोसेसर में बायोलॉजिकल वैसे समझाये वैज्ञानिक
- 6:36ढंग से समझाये। संकल्प में बढ़ी शक्ति है और मैं
- 6:47मैं और मैं संकल्प का 100% स्वरूप हूँ।
- 6:56संकल्प को ही चेतना कहते हैं 100% चेतना होने पर तुम परमात्मा हो
- 7:05जाओगे या ऐसा समझो कि तुम परमात्मा में?
- 7:14यक सह हो जाओगे, एक मिक हो जाओगे, अनंत विराट विशाल हो जाओगे शब्दों
- 7:25से इशारा लेने की कोशिश करना शांत होके व्याचाना कुछ न करना।
- 7:34मेरे इन अलफजों को अपने भीतर हृदय से पार उतर जाने देना, तो आपको
- 7:42कुछ कुछ समझ में आएगा और उस धागे को पकड़कर आप इस बहु मंजली इमारत
- 7:49बिछड़ सकते है। संकल्प संकल्पहीन होता है, मुर्दा
- 8:02उसमें कॉन्शसनेस लेवल होता है। जीरो सिर्फ जड़ता बची कॉन्शस निकल
- 8:10गई और संकल्पहीन हो गया। अब वह आँख भी नहीं परख सकता।
- 8:17कल जो कह रहा था मैं हूँ तो सब है, आज वह बोल नहीं सकता।
- 8:25कारण यह कि संकल्प उसके भीतर से निकल गया संकल्प यानी कान्शस्नस।
- 8:34संकल्प यानी चेतना और चेतना सदासी है थी रहेंगी आध सच जुगाध सच हेवी
- 8:47सच नानक और सिंह भी सच किसके बारे में कह रहे हैं बाबा?
- 8:53चेतना के बारे में कॉन्सेअस्नेस तुमने पूछा पुत्र, ऐसा कैसे होगा?
- 9:07तो पुत्र ऐसे होगा? ये नहीं हो सकता कि मैं कोई
- 9:15संकल्प करूँ और वह पूर्ण न हो, बस संकल्प करने भर के दे।
- 9:32दूसरा विषय हम क्या करें बाबा हम आपके अनुयायी हैं, दीक्षित हैं।
- 9:45सुबह उठकर क्रिया योग करते हैं। कुछ न करने में याने ध्यान में
- 9:51बैठ जाते हैं। आपके प्रवचन सुनते हैं उससे हमें
- 10:02इंस्पिरेशन मिलती है लेकिन आपने अब एक नई बात छेड़ ली।
- 10:21राजनीति हम राजनीति की तरफ। जुएं या आध्यात्मिकता की तरफ जुएं
- 10:32प्रश्न बाजू है। पुत्रे?
- 10:41अब इसको सहजी सहजी सरलता से समझने की चेष्टा कीजिए।
- 10:45ये प्रश्न समझ में आ जाएगा। जिनके पास प्रचुर मात्रा में धन
- 11:01संग्रह है, जीवन यापन करने के साधन है।
- 11:08वो राजनीति की तरफ ना सिर्फ गोल्डन स्पैरो इस चैनल को अंगूठा
- 11:19लगा दे, सब्सक्राइब कर दे और अपनी।
- 11:26ध्यान, वीडियो वगैरह सुनता रहे तो मैं जानकर हैरत भी होती होगी।
- 11:43मैं एक पल क्रोध में होता हूँ और अगले फल गीत गुणगुनाने लगता हूँ।
- 11:51कलियों ने घूँघट खोले, हर फूल ये। कैसे हो सकता है क्योंकि मैं मेरी
- 12:06इन्द्रियों से काम लेता? मैं मेरी ऊर्जा से जैसा चाहूँ काम
- 12:11लेना और तुम्हारे लिए मुसीबत ये कि ऊर्जा तुमको प्रयोग करती है,
- 12:20मैं ऊर्जा का प्रयोग करता हूँ यह एक विराट।
- 12:30फर्क है डिफरेंस है, ऊर्जा मेरे अधीन है, आप ऊर्जा के अधीन।
- 12:44आप देखोगे एक पल के लिए मैं परमक्रोधी तवास्था में होऊंगा,
- 12:48परशुराम बन जाऊंगा और दूसरे ही पल मैं शिव हो जाऊंगा, मैं राम हो
- 12:58जाऊंगा, मैं कृष्ण जैसी प्यारी बातें करने लगूंगा।
- 13:03रास रचाने की वातें करने लगूंगा क्योंकि मैं ऊर्जा से काम लेता
- 13:10हूँ, ऊर्जा आपसे काम लेती है और बड़ा विशाल फर्क है जब तुम अपने
- 13:21मालिक स्वयं बन जाओगे। तब तुम अपने इंद्रों से, अपने मन
- 13:28से, अपनी ऊर्जा से, अपने मन मुताबिक काम ले सकोगे।
- 13:35जैसे तुम अब हाथ को आज्ञा देते है तो उठ जाओ तो हाथ उठ जाता है।
- 13:43पाम को कहते हो चलो तो पाम चलता है विद्द्रोह नहीं करता तुम्हारी
- 13:48यादियां मानता है लेकिन अगर ये बेकाबू हो जाए पैरालायसिस हो
- 13:56जाएगा तुम्हारी यादियां कहाँ मानेगा?
- 14:01फिर तुम लाचार हो जाओगे। तुम इस ऊर्जा के आगे बेबस हो।
- 14:08मैं इस ऊर्जा को निचाता हूँ, मैं सुरजा से काम लेता हूँ, कृष्ण इस
- 14:14ऊर्जा से उस वक्त। आदमियों की कमी थी तो बैलेंस करने
- 14:24के लिए पुरुष पैदा करते हैं। और आपको समझ नहीं आता तो जैन मुनि
- 14:42उनको सातवें नरक में धकेल देते है।
- 14:53तुम्हे वो ही करते रहना है जो सदा से कर रहे हो।
- 14:58जब तुमने 5.5 साल पहले मुझे जॉइन किया तब से ही यो कर रहे हो।
- 15:06करिया योग ध्यान श्रवण। वहीं आप भी करते रहो चैनल को
- 15:22सब्सक्राइब कर दो। मैं कोई इकट्ठे नहीं करने वाला,
- 15:29कोई रैली, कोई रोड शो नहीं निकालने वाला।
- 15:34मैं तो यहीं से हिलूंगा भी नहीं। मैंने पहले भी कहा मात्र संकल्प
- 15:47और आप जीत जाओगे। ईश्वर ने दो होने के लिए किसी का
- 15:58सहारा मांगा था, मात्र संकल्प ही तो किया था।
- 16:04अमीबा दो होने के लिए किसी का सहारा मांगता है, खुद से ही दो हो
- 16:10जाता है। परमात्मा ने अपने प्रारूप संसार
- 16:14में भी छोड़ दिए हैं पद चिन्हों की तरह तुम्हें समझाने के लिए
- 16:24क्योंकि उदाहरणों के बिना तुम्हें समझ में आता नहीं रस्ता बड़ा।
- 16:30ठेड़ा मेटा है उबड़ खाबड़ है वीरान है, मंजिल सुनसान है राही।
- 16:49कोई संगीत साथी नहीं, कोई मार्गदर्शक नहीं कोई पथ को
- 16:57उजियारा करने के लिए दीप नहीं तुम्हारे पास।
- 17:02साथी ना कोई मंजिल। दिया।
- 17:12है ना कोई मैप चला मुझे लेके ए दिल।
- 17:24अकेले का शादी न कोई मंजल दिया है न कोई महफिल।
- 17:43चला मुझे लेके ए दिल अकेले कहाँ साथी न कोई।
- 18:02मज़े की बात यह है तुम्हारी बुद्धि सवाल पूछती है और तुम्हारी
- 18:07बुद्धि जवाब को ग्रहण करने में असमर्थ है।
- 18:13किया क्या जा रहा है? बुद्धि प्रश्न पूछती है वाजिब
- 18:20लेकिन बुद्धि? जवाब को समझ नहीं सकते, उस मंजिल
- 18:30की बात करता हूँ मैं जिसकी चाहत है बुद्धि को भी लेकिन काश बुद्धि
- 18:38समझ सकती काश गागर में सागर समझ सकती?
- 18:45तुमने सिर्फ यही करना जो तुम सदा से करते रहे हो, मेरे फॉलोवर बनने
- 18:53के बाद मुझे सुनने के बाद क्रिया योग करो, खूब दबाव जितना कर सकते
- 18:59हो। अति भी नहीं करनी अति सर्वत्र
- 19:06वर्जित, उसके बाद ध्यान में बैठ जाओ, कुछ न करो, न जाप, न पाठ, न
- 19:16पूजा ना नाम कुछ नहीं। जस्ट टु सीट अलोन लोनी लेस इस दी
- 19:29वे एंड इस दी टारगेट यही वे है और यही टारगेट है यही लक्ष्य है।
- 19:43यही ऐम है और यही रास्ता है। अकेले बैठ जाओ, अकेले पन में उतर
- 19:55जाओ साली जूठ अक्सर ही मैं कहा करता हूँ।
- 20:05अलेक्जैंडर पोक की कुछ पंक्तियाँ लेट मी लाइव उनसीन अन्नोन एंड एंड
- 20:13ले मेंटेड लेट में डार स्टील फ्रॉम दी वर्ल्ड एंड नॉट एस्टोन
- 20:19टेल वराइल। जिनके पास गोद जायज़ है, कोई
- 20:41पेंशनर तो है वो इस तरफ ख्याल ना करे।
- 20:51फिर तुम अपने असली मकसद से चूक जाओगे।
- 20:59यू विल लूज़ युअर ऐम बा मुश्किल तुम्हें रास्ता दिखाने वाला मिला
- 21:07है इसका लाभ उठा लो। मेरी इस बात को हर समझ लो जिनके
- 21:16पास अपनी जरूरतों के मुताबिक गुजारे लाल साधन हैं।
- 21:30वह वही करे जो कर रहा है। क्रिया योग, ध्यान प्रवचन इनमें
- 21:41से अगर कुछ मिस हो जाए तो हो जाए उसके फिक्र ना करो।
- 21:48लेकिन जब तुम सवस्थ हो चित्र दशा खराब नहीं, तो तुम इन चीजों को
- 21:57करते गिरो और जिनके पास साधन नहीं हैं और जीतने साधन हैं।
- 22:08उतनी शक्ति इन तीन चीजों में लगाओ, बाकी बाहर से अर्न करो,
- 22:18तुम्हारा पहला लक्ष्य है टु अचीव दी गौर हू आर यू?
- 22:28तुम हो कौन सारे प्रयास उसी के लिए कर रहा हूँ।
- 22:35शुरू से अब ये रास्ता बदला तो उनके लिए नहीं बदला।
- 22:44जिनके पास सी साधन हैं, जरिये हैं, तो अगर तुम्हारे पास संसाधन
- 22:53परिपूर्ण अवस्था में हैं तो तुम राजनीति की तरफ मत आना, लेकिन
- 23:00इतना काम करना चैनल को। अंगूठा लगा देना और मस्ती के आलम
- 23:06में लौट जाना आनन्द में सराब बहुत वो ही कुछ करते रहना।
- 23:15मैं क्या बोलता हूँ वो तुम्हारे काम का नहीं है।
- 23:23जो धन की दौड़ में थे, उन्होंने मेरी पहली वीडियो नहीं सुनी।
- 23:28सुननी भी नहीं चाहिए क्योंकि उन्हें धन चाहिए और मैंने पहले भी
- 23:35तुम्हें कहा भटकना भी एक रास्ता है।
- 23:43अगर धन तुम्हें भटका न दे तो फिर बुद्ध कैसे हो पाएगा?
- 23:54पदवी तुम्हें भटका न दे ज्ञान तुम्हें भटका न दे तुम्हारे
- 24:01संग्रहित शब्द और तुम्हारी संग्रहित प्रणालियाँ।
- 24:12वेस्ट टु सेल्फ रियलाइजेशन अगर तुम्हे भटका न दें तो फिर मज़े की
- 24:25बात है क्योंकि तुम सदा ही सोचते रहोगे जीस दरगाह से उठ के हम आए,
- 24:33कहीं ऐसा तो नहीं। के वहीं पे था हम वक्त से पहले
- 24:38उठाये नहीं परिपूर्ण बैरागी का जन्म होने का जहाँ बैठे हो, बैठे
- 24:50रहो जो इतने वर्ष गुजार दिए हैं। फिर और थोड़ा सा वक्त रह गया है
- 24:58कौन जाने किस घड़ी इस ज़िन्दगी की शाम हो जाए उजाले अपनी यादों के
- 25:04हमारे साथ रहने दो न जाने किस घड़ी इस ज़िन्दगी की शाम हो जाए।
- 25:13तुम वहीं बैठे रहो, मैं जानता हूँ कि तुम भटके हुए हो और इन भटके
- 25:20हुए लोगों को मैं बोलेंगे आक्रोश का उपयोग करूँगा और तुम देखना
- 25:27अगले ही पल। मैं फिर गीत गाने लग जाऊंगा
- 25:31क्योंकि मैं गैर बदलना जानता हूँ। आई ऍम ए ड्राइवर, मैं वाहन नहीं
- 25:39हूँ, मैं वाहन से काम लेता हूँ, मैं ड्राइव कर रहा हूँ क्योंकि
- 25:46मैं ड्राइव करना जानता हूँ। मेरा पहला रास्ता सभी के लिए नहीं
- 25:56था। जिनको धन चाहिए उनके लिए नहीं,
- 26:01मेरा पहला रास्ता और जिनको शांति चाहिए।
- 26:07उनके लिए दूसरा रास्ता सही नहीं है।
- 26:15राजनीतिक व्यवस्था आपको ऊहापोह में ले जाएगी।
- 26:18तुम भटकों के दिन भर रात चैन खो दोगे, नींद खो दोगे?
- 26:26तो मेरी बात को ठीक से समझ लेना। पहले जब मैं बोला तो उसका लाभ वो
- 26:36उठाएं जिनके पास प्रचुर मात्रा में संसाधन मौजूद है।
- 26:44लेकिन वो बेचारे क्या करते जिनके पास संसाधन मौजूद नहीं?
- 26:50मेरी आवाज उन्हें खींचती है और आवाज इस कदर खींचती है के खींचे
- 27:03तो चले जाते हैं। लेकिन जीस रथ पे बैठे हैं उस रथ
- 27:10में ईंधन नहीं है तो फिर जब मैंने पहला ग्रंथ पूरा कर लिया तो दूसरे
- 27:21ग्रंथ की ओर चला। लेकिन ध्यान रखना यह दूसरा ग्रंथ
- 27:29आपके लिए नहीं है। जिसके पास किसी भी तरीके से
- 27:34संसाधन जुटते हैं, वह उस रास्ते से ज़रा भी टस से मच न हो।
- 27:42चलता चला जा। लेकिन जिसके पास कोई संसाधन नहीं
- 27:57जो कहता है भूखे भजन ना होय वो पाला ये लो अपनी कंट्री में।
- 28:06इम्तहा हो जाती है गरीबी की भूखे बैठे तो बातें ही वजन नहीं होता
- 28:12कैसे ध्यान में बैठोगे? पेट में आग लगेंगी चूहे को तो आज
- 28:20जो रास्ता है। और रास्ता सभी के लिए नहीं।
- 28:28पहले जो रास्ता था वो सभी के लिए क्योंकि बुद्ध सब कुछ छोड़ देते
- 28:34हैं और तमन्ना इतनी गहरी प्यास राजा होते हुए भी।
- 28:44संकल्पवान है फिर कहते हैं मांग के खा लेंगे, कोई बात नहीं।
- 28:52पहला रास्ता सभी के लिए कुछ भी हो जाए लेकिन आनंद का दामन न
- 29:01छोड़ेंगे। हम चलेंगे जहाँ वो ले जाएगा, उसकी
- 29:12इच्छा को सर्वोपरि मानकर उसकी रजम में राजी रहकर चलेंगे, भूखे हैं
- 29:19तो भूखे चलेंगे। और जब भूख अपनी इम्तहा पे आ जाएगी
- 29:25तो हम फिर किसी के द्वार खट खटा लेंगे, वहाँ जाकर दो रोटी मांग
- 29:32लेंगे और किसी तरह गुजर बसर कर लेंगे।
- 29:42यह तरीका उनके लिए है जिनके भीतर आनंद को पानी की आग जग गई है।
- 29:52बुध के भीतर आग जग गई। कुछ है जो मैंने पाया नहीं और फिर
- 29:59वो परियां। कुछ है जो मैंने पाया नहीं आग
- 30:07इतनी गहरी उठी बेरहा की आग इतनी गहरी उठी के छोड़ लिए सब कुछ।
- 30:21असुरक्षा में ले गए अपने आपको और यही होती है आग की पहचान बेरहा की
- 30:28पहचान मरेंगे, मर जाएंगे भूखे लेकिन इस जंदगानी में तो नहीं
- 30:37रहना। यहाँ।
- 30:39नहीं खेना वहाँ नहीं रहना सुन मन मेरे।
- 31:01जहाँ नहीं चना वहाँ नहीं चना वहाँ नहीं रहना अगर ऐसी आग लग गई बेतर
- 31:16तो व्यक्ति अपने सभी संसाधनों को छोड़कर मीरा की तरह बावरा हो जाता
- 31:21है। एक छोटा सा प्रश्न और ले ले,
- 31:36लगातार साक्षी रहने का क्या लाभ है लगातार साक्षी रहने का?
- 31:45बुद्ध की विपश्यना करने का पहला लाभ ये।
- 31:53के तुम्हें दो तत्व दिखते हैं एक वह जो पल पल बदलता है और तुम उसे
- 32:07पल पल बदलता हुआ देखते हो। और एक वह जो देखता है और कभी अपना
- 32:19स्वभाव नहीं खोता साक्षित्व का, ओब्जर्वर का तो तुम्हें दो का
- 32:27अहसास होता है। एक वह जो पल पल बदलता है उसको तुम
- 32:38साफ देख रहे हो सुबह और था दोपहरी और हो गया सांझ कुछ और हो गया रात
- 32:46कुछ और हो गया। मन लो भी मन लालची मन, चंचल मन
- 32:53सोर मन के मते, न चा लिए पल का पलक मन और अगर तुम्हें दिख जाएंगे
- 33:00पल पल बदलता हुआ मन तो तुम्हें एक बात और भी समझे में आएगी कि यह
- 33:07देखा किसने? जो बदल रहा था पल पल हू, वास् द
- 33:15ऑब्जर्वर ऐट दैट टाइम सुबह और सांझ और सांझ ढले कुछ और दोपहरी
- 33:25को और रात को कुछ और। फिर यह कौन जो लगातार
- 33:30कॉन्स्टंट्ली इस ऑब्ज़र्विंग थिस माइन, वह कौन तो यह लाभ होगा
- 33:44तुम्हें साक्षित और सर। उसे देख पाओगे जो पल पल बदलता है
- 33:57पलक, पलक मन और मन लोभी मन लाडची मन चंचल मन चो किसी वक्त कहते हो
- 34:06दान कर तुम। सारा दान कर दूँ, छोड़ छोड़ के
- 34:09भाग जाऊं, किसी वक्त चिपट जाते हो, तुम और इकट्ठा कर लो और
- 34:17इकट्ठा कर लो। यह कौन है जो बदलता है और यह कौन
- 34:22है जो इस बदलते हुए को। कॉन्स्टंट्ली लगातार देख रहा है।
- 34:31बस अगर तुम इस बात को समझ पाए तो तुम्हारी अध्यात्मिक यात्रा का
- 34:36प्रथम पड़ाव शुरू हो गया और अगर प्रथम कदम उठ गया उसकी तरफ।
- 34:47तुम चलोगे एक कदम, वह चलेगा 1000 कदम वह डिक्टेटर नहीं है, तुम
- 35:01उसके बाल को हो, वह तुम्हारा पिता है तुम अगर थोड़ी सी।
- 35:11वहाँ तक पहुंचने की इच्छा जताते हो तो वह तुम्हारा परम पिता वह
- 35:23तुम्हारी परममाता। तुम्हें अपने आँचल में बैठा लेने
- 35:28को 1000 कदम चलती है, वह तुम्हें अपने आगोश में ले लेने के लिए
- 35:341000 कदम चलता है, बस तुम थोड़ा सा उसकी तरफ जाने को एक कदम
- 35:42बढ़ाओ, खुशी से उठाओ। तो फिर वो 1000 कदम चलेगा, लेकिन
- 35:50तुम पीछे मुड़ के झांकना नहीं। अगर तुम इस राह पे चल पड़े तो फिर
- 35:56रास्ते में देरी भी हो सकती है, लेकिन तुम धीरज बनाए रखना, धीरज
- 36:04मत खोना। बिरहा के आंसू भी आएँगे।
- 36:10क्यों नहीं आया तू वो लहने ताने भी आएँगे, लेकिन अब कांसू जंघा
- 36:18करूँ मैं अब झगड़ा भी किस्से करूँ।
- 36:23उस तरफ खींचने शुरू हो गए। आनंद की धीमी धीमी बारिश पड़नी
- 36:27शुरू हो गई। अब छोड़ना चाहे भी तो तुम छोड़ ना
- 36:31पाओगे, साक्षी होने का विपश्यना का यही फायदा है।
- 36:40तुम्हें दो दिखेंगे, अभी तक तुम एक हो।
- 36:44तुम शरीर हो, विचार हो, भावनाओं और इनको कोई चोट न पहुंचाए, बस
- 36:51यहीं तक ही सीमत हूँ। जैसे ही तुम्हें शाक्षित्व का
- 36:57आभास होना शुरू हुआ, तुम्हें मज़ा आना शुरू होगा।
- 37:01थोड़ी थोड़ी ललित आएगी। ओह लज्जत तुम्हें कैसे चलेगी?
- 37:08फिर तुम उस डगर पे चल पड़ोगे और वो डगर जहाँ जाती है, उसका मालिक
- 37:17तुम्हारी तरफ 1000 कदम चलेगा, लेकिन फिर बोल दूँ।
- 37:24अभी तुम्हें एक का एहसास है शरीर में हूँ, फिर तुम्हें दो का एहसास
- 37:31होगा, कोई इस शरीर का साक्षी भी है, कोई इन भावनाओं का साक्षी भी
- 37:37है, कोई इन विचारों का साक्षी भी है?
- 37:40दो हो गए, फिर दो को प्रगाढ़ करते जाना है।
- 37:48प्रगाढ़ करते जाना है प्रेम की इस डगर पर, चलते चलते दो खो जाएंगे
- 37:58तुम्हारा हिया तड़पेगा। तुम कहोगे तुम मुझे वर्मा के
- 38:09क्यों चले गए? बिरहा की आग लगा के क्यों चले गए?
- 38:18लेकिन पहले एक हो अब ही एक हो। साक्षी की साधना के बाद दो हो
- 38:27जाओगे एक वह जो कॉन्स्टेंट निहार रहा है ओब्सर्वर वह कभी अपनी
- 38:36ऑब्जर्वेशन को छोड़ता नहीं, वह हिलता नहीं, वह स्थायी है।
- 38:43और वह निर्लेप है, वह सदा तुम्हें देखता है बस उस बदलते हुए मन को
- 38:51जो पल पल सुबह साँझ दोपहरी रात बदलता है तुम्हें दो समझाएंगे साफ
- 38:58साफ दिखेंगे। और दो समझाएंगे तो समझो पहला कदम
- 39:07चल पड़ा तुम्हारा फिर ये दो कौन है?
- 39:14यह देखने वाला कौन? जो सोये पड़े भी निहार रहा था,
- 39:19सपना देख रहा था, वो कोन और यह सपना कोन जो तुम्हारी मनुष्य के
- 39:29ऊपर चर चित्र बनकर गुजर रहा था वह कोन स्वभागी के लिए प्रश्न उठेगा।
- 39:36और तुम तुम्हारी कला से शुरू हो जाएगी फिर इस डगरिया पे चलते हुए
- 39:46देर भी लग सकती है, लेकिन उलाना कहना मत देना, धीरज बनाए रखना।
- 39:55धीरजनक खोना मीर अम्बी तड़पी राजस्थान की उन सड़कों पर जहाँ दो
- 40:07फुट का घूँघट होता है, वहाँ की बहू बेटी है।
- 40:14वहाँ की रानी है, लेकिन नंगे पांव सड़कों पर दौड़ते हैं।
- 40:20बिरहा की आग जल गई फिर तुम्हारे वश में नहीं होती।
- 40:31तुम इस प्रेम के आगे बेबस हो जाओगे।
- 40:34इश्क पे ज़ोर नहीं इश्क पे ज़ोर नहीं ये, वो आतिश है गालिब, ये वो
- 40:42आतिश है गालिब ये वो आग है जो लगाए ना लगे तुम्हारी लगाई से
- 40:49लगती नहीं और बजाए ना बने। और बुझते भी नहीं तुम्हारे भजनक
- 40:55अब तुम फंस गए, अब तुम एक होकर ही निकलोगे और उस अवस्था में तुम
- 41:04उलाहने ताहने भी आएँगे। देते रहना कोई फर्क नहीं पड़ता उस
- 41:11अस्तित्व को। तुम गाली निकालो या तुम गायन करो,
- 41:18ज़रा भी तो फर्क नहीं पड़ता, तुम्हें फर्क पड़ता है गाली
- 41:22निकालते हो तो तुम क्रोध में आ जाते।
- 41:24तुम्हारे भीतर जहरीले तत्व पैदा होते हार्मोंस पैदा होते, तुम भजन
- 41:29गाते तो तुम्हें फायदा होता। गाली का भी और भजन का भी उसको कोई
- 41:34फर्क नहीं पड़ता। भजन में तुम्हारे भीतर डोपामाइन
- 41:40पैदा होता सेरेटोनिन पैदा होता, हैप्पी हार्मोन पैदा होते तो लाभ
- 41:45तुम्हें मिल गया। भाई और परमात्मा कोई अलग से लाभ
- 41:49देगा। तुम्हें वजन में जो आनंद आया लाभ
- 41:54ही तो है और गाली देने में जो तुम्हें दुख हुआ वह नर्क ही तो
- 42:01है। फिर अलग से नर्क की व्यवस्था इन
- 42:07दुकानदारों ने बना ली फिर अलग से। स्वर्ग की व्यवस्था इन दुकानदारों
- 42:14ने बना ली सच्च कंड की व्यवस्था इन दुकानदारों ने बना ली सच्च कंड
- 42:20तो तुम्हारे भीतर है, जीते जी मुक्त हुआ जा सकता है महेशमा क्या
- 42:29पूछें? जिसे रोशन खुदा करे फानूस बनकर
- 42:42जिसकी हिफाजत खुदा करे वो क्षमा क्या कुछ है जिसे रोशन खुदा करे
- 42:52फानूस बनकर जिसकी हिफाजत हवा करे। वो शमा क्या बुझे जिसे रोशन खुदा
- 43:00कर पर पल पल तुम्हारी रक्षा करेगा वो ढेर भी होगी क्योंकि तुम बहुत
- 43:15दूर निकल गए हो। तुम गाली निकालते हो तो तुम्हारे
- 43:22भीतर एडरनालीन कोटेसिल जहर पैदा होते हैं तुम्हें फल मिल तो गया
- 43:28नर्क में आ तो गए तुम और कोई अलग से नर्क मिलेगा तुम भजन गाते हो,
- 43:34कीर्तन करते हो? तुम मेरा प्रवचन सुनते हो?
- 43:38तुम्हारे भीतर? हैप्पी हार्मोन जब पैदा होते हैं
- 43:40तुम्हें लाभ मिल तो गया कोई अलग से स्वर्ग में लाभ मिले नहीं
- 43:46नहीं, यह दुकानदारों की रचना है। जीते जी अगर स्वर्ग ना होगा।
- 43:54जीते जी अगर सच खंड में ना गए तो मर कर किसे पता चलता है?
- 43:59क्या है क्या नहीं मर कर तो सिर्फ व्यूस ही इकट्ठा करने के लिए
- 44:04पाखंड हुआ करते हैं मैं तुम्हें जीते जी।
- 44:12सचखंड में ले जाना चाहता हूँ, तानाशाह भी नहीं हूँ।
- 44:22तुम्हारी मर्जी के बिना तो मैं सचखंड में नहीं ले जाऊंगा।
- 44:31तुम्हारी मर्ज़ी से ही ले जाऊंगा जब तुम कहोगे तेरा पाना मीठा लाख
- 44:38है जो तुद पावे सोई पर लिखा मेरी तो यही अर्जी कर वही जो तेरी
- 44:48मर्ज़ी। फिर लेके जाऊंगा तुम्हारी ऊँगली
- 44:52जीते जी पकडूंगा मरकर किसी ने देखा भ्रम है, इन भ्रमों के चक्कर
- 45:01में तुम पड़ना चाहो तो तुम स्वतंत्र हो।
- 45:07अगर निकलना चाहो इस चक्रव्यूह से तो भी तो मत स्वतंत्र हो मैं
- 45:13तुम्हारे लिए उपलब्ध हूँ जब तक हूँ तब तक उपलब्ध हूँ मेरे जाने
- 45:19के बाद फिर कोई और आएगा इंतजार रखना।
- 45:26लेकिन अभी मौका चूक गए तो फिर अगले भगवान का इंतजार करना अभी कल
- 45:37का आय सब बदलने के लिए अहिंसक रूप से क्रांति गठित करने।
- 45:46लेकिन ज़ोर जबर से नहीं। प्रेमपूर्वक तुम्हें समझ आए तो
- 45:53अच्छा नहीं समझ आए तो और अच्छा तुम तुम्हारे मालिक हो तुम पे जबर
- 46:02जब तुम पे जबर। और जबरदस्ती नहीं हो सकती और
- 46:08तुम्हारा पिता तुम बालकों पर जबर करता भी नहीं है।
- 46:11वो बड़ा रहमों करीम है, तुम उसके बच्चे हो।
- 46:23तुम उसकी तरफ जाओगे तो आनंद तो बहुत आएगा।
- 46:29रस तो बहुत आएगा, लेकिन फिर बोल दूँ सच खंड कोई भौगोलिक जगह नहीं
- 46:39है। जैसे स्वर्ग और नरक की आज पोल खुल
- 46:43गई। वैसे सच खंड की भी आज पोल खुल गई।
- 46:47संतों के समक्ष तो जब सच खंड जीते जी आता है तो पोल खुल जाती है और
- 46:54फिर वो बताते हैं साधो रे गुरु लाधो रे।
- 46:59जैसे माखन शाह लुबाना ने कहा जहाज़ डोल रहा था।
- 47:08माखन शाह लुबाना उस जहाज़ में सवार थे।
- 47:14हे सच्चे पाशाह हे नमम पाशा हे नमम करो।
- 47:18महाराज मैं मन्नत मांगता हूँ अगर ये जहाज बच गया इतने गंभीर संकट
- 47:24से तो मैं 100 मुद्राएं तेरे चरणों में भेंट करूँगा तू शांत थम
- 47:35गया। माखन शहर लुभाना बच गया, उसका
- 47:44जहाज़ भी बच गया। उसके हीरे जोहरात भी बच गए।
- 47:49वापस सुरक्षित तट पर आकर उतर गया। टेनारे से पहले सीधे सो शर्तियां
- 47:56निकालो। देखा तो आगे बैठे वो कहते मैं
- 48:02गुरु टेंट लगाए बैठो। किश्त नुमा टोपी पहने बैठे ये पाक
- 48:09फंड खुद का ही गवां रहे हैं। उस वेला में आनंद भी उठाया जा
- 48:18सकता था। उस वेला को भ्रम वेला और अमृत
- 48:25वेला में भी तब्दील किया जा सकता था, लेकिन कर्म परमात्मा।
- 48:40नहीं करता। कर्म तुम करते हो तुम मांगते हो
- 48:46उससे रहमत ए खुदा रहमकर लेकिन जब तुम खुद ही मालिक बन जाते हो तो
- 48:57तुम। भीड़ में खो गए गुम हो गए खुद ही
- 49:04को जानोगे कैसे जब तुम खुद खुदा ही बन गए नकली नकली खुदा तुमने
- 49:12असली खुदा के आंचल में बैठ जाना है।
- 49:17उसके आगोश को अपनी बाहों में ले लेना है और कोई किसी तरह का
- 49:27उलाहना ताना नहीं करना आएगा। बिरहा आग लगेंगी।
- 49:34किसी वक्त परिस्थितियां काबू से बाहर भी होंगी।
- 49:39मीरा भी कहती हैं। जो मैं ऐसा जान जी।
- 49:56चु कि। दुख हो नगर ढिंढोरा।
- 50:16प्रीत नगरियों को मोहें भूल गए सा रिया।
- 50:37भूल गए सांवरिया आवन कह गए आज हो न आए आवन कह गए।
- 50:56आज हो न आए ली नाही मेरी खबरिया महभूल गए सागरिया।
- 51:16भूल गए सांवरिया दिल को दिए क्यों दुःख विरहा के दिल को दिए क्यों?
- 51:34ये क्यों वगैरह मत करना। क्वेश्चन मत उठाना उठेंगे, लेकिन
- 51:44फिर नॉर्मल भी हो जाना। दिल को दिए क्यूँ दुख बिरहा के।
- 51:57तोड़। दिया।
- 52:00क्यों महल बनाके तोड़ दिया क्यों महल बनाके?
- 52:15आज दिला के। यह सटोरी की घटना एक बार दिख गया।
- 52:22तू तेरा प्यार हमने पा लिया, एक दफ़े एक झलक पाई हमने रिपैलेक्शन
- 52:31पाई करी। आश दिला के ओह वेधर जी आश दिला के
- 52:45ओह वेधर दी। फिर ली काहे नजरिया फिर ली काहे
- 53:00नजरिया? महे भूल गए, सांवरिया भूल गए
- 53:15सांवरिया आवन कह गए। हज हो न आए आन कह गए हज हो न आए
- 53:36ली नहीं मोरी खबर यार। मवे भूल गए कर्महीन?
- 53:50हैं वो लोग जिनको परमात्मा गायन का आनंद देता है और वो राजनीति
- 53:58में चले जाते हैं। वो व्यक्ति कर्म हीन है।
- 54:03परमात्मा ने रहमत की थी उन पर, लेकिन वो मूर्ख तय कर बैठे।
- 54:10तुम स्वतंत्र रहो, तुम कर सकते हो लेकिन ध्यान रखना।
- 54:16अगर उसकी रहमत बरस गई तो उसको बचा के रखना।
- 54:21पल दो पल के लिए मन भटकेगा? फिर शोहरत की गलियों में मत निकल
- 54:29जाना, धन के अंबार इकट्ठे करने का जुनून मत पैदा करना।
- 54:38गद्दियो की लालसा मत पैदा कर देना तुम्हारा भीतर बड़ा रोयेगा तुम
- 54:45बड़े तड़पोगे वो आनंद की गलियों में विहार कर रहे दृश्य नजर आएँगे
- 54:52तुम्हें और तुम कहोगे मैं कहूं फंस गया।
- 55:00और फिर उससे स्वर निकलेगा। दिल को दिए क्यों दुःख बिरहा के।
- 55:21तोड़ दिया क्यों महल बना? के?
- 55:32कर्महीन हैं वो लोग जिनको परमात्मा।
- 55:43भजनों के स्वर्ग का आनंद देता है कहाँ वो आनंद कहाँ राजनीति की
- 55:49सडान्ध तुम ऐसा मत करना बच्चा। तोड़ दिया।
- 56:01क्यों? महल बना के फिर।
- 56:05ऐसे उलाह नहीं उठेंगे, लेकिन ये तुम्हारी ही पैदा की हुई सिचुएशन
- 56:13है बेटों बच्चों ये तुम्हारी ही पैदा की हुई सिचुएशन।
- 56:25आस दिला के ओह वे धर दी आस दिला के ओह वे धर दी फिर लिखा है
- 56:41नजरिया। फेर ली काहे नजरिया?
- 56:52नहीं नहीं, उसने नहीं फरे तुम ही कहीं भटक गए, तुम ही गलियों में
- 56:59निकल गए शोहरत के धन के अम्बार। गद्दी नशीं होना और ध्यान रखना
- 57:10तुम्हारी शोहरत के हिमालय जीतने खजाने धन के अम्बार तुम्हारी उस
- 57:18भजन के एक बूंद में जो आनंद मिलता।
- 57:22तो लनता ही शकल मिली जो सुख ल व सत्संग उषम क्षण का मधुर बेला
- 57:38सारी धरती के तुल्य भी संपदा तुम पालो।
- 57:41चक्रवर्ती सम्राट में हो जाओ, तुलना ताही, शक्ल मिली जो सुख लव
- 57:49सत्संग एक क्षण भजन के जो रस में तुम डूब जाते थे, तुम्हे याद
- 57:56आएँगे वो धन तुम तड़को तड़पोगे मीरा की तरह।
- 58:03और मीरा बावरी होकर नंगे पांव सड़कों पे दौड़ पड़ती है।
- 58:14कोई बेशर्म कहता है, कोई बेहया कहता है।
- 58:18कोई पागल कहता, कोई दीवानी कहता अगर तुम पर ये जुनून आ जाए,
- 58:26परमात्मा की कृपा का तो इसको संभाल के रखना जैसे हीरों को
- 58:32तिजोरी में संभाल के रखते हो, खूब मत देना बच्चों को।
- 58:38ये खोना बार बार परमात्मा इनायत नहीं किया करता।
- 58:46कोई वेला होता है अगर ये इनायत कभी बरस जाए तो उसको आंचल में
- 58:51छिपा के रखना। ही रुपयों।
- 58:58गांठ गठिया हो। अगर ये हीरा कभी मिल जाए तो गांठ
- 59:07में बांधके गठिया लेना। बार बार बा को।
- 59:18क्यों? खोला।
- 59:22मन मस्त हुआ। फिर क्यों बोला मन मस्त हुआ?
- 59:33फिर क्यों बोला? शुरुआत में मैं था मैं मैं और मैं
- 59:42फिर मैंने अपने आपको वाइफ किट किया जड़ और चेतन मैं खेल का आनंद
- 59:50लेना चाहता था खेल खेलना चाहता था लीला करना चाहता था।
- 59:56और उस लीला को निहारकर मग्न होना चाहता था।
- 1:00:03अपने संकल्प से ही मैंने जड़ हुए चेतन पैदा किया है और अब लगातार।
- 1:00:11करोड़ों करोड़ों वर्षों से मैं अपने पैदा किये हुए जड़ और चेतन
- 1:00:15का खेल देख रहा हूँ। नानक विकस कर विचार नानक कहते हैं
- 1:00:28कि परमात्मा अपनी ही सर्जना के लीला को देखकर प्रसन्न होता है।
- 1:00:35नानक विकश कर विचार देखता है और खुश होता है।
- 1:00:46मैं अलग बना रहा दो पैदा किए, लेकिन दो मेरे से अलग है।
- 1:01:00जड़ और चेतन पैदा मैंने ही किया। मेरा ही प्रारूप है, समझ में तो
- 1:01:08नहीं आएगा बच्चे और जब चाहूंगा संकल्प करूँगा और इन दोनों को।
- 1:01:19विलीन कर दूंगा और फिर मैं अकेला ही रह जाऊंगा।
- 1:01:25मैं अकेला ही चला था, जान वे मंजल मगर लोग साथ साथ गए और कारवां
- 1:01:33बनता। क्या फिर एक वक्त आएगा?
- 1:01:39जब मैं सारा ढा दूंगा और फिर फिर मैं अकेला ही रह जाऊंगा।